Category: Economy

  • डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी…. भारत-चीन-रूस ने बनाया नया पेमेंट प्लान!

    डॉलर पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी…. भारत-चीन-रूस ने बनाया नया पेमेंट प्लान!


    नई दिल्ली।
    भारत (India) इस सप्ताह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) की मेजबानी कर रहा है। नई दिल्ली में शनिवार से शुरू हो रहे इस सम्मेलन में 11 देशों के शीर्ष नेता जुटेंगे। इस बीच अब ब्रिक्स देशों (BRICS Nations) की डॉलर (Dollar) पर निर्भरता खत्म करने की तैयारी वाली योजना पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। दरअसल भारत, चीन और रूस की अगुवाई वाला ब्रिक्स कई सालों से डॉलर का विकल्प तलाशने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में यह समूह अमेरिका से हमेशा खटकता रहा है। अब आगामी शिखर सम्मेलन से पहले भारत ने क्रॉस बॉर्डर भुगतान को आसान बनाने के लिए एक अहम प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इससे अमेरिका की बौखलाहट और बढ़ सकती है।

    दरअसल BRICS बीते कुछ समय से एक ऐसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रहा है जिससे भारत, चीन और रूस जैसे देशों की डिजिटल करेंसियों को इंटीग्रेट किया जा सके। अब ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच केंद्रीय बैंकों द्वारा जारी डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की वकालत करेगा।

    हालांकि भारत किसी ऐसे यूनिफाइड पेमेंट नेटवर्क का समर्थन नहीं कर रहा है जिसे अमेरिकी डॉलर या SWIFT के विकल्प के रूप में देखा जाए। इसकी वजह यह है कि भारत नहीं चाहता कि ब्रिक्स समूह को अमेरिका या पश्चिमी देशों के खिलाफ खड़े ब्लॉक के रूप में देखा जाए। यही कारण है कि भारत एक साझा ‘ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम’ बनाने के बजाय द्विपक्षीय डिजिटल करेंसी कनेक्टिविटी पर जोर दे रहा है।

    डिजिटल और स्थानीय करेंसी पर जोर
    रिपोर्ट के मुताबिक भारत का प्रस्ताव है कि ब्रिक्स देश अपनी-अपनी सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ें। इससे मध्यस्थ बैंकों पर निर्भरता कम होगी और लेनदेन की लागत में भारी गिरावट आएगी। आसान भाषा ने कहें तो भारत किसी तीसरे देश की करेंसी यानी डॉलर का उपयोग करने के बजाय सदस्य देशों की अपनी करेंसी में व्यापार करने की बात पर जोर दे रहा है।


    क्या है भारत का प्लान?

    जानकारी के मुताबिक इस सिस्टम में भारत के ई-रुपया, चीन की डिजिटल युआन और रूस की डिजिटल रूबल जैसी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को एक साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसमें हर देश अपनी करेंसी पर पूरा कंट्रोल बनाए रखेगा। बदलाव सिर्फ इतना होगा कि इन करेंसी के जरिए आपसी लेनदेन आसान हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए ब्रिक्स देश आपस में होने वाले व्यापार का भुगतान सीधे अपनी डिजिटल करेंसी में कर सकेंगे। इसके लिए ना तो डॉलर की जरूरत होगी और न ही स्विफ्ट जैसे डॉलर आधारित सिस्टम से होकर भुगतान करना पड़ेगा।

    भारत इस पूरे मॉडल को आकार देने में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि करेंसी को मिलाने की बजाय सिस्टम को आपस में जोड़ना बेहतर रास्ता है। इसका आधार भारत का खुद का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूपीआई है। UPI ने देश के अंदर डिजिटल पेमेंट को काफी आसान बनाया है और इसी मॉडल को अन्य देशों के साथ भी जोड़ा जा सकता है।


    काम कैसे करेगा ब्रिक्स का पेमेंट सिस्टम?

    ब्रिक्स डिजिटल पेमेंट सेटलमेंट साइकिल पर काम करेगा। इसका मतलब है कि हर लेनदेन का भुगतान तुरंत नहीं किया जाएगा। एक तय अवधि में आयात और निर्यात का हिसाब जोड़ा जाएगा और आखिर में सिर्फ अंतर की रकम का भुगतान होगा। उदाहरण के लिए, अगर भारत एक महीने में चीन से 500 अरब रुपये का सामान खरीदता है और चीन भारत से 450 अरब रुपये का सामान लेता है, तो भारत को सिर्फ 50 अरब रुपये का ही भुगतान करना होगा। इससे ट्रांजेक्शन कॉस्ट भी कम होंगी।

  • चांदी में ₹1,487 की बड़ी गिरावट, सोना चढ़ा, जानें 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का भाव

    चांदी में ₹1,487 की बड़ी गिरावट, सोना चढ़ा, जानें 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का भाव


    नई दिल्ली। सोने-चांदी की कीमतों में गुरुवार को वायदा बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार खुलते ही चांदी की कीमत करीब 1,500 रुपये प्रति किलो टूट गई। दूसरी ओर सोने में तेजी रही और 24 कैरेट गोल्ड का भाव 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।

    MCX पर ₹1,487 सस्ती हुई चांदी
    4 दिसंबर एक्सपायरी वाली चांदी बुधवार को 2,44,213 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। गुरुवार को कारोबार शुरू होते ही भाव गिरकर 2,42,726 रुपये प्रति किलो पर आ गया। इस तरह शुरुआती कारोबार में चांदी 1,487 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।

    ऑल टाइम हाई से ₹1.77 लाख नीचे भाव
    चांदी में ताजा गिरावट के बाद MCX पर इसका भाव जनवरी 2026 में बने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ गया है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार कर गई थी और बढ़ते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो के ऐतिहासिक हाई पर पहुंची थी। इसके बाद चांदी में तेज गिरावट आई। मौजूदा भाव से तुलना करें तो वायदा बाजार में चांदी अपने ऑल टाइम हाई से करीब 1,77,322 रुपये प्रति किलो नीचे कारोबार कर रही है।

    सोना करीब ₹200 महंगा
    चांदी में गिरावट के बीच सोने के भाव में तेजी देखने को मिली। MCX पर 5 अक्टूबर एक्सपायरी वाला सोना करीब 200 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़कर 1,53,963 रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, कारोबार की शुरुआत में सोने में भी कुछ गिरावट देखने को मिली थी।

    अगस्त के आखिरी भाव से सोना करीब ₹500 ऊपर
    सितंबर में अब तक सोने की चाल पर नजर डालें तो 31 अगस्त को MCX पर वायदा कारोबार खत्म होने के समय 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,54,460 रुपये पर बंद हुआ था। गुरुवार के बताए गए भाव से तुलना करने पर सोना करीब 500 रुपये महंगा है।

    घरेलू बाजार में सोना-चांदी कितने पर?
    घरेलू बाजार में इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट पर अपडेट रेट के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,53,486 रुपये और 1 किलो चांदी 2,35,249 रुपये पर है।

    हालांकि, ज्वेलरी खरीदते समय ग्राहकों को सोने-चांदी के बेस रेट के अलावा लागू GST और मेकिंग चार्ज भी देना होता है। इसलिए दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत इससे अधिक हो सकती है।

    निवेश संबंधी सावधानी: सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ETF में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय/मार्केट सलाहकार से सलाह जरूर लें।

  • बीआईएस की चेन्नई में बड़ी कार्रवाई, 803.99 ग्राम गैर-हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण जब्त, बिक्री के लिए रखे थे प्रदर्शित

    बीआईएस की चेन्नई में बड़ी कार्रवाई, 803.99 ग्राम गैर-हॉलमार्क वाले सोने के आभूषण जब्त, बिक्री के लिए रखे थे प्रदर्शित


    नई दिल्ली । 
    भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस ने गैर-हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों की बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करते हुए चेन्नई में 803.99 ग्राम सोने के आभूषण जब्त किए हैं। यह कार्रवाई चेन्नई के अंबत्तूर इलाके में स्थित एक आभूषण दुकान पर की गई। मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी जानकारी में कार्रवाई का विवरण दिया गया।

    बीआईएस के चेन्नई शाखा कार्यालय ने 1 सितंबर 2026 को दुकान पर प्रवर्तन तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की थी। इस दौरान बिक्री के लिए प्रदर्शित किए गए ऐसे सोने के आभूषण मिले, जिन पर आवश्यक हॉलमार्किंग नहीं थी। इसके बाद इन आभूषणों को भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 की धारा 28 के तहत जब्त किया गया।

    जब्त किए गए आभूषणों में सबसे अधिक संख्या मंगलसूत्र की थी। कार्रवाई में 671.50 ग्राम वजन के 175 मंगलसूत्र जब्त किए गए। इसके अलावा बच्चों की 25.02 ग्राम वजन वाली 12 चूड़ियां भी बरामद की गईं।

    बीआईएस की कार्रवाई में 86.14 ग्राम वजन के 40 झुमके और 21.33 ग्राम वजन के 10 पेंडेंट भी शामिल हैं। इस तरह अलग-अलग डिजाइन और श्रेणियों के इन आभूषणों का कुल वजन 803.99 ग्राम बताया गया है।

    प्रवर्तन टीम ने जांच के दौरान पाया कि ये आभूषण आवश्यक हॉलमार्किंग के बिना ग्राहकों को बिक्री के लिए पेश किए जा रहे थे। बीआईएस ने सभी संबंधित वस्तुओं को विस्तृत जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए अपने कब्जे में ले लिया।

    यह पूरी कार्रवाई स्थानीय पुलिस की सहायता से की गई। बीआईएस चेन्नई शाखा कार्यालय के अधिकारियों और सहायक कर्मचारियों ने प्रवर्तन तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया को अंजाम दिया। मामले में भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

    बीआईएस चेन्नई शाखा कार्यालय के प्रमुख एस. डी. दयानंद ने कहा कि संगठन बाजार की नियमित निगरानी के साथ प्रवर्तन गतिविधियां भी करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनिवार्य बीआईएस प्रमाणन और हॉलमार्किंग से जुड़े नियमों के दायरे में आने वाले उत्पाद निर्धारित मानकों का पालन करें।

    उन्होंने कहा कि घटिया उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए ऐसी कार्रवाई महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही बीआईएस मानक चिह्न और हॉलमार्क के दुरुपयोग को रोकना तथा प्रमाणन और हॉलमार्किंग व्यवस्था में उपभोक्ताओं का भरोसा बनाए रखना भी इन कार्रवाइयों का उद्देश्य है।

    बीआईएस के अनुसार, हॉलमार्किंग कीमती धातु से बनी वस्तुओं की शुद्धता या सुंदरता का आधिकारिक संकेत देती है। मौजूदा हॉलमार्किंग व्यवस्था में हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों पर बीआईएस लोगो, शुद्धता और छह अंकों की हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या यानी HUID दर्ज होती है।

    उपभोक्ता हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों की HUID संख्या की पुष्टि बीआईएस केयर ऐप के जरिए भी कर सकते हैं। चेन्नई में हुई इस कार्रवाई में जब्त आभूषणों की आगे विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाएगी।

  • सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    सेंसेक्स 74,902 और निफ्टी 23,477 पर बंद, पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने गिरावट का सिलसिला तोड़ा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला गुरुवार को थम गया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजार बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 138.36 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,902.59 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 46.30 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की तेजी रही और यह 23,477.80 के स्तर पर बंद हुआ।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,764.23 से 21.69 अंक नीचे 74,742.54 पर खुला। इसके बाद दिन में यह 146.73 अंक यानी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 74,910.96 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 165.75 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,598.47 के निचले स्तर तक भी गया।

    निफ्टी 50 ने पिछले बंद स्तर 23,431.50 की तुलना में 15 अंक की बढ़त के साथ 23,446.60 पर कारोबार की शुरुआत की। दिन के दौरान इंडेक्स 63.45 अंक यानी 0.27 प्रतिशत चढ़कर 23,494.95 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा। वहीं एक समय यह 51.40 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,380.10 के इंट्रा-डे निचले स्तर पर भी पहुंचा।

    व्यापक बाजार में हालांकि दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 0.38 प्रतिशत और 0.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। यानी प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी मीडिया, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके विपरीत निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा, निफ्टी ऑटो, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी एफएमसीजी में दबाव देखा गया।

    निफ्टी 50 में एचसीएल टेक, हिंडाल्को और टाटा स्टील सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर एचडीएफसी लाइफ, पावरग्रिड, ओएनजीसी, भारतीय एयरटेल और टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई।

    गुरुवार के कारोबार के दौरान बाजार के लिए पश्चिम एशिया का तनाव भी महत्वपूर्ण कारक बना रहा। मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच कच्चे तेल की कीमतें 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं। तेल की कीमतों में यह मजबूती भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का कच्चा तेल आयात करता है।

    ईरान की ओर से कहा गया कि छह महीने से चल रहे संघर्ष के दौरान जहाजों पर हुए सबसे बड़े हमलों में अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को डुबो दिया। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला करने की बात कही। इस घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर असर बना रहा।

    ऊंची कच्चे तेल की कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसके साथ ही इससे मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ने और आर्थिक विकास तथा कंपनियों की लाभप्रदता पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। गुरुवार के सत्र में इन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारतीय बाजार ने तीन सत्रों की लगातार गिरावट के बाद कारोबार बढ़त के साथ समाप्त किया।

  • एनएसई आईपीओ से पहले इक्विटी ऑप्शंस में मार्केट शेयर घटा, सख्त डेरिवेटिव्स नियमों से कारोबार और मुनाफे पर बढ़ा दबाव

    एनएसई आईपीओ से पहले इक्विटी ऑप्शंस में मार्केट शेयर घटा, सख्त डेरिवेटिव्स नियमों से कारोबार और मुनाफे पर बढ़ा दबाव

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का आईपीओ ऐसे समय में आने जा रहा है, जब एक्सचेंज के सामने इक्विटी ऑप्शंस कारोबार में घटती बाजार हिस्सेदारी, डेरिवेटिव्स से जुड़े सख्त नियम और सीमित विकास के अवसर जैसी चुनौतियां हैं। इन परिस्थितियों का असर एक्सचेंज के कारोबार और मुनाफे पर पड़ सकता है।

    एनएसई की ओर से रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में दी गई जानकारी के अनुसार, इक्विटी ऑप्शंस के प्रीमियम वैल्यू सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में 96.9 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2024-25 में यह घटकर 87.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2025-26 में 74.71 प्रतिशत रह गई।

    इस तरह तीन वित्त वर्षों में इक्विटी ऑप्शंस के प्रीमियम वैल्यू सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 22.2 प्रतिशत कम हुई है। हालांकि, अन्य सेगमेंट में एक्सचेंज की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

    कैश इक्विटी सेगमेंट इसका प्रमुख उदाहरण है। वित्त वर्ष 2023-24 में इस सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 92.7 प्रतिशत थी। अगले वित्त वर्ष में यह बढ़कर 93.6 प्रतिशत हुई और वित्त वर्ष 2025-26 में 92.99 प्रतिशत रही।

    कैश सेगमेंट में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी एनएसई की मजबूत स्थिति को दर्शाती है। हालांकि, इतनी ऊंची हिस्सेदारी होने के कारण इस क्षेत्र में आगे बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की गुंजाइश सीमित है। इसलिए ऑप्शंस और डेरिवेटिव्स कारोबार में होने वाले बदलाव एनएसई के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

    डेरिवेटिव्स कारोबार पर सख्त होते नियम भी एक्सचेंज के लिए चुनौती बढ़ा रहे हैं। निवेशकों को इस सेगमेंट में हुए बड़े नुकसान के बाद पिछले कुछ वर्षों में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स यानी एसटीटी बढ़ाना और मार्जिन से जुड़े कदम शामिल हैं।

    इसके साथ ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी की ओर से भी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग से जुड़े जोखिमों को लेकर निवेशकों में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। इन उपायों का उद्देश्य डेरिवेटिव्स कारोबार में निवेशकों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है।

    खुदरा निवेशकों की संख्या में आई गिरावट भी इसी चुनौती को सामने रखती है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, एफएंडओ सेगमेंट में विशिष्ट खुदरा निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 20 प्रतिशत घटकर 78.6 लाख रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में यह संख्या 98.1 लाख थी।

    खुदरा निवेशकों की संख्या घटने से एफएंडओ बाजार की गतिविधियों और वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है। इसका महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि एनएसई ने अपने आरएचपी में खुद इस जोखिम का उल्लेख किया है।

    एनएसई के अनुसार, डेरिवेटिव्स, खासकर एफएंडओ बाजार में वॉल्यूम में कमी आने से उसके कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। वॉल्यूम घटने का असर आगे उसके मुनाफे पर भी पड़ सकता है।

    इस तरह एनएसई के सामने चुनौती का मुख्य कारण इक्विटी ऑप्शंस में घटती हिस्सेदारी और डेरिवेटिव्स कारोबार को नियंत्रित करने वाले सख्त होते नियम हैं। इसका संभावित असर एफएंडओ गतिविधियों और वॉल्यूम में कमी के रूप में सामने आ सकता है, जिससे कारोबार और मुनाफे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

    आईपीओ से पहले एनएसई की कैश इक्विटी में मजबूत पकड़ बनी हुई है, लेकिन इक्विटी ऑप्शंस में बाजार हिस्सेदारी की गिरावट और डेरिवेटिव्स कारोबार से जुड़े नियामकीय बदलाव एक्सचेंज के लिए महत्वपूर्ण कारोबारी चुनौतियां बने हुए हैं।

  • भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 में नई दिल्ली का फोकस, समावेशी वैश्विक व्यवस्था और ग्लोबल साउथ की आवाज पर जोर

    नई दिल्ली ।कभी चार उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले आर्थिक शब्द के रूप में सामने आया ब्रिक्स अब चार महाद्वीपों तक फैले प्रभावशाली भू-राजनीतिक समूह का रूप ले चुका है। नए सदस्य देशों के जुड़ने के साथ इसकी आर्थिक और रणनीतिक ताकत में लगातार विस्तार हुआ है। वर्ष 2026 में संगठन की अध्यक्षता भारत के पास है और नई दिल्ली इसे अधिक समावेशी, प्रभावी तथा समाधान-केंद्रित मंच बनाने की दिशा में काम कर रही है।

    ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों के समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बन गया है। सदस्य देश यहां वैश्विक शासन, विकास, व्यापार और आर्थिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करते हैं। लगातार संवाद और सहयोग के जरिए संगठन ने वैश्विक दक्षिण की आवाज को अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंचाने में भी भूमिका निभाई है।

    भारत की 2026 की अध्यक्षता “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर केंद्रित है। इसी थीम के तहत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जाएगी। भारत का लक्ष्य संगठन की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना, विकास और नवाचार को प्राथमिकता देना तथा वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में प्रमुख स्थान दिलाना है।

    वर्तमान में ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित 11 सदस्य देश हैं। ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे संगठन की आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहुंच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    ब्रिक्स के विस्तार का बड़ा चरण जनवरी 2024 में आया, जब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया 11वां पूर्ण सदस्य बना। इन देशों के शामिल होने से संगठन का प्रभाव एशिया, अफ्रीका, मध्य पूर्व और लैटिन अमेरिका तक और व्यापक हुआ।

    विस्तार के साथ ब्रिक्स में पार्टनर कंट्री श्रेणी भी बनाई गई। वर्ष 2025 के दौरान बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम इस ढांचे से जुड़े। इससे संगठन की पहुंच और प्रभाव क्षेत्र में और विस्तार हुआ।

    समय के साथ ब्रिक्स का एजेंडा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कृषि, श्रम एवं रोजगार, दूरसंचार, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां भी इसके प्रमुख विषयों में शामिल हैं।

    ब्रिक्स विश्व व्यापार संगठन और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व तथा संतुलित भागीदारी की वकालत करता है। इसके प्रयासों का उद्देश्य वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना तथा बदलती वैश्विक चुनौतियों के प्रति उसे अधिक उत्तरदायी बनाना है।

  • बीएसई में तकनीकी गड़बड़ी से एफएंडओ कारोबार प्रभावित, जेरोधा यूजर्स ने कीमतें अपडेट और ऑर्डर में दिक्कत की शिकायत

    बीएसई में तकनीकी गड़बड़ी से एफएंडओ कारोबार प्रभावित, जेरोधा यूजर्स ने कीमतें अपडेट और ऑर्डर में दिक्कत की शिकायत


    नई दिल्ली ।
    गुरुवार को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण कुछ समय के लिए ट्रेडिंग गतिविधियां प्रभावित हुईं। एक्सचेंज के अनुसार, सुबह 9:42 बजे कैश सेगमेंट के एक हिस्से और उससे जुड़े शेयरों में तकनीकी समस्या सामने आई। हालांकि, अन्य सभी सेगमेंट और पार्टिशन सामान्य रूप से काम करते रहे। तकनीकी टीम ने समस्या का समाधान किया और सुबह 10:08 बजे से सामान्य परिचालन दोबारा शुरू कर दिया गया।

    तकनीकी समस्या के सामने आने के बाद बाजार में सक्रिय कई ट्रेडर्स के बीच चिंता देखी गई। खासकर डेरिवेटिव कारोबार करने वाले यूजर्स ने कीमतों के अपडेट नहीं होने और ऑर्डर से जुड़ी दिक्कतों की शिकायत की। कुछ ट्रेडर्स के लिए बाजार में उपलब्ध कीमतों में बदलाव समय पर दिखाई नहीं देने से ट्रेडिंग निर्णय लेना मुश्किल हुआ।

    इस दौरान जेरोधा के कई यूजर्स ने भी बीएसई पर एफएंडओ कॉन्ट्रैक्ट्स की कीमतें अपडेट नहीं होने की शिकायत की। इसके बाद जेरोधा ने अपने ग्राहकों को बताया कि बीएसई पर कुछ फ्यूचर्स एवं ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों के अपडेट और ऑर्डर प्लेसमेंट से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं। कंपनी ने कहा कि समस्या को जल्द दूर करने के लिए वह एक्सचेंज के साथ लगातार संपर्क में है।

    बाद में जेरोधा की ओर से जानकारी दी गई कि समस्या का समाधान कर लिया गया है और दोपहर 1:03 बजे तक स्थिति सामान्य हो गई। हालांकि, इसके बावजूद कुछ ट्रेडर्स ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि तकनीकी परेशानी बीच-बीच में दोबारा सामने आती रही।

    कई यूजर्स ने शिकायत की कि कीमतें लंबे समय तक अपडेट नहीं हो रही थीं। कुछ ट्रेडर्स ने यह भी दावा किया कि उनके ऑर्डर समय पर न तो निष्पादित हो रहे थे और न ही रद्द हो पा रहे थे। कुछ निवेशकों ने सेंसेक्स कॉल ऑप्शंस की कीमतें स्थिर रहने और नए ऑर्डर प्लेस नहीं कर पाने की भी शिकायत की।

    एक निवेशक ने कहा कि करीब 15 मिनट तक कीमतें अपडेट नहीं हो रही थीं और ऐसी स्थिति में संभावित नुकसान की जिम्मेदारी को लेकर चिंता है। एक अन्य यूजर ने दावा किया कि समस्या दोबारा सामने आने पर उसका ऑर्डर रद्द नहीं हो पाया। इस तरह कीमतों के अपडेट और ऑर्डर प्रबंधन से जुड़ी तकनीकी परेशानियों ने एफएंडओ ट्रेडर्स की चिंता बढ़ाई।

    यह तकनीकी समस्या ऐसे समय सामने आई, जब सेंसेक्स का साप्ताहिक एफएंडओ एक्सपायरी सेशन था। एक्सपायरी वाले दिन बाजार में आमतौर पर ट्रेडिंग गतिविधियां और उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसे में कीमतों के अपडेट या ऑर्डर निष्पादन में तकनीकी बाधा ट्रेडर्स के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    एफएंडओ एक्सपायरी के दौरान बाजार में छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव भी ट्रेडर्स की पोजीशन और संभावित मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए इस तरह के सत्र में ट्रेडिंग सिस्टम और कीमतों की जानकारी का समय पर उपलब्ध होना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    तकनीकी व्यवधान के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार का रुख मिला-जुला रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की कमजोरी के साथ खुला, जबकि निफ्टी मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया।

    बीएसई और जेरोधा की ओर से तकनीकी समस्या के समाधान की जानकारी दिए जाने के बाद परिचालन सामान्य हुआ। हालांकि, इस घटना से ट्रेडिंग सिस्टम की तकनीकी स्थिरता और भरोसेमंद इंफ्रास्ट्रक्चर की अहमियत फिर सामने आई है। खासकर ऐसे समय में जब खुदरा निवेशकों की बाजार में भागीदारी बढ़ रही है और एफएंडओ कारोबार में गतिविधियां लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।

  • अगस्त में म्यूचुअल फंड SIP निवेश रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंचा, गोल्ड ETF में भी 67 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज

    अगस्त में म्यूचुअल फंड SIP निवेश रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंचा, गोल्ड ETF में भी 67 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज

    नई दिल्ली ।अगस्त 2026 में म्यूचुअल फंड में निवेश का रुझान मजबूत बना रहा। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया यानी एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए निवेश बढ़कर रिकॉर्ड 32,297 करोड़ रुपए पहुंच गया। जुलाई में यह आंकड़ा 31,961 करोड़ रुपए था। अगस्त का एसआईपी निवेश अब तक का सबसे ऊंचा स्तर रहा।

    अगस्त का आंकड़ा मार्च में दर्ज 32,087 करोड़ रुपए और पहले दर्ज किए गए 31,781 करोड़ रुपए के उच्च स्तर से भी अधिक रहा। एसआईपी खातों में योगदान भी सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचकर 10.2 करोड़ हो गया, जबकि इससे पहले यह संख्या 9.9 करोड़ थी। अगस्त में नए एसआईपी खातों की संख्या 66.39 लाख रही, जो पिछले आंकड़े 61.44 लाख से अधिक है। वहीं बंद किए गए खातों की संख्या 53.82 लाख रही, जबकि पहले यह 50.30 लाख थी। इसके साथ कुल सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या 10.62 करोड़ हो गई।

    अगस्त में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ में भी निवेश में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश बढ़कर 2,596.70 करोड़ रुपए हो गया। जुलाई में यह 1,559 करोड़ रुपए था। इस तरह एक महीने में गोल्ड ईटीएफ निवेश में करीब 67 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    गोल्ड ईटीएफ में यह लगातार तीसरा महीना रहा, जब सकारात्मक निवेश प्रवाह दर्ज किया गया। सोने की कीमतों में बढ़ोतरी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ते रुझान के बीच निवेशकों की दिलचस्पी इस श्रेणी में बनी रही। अगस्त के दौरान मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोने की कीमत करीब 7.7 प्रतिशत बढ़ी।

    इसी अवधि में चांदी आधारित निवेश उत्पादों में भी निवेशकों की रुचि दिखाई दी। अगस्त में सिल्वर ईटीएफ में 1,270.63 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज हुआ। औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों के मजबूत रहने के कारण चांदी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनी रही।

    अगस्त में सक्रिय रूप से प्रबंधित इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में भी निवेश बढ़ा। इन योजनाओं में 29,328.62 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि जुलाई में यह 24,697.39 करोड़ रुपए था। इस तरह निवेश में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी में लगातार निवेश से लंबी अवधि की निवेश रणनीति के प्रति भरोसा दिखाई दिया।

    इक्विटी योजनाओं में स्मॉलकैप फंड सबसे अधिक पसंद किए गए। इनमें 7,973 करोड़ रुपए का निवेश आया। इसके बाद मिडकैप फंड में 6,989 करोड़ रुपए, फ्लेक्सीकैप फंड में 5,059 करोड़ रुपए और लार्ज एंड मिडकैप फंड में 3,873 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। आंकड़ों से पता चलता है कि निवेशकों की रुचि अलग-अलग इक्विटी श्रेणियों में बनी हुई है।

    दूसरी ओर, अगस्त में डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से 8,127.32 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी हुई। इसके विपरीत हाइब्रिड योजनाओं में 10,045 करोड़ रुपए का निवेश आया। हाइब्रिड श्रेणी में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड में 3,671 करोड़ रुपए और आर्बिट्रेज फंड में 3,789 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज हुआ।

    लिक्विड फंड्स में 19,934 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जबकि ओवरनाइट फंड्स से 30,654 करोड़ रुपए की निकासी हुई। अगस्त के आंकड़ों में एसआईपी, इक्विटी और गोल्ड ईटीएफ में मजबूत निवेश के साथ निवेशकों की अलग-अलग परिसंपत्ति श्रेणियों में बदलती प्राथमिकताएं भी दिखाई दीं।

  • इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अगस्त में 29,329 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो, एयूएम बढ़कर 87.07 लाख करोड़ रुपये हुआ

    इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अगस्त में 29,329 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो, एयूएम बढ़कर 87.07 लाख करोड़ रुपये हुआ

    मुंबई, 10 सितंबर। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में अगस्त में नेट इनफ्लो मासिक आधार पर 4,631.23 करोड़ रुपये बढ़कर 29,328.62 करोड़ रुपये हो गया है, जो कि जुलाई में 24,697.39 करोड़ रुपये था। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से गुरुवार को जारी किए गए डेटा में दी गई।

    अगस्त में सबसे अधिक 7,973.33 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो स्मॉलकैप फंड्स में दर्ज किया है। इस कैटेगरी में जुलाई में 7,767.50 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया था।

    वहीं, मिडकैप फंड्स में 6,989.40 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो आया है, जो कि पहले 6,192.31 करोड़ रुपये था। फ्लेक्सी कैप फंड्स में 5,059.42 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है, जो कि पहले 4,709.08 करोड़ रुपये था।

    इसके अलावा, लार्जकैप फंड्स में नेट इनफ्लो -1,147.36 करोड़ रुपये रहा है। जुलाई में भी इस कैटेगरी में -1,321.69 करोड़ रुपये की निकासी देखी गई थी।

    लार्ज एंड मिडकैप फंड्स में अगस्त में 3,872.79 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 3,425.37 करोड़ रुपये था।

    इसके अलावा, अगस्त में मल्टीकैप फंड्स में 3,732.77 करोड़ रुपये, कॉन्ट्रा फंड्स में 1,328.01 करोड़ रुपये और फोकस्ड फंड्स में 994.74 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है।

    अगस्त में इक्विटी ईटीएफ में 7,237.49 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है।

    अगस्त में म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 87.07 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो जुलाई में 85.75 लाख करोड़ रुपये पर था।

    इस हफ्ते की शुरुआत में, सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के डेटा में बताया गया कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड में नेट एसआईपी इनफ्लो वित्त वर्ष 26 में रिकॉर्ड 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    वित्त वर्ष 26 में कुल 3.5 लाख करोड़ रुपये के एसआईपी निवेश में नेट एसआईपी इनफ्लो का हिस्सा लगभग 56 प्रतिशत था, जो तीन सालों में सबसे उच्चतम स्तर है। वित्त वर्ष 25 में यह हिस्सा 54 प्रतिशत था।

  • शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल

    शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल


    नई दिल्ली । 10 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की नजर एक बार फिर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स तथा निफ्टी लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 9 सितंबर को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74764.23 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 23431.50 पर आ गया।

    बाजार में इस समय सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से बन रहा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई से लेकर कंपनियों की लागत और रुपये की मजबूती तक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

    9 सितंबर के कारोबार में आईटी शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। टेक्नोलॉजी इंडेक्स में करीब 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे। टीसीएस में भी गिरावट दर्ज की गई जबकि एचसीएल टेक और अन्य प्रमुख आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। दूसरी तरफ मेटल और कुछ ऊर्जा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में इस समय एकतरफा तेजी के बजाय सेक्टर के हिसाब से अलग अलग रुझान दिखाई दे रहे हैं।

    10 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर रुपये की चाल पर भी रहेगी। 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के पार चली गई थी। रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का दबाव बाजार के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव जारी रहता है तो विदेशी निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है। 9 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 123 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1350 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक बाजार में कमजोरी को कुछ अवसर के रूप में देख रहे हैं लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण सतर्कता अभी भी जरूरी है।

    निवेशकों के लिए 10 सितंबर का कारोबारी सत्र इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि निफ्टी तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे माहौल में बाजार में अचानक तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कारोबारियों की नजर निफ्टी के 23400 के आसपास के स्तर पर रहेगी और इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर और दबाव बन सकता है। वहीं अगर बाजार इस स्तर से संभलता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने की उम्मीद बन सकती है।

    फिलहाल बाजार की दिशा किसी एक घरेलू खबर से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रम तय कर सकता है। कच्चे तेल की कीमत पश्चिम एशिया का तनाव अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर संकेत रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां 10 सितंबर के कारोबार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। ऐसे समय में छोटे निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेडिंग करने के बजाय अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी होगा। शेयर बाजार में तेजी या गिरावट का अनुमान हमेशा निश्चित नहीं होता इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता को देखना महत्वपूर्ण है।