Category: Economy

  • अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का असर… दो दिन में सस्ती हुई चांदी, सोना भी 2 हजार रुपए से ज्यादा टूटा

    अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का असर… दो दिन में सस्ती हुई चांदी, सोना भी 2 हजार रुपए से ज्यादा टूटा


    नई दिल्ली। सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली है। कमोडिटी मार्केट से लेकर सर्राफा बाजार तक दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। MCX पर दो दिनों में चांदी 12,600 रुपए से ज्यादा टूट चुकी है, जबकि सोना भी 2 हजार रुपए से अधिक सस्ता हो गया है। शुक्रवार को भी दोनों के भाव गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।

    आज सोना-चांदी कितना सस्ता हुआ?
    MCX पर शुक्रवार को सोने की कीमत करीब 1,200 रुपए गिरकर 1,50,695 रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गई। वहीं चांदी करीब 2,600 रुपए टूटकर 2,30,270 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को भी सोने-चांदी में जोरदार गिरावट दर्ज की गई थी। लगातार दो कारोबारी सत्रों में सोने की कीमत 2 हजार रुपए से ज्यादा और चांदी की कीमत 12,600 रुपए से ज्यादा टूट चुकी है।

    इंटरनेशनल मार्केट में भी दबाव
    कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई दिया। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड 1.32% गिरकर 4,401.74 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत 5.45% की गिरावट के साथ 64.908 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    अमेरिका के महंगाई आंकड़ों से बढ़ा दबाव
    सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की प्रमुख वजह अमेरिका से आए महंगाई के मजबूत आंकड़ों को माना जा रहा है। इन आंकड़ों के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दरों में बढ़ोतरी की संभावना 80% तक पहुंच गई है।

    ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद से सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा ऊंचे स्तरों से मुनाफावसूली ने भी कीमतों में गिरावट को तेज किया है।

    कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भी असर
    दूसरी ओर, जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसके चलते डॉलर भी मजबूत हो रहा है। Brent Crude Oil 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। मजबूत डॉलर और तेल की बढ़ती कीमतों का असर भी सोने-चांदी के भाव पर देखने को मिल रहा है।

    नोट: सोने और चांदी में निवेश करने से पहले बाजार की मौजूदा स्थिति और विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।

  • ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी

    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत का ट्रेड प्लान, जयशंकर बोले- कारोबार के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद माहौल जरूरी


    नई दिल्ली ।
    ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत ने सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद कारोबारी माहौल बनाने पर जोर दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही।

    एस जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स अपनी सदस्यता, एजेंडे और सहयोग के तरीकों के लिहाज से लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में अस्थिरता और अनिश्चितता बनी हुई है, सदस्य देशों के लिए आर्थिक सहयोग को मजबूत करना महत्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया बड़े राजनीतिक और आर्थिक बदलावों के दौर से गुजर रही है और जटिल परिस्थितियां वैश्विक व्यवस्था की पहचान बन गई हैं।

    विदेश मंत्री के अनुसार, ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का अर्थ अपनी आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आर्थिक झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत करना है। इसके लिए कारोबारी व्यवहार को बाजार के वास्तविक सिद्धांतों के अनुरूप बनाए रखना और व्यापारिक साझेदारियों में भरोसे को बढ़ाना जरूरी है।

    उन्होंने विविध व्यापारिक संबंधों, पारदर्शी व्यापार और निवेश व्यवस्था तथा ऐसे कारोबारी वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसका अनुमान लगाया जा सके। उनके मुताबिक, कारोबारियों के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद परिस्थितियां तैयार होने से उन्हें नए साझेदार तलाशने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और अलग-अलग देशों की क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी।

    जयशंकर ने ब्रिक्स देशों के बीच आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ने की जरूरत भी बताई। मजबूत सप्लाई चेन तैयार होने से सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए आपसी व्यापार और सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देशों को अपनी क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलने के लिए समन्वित प्रयास करने चाहिए।

    व्यापार और निवेश में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ निष्पक्ष बाजार व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। भारत की ओर से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में विविधता लाने और आर्थिक सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई। इसके साथ ही सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने का सुझाव भी दिया गया।

    भारत नई दिल्ली में शनिवार और रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ब्रिक्स में शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी संगठन का सदस्य बना।

    ब्रिक्स के विस्तार के साथ संगठन के भीतर व्यापार और निवेश सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में भारत ने सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए अधिक बाजारों तक पहुंच, बेहतर सप्लाई नेटवर्क, पारदर्शी व्यापार व्यवस्था और भरोसेमंद कारोबारी माहौल को महत्वपूर्ण आधार के रूप में सामने रखा है। आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को सदस्य देशों की आर्थिक क्षमता मजबूत करने से जोड़ा गया है।

  • वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    वैश्विक तनाव और बढ़ते क्रूड दबाव से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 121 अंक टूटा और निफ्टी 0.34 प्रतिशत नीचे बंद

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोरी का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांक शुरुआती गिरावट के बाद निचले स्तर से संभले, लेकिन कारोबार का अंत लाल निशान में हुआ। आईटी, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों से बाजार को कुछ सहारा मिला, इसके बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 120.83 अंक यानी 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 भी 79.70 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा। दिन के दौरान दोनों सूचकांकों ने निचले स्तर से कुछ सुधार किया, जिससे अंतिम गिरावट शुरुआती दबाव की तुलना में सीमित रही।

    सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,902.59 के मुकाबले 593.42 अंक यानी 0.79 प्रतिशत नीचे 74,309.16 पर खुला था। कारोबार के दौरान यह एक समय 74,917.15 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि दिन के निचले स्तर पर 74,160.16 तक फिसल गया। इस तरह सेंसेक्स ने अपने दिन के निचले स्तर से 621.59 अंक की रिकवरी की।

    निफ्टी भी पिछले बंद स्तर 23,477.80 के मुकाबले 207 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,270.30 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 23,448.10 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि 23,231.40 का निचला स्तर भी देखा गया।

    व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.26 प्रतिशत और 0.58 प्रतिशत नीचे रहे। सेक्टरों में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा कमजोर रहे। रियल्टी इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत और मेटल इंडेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऑटो, ऑयल एंड गैस, पीएसयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी दबाव रहा।

    इसके विपरीत प्राइवेट बैंक, मीडिया और आईटी सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील, आयशर मोटर्स, टाटा स्टील और ओएनजीसी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही।

    बाजार पर दबाव के प्रमुख कारणों में पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली शामिल रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर 110 डॉलर की ओर बढ़ा, जिससे आपूर्ति बाधित होने की चिंता बढ़ी।

    कच्चे तेल की महंगाई ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव बढ़ाया। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंचने से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की आशंकाएं मजबूत हुईं। इस बीच रुपया कमजोर होकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया।

    पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी 50 में 2.1 प्रतिशत की गिरावट रही। मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.3 प्रतिशत और 0.6 प्रतिशत की कमजोरी आई। प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.5 प्रतिशत चढ़ा, जबकि रियल्टी क्षेत्र कमजोर रहा।

    बैंक यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल से भी बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। कर्मचारी पांच दिन के कार्य सप्ताह और पीएलआई योजना में बदलाव जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे। इस महीने के अंत में और 26 अक्टूबर से भी हड़ताल प्रस्तावित है।

    प्राइमरी बाजार में एनएसई के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,700 से 1,785 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। इश्यू 17 सितंबर को खुलेगा और इससे करीब 22,662 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर भारत के अगस्त सीपीआई और डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के साथ अमेरिकी फेड के नीतिगत फैसले, रिटेल सेल्स और औद्योगिक उत्पादन पर रहेगी। क्रूड, रुपया और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • अमेज़न इंडिया के विक्रेताओं का कुनबा 20 लाख पार, तीन साल में सबसे तेज बढ़ोतरी

    अमेज़न इंडिया के विक्रेताओं का कुनबा 20 लाख पार, तीन साल में सबसे तेज बढ़ोतरी


    भोपाल।
    त्योहारी खरीदारी का मौसम शुरू होने से पहले अमेज़न इंडिया ने अपने विक्रेता नेटवर्क को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी ने बताया कि Amazon.in पर उसके विक्रेताओं की संख्या 20 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। पिछले तीन वर्षों में यह विक्रेता आधार में साल दर साल हुई सबसे तेज वृद्धि है। इस दौरान तीन लाख से अधिक नए विक्रेता अमेज़न के मंच से जुड़े हैं।

    अमेज़न के बढ़ते विक्रेता समुदाय में देश के अलग-अलग हिस्सों और विभिन्न स्तरों के कारोबारी शामिल हैं। इनमें टियर-3 कस्बों से कारोबार शुरू करने वाले पहली पीढ़ी के उद्यमियों से लेकर हजारों स्टॉक कीपिंग यूनिट संभालने वाले स्थापित ब्रांड तक शामिल हैं। आगामी त्योहारी मौसम को देखते हुए कंपनी विक्रेताओं के लिए बिक्री, विज्ञापन, कारोबार प्रबंधन और ग्राहकों तक बेहतर सेवा पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दे रही है।

    इसके लिए कंपनी तकनीक, विभिन्न डिजिटल टूल्स और अपने बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश कर रही है। अमेज़न इंडिया में सेलिंग पार्टनर सर्विसेज की निदेशक अरुणा दरयानानी ने कहा कि कंपनी की कोशिश Amazon.in को हर आकार के विक्रेता के लिए बिक्री का बेहतर मंच बनाने की है। उन्होंने कहा कि फीस में कमी, रोजमर्रा के काम को आसान बनाने वाले एआई टूल्स और आंकड़ों के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में मदद करने वाली सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि 20 लाख विक्रेताओं तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि देशभर के उद्यमी Amazon.in पर भरोसा कर रहे हैं। आगामी त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए कंपनी ऐसे टूल्स, तकनीक और बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखेगी, जिससे विक्रेता अपने कारोबार को तैयार कर सकें और ग्राहकों को बेहतर सेवा दे सकें।

    फीस में कटौती से बिक्री की लागत हुई कम

    अमेज़न के विक्रेता आधार में विस्तार के पीछे कम सेलिंग फीस, एआई आधारित सुविधाएं, रचनात्मक विज्ञापन विकल्प और फुलफिलमेंट तथा डिलीवरी नेटवर्क में लगातार किया जा रहा निवेश प्रमुख वजहें हैं।

    कंपनी के अनुसार इस साल की शुरुआत में फीस में बदलाव के बाद 12.5 करोड़ से अधिक उत्पादों पर रेफरल फीस शून्य कर दी गई। इससे देशभर के उद्यमियों के लिए अमेज़न पर उत्पाद बेचने की लागत कम हुई है। इसके साथ ही कंपनी विक्रेताओं को एआई आधारित सुविधाएं और विभिन्न डिजिटल टूल्स उपलब्ध करा रही है।

    ये सुविधाएं उत्पादों की लिस्टिंग तैयार करने और उसे बेहतर बनाने, नए उत्पादों की संभावनाएं तलाशने, विज्ञापन के लिए क्रिएटिव तैयार करने, इन्वेंट्री की योजना बनाने और आंकड़ों के आधार पर कारोबारी निर्णय लेने में मदद करती हैं।

    सेलर असिस्टेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा

    Amazon.in पर सेलर असिस्टेंट का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं की संख्या हर छह महीने में दोगुनी हो रही है। कंपनी के अनुसार इस एआई आधारित टूल के साथ विक्रेताओं की बातचीत साल दर साल 7.5 गुना बढ़ी है।

    एआई आधारित टूल्स का इस्तेमाल करने वाले अमेज़न विज्ञापनदाताओं की हिस्सेदारी में भी साल दर साल 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं 2026 की पहली तिमाही में छोटे और मध्यम कारोबारियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इन टूल्स की मदद से 62 प्रतिशत अधिक विज्ञापन क्रिएटिव तैयार किए।

    देशभर में हो रहे सेलर कनेक्ट और ऐड्स हाइव वर्कशॉप

    त्योहारी सीजन की तैयारियों के तहत अमेज़न अपने डिजिटल टूल्स और सुविधाओं को विक्रेताओं तक सीधे पहुंचाने के लिए कई शहरों में 20 से अधिक सेलर कनेक्ट और ऐड्स हाइव वर्कशॉप आयोजित कर रहा है। इनमें कैटलॉग ऑप्टिमाइजेशन, इन्वेंट्री प्लानिंग, फुलफिलमेंट और विज्ञापन से जुड़े टूल्स तथा रणनीतियों की जानकारी दी जा रही है।

    मध्य प्रदेश में भी अमेज़न 77 हजार से अधिक विक्रेताओं और 24 हजार से ज्यादा स्थानीय दुकानों के लिए Amazon.in पर बिक्री को आसान बनाने पर काम कर रहा है।

    24 घंटे उपलब्ध एआई साथी

    त्योहारी तैयारी में सेलर असिस्टेंट को कंपनी प्रमुख सुविधाओं में शामिल कर रही है। यह 24 घंटे उपलब्ध बातचीत वाला एआई आधारित साथी है, जो अंग्रेजी और हिंग्लिश दोनों में काम करता है। इसके माध्यम से विक्रेता एक ही जगह से लिस्टिंग तैयार करने, इन्वेंट्री की योजना बनाने, फीस का अनुमान लगाने, कारोबार से संबंधित जानकारी हासिल करने और आगे बढ़ने के सुझाव लेने जैसे काम कर सकते हैं।

    प्रोडक्ट अपॉर्च्युनिटी एक्सप्लोरर भी विक्रेताओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। यह अमेज़न के ग्राहक मांग से जुड़े आंकड़ों के आधार पर ऐसे उत्पादों की संभावनाएं पहचानने में मदद करता है, जिनकी मांग मौजूद है और जहां प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। देश में 28 हजार से अधिक विक्रेता इस टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    दो लाख से ज्यादा विक्रेता एआई लिस्टिंग टूल्स से जुड़े

    अमेज़न के एआई आधारित लिस्टिंग टूल्स का इस्तेमाल दो लाख से अधिक विक्रेता कर रहे हैं। इन सुविधाओं के जरिए उत्पादों का कैटलॉग तैयार करना आसान होता है और ग्राहकों के लिए उत्पादों को खोज पाना भी सरल होता है।

    इन्वेंट्री और कीमत की योजना के लिए इस साल 69 हजार से अधिक विक्रेताओं ने सेल इवेंट प्लानर का इस्तेमाल किया। कंपनी के अनुसार जिन विक्रेताओं ने इसके एआई आधारित इन्वेंट्री सुझावों को अपनाया, उनके यहां स्टॉक खत्म होने की घटनाओं में 35 प्रतिशत की कमी आई। वहीं टूल द्वारा सुझाई गई डील कीमतें लागू करने वाले विक्रेताओं की बिक्री में 2.5 गुना तक बढ़ोतरी हुई।

    समृद्धि से बिक्री लक्ष्य पार करने की संभावना 2.8 गुना

    अमेज़न का निजी सुझाव देने वाला ग्रोथ रेकमेंडेशन इंजन ‘समृद्धि’ भी विक्रेताओं को कारोबार बढ़ाने के लिए जरूरी कदम पहचानने में मदद कर रहा है। कंपनी के अनुसार समृद्धि का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं के बिक्री आयोजनों के दौरान अपने बिक्री लक्ष्य को लगातार पार करने की संभावना 2.8 गुना अधिक होती है। वहीं इसके सुझावों को अपनाने वाले विक्रेताओं की सालाना बिक्री में 174 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    एआई से विज्ञापन क्रिएटिव तैयार करना आसान

    अमेज़न ऐड्स भी सेल्फ-सर्विस समाधान और एआई आधारित टूल्स के जरिये विक्रेताओं के लिए विज्ञापन को आसान बना रहा है। क्रिएटिव एजेंट और क्रिएटिव स्टूडियो जैसे टूल्स की मदद से विक्रेता कम मेहनत और बिना अतिरिक्त खर्च के पेशेवर स्तर के क्रिएटिव तैयार कर सकते हैं। इनमें वीडियो विज्ञापन भी शामिल हैं।

    अमेज़न ऐड्स क्रिएटर प्रोग्राम ब्रांड्स को पांच लाख से अधिक क्रिएटर्स के नेटवर्क से जोड़ता है। इससे विक्रेताओं को अपने विज्ञापन अभियानों में क्रिएटर के माध्यम से प्रचार का विकल्प भी मिलता है।

    त्योहारी मौसम के लिए 1.6 लाख से ज्यादा मौसमी रोजगार

    अमेज़न इंडिया अपने देशव्यापी ऑपरेशंस नेटवर्क और मौसमी कर्मचारियों पर भी निवेश कर रहा है। आगामी त्योहारी मौसम से पहले कंपनी ने अपने देशभर के ऑपरेशंस नेटवर्क में 1.6 लाख से अधिक मौसमी काम के अवसर तैयार किए हैं। ये अवसर अमेज़न के ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स दोनों कारोबार को सहयोग देंगे।

    ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर 400 शहरों में उपलब्ध होंगे। इनमें बड़े महानगरों के साथ वाराणसी, कोच्चि, जालंधर, गाजियाबाद, रांची, सेलम और गोरखपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहर भी शामिल हैं।

    त्योहारी मौसम के दौरान ये नए एसोसिएट ग्राहकों के ऑर्डर को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से उठाने, पैक करने, भेजने और पहुंचाने में मदद करेंगे। कंपनी के अनुसार इनमें से ज्यादातर लोग अमेज़न के साथ जुड़ चुके हैं और त्योहारी सीजन की तैयारियों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी शुरू कर चुके हैं।

    अमेज़न अपने देशव्यापी डिलीवरी नेटवर्क के माध्यम से भारत के हर पिन कोड तक सामान पहुंचाने का काम कर रहा है।

  • NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    नई दिल्ली ।भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा और लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) पवित्रन राजन के रणनीतिक अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। NATO से जुड़े हाइब्रिड वॉरफेयर पर तैयार एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में दोनों अधिकारियों के काम का कम से कम 10 बार उल्लेख किया गया है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने इसे भारतीय रणनीतिक सोच के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।

    डीएस हुड्डा नॉर्दर्न आर्मी के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। हुड्डा और पवित्रन राजन ने मिलकर ‘बियॉन्ड द काइनेटिक: डीकंस्ट्रक्टिंग वॉरफेयर इन द सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ नाम से एक पेपर तैयार किया था। यह पेपर जनवरी 2026 में नई दिल्ली स्थित काउंसिल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डिफेंस रिसर्च की ओर से प्रकाशित किया गया था।

    जनरल वीके सिंह ने दोनों अधिकारियों के काम को हाइब्रिड, कॉग्निटिव और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय रणनीतिक सोच की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनके काम को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना महत्वपूर्ण है और दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    हुड्डा और राजन के अध्ययन का मुख्य विषय आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति है। उनके अनुसार युद्ध अब केवल आमने-सामने के सैन्य संघर्ष या भौतिक लक्ष्यों को नष्ट करने तक सीमित नहीं रह गया है। संघर्ष का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र ऐसा भी बन गया है, जिसे उन्होंने ‘सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ यानी STCB के रूप में समझाया है।

    इस अवधारणा में सूचना, तकनीक और लोगों की सोच के बीच संबंध को महत्वपूर्ण माना गया है। दोनों अधिकारियों के अध्ययन के मुताबिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम के माध्यम से लोगों तक पहुंचने वाली सूचनाएं उनकी राय और निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। इसका रणनीतिक प्रभाव युद्ध के पारंपरिक क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के प्रभाव जैसा हो सकता है।

    पेपर में कॉग्निटिव वॉरफेयर को आधुनिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसमें कहा गया कि विरोधी सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर सूचना के प्रवाह को प्रभावित कर पहले से मौजूद सामाजिक विभाजन और सूचना की कमी का फायदा उठा सकते हैं। उद्देश्य केवल गलत सूचना फैलाना नहीं, बल्कि लोगों के घटनाओं को देखने और फैसले लेने के तरीके को प्रभावित करना भी हो सकता है।

    अध्ययन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अनुसार AI की मदद से गलत सूचना फैलाने वाले अभियान ज्यादा सटीक और बड़े स्तर पर चलाए जा सकते हैं। व्यक्तिगत या सामाजिक कमजोरियों को ध्यान में रखकर संदेश तैयार करना भी संभव हो सकता है।

    इस चुनौती से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता, मजबूत संस्थानों, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और विदेशी नियंत्रण वाले डिजिटल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जांच-पड़ताल के जरिए मजबूती बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    NATO से जुड़े प्रकाशन में हुड्डा और राजन के पेपर का उल्लेख विशेष रूप से ‘AI एंड कॉग्निटिव वॉरफेयर’ अध्याय में किया गया। इस अध्याय में कॉग्निटिव वॉरफेयर और OODA लूप पर चर्चा की गई है। OODA का अर्थ ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट है, जिसके जरिए सैन्य कमांडर किसी स्थिति को समझकर निर्णय लेते हैं और कार्रवाई करते हैं।

    प्रकाशन में रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में तकनीक, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई है। यूक्रेन द्वारा स्टारलिंक जैसी निजी सैटेलाइट कम्युनिकेशन व्यवस्था के इस्तेमाल और Clearview AI के जरिए रूसी सैनिकों की पहचान से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

    पावर-ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की समीक्षा वाले हिस्से में भी कॉग्निटिव वॉरफेयर, गलत सूचना, मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन और AI से पैदा होने वाली अव्यवस्था को जनता के भरोसे तथा निर्णय प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़ा गया है। दोनों अधिकारियों का जनवरी 2026 का पेपर इस प्रकाशन की संदर्भ सूची में भी औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

  • बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    नई दिल्ली । बड़ा फंड तैयार करने के लिए लोग अक्सर शेयर बाजार, फिक्स्ड डिपॉजिट या SIP जैसे विकल्पों पर विचार करते हैं। हालांकि, जो लोग बाजार से जुड़े जोखिम से बचना चाहते हैं और बिना किसी निवेश साधन के नियमित बचत करना चाहते हैं, उनके लिए गुल्लक में रोज थोड़ी रकम जमा करने का तरीका अपनाया जा सकता है। तारीख के हिसाब से बचत करने वाला यह फॉर्मूला बेहद आसान है और पति-पत्नी मिलकर इसे अपनाएं तो एक साल में एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम जमा की जा सकती है।

    इस बचत चुनौती का नियम सीधा है। महीने की जिस तारीख को जितना अंक हो, उतने ही दस रुपये गुल्लक में जमा करने होते हैं। यानी हर दिन जमा होने वाली राशि तारीख के साथ बढ़ती जाती है। इससे शुरुआत में बचत की रकम छोटी रहती है और महीने के आखिर में धीरे-धीरे बढ़कर ज्यादा हो जाती है।

    उदाहरण के तौर पर महीने की 1 तारीख को 10 रुपये जमा करने होंगे। 5 तारीख को 50 रुपये, 10 तारीख को 100 रुपये, 15 तारीख को 150 रुपये, 20 तारीख को 200 रुपये और 25 तारीख को 250 रुपये गुल्लक में डालने होंगे। इसी क्रम को महीने की 30 तारीख तक जारी रखा जा सकता है, जब उस दिन 300 रुपये जमा होंगे।

    अगर महीने की 1 से 31 तारीख तक इसी नियम के अनुसार रोज बचत की जाए, तो एक व्यक्ति एक महीने में कुल 4,960 रुपये जमा कर सकता है। इस तरह लगातार 12 महीने तक यही तरीका अपनाने पर एक व्यक्ति के पास करीब 59,520 रुपये का फंड तैयार हो जाएगा।

    इस चुनौती की खास बात यह है कि इसे पति-पत्नी मिलकर भी पूरा कर सकते हैं। दोनों लोग अपने-अपने स्तर पर तारीख के हिसाब से समान रकम गुल्लक में जमा करें तो एक साल में दोनों की संयुक्त बचत करीब 1,19,040 रुपये तक पहुंच सकती है। इस तरह एक लाख रुपये का लक्ष्य पार किया जा सकता है।

    इस तरीके में किसी निवेश योजना में पैसा लगाने की जरूरत नहीं होती। बचत की रकम सीधे गुल्लक में जमा की जाती है, इसलिए इसका उद्देश्य नियमित तौर पर पैसे अलग रखना और बचत की आदत विकसित करना है। रोजाना छोटी रकम जमा करने से एक साथ बड़ी राशि बचाने का दबाव भी कम किया जा सकता है।

    हालांकि, इस तरीके को बाजार निवेश का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश साधनों में पैसे लगाने पर रिटर्न बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा होता है और उसमें जोखिम भी रहता है। वहीं, गुल्लक में रखी रकम से निवेश रिटर्न नहीं मिलता। यह मूल रूप से बचत का तरीका है।

    इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए जरूरी है कि तय तारीख पर निर्धारित रकम अलग रखी जाए। महीने की शुरुआत में छोटी रकम से शुरू होने वाली बचत महीने के अंत तक बढ़ती जाती है। पति-पत्नी दोनों नियमितता बनाए रखें तो 12 महीने में संयुक्त रूप से करीब 1.19 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं।

  • भारत की बिजली मांग एक दशक में दोगुनी, पीक डिमांड 270.8 गीगावाट पहुंची; स्थापित क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हुई

    भारत की बिजली मांग एक दशक में दोगुनी, पीक डिमांड 270.8 गीगावाट पहुंची; स्थापित क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हुई

    नई दिल्ली । भारत के बिजली क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान तेजी से विस्तार हुआ है। बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और घरेलू स्तर पर बिजली की बढ़ती खपत के बीच देश की अधिकतम बिजली मांग करीब दोगुनी हो गई है। सरकार के अनुसार, इस बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए बिजली उत्पादन क्षमता के साथ-साथ ट्रांसमिशन नेटवर्क और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर विस्तार किया गया है।

    वर्ष 2013-14 में भारत की अधिकतम बिजली मांग 135.9 गीगावाट थी। यह मांग 21 मई 2026 को बढ़कर 270.8 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। सरकार के मुताबिक, बिजली मांग में यह वृद्धि देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, शहरीकरण, उद्योगों के विस्तार और घरों में बिजली के लगातार बढ़ते उपयोग से जुड़ी है।

    बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए देश की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मार्च 2014 में भारत की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 249 गीगावाट थी। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 552 गीगावाट हो गई। इस दौरान जोड़ी गई क्षमता ने मौजूदा बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य की मांग के लिए बिजली व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है।

    उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली के पारेषण ढांचे का भी विस्तार किया गया। अप्रैल 2014 में देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क की लंबाई 2,91,336 सर्किट किलोमीटर थी। जुलाई 2026 तक यह बढ़कर 5,10,594 सर्किट किलोमीटर हो गई। नेटवर्क के विस्तार से राष्ट्रीय ग्रिड को अधिक एकीकृत बनाने और अलग-अलग क्षेत्रों के बीच बिजली के प्रवाह को सुगम करने में मदद मिली है। इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ाने में भी योगदान मिला है।

    भारत ने पारंपरिक बिजली ढांचे के विस्तार के साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2026 रिपोर्ट के अनुसार, स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

    31 मार्च 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 283.46 गीगावाट थी। इसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता शामिल थी। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता जोड़ी। यह अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक इजाफा बताया गया है और पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है।

    ऊर्जा क्षेत्र में भारत ने जलवायु लक्ष्यों के संदर्भ में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जून 2025 में देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। इस तरह भारत ने पेरिस समझौते के तहत वर्ष 2030 के लिए निर्धारित इस लक्ष्य को तय समय सीमा से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया।

  • पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से बाजार खोलने, नियामकीय प्रक्रियाएं सरल करने और निर्बाध व्यापार को बढ़ावा देने की अपील की

    पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से बाजार खोलने, नियामकीय प्रक्रियाएं सरल करने और निर्बाध व्यापार को बढ़ावा देने की अपील की

    नई दिल्ली ।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को और मजबूत करने के लिए सदस्य देशों से अपने बाजार अधिक खोलने की अपील की है। उन्होंने नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने और व्यापारिक खेपों की तेज मंजूरी की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। गोयल ने यह बात शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही।

    केंद्रीय मंत्री ने खास तौर पर सेवा क्षेत्र के बाजारों को अधिक खोलने की जरूरत बताई। उन्होंने ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों से एक-दूसरे के लिए सेवा बाजार खोलने का आह्वान किया। उनके अनुसार, सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को केवल मौजूदा स्तर तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यापार और नवाचार के क्षेत्र में और आगे बढ़ाने की जरूरत है।

    गोयल ने संयुक्त नवाचार को नया मानदंड बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने ब्रिक्स देशों से एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने की अपील की। उनका जोर ऐसे आर्थिक सहयोग पर रहा, जिससे सदस्य देशों के बीच व्यापारिक अवसर बढ़ सकें और आपसी आर्थिक एकीकरण को मजबूती मिल सके।

    केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स देशों के कृषि-तकनीक यानी एग्री-टेक स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मिलकर काम करने से किसानों के लिए समाधान विकसित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे लोगों की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों को भी समर्थन मिल सकता है।

    वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भी ब्रिक्स देशों की आर्थिक ताकत को ठोस कारोबारी परिणामों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को व्यावहारिक कारोबारी उपलब्धियों में बदलना महत्वपूर्ण है।

    जितिन प्रसाद के अनुसार, प्राथमिकताओं में बड़े पैमाने पर प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, सदस्य देशों के बीच संतुलित व्यापार सुनिश्चित करना और सेवा क्षेत्र में साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना शामिल है।

    भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जा रही है। भारत की 2026 की अध्यक्षता का मार्गदर्शन “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” थीम से हो रहा है। इस थीम के तहत मौजूदा उपलब्धियों और संस्थागत प्रभावशीलता को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    भारत की अध्यक्षता में विकास, स्थिरता और नवाचार को एजेंडे के केंद्र में रखा गया है। साथ ही, ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को भी प्रमुखता दी जा रही है। भारत ब्रिक्स को एक रचनात्मक और समाधान-केंद्रित मंच के रूप में और मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

    वर्तमान में ब्रिक्स में 11 देश शामिल हैं। इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ये देश सामूहिक रूप से दुनिया की 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  • सोने और चांदी में गिरावट, डॉलर की मजबूती के बीच अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर निवेशकों की नजर, जानें बाजार का हाल

    सोने और चांदी में गिरावट, डॉलर की मजबूती के बीच अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर निवेशकों की नजर, जानें बाजार का हाल

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। दोनों कीमती धातुओं में करीब 1.10 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। घरेलू बाजार में कीमतों में आई इस गिरावट के बीच निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर बनी हुई है, जो आने वाले समय में कीमती धातुओं की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 की डिलीवरी वाला सोने का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,52,341 रुपये प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,571 रुपये या 1.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,50,770 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। हालांकि, शुरुआती कारोबार में इसमें कुछ सुधार दिखाई दिया।

    सुबह 9:48 बजे सोना 867 रुपये यानी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,51,474 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोने ने 1,50,695 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर और 1,51,483 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऊपरी स्तर छुआ।

    चांदी की कीमतों में भी शुक्रवार को दबाव देखा गया। एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला चांदी का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,34,099 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2,530 रुपये यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,31,569 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला।

    कारोबार के दौरान चांदी ने 2,30,270 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम स्तर और 2,32,096 रुपये प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर दर्ज किया। इस तरह घरेलू वायदा बाजार में सोने के साथ चांदी पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई। कॉमेक्स पर सोने की कीमत 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,350 डॉलर प्रति औंस पर थी। वहीं, चांदी 1.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63.63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

    जानकारों के मुताबिक, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच डॉलर की मजबूती सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव डाल रही है। दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स एक सप्ताह के उच्चतम स्तर 99.12 पर पहुंच गया है।

    बाजार में अब अमेरिका के महंगाई आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है। ये आंकड़े देर शाम जारी होने हैं और इनके बाद सोने तथा चांदी की कीमतों की दिशा को लेकर बाजार की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    महंगाई के आंकड़ों को लेकर निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है। ऐसे में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में कीमती धातुओं की कीमतों पर आने वाले आंकड़ों और डॉलर की चाल का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • 11 सितंबर को शेयर बाजार में फिर मचेगा घमासान! कच्चे तेल की तेजी के बीच Sensex-Nifty पर क्या रहेगा दबाव

    11 सितंबर को शेयर बाजार में फिर मचेगा घमासान! कच्चे तेल की तेजी के बीच Sensex-Nifty पर क्या रहेगा दबाव


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 11 सितंबर का कारोबारी सत्र काफी अहम रहने वाला है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। 10 सितंबर को कारोबार के दौरान बाजार में काफी हलचल रही और दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ 74902.59 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी में करीब 0.2 फीसदी की तेजी दर्ज हुई। हालांकि बाजार की यह मामूली रिकवरी निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं करती है।

    बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश के आयात बिल महंगाई रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि शुक्रवार के कारोबार में तेल की कीमतों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

    विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक इस कमजोरी के बीच बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो बाजार में उतार चढ़ाव और बढ़ सकता है।

    ग्लोबल मार्केट के संकेत भी शुक्रवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अमेरिकी बाजारों में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर है। अमेरिका में महंगाई से जुड़े आंकड़े फेडरल रिजर्व की अगली नीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।

    घरेलू बाजार में निवेशकों को खासतौर पर बैंकिंग आईटी ऑटो एफएमसीजी और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर नजर रखनी चाहिए। कच्चे तेल की तेजी से तेल आयात पर निर्भर कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है जबकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ शेयरों को इसका अलग असर मिल सकता है। दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण ब्याज दरों और उपभोक्ता मांग से जुड़े क्षेत्रों पर भी बाजार की नजर रह सकती है।

    तकनीकी स्तर पर भी शुक्रवार का कारोबार महत्वपूर्ण होगा। हाल के सत्रों में निफ्टी में कमजोरी देखी गई है और बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी हो सकता है।

    कुल मिलाकर 11 सितंबर को शेयर बाजार की चाल कई बड़े संकेतों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें मध्य पूर्व का तनाव विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अमेरिकी बाजार और रुपये की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में शुक्रवार को बाजार में तेज उतार चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों को किसी भी शेयर में फैसला लेने से पहले कंपनी की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। यह खबर निवेश की सलाह नहीं है।