Category: Economy

  • डिजिटल पेमेंट्स का विस्तार: कंबोडिया के 45 लाख व्यापारिक साझेदारों पर चलेगा भारतीय UPI

    डिजिटल पेमेंट्स का विस्तार: कंबोडिया के 45 लाख व्यापारिक साझेदारों पर चलेगा भारतीय UPI

    नई दिल्ली । भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की अंतरराष्ट्रीय इकाई एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (NIPL) ने कंबोडिया की राष्ट्रीय क्यूआर कोड भुगतान प्रणाली KHQR के साथ साझेदारी कर वहां UPI भुगतान सेवा शुरू कर दी है। इस पहल के साथ भारतीय यात्री अब कंबोडिया में अपने परिचित डिजिटल भुगतान माध्यम का उपयोग करते हुए आसानी से लेनदेन कर सकेंगे। यह कदम भारत के तेजी से विस्तार कर रहे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इस सेवा की औपचारिक शुरुआत कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की गई। इस अवसर पर दोनों देशों के वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। नई व्यवस्था के तहत भारत के UPI उपयोगकर्ता अपने मोबाइल भुगतान एप्लिकेशन के माध्यम से कंबोडिया में KHQR से जुड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सीधे भुगतान कर सकेंगे। इससे भारतीय पर्यटकों, व्यापारिक यात्रियों और अन्य आगंतुकों को विदेशी मुद्रा विनिमय या नकद भुगतान की जटिलताओं से काफी राहत मिलेगी।

    इस परियोजना के पहले चरण में भारतीय ग्राहकों को कंबोडिया के 45 लाख से अधिक व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भुगतान की सुविधा मिलेगी। इनमें होटल, रेस्तरां, पर्यटन स्थल, शॉपिंग सेंटर और रिटेल स्टोर जैसे अनेक व्यवसाय शामिल हैं। इससे यात्रियों को न केवल तेज और सुरक्षित भुगतान का अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों को भी भारत के विशाल डिजिटल भुगतान उपभोक्ता आधार तक पहुंचने का अवसर प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी सकारात्मक बढ़ावा मिलेगा।

    परियोजना का दूसरा चरण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत भविष्य में कंबोडिया के नागरिक अपने घरेलू बैंकिंग या डिजिटल भुगतान एप्लिकेशन का उपयोग करते हुए भारत में मौजूद लाखों UPI क्यूआर कोड आधारित व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भुगतान कर सकेंगे। इस प्रकार दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय और पूरी तरह इंटरऑपरेबल डिजिटल भुगतान नेटवर्क विकसित होगा, जो सीमा-पार लेनदेन को पहले से अधिक सहज और प्रभावी बनाएगा। यह मॉडल भविष्य में अन्य देशों के साथ भी डिजिटल भुगतान सहयोग का आधार बन सकता है।

    डिजिटल भुगतान क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल रियल-टाइम भुगतान प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी। साथ ही स्थानीय व्यापारियों को नकदी प्रबंधन की आवश्यकता कम होगी, परिचालन लागत में कमी आएगी और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। यह व्यवस्था छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए भी नए अवसर पैदा कर सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंच बनाना चाहते हैं।

    भारत ने पिछले कुछ वर्षों में UPI को एक वैश्विक डिजिटल भुगतान ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया है। विभिन्न देशों के साथ साझेदारी और सीमा-पार भुगतान नेटवर्क के विस्तार से भारतीय फिनटेक इकोसिस्टम को भी नई पहचान मिल रही है। कंबोडिया में UPI की शुरुआत इसी रणनीति का हिस्सा है, जो भारत को वैश्विक डिजिटल भुगतान नवाचार के अग्रणी देशों में शामिल करने की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित हो सकती है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव का असर: एक महीने में पेट्रोल-डीजल 7.5 रुपए तक महंगा, एलपीजी भी उछला

    अमेरिका-ईरान तनाव का असर: एक महीने में पेट्रोल-डीजल 7.5 रुपए तक महंगा, एलपीजी भी उछला

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले एक महीने के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो गया है। ऊर्जा बाजार में बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण ईंधन लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर परिवहन, व्यापार और दैनिक जीवन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    राजधानी दिल्ली में बीते एक महीने के दौरान पेट्रोल की कीमत में कुल 7.35 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसके बाद पेट्रोल का दाम 94.77 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 102.12 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। इस अवधि में सरकार ने चार अलग-अलग चरणों में ईंधन कीमतों में संशोधन किया। 15 मई को पेट्रोल के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जबकि 19 और 23 मई को 0.87-0.87 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद 25 मई को फिर 2.61 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया। लगातार हुई इन बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है।

    डीजल की कीमतों में भी लगभग इसी तरह की वृद्धि दर्ज की गई है। दिल्ली में डीजल का दाम 87.67 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 95.20 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कुल मिलाकर डीजल 7.53 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है। 15 मई को इसमें 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 19 और 23 मई को 0.91-0.91 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद 25 मई को डीजल के दाम में 2.71 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया। डीजल कीमतों में बढ़ोतरी का असर माल ढुलाई, कृषि गतिविधियों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ सकता है, जिससे कई वस्तुओं की लागत बढ़ने की संभावना है।

    ईंधन के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हुआ है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,113.50 रुपए तक पहुंच गई है। एक जून को सिलेंडर के दाम में 42 रुपए की नई बढ़ोतरी की गई। खास बात यह है कि जनवरी से अब तक कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 1,400 रुपए से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। वर्ष की शुरुआत में इसकी कीमत 1,691.50 रुपए थी, जो अब दोगुने के करीब पहुंच चुकी है। इसका असर होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और छोटे व्यवसायों की लागत पर पड़ सकता है।

    हालांकि घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारत अभी भी कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध करा रहा है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल की खुदरा कीमतें 150 रुपए प्रति लीटर से ऊपर बताई जा रही हैं, जबकि कई देशों में यह 180 रुपए प्रति लीटर से भी अधिक है। यूरोपीय संघ के देशों में पेट्रोल और डीजल दोनों की औसत कीमत भारत की तुलना में काफी ज्यादा है। वहीं पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और फिलीपींस में भी पेट्रोल की कीमतें भारतीय स्तर से ऊपर बनी हुई हैं।

    वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता का असर भारत के ईंधन बाजार पर लगातार दिखाई दे रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले महीनों में परिवहन लागत और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।

  • पेट्रोल की कीमतों का रहस्य: अंतरराष्ट्रीय गिरावट का फायदा क्यों नहीं मिल रहा?

    पेट्रोल की कीमतों का रहस्य: अंतरराष्ट्रीय गिरावट का फायदा क्यों नहीं मिल रहा?


    नई दिल्ली । दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इसका फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि आम लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब ब्रेंट क्रूड सस्ता हो रहा है तो देश में पेट्रोल और डीजल महंगा क्यों हो रहा है।

    दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ चुका है, जिससे यह उम्मीद थी कि भारत में ईंधन सस्ता होगा। लेकिन इसके उलट हाल के हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर कई रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    इस स्थिति की एक बड़ी वजह तेल कंपनियों की मूल्य नीति और उनका वित्तीय संतुलन है। भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited पहले वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पाईं थीं। उस समय कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुद घाटा सहा था। अब माना जा रहा है कि वे उसी पुराने नुकसान की भरपाई कर रही हैं।

    इसके अलावा भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता भी कीमतों को प्रभावित करती है। देश अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव भी घरेलू कीमतों पर सीधा असर डालता है।

    एक और अहम कारण है डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी। भारत कच्चे तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करता है, इसलिए जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है। इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता क्यों न हो रहा हो।

    कीमतों में टैक्स का भी बड़ा योगदान होता है। पेट्रोल और डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के एक्साइज ड्यूटी और वैट जैसे टैक्स भी शामिल होते हैं। यही टैक्स अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत को काफी बढ़ा देते हैं।

    इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन खर्च, डीलर कमीशन और लॉजिस्टिक्स लागत भी अंतिम कीमत में जुड़ते हैं। इन सभी कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर तुरंत भारतीय बाजार में नहीं दिखता।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और नीचे नहीं आतीं, रुपया मजबूत नहीं होता और टैक्स संरचना में राहत नहीं मिलती, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी कमी की उम्मीद करना मुश्किल है।

  • भारत में एडटेक ग्रोथ को AI दे रहा नई रफ्तार, डिजिटल विज्ञापन बाजार में बड़ा उछाल

    भारत में एडटेक ग्रोथ को AI दे रहा नई रफ्तार, डिजिटल विज्ञापन बाजार में बड़ा उछाल

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने वैश्विक विज्ञापन उद्योग की संरचना को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई अब केवल एक सहायक तकनीक नहीं रह गया है, बल्कि यह विज्ञापन उद्योग के हर स्तर को अधिक स्वचालित, डेटा-आधारित और परिणाम-केंद्रित मॉडल में बदल रहा है। इस बदलाव के बीच भारत को वैश्विक एडटेक हब के रूप में उभरने की मजबूत संभावना के तौर पर देखा जा रहा है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक विज्ञापन बाजार पहले ही 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जिसमें डिजिटल विज्ञापन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में कुल विज्ञापन खर्च का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर केंद्रित है, जबकि इसका बड़ा भाग प्रोग्रामेटिक तकनीक के जरिए संचालित हो रहा है। एआई इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक सटीक, तेज और प्रभावी बना रहा है, जिससे विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

    भारत इस बदलाव में एक अहम भूमिका निभा रहा है। देश में हर साल लाखों इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी छात्र तैयार हो रहे हैं, जिससे एक विशाल तकनीकी प्रतिभा आधार विकसित हो रहा है। इसके साथ ही करोड़ों डेवलपर्स और हजारों ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स भारत में मौजूद हैं, जो वैश्विक कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। यह मजबूत इकोसिस्टम एआई आधारित विज्ञापन तकनीक के विकास को गति दे रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार, एआई अब विज्ञापन उद्योग की लगभग हर प्रमुख प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। मीडिया खरीद से लेकर क्रिएटिव कंटेंट निर्माण, ग्राहक टारगेटिंग और परफॉर्मेंस मापन तक, हर स्तर पर एआई आधारित सिस्टम सक्रिय हो चुके हैं। मशीन लर्निंग और ट्रांसफॉर्मर आधारित मॉडल विज्ञापनों को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे कंपनियों की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार आने वाले वर्षों में तेज गति से बढ़ सकता है। अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025 में यह बाजार लगभग 21 अरब डॉलर का होगा, जो 2030 तक बढ़कर 33 से 42 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकता है। इस वृद्धि के पीछे ई-कॉमर्स, मोबाइल इंटरनेट की पहुंच और एआई आधारित विज्ञापन तकनीकों का बढ़ता उपयोग प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारतीय मूल की एडटेक कंपनियां अब केवल सेवा प्रदाता के रूप में सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक उत्पाद कंपनियों के रूप में उभर रही हैं। ये कंपनियां अब सॉफ्टवेयर और प्लेटफॉर्म आधारित बिजनेस मॉडल पर काम कर रही हैं, जिससे उनकी आय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता दोनों में वृद्धि हो रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ेगा, मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञापनदाताओं और प्रकाशकों के बीच बेहतर नेटवर्क और खुले डिजिटल इकोसिस्टम की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। भारत के पास इन सभी क्षेत्रों में मजबूत आधार मौजूद है, जिससे वह वैश्विक एडटेक बाजार में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

  • ग्लोबल इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए AI सॉल्यूशन, Coforge स्टॉक 5% चढ़ा

    ग्लोबल इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए AI सॉल्यूशन, Coforge स्टॉक 5% चढ़ा

    नई दिल्ली । ग्लोबल इंश्योरेंस इंडस्ट्री के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नया प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की घोषणा के बाद आईटी और टेक सेक्टर की प्रमुख कंपनी कोफोर्ज के शेयर में मंगलवार को मजबूत तेजी देखने को मिली। कंपनी द्वारा ‘नेक्सा एजेंटिक एआई प्लेटफॉर्म’ पेश किए जाने के बाद निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी और शेयर में 5 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में शेयर ने 1,554 रुपये के उच्च स्तर को भी छुआ, हालांकि बाद में यह कुछ नरमी के साथ कारोबार करता नजर आया।

    कंपनी का यह नया प्लेटफॉर्म खास तौर पर वैश्विक इंश्योरेंस उद्योग की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य इंश्योरेंस कंपनियों को उनके मौजूदा सिस्टम को बदले बिना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमताओं का लाभ देना है। कोफोर्ज के अनुसार यह प्लेटफॉर्म बीमा कंपनियों को नए प्रोडक्ट और सेवाओं को तेजी से बाजार में लॉन्च करने में मदद करेगा और उनके ऑपरेशनल एफिशिएंसी को भी बढ़ाएगा।

    इस प्लेटफॉर्म की खासियत यह है कि यह मौजूदा कोर सिस्टम के ऊपर एक अतिरिक्त AI लेयर के रूप में काम करता है, जिससे कंपनियों को भारी तकनीकी बदलाव की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें 30 से अधिक इंश्योरेंस आधारित एआई एसेट्स का मार्केटप्लेस भी शामिल किया गया है, जो अंडरराइटिंग, क्लेम प्रोसेसिंग, कस्टमर सर्विस और प्रोडक्ट डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों को अधिक स्मार्ट और तेज बनाते हैं। कंपनी का दावा है कि यह सिस्टम मॉड्यूलर और फ्लेक्सिबल है, जिससे कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार इसे अनुकूलित कर सकती हैं।

    कोफोर्ज का यह नया प्लेटफॉर्म केवल तकनीकी अपग्रेड नहीं बल्कि उसकी वैश्विक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि यह समाधान प्रॉपर्टी एंड कैजुअल्टी इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस, स्पेशलिटी इंश्योरेंस और मैनेजिंग जनरल एजेंट्स सहित पूरे इंश्योरेंस इकोसिस्टम के लिए उपयोगी है। इसमें मानव निगरानी और ऑडिट ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं, जिससे पारदर्शिता और नियंत्रण बनाए रखा जा सके।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के AI आधारित इनोवेशन आईटी कंपनियों के लिए लंबे समय में ग्रोथ के नए अवसर खोल सकते हैं। यही कारण है कि घोषणा के तुरंत बाद निवेशकों की खरीदारी बढ़ी और शेयर में तेज उछाल देखने को मिला। पिछले कुछ हफ्तों में भी कोफोर्ज का प्रदर्शन मजबूत रहा है और एक महीने में यह स्टॉक लगभग 32 प्रतिशत तक चढ़ चुका है, जो निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।

    हालांकि लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो स्टॉक में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। बीते छह महीनों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है, जबकि एक साल के आधार पर भी इसमें कमजोरी रही है। इसके बावजूद हालिया तेजी यह संकेत देती है कि कंपनी के नए प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी आधारित रणनीति को बाजार सकारात्मक रूप से देख रहा है।

    विश्लेषकों का यह भी कहना है कि AI और इंश्योरेंस टेक्नोलॉजी का यह संयोजन आने वाले वर्षों में ग्लोबल इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकता है। यदि यह प्लेटफॉर्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन करता है, तो कोफोर्ज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में और अधिक बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिलने की संभावना बढ़ सकती है।

    कुल मिलाकर, कोफोर्ज का यह नया AI प्लेटफॉर्म न केवल कंपनी के शेयर में तेजी का कारण बना है, बल्कि यह भी संकेत दे रहा है कि आने वाले समय में इंश्योरेंस और टेक्नोलॉजी के मेल से बाजार में नए अवसर तेजी से उभर सकते हैं।

  • वैश्विक तनाव से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 400 अंक टूटा, आईटी सेक्टर ने संभाली गिरावट

    वैश्विक तनाव से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 400 अंक टूटा, आईटी सेक्टर ने संभाली गिरावट

     नई दिल्ली ।  वैश्विक बाजारों में बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल देखने को मिला, जिसका सीधा असर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ा। बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 300 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।

    सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 322 अंक गिरकर 73,945 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी50 में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट देखने को मिली। कुछ ही समय बाद बिकवाली का दबाव और बढ़ गया, जिससे सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक टूट गया और निफ्टी भी 23,200 के आसपास फिसल गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू आर्थिक चिंताओं के चलते देखने को मिली है।

    बाजार पर दबाव का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता में अनिश्चितता माना जा रहा है। इसके साथ ही कमजोर मानसून की आशंका ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कमजोर मानसून का अनुमान जताए जाने के बाद कृषि आधारित शेयरों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों पर दबाव बढ़ गया है।

    सेक्टोरल मोर्चे पर अधिकतर इंडेक्स लाल निशान में नजर आए। ऑटो, रियल्टी और केमिकल सेक्टर में लगभग एक प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और सीमेंट सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे व्यापक बाजार में कमजोरी बढ़ी। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग एक प्रतिशत तक टूटकर कारोबार कर रहे थे, जिससे यह संकेत मिला कि गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है।

    हालांकि इस गिरावट के बीच आईटी सेक्टर ने बाजार को कुछ राहत दी। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली, जिसमें इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे प्रमुख शेयरों ने मजबूती दिखाई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक मांग और डॉलर की मजबूती के कारण आईटी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, जिससे इस सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट दिया।

    कमोडिटी बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यह अभी भी उच्च स्तर पर बनी हुई है, जिससे महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में हल्की गिरावट के बावजूद वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता कायम है।

    विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार वैश्विक घटनाक्रमों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। पश्चिम एशिया में यदि तनाव और बढ़ता है तो इसका असर ऊर्जा कीमतों और वैश्विक इक्विटी बाजारों पर और अधिक देखने को मिल सकता है। वहीं, घरेलू स्तर पर मानसून की स्थिति आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

    विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि इस अस्थिर माहौल में जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय मजबूत बुनियादी कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करें। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच दीर्घकालिक निवेश रणनीति अपनाना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव और घरेलू आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार फिलहाल दबाव में नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और मानसून से जुड़े अपडेट बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • 1 जून से बदलेंगे कई नियम, यूपीआई-ATM और टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव

    1 जून से बदलेंगे कई नियम, यूपीआई-ATM और टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली। नए महीने की शुरुआत के साथ ही देश की वित्तीय व्यवस्था में कई अहम बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका असर आम लोगों की रोजमर्रा की बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और टैक्स से जुड़ी गतिविधियों पर पड़ेगा। इन बदलावों का उद्देश्य डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित बनाना और वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना बताया जा रहा है।

    डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सुरक्षा सख्
    Unified Payments Interface (UPI) के तहत अब लेनदेन सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। बड़े ट्रांजैक्शन के लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन जैसे बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/फेस रिकग्निशन) और डिवाइस-बेस्ड ऑथेंटिकेशन लागू किए जा सकते हैं।
    इसके साथ ही अब पेमेंट करने से पहले लाभार्थी का सत्यापित नाम दिखेगा, जिससे गलत खाते में पैसे जाने की आशंका कम होगी।

    ATM निकासी नियमों में बदलाव
    अब यूपीआई आधारित कार्डलेस ATM निकासी को बैंक की मासिक फ्री लिमिट में शामिल किया जाएगा। लिमिट पार करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है, ठीक वैसे ही जैसे डेबिट कार्ड निकासी पर लागू होता है।

    टैक्स और पैन से जुड़े नए नियम
    15 जून तक वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एडवांस टैक्स की पहली किस्त जमा करनी होगी। जिनकी टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से अधिक है, उन्हें अनुमानित टैक्स का 15% भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा नकद लेनदेन और पैन कार्ड नियमों में भी बदलाव किया गया है अब बड़े नकद जमा और संपत्ति लेनदेन के लिए रिपोर्टिंग सीमा को संशोधित किया गया है।

    LPG और ईंधन कीमतों में बदलाव
    1 जून से कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में 19 किलो सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,113.50 रुपये हो गई है। अन्य शहरों में भी 40–50 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    RBI की बैठक पर नजर
    इस महीने होने वाली Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक भी महत्वपूर्ण होगी। रेपो रेट और महंगाई पर फैसले का असर होम लोन EMI, FD रिटर्न और बाजार पर पड़ सकता है।

    अन्य संभावित बदलाव
    रिपोर्ट्स के अनुसार EPFO सिस्टम में भी बदलाव की तैयारी है, जिससे भविष्य में PF निकासी UPI के जरिए संभव हो सकती है।

  • मई में ऑटो सेक्टर की रफ्तार तेज, हुंडई और महिंद्रा ने दर्ज की मजबूत बिक्री वृद्धि

    मई में ऑटो सेक्टर की रफ्तार तेज, हुंडई और महिंद्रा ने दर्ज की मजबूत बिक्री वृद्धि


    नई दिल्ली। देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में मई महीने के दौरान मजबूत मांग का असर साफ दिखाई दिया। प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों में Hyundai Motor India Limited और Mahindra & Mahindra ने घरेलू बाजार में बेहतर प्रदर्शन करते हुए बिक्री में अच्छी बढ़त दर्ज की है।

    हुंडई की बिक्री में 4.1% की वृद्धि
    हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने मई में कुल 61,137 वाहन बेचे। इसमें 47,837 यूनिट घरेलू बिक्री रही, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 9.1 प्रतिशत अधिक है। वहीं कंपनी ने 13,300 वाहनों का निर्यात भी किया। कुल मिलाकर कंपनी की बिक्री में 4.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा की 20% की छलांग
    महिंद्रा एंड महिंद्रा ने मई में निर्यात सहित कुल 99,636 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो साल-दर-साल आधार पर लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। कंपनी के यूटिलिटी व्हीकल (SUV) सेगमेंट ने इस वृद्धि में सबसे अहम भूमिका निभाई। घरेलू बाजार में 58,021 यूटिलिटी वाहन बिके, जो 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाते हैं।

    कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया और 24,079 यूनिट की बिक्री दर्ज की, जिसमें 19 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। निर्यात में भी कंपनी ने 37 प्रतिशत की बढ़त हासिल की।

    मांग मजबूत, लेकिन सप्लाई चुनौतियां कायम
    महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव डिवीजन के सीईओ ने बताया कि पूरे पोर्टफोलियो में मांग मजबूत बनी हुई है, हालांकि कुछ सप्लायरों के यहां श्रमिकों की कमी के कारण सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

    शेयर बाजार में हल्की गिरावट
    बिक्री के सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान दोनों कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। हुंडई का शेयर करीब 1.48 प्रतिशत गिरकर 1,900 रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर लगभग 1.9 प्रतिशत गिरकर 2,982 रुपये तक आ गया।

    SUV सेगमेंट बना ग्रोथ इंजन
    विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू बाजार में SUV और यूटिलिटी वाहनों की लगातार मजबूत मांग ऑटो सेक्टर की ग्रोथ को समर्थन दे रही है। आने वाले महीनों में त्योहारों की मांग और नए मॉडल लॉन्च इस रफ्तार को और बढ़ा सकते हैं।

  • भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान

    भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। इस समझौते को भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों, छोटे व्यापारियों, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को मिलने की उम्मीद है।

    वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विज़न की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यात को नए बाजार उपलब्ध कराएगा, विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा और देश में रोजगार सृजन को गति देगा।

    CEPA लागू होने के बाद ओमान में भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को 98 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तुरंत शून्य शुल्क (Zero Duty) का लाभ मिल जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद ओमान के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। पहले जहां केवल 15.3 प्रतिशत निर्यात पर ही शुल्क-मुक्त पहुंच थी, अब यह दायरा बेहद व्यापक हो गया है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समझौते से ओमान को भारत का निर्यात 4.06 अरब डॉलर से बढ़कर आने वाले वर्षों में 6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जबकि मध्य अवधि में यह 10 अरब डॉलर तक जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते कपड़ा, चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।

    विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, जयपुर और अहमदाबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं।

    इस समझौते के तहत भारत ने भी 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से आने वाले 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों—जैसे डेयरी, चाय, कॉफी, रबर और तंबाकू—को किसी भी रियायत से बाहर रखा है ताकि घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।

    इसके अलावा सोना-चांदी, आभूषण और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों पर भी सीमित या कोटा आधारित व्यवस्था लागू की गई है। सरकार का मानना है कि यह संतुलित समझौता भारत के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक व्यापार को मजबूती देगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत की सेवाक्षेत्र अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा, क्योंकि ओमान का आयात बाजार बड़ा और विविध है, जो भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खोल सकता है।

  • मारुति सुजुकी की रिकॉर्ड बिक्री, मई में 2.43 लाख के करीब पहुंचा आंकड़ा

    मारुति सुजुकी की रिकॉर्ड बिक्री, मई में 2.43 लाख के करीब पहुंचा आंकड़ा


    नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने मई में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कुल 2,42,688 वाहनों की बिक्री दर्ज की है। यह कंपनी के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक मासिक बिक्री है, जिसने अप्रैल में बने पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    कंपनी के अनुसार, मई 2025 की तुलना में इस साल मई में कुल बिक्री में लगभग 34.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 1,80,077 यूनिट्स था।

    घरेलू बाजार में कंपनी ने 1,93,535 वाहनों की बिक्री की, जो पिछले वर्ष के 1,38,690 यूनिट्स की तुलना में लगभग 39 प्रतिशत अधिक है। वहीं, निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स तक पहुंच गया। इसके अलावा अन्य ऑटोमोबाइल कंपनियों को 7,239 वाहनों की आपूर्ति की गई।

    मारुति के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट, जिसमें हैचबैक, सेडान, वैन और SUV शामिल हैं, ने इस वृद्धि में सबसे अहम भूमिका निभाई। इस श्रेणी में कुल 1,90,337 वाहन बेचे गए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1,35,962 था।

    SUV और यूटिलिटी वाहनों की मांग में भी तेज उछाल देखा गया। ब्रेजा, फ्रॉन्क्स, जिम्नी, ग्रैंड विटारा, अर्टिगा, XL6 और इनविक्टो जैसे मॉडलों की बिक्री 44.4 प्रतिशत बढ़कर 79,267 यूनिट्स तक पहुंच गई।

    छोटे कार सेगमेंट में भी मजबूत वृद्धि दर्ज हुई, जहां ऑल्टो और एस-प्रेसो की बिक्री दोगुने से अधिक होकर 16,275 यूनिट्स हो गई।

    कंपनी का निर्यात भी बढ़कर 41,914 यूनिट्स पर पहुंच गया, जो पिछले साल मई में 31,219 यूनिट्स था। कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में भी मामूली बढ़त दर्ज की गई।

    मारुति सुजुकी ने इससे पहले अप्रैल में भी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी और लगातार मजबूत मांग के चलते कंपनी का प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है।

    कंपनी भविष्य में लॉजिस्टिक्स को और अधिक कुशल बनाने के लिए रेल परिवहन का उपयोग बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके तहत 2030-31 तक वाहनों की ढुलाई में रेल हिस्सेदारी 35 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

    इसके अलावा कंपनी ने संकेत दिए हैं कि कच्चे माल और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण जून 2026 से कई मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।