Category: International

  • यूएफओ फाइल्स का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने जारी किए चौंकाने वाले दस्तावेज, अपोलो मिशन से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएं सामने आईं

    यूएफओ फाइल्स का बड़ा खुलासा: अमेरिका ने जारी किए चौंकाने वाले दस्तावेज, अपोलो मिशन से जुड़ी रहस्यमयी घटनाएं सामने आईं


    नई दिल्ली। अमेरिका में लंबे समय से गोपनीय रखी गई यूएफओ (UFO) से जुड़ी फाइलों का पहला बड़ा सेट सार्वजनिक कर दिया गया है। ट्रम्प प्रशासन के निर्देश पर जारी इन दस्तावेजों में सैकड़ों वीडियो, फोटो और सरकारी रिकॉर्ड शामिल हैं, जिनमें नासा के अपोलो मिशन से जुड़ी कई रहस्यमयी घटनाओं का भी उल्लेख है। इन खुलासों के बाद एक बार फिर एलियन जीवन और अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना (UAP) को लेकर बहस तेज हो गई है।

    जारी दस्तावेजों में सबसे ज्यादा चर्चा अपोलो 12 और अपोलो 17 मिशन से जुड़ी तस्वीरों और संवादों की हो रही है। एक तस्वीर में चांद की सतह के ऊपर आसमान में तीन चमकदार बिंदुओं के दिखने का दावा किया गया है, जिन्हें अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया जा सका है।

    सबसे दिलचस्प हिस्सा अपोलो 17 मिशन का रिकॉर्ड बताया जा रहा है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री उड़ान के दौरान अपने यान के पास अजीब चमकती वस्तुओं को देखने की बात कर रहे हैं। रिकॉर्ड में एक अधिकारी को यह कहते सुना जा सकता है कि “मेरी खिड़की के बाहर कई चमकती चीजें दिख रही हैं, जैसे आतिशबाजी हो रही हो।” हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ये दृश्य अक्सर अंतरिक्ष मलबे, प्रकाश परावर्तन या तकनीकी कारणों से भी हो सकते हैं।

    इन फाइलों को जारी करने का आदेश खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ने रक्षा विभाग को दिया था, ताकि UFO और UAP से जुड़ी सभी उपलब्ध जानकारी को सार्वजनिक किया जा सके। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, न कि किसी निष्कर्ष को साबित करना।

    पेंटागन द्वारा पहले भी कई बार स्पष्ट किया गया है कि अब तक किसी भी UFO घटना को एलियन जीवन या विदेशी तकनीक का ठोस सबूत नहीं माना गया है। कई मामलों की जांच में सामने आया कि रहस्यमयी दिखने वाली वस्तुएं दरअसल सैन्य ड्रोन, उपग्रह, गुब्बारे या प्राकृतिक घटनाएं थीं।

    नए जारी दस्तावेजों में 1999 के आसपास अमेरिकी सैन्य विमानों के पास देखी गई रहस्यमयी उड़ती वस्तुओं का भी जिक्र है। कुछ पायलटों ने दावा किया कि उन्होंने तेज रफ्तार से चलती चमकदार वस्तुओं को अपने विमान के पास देखा, जिन्हें कुछ समय तक रडार पर ट्रैक किया गया लेकिन बाद में वे गायब हो गईं।

    इसी तरह एक रिपोर्ट में 2024 में ओमान की खाड़ी के ऊपर इंफ्रारेड सेंसर द्वारा रिकॉर्ड की गई एक तेज रफ्तार “बूंद जैसी वस्तु” का भी उल्लेख है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि ये सभी केवल अवलोकन और शुरुआती रिपोर्टें हैं, किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।

    इस बीच, सोशल मीडिया पर इन खुलासों के बाद एलियन जीवन को लेकर चर्चाएं और अटकलें तेज हो गई हैं। लेकिन वैज्ञानिक समुदाय लगातार यही कह रहा है कि किसी भी दावे को साबित करने के लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।
  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी; न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, इस्लामाबाद में नई बातचीत की तैयारी; न्यूक्लियर प्रोग्राम और होर्मुज स्ट्रेट बना बड़ा विवाद


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए अगले हफ्ते इस्लामाबाद में नई दौर की बातचीत हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक 14-बिंदु ड्राफ्ट पर काम कर रहे हैं, जिसमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और यूरेनियम भंडार जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें ईरान के जवाब का इंतजार है और अगर प्रगति हुई तो समझौते की दिशा आगे बढ़ सकती है।

    हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम या हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को रोकने के लिए किसी समझौते पर तैयार नहीं है। इससे दोनों देशों के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं।

    इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने 70 से ज्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने से रोका है, जबकि ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी दखल पर क्षेत्र में बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है।

    UAE ने भी दावा किया है कि ईरान ने उसके ऊपर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने नष्ट कर दिया। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते तेल और सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    रूस ने अमेरिका और बहरीन के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए उसे वापस लेने की मांग की है, जबकि चीन और अन्य देशों की स्थिति इस पूरे मामले में अलग-अलग नजर आ रही है।

  • ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील

    ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने में भूमिका निभा चुके हैं और अब उनका अगला लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। ट्रम्प ने इसे अपनी “10वीं शांति पहल” बताया है।

    व्हाइट हाउस से वर्जीनिया रवाना होने से पहले ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है, जिसमें हर महीने बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को रोकना अब उनकी प्राथमिकता है।

    इसी बीच ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक 3 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और लगभग 1000-1000 कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है।

    हालांकि रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से इस सीजफायर पर कोई आधिकारिक संयुक्त घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि हालात सकारात्मक रहे तो इस अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्ष रुकवा चुके हैं और अब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने 3 दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखकर इसे अपनी बड़ी शांति पहल बताया है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप

    ऑपरेशन सिंदूर में चीन की एंट्री? पाकिस्तान को मिली टेक्निकल मदद और रियल-टाइम इनपुट के दावों से हड़कंप



    नई दिल्ली। चीन की ओर से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मदद देने के दावे ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। चीनी सरकारी मीडिया के एक इंटरव्यू के हवाले से कहा जा रहा है कि इंजीनियरों ने पाकिस्तान को तकनीकी सपोर्ट और रियल-टाइम इनपुट दिए थे। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर पूरी तरह स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट और चीनी टीवी इंटरव्यू में दावा किया गया है कि चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक इंजीनियर ने पाकिस्तान में तकनीकी सहायता की बात स्वीकार की है। कहा गया कि टीम का काम J-10CE जैसे लड़ाकू विमानों और उनके सिस्टम को ऑपरेशनल रूप से तैयार रखना था। यह भी दावा है कि पाकिस्तान ने चीन में बने J-10CE फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया, जिन्हें AVIC की सहयोगी कंपनियां बनाती हैं। इसी दौरान रियल-टाइम डेटा सपोर्ट और सैटेलाइट इनपुट देने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

    भारत की ओर से पहले ही यह कहा जा चुका है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर मदद दी थी। भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात का जिक्र किया था कि संघर्ष के दौरान चीन ने अपने नेटवर्क और सिस्टम के जरिए क्षेत्रीय गतिविधियों पर नजर रखी और पाकिस्तान को जानकारी उपलब्ध कराई। वहीं चीन ने पहले इन आरोपों को खारिज किया था, लेकिन अब आए इंटरव्यू और रिपोर्ट्स ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही काफी गहरा है और J-10CE जैसे एडवांस फाइटर जेट्स इसकी बड़ी मिसाल हैं। पाकिस्तान पहले से ही चीन से बड़े पैमाने पर हथियार आयात करता रहा है और हाल के वर्षों में यह निर्भरता और बढ़ी है। इसी बीच चीन द्वारा नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 को पाकिस्तान को देने की चर्चा ने भी क्षेत्रीय सैन्य समीकरणों पर बहस तेज कर दी है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑपरेशन के दौरान चीन ने अपने तकनीकी और सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कर स्थिति पर नजर रखी, जिसे कुछ विशेषज्ञ “लाइव लैब” रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि इन सभी दावों पर अभी तक पूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिससे इस मुद्दे पर बहस और तेज हो गई है।

  • रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर….. ट्रंप ने लिया क्रेडिट… बोले- 3 दिन सभी सैन्य गतिविधियों पर रहेगी रोक

    रूस-यूक्रेन के बीच सीजफायर….. ट्रंप ने लिया क्रेडिट… बोले- 3 दिन सभी सैन्य गतिविधियों पर रहेगी रोक


    वाशिंगटन।
    रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) में फरवरी, 2022 से ही लड़ाई जारी है. दोनों देश अब सीजफायर पर सहमत हो गए हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने यह युद्ध रुकवाने का क्रेडिट लेते हुए यह ऐलान किया है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में 9 से 11 मई तक तीन दिन सीजफायर रहेगा.सीजफायर के दौरान सभी सैन्य गतिविधियों पर रोक रहेगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे की क्रेमलिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की (Ukrainian President Volodymyr Zelensky) ने पुष्टि कर दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर इस सीजफायर का ऐलान किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हूं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन (9, 10 और 11 मई) सीजफायर रहेगा।

    उन्होंने अपने ट्रूथ सोशल पोस्ट में लिखा है कि रूस में यह जश्न विजय दिवस के लिए है और यूक्रेन के लिए भी, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के समय वह भी इसका हिस्सा था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी ऐलान किया कि दोनों देश एक-दूसरे के एक हजार कैदियों की अदला-बदली करने पर भी सहमत हो गए हैं।


    रूस के ड्रोन हमलों से यूक्रेन में तबाही की तस्वीरें

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस सीजफायर का क्रेडिट लेते हुए कहा है कि यह अनुरोध सीधे मेरी ओर से किया गया था. उन्होंने अपना सीजफायर का अनुरोध स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की की तारीफ भी की. ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पोस्ट में यह उम्मीद भी जताई है कि यह सीजफायर लंबे, घातक और कठिन लड़ाई के अंत की शुरुआत साबित होगा.

    उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी लड़ाई खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है और हम हर रोज समाधान के और करीब पहुंच रहे हैं. क्रेमलिन ने ट्रंप के दावे की पुष्टि कर दी है. आईएफक्स के मुताबिक क्रेमलिन ने कहा है कि रूस ने ट्रंप की ओर से प्रस्तावित सीजफायर पर सहमति जताई है.

    क्रेमलिन की ओर से यह भी कहा गया है कि रूस ने इस बात के लिए भी सहमति दे दी है कि युद्धबंदियों की अदला-बदली की जाएगी. वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप के ऐलान की पुष्टि करते हुए कहा है कि रूस के साथ एक हजार कैदियों की अदला-बदली की जाएगी.

  • किसी भी हालत में झुकेंगे नहीं…. युद्ध के बीच ईरान ने फिर दी अमेरिका को चेतावनी

    किसी भी हालत में झुकेंगे नहीं…. युद्ध के बीच ईरान ने फिर दी अमेरिका को चेतावनी


    तेहरान।
    अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच जारी युद्ध में अब डेडलॉक की स्थिति बन गई है। एक तरफ जहां दोनों पक्षों के बीच सीजफायर (Ceasefire) को लेकर बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ दोनों देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में एक दूसरे के जहाजों पर हमले भी कर रहे हैं। ऐसे में युद्ध खत्म होने की संभावना खत्म हो रही है। इस बीच ईरान ने अमेरिका को एक बार फिर बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह किसी भी हालत में झुकेगा नहीं। इस दौरान ईरान ने यह भी दावा किया कि वह पहले से ज्यादा ताकतवर हो गया है और उसके मिसाइलों का स्टॉक 120 फीसदी बढ़ गया है।

    शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Seyyed Abbas Araghchi.) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह बातें कही हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता और लॉन्चरों की संख्या काफी बढ़ गई है। अराघची ने लिखा, “जब भी मेज पर कूटनीतिक समाधान निकल रहा होता है, अमेरिका एक लापरवाह सैन्य दुस्साहस का विकल्प चुनता है। क्या यह दबाव बनाने की घटिया चाल है या फिर अमेरिकी राष्ट्रपति को एक बार फिर किसी दलदल में धकेलने की कोशिश?”


    क्या बोले अराघची?

    पोस्ट में उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान के पास अब केवल 75 फीसदी लॉन्चर और 70 फीसदी मिसाइल भंडार बचा है। अराघची ने कहा कि ईरान राष्ट्र की रक्षा के लिए 1000 फीसदी तैयार है और 28 फरवरी की तुलना में उसके मिसाइल स्टॉक 120 फीसदी ज्यादा बढ़ चुके हैं।


    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर तनाव

    इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की नौसेना ने शुक्रवार सुबह अमेरिकी जहाजों पर हमले का दावा किया है। ईरान का दावा है कि यह कार्रवाई संघर्ष विराम के उल्लंघन और उसके एक तेल टैंकर के खिलाफ अमेरिकी सेना की आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई है।

    ईरानी नौसेना ने बताया कि खुफिया निगरानी से पता चला है कि इस हमले में अमेरिकी सैन्य जहाजों को काफी नुकसान पहुंचा है। ईरान का दावा है कि हमले के बाद अमेरिकी सेना के तीन जहाज इस रास्ते से तेजी से पीछे हट गए हैं। वहीं अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने शुक्रवार को कहा है कि उसने दो और ईरानी टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया है। अमेरिकी सेना ने कहा कि यह जहाज अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।


    युद्धविराम पर अब भी जारी है चर्चा

    इस बीच युद्धविराम को लेकर बातचीत जारी है। दोनों देशों के बीच 30 दिनों के लिए युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक बयान में कहा है कि अमेरिका अब भी ईरान के जवाब का इंतजार कर रहा है।

  • टेस्ला के साइबरट्रक समेत 2 लाख से ज्यादा कारों में आयी खराबी, पहियों और कैमरा सिस्टम में गंभीर खामियां

    टेस्ला के साइबरट्रक समेत 2 लाख से ज्यादा कारों में आयी खराबी, पहियों और कैमरा सिस्टम में गंभीर खामियां

    नई दिल्‍ली । इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला को तकनीकी खामियों के चलते दो बड़े रिकॉल जारी करने पड़े हैं। कंपनी ने साइबरट्रक के साथ-साथ लगभग 2 लाख अन्य मॉडल्स को वापस बुलाने का फैसला किया है। इन वाहनों में पहियों की संरचना और सॉफ्टवेयर सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं।

    साइबरट्रक के पहियों में खामी
    रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच बने 18-इंच स्टील व्हील वाले 173 साइबरट्रक प्रभावित पाए गए हैं। अमेरिकी एजेंसी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) के मुताबिक, खराब सड़कों या तीखे मोड़ों पर चलने के दौरान इनके रोटर में दरार आने का खतरा है। इससे पहिया हब से अलग हो सकता है, जो गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। टेस्ला ने इन वाहनों के रोटर, हब और लग नट्स को मुफ्त में बदलने का फैसला किया है, ताकि किसी भी संभावित हादसे को रोका जा सके।

    2 लाख से ज्यादा कारों में कैमरा फेल
    साइबरट्रक के अलावा टेस्ला ने अपने मॉडल Y, मॉडल S, मॉडल X और मॉडल 3 की करीब 2 लाख से अधिक गाड़ियों को भी रिकॉल किया है। इन वाहनों में रियरव्यू कैमरा सिस्टम में खराबी पाई गई है। सॉफ्टवेयर गड़बड़ी के कारण बैक गियर में जाने पर कैमरा कुछ समय के लिए काम करना बंद कर देता है, जिससे पीछे का दृश्य नहीं दिख पाता और टक्कर का खतरा बढ़ जाता है। राहत की बात यह है कि इन तकनीकी खामियों के कारण अब तक किसी दुर्घटना या जानमाल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।

    ग्राहकों के लिए निर्देश
    टेस्ला ने प्रभावित ग्राहकों से अपील की है कि वे अपनी गाड़ियों की जांच और सुधार के लिए कंपनी की कस्टमर सर्विस 1-877-798-3752 पर संपर्क करें। कंपनी ने इन समस्याओं के समाधान के लिए विशेष रिकॉल नंबर भी जारी किए हैं।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े

    मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर: UAE पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, अमेरिका की जवाबी बमबारी से हालात और बिगड़े


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया है कि ईरान ने उसके क्षेत्र पर 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 3 ड्रोन दागे। UAE रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया, हालांकि इस हमले में 3 लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। अभी तक ईरान की तरफ से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने सीजफायर के बावजूद ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिका का कहना है कि ईरानी सेना ने उसके जंगी जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमला किया था, जिसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान किसी डील पर नहीं पहुंचता, तो आगे और भी बड़े हमले किए जाएंगे। वहीं ईरान ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि अमेरिकी हमले में सैन्य ठिकानों की बजाय नागरिक इलाकों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने यह भी कहा है कि उसने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट और चाबहार पोर्ट के पास मौजूद अमेरिकी सैन्य जहाजों को निशाना बनाया। इसके साथ ही ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमले ओमान की खाड़ी में उसके तेल टैंकरों पर भी किए गए।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि CIA की इंटेलिजेंस गलत है और ईरान की मिसाइल क्षमता खत्म नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि देश का मिसाइल रिजर्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और ईरान किसी भी हालात में अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। अराघची ने यह भी कहा कि जब भी कूटनीतिक समाधान की संभावना बनती है, अमेरिका सैन्य रास्ता अपना लेता है, लेकिन ईरान दबाव में झुकने वाला नहीं है।

    इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं, जहां करीब 1500 जहाज फंसे होने की जानकारी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसी के अनुसार, इस संकट का असर तेल, गैस और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है, जिससे कई देशों में आर्थिक और खाद्य संकट की आशंका बढ़ गई है।

    मध्य पूर्व में इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी तेज हो गया है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमलों का दावा कर रहे हैं। साथ ही अमेरिका ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।

  • 12,000 KM अग्नि-6 से हिला रणनीतिक संतुलन! भारत की मिसाइल ताकत पर पाक प्रोफेसर की तीखी टिप्पणी

    12,000 KM अग्नि-6 से हिला रणनीतिक संतुलन! भारत की मिसाइल ताकत पर पाक प्रोफेसर की तीखी टिप्पणी



    नई दिल्ली। भारत की रक्षा क्षमता को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज हो गई है, खासकर जब लंबी दूरी की अगली पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल Agni-VI missile को लेकर चर्चाएं सामने आई हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के बयान के बाद यह साफ हुआ है कि अगर सरकार मंजूरी देती है तो अग्नि-6 का परीक्षण पूरी तरह तैयार है। इसकी अनुमानित मारक क्षमता लगभग 12,000 किलोमीटर बताई जा रही है, जो इसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी में रखती है।

    इस मुद्दे पर पाकिस्तान मूल के स्कॉटलैंड स्थित ग्लासगो यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर Zafar Khan ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया और एक लेख में दावा किया कि पश्चिमी देश अक्सर पाकिस्तान की कथित लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं पर चर्चा करते हैं, जबकि भारत की बढ़ती रणनीतिक ताकत पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है।

    जफर खान का कहना है कि भारत की बढ़ती मिसाइल क्षमता सिर्फ रक्षा जरूरत नहीं बल्कि शक्ति प्रदर्शन और वैश्विक रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने का संकेत भी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह के विकास से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संतुलन पर असर पड़ सकता है और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

    हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का मिसाइल विकास कार्यक्रम पूरी तरह रक्षा और निवारक रणनीति (deterrence) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य किसी भी संभावित खतरे से देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। भारत पहले ही Agni-V missile जैसे सिस्टम का सफल परीक्षण कर चुका है, जिसकी रेंज चीन के बड़े हिस्से तक पहुंचने में सक्षम है।

    वहीं पाकिस्तान की ओर से आने वाली टिप्पणियों को रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि दक्षिण एशिया में दोनों देशों के बीच रक्षा संतुलन लगातार संवेदनशील बना हुआ है।

    कुल मिलाकर यह मामला केवल मिसाइल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति, शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति से जुड़ा हुआ बड़ा मुद्दा बन गया है।

  • सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप

    सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम के दावों के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने सीजफायर तोड़ते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े और सीधे सैन्य एक्शन से दिया जाएगा।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क क्षेत्र के पास उस तेल टैंकर पर हमला किया, जो होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ता तो अमेरिका और भी बड़े हमले करेगा।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई सैन्य नावों और ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ट्रम्प ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

    बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक, संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई, गैस कारोबार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। कई देशों में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    इस बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिन के अस्थायी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां किसी स्थायी शांति की संभावना को कमजोर करती नजर आ रही हैं।

    ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनती है, अमेरिका सैन्य कार्रवाई शुरू कर देता है।

    उधर संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

    भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी की गई है।