Category: Economy

  • भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, RBI ने अगले दो साल का GDP अनुमान पेश किया

    भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, RBI ने अगले दो साल का GDP अनुमान पेश किया


    नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) का नया अनुमान बुधवार को जारी किया।

    वित्त वर्ष 2026
    वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6%, जो पहले 7.4% थी।
    बढ़ती वृद्धि के कारण: मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार, और घरेलू मांग में मजबूती। दिसंबर तिमाही 2026 में जीडीपी ग्रोथ 7.8%, जबकि पिछली तिमाही में 8.4% थी।

    वित्त वर्ष 2027
    जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9%, जो बाहरी जोखिम और लागत दबाव के कारण थोड़ी नरमी दर्शाता है।
    पहली तिमाही: 6.8% (पहले 6.9%)
    दूसरी तिमाही: 6.7% (पहले 7%)
    मुख्य कारण: ईरान युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव।
    महंगाई का अनुमान
    वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान।
    पहली तिमाही: 4%
    दूसरी तिमाही: 4.4%
    तीसरी तिमाही: 5.2%
    चौथी तिमाही: 4.7%
    आरबीआई के अन्य संकेत
    बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी।
    निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने की उम्मीद, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग उच्च स्तर पर।
    विदेशी निवेश आकर्षक बना हुआ है; 3 अप्रैल तक विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर। नेट FDI में सुधार और ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत को एक आकर्षक गंतव्य माना जा रहा है।

    आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने चेताया कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी महंगाई का खतरा बढ़ा सकती है और वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

    वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जबकि 2027 में वैश्विक और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वृद्धि में थोड़ा नरमी आने का अनुमान है। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने की संभावना है और निजी निवेश आर्थिक विकास का समर्थन करेगा।

  • ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बावजूद सोना और कीमती धातुओं में जोरदार तेजी

    ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बावजूद सोना और कीमती धातुओं में जोरदार तेजी


    नई दिल्ली।अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के लिए युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा के बावजूद, सुरक्षित निवेश की मांग के कारण बुधवार को कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला।

    सोना और चांदी में रिकॉर्ड उछाल
    एमसीएक्स पर सोने का वायदा (5 जून) 3,688 रुपए यानी 2.7% की तेजी के साथ 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया।
    चांदी का वायदा (5 मई) 6% से अधिक बढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के उच्चतम स्तर पर था। खबर लिखे जाने तक, 5 जून कॉन्ट्रैक्ट सोना 1,54,471 रुपए (+2.8%) और 5 मई कॉन्ट्रैक्ट चांदी 2,45,678 रुपए (+6.19%) पर था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में यह तेजी सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और निचले स्तर पर खरीदारी की वजह से आई है।

    करंसी और शेयर बाजार में मजबूती
    भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत होकर 92.61 पर पहुंच गया।
    शेयर बाजार में भी सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4% तक उछल गए। इसका कारण आरबीआई द्वारा रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखना और सीजफायर की घोषणा रही।

    तेल की कीमतों में भारी गिरावट
    ब्रेंट क्रूड 16% यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल।
    यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 20% यानी 21.90 डॉलर गिरकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल।
    बाजार पर प्रभाव

    विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का सीजफायर ऐलान भू-राजनीतिक तनाव को कुछ हद तक कम कर रहा है। इसके बावजूद अस्थिर वैश्विक हालात और निवेशकों की सतर्कता सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और चांदी की मांग को बढ़ा रही है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश दिए हैं, जो कुछ घंटे पहले दिए गए कड़े बयानों के बाद एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

     सीजफायर की घोषणा के बावजूद निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित हुए, जिससे सोना और चांदी में तेजी आई, रुपये की मजबूती और शेयर बाजार में उछाल देखा गया।

  • मजबूत रबी फसल के बीच RBI का अनुमान, FY 2026-27 में महंगाई 4.6% रहेगी

    मजबूत रबी फसल के बीच RBI का अनुमान, FY 2026-27 में महंगाई 4.6% रहेगी


    नई दिल्ली।देश में महंगाई को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। Reserve Bank of India (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मजबूत रबी फसल के चलते खाद्य आपूर्ति बेहतर रहेगी, जिससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।

    तिमाही आधार पर महंगाई का अनुमान

    आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई 4.6% रहने का अनुमान है।

    पहली तिमाही: 4.0%
    दूसरी तिमाही: 4.4%
    तीसरी तिमाही: 5.2%
    चौथी तिमाही: 4.7%
    यह संकेत देता है कि साल के बीच में महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर यह नियंत्रित दायरे में रहेगी।

    रबी फसल से मिलेगी राहत

    अच्छे रबी उत्पादन के कारण बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खाद्य कीमतों पर दबाव कम होगा। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

    ऊर्जा कीमतें बनीं चिंता का कारण

    Sanjay Malhotra ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्रीमियम पेट्रोल, एलपीजी और डीजल पर दिख रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव इस स्थिति को और जटिल बना सकता है।

    कोर महंगाई भी नियंत्रण में

    आरबीआई के अनुसार, कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) 2026-27 में करीब 4.4% रहने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि घरेलू मांग से जुड़ा महंगाई दबाव फिलहाल ज्यादा नहीं है।

    मौसम और वैश्विक हालात से जोखिम

    महंगाई के अनुमान के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं-

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष
    ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी
    संभावित एल नीनो जैसी मौसम स्थितियां
    सप्लाई चेन में बाधाएं
    ये सभी कारक भविष्य में महंगाई को बढ़ा सकते हैं।

    अर्थव्यवस्था में बनी हुई है मजबूती

    फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। निजी खपत और निवेश मांग आर्थिक विकास को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आगे देखने को मिल सकता है।

    “वेट एंड वॉच” की रणनीति

    आरबीआई ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। Reserve Bank of India का कहना है कि मौजूदा स्थिति एक “सप्लाई शॉक” जैसी है, इसलिए बदलते हालात को देखते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति सही रहेगी।

    संतुलन बनाए रखने की चुनौती

    मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मानना है कि महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत है और बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।

  • कामकाज में कोई समस्या नहीं, RBI ने दिया भरोसा और खत्म की चिंताएं

    कामकाज में कोई समस्या नहीं, RBI ने दिया भरोसा और खत्म की चिंताएं


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank को लेकर उठे सवालों के बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने बड़ा बयान दिया है। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बुधवार को साफ कहा कि बैंक के कामकाज में किसी तरह की कोई समस्या सामने नहीं आई है और बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह स्थिर है।

    इस्तीफे के बाद उठे थे सवाल

    हाल ही में बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष Atanu Chakraborty के अचानक इस्तीफे ने हलचल पैदा कर दी थी। उन्होंने कुछ नीतियों और कार्यशैली से असहमति जताते हुए पद छोड़ा था, जिसके बाद बैंक की गवर्नेंस पर सवाल उठने लगे थे।

    आरबीआई की निगरानी में सब ठीक

    मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में Sanjay Malhotra ने कहा कि नियामक निगरानी के दौरान बैंक के संचालन में कोई खामी नहीं पाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा बैंकिंग कानून पर्याप्त और प्रभावी हैं, और फिलहाल उनमें बदलाव की जरूरत नहीं है।

    “व्यक्तिगत घटनाओं से सिस्टम पर असर नहीं”

    आरबीआई गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी एक बैंक में हुई व्यक्तिगत घटना पूरे सेक्टर की स्थिरता को प्रभावित नहीं करती।
    उन्होंने यह भी जोड़ा कि HDFC Bank की वित्तीय स्थिति और मुनाफे को लेकर कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं है।

    बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश जल्द

    आरबीआई ने संकेत दिए हैं कि वह बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश लाने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बोर्ड सदस्य रोजमर्रा के कामकाज में उलझने के बजाय नीतिगत और रणनीतिक फैसलों पर ज्यादा ध्यान दें।

    प्रबंधन और बोर्ड की भूमिकाएं होंगी स्पष्ट

    प्रस्तावित बदलावों के तहत बैंकों के प्रबंधन को दैनिक संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि बोर्ड बड़े फैसलों और दीर्घकालिक रणनीति पर फोकस करेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

    बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता का संदेश

    Reserve Bank of India के इस बयान से निवेशकों और ग्राहकों को राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में फैली अनिश्चितता कम होगी और बैंकिंग सेक्टर में विश्वास मजबूत बना रहेगा।

  • करण अदाणी का ऐलान, ओडिशा में विकास और रोजगार को मिलेगा नया बढ़ावा

    करण अदाणी का ऐलान, ओडिशा में विकास और रोजगार को मिलेगा नया बढ़ावा


    नई दिल्ली। देश के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में Adani Group ने ओडिशा में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। Adani Ports and Special Economic Zone (एपीएसईजेड) के मैनेजिंग डायरेक्टर Karan Adani ने बुधवार को तीन बड़े प्रोजेक्ट्स में 33,081 करोड़ रुपए निवेश की घोषणा की। इन परियोजनाओं से करीब 9,700 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है।

    डिजिटल इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा: भुवनेश्वर में डेटा सेंटर

    पहला प्रोजेक्ट Bhubaneswar में स्थापित किया जाएगा, जहां 800 करोड़ रुपए की लागत से एक आधुनिक डेटा सेंटर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और करीब 200 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह कदम राज्य को आईटी और डिजिटल सेक्टर में आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

    बिजली उत्पादन में मजबूती: कटक में मेगा थर्मल पावर प्लांट

    दूसरा और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट Cuttack के पास लगाया जाएगा, जहां 30,181 करोड़ रुपए की लागत से एक विशाल थर्मल पावर प्लांट विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से लगभग 7,000 नौकरियां सृजित होंगी। साथ ही, इससे उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली आपूर्ति मजबूत होगी, जिससे राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

    इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा: सीमेंट निर्माण यूनिट

    तीसरा प्रोजेक्ट भी कटक के पास ही प्रस्तावित है, जहां 2,100 करोड़ रुपए के निवेश से एक सीमेंट निर्माण यूनिट स्थापित की जाएगी। इस यूनिट से करीब 2,500 लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मजबूती मिलेगी।

    “निवेश नहीं, विश्वास का प्रतीक”

    Karan Adani ने कहा कि ये प्रोजेक्ट्स केवल निवेश नहीं, बल्कि ओडिशा के विकास में विश्वास का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि राज्य अब विकास के मोड़ पर नहीं, बल्कि विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है और भारत की औद्योगिक प्रगति का अगला अध्याय यहीं लिखा जाएगा।

    ओडिशा बनेगा बड़ा औद्योगिक हब

    अदाणी ग्रुप का मानना है कि ओडिशा के पास प्राकृतिक संसाधन, कुशल मानव संसाधन और बेहतर प्रशासन जैसी बड़ी ताकतें हैं। कंपनी राज्य को एक बड़े औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।

    दीर्घकालिक साझेदारी पर जोर

    Adani Group ने स्पष्ट किया है कि वह ओडिशा में केवल निवेश नहीं कर रहा, बल्कि लंबे समय तक विकास यात्रा में साझेदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में भी कंपनी राज्य में अपनी मौजूदगी और निवेश को बढ़ा सकती है।

  • फार्मा, फूड और कृषि सेक्टर को मिलेगा फायदा, केंद्र का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी आवंटन का नया फॉर्मूला तय किया है। Ministry of Petroleum and Natural Gas के इस फैसले का मकसद जरूरी सेक्टर्स को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और ऊर्जा संकट के संभावित असर को कम करना है।

    किन सेक्टर्स को मिलेगी प्राथमिकता

    नए फॉर्मूले के तहत फार्मा, फूड, कृषि, पॉलीमर, पैकेजिंग, पेंट, स्टील, बीज, सिरेमिक, फाउंड्री, फोर्जिंग, ग्लास और एयरोसोल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बल्क एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि ये सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरतों से सीधे जुड़े हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता देना जरूरी है।

    खपत के आधार पर तय होगा आवंटन

    सरकार ने तय किया है कि इन उद्योगों को मार्च 2026 से पहले की उनकी एलपीजी खपत का 70 प्रतिशत आवंटित किया जाएगा। हालांकि, पूरे सेक्टर के लिए कुल सीमा 0.2 टीएमटी (थाउजेंड मीट्रिक टन) प्रति दिन रखी गई है, ताकि सभी को संतुलित तरीके से गैस मिल सके।

    जहां गैस विकल्प नहीं, वहां पहले एलपीजी

    नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन उद्योगों में एलपीजी की जगह प्राकृतिक गैस (PNG) का उपयोग संभव नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी दी जाएगी। इससे उत्पादन पर असर कम होगा और सप्लाई चेन बनी रहेगी।

    रजिस्ट्रेशन और पीएनजी कनेक्शन जरूरी

    सरकार ने उद्योगों के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। कंपनियों को तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा और साथ ही सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के पास पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। हालांकि, जिन उद्योगों में एलपीजी अनिवार्य है, वहां यह शर्त लागू नहीं होगी।

    राज्यों के लिए भी प्रोत्साहन योजना

    सरकार ने राज्यों को पहले ही नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड एलपीजी का 70 प्रतिशत आवंटन कर दिया है। इसके अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा उन राज्यों को मिलेगा, जो पीएनजी से जुड़े सुधार लागू करेंगे। राज्यों को तीन प्रमुख कदम उठाने को कहा गया है

    गैस वितरण आदेश 2026 को सभी विभागों तक पहुंचाना
    रिफॉर्म-लिंक्ड एलपीजी आवंटन का लाभ उठाना
    कंप्रेस्ड बायो गैस नीति को जल्द लागू करना
    छोटे सिलेंडरों की मांग में उछाल

    सरकार के मुताबिक, 23 मार्च से अब तक करीब 7.8 लाख 5 किलो के फ्री-ट्रेड एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। सिर्फ एक दिन में 1.06 लाख से ज्यादा सिलेंडर बिके, जो मांग में तेज बढ़ोतरी का संकेत है। इसके अलावा तेल कंपनियों ने जागरूकता बढ़ाने के लिए 1,300 से ज्यादा शिविर भी लगाए हैं।

    क्या होगा असर?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया फॉर्मूला उद्योगों को राहत देने के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने में मदद करेगा। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है, यह कदम आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने में अहम साबित हो सकता है।

  • ऑटो सेक्टर में झटका: हुंडई ने 1% तक कीमत बढ़ाने का किया ऐलान!

    ऑटो सेक्टर में झटका: हुंडई ने 1% तक कीमत बढ़ाने का किया ऐलान!


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Hyundai Motor India Limited (एचएमआईएल) ने अपने ग्राहकों को झटका देते हुए कारों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कंपनी ने बताया कि 1 मई 2026 से उसकी गाड़ियों की कीमतों में अधिकतम 1 प्रतिशत तक की वृद्धि की जाएगी। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर लागू होगी, यानी हर गाड़ी पर इसका असर अलग-अलग देखने को मिलेगा।

    लागत बढ़ने का असर, ग्राहकों पर डाला जाएगा आंशिक भार

    कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में साफ किया है कि इनपुट लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। Hyundai Motor India Limited ने कहा कि वह हमेशा लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश करती रही है, ताकि ग्राहकों पर ज्यादा बोझ न पड़े। लेकिन अब परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना जरूरी हो गया है।

    बिक्री के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन

    कीमतें बढ़ाने के बावजूद कंपनी की बिक्री के आंकड़े मजबूत बने हुए हैं। मार्च 2026 में एचएमआईएल ने कुल 69,004 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल के मुकाबले 2.5 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें घरेलू बिक्री 55,064 यूनिट्स रही, जो मार्च महीने के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और इसमें सालाना आधार पर 6.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    तिमाही और तिमाही में भी रिकॉर्ड प्रदर्शन

    जनवरी से मार्च 2026 के बीच कंपनी की कुल बिक्री 2,08,275 यूनिट्स रही, जो पिछले साल की तुलना में 8.7 प्रतिशत ज्यादा है। चौथी तिमाही में घरेलू बिक्री 1,66,578 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो कंपनी के इतिहास में किसी भी तिमाही का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह पिछले साल के मुकाबले 8.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

    निर्यात में भी दिखी तेजी

    घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के मोर्चे पर भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इस दौरान निर्यात 9.4 प्रतिशत बढ़कर 41,697 यूनिट्स तक पहुंच गया, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी की मजबूत पकड़ को दिखाता है।

    टाटा मोटर्स ने भी बढ़ाए दाम

    ऑटो सेक्टर में कीमतों में बढ़ोतरी का यह ट्रेंड सिर्फ हुंडई तक सीमित नहीं है। Tata Motors ने भी हाल ही में अपने पैसेंजर वाहनों की कीमतों में 0.5 प्रतिशत तक की वृद्धि की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी है। इसके अलावा कंपनी ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। कंपनी के एमडी और सीईओ Shailesh Chandra के मुताबिक, लगातार बढ़ती कमोडिटी और इनपुट लागत के कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।

    आगे क्या होगा असर?

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो सेक्टर में बढ़ती लागत और सप्लाई चेन से जुड़े दबाव के चलते आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसका असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है, खासकर एंट्री-लेवल सेगमेंट में।

  • डॉलर के मुकाबले रुपया चढ़ा, कच्चे तेल की गिरती कीमतों का दिखा असर

    डॉलर के मुकाबले रुपया चढ़ा, कच्चे तेल की गिरती कीमतों का दिखा असर


    नई दिल्ली। वैश्विक घटनाक्रमों के बीच भारतीय मुद्रा को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ अस्थायी सीजफायर की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सकारात्मक संकेत देखने को मिले, जिसका असर सीधे रुपये पर पड़ा। बुधवार को भारतीय रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 40 पैसे की बढ़त के साथ 92.61 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले यह 93 के आसपास बंद हुआ था।

    सीजफायर से घटा भू-राजनीतिक तनाव

    अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा ने बाजार में चल रही अनिश्चितता को काफी हद तक कम किया है। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और सैन्य गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने की बात शामिल है। Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश भी दिए। इस कदम से निवेशकों के बीच भरोसा लौटा और जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी।

    कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट

    सीजफायर का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। Brent Crude करीब 16 प्रतिशत यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI Crude लगभग 20 प्रतिशत यानी 21.90 डॉलर टूटकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि सस्ता कच्चा तेल आयात बिल को कम करता है और मुद्रा को मजबूती देता है।

    आरबीआई की नीतिगत स्थिरता भी बनी सहायक

    इस बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है, जिससे बाजार में स्थिरता का संदेश गया है। ब्याज दरों में बदलाव न होने से निवेशकों को स्पष्ट संकेत मिला कि फिलहाल मौद्रिक नीति संतुलित बनी रहेगी।

    सोना-चांदी में तेज उछाल

    कमोडिटी बाजार में भी हलचल देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। सोने का वायदा भाव 3,688 रुपए (2.7%) उछलकर 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। वहीं चांदी का वायदा भाव 6 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    विश्लेषकों का मानना है कि रुपये की यह मजबूती फिलहाल वैश्विक संकेतों पर निर्भर है। अगर सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो रुपये को और समर्थन मिल सकता है। हालांकि, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को देखते हुए अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

  • पीएम मुद्रा योजना के 11 साल: 57.79 करोड़ लोन, 40 लाख करोड़ से ज्यादा का वितरण

    पीएम मुद्रा योजना के 11 साल: 57.79 करोड़ लोन, 40 लाख करोड़ से ज्यादा का वितरण


    नई दिल्ली। देश में छोटे कारोबारियों और नए उद्यमियों के लिए शुरू की गई Pradhan Mantri Mudra Yojana (पीएमएमवाई) ने 11 साल पूरे कर लिए हैं और इस दौरान योजना ने वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा बदलाव लाया है। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 57.79 करोड़ लोन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनके जरिए 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाने में इस योजना की भूमिका कितनी अहम रही है।

    2015 में हुई थी शुरुआत, ‘फंडिंग द अनफंडेड’ था लक्ष्य

    इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत साल 2015 में Narendra Modi ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बिना गारंटी के लोन उपलब्ध कराना था, जो पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर रह जाते थे। योजना के तहत छोटे गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि व्यवसायों को 20 लाख रुपए तक का कर्ज दिया जाता है, जिससे वे अपना कारोबार शुरू या विस्तार कर सकें।

    एमएसएमई सेक्टर में आया बड़ा बदलाव

    केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि पीएम मुद्रा योजना ने एमएसएमई और छोटे उद्यमियों के लिए क्रेडिट सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। उनके अनुसार, पिछले एक दशक में देश में एक “शांत क्रांति” देखने को मिली है, जहां करोड़ों लोगों ने आत्मविश्वास के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया।

    महिलाओं और नए उद्यमियों को मिला बड़ा लाभ

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को मिला है। कुल लोन में लगभग दो-तिहाई हिस्सा महिलाओं को दिया गया है, जबकि करीब 20 प्रतिशत लोन ऐसे लोगों को मिला है जिन्होंने पहली बार अपना व्यवसाय शुरू किया। नए उद्यमियों को ही करीब 12.15 करोड़ लोन दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 12 लाख करोड़ रुपए है।

    वंचित वर्गों के लिए बना सहारा

    वित्त राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary ने बताया कि यह योजना सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी बड़ी राहत साबित हुई है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों को इससे बड़े पैमाने पर लाभ मिला है, जो कुल लाभार्थियों का करीब 51 प्रतिशत हैं। वहीं महिलाओं की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत है।

    चार श्रेणियों में मिलता है लोन

    पीएम मुद्रा योजना के तहत लाभार्थियों की जरूरत के अनुसार चार कैटेगरी बनाई गई हैं—

    शिशु: 50,000 रुपए तक
    किशोर: 50,000 से 5 लाख रुपए
    तरुण: 5 लाख से 10 लाख रुपए
    तरुण प्लस: 10 लाख से 20 लाख रुपए

    इन श्रेणियों के जरिए मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि से जुड़े कार्यों के लिए टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराया जाता है।

    विकसित भारत के लक्ष्य में अहम योगदान

    सरकार का मानना है कि Pradhan Mantri Mudra Yojana आने वाले समय में भी उद्यमिता को बढ़ावा देती रहेगी और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह योजना न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही है, बल्कि लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।

  • ईरान युद्ध टलने के ऐलान से चमके सोना-चांदी… दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल

    ईरान युद्ध टलने के ऐलान से चमके सोना-चांदी… दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल


    नई दिल्ली।
    डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर हमले दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत (Silver Price) 6% या 13,000 रुपये से अधिक बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमत (Gold Price ) 2.4% या 3600 रुपये से अधिक बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।

    इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए।


    बाजार में ‘रिलीफ रैली’, आगे भी दिख सकता है उतार-चढ़ाव

    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं।


    पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की उम्मीद

    पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है।


    सोने के लिए ऊर्जा कीमतें और महंगाई बनी बड़ी चिंता

    ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसकी तेजी को सीमित भी कर सकती हैं।


    चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजी

    सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई।


    राहत के संकेत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार

    ट्रंप के फैसले से फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए है।