Category: Economy

  • भारत-दक्षिण कोरिया रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, राष्ट्रपति पहुंचे दिल्ली

    भारत-दक्षिण कोरिया रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, राष्ट्रपति पहुंचे दिल्ली


    नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung रविवार को भारत के लिए रवाना हो गए हैं। यह दौरा भारत और वियतनाम दो प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। राष्ट्रपति ली आज नई दिल्ली पहुंचेंगे।

    सोमवार को Narendra Modi के साथ शिखर वार्ता

    राष्ट्रपति ली सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह हाल के वर्षों में तीसरी आमने-सामने की बैठक होगी, जो पहले G7 Summit और G20 Summit के दौरान हुई बातचीत के बाद हो रही है।

    ऊर्जा सप्लाई और सप्लाई चेन पर रहेगा खास ध्यान

    इस बैठक में मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते ग्लोबल एनर्जी मार्केट में आई अनिश्चितता प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देश ऊर्जा सप्लाई चेन को स्थिर करने और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही शिपबिल्डिंग, मैरीटाइम इंडस्ट्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिफेंस सेक्टर में साझेदारी बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा।

    भारत में कोरियाई कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

    राष्ट्रपति ली भारत में कोरियाई कंपनियों के ऑपरेशन को मजबूत करने और नए निवेश के अवसर तलाशने के लिए एक बिजनेस फोरम में भी शामिल हो सकते हैं। भारत को दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोडक्शन हब और बड़ा उपभोक्ता बाजार माना जाता है।

    वियतनाम दौरे पर भी जाएंगे राष्ट्रपति ली

    भारत दौरे के बाद Lee Jae-myung मंगलवार को Hanoi (वियतनाम) के लिए रवाना होंगे। वहां वह To Lam और प्रधानमंत्री Le Minh Hung सहित अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान ऊर्जा सप्लाई चेन और जरूरी खनिजों पर सहयोग एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा।

    रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    यह दौरा दक्षिण कोरिया की कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने और तेजी से बढ़ती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंधों को गहरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह शिखर वार्ता न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की दिशा, जानें किन फैक्टर्स पर रहेगा फोकस

    ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की दिशा, जानें किन फैक्टर्स पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। खासकर US–Iran peace talks पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी। दोनों देशों के बीच जारी दो हफ्तों का युद्धविराम खत्म होने जा रहा है, ऐसे में किसी भी तरह का घटनाक्रम ग्लोबल मार्केट और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

    कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव से बढ़ेगी चिंता

    Strait of Hormuz के बार-बार बंद होने की खबरों से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और बाजार की चाल दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

    तिमाही नतीजों से बनेगा सेंटीमेंट

    अगले हफ्ते कई बड़ी कंपनियां अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी, जिनमें Infosys, HCLTech, Nestlé India, SBI Life Insurance और Adani Green Energy शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार की दिशा तय होने में मदद मिलेगी।

    घरेलू आर्थिक आंकड़े भी रहेंगे अहम

    भारतीय बाजार के लिए घरेलू डेटा भी काफी महत्वपूर्ण रहेगा।

    20 अप्रैल: इन्फ्रास्ट्रक्चर आउटपुट
    22 अप्रैल: Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति के मिनट्स
    23 अप्रैल: पीएमआई (PMI) डेटा

    ये आंकड़े आर्थिक गतिविधियों की गति और भविष्य की दिशा का संकेत देंगे।

    बीते हफ्ते बाजार में रही तेजी

    पिछला सप्ताह शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा।

    BSE Sensex 943.29 अंक (1.22%) बढ़कर 78,493.54 पर बंद हुआ
    Nifty 50 302.95 अंक (1.26%) चढ़कर 24,353.55 पर बंद हुआ

    वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

    सेक्टर परफॉर्मेंस: डिफेंस और एनर्जी सबसे आगे

    बीते हफ्ते सेक्टोरल इंडेक्स में शानदार बढ़त देखने को मिली।

    निफ्टी इंडिया डिफेंस टॉप गेनर रहा
    इसके बाद एनर्जी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसई सेक्टर में तेजी दर्ज की गई

    यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक खरीदारी का माहौल बना हुआ है।

    अगले हफ्ते बाजार की दिशा ग्लोबल घटनाओं, खासकर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों और तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। साथ ही घरेलू आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेंगे।

  • Indian Oil ने लॉन्च किया इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम…. गैस-बिजली के बगैर बनेगा खाना

    Indian Oil ने लॉन्च किया इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम…. गैस-बिजली के बगैर बनेगा खाना


    नई दिल्ली।
    बढ़ती एलपीजी कीमतें (Rising LPG prices) और कई जगहों पर सप्लाई की दिक्कतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हर महीने महंगा होता सिलेंडर (Cylinder Expensive) अब घर के बजट पर भारी पड़ रहा है। ऐसे समय में लोग ऐसे ऑप्शन तलाश रहे हैं जो सस्ते हों, भरोसेमंद हों और लंबे समय तक राहत दे सकें। Indian Oil ने एक ऐसा समाधान पेश किया है जो LPG संकट के बीच बड़ा समाधान बनकर सामने आया है। कंपनी ने ‘Surya Nutan’ नाम का इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम (Solar Cooking System ) लॉन्च किया है, जिस पर बिना LPG, PNG गैस और यहां तक कि बिना बिजली के भी खाना बनाया जा सकता है। यह सिस्टम सूरज की रोशनी से चलता है। खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद यह लंबे समय तक आपका खर्च कम कर सकता है। अगर आप इस कुकिंग सिस्‍टम को बुकिंग कराना चाहते हैं तो यहां हम आपको इसे बुक करने का प्रोसेस कीमत आगे बता रहे हैं।


    ‘Surya Nutan’ सोलर कुकिंग सिस्टम क्या है?

    ‘Surya Nutan’ एक इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम है जिसे घर के अंदर इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आपको चूल्हा बाहर धूप में रखने की जरूरत नहीं होती। यह सिस्टम पूरी तरह से किचन से जुड़ा रहता है और सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करके खाना बनाता है। इसे Indian Oil Corporation के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर ने तैयार किया है, जिससे साफ है कि यह एक मेड-इन-इंडिया टेक्नोलॉजी है।


    ऐसे काम करता है यह सोलर चूल्हा

    इस सिस्टम में घर की छत पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जो सूरज की रोशनी को एनर्जी में बदलते हैं। यह एनर्जी एक केबल के जरिए सीधे किचन में लगे कुकटॉप तक पहुंचती है। खास बात यह है कि इसमें “हाइब्रिड सिस्टम” दिया गया है, यानी यह सोलर के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दूसरी एनर्जी से भी चल सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर धूप नहीं है या बारिश हो रही है, तब भी आप बिना परेशानी खाना बना सकते हैं।


    Surya Nutan की कीमत

    इस सोलर कुकिंग सिस्टम को तीन अलग-अलग मॉडल्स में पेश किया है, ताकि लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से चुन सकें। इसकी शुरुआती कीमत करीब 12,000 रुपये रखी गई है, जबकि इसका टॉप या प्रीमियम मॉडल लगभग 23,000 रुपये तक जाता है। खास बात यह है कि प्रीमियम वेरिएंट इतना पावरफुल है कि यह एक आम 4 लोगों के परिवार के पूरे दिन का खाना आराम से बना सकता है।


    ऐसे करें सोलर चूल्हे के लिए अप्लाई

    अगर आप इस सोलर कुकिंग सिस्टम को खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसकी प्री-बुकिंग ऑनलाइन की जा रही है। इसके लिए आपको Indian Oil Corporation की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, ईमेल और परिवार में कितने लोग हैं जैसी जरूरी जानकारी भरनी होगी। इसके अलावा, आपको अपनी जरूरत के हिसाब से सिंगल या डबल बर्नर का ऑप्शन भी चुनना होगा। सारी डिटेल भरने के बाद फॉर्म सबमिट करना होता है, जिसके जरिए आपकी प्री-बुकिंग दर्ज हो जाती है।


    हर मौसम में करेगा काम

    लोगों को अक्सर लगता है कि सोलर कुकिंग सिर्फ धूप में ही काम करती है, लेकिन ‘Surya Nutan’ के साथ ऐसा नहीं है। यह सिस्टम ऐसी टेक्नोलॉजी के साथ आता है जो कम धूप या बारिश के समय भी काम कर सकता है। यानी आपको मौसम की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • अक्षय तृतीया पर चमके-सोना चांदी….., जानिए पिछले 10 सालों में कितनी बढ़ी कीमतें ?

    अक्षय तृतीया पर चमके-सोना चांदी….., जानिए पिछले 10 सालों में कितनी बढ़ी कीमतें ?


    नई दिल्ली।
    अक्षय तृतीया 2026 (Akshaya Tritiya 2026) का त्योहार कल यानी 19 अप्रैल को है। 10 साल पहले यानी 2016 में अक्षय तृतीया के समय पर 10 ग्राम गोल्ड की कीमत (Gold Price) 30,100 रुपये थी। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार कल यानी शुक्रवार को 24 कैरेट गोल्ड का रेट 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। यानी अगर किसी निवेशक ने 2026 में अक्षय तृतीया के समय पर 10,000 रुपये का निवेश किया होगा उसका इनवेस्टमेंट बढ़कर 45000 रुपये हो गया होगा। निवेशकों का तगड़ा फायदा हुआ है। बता दें, 10 साल में सोने का रेट 400 प्रतिशत बढ़ा है।


    चांदी के रेट में पिछले 10 साल में तेज इजाफा (Silver price histroy)

    2016 में अक्षय तृतीया के त्योहार के समय पर 1 किलोग्राम चांदी का रेट 41200 रुपये था। जोकि शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 247930 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यानी 10 साल में चांदी की कीमतों में 2,06,730 रुपये बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    पिछले एक साल में 50% बढ़ा सोने का रेट (Gold price surged 50 percent in one year)
    2025 में अक्षय तृतीया के समय पर गोल्ड का रेट 95500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। जोकि अब 151000 रुपये के लेवल पर पहुंच गया है। यानी बीते साल अक्षय तृतीया की तुलना में इस बार सोने का रेट 50% से अधिक बढ़ चुका है।


    आज क्या है 24 से 14 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Price Today)

    इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार 24 कैरेट गोल्ड का रेट शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, 23 कैरेट गोल्ड का रेट 150752 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 138644 रुपये, 18 कैरेट गोल्ड का रेट 113519 रुपये और 14 कैरेट गोल्ड का रेट 88544 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है।

    इससे पहले 16 अप्रैल को गोल्ड का रेट 153305 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी महज दो दिन में गोल्ड की कीमतों में करीब 2000 रुपये की गिरावट देखने को मिली है। बता दें, अप्रैल के महीने में गोल्ड का रेट लगभग स्थिर ही बना हुआ है।


    रिकॉर्ड हाई से क्यों गिरा गोल्ड का रेट? (Why Gold get cheaper)

    इसी साल एक समय पर गोल्ड का रेट 175000 रुपये को पार कर गया था। लेकिन वहां से गोल्ड की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसके पीछे की वजह डॉलर का मजबूत होना माना जा रहा है। वहीं, निवेशकों की तरफ से मुनाफावसूली भी जमकर देखने को मिली है।

  • एचडीएफसी बैंक का चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन मुनाफे में 9 प्रतिशत की बढ़त से निवेशकों में बढ़ा भरोसा और डिविडेंड की घोषणा से शेयरधारकों में उत्साह

    एचडीएफसी बैंक का चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन मुनाफे में 9 प्रतिशत की बढ़त से निवेशकों में बढ़ा भरोसा और डिविडेंड की घोषणा से शेयरधारकों में उत्साह

    नई दिल्ली :देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2025 26 की चौथी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बाजार में सकारात्मक संकेत दिए हैं। बैंक ने इस अवधि में शुद्ध मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है जिससे इसकी वित्तीय मजबूती और संचालन क्षमता एक बार फिर सामने आई है। लगातार बदलते आर्थिक माहौल के बीच बैंक का यह प्रदर्शन निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

    ताजा आंकड़ों के अनुसार बैंक का शुद्ध मुनाफा लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 19221 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर परिणाम है। इस वृद्धि के साथ बैंक ने अपने निवेशकों के लिए डिविडेंड की घोषणा भी की है जिससे शेयरधारकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना को और मजबूत करता है।

    राजस्व के स्तर पर भी बैंक ने स्थिर वृद्धि दर्ज की है। कुल शुद्ध आय में बढ़ोतरी देखने को मिली है जबकि शुद्ध ब्याज आय में भी सुधार हुआ है। यह दर्शाता है कि बैंक की ऋण वितरण क्षमता और ब्याज से होने वाली कमाई दोनों ही मजबूत स्थिति में बनी हुई हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन बैंक की स्थिर रणनीति और मजबूत ग्राहक आधार का परिणाम है।

    इस तिमाही में बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है। गैर निष्पादित परिसंपत्तियों में कमी दर्ज की गई है जिससे यह संकेत मिलता है कि बैंक का ऋण पोर्टफोलियो पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और स्थिर हो गया है। यह स्थिति बैंक की जोखिम प्रबंधन प्रणाली की मजबूती को दर्शाती है और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देती है।

    बैंक की पूंजी स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। पूंजी पर्याप्तता अनुपात नियामक आवश्यकताओं से काफी अधिक है जिससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक के पास वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। यह स्थिति बैंक को भविष्य में विस्तार और निवेश के अवसरों के लिए सक्षम बनाती है।

    जमा राशि और बचत खातों में भी वृद्धि दर्ज की गई है जिससे बैंक की फंडिंग क्षमता मजबूत हुई है। ग्राहक आधार में लगातार बढ़ोतरी और शाखा नेटवर्क के विस्तार ने बैंक की पहुंच को और व्यापक बनाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बैंक अपनी सेवाओं को अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल हो रहा है।

    शेयर बाजार में भी इस परिणाम का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है जहां बैंक के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों का भरोसा मजबूत वित्तीय परिणामों और डिविडेंड की घोषणा के बाद और बढ़ा है। कुल मिलाकर यह तिमाही परिणाम बैंक की स्थिर वृद्धि मजबूत वित्तीय स्थिति और भविष्य की सकारात्मक संभावनाओं को दर्शाते हैं।

  • सोना और पेट्रोल डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी बाजार में हलचल के बीच उपभोक्ताओं पर दिख रहा सीधा असर

    सोना और पेट्रोल डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी बाजार में हलचल के बीच उपभोक्ताओं पर दिख रहा सीधा असर

    नई दिल्ली: देशभर में आज सोने और पेट्रोल डीजल की कीमतों में हल्का उतार चढ़ाव देखने को मिला है जिससे बाजार में एक बार फिर सक्रियता बढ़ गई है। कीमती धातु और ईंधन दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं जिनकी कीमतों पर वैश्विक आर्थिक स्थिति, मांग और आपूर्ति तथा मुद्रा विनिमय दरों का सीधा प्रभाव पड़ता है। इसी कारण हर दिन इनके भाव में हल्का बदलाव देखने को मिलता रहता है जिसका असर आम लोगों की दैनिक जीवन लागत पर साफ दिखाई देता है।

    सोने के बाजार में आज विभिन्न श्रेणियों के अनुसार कीमतों में स्थिरता के साथ हल्की हलचल दर्ज की गई है। चौबीस कैरेट सोना प्रति दस ग्राम लगभग एक लाख इक्यावन हजार रुपये से ऊपर के स्तर पर बना हुआ है जबकि तेईस कैरेट सोना भी इसी के आसपास दर्ज किया गया है। बाईस कैरेट सोना एक लाख अड़तीस हजार रुपये के करीब और अठारह कैरेट सोना एक लाख तेरह हजार रुपये के आसपास बना हुआ है। चौदह कैरेट सोने की कीमत भी अपेक्षाकृत कम स्तर पर स्थिर बनी हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि सोने के दामों में अचानक बड़ी तेजी या गिरावट नहीं बल्कि सीमित दायरे में उतार चढ़ाव जारी है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव में हल्का अंतर देखने को मिला है। राजधानी क्षेत्र में चौबीस कैरेट सोना सबसे ऊंचे स्तर के करीब दर्ज किया गया है। मुंबई और कोलकाता में भी कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में सोने के दाम अपेक्षाकृत अधिक रहे हैं। वहीं उत्तर भारत के लखनऊ नोएडा और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में भी कीमतें लगभग समान रुझान के साथ बनी हुई हैं। यह अंतर स्थानीय कर और बाजार मांग के कारण देखने को मिलता है।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी आज विभिन्न शहरों में मामूली बदलाव दर्ज किया गया है। राजधानी में पेट्रोल की कीमत लगभग चौानवे रुपये के आसपास और डीजल लगभग सत्तासी रुपये के करीब बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल एक सौ चार रुपये से ऊपर और डीजल बानवे रुपये के आसपास दर्ज किया गया है। कोलकाता और चेन्नई में भी ईंधन के दाम इसी तरह के स्तर पर बने हुए हैं। लखनऊ में पेट्रोल की कीमत लगभग चौरानवे रुपये के करीब और डीजल अठासी रुपये के आसपास देखा गया है। पटना और हैदराबाद जैसे शहरों में ईंधन के दाम अपेक्षाकृत अधिक स्तर पर बने हुए हैं।

    ईंधन की कीमतों में बदलाव का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और कर संरचना को माना जाता है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव होता है तो उसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को प्रभावित करता है जिससे अलग अलग समय पर दामों में हल्का बदलाव देखने को मिलता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और ईंधन दोनों की कीमतें आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर रहेंगी। सोना जहां सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता है वहीं पेट्रोल डीजल की कीमतें सीधे आम उपभोक्ता के दैनिक खर्च को प्रभावित करती हैं। वर्तमान स्थिति में दोनों ही बाजारों में बड़े बदलाव की बजाय सीमित दायरे में उतार चढ़ाव का रुझान बना हुआ है।

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक स्तर पर 700 अरब डॉलर के पार पहुंचा..

    भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक स्तर पर 700 अरब डॉलर के पार पहुंचा..


    नई दिल्ली:
    देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ताजा आंकड़ों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को सामने रखा है। हालिया अवधि में विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह अब 700 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार चढ़ाव और अनिश्चितताओं का माहौल बना हुआ है। इस बढ़ोतरी ने देश की वित्तीय स्थिरता और आर्थिक मजबूती को और अधिक स्पष्ट रूप से सामने रखा है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार एक सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 3.82 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद कुल भंडार 700 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। इससे पहले भी भंडार में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे थे लेकिन अब इसमें स्थिरता के साथ सकारात्मक वृद्धि का रुझान सामने आया है। यह स्थिति देश की आर्थिक नीतियों और बाहरी वित्तीय परिस्थितियों के बीच बेहतर संतुलन को दर्शाती है।

    इस वृद्धि में विदेशी मुद्रा संपत्तियों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। ये संपत्तियां कुल भंडार का प्रमुख हिस्सा होती हैं और इनमें विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं के उतार चढ़ाव का सीधा प्रभाव पड़ता है। यूरो पाउंड और येन जैसी प्रमुख मुद्राओं में बदलाव के बावजूद इन संपत्तियों में मजबूती देखने को मिली है जिससे कुल विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा मिला है और इसमें वृद्धि दर्ज की गई है।

    इसके साथ ही सोने के भंडार में भी वृद्धि दर्ज की गई है जिसने कुल विदेशी मुद्रा भंडार को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है। सोना एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में माना जाता है और इसके मूल्य में बदलाव का प्रभाव सीधे देश के कुल भंडार पर पड़ता है। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिति में सुधार ने भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक भरोसे का प्रमुख संकेतक होता है। यह न केवल देश को बाहरी आर्थिक झटकों से बचाने में मदद करता है बल्कि मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने की क्षमता भी प्रदान करता है। मजबूत भंडार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को बढ़ाता है जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब कई अर्थव्यवस्थाएं दबाव और अस्थिरता का सामना कर रही हैं तब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार मजबूत स्थिति में बना हुआ है। यह संकेत देता है कि देश की वित्तीय प्रणाली स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ रही है और आर्थिक प्रबंधन अपेक्षाकृत संतुलित तरीके से कार्य कर रहा है। बढ़ता हुआ भंडार भविष्य में किसी भी बाहरी आर्थिक दबाव से निपटने की क्षमता को और अधिक मजबूत बनाता है और देश की आर्थिक स्थिति को वैश्विक स्तर पर अधिक सुदृढ़ पहचान प्रदान करता है।

  • केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 2 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी को दी मंजूरी..

    केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 2 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी को दी मंजूरी..

    नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत देते हुए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब डीए 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है। लंबे समय से इंतजार कर रहे कर्मचारियों के लिए यह निर्णय आर्थिक राहत लेकर आया है और उनकी मासिक आय में सीधा असर डालेगा।

    सरकारी निर्णय के अनुसार यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को इस तारीख से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिलेगा और इसके साथ ही उन्हें पिछले महीनों का एरियर भी दिया जाएगा। जनवरी, फरवरी और मार्च के बकाया भुगतान का लाभ सीधे उनके वेतन के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे एकमुश्त अतिरिक्त राशि उनके खाते में पहुंचेगी।

    महंगाई भत्ता सरकारी वेतन संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसे बढ़ती कीमतों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए समय समय पर संशोधित किया जाता है। इसका निर्धारण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर किया जाता है, जो बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को दर्शाता है। इसी आधार पर सरकार समय समय पर इसमें संशोधन करती है ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति प्रभावित न हो।

    इस बार डीए बढ़ोतरी को लेकर कर्मचारियों को सामान्य से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। आमतौर पर यह संशोधन समय पर कर दिया जाता है, लेकिन इस बार प्रक्रिया में देरी देखने को मिली। इसके बावजूद अब मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच संतोष और राहत का माहौल है।

    हालांकि कर्मचारी संगठनों की ओर से इस बार 3 से 4 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन सरकार ने 2 प्रतिशत वृद्धि को मंजूरी दी है। इसके बावजूद डीए का 60 प्रतिशत स्तर पार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह वेतन संरचना में एक बड़ा संकेत देता है और भविष्य में सैलरी स्ट्रक्चर पर इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।

    इस बढ़ोतरी का सीधा असर कर्मचारियों और पेंशनर्स की मासिक आय पर पड़ेगा। एरियर मिलने से उन्हें एक साथ अतिरिक्त राशि प्राप्त होगी, जिससे घरेलू बजट को मजबूती मिलेगी। महंगाई के मौजूदा दौर में यह निर्णय उनके खर्चों को संतुलित करने में मदद करेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बढ़ोतरी से बाजार में खपत बढ़ सकती है, क्योंकि लोगों के पास खर्च करने योग्य आय में इजाफा होता है। इसका अप्रत्यक्ष असर अर्थव्यवस्था की गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है।

  • आरबीआई ने बंद नोटों को बदलने के लिए नहीं जारी किया कोई नया नियम..

    आरबीआई ने बंद नोटों को बदलने के लिए नहीं जारी किया कोई नया नियम..

    नई दिल्ली। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाओं का प्रवाह जितनी तेजी से होता है उतनी ही तेजी से भ्रामक और गलत जानकारियां भी समाज में फैलती हैं। हाल ही में विभिन्न संदेशों और चर्चाओं के माध्यम से यह दावा किया जा रहा था कि केंद्रीय बैंक ने काफी समय पहले चलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों को बदलने के लिए एक और अवसर प्रदान किया है और इसके लिए नए नियम भी जारी किए गए हैं। आधिकारिक जांच और तथ्यों के गहन विश्लेषण के बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि इस प्रकार का कोई भी दावा सत्य नहीं है। प्रशासन ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्पष्ट किया है कि पुरानी मुद्रा को बदलने के संबंध में किसी भी प्रकार का कोई नया बदलाव या घोषणा नहीं की गई है।

    भ्रामक खबरों का उद्देश्य अक्सर नागरिकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा करना होता है। विशेषकर वित्तीय मामलों में इस तरह की अफवाहें लोगों को गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। यह देखा गया है कि साल 2016 में बंद किए गए उच्च मूल्य के नोटों को लेकर समय-समय पर इस तरह की मनगढ़ंत कहानियां साझा की जाती हैं। जिम्मेदार अधिकारियों ने एक बार फिर यह दोहराया है कि इन नोटों को बदलने की समय सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है और वर्तमान में ऐसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। जनता को यह समझना होगा कि किसी भी महत्वपूर्ण वित्तीय नीति में बदलाव की जानकारी हमेशा आधिकारिक और औपचारिक माध्यमों से ही सार्वजनिक की जाती है और व्यक्तिगत स्तर पर प्रसारित होने वाले संदेशों की कोई कानूनी वैधता नहीं होती है।

    आर्थिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह अनिवार्य है कि लोग किसी भी संदिग्ध जानकारी पर विश्वास करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करें। केवल मुद्रा ही नहीं बल्कि बैंकिंग सेवाओं और निवेश की योजनाओं को लेकर भी अक्सर फर्जी दावे किए जाते हैं ताकि भोले-भाले लोगों को वित्तीय जाल में फंसाया जा सके। कभी खातों को बंद करने का डर दिखाया जाता है तो कभी कम समय में धन दोगुना करने का प्रलोभन दिया जाता है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत जानकारी साझा करना या किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना खतरनाक साबित हो सकता है। समाज के हर वर्ग को इस बात के लिए जागरूक होना चाहिए कि वे किसी भी अपुष्ट संदेश को बिना सोचे-समझे दूसरों के साथ साझा न करें।

    सरकार और संबंधित विभाग लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं कि आम जनता तक केवल सही और प्रमाणित जानकारी ही पहुंचे। फर्जी खबरों के इस तंत्र को तोड़ने के लिए नागरिकों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत की सत्यता परखना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वित्तीय नियमों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन होने पर उसकी सूचना व्यापक रूप से सार्वजनिक की जाएगी। तब तक किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और अपनी व्यक्तिगत व वित्तीय सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सजग रहें। सतर्कता और सही जानकारी ही इस प्रकार के डिजिटल भ्रम से बचने का एकमात्र प्रभावी उपाय है।

  • आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में आम लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल 10% तक लुढ़ककर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।

    देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है।

    सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल य
    हां
    अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर में अब भी सबसे सस्ता ईंधन मिल रहा है।

    यहां पेट्रोल 78.05 रुपये और डीजल 82.64 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है।

    क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?
    ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक शिपिंग को फिर से सुचारू करने के संकेत दिए हैं। इस खबर के बाद सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।

    देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 104.21
    कोलकाता – 103.94
    चेन्नई – 100.75
    अहमदाबाद – 94.49
    बेंगलुरु – 94.49
    हैदराबाद – 107.46
    जयपुर – 104.72
    लखनऊ – 94.69
    पुणे – 104.04
    चंडीगढ़ – 94.30
    इंदौर – 106.48
    सूरत – 95.00
    नाशिक – 95.50

    डीजल के ताजा रेट (₹/लीटर)

    मुंबई – 92.15
    कोलकाता – 90.76
    चेन्नई – 92.34
    अहमदाबाद – 90.17
    बेंगलुरु – 89.02
    हैदराबाद – 95.70
    जयपुर – 90.21
    लखनऊ – 87.80
    पुणे – 90.57
    चंडीगढ़ – 82.45
    इंदौर – 91.88
    पटना – 93.80
    सूरत – 89.00

    पहले बढ़ चुके हैं दाम
    हाल ही में प्राइवेट कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी। शेल इंडिया ने 1 अप्रैल को पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल 25.01 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था।

    वहीं, नायरा ने मार्च में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ाए थे।

    प्रीमियम फ्यूल भी महंगा
    इंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को XP100 पेट्रोल की कीमत 11 रुपये बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी थी। इसके अलावा प्रीमियम डीजल ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ भी 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर फिलहाल कोई राहत नहीं है। अब सबकी नजर ऑयल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी है—क्या आम आदमी को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा या इंतजार लंबा चलेगा?