Category: Economy

  • ईरान युद्ध टलने के ऐलान से चमके सोना-चांदी… दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल

    ईरान युद्ध टलने के ऐलान से चमके सोना-चांदी… दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल


    नई दिल्ली।
    डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर हमले दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत (Silver Price) 6% या 13,000 रुपये से अधिक बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमत (Gold Price ) 2.4% या 3600 रुपये से अधिक बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।

    इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए।


    बाजार में ‘रिलीफ रैली’, आगे भी दिख सकता है उतार-चढ़ाव

    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं।


    पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की उम्मीद

    पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है।


    सोने के लिए ऊर्जा कीमतें और महंगाई बनी बड़ी चिंता

    ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसकी तेजी को सीमित भी कर सकती हैं।


    चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजी

    सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई।


    राहत के संकेत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार

    ट्रंप के फैसले से फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए है।

  • फूड पीएलआई स्कीम से आया 9,207 करोड़ रुपए का निवेश, 3.29 लाख लोगों को मिला रोजगार

    फूड पीएलआई स्कीम से आया 9,207 करोड़ रुपए का निवेश, 3.29 लाख लोगों को मिला रोजगार


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को जानकारी दी कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया गया है। इसके साथ ही इस योजना ने करीब 3.29 लाख रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं।

    योजना की अवधि और उद्देश्य

    यह योजना वित्त वर्ष 2021-22 से 2026-27 तक 6 साल के लिए लागू है। कुल बजट 10,900 करोड़ रुपए रखा गया है।
    योजना का मुख्य उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण में वैल्यू एडिशन बढ़ाना, प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार करना और विशेषकर ग्रामीण व गैर-कृषि क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।

    कौन से सेक्टरों को फायदा

    पीएलआई योजना के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों को बढ़ावा दिया गया है:

    रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट (आरटीसी/आरटीई) फूड
    प्रसंस्कृत फल और सब्जियां
    समुद्री उत्पाद
    मोजरेला चीज
    एमएसएमई सेक्टर के इनोवेटिव और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स

    इसके अलावा, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए भारतीय फूड प्रोडक्ट्स की वैश्विक पहचान को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    कंपनियों और यूनिट्स की स्थिति
    अब तक 128 कंपनियों को मंजूरी दी गई है, जो 274 यूनिट्स चला रही हैं।
    एमएसएमई सेक्टर की भागीदारी मजबूत रही, जिसमें 68 एमएसएमई कंपनियां और 40 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शामिल हैं।
    कुल निवेश 7,722 करोड़ रुपए के लक्ष्य से अधिक होकर 9,207 करोड़ रुपए हो गया है।
    तकनीकी सुधार और प्रोसेसिंग क्षमता

    सरकार ने बताया कि योजना से कई राज्यों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की क्षमता बढ़ी, तकनीक में सुधार हुआ और आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिला।
    इसके साथ ही लगभग 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता जोड़ी गई है।

    बिक्री और निर्यात में तेजी

    पीएलआई स्कीम के तहत आने वाले उत्पादों की बिक्री में 10.58 प्रतिशत की सालाना वृद्धि (सीएजीआर) दर्ज की गई।
    निर्यात में भी 7.41 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के खाद्य उत्पादों की प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।

    मिलेट और मोटे अनाज की बढ़ती मांग
    मिलेट (मोटे अनाज) से बने उत्पादों की बिक्री वित्त वर्ष 2023 में 345.73 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,845.25 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
    इस अवधि में बाजरा की खरीद में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे देश में स्वास्थ्यवर्धक और पोषणयुक्त फूड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है।
    विशेषज्ञों की राय

    विशेषज्ञों का कहना है कि फूड पीएलआई योजना ने देश में खाद्य प्रसंस्करण और रोजगार सृजन में नई दिशा दी है।
    एमएसएमई और बड़े उद्योगों की भागीदारी से उत्पादन क्षमता, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार हुआ है।

    फूड पीएलआई स्कीम ने अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया और 3.29 लाख रोजगार पैदा किए। योजना ने 128 कंपनियों और 274 यूनिट्स के माध्यम से उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाई, मिलेट और मोटे अनाज की मांग में तेजी आई, और देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई।

  • रेलवे करियर में कदम रखें, आईआरसीटीसी की इस भर्ती में बनें उम्मीदवार

    रेलवे करियर में कदम रखें, आईआरसीटीसी की इस भर्ती में बनें उम्मीदवार


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के कुल 84 पदों के लिए भर्ती का ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया है। यह नौकरी उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है जो रेलवे क्षेत्र में कैरियर बनाने की सोच रहे हैं।

    पद और चयन प्रक्रिया

    आईआरसीटीसी में चयन प्रक्रिया वॉक-इन-इंटरव्यू, मेडिकल फिटनेस और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर होगी। चयनित उम्मीदवारों को 30,000 रुपए प्रति माह सैलरी के साथ अन्य भत्ते और लाभ भी मिलेंगे।

    शैक्षणिक योग्यता

    उम्मीदवारों के पास निम्नलिखित योग्यता होनी चाहिए:
    हॉस्पिटैलिटी और होटल एडमिनिस्ट्रेशन में बीएससी / बीबीए / एमबीए (पाक कला)
    होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग साइंस में बीएससी / एमबीए (पर्यटन और होटल मैनेजमेंट)
    योग्य फ्रेशर्स भी इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    आयु सीमा
    अधिकतम आयु: 27 वर्ष (1 अप्रैल 2026 के आधार पर)
    आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु में छूट
    वॉक-इन-इंटरव्यू का शेड्यूल और स्थान
    इंटरव्यू का आयोजन 25 से 28 अप्रैल 2026 के बीच होगा। उम्मीदवार सुबह 10:30 बजे से शाम 17:30 बजे तक दिए गए पते पर पहुंच सकते हैं:

    आईआरसीटीसी क्षेत्रीय कार्यालय
    6ए, द रेन ट्री प्लेस, नंबर 9, मैक निकोल्स रोड, चेटपेट, चेन्नई – 600031
    उम्मीदवारों को सभी डॉक्यूमेंट्स और एप्लीकेशन फॉर्म की हार्ड कॉपी इंटरव्यू के दिन साथ ले जाने की सलाह दी जाती है।

    आवेदन कैसे करें

    उम्मीदवारों को सबसे पहले आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। होमपेज पर संबंधित पद के नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक कर एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करें। फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ इंटरव्यू के दिन लेकर जाएं।

    आईआरसीटीसी ने हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के 84 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की है। वॉक-इन-इंटरव्यू 25-28 अप्रैल को चेन्नई में आयोजित होंगे। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आवेदन फॉर्म डाउनलोड करके समय पर इंटरव्यू में शामिल होकर रेलवे क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा मौका प्राप्त कर सकते हैं।

  • क्विक कॉमर्स का बढ़ता असर: अब कीमत नहीं, सुविधा बन रही खरीदारी की पहली पसंद!

    क्विक कॉमर्स का बढ़ता असर: अब कीमत नहीं, सुविधा बन रही खरीदारी की पहली पसंद!


    नई दिल्ली। भारत में तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार के बीच क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। मंगलवार को जारी ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि 70 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ताओं ने कहा कि चाहे छूट कम हो जाए, वे क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल जारी रखेंगे। इससे यह साफ है कि आज उपभोक्ता कीमत से ज्यादा सुविधा और त्वरित डिलीवरी को प्राथमिकता देने लगे हैं।

    मोहल्ले की दुकानों की भूमिका अब भी अहम

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रोजमर्रा की किराना खरीदारी के लिए मोहल्ले की दुकानों का महत्व अभी भी बरकरार है। भरोसे और व्यक्तिगत संबंधों के कारण ये दुकाने उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। हालांकि, पिछले एक साल में 51 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि उनकी किराना दुकानों पर निर्भरता कम हुई है, जो डिजिटल और क्विक कॉमर्स की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।

    क्विक कॉमर्स के इस्तेमाल के तरीके

    रिपोर्ट के अनुसार, 45 प्रतिशत लोग आखिरी समय या जरूरी सामान के लिए क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, 24 प्रतिशत लोग दूध, ब्रेड जैसे रोजमर्रा के सामान के लिए इसका सहारा लेते हैं। 19 प्रतिशत उपभोक्ता स्नैक्स, पेय और इम्पल्स बाइंग के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा करते हैं।

    दूसरी ओर, 13 प्रतिशत लोग अब भी किराना दुकानों पर ज्यादा निर्भर हैं, जबकि 27 प्रतिशत लोगों की खरीदारी आदतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

    किराना दुकानदारों की चुनौतियां और डिजिटल अपनाना

    किराना दुकानदार भी अब बदलते परिदृश्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने के विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कम मुनाफा, छोटा क्रेडिट साइकिल और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाएं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत दुकानदार क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी में रुचि रखते हैं। वहीं 32 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें इसमें रुचि है, लेकिन वे समझ नहीं पाते कि यह साझेदारी कैसे काम करेगी। 20 प्रतिशत दुकानदारों ने कहा कि यदि उन्हें तकनीकी और संचालन में मदद मिले, तो वे भी इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं।

    डिजिटल भुगतान और तकनीकी टूल्स

    अब ज्यादातर किराना दुकानों पर डिजिटल पेमेंट आम हो गया है। यूपीआई और क्यूआर कोड के जरिए भुगतान व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है। हालांकि, पीओएस सिस्टम, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और डिजिटल ऑर्डरिंग जैसे एडवांस टूल्स का इस्तेमाल सीमित है, जिसका कारण उनकी लागत, प्रशिक्षण और संचालन की जटिलता है।

    भारत में क्विक कॉमर्स अब केवल कीमत की प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि तेजी और सुविधा की प्राथमिकता बन चुकी है। मोहल्ले की दुकानें अभी भी भरोसे का मुख्य केंद्र हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की बदलती आदतें और डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति इसे चुनौती दे रही हैं। किराना दुकानदारों के लिए भी डिजिटल नेटवर्क और तकनीकी सहयोग भविष्य में नई संभावनाएं खोल रहे हैं।

  • 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा नया बढ़ावा, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी खुशखबरी!

    'मेक इन इंडिया' को मिलेगा नया बढ़ावा, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी खुशखबरी!


    नई दिल्ली। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसएवीडब्ल्यूआईपीएल) ने मंगलवार को पुणे स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में अपडेटेड फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू करने की घोषणा की। कंपनी का कहना है कि यह कदम उनकी ‘मेक इन इंडिया, फॉर इंडिया एंड द वर्ल्ड’ रणनीति को मजबूती प्रदान करेगा और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करेगा।

    नया डिजाइन और प्रीमियम फीचर्स

    एसएवीडब्ल्यूआईपीएल के अनुसार, अपडेटेड टाइगुन में नया डिजाइन और बेहतर प्रीमियम फीचर्स शामिल हैं। इसे भारतीय ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है, जबकि यूरोपीय ड्राइविंग डायनामिक्स, आराम और सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इससे भारतीय ग्राहक उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ आरामदायक अनुभव का लाभ उठा सकेंगे।

    उत्पादन शुरू होने पर कंपनी की प्रतिक्रिया

    कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ पीयूष अरोरा ने कहा, “नई फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू होना भारत में हमारे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की परिपक्वता को दर्शाता है। हमारी भारत स्थित इकाइयां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वाहनों का उच्च स्तरीय स्थानीयकरण करने के लिए तैयार हैं। यह घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों की जरूरतों को कुशलतापूर्वक पूरा करने में मदद करेगा।

    एसयूवी पोर्टफोलियो में मजबूती

    ब्रांड निदेशक नितिन कोहली ने कहा कि टाइगुन लॉन्च के बाद से ही कंपनी की एसयूवी रणनीति का केंद्र रही है और इसने कंपनी के पोर्टफोलियो को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाकन प्लांट में उत्पादन भारतीय ग्राहकों के प्रति कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    बाजार में टाइगुन का प्रदर्शन

    2021 में लॉन्च हुई टाइगुन ने प्रदर्शन, आराम और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। कंपनी के अनुसार, अब तक 1.43 लाख से अधिक यूनिट्स का उत्पादन हो चुका है, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत का निर्यात वैश्विक बाजारों में किया गया है।

    पुणे प्लांट और कंपनी की स्थिति

    पुणे स्थित यह कंपनी ऑडी, पोर्श, लैम्बोर्गिनी और बेंटले सहित फॉक्सवैगन समूह के छह ब्रांडों का भारत में संचालन करती है। कंपनी ने 25 वर्ष पूर्व भारत में परिचालन शुरू किया था और वर्तमान में चाकन और छत्रपति संभाजीनगर में दो विनिर्माण संयंत्र संचालित करती है, जिनकी संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.15 लाख यूनिट्स है।

    कर्मचारियों और ग्राहक सेवा नेटवर्क

    वर्तमान में कंपनी के लगभग 700 ग्राहक संपर्क केंद्र हैं और लगभग 5,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे यह स्पष्ट है कि फॉक्सवैगन ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि ग्राहक सेवा और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती प्रदान की है।

  • भारत का मछली उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 106% बढ़ा, FY 2025 में 197.75 लाख टन!

    भारत का मछली उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 106% बढ़ा, FY 2025 में 197.75 लाख टन!


    नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मछली उत्पादन 197.75 लाख टन तक पहुंच गया, जो 2013-14 के 95.79 लाख टन की तुलना में 106 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% योगदान कर रहा है। मत्स्य पालन क्षेत्र ने न केवल उत्पादन में उछाल दिखाया है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, आय सृजन और खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    केंद्रीय बजट में अब तक का सबसे बड़ा आवंटन

    केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 2,761.80 करोड़ रुपए का आवंटन किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक बजट है। इसमें से 2,500 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत आवंटित किए गए हैं। इस योजना के माध्यम से तालाब, जलाशय पिंजरे, मछली परिवहन इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज जैसी बुनियादी ढांचा सुविधाओं का विकास हो रहा है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है।

    रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 तक 74.66 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा, 33 लाख से अधिक लोगों को बीमा कवरेज और लगभग 7.44 लाख मछुआरा परिवारों को आजीविका सहायता प्रदान की गई है। क्षेत्र में इस वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।

    नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई की भूमिका

    सरकार ने बताया कि नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई ने उत्पादन, मूल्य शृंखला और बुनियादी ढांचे में नई गति दी है। इसके तहत हजारों तालाबों और जलाशयों में पिंजरे लगाए गए हैं, 27,189 मछली परिवहन इकाइयों का निर्माण हुआ है और 12,081 आरएएस इकाइयां एवं 4,205 बायो-फ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इन तकनीकी बदलावों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों को आधुनिक तरीकों से लाभान्वित किया है।

    निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

    मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने से समुद्री खाद्य निर्यात में भी तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 62,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। फ्रोजन झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद बने हुए हैं, जिनके बड़े बाजार अमेरिका और चीन हैं। सरकार ने बंदरगाह, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग यूनिट्स के माध्यम से निर्यात नेटवर्क को भी मजबूत किया है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती आई है।

    भविष्य की राह

    मत्स्य पालन क्षेत्र अब केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में उत्पादन, रोजगार और निर्यात में और वृद्धि हो। पीएमएमएसवाई और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से भारत विश्व स्तर पर मत्स्य पालन में अग्रणी देश बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

    भारत का मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुंचकर 106% बढ़ गया। पीएमएमएसवाई और नीली क्रांति ने उत्पादन, निर्यात और रोजगार में नई गति दी है। मत्स्य पालन क्षेत्र अब ग्रामीण आय, रोजगार और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार ने बजट 2026-27 में 2,761.80 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिससे आधुनिक तकनीक, आरएएस और बायो-फ्लॉक इकाइयों के माध्यम से उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है।

  • केंद्र ने बताया, सुरक्षा कारणों से West Asia जाने वाली फ्लाइट्स पर लगाया ब्रेक!

    केंद्र ने बताया, सुरक्षा कारणों से West Asia जाने वाली फ्लाइट्स पर लगाया ब्रेक!


    नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया के लिए भारतीय उड़ानों में भारी रद्दीकरण हुआ है। नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि युद्ध से पहले भारतीय एयरलाइंस प्रतिदिन 300-350 उड़ानें संचालित करती थीं, जो अब घटकर सिर्फ 80-90 रह गई हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी के हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया। इसके बावजूद, भारतीय एयरलाइंस लगातार काम कर रही हैं और कार्गो सेवा भी जारी है।

    डीजीसीए ने पायलटों के लिए छूट दी
    मध्य पूर्व के एयरस्पेस बंद होने के कारण लंबी दूरी की उड़ानों में पायलटों को ड्यूटी टाइम लिमिट का पालन करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने अस्थायी रूप से पायलटों के फ्लाइट ड्यूटी समय (FDTL) बढ़ाने की अनुमति दी।

    नए नियमों के अनुसार, पायलटों को 48 घंटे का लगातार आराम मिलना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था। यह छूट लंबी उड़ानों में थकान कम करने और उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दी गई है।

  • मध्य पूर्व संकट के बीच LG एनर्जी सॉल्यूशन को पहली तिमाही में 207.8 बिलियन वॉन का घाटा!

    मध्य पूर्व संकट के बीच LG एनर्जी सॉल्यूशन को पहली तिमाही में 207.8 बिलियन वॉन का घाटा!


    नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया की बैटरी निर्माता कंपनी LG एनर्जी सॉल्यूशन लिमिटेड ने मंगलवार को बताया कि जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में उसे 207.8 बिलियन वॉन (लगभग 138.2 मिलियन डॉलर) का ऑपरेटिंग घाटा हुआ। यह घाटा पिछले साल की इसी तिमाही में हुए 374.7 बिलियन वॉन के मुनाफे के विपरीत है।

    कंपनी की बिक्री 2.5 प्रतिशत गिरकर 6.55 ट्रिलियन वॉन रह गई। वित्तीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिका-ईरान युद्ध और मध्य पूर्व संकट के कारण बढ़ी उत्पादन लागत इस घाटे का प्रमुख कारण रही। इसके अलावा उत्तरी अमेरिका में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) बैटरी उत्पादन में शुरुआती निवेश का असर भी पड़ा।

    कंपनी ने बताया कि अमेरिकी इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट के तहत उसे 189.8 बिलियन वॉन का टैक्स क्रेडिट मिला है। यदि यह क्रेडिट न होता, तो वास्तविक ऑपरेटिंग घाटा 397.5 बिलियन वॉन तक पहुँच जाता।

    एलजी ग्रुप के चेयरमैन कू क्वांग-मो ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री में बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए पावर इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने अमेरिका के मैसाचुसेट्स स्थित LG एनर्जी सॉल्यूशन वर्टेक का दौरा भी किया, क्योंकि कंपनी उत्तरी अमेरिका के ESS मार्केट में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।

  • अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एयरलाइन्स को मिली राहत, DGCA की नई गाइडलाइन जारी!

    अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच एयरलाइन्स को मिली राहत, DGCA की नई गाइडलाइन जारी!


    नई दिल्ली। ईरान युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट के कई देशों का एयरस्पेस बंद होने के चलते लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इस स्थिति में नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलटों के ड्यूटी समय (FDTL) नियमों में अस्थायी राहत देने का फैसला किया है।

    नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव असंगबा चुबा आओ ने बताया कि लंबी उड़ानों के कारण एयरलाइंस को नियमों का पालन करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए दो पायलट वाली लंबी उड़ानों के लिए फ्लाइट टाइम (FT) को 1 घंटे 30 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 30 मिनट और फ्लाइट ड्यूटी पीरियड (FDP) को 1 घंटे 45 मिनट बढ़ाकर 11 घंटे 45 मिनट कर दिया गया है।

    DGCA ने कहा कि इससे पायलटों को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी आराम का ध्यान रखा जाएगा और नियमों का उल्लंघन नहीं होगा। पिछले साल लागू किए गए नियमों के तहत पायलटों को 48 घंटे लगातार आराम देना अनिवार्य है, जो पहले 36 घंटे था।

    साथ ही, रेगुलेटर ने एयरलाइंस पर निगरानी बढ़ा दी है। इसमें पायलट रोस्टर, क्रू की उपलब्धता, बैकअप व्यवस्था और सिस्टम की मजबूती पर खास ध्यान दिया जाएगा। DGCA अधिकारी हर दो महीने में एयरलाइंस का निरीक्षण करेंगे और साप्ताहिक तथा पखवाड़े के आधार पर निगरानी जारी रहेगी।

    DGCA का कहना है कि यह राहत अस्थायी है और केवल मिडिल ईस्ट के संघर्ष वाले एयरस्पेस को बायपास करने वाली लंबी उड़ानों पर लागू होगी।

  • कॉर्पोरेट अपडेट: एयर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा मंजूर, कंपनी ने दी आधिकारिक जानकारी

    कॉर्पोरेट अपडेट: एयर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा मंजूर, कंपनी ने दी आधिकारिक जानकारी


    नई दिल्ली भारत के प्रमुख विमान एयर इंडिया में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन सामने आया है। कंपनी ने पुष्टि की है कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने अपना पद छोड़ दिया है।

    हालाँकि, वे तब तक अपनी जिम्मेदारियाँ मलेशिया गए, जब तक नए सीईओ की पेशकश नहीं हुई। इस कदम को लेकर एयर इंडिया के अगले विकास चरण की तैयारी आधिकारिक तौर पर देखी जा रही है।

    पहले ही कर दी थी पद छोड़ने की घोषणा

    कंपनी के मुताबिक, कैंपबेल विल्सन ने साल 2024 में ही एन. चंद्रशेखरन को 2026 में पद छोड़े की अपनी योजना के बारे में बताया था। इसके बाद वे संगठन को मजबूत बनाने और नेतृत्व टीम को स्थिर बनाने पर लगातार काम कर रहे थे, ताकि बदलाव की प्रक्रिया सहज और प्रभावशाली हो सके।

    चार साल में बदली एयर इंडिया की तस्वीर

    अपने फैसले को याद करते हुए कैंपबेल विल्सन ने कहा कि बोली के बाद पिछले चार वर्षों में एयर इंडिया में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिले हैं। इस दौरान कंपनी ने चार एयरलाइंस का अधिग्रहण और विलय किया, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र की कार्यशैली में भी महत्वपूर्ण बदलाव किये गये।

    ज़ोर से आधुनिक सिस्टम और बेहतर सेवाएँ

    विल्सन के नेतृत्व में एयर इंडिया ने अपने ऑपरेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण किया और नई शुरुआत की। यूनिवर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ग्राउंड सर्विस से लेकर इन-फ्लाइट होटल तक कई सुधार किए गए। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने बेड़े में 100 नए विमान शामिल किए और पुराने मॉडलों के उद्यमों को भी शामिल किया।

    बड़ा निवेश पर दस्तावेज़ और प्रशिक्षण

    एयर इंडिया ने अपने विस्तार के तहत कई बड़े आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं।इनमें दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी ट्रेनिंग अकादमी, फ़्लाइट सिम्युलेटर किड्स, फ़्लाइंग स्कूल और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (एमआरओ) बेस शामिल हैं।
    ये सभी फर्स्ट फ्यूचर में एयरलाइंस की जगहें और विस्तार को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।

    आस्था ने की नेतृत्व की अभिनेत्री

    एयर इंडिया के सानिध्य एन. चन्द्रशेखरन ने विल्सन के योगदान की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद क्रिस्टोफर चेन की तस्वीरें सामने आईं, डॉक्यूमेंट्री में देरी हुई और ग्लोबल मिरर के सामने टीम ने शानदार काम किया।

    नए सीईओ की तलाश शुरू

    कंपनी के बोर्ड ने नए सीईओ के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति आने वाले समय में उपयुक्त अभ्यर्थी का चयन करेगी।

    एयर इंडिया के अगले विकास चरण के लिए इस बदलाव पर बेहद अहम विचार किया जा रहा है, खासकर तब जब 2027 से बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट के दस्तावेज शुरू होने वाले हैं।

    ‘नया एयर इंडिया’ का भविष्य

    कैंपबेल विल्सन ने कहा कि कंपनी अब एक मजबूत प्रतिष्ठान है और आगे की यात्रा के लिए तैयार है। उनके अनुसार, यह सही समय है जब कंपनी के नए नेतृत्व को छोड़ दिया जाए, ताकि विकास की गति को और तेज किया जा सके।

    एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने पद छोड़ दिया है, लेकिन नए सीईओ की नियुक्ति तक पद पर बने रहे-चार साल में उन्होंने विमान को मजबूत आधार देकर अगले विकास चरण के लिए तैयार किया है।