Category: Economy

  • ग्लोबल तनाव का असर! CAIT ने सरकार से मांगी राहत, इनपुट लागत कंट्रोल करने की अपील

    ग्लोबल तनाव का असर! CAIT ने सरकार से मांगी राहत, इनपुट लागत कंट्रोल करने की अपील

    नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश के व्यापारिक संगठनों ने चिंता जतानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और छोटे व्यापारियों के लिए त्वरित राहत उपाय लागू करे। संगठन का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर भारत के व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और लागत संरचना पर पड़ रहा है।

    क्रेडिट और लिक्विडिटी बढ़ाने की मांग

    CAIT ने सरकार से विशेष क्रेडिट गारंटी लाइन स्कीम शुरू करने की मांग की है, जिससे छोटे व्यवसायों को लिक्विडिटी सपोर्ट मिल सके। इसके साथ ही MSME सेक्टर को राहत देने के लिए लोन चुकाने की समयसीमा बढ़ाने की भी अपील की गई है। संगठन का मानना है कि मौजूदा हालात में नकदी की उपलब्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि कारोबार प्रभावित न हो।

    इनपुट लागत और ईंधन कीमतों पर नजर जरूरी

    संगठन ने ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत पर भी चिंता जताई है। CAIT ने सरकार से इन लागतों की बारीकी से निगरानी और स्थिरीकरण के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों के लिए ब्याज सब्सिडी, बीमा सहायता और निर्यातकों के लिए तेजी से रिफंड की सुविधा देने की भी मांग की गई है।

    सरकार को लिखा गया पत्र, त्वरित कार्रवाई की अपील

    CAIT के महासचिव और सांसद Praveen Khandelwal ने वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर इन मुद्दों को उठाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ सकता है।

    ‘वेस्ट एशिया टास्क फोर्स’ बनाने का सुझाव

    खंडेलवाल ने एक विशेष ‘पश्चिम एशिया प्रभाव आकलन एवं प्रतिक्रिया कार्य बल’ बनाने का सुझाव भी दिया है। इसमें प्रमुख मंत्रालयों, Reserve Bank of India, व्यापार संगठनों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों का लगातार आकलन कर समय-समय पर नीतिगत सुझाव देना होगा।

    आपूर्ति श्रृंखला और लागत दबाव पर बढ़ती चिंता

    पत्र में कहा गया है कि मौजूदा तनाव के कारण इनपुट लागत बढ़ रही है, सप्लाई चेन बाधित हो रही है और कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और संचालन पर पड़ सकता है, खासकर छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है।

    सरकार के प्रयासों की सराहना भी

    हालांकि CAIT ने Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी की। संगठन ने कहा कि सप्लाई सोर्स का विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और जरूरी वस्तुओं की निगरानी जैसे कदमों से बाजार में स्थिरता बनी हुई है और व्यापार जगत का भरोसा कायम है।

    समय रहते कदम जरूरी

    कुल मिलाकर, CAIT का मानना है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में सरकार को सक्रिय और सतर्क रहकर छोटे व्यवसायों के लिए राहत उपाय लागू करने चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था की गति बनी रहे।

  • भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली

    भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली


    नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ खुला। सुबह करीब 9:17 बजे BSE Sensex 241 अंक यानी 0.33% की गिरावट के साथ 73,078.49 पर और Nifty 50 84.70 अंक यानी 0.37% की कमजोरी के साथ 22,628.40 पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखा, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा।

    फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव

    इस गिरावट की अगुवाई फार्मा शेयरों ने की। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1% तक लुढ़क गया, जिससे यह टॉप लूजर सेक्टर बना। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, मीडिया, प्राइवेट बैंक, रियल्टी, डिफेंस और इंफ्रा सेक्टरों में भी बिकवाली देखने को मिली। यह दर्शाता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव बना हुआ है।

    आईटी और मेटल स्टॉक्स ने दी थोड़ी राहत

    हालांकि, पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। आईटी, मेटल और पीएसयू बैंक सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में ट्रेंट, टाइटन, पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयर शामिल रहे। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में

    लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.59% गिरकर 53,384 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.64% गिरकर 15,549 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का माहौल बना हुआ है।

    वैश्विक तनाव का असर, निवेशकों में सतर्कता

    बाजार की इस गिरावट के पीछे प्रमुख वजह वैश्विक तनाव को माना जा रहा है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिख रहा है। निवेशक जोखिम से बचने के मूड में नजर आ रहे हैं, जिससे बिकवाली बढ़ रही है।

    एशियाई और अमेरिकी बाजारों का मिला-जुला संकेत

    एशियाई बाजारों में Tokyo और Seoul के बाजार हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता में गिरावट देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

    कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव

    कमोडिटी बाजार की बात करें तो कच्चे तेल में मिलाजुला रुख देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड हल्की तेजी के साथ 109.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड में गिरावट रही। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है।

    दबाव में बाजार, आगे भी रह सकती है उतार-चढ़ाव की स्थिति

    कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत कमजोर नोट पर की है। वैश्विक तनाव, महंगाई और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • सर्विस सेक्टर में उछाल! ग्लोबल डिमांड से मार्च में बढ़ी गतिविधियां

    सर्विस सेक्टर में उछाल! ग्लोबल डिमांड से मार्च में बढ़ी गतिविधियां


    नई दिल्ली। भारत की सेवा अर्थव्यवस्था ने मार्च महीने में मजबूती के संकेत दिए हैं। वैश्विक मांग में सुधार के चलते सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में इजाफा हुआ है, हालांकि घरेलू नए ऑर्डर्स की रफ्तार कुछ धीमी जरूर पड़ी है। S&P Global द्वारा जारी HSBC इंडिया सर्विसेज PMI रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में सर्विसेज PMI 57.5 दर्ज किया गया, जो इसके दीर्घकालिक औसत 54.4 से काफी ऊपर है। यह संकेत देता है कि सेक्टर में विस्तार जारी है और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

    विदेशी ऑर्डर्स ने बढ़ाया कारोबार, घरेलू मांग थोड़ी सुस्त

    रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स में तेज वृद्धि ने सर्विस सेक्टर को मजबूत सपोर्ट दिया। हालांकि, घरेलू स्तर पर नए बिजनेस की ग्रोथ में नरमी देखी गई। इसके पीछे वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार की बदलती परिस्थितियों का असर माना जा रहा है। खासतौर पर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर मांग, पर्यटन और बिजनेस माहौल पर पड़ा है, जिससे उत्पादन की रफ्तार सीमित हुई।

    रोजगार में तेजी, कंपनियों का भरोसा मजबूत

    एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि कंपनियों ने मार्च में रोजगार बढ़ाने की रफ्तार तेज की। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के मध्य के बाद से यह सबसे तेज भर्ती देखी गई है। इतना ही नहीं, करीब 12 वर्षों में उत्पादन को लेकर सबसे मजबूत आउटलुक भी सामने आया है। इससे साफ है कि कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी हैं और विस्तार की योजनाएं बना रही हैं।

    चार में से तीन प्रमुख सेक्टरों में धीमी बिक्री

    सेवा क्षेत्र के चार प्रमुख हिस्सों—वित्त एवं बीमा, रियल एस्टेट एवं प्रोफेशनल सर्विसेज और ट्रांसपोर्ट, सूचना एवं संचार—में बिक्री की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही। इससे संकेत मिलता है कि सेक्टर में ग्रोथ तो है, लेकिन यह व्यापक रूप से समान नहीं है और कुछ हिस्सों में दबाव बना हुआ है।

    महंगाई का दबाव बढ़ा, कीमतों में उछाल

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जून 2022 के बाद से इनपुट लागत में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसके चलते सर्विसेज की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई और मार्च में चार्ज किए जाने वाले शुल्क सात महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। यानी, कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

    चुनौतियों के बीच मजबूती दिखा रहा सर्विस सेक्टर

    कुल मिलाकर, भारतीय सर्विस सेक्टर ने मार्च में वैश्विक मांग के दम पर अच्छी वृद्धि दर्ज की है, लेकिन घरेलू मांग और महंगाई जैसे कारक आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी कंपनियों का बढ़ता भरोसा और रोजगार में सुधार इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

  • स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश! मेसाबी मेटालिक्स ने जुटाए 150 मिलियन डॉलर

    स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश! मेसाबी मेटालिक्स ने जुटाए 150 मिलियन डॉलर


    नई दिल्ली।एस्सार समूह द्वारा समर्थित मेसाबी मेटालिक्स ने अमेरिकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने घोषणा की है कि उसे मैक्वेरी ग्रुप से 150 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है। यह निवेश मिनेसोटा के नैशवॉक में बन रही उसकी डायरेक्ट रिडक्शन (डीआर) ग्रेड लौह अयस्क खदान और पेलेट संयंत्र परियोजना को गति देगा, जिसके 2026 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है। यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब अमेरिका अपनी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

    पहले से मिल रही पूंजी को मिला और बल

    यह नई फंडिंग मेसाबी मेटालिक्स के लिए पहले से जारी निवेश प्रवाह को और मजबूत करती है। इससे पहले कंपनी ने Breakwall Capital के साथ 520 मिलियन डॉलर की सीनियर सिक्योर्ड क्रेडिट फैसिलिटी की घोषणा की थी। इसके अलावा, कंपनी को Export-Import Bank of the United States से भी समर्थन मिल चुका है, जो इस परियोजना के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। इन निवेशों से साफ है कि वैश्विक निवेशक इस प्रोजेक्ट की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे हैं।

    अमेरिकी इस्पात सेक्टर के लिए गेमचेंजर प्रोजेक्ट

    मेसाबी मेटालिक्स की यह परियोजना अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश में उच्च गुणवत्ता वाले डीआर-ग्रेड लौह अयस्क का घरेलू स्रोत तैयार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इससे न केवल इस्पात उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपबिल्डिंग और रक्षा जैसे क्षेत्रों को भी फायदा होगा। खासकर ऐसे समय में, जब अमेरिका वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    2.5 बिलियन डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट, हजारों को रोजगार

    उत्तरी मिनेसोटा में 16,000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली यह परियोजना करीब 2.5 बिलियन डॉलर की लागत से तैयार की जा रही है। वर्तमान में 800 से अधिक श्रमिक इस साइट पर काम कर रहे हैं, जिससे यह मिनेसोटा के इतिहास में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में शामिल हो गई है। एस्सार समूह पहले ही इस प्रोजेक्ट में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का इक्विटी निवेश कर चुका है, जो इसकी दीर्घकालिक रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।

    कंपनी और निवेशकों ने जताया भरोसा

    मेसाबी मेटालिक्स के सीईओ जो ब्रोकिंग ने इस फंडिंग को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही वित्तीय साझेदारियां इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और संभावनाओं पर बढ़ते विश्वास को दिखाती हैं। वहीं मैक्वेरी ग्रुप के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक माइक बर्न्स ने कहा कि उनकी कंपनी का एस्सार समूह के साथ पुराना संबंध रहा है और वे अमेरिका में इस परियोजना के साथ जुड़कर इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका

    आरबीआई की सख्ती से बैंक शेयरों पर दबाव, 95 अरब डॉलर घटा मार्केट कैप; आगे और गिरावट की आशंका


    मुंबई। भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया सख्त नीति और रुपये को संभालने के प्रयासों का असर बैंकिंग शेयरों पर दिखने लगा है। पिछले कुछ हफ्तों में भारतीय बैंकों की मार्केट वैल्यू करीब 95 अरब डॉलर घट गई है, जबकि विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह दबाव और बढ़ सकता है।

    रुपये को संभालने की कोशिश, बैंकों पर असर

    रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर पर जाने से रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप किया।

    इस कदम से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे बैंकों की कर्ज देने की क्षमता और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की निकासी

    आंकड़ों के मुताबिक मार्च के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने वित्तीय कंपनियों के शेयरों से लगभग 327 अरब रुपये (करीब 3.5 अरब डॉलर) निकाल लिए। इसी दौरान बैंकिंग इंडेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह बियर मार्केट की सीमा (20% गिरावट) के करीब पहुंच गया।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    क्रांति बथिनी का कहना है कि मौद्रिक नीति के सख्त बने रहने से बैंक स्टॉक्स पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि गिरावट के बाद इन शेयरों के वैल्यूएशन आकर्षक होने की बात भी उन्होंने कही।

    पूरे बाजार पर असर का खतरा

    रिपोर्ट्स के अनुसार बैंकिंग शेयर लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर के भारतीय शेयर बाजार का करीब एक-तिहाई हिस्सा हैं। ऐसे में बैंक शेयरों में कमजोरी बनी रहती है तो इसका असर व्यापक बाजार पर पड़ सकता है।

    उम्मीद की किरण भी
    कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत रहने से बैंकिंग सेक्टर संभल सकता है। फिलहाल बैंकिंग इंडेक्स करीब 1.5 गुना वन-ईयर फॉरवर्ड प्राइस-टू-बुक पर ट्रेड कर रहा है, जो 2020 के बाद निचले स्तरों में है। Citibank ने भी सरकारी बैंकों की तुलना में निजी बैंकों को प्राथमिकता देना शुरू किया है।

    आगे का खतरा

    रिपोर्ट्स के मुताबिक Jefferies का अनुमान है कि करेंसी ट्रेड्स पर बैंकों को करीब 50 अरब रुपये तक का नुकसान हो सकता है। वहीं Fitch Ratings के अनुसार सख्त वित्तीय हालात से बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 20-30 बेसिस प्वाइंट तक घट सकता है।
    रजत अग्रवाल ने कहा कि हाल की तेज क्रेडिट ग्रोथ पर वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे कारकों का असर देखने लायक होगा।
    कुल मिलाकर, आरबीआई की सख्ती, विदेशी निवेश की निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते बैंकिंग सेक्टर पर निकट भविष्य में दबाव बना रह सकता है, हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है।

  • सरकारी तेल कंपनियों ने घाटे से निपटने उठाया कदम, रिफाइनरियों से सस्ते दाम पर खरीदेंगी ईंधन

    सरकारी तेल कंपनियों ने घाटे से निपटने उठाया कदम, रिफाइनरियों से सस्ते दाम पर खरीदेंगी ईंधन

    नई दिल्ली। ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) रिफाइनरियों से पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और केरोसिन को रियायती दरों पर खरीदेंगी। यह कदम घाटे की भरपाई के लिए उठाया गया है और यह पहली बार है जब कीमत नियंत्रण के बाद ऐसा किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ओएमसी ने 26 मार्च को ऐसी दरें तय की हैं, जो आयात लागत से 60 रुपये प्रति लीटर तक कम हैं।

    रियायती दरें 16 मार्च से प्रभावी
    ओएमसी की ये रियायती दरें 16 मार्च से लागू मानी जाएंगी। पश्चिम एशिया में संघर्ष से पहले कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ, जिससे होने वाले नुकसान को ओएमसी को खुद वहन करना पड़ रहा है।

    ईंधन पर छूट के बाद आरटीपी में कमी
    मार्च के दूसरे पखवाड़े में डीजल पर 22,342 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट दी गई थी, जिससे आरटीपी 85,349 रुपये से घटाकर 63,007 रुपये प्रति किलोलीटर किया गया। अप्रैल के पहले पखवाड़े के लिए डीजल पर छूट 60,239 रुपये प्रति किलोलीटर रखी गई है, ताकि आरटीपी 1,46,243 रुपये से घटाकर 86,004 रुपये प्रति किलोलीटर किया जा सके।

    विमान ईंधन (एटीएफ) पर 50,564 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी को 1,27,486 रुपये से घटाकर 76,923 रुपये प्रति किलोलीटर किया गया।

    केरोसिन पर 46,311 रुपये प्रति किलोलीटर की छूट के बाद आरटीपी 1,23,845 रुपये से घटाकर 77,534 रुपये प्रति किलोलीटर तय किया गया है।

  • शेयर बाजार पर नजर! RBI पॉलिसी, ग्लोबल टेंशन और क्रूड ऑयल की चाल से तय होगी दिशा

    शेयर बाजार पर नजर! RBI पॉलिसी, ग्लोबल टेंशन और क्रूड ऑयल की चाल से तय होगी दिशा


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होगा। आरबीआई मौद्रिक नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की चाल से शेयर बाजार की दिशा तय होगी।

    ब्याज दरों की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति (आरबीआई-एमपीसी) की बैठक 6-8 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम उच्चतम स्तर पर बने हुए हैं, जिससे महंगाई को लेकर दुनियाभर में चिंताएं बढ़ रही हैं।

    अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध भी शेयर बाजार के लिए अगले हफ्ते एक अहम फैक्टर होगा, क्योंकि युद्ध का प्रभाव अब दुनिया की आपूर्ति श्रृंख्लाओं पर दिखाई देने लगा है। ऐसे में इस युद्ध से जुड़े अपटेड आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार के लिए अहम होंगे।

    मौजूदा समय में कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। बीते एक महीने में इसमें 34 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आने वाले हफ्ते में कच्चे तेल की चाल पर निवेशकों की निगाहें बनी रहेंगी।

    बीते हफ्ते शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ था। इस दौरान सेंसेक्स 1,953.90 अंक या 2.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,319.55 और निफ्टी 593.35 अंक या 2.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,713 पर बंद हुआ। यह लगातार छठवां हफ्ता था, जब शेयर बाजार में गिरावट देखी गई।

    सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक (5.21 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (4.06 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (4.04 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (3.87 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (3.84 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.27 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (2.90 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (2.89 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे।

    इस दौरान केवल निफ्टी आईटी (2.60 प्रतिशत) और निफ्टी मेटल (1.01 प्रतिशत) ही हरे निशान में बंद हुए।

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.05 अंक या 1.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,650.50 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,654 अंक या 2.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53,677.05 पर बंद हुआ।

  • फार्मा सेक्टर को मिलेगी नई ताकत! सरकार बढ़ाएगी निर्यात और सप्लाई चेन क्षमता

    फार्मा सेक्टर को मिलेगी नई ताकत! सरकार बढ़ाएगी निर्यात और सप्लाई चेन क्षमता


    नई दिल्ली।  तेलंगाना की राजधानी में फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर पर ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया, जिसको लेकर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मीडिया से बात की। इस दौरान राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘चिंतन शिविर’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर गहन मंथन करना है। इस पहल के तहत सेक्टर से जुड़ी चुनौतियों को समझते हुए उनके समाधान और भविष्य की स्पष्ट दिशा तय की जा रही है।

    वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि यह मंच केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकार, उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए ठोस रणनीति तैयार की जाती है। खासतौर पर फार्मा सेक्टर के लिए यह अहम है, क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और तेजी से विकसित होता क्षेत्र है।

    अमेरिका द्वारा फार्मास्युटिकल सेक्टर पर लगाए गए संभावित टैरिफ को लेकर अग्रवाल ने कहा कि शुरुआती समझ के मुताबिक भारतीय जेनेरिक दवाएं इन टैरिफ से बाहर हैं। ऐसे में भारत के फार्मा निर्यात पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, कुछ इनोवेटिव या पेटेंटेड दवाओं पर सीमित प्रभाव पड़ सकता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है। यदि किसी भी सेगमेंट में भारतीय उद्योग को दिक्कत आती है, तो उसे इस समझौते के तहत उठाया जाएगा और समाधान खोजा जाएगा।

    अग्रवाल ने आगे कहा कि भारत का फार्मा सेक्टर मजबूत स्थिति में है, और केंद्र सरकार इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए लगातार नए बाजारों और उत्पादों पर ध्यान दे रही है। पिछले 5-6 वर्षों में भारत ने 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किए हैं, जो करीब 38 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं। इनका कुल आर्थिक आकार 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है।

    अग्रवाल के मुताबिक, ये समझौते भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेंगे, बाजारों में विविधता लाएंगे और घरेलू उद्योग को मजबूत करेंगे। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट अभी कुछ ही हफ्तों पुराना है, इसलिए इसके दीर्घकालिक प्रभाव का अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि, सरकार इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर रही है।

    वाणिज्य सचिव ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी बाहरी चुनौतियां समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन भारत ने हर बार इनसे निपटते हुए आगे बढ़ने की क्षमता दिखाई है।

    अग्रवाल के अनुसार, करीब 60 अरब डॉलर के आकार वाला भारत का फार्मा उद्योग अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, आधुनिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। सरकार का लक्ष्य है कि बायोसिमिलर, बायोलॉजिक्स और इनोवेटिव दवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाए।

    अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल दवाओं की कीमतों पर किसी बड़े असर के संकेत नहीं हैं। लेकिन अगर भविष्य में कोई समस्या आती है, तो सरकार और उद्योग मिलकर उसका समाधान निकालेंगे।

    वाणिज्य सचिव ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि दवाओं की सप्लाई किसी भी हाल में बाधित न हो। सरकार और उद्योग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर दवाओं की उपलब्धता बनी रहे और भारत का फार्मा सेक्टर अपनी विकास की राह पर आगे बढ़ता रहे।

  • क्रूड के रेट आसमान पर… भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम

    क्रूड के रेट आसमान पर… भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम


    नई दिल्ली।
    सरकारी ऑयल कंपनियों (Government Oil Companies) ने आज रविवार को एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price ) में कोई बदलाव नहीं किया है। तेल कंपनियों (Oil Companies) ने पुरानी कीमतों को बरकरार रखा है। बता दें, 1 अप्रैल को Shell India ने पेट्रोल के रेट में 7.41 रुपये और डीजल के रेट में 25 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है।


    वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के रेट

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों में पर देखने को मिल रहा है। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुई है। इसी रास्ते से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। लेकिन अब यह बाधित होने के बाद कच्चे तेल के रेट में जोरदार इजाफा देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का रेट 109 डॉलर प्रति बैरल को क्रॉस तक पहुंच गया। युद्ध शुरू होने से पहले रेट 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था।


    आज पेट्रोल का क्या है रेट?

    – नई दिल्ली में – 94.72
    – कोलकाता – 104.21
    – चेन्नई – 100.75
    – अहमदाबाद – 94.49
    – बेंगलुरू – 102.92
    – हैदराबाद – 107.46
    – जयपुर – 104.72
    – लखनऊ – 94.69
    – पुणे – 104.04
    – चंडीगढ़ – 94.30
    – इंदौर – 106.48
    – पटना – 105.58
    – सूरत – 95
    – नाशिक – 95.50


    आज डीजल का क्या है रेट?

    – दिल्ली – 87.62
    – मुंबई – 92.15
    – चेन्नई – 92.34
    – अहमदाबाद – 90.17
    – बेंगलुरू – 89.02
    – हैदराबाद – 95.70
    – जयपुर – 90.21
    – लखनऊ – 87.80
    – चंडीगढ़ – 82.45
    – इंदौर – 91.88
    – पटना – 93.80
    – सूरत – 89
    – नाशिक – 89.50


    प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हुआ था इजाफा

    1 अप्रैल को इंडियन ऑयल ने XP100 पेट्रोल के रेट में 11 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। जिसके बाद इसका रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर को क्रॉस कर गया था। प्रीमियम डीजल वैरिएंट एक्सट्रा ग्रीन की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला है। यह अब 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।


    नायरा के बाद Shell India ने भी बढ़ाया रेट

    प्राइवेट कंपनियों ने तेल की कीमतों में इजाफा शुरू कर दिया है। नयारा के बाद Shell India ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। पेट्रोल के रेट में कंपनी ने 7.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 25.01 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।

  • पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, सोने की खरीद पर भी लगी सख्ती: आज का पूरा अपडेट

    पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, सोने की खरीद पर भी लगी सख्ती: आज का पूरा अपडेट


    नई दिल्ली। 4 अप्रैल 2026 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी कर दिए हैं। देश के ज्यादातर बड़े शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिली है। हालांकि, कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

    पेट्रोल के दाम
    दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और मुंबई में ₹103.54 प्रति लीटर पर स्थिर है। कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
    नोएडा, मुजफ्फरपुर और रांची जैसे कुछ शहरों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    डीजल की कीमतों में स्थिरता
    डीजल के दाम भी ज्यादातर शहरों में स्थिर रहे। दिल्ली में डीजल ₹87.67 और मुंबई में ₹90.03 प्रति लीटर मिल रहा है। कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी और गिरावट जरूर देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार स्थिर बना हुआ है।

    कीमतें क्यों बदलती हैं?
    पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (Excise Duty और VAT) इसी वजह से हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं।

    सरकार का बड़ा फैसला: सोने की खरीद पर नए नियम
    सरकार अब सोने की खरीदारी से जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सोने की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब हर सोने के गहने पर 6 अंकों का HUID (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य होगा। यह कोड एक तरह का यूनिक पहचान नंबर है, जिसे दोबारा किसी अन्य गहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ग्राहक BIS CARE ऐप के जरिए इस कोड की जांच कर सकते हैं ताकि सोने की असलियत की पुष्टि हो सके। हॉलमार्किंग एक प्रमाणन प्रक्रिया है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सोना तय शुद्धता मानकों के अनुसार है। इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इससे नकली या कम गुणवत्ता वाले सोने की बिक्री पर रोक लगती है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलती है।

    नए नियमों के तहत क्या बदलाव होंगे?
    सोने पर HUID कोड का दोबारा इस्तेमाल नहीं होगा हर गहने की अलग पहचान होगी खरीदारी में पारदर्शिता बढ़ेगी धोखाधड़ी और नकली हॉलमार्क पर रोक लगेगी ₹2 लाख से अधिक खरीद पर PAN कार्ड जरूरी ₹10 लाख से अधिक खरीद पर PAN + आधार + आय प्रमाण जरूरी₹2 लाख से अधिक का कैश भुगतान नहीं किया जा सकेगा 4 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल के दामों में स्थिरता देखने को मिली है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। वहीं, सरकार के नए फैसले के तहत सोने की खरीद को और सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। आने वाले समय में ये नियम ग्राहकों के लिए सुरक्षा और भरोसे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।