Category: Economy

  • विंड एनर्जी से आगे बढ़ेगी सुजलॉन, FY31 तक 10 GW सेल्स और 70 GW एसेट मैनेजमेंट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

    विंड एनर्जी से आगे बढ़ेगी सुजलॉन, FY31 तक 10 GW सेल्स और 70 GW एसेट मैनेजमेंट का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

    नई दिल्ली । भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेजी से बदलते परिदृश्य के बीच सुजलॉन एनर्जी ने अपने विकास की नई रणनीति ‘Suzlon 2.0’ का ऐलान किया है। इस नई योजना के तहत कंपनी केवल विंड टरबाइन निर्माता की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि विंड, सोलर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज और एसेट मैनेजमेंट जैसी सेवाओं को एकीकृत करते हुए खुद को फुल-स्टैक रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कंपनी के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक उपस्थिति दर्ज कराते हुए आने वाले वर्षों में अपनी कारोबारी क्षमता को कई गुना बढ़ाना है।

    कंपनी द्वारा प्रस्तुत रोडमैप के अनुसार वित्त वर्ष 2031 तक वार्षिक रिन्यूएबल एनर्जी बिक्री को 10 गीगावाट तक पहुंचाने और एसेट अंडर मैनेजमेंट को बढ़ाकर 70 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही कंपनी भारतीय पवन ऊर्जा बाजार में अपनी हिस्सेदारी को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है। वर्तमान में कंपनी देश के विंड एनर्जी बाजार में महत्वपूर्ण उपस्थिति रखती है और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र को अपना प्रमुख विकास इंजन बनाए रखने का इरादा रखती है।

    नई रणनीति के तहत कंपनी चार प्रमुख व्यावसायिक स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इनमें विंड-फर्स्ट ऊर्जा समाधान, परियोजना विकास, ऊर्जा परियोजनाओं का निष्पादन और एसेट मैनेजमेंट सेवाएं शामिल हैं। कंपनी का उद्देश्य ग्राहकों को एक ही मंच पर संपूर्ण रिन्यूएबल एनर्जी समाधान उपलब्ध कराना है, जिससे परियोजनाओं के विकास और संचालन की जटिलताओं को कम किया जा सके। इसके जरिए कंपनी बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को अधिक तेज, प्रभावी और भरोसेमंद तरीके से लागू करने की योजना बना रही है।

    सुजलॉन का मानना है कि भविष्य में केवल ऊर्जा उत्पादन ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऊर्जा के भंडारण और प्रबंधन की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। इसी सोच के तहत कंपनी ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम क्षेत्र में प्रवेश करने की घोषणा की है। कंपनी की योजना आने वाले वर्षों में बैटरी स्टोरेज विनिर्माण सुविधाएं विकसित करने और भारतीय बिजली ग्रिड की जरूरतों के अनुरूप उन्नत ऊर्जा भंडारण समाधान उपलब्ध कराने की है। इससे सौर और पवन ऊर्जा जैसी अस्थिर स्रोतों से उत्पन्न बिजली को अधिक विश्वसनीय तरीके से उपयोग में लाया जा सकेगा।

    विंड एनर्जी कंपनी के विकास का मुख्य आधार बनी रहेगी। सुजलॉन ने इस क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने और उच्च क्षमता वाले आधुनिक टरबाइन विकसित करने की योजना भी सामने रखी है। कंपनी का मानना है कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और इस क्षेत्र में तकनीकी नवाचार भविष्य की प्रतिस्पर्धा तय करेंगे। इसी उद्देश्य से अगली पीढ़ी के उच्च क्षमता वाले विंड टरबाइन विकसित किए जा रहे हैं, जो ऊर्जा उत्पादन की दक्षता बढ़ाने में मदद करेंगे।

    कंपनी ने परियोजना विकास और एसेट मैनेजमेंट को भी अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। इसके तहत भूमि अधिग्रहण, ग्रिड कनेक्टिविटी, नियामकीय मंजूरियां और परियोजना निष्पादन जैसी प्रक्रियाओं को एकीकृत तरीके से संचालित किया जाएगा। इससे परियोजनाओं की तैयारी और क्रियान्वयन की गति बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में स्वच्छ ऊर्जा की मांग आने वाले वर्षों में तेज गति से बढ़ेगी। ऐसे में सुजलॉन की नई रणनीति उसे केवल पवन ऊर्जा कंपनी के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक रिन्यूएबल एनर्जी समाधान प्रदाता के रूप में स्थापित कर सकती है। यदि निर्धारित लक्ष्य समय पर हासिल होते हैं तो कंपनी देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकती है।

  • बढ़ती ईंधन लागत पर सरकार का बड़ा फैसला, घरेलू एयरलाइंस के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष समर्थन पैकेज

    बढ़ती ईंधन लागत पर सरकार का बड़ा फैसला, घरेलू एयरलाइंस के लिए 10,000 करोड़ रुपये का विशेष समर्थन पैकेज

    नई दिल्ली । देश के विमानन क्षेत्र को बढ़ती ईंधन लागत के दबाव से राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की अस्थिर और ऊंची कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये की विशेष बजटीय सहायता को मंजूरी दी गई है। सरकार का मानना है कि इस कदम से एयरलाइंस को ईंधन लागत में स्थिरता मिलेगी और वे अपने परिचालन को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकेंगी।

    सरकार द्वारा स्वीकृत यह सहायता तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन कीमतों में आने वाले अचानक उतार-चढ़ाव के दौरान एयरलाइंस को अपेक्षाकृत स्थिर दरों पर एटीएफ उपलब्ध कराना है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण विमानन ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर एयरलाइंस की परिचालन लागत पर पड़ा है।

    नई व्यवस्था के तहत एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता को 36 महीनों तक लागू रखा जाएगा। हालांकि इसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार इसमें संशोधन भी संभव होगा। योजना का उद्देश्य केवल तत्काल राहत प्रदान करना नहीं है, बल्कि विमानन उद्योग को वित्तीय अनिश्चितताओं से बचाते हुए दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान करना भी है।

    सरकारी व्यवस्था के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की आयात समता कीमत निर्धारित मानक स्तर से अधिक हो जाती है, तो उससे होने वाले अतिरिक्त वित्तीय भार की भरपाई इस सहायता कोष से की जाएगी। दूसरी ओर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में कमी आएगी, तब तेल विपणन कंपनियों से अंतर की राशि वापस ली जाएगी और उसे सरकारी कोष में जमा कराया जाएगा। इस प्रकार योजना को संतुलित और वित्तीय रूप से जिम्मेदार ढंग से संचालित करने का प्रयास किया गया है।

    यह सुविधा सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस के लिए उपलब्ध होगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों पर लागू होगी। योजना में भाग लेने वाली एयरलाइंस को एक निर्धारित अवधि तक केवल अधिकृत तेल विपणन कंपनियों से ही एटीएफ खरीदना होगा। इसके लिए एयरलाइंस और तेल विपणन कंपनियों के बीच औपचारिक समझौता किया जाएगा, जिसमें संबंधित मंत्रालय भी भागीदार होंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन उद्योग की लागत संरचना में ईंधन का हिस्सा अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में ईंधन कीमतों में तेज वृद्धि सीधे टिकट दरों, परिचालन योजनाओं और एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति को प्रभावित करती है। सरकार की इस पहल से एयरलाइंस को लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी और वे भविष्य की व्यावसायिक रणनीतियां अधिक सटीक तरीके से तैयार कर सकेंगी।

    इस निर्णय का प्रभाव केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने की संभावना है। पर्यटन, होटल उद्योग, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों को भी इससे अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। बेहतर और स्थिर हवाई सेवाएं आर्थिक गतिविधियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे व्यापक स्तर पर विकास को प्रोत्साहन मिल सकता है।

    हालिया आंकड़े बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतों में बेहद तेज वृद्धि हुई है। कुछ ही महीनों के भीतर ईंधन लागत में कई गुना बढ़ोतरी ने एयरलाइंस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी थी। ऐसे समय में सरकार का यह कदम विमानन उद्योग को राहत देने और उसकी वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

  • RBI MPC बैठक के बीच SBI चेयरमैन का बड़ा बयान, कहा- फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर

    RBI MPC बैठक के बीच SBI चेयरमैन का बड़ा बयान, कहा- फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर

    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने ब्याज दरों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में किसी प्रकार का बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए अधिक लाभदायक रहेगा। उनके अनुसार इस समय नीतिगत दरों में स्थिरता बनाए रखने से आर्थिक गतिविधियों को संतुलित समर्थन मिलेगा और विकास की रफ्तार भी बनी रहेगी। बाजार की सामान्य धारणा भी यही संकेत देती है कि आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में किसी बड़े बदलाव से बच सकता है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएस शेट्टी ने कहा कि महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्रीय बैंक की प्रमुख जिम्मेदारी होती है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में ब्याज दरों को स्थिर रखना एक व्यावहारिक कदम माना जा सकता है। उनका मानना है कि स्थिर ब्याज दरें उद्योग, कारोबार और उपभोक्ताओं को स्पष्ट संकेत देती हैं, जिससे निवेश और ऋण गतिविधियों को निरंतरता मिलती है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था इस समय सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और इसे स्थिर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है।

    एसबीआई चेयरमैन ने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि शेयर बाजार में होने वाले रोजाना उतार-चढ़ाव को लेकर अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक ताकत उसकी दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता में निहित है। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, डिजिटल क्रांति, वित्तीय समावेशन और तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता रखता है। उनका कहना है कि निवेशकों को अल्पकालिक बाजार गतिविधियों के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

    सीएस शेट्टी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याएं और तकनीकी परिवर्तन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत एक स्थिर और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक सुधारों और निवेश के अनुकूल वातावरण ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

    डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने भारत की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आज देश की सबसे बड़ी तकनीकी सफलताओं में शामिल है। हर महीने अरबों डिजिटल लेनदेन यूपीआई के माध्यम से किए जा रहे हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और भुगतान प्रणाली अधिक तेज, सुरक्षित तथा पारदर्शी बनी है। उन्होंने बताया कि एसबीआई की डिजिटल सेवाओं की सफलता उसकी मजबूत तकनीकी संरचना और ग्राहकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

    उन्होंने वित्तीय समावेशन में जनधन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार ‘जेएएम ट्रिनिटी’ ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में अहम योगदान दिया है। इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और विभिन्न योजनाओं में होने वाली संभावित अनियमितताओं में कमी आई है।

    भारत की भविष्य की विकास यात्रा पर बात करते हुए सीएस शेट्टी ने कहा कि आने वाले वर्षों में देश को बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, एमएसएमई और नवाचार जैसे क्षेत्रों में विशाल निवेश अवसर मौजूद हैं। उनके अनुसार ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार बनेंगे।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भी उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उनका मानना है कि भारत एआई तकनीक के उपयोग और विस्तार के मामले में दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन सकता है। उन्होंने बताया कि एसबीआई पहले से कई बैंकिंग सेवाओं में एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग कर रहा है और इसके लिए जिम्मेदार तथा सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने हेतु विशेष ढांचा भी विकसित किया गया है।

    कर्ज की मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की मांग मजबूत बनी हुई है। बैंक लगातार उद्यमियों और व्यवसायों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही बैंक विलय एवं अधिग्रहण से जुड़े वित्तपोषण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की मजबूत आर्थिक नींव, डिजिटल प्रगति और निवेश क्षमता देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में मदद करेगी।

  • EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट

    EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों खाताधारकों को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित ब्याज राशि का इंतजार है। मार्च में ब्याज दर तय किए जाने के बावजूद जून की शुरुआत तक खातों में ब्याज जमा नहीं होने से कई कर्मचारियों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीएफ खाते में ब्याज कब आएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि ब्याज दर घोषित होने और उसे खातों में जमा किए जाने के बीच कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

    ईपीएफओ ने मार्च 2026 की शुरुआत में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बनाए रखने का फैसला किया था। यह निर्णय केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक के बाद लिया गया था। इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जानकारी भी साझा की गई थी। हालांकि ब्याज दर की घोषणा के बाद इसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार की औपचारिक अधिसूचना जारी होना आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ईपीएफओ अपने करोड़ों सदस्यों के खातों में ब्याज की राशि जमा करता है।

    देशभर में लगभग सात करोड़ से अधिक पीएफ खाताधारक हैं, जिनकी नजर हर साल अपने खाते में जमा होने वाले ब्याज पर रहती है। वित्त वर्ष समाप्त होने के दो महीने बाद भी ब्याज राशि जमा नहीं होने से कर्मचारियों के बीच चर्चा बढ़ गई है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि जब ब्याज दर मार्च में ही तय हो चुकी है तो राशि अब तक खातों में क्यों नहीं पहुंची। विशेषज्ञों के अनुसार ब्याज क्रेडिट करने से पहले सरकार की मंजूरी, तकनीकी अपडेट और खातों का सत्यापन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिनमें कुछ समय लगना सामान्य बात है।

    वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के अनुभव को देखें तो ईपीएफओ आमतौर पर जून या जुलाई के दौरान खातों में ब्याज की राशि जमा करता है। पहले यह प्रक्रिया सितंबर या अक्टूबर तक चलती थी, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी आई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष भी सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद जून या जुलाई के दौरान करोड़ों खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई देने लगेगी। हालांकि अंतिम समयसीमा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    ईपीएफओ सदस्य अपने खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी घर बैठे मोबाइल फोन के जरिए भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उमंग ऐप एक आसान विकल्प माना जाता है। उपयोगकर्ता सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में उमंग ऐप डाउनलोड कर सकते हैं और मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद ईपीएफओ सेवाओं के विकल्प में जाकर ‘व्यू पासबुक’ पर क्लिक करना होगा। ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सदस्य अपने खाते का बैलेंस और ब्याज से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।

    इसके अलावा ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी पीएफ खाते का विवरण देखा जा सकता है। सदस्य पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद ‘मेंबर पासबुक’ विकल्प पर क्लिक करके अपने खाते में जमा राशि, मासिक योगदान और ब्याज संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि ब्याज की राशि खाते में जमा कर दी गई होगी तो वह पासबुक में दिखाई देने लगेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पीएफ खाताधारकों को फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। ब्याज राशि में किसी प्रकार की कटौती या देरी की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद ईपीएफओ निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी पात्र खातों में ब्याज जमा करेगा। ऐसे में कर्मचारियों को समय-समय पर अपनी पासबुक जांचते रहना चाहिए और किसी भी अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

  • आरबीआई का बड़ा बयान: सोना बेचने की खबरें फर्जी, भारत के पास अब भी 880.52 टन गोल्ड रिजर्व सुरक्षित

    आरबीआई का बड़ा बयान: सोना बेचने की खबरें फर्जी, भारत के पास अब भी 880.52 टन गोल्ड रिजर्व सुरक्षित

    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश के स्वर्ण भंडार को लेकर फैल रही अटकलों और मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास मौजूद भौतिक सोने के भंडार में किसी प्रकार की बिक्री या कमी नहीं हुई है और यह पहले की तरह 880.52 टन पर स्थिर है।

    आरबीआई ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि केंद्रीय बैंक ने अपने गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा बेच दिया है, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है। बैंक ने दोहराया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार सुरक्षित है और इसमें कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि स्वर्ण भंडार से संबंधित सभी आधिकारिक आंकड़े नियमित रूप से मासिक बुलेटिन में प्रकाशित किए जाते हैं, जिन्हें आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। बैंक ने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें।

    इस मामले में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए इन खबरों को फर्जी बताया है। पीआईबी ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है, लेकिन यह जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है।

    पीआईबी के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2025 के अंत में यह हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गई। इसके बाद 22 मई 2026 तक यह और बढ़कर 16.85 प्रतिशत तक पहुंच गई। ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका मजबूत हो रही है।

    इससे पहले एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ब्लूमबर्ग के हवाले से आरबीआई ने हाल के दो हफ्तों में लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचकर विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां खरीदी हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वित्तीय बाजारों और निवेशकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

    हालांकि आरबीआई और पीआईबी दोनों ने इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है। केंद्रीय बैंक ने दोहराया कि भारत का स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें किसी तरह की बिक्री या गिरावट नहीं हुई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी देश की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक सुरक्षा कवच के रूप में देखी जाती है। सोने को हमेशा से एक सुरक्षित निवेश माना जाता है और केंद्रीय बैंक भी इसे अपने रिजर्व पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए रखते हैं।

    इस स्पष्टीकरण के बाद अब बाजार में फैली अटकलों पर विराम लगने की उम्मीद है और निवेशकों के बीच स्थिति को लेकर स्पष्टता आई है। आरबीआई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश की वित्तीय स्थिति मजबूत है और स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बना हुआ है।

  • आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू, ब्याज दरों पर फैसले को लेकर बाजार की निगाहें टिकीं, महंगाई और वैश्विक तनाव बना मुख्य फोकस

    आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू, ब्याज दरों पर फैसले को लेकर बाजार की निगाहें टिकीं, महंगाई और वैश्विक तनाव बना मुख्य फोकस

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है, जिसमें देश की मौद्रिक नीति की दिशा तय करने को लेकर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रही है और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई और विकास दर दोनों को संतुलित रखने का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और मौजूदा दरों को यथावत बनाए रखेगा, हालांकि नीति वक्तव्य में अधिक सतर्क रुख देखने को मिल सकता है।

    इस बैठक पर बाजार और निवेशकों की खास नजर बनी हुई है क्योंकि इससे आने वाले महीनों में ऋण, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की दिशा तय होगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को बैठक के बाद नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई दर पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें स्थिर नहीं रहती हैं तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई अनुमान में वृद्धि संभव है।

    एचएसबीसी और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखने की रणनीति अपनाएगा, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार आगे चलकर सख्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिए गए हैं कि बाजार 2026 के अंत तक दरों में हल्की कटौती की संभावना को देख रहा है, हालांकि यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

    अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि महंगाई का मौजूदा दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा हुआ है, न कि मांग में तेजी के कारण। ऐसे में आरबीआई के लिए चुनौती यह होगी कि वह विकास दर को प्रभावित किए बिना मूल्य स्थिरता बनाए रखे। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 6.6 से 6.7 प्रतिशत के बीच रह सकती है, बशर्ते वैश्विक तेल कीमतें नियंत्रित रहें।

  • अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बावजूद कीमती धातुओं में गिरावट, MCX पर चांदी 1,300 रुपए तक फिसली

    अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बावजूद कीमती धातुओं में गिरावट, MCX पर चांदी 1,300 रुपए तक फिसली

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कीमती धातुओं के बाजार में बुधवार को कमजोरी का रुख देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसका सीधा फायदा सोने और चांदी को नहीं मिल सका। इसके विपरीत घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दोनों धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बन गया है।

    सोने की कीमतों में शुरुआत में मामूली मजबूती देखी गई, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें दबाव बढ़ता गया। अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हल्की बढ़त के साथ खुला, लेकिन जल्द ही इसमें गिरावट दर्ज की गई और यह नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई बढ़ने की आशंका ने ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना को मजबूत किया है, जिससे सोने में निवेश की मांग सीमित हो गई है।

    चांदी के बाजार में अधिक अस्थिरता देखने को मिली। जुलाई वायदा चांदी की कीमतों में करीब 1,300 रुपए प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में कमजोर धारणा को दर्शाती है। कारोबार के दौरान चांदी ने शुरुआती स्तर पर स्थिरता दिखाई, लेकिन बाद में बिकवाली दबाव बढ़ने से यह नीचे आ गई। विश्लेषकों का कहना है कि चांदी की चाल फिलहाल सीमित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक संकेतों के कारण इसमें तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में कमजोरी का रुख देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड और फ्यूचर्स दोनों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतें भी दबाव में रहीं। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने वैश्विक महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है, लेकिन इसके बावजूद निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर अपेक्षित रूप से आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक संकेतों में अनिश्चितता और ब्याज दरों की दिशा को लेकर असमंजस माना जा रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है, अन्यथा दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में सतर्कता बनाए रखना ही बेहतर रणनीति मानी जा रही है क्योंकि किसी भी दिशा में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: मई में सेवा क्षेत्र में मजबूत विस्तार, विदेशी मांग और नए कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

    भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: मई में सेवा क्षेत्र में मजबूत विस्तार, विदेशी मांग और नए कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

    नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सेवा क्षेत्र से एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। नए कारोबार में लगातार बढ़ोतरी और डिजिटल, आईटी, ई-कॉमर्स तथा लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग के चलते मई में भारत के सेवा क्षेत्र का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया है, जो अप्रैल में 58.8 था। यह वृद्धि देश के सेवा आधारित उद्योगों में मजबूत विस्तार और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को दर्शाती है।

    एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, माल ढुलाई, डिजिटल सेवाओं, मनोरंजन, ई-कॉमर्स और आईटी सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण कंपनियों के नए ऑर्डरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। इस बढ़त के चलते सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी कारोबारी गतिविधियों को तेज किया और उत्पादन क्षमता में विस्तार किया।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नए कारोबार में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी सुधार हुआ है। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने मई में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का सिलसिला जारी रखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि मांग में बढ़ोतरी के चलते कंपनियां विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल अधिकांश कंपनियों ने अपने स्टाफ स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया, लेकिन एक छोटे हिस्से ने नई भर्तियां की हैं।

    अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन मई में इसमें हल्की कमी देखी गई है। यह पिछले चार महीनों में सबसे निचला स्तर है। लागत दबाव में कमी आने से कंपनियों पर सेवाओं की कीमत बढ़ाने का दबाव भी कम हुआ है। इसी कारण मई में सेवाओं की कीमतों में वृद्धि की गति भी जनवरी के बाद सबसे धीमी रही।

    एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मई में सेवा क्षेत्र में विस्तार का मुख्य कारण नए ऑर्डरों की लगातार बढ़ती संख्या रही। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से भी सेवाओं की मांग में सुधार देखने को मिला है। अप्रैल में आई गिरावट के बाद निर्यात आधारित सेवाओं में अच्छी रिकवरी दर्ज की गई, जिससे कुल कारोबार को मजबूती मिली।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत की सेवाओं की मांग कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत रही, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। हालांकि, विदेशी मांग की वृद्धि दर कुल घरेलू बिक्री की तुलना में थोड़ी कम रही और यह 2025 के औसत से नीचे रही, फिर भी इसमें स्थिरता बनी रही।

    कुल मिलाकर, सेवा क्षेत्र में इस तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आईटी और डिजिटल सेवाओं की मजबूत मांग, ई-कॉमर्स का विस्तार और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सेवाओं की जरूरत भारत के सेवा उद्योग को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले महीनों में रोजगार और निवेश दोनों में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।

  • चीनी अरबपति झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछे

    चीनी अरबपति झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली।
    बाइटडांस कंपनी (ByteDance Company) की कीमत बढ़ने और उसके एआई चैटबॉट (AI Chatbot) की सफलता से झांग यिमिंग (Zhang Yiming) मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) को पीछे छोड़कर एशिया के दूसरे सबसे अमीर बन गए हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, झांग के पास अब 92.8 अरब डॉलर हैं। वह चीन के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। 2019 में उनके पास सिर्फ 13 अरब डॉलर थे। यानी उनकी दौलत सात गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है। बता दें 117 अरब डॉलर के नेटवर्थ के साथ गौतम अडानी (Gautam Adani) दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में तो 17वें स्थान पर हैं, लेकिन उनके सिर पर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का ताज बरकरार है।

    पहले मुकेश अंबानी के सिर पर कई वर्षों तक एशिया के सबसे रईस का ताज था। कुछ महीने पहले ही इनसे यह ताज अडानी ने छीन लिया और अंबानी एशिया के दूसरे नंबर के रईस बन गए। अब यह पोजीशन भी उनकी चली गई।


    दुनिया के अमीरों में घटा अंबानी का रुतबा

    यही नहीं, दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में अंबानी अब 4 पायदान नीचे 25वें स्थान पर चले गए हैं। इसकी वजह एक ही दिन में झांग की दौलत में 24.1 अरब डॉलर की छलांग, जेफ यास की दौलत में 7.56 अरब डॉलर, डेविड सुन की दौलत में 2.75 अरब डॉलर और झान तू की दौलत में 2.75 अरब डॉलर की उछाल है। ये चारों अब अंबानी से ऊपर पहुंच गए हैं।


    झांग को 24 अरब डॉलर का फायदा

    ब्लूमबर्ग ने ब्लैकरॉक, फिडेलिटी, टी. रो प्राइस, एचएसजी और जनरल अटलांटिक जैसे निवेशकों के मूल्यांकन देखे। इसके बाद झांग की दौलत में 24 अरब डॉलर से अधिक का उछाल आया।


    टिकटॉक और दोउबाओ ने दिया मौका

    झांक के ऊपर अचानक हुई डॉलर की बारिश यूं ही नहीं हुई। इसमें टिकटॉक ऐप की लोकप्रियता और एआई चैटबॉट ‘दोउबाओ’ का बड़ा योगदान है। दोउबाओ हर महीने 30 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं। यह चीन का सबसे पसंदीदा चैटबॉट है। बाइटडांस ने इसी साल अपने अमेरिका के कुछ कामकाज वहां के निवेशकों को बेच भी दिए थे।


    चीन की सबसे बड़ी निजी कंपनी

    बाइटडांस चीन की सबसे चर्चित निजी कंपनी है। दोउबाओ इतना सफल हुआ कि कंपनी अब उसके लिए पैसे लेने की तैयारी कर रही है। चीन में लोग ऑनलाइन सेवाओं के लिए पैसे देने को तैयार नहीं होते, इसलिए यह बड़ी बात है। कंपनी को भविष्य में शेयर बाजार में उतरने की भी उम्मीद है।


    अमेरिका में टिकटॉक का मामला सुलझा

    टिकटॉक के अमेरिकी व्यापार को ओरेकल, सिल्वर लेक और अबू धाबी के एमजीएक्स को दे दिया गया। इससे कई सालों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हुई। आलोचक टिकटॉक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे थे।


    एआई पर बड़ा दांव

    अब बाइटडांस एआई पर जोर लगा रहा है। ब्लूमबर्ग की खबर के अनुसार, कंपनी इस साल 70 अरब डॉलर तक खर्च करने की बात कर रही है। इससे चीन के एआई बाजार में कंपनी सबसे आगे रहेगी और अमेरिकी कंपनियों को टक्कर देगी। यह पैसा 2025 में कंपनी द्वारा कमाए गए करीब 50 अरब डॉलर के मुनाफे से आएगा।

  • अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    नई दिल्ली । देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी समूहों में शामिल अदाणी पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत निवेश के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। समूह ने इस अवधि में करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स किया, जिसे किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इस निवेश के साथ समूह का कुल परिसंपत्ति आधार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब देश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।

    समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में ईबीआईटीडीए बढ़कर लगभग 94,834 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इस आय में ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। समूह का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन और दीर्घकालिक निवेश रणनीति भविष्य में भी विकास की गति बनाए रखने में मदद करेगी।

    कैपेक्स का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और यूटिलिटी सेक्टर में लगाया गया, जहां नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष के दौरान 5 गीगावाट से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी गई, जिससे समूह की कुल परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को भी विस्तार दिया गया है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और ग्रीन ट्रांजिशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में यह निवेश आने वाले वर्षों में समूह के राजस्व और नकदी प्रवाह को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं। नए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास से समूह ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को और व्यापक बनाया है। एयरपोर्ट कारोबार में यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बंदरगाह कारोबार में कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम ने भी नया स्तर हासिल किया। वैश्विक विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाते हुए समूह ने विदेशों में रणनीतिक परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है।

    वित्तीय मोर्चे पर समूह ने नकदी स्थिति और ऋण प्रबंधन को भी मजबूत बनाए रखा है। बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल और वित्तीय अनुशासन के कारण उधारी लागत में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा इक्विटी आधारित वित्तपोषण पर जोर देकर समूह ने अपनी बैलेंस शीट को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े निवेश चक्र के बावजूद ऋण और नकदी के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर समूह के लिए महत्वपूर्ण होता है और यही पहलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।

    आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरी तरह परिचालन में आने के बाद समूह की आय, लाभ और नकदी प्रवाह में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। भारत में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग, शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की जरूरतों के बीच इस तरह के बड़े निवेश देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।