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  • पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल

    पाकिस्तान ने फिर अफगानिस्तान में घुसकर की सैन्य कार्रवाई, 7 आतंकी ठिकानों पर दागी मिसाइल


    इस्लामाबाद/काबुल।
    पाकिस्तान (Pakistan) ने एक बार फिर अफगानिस्तान (Afghanistan.) के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई (Military Action) की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि सीमा पार सात आतंकी कैंप और ठिकानों को निशाना बनाया गया।

    इस्लामाबाद का कहना है कि ये ठिकाने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और इस्लामिक स्टेट-खोरासान (ISKP) से जुड़े लोगों के थे. पाकिस्तान सरकार TTP को ‘फितना अल खवारिज’ कहती है. बयान में कहा गया कि हाल के आत्मघाती हमलों, जिनमें इस्लामाबाद की इमाम बारगाह, बाजौर और बन्नू में धमाके शामिल हैं, के बाद यह जवाबी कार्रवाई की गई. रमजान के महीने में हुए ताजा हमले को भी इसका कारण बताया गया. पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास पक्के सबूत हैं कि ये हमले अफगानिस्तान में बैठे नेतृत्व और संचालकों के इशारे पर कराए गए. बयान में कहा गया कि जिम्मेदारी भी अफगानिस्तान में मौजूद टीटीपी और ISKP ने ली थी. पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर चुने हुए ठिकानों पर की गई. इस हमले पर तालिबान ने कहा है कि अब वह सही समय पर जवाब देगा।

    बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलोच ने इस हमले की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान की कायर सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और पक्तिका प्रांत के बरमल जिले में ड्रोन और हवाई हमले किए. उनके मुताबिक इन हमलों में एक धार्मिक मदरसे को निशाना बनाया गया, जहां मौजूद कुरान की प्रतियां भी नष्ट हो गईं. मीर यार बलोच ने इसे ‘दमनकारी सैन्य कार्रवाई’ करार दिया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई क्षेत्र में अस्थिरता और नफरत को और बढ़ाएगी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने रमजान से पहले कार्रवाई की धमकी दी थी।


    तालिबान के प्रवक्ता ने क्या कहा?

    अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बीती रात पाकिस्तानी सेना ने अफगान क्षेत्र में घुसकर नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में बमबारी की. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे भी मारे गए और कई लोग घायल हुए हैं. मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा नाकामियों को छिपाने के लिए अफगान जमीन को निशाना बना रहा है और ऐसे कदम क्षेत्र में हालात और बिगाड़ेंगे।


    एयर स्ट्राइक से पहले दहला पाकिस्तान

    इस हमले से पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में एक आत्मघाती हमला हुआ था. पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ISPR के अनुसार, एक खुफिया अभियान के दौरान सेना के काफिले को निशाना बनाया गया. हमले में एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक सिपाही की मौत हो गई. सेना ने कहा कि पांच आतंकियों को मार गिराया गया, लेकिन एक विस्फोटक वाहन सेना की गाड़ी से टकरा गया, जिससे भारी नुकसान हुआ. इससे पहले 16 फरवरी को बाजौर में भी एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ था. उसमें 11 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई थी. एक बच्ची की भी जान गई थी और कई लोग घायल हुए थे. पाकिस्तान ने कहा कि हमलावर अफगान तालिबान की विशेष इकाई से जुड़ा था और टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी।


    पाकिस्तान का क्या है आरोप?

    पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि अफगान तालिबान सरकार अपनी जमीन से टीटीपी को काम करने से रोकने में नाकाम रही है. बयान में कहा गया कि कई बार चेतावनी देने के बावजूद ठोस कदम नहीं उठाए गए. पाकिस्तान ने दोहा समझौते का हवाला देते हुए कहा कि अफगान अंतरिम सरकार को अपनी जमीन किसी दूसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए।


    पहले भी किया है हमला

    यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने सीमा पार हमला किया हो. पिछले साल भी अफगानिस्तान के खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में हवाई हमलों की खबर आई थी. उस समय काबुल ने पाकिस्तान पर बमबारी का आरोप लगाया था, हालांकि इस्लामाबाद ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी. दोनों देशों के रिश्ते 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद से लगातार बिगड़ते रहे हैं. सीमा पर झड़पें आम हो चुकी हैं।

  • SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया

    SC के फैसले के खिलाफ ट्रंप के तीखे तेवर… रिफंड की बजाए नए टैरिफ को 10 से बढ़ाकर 15% किया


    नई दिल्ली/वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के एक बड़े फैसले के बाद हार मानने के बजाय अपने तेवर और कड़े कर लिए हैं. कल सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ (Emergency Tariff) को अवैध करार दे दिया था. कोर्ट का कहना था कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया है. इस फैसले से उन कंपनियों को बड़ी राहत मिली थी जो अरबों डॉलर का टैक्स भर रही थीं. लेकिन ट्रंप ने तुरंत पलटवार करते हुए नए ग्लोबल टैरिफ को 10% से बढ़ाकर 15% करने का फैसला किया है.।

    ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ट्रेड पॉलिसी से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि वह ‘सेक्शन 122’ जैसी दूसरी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करेंगे. राष्ट्रपति का यह अड़ियल रवैया बता रहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव और बढ़ेगा. इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल रिफंड को लेकर खड़ा हो गया है. कंपनियां अपने अरबों डॉलर वापस मांग रही हैं, लेकिन ट्रंप प्रशासन लंबी कानूनी लड़ाई की तैयारी में है।


    1. सेक्शन 122 क्या है और ट्रंप इसे हथियार क्यों बना रहे हैं?

    सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप ने अब ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 122 का सहारा लिया है. यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि वह गंभीर व्यापार घाटे को रोकने के लिए 15% तक का अस्थाई टैरिफ लगा सकते हैं. हालांकि, इसकी एक बड़ी सीमा है कि यह सिर्फ 150 दिनों के लिए ही प्रभावी रह सकता है. इसके बाद राष्ट्रपति को संसद यानी कांग्रेस से मंजूरी लेनी होगी.

    ट्रंप का मानना है कि इससे उन्हें वह ताकत वापस मिल जाएगी जो कोर्ट ने उनसे छीनी है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों पर भी निशाना साधा और इसे देश के लिए एक बुरा फैसला बताया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें जांच की लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वह इसे तुरंत लागू करके अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को बरकरार रखना चाहते हैं।


    2. इलिनोय के गवर्नर ने ट्रंप को 8.7 अरब डॉलर का बिल क्यों थमाया?

    इस पूरे विवाद में अब राजनीति भी गर्मा गई है. इलिनोय के गवर्नर जेबी प्रित्ज़कर ने ट्रंप को एक औपचारिक इनवॉइस यानी बिल भेजा है. इसमें उन्होंने ट्रंप से 8.68 अरब डॉलर के रिफंड की मांग की है. गवर्नर का तर्क है कि ट्रंप के अवैध टैरिफ की वजह से उनके राज्य के हर परिवार को करीब 1700 डॉलर का नुकसान हुआ है. उन्होंने इसे ‘पास्ट ड्यू’ यानी बकाया राशि बताते हुए सोशल मीडिया पर लिखा।

    हालांकि, कानूनी तौर पर यह मामला इतना सीधा नहीं है. टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, आम जनता नहीं. कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालती हैं जिससे महंगाई बढ़ती है. ऐसे में अगर रिफंड मिलता भी है, तो वह कंपनियों को मिलेगा न कि सीधे आम लोगों को. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वॉलमार्ट या कॉस्टको जैसी कंपनियां ग्राहकों को पुराना पैसा वापस नहीं करेंगी।

    3. क्या रिफंड की जंग अगले 5 सालों तक खिंच सकती है?

    रिफंड के मुद्दे पर ट्रंप ने जो बयान दिया है, उसने बिजनेस जगत की नींद उड़ा दी है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि इस पर अगले दो साल या शायद पांच साल तक मुकदमा चलेगा’. इसका मतलब है कि जिन कंपनियों ने पिछले साल अरबों डॉलर का टैक्स दिया है, उन्हें अपना पैसा वापस पाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने होंगे. ट्रंप प्रशासन ने पहले वादा किया था कि अगर कोर्ट का फैसला खिलाफ आया तो पैसा वापस कर दिया जाएगा।

    अब प्रशासन अपने ही वादे से मुकरता दिख रहा है. हजारों कंपनियों ने पहले ही सरकार पर केस कर रखा है. अब इन मामलों की सुनवाई ‘कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड’ में होगी. छोटे व्यापारियों के लिए यह स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि उनके पास लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए फंड नहीं है।


    4. भारत और ग्लोबल मार्केट पर इस फैसले का क्या असर होगा?

    भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है. एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत पर लगे कुछ पुराने टैरिफ अवैध हो गए हैं. लेकिन ट्रंप के नए 10-15% ग्लोबल टैरिफ ने फिर से अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत का वाणिज्य मंत्रालय इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहा है. मंत्रालय ने कहा है कि वह कोर्ट के फैसले और ट्रंप के बयानों का एनालिसिस कर रहा है।


    5. क्या बर्बाद होगा ग्लोबल मार्केट?

    ट्रंप ने हिंट दिया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वह तेल और अन्य चीजों पर दबाव बनाने के लिए मिलिट्री एक्शन भी ले सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. भारतीय निर्यातकों के लिए आने वाले 150 दिन बहुत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि ट्रंप की नई नीति किसी भी वक्त लागू हो सकती है।

  • NASA का मून मिशन स्थगित, मार्च में होने वाला था लांच, जानिए क्‍या रही वजह?

    NASA का मून मिशन स्थगित, मार्च में होने वाला था लांच, जानिए क्‍या रही वजह?



    नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अपने बहुप्रतीक्षित मून मिशन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। एजेंसी मानवयुक्त फ्लाइबाइ मिशन आर्टेमिस-2 को मार्च में लॉन्च करने की तैयारी में थी, लेकिन ऐन वक्त पर सामने आई तकनीकी समस्या के कारण रॉकेट और यान दोनों को लॉन्च पैड से हटा लिया गया। जानकारी के अनुसार रॉकेट में हीलियम लीक की समस्या पाई गई, जिसके चलते मिशन को टालने का निर्णय लिया गया।

    नासा के प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने शनिवार को बताया कि स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) में हीलियम रिसाव का पता चला है। इस तकनीकी खामी के कारण अब मार्च में मिशन की लॉन्चिंग संभव नहीं होगी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस फैसले से पूरी टीम निराश है, क्योंकि मिशन की तैयारी में लंबे समय से कड़ी मेहनत की जा रही थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बड़े और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में सावधानी सर्वोपरि होती है। 1960 के दशक में भी जब नासा ने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की थीं, तब कई चुनौतियों और देरी का सामना करना पड़ा था।

    रॉकेट सिस्टम में हीलियम की अहमियत
    किसी भी रॉकेट प्रणाली में हीलियम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह प्रोपेलेंट टैंक में आवश्यक दबाव बनाए रखने और इंजन के संचालन में मदद करता है। हीलियम में आई गड़बड़ी को देखते हुए अब एसएलएस रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को मरम्मत के लिए व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में ले जाया जाएगा, जहां विस्तृत जांच और सुधार का काम किया जाएगा।

    क्या था मिशन का उद्देश्य
    आर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्री शून्य-गुरुत्वाकर्षण में एक छोटे केबिन में काम करने वाले थे। पृथ्वी की निचली कक्षा में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन की तुलना में अधिक रेडिएशन का सामना करना पड़ता, हालांकि इसे सुरक्षित दायरे में माना गया था। मिशन की योजना के अनुसार वापसी के दौरान अंतरिक्ष यात्री वायुमंडल से गुजरते हुए एक चुनौतीपूर्ण रिएंट्री का अनुभव करते और अमेरिका के पश्चिमी तट से दूर प्रशांत महासागर में लैंडिंग करते।

    गौरतलब है कि इसके बाद लक्ष्य चंद्रमा पर इंसानों की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित करना है। आगे चलकर आर्टेमिस-4 और आर्टेमिस-5 मिशनों के जरिए ‘गेटवे’ नामक एक छोटा स्पेस स्टेशन स्थापित किया जाएगा, जो चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा।

    उल्लेखनीय है कि नासा ने आखिरी बार 1960 और 1970 के दशक में अपोलो कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजा था। अब आर्टेमिस कार्यक्रम के जरिए एजेंसी चंद्रमा पर दीर्घकालिक और स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, हालांकि फिलहाल तकनीकी अड़चन ने उसकी रफ्तार पर अस्थायी विराम लगा दिया है।

  • जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा

    जयशंकर ने ब्राजील के राष्ट्रपति लूला से की मुलाकात, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने पर हुई चर्चा


    नई दिल्ली/ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत के राजकीय दौरे पर आए राष्ट्रपति लूला से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं उन्होंने बताया कि लूला ने साझा हितों और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए अपनी गाइडेंस और गर्मजोशी भरी भावनाओं का प्रदर्शन किया उन्होंने यह भी कहा कि आज बाद में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक से द्विपक्षीय संबंधों को नई रफ्तार मिलेगी इसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और पीएम मोदी से भी मुलाकात की और उसके बाद दोनों नेता द्विपक्षीय बैठक करेंगे विदेश मंत्रालय ने पहले ही बताया था
    कि दोनों नेता द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे प्रधानमंत्री आने वाले गणमान्य व्यक्ति के सम्मान में लंच होस्ट करेंगे और आपसी हितों के क्षेत्रीय और ग्लोबल मुद्दों पर विचार करेंगे जिसमें बहुपक्षीय फोरम में सहयोग रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म ग्लोबल गवर्नेंस और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दे शामिल हैं राष्ट्रपति लूला दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट के लिए 18 फरवरी को भारत आए उनके साथ करीब 14 मंत्री और ब्राजील की कंपनियों के टॉप सीईओ का डेलीगेशन भी है जो अपने भारतीय समकक्षों के साथ मीटिंग करेंगे
    यह राष्ट्रपति लूला का भारत का छठा दौरा है वे पहली बार 2004 में रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में भारत आए थे और आखिरी बार सितंबर 2023 में जी20 समिट के लिए भारत आए थे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला अक्सर मिलते रहे हैं प्रधानमंत्री 7 से 8 जुलाई 2025 तक राजकीय दौरे पर ब्रासीलिया में थे और नवंबर 2025 में जी20 के दौरान जोहान्सबर्ग में भी उनकी मुलाकात हुई भारत और ब्राजील के बीच करीबी और रणनीतिक साझेदारी साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों लोगों के बीच गहरे रिश्तों और खास सेक्टरों में बढ़ते सहयोग पर आधारित है दोनों देश 2006 से रणनीतिक साझेदार हैं
    ब्राजील एलएसी इलाके में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और व्यापार निवेश रक्षा कृषि स्वास्थ्य फार्मास्यूटिकल्स ऊर्जा जिसमें रिन्यूएबल्स जरूरी मिनरल्स रेयर अर्थ मटीरियल्स साइंस टेक्नोलॉजी और नवाचार शामिल हैं जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का जुड़ाव लगातार गहरा होता जा रहा है
    इसमें डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एआई स्पेस और लोगों के बीच जुड़ाव के क्षेत्र में सहयोग भी शामिल है दोनों देश यूएन रिफॉर्म्स क्लाइमेट चेंज और आतंकवाद से लड़ने जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समान विचार रखते हैं विदेश मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति लूला का यह राजकीय दौरा दोनों पक्षों को आपसी फायदे के मुद्दों पर रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और द्विपक्षीय क्षेत्रीय और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर सहयोग को और गहरा करने का अवसर देगा
  • राष्ट्रपति भवन से हैदराबाद हाउस तक भारत ब्राजील रिश्तों को नई ऊंचाई देने की दिशा में निर्णायक वार्ता

    राष्ट्रपति भवन से हैदराबाद हाउस तक भारत ब्राजील रिश्तों को नई ऊंचाई देने की दिशा में निर्णायक वार्ता


    नई दिल्ली का पारा शनिवार को कूटनीतिक गर्मी से चढ़ा रहा जब भारत और ब्राजील के प्रगाढ़ संबंधों के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डी सिल्वा का राष्ट्रपति भवन के भव्य प्रांगण में पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया गया। इस औपचारिक समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति लूला का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। राष्ट्रपति भवन में दी गई ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ और पारंपरिक औपचारिकताओं के बीच दोनों देशों के झंडे एक साथ लहराते हुए ग्लोबल साउथ की दो महाशक्तियों की अटूट मित्रता की गवाही दे रहे थे।

    औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति लूला दिल्ली के ऐतिहासिक हैदराबाद हाउस पहुंचे जहाँ दोनों नेताओं के बीच एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता का दौर शुरू हुआ। इस बैठक के केंद्र में व्यापार निवेश रक्षा ऊर्जा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र रहे। विशेष रूप से ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में राष्ट्रपति लूला की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देश केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहते बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की डिजिटल तकनीकों में भी एक-दूसरे का हाथ थामने को तैयार हैं।

    राष्ट्रपति लूला की यह पांच दिवसीय18-22 फरवरी यात्रा केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है। उनके साथ ब्राजील के 14 कद्दावर मंत्रियों और शीर्ष कंपनियों के सीईओ का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल भारत आया है। यह दर्शाता है कि ब्राजील भारत के विशाल बाजार और बढ़ती आर्थिक ताकत को कितनी गंभीरता से ले रहा है। द्विपक्षीय वार्ता के अलावा दोनों देशों के बीच व्यापारिक संभावनाओं को तलाशने के लिए एक विशेष ‘बिजनेस फोरम’ का भी आयोजन किया जा रहा है जो आने वाले समय में निवेश के नए द्वार खोलेगा।

    इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी राष्ट्रपति लूला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मुलाकात कर कूटनीतिक जमीन तैयार की। जयशंकर ने भरोसा जताया कि यह यात्रा ‘ग्लोबल गवर्नेंस’ और बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों की साझा आवाज को और बुलंद करेगी। राष्ट्रपति लूला की यह छठी भारत यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत लगाव को दर्शाती है बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि नई वैश्विक व्यवस्था में भारत और ब्राजील की रणनीतिक साझेदारी अब एक अपरिहार्य शक्ति बन चुकी है।

  • US में पाकिस्तान की बेइज्जती… ट्रंप ने भरी सभा में शहबाज को खड़ा कराया और बांधे मोदी की तारीफ के पुल

    US में पाकिस्तान की बेइज्जती… ट्रंप ने भरी सभा में शहबाज को खड़ा कराया और बांधे मोदी की तारीफ के पुल


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) के वाशिंगटन में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के उद्घाटन सत्र में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसकी चर्चा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जोर-शोर से हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अपने संबोधन के दौरान न केवल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को अपना बेहतरीन दोस्त बताया, बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Pakistan’s Prime Minister Shahbaz Sharif) को बीच भाषण में खड़ा कर भारत-पाक शांति का पूरा श्रेय खुद ले लिया।

    ट्रंप भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने के अपने दावे का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने शहबाज शरीफ की ओर देखते हुए उन्हें खड़ा होने के लिए कहा। जैसे ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री खड़े हुए, ट्रंप ने अपनी शैली में प्रधानमंत्री मोदी और भारत का गुणगान शुरू कर दिया। ट्रंप ने वहां उपस्थित दुनियाभर के कई नेताओं और मीडिया के सामने कहा, “भारत और पाकिस्तान… वह एक बहुत बड़ा मामला था। मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की है। वह बहुत उत्साहित हैं और वास्तव में वह अभी इस कार्यक्रम को देख रहे हैं।”

    ट्रंप ने आगे कहा, “भारत और पाकिस्तान, आप दोनों का बहुत शुक्रिया। मोदी एक महान व्यक्ति हैं और मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” यह नजारा काफी दिलचस्प था क्योंकि जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री प्रोटोकॉल के तहत खड़े होकर यह सब सुन रहे थे, वहीं भारत इस बैठक में केवल एक ‘पर्यवेक्षक’ के रूप में मौजूद था और पीएम मोदी स्वयं वहां उपस्थित नहीं थे।

    ट्रंप ने इस दौरान फिर से दोहराया कि उन्होंने पिछले साल भारत-पाक युद्ध को केवल एक फोन कॉल से रोक दिया था। उन्होंने कहा, “जब मुझे पता चला कि दोनों देश लड़ रहे हैं और विमान गिराए जा रहे हैं, तो मैंने फोन उठाया और कहा अगर युद्ध नहीं रुका, तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत का व्यापारिक टैरिफ लगा दूंगा।”

    ट्रंप ने जिस तरह से सार्वजनिक मंच पर शहबाज शरीफ को खड़ा कर पीएम मोदी का जिक्र किया वह पाकिस्तान के लिए काफी असहज स्थिति थी। एक तरफ जहां पाकिस्तान खुद को ट्रंप का करीबी सहयोगी दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ट्रंप बार-बार अपनी बातचीत में भारत और मोदी को अधिक महत्व देते नजर आ रहे हैं।

  • पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में बंधक सैनिकों को पहचानने से किया इनकार… अपनाया कागरिल फॉर्मूला

    पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में बंधक सैनिकों को पहचानने से किया इनकार… अपनाया कागरिल फॉर्मूला


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान की सेना (Pakistan Army) ने कारगिल युद्ध (Kargil War) में मारे गए अपने सैनिकों को पहचानने से इनकार कर दिया था। अब यही फॉर्मूला उसने बलूचिस्तान (Balochistan) में भी इस्तेमाल किया है। पाकिस्तानी सेना (Pakistani Army) के सात जवान बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) (Balochistan Liberation Army (BLA) के कब्जे में हैं, जिनके बदले वह अपने लड़ाकों की रिहाई की मांग कर रही है, लेकिन पाकस्तानी सेना ने साफ कह दिया है कि ये जवान उनके हैं ही नहीं।

    सूत्रों के अनुसार 14 फरवरी को बीएलए ने इन सैनिकों का अपहरण किया था इनकी तस्वीरें और वीडियो क्लिप जारी कर अपने लड़ाकों को छोड़ने को कहा था। इसके लिए 21 फरवरी तक की मियाद रखी गई है, जो शनिवार को खत्म हो जाएगी। बीएलए ने कहा कि यदि पाक सेना ने उसकी बात नहीं मानी तो इन जवानों को फांसी दे दी जाएगी।

    फुटेज सामने आने के तुरंत बाद पाकिस्तान सेना के एक्स कोर और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल ने झूठ फैलाना शुरू कर दिया। कहा गया कि दिखाए गए लोग पाकिस्तानी सैनिक नहीं हैं। वीडियो को डिजिटल रूप से हेरफेर किया गया था। इसके बाद बीएलए ने एक नया वीडियो जारी किया, जिसमें सातों बंधक दिखाई दे रहे हैं तथा वे सेना का अपना आधिकारिक कार्ड भी दिखाते हैं। उन्हें पूरी पहचान बताते हुए दिखाया गया है।

    कारगिल में भी यही फॉर्मूला
    दरअसल, यह पाकिस्तानी सेना का पुराना फॉर्मूला है। इस घटनाक्रम ने 1999 के कारगिल संघर्ष की याद दिला दी है, जब जनरल परवेज मुशर्रफ के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना ने शुरू में इस बात से इनकार किया था कि नियमित सैनिक नियंत्रण रेखा के पार कार्रवाई कर रहे थे। उस समय युद्धक्षेत्र से मिले साक्ष्यों और बरामद शवों ने पाकिस्तान के आधिकारिक बयानों को झुठला दिया था। अब फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली सेना भी यही कर रही है।

  • एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश

    एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि एलियन (Alien.), अनजान हवाई घटनाओ (UAP) और अनजान उड़ने वाले ऑब्जेक्ट्स (Unidentified Flying Objects- UFO) से जुड़ी घटनाओं और दस्तावेजों की पहचान करें और उन्हें जारी करें। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल हैंडल पर कहा, लोगों की रुचि को देखते हुए मैं युद्ध सचिवऔर अन्य एजेंसियों व वभागों को निर्देश देता हूं कि वे एलियन्स, न्य ग्रहों पर जीवन, यूएपी और यूएफओ से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें।

    ट्रंप ने कहा कि लोगों के इंटरेस्ट और इसकी अहमियत को देखते हुए जो फाइल्स जारी की जाएंगी उसने सभी जानकारियों को शामिल करने की कोशिश होगी। बता दें कि हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक पॉडकास्ट के दौरान एलियन्स की बातें की थीं। उन्होंने कहा था, एलियन वास्तव में हैं लेकिन मैंने अपनी आखों से उन्हें नहीं देखा है। यह बात भी सच है कि एरिया 51 में कोई एलियन नहीं है।


    ओबामा पर गुप्त जानकारी लीक करने का आरोप

    डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा पर आरोप लगाया कि ओबामा ने गुप्त जानकारियां लीक की हैं। ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने बड़ी गलती कर दी है। मुझे भी नहीं पता कि एलियन हैं या नहीं लेकिन ओबामा ने जो सीक्रेट इन्फॉर्मेंशन लीक की है, उसकी कोई जरूरत नहीं थी।


    एलियन्स को लेकर क्या बोले थे बराक ओबामा

    ओबामा ने एलियन्स को लेकर सवाल किए जाने पर हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि यह ब्रह्मांड बहुत बड़ा है। ऐसे में धरती से बाहर के जीवन के बारे में नकारा तो नहीं जा सकता। उन्होंने कहा था,मेरे कार्यकाल के दौरान एलियन्स को लेकर कोई प्रमाण नहीं मिला था। एरिया 51 से जुड़े मामलों को लेकर उन्होंने कहा था कि वहां कोई एलियन या गुप्त जीव नहीं है। लोग मानते हैं कि एरिया 51 में एलियन के शव हैं लेकिन यह पूरी तरह से गलत धारणा है।

    ओबामा के बयान के बाद ही ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह बात लीक नहीं करनी चाहिए थे। उन्होंने कहा, ओबामा ने जो कुछ भी बताया है वह बेहद संवेदनशील जानकारी थी। हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि आखिर उन्होंने कौन सी सीक्रेट जानकारी लीक कर दी है। ट्रंप से जब एलियन्स को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने खुद भी कहा कि उन्हें एलिन्स के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है।


    क्या है एरिया 51?

    अमेरिका के नेवादा में एक बेहद गोपनीय अमेरिकी वायुसेना का अड्डा है जिसे एरिया 51 के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यहां एलिनय के शवों और क्रैश हुए यूएफओ को रखा जाता है। 2013 में सीआईए ने इससे जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए बताया था कि शीत युद्ध के दौरान इस ठिकाने का इस्तेमाल जासूसी विमानों के परीक्षण के लिए किया जाता था। 2022 में भी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया था कि एलियन्स के धरती पर आने से संबंधित कोई सबूत नहीं मिला है। ऐसी अगर कोई भी वस्तु मिली है तो जांच के बाद ये सामान्य उपकरण या फिर तकनीकी भ्रम ही पाई गई हैं।

  • नाइजीरिया में खदान में हुआ जहरीली गैस का रिसाव…. 37 लोगों की मौत, 26 घायल

    नाइजीरिया में खदान में हुआ जहरीली गैस का रिसाव…. 37 लोगों की मौत, 26 घायल


    अबुजा।
    उत्तर-मध्य नाइजीरिया (North-central Nigeria) में एक खदान में जहरीली गैस (Poisonous Gas.) के रिसाव से कम से कम 37 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 26 अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस प्रवक्ता अल्फ्रेड अलाबो (Alfred Alabo) ने एक बयान में बताया कि यह घटना मंगलवार तड़के पठार राज्य के वासे क्षेत्र में स्थित कम्पानी जुरक समुदाय में हुई।

    उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि खनिकों को लेड ऑक्साइड और इससे जुड़ी अन्य गैसों जैसे सल्फर तथा कार्बन मोनोऑक्साइड के अचानक रिसाव का सामना करना पड़ा, जो मनुष्यों के लिए बेहद विषाक्त और खतरनाक होती हैं। खासकर बंद या खराब हवादार जगहों में इन गैसों का प्रभाव जानलेवा साबित होता है।

    अलाबो ने आगे बताया कि मृतकों के शवों को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। फिलहाल नाइजीरिया सरकार ने खनन स्थल को सील कर दिया है और रिसाव के कारणों की जांच जारी है। ठोस खनिज विकास मंत्री डेले अलाके ने एक बयान में कहा कि खनिक खनन के दौरान जहरीली गैस के उत्सर्जन से अनजान थे और उन्होंने अपना काम जारी रखा, जिस कारण यह हादसा हुआ।

    फिलहाल प्रशासन मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उस जगह पर किस खनिज का खनन हो रहा था और क्या खदान कानूनी रूप से संचालित थी। नाइजीरिया सरकार देश भर में सोने और अन्य खनिजों के अवैध खनन पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है, जिसमें पिछले कई वर्षों में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।

  • बांग्लादेश में नई सरकार के बाद तुर्की की सक्रियता, बिलाल एर्दोगन का ढाका दौरा चर्चा में

    बांग्लादेश में नई सरकार के बाद तुर्की की सक्रियता, बिलाल एर्दोगन का ढाका दौरा चर्चा में

    नई दिल्ली । बांग्लादेश में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद तुर्की के राष्ट्रपतिरेसेप तैयप एर्दोगन के बेटे Bilal Erdogan का अचानक ढाका दौरा क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुधार की पृष्ठभूमि में हुए इस दौरे को रणनीतिक नजर से देखा जा रहा है।

    बिलाल एर्दोगन एक निजी विमान से ढाका पहुंचे। उनके साथ तुर्की के पूर्व फुटबॉलर मेसुट ओज़िल और तुर्की की सरकारी सहायता एजेंसी तुर्की सहयोग और समन्वय एजेंसी TIKA के चेयरमैन अब्दुल्ला आरोन भी मौजूद थे। ढाका पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने ढाका विश्वविद्यालय में TIKA द्वारा वित्तपोषित एक मेडिकल सेंटर का उद्घाटन किया। बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट की पहल जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई ने की थी।

    बांग्लादेश के हालिया चुनावों मेंबांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने गठबंधन के जरिए 77 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की है और वह अब संसद में प्रभावशाली विपक्ष के रूप में उभरी है। हालांकि सरकार BNP के नेतृत्व में बनी है, लेकिन माना जा रहा है कि नीतिगत फैसलों पर जमात का असर बढ़ सकता है।

    विश्लेषकों के अनुसार, दक्षिण एशिया में TIKA की बढ़ती मौजूदगी और तुर्की की सक्रियता को भारत की सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। खासकर रोहिंग्या कैंपों की यात्राओं और इस्लामिक संगठनों के साथ संपर्क को क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    इस संदर्भ में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence (ISI) पर पहले भी बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में दखल के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियों को भारत के लिए रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    फिलहाल, बिलाल एर्दोगन का यह दौरा तुर्की और बांग्लादेश के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि इस कूटनीतिक सक्रियता का दक्षिण एशिया की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।