Category: Economy

  • सोना और चांदी कमजोर रुख के साथ खुले, निवेशकों की सतर्कता के बीच दोनों धातुओं के भाव लुढ़के

    सोना और चांदी कमजोर रुख के साथ खुले, निवेशकों की सतर्कता के बीच दोनों धातुओं के भाव लुढ़के

    नई दिल्ली । मंगलवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोना तथा चांदी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों के सतर्क रुख का असर भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत से ही दोनों धातुओं में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसके कारण कीमतों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव 1,43,063 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में 1,42,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में लगातार दबाव बना रहा और सुबह लगभग 10 बजे तक यह 1,129 रुपये यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,41,934 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।

    कारोबार के दौरान सोने ने 1,41,808 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर भी छुआ, जबकि दिन का उच्चतम स्तर 1,42,353 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। यह संकेत देता है कि बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली का दबाव अधिक बना रहा और निवेशकों ने फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाई।

    चांदी की कीमतों में भी इसी तरह की कमजोरी देखने को मिली। एमसीएक्स पर 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले बंद भाव 2,21,173 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2,20,555 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुई। शुरुआती कारोबार में गिरावट और तेज हुई तथा सुबह तक चांदी का भाव 3,940 रुपये यानी करीब 1.78 प्रतिशत टूटकर 2,17,233 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।

    दिन के शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी ने 2,16,592 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम स्तर दर्ज किया, जबकि इसका उच्चतम स्तर 2,20,555 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों की सतर्कता का असर चांदी के बाजार पर भी समान रूप से दिखाई दिया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं का रुख कमजोर रहा। वैश्विक कारोबार के दौरान सोने की कीमत लगभग 0.76 प्रतिशत गिरकर 4,045 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई, जबकि चांदी में 2.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव लगभग 57.53 डॉलर प्रति औंस रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार की यह कमजोरी भारतीय बाजार के लिए भी दबाव का प्रमुख कारण बनी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक शुरू होने से पहले निवेशक किसी बड़े निवेश निर्णय से बच रहे हैं। बैठक के नतीजे और ब्याज दरों पर आने वाला फैसला वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी वजह से सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में फिलहाल सीमित गतिविधि देखने को मिल रही है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा हालिया महंगाई और रोजगार से जुड़े आर्थिक आंकड़ों ने यह संभावना मजबूत की है कि फेडरल रिजर्व अपनी जुलाई बैठक में ब्याज दरों को यथावत रख सकता है। हालांकि तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी भविष्य में महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है, लेकिन फिलहाल बाजार की नजर पूरी तरह फेड के फैसले पर टिकी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

  • भारतीय शेयर बाजार ने सपाट रुख के साथ की शुरुआत, आईटी सेक्टर में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

    भारतीय शेयर बाजार ने सपाट रुख के साथ की शुरुआत, आईटी सेक्टर में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

    नई दिल्ली । सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगभग सपाट रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में निवेशकों का रुझान संतुलित रहा, जबकि आईटी क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती समर्थन प्रदान किया। दूसरी ओर, ऊर्जा, रक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रमुख सेक्टरों में दबाव भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 32 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 76,861 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 6 अंकों की बढ़त के साथ 24,002 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार से संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय चुनिंदा सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और बाजार सीमित दायरे में बना हुआ है।

    आईटी सेक्टर ने शुरुआती कारोबार में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ सबसे अधिक लाभ दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा रियल्टी, एफएमसीजी, मीडिया, सर्विसेज, हेल्थकेयर और फार्मा से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक रुख दिखाई दिया। इन क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को स्थिरता मिली और प्रमुख सूचकांक शुरुआती बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    इसके विपरीत रक्षा, ऊर्जा, सार्वजनिक उपक्रम, पीएसयू बैंक, मैन्युफैक्चरिंग, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण बाजार की तेजी सीमित रही और निवेशकों ने सतर्कता के साथ कारोबार किया। इससे स्पष्ट हुआ कि विभिन्न सेक्टरों में निवेशकों का रुख फिलहाल एक समान नहीं है।

    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों की गतिविधि संतुलित बनी हुई है और फिलहाल बड़े उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिल रहे हैं।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टीसीएस, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, इंडिगो, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एसबीआई, टाटा स्टील, टाइटन, भारती एयरटेल, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में शुरुआती कमजोरी देखी गई।

    वैश्विक बाजारों का रुख भी मिश्रित रहा। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और सोल के प्रमुख सूचकांक दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भारतीय बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया और निवेशकों ने घरेलू कारकों पर अधिक ध्यान दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन बीच-बीच में मुनाफावसूली और सीमित दायरे का कारोबार जारी रह सकता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कम होती तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की धारणा को आगे भी समर्थन दे सकती हैं।

  • टाटा संस के रेवन्यू में 9.1% का उछाल…. एक शेयर पर 1,10,717 रुपये डिविडेंड देने की सिफारिश

    टाटा संस के रेवन्यू में 9.1% का उछाल…. एक शेयर पर 1,10,717 रुपये डिविडेंड देने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन चंद्रशेखर (Chairman N. Chandrasekaran) ने बताया कि टाटा संस का रेवन्यू (Tata Sons Revenue) बीते वित्त वर्ष 9.1 प्रतिशत बढ़कर 42,367 करोड़ रुपये रहा है। वित्त वर्ष 2025 में टाटा संस का रेवन्यू (Tata Sons Revenue) 38835 करोड़ रुपये रहा था। वहीं, टैक्स भुगतान के बाद प्रॉफिट 21.8 प्रतिशत बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये हो गया। इससे पहले के फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का प्रॉफिट 26232 करोड़ रुपये था। कंपनी के निदेशक मंडल ने 1,10,717 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है। यह शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर है। बता दें, टाटा संस की शेयर बाजारों में लिस्टिंग नहीं हुई है।

    एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि टाटा ग्रुप का वित्तीय प्रदर्शन बीते वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत रहा है। समूह का कुल रेवन्यू 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16,24,030 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 51.9 प्रतिशत बढ़कर 1,70,525 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। चंद्रशेखरन ने कंपनी की सालाना रिपोर्ट 2025-26 में शेयरधारकों को संबोधित करते कहा कि वर्ष 2025-26 वैश्विक संघर्षों और ग्लोबल स्टेज पर एआई में अभूतपूर्व निवेश का साल रहा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद टाटा समूह ने वित्तीय मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया।

    उन्होंने कहा, ”एकीकृत स्तर पर वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा समूह का रेवन्यू 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16,24,030 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ 51.9 प्रतिशत बढ़कर 1,70,525 करोड़ रुपये हो गया।” वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा समूह का राजस्व वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में 2.1 गुना और लाभ 5.4 गुना हो गया है। यह समूह की विभिन्न कंपनियों में किए गए सुधारों का परिणाम है।

    टाटा के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता एयर इंडिया है। कंपनी का घाटा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया है। एक साल पहले इसी वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का घाटा 10,859 करोड़ रुपये रहा था। चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया के लिए यह साल काफी संघर्षपूर्ण रहा। वो कहते हैं कि तेल की कीमतों में उछाल, कई रूट्स का बंद होना, AI171 का क्रैश होना, पश्चिम एशिया में तनाव का बुरा असर पड़ा है। जिसकी वजह से एयर इंडिया को काफी नुकसान हुआ है। वो कहते हैं इतिहास की हर बड़ी एयरलाइन को खड़ा होने में दशकों का समय लगा है….। एयर इंडिया के परिवर्तन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

  • E20 पेट्रोल की कीमत पर बड़ा खुलासा किसानों से लेकर कच्चे तेल तक समझिए क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल के दाम

    E20 पेट्रोल की कीमत पर बड़ा खुलासा किसानों से लेकर कच्चे तेल तक समझिए क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल के दाम


    नई दिल्ली । देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 ईंधन की आपूर्ति तेज़ी से बढ़ाई जा रही है। सरकार का लक्ष्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना और घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले जैव ईंधन को बढ़ावा देना है। हालांकि आम लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एथेनॉल भारत में ही तैयार होता है तो फिर E20 पेट्रोल सामान्य पेट्रोल से सस्ता क्यों नहीं मिलता। अब सरकार ने संसद में इस सवाल का विस्तृत जवाब देते हुए इसकी असली वजह स्पष्ट कर दी है।

    सरकार के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में एथेनॉल कोई बहुत सस्ता ईंधन नहीं है। एथेनॉल का उत्पादन किसानों से खरीदे गए मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। किसानों को उचित मूल्य देने की नीति के तहत सरकार एथेनॉल की खरीद तय दरों पर करती है। इसके अलावा परिवहन भंडारण और कर जैसे अतिरिक्त खर्च भी इसमें शामिल होते हैं। यही कारण है कि E20 पेट्रोल तैयार करने की कुल लागत सामान्य पेट्रोल के बराबर या कई बार उससे अधिक हो जाती है।

    सरकार ने यह भी बताया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत सामान्य स्तर पर रहती है तब एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की लागत में कोई बड़ी कमी नहीं आती। यदि भविष्य में कच्चे तेल की कीमतें बहुत अधिक बढ़ती हैं तब एथेनॉल मिश्रण आर्थिक रूप से अधिक लाभदायक साबित हो सकता है। इसलिए फिलहाल उपभोक्ताओं को कीमत के रूप में सीधी राहत नहीं मिल पा रही है।

    हालांकि सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल का सबसे बड़ा फायदा कीमत नहीं बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का मतलब है कि ईंधन का एक बड़ा हिस्सा अब देश में ही तैयार हो रहा है। इससे विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम होती है और वैश्विक संकट या युद्ध जैसी परिस्थितियों में ईंधन आपूर्ति पर असर कम पड़ता है। साथ ही किसानों को उनकी फसल का बेहतर बाजार मिलता है जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल पंपों पर अलग से शुद्ध पेट्रोल E10 और E20 उपलब्ध कराना फिलहाल व्यावहारिक नहीं है। देश में एक लाख से अधिक पेट्रोल पंप हैं और हर स्थान पर तीन तरह का ईंधन रखने के लिए अलग भंडारण और वितरण व्यवस्था की जरूरत होगी। इससे लागत काफी बढ़ जाएगी और सप्लाई चेन को संभालना भी कठिन हो जाएगा। इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन और वितरण नेटवर्क पर पहले ही बड़े पैमाने पर निवेश किया जा चुका है।

    माइलेज को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। सरकार के अनुसार E20 ईंधन के उपयोग से कुछ वाहनों में लगभग तीन से पांच प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। हालांकि वास्तविक माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता बल्कि वाहन की स्थिति ड्राइविंग शैली टायर का दबाव समय पर सर्विसिंग और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसे कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है।

    दुनिया के कई विकसित देशों में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है ताकि आयातित तेल पर खर्च कम हो और स्वदेशी जैव ईंधन के जरिए ऊर्जा क्षेत्र को अधिक आत्मनिर्भर बनाया जा सके। आने वाले समय में एथेनॉल उत्पादन बढ़ने और तकनीक बेहतर होने के साथ इसकी लागत में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

  • सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बाजार में बन सकते हैं नए मौके निवेश से पहले जान लें एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

    सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बाजार में बन सकते हैं नए मौके निवेश से पहले जान लें एक्सपर्ट्स की अहम सलाह


    नई दिल्ली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक संकेतों से तय हो सकती है। निवेशकों की नजर विदेशी बाजारों की चाल कच्चे तेल की कीमतों विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय शेयर बाजार में अच्छी शुरुआत देखने को मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की अनिश्चितता का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में उतार चढ़ाव का दौर बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सोच समझकर निवेश करना चाहिए। खासतौर पर छोटे और नए निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। मजबूत कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना अपेक्षाकृत बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

    मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो एफएमसीजी फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रह सकती है। यदि इन क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर कमजोर नतीजे या नकारात्मक वैश्विक संकेत बाजार में दबाव भी बढ़ा सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है। वहीं लगातार बिकवाली होने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट जानकारियों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार की संभावनाओं और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है। जोखिम को कम करने के लिए निवेश को अलग अलग सेक्टरों में बांटना भी एक बेहतर रणनीति मानी जाती है।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बाजारों की चाल एशियाई बाजारों का प्रदर्शन डॉलर की मजबूती या कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता बनी रहती है तो घरेलू निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है। इसके अलावा रुपये की स्थिति भी विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित करती है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें रोजाना होने वाले उतार चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है। वहीं अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को स्टॉप लॉस और जोखिम प्रबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए।

    कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबार कई महत्वपूर्ण संकेतों पर निर्भर रहेगा। बाजार में अवसर भी बन सकते हैं और उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को संयम धैर्य और सही रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि वे बदलते बाजार माहौल में बेहतर निवेश निर्णय ले सकें।

  • महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

    महीने की पहली तारीख पर बदलेंगे गैस सिलेंडर के रेट जानिए कम होंगे दाम या फिर बढ़ेगा महंगाई का बोझ


    नई दिल्ली। हर महीने की पहली तारीख देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी दिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियां गैस सिलेंडर की नई कीमतें जारी करती हैं। एक अगस्त से भी घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में बदलाव होने की संभावना है। ऐसे में करोड़ों परिवारों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस बार रसोई गैस सस्ती होगी या फिर महंगाई का बोझ और बढ़ेगा। हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए लेंगी।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों विदेशी मुद्रा विनिमय दर और आयात लागत के आधार पर तय की जाती हैं। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की कीमतों में गिरावट आती है तो घरेलू बाजार में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आती है तो गैस सिलेंडर महंगा भी हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार चढ़ाव बना हुआ है। इसी कारण तेल कंपनियां बाजार की स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। ऐसे में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम घटेंगे या बढ़ेंगे। हालांकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बदलाव की संभावना अधिक मानी जा रही है क्योंकि इस श्रेणी में कीमतों में अक्सर तेजी से संशोधन किया जाता है।

    देश में घरेलू उपयोग के लिए 14 दशमलव 2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर और व्यावसायिक उपयोग के लिए 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल किया जाता है। होटल रेस्टोरेंट ढाबे और छोटे कारोबारी कमर्शियल सिलेंडर पर अधिक निर्भर रहते हैं। इसलिए इस श्रेणी में कीमतों में बदलाव का सीधा असर खाद्य पदार्थों और अन्य सेवाओं की लागत पर भी पड़ सकता है।

    यदि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कमी होती है तो इसका सबसे बड़ा फायदा आम परिवारों को मिलेगा। वहीं यदि कीमतें बढ़ती हैं तो मासिक घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासतौर पर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की कीमतें घरेलू खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं।

    उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे नई कीमतों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही किसी भी जानकारी पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों या अफवाहों से बचना चाहिए क्योंकि वास्तविक कीमतें केवल तेल विपणन कंपनियों की ओर से जारी सूची के अनुसार ही लागू होती हैं। नई दरें देश के अलग अलग शहरों में टैक्स और परिवहन लागत के कारण थोड़ी अलग हो सकती हैं।

    हर महीने की तरह इस बार भी एक अगस्त को इंडियन ऑयल भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम नई एलपीजी दरें जारी करेंगी। यदि वैश्विक बाजार से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। वहीं विपरीत परिस्थितियों में कीमतों में बढ़ोतरी से इनकार भी नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी की नजर अब पहली अगस्त को जारी होने वाली नई एलपीजी मूल्य सूची पर टिकी हुई है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज

    अमेरिका-ईरान तनाव नरम पड़ते ही फिसले कच्चे तेल के दाम, एक हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज


    वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों की कीमतें करीब एक सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ प्रस्तावित हवाई कार्रवाई फिलहाल टालने से कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है, जिससे तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं कुछ कम हुई हैं।

    सोमवार को ब्रेंट क्रूड 8.42 डॉलर यानी 8.7 फीसदी टूटकर 88.36 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जो 17 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं WTI क्रूड 6.70 डॉलर यानी 7.5 फीसदी गिरकर 82.61 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो 16 जुलाई के बाद का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिलहाल रोकने के फैसले से बाजार में राहत का माहौल बना है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद भी मजबूत हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला।

    ट्रंप ने कूटनीति को दी प्राथमिकता

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को और समय देने के उद्देश्य से सैन्य कार्रवाई स्थगित करने का फैसला किया है। ट्रंप ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और समझौते की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

    सऊदी और रूस से जुड़ी घटनाओं पर भी नजर

    इस बीच सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने इराक की ओर से भेजे गए ड्रोन को मार गिराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के यनबू तेल निर्यात केंद्र से जुड़ी आपूर्ति लाइनों को निशाना बनाने का दावा किया है। दूसरी ओर, रूस के ब्लैक सी स्थित प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनल पर ड्रोन हमलों से कजाकिस्तान के तेल उत्पादन पर भी असर पड़ा, हालांकि बाद में कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम ने टर्मिनल से तेल लोडिंग फिर शुरू होने की पुष्टि की।

    बाजार में बनी रह सकती है अस्थिरता

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फिलहाल तनाव कम होता दिखाई दे रहा हो, लेकिन जब तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो जाता, तब तक अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और तेल आपूर्ति की स्थिति आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • सऊदी अरब की अबकैक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, भीषण आग से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता

    सऊदी अरब की अबकैक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, भीषण आग से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता


    रियाद।
    सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की अबकैक (Abqaiq) तेल रिफाइनरी और ईस्ट-वेस्ट पंपिंग स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। हमले के बाद संयंत्र के कई हिस्सों से आग की ऊंची लपटें उठती दिखाई दीं। उपग्रह तस्वीरों में भी रिफाइनरी परिसर में व्यापक नुकसान के संकेत मिले हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमले में दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल प्रसंस्करण सुविधाओं में शामिल अबकैक संयंत्र को नुकसान पहुंचा है। सऊदी अधिकारियों ने इस हमले के पीछे इराक में सक्रिय एक सशस्त्र संगठन का हाथ होने का दावा किया है, जिस पर ईरान समर्थित होने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    दुनिया की सबसे अहम तेल प्रसंस्करण इकाइयों में शामिल

    अबकैक रिफाइनरी को दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल स्टेबलाइजेशन प्लांट माना जाता है। यहां बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया जाता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस संयंत्र में किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।

    आग पर काबू पाने के प्रयास तेज

    हमले के बाद सऊदी अरामको और संबंधित एजेंसियों ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन कार्रवाई शुरू कर दी। आग को नियंत्रित करने और अतिरिक्त नुकसान रोकने के लिए कई उत्पादन केंद्रों पर इमरजेंसी फ्लेयरिंग की गई। सुरक्षा एजेंसियां हमले के कारणों और क्षति का आकलन कर रही हैं।

    सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा नुकसान

    उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में रिफाइनरी के कई हिस्सों में आग और धुएं के बड़े गुबार दिखाई दिए हैं। शुरुआती आकलन के मुताबिक, संयंत्र के कुछ परिचालन हिस्से प्रभावित हुए हैं, हालांकि उत्पादन क्षमता पर वास्तविक असर का आधिकारिक विवरण अभी जारी नहीं किया गया है।

    वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है प्रभाव

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अबकैक रिफाइनरी का संचालन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। इससे वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की संभावना भी बढ़ सकती है।

    सऊदी सरकार ने कहा है कि वह हमले की जांच कर रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जाएंगे।

  • संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    संसद में सरकार का खुलासा, 100 करोड़ रुपये से ज्यादा आय बताने वाले करदाताओं की संख्या 142 से बढ़कर 576 हुई

    नई दिल्ली ।देश में 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित करने वाले आयकरदाताओं की संख्या में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि आकलन वर्ष 2025-26 में ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़कर 576 हो गई, जबकि आकलन वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा केवल 142 था। इस प्रकार पांच वर्षों में इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में उच्च आय वर्ग के करदाताओं की बढ़ती संख्या को दर्शाती है।
    लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि विभिन्न आकलन वर्षों के दौरान इस श्रेणी के करदाताओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद समग्र रूप से वृद्धि का रुझान स्पष्ट दिखाई देता है। उनके अनुसार आकलन वर्ष 2022-23 में 301 करदाताओं ने 100 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक आय घोषित की थी। इसके बाद आकलन वर्ष 2023-24 में यह संख्या घटकर 284 रह गई, लेकिन अगले वर्षों में फिर तेजी से बढ़ोतरी हुई। आकलन वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 415 तक पहुंचा और 2025-26 में बढ़कर 576 हो गया।
    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ‘अरबपति’ शब्द की कोई कानूनी या वैधानिक परिभाषा निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़े केवल उन आयकर रिटर्न पर आधारित हैं, जिनमें संबंधित व्यक्तियों ने अपनी वार्षिक आय 100 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंकड़े घोषित आय के आधार पर तैयार किए गए हैं।
    आय असमानता से जुड़े प्रश्न के उत्तर में सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में आय वितरण की स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। सरकार के अनुसार घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय असमानता में कमी दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों का जिनी गुणांक 2022-23 के 0.266 से घटकर 2023-24 में 0.237 हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 0.314 से घटकर 0.284 पर आ गया। सरकार का मानना है कि यह बदलाव आय वितरण में अपेक्षाकृत संतुलन आने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
    सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी सुधार का दावा किया। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों की बेरोजगारी दर वर्ष 2023-24 में घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई। सरकार का कहना है कि रोजगार सृजन, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से श्रम बाजार की स्थिति में सुधार हुआ है।
    सरकार ने संसद में यह भी कहा कि आय असमानता कम करने के लिए प्रगतिशील कर व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही रोजगार सृजन कार्यक्रमों, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर सार्वजनिक निवेश बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि लक्षित कर प्रोत्साहनों और विकास आधारित निवेश के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार करने तथा समावेशी आर्थिक विकास को गति देने के प्रयास जारी रहें

  • मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और उद्यमी पारुल गुलाटी ने यह साबित किया है कि सफल कारोबार की नींव केवल बड़ी पूंजी पर नहीं, बल्कि सही विचार, लगातार मेहनत और ग्राहकों की जरूरत को समझने पर टिकती है। महज ₹5,000 के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ उनका हेयर एक्सटेंशन स्टार्टअप आज करीब 50 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने व्यवसाय को जिस तरह आगे बढ़ाया, वह नए उद्यमियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

    पारुल गुलाटी ने अभिनय के साथ-साथ उद्यमिता की राह तब चुनी, जब उन्होंने महसूस किया कि कई लोग बाल झड़ने और बाल पतले होने जैसी समस्याओं का सामना तो करते हैं, लेकिन इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते। उस समय हेयर एक्सटेंशन को लेकर भी लोगों के मन में कई तरह की झिझक और गलत धारणाएं थीं। उन्होंने इसी समस्या को अवसर में बदलने का निर्णय लिया और वर्ष 2017 में अपने स्टार्टअप की शुरुआत की।

    शुरुआती दौर में उनके पास न तो बड़ा निवेश था और न ही महंगी मार्केटिंग का बजट। ऐसे में उन्होंने सोशल मीडिया को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने अपने मोबाइल फोन से ही वीडियो बनाकर लोगों को हेयर एक्सटेंशन के उपयोग, गुणवत्ता और फायदे समझाने शुरू किए। वह स्वयं अपने ब्रांड का चेहरा बनीं और नियमित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री साझा करती रहीं। इससे धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनके उत्पाद की पहचान बनने लगी।

    व्यवसाय के शुरुआती दिनों में पारुल खुद अपने हाथों से हेयर एक्सटेंशन तैयार करती थीं। ग्राहक जुटाना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने अलग तरीका अपनाया। विभिन्न कार्यक्रमों, ऑडिशन और सार्वजनिक आयोजनों में वह अपने उत्पाद का उपयोग करतीं, जिससे लोगों की जिज्ञासा बढ़ती। इसके बाद संभावित ग्राहक उनके उत्पाद के बारे में जानकारी लेने लगे और धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने शुरू हो गए।

    ऑनलाइन लोकप्रियता मिलने से पहले पारुल अलग-अलग शहरों में आयोजित फ्ली मार्केट और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर सीधे ग्राहकों से संवाद करती थीं। वह लोगों को उत्पाद का अनुभव करातीं और उन्हें तस्वीरें लेने के लिए प्रेरित करतीं। कई ग्राहक तत्काल खरीदारी नहीं करते थे, लेकिन बाद में सोशल मीडिया या तस्वीरों के माध्यम से दोबारा संपर्क कर उत्पाद खरीदते थे। इस रणनीति ने उनके व्यवसाय को शुरुआती गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    बाद में पारुल गुलाटी ने लोकप्रिय बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया में भी हिस्सा लिया। इस अनुभव को उन्होंने अपने उद्यमी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, इस मंच ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल अच्छा उत्पाद ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वित्तीय योजना, व्यावसायिक रणनीति और निवेशकों की सोच को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

    आज उनका स्टार्टअप देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है और हेयर एक्सटेंशन श्रेणी में प्रमुख ब्रांडों में गिना जाता है। पारुल की यात्रा यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि किसी समस्या का व्यावहारिक समाधान तैयार किया जाए और उसे सही तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाया जाए, तो छोटा निवेश भी बड़े व्यवसाय में बदल सकता है। उनकी सफलता नए उद्यमियों को नवाचार, धैर्य और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग की दिशा में प्रेरित करती है।