Category: Economy

  • Air India को घाटे से उबारने की कवायद….. एयरलाइंस पार्टनर से मिले टाटा के चेयरमैन चंद्रशेखरन

    Air India को घाटे से उबारने की कवायद….. एयरलाइंस पार्टनर से मिले टाटा के चेयरमैन चंद्रशेखरन


    नई दिल्ली।
    घाटे में चल रही एयर इंडिया (Air India) को लेकर टाटा समूह (Tata Group) एक्शन मोड में है। इसी कड़ी में सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines.) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) गोह चून फोंग और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के बीच मुलाकात भी हुई है। माना जा रहा है कि दोनों पक्षों ने घाटे में चल रही एयर इंडिया के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। फोंग सुबह टाटा समूह के मुख्यालय बॉम्बे हाउस पहुंचे और शाम को रवाना हो गए।

    एक सूत्र ने बताया कि उन्होंने एयर इंडिया के चेयरमैन चंद्रशेखरन और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। टाटा समूह के अधिकारियों के साथ हुई बैठकों के बारे में फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिल सकी है। बता दें कि टाटा समूह ने जनवरी, 2022 में भारत सरकार से एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था और बाद में सिंगापुर एयरलाइंस ने विमानन कंपनी में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी।


    प्रतिबंधों से पड़ा असर

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एयर इंडिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है जिनमें पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध से बढ़ती परिचालन लागत और करीब एक वर्ष से पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद रहने का प्रभाव शामिल है। इन प्रतिबंधों के कारण महत्वाकांक्षी बदलाव योजना के तहत काम कर रही विमानन कंपनी को लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है जिससे ईंधन खपत एवं खर्च बढ़ गया है।


    सीईओ का इस्तीफा

    इस महीने की शुरुआत में एयर इंडिया ने घोषणा की थी कि उसके सीईओ एवं प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन पद छोड़ेंगे। एयरलाइन ने उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए एक समिति का गठन किया है। न्यूजीलैंड मूल के विल्सन पिछले चार वर्ष से टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक के रूप में कार्य कर रहे हैं। बता दें कि एयरलाइन की लंदन जाने वाली उड़ान के पिछले साल अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद विल्सन की आलोचना भी हुई थी। इस हादसे में 250 से अधिक लोगों की जान गई थी। इसके अलावा कई मौकों पर सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन को लेकर भी उन पर सवाल उठे थे।

    31 मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में एयर इंडिया को 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। एयर इंडिया का प्रदर्शन सिंगापुर एयरलाइंस के लिए भी वित्तीय दबाव का कारण बन रहा है। ऐसे में यह मुलाकात काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में एयर इंडिय को घाटे से उबारने के मुद्दे पर जोर दिया गया है।

  • सावधान! आसान लोन का झांसा देकर हो रही ठगी, बढ़ रहे साइबर फ्रॉड केस

    सावधान! आसान लोन का झांसा देकर हो रही ठगी, बढ़ रहे साइबर फ्रॉड केस


    नई दिल्ली। प्रेस सूचना ब्यूरो ने आधार कार्ड के नाम पर फैल रहे लोन स्कैम (लोन फ्रॉड) को लेकर लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। सरकार ने साफ किया है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट पर चल रहे कई विज्ञापन पूरी तरह फर्जी हैं, जिनमें आधार कार्ड पर आसान लोन देने का दावा किया जा रहा है।
    सरकारी फैक्ट चेक यूनिट के मुताबिक, इन फर्जी विज्ञापनों में लोगों को बिना किसी दस्तावेज या कम ब्याज दर पर तुरंत लोन देने का लालच दिया जाता है। ऐसे मैसेज और विज्ञापन खासतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनका मकसद लोगों को ठगना है।

    सोने-चांदी के दाम में हलचल, पेट्रोल-डीजल के रेट में उतार-चढ़ाव; जानें आज का पूरा बाजार अपडेट
    सोने-चांदी के दाम में हलचल, पेट्रोल-डीजल के रेट में उतार-चढ़ाव; जानें आज का पूरा बाजार अपडेट
    15 Apr 2026
    आपका लोन बार बार क्यों हो रहा है रिजेक्ट, ये रहा कारण

    स्कीम के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार
    सरकार ने बताया कि इन स्कैम में ठग खुद को सरकारी योजना या अधिकृत संस्था से जुड़ा हुआ बताते हैं। कई मामलों में प्रधानमंत्री योजना या सरकारी स्कीम का नाम इस्तेमाल कर भरोसा जीतने की कोशिश की जाती है। जबकि हकीकत यह है कि ऐसी कोई भी आधिकारिक योजना मौजूद नहीं है।

    फैक्ट चेक में यह भी सामने आया है कि इस तरह के मैसेज पहले भी वायरल हो चुके हैं, जिनमें दावा किया गया था कि सभी आधार कार्ड धारकों को लाखों रुपये का लोन दिया जा रहा है, लेकिन सरकार ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया था।

    Loan Fraud से ऐसे करें खुद को सुरक्षित
    सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक, ऐप या विज्ञापन पर भरोसा न करें। खासतौर पर ऐसे ऑफर्स से दूर रहें, जो बिना वेरिफिकेशन या तुरंत लोन देने का वादा करते हैं।

    इसके अलावा, किसी भी प्लेटफॉर्म पर अपनी पर्सनल जानकारी जैसे आधार नंबर, बैंक डिटेल या OTP साझा करने से बचें। केवल आधिकारिक वेबसाइट या विश्वसनीय संस्थाओं के जरिए ही लोन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करें।

  • भारत का सबसे बड़ा Trade पार्टनर बना चीन… अमेरिका को छोड़ा पीछे

    भारत का सबसे बड़ा Trade पार्टनर बना चीन… अमेरिका को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली।
    चीन (China), अमेरिका (America) को पीछे छोड़कर 2025-26 में भारत (India) का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार (Largest Trading Partner) बन गया है। उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान चीन के साथ देश का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया। अमेरिका 2024-25 तक लगातार चार वर्षों तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था।


    व्यापार घाटा भी रिकॉर्ड स्तर पर

    चीन 2013-14 से 2017-18 तक और फिर 2020-21 में भी भारत का शीर्ष व्यापारिक साझेदार रहा। चीन से पहले यूएई देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। पिछले वित्त वर्ष के दौरान चीन को भारत का निर्यात 36.66 फीसदी बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16 फीसदी बढ़कर 131.63 अरब डॉलर रहा। व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर 112.16 अरब डॉलर के अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर था।


    व्यापार संतुलन में बदलाव

    2025-26 में अमेरिका को निर्यात मामूली रूप से 0.92 प्रतिशत बढ़कर 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95 फीसदी बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। व्यापार अधिशेष 2024-25 के 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया। जिन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ भारत का निर्यात घटा है, उनमें नीदरलैंड, ब्रिटेन, सिंगापुर, बांग्लादेश, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका और मलयेशिया शामिल हैं। जिन प्रमुख देशों के साथ 2025-26 में आयात बढ़ा है, उनमें रूस, इराक, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, कतर और ताइवान शामिल हैं।

  • भारत अब रूस से नहीं खरीद पाएगा सस्ता तेल…. अमेरिका ने फिर लगाई पाबंदी

    भारत अब रूस से नहीं खरीद पाएगा सस्ता तेल…. अमेरिका ने फिर लगाई पाबंदी


    वाशिंगटन।
    ईरान युद्ध (Iran War) के बाद गहराए ईंधन संकट के बीच अमेरिका (America) ने रूसी तेल (Russian oil) खरीद पर लगाई पाबंदी में ढील दी थी। इसकी मियाद 11 अप्रैल को पूरी हो गई। इस दौरान भारत ने अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद देश रूस से जमकर कच्चे तेल (Crude oil) की खरीद की। अब अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ताजा फैसले ने भारत समेत कई एशियाई देशों की चिंता बढ़ा दी है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिका रूसी और ईरानी तेल खरीद के लिए दी गई प्रतिबंधों की छूट की समय सीमा को नहीं बढ़ाएगा।

    अमेरिका का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब दुनिया के तेल बाजार में भारी अस्थिरता है। भारत जैसे देशों ने अपनी आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए इन छूटों का भरपूर लाभ उठाया था।

    क्या है पूरा मामला?
    फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं। दुनिया के तेल बाजार को स्थिर करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने एक अस्थायी नीति अपनाई थी। इसके तहत 12 मार्च को भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी गई थी। यह केवल उस तेल के लिए थी जो 11 मार्च से पहले जहाजों पर लद चुका था। इसी तरह ईरान के लिए भी 30 दिनों का लाइसेंस दिया गया था। रूस के लिए दी गई छूट 11 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई है, जबकि ईरान के लिए यह छूट 19 अप्रैल को समाप्त होने जा रही है।


    भारत के लिए बड़ा झटका

    भारत इस छूट का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियों ने पहले रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसे रूसी आपूर्तिकर्ताओं से किनारा कर लिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, छूट मिलने के बाद भारत ने रूस से लगभग 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए थे। भारत समेत कई एशियाई देशों ने अमेरिका से इन छूटों को आगे बढ़ाने की अपील की थी, जिसे अब अमेरिकी ट्रेजरी ने ठुकरा दिया है।

    ट्रंप के फैसले की खूब हुई आलोचना
    ट्रंप प्रशासन के इस रुख की अमेरिका के भीतर खासकर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा कड़ी आलोचना की जा रही थी। सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल और अल्पसंख्यक नेता चक शूमर जैसे नेताओं ने आरोप लगाया कि इस छूट से रूस को यूक्रेन के खिलाफ अपनी युद्ध मशीनरी के लिए भारी पैसा मिल रहा है।

    डेमोक्रेट्स का कहना है कि एक तरफ रूस यूक्रेन में बच्चों की हत्या कर रहा है, तो दूसरी तरफ वह ईरान को अमेरिकी सैनिकों पर हमला करने के लिए खुफिया जानकारी दे रहा है। ऐसे में उन्हें आर्थिक राहत देना खतरनाक है। ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अब कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा क्योंकि समुद्र में जो तेल 11 मार्च से पहले था, वह इस्तेमाल किया जा चुका है।


    अब आगे क्या?

    रूस और ईरान से तेल की आयात बंद होने से भारत को अब खाड़ी के अन्य देशों या अमेरिकी घरेलू बाजार पर निर्भरता बढ़ानी होगी, जो महंगा पड़ सकता है। आपूर्ति कम होने से घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। भारत को अब रूस के साथ व्यापार करने के लिए वैकल्पिक पेमेंट गेटवे जैसे रुपया-रुबल पर गंभीरता से विचार करना होगा, जो अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में न आए।

  • ईरान युद्ध के चलते कई देशों में आसमान पर पहुंचे पेट्रोल-डीजल के दाम… भारत में अब तक राहत

    ईरान युद्ध के चलते कई देशों में आसमान पर पहुंचे पेट्रोल-डीजल के दाम… भारत में अब तक राहत


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran–US–Israel War.) शुरू होने के बाद से अबतक कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम (Petrol-Diesel Price) आसमान पर पहुंच गए। फिलीपिंस में डीजल के रेट में 172 प्रतिशत उछाल आया तो म्यांमार में पेट्रोल के रेट डबल हो गए। लेकिन, भारत में पेट्रोल-डीजल के रेट में अभी राहत है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर पिछले कई साल से अटका हुआ है। यह आशंका प्रबल है कि यह राहत चुनाव के बाद छिन सकती है।


    पेट्रोल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देश

    globalpetrolprices.com के लेटेस्ट डेटा के मुताबिक पेट्रोल के सबसे अधिक दाम बढ़ाने वाले देशों में म्यांमार (101.1%), फिलीपींस (72.6%), मलेशिया (68.1%), लाओस (45.6%), जिम्बाब्वे (42.9%) पाकिस्तान (42.0%), यूएई (40.8%), कंबोडिया (40.4%) और नेपाल (39.5%)।


    डीजल के दाम सबसे अधिक बढ़ाने वाले देश

    फिलीपींस 172.0%
    लाओस 169.5%
    म्यांमार 161.4%
    मलेशिया 124.7%
    न्यूजीलैंड 89.9%
    यूएई 86.1%
    कंबोडिया 84.0%
    लेबनान 80.5%
    वियतनाम 77.9%
    ऑस्ट्रेलिया 65.3%
    स्रोत: globalpetrolprices.com


    कई देशों को क्यों बढ़ाने पड़े पेट्रोल-डीजल के दाम

    युद्ध के शुरू होने के बाद ्रबेंट क्रूड की कीमत 71 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 111 डॉलर तक पहुंच गईं। सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी, जिससे मार्च के मध्य तक ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया। 6 अप्रैल तक यह 111.73 डॉलर पर था। हालांकि, सीजफायर के बीच इसमें गिरावट आई और कीमत 95.49 डॉलर पर आ गई।

    इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा। दुनिया भर में औसत पेट्रोल कीमत 1.2 डॉलर प्रति लीटर से बढ़कर 1.44 डॉलर और डीजल 1.2 से 1.6 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गया। डेटा के अनुसार कुछ देशों में ईंधन कीमतों में विस्फोटक उछाल देखने को मिली। खासतौर पर एशिया और छोटे आयात-निर्भर देशों में दाम तेजी से बढ़े।


    भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बढ़े?

    एक ओर जब पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतो में आग लगी हई है तो दूसरी ओर भारत में शांति है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भारत में इस दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल समेत 5 राज्यों का चुनाव और सरकार द्वारा टैक्स में कटौती। केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल को महंगा होने से बचाने के लिए 10-10 रुपये टैक्स कम कर दिए। वहीं, निर्यात पर टैक्स बढ़ाया, ताकि घरेलू सप्लाई में दिक्कत न हो।

    क्या चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल हो जाएगा महंगा?
    चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक यह चर्चा आम है कि पेट्रोल-डीजल के दाम 5 राज्यों के चुनाव के बाद बढ़ जाएंगे। Macquarie Group ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेट्रोल पर कंपनियों को 18 और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। क्यांकि, एक बैरल कच्चे तेल में 10 डॉलर की बढ़ोतरी की वजह से कंपनियों को करीब 6 रुपये प्रति लीटर का नुकसान होता है।

  • EPFO अपडेट: नया फॉर्म 121 से टैक्स प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

    EPFO अपडेट: नया फॉर्म 121 से टैक्स प्रक्रिया में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली।  Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने PF खाताधारकों के लिए बड़ा बदलाव (EPFO New Rule) करते हुए नया Form 121 लागू किया है। यह फॉर्म पहले इस्तेमाल होने वाले Form 15G और Form 15H की जगह लेगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है और इसका मकसद टैक्स से जुड़े नियमों को आसान बनाना है।

    अब EPF सदस्य एक ही फॉर्म के जरिए यह घोषित कर सकते हैं कि उनकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, जिससे उनके PF पर TDS (टैक्स कटौती) नहीं लगेगा। पहले अलग-अलग उम्र के हिसाब से 15G और 15H भरना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया आसान कर दी गई है।

    क्या है Form 121 और किसे भरना जरूरी है?
    Form 121 एक यूनिफाइड डिक्लेरेशन फॉर्म है, जिसे वह व्यक्ति भर सकता है जिसकी कुल टैक्स देनदारी शून्य (Nil) है। यानी अगर आपकी सालाना आय टैक्स लिमिट से कम है, तो आप यह फॉर्म भरकर TDS कटने से बच सकते हैं।

    यह फॉर्म खासतौर पर PF निकासी, बैंक ब्याज, डिविडेंड और अन्य इनकम पर लागू होता है। हालांकि, यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है सिर्फ वही लोग इसे भरेंगे जिन्हें TDS से बचना है।

    EPFO New Rule में क्या बदला?
    EPFO ने Form 121 के साथ कुछ नए नियम भी लागू किए हैं। अब हर फॉर्म को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) दिया जाएगा, जिससे इसकी ट्रैकिंग आसान होगी। इसके अलावा, यह डेटा नियमित रूप से इनकम टैक्स विभाग को भेजा जाएगा।

    फॉर्म भरते समय अब पिछले दो साल के ITR की जानकारी देना भी जरूरी हो सकता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्ति वास्तव में टैक्स छूट के योग्य है।

    इसके अलावा EPFO डिजिटल सिस्टम भी तैयार कर रहा है, जिससे भविष्य में यह फॉर्म ऑनलाइन भरना और आसान हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, Form 121 का उद्देश्य PF सदस्यों के लिए टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है। अब एक ही फॉर्म के जरिए TDS से बचना आसान होगा, लेकिन सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।

  • इकोनॉमी को राहत: एक्सपोर्ट बढ़ा, ट्रेड डेफिसिट 20.67 अरब डॉलर पर आया

    इकोनॉमी को राहत: एक्सपोर्ट बढ़ा, ट्रेड डेफिसिट 20.67 अरब डॉलर पर आया


    नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के विदेशी व्यापार से राहत भरी खबर सामने आई है। मार्च 2026 में देश का व्यापारिक निर्यात 6.3% बढ़कर 38.92 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर रह गया। यह जानकारी Ministry of Commerce and Industry की ओर से जारी आंकड़ों में सामने आई है।

     निर्यात में मजबूती, सालाना प्रदर्शन भी बेहतर
    वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। यह पिछले वित्त वर्ष (825.26 अरब डॉलर) की तुलना में 4.22% की बढ़त दर्शाता है।
    यह आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

    आयात में गिरावट से घाटा कम
    मार्च में आयात 5.98% घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया। आयात में कमी आने से व्यापार घाटा घटा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को राहत मिली।
    विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में कमी का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की रणनीतिक खरीद में बदलाव रहा है।

    तेल रणनीति ने दिलाई राहत
    वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर आयात करने के बजाय अपने भंडार का उपयोग किया। इससे तेल आयात बिल कम हुआ और व्यापार घाटे पर सकारात्मक असर पड़ा।

     वैश्विक तनाव के बीच आया डेटा
    यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
    होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल-गैस का व्यापार होता है, वहां तनाव के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।

     भारत को मिली राहत: LPG सप्लाई जारी
    तनाव के बावजूद भारत के लिए राहत की खबर यह रही कि ईरान ने कुछ भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया।

    ‘जग विक्रम’ नामक पोत 20,400 मीट्रिक टन LPG लेकर Kandla Port पहुंचा

    ‘ग्रीन आशा’ जहाज 15,400 टन LPG के साथ Jawaharlal Nehru Port पहुंचा

    इससे देश में रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली।

     क्या है इसका व्यापक असर?

    निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा
    आयात घटने से व्यापार घाटा नियंत्रित रहेगा
    वैश्विक संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता मजबूत दिखती है

  • दिल्ली EV पॉलिसी ड्राफ्ट से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार, बिक्री में उछाल के आसार

    दिल्ली EV पॉलिसी ड्राफ्ट से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार, बिक्री में उछाल के आसार


    नई दिल्ली। देश की राजधानी Delhi में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई EV पॉलिसी (2024-2030) का ड्राफ्ट सामने आने के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आ सकता है। करीब 40,000 करोड़ रुपए के प्रावधान वाली इस नीति का मकसद न सिर्फ प्रदूषण कम करना है, बल्कि आम लोगों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से आकर्षित करना भी है।

     शुरुआती झटका, फिर तेज रफ्तार पकड़ सकता है बाजार
    Axis Direct की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल इस पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में कई खरीदार नई नीति के लागू होने का इंतजार करते हुए अपनी EV खरीद को कुछ समय के लिए टाल सकते हैं। हालांकि, जैसे ही नीति लागू होगी, तब तक जमा हुई मांग (pent-up demand) और स्पष्ट प्रोत्साहनों के कारण बाजार में तेजी से उछाल देखने को मिल सकता है।

     कब से क्या बदलेगा? बड़े फैसलों की टाइमलाइन
    इस ड्राफ्ट पॉलिसी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं-

    जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा

    अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण किया जाएगा

    यह कदम राजधानी को पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

     प्रोत्साहन और स्क्रैपेज से मिलेगा बूस्ट
    नीति में शुरुआती वर्षों में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

    पहले साल: ₹10,000 प्रति kWh (अधिकतम ₹30,000)
    दूसरे साल: ₹6,600
    तीसरे साल: ₹3,300

    इसके अलावा, पुराने वाहनों को हटाने (स्क्रैपेज) पर भी लाभ मिलेगा। हालांकि, यात्री वाहनों पर सीधी सब्सिडी खत्म कर दी गई है और कर छूट व अन्य लाभों पर जोर दिया गया है।

     कंपनियों के लिए बड़ा मौका
    रिपोर्ट के मुताबिक, वे कंपनियां जो पहले से EV सेगमेंट में निवेश कर चुकी हैं और जिनके पास मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो है, उन्हें इस नीति से सबसे ज्यादा फायदा होगा।
    दोपहिया और तिपहिया सेगमेंट में पहले से मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनियां अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं, जबकि नई कंपनियां भी इस बाजार में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं।

    हाइब्रिड वाहनों को भी मिला सहारा
    नीति में हाइब्रिड वाहनों को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। 30 लाख रुपए से कम कीमत वाले मजबूत हाइब्रिड वाहनों पर 50% तक रोड टैक्स छूट दी जाएगी, जिससे ट्रांजिशन को आसान बनाया जा सके।

     प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम
    दिल्ली लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में यह EV पॉलिसी न सिर्फ परिवहन को स्वच्छ बनाएगी, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर के पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर डालेगी।

     कुल मिलाकर क्या होगा असर?
    यह नीति लागू होने के बाद

    EV की मांग में तेज उछाल आएगा
    बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
    ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे
    प्रदूषण में कमी आएगी

  • ईंधन कीमतों पर लगाम की तैयारी, सरकार ला सकती है प्राइस स्टेबिलाइजेशन मैकेनिज्म

    ईंधन कीमतों पर लगाम की तैयारी, सरकार ला सकती है प्राइस स्टेबिलाइजेशन मैकेनिज्म


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार अब एक बड़े कदम की तैयारी में है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार ‘ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र’ (Fuel Price Stabilization Mechanism) पर गंभीरता से विचार कर रही है।

     क्यों उठी इस तंत्र की जरूरत?
    पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ते ही घरेलू बाजार में ईंधन महंगा हो जाता है, जिससे महंगाई और बढ़ती है।
    इसी समस्या से निपटने के लिए Government of India एक ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जो कीमतों में अचानक उछाल को नियंत्रित कर सके।

    कैसे काम करेगा यह तंत्र?
    रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था एक “बफर फंड” या रिजर्व सिस्टम पर आधारित होगी। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ेंगी, तब इस फंड के जरिए हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ कम किया जाएगा।
    यह मॉडल कुछ हद तक कृषि उत्पादों के मूल्य स्थिरीकरण तंत्र जैसा होगा, जहां जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक बाजार में उतारा जाता है।

    पेट्रोल-डीजल और LPG होंगे शामिल
    इस प्रस्तावित योजना में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी तीनों ईंधनों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए एक अलग “ईंधन बफर फंड” बनाने की तैयारी है, जिससे कीमतों के तेज उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सके।

     रणनीतिक भंडार से अलग होगा यह सिस्टम
    यह तंत्र भारत के मौजूदा रणनीतिक कच्चे तेल भंडार से अलग होगा। जहां रणनीतिक भंडार का मकसद आपूर्ति सुनिश्चित करना है, वहीं यह नया सिस्टम कीमतों को स्थिर रखने पर फोकस करेगा।

     कब होगा हस्तक्षेप? तय होंगे खास मानदंड
    सरकार इस बात पर भी काम कर रही है कि कब और कैसे हस्तक्षेप किया जाए। इसके लिए कुछ तय सीमाएं (थ्रेशहोल्ड) बनाई जा सकती हैं, जैस

    कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत

    वैश्विक बाजार में अस्थिरता का स्तर
    जब ये सीमाएं पार होंगी, तब सरकार बफर फंड का इस्तेमाल कर कीमतों को काबू में रखने की कोशिश करेगी।

     स्थायी सब्सिडी नहीं, सिर्फ अस्थायी राहत
    सरकार का मकसद स्थायी सब्सिडी देना नहीं है, बल्कि सिर्फ अत्यधिक उतार-चढ़ाव के समय अस्थायी राहत देना है। जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तब बफर को फिर से भर दिया जाएगा।

     आम लोगों को क्या फायदा?
    इस तंत्र के लागू होने से
    पेट्रोल-डीजल के अचानक महंगे होने का झटका कम लगेगा
    महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी
    घरेलू बजट पर दबाव घटेगा

  • रेल नेटवर्क का विस्तार: 741 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार, इलेक्ट्रिफिकेशन में बड़ी उपलब्धि

    रेल नेटवर्क का विस्तार: 741 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार, इलेक्ट्रिफिकेशन में बड़ी उपलब्धि


    नई दिल्ली। देश की लाइफलाइन मानी जाने वाली Indian Railways ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल की हैं। इस दौरान करीब 741 करोड़ यात्रियों ने ट्रेन से सफर किया, जो रेलवे की बढ़ती पहुंच और भरोसे को दर्शाता है। वहीं, ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6% हिस्सा अब विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे परिचालन और भी तेज, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल बन गया है।

     आय और माल ढुलाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रेलवे की कुल आय बढ़कर लगभग ₹80,000 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं माल ढुलाई भी बढ़कर 1,670 मिलियन टन (MT) हो गई है, जो देश की अर्थव्यवस्था में रेलवे की अहम भूमिका को मजबूत करता है।

    विद्युतीकरण में ऐतिहासिक छलांग

    2014 तक जहां सिर्फ 20% रेलवे नेटवर्क ही विद्युतीकृत था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 69,873 रूट किलोमीटर (RKM) हो गया है। यह कुल नेटवर्क का 99.6% हिस्सा है। इस उपलब्धि ने भारत को विद्युतीकरण के मामले में United Kingdom (39%), Russia (52%) और China (82%) जैसे देशों से भी आगे पहुंचा दिया है।

     डीजल की बचत, पर्यावरण को राहत

    रेलवे विद्युतीकरण के चलते 2024-25 में करीब 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई, जिससे लगभग ₹6,000 करोड़ की लागत बची। साथ ही कच्चे तेल के आयात में कमी आई, जो देश के लिए बड़ी आर्थिक राहत है।

    सुरक्षा में तकनीकी मजबूती

    रेलवे ने सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए हैं। ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 3,100 किमी से ज्यादा ट्रैक पर लागू हो चुका है और 24,400 किमी पर काम जारी है। इसके अलावा, 1,874 स्टेशनों पर वीडियो सर्विलांस सिस्टम (VSS) लगाया गया है, जिसमें AI आधारित एनालिसिस और फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग हो रहा है।

     यात्रियों को बेहतर सुविधा

    1,405 स्टेशनों पर इंटीग्रेटेड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (IPIS) लागू किया गया है, जो National Train Enquiry System से जुड़ा है। इससे यात्रियों को समय पर जानकारी और बेहतर कम्युनिकेशन मिल रहा है।

     वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों का विस्तार

    नई पीढ़ी की Vande Bharat Express ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.98 करोड़ यात्रियों ने इसमें सफर किया। अब तक यह सेवा 1 लाख ट्रिप में 9.1 करोड़ यात्रियों को ले जा चुकी है। वहीं, किफायती यात्रा के लिए Amrit Bharat Express भी शुरू की गई है, जिसकी 60 सेवाएं नेटवर्क पर चल रही हैं।

     ट्रैक और स्पीड में भी सुधार

    पिछले दशक में 54,600 किमी ट्रैक का नवीनीकरण किया गया है। 110 किमी/घंटा से ज्यादा स्पीड झेलने वाले ट्रैक की लंबाई 31,445 किमी से बढ़कर 85,000 किमी से अधिक हो गई है, जिससे ट्रेनें अब ज्यादा तेज और सुरक्षित हो गई हैं।