Category: Economy

  • SC का प्रस्ताव- वाहन का बीमा नहीं तो तेल नहीं…, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की तैयारी

    SC का प्रस्ताव- वाहन का बीमा नहीं तो तेल नहीं…, पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की तैयारी


    नई दिल्ली
    । देश में बिना बीमा (Uninsured) के सड़कों पर फर्राटे भर रहे वाहनों (Vehicles) पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने प्रस्ताव दिया है. इसमें ‘वाहन का बीमा नहीं तो तेल नहीं’ अभियान (‘No vehicle insurance, no fuel’ campaign ) को पायलट प्रोजेक्ट (Pilot project) के रूप में लागू करने का प्रपोजल दिया गया है।

    सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी IRDAI और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वे एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करें जिसके तहत पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से पहले वाहन के वैध इंश्योरेंस की जांच की जा सके और बीमा न होने पर तेल देने से मना किया जा सके।

    सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा और बीमा नियमों को सख्त करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय और IRDAI को पेट्रोल पंपों पर ईंधन, ANPR कैमरे, और नई गाड़ियों के बीमा को लेकर बड़े आदेश दिए हैं.कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय और IRDAI को एक ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है, जिसके तहत पेट्रोल पंपों पर वैध वाहन बीमा न होने पर गाड़ियों को ईंधन यानी पेट्रोल डीजल देने पर रोक लगाई जा सके।

    हाईवे और सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को ‘वाहन VAHAN’ पोर्टल और बीमा डेटाबेस से जोड़ा जाएगा. इससे बिना बीमा वाली गाड़ियों के अपने आप ई-चालान कट सकेंगे.नई गाड़ियों के लिए बीमा अवधि बढ़ाते हुए कोर्ट ने नई प्राइवेट कारों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा अवधि 3 साल से बढ़ाकर 4 साल कर दी।

    जबकि नए दोपहिया वाहनों के लिए इसे 5 साल से बढ़ाकर 6 साल कर दिया गया है.पुलिस के लिए मोबाइल ऐप भी होगा. सड़क पर चेकिंग के लिए ट्रैफिक पुलिस को ऐसे मोबाइल ऐप या हैंडहेल्ड डिवाइस दिए जाएंगे, जिससे वे पलभर में गाड़ी के बीमा की जांच कर सकें।

  • बुधवार का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों और कंपनियों के नतीजों से तय होगी बाजार की दिशा

    बुधवार का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों और कंपनियों के नतीजों से तय होगी बाजार की दिशा


    नई दिल्ली । बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बुधवार का सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के आधार पर तय होगा। पिछले कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और ऐसे में निवेशक हर नई खबर पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी बाजारों का रुख कैसा रहता है और घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेत क्या मिलते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार को सबसे ज्यादा नजर विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की खरीद और बिकवाली पर रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से बाजार में खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं अगर बिकवाली का दबाव बढ़ता है तो बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रदर्शन भी भारतीय शेयर बाजार पर असर डालेगा। अमेरिका और एशियाई बाजारों की चाल निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो इसका असर कई सेक्टरों पर पड़ सकता है जबकि रुपये में मजबूती निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकती है।

    कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बुधवार के कारोबार में अहम भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजों वाली कंपनियों के शेयर दबाव में आ सकते हैं। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर बनी रहेगी क्योंकि इन क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन का सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ता है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए और गुणवत्ता वाले शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में आने वाले उतार चढ़ाव अवसर भी बन सकते हैं लेकिन अल्पकालिक निवेश करने वालों को जोखिम प्रबंधन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। किसी भी खबर के आधार पर भावनात्मक निर्णय लेने के बजाय निवेश से पहले पूरी जानकारी और विश्लेषण करना बेहतर रहेगा।

    बुधवार के कारोबार में बाजार की शुरुआत हल्की तेजी या कमजोरी के साथ हो सकती है लेकिन दिनभर विभिन्न आर्थिक और वैश्विक संकेतों के आधार पर उतार चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे बाजार की हर गतिविधि पर नजर रखें और सोच समझकर निवेश संबंधी निर्णय लें। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आर्थिक आधार और लंबी अवधि की विकास संभावनाओं के चलते भारतीय शेयर बाजार भविष्य में सकारात्मक प्रदर्शन कर सकता है लेकिन फिलहाल सतर्कता के साथ निवेश करना ही सबसे बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

  • UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    नई दिल्ली । देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सरकार डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी है।

    चर्चा के अनुसार बड़े कारोबारियों द्वारा किए जाने वाले उच्च मूल्य के UPI लेनदेन पर सीमित MDR लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन, तकनीकी विकास और सुरक्षा से जुड़ी लागत के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    वर्तमान में बैंक-टू-बैंक UPI भुगतान पर किसी प्रकार का MDR लागू नहीं है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में UPI का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लाखों व्यापारी और करोड़ों उपभोक्ता रोजाना बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल भुगतान का उपयोग कर रहे हैं। इस व्यवस्था ने नकदरहित लेनदेन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    डिजिटल भुगतान से जुड़े संस्थानों का मानना है कि भुगतान नेटवर्क का विस्तार, साइबर सुरक्षा, सर्वर क्षमता और नई तकनीकों के विकास पर लगातार निवेश करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक इस व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए एक संतुलित राजस्व मॉडल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी कारण MDR व्यवस्था में सीमित बदलाव की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

    यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह मुख्य रूप से बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और अधिक मूल्य वाले लेनदेन तक सीमित रह सकता है। आम उपभोक्ताओं से सीधे अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने का कोई अंतिम निर्णय फिलहाल नहीं हुआ है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और साथ ही भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित रहता है तो सामान्य ग्राहकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि कुछ मामलों में व्यापारियों की लागत बढ़ने पर उसका प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा।

    डिजिटल भुगतान ने देश में वित्तीय लेनदेन की तस्वीर बदल दी है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक UPI का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसी वजह से सरकार और संबंधित संस्थाएं ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती हैं, जिससे डिजिटल भुगतान की गति भी बनी रहे और इसका संचालन भी लंबे समय तक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं के लिए कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है और न ही नए नियम प्रभावी हुए हैं। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है तो उसके बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी। तब तक आम लोग पहले की तरह बिना किसी बदलाव के UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।

  • सेबी के नए सीएएस सिस्टम से बढ़ी उलझन, बीएसई और एनएसई पर एक ही शेयर के क्लोजिंग भाव में बड़ा अंतर

    सेबी के नए सीएएस सिस्टम से बढ़ी उलझन, बीएसई और एनएसई पर एक ही शेयर के क्लोजिंग भाव में बड़ा अंतर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बाजार बंद होने के बाद शेयरों के अंतिम भाव को लेकर नई स्थिति सामने आई है। बाजार नियामक द्वारा लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) सिस्टम के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कई प्रमुख कंपनियों के शेयर अलग-अलग क्लोजिंग प्राइस पर बंद हुए। इससे निवेशकों, ट्रेडर्स और बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि एक ही समय पर कारोबार समाप्त होने के बावजूद दोनों एक्सचेंजों पर अंतिम भाव में इतना अंतर क्यों दिखाई दे रहा है।

    मंगलवार के कारोबारी सत्र में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में यह अंतर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। ट्रेंट का शेयर बीएसई पर बढ़त के साथ 3,070 रुपये पर बंद हुआ, जबकि एनएसई पर इसका क्लोजिंग भाव 3,107.70 रुपये दर्ज किया गया। इसी तरह भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के शेयर में भी दोनों एक्सचेंजों पर अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिला। बीएसई पर यह बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई पर हल्की गिरावट दर्ज की गई।

    बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी दोनों एक्सचेंजों के क्लोजिंग प्राइस में उल्लेखनीय अंतर दिखाई दिया। बीएसई पर शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई पर इसमें गिरावट दर्ज की गई। महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, टाइटन, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट सहित कई अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी इसी तरह का अंतर देखने को मिला। इससे यह स्पष्ट हुआ कि नया सिस्टम लागू होने के बाद दोनों एक्सचेंजों की क्लोजिंग प्रक्रिया अलग-अलग परिणाम दे रही है।

    कारोबार की शुरुआत से ही दोनों प्रमुख सूचकांकों की चाल में भी अंतर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में जहां सेंसेक्स बढ़त के साथ खुला, वहीं निफ्टी कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार बंद होने पर भी दोनों सूचकांकों के प्रदर्शन में अंतर बना रहा। सेंसेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में अपेक्षाकृत अधिक कमजोरी दर्ज की गई। दोनों सूचकांकों की क्लोजिंग के बीच प्रतिशत के आधार पर भी अंतर देखा गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीएएस प्रणाली का उद्देश्य बाजार बंद होने के समय अंतिम कीमतों की खोज को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। हालांकि शुरुआती चरण में दोनों एक्सचेंजों पर उपलब्ध ऑर्डर, मांग और आपूर्ति के अलग-अलग स्वरूप के कारण अंतिम क्लोजिंग प्राइस में अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को यह समझना होगा कि दोनों एक्सचेंज स्वतंत्र रूप से अपने-अपने क्लोजिंग ऑक्शन के आधार पर अंतिम मूल्य निर्धारित करते हैं।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि नए सिस्टम को पूरी तरह स्थिर होने में कुछ समय लग सकता है। शुरुआती दिनों में निवेशकों के लिए यह बदलाव नया अनुभव है, इसलिए भ्रम की स्थिति स्वाभाविक मानी जा रही है। यदि भविष्य में भी यह अंतर लगातार बना रहता है तो बाजार सहभागियों को अपनी निवेश और ट्रेडिंग रणनीतियों में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं।

    फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे किसी भी निवेश निर्णय से पहले संबंधित एक्सचेंज पर दर्ज आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस और बाजार के समग्र रुझान का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें। नए सिस्टम के प्रभाव का वास्तविक आकलन आने वाले कारोबारी सत्रों में अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की संभावना है।

  • सरकार ने LIC में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री शुरू की, शेयर 8 प्रतिशत तक टूटने से बाजार में हलचल

    सरकार ने LIC में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री शुरू की, शेयर 8 प्रतिशत तक टूटने से बाजार में हलचल

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयर मंगलवार को तेज दबाव में दिखाई दिए। केंद्र सरकार द्वारा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद कंपनी के शेयर में कारोबार के दौरान लगभग 8 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बाद में शेयर में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन दिनभर निवेशकों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा बनी रही।

    सरकार ने एलआईसी में अपनी 2.5 प्रतिशत मूल हिस्सेदारी बिक्री के साथ 4 प्रतिशत तक का ग्रीनशू विकल्प भी रखा है। इस तरह कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई है। इस हिस्सेदारी बिक्री से केंद्र सरकार को 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की उम्मीद है। यह सार्वजनिक क्षेत्र की किसी प्रमुख वित्तीय संस्था में सरकार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बिक्री में शामिल माना जा रहा है।

    ऑफर फॉर सेल के लिए प्रति शेयर 382 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो बाजार मूल्य से लगभग 10 प्रतिशत कम है। इसी वजह से बाजार खुलते ही एलआईसी के शेयर पर दबाव बढ़ गया और निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 390.70 रुपये तक फिसल गया। बाद में कुछ खरीदारी लौटने से गिरावट सीमित हुई, लेकिन शेयर दिनभर दबाव में ही कारोबार करता रहा।

    शेयर में आई गिरावट का असर कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी दिखाई दिया। एलआईसी का मार्केट कैप घटकर लगभग 5.03 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ओएफएस के दौरान फ्लोर प्राइस कम तय होने के कारण अल्पकालिक दबाव बनना सामान्य स्थिति है। हालांकि दीर्घकाल में कंपनी के प्रदर्शन और निवेशकों की भागीदारी पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

    सरकार की ओर से यह ऑफर दो दिनों के लिए खोला गया है। पहले दिन गैर-खुदरा यानी संस्थागत निवेशकों को आवेदन का अवसर दिया गया है, जबकि दूसरे दिन खुदरा निवेशक भी इसमें भाग ले सकेंगे। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाने के साथ-साथ सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने के लक्ष्य को भी पूरा करना चाहती है।

    वर्तमान में एलआईसी में केंद्र सरकार की लगभग 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। नियामकीय प्रावधानों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखना आवश्यक होता है। ऐसे में इस हिस्सेदारी बिक्री को उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य बाजार में अधिक सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ पूंजी जुटाना भी है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की प्रतिक्रिया, ओएफएस को मिलने वाला प्रतिसाद और एलआईसी के शेयर का प्रदर्शन इस प्रक्रिया की सफलता तय करेगा। फिलहाल निवेशकों की नजर इस हिस्सेदारी बिक्री और इसके बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव पर बनी हुई है।

  • रिकॉर्ड स्तर से नरम पड़े सोने के दाम, छोटे निवेशकों में नियमित डिजिटल गोल्ड खरीदारी का बढ़ा रुझान

    रिकॉर्ड स्तर से नरम पड़े सोने के दाम, छोटे निवेशकों में नियमित डिजिटल गोल्ड खरीदारी का बढ़ा रुझान

    नई दिल्ली । सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से नीचे आने के बावजूद लगातार उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं। इसी कारण बड़ी राशि एकमुश्त निवेश करने के बजाय अब बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक छोटी-छोटी रकम के नियमित निवेश की रणनीति अपना रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सोने में निवेश का चलन तेजी से बढ़ रहा है और इसे बदलते बाजार माहौल में अपेक्षाकृत संतुलित विकल्प माना जा रहा है।

    घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव मंगलवार को करीब 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। यह कीमत इस वर्ष जनवरी के अंत में दर्ज हुए लगभग 1.78 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे है। उस समय वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश की बढ़ी मांग के कारण सोने ने ऐतिहासिक ऊंचाई हासिल की थी। इसके बाद बाजार में कई बार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों पर अमेरिकी ब्याज दरों की संभावित दिशा, डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों का सीधा प्रभाव पड़ता है। हाल ही में अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने के बाद भी निवेशकों की नजर आगामी मौद्रिक नीति पर बनी हुई है। इसी वजह से सोने के बाजार में अनिश्चितता का माहौल कायम है।

    बाजार विश्लेषकों ने भले ही निकट अवधि के लिए अपने अनुमान में कुछ संशोधन किया हो, लेकिन मध्यम अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अभी भी बरकरार है। इसका प्रमुख कारण विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की मांग को माना जा रहा है। हालांकि मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड समय-समय पर कीमतों पर दबाव भी बना सकती हैं।

    ऐसे वातावरण में निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर खरीदारी की रहती है। यदि कोई निवेशक एक साथ बड़ी राशि लगाता है तो ऊंचे भाव पर खरीदारी का जोखिम रहता है, जबकि अधिक इंतजार करने पर कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। इस स्थिति में नियमित अंतराल पर छोटी राशि का निवेश अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी का अवसर देता है और औसत लागत को संतुलित करने में मदद करता है।

    डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म इसी रणनीति को आसान बना रहे हैं। निवेशक बेहद कम राशि से भी 24 कैरेट डिजिटल गोल्ड खरीद सकते हैं और नियमित निवेश के लिए स्वचालित योजना का लाभ उठा सकते हैं। इससे छोटे निवेशकों को अपनी आय और बचत के अनुसार धीरे-धीरे सोने में निवेश बढ़ाने की सुविधा मिल रही है।

    डिजिटल गोल्ड में खरीदे गए सोने के बराबर भौतिक सोना सुरक्षित वॉल्ट में संरक्षित रखा जाता है। निवेशक जरूरत पड़ने पर अपनी होल्डिंग बाजार भाव पर बेच सकते हैं या निर्धारित शर्तों के अनुसार उसे प्रमाणित भौतिक सोने में बदलकर घर भी मंगवा सकते हैं। इस सुविधा ने डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश को पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बना दिया है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सोने को पूरे निवेश का आधार नहीं बल्कि विविधीकृत निवेश पोर्टफोलियो का हिस्सा माना जाना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है, लेकिन नियमित और छोटी राशि के निवेश की रणनीति जोखिम को संतुलित करने का एक व्यावहारिक विकल्प बनकर उभर रही है। इसी कारण बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक अब सही समय का इंतजार करने के बजाय अनुशासित और नियमित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

  • फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक तेज झटके, सुरक्षित उतरा विमान, मामूली रूप से घायल यात्रियों का हुआ इलाज

    फुकेत-दिल्ली उड़ान में अचानक तेज झटके, सुरक्षित उतरा विमान, मामूली रूप से घायल यात्रियों का हुआ इलाज

    नई दिल्ली । थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान मंगलवार को अचानक आए तेज टर्बुलेंस की चपेट में आ गई। उड़ान के दौरान मौसम में आए अचानक बदलाव के कारण विमान को कुछ समय के लिए तेज झटकों का सामना करना पड़ा, जिससे विमान की ऊंचाई में भी क्षणिक बदलाव दर्ज किया गया। इस घटना में कई यात्रियों और कुछ क्रू सदस्यों को मामूली चोटें आईं। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतर गया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    एअर इंडिया की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार फुकेत से दिल्ली आने वाली फ्लाइट एआई2379 उड़ान के दौरान अप्रत्याशित टर्बुलेंस से प्रभावित हुई। विमान में आए तेज झटकों के कारण कुछ यात्रियों को हल्की चोटें लगीं। एयरलाइन ने बताया कि किसी भी यात्री या क्रू सदस्य को गंभीर चोट नहीं आई है। एहतियात के तौर पर जिन लोगों को चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता महसूस हुई, उन्हें एयरपोर्ट पर मौजूद मेडिकल सुविधा केंद्र ले जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया।

    एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी की एयरपोर्ट टीम और मेडिकल स्टाफ ने प्रभावित यात्रियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई। साथ ही संबंधित विमानन अधिकारियों के साथ मिलकर घटना की आवश्यक औपचारिकताओं और जांच प्रक्रिया में भी सहयोग किया जा रहा है। एयर इंडिया ने भरोसा दिलाया कि प्रभावित यात्रियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार टर्बुलेंस उड़ान के दौरान मौसम में अचानक बदलाव, तेज हवाओं या वायुमंडलीय दबाव में परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो सकता है। अधिकांश मामलों में आधुनिक विमान ऐसे हालात से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर यात्रियों को सीट बेल्ट बांधकर रखने की सलाह लगातार दी जाती है, ताकि अचानक झटकों की स्थिति में चोट लगने का खतरा कम हो सके।

    हाल के महीनों में एअर इंडिया की उड़ानों से जुड़ी कुछ अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। जून में दिल्ली से रायपुर जा रही एक उड़ान लैंडिंग के दौरान बर्ड हिट की घटना का शिकार हुई थी। उस समय भी विमान सुरक्षित उतरा था और किसी यात्री या चालक दल के सदस्य को नुकसान नहीं पहुंचा था। घटना के बाद विमान की विस्तृत तकनीकी जांच की गई और सभी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद उसे दोबारा परिचालन के लिए मंजूरी दी गई थी।

    ताजा घटना के बाद भी विमान की सुरक्षित लैंडिंग ने यात्रियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत दी है। एयरलाइन और विमानन अधिकारियों की ओर से पूरी घटना की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से और अधिक प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। फिलहाल सभी प्रभावित यात्रियों की स्थिति सामान्य बताई गई है और आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।

  • सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    नई दिल्ली । कारोबारी सप्ताह के पहले दिन घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में शानदार तेजी दर्ज की गई है। पिछले कारोबारी सत्रों में लगातार दर्ज की जा रही गिरावट के बाद दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को सुधार देखने को मिला। बाजार में आई इस नई तेजी से निवेशकों और कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि ताजा रिकवरी के बावजूद चांदी अभी भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी निचले स्तर पर बनी हुई है, जबकि सोने में भी सकारात्मक गति दर्ज की गई है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सितंबर एक्सपायरी वाले चांदी के अनुबंध ने सोमवार को बढ़त के साथ व्यापार की शुरुआत की। पिछले सत्र में चांदी का भाव 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था, जो नए सत्र की शुरुआत में उछलकर 2,18,709 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार चांदी की कीमत में प्रति किलोग्राम 1,511 रुपये की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में आई इस उछाल ने पिछले सप्ताह की सुस्ती को दूर करते हुए कारोबारियों में नया उत्साह भरा है।

    बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान चांदी की दरों में काफी दबाव देखा गया था। 24 जुलाई को चांदी का भाव 2,22,138 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था, जो सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन तक गिरकर 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया था। महज पांच कारोबारी दिनों के भीतर चांदी करीब 4,940 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई थी। सोमवार को दर्ज की गई तेजी से इस बड़ी गिरावट की आंशिक भरपाई संभव हो सकी है, लेकिन बाजार को पूरी तरह उबरने में अभी समय लग सकता है।

    यदि चांदी के लंबे समय के आंकड़ों और ऐतिहासिक प्रदर्शन का आकलन किया जाए तो इस धातु ने चालू वर्ष के जनवरी महीने में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया था। उस दौरान चांदी की कीमत इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के आंकड़े को पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर तक जा पहुंची थी। वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना करें तो चांदी अभी भी अपने उस रिकॉर्ड स्तर से लगभग 2,01,339 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती बिक रही है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में रिकवरी की बड़ी संभावना मौजूद है।

    सोने के बाजार में भी सप्ताह के पहले दिन मजबूती का रुख देखा गया। अगस्त एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने का वायदा भाव पिछले कारोबारी दिन 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को बाजार खुलते ही यह बढ़त के साथ 1,41,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस तरह सोने में प्रति 10 ग्राम 309 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के सकारात्मक संकेतों और स्थानीय मांग के कारण सोने को यह समर्थन प्राप्त हुआ है।

    पिछला हफ्ता सोने के लिए भी सुस्ती भरा साबित हुआ था। 24 जुलाई को सोने की कीमत 1,43,106 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थी, जो सप्ताहांत तक घटकर 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई थी। इस अवधि में सोने के दाम में करीब 1,595 रुपये प्रति 10 ग्राम की नरमी दर्ज की गई थी। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सर्राफा बाजारों में कारोबारी अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति के संकेतों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में सराफा बाजार की आगे की दिशा तय होगी।

  • EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी

    EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी


    नई दिल्ली।
    संगठित क्षेत्र में काम करने वाले उन लाखों कर्मचारियों को भी पीएफ (PF) और पेंशन (Pension) का लाभ मिल सकता है, जिनका मासिक बेसिक वेतन (Monthly Basic Salary) 25,000 रुपये है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) (Employees’ Provident Fund – EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) (Employees’ Pension Scheme -EPS) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इसे केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। नया नियम 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली सभी पंजीकृत कंपनियों पर लागू होगा। आखिरी बार इसमें सितंबर, 2014 में संशोधन किया गया था।


    पहले 30,000 रुपये करने का था प्रस्ताव

    सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने पहले वेतन सीमा को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, वित्त मंत्रालय के साथ गहन समीक्षा के बाद 25,000 रुपये प्रति माह (बेसिक पे और डीए) पर अंतिम मुहर लगाई गई। 


    मौजूदा नियम

    वर्तमान नियमों के अनुसार, 15,000 तक बेसिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए ही ईपीएफओ में योगदान अनिवार्य था। इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों के पास ईपीएफ से बाहर रहने का विकल्प था।


    कंपनियों और सरकारी खजाने पर पड़ेगा असर

    वेतन सीमा बढ़ने से कंपनियों और सरकार दोनों का वित्तीय बोझ बढ़ेगा। कंपनियों को अधिक कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन में 12 फीसदी का योगदान देना होगा, जिससे उनकी पेरोल लागत बढ़ जाएगी। पेंशन फंड में सरकार भी बेसिक वेतन का 1.16 फीसदी योगदान देती है। वेतन सीमा बढ़ने से सरकार का पेंशन सब्सिडी बजट भी बढ़ जाएगा।

  • LPG उपभोक्ता 16 अगस्त से पहले जरूर करा लें ये काम… वरना, सिलेंडर पाने में होगी दिक्कत

    LPG उपभोक्ता 16 अगस्त से पहले जरूर करा लें ये काम… वरना, सिलेंडर पाने में होगी दिक्कत


    नई दिल्ली।
    आप एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) यूज करते हैं, तो फिर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (Registered Mobile Number) पर भी एक मैसेज आया होगा, जिसमें e-KYC पूरा करने का अलर्ट (LPG e-KYC Alert) दिया गया है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भेजे गए इस एसएमएस में एलपीजी यूजर्स को ये जरूरी काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है. इसके लिए डेडलाइन 16 अगस्त तय की गई है, ऐसे में अगर ये लास्ट डेट चूक जाती है, तो फिर एलपीजी सिलेंडर पाने में मुश्किल हो सकती है, इसके साथ ही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी सरकारी सब्सिडी में रुकावट पेश आ सकती है।


    राहत के साथ अगस्त की शुरुआत

    अगस्त महीने की शुरुआत एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी हुई. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अगस्त 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती कर राहत दी. हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) का दाम जस का तस रखा गया. इसके साथ ही कंपनियों ने अलर्ट भी जारी किया है कि सिलेंडर की सप्लाई सुचारू पाने के लिए फटाफट ई-केवाईसी करा लें।

    घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर नजर डालें, तो दिल्ली में सिलेंडर की कीमत (Delhi LPG Cylinder Price) 942 रुपये, कोलकाता में दाम (Kolkata LPG Cylinder Price) 968 रुपये, मुंबई में कीमत 941.50 रुपये और चेन्नई में ये 957.50 रुपये है।


    SMS अलर्ट के जरिए चेतावनी

    घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को 16 अगस्त तक ये आधार बेस्ड ई-केवाईसी सत्यापन प्रोसेस पूरा करना है और इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने उन्हें एसएमएस अलर्ट भेजना भी शुरू कर दिया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि जो लोग डेडलाइन तक ये काम पूरा नहीं करते हैं, तो फिर अधिसूचित घरेलू दर पर LP Cylinder खरीदने में दिक्कत पेश आ सकती है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को भी तय की गई लास्ट डेट तक LPG e-KYC पूरा करना जरूरी है।

    बता दें 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के देश में अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं और इसके तहत उन्हें हर साल चार एलपीजी सिलेंडर की रिफिल पर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलता है. इससे पहले 9 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते हैं, जिसका नियम बीते जून महीने में ही बदला गया है।


    घर बैठे कर सकते हैं काम पूरा

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भी लगातार एसएमएस के जरिए अलर्ट भेजा जा रहा है. इनमें कहा गया है, ‘प्रिय ग्राहक, घरेलू दरों पर एलपीजी सिलेंडर पाने के लिए आपको e-KYC करना जरूरी है, पहले भी कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं किया है।

    IOCL की ओर से इस जरूरी काम के लिए अलर्ट भेजने के साथ ही घर बैठे इसे पूरा करने का प्रोसेस भी शेयर किया गया है. मैसेज में आगे कहा गया है कि आप इंडियनऑयल वन ऐप (Indian Oil One App) के माध्यम से घर बैठे, अपने डिस्ट्रिब्यूटर के पास जाकर या डिलीवरी कर्मी के जरिए ई-केवाईसी प्रोसेस को पूरा कर सकते हैं. इसमें साफ कहा गया है कि, ’16 अगस्त 2026 तक ये काम पूरा न करने पर, इसके पूरा होने तक आप घरेलू दरों पर सिलेंडर प्राप्त करने के पात्र नहीं रहेंगे. कृपया जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करें।