Category: Economy

  • मिडिल ईस्ट तनाव का गोल्ड मार्केट पर असर… कीमत में गिरावट का सिलसिला जारी

    मिडिल ईस्ट तनाव का गोल्ड मार्केट पर असर… कीमत में गिरावट का सिलसिला जारी


    नई दिल्ली।
    ग्लोबल मार्केट (Global Market) में सोने की कीमतों (Gold Prices) में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है और इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता तनाव बन रही है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने की योजना ने दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट्स में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करता है और यही असर अब सोने के बाजार पर भी दिखने लगा है।

    दरअसल, जब तेल महंगा होता है, तो महंगाई बढ़ने लगती है। इस समय कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। बढ़ती महंगाई के कारण निवेशक अब ब्याज दरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और यही वजह है कि सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    सोना एक ऐसा निवेश है, ज्यादातर मामलों में ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशक इससे दूरी बनाने लगते हैं। फिलहाल, अमेरिका में महंगाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह उम्मीद कम हो गई है कि जल्द ही ब्याज दरों में कटौती होगी। यही कारण है कि सोने की कीमतों में हाल ही में लगभग 2% तक की गिरावट देखने को मिली।

    हालांकि, पूरी तरह से तस्वीर नकारात्मक भी नहीं है। डॉलर में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट जैसे फैक्टर सोने को कुछ हद तक सपोर्ट दे रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल स्तर पर आर्थिक सुस्ती और अनिश्चितता भी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर सकती है। यही वजह है कि शुरुआती गिरावट के बाद सोने ने कुछ रिकवरी भी दिखाई।

    एक और दिलचस्प बात यह है कि फरवरी से शुरू हुए इस जियो-पॉलिटिकल तनाव के दौरान सोना करीब 10% तक गिर चुका है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह संभलने की कोशिश कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में अगर तनाव बढ़ता है या आर्थिक ग्रोथ धीमी होती है, तो सोना फिर से मजबूत हो सकता है।

    अभी सोने का बाजार कई फैक्टर्स के बीच फंसा हुआ है। इसमें एक तरफ बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का दबाव है, तो दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितता का सपोर्ट है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें, बल्कि बाजार के रुझान को समझकर ही निवेश करें।

  • भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री नई ऊंचाई पर: वित्त वर्ष 26 में AUM में जोरदार उछाल

    भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री नई ऊंचाई पर: वित्त वर्ष 26 में AUM में जोरदार उछाल


    नई दिल्ली। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 12.2 प्रतिशत बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस दौरान इंडस्ट्री के कुल एसेट बेस में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की रुचि मजबूत बनी हुई है। मार्च में इक्विटी फंड्स में इनफ्लो बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो जुलाई 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। यह संकेत देता है कि निवेशक बाजार में गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं और लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश कर रहे हैं।

    सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। मार्च में SIP इनफ्लो 32,087 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये से अधिक है। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशक बाजार की अस्थिरता के बावजूद नियमित और अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इक्विटी इनफ्लो में यह वृद्धि मुख्य रूप से वित्त वर्ष के अंत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग, बाजार में हालिया गिरावट और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण हुई है। निवेशकों ने गिरावट के समय खरीदारी को अवसर माना है, जिससे बाजार में फंड फ्लो मजबूत हुआ है।

    हालांकि, पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग में मार्च के दौरान 2.39 लाख करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो देखा गया था। डेट म्यूचुअल फंड्स में भी भारी आउटफ्लो देखने को मिला, जो 2.94 लाख करोड़ रुपये रहा। यह उतार-चढ़ाव बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता को दर्शाता है।

    गोल्ड ETF में निवेश भी घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया, जबकि फरवरी में यह 5,254.95 करोड़ रुपये था। वहीं इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जिनमें 10,054.12 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसके अलावा स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखा गया, जो क्रमशः 6,263.56 करोड़ रुपये और 6,063.53 करोड़ रुपये रहा। लार्ज-कैप फंड्स में भी 2,997.84 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया।

    कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है और निवेशक अब लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बाजार की स्थिरता और गहराई दोनों बढ़ रही हैं।

  • आईटी इंडस्ट्री में वापसी की रफ्तार: भारत में डिमांड बढ़ी, ग्रोथ आउटलुक हुआ मजबूत

    आईटी इंडस्ट्री में वापसी की रफ्तार: भारत में डिमांड बढ़ी, ग्रोथ आउटलुक हुआ मजबूत


    नई दिल्ली। भारत के आईटी सेक्टर को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार देश का आईटी उद्योग धीरे-धीरे रिकवरी की राह पर लौट रहा है और आने वाले समय में ग्रोथ आउटलुक में भी सुधार देखने को मिल सकता है। निवेशकों की सतर्कता के बावजूद मांग और आय के संकेतों में क्रमिक सुधार दर्ज किया जा रहा है, जिससे सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं।

     रिपोर्ट में कहा गया है कि भर्ती गतिविधियों में बढ़ोतरी, मैनेजमेंट की स्थिर टिप्पणी और क्लाउड सर्विसेज से होने वाली आय में लगातार सुधार यह दर्शाता है कि सेक्टर अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में आईटी सेवाओं की मांग भी धीरे-धीरे बेहतर हो रही है।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट से भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों के मार्जिन मजबूत होने की संभावना है, जो पूरे सेक्टर के लिए लाभकारी संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुद्रा विनिमय दर का यह प्रभाव आने वाले समय में कंपनियों की कमाई को सपोर्ट करेगा।

    वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही को लेकर अनुमान लगाया गया है कि आईटी कंपनियों की आय में तिमाही आधार पर मामूली वृद्धि देखने को मिल सकती है, जबकि सालाना आधार पर इसमें बेहतर ग्रोथ दर्ज होने की संभावना है। बड़ी आईटी कंपनियों का प्रदर्शन स्थिर रहने का अनुमान है, वहीं मिडकैप कंपनियां इस सेक्टर की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन सेक्टर में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं, जबकि अन्य संबंधित क्षेत्र स्थिर बने हुए हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027 तक आईटी सेक्टर में स्थिर आय वृद्धि का अनुमान जताया गया है। इसी आधार पर वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए आय अनुमानों में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाया जा रहा है, जिससे आईटी सेक्टर में नए अवसर बन रहे हैं। भारतीय कंपनियां बड़ी टेक फर्मों के साथ साझेदारी कर रही हैं और जनरेटिव एआई तथा एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में नए प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं। इससे आने वाले वर्षों में सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर रिपोर्ट संकेत देती है कि चुनौतियों के बावजूद भारत का आईटी सेक्टर धीरे-धीरे स्थिरता और रिकवरी की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें बेहतर ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

    भारत का आईटी सेक्टर धीरे-धीरे रिकवरी दिखा रहा है और मांग व आय में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। AI, क्लाउड सर्विसेज और रुपये की कमजोरी से आने वाले समय में ग्रोथ और मजबूत होने की उम्मीद है।

  • ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी उड़ान: तेजस फाइटर जेट के इंजन रिपेयर सेंटर के लिए GE एयरोस्पेस और IAF में समझौता

    ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी उड़ान: तेजस फाइटर जेट के इंजन रिपेयर सेंटर के लिए GE एयरोस्पेस और IAF में समझौता


    नई दिल्ली। भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देते हुए अमेरिकी कंपनी GE Aerospace और भारतीय वायुसेना भारतीय वायुसेना के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत में तेजस फाइटर जेट को शक्ति देने वाले F404-IN20 इंजन के लिए एक आधुनिक रिपेयर और मेंटेनेंस डिपो स्थापित किया जाएगा। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है।

    इस नई सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब तेजस लड़ाकू विमानों के इंजन की मरम्मत और रखरखाव भारत में ही किया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि विमान की ऑपरेशनल उपलब्धता भी बढ़ेगी। अभी तक कई महत्वपूर्ण मरम्मत कार्यों के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस डिपो के शुरू होने के बाद यह निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।

    समझौते के अनुसार यह डिपो पूरी तरह भारतीय वायुसेना के स्वामित्व और संचालन में रहेगा, जबकि तकनीकी सहयोग GE एयरोस्पेस द्वारा दिया जाएगा। कंपनी विशेषज्ञ तकनीशियन, प्रशिक्षण, जरूरी उपकरण और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराएगी, जिससे भारत में ही उच्च स्तरीय इंजन मेंटेनेंस संभव हो सकेगा।

    इस समझौते को भारत के रक्षा क्षेत्र में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की तैयारियों को भी बेहतर बनाएगा। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान के लिए यह सुविधा बेहद अहम साबित होगी, क्योंकि इससे मिशन रेडीनेस और फ्लीट उपलब्धता में सुधार होगा।

    GE एयरोस्पेस की ओर से कहा गया है कि यह साझेदारी भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी के अनुसार इससे भारतीय वायुसेना को आधुनिक तकनीक और सपोर्ट तेजी से उपलब्ध होगा, जिससे संचालन और भी प्रभावी होगा।

    कंपनी पहले से ही भारत के रक्षा और विमानन क्षेत्र में सक्रिय है। इसके इंजन P-8I समुद्री निगरानी विमान, MH-60R हेलीकॉप्टर और AH-64 अपाचे जैसे प्लेटफॉर्म्स में उपयोग किए जाते हैं। इसके अलावा GE के LM2500 मरीन गैस टर्बाइन का उपयोग INS विक्रांत और शिवालिक क्लास फ्रिगेट्स में भी किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी है।

    पिछले चार दशकों से GE एयरोस्पेस भारत के एयरोस्पेस सेक्टर में सक्रिय है और पुणे स्थित इसका निर्माण संयंत्र तथा देश के कई साझेदार इसके वैश्विक सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हैं। इस नए डिपो के साथ भारत अब रक्षा मेंटेनेंस और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

  • ऑफिस लीजिंग में जबरदस्त उछाल: 5 साल में सबसे मजबूत ग्रोथ, 21 मिलियन स्क्वायर फीट के पार बाजार

    ऑफिस लीजिंग में जबरदस्त उछाल: 5 साल में सबसे मजबूत ग्रोथ, 21 मिलियन स्क्वायर फीट के पार बाजार


    नई दिल्ली। भारत के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी और सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई है। देश में ऑफिस लीजिंग की मांग वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 21.6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है। यह पिछले पांच वर्षों में दर्ज की गई सबसे मजबूत वृद्धि मानी जा रही है। इस बढ़त ने भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट को नई मजबूती दी है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाया है।

    यह जानकारी सैविल्स इंडिया की ताजा रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें कहा गया है कि मजबूत मांग के साथ-साथ आपूर्ति में गिरावट भी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में ऑफिस स्पेस की नई आपूर्ति सालाना आधार पर 28 प्रतिशत घटकर 7.9 मिलियन स्क्वायर फीट रह गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि देश में खाली पड़े ऑफिस स्पेस का स्तर घटकर कुल उपलब्ध स्टॉक का 13.9 प्रतिशत रह गया, जो बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत माना जा रहा है।

    लीजिंग गतिविधियों में टेक्नोलॉजी सेक्टर की भूमिका सबसे अहम रही, जिसने कुल मांग में 32 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। इसके बाद फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर ने 22 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) सेक्टर की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत का ऑफिस मार्केट तेजी से विविधता की ओर बढ़ रहा है और सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रह गया है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बड़े आकार के ऑफिस स्पेस की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। कुल लीजिंग में एक लाख स्क्वायर फीट या उससे अधिक के सौदों की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत रही, जो यह दर्शाता है कि बड़ी कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशन का विस्तार कर रही हैं। वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) भी इस वृद्धि को लगातार सपोर्ट कर रहे हैं, जिससे बड़े शहरों में कमर्शियल डिमांड बढ़ी है।

    शहरों के प्रदर्शन की बात करें तो बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां आईटी-बीपीएम कंपनियों की मजबूत मौजूदगी के कारण ऑफिस लीजिंग 6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। यहां सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 3.6 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की। वहीं हैदराबाद ने सबसे तेज उछाल दिखाया, जहां 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मांग 4.3 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। पुणे में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग हुई, जबकि मुंबई में 2.8 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का ऑफिस मार्केट लगातार मजबूत हो रहा है। कंपनियां भारत को अपने विस्तार और निवेश के लिए सुरक्षित और लाभकारी बाजार के रूप में देख रही हैं। आने वाले समय में भी इस सेक्टर में स्थिर और मजबूत ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर आईटी, बीएफएसआई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के चलते।

  • लोन का गारंटर बनने से पहले सावधान! ये कानून जानना जरूरी, वरना चुकाना पड़ सकता है पूरा कर्ज

    लोन का गारंटर बनने से पहले सावधान! ये कानून जानना जरूरी, वरना चुकाना पड़ सकता है पूरा कर्ज


    नई दिल्ली। जब हम लोन लेने के लिए आवेदन करते हैं तो गारंटर की जरूरत पड़ती ही है। किसी दोस्त या रिश्तेदार की मदद के लिए लोग अक्सर बिना सोचे-समझे लोन में गारंटर बन जाते हैं, लेकिन यह फैसला कई बार भारी पड़ सकता है। Loan Guarantor बनने का मतलब सिर्फ औपचारिकता नहीं होता, बल्कि आप कानूनी रूप से उस लोन की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ले लेते हैं।

    अगर लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर EMI नहीं भरता या डिफॉल्ट कर देता है, तो बैंक सीधे गारंटर से पैसे वसूल सकता है जो कि कानून सम्मत है। कई मामलों में गारंटर को पूरा बकाया चुकाना पड़ता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो सकती है।

    Loan Guarantor पर कब आती है कानूनी जिम्मेदारी
    भारतीय कानून के तहत, खासकर Indian Contract Act 1872 के अनुसार, गारंटर (Surety) की जिम्मेदारी उधार लेने वाले (Principal Borrower) के बराबर मानी जाती है। लोन लेने वाला व्यक्ति अगर चुकाने में असमर्थता जता रहा है तो लोन गारंटर की जिम्मेदारी भी उतनी ही बनती है। इसका मतलब यह है कि अगर borrower पैसा नहीं चुकाता, तो बैंक सीधे गारंटर से वसूली कर सकता है, बिना पहले borrower पर पूरी कार्रवाई किए। यही वजह है कि गारंटर बनना एक बड़ा कानूनी जोखिम माना जाता है।

    गारंटर बनने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
    गारंटर बनने से पहले यह जरूरी है कि आप उस व्यक्ति की वित्तीय स्थिति को अच्छी तरह समझ लें, जिसके लिए आप गारंटी दे रहे हैं। साथ ही लोन की शर्तें और दस्तावेज ध्यान से पढ़ें। ध्यान रखें कि डिफॉल्ट होने पर आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको खुद लोन लेने में परेशानी आ सकती है।

    कुल मिलाकर, गारंटर बनना एक बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए भावनाओं में आकर नहीं बल्कि पूरी जानकारी और समझ के साथ ही यह फैसला लेना चाहिए।

  • सुरों की विदाई पर भावुक हुए गौतम अदाणी: "अमर रहेगी आशा भोसले की विरासत, सदियों तक गूँजेगी वो आवाज़"

    सुरों की विदाई पर भावुक हुए गौतम अदाणी: "अमर रहेगी आशा भोसले की विरासत, सदियों तक गूँजेगी वो आवाज़"



    नई दिल्ली।  भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सुरों की जादूगर और लाखों दिलों की धड़कन रहीं आशा भोसले ने 92 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बीते कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी और उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।

    आठ दशकों तक चला सुरों का जादू

    40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत करने वाली आशा भोसले ने संगीत की दुनिया में एक लंबा और शानदार सफर तय किया। उन्होंने बिमल रॉय, राज कपूर जैसे दिग्गजों के साथ काम किया और ओ. पी. नैय्यर, ए. आर. रहमान जैसे महान संगीतकारों के साथ मिलकर कई यादगार गीत दिए। शुरुआत में उन्होंने लो-बजट फिल्मों में गाकर पहचान बनाई, लेकिन 1957 की फिल्म नया दौर ने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    हर दौर की आवाज, हर दिल की धड़कन

    आशा भोसले की आवाज ने हर जॉनर में अपनी छाप छोड़ी। मोहम्मद रफी के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही। ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘ये मेरा दिल’ जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
    1966 में आर. डी. बर्मन के साथ फिल्म तीसरी मंजिल के गानों ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वहीं 1981 की फिल्म उमराव जान में गाई गई गज़लों ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया और उनकी गायकी की गहराई को साबित किया।

    रिकॉर्ड, सम्मान और अमर विरासत

    आशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए और उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण और कई राष्ट्रीय व फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनकी आवाज सिर्फ गाने नहीं थी, बल्कि एक एहसास थी, जिसने पीढ़ियों को जोड़े रखा।

    देशभर में शोक, हमेशा जिंदा रहेंगी यादें

    आशा भोसले के निधन पर देशभर में शोक की लहर है। संगीत, फिल्म और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनकी मधुर आवाज, उनके गीत और उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी—एक ऐसी धरोहर, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी महसूस करती रहेंगी।

  • स्पेस अपडेट: Northrop Grumman CRS-24 मिशन लॉन्च की तैयारी में, जानें कैसे देखें लाइव

    स्पेस अपडेट: Northrop Grumman CRS-24 मिशन लॉन्च की तैयारी में, जानें कैसे देखें लाइव


    नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने Northrop Grumman के कमर्शियल रिसप्लाई सर्विसेज-24 (CRS-24) मिशन के लॉन्च की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह अहम मिशन 11 अप्रैल को भारतीय समयानुसार शाम 5:11 बजे लॉन्च किया जाएगा, जिस पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं।

    ISS के लिए 5000 किलो सामान

    इस मिशन के तहत Cygnus XL spacecraft लगभग 11,000 पाउंड (करीब 5,000 किलोग्राम) वैज्ञानिक उपकरण, रिसर्च सामग्री और जरूरी सप्लाई लेकर International Space Station (ISS) की ओर रवाना होगा। यह साइगनस का उन्नत और बड़ा वर्जन है, जो सौर ऊर्जा से संचालित होता है।

     फाल्कन 9 से होगा प्रक्षेपण

    इस मिशन को SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के जरिए फ्लोरिडा स्थित Cape Canaveral Space Force Station से लॉन्च किया जाएगा। यह लॉन्च स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स-40 से होगा।

    13 अप्रैल को ISS से जुड़ेगा स्पेसक्राफ्ट

    लॉन्च के दो दिन बाद, 13 अप्रैल को ISS पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री Canadarm2 robotic arm की मदद से इस स्पेसक्राफ्ट को कैप्चर करेंगे। इसके बाद इसे यूनिटी मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा, ताकि सामान को सुरक्षित तरीके से उतारा जा सके।

    कई अहम वैज्ञानिक प्रयोग भेजे जा रहे

    इस मिशन में कई महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं:

    क्वांटम साइंस को आगे बढ़ाने के लिए कोल्ड एटम लैब मॉड्यूल
    कैंसर और खून की बीमारियों के इलाज के लिए स्टेम सेल रिसर्च हार्डवेयर
    आंत के माइक्रोबायोम का अध्ययन
    स्पेस वेदर को समझने के लिए एडवांस रिसीवर
    ये प्रयोग भविष्य में चिकित्सा, कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।


    अंतरिक्ष यात्री के नाम पर रखा गया नाम

    इस स्पेसक्राफ्ट का नाम नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री Steven R. Nagel के सम्मान में “SS स्टीवन आर नागेल” रखा गया है। यह अक्टूबर 2026 तक ISS से जुड़ा रहेगा और बाद में कचरे के साथ पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाएगा।

    यहां देख सकेंगे लाइव लॉन्च

    नासा ने इस ऐतिहासिक लॉन्च की लाइव स्ट्रीमिंग NASA+, Amazon Prime Video और यूट्यूब पर उपलब्ध कराई है। लाइव कवरेज भारतीय समयानुसार शाम 4:50 बजे से शुरू होगी।

  • गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी

    गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते तेजी देखने को मिली है। सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक हालात ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है।

    सोने में 1.65% साप्ताहिक उछाल

    इस हफ्ते सोने की कीमतों में 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने के जून फ्यूचर्स हल्की बढ़त के साथ करीब 1,52,690 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते नजर आए। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 999 प्योरिटी वाले सोने का भाव बढ़कर 1,50,327 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो सप्ताह की शुरुआत से ऊंचा स्तर है।

     चांदी भी चमकी, कीमतों में मजबूती

    चांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख बना रहा। एमसीएक्स पर मई फ्यूचर्स 2,43,300 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करते दिखे।
    आईबीजेए के मुताबिक, 999 प्योरिटी वाली चांदी 2,39,934 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में मजबूत बढ़त दर्शाता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमेक्स (COMEX) पर सोना लगभग 3% की साप्ताहिक बढ़त के साथ 4,787 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि 5,000 डॉलर का स्तर एक बड़ा रेजिस्टेंस है, जिसे पार करने पर तेजी और तेज हो सकती है।

    डॉलर की कमजोरी और फेड नीति बनी वजह

    अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और सीजफायर बातचीत के चलते डॉलर पर दबाव बना है। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर नए सिरे से आकलन शुरू किया है।
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत हुई है।

    बाजार में संतुलन, लेकिन सतर्कता बरकरार

    कमोडिटी बाजार इस हफ्ते संतुलित लेकिन सतर्क माहौल में रहा। हालिया उतार-चढ़ाव के बाद अब कीमतों में स्थिरता के शुरुआती संकेत भी देखने को मिल रहे हैं, हालांकि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।


    सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर

    विशेषज्ञों के अनुसार:

    सोना: 1,48,000–1,46,000 रुपए मजबूत सपोर्ट, 1,54,000–1,55,000 रुपए रेजिस्टेंस
    चांदी: 2,30,000–2,25,000 रुपए सपोर्ट, गहरा सपोर्ट 2,05,000–2,00,000 रुपए साथ ही डॉलर-रुपया (USD/INR) की चाल आगे भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • निवेशकों के लिए भारत सुरक्षित और खुला बाजार, SEBI प्रमुख ने जताया भरोसा

    निवेशकों के लिए भारत सुरक्षित और खुला बाजार, SEBI प्रमुख ने जताया भरोसा


    नई दिल्ली।भारत आज भी वैश्विक निवेशकों के लिए एक खुला, स्थिर और आकर्षक बाजार बना हुआ है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि मजबूत आर्थिक आधार, तेजी से बढ़ता निवेशक वर्ग और सुधार-आधारित नीतियां भारत को वैश्विक पूंजी के लिए खास बनाती हैं।

    🇺🇸 सैन फ्रांसिस्को में निवेशकों से संवाद

    यह बयान सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान दिया गया, जिसे भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में वैश्विक निवेशकों, वेंचर कैपिटल फर्म्स और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।

    पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित रेगुलेटरी सिस्टम

    सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामकीय ढांचा पारदर्शी, परामर्श-आधारित और तकनीक-संचालित है। सेबी का फोकस ऐसी नीतियों पर है जो जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश को आसान बनाएं और पूंजी बाजार की स्थिरता बनाए रखें।

    उन्होंने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन और री-केवाईसी प्रक्रिया को आसान किया गया है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ता उपयोग, मजबूत आईपीओ बाजार और वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) की बढ़ती भूमिका बाजार को और गहराई दे रही है।

    घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी

    भारत के पूंजी बाजार की एक बड़ी ताकत घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है। इससे बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी भरोसे का संकेत है।

    मजबूत आर्थिक संकेतक दे रहे सहारा

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियंत्रित महंगाई, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और संतुलित बाहरी खाते भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देते हैं। यही कारण है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

    भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

    इस मौके पर के. श्रीकर रेड्डी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और इसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।

    वहीं रामकृष्णन मुकुंदन ने सरकार, उद्योग और वैश्विक निवेशकों के बीच सहयोग को भारत की भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति वैश्विक साझेदारी, खासकर अमेरिका के साथ, पर निर्भर करेगी।

    निवेश माहौल को और बेहतर बनाने पर जोर

    सत्र के दौरान निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच खुली चर्चा हुई। इसमें नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, क्रॉस-बॉर्डर निवेश नियमों में स्पष्टता लाने, डीप-टेक सेक्टर में फंडिंग बढ़ाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को तेज करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।