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  • भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद

    भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में तेज़ी आने की उम्मीद है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत के निर्यात को बढ़ावा देना और द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर पर ले जाना है।

    सरकारी अनुमान के अनुसार, इस समझौते के लागू होने के बाद भारत का ओमान को वस्तु निर्यात अगले तीन वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वर्तमान में भारत का ओमान को निर्यात करीब 4.06 अरब डॉलर का है, जिसे बढ़ाकर 6 अरब डॉलर तक पहुंचाने और मध्य अवधि में 10 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।

    समझौते के तहत ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा दी है। इसका लाभ भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को मिलेगा। इससे जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता उद्योग, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

    वहीं भारत ने भी ओमान के लिए 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में रियायत दी है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान के भारत को होने वाले आयात का लगभग 94.81 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि उत्पाद, डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) को भी बड़ा लाभ मिल सकता है, क्योंकि ओमान का सेवा आयात लगभग 12.52 अरब डॉलर का है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

    भारत और ओमान ने इस समझौते पर पिछले वर्ष दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा भारत हाल के वर्षों में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार समझौतों को आगे बढ़ा चुका है।

  • मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    नई दिल्ली । मई माह में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था में मांग और कर अनुपालन की मजबूती को दर्शाती है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद भारत का सकल जीएसटी संग्रह लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर के करीब पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है जब कई वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं धीमी विकास दर और अनिश्चितता का सामना कर रही हैं।
    आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 1,94,184 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1,88,172 करोड़ रुपये की तुलना में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। वहीं शुद्ध जीएसटी राजस्व 1,66,904 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिसमें 3.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है। रिफंड को समायोजित करने के बाद राजस्व वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कर संग्रह प्रणाली की मजबूती का संकेत है।

    महीने के दौरान रिफंड की राशि भी बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये रही, हालांकि इसके बावजूद कुल राजस्व में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। घरेलू कर संग्रह में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन आयात से प्राप्त कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि ने कुल आंकड़ों को संतुलित बनाए रखा। आयात आधारित जीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर 59,654 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वैश्विक व्यापार गतिविधियों में मजबूती और आयात मांग में सुधार का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति घरेलू खपत और औद्योगिक गतिविधियों में निरंतरता को दर्शाती है।

    वहीं दूसरी ओर घरेलू जीएसटी संग्रह 1,34,530 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 2.6 प्रतिशत की कमी देखी गई, लेकिन सेवा क्षेत्र और वस्तु श्रेणियों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। सेवा क्षेत्र में 22.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि और वस्तु श्रेणियों में सकारात्मक रुझान यह दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत आधारित विकास मॉडल मजबूत स्थिति में है। सभी प्रमुख सेवा क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई, जो आर्थिक गतिविधियों की व्यापकता को दर्शाता है।

    राज्यों के स्तर पर भी जीएसटी संग्रह में विविध प्रदर्शन देखने को मिला। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्यों में कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से केरल और हरियाणा जैसे राज्यों ने दोहरे अंकों में वृद्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है। यह संकेत देता है कि राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं में भी गतिविधियां तेज हो रही हैं और कर आधार का विस्तार हो रहा है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में कुल सकल जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में शुद्ध राजस्व में भी 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल माह में भी रिकॉर्ड संग्रह देखने को मिला था, जो यह दर्शाता है कि लगातार दो महीनों से राजस्व वृद्धि का रुझान मजबूत बना हुआ है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन वित्त वर्ष के निर्धारित कर लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा और देश की आर्थिक स्थिरता को और मजबूत करेगा।

  • भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मई में बढ़कर 55 पर, नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज़ी से उद्योग गतिविधियों में मजबूती

    भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मई में बढ़कर 55 पर, नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज़ी से उद्योग गतिविधियों में मजबूती

    नई दिल्ली । मई में भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसमें एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 55.0 के स्तर पर पहुंच गया है। यह अप्रैल के 54.7 और शुरुआती अनुमान 54.3 से अधिक है, जो औद्योगिक गतिविधियों में लगातार सुधार का संकेत देता है। नए ऑर्डरों, उत्पादन गतिविधियों और खरीद में आई तेज़ वृद्धि ने इस सुधार को प्रमुख रूप से समर्थन दिया है, जिसके चलते कंपनियों ने भविष्य की मांग को देखते हुए स्टॉक जमा करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार मई का प्रदर्शन पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत माना जा रहा है, जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर और व्यापक रिकवरी की ओर इशारा करता है। देश के कई हिस्सों, जिनमें मध्य प्रदेश सहित विभिन्न औद्योगिक केंद्र शामिल हैं, वहां भी उत्पादन गतिविधियों में सुधार का रुझान देखा गया है।

    सर्वेक्षण के अनुसार इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स सेगमेंट में वृद्धि उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की तुलना में अधिक तेज रही, जिससे औद्योगिक उत्पादन के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू मांग इस वृद्धि का मुख्य आधार बनी हुई है, जबकि निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर कुछ धीमी जरूर हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों से नए ऑर्डरों की लगातार प्राप्ति ने संतुलन बनाए रखा है।

    एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कुछ देशों से भी भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है, जिससे निर्यात आधारित गतिविधियों को समर्थन मिला है। लागत के मोर्चे पर कच्चे माल, ऊर्जा, ईंधन और परिवहन खर्चों में वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की तुलना में अधिक है। यह वृद्धि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव का परिणाम मानी जा रही है।

    हालांकि तैयार उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिससे कंपनियों के लाभ मार्जिन पर कुछ दबाव बनने की संभावना जताई जा रही है। उत्पादन और नए ऑर्डरों में आई तेज़ी फरवरी के बाद सबसे अधिक दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि उद्योगों में मांग का स्तर मजबूत बना हुआ है।

    उद्योग जगत के अनुसार यह रुझान आने वाले महीनों में भी जारी रह सकता है, क्योंकि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश और निर्माण गतिविधियों में वृद्धि से औद्योगिक मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों का विश्वास स्तर भी मजबूत बना हुआ है, जो उत्पादन क्षमता विस्तार और नई भर्तियों की संभावनाओं को बढ़ा रहा है।

    हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण लागत दबाव बना रह सकता है, लेकिन घरेलू मांग इस दबाव को काफी हद तक संतुलित कर रही है। कुल मिलाकर मई के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत का विनिर्माण क्षेत्र स्थिर गति से विस्तार कर रहा है और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जिससे निवेश और उत्पादन दोनों को सकारात्मक दिशा मिल रही है।

  • एआई युग में केवल तकनीक नहीं, मजबूत बुनियादी ढांचा भी जरूरी; गौतम अदाणी ने रखी दीर्घकालिक विकास की दृष्टि

    एआई युग में केवल तकनीक नहीं, मजबूत बुनियादी ढांचा भी जरूरी; गौतम अदाणी ने रखी दीर्घकालिक विकास की दृष्टि

    नई दिल्ली । तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बीच अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत के विकास और भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। वित्त वर्ष 2026 के लिए जारी अपने वार्षिक संदेश में उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंटेलिजेंस अब अलग-अलग क्षेत्रों की अवधारणाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं और साथ मिलकर विकास की नई दिशा तय कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि इतिहास में अक्सर पहले भौतिक बुनियादी ढांचे का निर्माण होता था और उसके बाद तकनीकी प्रगति उस पर आधारित होकर आगे बढ़ती थी। लेकिन वर्तमान समय में यह प्रक्रिया बदल चुकी है। अब ऊर्जा, डेटा, कनेक्टिविटी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। किसी भी एआई प्रणाली के प्रभावी संचालन के लिए ऊर्जा, डेटा ट्रांसमिशन और मजबूत नेटवर्किंग अवसंरचना की आवश्यकता होती है। ऐसे में तकनीकी विकास और भौतिक ढांचे का निर्माण एक साथ आगे बढ़ना अनिवार्य हो गया है।

    गौतम अदाणी ने कहा कि भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त केवल उन संस्थानों को मिलेगी जो ऊर्जा, तकनीक, लॉजिस्टिक्स, कनेक्टिविटी और निष्पादन क्षमता को एकीकृत प्रणाली के रूप में विकसित करने में सफल होंगे। उनके अनुसार आने वाला दशक केवल नई तकनीकों का नहीं, बल्कि उन तकनीकों को संचालित करने वाले मजबूत बुनियादी ढांचे का भी होगा। यही कारण है कि दुनिया भर में तकनीकी नेतृत्व की दौड़ अब इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयारियों की दौड़ में भी बदलती दिखाई दे रही है।

    उन्होंने अपने समूह के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए निवेशों का उल्लेख करते हुए बताया कि ऊर्जा, ट्रांसमिशन, बंदरगाह, हवाई अड्डे, लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर और विनिर्माण क्षेत्र में बड़े स्तर पर विस्तार किया गया है। उनका कहना था कि इन क्षेत्रों को अलग-अलग व्यवसायों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक ऐसी परस्पर जुड़ी प्रणाली का हिस्सा हैं जो भविष्य की डिजिटल और भौतिक अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया इस समय ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और एआई आधारित तकनीकों की बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में जिन देशों के पास मजबूत ऊर्जा नेटवर्क, विश्वसनीय परिवहन व्यवस्था, उच्च क्षमता वाली डेटा संरचना और औद्योगिक उत्पादन क्षमता होगी, वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे निकल सकेंगे।

    भारत को लेकर उन्होंने विशेष आशावाद व्यक्त करते हुए कहा कि देश के पास एक अनूठा अवसर मौजूद है। कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तरह भारत को पुरानी प्रणालियों को बदलने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वह सीधे आधुनिक भौतिक और डिजिटल अवसंरचना को समानांतर रूप से विकसित कर सकता है। नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण क्षमता, बंदरगाह, हवाई अड्डे, डेटा सेंटर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसी व्यापक परिवर्तन का हिस्सा बन रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में केवल अधिक निर्माण करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी मजबूत भौतिक और डिजिटल नींव तैयार करना आवश्यक है जो देश को दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे ले जा सके। उनके अनुसार बुनियादी ढांचा किसी राष्ट्र को शक्ति देता है और इंटेलिजेंस उसे प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करती है। इन दोनों का प्रभावी संगम ही वैश्विक विकास के अगले चरण को परिभाषित करेगा और भारत इस परिवर्तन का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।

  • आम जनता को राहत, सरकार ने 30 ड्रग फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमत तय की, कंपनियों की मनमानी पर लगेगा अंकुश

    आम जनता को राहत, सरकार ने 30 ड्रग फॉर्मूलेशन की अधिकतम कीमत तय की, कंपनियों की मनमानी पर लगेगा अंकुश

    नई दिल्ली । आम जनता को राहत देने और आवश्यक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम के तहत 30 जरूरी ड्रग फॉर्मूलेशन की अधिकतम खुदरा कीमत तय कर दी गई है, जिससे अब दवा कंपनियां इन निर्धारित सीमाओं से अधिक कीमत नहीं वसूल सकेंगी। यह फैसला ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत लागू किया गया है और इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है।

    इस निर्णय के तहत पैन रिलीफ, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मल्टी-विटामिन और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं में उपयोग होने वाली दवाओं को शामिल किया गया है। सरकार का मानना है कि इन आवश्यक दवाओं की कीमतों में अनियंत्रित वृद्धि आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाती है, जिसे नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। इसी दिशा में यह कदम दवा बाजार में पारदर्शिता और संतुलन लाने के लिए उठाया गया है।

    नए नियमों के अनुसार इन 30 फॉर्मूलेशन की कीमतें अब एक निश्चित सीमा के भीतर रहेंगी और निर्माता कंपनियां इस तय सीमा से अधिक मूल्य नहीं जोड़ सकेंगी। हालांकि इन कीमतों में वस्तु एवं सेवा कर शामिल नहीं होगा, जिसे अलग से जोड़ा जा सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दवाओं के बेस प्राइस में किसी भी प्रकार की मनमानी बढ़ोतरी की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    उदाहरण के तौर पर विटामिन डी3 ओरल सॉल्यूशन की कीमत निर्धारित कर दी गई है, वहीं कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों से जुड़ी संयुक्त टैबलेट्स की कीमत भी नियंत्रित की गई है। इसी तरह डायबिटीज के उपचार में इस्तेमाल होने वाली मेटफॉर्मिन और विल्डाग्लिप्टिन जैसी दवाओं की कीमतों पर भी सीमा तय की गई है, जिससे मरीजों को नियमित उपचार में राहत मिल सके।

    सरकार की अधिसूचना के अनुसार सभी दवा विक्रेताओं और रिटेलर्स को अपने प्रतिष्ठानों पर दवाओं की मूल्य सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी, ताकि उपभोक्ता आसानी से निर्धारित कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकें। यह व्यवस्था उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने और बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। यदि कोई कंपनी या विक्रेता निर्धारित कीमत से अधिक शुल्क वसूलता पाया जाता है, तो उससे अतिरिक्त राशि ब्याज सहित वसूली जाएगी और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जीवन रक्षक और आवश्यक दवाएं हर नागरिक तक उचित मूल्य पर पहुंच सकें।

    इस निर्णय को स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदम दवा बाजार में स्थिरता लाने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने में भी मदद करेंगे।

  • देशभर में LPG उपभोक्ताओं को राहत जारी, घरेलू गैस सिलेंडर के दाम मार्च स्तर पर बरकरार, कल हो सकता है बड़ा फैसला

    देशभर में LPG उपभोक्ताओं को राहत जारी, घरेलू गैस सिलेंडर के दाम मार्च स्तर पर बरकरार, कल हो सकता है बड़ा फैसला

    नई दिल्ली । देशभर में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए 31 मई को जारी ताजा अपडेट में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को लेकर कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों की मासिक समीक्षा के बाद यह स्थिति सामने आई है कि फिलहाल घरेलू गैस की दरें मार्च माह के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना पड़ रहा है। हालांकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बदलाव को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों पर असर पड़ने की आशंका भी बनी हुई है।

    देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये दर्ज की गई है, जबकि मुंबई में यह 912.50 रुपये पर उपलब्ध है। कोलकाता में उपभोक्ताओं को 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये की दर पर सिलेंडर मिल रहा है। इसी तरह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में घरेलू सिलेंडर की कीमत 918.50 रुपये पर स्थिर बनी हुई है, जो राज्य के उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की स्थिति को दर्शाती है। लखनऊ, पटना और अन्य प्रमुख शहरों में भी दरों में स्थिरता देखी गई है, हालांकि कुछ शहरों में कीमतें 950 रुपये से अधिक के स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे क्षेत्रीय अंतर साफ नजर आता है।

    कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में हाल के दिनों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन घरेलू उपयोग वाले सिलेंडर में स्थिरता बनाए रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाएं भविष्य में LPG कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को दरों की समीक्षा करती हैं, और इसी क्रम में कल यानी 1 जून को एक नई समीक्षा की संभावना है, जो उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    पिछले कुछ महीनों में घरेलू LPG की कीमतों में सीमित बदलाव ही देखने को मिला है, जिसमें मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बाद से अब तक दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, जिससे आने वाले समय में घरेलू गैस की कीमतों पर दबाव बन सकता है।

    उपभोक्ताओं की नजर अब 1 जून की समीक्षा पर टिकी हुई है, क्योंकि हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियां नए रेट जारी करती हैं। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है तो घरेलू LPG कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल स्थिति यह है कि देशभर में रसोई गैस की कीमतें स्थिर हैं और उपभोक्ताओं को किसी तात्कालिक बढ़ोतरी से राहत मिली हुई है।

  • शहरों के लिए कौन सी EV बेहतर सौदा? Tata Tiago EV और MG Comet EV की कीमत, EMI और ऑन-रोड खर्च की पूरी तुलना

    शहरों के लिए कौन सी EV बेहतर सौदा? Tata Tiago EV और MG Comet EV की कीमत, EMI और ऑन-रोड खर्च की पूरी तुलना

    नई दिल्ली । भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है, जहां बढ़ती ईंधन कीमतों और शहरों में ट्रैफिक के दबाव के कारण लोग अब किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी बदलते बाजार में Tata Tiago EV और MG Comet EV दो ऐसी कारें हैं जो बजट सेगमेंट में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दोनों ही मॉडल कीमत, फीचर्स और फाइनेंस विकल्पों के आधार पर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन EMI और डाउन पेमेंट के लिहाज से किस कार को खरीदना ज्यादा समझदारी भरा सौदा साबित होगा, यह सवाल खरीदारों के बीच लगातार बना हुआ है।

    Tata Tiago EV की एक्स-शोरूम कीमत लगभग 6.99 लाख रुपये से शुरू होती है और RTO, इंश्योरेंस व अन्य चार्ज जोड़ने के बाद इसकी ऑन-रोड कीमत करीब 7.41 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। यदि ग्राहक 2 लाख रुपये का डाउन पेमेंट करता है और शेष राशि को 9 प्रतिशत ब्याज दर पर 4 साल के लिए फाइनेंस कराता है तो उसकी मासिक EMI लगभग 13,464 रुपये बनती है। वहीं 5 साल की अवधि चुनने पर यह EMI घटकर करीब 11,231 रुपये प्रति माह हो जाती है, जिससे मासिक बजट पर दबाव कुछ कम हो जाता है।

    दूसरी ओर MG Comet EV की एक्स-शोरूम कीमत लगभग 7.62 लाख रुपये है और ऑन-रोड कीमत करीब 8.07 लाख रुपये तक पहुंचती है। समान 2 लाख रुपये के डाउन पेमेंट और 9 प्रतिशत ब्याज दर पर 4 साल के लोन विकल्प में इसकी मासिक EMI लगभग 15,118 रुपये बनती है। अगर यही लोन 5 साल के लिए लिया जाए तो EMI घटकर करीब 12,611 रुपये प्रति माह के आसपास आ जाती है, लेकिन फिर भी यह Tiago EV की तुलना में अधिक रहती है।

    इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि EMI और कुल फाइनेंसिंग बोझ के मामले में Tata Tiago EV, MG Comet EV की तुलना में ज्यादा किफायती विकल्प साबित होती है। हालांकि, खरीद का निर्णय केवल EMI पर आधारित नहीं होना चाहिए क्योंकि दोनों गाड़ियों की उपयोगिता अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है।

    MG Comet EV एक कॉम्पैक्ट सिटी कार है, जो भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों और सीमित पार्किंग स्पेस के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसका छोटा आकार इसे आसान ड्राइविंग और पार्किंग का फायदा देता है, लेकिन इसमें जगह सीमित होने के कारण यह मुख्य रूप से छोटे परिवार या व्यक्तिगत उपयोग के लिए बेहतर विकल्प है। वहीं Tata Tiago EV एक हैचबैक कार के रूप में अधिक स्पेस, आराम और लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर संतुलन प्रदान करती है, जिससे यह फैमिली यूजर्स के बीच ज्यादा लोकप्रिय विकल्प बन जाती है।

  • होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा आर्थिक कदम, पेट्रोल-डीजल निर्यात शुल्क में बदलाव से वैश्विक तेल बाजार पर असर की उम्मीद

    होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा आर्थिक कदम, पेट्रोल-डीजल निर्यात शुल्क में बदलाव से वैश्विक तेल बाजार पर असर की उम्मीद

    नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव और होर्मुज क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े नियमों में अहम बदलाव करते हुए निर्यात शुल्क में संशोधन का निर्णय लिया है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव और घरेलू आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन पर नई दरें 1 जून से प्रभावी होंगी, जिससे ऊर्जा व्यापार और निर्यात नीति पर सीधा असर पड़ेगा।

    इस निर्णय के बाद पेट्रोल पर निर्यात शुल्क घटकर 1.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है, जबकि डीजल पर यह 13.5 रुपये प्रति लीटर रहेगा। विमानन टरबाइन ईंधन पर 9.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लागू किया गया है। यह बदलाव विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में लागू होगा और इसके तहत रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे कर ढांचे में आंशिक सरलता देखने को मिलेगी।

    सरकार का कहना है कि निर्यात शुल्क की समीक्षा हर पखवाड़े की जाती है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति स्थिति का आकलन शामिल होता है। पिछले संशोधन के बाद अब नई दरों की घोषणा मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखकर की गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर अनिश्चितता के चलते सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और किसी भी प्रकार का घरेलू संकट उत्पन्न न हो। इसी उद्देश्य से निर्यात नीति में समय-समय पर संशोधन किया जाता है ताकि घरेलू जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बना रहे।

    इससे पहले भी इसी वर्ष मार्च में निर्यात शुल्क प्रणाली को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करना और घरेलू खपत के लिए पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना था। मई में हुए पिछले संशोधन के बाद अब एक बार फिर नई दरों की घोषणा की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप मानी जा रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नीतिगत निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करते हैं और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। आने वाले समय में तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय हालात के आधार पर इस नीति में और बदलाव संभव हैं, क्योंकि सरकार हर पखवाड़े समीक्षा प्रक्रिया के जरिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखती है।

  • क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर हो सकता है बंद, बैंक नियमों को लेकर जानें अहम अपडेट

    क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर हो सकता है बंद, बैंक नियमों को लेकर जानें अहम अपडेट

    नई दिल्ली । आज के समय में क्रेडिट कार्ड वित्तीय लेन-देन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका सही तरीके से उपयोग न करना ग्राहकों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। कई लोग सुविधा के तौर पर क्रेडिट कार्ड लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक उसका उपयोग नहीं करते। ऐसी स्थिति में बैंक और वित्तीय संस्थान इसे निष्क्रिय मानकर बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार यदि किसी क्रेडिट कार्ड का उपयोग लगातार कई महीनों तक नहीं किया जाता है तो उसे “डेड कार्ड” की श्रेणी में रखा जा सकता है और बैंक उसे बंद भी कर सकते हैं।

    बैंकिंग नियमों के अनुसार आमतौर पर तीन से बारह महीने तक यदि किसी कार्ड पर कोई लेन-देन नहीं होता है तो उसे निष्क्रिय माना जाता है। इस दौरान यदि कार्ड से कोई खरीदारी, भुगतान, स्टेटमेंट जनरेशन या अन्य गतिविधि नहीं होती है तो बैंक उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कई मामलों में ग्राहक को सूचना दिए बिना भी कार्ड को निष्क्रिय किया जा सकता है, हालांकि अधिकांश बैंक पहले नोटिस जारी करते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्रेडिट कार्ड को सक्रिय बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि यह सीधे व्यक्ति के क्रेडिट इतिहास और क्रेडिट स्कोर से जुड़ा होता है। यदि कार्ड लंबे समय तक उपयोग में नहीं रहता है तो इसका असर क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ सकता है। इससे भविष्य में लोन या अन्य वित्तीय सेवाएं लेने में कठिनाई आ सकती है। क्रेडिट स्कोर को मजबूत बनाए रखने के लिए समय-समय पर कार्ड का उपयोग करना और उसका भुगतान समय पर करना जरूरी माना जाता है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई ग्राहक बारह महीने तक अपने क्रेडिट कार्ड का उपयोग नहीं करता है तो बैंक उसे निष्क्रिय मान सकता है। इसके अलावा कुछ बैंक छोटी गतिविधियों जैसे पिन परिवर्तन या स्टेटमेंट चेक करने को भी सक्रियता में शामिल करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से लेन-देन ही आधार माना जाता है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर छोटे लेन-देन कर अपने कार्ड को सक्रिय रखें।

    क्रेडिट कार्ड बंद होने का एक और बड़ा प्रभाव यह होता है कि इससे व्यक्ति की कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट भी कम हो जाती है। इसका सीधा असर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर पड़ता है, जो क्रेडिट स्कोर निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि यह अनुपात बिगड़ता है तो स्कोर में गिरावट आ सकती है।

    इसके अलावा बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन के लिए भी निष्क्रिय खातों और कार्डों की निगरानी की जाती है। बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके सिस्टम में केवल सक्रिय और उपयोग में आने वाले खाते ही बने रहें, जिससे धोखाधड़ी और अनावश्यक जोखिम को कम किया जा सके।

    अंततः यह स्पष्ट है कि क्रेडिट कार्ड केवल एक सुविधा नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। इसका समझदारी से उपयोग न केवल वित्तीय सुविधा देता है बल्कि आपके क्रेडिट इतिहास को भी मजबूत बनाता है। लंबे समय तक इसे निष्क्रिय छोड़ना भविष्य में वित्तीय समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए समय-समय पर इसका उपयोग आवश्यक माना जाता है।

  • वीकेंड पर कीमती धातुओं में नहीं दिखा बदलाव, सोमवार से फिर तय होगी बाजार की दिशा

    वीकेंड पर कीमती धातुओं में नहीं दिखा बदलाव, सोमवार से फिर तय होगी बाजार की दिशा

    नई दिल्ली । देश के सर्राफा बाजार में रविवार को सोने और चांदी की कीमतों में किसी प्रकार का बदलाव दर्ज नहीं किया गया। वीकेंड के चलते घरेलू बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज दोनों ही बंद रहे, जिसके कारण कीमतें पिछले कारोबारी सत्र के स्तर पर स्थिर बनी रहीं। हालांकि, चेन्नई जैसे कुछ प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जहां 24 कैरेट सोना 1,59,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुका है। अन्य महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में भी कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई के आसपास बनी हुई हैं, लेकिन उनमें हल्का अंतर देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने को प्राथमिकता दिए जाने के कारण इसकी कीमतों में दीर्घकालिक मजबूती देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतिगत अनिश्चितताओं का भी असर सोने की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है।

    चांदी की कीमतों में भी इस समय स्थिरता बनी हुई है। देश के प्रमुख बाजारों में चांदी का औसत भाव लगभग 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि कुछ औद्योगिक केंद्रों में यह 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया जा रहा है। औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार संकेतों के आधार पर चांदी की कीमतों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, लेकिन फिलहाल बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं है।

    जानकारों का मानना है कि वीकेंड पर कारोबार बंद रहने के कारण कीमतों में स्थिरता स्वाभाविक है। असली दिशा अब सोमवार को बाजार खुलने के बाद ही स्पष्ट होगी, जब अंतरराष्ट्रीय संकेतों के साथ घरेलू मांग और निवेश प्रवाह का प्रभाव सामने आएगा। खासकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आने वाले रोजगार और विकास संबंधी आंकड़े तथा वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    निवेश विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा समय में सोने में दीर्घकालिक निवेश को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूत स्थिति में है। हालांकि अल्पकालिक निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है, जिससे उन्हें सावधानी के साथ निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

    बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने और चांदी दोनों की कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है। वहीं यदि वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता आती है, तो कीमतों में हल्का दबाव भी संभव है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब अगले कारोबारी सप्ताह पर टिकी हुई है, जो कीमती धातुओं की दिशा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।