Category: Economy

  • डिजिटल यूजर्स के लिए बड़ी राहत, BSNL का 399 रुपये वाला फाइबर प्लान पहले साल में भारी फायदे के साथ उपलब्ध

    डिजिटल यूजर्स के लिए बड़ी राहत, BSNL का 399 रुपये वाला फाइबर प्लान पहले साल में भारी फायदे के साथ उपलब्ध

    नई दिल्ली । सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपने ब्रॉडबैंड यूजर्स के लिए एक नया और किफायती ऑफर पेश किया है, जो खासतौर पर डिजिटल कनेक्टिविटी को सस्ता और आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BSNL के ‘Spark’ पोर्टफोलियो के तहत लॉन्च किया गया यह फाइबर-टू-द-होम (FTTH) प्लान शुरुआती 12 महीनों के लिए केवल 399 रुपये प्रति माह की दर पर उपलब्ध है। कंपनी का दावा है कि इस प्लान में हाई-स्पीड इंटरनेट और पर्याप्त डेटा के साथ उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।

    इस नए प्लान के तहत ग्राहकों को 50 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड दी जा रही है, जो घरेलू और प्रोफेशनल दोनों तरह के उपयोग के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। साथ ही इसमें कुल 3300 GB हाई-स्पीड डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है, जो सामान्य ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं के लिए काफी बड़ी मात्रा है। डेटा लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट स्पीड 4 Mbps तक सीमित हो जाती है, जिससे बेसिक कनेक्टिविटी जारी रहती है।

    BSNL ने इस प्लान में अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग की सुविधा भी शामिल की है, जिससे यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर बिना अतिरिक्त शुल्क के कॉल कर सकते हैं। इसके साथ ही कंपनी अपने ग्राहकों को BSNL Secure Pro जैसी डिजिटल सुरक्षा सेवाएं भी उपलब्ध करा रही है, जिससे ऑनलाइन उपयोग को और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। यह पैकेज खासतौर पर उन उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो घर से काम करते हैं, ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग का उपयोग करते हैं।

    हालांकि यह ऑफर शुरुआती एक साल तक ही 399 रुपये प्रति माह की दर पर उपलब्ध है। 12 महीने पूरे होने के बाद, यानी 13वें महीने से इस प्लान की कीमत बढ़कर 499 रुपये प्रति माह हो जाएगी। इसके बावजूद शुरुआती अवधि में यह प्लान बाजार में मौजूद कई निजी कंपनियों के मुकाबले अधिक किफायती विकल्प माना जा रहा है।

    कनेक्शन बुक करने के लिए कंपनी ने डिजिटल माध्यमों को भी आसान बनाया है। ग्राहक BSNL की WhatsApp सेवा के जरिए 1800 4444 नंबर पर ‘Hi’ संदेश भेजकर कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह प्रक्रिया नए उपभोक्ताओं के लिए सरल और तेज मानी जा रही है।

    डिजिटल इंडिया अभियान और बढ़ती इंटरनेट जरूरतों के बीच BSNL का यह कदम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में किफायती इंटरनेट उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्लान से ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ सकती है और डिजिटल सेवाओं की पहुंच और व्यापक हो सकती है।

    कुल मिलाकर यह नया BSNL Spark FTTH प्लान उन उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक विकल्प बनकर सामने आया है, जो कम कीमत में अधिक डेटा, स्थिर स्पीड और अनलिमिटेड कॉलिंग जैसी सुविधाओं की तलाश में हैं।

  • ऑटो उद्योग की बड़ी चिंता: विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से घट रहा DVA, कंपनियों ने PLI नियमों में संशोधन का सुझाव दिया

    ऑटो उद्योग की बड़ी चिंता: विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से घट रहा DVA, कंपनियों ने PLI नियमों में संशोधन का सुझाव दिया

    नई दिल्ली । वाहन क्षेत्र की उत्पादन-से-जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत मिलने वाले लाभ पर विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव का असर पड़ने लगा है। इसी को देखते हुए देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने केंद्र सरकार से घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition-DVA) की गणना के लिए एक निश्चित विनिमय दर लागू करने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि रुपये में आई हालिया कमजोरी के कारण कई मॉडलों का स्थानीयकरण स्तर वास्तविक स्थिति से कम दिखाई दे रहा है, जिससे वे प्रोत्साहन योजना की पात्रता के दायरे से बाहर हो सकते हैं।

    25,938 करोड़ रुपये की ऑटो पीएलआई योजना का उद्देश्य देश में उन्नत ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत किसी पात्र वाहन मॉडल में आयातित पुर्जों और सामग्रियों की हिस्सेदारी निर्धारित सीमा के भीतर रहनी चाहिए। इसके लिए घरेलू मूल्य संवर्धन का एक न्यूनतम स्तर अनिवार्य किया गया है, ताकि स्थानीय विनिर्माण और सप्लाई चेन को प्रोत्साहन मिल सके।

    उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, DVA की गणना वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत और उसमें इस्तेमाल आयातित सामग्री की लागत के आधार पर की जाती है। चूंकि आयातित पुर्जों की कीमत विदेशी मुद्राओं में तय होती है, इसलिए रुपये के कमजोर होने पर उनकी लागत स्वतः बढ़ जाती है। इससे कागजों पर आयातित हिस्सेदारी अधिक और घरेलू मूल्य संवर्धन कम दिखाई देने लगता है, जबकि वास्तविक उत्पादन प्रक्रिया और स्थानीयकरण स्तर में कोई बदलाव नहीं होता।

    हाल ही में भारी उद्योग मंत्रालय और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के साथ हुई बैठक में वाहन उद्योग के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनका तर्क था कि विनिमय दरों में बदलाव एक बाहरी आर्थिक कारक है, जिस पर वाहन निर्माताओं का कोई नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में केवल मुद्रा विनिमय के प्रभाव के कारण कंपनियों की पात्रता प्रभावित होना उचित नहीं माना जा सकता।

    उद्योग का कहना है कि बीते एक वर्ष के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इससे आयातित पुर्जों की लागत बढ़ गई है और कई मॉडलों के DVA प्रतिशत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कंपनियों का मानना है कि यदि DVA की गणना के लिए एक पूर्व-निर्धारित या स्थिर विनिमय दर को आधार बनाया जाए, तो स्थानीयकरण का वास्तविक स्तर अधिक सटीक रूप से सामने आएगा और योजना का उद्देश्य भी बेहतर तरीके से पूरा होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो उद्योग में वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण योगदान है। कई अत्याधुनिक कंपोनेंट अभी भी विदेशों से आयात किए जाते हैं। ऐसे में मुद्रा विनिमय दरों में तेज बदलाव कंपनियों की लागत संरचना और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। इस कारण उद्योग लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग करता रहा है जो विनिमय दरों के अस्थायी उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हो।

    ऑटो पीएलआई योजना के तहत पात्रता और लाभ निर्धारण में ARAI की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह संस्था विभिन्न वाहन मॉडलों के स्थानीयकरण स्तर और अन्य तकनीकी मानकों का सत्यापन करती है। अब उद्योग की मांग पर सरकार और संबंधित एजेंसियां किस प्रकार विचार करती हैं, इस पर वाहन निर्माताओं की नजर बनी हुई है। यदि इस संबंध में कोई नीति संशोधन किया जाता है, तो इससे कई कंपनियों को राहत मिल सकती है और योजना के तहत निवेश तथा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

  • Sebi की सख्त कार्रवाई के बाद Rajesh Exports पर संकट गहराया, PLI योजना से बाहर होने की आशंका से शेयरों में भारी बिकवाली

    Sebi की सख्त कार्रवाई के बाद Rajesh Exports पर संकट गहराया, PLI योजना से बाहर होने की आशंका से शेयरों में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में लगातार गिरावट का दौर जारी है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन कंपनी का शेयर पांच प्रतिशत के लोअर सर्किट के साथ बंद हुआ। पिछले तीन सत्रों के दौरान शेयर में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में बढ़ती बेचैनी की मुख्य वजह कंपनी को एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज से जुड़ी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई योजना से बाहर किए जाने की आशंका है।

    सूत्रों के अनुसार, भारी उद्योग मंत्रालय कंपनी की पात्रता की समीक्षा कर रहा है। मंत्रालय के स्तर पर इस बात पर विचार किया जा रहा है कि क्या राजेश एक्सपोर्ट्स को योजना के लाभार्थियों की सूची में बनाए रखा जाए या नहीं। यदि कंपनी को योजना से बाहर किया जाता है, तो इसका असर उसके बैटरी कारोबार और भविष्य की विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।

    कंपनी से जुड़ी चिंताएं उस समय और बढ़ गईं जब बाजार नियामक ने हाल ही में एक अंतरिम आदेश जारी किया। नियामकीय कार्रवाई में कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ सहायक कंपनियों के माध्यम से कई वर्षों के दौरान राजस्व को वास्तविक स्थिति से अधिक दिखाया गया। इसके अलावा संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन में पारदर्शिता की कमी और आवश्यक खुलासों से जुड़े मुद्दों की भी जांच की जा रही है।

    मामले का संबंध कंपनी के लिथियम-आयन बैटरी कारोबार से जुड़ी इकाइयों से भी जोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि बैटरी निर्माण क्षेत्र में कंपनी की भूमिका और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के लिए उसकी पात्रता को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो इसका प्रभाव केवल शेयर प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी की कारोबारी साख पर भी असर पड़ सकता है।

    नियामकीय कार्रवाई के तहत कंपनी के चेयरमैन और प्रमोटर के खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। उन्हें अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री करने से रोका गया है। साथ ही कंपनी के खातों की दोबारा फॉरेंसिक जांच कराने का निर्देश भी दिया गया है। इस फैसले ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

    हालांकि कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। कंपनी का तर्क है कि केवल राजस्व बढ़ाकर दिखाने से कोई विशेष लाभ नहीं मिलता, विशेष रूप से तब जब उससे लाभप्रदता में कोई अतिरिक्त फायदा न हो। कंपनी ने भरोसा जताया है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    फिलहाल बाजार की नजर दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर टिकी हुई है। पहला, नियामकीय जांच की आगे की दिशा और उसके निष्कर्ष क्या रहते हैं। दूसरा, भारी उद्योग मंत्रालय पीएलआई योजना में कंपनी की पात्रता को लेकर क्या निर्णय लेता है। इन दोनों मामलों का असर आने वाले समय में कंपनी के शेयर मूल्य, निवेशकों के विश्वास और बैटरी कारोबार की संभावनाओं पर पड़ सकता है।

    शेयर बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव यह संकेत दे रहा है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। जब तक जांच और सरकारी समीक्षा प्रक्रिया पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक कंपनी के शेयरों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • बाइक, कार, ट्रैक्टर और EV की बढ़ती मांग से ऑटो सेक्टर में उछाल, मई में रिटेल बिक्री 9.55 फीसदी बढ़ी

    बाइक, कार, ट्रैक्टर और EV की बढ़ती मांग से ऑटो सेक्टर में उछाल, मई में रिटेल बिक्री 9.55 फीसदी बढ़ी

    नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार ने मई 2026 में नई ऊंचाई हासिल करते हुए रिटेल बिक्री का रिकॉर्ड बनाया है। महंगाई, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और भीषण गर्मी जैसी चुनौतियों के बावजूद वाहन खरीदारी की मजबूत मांग देखने को मिली। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ग्राहकों की सक्रिय भागीदारी ने ऑटो सेक्टर को मजबूती प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप कुल रिटेल बिक्री 25 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गई।

    ऑटो डीलर नेटवर्क से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में देशभर में कुल 25.31 लाख से अधिक वाहनों की रिटेल बिक्री दर्ज की गई। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 9.55 फीसदी अधिक रही। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता मांग में निरंतर सुधार, विवाह सीजन का प्रभाव और बेहतर वित्तपोषण विकल्पों ने बिक्री को गति दी है।

    मई का महीना आमतौर पर ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अपेक्षाकृत धीमा माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग रही। दोपहिया वाहनों, यात्री वाहनों, तीन-पहिया वाहनों और ट्रैक्टरों की बिक्री में उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने और कृषि क्षेत्र से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों ने वाहन खरीदारी को प्रोत्साहन दिया।

    दोपहिया वाहन खंड ने बिक्री में सबसे बड़ा योगदान दिया। मई के दौरान 18 लाख से अधिक बाइक और स्कूटरों की बिक्री हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, कम ईंधन खर्च वाले वाहनों और इलेक्ट्रिक विकल्पों की बढ़ती लोकप्रियता ने इस श्रेणी को मजबूत आधार दिया। ईंधन की बढ़ती लागत के बीच उपभोक्ता अब अधिक किफायती और टिकाऊ विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

    यात्री वाहन श्रेणी में भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। कारों और एसयूवी की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। नए मॉडल लॉन्च, बेहतर फीचर्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ती रुचि ने ग्राहकों को आकर्षित किया। उद्योग जगत का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आय और उपभोक्ताओं का भरोसा इस वृद्धि के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

    इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी लगातार तेजी बनी हुई है। खासकर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्राहकों की ओर से ईंधन बचाने वाले और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों के प्रति बढ़ती रुचि स्पष्ट दिखाई दे रही है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारतीय ऑटो बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

    कॉमर्शियल वाहन और तीन-पहिया वाहन खंड में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। माल ढुलाई, छोटे व्यवसायों और शहरी परिवहन गतिविधियों में बढ़ोतरी का असर इन श्रेणियों की बिक्री पर दिखाई दिया। वहीं ट्रैक्टरों की मांग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दिया है, जो आगामी कृषि सीजन के प्रति किसानों के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

    उद्योग से जुड़े डीलरों का मानना है कि जून में भी मांग बनी रह सकती है। मानसून की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह और खरीफ सीजन की तैयारियां बाजार को अतिरिक्त समर्थन दे सकती हैं। हालांकि गर्मी, ईंधन कीमतों में संभावित बदलाव और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े लागत दबाव अभी भी चुनौतियां बने हुए हैं।

    ऑटो उद्योग के जानकारों का कहना है कि मई के आंकड़े भारतीय बाजार की मजबूत उपभोक्ता क्षमता को दर्शाते हैं। यदि मानसून सामान्य रहता है और आर्थिक गतिविधियां इसी तरह जारी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भी ऑटोमोबाइल क्षेत्र की विकास गति बरकरार रहने की संभावना है।

  • PVC कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद पाइप कंपनियों के अच्छे दिन लौटने के संकेत, बड़ी कंपनियों को मिल सकता है सबसे ज्यादा फायदा

    PVC कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद पाइप कंपनियों के अच्छे दिन लौटने के संकेत, बड़ी कंपनियों को मिल सकता है सबसे ज्यादा फायदा

    नई दिल्ली । पिछले कुछ वर्षों से कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता, कमजोर मांग और परियोजनाओं में सुस्ती जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा प्लास्टिक पाइप उद्योग अब धीरे-धीरे सुधार की राह पर लौटता दिखाई दे रहा है। उद्योग से जुड़े संकेतकों और कंपनियों के हालिया प्रदर्शन ने यह उम्मीद जगाई है कि वित्त वर्ष 2027 इस क्षेत्र के लिए बेहतर अवसर लेकर आ सकता है। विशेष रूप से संगठित और बड़ी कंपनियों के लिए विकास की संभावनाएं अधिक मजबूत मानी जा रही हैं।

    उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार वित्त वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में पाइप सेक्टर ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया। पीवीसी की कीमतों में आई तेजी के कारण बाजार में खरीदारी बढ़ी और डीलरों ने भविष्य में संभावित मूल्य वृद्धि को देखते हुए पहले से स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया। इसका सीधा लाभ पाइप निर्माताओं को मिला और उनकी बिक्री तथा मुनाफे में सुधार देखने को मिला।

    हालांकि आने वाले वित्त वर्ष की शुरुआत पूरी तरह आसान नहीं मानी जा रही है। पीवीसी की कीमतों में बाद में आई तेज गिरावट से कुछ कंपनियों को शुरुआती दबाव का सामना करना पड़ सकता है। जिन कंपनियों ने ऊंची कीमतों पर कच्चा माल खरीदा था, उन्हें मूल्य समायोजन के कारण अल्पकालिक चुनौतियां झेलनी पड़ सकती हैं। इसके बावजूद बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक नजर आ रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि उद्योग में अब धीरे-धीरे संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। छोटी कंपनियां लगातार बदलती लागत और पूंजी संबंधी चुनौतियों से जूझ रही हैं, जबकि बड़ी कंपनियों के पास मजबूत ब्रांड, व्यापक वितरण नेटवर्क और वित्तीय मजबूती मौजूद है। यही कारण है कि ग्राहक और डीलर दोनों बड़े ब्रांडों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।

    उद्योग में एक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। अब ग्राहक केवल कम कीमत वाले उत्पादों पर निर्भर नहीं रह रहे, बल्कि बेहतर गुणवत्ता और विशेष उपयोग वाले पाइपों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। सीपीवीसी पाइप, गैस पाइपिंग सिस्टम और औद्योगिक उपयोग के लिए बनाए जाने वाले विशेष उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे कंपनियों को बेहतर मार्जिन और अधिक लाभ कमाने का अवसर मिल रहा है।

    सरकारी स्तर पर चल रही कई महत्वाकांक्षी परियोजनाएं भी इस क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं। जल आपूर्ति नेटवर्क, गैस वितरण व्यवस्था, सीवेज सिस्टम और शहरी आधारभूत ढांचे के विकास से पाइप उद्योग को निरंतर मांग मिलने की संभावना है। इसके अलावा आवास निर्माण और भवन मरम्मत गतिविधियों में बढ़ोतरी भी इस क्षेत्र को मजबूती प्रदान कर सकती है।

    विशेषज्ञों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में प्रमुख संगठित कंपनियां दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज कर सकती हैं। आवास, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रीमियम उत्पादों की मांग इस विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा सकती है। यही वजह है कि निवेशकों की रुचि एक बार फिर पाइप उद्योग की प्रमुख कंपनियों की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

    बाजार विश्लेषकों ने विशेष रूप से एस्ट्रल, सुप्रीम इंडस्ट्रीज और प्रिंस पाइप्स जैसी कंपनियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। इन कंपनियों की मजबूत बाजार उपस्थिति, विविध उत्पाद पोर्टफोलियो और वितरण नेटवर्क को भविष्य की वृद्धि का प्रमुख आधार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग में सुधार का मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान कर सकता है।

    कुल मिलाकर, कई चुनौतियों से गुजरने के बाद पाइप उद्योग में स्थिरता और विकास के संकेत उभर रहे हैं। बाजार की बदलती परिस्थितियों और बढ़ती मांग के बीच बड़ी कंपनियां इस संभावित उछाल का सबसे अधिक लाभ उठाने की स्थिति में दिखाई दे रही हैं।

  • Wipro में 6% से ज्यादा गिरावट, रिकॉर्ड डेट गुजरते ही बढ़ी बिकवाली; अब निवेशकों की नजर अगले बड़े कदम पर

    Wipro में 6% से ज्यादा गिरावट, रिकॉर्ड डेट गुजरते ही बढ़ी बिकवाली; अब निवेशकों की नजर अगले बड़े कदम पर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को आईटी सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला, जिसमें विप्रो के शेयर सबसे अधिक चर्चा में रहे। कंपनी का शेयर शुरुआती कारोबार के दौरान छह प्रतिशत से अधिक टूट गया और अपने 52 सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे केवल सेक्टर से जुड़ी चुनौतियां ही नहीं, बल्कि हाल ही में समाप्त हुई बायबैक रिकॉर्ड डेट भी एक महत्वपूर्ण कारण है।

    विप्रो ने कुछ समय पहले 15,000 करोड़ रुपये के बड़े बायबैक कार्यक्रम की घोषणा की थी। कंपनी ने 250 रुपये प्रति शेयर के भाव पर शेयर वापस खरीदने की योजना बनाई है, जो मौजूदा बाजार मूल्य से काफी अधिक है। इसी कारण रिकॉर्ड डेट से पहले निवेशकों में उत्साह देखा गया था। हालांकि रिकॉर्ड डेट गुजरने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली का रास्ता चुना, जिससे शेयर पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

    विश्लेषकों के अनुसार बायबैक से जुड़े शेयरों में अक्सर ऐसा रुझान देखने को मिलता है। रिकॉर्ड डेट तक पात्रता सुनिश्चित करने के लिए निवेशक शेयर खरीदते हैं, जबकि रिकॉर्ड डेट निकलने के बाद कुछ निवेशक अपने निवेश से बाहर निकलने लगते हैं। विप्रो के शेयर में भी इसी प्रकार की तकनीकी कमजोरी देखने को मिली है।

    हालांकि कंपनी के शेयर पर दबाव का कारण केवल बायबैक नहीं है। वैश्विक आईटी उद्योग इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिकी बाजारों में हालिया गिरावट और टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली ने भारतीय आईटी कंपनियों पर भी असर डाला है। चूंकि भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका से आता है, इसलिए वहां के आर्थिक संकेतकों और निवेश माहौल का सीधा प्रभाव इन कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ता है।

    बाजार में चिंता का एक बड़ा कारण अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी है। मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बाद निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है। इसका असर वैश्विक निवेश प्रवाह और तकनीकी कंपनियों के मूल्यांकन पर पड़ रहा है।

    इसी बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता प्रभाव भी आईटी उद्योग के लिए नई चुनौती और अवसर दोनों बनकर उभरा है। दुनिया भर की कंपनियां अब पारंपरिक आईटी सेवाओं के साथ-साथ एआई आधारित समाधानों पर तेजी से निवेश कर रही हैं। ऐसे में निवेशकों की अपेक्षा है कि बड़ी आईटी कंपनियां बदलते तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप अपने कारोबार मॉडल को तेजी से विकसित करें।

    उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में केवल पारंपरिक आउटसोर्सिंग सेवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनियों को नई तकनीकों, ऑटोमेशन और एआई आधारित सेवाओं के जरिए राजस्व वृद्धि के नए स्रोत तैयार करने होंगे। इसी वजह से निवेशक उन कंपनियों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं जो तकनीकी बदलावों को तेजी से अपनाने में सक्षम दिखाई दे रही हैं।

    विप्रो के लिए फिलहाल स्थिति मिश्रित बनी हुई है। एक ओर बायबैक का आकर्षण निवेशकों की रुचि बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर आईटी सेक्टर की सुस्त वृद्धि और वैश्विक अनिश्चितताएं शेयर पर दबाव बना रही हैं। बाजार की नजर अब कंपनी की आगामी रणनीति, बायबैक प्रक्रिया के अगले चरण और एआई आधारित विकास योजनाओं पर टिकी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन निवेशकों के लिए कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति और तकनीकी बदलावों के प्रति उसकी तैयारी सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित होगी। इसी आधार पर भविष्य में शेयर की दिशा तय होने की संभावना है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

    कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बिकवाली से शेयर बाजार दबाव में, खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआत देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, वेस्ट एशिया में गहराते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए और शुरुआती सत्र में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए तेल कीमतों में वृद्धि आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसका असर महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट लागत पर पड़ सकता है।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह सैकड़ों अंकों की कमजोरी के साथ नीचे फिसल गया। इसी तरह एनएसई निफ्टी भी शुरुआती सत्र में दबाव में दिखाई दिया। बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ऑटोमोबाइल, आईटी, एविएशन और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। निवेशकों की बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में कमजोरी दर्ज की गई। दूसरी ओर कुछ चुनिंदा बैंकिंग और फार्मा शेयरों ने बाजार को सीमित समर्थन देने का प्रयास किया, लेकिन व्यापक गिरावट के सामने यह समर्थन पर्याप्त नहीं रहा।

    भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का प्रभाव भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी कमजोरी का माहौल बना रहा। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

    अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान आई कमजोरी का असर भी भारतीय बाजार पर पड़ा। वैश्विक निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि दुनिया भर के बाजारों में अस्थिरता का माहौल बना हुआ है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। हाल के कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी का सुरक्षित बाजारों की ओर जाना उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा सकता है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक वेस्ट एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव में कमी आती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को सतर्कता बरतने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कुछ समय में मजबूत प्रदर्शन किया है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां निवेशकों के लिए नई चुनौतियां लेकर आई हैं। ऐसे में बाजार प्रतिभागियों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और आर्थिक संकेतकों पर टिकी हुई है, जो आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल

    ATM कैश की कमी पर शिकायत, बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम नेटवर्क को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। देशभर में लगभग 65,000 एटीएम वाले इस नेटवर्क में कैश की कमी को लेकर ATM इंडस्ट्री बॉडी CATMi ने भारतीय रिजर्व बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक को शिकायत भेजी है। संगठन का आरोप है कि कैश सप्लाई में प्राथमिकता बड़े शहरों को दी जा रही है, जिससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में एटीएम खाली पड़े हैं।

    ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग
    ATM ऑपरेटरों के संगठन CATMi का कहना है कि कैश की अनुपलब्धता के कारण हजारों एटीएम बंद हो गए हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। संगठन ने बैंकिंग सिस्टम से करीब ₹100 करोड़ मुआवजे की मांग भी की है। उनका कहना है कि हर खाली एटीएम का मतलब एक खोया हुआ ट्रांजैक्शन है, जिससे इंटरचेंज और ऑपरेशन फीस का सीधा नुकसान होता है।

    छोटे शहरों में सबसे ज्यादा असर
    रिपोर्ट के अनुसार समस्या मुख्य रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में देखने को मिल रही है। कई जगहों पर एटीएम में कैश रिफिल समय पर नहीं हो रहा, जिससे लोग घंटों तक परेशान हो रहे हैं। उद्योग के अनुसार, दिसंबर 2025 के बाद से कई राज्यों में बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट से कैश उपलब्धता में भी दिक्कत बढ़ी है।

    बढ़ती लागत और घटता ट्रांजैक्शन बना संकट की वजह
    ATM ऑपरेटरों के सामने एक और बड़ी चुनौती ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी है। मजदूरी और ईंधन की कीमतें बढ़ने से खर्च 60% तक बढ़ गया है। वहीं दूसरी ओर कैश निकासी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2023 में जहां मासिक ट्रांजैक्शन 57 करोड़ थे, वहीं सितंबर 2025 तक यह घटकर 43.95 करोड़ रह गए।

    ग्रामीण क्षेत्रों में घटते ATM
    देश में ATM की संख्या भी धीरे-धीरे कम हो रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल ATM संख्या घटकर लगभग 2.51 लाख रह गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 2.53 लाख से अधिक था। सबसे ज्यादा गिरावट ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई है।

    आम लोगों पर क्या असर होगा?
    अगर कैश सप्लाई की समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो छोटे शहरों और गांवों में लोगों को नकदी निकालने में और दिक्कत हो सकती है। हालांकि डिजिटल पेमेंट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत में अब भी बड़ी आबादी रोजमर्रा के लेनदेन के लिए कैश पर निर्भर है। ऐसे में ATM संकट सीधे आम जनता की जेब और सुविधा दोनों को प्रभावित कर सकता है।

  • शेयर बाजार आज: 8 जून को उतार-चढ़ाव के बीच रह सकती है बाजार की चाल, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर

    शेयर बाजार आज: 8 जून को उतार-चढ़ाव के बीच रह सकती है बाजार की चाल, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 8 जून 2026 का कारोबारी दिन उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है। घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों से मिल रहे संकेत निवेशकों को सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में बंद हुए थे, जबकि बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रह सकती है। GIFT Nifty में गिरावट के संकेत मिले हैं, जिससे शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की सतर्कता भी घरेलू बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है।

    पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के बाद बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, लेकिन महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर दिए गए संकेतों ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर किया। इसके चलते कई सेक्टरों में मुनाफावसूली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है, जबकि 23,700 से 23,900 के बीच मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र देखा जा रहा है। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो रिकवरी की संभावना बन सकती है, जबकि नीचे फिसलने पर दबाव और बढ़ सकता है।

    सेक्टरवार नजर डालें तो बैंकिंग शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिल सकती है। RBI के फैसले के बाद बैंकिंग सेक्टर को समर्थन मिला है। वहीं आईटी शेयरों पर वैश्विक संकेतों का असर बना रह सकता है। निवेशकों की नजर वित्तीय, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर अधिक रहने की संभावना है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने गिरावट को सीमित रखने में मदद की है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में फिलहाल चुनिंदा शेयरों और सेक्टरों में अवसर मौजूद हैं, लेकिन अस्थिरता के दौर में जोखिम प्रबंधन और संतुलित निवेश रणनीति अपनाना अधिक महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, विदेशी निवेश प्रवाह और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर 8 जून का कारोबारी दिन सावधानी और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। निवेशकों को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझानों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

  • अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अहमदाबाद । ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों – अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड – पर बुलिश रुख अपनाया है। जेफरीज का कहना है कि इन कंपनियों में क्षमता में तेज विस्तार, मजबूत क्रियान्वयन और बढ़ती मांग की वजह से निवेश के लिए आकर्षक अवसर मौजूद हैं।

    अदाणी ग्रीन एनर्जी को जेफरीज ने “बाय” रेटिंग के साथ 1,435 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार कंपनी वित्त वर्ष 2026 में 19.3 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता से वित्त वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। इसमें 5 गीगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में 10 गीगावाट से अधिक की वृद्धि शामिल है। गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता का निर्माण चल रहा है, जो ग्रोथ का प्रमुख ड्राइवर है।

    अदाणी पावर पर जेफरीज ने अपनी “बाय” रेटिंग बनाए रखते हुए 255 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। कंपनी वित्त वर्ष 2032 तक अपनी क्षमता 42 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना रखती है। इसके अलावा दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) की मजबूत पाइपलाइन से आय में सुधार की संभावना है। वर्तमान में आगामी क्षमता का लगभग 56 प्रतिशत पीपीए पहले से ही सुनिश्चित किया जा चुका है।

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) के लिए जेफरीज ने 1,665 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “बाय” रेटिंग बरकरार रखी है। एईएसएल भारत की एकमात्र सूचीबद्ध प्योर प्ले ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है। कंपनी वर्तमान में 718 अरब रुपये के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित कर रही है और स्मार्ट मीटरिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक 11 मिलियन से अधिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

    जेफरीज का अनुमान है कि मध्यम अवधि में एबिटा और कर के बाद मुनाफे में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि होगी। यह क्रियान्वयन की गति, डेटा सेंटर, वाणिज्यिक और औद्योगिक ऊर्जा समाधानों में बढ़ते अवसरों और स्मार्ट मीटरिंग के व्यापक विस्तार से प्रेरित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अदाणी ग्रुप की ये कंपनियां भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बढ़ते निवेश का लाभ उठा रही हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि ग्रुप की लंबी अवधि की रणनीति और क्षमता विस्तार योजनाएं उनके पोर्टफोलियो के लिए आकर्षक साबित हो सकती हैं।