Category: Economy

  • जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत उपलब्ध न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद देशभर के परिवारों के लिए स्वास्थ्यवर्धक पोषण सप्लीमेंट को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आवश्यक पोषण उत्पादों को कम कीमत पर उपलब्ध कराकर आम लोगों के स्वास्थ्य संबंधी खर्च को कम करना और संतुलित पोषण को बढ़ावा देना है।

    सरकार के मुताबिक, जन औषधि केंद्रों पर विभिन्न आयु वर्ग और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें प्रोटीन बार, इम्यूनिटी बार, महिलाओं के लिए विशेष प्रोटीन सप्लीमेंट, माल्ट आधारित पोषण आहार तथा प्रोटीन पाउडर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को बच्चों, कामकाजी लोगों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और फिटनेस के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, जन औषधि प्रोटीन बार और इम्यूनिटी बार 35 ग्राम के चॉकलेट पैक में उपलब्ध हैं। वहीं महिलाओं के लिए तैयार किए गए विशेष प्रोटीन बूस्ट को चॉकलेट और वनीला फ्लेवर में 250 ग्राम पैक के रूप में उपलब्ध कराया गया है। सरकार का कहना है कि इन उत्पादों का उद्देश्य रोजमर्रा के आहार में अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है ताकि विभिन्न वर्गों की पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

    जन औषधि योजना के अंतर्गत पोषण रेंज में माल्ट आधारित न्यूट्रिशनल फूड भी शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, यह उत्पाद आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध है और पूरे परिवार के लिए दैनिक पोषण का एक उपयोगी विकल्प माना जाता है। 500 ग्राम के सामान्य माल्ट पैक के साथ कोको फ्लेवर वाला विकल्प भी उपलब्ध है। इसके अलावा कम मात्रा में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छोटे सैशे पैक भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे कम बजट वाले परिवारों को भी इन उत्पादों तक आसान पहुंच मिल सके।

    सरकार का कहना है कि विभिन्न पैक आकार उपलब्ध होने से उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और आर्थिक क्षमता के अनुसार उत्पाद चुन सकते हैं। इन पोषण उत्पादों को तैयार करना भी आसान है और नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त माना गया है। इससे परिवारों को कम लागत में अतिरिक्त पोषण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    फिटनेस और प्रोटीन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए योजना के तहत 100 प्रतिशत व्हे प्रोटीन पाउडर और जन औषधि प्रोटीन पाउडर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, ये उत्पाद दैनिक प्रोटीन की आवश्यकता पूरी करने के साथ-साथ मांसपेशियों की रिकवरी में भी सहायक माने जाते हैं। विशेष रूप से व्यायाम करने वाले लोगों और अधिक प्रोटीन की आवश्यकता वाले उपभोक्ताओं के लिए इन्हें उपयोगी विकल्प बताया गया है।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों को आम नागरिकों तक किफायती दरों पर पहुंचाना है। सरकार का कहना है कि न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों को योजना में शामिल करने से अब लोगों को केवल सस्ती दवाएं ही नहीं, बल्कि कम कीमत पर पोषण संबंधी उत्पाद भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध इन उत्पादों से परिवारों का स्वास्थ्य व्यय कम करने, संतुलित पोषण को प्रोत्साहित करने और विभिन्न आय वर्ग के लोगों तक आवश्यक पोषण उत्पाद पहुंचाने में मदद मिल रही है। आने वाले समय में भी इस श्रेणी में नए उत्पाद शामिल किए जाने की संभावना पर काम जारी है।

  • 8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    8वें वेतन आयोग पर संसद में पहली बार फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट पर चर्चा, सरकार ने दिया बड़ा जवाब

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे आठवें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। वेतन वृद्धि, फिटमेंट फैक्टर और फैमिली यूनिट जैसे मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों की ओर से लगातार मांगें उठाई जा रही हैं। इसी बीच संसद में पहली बार इन दोनों अहम विषयों पर विस्तार से सवाल-जवाब हुए, जिससे लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें आयोग की आगामी प्रक्रिया पर टिक गई हैं।

    संसद में हुई चर्चा के दौरान सरकार से पूछा गया कि आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर तय करते समय किन मानकों को आधार बनाया जाएगा और क्या फैमिली यूनिट की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि इन सभी विषयों पर अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही लिया जाएगा। आयोग को स्वतंत्र रूप से अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

    फिटमेंट फैक्टर वह महत्वपूर्ण गुणांक होता है जिसके आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के मूल वेतन और पेंशन में संशोधन किया जाता है। नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर पुराने मूल वेतन को निर्धारित फिटमेंट फैक्टर से गुणा कर नया वेतन तय किया जाता है। यही कारण है कि कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को अधिक रखने की है ताकि वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

    वर्तमान में विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से फिटमेंट फैक्टर को 3.68 तक रखने की मांग की जा रही है। वहीं कुछ अन्य संगठन इसे 3 से 3.5 के बीच निर्धारित करने की पैरवी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए बेहतर फिटमेंट फैक्टर तय किया जाना चाहिए। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    फैमिली यूनिट को लेकर भी कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने अपनी मांग दोहराई है। उनकी मांग है कि वर्तमान व्यवस्था में परिवार की परिभाषा का विस्तार किया जाए और परिवार के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर पांच की जाए, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए। संसद में इस मुद्दे को भी उठाया गया और सरकार से इस संबंध में नीति स्पष्ट करने का आग्रह किया गया। हालांकि सरकार ने कहा कि इस विषय पर भी आयोग अपनी सिफारिशों के आधार पर विचार करेगा।

    सरकार ने यह भी बताया कि आठवें वेतन आयोग की बैठकें लगातार जारी हैं और आयोग विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। आगामी बैठक 7 अगस्त को दिल्ली में आयोजित होगी। इसके बाद सितंबर महीने में चेन्नई और पुडुचेरी में भी बैठकें प्रस्तावित हैं। आयोग ने संबंधित संगठनों से आग्रह किया है कि वे केवल अपने निर्धारित क्षेत्र की बैठकों में ही भाग लें, क्योंकि आयोग स्वयं विभिन्न राज्यों का दौरा कर सुझाव एकत्र कर रहा है।

    फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा और वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी। सरकार ने साफ किया है कि आयोग की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में फिलहाल सभी की नजरें आयोग की आगामी बैठकों और अंतिम सिफारिशों पर बनी हुई हैं।

  • आईटीआर फाइलिंग ने पार किया 5 करोड़ का आंकड़ा, आयकर विभाग बोला- अंतिम दिन की जल्दबाजी से बचें

    आईटीआर फाइलिंग ने पार किया 5 करोड़ का आंकड़ा, आयकर विभाग बोला- अंतिम दिन की जल्दबाजी से बचें

    नई दिल्ली । असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। निर्धारित अंतिम तारीख 31 जुलाई से ठीक पहले 5 करोड़ से अधिक करदाताओं ने अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही आयकर विभाग ने शेष पात्र करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम दिन तक इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपना रिटर्न दाखिल कर लें। विभाग का कहना है कि समय रहते रिटर्न फाइल करने से अंतिम समय में संभावित तकनीकी दिक्कतों और अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सकता है।

    आयकर विभाग ने अपने आधिकारिक संदेश के माध्यम से बताया कि असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 5 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न सफलतापूर्वक दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने विशेष रूप से उन करदाताओं को सलाह दी है, जिन्हें आईटीआर-1 या आईटीआर-2 फॉर्म के माध्यम से रिटर्न दाखिल करना है, वे अपने दस्तावेजों का मिलान करने के बाद बिना देरी के रिटर्न जमा करें। विभाग का मानना है कि अंतिम दिन बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के एक साथ पोर्टल पर आने से तकनीकी दबाव बढ़ सकता है, जिससे रिटर्न दाखिल करने में परेशानी हो सकती है।

    31 जुलाई की समयसीमा उन करदाताओं के लिए निर्धारित है, जिनके खातों का ऑडिट कराना आवश्यक नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और अन्य सामान्य करदाताओं के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्धारित समय के भीतर रिटर्न दाखिल करने से आगे की प्रक्रिया भी सुगमता से पूरी हो सकती है और आवश्यक होने पर रिफंड की प्रक्रिया भी समय पर शुरू हो सकती है।

    विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी करदाता अपने वित्तीय विवरणों का सावधानीपूर्वक सत्यापन अवश्य करें। इसके लिए फॉर्म-16, वार्षिक सूचना विवरण, फॉर्म-26एएस, बैंक स्टेटमेंट तथा आय से संबंधित अन्य दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है। यदि किसी दस्तावेज में दर्ज जानकारी और रिटर्न में भरी गई जानकारी में अंतर पाया जाता है, तो भविष्य में नोटिस या स्पष्टीकरण की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए विभाग ने सही और पूर्ण जानकारी के आधार पर रिटर्न दाखिल करने पर जोर दिया है।

    आयकर विभाग पिछले कई दिनों से लगातार करदाताओं को समय पर रिटर्न दाखिल करने के लिए जागरूक कर रहा है। विभाग का कहना है कि अंतिम समय तक प्रतीक्षा करने की प्रवृत्ति के कारण पोर्टल पर अचानक अत्यधिक ट्रैफिक बढ़ जाता है, जिससे तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में समय रहते प्रक्रिया पूरी करना करदाताओं के हित में रहेगा और अनावश्यक तनाव से भी बचाव होगा।

    पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े भी आयकर प्रणाली में बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में 31 मार्च 2025 तक 9 करोड़ से अधिक करदाताओं ने आयकर रिटर्न दाखिल किए थे। इनमें से 8.64 करोड़ रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन भी पूरा किया गया था। इसी अवधि में 4,35,008 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समय पर और सही तरीके से रिटर्न दाखिल करने वाले करदाताओं को प्रक्रिया का लाभ तेजी से मिल सकता है। ऐसे में विभाग ने एक बार फिर सभी पात्र करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम तारीख से पहले अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर निर्धारित प्रक्रिया को समय पर पूरा करें।

  • मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    नई दिल्ली । देश के हेल्थकेयर सेक्टर की प्रमुख अस्पताल श्रृंखलाओं में शामिल मनीपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का ₹9,275.22 करोड़ का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) निवेशकों के लिए खुल चुका है। कंपनी इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से अपने विस्तार की योजनाओं को गति देने के साथ-साथ कर्ज का बोझ कम करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। पहले दिन मिले शुरुआती निवेशकों के रुझान के बाद बाजार में यह चर्चा तेज है कि इस आईपीओ में निवेश करना कितना लाभदायक हो सकता है और किन निवेशकों के लिए यह अवसर उपयुक्त माना जा रहा है।

    मनीपाल हेल्थ देश की सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखलाओं में गिनी जाती है। कंपनी के नेटवर्क में 13,000 से अधिक बेड उपलब्ध हैं और पिछले कुछ वर्षों में इसने नए अस्पताल स्थापित करने के साथ-साथ अस्पतालों के अधिग्रहण के जरिए अपने कारोबार का लगातार विस्तार किया है। मजबूत ब्रांड पहचान, व्यापक उपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लंबे अनुभव ने कंपनी को उद्योग की प्रमुख संस्थाओं में शामिल किया है।

    कंपनी की एक बड़ी विशेषता इसके प्रमोटर समूह और संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी मानी जा रही है। वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित निवेशकों की मौजूदगी से कंपनी की विश्वसनीयता को मजबूती मिली है। साथ ही, बीते वर्षों में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है, जिससे इसके भविष्य की विकास संभावनाओं को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

    आईपीओ के मूल्यांकन को भी उद्योग के अन्य सूचीबद्ध अस्पताल समूहों की तुलना में प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर ₹560 से ₹590 का प्राइस बैंड तय किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मूल्यांकन बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संतुलित दिखाई देता है। सार्वजनिक निर्गम से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कंपनी अपने मौजूदा कर्ज को कम करने में लगाएगी, जिससे भविष्य में ब्याज व्यय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इससे कंपनी की लाभप्रदता और नकदी प्रवाह दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    हालांकि निवेशकों के सामने कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। कंपनी की आय का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्नाटक से आता है, जिससे किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर अधिक निर्भरता का जोखिम बना रहता है। यदि उस क्षेत्र में कारोबार प्रभावित होता है तो कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। हालांकि कंपनी अन्य राज्यों में नए अस्पताल शुरू करने और अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है, जिससे भविष्य में यह निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस आईपीओ से पहले दिन भारी प्रीमियम पर लिस्टिंग की संभावना सीमित हो सकती है। इसलिए केवल अल्पकालिक मुनाफे या लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। इसके विपरीत, जिन निवेशकों का निवेश दृष्टिकोण तीन वर्ष या उससे अधिक का है, उनके लिए यह आईपीओ बेहतर विकल्प माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग, कंपनी का मजबूत प्रबंधन और विस्तार की योजनाएं इसे लंबी अवधि में संभावनाओं वाला निवेश बना सकती हैं।

    मनीपाल हेल्थ का आईपीओ 29 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक निवेशकों के लिए खुला है। कंपनी इस निर्गम के जरिए कुल ₹9,275.22 करोड़ जुटाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें नए शेयर जारी करने के साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम 25 शेयरों का एक लॉट निर्धारित किया गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्गम उन निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है जो गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश के माध्यम से स्थिर रिटर्न की तलाश कर रहे हैं।

  • सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट

    सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट


    नई दिल्ली ।
    अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के बाद गुरुवार को वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद बाजार में मुनाफावसूली और निवेशकों की बदली रणनीति के कारण कीमतों में फिर नरमी आ गई। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया, जहां सोने और चांदी के ताजा भाव में बदलाव दर्ज किया गया।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखने का निर्णय लिया। बाजार पहले से ही इस फैसले की संभावना जता रहा था, लेकिन निवेशकों की निगाहें महंगाई और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर फेड नेतृत्व की टिप्पणियों पर टिकी रहीं। महंगाई को निर्धारित लक्ष्य के करीब लाने की चुनौती बरकरार रहने के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी ध्यान दिया।

    फेड के फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत में तेजी आई और यह लगभग 4,078 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतें 4,080 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी छूती दिखाई दीं। हालांकि यह तेजी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी और बाद में बाजार में बिकवाली बढ़ने से सोने का भाव घटकर करीब 4,058 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी शुरुआती मजबूती के बाद इसी तरह का रुख देखने को मिला।

    वैश्विक बाजार में आई इस हलचल का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,47,000 रुपये के स्तर तक पहुंच गई। वहीं चांदी के दाम में भी बढ़त दर्ज की गई और इसका भाव करीब 2,25,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और डॉलर की चाल का असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी घरेलू कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

    वायदा बाजार में भी सोने के दाम मजबूत रहे। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 10 ग्राम सोना लगभग 570 रुपये की बढ़त के साथ 1,42,192 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसके विपरीत एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में कमजोरी रही और इसका भाव करीब 852 रुपये घटकर 2,16,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि हाजिर और वायदा बाजार में निवेशकों की रणनीति अलग-अलग बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स की चाल और केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं आर्थिक संकेतकों में सुधार और डॉलर की मजबूती की स्थिति में कीमतों पर दबाव भी देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और घरेलू बाजार के रुझानों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है, इसलिए निवेश संबंधी निर्णय बाजार की मौजूदा स्थिति और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर लेना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

  • फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    नई दिल्ली । अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के फैसले से अमेरिकी निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार में तेज बिकवाली दर्ज की गई। दूसरी ओर, वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत स्थिर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    अमेरिका में डॉऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज कारोबार के दौरान 1,100 अंकों से अधिक तक फिसल गया। इसके साथ ही नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांकों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को ब्याज दरों को लेकर अधिक स्पष्ट संकेतों की उम्मीद थी, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा मौजूदा दरों को बरकरार रखने के फैसले ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके बाद निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    फेडरल रिजर्व ने अपनी नीति समीक्षा के बाद ब्याज दरों को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने यह संकेत भी दिया कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की प्रक्रिया अभी जारी है और भविष्य के निर्णय आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे। इसी कारण बाजार को निकट भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी।

    अमेरिकी बाजार में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया, हालांकि विभिन्न देशों के बाजारों में मिश्रित रुख रहा। कुछ प्रमुख एशियाई सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संभावित प्रभाव का आकलन करने में जुटे हुए हैं।

    वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान के साथ खुले। बाजार में ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि बैंकिंग और रियल एस्टेट क्षेत्र के कुछ शेयरों पर दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा और भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति ने बाजार को शुरुआती समर्थन दिया।

    विदेशी बाजारों की हलचल के बीच भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह पैसे मजबूत होकर 95.59 के स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार की स्थिरता और विदेशी मुद्रा प्रवाह से रुपये को समर्थन मिला, हालांकि वैश्विक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। वहीं भारतीय बाजार में भी विदेशी निवेश, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक संकेतकों का असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार की मजबूती के बीच संतुलन पर बनी हुई हैं।

  • TDS कट चुका तो कल तक फाइल करें ITR…. वरना हो सकता है नुकसान

    TDS कट चुका तो कल तक फाइल करें ITR…. वरना हो सकता है नुकसान


    नई दिल्ली।
    आपकी सैलरी (Salary), फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit-FD), प्रॉपर्टी बेचने या किसी अन्य ट्रांजेक्शन (Transaction) पर टीडीएस (TDS) कट चुका है। लेकिन आपने 31 जुलाई 2026 तक इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return- ITR) दाखिल नहीं किया है। तो इसे हल्के में लेने की गलती न करें। सिर्फ टैक्स कट जाने या टैक्स जमा कर देने से आपकी जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। आईटीआर फाइल नहीं करने पर आपको लेट फीस, ब्याज, टैक्स नोटिस और कई दूसरे नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।


    क्यों फाइल करें आईटीआर?

    टैक्स का पेमेंट करना और आईटीआर दाखिल करना दो अलग-अलग कानूनी जिम्मेदारियां हैं। अगर आपकी इनकम आईटीआर फाइल करने की लिमिट में आती है, तो टीडीएस कटने या पूरा टैक्स जमा होने के बावजूद रिटर्न फाइल करना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया जाता, तो इनकम टैक्स विभाग के रिकॉर्ड में आपकी इनकम और टीडीएस का मिलान नहीं हो पाता, जिससे विभाग की ओर से नोटिस भेजा जा सकता है।

    नहीं मिलेगा रिफंड
    अगर आपकी कुल सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये से कम है और टीडीएस कट चुका है, तो आईटीआर दाखिल करके आप उस रकम का टैक्स रिफंड ले सकते हैं। लेकिन अगर आपने रिटर्न ही दाखिल नहीं किया, तो यह पैसा वापस नहीं मिलेगा। यानी आपका ही पैसा सरकार के पास अटका रह सकता है।

    नहीं होगा ये नुकसान

    वहीं, अगर आपकी टैक्स देनदारी बनती है और आपने समय पर आईटीआर दाखिल नहीं किया, तो आपको ब्याज और लेट फीस का पेमेंट करना पड़ सकता है। इनकम टैक्स कानून की धारा 234F के तहत देरी से आईटीआर दाखिल करने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है, अगर आपकी कुल इनकम 5 लाख रुपये से अधिक है। इसके अलावा, बकाया टैक्स पर धारा 234A के तहत ब्याज भी देना पड़ सकता है।


    ये हैं नियम

    क्रिप्टो या अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) में निवेश करने वालों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। इस तरह की इनकम पर 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है और यह नियम बेसिक छूट सीमा से अलग है। यानी अगर आपकी दूसरी कोई इनकम नहीं है और सिर्फ क्रिप्टो से कमाई हुई है, तब भी टैक्स और आईटीआर से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं।


    आईटीआर फाइल करने का फायदा

    अगर आप समय पर आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं, तो भविष्य में होने वाले कुछ फायदे भी छूट सकते हैं। उदाहरण के लिए कुछ मामलों में आप अपने नुकसान को अगले सालों में एडजस्ट नहीं कर पाएंगे। साथ ही इनकम टैक्स विभाग के पास एक्सचेंज और अन्य संस्थानों से ट्रांजेक्शन की जानकारी पहले से पहुंच रही है, इसलिए रिटर्न नहीं फाइल करने पर जांच या नोटिस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

  • शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

    शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल


    नई दिल्ली । 30 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और अब निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों वैश्विक बाजारों की चाल विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी रहेगी। ऐसे में बाजार खुलने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किन वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता बढ़ती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों को हर खबर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    इन दिनों कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर होंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार को मजबूती मिलती है जबकि बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती या कमजोरी और रुपये की स्थिति भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करती है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी तेजी या गिरावट में भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जाती है। जिन लोगों की जोखिम उठाने की क्षमता कम है उन्हें एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। साथ ही पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।

    30 जुलाई का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई नए अवसर लेकर आ सकता है लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी होगा। सही जानकारी मजबूत रिसर्च और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है।

  • Xtranet Technologies IPO का अलॉटमेंट आज, 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 6% प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद, निवेशकों की बढ़ी नजरें

    Xtranet Technologies IPO का अलॉटमेंट आज, 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 6% प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद, निवेशकों की बढ़ी नजरें

    नई दिल्ली। आईटी सेक्टर की कंपनी Xtranet Technologies के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) में निवेश करने वाले निवेशकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। कंपनी के 166.80 करोड़ रुपये के IPO का अलॉटमेंट आज फाइनल होने की उम्मीद है। जिन निवेशकों ने इस इश्यू में आवेदन किया था, वे जल्द ही यह जान सकेंगे कि उन्हें शेयर आवंटित हुए हैं या नहीं। IPO को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला था और सभी श्रेणियों में अच्छी मांग देखने को मिली। अब बाजार की निगाहें अलॉटमेंट प्रक्रिया और आगामी लिस्टिंग पर टिकी हैं।

    कंपनी का IPO 23 जुलाई 2026 को निवेशकों के लिए खुला था और 27 जुलाई तक आवेदन स्वीकार किए गए। यह पूरी तरह फ्रेश इश्यू था, जिसके तहत करीब 1.31 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए गए। कंपनी ने किसी भी प्रमोटर या मौजूदा निवेशक के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं किया। शेयरों का प्राइस बैंड 120 से 127 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था और ऊपरी मूल्य पर कंपनी का प्री-आईपीओ मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 664 करोड़ रुपये रहा।

    इस IPO को कुल 12.24 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ, जो निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाता है। सबसे अधिक उत्साह गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) में देखने को मिला, जहां यह श्रेणी 26.65 गुना सब्सक्राइब हुई। खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.98 गुना और योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) का हिस्सा 7.13 गुना सब्सक्राइब हुआ। मजबूत सब्सक्रिप्शन के बाद अब निवेशकों को अलॉटमेंट और लिस्टिंग से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

    ग्रे मार्केट में भी कंपनी के शेयर सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शेयर लगभग 8 रुपये के प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं। यदि यही रुझान बना रहता है तो कंपनी के शेयर लगभग 135 रुपये के आसपास सूचीबद्ध हो सकते हैं, जो ऊपरी इश्यू प्राइस 127 रुपये की तुलना में करीब 6 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल संभावित संकेत होता है और वास्तविक लिस्टिंग बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करती है।

    कंपनी वर्ष 2002 से आईटी समाधान और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत है। इसके कारोबार में क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, सिस्टम इंटीग्रेशन, डेटा सेंटर मैनेजमेंट, एप्लीकेशन डेवलपमेंट और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सेवाएं शामिल हैं। कंपनी सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी संस्थानों को भी तकनीकी सेवाएं प्रदान करती है। इसके प्रमुख उत्पादों में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म और क्लाउड आधारित समाधान शामिल हैं।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान कुल आय बढ़कर 366 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष के 276 करोड़ रुपये से लगभग 32 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कंपनी का शुद्ध लाभ 36 प्रतिशत बढ़कर 41 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो 47 करोड़ रुपये से बढ़कर 63 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से कार्यशील पूंजी की जरूरतों, कर्ज चुकाने, सिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड तथा अन्य सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। कंपनी के शेयरों की संभावित लिस्टिंग 30 जुलाई 2026 को बीएसई और एनएसई पर होने की उम्मीद है, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

  • मामूली GMP के बावजूद HR Hygiene Products IPO में निवेशकों की दिलचस्पी, पहले दिन जोरदार बोली

    मामूली GMP के बावजूद HR Hygiene Products IPO में निवेशकों की दिलचस्पी, पहले दिन जोरदार बोली

    नई दिल्ली। एसएमई आईपीओ बाजार में एचआर हाइजीन प्रोडक्ट्स लिमिटेड के सार्वजनिक निर्गम को पहले ही दिन निवेशकों का सकारात्मक प्रतिसाद मिला। बुधवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुले 43.17 करोड़ रुपये के इस आईपीओ में शुरुआती घंटों से ही अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दिन के दौरान उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इश्यू कुल मिलाकर करीब 84 प्रतिशत सब्सक्राइब हो चुका था। निवेशकों की इस शुरुआती दिलचस्पी ने संकेत दिया है कि कंपनी के कारोबार विस्तार की योजनाओं और वित्तीय प्रदर्शन पर बाजार का भरोसा बना हुआ है।

    कंपनी का आईपीओ 29 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक निवेशकों के लिए खुला रहेगा। इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से जुटाई गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से गुजरात के राजकोट में नई विनिर्माण इकाई स्थापित करने, कर्ज कम करने और सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि नई उत्पादन क्षमता से उसके कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    सब्सक्रिप्शन के शुरुआती रुझानों में अलग-अलग निवेशक श्रेणियों से सकारात्मक भागीदारी देखने को मिली। खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्से में लगभग 64 प्रतिशत आवेदन प्राप्त हुए, जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों (एनआईआई) की श्रेणी पूरी तरह भरते हुए 122 प्रतिशत से अधिक सब्सक्राइब हो गई। वहीं, योग्य संस्थागत खरीदार (क्यूआईबी) श्रेणी में भी करीब 92 प्रतिशत तक आवेदन प्राप्त हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि विभिन्न वर्गों के निवेशकों ने कंपनी में रुचि दिखाई है।

    ग्रे मार्केट में भी कंपनी के शेयर हल्के प्रीमियम पर कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में लगभग 2 रुपये प्रति शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम दर्ज किया गया। कंपनी ने आईपीओ का मूल्य दायरा 83 से 88 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया है। मौजूदा ग्रे मार्केट प्रीमियम के आधार पर संभावित लिस्टिंग मूल्य करीब 90 रुपये प्रति शेयर आंका जा रहा है। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रे मार्केट केवल एक संकेतक होता है और अंतिम लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा।

    यह आईपीओ फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) दोनों का मिश्रण है। कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी जुटा रही है, जबकि कुछ मौजूदा शेयरधारक ऑफर फॉर सेल के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी का आंशिक विनिवेश करेंगे। खुदरा निवेशकों के लिए न्यूनतम आवेदन 1,600 शेयरों का रखा गया है, जिसके लिए ऊपरी मूल्य बैंड के अनुसार लगभग 2.81 लाख रुपये का निवेश करना होगा।

    आईपीओ के लिए शेयरों का आवंटन 3 अगस्त 2026 को संभावित रूप से अंतिम रूप दिया जाएगा, जबकि कंपनी के शेयर 5 अगस्त 2026 को बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। सार्वजनिक निर्गम से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से लगभग 14.84 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिससे बड़े निवेशकों का शुरुआती भरोसा भी सामने आया।

    एचआर हाइजीन प्रोडक्ट्स वर्ष 2016 से हाइजीन और पर्सनल केयर उत्पादों के निर्माण एवं विपणन के क्षेत्र में सक्रिय है। कंपनी सैनिटरी नैपकिन, बेबी केयर और एडल्ट केयर उत्पादों के साथ अपने कई ब्रांड संचालित करती है और व्हाइट लेबल मैन्युफैक्चरिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराती है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की आय बढ़कर 131.90 करोड़ रुपये रही, जबकि कर पश्चात लाभ 11.41 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आय और मुनाफे में दर्ज हुई इस वृद्धि को निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। अब बाजार की नजर आईपीओ के अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़ों और आगामी लिस्टिंग प्रदर्शन पर बनी रहेगी।