Category: Economy

  • चीन समेत कई अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है भारत, एडीबी रिपोर्ट में दावा!

    चीन समेत कई अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है भारत, एडीबी रिपोर्ट में दावा!


    नई दिल्ली। भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच Asian Development Bank (ADB) की ताजा रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रोथ की रफ्तार भले ही धीमी पड़ रही हो, लेकिन भारत इस क्षेत्र में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

    एशिया-प्रशांत में सुस्ती के संकेत

    ADB के अनुसार, विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 5.4% से घटकर 2026 और 2027 में 5.1% रहने का अनुमान है। इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम प्रमुख कारण बताए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, स्थिर श्रम बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च इस क्षेत्र को कुछ हद तक सहारा देता रहेगा।

    भारत की मजबूत ग्रोथ बनी रहेगी

    ADB के मुताबिक, India की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.9% की दर से बढ़ सकती है, जो 2027 में बढ़कर 7.3% तक पहुंचने का अनुमान है। यह तेजी मुख्य रूप से मजबूत घरेलू खपत, सरकारी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते बनी रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति अधिक स्थिर और मजबूत नजर आ रही है।

    China की ग्रोथ में गिरावट

    ADB ने China (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) की आर्थिक वृद्धि को लेकर सतर्क अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की ग्रोथ 2026 में घटकर 4.6% और 2027 में 4.5% रहने की संभावना है, जो पिछले साल 5% थी। इस गिरावट के पीछे प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और निर्यात में सुस्ती को मुख्य कारण माना गया है।

    जोखिम अभी भी बरकरार

    ADB के चीफ इकोनॉमिस्ट Albert Park ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष ऊर्जा और खाद्य कीमतों को बढ़ा सकता है। इससे वित्तीय स्थितियां और कमजोर हो सकती हैं, जो पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा जोखिम है। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार नीतियों में उतार-चढ़ाव भी ग्रोथ पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    AI और घरेलू मांग से मिलेगा सहारा

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग और मजबूत निजी खपत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को कुछ हद तक सपोर्ट दे सकती है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल ऊंची बनी रह सकती हैं, लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले समय में स्थिरता देखने को मिल सकती है।

    कुल मिलाकर, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और आने वाले वर्षों में यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रह सकती है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट संकट का बड़ा असर!

    मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट संकट का बड़ा असर!


    नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है, जहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।

    ब्रेंट और WTI में तेजी

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.13% बढ़कर 97.01 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड 1.39% की बढ़त के साथ 99.24 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया।

    गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को तेल की कीमतों में करीब 20% की गिरावट आई थी और यह 100 डॉलर के नीचे आ गया था। अब दोबारा तेजी ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

    Multi Commodity Exchange पर भी दिखा असर

    भारतीय बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (20 अप्रैल डिलीवरी) करीब 2.43% बढ़कर 9,150 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह तेजी घरेलू बाजार में भी वैश्विक संकेतों का असर दर्शाती है।

    सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार

    हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। Israel द्वारा Lebanon में जारी हमले और Iran की गतिविधियों ने स्थिति को जटिल बना रखा है।

    बताया जा रहा है कि Iran ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है, जिससे शिपिंग गतिविधियां सामान्य स्तर के 10% से भी कम रह गई हैं। शिपिंग कंपनियां भी स्थिति स्पष्ट होने तक इस मार्ग से जहाज भेजने में सतर्कता बरत रही हैं।

    Donald Trump की चेतावनी

    इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर सीजफायर का पालन नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसकी संभावना फिलहाल कम है।

    उन्होंने दोहराया कि Iran को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी और Strait of Hormuz को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका तैयार है।

    आगे क्या संकेत?

    Asian Development Bank (ADB) के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए निकट भविष्य में तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो बाजार में धीरे-धीरे स्थिरता लौट सकती है।

  • आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती!

    आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती!


    नई दिल्ली। शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 10 पैसे चढ़कर 92.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 92.66 पर बंद हुआ था। बाजार में यह मजबूती मुख्य रूप से Reserve Bank of India (RBI) की ओर से तय की गई समयसीमा के चलते देखने को मिली।

    बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग से मिला सपोर्ट

    10 अप्रैल बैंकों के लिए ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में अपनी अतिरिक्त पोजीशन खत्म करने की आखिरी तारीख है। इसी कारण बैंकों ने अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन कम करनी शुरू कर दी, जिससे रुपए को सपोर्ट मिला।

    मार्च में RBI ने निर्देश दिया था कि बैंकों की रुपए में नेट ओपन पोजीशन हर दिन के अंत में 100 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि बैंकों ने इस सीमा में ढील की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय बैंक ने इसे सख्ती से लागू रखा।

    बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ का माहौल

    विश्लेषकों का मानना है कि जब तक RBI की ओवरनाइट पोजीशन लिमिट को लेकर और स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार सतर्क बना रहेगा। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डेडलाइन के बाद रुपए में बड़ी गिरावट की आशंका फिलहाल उतनी मजबूत नहीं है, जितनी बताई जा रही है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर

    इस बीच, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी निवेशकों के रडार पर है। ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।

    घरेलू बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर कच्चे तेल के वायदा भाव ने इंट्रा-डे में 9,222 रुपये का स्तर छुआ, जो 3% से ज्यादा की बढ़त दर्शाता है। तेल की कीमतों में तेजी आमतौर पर रुपए पर दबाव डालती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

    RBI गवर्नर का बयान

    इस हफ्ते की शुरुआत में RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा था कि विदेशी मुद्रा बाजार में लगाए गए कुछ प्रतिबंध अस्थायी हैं। इनका उद्देश्य बाजार में बढ़ती अस्थिरता को नियंत्रित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के समय में विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिसका एक कारण बैंकों द्वारा किए गए आर्बिट्रेज ट्रेड्स भी रहे हैं।

    आगे क्या संकेत?

    रुपए की चाल आगे RBI की नीतियों, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी। फिलहाल डेडलाइन से पहले रुपया मजबूत जरूर हुआ है, लेकिन आगे की दिशा को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है। RBI की डेडलाइन से पहले बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग के चलते रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ, हालांकि आगे बाजार की दिशा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, कीमतें करीब 1% तक लुढ़कीं!

    मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, कीमतें करीब 1% तक लुढ़कीं!


    नई दिल्ली।सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग में कमी आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।

    सोने में हल्की कमजोरी, लेकिन सपोर्ट कायम

    एमसीएक्स पर सोने का जून वायदा करीब 0.55% गिरकर 1,52,585 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। कारोबार के दौरान यह 1,52,419 रुपये के निचले स्तर तक गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,52,990 रुपये रहा। विश्लेषकों का मानना है कि सोना फिलहाल 1,52,500 रुपये के आसपास सपोर्ट ले रहा है। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिल रही है, लेकिन मजबूत तेजी के संकेत अभी नहीं हैं। अगर कीमत 1,53,000 रुपये के ऊपर टिकती है, तो यह 1,55,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं, अगर सोना 1,52,000 रुपये के नीचे फिसलता है, तो इसमें और गिरावट आकर यह 1,50,000 से 1,48,000 रुपये तक जा सकता है।

    चांदी भी दबाव में, लेकिन इंडस्ट्रियल डिमांड से सहारा

    चांदी का मई वायदा भी करीब 0.96% गिरकर 2,41,435 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान यह 2,41,510 रुपये के निचले स्तर तक पहुंचा, जबकि ऊपरी स्तर 2,43,704 रुपये रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी को 2,42,000 रुपये के आसपास सपोर्ट मिल रहा है, जहां सेफ-हेवन और इंडस्ट्रियल डिमांड दोनों का सहारा बना हुआ है। हालांकि, इसकी चाल फिलहाल सतर्क बनी हुई है।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    चांदी के लिए 2,45,000 से 2,47,000 रुपये के बीच मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो कीमत 2,50,000 से 2,52,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं नीचे की ओर 2,40,000 रुपये का स्तर अहम है, जिसके टूटने पर यह 2,36,000 से 2,35,000 रुपये तक गिर सकती है।

    बाजार का मूड बदल रहा है

    हाल के दिनों में निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों से हटकर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी के संकेत भी सेफ-हेवन डिमांड को कमजोर कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच जारी अनिश्चितता के कारण सोना-चांदी में बड़ी गिरावट फिलहाल सीमित रह सकती है।

  • छोटे और मध्यम उद्योग संकट में…. ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित

    छोटे और मध्यम उद्योग संकट में…. ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित


    नई दिल्ली।
    फिरोजाबाद (Firozabad) में करीब 200 छोटे और मध्यम उद्योगों (Small and Medium Industries) का अस्तित्व गैस संकट के कारण खतरे में हैं। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है या बंद कर दिया है। इससे हजारों कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट बताती है कि फिरोजाबाद का संकट कैसे पूरे देश की कई इंडस्ट्रीज को प्रभावित कर रहा है।

    बेंगलुरु की कंपनी Mossant Craft Kombucha के को-फाउंडर शिशिर साथ्यान पिछले एक महीने से अपने प्रीमियम ड्रिंक्स के लिए कांच की बोतलें जुटाने में परेशान हैं। उनका कहना है कि बाजार में अब कांच के फ्लास्क मिल ही नहीं रहे हैं, जबकि गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक की मांग सबसे ज्यादा होती है। बढ़ती लागत को संभालने के लिए कंपनी अब मार्केटिंग और डिस्काउंट बजट में कटौती करने पर मजबूर हो गई है।


    गैस सप्लाई में बड़ी कटौती का असर

    देश में कांच की कमी की सबसे बड़ी वजह गैस संकट है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए LPG और LNG की सप्लाई फैक्ट्रियों से हटाकर घरों की ओर मोड़ दी है। इसका सीधा असर कांच बनाने वाले उद्योगों पर पड़ा है, जो गैस पर निर्भर होते हैं।


    फिरोजाबाद बना संकट का केंद्र

    पिछले 400 साल से कांच उद्योग का केंद्र रहा उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बना है। यहां के कारखाने नेचुरल गैस से चलते हैं। कांच बनाने की भट्टियां 1500°C तापमान पर लगातार चलती रहती हैं। अगर ये ठंडी पड़ जाएं तो दोबारा चालू करने में हफ्तों का समय और अरबों रुपये का खर्च लगता है।

    प्रोडक्शन हुआ आधा, कीमतें 20% तक बढ़ीं
    गैस सप्लाई कम होने के कारण कई कंपनियों को उत्पादन 50% तक घटाना पड़ा है। कांच की कीमतें 20% तक बढ़ गई हैं। कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और विस्तार योजनाएं रोक दी गई हैं। ग्लोबल कंपनियों को सप्लाई करने वाले उद्योग भी इस संकट से जूझ रहे हैं।


    हर सेक्टर पर असर: दवा, शराब, FMCG तक झटका

    कांच की कमी का असर सिर्फ बोतलों तक सीमित नहीं है। दूध की बोतलें, जैम के जार, दवाइयों की शीशियां, कॉस्मेटिक पैकेजिंग, सबकी सप्लाई प्रभावित हुई है। कुछ कंपनियों को पैकेजिंग लागत 30% तक बढ़ानी पड़ी है। एस आर ग्लास के प्रबंध निदेशक प्रांजल मित्तल को उम्मीद है कि कांच उत्पादन में यह रुकावट महीनों तक चलेगा। उनका कहना है, “अगर युद्ध एक सप्ताह बढ़ता है, तो हमारा कारोबार एक महीने के लिए गड़बड़ा जाता है। इसका मतलब है कि अभी अगले चार महीने बिगड़ चुके हैं।”


    भारत की क्या है कमजोरी

    भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लगभग 50% नेचुरल गैस आयात होती है। करीब 40% LNG सिर्फ कतर से आता है। LPG का लगभग 90% आयात मिडिल-ईस्ट से होता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू उद्योगों पर पड़ रहा है।

    रेस्टोरेंट और शादी सीजन भी प्रभावित: गैस की कमी का असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है। रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे फूड बिजनेस भी LPG की कमी से जूझ रहे हैं। इसका असर शादी सीजन और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिख रहा है।

    जल्दी राहत की उम्मीद कम: हालांकि सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालात जल्द सामान्य नहीं होंगे। ग्लास इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि अगर युद्ध एक हफ्ता भी बढ़ता है, तो इसका असर कई महीनों तक चलता है।

  • स्टार्टअप से संकट तक का सफर, ShopClues की कहानी ने सबको चौंकाया!

    स्टार्टअप से संकट तक का सफर, ShopClues की कहानी ने सबको चौंकाया!


    नई दिल्ली। भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में एक समय ShopClues का नाम तेजी से उभरते स्टार्टअप्स में लिया जाता था। 2016 में कंपनी की वैल्यूएशन करीब 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। लेकिन कुछ ही वर्षों में हालात इतने बदल गए कि 2019 में सिंगापुर की कंपनी Qoo10 ने इसे मात्र 70–100 मिलियन डॉलर में खरीद लिया यानी लगभग 90% गिरावट।

    टियर-2 और टियर-3 शहरों पर दांव, शुरुआत में मिली बड़ी सफलता
    ShopClues ने खुद को “ऑनलाइन चांदनी चौक” के रूप में स्थापित किया था। कंपनी ने छोटे शहरों के कीमत-संवेदनशील ग्राहकों को टारगेट किया और कम कीमत वाले, बिना ब्रांड के प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराए। उस समय Amazon और Flipkart जैसे दिग्गज मुख्य रूप से मेट्रो शहरों पर फोकस कर रहे थे, जिससे ShopClues को तेजी से ग्रोथ मिली।

    बड़ी कंपनियों की एंट्री से बिगड़ा खेल
    जैसे ही Amazon और Flipkart ने छोटे शहरों में अपनी पकड़ मजबूत की, बेहतर लॉजिस्टिक्स, तेज डिलीवरी और भरोसेमंद सर्विस के दम पर उन्होंने बाजार पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया। ShopClues का सस्ता मॉडल इस प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाया और कंपनी का मार्केट शेयर तेजी से गिरने लगा।

    खराब क्वालिटी और बढ़ते रिटर्न ने तोड़ा भरोसा
    ShopClues की सबसे बड़ी कमजोरी बनी-असंगठित विक्रेताओं पर अत्यधिक निर्भरता। इससे प्लेटफॉर्म पर नकली और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की भरमार हो गई। नतीजतन, रिटर्न रेट 30-40% तक पहुंच गया और ग्राहकों का भरोसा टूटने लगा। वहीं प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने क्वालिटी और कस्टमर एक्सपीरियंस पर भारी निवेश किया।

    लीडरशिप संकट और विवादों ने बढ़ाई मुश्किलें
    कंपनी को अंदरूनी झटके भी लगे। सह-संस्थापक Sandeep Aggarwal को अमेरिका में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों के बाद पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद Radhika Aggarwal और Sanjay Sethi ने नेतृत्व संभाला। संस्थापकों के बीच सार्वजनिक विवादों ने निवेशकों का भरोसा और कमजोर कर दिया।

    फंडिंग की कमी और गिरता कारोबार
    IPO से पहले मुनाफा दिखाने के प्रयास में कंपनी ने मार्केटिंग खर्च घटा दिया, जिससे बिक्री (GMV) में भारी गिरावट आई। नए निवेश जुटाने के प्रयास भी असफल रहे और मौजूदा निवेशकों ने भी हाथ खींच लिया। इससे कंपनी “पतन के चक्र” में फंसती चली गई।

    रणनीतिक बदलाव भी नहीं बचा पाए
    ShopClues ने बिजनेस मॉडल बदलने की कोशिश की—जैसे B2B वर्टिकल और रीसेलर प्लेटफॉर्म but ये प्रयास गिरावट को रोकने में नाकाम रहे। साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच जैसी खबरों ने अनिश्चितता और बढ़ा दी।

    संस्थापक का नया सफर, लेकिन चुनौतियां जारी
    ShopClues छोड़ने के बाद संदीप अग्रवाल ने Droom की शुरुआत की, जो सेकंड हैंड वाहनों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। हालांकि, यह कंपनी भी GST जांच जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

  • Gold & Petrol Diesel Price Today: सोना हुआ सस्ता, पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

    Gold & Petrol Diesel Price Today: सोना हुआ सस्ता, पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल मार्केट पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे आम जनता को राहत मिली है।

    सोना हुआ सस्ता, दो दिन बाद टूटी तेजी
    लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद आज सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी Delhi में 24 कैरेट सोना ₹10 सस्ता होकर ₹1,50,800 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना ₹10 सस्ता होकर ₹1,38,240 प्रति 10 ग्राम पिछले दो दिनों में 24 कैरेट सोना ₹280 और 22 कैरेट ₹260 तक सस्ता हो चुका है। सरकार द्वारा इंपोर्ट प्राइस में कटौती का असर भी कीमतों पर देखा जा रहा है।

    देश के बड़े शहरों में सोने का भाव
    Mumbai: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Kolkata: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Chennai: ₹1,52,630 (24K), ₹1,39,910 (22K)
    Bengaluru: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Lucknow: ₹1,50,800 (24K), ₹1,38,240 (22K)
    Patna: ₹1,50,700 (24K), ₹1,38,140 (22K)

    चांदी भी सस्ती, 4 दिन बाद आई गिरावट
    चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। दिल्ली में चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,49,900 प्रति किलो पर पहुंच गई है Mumbai और Kolkata में भी लगभग यही भाव है Chennai में चांदी सबसे महंगी ₹2,54,900 प्रति किलो है

    कच्चे तेल में उछाल, सप्लाई को लेकर चिंता
    ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। ब्रेंट क्रूड $96.73 प्रति बैरल WTI क्रूड $96.99 प्रति बैरल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, जानें आपके शहर का रेट कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में ईंधन के दाम नहीं बढ़े हैं

    Delhi: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
    Mumbai: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03
    Chennai: पेट्रोल ₹101.06 | डीजल ₹91.50
    Kolkata: पेट्रोल ₹105.86 | डीजल ₹92.02
    Bengaluru: पेट्रोल ₹102.96 | डीजल ₹88.95
    Hyderabad: पेट्रोल ₹107.46 | डीजल ₹97.00

    घर बैठे ऐसे चेक करें ताजा रेट
    आप SMS के जरिए भी अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट जान सकते हैं: IOCL: RSP भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर विशेषज्ञों के अनुसार सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतें आगे Iran-United States के बीच तनाव, ग्लोबल आर्थिक आंकड़े और RBI की नीतियों पर निर्भर करेंगी।

  • शेयर मार्केट टुडे: हफ्ते के चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

    शेयर मार्केट टुडे: हफ्ते के चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 9 अप्रैल को गिरावट देखने को मिली। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन बाजार की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में ही बिकवाली का दबाव नजर आया। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

    कमजोर शुरुआत, शुरुआती कारोबार में गिरावट तेज
    सेंसेक्स 243 अंक की गिरावट के साथ 77,319 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 भी 88 अंकों की कमजोरी के साथ 23,909 पर ओपन हुआ। सुबह करीब 9:20 बजे तक गिरावट और बढ़ गई, जहां सेंसेक्स करीब 300 अंक टूटकर 77,261 पर आ गया, वहीं निफ्टी 113 अंक गिरकर 23,883 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया।

    गेनर्स और लूजर्स में दिखा मिला-जुला रुख
    गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। टॉप गेनर्स में NTPC, Tata Steel, Power Grid Corporation of India, ITC Limited और Bharti Airtel शामिल रहे। वहीं टॉप लूजर्स में Sun Pharmaceutical Industries, IndiGo, Adani Ports और Larsen & Toubro जैसे शेयर दबाव में रहे।

    एक दिन पहले बाजार में आई थी जोरदार तेजी
    इससे पहले 8 अप्रैल को बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। सेंसेक्स करीब 2946 अंक चढ़कर 77,562 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 873 अंक की तेजी के साथ 23,997 पर पहुंच गया था। उस दिन ज्यादातर सेक्टर्स में खरीदारी देखी गई थी।

    गिरावट की वजह क्या है?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं पिछले दिन की तेज बढ़त के बाद मुनाफावसूली ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव निवेशकों का सतर्क रुख निवेशकों के लिए क्या संकेत? बाजार में हल्की गिरावट को सामान्य करेक्शन माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ऐसे मौके निवेश के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 9 अप्रैल को शेयर बाजार में आई गिरावट ने यह संकेत दिया है कि तेज रैली के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

  • ईरान युद्ध थमने से क्रिप्टो मार्केट में तेजी…. 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे Bitcoin के रेट

    ईरान युद्ध थमने से क्रिप्टो मार्केट में तेजी…. 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे Bitcoin के रेट


    वाशिंगटन।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) में सीजफायर के बाद बिटकॉइन की कीमतें (Bitcoin Price) तीन हफ्ते के हाई पर पहुंच गई हैं। न्यूयॉर्क ट्रेडिंग (New York Trading) में बिटकॉइन 5% चढ़कर 72,841 डॉलर तक पहुंच गया, जो 18 मार्च के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, बाद में इसमें हल्की मुनाफावसूली भी देखने को मिली।

    ईथर और अन्य क्रिप्टो में भी उछाल: तेजी सिर्फ बिटकॉइन तक सीमित नहीं रही। ईथेरियम भी 7.5% उछलकर 2,273 डॉलर तक पहुंच गया। यानी पूरे क्रिप्टो मार्केट में निवेशकों का भरोसा लौटा है।

    सीजफायर से बाजार में आई राहत
    डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले रोकने के फैसले ने ग्लोबल मार्केट में पॉजिटिव माहौल बना दिया। इसके बाद शेयर बाजारों में तेजी आई और कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 95 डॉलर से नीचे आ गईं। होर्मूज स्ट्रेट के फिर से खुलने की उम्मीद ने निवेशकों का डर कम किया, जिससे जोखिम वाले ऐसेट्स जैसे क्रिप्टो में खरीदारी बढ़ी।


    खतरा अभी बाकी: टूट सकता है ट्रेंड

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह तेजी स्थायी नहीं भी हो सकती। अगर सीजफायर टूटता है, तो बिटकॉइन फिर से गिरकर 66,000 डॉलर तक जा सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन 60,000 से 75,000 डॉलर के बीच ही झूल रहा है।


    शॉर्ट सेलर्स को झटका

    तेजी ने उन ट्रेडर्स को नुकसान पहुंचाया, जो गिरावट पर दांव लगा रहे थे। डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की शॉर्ट पोजीशन खत्म हो गईं। ब्लूमबर्ग ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि अगर कीमत 73,500 डॉलर के ऊपर टिकती है, तो बिटकॉइन 80,000 डॉलर तक जा सकता है। ब्लॉकचेन डेटा के अनुसार, अभी स्पॉट मार्केट में मांग उतनी मजबूत नहीं है।

    हालांकि, यूएस में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में सोमवार को $471.3 मिलियन का नेट इनफ्लो हुआ। यह पिछले हफ़्ते के $22.3 मिलियन के इनफ्लो से काफी अधिक था। यह संस्थागत निवेशकों की वापसी का शुरुआती संकेत हो सकता है।


    राहत की रैली, पर नजर जरूरी:

    सीजफायर ने क्रिप्टो मार्केट को मजबूती दी है, लेकिन आगे की दिशा पूरी तरह जियो-पॉलिटिकल हालात और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। फिलहाल, बाजार में तेजी है, लेकिन जोखिम भी बरकरार है।

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    विशेषज्ञों का कहना, RBI के फैसले से गृह ऋण लेने वालों को मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से होम लोन (मॉर्गेज) की ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलेगी। रियल एस्टेट मार्केट में अब खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही अपने वित्तीय निर्णयों को बेहतर तरीके से योजना बना सकेंगे।

    विशेषज्ञों ने दी प्रतिक्रिया

    श्रीनिवास राव, वेस्टियन के सीईओ (FRICS) ने कहा कि रेपो रेट स्थिर रहने से निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद होम लोन दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी, जो घर खरीदने वालों के लिए राहत है। उन्होंने बताया कि यह कदम बढ़ती लागत के असर को कम करने में मदद करेगा और बाजार की बदलती स्थिति के अनुसार रणनीति बनाने का समय देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह आखिरी बार हो सकता है जब रेपो रेट स्थिर रहे; भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

    शिशिर बैजल, नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि आरबीआई का ‘न्यूट्रल’ रुख अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाएगा। उन्होंने बताया कि स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदने वालों के लिए सामर्थ्य बनी रहती है और डेवलपर्स को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक संकेतों से बाजार प्रभावित होता है, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का न होना सकारात्मक संकेत है।

    विमल नादर, कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और रिसर्च हेड ने कहा कि मौजूदा संकट की तीव्रता और अवधि का असर खपत पर पड़ सकता है, खासकर रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और हाउसिंग सेक्टर में। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से सस्ते और मिड-इनकम सेगमेंट के खरीदार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू रियल एस्टेट सेक्टर को मध्यम अवधि में मजबूती देंगे।

    आर्थिक संकेतक: महंगाई और जीडीपी

    आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए बैंक ने ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई है। इससे अर्थव्यवस्था पर अप्रत्याशित झटकों का असर कम होगा और मौद्रिक स्थिरता बनी रहेगी।

    रियल एस्टेट और होम लोन पर असर

    स्थिर रेपो रेट से होम लोन दरें स्थिर रहेंगी, जिससे घर खरीदने वालों के लिए वित्तीय योजना आसान होगी। डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की योजना और लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से निजी निवेश और मांग को बनाए रखने में सहारा मिलेगा, जबकि सप्लाई चेन बाधाओं और बढ़ती निर्माण लागत जैसी चुनौतियों का असर सीमित रहेगा।

    आरबीआई का यह निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर और होम लोन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। स्थिर ब्याज दरों से खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही लाभान्वित होंगे, जबकि अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू भविष्य में स्थिर विकास सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, वैश्विक और स्थानीय जोखिमों पर नजर रखना आवश्यक रहेगा।