Category: Economy

  • सेंसेक्स में जोरदार रिकवरी: निचले स्तर से 1800 अंक उछलकर बंद, IT सेक्टर चमका

    सेंसेक्स में जोरदार रिकवरी: निचले स्तर से 1800 अंक उछलकर बंद, IT सेक्टर चमका


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का सत्र उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन अंत में बाजार ने शानदार रिकवरी दिखाते हुए हरे निशान में क्लोजिंग दी। शुरुआती गिरावट के बाद निवेशकों की खरीदारी से बाजार में जबरदस्त रिटर्न देखने को मिली।

    इंटर-डे में बड़ी रिकवरी

    कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 71,545 के निचले स्तर से करीब 1,774 अंक उछल गया। दिन के अंत में सेंसेक्स 185.23 अंक (0.25%) की बढ़त के साथ 73,319.55 पर बंद हुआ।

    वहीं निफ्टी 50 ने भी 22,182 के लो से 531 अंकों की रिकवरी करते हुए 33.70 अंक (0.15%) की तेजी के साथ 22,713.10 पर क्लोजिंग दी।

    आईटी सेक्टर बना बाजार का हीरो

    आज के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बड़ा जेनरेटर रहा, जो 2.60% की तेजी के साथ बंद हुआ। इसके अलावा:

    निफ्टी रियल्टी: +1.07%
    निफ्टी सर्विसेज़: +0.54%
    निफ्टी मेटल: +0.39%
    निफ्टी प्राइवेट बैंक: +0.39%
    निफ्टी FMCG: +0.21%

    IT कंपनियों में खरीदारी ने बाजार को बढ़त देने में अहम भूमिका निभाई।

    इन सेक्टर्स में रही गिरावट

    दूसरी ओर कुछ सेक्टर्स दबाव में रहे:

    निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: -0.93%
    निफ्टी फार्मा: -0.92%
    निफ्टी हेल्थकेयर: -0.86%
    निफ्टी ऑयल एंड गैस: -0.79%
    निफ्टी ऑटो: -0.62%
    निफ्टी इंफ्रा: -0.45%
    सेंसेक्स के टॉप जेनर्स और लूजर्स

    तेजी वाले सर्वे में Infosys, TCS, HCLTech, Tech Mahindra, HDFC Bank और ICICI Bank शामिल रहे।

    वहीं गिरावट वाले रिकवरी में Sun Pharma, NTPC, Power Grid Corporation of India और Tata Steel प्रमुख रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी

    लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में कमजोरी देखने को मिली।

    निफ्टी मिडकैप 100: 0.26% गिरकर 53,677.05
    निफ्टी स्मॉलकैप 100: 0.38% गिरकर 15,650.50
    क्यों आई बाजार में यह रिकवरी?

    विश्लेषकों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर संभावित हमले वाले बयान से शुरुआती कारोबार में बाजार दबाव में था। लेकिन बाद में वैल्यू बाइंग और रुपये में बढ़ोतरी से बाजार में सुधार आया।

    रुपये ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए बाजार को सहारा दिया, जिससे निवेशकों का भरोसा लौटा।

    क्यों अहम है यह ट्रेंड

    आज की रिकवरी यह दर्शाती है कि बाजार में अभी भी निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और गिरावट में खरीदारी का रुख जारी है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव का असर: RBI अप्रैल MPC में रेपो रेट रख सकता है स्थिर

    अमेरिका-ईरान तनाव का असर: RBI अप्रैल MPC में रेपो रेट रख सकता है स्थिर


    नई दिल्ली वैश्विक भू-अप्रैल राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 2026 की स्मारक नीति समिति (MPC) की बैठक में रिजर्व बैंक रेट को 5.25% पर स्थिर रखा जा सकता है। एक ताजा रिपोर्ट में यह संभावना व्यक्त की गई है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल के क्षेत्र में उथल-पुथल के चलते केंद्रीय बैंक के आवंटन में कोई बदलाव नहीं होगा।

    अमेरिका-ईरान तनाव का असर

    संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में भूस्खलन से कच्चे तेल की डॉलर की कीमत 100 प्रति शेयर से ऊपर पहुंच गई है। यह सीधी प्रभावकारी संरचना और आर्थिक स्थिरता पर आधारित है।

    क्या कहती है रिपोर्ट?

    बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्याज ब्याज में कटौती का दौर समाप्त हो गया है। आरबीआई अब ‘न्यूट्रल’ रुख अपनाते हुए आर्थिक स्थिति पर नजर बनाए रखेगा। जरूरत है पानी पर तेल बढ़ाने और रुपये को सहारा देने के उपाय की।

    पौधारोपण तो बढ़ना संभव है

    रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि फसल 6% की ऊपरी सीमा को पार करती है, तो वर्ष के अंत तक रुचि में बढ़त की संभावना बन सकती है। अगली 3-4 महीनों की नीति में युद्ध का आर्थिक प्रभाव अधिक स्पष्ट होगा, जिसके बाद आरबीआई अपनी दिशा तय करेगा।

    कारखाने में उजाले-बिजली

    इस वैश्विक संकट का असर भारतीय अभिनेता पर भी दिख रहा है। विदेशी निवेशकों (FPI) का लगातार पैसा खत्म हो रहा है, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो रही है और डॉलर के ग्रुप ग्रुप में 94.83 के भारतीय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

    अचल और चालू खाते पर प्रभाव

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट का असर आर्थिक वृद्धि और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ा। आरबीआई वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी जीडीपी और शेयर बाजार के अनुमान में बदलाव कर सकता है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार, सैद्धांतिक सिद्धांत, ने भी चेतावनी दी है कि चालू खाता घाटा (सीएडी) में और वृद्धि हो सकती है।

    सकल घरेलू उत्पाद की बिक्री का अनुमान

    रिपोर्ट के मुताबिक,

    वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी वृद्धि: 7.6%
    वित्त वर्ष 2027 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि: 7% – 7.2%

    हालाँकि, बहुराष्ट्रीय हस्तियों के जीवित इन आंकड़ों में बदलाव संभव है।

    यह बैठक क्यों अहम है?

    एमपीसी की अप्रैल बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कहा गया है कि आरबीआई के बीच आर्थिक दबाव का विकास और बैंकिंग के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

  • सोना और चांदी महंगा होने की राह पर? सरकार ने गोल्ड सिल्वर ज्वैलरी आयात पर पाबंदी लगाई

    सोना और चांदी महंगा होने की राह पर? सरकार ने गोल्ड सिल्वर ज्वैलरी आयात पर पाबंदी लगाई


    नई दिल्ली । भारत में सोने और चांदी की ज्वैलरी खरीदने वाले लोगों के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है अब गोल्ड-सिल्वर और प्लैटिनम से तैयार की गई ज्वैलरी का आयात बिना मंजूरी के नहीं किया जा सकेगा। केंद्रीय सरकार ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के म‍िसयूज को रोकने के मकसद से DGFT डायरेक्टरेट जर्नल ऑफ फॉरेन ट्रेड के माध्यम से नई पाबंदियां लागू की हैं।

    पिछले एक साल के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिली थी। 29 जनवरी 2026 को सोने ने 1.92 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई छुआ जबकि चांदी 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। इस बढ़ती कीमत और FTA के गलत इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ने आयात नियमों को कड़ा कर दिया है।

    DGFT की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अब कस्टम्स टैरिफ हेडिंग 7113 के अंतर्गत आने वाले सभी सोने चांदी और प्लैटिनम से तैयार ज्वैलरी को रिस्ट्रीक्टेड कर दिया गया है। इसका मतलब है कि किसी भी तरह के आयात के लिए पहले DGFT से लाइसेंस या मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। यह नियम पुराने कॉन्ट्रैक्ट एडवांस पेमेंट या शिपमेंट की स्थिति को देखते हुए भी लागू होगा।

    हालांकि पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। एक्सपोर्ट स्पेशल इकोनॉमिक जोन और फॉरेन ट्रेड पॉलिसी के जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्लान के तहत होने वाला आयात इस पाबंदी से बाहर रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि कुछ आयातक भारत-आसियान FTA का गलत इस्तेमाल कर रहे थे और इसी कारण नई नियमावली बनाई गई।

    सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि सही कारोबारियों को कोई नुकसान नहीं होगा। DGFT के लाइसेंस लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जाएगी ताकि व्यवसायिक गतिविधियां बाधित न हों। यह कदम पिछले साल की रोकथामों का विस्तार है सितंबर 2025 में चांदी ज्वैलरी और नवंबर 2025 में कुछ प्रकार की प्लैटिनम ज्वैलरी के आयात पर रोक लागू की गई थी।

    इस नए नियम के बाद देश में ज्वैलरी के दामों में असर पड़ सकता है। बिना लाइसेंस के आयात पर रोक लगने से कारोबारी महंगी ज्वैलरी को सीमित मात्रा में ही ला पाएंगे जिससे कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है। आम ग्राहकों के लिए यह समय सोने और चांदी की खरीद में सोच-समझकर कदम रखने का होगा।

    सरकार का यह कदम FTA के म‍िसयूज को रोकने और आयात प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। DGFT लाइसेंस अनिवार्य करने से कारोबारियों को नियमों का पालन करना होगा और अवैध तरीके से ज्वैलरी लाने की छूट नहीं रहेगी।

    इस फैसले का असर न केवल कारोबारी बल्कि आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि आयात पर पाबंदी से कुछ समय के लिए कीमतों में स्थिरता आएगी लेकिन मांग और आपूर्ति के हिसाब से बाजार में हलचल बनी रहेगी।

  • विमान ईंधन के दाम बढ़ने के बाद हवाई यात्रा भी हुई महंगी… इंडिगो ₹10,000 तक लगाएगा फ्यूल चार्ज

    विमान ईंधन के दाम बढ़ने के बाद हवाई यात्रा भी हुई महंगी… इंडिगो ₹10,000 तक लगाएगा फ्यूल चार्ज


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (Country’s Largest Airline Indigo) ने बुधवार को कहा कि वह विमान ईंधन की कीमतों में वृद्धि (Jet Fuel Prices Rise) के बाद 2 अप्रैल से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 275 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का संशोधित ईंधन शुल्क लगाना शुरू करेगी। ईंधन शुल्क में इस बढ़ोतरी से विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के हवाई किराए बढ़ने तय हैं। एयरलाइन की यह घोषणा उस दिन आई है, जब विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में संशोधन किया गया और सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए कीमतों में 25 प्रतिशत की आंशिक बढ़ोतरी का फैसला किया।

    पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में आए उछाल के मद्देनजर एयरलाइन 14 मार्च से ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर 425 रुपये से 2,300 रुपये तक का ईंधन शुल्क वसूल रही है। घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर संशोधित ईंधन शुल्क 275 रुपये से 950 रुपये के बीच होगा।


    कितनी बढ़ोतरी होगी?

    इंडिगो ने एक बयान में कहा कि इंडिगो ने अलग-अलग यात्रा दूरियों के हिसाब से अपने घरेलू ईंधन शुल्क को फिर से निर्धारित किया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मामले में दूरी के आधार पर ईंधन शुल्क 900 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक होगा।


    कब से होगी बढ़ोतरी?

    बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के लिए पिछले महीने में एटीएफ की कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं, जिसके चलते इन मार्गों पर एयरलाइन की ऑपरेशनल कॉस्ट पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। ये संशोधित शुल्क 2 अप्रैल को रात 00:01 बजे से लागू होंगे।

    एयरलाइन कंपनियों ने बुधवार को कहा कि विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में आंशिक वृद्धि से घरेलू हवाई यात्रा की लागत को संतुलित रखने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच यह वृद्धि की गई है।

    स्पाइसजेट के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा कि सरकार की जेट ईंधन की कीमतों में केवल आंशिक वृद्धि की अनुमति देने का निर्णय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने बयान में यह भी कहा कि समय पर किये गये इस हस्तक्षेप से हाल के समय के सबसे चुनौतीपूर्ण वैश्विक संकट में से एक से निपटने में एयरलाइंस को काफी मदद मिलेगी।

    नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय के परामर्श से घरेलू विमानन कंपनियों के लिए केवल 25 प्रतिशत यानी 15 रुपये प्रति लीटर की आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि लागू करने का निर्णय लिया है।

    संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया क्षेत्र में हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण एयरलाइंस पहले से ही हाई ऑपरेशनल कॉस्ट वहन कर रही हैं। इस स्थिति के कारण एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ रही है।

  • मध्य पूर्व में तनाव का असर: केंद्र ने SEZ यूनिट्स के लिए दरों में कटौती की घोषणा

    मध्य पूर्व में तनाव का असर: केंद्र ने SEZ यूनिट्स के लिए दरों में कटौती की घोषणा


    नई दिल्ली। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने बुधवार को विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में काम कर रही पात्र इकाइयों के लिए घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में निर्मित वस्तुओं पर रियायती सीमा शुल्क दरों की घोषणा की। यह कदम केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई घोषणा के तहत उठाया गया है, ताकि वैश्विक व्यापार में जारी व्यवधानों के कारण एसईजेड इकाइयों के सामने आ रही चुनौतियों को कम किया जा सके।

    राहत योजना की अवधि और कानूनी आधार
    सीबीआईसी ने इस राहत को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25 के तहत जारी अधिसूचना 11/2026-सीमा शुल्क (31 मार्च 2026) के माध्यम से लागू किया है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत पात्र एसईजेड इकाइयों को घरेलू टैरिफ क्षेत्र में कार्यरत इकाइयों के समान अवसर सुनिश्चित करते हुए रियायती दरों पर बिक्री की अनुमति दी जाएगी।

    सीमा शुल्क दरों में कटौती का विवरण
    राहत योजना के अंतर्गत विभिन्न सीमा शुल्क दरों को घटाया गया है:

    वर्तमान में 30%-40% सीमा शुल्क वाले माल पर अब 20% शुल्क लागू होगा।
    20%-30% सीमा शुल्क वाले माल की दर घटाकर 15% कर दी गई है।
    20% सीमा शुल्क वाले माल पर अब 12.5% शुल्क लगेगा।
    12.5%-15% सीमा शुल्क वाले माल पर 10% शुल्क लागू होगा।
    10% सीमा शुल्क को घटाकर 9%, और 7.5% को घटाकर 6.5% किया गया।

    शर्तें और मूल्यवर्धन आवश्यकता
    इस योजना का लाभ लेने वाली एसईजेड इकाइयों को सुनिश्चित करना होगा कि उनके निर्मित माल में इनपुट की तुलना में कम से कम 20% मूल्यवर्धन हो। इसके साथ ही, डीटीए में रियायती दरों पर की गई बिक्री पिछले तीन वित्तीय वर्षों में किसी भी वर्ष के उच्चतम वार्षिक एफओबी निर्यात मूल्य के 30% से अधिक नहीं होगी।

    राहत यो जना का क्रियान्वयन
    इस राहत योजना को केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड की स्वचालित प्रणाली के माध्यम से लागू किया जाएगा। डीटीए क्लीयरेंस के लिए एंट्री बिलों का मूल्यांकन फेसलेस असेसमेंट सिस्टम के तहत किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक व्यापार व्यवधानों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एसईजेड इकाइयों को राहत देने के लिए सीमा शुल्क दरों में कटौती की है। यह कदम देश में विनिर्माण इकाइयों के लिए व्यापार को बढ़ावा देने और निर्यात पर जोर बनाए रखने का स्पष्ट संकेत है।

  • अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2026 में बनाई बड़ी उपलब्धि, नवीकरणीय ऊर्जा में 5 गीगावाट से अधिक की वृद्धि

    अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2026 में बनाई बड़ी उपलब्धि, नवीकरणीय ऊर्जा में 5 गीगावाट से अधिक की वृद्धि


    नई दिल्ली।अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने वित्त वर्ष 2025–26 में 5 गीगावाट (5,051 मेगावाट) से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़कर अपनी कुल परिचालन क्षमता 19.3 गीगावाट तक पहुंचा दी है। चीन को छोड़कर यह किसी भी कंपनी द्वारा एक साल में की गई सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड क्षमता वृद्धि मानी जा रही है।

    नई क्षमता का विवरण

    नई जोड़ी गई क्षमता में 3.4 गीगावाट सौर ऊर्जा, 0.7 गीगावाट पवन ऊर्जा और 1 गीगावाट पवन-सौर हाइब्रिड क्षमता शामिल है। कंपनी के अनुसार, यह हर साल लगभग 1 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करेगी। कुल 19.3 गीगावाट क्षमता सालाना 3.6 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन ऑफसेट करने में सक्षम है।

    एजीईएल का लक्ष्य और वैश्विक महत्व


    एजीईएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा कि 5 गीगावाट से अधिक नई क्षमता जोड़ना भारत के रिन्यूएबल ऊर्जा सेक्टर के लिए अहम मोड़ है। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी देश के रूप में पहचान मिलेगी और लो-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी। यह उपलब्धि 2030 तक 50 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम है।

    खावड़ा प्रोजेक्ट: दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल ऊर्जा केंद्र


    ज्यादातर नई क्षमता गुजरात के खावड़ा में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट में जोड़ी गई है। 538 वर्ग किलोमीटर में फैले इस प्रोजेक्ट में अब तक 9.4 गीगावाट क्षमता स्थापित की जा चुकी है और 2029 तक 30 गीगावाट का लक्ष्य है।

    बैटरी स्टोरेज और तकनीकी उन्नयन


    कंपनी ने खावड़ा में 1,376 मेगावाट-घंटे की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) क्षमता भी शुरू की है। यह दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन प्रोजेक्ट्स में से एक है और सिर्फ 8 महीनों में पूरा किया गया। इसके जरिए ग्रिड की स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद मिलती है।

    सोलर और पवन टेक्नोलॉजी का इनोवेशन

    एडवांस बाइफेशियल सोलर मॉड्यूल्स दोनों तरफ से सूरज की रोशनी लेकर बिजली बनाते हैं।
    सोलर ट्रैकर्स से उत्पादन अधिकतम किया जाता है।
    5.2 मेगावाट के पवन टर्बाइन दुनिया के सबसे शक्तिशाली ऑनशोर टर्बाइनों में शामिल हैं।
    पानी रहित रोबोटिक क्लीनिंग सिस्टम से सोलर पैनल की सफाई होती है, जिससे लगभग शून्य पानी की जरूरत पड़ती है और दक्षता बढ़ती है।

     अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2026 में 5 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा जोड़कर भारत और दुनिया में रिकॉर्ड दर्ज किया। खावड़ा प्रोजेक्ट और बीईएसएस क्षमता के साथ कंपनी स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन कम करने के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन रही है, जबकि सोलर और पवन टेक्नोलॉजी में नवाचार से उत्पादन और दक्षता दोनों बढ़ रही है।
  • नए वित्तीय साल में नए नियम: 1 अप्रैल से आयकर और LPG में बदलाव, जानिए असर

    नए वित्तीय साल में नए नियम: 1 अप्रैल से आयकर और LPG में बदलाव, जानिए असर


    नई दिल्ली। भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही आम आदमी की आर्थिक जिंदगी में कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। करीब 65 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह अब नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो गया है, जिसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है। इसके साथ ही जीएसटी व्यवस्था, बैंकिंग नियम, डिजिटल पेमेंट और रोजमर्रा के खर्चों से जुड़े कई अहम बदलाव भी लागू हुए हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

    नए टैक्स सिस्टम के तहत अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा। सरकार ने 12 लाख रुपए तक की आय को करमुक्त रखने का ऐलान किया है। साथ ही, टैक्स से जुड़े नियमों को सरल भाषा में पेश किया गया है ताकि आम लोगों को समझने में आसानी हो और अनुपालन बेहतर हो सके।

    आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी, जबकि अन्य करदाताओं के लिए यह 31 अगस्त तय की गई है। जिन मामलों में ऑडिट जरूरी है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर होगी।

    इसके अलावा, अब गिफ्ट और वाउचर पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 15,000 रुपए कर दी गई है, जो पहले 5,000 रुपए थी। बच्चों के शिक्षा और हॉस्टल भत्ते में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिससे परिवारों को राहत मिलेगी।

    हालांकि, इस बीच महंगाई का दबाव भी बढ़ता नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2078.50 रुपए तक पहुंच गई है, जो पहले 1884.50 रुपए थी। इसका असर होटल और रेस्टोरेंट के खाने-पीने की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे आम लोगों का खर्च बढ़ना तय है। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    सरकारी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। एक्सपी100 पेट्रोल की कीमत अब 160 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 149 रुपए थी। इसी तरह कंपनी ने एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल (प्रीमियम डीजल) की कीमत भी बढ़ा दी है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 92.99 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 91.49 रुपए थी। हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, भारत के प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं।

    पैन कार्ड से जुड़े नियम भी सख्त कर दिए गए हैं। अब सिर्फ आधार के आधार पर पैन बनवाना संभव नहीं होगा और अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा। बड़े लेनदेन के लिए पैन अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, क्रेडिट कार्ड से बड़े खर्च की जानकारी अब आयकर विभाग को दी जाएगी, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी।

    मकान किराया भत्ता (एचआरए) के नियमों को भी कड़ा किया गया है। अब किराये की छूट पाने के लिए मकान मालिक का पैन और अन्य विवरण देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को मेट्रो शहरों में शामिल कर लिया गया है, जिससे इन शहरों में रहने वालों को 50 प्रतिशत तक एचआरए छूट मिलेगी।

    बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में भी बदलाव हुए हैं। अब एटीएम से यूपीआई के जरिए नकद निकासी को भी फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट में गिना जाएगा। वहीं, सभी डिजिटल पेमेंट के लिए ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड पर रोक लगेगी।

    यात्रियों के लिए रेलवे नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब कंफर्म टिकट पर रिफंड पाने के लिए ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना होगा। वहीं, बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा अब ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक उपलब्ध रहेगी।

    हाईवे पर सफर करने वालों के लिए फास्टैग महंगा हो गया है और टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब केवल डिजिटल माध्यमों से ही भुगतान करना होगा, अन्यथा जुर्माना देना पड़ सकता है।

  • निवेशकों के लिए राहत: पुराने निवेश ट्रांसफर से होने वाली आय पर नहीं लगेगा जीएएआर

    निवेशकों के लिए राहत: पुराने निवेश ट्रांसफर से होने वाली आय पर नहीं लगेगा जीएएआर


    नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इनकम टैक्स नियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेश के ट्रांसफर से होने वाली आय पर जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल्स (जीएएआर) लागू नहीं होगा। यह संशोधन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और निवेशकों को पुराने निवेशों (लेगेसी इन्वेस्टमेंट) पर भरोसा और स्पष्टता प्रदान करेगा।

    पीछे का घटनाक्रम और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

    यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा मॉरीशस स्थित टाइगर ग्लोबल इंटरनेशनल के खिलाफ दिए गए फैसले के बाद आया है। कोर्ट ने 2018 में फ्लिपकार्ट से एग्जिट पर हुए मुनाफे पर आयकर विभाग के टैक्स लगाने के अधिकार को सही ठहराया था। इससे स्पष्ट हुआ कि पुराने निवेश और नए निवेश पर टैक्स नियमों की व्याख्या में अंतर हो सकता है, जिसे अब सीबीडीटी ने स्पष्टीकरण के जरिए दूर किया है।

    नए आयकर ढांचे में अन्य बदलाव

    नए वित्त वर्ष से लागू नए आयकर कानून ने 1961 के पुराने कानून की जगह ली है। इस कानून में अनुपालन, शब्दावली और टैक्स प्रणाली में कई बदलाव किए गए हैं।

    टैक्स ईयर का परिचय: अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ (एफवाई) और ‘असेसमेंट ईयर’ (एवाई) की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ लागू होगा, जिससे रिटर्न फाइल करना आसान होगा और टैक्सपेयर्स के लिए स्पष्टता बढ़ेगी आईटीआर फाइलिंग समय-सीमा: सैलरी पाने वाले लोगों के लिए डेडलाइन 31 जुलाई रहेगी, जबकि सेल्फ-एम्प्लॉयड और प्रोफेशनल्स जैसे नॉन-ऑडिट मामलों में अब 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।

    एफएंडओ ट्रेडिंग शुल्क: यूनियन बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाए जाने के कारण फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) में ट्रेडिंग पर शुल्क बढ़ा दिया गया है।
    शेयर बायबैक टैक्स: अब कंपनियों के शेयर बायबैक पर टैक्स को ‘डिविडेंड’ की बजाय ‘कैपिटल गेन’ के रूप में लिया जाएगा, जिससे प्रमोटर्स और रिटेल निवेशकों दोनों पर असर पड़ेगा।

     सीबीडीटी ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेश पर जीएएआर लागू नहीं होगा। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे और निवेशकों को पुराने निवेशों पर भरोसा देंगे। इसके साथ ही नए आयकर कानून में टैक्स ईयर, आईटीआर समय-सीमा, एफएंडओ शुल्क और शेयर बायबैक टैक्स जैसी महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं, जो टैक्स प्रणाली को अधिक स्पष्ट और आसान बनाएंगे।

  • सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार

    सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर आप किसी दूसरे देश से हों और वहां क्रिकेट प्रमुख खेल न हो, तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सलीम दुर्रानी की कहानी इस कठिन रास्ते को पार करने वाले खिलाड़ियों में अद्वितीय है।

    अफगानिस्तान से जामनगर तक का सफर

    सलीम दुर्रानी का जन्म 11 दिसंबर 1934 को खैबर दर्रा, अफगानिस्तान में हुआ। उनके पिता अब्दुल अजीज दुर्रानी पेशेवर क्रिकेटर थे। 1935 में कराची के दौरे पर अब्दुल अजीज की बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से प्रभावित होकर नवानगर (आज का जामनगर) के जाम साहिब दिग्विजयसिंह रणजीतसिंह ने उन्हें सब-इंस्पेक्टर की नौकरी का ऑफर दिया। इसी अवसर पर दुर्रानी परिवार जामनगर में बस गया। सलीम केवल तीन साल के थे जब वह भारत आ गए। 1947 के बंटवारे के बाद उनके पिता पाकिस्तान चले गए, जबकि उनका परिवार जामनगर में रहा।

    ऑलराउंडर की भूमिका और टेस्ट करियर

    दुर्रानी एक ऑलराउंडर थे। वह धीमे बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज और बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। उनके छक्के मारने की क्षमता उन्हें खास बनाती थी। अफगानिस्तान में जन्मे और भारतीय टीम के लिए खेलते हुए, दुर्रानी 1960 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद 1973 तक 29 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उन्होंने 50 पारियों में 1 शतक और 7 अर्धशतक बनाकर 1202 रन बनाए और 75 विकेट लिए।

    महत्वपूर्ण जीतों में अहम भूमिका

    1961-62 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की सीरीज जीत में दुर्रानी ने कोलकाता और चेन्नई में क्रमशः 8 और 10 विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई। एक दशक बाद, 1970 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की पहली जीत में भी उन्होंने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स जैसे दिग्गजों को आउट किया, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ।

    अर्जुन पुरस्कार और जीवन सम्मान

    सलीम दुर्रानी पहले क्रिकेटर थे जिन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता। 2011 में उन्हें सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड का सर्वोच्च पुरस्कार है।

    विदाई: 88 साल की उम्र में

    सलीम दुर्रानी ने 2 अप्रैल 2023 को 88 वर्ष की उम्र में कैंसर से अंतिम सांस ली। उनका क्रिकेट और भारतीय खेल जगत में योगदान आज भी याद किया जाता है।