Category: Economy

  • वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच भी भारतीय शेयर बाजार का दमदार प्रदर्शन, सेंसेक्स-निफ्टी ने साप्ताहिक बढ़त के साथ दिखाया भरोसा

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी अनिश्चितता के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने बीते सप्ताह उल्लेखनीय मजबूती का प्रदर्शन किया। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों, सरकार के बड़े विनिर्माण संबंधी फैसलों और निवेशकों के सकारात्मक रुख ने घरेलू बाजार को सहारा दिया। इसी का परिणाम रहा कि सप्ताह के दौरान प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए और निवेशकों का भरोसा कायम रहा।

    सप्ताह भर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 582.06 अंकों यानी करीब 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए मजबूत स्थिति में रहा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 127.40 अंकों यानी लगभग 0.5 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बाजार में खरीदारी का उत्साह और अधिक बढ़ गया। सेंसेक्स 964.58 अंकों की छलांग लगाकर 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी इस बात का संकेत रही कि वैश्विक चुनौतियों के बीच भी घरेलू निवेशकों का विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था पर बना हुआ है।

    सप्ताह के दौरान निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर बनी रही। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता का माहौल पैदा किया। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके बावजूद भारतीय बाजार पर इन घटनाओं का सीमित प्रभाव देखने को मिला, क्योंकि घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक आर्थिक संकेतकों ने बाजार को संतुलित बनाए रखा।

    बाजार को सबसे बड़ा सहारा प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों से मिला। कई बड़ी कंपनियों ने अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिससे आईटी और चुनिंदा अन्य क्षेत्रों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली दो बड़ी विनिर्माण योजनाओं को मंजूरी दिए जाने से औद्योगिक विकास और निवेश को लेकर सकारात्मक माहौल बना। इन घोषणाओं ने दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं को लेकर निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी क्षेत्र पूरे सप्ताह सबसे अधिक चर्चा में रहा। इस क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई, जिससे तकनीकी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मीडिया, प्राइवेट बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर रियल्टी, मेटल, डिफेंस, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक जैसे कुछ क्षेत्रों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में ही अधिक भरोसा दिखाया।

    हालांकि प्रमुख सूचकांकों में मजबूती रही, लेकिन व्यापक बाजार अपेक्षाकृत कमजोर नजर आया। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सप्ताह के दौरान गिरावट दर्ज की गई। वहीं बाजार की अस्थिरता दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स भी बढ़ा, जो यह संकेत देता है कि वैश्विक परिस्थितियों को लेकर निवेशकों के बीच सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों, प्रबंधन के भविष्य के संकेतों, मानसून की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन मजबूत बना रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।

  • भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    भारत के निजी स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, विक्रम-1 की सफलता पर गौतम अदाणी ने युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की सराहना की

    नई दिल्ली । भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग के साथ एक नया इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का सशक्त प्रमाण बताते हुए स्काईरूट एयरोस्पेस, इसरो और आईएन-स्पेस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की नवाचार क्षमता, युवा प्रतिभा और निजी अंतरिक्ष उद्योग की बढ़ती ताकत का प्रतीक है।

    गौतम अदाणी ने अपने संदेश में कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल उड़ान ने मिशन के सभी निर्धारित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन चंदाना, भारत डाका और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस मिशन की सफलता सामूहिक वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता का परिणाम है।

    उन्होंने इस उपलब्धि को देश की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां सफलतापूर्वक ऑर्बिटल लॉन्च करने की क्षमता प्रदर्शित कर चुकी हैं। उनके अनुसार यह उपलब्धि वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की मजबूत होती उपस्थिति और तकनीकी आत्मविश्वास को भी दर्शाती है।

    गौतम अदाणी ने विशेष रूप से मिशन से जुड़ी युवा टीम का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। उन्होंने कहा कि इतनी युवा टीम द्वारा हासिल की गई यह सफलता पूरी दुनिया के सामने भारत की नई पीढ़ी की क्षमता और नवाचार की शक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनका मानना है कि देश के युवाओं की प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच भारत को भविष्य की वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में नई पहचान दिला सकती है।

    हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। यह चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। मिशन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेज, लचीली और मांग आधारित लॉन्च सेवाएं उपलब्ध कराना है, जिससे भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष सेवाओं को नई गति मिल सके।

    विक्रम-1 का नाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह प्रक्षेपण यान छोटे उपग्रह मिशनों की बढ़ती वैश्विक मांग को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। सफल परीक्षण के बाद भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    करीब सात मंजिला ऊंचाई वाले इस रॉकेट को पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्षेपित किया गया। इस मिशन की सफलता ने यह संकेत दिया है कि भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी उपलब्धियां देश को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं और वैश्विक वाणिज्यिक स्पेस मार्केट में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • 15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी

    15 महीने बाद Apple की धमाकेदार वापसी, Nvidia को पछाड़कर बनी दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी


    नई दिल्ली। आईफोन बनाने वाली दिग्गज टेक कंपनी Apple ने करीब 15 महीने बाद एक बार फिर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब हासिल कर लिया है। कंपनी ने मार्केट वैल्यूएशन के मामले में AI चिप निर्माता Nvidia को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान पर कब्जा कर लिया।

    Apple की कुल वैल्यूएशन करीब 4.88 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई, जबकि Nvidia की वैल्यूएशन में 3.5 प्रतिशत की गिरावट के बाद यह लगभग 4.86 ट्रिलियन डॉलर रह गई। इस बदलाव के साथ टेक कंपनियों की वैश्विक रैंकिंग में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिला और Apple फिर से नंबर-1 कंपनी बन गई।

    खास बात यह है कि Apple पिछले साल अप्रैल के बाद पहली बार इस मुकाम पर लौटी है। कंपनी की यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब सीईओ टिम कुक का कार्यकाल खत्म होने की चर्चाएं तेज हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुक सितंबर में अपना पद हार्डवेयर विशेषज्ञ जॉन टर्नस को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं।

    निवेशकों का भरोसा Apple पर क्यों बढ़ा?
    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों का नजरिया अब बदल रहा है। कुछ समय पहले तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर में Nvidia को सबसे बड़ा फायदा उठाने वाली कंपनी माना जा रहा था, लेकिन अब Apple की मजबूत कमाई, विशाल इकोसिस्टम और सर्विस बिजनेस ने निवेशकों का ध्यान फिर अपनी ओर खींचा है।

    BRI वेल्थ मैनेजमेंट के इन्वेस्टमेंट हेड टोनी मीडोज के अनुसार, Apple को पहले इसलिए पीछे माना जा रहा था क्योंकि कंपनी AI मॉडल बनाने पर भारी खर्च नहीं कर रही थी। लेकिन अब बाजार की सोच बदल रही है।

    उनका कहना है कि Apple पर कैपिटल एक्सपेंडिचर का दबाव कम है और कंपनी अपनी सर्विसेज, मजबूत इकोसिस्टम और हार्डवेयर अपग्रेड के जरिए AI से कमाई करने की बेहतर स्थिति में है। यह बदलाव AI से जुड़े संभावित फायदों के बजाय कंपनी की स्थिर कमाई पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    Siri में बदलाव से Apple को उम्मीद
    Apple ने हाल ही में अपने वर्चुअल असिस्टेंट Siri में लंबे समय से चल रहे बदलावों को लागू किया है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि नया और बेहतर Siri सिस्टम AI के क्षेत्र में Apple को बड़ी टेक कंपनियों और नए स्टार्टअप्स के करीब लाने में मदद करेगा।

    कुछ विश्लेषकों का मानना है कि Apple के पास हर iPhone में मौजूद यूजर डेटा के रूप में AI के लिए बड़ा आधार है। यह डेटा Siri को अधिक उपयोगी और स्मार्ट बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, कंपनी के सामने चुनौती यह है कि यूजर प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए इस डेटा की क्षमता का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए।

    Nvidia की वापसी की संभावना भी बरकरार
    हालांकि बाजार की स्थिति बदलने पर Nvidia फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर सकती है। Nvidia अब भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी लाभार्थी कंपनियों में शामिल है। कंपनी के ग्राफिक्स प्रोसेसर (GPU) दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश जनरेटिव AI मॉडल को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि AI सेक्टर में Nvidia की मजबूत पकड़ अभी भी बनी हुई है।

  • देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी

    देश में अगले साल आ सकते हैं 10-20 रुपये के प्लास्टिक के नोट…. RBI ने शुरू की तैयारी


    नई दिल्ली।
    भारत (Inida) में जल्द ही कटे-फटे और गंदे नोटों की समस्या हमेशा के लिए खत्म होने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India ) ने देश में पॉलीमर (Polymer) यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत फैसला कर लिया है और अगले साल तक 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में उतारे जा सकते हैं। क्रेडिट कार्ड की तरह कड़े होने के बजाय ये नोट बेहद पतले, हल्के और लचीले होंगे।

    भारत में पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट चलन में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल दस व बीस रुपये के प्लास्टिक नोट बाजार में लाए जाएंगे। इसमें सुरक्षा के उन्हीं उन्नत नियमों का पालन किया जाएगा जो कागज के नोट छापने में अपनाए जाते हैं। अगले साल यह नोट बाजार में आ सकते हैं।

    रिजर्व बैंक ने पॉलीमर शीट आपूर्ति के लिए निजी कंपनियों को भी आमंत्रित किया है। शुरुआती चरण सफल रहा तो बड़े नोट भी चरणबद्ध तरीके से लाए जाएंगे। इन पॉलीमर नोटों के लिए डिजाइन, आकार व छपाई उसी तरह होगी जैसे कागज के नोट पर होगी। फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इन नोटों में विशेष तकनीक अपनाई जाएगी।

    रिजर्व बैंक के अधिकारियों के मुताबिक पॉलीमर नोटों के प्रचलन में आने की समय सीमा नहीं बताई जा सकती। इतना जरूर है कि पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट लाने का नीतिगत निर्णय हो चुका है और चार चरणों से गुजरने के बाद पॉलीमर नोट छापे जाएंगे।


    पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे नोट

    इस पूरी प्रक्रिया में वक्त लगना स्वाभाविक है। इसमें मौसम, इस्तेमाल के तौर-तरीकों व जनता की सहूलियत का भी ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में कितने नोट तैयार होंगे इसका आकलन बाजार में दस व बीस रुपये मूल्य वर्ग के नोटों की उपलब्धता, एटीएम व बैंकों की जरूरत के हिसाब से तय होगा। यह नोट एक पतले, लचीले प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनेंगे। ये क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह कठोर नहीं हल्के, लचीले होंगे।

    पहले भी हो चुकी है कवायद…वर्ष 2012 में भारत सरकार ने मैसूर, जयपुर, भुवनेश्वर और शिमला समेत कुछ शहरों में 10 रुपये के एक अरब पॉलीमर नोटों के परीक्षण को मंजूरी दी थी। लेकिन तकनीकी चुनौतियों के कारण यह पहल आगे नहीं बढ़ सकी।


    कटे-फटे नोटों से निजात

    लोगों को कटे, फटे व गंदे नोटों से निजात मिलेगी। इसे वह आसानी से ले जा सकेंगे। पॉलीमर करेंसी नोट में नए सुरक्षा फीचर होंगे। इससे नकली नोट तैयार होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी। पॉलीमर नोटों में माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और विशेष स्याही जैसी उन्नत, सुविधाओं का उपयोग होगा। कागज के मुकाबले इनके निर्माण पर खर्च भी कम आएगा। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट कई वर्षों से चलन में हैं।

    नोटों की छपाई पर बढ़ रहा खर्च
    रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, नोटों की छपाई पर व्यय वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 6,372.8 करोड़ रुपये हो गया, यह पिछले वर्ष 5,101.4 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि मुख्य रूप से नोटों की बढ़ती मांग के कारण हुई है। वित्त वर्ष 2025 में, लगभग 23.8 अरब गंदे नोटों का निस्तारण किया गया। 10 रुपये और 20 रुपये जैसे कम मूल्यवर्ग के नोटों की जांच सबसे पहले होने की संभावना है।

  • मुकेश अंबानी को बड़ा झटका…. पहली तिमाही में 22% गिरा रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा

    मुकेश अंबानी को बड़ा झटका…. पहली तिमाही में 22% गिरा रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा


    मुम्बई।
    मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) (Reliance Industries Limited – RIL) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी का मुनाफा (Profit) सालाना आधार पर 22 प्रतिशत घटकर 20,946 करोड़ रुपये रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि पिछले साल की समान तिमाही में एशियन पेंट्स की हिस्सेदारी बेचने से उसे एकबारगी बड़ा लाभ हुआ था, जिससे उसका मुनाफा 26,994 करोड़ रुपये रहा था। इस वजह से इस बार लाभ में गिरावट दिख रही है। रिलायंस ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में पिछले साल जैसा 8,924 करोड़ रुपये का असाधारण लाभ नहीं था। हालांकि, अगर इस एकबारगी लाभ को हटा दिए जाए, तो कंपनी का मुख्य कारोबार स्थिर बना रहा।


    रिलायंस रिटेल के कारोबार का हाल

    रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उसका नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14.1 प्रतिशत घटकर 2,805 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशन्स से रिलायंस रिटेल की EBITDA 1.8 प्रतिशत घटकर 5,935 करोड़ रुपये रह गई। जून में खत्म हुई तिमाही के दौरान, कंपनी की फाइनेंस कॉस्ट सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 793 करोड़ रुपये हो गई।


    जियो प्लेटफॉर्म्स के मुनाफे में उछाल

    वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट प्रॉफिट 9.2 प्रतिशत बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा। जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (जेपीएल) ने वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में 7,110 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। कंपनी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसकी परिचालन आय 11.8 प्रतिशत बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये हो गई, जो 2025-26 की समान तिमाही में 35,032 करोड़ रुपये थी। जियो ने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स का राजस्व सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़ा है।

    इसके पीछे ग्राहक बाजार हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि, उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में बढ़ोतरी और डिजिटल सेवाओं के कारोबार में मजबूत वृद्धि प्रमुख कारण रहे। तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स का एआरपीयू 3.3 प्रतिशत बढ़कर 215.6 रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में कंपनी का एआरपीयू 208.8 रुपये था। कंपनी का ग्राहक आधार सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत बढ़कर 53.3 करोड़ हो गया, जो 2025-26 की समान तिमाही में 49.8 करोड़ था।


    शेयर का हाल

    रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर की बात करें तो शुक्रवार को 1326.50 रुपये पर बंद हुआ। एक दिन पहले के मुकाबले शेयर 2.59% बढ़कर बंद हुआ। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 1,611.20 रुपये है।

  • शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    शानदार तेजी के साथ बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 965 अंक उछला तो निफ्टी 24,334 के पार; बैंकिंग और आईटी शेयरों ने दिखाई दमदार मजबूती

    नई दिल्ली ।सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बड़ी राहत दी। वैश्विक स्तर पर मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का मजबूत माहौल देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 964.58 अंकों की बढ़त के साथ 78,151.45 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 261.55 अंक चढ़कर 24,334.30 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त ने बाजार में निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाया।

    कारोबार की शुरुआत भी सकारात्मक रही। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से ऊपर खुला और दिनभर खरीदारी के दम पर लगातार मजबूत बना रहा। कारोबार के दौरान यह 78,282.55 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी ने भी शुरुआती बढ़त को बरकरार रखते हुए दिन के दौरान 24,367.30 का इंट्रा-डे हाई बनाया। बाजार बंद होने तक प्रमुख सूचकांक अपने ऊंचे स्तरों के करीब बने रहे, जिससे पूरे कारोबारी सत्र में सकारात्मक रुझान देखने को मिला।

    बाजार की तेजी में सबसे बड़ी भूमिका बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों ने निभाई। निजी बैंकों में मजबूत खरीदारी के कारण निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक सबसे अधिक बढ़त दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा आईटी, बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती प्रदान की। निफ्टी 50 में टेक महिंद्रा, टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर प्रमुख बढ़त दर्ज करने वालों में शामिल रहे।

    हालांकि बाजार का रुख पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। फार्मा, हेल्थकेयर, मेटल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला। इसी तरह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित कमजोरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर इन वर्गों पर देखने को मिला, लेकिन बड़े शेयरों में मजबूत खरीदारी ने पूरे बाजार को सकारात्मक दिशा दी।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कई कारोबारी सत्रों से सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद बाजार ने महत्वपूर्ण तकनीकी ब्रेकआउट दिया है। इसे निवेशकों के बढ़ते भरोसे और मजबूत बाजार धारणा का संकेत माना जा रहा है। तकनीकी संकेतकों के अनुसार निफ्टी अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि आरएसआई में भी सकारात्मक संकेत दिखाई दिए हैं। इससे निकट भविष्य में बाजार की मजबूती बरकरार रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो निफ्टी आने वाले कारोबारी सत्रों में 24,800 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। वहीं 24,200 का स्तर निकट अवधि के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर से नीचे जाता है तो कुछ समय के लिए सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है। फिलहाल घरेलू आर्थिक संकेतकों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यही कारक आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पहली तिमाही शानदार, 13 प्रतिशत बढ़ा शुद्ध मुनाफा; एनपीए में सुधार से वित्तीय स्थिति और मजबूत

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पहली तिमाही शानदार, 13 प्रतिशत बढ़ा शुद्ध मुनाफा; एनपीए में सुधार से वित्तीय स्थिति और मजबूत


    नई दिल्ली ।
    सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। अप्रैल से जून 2026 के दौरान बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 13.3 प्रतिशत बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये पहुंच गया। बैंक की ब्याज आय में बढ़ोतरी और प्रावधानों में कमी ने लाभप्रदता को मजबूती दी, जबकि परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला। हालांकि परिचालन लाभ में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।

    बैंक द्वारा जारी वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में शुद्ध मुनाफा 1,169 करोड़ रुपये था, जो इस बार बढ़कर 1,324 करोड़ रुपये हो गया। यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और वित्तीय संस्थान अपनी आय बढ़ाने के साथ जोखिम नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से प्राप्त आय और ब्याज पर किए गए खर्च के बीच का अंतर भी मजबूत रहा। यह सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 3,914 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 3,383 करोड़ रुपये था। विशेषज्ञों के अनुसार, नेट इंटरेस्ट इनकम में बढ़ोतरी बैंक की मुख्य बैंकिंग गतिविधियों की मजबूती को दर्शाती है।

    हालांकि बैंक के परिचालन लाभ में मामूली दबाव दिखाई दिया। पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 5.1 प्रतिशत घटकर 2,186 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 2,304 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद शुद्ध लाभ में वृद्धि इस बात का संकेत है कि बैंक ने खर्चों और जोखिम प्रबंधन पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा।

    बैंक ने इस तिमाही में प्रावधानों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की। अप्रैल-जून अवधि में प्रोविजन घटकर 401.6 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह 521.1 करोड़ रुपये था। पिछली तिमाही की तुलना में भी इसमें कमी दर्ज की गई है। प्रावधानों में गिरावट से बैंक की लाभप्रदता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

    परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंक का प्रदर्शन बेहतर रहा। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (जीएनपीए) अनुपात घटकर 2.60 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछली तिमाही में 2.67 प्रतिशत था। वहीं नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनएनपीए) अनुपात 0.49 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा। यह संकेत देता है कि बैंक खराब ऋणों पर नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहा है।

    बैंक ने तिमाही परिणामों के साथ किसी लाभांश की घोषणा नहीं की। वहीं शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के दौरान बैंक का शेयर मामूली गिरावट के साथ 31.70 रुपये पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर आने वाली तिमाहियों में बैंक की आय वृद्धि, ऋण विस्तार और परिसंपत्ति गुणवत्ता के प्रदर्शन पर बनी रहेगी।

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो लगभग स्थिर बना हुआ है, जबकि जमा राशि जुटाने की लागत में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे बैंक की परिचालन दक्षता और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का संकेत मिलता है। बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पहली तिमाही के ये परिणाम सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की वित्तीय मजबूती और स्थिर प्रदर्शन की दिशा में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

  • आईपीओ से पहले एनएसई पर उठे वैल्यूएशन के सवाल, ब्रोकरेज ने दी बिकवाली की सलाह; घटते ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट शेयर को बताया सबसे बड़ी चिंता

    आईपीओ से पहले एनएसई पर उठे वैल्यूएशन के सवाल, ब्रोकरेज ने दी बिकवाली की सलाह; घटते ट्रेडिंग वॉल्यूम और मार्केट शेयर को बताया सबसे बड़ी चिंता

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के प्रस्तावित आईपीओ से पहले बाजार में इसकी वैल्यूएशन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। एक प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ने एनएसई की कवरेज शुरू करते हुए निवेशकों को बिकवाली की सलाह दी है। आमतौर पर किसी कंपनी के आईपीओ से पहले इस तरह की राय कम ही देखने को मिलती है, इसलिए यह रिपोर्ट निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच विशेष चर्चा का विषय बन गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्सचेंज के ट्रेडिंग वॉल्यूम में लगातार आ रही गिरावट और बाजार हिस्सेदारी में कमी भविष्य की ग्रोथ पर दबाव डाल सकती है।

    ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि एनएसई की मौजूदा अनलिस्टेड मार्केट वैल्यू उसके वित्तीय प्रदर्शन की तुलना में अधिक दिखाई देती है। इसी आधार पर कंपनी के लिए 1,550 रुपये का लक्ष्य मूल्य निर्धारित किया गया है, जो अनलिस्टेड बाजार में प्रचलित करीब 2,085 रुपये के मूल्य से लगभग 26 प्रतिशत कम है। फर्म का कहना है कि मौजूदा स्तर पर निवेशकों को भविष्य में अपेक्षित रिटर्न सीमित मिल सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में एनएसई के परिचालन प्रदर्शन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। कंपनी की कुल परिचालन आय में वर्ष-दर-वर्ष गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि कारोबार की रफ्तार पहले की तुलना में कुछ धीमी हुई है। विशेष रूप से इक्विटी डेरिवेटिव्स से जुड़े कारोबार में ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होने का असर कंपनी की कमाई पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इससे एक्सचेंज के बाजार हिस्से पर भी दबाव बढ़ा है।

    एनएसई की आय का सबसे बड़ा स्रोत ट्रांजैक्शन चार्जेज माना जाता है। उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, इस मद से प्राप्त होने वाली आय में भी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा क्लियरिंग और सेटलमेंट सेवाओं से होने वाली कमाई में भी गिरावट देखने को मिली है। इन दोनों प्रमुख आय स्रोतों में कमी आने से कंपनी के कुल राजस्व पर प्रभाव पड़ा है, जिसे बाजार विशेषज्ञ भविष्य की चुनौती के रूप में देख रहे हैं।

    वित्तीय वर्ष 2026 के दौरान कंपनी की कुल परिचालन आय पिछले वित्त वर्ष की तुलना में तीन प्रतिशत से अधिक कम रही। वहीं ट्रांजैक्शन चार्जेज से प्राप्त आय में लगभग चार प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रेडिंग गतिविधियों में तेजी नहीं आती और बाजार हिस्सेदारी में सुधार नहीं होता, तो भविष्य में कंपनी के लिए उच्च वैल्यूएशन को बनाए रखना आसान नहीं होगा।

    हालांकि एनएसई भारतीय पूंजी बाजार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण एक्सचेंज बना हुआ है तथा निवेशकों के बीच उसकी मजबूत पहचान है, लेकिन किसी भी कंपनी की दीर्घकालिक वैल्यू उसके वित्तीय प्रदर्शन और कारोबार की वृद्धि पर निर्भर करती है। इसी कारण विशेषज्ञ निवेशकों को आईपीओ से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, आय के स्रोतों, भविष्य की विकास संभावनाओं और वैल्यूएशन का संतुलित आकलन करने की सलाह दे रहे हैं।

    आने वाले समय में एनएसई का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार की सबसे चर्चित सार्वजनिक पेशकशों में शामिल हो सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर कंपनी के आगामी वित्तीय प्रदर्शन, नियामकीय प्रक्रियाओं और बाजार की प्रतिक्रिया पर बनी रहेगी। यदि कंपनी अपने कारोबार की गति बढ़ाने और आय के प्रमुख स्रोतों को मजबूत करने में सफल रहती है, तो भविष्य में निवेशकों का भरोसा और अधिक मजबूत हो सकता है। फिलहाल ब्रोकरेज की इस रिपोर्ट ने एनएसई के आईपीओ से पहले वैल्यूएशन और ग्रोथ को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

  • चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?

    चीन पर निर्भरता होगी कम: 51 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाने की तैयारी, क्या है सरकार का प्लान?


    नई दिल्ली। सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और चीन पर आयात निर्भरता घटाने के लिए 51 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे प्रमुख आयातित उत्पादों की पहचान की है, जिनका उत्पादन देश में किया जा सकता है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए आयातित वस्तुओं का व्यापक आकलन किया गया।

    मार्च, 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में भारत ने 775 अरब डॉलर का आयात किया। इसमें करीब 398 अरब डॉलर के उत्पाद देश में बनाए जा सकते थे। सत्रों के मुताबिक, उत्पादों का चयन आर्थिक मजबूती, आपूर्ति शृंखला और चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने को ध्यान में रखकर किया गया है।
    विनिर्माण के लिए किन उत्पादों की हुई पहचान?
    विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जिन उत्पादों की पहचान की गई है, उनमें कपड़े, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग वाले कच्चे माल एवं कलपुर्जे शामिल हैं। इस सूची में शामिल करीब 100 उत्पादों पर तत्काल कार्रवाई होगी। इनका घरेलू उत्पादन बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये विनिर्माण क्षमता विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है।

    सिरदर्द बन रहा चीन से होने वाला आयात?
    भारत का 2025-26 में चीन से आयात 132 अरब डॉलर था। यह अन्य देशों के मुकाबले सबसे अधिक है। इसमें फैक्टरियों के लिए जरूरी इनपुट और मशीनरी भी शामिल हैं। सरकार ने पाया, पिछले साल आयातित 48.3 करोड़ डॉलर के जूतों का सोल भारत में बनने में दो हफ्ते लगते हैं, जबकि चीन में तीन से पांच दिन लगते हैं।

    केंद्र का मकसद ताइवान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और इटली की फर्मों संग संयुक्त उद्यम बनाकर इस अंतर को पाटना है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात हैं। चीनी सोलर फोटोवोल्टिक सेल घरेलू निर्माताओं पर भारी पड़ रहे हैं।

  • त्योहारी सीजन में बिगड़ा रसोई का बजट….! एक माह में 8% महंगा हुआ गेहूं, खाद्य तेल में भी तेजी के आसार….

    त्योहारी सीजन में बिगड़ा रसोई का बजट….! एक माह में 8% महंगा हुआ गेहूं, खाद्य तेल में भी तेजी के आसार….


    नई दिल्ली।
    त्योहारी सीजन (Festive Season) से ठीक पहले रसोई का बजट (Kitchen Budget) फिर बिगड़ सकता है। घरेलू बाजार (Domestic Market) में पिछले एक माह में गेहूं की कीमतें (Wheat prices) 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी आशंका है।

    काले सागर में आपूर्ति के बढ़ते जोखिमों के कारण शिकागो गेहूं वायदा पिछले सत्र में 5 फीसदी उछलने के बाद दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। यूक्रेन के बंदरगाह पर हुए हमलों से गेहूं निर्यात प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, अजोव सागर और केर्च जलडमरूमध्य में प्रतिबंध से रूस का गेहूं निर्यात भी मुश्किल में आ गया है। इन व्यवधानों ने वैश्विक गेहूं बाजारों में एक जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है।

    गेहूं की वैश्विक कीमतों में आए इस उछाल का असर भारतीय बाजार पर भी हुआ है। इस दौरान इंदौर मंडी में गेहूं के दाम सबसे अधिक 8.44 फीसदी तक बढ़े हैं। दिल्ली, कानपुर और कोटा जैसी प्रमुख मंडियों में कीमतें औसतन 3.5-4 फीसदी के बीच बढ़ी हैं।


    गेहूं उत्पादन हो सकता है प्रभावित

    गेहूं उत्पादन का परिदृश्य प्रतिकूल मौसम की स्थिति के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि बढ़ता तापमान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि पैदावार एवं अनाज की गुणवत्ता के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। मौसम में हालिया व्यवधानों के कारण व्यापारियों ने अगले रबी सीजन के उत्पादन पूर्वानुमान को 11.35 करोड़ टन से घटाकर 11.40 करोड़ टन कर दिया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में अधिक उत्पादन के बावजूद शुरुआती उम्मीदों से कम है।


    खाद्य तेलों में तेजी के चार कारण

    – इस साल सोयाबीन की खेती 6 फीसदी तक कम रहने की आशंका है। 15 दिनों में बारिश में सुधार नहीं हुआ, तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी 5 से 7 फीसदी घट सकता है। 
    – वैश्विक बाजारों में पाम तेल की उपलब्धता में कमी और घरेलू बाजार में सरसों व सोयाबीन के पर्याप्त स्टॉक के चलते भारत ने आयात कम किया है, जिससे आने वाले समय में घरेलू स्टॉक पर दबाव बढ़ेगा।
    – एफएमसीजी कंपनियों और स्टॉकिस्टों की मांग थोड़ी सुस्त जरूर है। लेकिन, अगस्त के पहले पखवाड़े से बाजार में रिकवरी आएगी और दिवाली तक त्योहारी मांग चरम पर होगी। यह मांग कीमतों को और ऊपर धकेलेगी।
    – वैश्विक स्तर पर बायोफ्यूल में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ने से सोया तेल और सूरजमुखी तेल महंगा हुआ है। रुपये की कमजोरी ने रिफाइनर्स के लिए आयात लागत बढ़ा दिया है।


    कितने बढ़ सकते हैं खाद्य तेल के दाम?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमतों में अचानक कोई बड़ा विस्फोट भले न हो, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों में तेजी बनी रहेगी। सूरजमुखी तेल 1,580 से 1,600 प्रति क्विंटल के स्तर पर बनी रहेगी। यानी इसके दाम 160 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बने रहने के आसार है। सोयाबीन तेल का दाम 1,420 रुपये के मजबूत स्तर पर बरकरार रहने की उम्मीद है, जिससे इसमें मंदी की गुंजाइश खत्म हो गई है। पाम तेल काफी अच्छे डिस्काउंट पर आ चुका है, इसलिए 1,340 से 1,350 के स्तर पर इसमें तगड़ी खरीदारी लौटती दिख रही है।