Category: Economy

  • घाटे से उबरने की तैयारी कर रही Air India, अगले 18 महीनों में बेड़े में जुड़ेंगे 50-60 नए विमान

    घाटे से उबरने की तैयारी कर रही Air India, अगले 18 महीनों में बेड़े में जुड़ेंगे 50-60 नए विमान


    नई दिल्‍ली । एयरलाइन सेक्‍टर के इतिहास में टाटा ग्रुप की तरफ से एअर इंडिया का अध‍िग्रहण करना सबसे बड़ी डील में एक रहा. घाटे में चल रही एयरलाइन को फ‍िर से प्रॉफ‍िट में लाने के लि‍ए टाटा ग्रुप ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम चला रहा है. हालांकि, ग्‍लोबल लेवल पर एयरलाइन इंडस्‍ट्री को प्रभावित करने वाली कई घटनाओं के बाद एअर इंडिया का यह मिशन सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. एअर इंडिया ग्रुप के एक अध‍िकारी के अनुसार एयरलाइन आने वाले डेढ़ साल के अंदर अपने बेड़े में 50 से 60 नए और आधुन‍िक व‍िमान शामिल करने जा रही है.

    एअर इंडिया के सीओओ और एअर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन निपुण अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान एअर इंडिया के रीस्‍ट्रक्‍चर‍िंग को लेकर जानकारी दी. उन्होंने माना क‍ि जनवरी 2022 में टाटा ग्रुप की तरफ से कमान संभालने के बाद से पिछले कुछ साल में मैनेजमेंट को काफी सीखने को मिला है. उन्‍होंने कहा क‍ि एयरलाइन इंडस्‍ट्री पिछले कुछ समय से क्राइस‍िस से गुजर रही है. इस बदलाव की यात्रा की शुरुआत हुई तब किसी ने भी ग्‍लोबल लेवल पर आने वाली इन बाधाओं का अनुमान नहीं लगाया था.

    कई घटनाओं से एयरलाइन की रफ्तार पर लगा ब्रेक
    सप्लाई चेन की ग्‍लोबल द‍िक्‍कतें, अलग-अलगी देशों के एयरस्पेस से जुड़े विवाद, तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल टेंशन जैसी कई अप्रत्याशित घटनाओं ने एयरलाइन की रफ्तार को प्रभावित करने की कोशिश की है. एयर इंड‍िया ने पिछले कुछ समय के दौरान कई गंभीर और दर्दनाक झटकों का सामना किया है. इन मुश्किलों और मीडिया में आ रही ऐसी खबरों के बीच, जिनमें कहा जा रहा था कि एयर इंड‍िया का ट्रांसफॉर्मेशन प्लान तय समय से पिछड़ सकता है, निपुण अग्रवाल ने स्थिति साफ की है.

    विमानों की मेंटीनेंस पर भारी खर्च क‍िया जा रहा
    एयर इंडिया ने पांच साल का जो खाका तैयार किया है, उसके तहत विमानों के आधुनिकीकरण से लेकर विमानों की मरम्मत और रखरखाव के क्षेत्र में भारी निवेश किया जा रहा है. एअर इंडिया ने करीब 600 नए विमानों का विशाल ऐतिहासिक ऑर्डर दे रखा है, जिसमें से अभी तक 10 प्रतिशत से भी कम विमानों की डिलीवरी हो पाई है. यह ऑर्डर बुक इतनी बड़ी है कि इसके तहत विमानों की सप्‍लाई अगले दशक के म‍िड यानी 2035 तक जारी रहेगी. अगले सात से आठ साल तक हर साल बेड़े में 50 से 60 नए विमान जोड़े जाएंगे.

    मौजूदा बेड़े को पूरी तरह बदलने की तैयारी
    इस रणनीति के तहत एयर इंड‍िया को हर साल 10 से 15 बड़े साइज के विमान (वाइड-बॉडी) और 45 से 50 छोटे साइज के नैरो-बॉडी व‍िमान की स्ट्रीम मिलती रहेगी. अगले 18 महीने के अंदर ग्रुप के पास करीब 60 नए विमान उपलब्ध होंगे. नए विमानों को शामिल करने के साथ ही एअर इंडिया अपने मौजूदा बेड़े को पूरी तरह बदलने में जुटी है. वाइड-बॉडी प्‍लेन को अगले दो से तीन साल में पूरी तरह नया रूप दे दिया जाएगा. कंपनी के बोइंग 787 (ड्रीमलाइनर) विमानों का नवीनीकरण अगले साल के म‍िड तक पूरा हो जाएगा, जबकि बोइंग 777 विमानों के केबिन को बदलने में थोड़ा अधिक समय लगेगा.

    अभी 290 से ज्‍यादा प्‍लेन का बेड़ा
    कंपनी को बोइंग मैक्स 8 विमानों की डिलीवरी लगातार मिल रही है और एअर इंडिया दुनिया की उन चुनिंदा एयरलाइंस में शामिल होगी, जिसे बोइंग मैक्स 10 विमानों की पहली खेप मिलेगी. मौजूदा समय में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के पास 290 से ज्‍यादा प्‍लेन का बेड़ा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और तेल की आसमान छूती कीमत के कारण एयरलाइन को अपनी कुछ इंटरनेशनल फ्लाइट और सर्व‍िस में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

  • भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों की दमदार वापसी, शीर्ष 10 में शामिल पांच दिग्गजों का मार्केटकैप 1.54 लाख करोड़ रुपये बढ़ा

    भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कंपनियों की दमदार वापसी, शीर्ष 10 में शामिल पांच दिग्गजों का मार्केटकैप 1.54 लाख करोड़ रुपये बढ़ा


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह सकारात्मक संकेतों के साथ समाप्त हुआ। मजबूत निवेशक धारणा, चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी और बेहतर कॉरपोरेट प्रदर्शन के कारण देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों में से पांच के बाजार पूंजीकरण में संयुक्त रूप से 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान सूचना प्रौद्योगिकी और बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां निवेशकों के आकर्षण का केंद्र रहीं, जबकि कुछ बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन में गिरावट भी देखने को मिली।

    सप्ताह के दौरान सबसे अधिक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को मिला। कंपनी के बाजार पूंजीकरण में 72 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हुआ, जिससे उसका कुल बाजार मूल्य 8.20 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया। कंपनी के बेहतर तिमाही नतीजों और आने वाली तिमाहियों में कारोबार की संभावनाओं को लेकर प्रबंधन के सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। इसके परिणामस्वरूप आईटी क्षेत्र में खरीदारी तेज हुई और कंपनी के शेयरों में मजबूती देखने को मिली।

    निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। सप्ताहभर में बैंक के बाजार पूंजीकरण में 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार मूल्य में भी लगभग 24 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। वित्तीय क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बजाज फाइनेंस और सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न दिया।

    हालांकि सभी बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा। इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो के बाजार मूल्यांकन में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार पूंजीकरण में भी कमी देखने को मिली। इसके बावजूद इन कंपनियों की बाजार स्थिति मजबूत बनी रही और वे देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल रहीं।

    सप्ताह के अंत तक रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे अधिक बाजार मूल्य वाली सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा। यह क्रम भारतीय कॉरपोरेट जगत में इन कंपनियों की मजबूत उपस्थिति और निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

    समूचे शेयर बाजार का प्रदर्शन भी उत्साहजनक रहा। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 582 अंकों से अधिक की बढ़त दर्ज हुई, जबकि निफ्टी भी 127 अंकों से अधिक मजबूत होकर बंद हुआ। विभिन्न सेक्टरों में सूचना प्रौद्योगिकी सबसे अधिक लाभ देने वाला सूचकांक रहा। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक, ऑयल एंड गैस, ऑटो, सर्विसेज, सार्वजनिक उपक्रम और ऊर्जा क्षेत्रों में भी सकारात्मक बढ़त देखने को मिली।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कॉरपोरेट नतीजों, बेहतर आर्थिक संकेतकों और निवेशकों के बढ़ते विश्वास के कारण भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। यदि आने वाले समय में कंपनियों के तिमाही परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप रहते हैं और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर बनी रहती हैं, तो बाजार में यह सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल शीर्ष कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में आई यह बढ़ोतरी भारतीय इक्विटी बाजार की मजबूती और निवेशकों के भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।

  • सूचीबद्ध कंपनियों की निगरानी होगी और सख्त, सेबी ने फोरेंसिक ऑडिट पैनल का किया विस्तार, 18 नई विशेषज्ञ फर्मों को मिली जिम्मेदारी

    सूचीबद्ध कंपनियों की निगरानी होगी और सख्त, सेबी ने फोरेंसिक ऑडिट पैनल का किया विस्तार, 18 नई विशेषज्ञ फर्मों को मिली जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने पूंजी बाजार में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सूचीबद्ध कंपनियों के फोरेंसिक ऑडिट के लिए अपने अधिकृत पैनल का विस्तार किया है। नियामक ने 18 नई पेशेवर फर्मों को इस पैनल में शामिल किया है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की जांच की क्षमता और संस्थागत निगरानी दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय बाजार में विश्वास बनाए रखने और निवेशकों के हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

    यह विस्तार उस चयन प्रक्रिया के बाद किया गया है जिसे सार्वजनिक आमंत्रण के माध्यम से शुरू किया गया था। नियामक द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नई फर्मों को पहले से मौजूद अधिकृत सूची में शामिल किया गया है और उनका पंजीकरण तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि के दौरान आवश्यकता पड़ने पर इन फर्मों को सूचीबद्ध कंपनियों के वित्तीय मामलों की गहन फोरेंसिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी जा सकेगी।

    नई सूची में कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऑडिट एवं परामर्श फर्मों के साथ विभिन्न अनुभवी पेशेवर संस्थानों को भी स्थान दिया गया है। इन फर्मों के शामिल होने से जटिल वित्तीय मामलों, लेखा संबंधी विसंगतियों, संदिग्ध लेनदेन और संभावित कॉरपोरेट अनियमितताओं की जांच अधिक विशेषज्ञता और दक्षता के साथ किए जाने की संभावना बढ़ेगी। इससे नियामकीय जांच की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    फोरेंसिक ऑडिट सामान्य वित्तीय ऑडिट से अलग प्रक्रिया होती है। इसका उद्देश्य केवल खातों की जांच करना नहीं, बल्कि संभावित धोखाधड़ी, वित्तीय गड़बड़ियों, धन के दुरुपयोग, लेखांकन में हेरफेर या अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों का गहराई से परीक्षण करना होता है। जब किसी सूचीबद्ध कंपनी के वित्तीय विवरणों या लेनदेन को लेकर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है, तब ऐसे मामलों में फोरेंसिक ऑडिट कराया जाता है ताकि वास्तविक स्थिति सामने लाई जा सके।

    पूंजी बाजार में निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी उद्देश्य से नियामक समय-समय पर अपनी प्रक्रियाओं और विशेषज्ञ संसाधनों को मजबूत करता है। विस्तारित पैनल से उम्मीद है कि जांच संबंधी मामलों का निपटारा अधिक व्यवस्थित, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा। साथ ही कॉरपोरेट प्रशासन के मानकों को भी बेहतर बनाने में यह पहल सहायक सिद्ध हो सकती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत फोरेंसिक व्यवस्था से सूचीबद्ध कंपनियों में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा। इससे कंपनियों के प्रबंधन की जवाबदेही बढ़ेगी और निवेशकों को अधिक विश्वसनीय कारोबारी वातावरण उपलब्ध होगा। नियामकीय संस्थाओं की ऐसी पहल से पूंजी बाजार की साख मजबूत होने के साथ-साथ दीर्घकालिक निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। आने वाले समय में यह कदम वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और निवेशक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • संसद के मानसून सत्र में कानूनों में बड़े बदलाव की तैयारी, निवेश, न्याय व्यवस्था और एमएसएमई सुधार पर सरकार का विशेष फोकस

    संसद के मानसून सत्र में कानूनों में बड़े बदलाव की तैयारी, निवेश, न्याय व्यवस्था और एमएसएमई सुधार पर सरकार का विशेष फोकस

    नई दिल्ली । संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, जिसमें केंद्र सरकार व्यापक विधायी एजेंडे के साथ सदन में प्रवेश करेगी। इस सत्र के दौरान सरकार पांच नए विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इन प्रस्तावित विधेयकों का उद्देश्य कर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन देना, न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करना, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाना तथा राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानूनों को और सख्त करना है। सरकार का मानना है कि इन विधेयकों से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक सुधारों को गति मिलेगी।

    सरकार आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को सदन में प्रस्तुत करेगी, जिसके माध्यम से पहले जारी अध्यादेश का स्थान लेने वाला स्थायी कानून बनाया जाएगा। इस प्रस्ताव का उद्देश्य विदेशी निवेश को आकर्षित करना, सरकारी ऋण बाजार को अधिक मजबूत बनाना तथा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच वित्तीय बाजार में स्थिरता और तरलता बनाए रखना है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने और भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने में सहायक होगी।

    मानसून सत्र में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया जाएगा। इस विधेयक के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का तर्क है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों के निस्तारण की गति तेज होगी और न्यायिक प्रणाली पर बढ़ते कार्यभार को कम करने में मदद मिलेगी।

    सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र में कारोबार को और सरल बनाने का प्रयास किया जाएगा। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य भरोसे पर आधारित नियामकीय व्यवस्था विकसित करना, भुगतान में देरी से जुड़े विवादों के समाधान की प्रक्रिया को मजबूत करना तथा राज्यों को अधिक प्रशासनिक अधिकार प्रदान करना है। सरकार का मानना है कि इन बदलावों से छोटे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।

    जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए विलंबित पंजीकरण से जुड़े नियमों को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय सम्मान के विरुद्ध होने वाले कृत्यों पर अधिक कठोर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किए जाने की योजना है। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य कानूनों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।

    इन नए विधेयकों के अलावा सरकार संसद में पहले से लंबित कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी चर्चा आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी। साथ ही अनुपूरक अनुदानों की मांग पर भी दोनों सदनों में विचार और मतदान कराया जाएगा। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक बहस होने की संभावना है। सत्र शुरू होने से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक और विपक्षी दलों की रणनीतिक बैठकों के बाद संसद की कार्यवाही राजनीतिक और विधायी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहने की उम्मीद है।

  • इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    इनोवेशन और वैश्विक साझेदारी से भारतीय हस्तशिल्प को मिलेगा नया विस्तार, पीएम मोदी ने आर्थिक विकास में शिल्प कौशल की क्षमता पर जताया भरोसा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का पारंपरिक शिल्प कौशल केवल सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का एक सशक्त आधार भी बन सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवाचार, आधुनिक सोच और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारतीय कारीगरों की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाकर रोजगार, निर्यात और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी जा सकती है। उनका कहना था कि यदि पारंपरिक कौशल को आधुनिक अवसरों के साथ जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    प्रधानमंत्री ने इस विषय पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के विचारों को साझा करते हुए ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल देश के विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद विशिष्ट उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इसके जरिए स्थानीय कारीगरों को बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ उनकी आजीविका मजबूत हो रही है और भारत की पारंपरिक विरासत को भी नई पहचान मिल रही है।

    वित्त मंत्री ने चेन्नई स्थित ‘वस्त्रकला’ का उदाहरण देते हुए बताया कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग ने भारतीय कारीगरों को वैश्विक फैशन उद्योग से जोड़ने का नया रास्ता खोला है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से फ्रांस की उच्चस्तरीय फैशन परंपरा और भारत की सदियों पुरानी कढ़ाई कला का सफल समन्वय हुआ है। इससे भारतीय हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों के लिए उच्च मूल्य वाले कार्य अवसर भी विकसित हुए हैं।

    उन्होंने बताया कि पेरिस में आयोजित एक निवेशकों की बैठक के दौरान भी इस पहल का उल्लेख किया गया था, जिससे भारतीय शिल्प कौशल की वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत मिलता है। भारत लौटने के बाद उन्होंने तिरुवल्लूर जिले के गुडापक्कम स्थित वस्त्रकला की कार्यशाला का दौरा किया और वहां कार्यरत कारीगरों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें यह जानकर विशेष संतोष हुआ कि कंपनी ने अपनी कार्यशाला को शहर से गांव में स्थानांतरित करने का निर्णय इसलिए लिया ताकि पारंपरिक कौशल रखने वाले ग्रामीण परिवारों को उनके अपने क्षेत्र में बेहतर रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।

    वित्त मंत्री ने कहा कि सामान्यतः रोजगार की तलाश में ग्रामीण युवा शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन इस पहल ने विपरीत दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। गांवों में ही रोजगार उपलब्ध होने से स्थानीय प्रतिभा को अपने क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला है, जिससे सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इससे पारंपरिक शिल्प की निरंतरता भी बनी रहती है और नई पीढ़ी का इस कला से जुड़ाव भी मजबूत होता है।

    उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र लंबे समय से सूखे की चुनौतियों का सामना करता रहा है। ऐसे समय में जब खेती प्रभावित होती थी, तब ग्रामीण परिवार सूती और रेशमी वस्त्रों पर बारीक कढ़ाई कर अपनी आजीविका चलाते थे। यही परंपरा आज आधुनिक बाजारों तक पहुंचकर नए अवसरों का माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा कि धैर्य, अनुशासन और बारीकी जैसी विशेषताओं से परिपूर्ण भारतीय कारीगरों की यह कला देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ आर्थिक विकास की भी मजबूत आधारशिला बन सकती है।

  • वैश्विक बाजार में नई पहचान, सिंगापुर पहुंची प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

    वैश्विक बाजार में नई पहचान, सिंगापुर पहुंची प्रीमियम चेरी और प्लम की पहली खेप से किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में शोपियां और पुलवामा से प्रीमियम अरेको चेरी और सेंटरोज प्लम की पहली खेप सिंगापुर के लिए रवाना की गई है। इस पहल को क्षेत्र के फल उत्पादकों के लिए नए अवसरों का द्वार माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहचान को और मजबूत करना है।

    जम्मू-कश्मीर लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले शीतोष्ण फलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां की जलवायु, मिट्टी और प्राकृतिक परिस्थितियां ऐसे फलों की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। अरेको चेरी अपनी मिठास, आकर्षक रंग और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विशेष मांग रखती है, जबकि सेंटरोज प्लम भी गुणवत्ता और स्वाद के आधार पर प्रीमियम श्रेणी का फल माना जाता है।

    इस निर्यात के लिए फलों की कटाई से लेकर ग्रेडिंग, पैकिंग और परिवहन तक पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप पूरी की गई। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक कोल्ड चेन प्रणाली का उपयोग किया गया, ताकि सिंगापुर पहुंचने तक फलों की ताजगी और गुणवत्ता पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पौध स्वच्छता से जुड़े सभी आवश्यक मानकों का पालन भी सुनिश्चित किया गया।

    इससे पहले जम्मू-कश्मीर से ताजी चेरी और प्लम का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी और दुबई जैसे बाजारों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। अब सिंगापुर जैसे नए और प्रीमियम बाजार में प्रवेश से क्षेत्र के बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच और व्यापक होने की उम्मीद है। इससे भविष्य में अन्य देशों के साथ भी निर्यात के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

    इस पहल में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं और स्थानीय निर्यातकों के बीच समन्वय स्थापित किया गया। आधुनिक पैकिंग, गुणवत्ता परीक्षण और निर्यात प्रबंधन की मदद से यह सुनिश्चित किया गया कि उत्पाद वैश्विक बाजार की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे उतरें। इससे स्थानीय बागवानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन और प्रबंधन की नई जानकारी भी मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से किसानों को पारंपरिक बिक्री व्यवस्था की तुलना में काफी बेहतर प्रतिफल मिलने की संभावना है। बेहतर मूल्य मिलने से बागवान आधुनिक खेती तकनीकों, उन्नत पौधों, वैज्ञानिक प्रबंधन और फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं में अधिक निवेश कर सकेंगे। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी, फसल की बर्बादी कम होगी और निर्यात योग्य फलों की मात्रा में भी वृद्धि होगी।

    जम्मू-कश्मीर के फल उत्पादकों के लिए यह उपलब्धि केवल एक निर्यात खेप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। वैश्विक बाजारों से सीधा जुड़ाव किसानों को स्थायी आय, बेहतर बाजार विकल्प और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान कर सकता है। साथ ही भारत के उच्च गुणवत्ता वाले बागवानी उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीय पहचान और मजबूत होगी, जिससे भविष्य में कृषि निर्यात को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है।

  • भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    भारत-फिनलैंड ने 2030 तक व्यापार दोगुना करने का रखा लक्ष्य, ईयू-भारत एफटीए से बढ़ेंगी नई संभावनाएं

    नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड ने आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने के उद्देश्य से वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रस्तावित यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते (ईयू-भारत एफटीए) को इस लक्ष्य की प्राप्ति का प्रमुख माध्यम माना जा रहा है। दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं ने हेलसिंकी में हुई उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान व्यापार, निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा की।

    फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री रिक्का पुर्रा और भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच हुई बैठक में आर्थिक संबंधों को अधिक विविध, मजबूत और दीर्घकालिक बनाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने माना कि ईयू-भारत एफटीए लागू होने के बाद व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की कंपनियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा स्तर से दोगुना करने का लक्ष्य भी अधिक व्यावहारिक माना गया।

    बैठक के बाद फिनलैंड की उप प्रधानमंत्री रिक्का पुर्रा ने कहा कि डिजिटलाइजेशन और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में भारत और फिनलैंड की रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उनके अनुसार डिजिटल और टिकाऊ प्रौद्योगिकी समाधान विकसित करने में फिनलैंड की विशेषज्ञता भारत की विकास यात्रा और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

    रिक्का पुर्रा ने यह भी कहा कि भविष्य में स्पेस, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा किया जाएगा। उन्होंने भारत को एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी नवाचार और औद्योगिक सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

    वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि उनकी बैठकों में आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने, व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा डिजिटलाइजेशन और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी का विस्तार करने पर विशेष चर्चा हुई। उन्होंने फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री साकारी पुइस्तो से भी मुलाकात की, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 6जी संचार, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष तकनीक और सस्टेनेबिलिटी जैसे भविष्य के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

    फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक प्रगति और ईयू-भारत एफटीए की संभावनाएं फिनलैंड की कंपनियों के लिए नए अवसर लेकर आएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार का विशाल आकार पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नई प्रौद्योगिकी आधारित क्षेत्रों में भी निवेश और व्यावसायिक विस्तार के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।

    अपनी यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने फिनलैंड की प्रमुख प्रौद्योगिकी और औद्योगिक कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और निर्यात आधारित उत्पादन में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। दोनों देशों का मानना है कि प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश पर आधारित यह साझेदारी आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • इंडिया पोस्ट ने लॉन्च की मैस्कॉट डिजाइन प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेंगे 2 लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार

    इंडिया पोस्ट ने लॉन्च की मैस्कॉट डिजाइन प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेंगे 2 लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार


    नई दिल्ली ।
    संचार मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ पोस्ट्स ने देशभर के रचनात्मक प्रतिभागियों के लिए ‘इंडिया पोस्ट मैस्कॉट डिजाइन कॉन्टेस्ट’ की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता के माध्यम से नागरिकों को इंडिया पोस्ट का आधिकारिक मैस्कॉट तैयार करने का अवसर मिलेगा। प्रतियोगिता का आयोजन इनोवेट इंडिया मायगव प्लेटफॉर्म पर किया जा रहा है और इसका उद्देश्य ऐसा मैस्कॉट विकसित करना है जो इंडिया पोस्ट की विश्वसनीयता, भरोसे, समावेशिता, सेवा भावना और डिजिटल नवाचार जैसी मूल पहचान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सके।

    यह प्रतियोगिता सभी भारतीय नागरिकों के लिए खुली है। प्रतिभागियों को एक मौलिक मैस्कॉट डिजाइन तैयार करने के साथ उसका उपयुक्त नाम और एक संक्षिप्त कॉन्सेप्ट नोट भी प्रस्तुत करना होगा। प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक स्वीकार की जाएंगी। सरकार ने विद्यार्थियों, डिजाइनर्स, कलाकारों और अन्य रचनात्मक पेशेवरों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है, ताकि इंडिया Post की भविष्य की दृश्य पहचान तैयार करने में उनका योगदान मिल सके।

    प्रतियोगिता को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिनमें मैस्कॉट डिजाइन और मैस्कॉट नेमिंग शामिल हैं। मैस्कॉट डिजाइन श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को 75 हजार रुपये, द्वितीय स्थान पर 50 हजार रुपये और तृतीय स्थान पर 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं मैस्कॉट नेमिंग श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 25 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी। सभी विजेताओं को सम्मान स्वरूप प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

    चयनित मैस्कॉट को इंडिया पोस्ट का आधिकारिक ब्रांड एंबेसडर बनाया जाएगा। भविष्य में इसका उपयोग विभाग के प्रचार अभियानों, फिलाटेलिक उत्पादों, जन-जागरूकता कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों, सोशल मीडिया अभियानों और अन्य आधिकारिक संचार माध्यमों में किया जाएगा। इससे न केवल इंडिया पोस्ट की ब्रांड पहचान को नया स्वरूप मिलेगा, बल्कि देश के रचनात्मक प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर भी प्राप्त होगा।

    यह पहल ऐसे समय शुरू की गई है जब इंडिया पोस्ट अपने वित्तीय प्रदर्शन में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। हाल ही में डाक विभाग ने किसी भी वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में पहली बार 4,000 करोड़ रुपये के कारोबार का आंकड़ा पार किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विभाग ने 4,008.95 करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक प्रथम तिमाही राजस्व दर्ज किया, जो विभाग की सेवाओं के बढ़ते दायरे और डिजिटल परिवर्तन की दिशा में उसकी मजबूत प्रगति को दर्शाता है। ऐसे में यह प्रतियोगिता इंडिया पोस्ट की नई पहचान को और अधिक प्रभावी तथा जनसहभागिता आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

  • भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का दम, 130 देशों की भागीदारी के बीच मिले 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    भारतीय टेक्सटाइल उद्योग का दम, 130 देशों की भागीदारी के बीच मिले 14,300 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

    नई दिल्ली । भारत के टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले भारत टेक्स 2026 ने इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और पारंपरिक भारतीय शिल्प को एक ही मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। तीसरे संस्करण के रूप में आयोजित इस प्रदर्शनी में दुनिया के 130 से अधिक देशों से छह हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार पहुंचे, जबकि करीब 1.30 लाख व्यापारिक आगंतुकों ने इसमें भाग लिया। व्यापक वैश्विक भागीदारी ने यह संकेत दिया कि भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के प्रति अंतरराष्ट्रीय बाजार का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

    करीब 1.6 मिलियन वर्ग फुट क्षेत्र में आयोजित इस विशाल प्रदर्शनी में 20 हजार से अधिक टेक्सटाइल उत्पाद प्रदर्शित किए गए। आयोजन का उद्देश्य केवल व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराना नहीं था, बल्कि भारतीय विरासत, पारंपरिक शिल्प, आधुनिक तकनीक और सतत विकास को एक साथ प्रस्तुत करना भी रहा। प्रदर्शनी में टेक्सटाइल उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया, जिससे घरेलू और विदेशी खरीदारों को एक ही स्थान पर विविध उत्पादों और नवाचारों का व्यापक परिचय मिला।

    प्रदर्शनी में फाइबर, यार्न, फैब्रिक, रेडीमेड परिधान, होम टेक्सटाइल्स, टेक्निकल टेक्सटाइल्स, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स सहित अनेक क्षेत्रों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इससे भारतीय उद्योग की विविधता और उत्पादन क्षमता को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तथा निवेशकों के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर मिला। विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला और वस्त्र परंपराओं ने भी विदेशी प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

    बिहार की प्रसिद्ध टिकुली कला इस आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। अपनी चमकदार रंग योजना और बारीक इनामेल कार्य के लिए प्रसिद्ध इस पारंपरिक कला ने भारतीय हस्तशिल्प की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया। इसके अलावा देशभर के अनेक पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र उत्पादों ने भी आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।

    हैंडलूम क्षेत्र को भी प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया। लगभग 120 बुनकरों का प्रतिनिधित्व करने वाली एक निर्यातक हैंडलूम सहकारी संस्था ने रियायती स्टॉल के माध्यम से अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने प्रस्तुत किए। इस पहल से छोटे बुनकरों और पारंपरिक उत्पादकों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला, जिससे निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    भारत टेक्स 2026 में 1,600 से अधिक प्रदर्शकों और 11 हजार से ज्यादा खरीदारों की भागीदारी रही। आयोजन के दौरान 28 हजार से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकें आयोजित की गईं, जबकि 100 से अधिक गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट और बिजनेस-टू-गवर्नमेंट संवाद भी हुए। इन बैठकों के परिणामस्वरूप 14,300 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में बढ़ते निवेश विश्वास का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    इस आयोजन के साथ आयोजित इंडी हाट 2026 ने भी भारतीय हैंडलूम और हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें 48 कारीगरों और बुनकरों के साथ 12 डिजाइन आधारित ब्रांड्स ने भाग लेकर क्षेत्रीय कला और शिल्प परंपराओं का प्रदर्शन किया। गुलाबी मीनाकारी, डोकरा, उस्ता कला, पिचवाई, सोजनी कढ़ाई, ब्लू पॉटरी, सिल्वर फिलिग्री, चेरियाल पेंटिंग, माता नी पछेड़ी, पेपियर-माशे, बागरू ब्लॉक प्रिंटिंग, जामदानी साड़ियां, मूगा और एरी सिल्क तथा ओडिशा इकत जैसी अनेक पारंपरिक कलाओं ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध विविधता को वैश्विक मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

  • भारत के स्पेस रिफॉर्म्स को मिली बड़ी सफलता, विक्रम-1 की लॉन्चिंग पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया गर्व और आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक

    भारत के स्पेस रिफॉर्म्स को मिली बड़ी सफलता, विक्रम-1 की लॉन्चिंग पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया गर्व और आत्मनिर्भरता का नया प्रतीक

    नई दिल्ली ।भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए निजी भागीदारी के नए युग की मजबूत शुरुआत का संकेत दिया है। स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे पूरे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत के स्पेस सेक्टर में किए गए सुधारों और निजी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ाने की नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उनके अनुसार यह सफलता भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष उद्योग के विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में देश की मजबूत उपस्थिति का आधार बनेगी।

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने अपनी निर्धारित योजना के अनुरूप सफलतापूर्वक रॉकेट लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने इसे केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता, वैज्ञानिक प्रतिभा और उद्योग जगत की बढ़ती भूमिका का भी प्रमाण बताया। उनका कहना था कि इस उपलब्धि से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारी संस्थानों और निजी कंपनियों के बीच समन्वय से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

    उन्होंने कहा कि लगभग पांच-छह वर्ष पहले केंद्र सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। इस नीति के बाद देश में नई कंपनियों को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला। विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग उसी दूरदर्शी निर्णय का सकारात्मक परिणाम है, जिसने भारतीय स्पेस इकोसिस्टम को नई दिशा दी है।

    मंत्री ने इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़े सभी संस्थानों और वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से ऑर्बिटल लॉन्च करने वाली भारत की पहली निजी कंपनी बनकर नया इतिहास बनाया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के प्रभावी सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है और आने वाले वर्षों में ऐसे कई नवाचार देखने को मिल सकते हैं।

    डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण, इसरो और मिशन से जुड़े सभी तकनीकी विशेषज्ञों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों के सहयोग और मार्गदर्शन ने निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में आगे बढ़ने का मजबूत मंच उपलब्ध कराया है। उनके अनुसार यह मॉडल भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि बीते पांच वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में जिस गति से प्रगति की है, वह उल्लेखनीय है। सामान्य तौर पर स्पेस सेक्टर में बड़े परिणाम हासिल करने में कई दशक लग जाते हैं, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत कम समय में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं। उनका मानना है कि यह सफलता देश की नीतिगत स्पष्टता, वैज्ञानिक क्षमता और नवाचार को प्रोत्साहन देने वाली व्यवस्था का परिणाम है।

    मंत्री ने कहा कि जिन देशों ने भारत से कई दशक पहले अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किए थे, उनकी तुलना में पहली कोशिश में सफलता प्राप्त करने का भारत का रिकॉर्ड अत्यंत प्रभावशाली रहा है। विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग इस उपलब्धि को और मजबूत करती है तथा यह संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह सफलता भारतीय निजी स्पेस उद्योग के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करने के साथ-साथ देश की वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी नई पहचान देती है।