Category: Economy

  • UPI पेमेंट पर चार्ज की तैयारी, 2000 रुपये तक कोई शुल्क नहीं, बड़े भुगतान पर दुकानदारों से वसूली संभव

    UPI पेमेंट पर चार्ज की तैयारी, 2000 रुपये तक कोई शुल्क नहीं, बड़े भुगतान पर दुकानदारों से वसूली संभव

    नई दिल्ली । UPI से भुगतान करने वाले लोगों के लिए शुल्क से जुड़ा नया बदलाव सामने आया है। 2000 रुपये तक के UPI भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा, जबकि इससे अधिक राशि के भुगतान पर शुल्क लगाने का रास्ता साफ होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस शुल्क का सीधा भुगतान ग्राहक को नहीं करना होगा। 2000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर लगने वाले शुल्क की दर तय करने की जिम्मेदारी NPCI यानी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की होगी।

    अब तक UPI भुगतान को लेकर यह व्यवस्था थी कि किसी भी राशि के लेनदेन पर कोई चार्ज नहीं लिया जाता था। नई व्यवस्था में 2000 रुपये तक के भुगतान को शुल्क से बाहर रखा गया है। इससे ज्यादा राशि के भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था लागू होने की संभावना है। ऐसे में बड़े मूल्य के UPI लेनदेन करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों पर इसका असर पड़ सकता है।

    सामने आई जानकारी के अनुसार 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क कितना होगा, इसका अंतिम फैसला NPCI करेगा। इसकी दर 0.3 से 0.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, यह अंतिम दर नहीं है और वास्तविक शुल्क NPCI के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

    यदि शुल्क की दर 0.3 से 0.5 प्रतिशत के बीच रहती है, तो 5000 रुपये के भुगतान पर 15 से 25 रुपये तक का शुल्क बन सकता है। यह राशि ग्राहक से सीधे वसूल किए जाने की बात नहीं है। इसका भुगतान दुकानदार या संबंधित व्यापारी को करना होगा। यानी किसी दुकान पर 5000 रुपये का सामान खरीदने के लिए UPI से भुगतान करने वाले ग्राहक को अलग से 15 या 25 रुपये देने की जरूरत नहीं होगी।

    इस व्यवस्था में व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन को अलग रखा गया है। यानी कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजता है, तो राशि कितनी भी हो, उसके लिए चार्ज नहीं लगेगा। इस तरह व्यक्तिगत लेनदेन पर शुल्क का असर नहीं पड़ेगा।

    बदलाव का मुख्य असर व्यापारिक भुगतान पर पड़ने की संभावना है। दुकानदारों और कारोबारियों द्वारा ग्राहकों से सामान या सेवाओं के बदले UPI के जरिए प्राप्त की जाने वाली बड़ी रकम पर शुल्क लागू हो सकता है। हालांकि, इस शुल्क की अंतिम दर और लागू होने से जुड़ी विस्तृत व्यवस्था NPCI के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

    UPI देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है और छोटे से लेकर बड़े लेनदेन तक इसका इस्तेमाल किया जाता है। नई व्यवस्था में 2000 रुपये तक के भुगतान को बिना शुल्क जारी रखने की बात कही गई है। इससे रोजमर्रा की छोटी खरीदारी के लिए UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर सीधे शुल्क का प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    दूसरी ओर, 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क की संभावित व्यवस्था कारोबारियों के लिए नई लागत पैदा कर सकती है। हालांकि, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेनदेन पर किसी राशि की सीमा के आधार पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बिंदु NPCI द्वारा तय की जाने वाली शुल्क दर है। 2000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर कितना प्रतिशत शुल्क लगेगा और यह व्यवस्था किस तरह लागू होगी, इसकी तस्वीर अंतिम निर्णय के बाद साफ होगी। फिलहाल 2000 रुपये तक के भुगतान को शुल्क से मुक्त रखने की व्यवस्था बताई गई है।

  • Gold Price Prediction: सोने में फिर आएगी तेजी? एक्सपर्ट का अनुमान- साल के अंत तक

    Gold Price Prediction: सोने में फिर आएगी तेजी? एक्सपर्ट का अनुमान- साल के अंत तक


    नई दिल्ली।
    सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद अब बाजार में फिर तेजी की उम्मीद जताई जा रही है। लगातार बढ़त के बाद कीमती धातुओं में मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजार के बदले माहौल का असर कीमतों पर पड़ा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाला त्योहारी और शादी का सीजन घरेलू मांग को बढ़ा सकता है, जिससे सोने-चांदी के भाव को दोबारा मजबूती मिल सकती है।

    बाजार विशेषज्ञ अजय केडिया के अनुमान के मुताबिक, सितंबर के अंत तक 10 ग्राम सोने का भाव 1.6 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं, साल के अंत तक सोने की कीमत 1.8 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जाने की संभावना जताई गई है। चांदी को लेकर भी तेजी का अनुमान है और इसका भाव 3 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है।

    लगातार तेजी के बाद क्यों फिसले सोने-चांदी के भाव?

    पिछले कुछ दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट को बाजार की सामान्य हलचल के तौर पर देखा जा रहा है। लगातार तेजी के बाद निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली शुरू हुई, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बना। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा।

    एमसीएक्स के आंकड़ों के मुताबिक, हाल की सात कारोबारी दिनों की अवधि में सोने की कीमत करीब 4 फीसदी, जबकि चांदी लगभग 2 फीसदी कमजोर हुई है। तीन महीने की अवधि में सोने में करीब 3 फीसदी और चांदी में लगभग 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। छह महीने की अवधि में भी दोनों कीमती धातुओं में कमजोरी देखने को मिली है।

    सितंबर के अंत तक सोना 1.6 लाख तक पहुंचने का अनुमान

    केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का मानना है कि हालिया गिरावट के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। भारतीय बाजार में सोना केवल निवेश का साधन नहीं है, बल्कि त्योहारों और शादियों से इसकी खरीद सीधे जुड़ी हुई है।

    इसी घरेलू मांग को देखते हुए सितंबर के अंत तक 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.6 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। अगर बाजार में मांग मजबूत रहती है तो इसके बाद कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    अक्टूबर से बढ़ सकती है खरीदारी

    त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ सोने की खरीदारी में तेजी आने की उम्मीद है। इसके बाद शादी का सीजन शुरू होगा, जिससे आभूषणों की मांग बढ़ सकती है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक मांग बढ़ने की स्थिति में मौजूदा कीमतों को और सहारा मिल सकता है।

    पोपली ग्रुप के निदेशक राजीव पोपली के अनुसार, कीमतों में गिरावट को ग्राहक खरीदारी के अवसर के तौर पर देख सकते हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के बाद यदि सोने की कीमत में कोई बड़ी गिरावट आती है तो बाजार में खरीदारी बढ़ने की संभावना है।

    साल के अंत तक 1.8 लाख रुपये हो सकता है सोना

    न्यूज18 तमिल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि अगर त्योहारी और शादी के सीजन में सोने की मांग मजबूत रहती है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी कीमतों के अनुकूल बनी रहती हैं, तो साल के अंत तक 10 ग्राम सोने का भाव 1.8 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

    इसी तरह चांदी के भाव में भी तेज बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है और यह 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर तक पहुंच सकती है।

    इन फैक्टर्स पर भी निर्भर करेगा सोने का भाव

    हालांकि, 1.8 लाख रुपये का अनुमान बाजार विशेषज्ञों का आकलन है, कोई निश्चित कीमत नहीं। सोने और चांदी के भाव पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, डॉलर की चाल, ब्याज दरें, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और घरेलू मांग जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

    ऐसे में मौजूदा गिरावट को देखते हुए भविष्य में कीमतें किस स्तर तक जाएंगी, इसे लेकर पक्की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। निवेशकों और खरीदारों को बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना चाहिए।

  • UK दौरे पर CM विजय ने चार बड़े समझौते, 9000 नौकरियों की उम्मीद

    UK दौरे पर CM विजय ने चार बड़े समझौते, 9000 नौकरियों की उम्मीद


    लंदन। त
    मिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री विजय थलपति (Chief Minister Vijay Thalapathy) ने ब्रिटेन दौरे (UK visit) पर सोमवार को कम से कम चार निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए। राज्य सरकार के मुताबिक, इन समझौतों के तहत तमिलनाडु में करीब 12300 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इनसे लगभग 9,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इनमें सबसे बड़ा समझौता संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ हुआ है। इसके तहत कंपनी तमिलनाडु में 11,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।


    11 हजार करोड़ के निवेश से 7 हजार नौकरियां

    संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल के साथ हुए समझौते के तहत डिजाइन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना से करीब 7,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है।

    इसके अलावा विजय ने एक ब्रिटिश कंपनी के साथ 1,000 करोड़ रुपये के समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। यह समझौता अर्न्स्ट एंड यंग के जरिए चेन्नई में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) विकसित करने के लिए हुआ है। प्रस्तावित सेंटर आगामी GCC कॉरिडोर में बनाया जाएगा और इससे करीब 2,000 हाई-वैल्यू नौकरियां मिलने की उम्मीद है।


    चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में भी निवेश

    एक अन्य समझौता स्वीडन स्थित सिग्मा टेक्नोलॉजी ग्रुप के साथ हुआ है। इसके तहत कंपनी चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार करेगी। इससे करीब 600 हाई-वैल्यू नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। चौथा समझौता विल्सन पावर सॉल्यूशंस के साथ हुआ है। इसमें 300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और तिरुवल्लूर जिले में करीब 400 नौकरियां पैदा होने की संभावना है।

    चार समझौतों का पूरा ब्योरा
    संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड: 11,000 करोड़ रुपये का निवेश, करीब 7,000 नौकरियां
    ब्रिटिश कंपनी: 1,000 करोड़ रुपये का निवेश, करीब 2,000 हाई-वैल्यू नौकरियां
    सिग्मा टेक्नोलॉजी ग्रुप: चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में GCC विस्तार, करीब 600 हाई-वैल्यू नौकरियां
    विल्सन पावर सॉल्यूशंस: 300 करोड़ रुपये का निवेश, करीब 400 नौकरियां

    किन क्षेत्रों पर है तमिलनाडु सरकार का फोकस?
    तमिलनाडु सरकार के मुताबिक, राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है।

    विजय के ब्रिटेन रवाना होने से पहले राज्य सरकार ने कहा था कि यूरोपीय कंपनियों ने तमिलनाडु में 8,491 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन निवेशों से 5,690 नौकरियां पैदा होने की संभावना बताई गई थी। ब्रिटेन यात्रा का उद्देश्य नए निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ राज्य में पहले से मौजूद निवेश को मजबूत करना भी बताया गया था।

    यह दौरा भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के 15 जुलाई को लागू होने के बाद हुआ है। तमिलनाडु सरकार के मुताबिक, इस समझौते से कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुले हैं।

    सरकार का व्यापक लक्ष्य तमिलनाडु को एशिया का प्रमुख निवेश गंतव्य बनाना है। सरकार का यह भी दावा है कि TVK सरकार के पहले 100 दिनों में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।


    मोटर स्पोर्ट्स पर भी रहा फोकस

    ब्रिटेन दौरे के दौरान मोटर स्पोर्ट्स भी एजेंडे में रहा। विजय ने सिल्वरस्टोन रेसिंग सर्किट का दौरा किया और उस रेस को हरी झंडी दिखाई, जिसमें अभिनेता और रेसर अजित कुमार ने हिस्सा लिया। इस दौरे को तमिलनाडु में विश्वस्तरीय मोटर स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने की सरकार की योजना से भी जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य रेसिंग से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग और अन्य संबद्ध उद्योगों में अवसर पैदा करना है।


    निवेश समझौतों को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल

    निवेश को लेकर सरकार के प्रयासों के बीच विपक्ष ने विजय के ब्रिटेन दौरे के कार्यक्रम और उनकी बैठकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। इसके बाद पहली बार सत्तारूढ़ TVK ने बताया है कि निवेश से जुड़ी बैठकों की जानकारी पहले सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। TVK के प्रवक्ता पी. सत्य कुमार ने कहा कि तमिलनाडु फिलहाल प्रतिस्पर्धी संघवाद के माहौल में काम कर रहा है, जहां देश के अलग-अलग राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवेश समझौतों की जानकारी MoU पर हस्ताक्षर होने के साथ जारी की जाएगी।

    ब्रिटेन दौरा अभी खत्म नहीं हुआ
    तमिलनाडु सरकार के मुताबिक निवेश जुटाने का अभियान अभी जारी है। विजय 16 सितंबर को ब्रिटेन से रवाना होने वाले हैं और मंगलवार को भी कुछ और निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ब्रिटेन दौरे से अब तक 12,300 करोड़ रुपये के निवेश समझौते सामने आने के बाद अब इन समझौतों के वास्तविक परियोजनाओं, नौकरियों और तमिलनाडु में लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियों में बदलने पर नजर रहेगी।

  • सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू

    सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू


    नई दिल्ली।
    सहारा समूह (Sahara Group) की चार सहकारी समितियों (Four Cooperative Societies) में फंसे पैसे के रिफंड का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों (Millions Investors) के लिए राहत भरी जरूरी खबर है। केंद्र सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को फिर से एक्टिव कर दिया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटके करीब 20 लाख क्लेम की जांच और प्रोसेसिंग दोबारा शुरू हो गई है। पोर्टल के मुताबिक सत्यापित और पात्र क्लेम पर ₹10 लाख तक रिफंड दिया जा रहा है। इससे पहले इसकी लिमिट केवल ₹50,000 तक थी।


    9,267 करोड़ रुपये रिफंड

    सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 41.56 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को करीब 9,267 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। यह राशि आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है। अब लंबित आवेदनों की जांच कर पात्र निवेशकों को रिफंड देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    क्यों बंद हुई थी रिफंड की प्रकिया?
    सरकार के अनुसार नवंबर 2025 के बाद पोर्टल की IT इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइसेंस, हार्डवेयर, AMC और कर्मचारियों से जुड़ी कुछ समस्याओं के कारण क्लेम की प्रोसेसिंग प्रभावित हुई थी। अब इन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर पोर्टल बहाल किया गया है।


    45 दिन में पैसा आएगा?

    रिफंड व्यवस्था में पात्र क्लेम पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया को सामान्य तौर पर 45 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रावधान बताया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अप्लाई करते ही 45 दिन में पैसा खाते में आना तय है।

    पहले Aadhaar e-KYC, बैंक खाते की जानकारी, सदस्यता/जमा रिकॉर्ड और संबंधित सहकारी समिति के रिकॉर्ड का सत्यापन होता है। किसी तरह की कमी मिलने पर क्लेम अटक सकता है।


    क्लेम रिजेक्ट या Deficiency में गया है तो क्या करें?

    जिन निवेशकों के आवेदन में कमी बताई गई है, उनके लिए Resubmission Portal की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे निवेशकों को बताई गई कमी दूर करके अपना दावा दोबारा जमा करना चाहिए। ध्यान रखें कि रिफंड के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति या वेबसाइट को OTP, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी न दें। आवेदन और स्टेटस के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।


    31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी प्रक्रिया

    सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद सहारा समितियों के जमाकर्ताओं को रिफंड देने की समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में लंबित क्लेम की प्रोसेसिंग और भुगतान महत्वपूर्ण रहेगा।


    किसी भी सहायता के लिए नीचे दिए नंबरों पर करें कॉल
    पोर्टल हेल्प डेस्क नंबर:

    01120909044 / 01120909045
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    संपर्क का समय: सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक (केंद्र सरकार की छुट्टियों को छोड़कर)

  • प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    प्रणव अदाणी और करण अदाणी ने गणेश चतुर्थी पर चिंचपोकली चा चिंतामणि में परिवार संग पूजा-अर्चना कर दर्शन किए

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी और अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने परिवार के साथ मुंबई के ऐतिहासिक चिंचपोकली चा चिंतामणि गणपति के दर्शन किए। दोनों ने गणपति की पूजा-अर्चना कर उत्सव में भाग लिया।

    प्रणव अदाणी अदाणी एंटरप्राइजेज में एग्रो, ऑयल एंड गैस कारोबार के प्रबंध निदेशक और निदेशक भी हैं। उन्होंने चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध विरासत भक्ति, एकता और मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रही है। यह उत्सव इस वर्ष अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि को मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सार्वजनिक गणपति उत्सव के रूप में माना जाता है। इसकी परंपरा शहर के पुराने कपड़ा मिल क्षेत्रों परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी रही है। शुरुआती दौर में कपड़ा मिलों के श्रमिकों ने इस उत्सव को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    इस सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस पहल से भी जुड़ी मानी जाती है, जिसके तहत 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को घरों तक सीमित धार्मिक आयोजन से आगे बढ़ाकर सार्वजनिक उत्सव का स्वरूप दिया गया था।

    इस वर्ष चिंचपोकली चा चिंतामणि का आयोजन दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला से प्रेरित विशेष थीम पर किया गया है। गणेश प्रतिमा को तिरुमला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की शैली में सजाया गया है। प्रतिमा की सजावट में गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों को शामिल किया गया है।

    उत्सव के लिए तैयार किए गए भव्य पंडाल की वास्तुकला हैदराबाद और भुवनगिरि स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर, स्वर्णगिरि की शैली से प्रेरित है। पंडाल में ऊंचे गोपुरम, दीप स्तंभ और याली तथा व्याल जैसे संरक्षक शिल्प बनाए गए हैं, जो इसकी विशेष थीम का हिस्सा हैं।

    चिंचपोकली चा चिंतामणि की परंपरा ने मुंबई में हुए बड़े सामाजिक और औद्योगिक बदलावों के दौर को भी देखा है। वर्ष 1982 की ऐतिहासिक बॉम्बे कपड़ा मिल हड़ताल और उसके बाद शहर में हुए बदलावों के बावजूद यह उत्सव अपने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

    करीब 5,000 योगदानकर्ताओं के सहयोग से संचालित चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल की गतिविधियां केवल गणेशोत्सव तक सीमित नहीं हैं। मंडल की ओर से स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े सामाजिक कार्य भी किए जाते हैं।

    वर्ष 1939 से चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से के पास गणेशोत्सव का आयोजन लगातार किया जा रहा है। चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल ही इन वर्षों में इस आयोजन का संचालन करता रहा है। गणेशोत्सव के अलावा मंडल रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कार्यक्रम और बच्चों के लिए विभिन्न कल्याणकारी पहल भी आयोजित करता है।

  • थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव

    थोक महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% पहुंची, पेट्रोलियम उत्पादों और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया थोक बाजार का दबाव


    नई दिल्ली ।
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 सितंबर को अगस्त 2026 के थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI के आंकड़े जारी किए। आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.92 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई 2026 में यह 9.78 प्रतिशत थी। इस तरह थोक महंगाई लगातार चौथे महीने करीब 10 प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है। हालांकि WPI का 9.92 प्रतिशत होना यह नहीं बताता कि बाजार में हर सामान की कीमत इतनी ही बढ़ गई है।

    WPI यानी थोक मूल्य सूचकांक उस कीमत में बदलाव को मापता है, जिस पर सामान थोक बाजार में कारोबार करता है। यह मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों पर आधारित होता है। इसके विपरीत खुदरा स्तर पर उपभोक्ताओं द्वारा चुकाई जाने वाली कीमतों का आकलन CPI के जरिए किया जाता है। WPI में सेवाओं को शामिल नहीं किया जाता। स्कूल फीस, डॉक्टर की फीस, किराया और मोबाइल रिचार्ज जैसी सेवाएं इसके दायरे में नहीं आतीं।

    अगस्त में WPI महंगाई 9.92 प्रतिशत रही। इसका अर्थ यह है कि अगस्त 2025 की तुलना में अगस्त 2026 में WPI में शामिल वस्तुओं की कीमतों में औसतन 9.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका मतलब यह नहीं है कि हर वस्तु की कीमत 9.92 प्रतिशत बढ़ी है। अलग-अलग वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि अलग-अलग रही है और कुछ श्रेणियों में कीमतें कम भी हुई हैं।

    अगस्त की थोक महंगाई बढ़ाने में पेट्रोलियम से जुड़ी कीमतों की बड़ी भूमिका रही। पावर पेट्रोल श्रेणी में महंगाई जुलाई के 20.05 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 38.48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 34.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    खाद्य वस्तुओं ने भी थोक महंगाई पर दबाव बढ़ाया। अगस्त में फूड इंडेक्स की महंगाई 7.05 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 प्रतिशत थी। तैयार खाद्य उत्पादों की महंगाई भी अगस्त में 9.65 प्रतिशत रही। इससे खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ पैक्ड और प्रोसेस्ड उत्पादों की कीमतों पर भी दबाव दिखाई दिया।

    हालांकि सभी श्रेणियों में कीमतें नहीं बढ़ीं। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई जुलाई के 8.52 प्रतिशत से घटकर अगस्त में 7.76 प्रतिशत हो गई। नॉन-फूड आर्टिकल की महंगाई 17.66 प्रतिशत से घटकर 14.79 प्रतिशत और खनिजों की महंगाई 13.28 प्रतिशत से घटकर 8.24 प्रतिशत रही। बिजली की महंगाई -1.73 प्रतिशत और कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान की महंगाई -0.47 प्रतिशत रही।

    मार्च 2026 में WPI महंगाई 3.98 प्रतिशत थी। इसके बाद अप्रैल में 8.36 प्रतिशत, मई में 9.88 प्रतिशत, जून में 9.97 प्रतिशत और अगस्त में 9.92 प्रतिशत रही। इस बढ़ोतरी में बेस इफेक्ट की भी भूमिका बताई गई है। पिछले साल अप्रैल से अगस्त के बीच WPI महंगाई औसतन -0.20 प्रतिशत थी, जबकि इस साल इसी अवधि में औसत महंगाई करीब 9.56 प्रतिशत रही।

    WPI का असर उपभोक्ता की जेब पर सीधे नहीं पड़ता, लेकिन थोक लागत बढ़ने से कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ सकता है। पेट्रोल, स्टील, केमिकल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने पर कंपनियां कुछ समय तक लागत खुद वहन कर सकती हैं। लगातार दबाव रहने पर कुछ उत्पादों की खुदरा कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    अगस्त का WPI आंकड़ा अभी अस्थायी है और 84.4 प्रतिशत महत्व-आधारित उत्तर के आधार पर तैयार हुआ है। आगे मिलने वाले आंकड़ों के साथ इसमें बदलाव हो सकता है। सितंबर के WPI आंकड़े 14 अक्टूबर 2026 को जारी होंगे, जिससे पता चलेगा कि पेट्रोलियम और अन्य कच्चे माल से बना कीमतों का दबाव आगे भी बना रहता है या इसमें कमी आती है।

  • 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों की बड़ी मांग, हर तीन महीने में DA बढ़ाने और 25% पर बेसिक में मर्जर का प्रस्ताव

    8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों की बड़ी मांग, हर तीन महीने में DA बढ़ाने और 25% पर बेसिक में मर्जर का प्रस्ताव

    नई दिल्ली ।8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी संगठनों की ओर से कई महत्वपूर्ण मांगें और सुझाव सामने आ रहे हैं। इनमें महंगाई भत्ते यानी DA की समीक्षा साल में दो बार के बजाय चार बार करने और 25 प्रतिशत DA होने पर उसे बेसिक पे में मर्ज करने की मांग प्रमुख है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे महंगाई के असर के अनुसार वेतन में बदलाव अधिक नियमित तरीके से किया जा सकेगा।

    चेन्नई और पुडुचेरी के बाद 8वें वेतन आयोग की बैठक चंडीगढ़ में होने की जानकारी दी गई है। चंडीगढ़ में 16 से 18 अगस्त के बीच होने वाली बैठक में उत्तर भारत के विभिन्न कर्मचारी संघ और पेंशनर्स संगठन अपनी मांगें आयोग के सामने रखेंगे। बैठक में फिटमेंट फैक्टर, DA और HRA सहित वेतन से जुड़े मुद्दों पर सुझाव दिए जा सकते हैं। इसके बाद 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बैठक प्रस्तावित है।

    वर्तमान व्यवस्था के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में संशोधन किया जाता है। कर्मचारी संगठनों के एक वर्ग ने अब इसकी समीक्षा हर तीन महीने में यानी साल में चार बार करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे महंगाई में होने वाले बदलावों के अनुसार DA में अधिक नियमित संशोधन किया जा सकेगा।

    नेशनल काउंसिल यानी NC-JCM सहित कुछ संगठनों ने DA के 25 प्रतिशत होने पर उसे बेसिक पे में शामिल करने की मांग भी रखी है। इस मांग के लागू होने पर आगे कर्मचारियों के वेतन के साथ HRA और TA जैसे भत्तों की गणना बढ़े हुए बेसिक पे के आधार पर होने की बात कही गई है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का DA 60 प्रतिशत से अधिक बताया गया है।

    कर्मचारी संगठनों की ओर से वित्तीय अपग्रेडेशन से जुड़ी MACP व्यवस्था में भी बदलाव की मांग की गई है। इसमें हर 10 साल के बजाय हर पांच साल में फाइनेंशियल अपग्रेडेशन देने का सुझाव शामिल है। इसके अलावा कुछ संगठनों ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की मांग रखी है। फिटमेंट फैक्टर के आधार पर कर्मचारियों के बेसिक पे में बदलाव का प्रस्ताव है।

    7वें वेतन आयोग में फैमिली यूनिट की संख्या तीन निर्धारित किए जाने का उल्लेख करते हुए इसे 8वें वेतन आयोग में बढ़ाकर पांच करने की मांग भी सामने आई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन और सेवा शर्तों से जुड़े मुद्दों को नए वेतन आयोग में ध्यान में रखा जाना चाहिए।

    हालांकि, कर्मचारी संगठनों की ओर से रखी जा रही ये मांगें और सुझाव अभी अंतिम निर्णय नहीं हैं। 8वें वेतन आयोग को विभिन्न कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव मिल रहे हैं। इन सुझावों पर विचार के बाद आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोग मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। फिलहाल DA में साल में चार बार संशोधन, 25 प्रतिशत पर बेसिक पे में मर्जर, फिटमेंट फैक्टर, MACP और फैमिली यूनिट से संबंधित मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

  • अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    अमेरिका में महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका, सोने और चांदी की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली ।अमेरिका में उम्मीद से अधिक महंगाई के आंकड़े सामने आने के बाद वैश्विक बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। बाजार में यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस सप्ताह ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ब्याज दर बढ़ने की आशंका के बीच निवेशकों ने बिना ब्याज देने वाली कीमती धातुओं में बिकवाली बढ़ाई है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 4,340 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान इसमें लगभग 0.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले पिछले सप्ताह सोने की कीमत में कुल 1.8 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। चांदी भी करीब 0.8 प्रतिशत गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी नरमी देखी गई।

    घरेलू बाजार में सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर एमसीएक्स के सोना और चांदी वायदा कारोबार का सुबह का सत्र बंद रहा। एमसीएक्स पर कारोबार शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक होने की जानकारी दी गई है। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना वायदा करीब 1,52,655 रुपये प्रति 10 ग्राम और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी करीब 2,34,886 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही।

    अमेरिका में शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और ऊर्जा की कीमतों को हटाकर मापी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत बढ़ी। यह बाजार की उम्मीदों से अधिक रही। आंकड़ों से संकेत मिला कि महंगाई पर अभी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है।

    महंगाई के इन आंकड़ों के बाद बाजार में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना मजबूत हुई है। कारोबारी सितंबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की करीब 88 प्रतिशत संभावना देख रहे हैं। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर सोने जैसी ऐसी परिसंपत्तियों के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, जिनसे ब्याज आय नहीं होती।

    इस बीच पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर जोखिम के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। तेल आपूर्ति से जुड़े जोखिमों ने ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं।

    यमन में हौथी बलों के महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर कब्जे की बात भी सामने आई है। ये बंदरगाह उस महत्वपूर्ण तटीय क्षेत्र के पास हैं, जो वैश्विक समुद्री तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से से जुड़ा है। रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में ड्रोन हमलों और एक व्यापारिक पोत पर हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, घटना में एक व्यक्ति की मौत हुई और तीन लोग घायल हुए।

    विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों ने फिलहाल सोने और चांदी में नई खरीदारी से दूरी बनाई है।

    अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक और ब्याज दर संबंधी फैसले पर है। यदि फेड दरें बढ़ाता है और आगे भी सख्त रुख के संकेत देता है, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर कुछ समर्थन दे सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा फेड के फैसले तथा कच्चे तेल की कीमतों से प्रभावित होने की संभावना है।

  • Share Market Holiday: 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट बंद, कमोडिटी और EGR सेगमेंट में शाम पांच बजे बाद शुरू होगी ट्रेडिंग

    Share Market Holiday: 14 सितंबर को स्टॉक मार्केट बंद, कमोडिटी और EGR सेगमेंट में शाम पांच बजे बाद शुरू होगी ट्रेडिंग

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोमवार, 14 सितंबर 2026 को देश के शेयर बाजार में कारोबार बंद है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE पर आज सामान्य ट्रेडिंग नहीं होगी। बाजार की छुट्टी के कारण निवेशक इक्विटी समेत कई प्रमुख सेगमेंट में खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे।

    आज इक्विटी सेगमेंट, डेरिवेटिव्स सेगमेंट और सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग यानी SLB सेगमेंट में कारोबार पूरी तरह बंद रहेगा। इसके अलावा करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में भी सोमवार को कोई ट्रेडिंग नहीं होगी। इस तरह इन सभी प्रमुख बाजार सेगमेंट में पूरे कारोबारी दिन गतिविधियां बंद रहेंगी।

    गणेश चतुर्थी के मौके पर बाजार बंद रहने के साथ देश के कई सरकारी और निजी कार्यालयों में भी अवकाश है। इसके अलावा कई सरकारी और निजी बैंक भी सोमवार को बंद रहने वाले हैं। हालांकि, सभी कार्यालयों में छुट्टी होना जरूरी नहीं है और कुछ जगहों पर सामान्य कामकाज जारी रहेगा।

    शेयर बाजार में छुट्टी के बावजूद कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR सेगमेंट में आंशिक कारोबार की व्यवस्था रहेगी। इन सेगमेंट में सुबह का कारोबारी सत्र बंद रहेगा। शाम के सत्र में कारोबार दोबारा शुरू किया जाएगा।

    कमोडिटी बाजार में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कारोबार नहीं होगा। इसके बाद शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होगी। यानी इक्विटी और अन्य प्रमुख सेगमेंट के विपरीत कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR सेगमेंट में दिन के दूसरे हिस्से में कारोबार किया जा सकेगा।

    बाजार बंद रहने की यह व्यवस्था गणेश चतुर्थी के अवसर पर लागू है। ऐसे में निवेशकों और बाजार से जुड़े लोगों के लिए सोमवार को शेयर बाजार की सामान्य गतिविधियां उपलब्ध नहीं रहेंगी। BSE की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आज संबंधित सेगमेंट में ट्रेडिंग नहीं होगी।

    अब बाजार अगले कारोबारी दिन मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को फिर से खुलेगा। उस दिन BSE और NSE पर सामान्य कारोबार शुरू होने की उम्मीद रहेगी। वहीं, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR सेगमेंट के लिए सोमवार शाम 5 बजे के बाद कारोबार का सत्र उपलब्ध रहेगा।

    गणेश चतुर्थी के कारण शेयर बाजार की छुट्टी निवेशकों के लिए कारोबारी कैलेंडर का हिस्सा है। इसलिए 14 सितंबर को इक्विटी, डेरिवेटिव्स, SLB, करेंसी डेरिवेटिव्स और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स में लेन-देन नहीं किया जा सकेगा। बाजार से जुड़े लोगों को अगले कारोबारी दिन यानी 15 सितंबर से सामान्य गतिविधियां फिर शुरू करनी होंगी।

    इस तरह सोमवार को शेयर बाजार की प्रमुख गतिविधियां बंद रहेंगी, जबकि कमोडिटी डेरिवेटिव्स और EGR में शाम के सत्र में सीमित कारोबार जारी रहेगा। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि बाजार की छुट्टी केवल संबंधित ट्रेडिंग सेगमेंट के तय कार्यक्रम के अनुसार लागू है और मंगलवार से सामान्य कारोबार फिर शुरू होगा।

  • Zomato: ग्राहकों को कैश भुगतान पर चुकाना होगा 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क

    Zomato: ग्राहकों को कैश भुगतान पर चुकाना होगा 20 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क


    नई दिल्ली।
    फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो (Food delivery platform Zomato) ‘कैश ऑन डिलीवरी’ (Cash on Delivery) यानी डिलीवरी के वक्त नकद भुगतान विकल्प चुनने पर ग्राहकों से पांच से 20 रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क लेगी। यह नया शुल्क एप के बिल विवरण में ‘पे ऑन डिलीवरी फीस’ (‘Pay on Delivery Fee’) के नाम से अलग से जोड़ा गया है। हालांकि, जो उपभोक्ता यूपीआई व अन्य तरीके से ऑनलाइन भुगतान करेंगे उन पर यह अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा।

    जोमैटो ने बताया कि उसके बिल में अब पे ऑन डिलीवरी फीस नाम से एक अलग चार्ज दिखाई देगा। यह शुल्क उन ग्राहकों पर लागू होता है, जो ‘कैश ऑन डिलीवरी’ यानी फूड सप्लाई के समय भुगतान करने का विकल्प चुनते हैं। यह शुल्क सभी ऑर्डर के लिए समान नहीं है। अलग-अलग यूजर्स और ऑर्डर की राशि के आधार पर यह फीस भी अलग दिखाई देगी। कंपनी ने अभी तक फीस तय करने का कोई सटीक फॉर्मूला नहीं बताया है। फिलहाल यह फीस ऑर्डर की राशि, ग्राहक के स्थान या किसी अन्य मानदंड से जुड़ा है।

    एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस फीस को तय करने का सटीक आधार क्या है और क्या यह ऑर्डर की वैल्यू, लोकेशन या दूसरे पैरामीटर्स जैसे फैक्टर्स से जुड़ा है, इसका तुरंत पता नहीं चल सका। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म अलग-अलग फीस स्ट्रक्चर और मॉनेटाइजेशन मॉडल्स के साथ प्रयोग कर रहे हैं।

    कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर्स पर नई फीस के अलावा, जोमैटो प्लेटफॉर्म पहले से ही फूड ऑर्डर्स पर प्लेटफॉर्म फीस वसूलता है। इसके साथ ही ऑर्डर के आधार पर डिलीवरी, पैकेजिंग और अन्य चार्ज भी लागू होते हैं। जोमैटो की कॉम्पिटीटर स्विगी अभी कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर्स पर कोई अलग फीस नहीं ले रही है।