Category: Economy

  • आज का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की चाल निवेशकों के लिए जानिए क्या है रणनीति

    आज का शेयर बाजार आउटलुक ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की चाल निवेशकों के लिए जानिए क्या है रणनीति


    नई दिल्ली । आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है। निवेशकों की नजर सबसे पहले एशियाई बाजारों की चाल अमेरिकी बाजार के रुख विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिकवाली के आंकड़ों के साथ कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर जारी संकेत निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार में भी खरीदारी का माहौल बन सकता है। दूसरी ओर यदि वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ता है तो घरेलू बाजार में भी मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

    घरेलू स्तर पर कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर दबाव बन सकता है। ऐसे समय में निवेशकों की नजर बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा एफएमसीजी और मेटल सेक्टर के प्रमुख शेयरों पर बनी रहेगी।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं बिकवाली बढ़ने की स्थिति में प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही भारतीय रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार चढ़ाव भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेगा।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। वहीं अल्पकालिक निवेश करने वाले कारोबारियों को स्टॉप लॉस का पालन करते हुए जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बिना पर्याप्त जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करना नुकसानदायक हो सकता है।

    आज के कारोबारी सत्र में बैंकिंग वित्तीय सेवाएं आईटी और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। यदि इन क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख शेयरों में खरीदारी बनी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और कॉर्पोरेट घोषणाओं के आधार पर दिनभर बाजार की दिशा बदल सकती है।

    कुल मिलाकर आज का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए अवसर और सतर्कता दोनों लेकर आ सकता है। सही जानकारी धैर्य और संतुलित निवेश रणनीति अपनाकर बाजार की अस्थिरता के बीच भी बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि अफवाहों के बजाय प्रमाणिक जानकारी और मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन को आधार बनाकर ही निवेश संबंधी निर्णय लें।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, 3-4 महीने में साइनिंग की उम्मीद, जाने क्‍यों अटका समझौता?


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से लंबित ट्रेड डील अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, समझौते की शर्तों पर सहमति बन चुकी है और दस्तावेज भी तैयार हैं। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले तीन से चार महीनों के भीतर दोनों देशों के बीच इस अहम व्यापारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

    आखिर देरी क्यों हो रही है?
    मनीला में आयोजित आसियान (ASEAN) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर बताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील की शर्तें अंतिम रूप ले चुकी हैं। हालांकि, समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल अमेरिका में चल रही सेक्शन 301 (Section 301) ट्रेड जांच के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

    अधिकारी के मुताबिक, भारत सहित करीब 60 देशों से जुड़े मामलों की जांच इस प्रावधान के तहत चल रही है, जिसके नतीजे अगले दो से तीन सप्ताह में आने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद अमेरिका भारत समेत अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।

    क्या है सेक्शन 301?
    अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 के तहत सेक्शन 301 अमेरिका को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी देश की व्यापारिक नीतियों की जांच कर सके। यदि जांच में अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव या अनुचित व्यापारिक व्यवहार पाया जाता है तो अमेरिका उस देश पर व्यापारिक प्रतिबंध, अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) या अन्य कार्रवाई कर सकता है।

    हाल के दिनों में अमेरिका ने इसी प्रावधान के तहत ब्राजील और कनाडा पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ व्यापारिक वार्ता में भी इस प्रावधान का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकते हैं।

    टैरिफ भी बना बड़ी चुनौती
    भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता के दौरान टैरिफ का मुद्दा भी प्रमुख बाधाओं में शामिल रहा है। अमेरिका पहले ही कई देशों पर 12.5 प्रतिशत तक नए टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दे चुका है। इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने जेनेरिक दवाओं पर भी चरणबद्ध तरीके से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना की घोषणा की है। प्रस्ताव के अनुसार पहले दो वर्षों तक टैरिफ में राहत, उसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और फिर 200 प्रतिशत तक शुल्क लागू किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका सेक्शन 301 और टैरिफ नीति के जरिए अपनी शर्तों के अनुरूप समझौता करना चाहता है। वहीं भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह केवल ऐसे व्यापारिक समझौतों को स्वीकार करेगा, जो उसके राष्ट्रीय और आर्थिक हितों के अनुरूप हों।

  • लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के दूसरे ही कारोबारी दिन एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में मजबूत स्तर पर खुलने के बावजूद पूरे सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा और अंततः शेयर 600 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। इस गिरावट ने बाजार सहभागियों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, क्योंकि कंपनी ने एक दिन पहले ही प्रीमियम पर बाजार में प्रवेश किया था।

    कारोबार की शुरुआत में शेयर सकारात्मक स्तर पर खुला, लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें लगातार कमजोरी देखने को मिली। सत्र के दौरान शेयर निचले स्तर तक पहुंच गया और अंत में लगभग उसी दायरे में बंद हुआ, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार बंद होने तक निवेशकों की ओर से बिकवाली का दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नई सूचीबद्ध कंपनियों में शुरुआती दिनों में मुनाफावसूली के कारण इस तरह की अस्थिरता सामान्य मानी जाती है।

    कंपनी के शेयरों ने सूचीबद्ध होने के पहले दिन निर्गम मूल्य के मुकाबले प्रीमियम के साथ शुरुआत की थी। सकारात्मक लिस्टिंग के बाद निवेशकों में उत्साह देखा गया, लेकिन दूसरे दिन कुछ निवेशकों ने मुनाफा वसूलना उचित समझा, जिसका असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के शेयर में शुरुआती कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान मांग और आपूर्ति के आधार पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    इस बीच कंपनी के प्रमोटर भारतीय स्टेट बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोई योजना नहीं है। बैंक का कहना है कि सार्वजनिक निर्गम का उद्देश्य केवल कंपनी की विकास यात्रा में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना था, न कि अपनी हिस्सेदारी में कमी करना। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रमोटर कंपनी लंबे समय तक अपने निवेश और रणनीतिक भागीदारी को बनाए रखने के पक्ष में है।

    बैंक प्रबंधन ने यह भी कहा कि कंपनी की सूचीबद्धता उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक बाजार में आने से कंपनी की पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि होगी। इसके साथ ही मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस और पेशेवर प्रबंधन के आधार पर भविष्य में कंपनी के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं।

    प्रबंधन के अनुसार कंपनी ने सूचीबद्ध होने से पहले ही कॉरपोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों को अपनाया था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी साझेदार के साथ लंबे समय से चल रहा सहयोग कंपनी की कार्यप्रणाली और संचालन व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। यही कारण है कि कंपनी भविष्य में अपने कारोबार के विस्तार और निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के प्रदर्शन का आकलन केवल शुरुआती एक-दो कारोबारी सत्रों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। लंबी अवधि में कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन की रणनीति, उद्योग की संभावनाएं और समग्र बाजार परिस्थितियां शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की बजाय कंपनी के मूलभूत पक्षों और दीर्घकालिक विकास क्षमता पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

  • ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से ई10 मानक के अनुसार तैयार किए गए कुछ पुराने वाहनों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन को नुकसान पहुंचने या वाहन के बड़े पैमाने पर खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सरकार का कहना है कि इस विषय पर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते और उपलब्ध तकनीकी जानकारी इसके विपरीत संकेत देती है।

    सरकार के अनुसार ई10 मानक के अनुरूप तैयार किए गए पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में सामान्यतः लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है। हालांकि यह गिरावट सीमित मानी गई है और इसे वाहन की समग्र कार्यक्षमता पर गंभीर प्रभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इस बदलाव को केवल एथेनॉल मिश्रण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि माइलेज कई अन्य तकनीकी और परिचालन संबंधी कारणों से भी प्रभावित होता है।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज चालक की ड्राइविंग शैली, वाहन के नियमित रखरखाव, टायरों में सही हवा, व्हील अलाइनमेंट, इंजन की स्थिति और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसी अनेक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि किसी वाहन की ईंधन दक्षता में बदलाव दिखाई देता है तो उसके पीछे केवल ई20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने यह भी बताया कि ई20 पेट्रोल के कई तकनीकी लाभ हैं। इसमें पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक ऑक्टेन रेटिंग मिलती है, जिससे इंजन में बेहतर एंटी-नॉक प्रदर्शन प्राप्त होता है। इसके साथ ही ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन का संचालन अधिक स्मूथ रहता है और एक्सीलरेशन भी बेहतर महसूस हो सकता है। सरकार का मानना है कि इन विशेषताओं के कारण आधुनिक वाहनों के लिए ई20 मिश्रित ईंधन एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहा है।

    हाल के दिनों में ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इंजन खराब होने तथा वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसे कई दावे सामने आए थे। इन आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने दोहराया कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि ई20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन का इंजन व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ हो। सरकार का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी परीक्षण और अनुभव ऐसे दावों की पुष्टि नहीं करते।

    इसी क्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल ही में ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि यदि किसी वाहन को इस ईंधन से वास्तविक नुकसान हुआ हो तो उसका प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ई20 को लेकर कई भ्रामक दावे फैलाए जा रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करना है।

    सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी कारण ई20 पेट्रोल को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी परीक्षणों के आधार पर लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

  • बिजली कारोबार में अदाणी पावर की शानदार छलांग, पहली तिमाही में रिकॉर्ड मुनाफा, बढ़ी बिक्री और विस्तार योजनाओं से भविष्य को मिली नई रफ्तार

    बिजली कारोबार में अदाणी पावर की शानदार छलांग, पहली तिमाही में रिकॉर्ड मुनाफा, बढ़ी बिक्री और विस्तार योजनाओं से भविष्य को मिली नई रफ्तार

    नई दिल्ली । अदाणी समूह की प्रमुख ऊर्जा कंपनी अदाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए कारोबार के कई प्रमुख मानकों पर नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 47.2 प्रतिशत बढ़कर 4,867 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 3,305 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार परिचालन क्षमता में सुधार, वित्तीय लागत पर प्रभावी नियंत्रण और लगातार जारी पूंजीगत निवेश के कारण यह उल्लेखनीय वृद्धि संभव हो सकी।

    पहली तिमाही के दौरान कंपनी के कुल समेकित राजस्व में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी का राजस्व 26.6 प्रतिशत बढ़कर 17,936 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 14,167 करोड़ रुपये था। प्रबंधन का कहना है कि बिजली की बिक्री में बढ़ोतरी और बेहतर औसत टैरिफ के कारण आय में यह मजबूत वृद्धि देखने को मिली। देश में बिजली की लगातार बढ़ती मांग ने भी कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती प्रदान की।

    अदाणी पावर ने परिचालन लाभ के मोर्चे पर भी नया इतिहास रचा है। कंपनी का समेकित निरंतर ईबीआईटीडीए 21.6 प्रतिशत बढ़कर 6,983 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो अब तक का सबसे अधिक तिमाही ईबीआईटीडीए है। ईंधन लागत में वृद्धि के बावजूद प्रभावी लागत प्रबंधन, उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग और परिचालन दक्षता के कारण कंपनी यह उपलब्धि हासिल करने में सफल रही।

    बिजली उत्पादन और बिक्री के क्षेत्र में भी कंपनी ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। पहली तिमाही में बिजली बिक्री 16.9 प्रतिशत बढ़कर 28.8 बिलियन यूनिट हो गई, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 24.6 बिलियन यूनिट थी। कंपनी का कहना है कि उत्पादन क्षमता में विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों से लगातार बढ़ती मांग ने बिक्री को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    पावर परचेज एग्रीमेंट के तहत बिजली की बिक्री में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। इस श्रेणी में बिक्री 30.3 प्रतिशत बढ़कर 24.5 बिलियन यूनिट तक पहुंच गई। वहीं प्रति यूनिट औसत टैरिफ 8.5 प्रतिशत बढ़कर 5.95 रुपये हो गया। मर्चेंट और शॉर्ट-टर्म बाजार में भी कंपनी को बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ, जहां औसत प्राप्ति 13.1 प्रतिशत बढ़कर 7.04 रुपये प्रति यूनिट रही। मजबूत बाजार मांग और अनुकूल व्यावसायिक परिस्थितियों का लाभ कंपनी को मिला।

    कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस. बी. ख्यालिया ने कहा कि अदाणी पावर ने एक बार फिर अपनी लागत-कुशल उत्पादन क्षमता और परिचालन उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि कंपनी 45 गीगावाट उत्पादन क्षमता के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और विभिन्न नई परियोजनाओं पर निर्धारित समयसीमा के भीतर काम जारी है। उनका कहना है कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार कर रही है।

    कारोबार विस्तार की रणनीति के तहत कंपनी ने कई महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों का अधिग्रहण भी किया है। कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के अंतर्गत स्वीकृत योजना के अनुसार कंपनी ने 180 मेगावाट क्षमता वाले चुर्क थर्मल पावर प्लांट के साथ जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड और प्रयागराज पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड में हिस्सेदारी हासिल की है। इसके अलावा कंपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय जलविद्युत परियोजनाओं में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है तथा भविष्य में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में संभावित अवसरों पर भी नजर बनाए हुए है। कंपनी का मानना है कि इन विस्तार योजनाओं से आने वाले वर्षों में उसकी उत्पादन क्षमता और बाजार में प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत होगी।

  • सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत से बड़ा उछाल, गोल्ड ₹1,150 और सिल्वर ₹3,159 महंगी, नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे भाव

    नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत घरेलू सर्राफा बाजार के लिए तेज़ी भरी रही। सोने और चांदी की कीमतों में एक दिन के भीतर उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमती धातुओं के बाजार में फिर से हलचल बढ़ गई है। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम ₹1,43,404 तक पहुंच गई, जबकि चांदी का भाव बढ़कर ₹2,23,000 प्रति किलोग्राम हो गया। कीमतों में आई इस तेजी का असर देश के प्रमुख शहरों के खुदरा बाजारों में भी देखने को मिला, जहां सोना पहले की तुलना में अधिक कीमत पर बिक रहा है।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने में ₹1,150 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी की कीमत ₹3,159 प्रति किलोग्राम बढ़ने के बाद नए स्तर पर पहुंच गई। विभिन्न शुद्धता वाले सोने के दामों में भी समान रूप से तेजी देखने को मिली। 22 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट सोने की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज होने से आभूषण बाजार और निवेशकों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने की कीमतों में अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,370 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में इसकी कीमत ₹1,44,220 रही। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में सोना ₹1,44,270 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। अलग-अलग शहरों में कीमतों का यह अंतर स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और व्यावसायिक लागत पर निर्भर करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार देशभर में सोने की कीमतें एक समान नहीं होतीं। इसका पहला कारण परिवहन और सुरक्षा से जुड़ी लागत है। सोने को एक स्थान से दूसरे स्थान तक सुरक्षित पहुंचाने में आने वाला खर्च अंतिम बिक्री मूल्य को प्रभावित करता है। इसके अलावा स्थानीय मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों में बदलाव का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन क्षेत्रों में सोने की खरीद अधिक होती है, वहां बाजार की स्थिति के अनुसार दरों में अंतर देखने को मिल सकता है।

    स्थानीय ज्वेलरी एसोसिएशन भी अपने-अपने क्षेत्रों की बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दैनिक दरें निर्धारित करते हैं। इसके साथ ही ज्वेलर्स द्वारा पहले खरीदे गए स्टॉक की लागत भी बिक्री मूल्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि पुराना स्टॉक अधिक कीमत पर खरीदा गया है तो उसका प्रभाव खुदरा बाजार की कीमतों पर भी दिखाई देता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोना खरीदते समय केवल कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। ग्राहकों को हमेशा भारतीय मानक ब्यूरो की हॉलमार्क प्रमाणित ज्वेलरी ही खरीदनी चाहिए ताकि शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही खरीदारी से पहले विभिन्न आधिकारिक बाजार दरों का मिलान करना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमतों में स्पष्ट अंतर होता है।

    बुलियन बाजार में आई इस नई तेजी ने निवेशकों और आभूषण खरीदारों दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। आगामी दिनों में वैश्विक बाजार के रुझान, घरेलू मांग और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार विशेषज्ञ निवेशकों और ग्राहकों को खरीदारी से पहले ताजा दरों की जानकारी लेकर ही निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं।

  • शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक लुढ़का तो निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा, वैश्विक संकेतों से बढ़ी निवेशकों की चिंता

    शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 600 अंक लुढ़का तो निफ्टी 24,000 के करीब पहुंचा, वैश्विक संकेतों से बढ़ी निवेशकों की चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती सत्र में प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 600 अंक तक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों के करीब पहुंचकर कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया।

    बाजार खुलते ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी करीब 24 हजार के स्तर के आसपास फिसल गया। लगातार दूसरे दिन आई इस कमजोरी ने बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। इस स्थिति का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जो ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉरपोरेट लागत पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की कमजोरी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तब विदेशी निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसके परिणामस्वरूप उभरते बाजारों से पूंजी निकासी बढ़ सकती है, जिसका प्रभाव भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है। रुपये में कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंताओं को बढ़ाया है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो शुरुआती कारोबार में एविएशन और फार्मा क्षेत्र के कई प्रमुख शेयरों पर दबाव दिखाई दिया। इसके अलावा विभिन्न सेक्टरों में मुनाफावसूली के कारण भी बिकवाली का माहौल बना रहा। हालांकि कुछ चुनिंदा शेयरों में सीमित खरीदारी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं रहा।

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। एशियाई बाजारों में कुछ प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की, जबकि कुछ अन्य बाजारों में कमजोरी बनी रही। निवेशक लगातार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, ऊर्जा बाजार और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इनका असर आने वाले दिनों में भी बाजार की चाल तय कर सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और आगामी आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने और संतुलित निवेश रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक संकेतकों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी टिकी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन कारकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना है।

  • E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत सरकार अब इथेनॉल के उपयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है। सरकार का फोकस अब केवल वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इथेनॉल को घरेलू रसोई ईंधन, एथेनॉल एटीएम, विमानन क्षेत्र के टिकाऊ ईंधन और निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही इथेनॉल उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों के लिए नए बाजार तैयार करना है।

    पिछले कुछ वर्षों में भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और गन्ना तथा अनाज उत्पादक किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। इस नीति के चलते देशभर में चीनी मिलों और अनाज आधारित डिस्टिलरी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश भी हुआ है।

    हालांकि इस सफलता के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसके लगभग 24 अरब लीटर वार्षिक स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके मुकाबले E20 कार्यक्रम के लिए सालाना लगभग 11 अरब लीटर इथेनॉल की आवश्यकता है। वहीं पेय पदार्थ, दवा और रासायनिक उद्योगों की संयुक्त मांग भी कुल उत्पादन क्षमता से काफी कम है। ऐसे में बड़ी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए सरकार नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।

    इसी दिशा में इथेनॉल को घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। प्रस्तावित एथेनॉल एटीएम मॉडल के तहत उपभोक्ता विशेष कंटेनर में इथेनॉल भरवा सकेंगे और उसे विशेष रूप से तैयार किए गए स्टोव में इस्तेमाल कर सकेंगे। यदि यह मॉडल सफल होता है तो रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।

    सरकार की योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। भारत इथेनॉल के निर्यात की संभावनाओं पर भी सक्रियता से काम कर रहा है। ऐसे देशों की पहचान की जा रही है जहां इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य तो निर्धारित हैं, लेकिन उत्पादन क्षमता सीमित है। इससे भारतीय उत्पादकों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकते हैं और अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    विमानन क्षेत्र भी सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सतत विमानन ईंधन यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग को बढ़ाने के लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इस दिशा में इथेनॉल आधारित तकनीक से जेट ईंधन तैयार करने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। यदि ये परियोजनाएं सफल रहती हैं तो देश में स्वच्छ विमानन ईंधन के उत्पादन को नई गति मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल के उपयोग का दायरा बढ़ने से केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि, उद्योग और निर्यात को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। सरकार की नई रणनीति का उद्देश्य अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को आर्थिक अवसर में बदलना और भारत को वैश्विक बायोफ्यूल क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।

  • टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के कारोबारी माहौल और बदलते वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर बनी हुई है। इसी क्रम में बाजार विशेषज्ञों ने कई चर्चित शेयरों पर अपनी रणनीति साझा की है। उनके अनुसार, मेटल, बैंकिंग, ज्वेलरी और उपभोक्ता क्षेत्र के कुछ शेयर आने वाले समय में निवेशकों के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं, हालांकि निवेश से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्तरों का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मेटल सेक्टर फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में सुधार और मांग में संभावित मजबूती का लाभ भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। इसी वजह से टाटा स्टील को इस समय प्रमुख पसंद के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लगभग 183 रुपये के आसपास यह शेयर निवेश के लिए उपयुक्त स्तर पर माना जा सकता है। यदि किसी कारणवश इसमें और गिरावट आती है तथा यह 170 से 172 रुपये के दायरे में पहुंचता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में जोड़ने का अवसर माना जा सकता है।

    विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में टाटा स्टील के लिए 215 से 220 रुपये का लक्ष्य संभावित माना जा रहा है। वहीं, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मेटल सेक्टर में मजबूती जारी रहती है, तो दीर्घावधि में यह शेयर 270 रुपये तक पहुंचने की क्षमता रख सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शेयर 170 रुपये के नीचे साप्ताहिक आधार पर बंद होता है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जोखिम सीमित करने के लिए स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश केवल संभावित रिटर्न को देखकर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जोखिम और पूंजी संरक्षण को भी समान महत्व देना चाहिए। किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जाती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है और औसत खरीद मूल्य भी बेहतर बन सकता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर नहीं बल्कि कंपनी की आय, लाभप्रदता, कर्ज की स्थिति, भविष्य की विकास योजनाओं और उद्योग की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना रखती हैं।

    बाजार में फिलहाल वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में अनुशासित निवेश और तय जोखिम सीमा के साथ बनाई गई रणनीति ही अस्थिर बाजार में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी लें।

  • Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    नई दिल्ली । ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Meesho लिमिटेड में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। कंपनी के ताजा शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार पिछले दो तिमाहियों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) दोनों ने अपनी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की है। बाजार विशेषज्ञ इसे कंपनी के बेहतर परिचालन प्रदर्शन, मजबूत वित्तीय संकेतकों और भविष्य की विकास संभावनाओं के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मान रहे हैं।

    जून 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले मार्च 2026 में यह 4.2 प्रतिशत थी। लगातार दूसरी तिमाही में विदेशी निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर बाजार में FII की लगातार खरीदारी को अक्सर सकारात्मक निवेश संकेत माना जाता है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी कंपनी में अपना निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। दिसंबर 2025 में DII की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 5.6 प्रतिशत हुई और जून 2026 में तेज उछाल के साथ 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू संस्थानों ने Meesho में निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। इससे कंपनी के प्रति घरेलू निवेशकों का बढ़ता विश्वास भी स्पष्ट होता है।

    संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ कंपनी की प्रमोटर और सार्वजनिक हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है। प्रमोटर हिस्सेदारी 16.6 प्रतिशत से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गई, जबकि सार्वजनिक हिस्सेदारी 73.7 प्रतिशत से घटकर 69.3 प्रतिशत पर आ गई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के शेयरों का बड़ा हिस्सा अब संस्थागत निवेशकों के पास जा रहा है, जिसे बाजार स्थिर निवेश का सकारात्मक संकेत मानता है।

    कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में योगदान मार्जिन 170 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी लागत में कमी, प्रीपेड ऑर्डर बढ़ने तथा डिलीवरी विफल होने की घटनाओं में कमी आने से परिचालन खर्च नियंत्रित हुआ है। इससे कंपनी की लाभप्रदता में सुधार हुआ है और भविष्य में बेहतर नकदी प्रवाह की संभावना भी मजबूत हुई है।

    Meesho का विज्ञापन कारोबार भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय विक्रेताओं की संख्या में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही विज्ञापन पर खर्च करने वाले कारोबारियों की संख्या और बजट दोनों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कंपनी द्वारा AI आधारित वॉयस शॉपिंग असिस्टेंट का उपयोग ग्रामीण और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में किया जा रहा है, जिससे ग्राहक अधिग्रहण लागत कम होने और कारोबार के विस्तार में मदद मिल रही है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन, लागत नियंत्रण, विज्ञापन कारोबार का विस्तार और तकनीक आधारित रणनीति Meesho की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। यही कारण है कि संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय नतीजों और कारोबार की प्रगति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।