Category: Economy
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अनिश्चितता के दौर में गोल्ड ETF बना सुरक्षित विकल्प, AUM पहुंचा 1.7 लाख करोड़
नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर सोने पर मजबूत होता दिख रहा है। खासतौर पर डिजिटल निवेश के रूप में Gold ETF ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। मार्च 2026 में गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹1,71,468 करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर लगभग तीन गुना उछाल को दर्शाता है।पांच साल में धमाकेदार ग्रोथICRA Analytics की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड ETF ने पिछले पांच वर्षों में करीब 64.76% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है। मार्च 2021 में जहां AUM सिर्फ ₹14,122 करोड़ था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है।सिर्फ एक साल में ही AUM ₹58,887 करोड़ (मार्च 2025) से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया—यानी करीब 191% की जोरदार बढ़ोतरी।इनफ्लो भी मजबूत, लेकिन मासिक आधार पर गिरावटमार्च 2026 में गोल्ड ETF में ₹2,265 करोड़ का शुद्ध निवेश (इनफ्लो) आया, जबकि पिछले साल इसी महीने ₹77 करोड़ की निकासी हुई थी। हालांकि फरवरी 2026 के ₹5,254 करोड़ के मुकाबले मार्च में इनफ्लो करीब 56% घटा है।इस गिरावट की वजह सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी और वैश्विक जोखिम में अस्थायी कमी मानी जा रही है।क्यों बढ़ रहा है गोल्ड ETF में निवेश?विशेषज्ञों के अनुसार, दो बड़े कारण इस उछाल के पीछे हैं—वैश्विक अनिश्चितता और तनावसोने की लगातार मजबूत कीमतेंइन हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्प की तलाश में रहते हैं और सोना पारंपरिक रूप से “सेफ हेवन” माना जाता है। इसलिए Gold ETF तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का पसंदीदा विकल्पफिलहाल बाजार में 26 गोल्ड ETF स्कीम उपलब्ध हैं, जिनमें से 6 नई स्कीम वित्त वर्ष 2025-26 में लॉन्च हुई हैं।इन फंड्स ने पिछले एक साल में करीब 58% से 62% तक का रिटर्न दिया है, जबकि 5 साल का CAGR रिटर्न लगभग 26% के आसपास रहा है।विशेषज्ञ मानते हैं कि गोल्ड ETF निवेश पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और लॉन्ग टर्म रिटर्न के लिए बेहतर विकल्प है, जबकि फिजिकल गोल्ड अधिकतर पारंपरिक उपयोग के लिए खरीदा जाता है।गिरावट के बावजूद भरोसा कायमहालांकि हाल के महीनों में इनफ्लो में थोड़ी कमी आई है, लेकिन निवेश पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा अब भी इस एसेट क्लास पर कायम है और आगे भी इसमें स्थिर ग्रोथ की संभावना बनी हुई है। -

ईरान युद्ध से धीमी हुई विश्व की आर्थिक गति… IMF ने घटाया वृद्धि दर का अनुमान.. महंगाई बढ़ने का आशंका
वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) (International Monetary Fund (IMF) ने मंगलवार को कहाकि ईरान युद्ध (Iran War) ने इस वर्ष विश्व की आर्थिक गति (World Economic Dynamics) को धीमा कर दिया है। इसके चलते 2025 की तुलना में वृद्धि दर में गिरावट आने की आशंका है। आईएमएफ ने वैश्विक वृद्धि के अपने अनुमान को घटाकर 2026 के लिए 3.1 फीसदी कर दिया है। इससे पहले जनवरी महीने में इसके 3.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। यह 2025 में अनुमानित 3.4 प्रतिशत वृद्धि से धीमी होगी।
बढ़ गईं तेल और गैस की कीमतें
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों, ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने और पड़ोसी देशों में तेल रिफाइनरियों और अन्य ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर जवाबी हमलों के कारण दुनिया भर में तेल एवं गैस की कीमतों में तेजी आई है। इसके परिणामस्वरूप, आईएमएफ ने इस साल वैश्विक मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया है, जबकि जनवरी में इसके 3.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। वहीं 2025 के लिए यह 4.1 फीसदी था।
युद्ध पहले तक सब सही था
युद्ध से पहले तक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था ने आश्चर्यजनक रूप से मजबूती दिखाई थी। इन नीतियों ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और कभी आयात के लिए लगभग पूरी तरह से खुला बाजार रहे अमेरिका के चारों ओर आयात कर की दीवार खड़ी कर दी थी। लेकिन इससे नुकसान कम हुआ। इसका एक कारण यह भी था कि पिछले साल ट्रंप द्वारा घोषित शुल्क मूल रूप से कम थे।
क्या बोले आईएमएफ चीफ
डेटा केंद्रों और कृत्रिम मेधा में भारी निवेश के साथ प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी और बढ़ती उत्पादकता ने भी विश्व अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास ने मुद्राकोष के नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य के साथ ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने इस गति को रोक दिया है। गौरिंचास ने लिखा कि आईएमएफ का यह मानना था कि फारस की खाड़ी में संघर्ष अल्पकालिक होगा और इस वर्ष ऊर्जा की कीमतों में 19 फीसदी की हल्की वृद्धि होगी।उन्होंने आगे चेताया कि हालांकि इससे कहीं अधिक खराब हो सकते हैं। एक सीरियस सिनैरियो में, जिसमें ऊर्जा संकट अगले साल तक जारी रहता है और केंद्रीय बैंकों को मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, वैश्विक वृद्धि 2026 और 2027 में घटकर दो फीसदी हो सकती है। उन्होंने कहाकि अस्थायी युद्धविराम की हाल की खबरों के बावजूद, कुछ नुकसान पहले ही हो चुका है और आगे के जोखिम अभी भी बहुत अधिक हैं।
अमेरिका का क्या हाल
आईएमएफ ने इस साल अमेरिका की वृद्धि दर के अपने अनुमान को थोड़ा घटाकर 2.3 फीसदी कर दिया है। मुद्राकोष के अनुमान के अनुसार, यूरो मुद्रा साझा करने वाले 21 यूरोपीय देश इस साल सामूहिक रूप से 1.1 फीसदी की वृद्धि हासिल करेंगे, जो 2025 के 1.4 फीसदी से कम है। यूरोप प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से बुरी तरह प्रभावित है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना उन कर्ज में डूबे गरीब देशों की है जो ऊर्जा आयात करते हैं और सरकारी खर्च और कर राहत बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देने में असमर्थ हैं।रूस पर ज्यादा असर नहीं
इस संघर्ष से उभरने वाले एक प्रमुख देश रूस है, जो ऊर्जा निर्यातक होने के नाते उच्च कीमतों से लाभान्वित होगा। 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद प्रतिबंधों से बुरी तरह प्रभावित रूसी अर्थव्यवस्था के लिए आईएमएफ ने अपने अनुमान को बढ़ाकर 1.1 फीसदी कर दिया है, जो अभी भी मामूली है। -

ईरान-अमेरिका युद्ध का असर…. सोना-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी
नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों (Gold Silver Price) में आज लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान (America and Iran War) के बीच फिर से बातचीत की संभावनाओं की वजह से आज इंटरनेशनल मार्केट (International Market) गोल्ड और सिल्वर का रेट (Gold Silver Price) फिर से बढ़ा हुआ है। मौजूदा परिस्थितियों की वजह से दुनिया भर में एनर्जी संकट गहरा गया है। बता दें, पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच एक दौर की बातचीत हो गई है। लेकिन यह पूरी वार्ता विफल रही थी। दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता तब नहीं हो पाया था।
क्या है गोल्ड का ताजा रेट (Gold Latest Price)
COMEX gold की कीमतों में आज शुरुआती कारोबार के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। जिसके बाद यह 4855 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले के सत्र में सोने का भाव 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ा था। COMEX Silver के रेट भी आज बुधवार को बढ़ोतरी देखने को मिली है। चांदी की कीमतों में उछाल के बाद यह 79 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गई थी।
क्यों बढ़ रहा सोने और चांदी का रेट (Why Gold Silver prices rising)
ब्लूमबर्ग के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आने वाले दिनों में हो सकती है। न्यूयार्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले दो दिनों में बातचीत शुरू होने के संकेत दिए हैं। इन खबरों की वजह से मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। वहीं, डॉलर इंडेक्स 0.3 प्रतिशत लुढ़क चुका है। बता दें, जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से मेटल की कीमतों में 8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।
कहां तक जाएगा सोने और चांदी का रेट (Gold Silver Price Outlook)
Augmon से जुड़ी रेनिशा कहती हैं कि सोने और चांदी इस समय भी बुल रन पर सवार हैं। हालांकि, आगे का रास्ता काफी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। रेनिशा का कहना है टेक्निकल स्तर पर, “गोल्ड 4800 से 4850 डॉलर (154000 रुपये से 155000 रुपये तक) के आस-पास रेसिस्टेंस दिखा रहा है। अगर कीमतें इसके ऊपर गई तो यह फिर 5000 डॉलर (160000 रुपये) के स्तर तक जा सकती हैं।”चांदी के विषय में एक्सपर्ट की राय है कि यह 77 डॉलर (246000 रुपये) के स्तर पर रेसिस्टेंस दिखा रहा है। इसके ऊपर जाने की स्थिति में चांदी का दाम 82 डॉलर से 87 डॉलर (255000 रुपये से 265000 रुपये) के स्तर तक पहुंच सकता है।”
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एशिया के सबसे अमीर परिवारों की नई सूची जारी, अंबानी परिवार टॉप पर, AI बूम से बढ़ी दौलत
नई दिल्ली। दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के तेज़ विस्तार ने एशिया के सबसे बड़े कारोबारी परिवारों की संपत्ति में बड़ा इजाफा किया है। ब्लूमबर्ग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 2026 में एशिया के टॉप 10 सबसे अमीर परिवारों की कुल नेटवर्थ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे डेटा सेंटर ऊर्जा चिप्स और कच्चे माल की बढ़ती मांग को माना जा रहा है। साथ ही हांगकांग के रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार ने भी इन संपत्तियों को और मजबूती दी है।अंबानी परिवार सबसे आगे
इस सूची में पहला स्थान एक बार फिर अंबानी परिवार के पास है जिनकी कुल संपत्ति लगभग 89.7 अरब डॉलर करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ऊर्जा टेलीकॉम रिटेल और फाइनेंशियल सर्विसेज में लगातार विस्तार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक परिवार ने अगले कुछ वर्षों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की योजना भी बनाई है।क्वोक परिवार दूसरे स्थान पर
दूसरे नंबर पर क्वोक परिवार है जिनकी संपत्ति करीब 50.2 अरब डॉलर है। इनका मुख्य कारोबार हांगकांग का रियल एस्टेट सेक्टर है जहां हाल के समय में सुधार देखने को मिला है।सैमसंग का ली परिवार तीसरे स्थान पर
तीसरे स्थान पर ली परिवार है जिनकी संपत्ति लगभग 45.5 अरब डॉलर है। सेमीकंडक्टर और स्मार्टफोन इंडस्ट्री में सैमसंग की मजबूत पकड़ और AI व रोबोटिक्स में बढ़ता फोकस इनके विकास को आगे बढ़ा रहा है।
चौथे स्थान पर चेरावनोन्त परिवारचेरावनोन्त परिवार की कुल संपत्ति 44.8 अरब डॉलर के आसपास है। इनका चारोएन पोकफैंड ग्रुप फूड रिटेल और टेलीकॉम सेक्टर में सक्रिय है और एशिया में तेजी से विस्तार कर रहा है।
एल्युमीनियम से बढ़ी झांग परिवार की कमाईझांग परिवार की संपत्ति लगभग 44.7 अरब डॉलर है। इलेक्ट्रिक वाहनों और AI इंडस्ट्री में एल्युमीनियम की बढ़ती मांग से इनके बिजनेस को बड़ा फायदा मिला है।
त्साई परिवार की स्थिर ग्रोथत्साई परिवार लगभग 34.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर से मजबूत आय बनाए हुए है।रेड बुल से चमका यूविदया परिवार
यूविदया परिवार की संपत्ति करीब 32.9 अरब डॉलर है। रेड बुल ब्रांड ने उन्हें ग्लोबल स्तर पर मजबूत पहचान और लगातार मुनाफा दिया है।
बैंकिंग सेक्टर में हार्टोनो परिवारहार्टोनो परिवार की संपत्ति लगभग 30.2 अरब डॉलर है और इंडोनेशिया के बैंकिंग सेक्टर में इनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है।भारत के मिस्त्री और जिंदल परिवार भी सूची में
भारत के मिस्त्री परिवार की संपत्ति करीब 29.5 अरब डॉलर और जिंदल परिवार की संपत्ति लगभग 29.4 अरब डॉलर आंकी गई है। दोनों परिवार क्रमशः इंफ्रास्ट्रक्चर स्टील एनर्जी और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। -

ऑटो सेक्टर में रफ्तार: मार्च में पैसेंजर व्हीकल बिक्री 16% बढ़ी, बाजार में लौटी मजबूती
नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर से राहत भरी खबर सामने आई है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च महीने में यात्री वाहनों (Passenger Vehicles) की थोक बिक्री सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 4,42,460 यूनिट्स तक पहुंच गई। पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 3,81,358 यूनिट्स था। यह उछाल दर्शाता है कि बाजार में उपभोक्ताओं का भरोसा फिर मजबूत हुआ है और खरीदारी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।दोपहिया और तिपहिया में भी शानदार प्रदर्शन
ऑटो सेक्टर के अन्य सेगमेंट्स में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मार्च में दोपहिया वाहनों की बिक्री 19.3 प्रतिशत बढ़कर 19,76,128 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले साल यह 16,56,939 यूनिट्स थी। वहीं तिपहिया वाहनों की बिक्री में 21.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 76,273 यूनिट्स तक पहुंच गई। इन आंकड़ों से साफ है कि शहरी ही नहीं, ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में भी मांग मजबूत बनी हुई है।डीलरशिप स्टॉक और मांग बनी बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार इस तेजी के पीछे दो मुख्य कारण रहे—एक, डीलरों के पास पर्याप्त इन्वेंट्री उपलब्ध होना और दूसरा, ग्राहकों की बढ़ती मांग। फरवरी महीने में भी यात्री वाहनों की बिक्री में 10.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जो इस सकारात्मक ट्रेंड को और मजबूत करती है।आने वाले समय के संकेत भी सकारात्मक
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में ऑटो सेक्टर की थोक बिक्री 7 से 9 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। इसके पीछे त्योहारों की मजबूत मांग, हाल में जीएसटी दरों में कटौती और नए मॉडलों की लॉन्चिंग को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में उच्च आधार और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के चलते वृद्धि दर घटकर 4 से 6 प्रतिशत रह सकती है।SUV और प्रीमियम कारों का बढ़ता क्रेज
ऑटो इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है। अब ग्राहकों का झुकाव यूटिलिटी व्हीकल (SUV) और प्रीमियम सेगमेंट की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कुल यात्री वाहन बिक्री में SUV की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत हो गई है, जो यह दिखाती है कि लोग अब ज्यादा फीचर्स और बेहतर परफॉर्मेंस वाली गाड़ियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी
सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। इससे बाजार में विविधता आई है और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों को भी बढ़ावा मिल रहा है।ऑटो सेक्टर में जारी है बदलाव का दौर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ऑटो बाजार अब एक ट्रांजिशन फेज से गुजर रहा है, जहां पारंपरिक वाहनों के साथ-साथ नए फ्यूल और टेक्नोलॉजी आधारित विकल्प तेजी से जगह बना रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह बदलाव और स्पष्ट नजर आएगा। -

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से बढ़ेगी रफ्तार, गडकरी बोले-रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देहरादून में बहुप्रतीक्षित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। करीब 213 किलोमीटर लंबे इस 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण 12,000 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से किया गया है। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ता है।6 घंटे का सफर अब सिर्फ ढाई घंटे
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से नई दिल्ली से देहरादून तक की यात्रा का समय लगभग 6 घंटे से घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।‘सिर्फ सड़क नहीं, आर्थिक विकास का इंजन’
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना को देश के आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा और क्षेत्रीय विकास को गति देगा।पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस कॉरिडोर से हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी। खासतौर पर उत्तराखंड जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए यह परियोजना बेहद लाभकारी साबित होगी।आर्थिक और औद्योगिक विकास के नए अवसर
बेहतर कनेक्टिविटी से:उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा
निवेश आकर्षित होगा
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगीआधुनिक सुविधाओं से लैस हाईवे
यह कॉरिडोर अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ तैयार किया गया है:10 इंटरचेंज
3 रेलवे ओवरब्रिज (ROB)
4 बड़े पुल
12 रोडसाइड सुविधाएं
एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATM)पर्यावरण संरक्षण का भी रखा गया ध्यान
इस परियोजना में पर्यावरण संतुलन को विशेष महत्व दिया गया है।
12 किमी लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर (एशिया के सबसे लंबे में से एक)8 पशु मार्ग
2 हाथी अंडरपास
370 मीटर लंबी सुरंग (दात काली मंदिर के पास)
इन सुविधाओं से वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।आगे और मजबूत होगी कनेक्टिविटी
मंत्री ने बताया कि सहारनपुर बाईपास से हरिद्वार तक 51 किमी लंबा 6-लेन सुपररोड भी जल्द शुरू किया जाएगा, जिससे इस पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर होगी। -

इनकम टैक्स सिस्टम में सुधार: ‘फॉर्म 141’ से आसान होगी TDS प्रक्रिया
नई दिल्ली।आयकर विभाग ने टैक्स प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए ‘फॉर्म 141’ शुरू किया है। यह एक कंसोलिडेटेड चालान-कम-स्टेटमेंट है, जो अब तक इस्तेमाल हो रहे चार अलग-अलग TDS फॉर्म की जगह लेगा। इससे करदाताओं को अलग-अलग फॉर्म भरने की झंझट से राहत मिलेगी।इन चार फॉर्म की जगह लेगा नया फॉर्म
फॉर्म 141 में निम्न चार TDS फॉर्म को एक साथ शामिल किया गया है:फॉर्म 26QB – संपत्ति खरीद पर TDS
फॉर्म 26QC – किराए पर TDS
फॉर्म 26QD – कॉन्ट्रैक्ट/प्रोफेशनल भुगतान पर TDS
फॉर्म 26QE – वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) पर TDS
अब इन सभी के लिए अलग-अलग फाइलिंग की जरूरत नहीं होगी।
किन मामलों में होगा इस्तेमाल
नए नियमों के अनुसार फॉर्म 141 का उपयोग इन स्थितियों में किया जा सकेगा:₹50,000 प्रति माह तक के किराए पर TDS
₹50 लाख या उससे अधिक की संपत्ति खरीद पर TDS
ऐसे व्यक्ति/HUF द्वारा ₹50 लाख से अधिक के प्रोफेशनल, कमीशन या कॉन्ट्रैक्ट भुगतान (जो टैक्स ऑडिट के अंतर्गत नहीं आते)
क्रिप्टोकरेंसी या NFT जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर भुगतान
फॉर्म भरने के लिए जरूरी जानकारी
फॉर्म 141 भरते समय करदाताओं को निम्न जानकारी देनी होगी:कटौतीकर्ता (payer) और प्राप्तकर्ता (payee) का PAN
पता, मोबाइल नंबर और ईमेल
लेन-देन का प्रकार और भुगतान का तरीका
यह फॉर्म आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर ‘e-Pay Tax’ सेक्शन के जरिए भरा जा सकता है।
एक फॉर्म में कई विक्रेताओं की एंट्री
विशेषज्ञों के अनुसार इस नए सिस्टम में एक बड़ा बदलाव यह है कि अब फॉर्म की संख्या विक्रेताओं (sellers) के आधार पर नहीं बल्कि खरीदारों (buyers) के आधार पर तय होगी। यानी एक ही फॉर्म में कई विक्रेताओं की जानकारी दर्ज की जा सकती है, जिससे प्रक्रिया और आसान हो जाएगी।डिजिटल टैक्स सिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का यह कदम डिजिटल टैक्स फाइलिंग को और मजबूत करेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि त्रुटियों की संभावना भी कम होगी और अनुपालन (compliance) आसान बनेगा। -

खनन क्षेत्र को राहत: लो-ग्रेड आयरन ओर के इस्तेमाल पर नए नियम लागू
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कम गुणवत्ता (लो-ग्रेड) वाले लौह अयस्क के बेहतर उपयोग और बर्बादी रोकने के लिए अहम कदम उठाया है। खान मंत्रालय ने इसके लिए प्राइसिंग नियमों में बदलाव करते हुए नया ढांचा तैयार किया है, जिससे ऐसे अयस्क का आर्थिक रूप से उपयोग संभव हो सके।नई प्राइसिंग व्यवस्था से स्पष्टता
नए नियमों के तहत 45% से कम आयरन (Fe) कंटेंट वाले अयस्क जैसे बैंडेड हेमेटाइट क्वार्टजाइट (BHQ) और बैंडेड हेमेटाइट जैस्पर (BHJ) के लिए अलग से मूल्य निर्धारण की व्यवस्था की गई है। 35% से 45% Fe कंटेंट वाले अयस्क की औसत बिक्री कीमत (ASP) अब 45-51% ग्रेड के अयस्क की ASP का 75% होगी। 35% से कम Fe कंटेंट वाले अयस्क की ASP 50% तय की गई है।पहले क्या थी समस्या?
पहले लो-ग्रेड अयस्क के लिए अलग प्राइसिंग सिस्टम नहीं था। रॉयल्टी और अन्य शुल्क उच्च ग्रेड (45-51%) अयस्क के आधार पर तय होते थे, जिससे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस करना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो जाता था। यही वजह थी कि बड़ी मात्रा में यह संसाधन बेकार चला जाता था।नई तकनीक से बढ़ेगा उपयोग
सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीकों की मदद से BHQ और BHJ जैसे लो-ग्रेड अयस्क को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाले स्टील निर्माण योग्य मटेरियल में बदला जा सकता है। नई प्राइसिंग नीति इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करेगी।रॉयल्टी नियमों में भी बदलाव
नए नियमों के तहत यदि कच्चे अयस्क (ROM) को प्रोसेस करने से उसकी कीमत घटती है, तो रॉयल्टी का निर्धारण प्रोसेसिंग से पहले की स्थिति (प्रारंभिक स्क्रीनिंग) के आधार पर किया जाएगा। इससे कीमत को कृत्रिम रूप से कम दिखाने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।स्टील इंडस्ट्री और संसाधन संरक्षण को फायदा
सरकार के मुताबिक इस कदम से:हाई-ग्रेड अयस्क पर निर्भरता कम होगी
स्टील उद्योग को कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति मिलेगी
खनिज संसाधनों का संरक्षण होगा
बेकार माने जाने वाले अयस्क का भी उपयोग बढ़ेगा
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राहत भरी खबर: सस्ता हुआ सोना और चांदी, ईंधन कीमतों में क्या बदलाव?
नई दिल्ली। आज देशभर में सोना-चांदी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा अपडेट देखने को मिला है। जहां लगातार दूसरे दिन सोने की चमक फीकी पड़ी है, वहीं चांदी भी सस्ती हो गई है। दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल के दामों में शहरों के हिसाब से हल्का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है।सोने की कीमतों में गिरावट का दबाव जारी
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच सोने की कीमतों में लगातार दूसरे दिन कमजोरी देखने को मिली है। हालांकि कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी भी दर्ज की गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में गिरावट का रुझान बना हुआ है।दिल्ली में आज 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के दाम में हल्की बढ़ोतरी देखी गई, लेकिन पिछले दो दिनों में कुल मिलाकर सोना सस्ता हुआ है। चांदी के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार दो दिनों में चांदी करीब ₹5100 प्रति किलो तक सस्ती हुई है। दिल्ली में आज चांदी ₹2,54,900 प्रति किलो के भाव पर बिक रही है।प्रमुख शहरों में सोने के ताजा दाम (10 ग्राम)
दिल्ली: ₹1,52,600 (24K), ₹1,39,890 (22K), ₹1,14,480 (18K)
मुंबई: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
कोलकाता: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
चेन्नई: ₹1,53,370, ₹1,40,590, ₹1,17,290
बेंगलुरु: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
हैदराबाद: ₹1,52,450, ₹1,39,740, ₹1,14,330
पटना: ₹1,52,500, ₹1,39,790, ₹1,14,380पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी
सुबह 6 बजे तेल कंपनियों ने देशभर में पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें जारी कीं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में बदलाव का असर घरेलू बाजार पर देखा गया है।प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल रेट
नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72, डीजल ₹87.62
मुंबई: पेट्रोल ₹104.21, डीजल ₹92.15
कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94, डीजल ₹90.76
चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75, डीजल ₹92.34
हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46, डीजल ₹95.70
पटना: पेट्रोल ₹105.58, डीजल ₹93.80
लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69, डीजल ₹87.80
जयपुर: पेट्रोल ₹104.72, डीजल ₹90.21कीमतें क्यों बदलती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों का टैक्स रिफाइनिंग लागत और मांग-आपूर्ति का संतुलन ग्राहक अपने मोबाइल से भी आसानी से अपने शहर का ईंधन रेट जान सकते हैं। Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें, आज के बाजार अपडेट में साफ दिख रहा है कि सोना और चांदी पर दबाव बना हुआ है, जबकि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता के साथ हल्का बदलाव देखा गया है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल ही इन कीमतों की दिशा तय करेगी।
