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  • पाकिस्‍तान को इजरायल की दो टूक; गाजा पट्टी में मुनीर के मंसूबों पर फेरा पानी

    पाकिस्‍तान को इजरायल की दो टूक; गाजा पट्टी में मुनीर के मंसूबों पर फेरा पानी

    नई दिल्‍ली। इजरायल ने दो टूक कहा है कि गाजा में अमेरिका के प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबलाइज़ेशन फोर्स (ISF) में पाकिस्तानी सेना को एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही इजरायल ने कहा है कि हमास के साथ उसके संबंधों की वजह से उसकी गाजा में भागीदारी संदिग्ध है।
    भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल अमेरिका द्वारा प्रस्तावित किसी भी गाजा स्थिरीकरण बल में पाकिस्तानी सेना को शामिल करने का स्पष्ट रूप से विरोध करता है। उन्होंने कहा कि हमास और आतंकी संगठनों के रिश्तों के कारण पाकिस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते।

    एक विशेष साक्षात्कार में अज़ार ने कहा कि हमास और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, खासकर लश्कर-ए-तैयबा, के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर इज़रायल को गहरी चिंता है। इजरायल की तरफ से यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब पाकिस्तान गाजा में इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने पर अमेरिका की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार ही कर रहा है।

    बता दें कि ट्रंप के गाजा में शांति बहाली और सत्ता हस्तांतरण के फार्मूले के तहत वहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तिरिकरण बल की तैनाती की जानी है, जिसमें कई देश शामिल होंगे। पाकिस्तान ने भी इस बल में शामिल होने की इच्छा जताई थी लेकिन इजरायल ने उसे खारिज कर दिया है।

    हमास के खात्मे के बिना कोई व्यवस्था संभव नहीं
    इजरायली राजदूत अज़ार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में पूरी तरह खत्म किए बिना गाज़ा के भविष्य को लेकर कोई भी व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में एक स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) का विचार तब तक निरर्थक है, जब तक हमास को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता। यह पहली बार है जब इजरायल आधिकारिक तौर पर और खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना की भूमिका के खिलाफ सामने आया है।

    यह आसिम मुनीर के लिए बड़ा झटका है, जो गाजा में अपनी सेना की तैनाती के बड़े ख्वाव देख रहे थे।
    पाक समेत कई देशों से अमेरिका ने किया था संपर्क
    हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने गाज़ा में सुरक्षा और पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित बल में योगदान देने को लेकर पाकिस्तान समेत कई देशों से संपर्क किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अज़ार ने कहा, “कई देशों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे हमास से लड़ने के लिए अपने सैनिक नहीं भेजना चाहते। ऐसे में यह योजना व्यावहारिक नहीं लगती।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या इज़रायल गाज़ा में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी को स्वीकार करेगा, तो उनका जवाब साफ था “नहीं।”
    “केवल उन्हीं के साथ काम करेंगे जो भरोसेमंद”
    पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए इज़रायली राजदूत ने कहा,“देश आमतौर पर उन्हीं के साथ सहयोग करते हैं जिनके साथ उनके भरोसेमंद राजनयिक संबंध हों। इस समय पाकिस्तान के साथ ऐसी स्थिति नहीं है।” इस बयान से इज़रायल की पाकिस्तान को लेकर गहरी अविश्वास की भावना साफ झलकती है।
    हमास–पाकिस्तान संपर्कों पर इजरायल की नजर
    राजदूत अज़ार के बयान ऐसे समय आए हैं जब हाल ही में यह बात सामने आई है कि हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी ज़हीर पिछले तीन वर्षों से लगातार पाकिस्तान की यात्राएं कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, नाजी ज़हीर ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से कई बैठकें और मुलाकातें की थीं। ये बैठकें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)में भी हुईं हैं। यह बात भी सामने आ चुकी है कि 7 अक्टूबर को इज़रायल पर हुए हमले के कुछ ही दिनों बाद ज़हीर पेशावर में मौजूद था।अज़ार ने पुष्टि की कि इज़रायली खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
  • ट्रंप को खामेनेई ने ललकारा, कहा- तुम्‍हारा फिरौन और निमरोद जैसा हश्र होगा

    ट्रंप को खामेनेई ने ललकारा, कहा- तुम्‍हारा फिरौन और निमरोद जैसा हश्र होगा


    तेहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रंप पर दुनिया को अहंकार के साथ परखने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि इतिहास में ऐसे घमंडी और अत्याचारी शासक अपने सत्ता-शिखर पर ही पतन का शिकार हुए हैं। एक्स पर जारी पोस्ट में खामेनेई ने कहा कि इतिहास गवाह है- फिरौन, निमरोद और ईरान के पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी जैसे शासकों का अंत तब हुआ, जब वे अपने घमंड की चरम अवस्था में थे।

    खामेनेई ने लिखा- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति जो पूरी दुनिया के बारे में घमंड से फैसले करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि दुनिया के तानाशाहों और घमंडी शासकों का पतन तब हुआ जब वे अपने घमंड के चरम पर थे।

    तुम्हारा भी पतन होगा।’ खामेनेई के बयान में धार्मिक और ऐतिहासिक प्रतीकों का संदर्भ था- फिरौन को इस्लामी और बाइबिल परंपराओं में अत्याचार के प्रतीक के रूप में देखा जाता है; निमरोद को अब्राहमिक ग्रंथों में निरंकुश शासक माना जाता है; मोहम्मद रजा पहलवी को 1979 की इस्लामी क्रांति में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था और जिनकी बाद में निर्वासन में मृत्यु हुई।
    फिरौन, निमरोद कौन थे?

    फिरौन मिस्र के प्राचीन बादशाहों की एक उपाधि थी, जैसे आज राजा या सम्राट कहते हैं। लेकिन कुरान और बाइबल में जब फिरौन का जिक्र आता है, तो ज्यादातर मामलों में वह हजरत मूसा के समय का मिस्र का वह क्रूर बादशाह होता है। वह खुद को खुदा/भगवान घोषित करता था। बनी इसराइल (यहूदियों) पर बहुत ज़ुल्म करता था। उनके नवजात बेटों को मार डालने का हुक्म देता था। आखिर में लाल सागर में डूबकर मर गया।

    निमरोद बाबुल/इराक (मेसोपोटामिया) का एक बहुत शक्तिशाली और अत्याचारी बादशाह था। वह हजरत इब्राहीम के समय का शासक माना जाता है। उसने भी खुद को खुदा घोषित किया था। हालांकि कुरान में उसका नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया गया, लेकिन सूरह अल-बकरह में वर्णित वह बादशाह जिसने इब्राहीम से खुदाई के बारे में बहस की थी, उसे इसी निमरोद से तस्सूर किया जाता है। इस्लामी रिवायतों में कहा जाता है कि उसकी मौत एक छोटे से मच्छर के काटने से हुई, जो उसके दिमाग में घुस गया था (अत्यंत छोटी चीज से बहुत बड़े अहंकारी का अंत)।
    Iran
    रजा पहलवी फिर सुर्खियों में

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी एक बार फिर चर्चा में हैं। वे ईरान के आखिरी शाह- मोहम्मद रजा पहलवी के पुत्र हैं। हालांकि वह जमीनी स्तर पर प्रदर्शनों का नेतृत्व नहीं कर रहे, फिर भी इस्लामी गणराज्य के मुखर आलोचक के तौर पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में लगातार बयान दिए हैं।

    हालिया उथल-पुथल के दौरान रजा पहलवी ने ईरानियों से शांतिपूर्ण प्रतिरोध जारी रखने की अपील की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि वह शासक धार्मिक प्रतिष्ठान के बजाय ईरानी जनता का साथ दे।

    उन्होंने प्रदर्शनों को किसी एक नेता या विचारधारा से जुड़ी पहल नहीं, बल्कि आर्थिक बदहाली, दमन और दशकों से अधूरे वादों से उपजी जनआंदोलन बताया।

    एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में रजा पहलवी ने कहा कि वह गुरुवार रात को सड़कों पर उतरे हर व्यक्ति पर गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने लोगों से शुक्रवार रात फिर से बड़ी संख्या में बाहर निकलने का आह्वान किया और कहा कि भीड़ जितनी बड़ी होगी, दमनकारी ताकतें उतनी ही कमजोर पड़ेंगी। इंटरनेट पाबंदियों के बावजूद सड़कों पर डटे रहने का उन्होंने भरोसा जताया और कहा जीत आपकी होगी।
    कड़ा दमन, बढ़ता तनाव

    दूसरी ओर, ईरान ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे- यह ट्रंप की उस सार्वजनिक प्रतिबद्धता के उलट है, जिसमें उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात कही थी। एपी के अनुसार, हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर कम से कम 62 हो गई है।

    तेहरान में अपने परिसर में समर्थकों को संबोधित करते हुए खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी ही सड़कों को नुकसान पहुंचा रहे हैं ताकि अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश कर सकें, और कहा कि ट्रंप को अपने देश की हालत पर ध्यान देना चाहिए। ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों को निर्णायक, अधिकतम और बिना किसी कानूनी रियायत के सजा दी जाएगी।
  • ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    नई दिल्ली। ईरान में महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाला रूप ले चुका है। देश के 31 प्रांतों और 111 शहरों-कस्बों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों और विरोधी संगठनों से प्रेरित बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेताया कि कोई भी विदेशी दबाव ईरान की सत्ता को नहीं झुका पाएगा। खामेनेई ने आरोप लगाया कि आंदोलन विदेशी एजेंडों के तहत देश में उथल-पुथल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है।

    सड़कों पर नारे और इंटरनेट बंदी

    ईरान के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने “आजादी-आजादी” के नारे लगाए। ऐसे में सरकार को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ी। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि कानून तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    खामेनेई का अमेरिका को चेतावनी संदेश

    सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चेताया कि इतिहास में तानाशाहों का पतन तय रहा है और ट्रंप इससे अलग नहीं होंगे। उनका जोर था कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव में नहीं झुकेगा और देश की सुरक्षा और एकता बनाए रखी जाएगी।

    रजा पहलवी का अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का आह्वान

    वहीं, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लाखों ईरानी प्रदर्शनकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और संचार सेवाएं ठप हैं। रजा पहलवी ने खामेनेई पर आम जनता पर बर्बरता करने का आरोप लगाया और लोगों से एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।

    उन्होंने चेताया कि समय तेजी से निकल रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाना होगा, ताकि देश में जारी हिंसा और दमन को रोका जा सके।

  • मानवीय संकट के बीच सूडान में बढ़ी चुनौतियां, पाकिस्तान से हथियार सौदा और सऊदी मध्यस्थ

    मानवीय संकट के बीच सूडान में बढ़ी चुनौतियां, पाकिस्तान से हथियार सौदा और सऊदी मध्यस्थ

    इस्लामाबाद। सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और पैरामिलिट्री संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच गृहयुद्ध लगातार जारी है। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, हजारों मारे गए हैं और देश में भुखमरी, बीमारियां और मानवीय संकट बढ़ता जा रहा है। इसी बीच पाकिस्तान और सूडान के बीच लगभग 1.5 अरब डॉलर का बड़ा हथियार और सैन्य विमान का सौदा अंतिम चरण में है।

    हथियार सौदे का विवरण

    सूत्रों के अनुसार, इस समझौते में शामिल हैं:

    10 कराकोरम-8 हल्के लड़ाकू विमान,

    200 से अधिक ड्रोन, निगरानी और कामिकाजी हमलों के लिए,

    एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम।

    इसके अतिरिक्त, सुपर मुश्शक प्रशिक्षण विमान और संभवतः JF-17 फाइटर जेट भी सौदे में शामिल हो सकते हैं। JF-17 पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित लड़ाकू विमान है। सूडानी सेना इस हथियार आपूर्ति से हवाई श्रेष्ठता फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि RSF ने हाल के महीनों में ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।

    सऊदी अरब की मध्यस्थता और भूमिका

    पूर्व एयर मार्शल आमिर मसूद के अनुसार, सऊदी अरब इस सौदे में फंडिंग या मध्यस्थ के रूप में शामिल हो सकता है। यह कदम सऊदी अरब को सूडान में अपने राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने का अवसर देगा, जबकि सीधे हथियार सप्लाई के आरोपों से बचा जा सकेगा। इसके अलावा पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच 2–4 अरब डॉलर के बड़े रक्षा समझौते पर भी बातचीत चल रही है, जिसमें सूडान के लिए हथियार सप्लाई शामिल हो सकता है।

    भू-राजनीति और पाकिस्तान के लिए महत्व

    पाकिस्तान के लिए यह सौदा उसके तेजी से बढ़ते रक्षा निर्यात का हिस्सा है। इससे पहले पाकिस्तान ने लीबिया के साथ 4 अरब डॉलर से अधिक का हथियार सौदा किया है और बांग्लादेश के साथ भी रक्षा सहयोग पर बातचीत जारी है। पाकिस्तान सरकार अपने रक्षा उद्योग को आर्थिक स्थिरता का जरिया मान रही है, खासकर IMF के 7 अरब डॉलर के आर्थिक सुधार कार्यक्रम के बीच।

    विदेशी हस्तक्षेप का आरोप

    सूडानी सेना और RSF दोनों पक्षों ने विदेशी हथियार सप्लाई का आरोप लगाया है। सेना ने RSF पर UAE से हथियार लेने का आरोप लगाया, जबकि RSF ने सेना पर विदेशी समर्थन का आरोप लगाया। इस पृष्ठभूमि में पाकिस्तान का यह हथियार सौदा और सऊदी अरब की मध्यस्थता क्षेत्रीय भू-राजनीति और शक्ति संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निष्कर्ष:
    सूडान में मानवीय संकट और गृहयुद्ध के बीच पाकिस्तान का हथियार सौदा और सऊदी अरब की मध्यस्थ भूमिका, क्षेत्रीय सुरक्षा, भू-राजनीति और पाकिस्तान की आर्थिक रणनीति सभी के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है।

  • Syria: अलेप्पो में युद्ध जैसे हालात…. सेना-SDF के बीच खूनी संघर्ष में 15 की मौत, लाखों लोग बेघर

    Syria: अलेप्पो में युद्ध जैसे हालात…. सेना-SDF के बीच खूनी संघर्ष में 15 की मौत, लाखों लोग बेघर


    अलेप्पो।
    सीरिया (Syria) के सबसे बड़े शहर अलेप्पो (Largest city Aleppo) में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। सीरियाई सरकारी सेना (Syrian government forces) और कुर्द बहुल सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस (SDF) के बीच शेख मकसूद तथा अशरफीह जैसे कुर्द-प्रभुत्व वाले इलाकों में लगातार तीसरे दिन भीषण झड़पें चल रही हैं। इन लड़ाइयों में अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक लाख से अधिक नागरिकों को अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा है। अल जजीरा ने एक सीरियाई सैन्य सूत्र के हवाले से बताया कि सीरियाई सेना ने शेख मकसूद और अशरफीह जिलों में एसडीएफ के ठिकानों पर तोपखाने से हमले किए, जबकि भारी मोर्टार हमलों और स्नाइपर गतिविधियों के बीच लोग भागते रहे। वहीं, एसडीएफ ने कहा कि उसके लड़ाके सीरियाई क्वार्टर (हय अल-सेरियान) के पास सीरियाई सरकारी बलों के साथ भयंकर झड़पों में लगे हुए हैं।

    अल जजीरा के अनुसार, राज्य मीडिया के हवाले से अलेप्पो स्वास्थ्य निदेशालय ने कहा कि एसडीएफ की गोलाबारी में कम से कम सात नागरिक मारे गए और 52 घायल हुए, जबकि एसडीएफ ने दावा किया कि कुर्द बहुल इलाकों में आठ नागरिकों की मौत हुई। स्थानीय अधिकारियों का अनुमान है कि लगभग दो-तिहाई निवासी सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों से भाग गए हैं, लेकिन तोपखाने और जमीनी हमलों के बीच 100,000 से अधिक लोग अभी भी फंसे हुए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की ने सीरियाई सरकार द्वारा अनुरोध किए जाने पर सहायता करने की तत्परता का संकेत दिया है।

    तुर्की के रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि अंकारा उत्तरी सीरिया में हो रहे घटनाक्रमों पर ‘करीब से नजर रख रहा है’ और इस बात को दोहराया कि तुर्की आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सीरिया की लड़ाई का समर्थन करता है। अल जजीरा के अनुसार, तुर्की और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच स्थिति को शांत करने के लिए मध्यस्थता कर रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा लड़ाई में अशरफीह और शेख मकसूद के केंद्रीय हिस्सों में अभूतपूर्व सैन्य आवाजाही शामिल है, जो हाल के वर्षों में अलेप्पो में देखी गई सबसे तीव्र झड़पों में से एक है।

    सीरियाई सरकार के सूत्रों ने अल जजीरा को बताया कि एसडीएफ अलेप्पो के शेख मकसूद और अशरफीह इलाकों से नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए मध्यस्थों के माध्यम से दमिश्क के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, एसडीएफ ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने न तो इन क्षेत्रों से सुरक्षित मार्ग की मांग की है और न ही ऐसा करने का उसका कोई इरादा है। सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए गए एक बयान में समूह ने कहा कि वह खुद को हमलावर नहीं मानता है और इसलिए उसके पास पीछे हटने का कोई कारण नहीं है। बयान में कहा गया कि हमारी सेनाओं ने किसी भी प्रकार के सुरक्षित मार्ग का अनुरोध नहीं किया है और न ही करेंगी, क्योंकि हम हमलावर पक्ष नहीं हैं।

    पहलवी ने गुरुवार रात को विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया था और उन्होंने शुक्रवार रात 8 बजे भी प्रदर्शनों का आह्वान किया। ‘वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी‘ की वरिष्ठ फेलो होली डैग्रेस ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों का रुख बदलने वाला कारक पहलवी का ईरानियों से बृहस्पतिवार और शुक्रवार को रात 8 बजे सड़कों पर उतरने का आह्वान था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से यह स्पष्ट हो गया कि ईरानियों ने इस आह्वान को गंभीरता से लिया और इस्लामी गणराज्य को उखाड़ फेंकने के लिए विरोध प्रदर्शन किया।

  • ममता बनर्जी ने 2026 विधानसभा चुनाव में जीत का दावा किया, कहा- अगला लक्ष्य दिल्ली होगा

    ममता बनर्जी ने 2026 विधानसभा चुनाव में जीत का दावा किया, कहा- अगला लक्ष्य दिल्ली होगा

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कोलकाता में आयोजित एक रैली में 2026 के विधानसभा चुनाव में अपनी जीत का दावा किया। ममता ने कहा कि भाजपा कितनी भी कोशिश कर ले, वह बंगाल में सत्ता हासिल नहीं कर पाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बंगाल में जीतने के बाद उनका अगला राजनीतिक लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली होगा।

    भाजपा और केंद्र सरकार पर हमला

    रैली में ममता ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा अब लंबे समय तक भारत पर शासन नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां भाजपा के राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रही हैं और कई राज्यों में सत्ता पर जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं।

    निर्वाचन आयोग और धरना की तैयारी

    सीएम ममता बनर्जी ने अपने सांसद कल्याण बनर्जी को निर्देश दिए कि आगामी राजनीतिक कदम के तहत उनका अगला धरना स्थल निर्वाचन आयोग होगा। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा और बिहार में चुनाव आयोग की मदद से सत्ता हासिल की। ममता ने पूछा कि क्या भाजपा बंगाल पर भी इसी तरह कब्जा करने का प्रयास करेगी।

    ईडी छापेमारी पर ममता का बयान

    ममता ने आईपैक कार्यालय पर हुई ईडी की छापेमारी के संदर्भ में अपने फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि ईडी उनकी पार्टी की रणनीति से जुड़ी जानकारियां चुराने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा, “मैंने जो किया, टीएमसी अध्यक्ष के रूप में किया और इसमें कोई गलत बात नहीं है।”

    राजनीतिक संकेत और भविष्य की योजना

    ममता बनर्जी की यह रैली सिर्फ विधानसभा चुनाव में जीत का जश्न नहीं थी, बल्कि आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के संकेत भी थे। उन्होंने साफ किया कि टीएमसी का अगला लक्ष्य केवल बंगाल तक सीमित नहीं है और उनकी नजर राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत उपस्थिति बनाने पर है।
    ममता बनर्जी की कोलकाता रैली में भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखे आरोप, निर्वाचन आयोग के प्रति सवाल और 2026 विधानसभा चुनाव में जीत का दावा ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उनका यह स्पष्ट संदेश है कि टीएमसी केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगी और दिल्ली की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाने का इरादा रखती है।

  • ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान में गुस्सा: ‘ट्रंप के हाथ ईरानियों के खून से सने’, विरोध प्रदर्शन तेज

    ईरान | ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाले आंदोलन में बदल गया है। विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर ईरान के निर्वासित विपक्षी नेता रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने देश की सत्ता क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सौंपने की मांग की।

    सरकारी बयान और अमेरिका-इजरायल पर आरोप

    ईरान के सरकारी टीवी ने पहली बार विरोध प्रदर्शनों को दिखाया और दावा किया कि अमेरिका और इजरायल के ‘आतंकवादी एजेंटों’ ने माहौल बिगाड़ा है। आयतुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ दंगाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के लिए तोड़फोड़ कर रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान विदेशियों के भाड़े के सैनिकों को बर्दाश्त नहीं करेगा।

    खामेनेई का विरोधकारियों और अमेरिका पर बयान

    खामेनेई ने कहा, “लाखों कुर्बानियों के बाद हम सत्ता में आए हैं और इतनी आसानी से झुकने वाले नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ हजारों ईरानियों के खून से सने हैं। ईरान के युवाओं को एकता बनाए रखनी होगी।” उन्होंने जून 2025 में ईरान के परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमले का भी जिक्र किया। इस दौरान भीड़ ने अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए।

    रजा पहलवी का आह्वान और हिंसा की झलक

    निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के लोगों से आह्वान किया कि वे सड़कों पर उतरें, क्योंकि पूरी दुनिया की निगाहें ईरान पर हैं। सरकारी टीवी पर मेट्रो स्टेशनों और बैंकों में आग, जलती हुई बसें और कारें दिखाई गईं। ईरानी मीडिया ने पीपुल्स मुजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन (एमकेओ) पर इस अशांति का आरोप लगाया, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद अलग हुआ एक विपक्षी गुट है।

    इंटरनेट और संचार बाधित

    गुरुवार, 8 जनवरी 2026 की रात ईरान सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन लाइनें काट दीं। इंटरनेट कंपनियों क्लाउडफ्लेयर और नेटब्लॉक्स ने इसे रिपोर्ट किया और कहा कि इसका कारण ईरान सरकार का हस्तक्षेप था। इससे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन की जानकारी और संचार बाधित हो गया।

    परिस्थितियों का अंतरराष्ट्रीय असर

    महंगाई विरोध से शुरू हुए आंदोलन का असर राजनीतिक अस्थिरता और सरकार की जवाबदेही पर पड़ रहा है। खामेनेई और अमेरिका-इजरायल के बीच आरोप-प्रत्यारोप, देश में इंटरनेट ब्लैकआउट और रजा पहलवी का आह्वान ईरान की आंतरिक स्थिति को और नाजुक बना रहे हैं। विरोध प्रदर्शन ने केवल आर्थिक मुद्दों को नहीं, बल्कि राजनीतिक और सुरक्षा के गंभीर पहलुओं को भी उजागर किया है।

  • ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    अंतरराष्ट्रीय मध्य पूर्व के देश ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. बीते करीब 12 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सड़कों पर नजर आ रहा है.

    गुरुवार रात हालात और बिगड़ गए, जब राजधानी तेहरान समेत 100 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए.

    प्रदर्शनों के दौरान कई जगह आगजनी की घटनाएं हुईं. सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आईं. इसके साथ ही, कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की भी सूचना मिली है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए. बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में आते नहीं दिख रहे हैं.

    अमेरिका की चेतावनी और ईरान का जवाब

    इन घटनाओं के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की गई, तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा. इस बयान के बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ईरान सरकार किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क है.

    सरकारी टीवी ने तोड़ी चुप्पी

    लंबे समय तक हालात पर चुप्पी साधे रखने के बाद अब ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार हिंसा की बात स्वीकार की है. एक कार्यक्रम के दौरान यह माना गया कि प्रदर्शनों के समय हिंसक घटनाएं हुई हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है. यह स्वीकारोक्ति बताती है कि हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब उन्हें छिपाना संभव नहीं रहा.

    हालांकि, सरकार ने जनता के गुस्से को इन घटनाओं की वजह मानने से इनकार किया है. सरकारी टीवी का दावा है कि आगजनी और हिंसा के पीछे अमेरिका और इज़रायल से जुड़े ‘आतंकी एजेंट’ हैं. ईरानी शासन का कहना है कि देश में अशांति फैलाने के लिए बाहर से साजिश रची जा रही है. यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने अंदरूनी विरोध को विदेशी हस्तक्षेप बताया हो.

    आर्थिक संकट बना बड़ा कारण

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देश में चल रहा आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जनता के गुस्से की बड़ी वजह हैं. आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है. ऐसे हालात में सरकार के लिए स्थिति संभालना आसान नहीं रह गया है.

  • स्पेस स्टेशन में खराब हुई एस्ट्रोनॉट की तबीयत, जानिए NASA ने क्‍या लिया फैसला

    स्पेस स्टेशन में खराब हुई एस्ट्रोनॉट की तबीयत, जानिए NASA ने क्‍या लिया फैसला

    न्यूयॉर्क। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने एक दुर्लभ फैसला लेते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी कि ISS पर चल रहे एक मिशन को जल्दी खत्म करने का ऐलान किया है। NASA ने कहा कि एक अंतरिक्ष यात्री की स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। स्पेस एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका-जापान-रूस के 4 अंतरिक्ष यात्रियों की टीम अब तय किए गए प्लान से पहले ही अगले कुछ दिनों में पृथ्वी पर लौट आएगी। इस स्वास्थ्य समस्या की वजह से NASA ने नए साल की पहली स्पेसवॉक को भी रद्द कर दिया।

    NASA के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ने क्या कहा?
    NASA ने मरीज की निजता का हवाला देते हुए प्रभावित अंतरिक्ष यात्री का नाम या बीमारी का विवरण नहीं बताया। हालांकि, NASA ने साफ किया कि अंतरिक्ष यात्री अब स्थिर स्थिति में है। एजेंसी के मुख्य स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेम्स पोल्क ने कहा कि यह कोई आपात स्थिति नहीं है, लेकिन हम अंतरिक्ष यात्री की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष स्टेशन से यह NASA का यह पहला मेडिकल एग्जिट होगा, हालांकि पहले दांत दर्द या कान के दर्द जैसी छोटी समस्याओं का इलाज स्टेशन पर ही किया गया है।
    कम से कम 6 महीने रहने की योजना थी

    पृथ्वी पर लौट रही 4 सदस्यीय टीम SpaceX के यान से अगस्त में अंतरिक्ष स्टेशन पहुंची थी और उसकी वहां कम से कम 6 महीने रहने की योजना थी। टीम में NASA के जीना कार्डमैन और माइक फिंके, जापान के किमिया युई तथा रूस के ओलेग प्लातोनोव शामिल हैं। फिंके और कार्डमैन को स्पेसवॉक करके अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक्स्ट्रा बिजली प्रदान करने वाले नए सोलर पैनल की तैयारी करनी थी।

    यह फिंके का अंतरिक्ष स्टेशन का चौथा दौरा जबकि युई का दूसरा दौरा था। कार्डमैन और प्लातोनोव पहली बार अंतरिक्ष यात्रा पर गए हैं।
    स्पेस स्टेशन पर 3 अन्य अंतरिक्ष यात्री भी मौजूद

    बता दें कि इस समय अंतरिक्ष स्टेशन पर 3 अन्य अंतरिक्ष यात्री भी हैं। इनमें NASA के क्रिस विलियम्स तथा रूस के सर्गेई मिकाएव और सर्गेई कुद-सेवर्चकोव शामिल हैं। ये नवंबर में सोयुज रॉकेट से 8 महीने के लिए स्पेस स्टेशन पर रहने के लिए आए थे। अब ये तीनों अंतरिक्ष यात्री गर्मियों में लौटेंगे। NASA ने SpaceX को अंतरिक्ष स्टेशन को 2030 के अंत या 2031 की शुरुआत में समुद्र के ऊपर सुरक्षित तरीके से कक्षा से बाहर करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

  • पाकिस्तान में 10 करोड़ से अधिक मोबाइल ब्लॉक

    पाकिस्तान में 10 करोड़ से अधिक मोबाइल ब्लॉक

    इस्‍ल्‍माबाद। पाकिस्तान टेलीकॉम अथॉरिटी (PTA) ने 2024-25 वित्तीय वर्ष में लगभग 10 करोड़ मोबाइल फोन्स को ब्लॉक किया है। चोरी, नकली और क्लोन किए गए फोन पर नकेल कसने के लिए यह अहम कदम उठाया गया है। इससे पाकिस्तान के मोबाइल मार्केट में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। PTA ने ग्राहकों को सुरक्षित रखने के लिए डिवाइस आइडेंटिफिकेशन रजिस्ट्रेशन एंड ब्लॉकिंग सिस्टम (DIRBS) का इस्तेमाल किया है।
    इस कदम ने ना सिर्फ ग्राहकों को सुरक्षित किया बल्कि स्थानीय मोबाइल निर्माण को भी इससे काफी बढ़ावा मिला है। भारत को भी ऐसे सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

    7.2 करोड़ नकली फोन हुए ब्लॉक
    PTA की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ब्लॉक किए गए मोबाइल फोन में 7.2 करोड़ नकली या डुप्लीकेट फोन थे। इसके अलावा, 2.7 करोड़ ऐसे फोन थे, जिनके IMEI नंबर डुप्लीकेट या क्लोन किए गए थे। वहीं, 8.68 लाख हैंडसेट खोए हुए या चोरी के बताए गए थे। ये कार्रवाई पाकिस्तान के डिजिटल माहौल को सुरक्षित करने और ऐसे डिवाइस को मार्केट में आने से रोकने के लिए किए गए बड़े प्रयासों का हिस्सा है, जो ग्राहकों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं थे।
    क्या है DIRBS?
    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि DIRBS को मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट (MDM) रेगुलेशन, 2021 के तहत लाया गया था। इस सिस्टम ने डिवाइस रजिस्ट्रेशन को नेटवर्क ऑथराइजेशन से जोड़ा है।

    सिस्टम की मदद से पाकिस्तान में स्मगलिंग और अनऑथराइज्ड डिवाइस के इस्तेमाल को बहुत कम कर दिया गया है। इस कारण पाकिस्तानी नेटवर्क पर सिर्फ वेरिफाइड और नियमों का पालन करने वाले डिवाइस ही काम कर सकेंगे।

    पाकिस्तान में बने मोबाइल का हो रहा ज्यादा इस्तेमाल
    PTA द्वारा उठाए गए इस कदम की मदद से स्थानीय मोबाइल निर्माण में भारी वृद्धि भी देखने को मिली। 2025 तक, पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले 95% से अधिक डिवाइस वहीं बने थे। इसमें 68% स्मार्टफोन शामिल हैं।

    पाकिस्तान में कुल 36 कंपनियों को निर्माण करने की अनुमति मिली है। इनमें सैमसंग, शाओमी, ओप्पो और वीवो जैसी बड़ी कंपनियां भी शामिल हैं।

    रेवन्यू में हुई बढ़ोतरी
    2019 से, व्यक्तिगत मोबाइल डिवाइस रजिस्ट्रेशन से सरकार को 83 अरब रुपये से अधिक का रेवेन्यू मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदमों से ग्राहकों को ना सिर्फ घटिया और नुकसान पहुंचाने वाले डिवाइसों से सुरक्षा मिलती है। साथ ही, यह स्थानीय उत्पादन और प्रौद्योगिकी विकास में निवेश को भी प्रोत्साहित करता है।

    भारत को भी उठाना चाहिए सख्त कदम
    एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार को भी इस तरह का अहम कदम उठाना चाहिए। हाल ही में दिल्ली के करोल बाग में सैमसंग के नकली फोन बेचने वाले गिरोह का पर्दा फाश किया गया है। गिरोह कीमतों में सैमसंग के नकली प्रीमियम स्मार्टफोन्स को बेच रहा था, जिससे ग्राहकों की प्राइवेसी को नुकसान पहुंचा।