Category: Economy

  • इकोनॉमी अपडेट: भारत की GDP ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान, Morgan Stanley की रिपोर्ट

    इकोनॉमी अपडेट: भारत की GDP ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान, Morgan Stanley की रिपोर्ट


    नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। Morgan Stanley की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, यह अनुमान पहले के 6.5 प्रतिशत से थोड़ा कम है, लेकिन इसके बावजूद भारत तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है।

    कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती

    रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। अनुमान है कि तेल की औसत कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जिससे ऊर्जा आयात पर खर्च बढ़ेगा और इसका सीधा असर उद्योगों की लागत पर पड़ेगा।इसके चलते उत्पादन महंगा होगा और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

    अल्पकाल में ग्रोथ पर दिख सकता है असर

    Morgan Stanley की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निकट भविष्य में आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। जून 2026 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसकी वजह औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती, वित्तीय स्थितियों में सख्ती और कंपनियों के मुनाफे में कमी को माना गया है।

    महंगाई और रुपए पर बढ़ेगा दबाव

    ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह महंगाई और मुद्रा पर भी असर डालेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 प्रतिशत रह सकती है। इसके अलावा, बढ़ते आयात बिल और कमजोर पूंजी प्रवाह के चलते भारतीय रुपए पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।

    चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका

    बढ़ती तेल कीमतों का असर भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी पड़ सकता है।रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि यह घाटा जीडीपी के 1 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति देश के बाहरी आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है और भुगतान संतुलन पर भी दबाव डाल सकती है।

    सरकार के उपायों से मिलेगी राहत

    हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि सरकारी नीतियों और आपूर्ति में सुधार से हालात धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं। सरकार शुरुआती चरण में सब्सिडी और लागत नियंत्रण जैसे उपायों का सहारा ले सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    लंबी अवधि में भारत की ग्रोथ बरकरार

    वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतियों और स्थिर मांग के चलते देश की विकास दर मध्यम अवधि में फिर से गति पकड़ सकती है।

    वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगे तेल के दबाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, जहां 6.2% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि अल्पकाल में महंगाई और रुपए पर दबाव बढ़ सकता है।

  • मध्य पूर्व संघर्ष के तेज होने की चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स 300 अंक टूटा

    मध्य पूर्व संघर्ष के तेज होने की चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में खुला, सेंसेक्स 300 अंक टूटा


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध के तेज होने की चिंताओं के बीच सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। इसके पहले सोमवार को भी बाजार लाल रंग में खुला था।

    इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 372.49 अंक या 0.50 प्रतिशत गिरकर 73,734.36 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 129.55 अंक या 0.56 प्रतिशत गिरकर 22,838.70 पर खुला। इसके अलावा, बैंक निफ्टी 350.40 अंक या 0.67 प्रतिशत गिरकर 52,258.70 पर खुला।

    (सुबह 9:28 बजे के करीब) सेंसेक्स 0.43 प्रतिशत यानी 315.64 अंक गिरकर 73,791.21 पर ट्रेड कर रहा था, तो वहीं निफ्टी50 0.38 प्रतिशत या 87.40 अंक गिरकर 22,880.85 पर कारोबार कर रहा था।

    व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.47 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.23 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी में 0.93 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी में 0.15 प्रतिशत की उछाल देखने को मिली। जबकि निफ्टी ऑटो में 1.33 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 0.82 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    निफ्टी 50 में हिंडाल्को, विप्रो, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, ओएनजीसी, आईटीसी और टीसीएस में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली, जबकि इसके विपरीत मैक्स हेल्थ, इंडिगो, एमएंडएम, इटरनल, आयशर मोटर, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर सबसे ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजार इस समय बेहद सतर्क हैं, क्योंकि एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक समयसीमा नजदीक आ रही है। निवेशकों की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए अल्टीमेटम पर टिकी हुई है, जिसकी समयसीमा भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 6:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार रात 8:00 बजे) है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा नहीं खोलता, तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है और डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जिसकी मुख्य वजह यह है कि ट्रंप ने अपने अल्टीमेटम को दोहराते हुए ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले की चेतावनी दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है, 28 फरवरी से जारी संघर्ष के कारण बाधित है, जिससे इस साल अब तक कच्चे तेल की कीमतों में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है।

    वहीं, ईरान ने अमेरिका समर्थित 45 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसे पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देशों ने समर्थन दिया था। ईरान का कहना है कि वह स्थायी शांति, प्रतिबंधों में राहत और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई चाहता है।

    एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, तकनीकी रूप से निफ्टी के लिए निकट अवधि का रेजिस्टेंस 23,465 पर है, जबकि सपोर्ट लेवल 22,800 और 22,540 पर देखा जा रहा है।

  • एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के रिकॉर्ड बिक्री के चलते पहली तिमाही के परिचालन लाभ में 33 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के रिकॉर्ड बिक्री के चलते पहली तिमाही के परिचालन लाभ में 33 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। मजबूत बिक्री और खासतौर पर होम अप्लायंस बिजनेस की दमदार ग्रोथ के चलते कंपनी का परिचालन लाभ (ऑपरेटिंग प्रॉफिट) साल-दर-साल 33 प्रतिशत बढ़ गया है।

    ऑपरेटिंग प्रॉफिट में जबरदस्त उछाल

    कंपनी की नियामक फाइलिंग के अनुसार, पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 1.25 ट्रिलियन वॉन से बढ़कर 1.67 ट्रिलियन वॉन (करीब 1.1 अरब डॉलर) हो गया। यह बढ़ोतरी ऐसे समय आई है, जब पिछली तिमाही में कंपनी को नुकसान उठाना पड़ा था।

    बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल बिक्री 4.4 प्रतिशत बढ़कर 23.73 ट्रिलियन वॉन तक पहुंच गई, जो पहली तिमाही के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। फाइनल अर्निंग रिपोर्ट इस महीने के अंत में जारी की जाएगी।

    पिछली तिमाही से शानदार वापसी

    गौरतलब है कि पिछली (चौथी) तिमाही में कंपनी को 109 बिलियन वॉन का ऑपरेटिंग नुकसान हुआ था। इसकी वजह कमजोर मांग और रिस्ट्रक्चरिंग से जुड़े एकमुश्त खर्च थे।

    लेकिन नई तिमाही में कंपनी ने शानदार वापसी करते हुए न सिर्फ नुकसान की भरपाई की, बल्कि मजबूत मुनाफा भी दर्ज किया।

    होम अप्लायंस बिजनेस बना ग्रोथ का इंजन

    कंपनी के मुताबिक, उसके होम अप्लायंस सॉल्यूशन डिवीजन ने इस ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई। सब्सक्रिप्शन मॉडल को मजबूत करने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस ने बिक्री को बढ़ावा दिया।

    इसके अलावा, मीडिया और एंटरटेनमेंट बिजनेस भी पिछली तिमाही के नुकसान से उबरकर मुनाफे में लौट आया है, जिसमें लागत कटौती का बड़ा योगदान रहा।

    व्हीकल और अन्य सेगमेंट का प्रदर्शन

    व्हीकल सॉल्यूशन बिजनेस में भी साल-दर-साल मुनाफे में सुधार देखने को मिला। दक्षिण कोरियाई मुद्रा वॉन के कमजोर होने से इस सेगमेंट को फायदा मिला, क्योंकि इसके ज्यादातर ग्राहक विदेशों में हैं। हालांकि, इको सॉल्यूशन बिजनेस में बाजार की अनिश्चितताओं के चलते बिक्री और मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई।

    AI और भविष्य की रणनीति पर फोकस

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने बताया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटर से जुड़ी मांग को पूरा करने पर ध्यान देगी। इसके साथ ही, कंपनी भविष्य के ग्रोथ इंजन के रूप में होम रोबोट और स्मार्ट उपकरणों पर निवेश बढ़ाने की योजना बना रही है।

    वैश्विक चुनौतियों से निपटने की तैयारी

    कंपनी ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और कच्चे माल व लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इनसे निपटने के लिए कंपनी लागत में कटौती और लचीली रणनीति अपनाएगी, ताकि आने वाले समय में ग्रोथ को बनाए रखा जा सके।

    एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने रिकॉर्ड बिक्री के दम पर पहली तिमाही में 33% मुनाफा बढ़ाया। होम अप्लायंस बिजनेस इसकी सबसे बड़ी ताकत रहा, जबकि कंपनी भविष्य में AI और नए टेक्नोलॉजी सेगमेंट पर फोकस बढ़ा रही है।

  • मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बीच वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल तेज हो गई है। मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

    ब्रेंट और WTI क्रूड में जोरदार उछाल

    वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा 1.69% यानी 1.86 डॉलर की बढ़त के साथ 111.63 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड में 3% से ज्यादा यानी 4.15 डॉलर की तेजी आई और यह 116.56 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।यह तेजी दिन के शुरुआती कारोबार में ही देखने को मिली, जिससे साफ है कि निवेशकों में तनाव को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    कुछ ही दिनों में 60% से ज्यादा चढ़ा तेल

    मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 27 फरवरी को 72.48 डॉलर से बढ़कर 9 मार्च को 119.50 डॉलर तक पहुंच गया, यानी करीब 60% की तेजी। साल 2026 में अब तक तेल की कीमतों में लगभग 90% तक उछाल देखा जा चुका है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

    ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी चिंता

    तेल की कीमतों में यह तेजी उस समय आई, जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया।ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए समयसीमा तय करते हुए चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो “तेहरान पर बड़ा हमला” किया जा सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि ईरान को “एक रात में खत्म किया जा सकता है।”

    होर्मुज स्ट्रेट: तेल सप्लाई की लाइफलाइन

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% गुजरता है। 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष के कारण इस रूट पर असर पड़ा है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है और कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

    ईरान का सख्त रुख, सीजफायर से इनकार

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने सीजफायर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और संघर्ष जारी रखने का फैसला किया है। इससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है और बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

    शेयर बाजार पर भी असर

    तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, अमेरिका का वॉल स्ट्रीट हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला।

    आगे क्या? बाजार की नजर भू-राजनीति पर

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। वहीं, किसी समझौते की स्थिति में कीमतों में राहत मिल सकती है।

    मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3% से ज्यादा उछाल आया है। होर्मुज स्ट्रेट पर असर और ईरान के सख्त रुख से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

  • कमोडिटी मार्केट में हलचल: तनाव के बीच सोने-चांदी के दाम फिसले

    कमोडिटी मार्केट में हलचल: तनाव के बीच सोने-चांदी के दाम फिसले


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयानों के बीच मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। आमतौर पर ऐसे हालात में निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन इस बार बाजार में वैसी मजबूती नजर नहीं आई।

    MCX पर गिरावट के साथ खुला सोना-चांदी

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 जून कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना पिछले बंद भाव 1,49,981 रुपये के मुकाबले 222 रुपये गिरकर 1,49,759 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं, 5 मई कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 1,379 रुपये गिरकर 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली। शुरुआती कारोबार में दोनों धातुओं में कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    दिनभर उतार-चढ़ाव, स्थिरता नहीं

    दोपहर करीब 12:13 बजे तक सोना 175 रुपये यानी 0.12% गिरकर 1,49,806 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। दिन के दौरान यह 1,50,474 रुपये के उच्चतम स्तर तक गया, जबकि 1,49,201 रुपये तक नीचे भी आया।

    इसी तरह चांदी भी 813 रुपये यानी 0.35% गिरकर 2,32,566 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। इंट्रा-डे में चांदी ने 2,35,547 रुपये का उच्चतम और 2,31,503 रुपये का न्यूनतम स्तर छुआ।

    ‘सेफ हेवन’ डिमांड कमजोर क्यों?

    विश्लेषकों का कहना है कि आमतौर पर तनाव के समय सोने-चांदी में निवेश बढ़ता है, लेकिन इस बार “सेफ-हेवन” डिमांड उतनी मजबूत नहीं दिख रही। बाजार फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि कीमतें एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो रही हैं।

    चांदी के लिए अहम स्तर

    एमसीएक्स पर चांदी फिलहाल 2,31,000 से 2,33,000 रुपये के दायरे में कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2,33,000–2,34,000 रुपये का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है तो कीमतों में तेजी आ सकती है, लेकिन 2,30,000 रुपये के नीचे जाने पर तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिला-जुला रुख

    वैश्विक बाजार में कीमती धातुएं लगभग स्थिर रहीं। COMEX पर गोल्ड 3.36 डॉलर की मामूली गिरावट के साथ 4,681.34 डॉलर पर रहा, जबकि सिल्वर 0.09 डॉलर की बढ़त के साथ 72.94 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। स्पॉट मार्केट में सोना हल्की बढ़त के साथ 4,653 डॉलर पर पहुंचा, जबकि चांदी मामूली गिरावट के साथ 72.78 डॉलर पर रही।

    ईरान-हॉर्मुज तनाव और कच्चे तेल में उछाल

    कीमतों में यह उतार-चढ़ाव उस समय देखने को मिला, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 1.69% बढ़कर 111.63 डॉलर पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 3% से ज्यादा चढ़कर 116.56 डॉलर तक पहुंच गया।

    बाजार की नजर आगे क्या?

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी नीतियां ही तय करेंगी कि सोने-चांदी की दिशा क्या होगी। निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और हर बड़े अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं।

  • बैंकिंग सेक्टर पर मंडराया संकट, युद्धों को बताया सबसे बड़ा जोखिम: JPMorgan CEO

    बैंकिंग सेक्टर पर मंडराया संकट, युद्धों को बताया सबसे बड़ा जोखिम: JPMorgan CEO


    नई दिल्ली। दुनिया की सबसे बड़ी बैंकिंग संस्थाओं में से एक जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव बैंकिंग सेक्टर और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। डिमोन के मुताबिक, यूक्रेन और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों ने अनिश्चितता को काफी बढ़ा दिया है, जिससे दुनिया भर के बाजारों और उद्योगों पर दबाव साफ देखा जा रहा है।

    युद्ध और तनाव से बढ़ रही आर्थिक अनिश्चितता

    अपने सालाना शेयरधारक पत्र में जेमी डिमोन ने कहा कि दुनिया इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान से जुड़े तनाव, मध्य पूर्व में बढ़ती दुश्मनी और आतंकवादी गतिविधियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी घटनाएं “अनिश्चितता का क्षेत्र” तैयार कर रही हैं, जहां भविष्य के परिणामों का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। इसका सीधा असर कमोडिटी मार्केट, निवेश और वैश्विक व्यापार पर पड़ रहा है।

    चीन और ट्रेड वॉर भी चिंता का कारण

    डिमोन ने चीन के साथ बढ़ते तनाव को भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू की गई टैरिफ आधारित ट्रेड वॉर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

    उनके अनुसार, ये व्यापारिक तनाव भविष्य में वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं और नए आर्थिक समीकरण पैदा कर सकते हैं।

    AI: सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति, लेकिन जोखिम भी

    जेमी डिमोन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अब तक की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति बताया। उन्होंने कहा कि AI का असर हर सेक्टर पर पड़ेगा और यह पूरी दुनिया के काम करने के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI के अंतिम परिणाम को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।

    अमेरिकी मूल्यों पर भरोसा जरूरी

    डिमोन ने कहा कि इन चुनौतियों के बीच अमेरिका को अपने मूल्यों स्वतंत्रता, अवसर और लोकतंत्र पर फिर से भरोसा जताने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ ऐसे मूल्यों को मजबूत करने का सही मौका है, जो देश की पहचान रहे हैं।

    भविष्य की अर्थव्यवस्था पर बड़ा सवाल

    डिमोन के अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक घटनाएं यह तय करेंगी कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था कैसी होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अनिश्चितता इतनी ज्यादा है कि कोई भी सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है।

    :
    जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमोन ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध, चीन के साथ तनाव और ट्रेड वॉर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। साथ ही, AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव को लेकर भी उन्होंने सतर्क रहने की सलाह दी।

  • खराब बिजनेस अपडेट का असर! जुबिलेंट फूडवर्क्स स्टॉक में बड़ी गिरावट, निवेशकों में चिंता

    खराब बिजनेस अपडेट का असर! जुबिलेंट फूडवर्क्स स्टॉक में बड़ी गिरावट, निवेशकों में चिंता


    नई दिल्ली। क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर की दिग्गज कंपनी जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड के शेयरों में मंगलवार को जोरदार गिरावट देखने को मिली। कंपनी के कमजोर चौथी तिमाही (Q4) बिजनेस अपडेट के बाद निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी, जिसके चलते शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया और 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया।

    कारोबार के दौरान 52-हफ्ते के लो पर पहुंचा स्टॉक

    एनएसई पर दोपहर करीब 1:35 बजे जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड का शेयर 10.14% गिरकर 414.25 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन की शुरुआत 440 रुपये पर हुई थी, लेकिन बिकवाली के दबाव में यह गिरकर 408.80 रुपये तक पहुंच गया, जो इसका 52-हफ्ते का निचला स्तर है।गौरतलब है कि इस स्टॉक का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 727.95 रुपये रहा है, जिससे साफ है कि पिछले एक साल में इसमें भारी गिरावट आई है।

    रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन मांग कमजोर

    कंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही में 19% की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की और कुल आय 2,506 करोड़ रुपये रही। हालांकि, इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ गया। इसकी सबसे बड़ी वजह Domino’s Pizza इंडिया का कमजोर प्रदर्शन रहा। कंपनी की लाइक-फॉर-लाइक (LFL) ग्रोथ सिर्फ 0.2% रही, जो घरेलू बाजार में सुस्त मांग को दर्शाती है।

    मार्जिन पर दबाव और सीमित ग्रोथ की चिंता

    विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर LFL ग्रोथ के कारण कंपनी के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। बड़े इवेंट जैसे टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के बावजूद कंपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। इसके अलावा, डिलीवरी बिजनेस से ग्रोथ की संभावनाएं भी सीमित होती दिख रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में कंपनी की ग्रोथ रफ्तार और धीमी पड़ सकती है।

    हालांकि, कंपनी का तुर्की बिजनेस अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया है, जो कुछ राहत जरूर देता है।

    नए स्टोर्स का विस्तार जारी

    कमजोर मांग के बावजूद कंपनी अपने विस्तार पर ध्यान दे रही है। इस तिमाही में जुबिलेंट फूडवर्क्स लिमिटेड ने कुल 69 नए स्टोर्स जोड़े, जिससे कुल आउटलेट्स की संख्या बढ़कर 3,663 हो गई है।
    इनमें Domino’s Pizza इंडिया के 59 नए स्टोर शामिल हैं, जबकि तुर्की में 4 नए आउटलेट खोले गए।

    डंकिन के साथ 15 साल पुरानी साझेदारी खत्म

    कंपनी ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Dunkin’ के साथ अपनी फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट को रिन्यू न करने का ऐलान किया है। यह 15 साल पुरानी साझेदारी इस साल 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगी। कंपनी ने बताया कि लगातार घाटे और कमजोर ग्रोथ के चलते यह कदम उठाया गया है। अब कंपनी इस बिजनेस के लिए बिक्री या फ्रेंचाइजी ट्रांसफर जैसे विकल्पों पर विचार करेगी।

    निवेशकों के लिए चिंता बढ़ी

    इस साल अब तक कंपनी के शेयर 20% से ज्यादा गिर चुके हैं, जबकि पिछले एक साल में इसमें करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है। कमजोर मांग, मार्जिन प्रेशर और धीमी ग्रोथ के चलते निवेशकों की चिंता बढ़ गई है और आने वाले समय में कंपनी के प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

    कमजोर Q4 अपडेट के बाद जुबिलेंट फूडवर्क्स के शेयर 10% से ज्यादा गिरकर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। डोमिनोज इंडिया की धीमी ग्रोथ और मार्जिन दबाव के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है।

  • टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना

    टाटा की लुटिया डुबो रहे नए कारोबार… ग्रुप का घाटा बढ़कर ₹29,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना


    नई दिल्ली।
    टाटा संस (Tata Sons) के नए कारोबारों (New Businesses) में बढ़ते घाटे (Growing losses) ने ग्रुप के अंदर चिंता बढ़ा दी है। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इन बजनेसों का कुल घाटा करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान ₹5,700 करोड़ से बहुत ज्यादा है। यह बढ़ता नुकसान अब समूह की रणनीति और निवेश फैसलों पर सवाल खड़े कर रहा है।


    9 महीनों में ही ₹21,700 करोड़ पार

    एक खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह ₹16,550 करोड़ था। इससे साफ है कि नुकसान का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते घाटे में सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजस नेटवर्क जैसे नए बिजनेस से आ रहा है।


    नोएल टाटा की चिंता, बोर्ड स्तर पर बढ़ा दबाव

    नोएल टाटा (Noel Tata) ने इन नए प्रोजेक्ट्स के बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यही कारण रहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया गया। अब उम्मीद है कि जून की बैठक में घाटा कम करने की ठोस रणनीति पेश की जाएगी।


    टाटा डिजिटल बना सबसे बड़ी चिंता

    टाटा ग्रुप का डिजिटल कारोबार, जिसमें बिग बॉस्केट, Tata 1mg, क्रोमा और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, अभी तक फायदे में नहीं आ पाया है। FY26 में इस यूनिट का घाटा ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर ग्रोथ, लीडरशिप में बदलाव और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले धीमी रणनीति इसके पीछे मुख्य कारण हैं।


    एयर इंडिया पर सबसे बड़ा बोझ

    घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है। तेल की ऊंची कीमतें, पाकिस्तान एयरस्पेस का बंद होना और ग्लोबल टेंशन जैसे बाहरी कारणों ने कंपनी की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सेवा सुधार की गति अभी भी अपेक्षा से धीमी है।


    अन्य बिजनेस भी दबाव में

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर कारोबार में FY26 में करीब ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। वहीं तेजस नेटवर्क्स, जो FY25 में मुनाफे में थी, अब FY26 में ₹1,000 करोड़ के नुकसान में जा सकती है। यह दिखाता है कि समूह के कई नए निवेश अभी शुरुआती चरण में हैं और उन्हें स्थिर होने में समय लगेगा।


    क्या है आगे की चुनौती?

    टाटा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन नए व्यवसायों को मुनाफे की राह पर लाना है। लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों और बोर्ड दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जल्द ही रणनीतिक बदलाव नहीं किए गए, तो यह घाटा आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

  • ऑनलाइन शॉपिंग का फायदा: PhonePe SBI Card पर रिवॉर्ड और जीरो ज्वाइनिंग फीस

    ऑनलाइन शॉपिंग का फायदा: PhonePe SBI Card पर रिवॉर्ड और जीरो ज्वाइनिंग फीस


    नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म फोनपे ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के साथ मिलकर नया क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया है, जो सीमित अवधि के लिए पहले साल जीरो ज्वाइनिंग फीस के साथ उपलब्ध है। इसका मतलब है कि ग्राहक बिना किसी अग्रिम लागत के कार्ड के सभी लाभ उठा सकते हैं।

    यह कार्ड रुपे और विजा प्लेटफॉर्म दोनों पर उपलब्ध है और खासतौर पर उन उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अक्सर ऑनलाइन लेनदेन करते हैं। कार्ड की सबसे बड़ी खासियत इसकी यूनिवर्सल रिवॉर्ड स्ट्रक्चर है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस ब्रांड या व्यापारी से खरीदारी कर रहे हैं, सभी ऑनलाइन खर्च पर आपको 5 प्रतिशत रिवॉर्ड मिलेगा।

    फोनपे का कहना है कि यह कार्ड उन यूजर्स के लिए बेहतरीन विकल्प है जो अपने दैनिक डिजिटल खर्च पर अधिकतम लाभ पाना चाहते हैं। इसके अलावा, फोनपे इकोसिस्टम के भीतर चुनिंदा श्रेणियों जैसे मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल और अन्य नियमित लेनदेन पर 10 प्रतिशत रिवॉर्ड मिलेगा। इसी तरह, बीमा प्रीमियम भुगतान पर भी कार्डधारक रिवॉर्ड अर्जित कर सकते हैं।

    ऑफलाइन खर्च पर भी कार्ड लाभकारी है। रुपे वर्जन के माध्यम से स्कैन-एंड-पे लेनदेन पर 1 प्रतिशत रिवॉर्ड मिलेगा। यानी कम राशि के भुगतान भी आकर्षक बन जाएंगे।

    कार्ड में यात्रा संबंधी सुविधाएं भी शामिल हैं। साल में चार बार घरेलू हवाई अड्डे के लाउंज में निःशुल्क प्रवेश मिलेगा। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए दो साल की प्रायोरिटी पास सदस्यता भी कार्ड के साथ उपलब्ध है।

    कार्ड से अर्जित रिवॉर्ड पॉइंट्स को सीधे क्रेडिट कार्ड बिल के भुगतान में उपयोग किया जा सकता है। हर पॉइंट का मूल्य 1 रुपए है, जिससे मासिक बिलों को आसानी से समायोजित किया जा सकता है और कार्ड का कुल लाभ बढ़ जाता है।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है और इसे फोनपे ऐप के माध्यम से पूरा किया जा सकता है। यह ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सहज और सरल बनाता है, जिससे उपयोगकर्ता बिना किसी परेशानी के कार्ड के लाभ उठा सकते हैं।

    जीरो ज्वाइनिंग फीस (पहला साल)
    ऑनलाइन खर्च पर 5% रिवॉर्ड
    फोनपे इकोसिस्टम में 10% रिवॉर्ड (रिचार्ज, बिल आदि)
    ऑफलाइन स्कैन-एंड-पे पर 1% रिवॉर्ड
    यात्रा लाभ: घरेलू लाउंज चार बार फ्री, अंतरराष्ट्रीय लाउंज प्रायोरिटी पास दो साल
    रिवॉर्ड पॉइंट्स क्रेडिट बिल में सीधे भुनाए जा सकते हैं
    पूरी प्रक्रिया डिजिटल और आसान

    यह कार्ड डिजिटल खर्च, यात्रा और नियमित बिल भुगतान पर अधिकतम लाभ देने वाला एक आकर्षक विकल्प साबित होता है।

  • मार्केट अपडेट: मिनटों में लाल निशान, निवेशकों में चिंता बढ़ी, Sensex-Nifty गिरावट में

    मार्केट अपडेट: मिनटों में लाल निशान, निवेशकों में चिंता बढ़ी, Sensex-Nifty गिरावट में


    नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही, लेकिन यह तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। बाजार खुलने के कुछ ही मिनटों के भीतर ही बिकवाली हावी हो गई और सूचकांक लाल निशान में आ गए।

    चंद मिनट में हरे से लाल हुआ बाजार
    शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 157 अंकों की बढ़त के साथ 73,477 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, Nifty 50 भी 67 अंकों की तेजी के साथ 22,723 पर खुला। लेकिन जल्द ही बाजार में गिरावट शुरू हो गई और सेंसेक्स 377 अंक टूटकर 72,942 पर आ गया, जबकि निफ्टी 66 अंक गिरकर 22,642 के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह ग्लोबल संकेतों का कमजोर होना है। एशियाई बाजारों में जहां कुछ सूचकांक बढ़त में रहे, वहीं कई प्रमुख बाजार छुट्टियों के कारण बंद रहे, जिससे निवेशकों में स्पष्ट दिशा की कमी नजर आई।

    अमेरिकी बाजार से मिले कमजोर संकेत
    वहीं, अमेरिकी बाजार से भी नकारात्मक संकेत मिले हैं। डाऊ जोन्स, S&P 500 और नैस्डैक के फ्यूचर्स में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाला है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी बाजार के लिए बड़ा फैक्टर बना हुआ है। ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों ही 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहे हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर बना हुआ है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती ने भी बाजार पर दबाव बनाया है। US Dollar Index (DXY) में बढ़त दर्ज की गई है, जिससे विदेशी निवेशकों के रुख पर असर पड़ सकता है। बाजार की शुरुआत भले ही अच्छी रही हो, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती लागत के दबाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी।