Category: Economy

  • शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी

    शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी


    नई दिल्ली । 5 जून को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मिलाजुली और अस्थिर (Volatile) रहने की संभावना जताई जा रही है। ग्लोबल मार्केट के संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों के चलते बाजार में दिनभर हलचल देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सीमित दायरे में रह सकते हैं, जहां तेजी और गिरावट दोनों ही स्थितियां देखने को मिलेंगी। शुरुआती ट्रेडिंग में निवेशकों की नजरें वैश्विक बाजारों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर टिकी रहेंगी।

    ग्लोबल संकेत तय करेंगे बाजार की दिशा
    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हो रहे बदलाव भारतीय बाजार पर सीधा असर डाल सकते हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों के रुख के आधार पर आज सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय होगी। अगर वैश्विक बाजार सकारात्मक रहते हैं तो भारतीय बाजार को समर्थन मिल सकता है, वहीं कमजोरी की स्थिति में दबाव देखने को मिल सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी या गिरावट भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा। तेल महंगा होने पर महंगाई की आशंका बढ़ती है, जिसका असर ऑटो और पेंट जैसे सेक्टरों पर पड़ सकता है।

    FII-DII की चाल से तय होगा मू
    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद-बिक्री भी आज के बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी। हाल के दिनों में FII की गतिविधियां अस्थिर रही हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अगर FII की ओर से खरीदारी बढ़ती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है, जबकि बिकवाली दबाव बना सकती है। DII की स्थिर खरीदारी बाजार को सपोर्ट देने का काम कर सकती है।

    सेक्टोरल मूवमेंट में दिख सकती है तेजी और कमजोरी
    आज के सत्र में सेक्टोरल मूवमेंट महत्वपूर्ण रहेगा। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में अलग-अलग रुझान देखने को मिल सकते हैं। बैंकिंग सेक्टर में हल्की मजबूती की उम्मीद है, जबकि आईटी सेक्टर ग्लोबल संकेतों पर अधिक निर्भर रहेगा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ ट्रेडिंग करने की सलाह दी जा रही है।

    निवेशकों के लिए सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि आज का दिन शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और स्टॉप लॉस का उपयोग करने की सलाह दी गई है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह उतार-चढ़ाव अवसर भी प्रदान कर सकता है, लेकिन चयन सोच-समझकर करना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 5 जून को शेयर बाजार में मिश्रित रुझान और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल संकेतों और निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की पूरी दिशा निर्भर करेगी। सतर्क रणनीति ही आज के दिन सफलता की कुंजी होगी।

  • महंगी उड़ानों और बढ़ती ईंधन लागत के बावजूद नहीं थमा घूमने का जुनून, घरेलू पर्यटन मांग में जोरदार उछाल

    महंगी उड़ानों और बढ़ती ईंधन लागत के बावजूद नहीं थमा घूमने का जुनून, घरेलू पर्यटन मांग में जोरदार उछाल

    नई दिल्ली । बढ़ती ईंधन कीमतों, महंगे हवाई किरायों और वैश्विक स्तर पर परिचालन चुनौतियों के बावजूद भारतीयों का घूमने-फिरने का उत्साह बरकरार है। गर्मी की छुट्टियों के दौरान देशभर में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल रही है। ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक दबावों के बावजूद घरेलू पर्यटन बाजार मजबूत स्थिति में बना हुआ है और लोगों की यात्रा संबंधी प्राथमिकताओं में बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इस वर्ष गर्मी के मौसम में कई प्रमुख हवाई मार्गों पर टिकट कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विमान ईंधन की बढ़ती लागत और कुछ अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर एयरस्पेस संबंधी बाधाओं के कारण एयरलाइंस का परिचालन खर्च बढ़ा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग छुट्टियां मनाने के लिए यात्रा पर निकल रहे हैं। हालांकि यात्रियों का एक वर्ग अब अपने बजट के अनुसार गंतव्य और यात्रा के साधनों में बदलाव कर रहा है।

    ट्रैवल उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि लोग अब दूरस्थ और महंगे पर्यटन स्थलों के बजाय अपने शहरों के आसपास स्थित आकर्षक स्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। परिवार और मित्रों के साथ समूह में यात्रा करने का चलन भी लगातार बढ़ रहा है, जिससे निजी वाहनों, टैक्सियों और बस सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय उछाल देखा गया है।

    कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ दर्ज की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों और ठंडे मौसम वाले स्थानों में लंबी वाहन कतारें और यातायात दबाव भी देखने को मिला है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संकेत है कि महंगाई के बावजूद लोगों की प्राथमिकताओं में यात्रा और मनोरंजन अभी भी महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

    महंगे हवाई सफर का सबसे बड़ा लाभ रेल और सड़क परिवहन क्षेत्र को मिला है। घरेलू यात्राओं के लिए बड़ी संख्या में लोग अब ट्रेन और बस सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। विशेष रूप से हिल स्टेशनों और वीकेंड डेस्टिनेशन के लिए बस बुकिंग में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे परिवहन क्षेत्र को अतिरिक्त कारोबार मिला है।

    अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबी दूरी वाले गंतव्यों की मांग में कुछ नरमी आई है। अमेरिका और पश्चिमी यूरोप जैसे देशों की यात्रा अपेक्षाकृत महंगी हो गई है, जिसका असर बुकिंग पर पड़ा है। रुपये की कमजोरी, बढ़ती यात्रा लागत और लंबी उड़ानों के बढ़ते खर्च ने भी यात्रियों के फैसलों को प्रभावित किया है।

    हालांकि विदेश यात्रा करने वाले भारतीय अब अपेक्षाकृत कम दूरी और बजट अनुकूल देशों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वियतनाम, श्रीलंका, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे गंतव्य तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये देश कम लागत, आसान कनेक्टिविटी और बेहतर पर्यटन सुविधाओं के कारण भारतीय पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

    होटल उद्योग के लिए भी यह सीजन उत्साहजनक रहा है। कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल ऑक्यूपेंसी 70 से 75 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। जयपुर, गोवा, आगरा और विभिन्न हिल स्टेशनों में होटल बुकिंग मजबूत बनी हुई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू पर्यटन की यह मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च और सेवा क्षेत्र की सकारात्मक स्थिति को भी दर्शाती है।

    कुल मिलाकर, बढ़ती लागत और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय यात्रियों ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि यात्रा और अवकाश अब उनकी जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। यही कारण है कि बदलते हालात के अनुसार योजनाएं और बजट समायोजित करने के बावजूद पर्यटन क्षेत्र में मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।

  • बाजार खुलते ही निवेशकों की नजर इन चुनिंदा शेयरों पर, कॉरपोरेट घोषणाओं के बाद बढ़ सकती है ट्रेडिंग गतिविधि

    बाजार खुलते ही निवेशकों की नजर इन चुनिंदा शेयरों पर, कॉरपोरेट घोषणाओं के बाद बढ़ सकती है ट्रेडिंग गतिविधि

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को सीमित दायरे में कारोबार करते हुए लगभग सपाट स्तर पर दिन का समापन किया। हालांकि बाजार सूचकांकों में बड़ी हलचल देखने को नहीं मिली, लेकिन कई कंपनियों की ओर से जारी महत्वपूर्ण कॉरपोरेट घोषणाओं ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। ऐसे में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कुछ चुनिंदा शेयरों में गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार किसी कंपनी द्वारा विस्तार योजनाओं, नए ऑर्डर, डिविडेंड भुगतान, वैश्विक मान्यता या व्यवसायिक लक्ष्यों से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने का असर अक्सर उसके शेयरों पर दिखाई देता है। इसी कारण निवेशक आगामी सत्र में उन कंपनियों पर विशेष नजर रखेंगे जिन्होंने हाल के दिनों में महत्वपूर्ण अपडेट जारी किए हैं।

    हिंडाल्को इंडस्ट्रीज उन कंपनियों में शामिल है जिस पर बाजार की निगाहें बनी रहेंगी। कंपनी ने प्रीमियम बिल्डिंग सॉल्यूशंस सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में नया एक्सपीरियंस सेंटर शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपने इंजीनियर्ड एल्युमीनियम डोर और विंडो कारोबार को बड़े स्तर पर विस्तार देना है। रियल एस्टेट और प्रीमियम निर्माण क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए इस घोषणा को कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    डिफेंस और इंजीनियरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत फोर्ज भी निवेशकों के रडार पर रहेगी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अंतिम डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट घोषित की है। डिविडेंड से जुड़ी घोषणाएं आमतौर पर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि इससे शेयरधारकों को मिलने वाले प्रतिफल की स्पष्ट तस्वीर सामने आती है। ऐसे में इस अपडेट का असर कंपनी के शेयर में देखने को मिल सकता है।

    सौर ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी प्रीमियर एनर्जीज ने भी हाल ही में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को वैश्विक स्तर की प्रतिष्ठित सोलर मॉड्यूल निर्माता रैंकिंग में शीर्ष भारतीय कंपनियों में स्थान मिला है। यह उपलब्धि कंपनी की विनिर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं के बीच यह खबर निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    पिलानी इन्वेस्टमेंट एंड इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ने भी अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा की है। हालांकि रिकॉर्ड डेट की जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी के इस फैसले ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। डिविडेंड भुगतान की घोषणा अक्सर बाजार में निवेशकों के भरोसे और कंपनी की वित्तीय स्थिति का संकेत मानी जाती है।

    वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर और टोल संचालन क्षेत्र से जुड़ी कंपनी इनोविजन को मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण परियोजना के संचालन के लिए लेटर ऑफ इंटेंट प्राप्त हुआ है। कंपनी को राष्ट्रीय राजमार्ग के एक प्रमुख हिस्से पर टोल संचालन और शुल्क संग्रहण का कार्य सौंपा गया है। नए ऑर्डर से कंपनी के ऑर्डर बुक और भविष्य की आय संभावनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में कॉरपोरेट अपडेट्स निवेशकों के निर्णयों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। ऐसे में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में इन कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की गतिविधि बढ़ सकती है। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेशकों को कंपनी के मूलभूत आंकड़ों, जोखिम कारकों और बाजार परिस्थितियों का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहिए।

  • रिकॉर्ड IPO, लेकिन नया निवेश कम: भारतीय बाजार से विदेशी कंपनियों की बड़ी पूंजी निकासी ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की गतिविधियां पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई हैं। लगातार बढ़ती लिस्टिंग, निवेशकों की मजबूत भागीदारी और ऊंचे वैल्यूएशन ने भारत को दुनिया के सबसे आकर्षक पूंजी बाजारों में शामिल कर दिया है। हालांकि इस तेजी के बीच एक ऐसा रुझान उभर रहा है, जिसने बाजार विशेषज्ञों और अर्थशास्त्रियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कई विदेशी कंपनियां अपनी भारतीय इकाइयों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कर रही हैं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य नया निवेश जुटाना नहीं बल्कि अपनी मौजूदा हिस्सेदारी बेचकर पूंजी निकालना दिखाई दे रहा है।

    हाल के वर्षों में बाजार में आई कई बड़ी लिस्टिंग में देखा गया है कि कंपनियों ने नए शेयर जारी करने के बजाय ऑफर फॉर सेल मॉडल को प्राथमिकता दी। इस व्यवस्था में कंपनी के कारोबार के लिए नई पूंजी नहीं आती, बल्कि मौजूदा निवेशक अपने शेयर बेचकर धन प्राप्त करते हैं। परिणामस्वरूप बाजार से जुटाई गई बड़ी राशि सीधे पुराने निवेशकों या मूल कंपनियों के पास पहुंच जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार में मिल रहा प्रीमियम वैल्यूएशन इस प्रवृत्ति की सबसे बड़ी वजह है। वैश्विक स्तर पर कई कंपनियों को अपने घरेलू बाजारों की तुलना में भारत में कहीं अधिक मूल्यांकन मिल रहा है। ऐसे में विदेशी कंपनियों के लिए अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचकर आकर्षक लाभ अर्जित करना स्वाभाविक रणनीति बन गया है। इससे उन्हें नकदी प्राप्त होती है और निवेश पर बेहतर रिटर्न भी हासिल होता है।

    यह स्थिति तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब बड़ी संख्या में आईपीओ का उद्देश्य विस्तार, उत्पादन क्षमता बढ़ाने या रोजगार सृजन के लिए पूंजी जुटाना न होकर केवल हिस्सेदारी का हस्तांतरण बन जाए। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिकांश लिस्टिंग इसी दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो आईपीओ बाजार की मूल अवधारणा पर सवाल उठ सकते हैं। आम तौर पर आईपीओ को कंपनियों के विकास, नए निवेश और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का माध्यम माना जाता है।

    दूसरी ओर, इस प्रवृत्ति का असर विदेशी मुद्रा प्रवाह और रुपये की स्थिति पर भी पड़ सकता है। जब बड़ी मात्रा में धन विदेशी मूल कंपनियों के पास वापस जाता है, तो पूंजी निकासी का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि इसका प्रभाव तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन दीर्घकाल में यह मुद्रा बाजार और निवेश प्रवाह के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

    आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि केवल ऑफर फॉर सेल आधारित आईपीओ को नकारात्मक नहीं माना जा सकता। कई बार शुरुआती निवेशकों या प्रमोटरों के लिए आंशिक एग्जिट स्वाभाविक व्यावसायिक प्रक्रिया होती है। लेकिन जब अधिकांश बड़ी लिस्टिंग में नए निवेश की हिस्सेदारी सीमित हो और पूंजी निकासी प्रमुख उद्देश्य बन जाए, तब संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता महसूस होती है।

    भारत का पूंजी बाजार वर्तमान में मजबूत निवेशक आधार, बेहतर आर्थिक वृद्धि और उच्च वैल्यूएशन के कारण वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यही वजह है कि आने वाले समय में भी कई बड़ी विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों के आईपीओ बाजार में आने की संभावना है। इससे निवेशकों के लिए नए अवसर तो पैदा होंगे, लेकिन साथ ही यह बहस भी तेज होगी कि क्या आईपीओ बाजार आर्थिक विकास को गति देने का माध्यम बना हुआ है या फिर बड़े निवेशकों के लिए लाभ निकालने का मंच बनता जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में नियामकों, निवेशकों और कंपनियों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता होगी ताकि आईपीओ बाजार का मूल उद्देश्य बरकरार रहे और पूंजी बाजार विकास, निवेश तथा रोजगार सृजन की दिशा में अपनी प्रभावी भूमिका निभाता रहे।

  • सेबी की सख्त कार्रवाई से घिरी Rajesh Exports, 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित राजस्व घोटाले ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

    सेबी की सख्त कार्रवाई से घिरी Rajesh Exports, 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित राजस्व घोटाले ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख स्वर्ण आभूषण निर्यातक कंपनियों में शामिल Rajesh Exports एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से कंपनी और उसके प्रमोटर समूह के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और अंतरिम कार्रवाई के बाद निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल शेयर मूल्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी की साख और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

    मामला कथित तौर पर राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने और धन के संभावित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है। सेबी की कार्रवाई के बाद बाजार में कंपनी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला, जहां कंपनी के शेयर में पांच प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया और यह 104.65 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। पिछले कुछ महीनों से शेयर में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता और गहरी हो गई है।

    इस घटनाक्रम का सबसे अधिक ध्यान बड़े संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी पर गया है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, Life Insurance Corporation of India यानी एलआईसी के पास कंपनी में 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी 14.19 प्रतिशत और खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 14.55 प्रतिशत है। प्रमोटर समूह अभी भी कंपनी में 54.55 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरधारक बना हुआ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि एलआईसी जैसे बड़े संस्थागत निवेशक के लिए यह निवेश उसके कुल पोर्टफोलियो का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है, इसलिए इस मामले का एलआईसी की वित्तीय स्थिति या उसके शेयर पर कोई बड़ा दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, Rajesh Exports के निवेशकों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि नियामकीय जांच का असर अक्सर निवेशक विश्वास पर पड़ता है।

    इक्विटी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की कार्रवाई अपने आप में गंभीर संकेत है। उनके अनुसार, जब किसी सूचीबद्ध कंपनी के खिलाफ वित्तीय पारदर्शिता और फंड उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं तो निवेशकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल दिखाई दे रहा है।

    दूसरी ओर, कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सेबी का आदेश केवल अंतरिम प्रकृति का है और अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। कंपनी का दावा है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े पूरी तरह सही हैं और राजस्व बढ़ाकर दिखाने जैसी कोई स्थिति नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि मामले में किसी प्रकार की संचार संबंधी गलतफहमी हो सकती है और जल्द ही विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि Rajesh Exports का शेयर शेयर बाजार के ‘Z’ ग्रुप में सूचीबद्ध है, जहां केवल ट्रेड-फॉर-ट्रेड आधार पर कारोबार की अनुमति होती है। इस श्रेणी में शामिल कंपनियों पर पहले से ही निवेशकों की विशेष नजर रहती है। कंपनी का शेयर दिसंबर 2025 में 239 रुपये के अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से करीब 56 प्रतिशत तक टूट चुका है। ऐसे में सेबी की जांच ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में सेबी की जांच रिपोर्ट और कंपनी के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर बाजार की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यही तय करेगा कि निवेशकों का भरोसा दोबारा बहाल हो पाता है या नहीं।

  • भारत बना वैश्विक पूंजी का सबसे भरोसेमंद ठिकाना, दीर्घकालिक निवेशकों की पहली पसंद के रूप में उभरी भारतीय अर्थव्यवस्था: पीयूष गोयल

    भारत बना वैश्विक पूंजी का सबसे भरोसेमंद ठिकाना, दीर्घकालिक निवेशकों की पहली पसंद के रूप में उभरी भारतीय अर्थव्यवस्था: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत ने खुद को दुनिया के सबसे विश्वसनीय निवेश गंतव्यों में स्थापित किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा लगातार भारत की ओर बढ़ रहा है और दुनिया भर की दीर्घकालिक पूंजी अब भारतीय अर्थव्यवस्था में नए अवसर तलाश रही है।

    मुंबई में आयोजित ‘सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026’ को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि हाल के दिनों में न्यूयॉर्क और टोरंटो के प्रमुख निवेशकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों से यह स्पष्ट हुआ है कि भारत को लेकर वैश्विक निवेशकों का दृष्टिकोण पहले से अधिक सकारात्मक हुआ है। उन्होंने कहा कि अब चर्चा इस बात पर नहीं होती कि भारत में निवेश किया जाए या नहीं, बल्कि इस बात पर केंद्रित होती है कि निवेशक भारत की विकास यात्रा में कितनी जल्दी और कितनी व्यापक भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और आने वाले वर्षों में भी यह स्थिति बरकरार रहने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन, कारोबार करने में आसानी, आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल तकनीकों के विस्तार और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय निवेश समुदाय के बीच स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    गोयल ने कहा कि भारत ने हर चुनौती को अवसर में बदलने की क्षमता दिखाई है। वैश्विक स्तर पर उत्पन्न संकटों के दौरान भी देश ने अपनी आर्थिक नीतियों और व्यावसायिक रणनीतियों को समय के अनुरूप ढालते हुए विकास की गति बनाए रखी। यही कारण है कि आज भारत व्यापार, निवेश और औद्योगिक विस्तार के लिए एक आकर्षक केंद्र के रूप में देखा जा रहा है।

    उन्होंने अपनी हालिया कनाडा यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत का अब तक का सबसे बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल उनके साथ गया था। वहां विभिन्न पेंशन फंड, बीमा कंपनियों और संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में गहरी रुचि दिखाई। साथ ही भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत प्राप्त हुए, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

    न्यूयॉर्क में प्रमुख निवेश कंपनियों और लगभग 50 वैश्विक व्यवसायिक संस्थाओं के साथ हुई चर्चाओं का हवाला देते हुए गोयल ने कहा कि भारत को अब एक भरोसेमंद वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र, स्थिर कारोबारी साझेदार और सुरक्षित निवेश गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानून का शासन, निर्णायक नेतृत्व, तकनीकी दक्षता और 140 करोड़ से अधिक लोगों का विशाल उपभोक्ता आधार भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं।

    भारत में सफल विदेशी निवेश के उदाहरण देते हुए मंत्री ने हुंडई और जेसीबी जैसी कंपनियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों ने उस समय भारत में निवेश किया था जब बुनियादी ढांचा और औद्योगिक क्षमताएं आज की तुलना में काफी सीमित थीं। इसके बावजूद उन्होंने यहां दीर्घकालिक निवेश से उल्लेखनीय लाभ अर्जित किया और अपने वैश्विक कारोबार का विस्तार किया।

    गोयल ने कहा कि भारत केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि नवाचार, डिजाइन, अनुसंधान और उन्नत विनिर्माण का उभरता हुआ वैश्विक केंद्र भी बन रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा का भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि भविष्य की तकनीकों और नए औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश के लिए भारत व्यापक अवसर प्रदान कर रहा है।

  • भारत की पहली 100% एथेनॉल कार लॉन्च: मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल से स्वच्छ परिवहन को नई रफ्तार

    भारत की पहली 100% एथेनॉल कार लॉन्च: मारुति सुजुकी की वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल से स्वच्छ परिवहन को नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन आधारित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मारुति सुजुकी ने देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल यात्री कार वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल लॉन्च कर दी है। यह वाहन E20 से लेकर E100 तक के एथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर संचालित हो सकता है और 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलने के लिए तैयार भारत का पहला यात्री वाहन माना जा रहा है।

    कंपनी की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। एथेनॉल आधारित ईंधन न केवल आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नई वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल को विशेष रूप से इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह विभिन्न स्तरों के एथेनॉल मिश्रण के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भविष्य में भारत के हरित परिवहन मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। इससे देश में जैव ईंधन उद्योग को भी नई गति मिलने की संभावना है।

    लॉन्च कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार लगातार ऐसे विकल्पों को बढ़ावा दे रही है जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करें। उन्होंने बताया कि सरकार की वैकल्पिक ईंधन रणनीति के तहत डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिश्रण को भी बढ़ावा देने की योजना है, जिससे पारंपरिक ईंधनों के उपयोग को धीरे-धीरे कम किया जा सके।

    गडकरी ने ऑटोमोबाइल उद्योग से आग्रह किया कि वे पुराने वाहनों को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनुरूप परिवर्तित करने की संभावनाओं पर काम करें। उनका मानना है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी और देश में चल रहे वाहन स्क्रैपेज कार्यक्रम को भी समर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ ईंधन आधारित तकनीकों को अपनाने से वायु गुणवत्ता में सुधार और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान मारुति सुजुकी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने बताया कि कंपनी केवल फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि कंप्रेस्ड बायोगैस और हाइड्रोजन जैसे भविष्य के स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य भारतीय बाजार के लिए टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन समाधान विकसित करना है।

    कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भारत में ग्रीन मोबिलिटी को लेकर उपभोक्ताओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में बिकने वाले हरित वाहनों में मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी उल्लेखनीय रही, जो इस क्षेत्र में कंपनी की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की बढ़ती उपलब्धता किसानों, एथेनॉल उत्पादकों और ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।

    वैगनआर फ्लेक्स-फ्यूल का लॉन्च भारत के ऊर्जा परिवर्तन अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल न केवल स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देती है, बल्कि देश को दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ विकास के लक्ष्य के करीब ले जाने में भी सहायक साबित हो सकती है।

  • आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल, ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर बने विकास के प्रमुख इंजन

    आर्थिक चुनौतियों के बावजूद कंपनियों की कमाई में जोरदार उछाल, ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर बने विकास के प्रमुख इंजन

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और लागत संबंधी चुनौतियों के बावजूद भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2026 का समापन मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ किया है। नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, बीएसई 500 कंपनियों के संयुक्त शुद्ध मुनाफे में चौथी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि भारतीय कंपनियां बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भी अपनी परिचालन क्षमता और लाभप्रदता बनाए रखने में सफल रही हैं।

    एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, मजबूत राजस्व वृद्धि, बेहतर नकदी प्रवाह, संतुलित बैलेंस शीट और विभिन्न क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी ने भारतीय कॉरपोरेट जगत को मजबूती प्रदान की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में कंपनियों की आय वृद्धि की संभावनाएं और अधिक मजबूत दिखाई दे रही हैं।

    विशेष रूप से गैर-वित्तीय कंपनियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। इन कंपनियों की कुल राजस्व वृद्धि बढ़कर 12.3 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 9.2 प्रतिशत थी। यह सुधार दर्शाता है कि मांग में बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार का लाभ कंपनियों को व्यापक स्तर पर मिला है। हालांकि परिचालन लाभ मार्जिन यानी ईबीआईटीडीए मार्जिन मामूली रूप से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गया, फिर भी कंपनियों की कमाई की गुणवत्ता मजबूत बनी रही।

    रिपोर्ट के अनुसार, चौथी तिमाही के दौरान लाभ वृद्धि केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर व्यापक रूप से विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दिया। बीएसई 500 की लगभग 59 प्रतिशत कंपनियों ने अपने मुनाफे में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की, जबकि 39 प्रतिशत कंपनियों का लाभ 25 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र में कमाई का सुधार व्यापक और टिकाऊ स्वरूप ले रहा है।

    कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहे। निफ्टी की लगभग 48 प्रतिशत कंपनियों ने विश्लेषकों की अपेक्षाओं से अधिक प्रदर्शन किया, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा केवल 32 प्रतिशत था। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और यह संकेत मिला है कि कंपनियों की बुनियादी स्थिति अनुमान से कहीं अधिक सुदृढ़ बनी हुई है।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्र ने सबसे प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। इस क्षेत्र की आय में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिसे बेहतर उपभोक्ता मांग और खर्च में वृद्धि का समर्थन मिला। वहीं उपभोक्ता आवश्यक वस्तु क्षेत्र ने भी 15 प्रतिशत से अधिक की आय वृद्धि दर्ज कर स्थिर मांग का संकेत दिया।

    वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में चुनौतियों के बावजूद भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने 13.4 प्रतिशत की आय वृद्धि हासिल की। वित्तीय क्षेत्र ने भी अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए 13.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और बाजार की कुल कमाई में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    ऊर्जा और मटेरियल सेक्टर इस तिमाही के सबसे बड़े प्रदर्शनकर्ता बनकर उभरे। ऊर्जा क्षेत्र की आय में 23.8 प्रतिशत और मटेरियल क्षेत्र की आय में 23.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि उत्पादन और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

    कंपनियों के आकार के आधार पर देखें तो मिडकैप कंपनियों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन कंपनियों के मुनाफे में सालाना आधार पर 34.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि लार्जकैप और स्मॉलकैप कंपनियों का लाभ क्रमशः 10.3 प्रतिशत और 10.4 प्रतिशत बढ़ा। यह प्रदर्शन बताता है कि मध्यम आकार की कंपनियां वर्तमान कारोबारी माहौल में तेजी से अवसरों का लाभ उठाने में सफल रही हैं और निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

  • भारत में हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों की संख्या और संपत्ति दोनों में दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि

    भारत में हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों की संख्या और संपत्ति दोनों में दर्ज हुई उल्लेखनीय वृद्धि

    नई दिल्ली । भारत में आर्थिक गतिविधियों की मजबूती और निवेश बाजारों के बेहतर प्रदर्शन का असर देश के संपन्न वर्ग पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के दौरान देश में उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों यानी हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही उनकी कुल वित्तीय संपत्ति भी नए स्तर पर पहुंच गई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती क्षमता और निवेश माहौल की मजबूती को दर्शाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत में उच्च संपत्ति वाले लोगों की संख्या सालाना आधार पर लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 3.9 लाख के करीब पहुंच गई। इसी अवधि में उनकी कुल वित्तीय संपत्ति में भी 4.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह आंकड़ा लगभग 1.64 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल संपत्ति मूल्य में बढ़ोतरी का परिणाम नहीं है, बल्कि देश में निवेश के बढ़ते अवसरों और आर्थिक विस्तार का भी संकेत है।

    भारतीय अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2025 में मजबूत प्रदर्शन किया। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने से उद्योग, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों को व्यापक समर्थन मिला। आर्थिक गतिविधियों में तेजी के कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा और पूंजी बाजारों में सकारात्मक माहौल बना रहा। इसका सीधा लाभ उन निवेशकों को मिला जिनकी बड़ी हिस्सेदारी शेयर बाजार और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों में थी।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि निवेशकों की प्राथमिकताओं में तेजी से बदलाव हो रहा है। पारंपरिक निवेश विकल्पों के साथ-साथ अब व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप निवेश समाधान, वैकल्पिक परिसंपत्तियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वेल्थ मैनेजमेंट सेवाएं लोकप्रिय हो रही हैं। वित्तीय सलाह और निवेश रणनीति में तकनीक की बढ़ती भूमिका ने संपत्ति प्रबंधन के तरीके को भी बदल दिया है।

    वैश्विक स्तर पर भी वर्ष 2025 संपन्न वर्ग के लिए काफी सकारात्मक रहा। दुनिया भर के उच्च संपत्ति वाले लोगों की कुल संपत्ति में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस वृद्धि का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा, जहां संपत्ति और उच्च संपत्ति वाले लोगों की संख्या दोनों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। जापान, चीन, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इस क्षेत्रीय वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजारों में मजबूती, महंगाई में नरमी और तकनीकी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने वैश्विक संपत्ति निर्माण में अहम भूमिका निभाई। विशेष रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों में आई तेजी ने निवेशकों को उल्लेखनीय लाभ पहुंचाया। इसका असर भारत समेत कई देशों में संपन्न वर्ग की वित्तीय स्थिति पर दिखाई दिया।

    रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक उच्च संपत्ति वाले व्यक्तियों को इस वृद्धि का सबसे अधिक लाभ मिला क्योंकि उनके निवेश सार्वजनिक बाजारों और बेहतर प्रदर्शन करने वाली निजी परिसंपत्तियों में केंद्रित रहे। वहीं निवेश पोर्टफोलियो में शेयरों और निश्चित आय वाले निवेश साधनों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है, जो निवेशकों की संतुलित रणनीति को दर्शाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति बनी रहती है और पूंजी बाजारों में स्थिरता कायम रहती है, तो आने वाले वर्षों में देश में संपन्न वर्ग की संख्या और उनकी कुल संपत्ति दोनों में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। यह रुझान भारत को वैश्विक संपत्ति निर्माण के प्रमुख केंद्रों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • डॉलर में कमजोरी और पश्चिम एशिया तनाव से चमकी कीमती धातुएं, सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा, चांदी में भी उछाल हेडलाइन विकल्प 2:

    डॉलर में कमजोरी और पश्चिम एशिया तनाव से चमकी कीमती धातुएं, सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा, चांदी में भी उछाल हेडलाइन विकल्प 2:

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच गुरुवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। डॉलर में आई कमजोरी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग ने कीमती धातुओं को समर्थन प्रदान किया। निवेशकों ने जोखिम वाले परिसंपत्तियों से दूरी बनाते हुए सोने और चांदी की ओर रुख किया, जिसके चलते दोनों धातुओं के वायदा भाव में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखी गई। शुरुआती सत्र से ही पीली धातु मजबूत रुख के साथ कारोबार करती रही और दिन के दौरान ऊंचे स्तर तक पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की कमजोरी ने सोने को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में प्राथमिकता देते हैं।

    चांदी की कीमतों में भी दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती बनी रही। कारोबार के शुरुआती चरण में चांदी ने ऊंचे स्तर को छुआ, हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बावजूद कुल मिलाकर चांदी के भाव सकारात्मक दायरे में बने रहे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश दोनों कारणों से चांदी को भी समर्थन मिल रहा है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया सैन्य गतिविधियों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी संभावित संघर्ष या अस्थिरता का सीधा प्रभाव कमोडिटी बाजारों पर पड़ता है, विशेषकर सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों पर। यही कारण है कि हाल के दिनों में कीमती धातुओं में निवेश बढ़ा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समाधान से जुड़ी खबरों पर भी नजर बनाए हुए है। यदि तनाव कम करने की दिशा में कोई सकारात्मक प्रगति होती है तो सोने और चांदी की कीमतों में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि अनिश्चितता बनी रहती है तो सुरक्षित निवेश की मांग और बढ़ सकती है।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। तेल बाजार में नरमी से वैश्विक मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी निवेशकों की प्राथमिक चिंता बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में डॉलर की चाल, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और पश्चिम एशिया की स्थिति सोने-चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विश्लेषकों के अनुसार, तकनीकी दृष्टि से भी सोना और चांदी महत्वपूर्ण स्तरों के आसपास कारोबार कर रहे हैं। यदि ये धातुएं अपने प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार कर स्थिर होती हैं तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। हालांकि निवेशकों को वर्तमान अस्थिर माहौल में सावधानी बरतने और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।