Category: International

  • जम्मू कश्मीर में LOC के पास दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, इंडियन आर्मी की जवाबी कार्रवाई के बाद वापस लौटे

    जम्मू कश्मीर में LOC के पास दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, इंडियन आर्मी की जवाबी कार्रवाई के बाद वापस लौटे

    जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर के सांबा, राजौरी और पुंछ जिलों में रविवार शाम को लाइन ऑफ कंट्रोल पर कुछ ड्रोन देखे गए। ड्रोन देखने के बाद भारतीय सेना के जवानों ने काउंटर उपाय अपनाए। इसके बाद पाकिस्तानी ड्रोन वापस लौट गए। अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) और नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे कई अग्रिम क्षेत्रों में सुरक्षा बलों ने संदिग्ध ड्रोन की गतिविधि देखी। अधिकारियों ने बताया कि सभी ड्रोन पाकिस्तान की तरफ से आए थे और भारतीय क्षेत्र के ऊपर कुछ मिनट तक मंडराने के बाद वापस लौट गए।
    सेना के अधिकारियों के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध ड्रोन की गतिविधि को देखते हुए सुरक्षा बलों ने जमीन पर तलाश अभियान शुरू किया है। उन्होंने बताया कि राजौरी में नियंत्रण रेखा के पास नौशेरा सेक्टर की रखवाली कर रहे सेना के जवानों ने शाम करीब छह बजकर 35 मिनट पर गनिया-कलसियां ​​गांव के ऊपर ड्रोन की गतिविधि को देखते हुए मध्यम और हल्की मशीन गनों से गोलीबारी की। राजौरी जिले के तेरियाथ के खब्बर गांव में शाम 6.35 बजे एक और ड्रोन देखा गया।

    सैन्य अधिकारियों ने शाम छह बजे ड्रोन देखे
    अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन जैसी उड़ने वाली वस्तु कलाकोट के धर्मसाल गांव से आया और भरख की ओर बढ़ गयी। उन्होंने बताया कि शाम करीब 7:15 मिनट पर सांबा के रामगढ़ सेक्टर के चक बाबराल गांव के ऊपर एक ड्रोन जैसी वस्तु कुछ मिनटों तक मंडराती हुई देखी गई। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार शाम छह बजकर 35 मिनट पर पुंछ जिले के नियंत्रण रेखा (एलओ) पर स्थित मनकोट सेक्टर में तैन से टोपा में भी एक ड्रोन जैसी वस्तु देखी गई थी।

    शुक्रवार को गिराया गया था पाकिस्तानी ड्रोन
    सैन्य अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार रात को सुरक्षा बलों ने सांबा जिले से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के पास घगवाल के पलोरा गांव में पाकिस्तान से आए एक ड्रोन द्वारा गिराए गए हथियारों की खेप बरामद की। उन्होंने बताया कि इस खेप में दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 गोलियां और एक ग्रेनेड शामिल थे।

  • वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की क्यूबा को धमकी, कहा-समझौता कर ले नहीं तो परिणआम भुगतने तैयार

    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के करीबी सहयोगी क्यूबा को रविवार को एक और चेतावनी जारी की। वेनेजुएला में अमेरिका के हवाई हमलों और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपदस्थ किए जाने के बाद क्यूबा में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन भड़कने की आशंका है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि या तो क्यूबा अमेरिका के साथ समझौता कर ले नहीं तो उसे परिणआम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, क्यूबा समय रहते फैसला कर ले, कहीं ऐसा ना हो कि देर हो जाए।

    वेनेजुएला के तेल का प्रमुख खरीदार रहा क्यूबा अब इसकी खेप से वंचित हो गया है, क्योंकि अमेरिकी सेना वेनेजुएला के तेल उत्पादों के उत्पादन, शोधन और वैश्विक वितरण को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत टैंकर को जब्त करना जारी रखे हुए है। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल और धन का इस्तेमाल कर रहा था और बदले में उसे सुरक्षा प्रदान कर रहा था, लेकिन अब और नहीं! क्यूबा को अब न तो तेल मिलेगा और न ही धन।’

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने लिखा, ‘मैं उन्हें कड़ी सलाह देता हूं कि वे बहुत देर होने से पहले समझौता कर लें।’ हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वह किस तरह के समझौते की बात कर रहे हैं। क्यूबा सरकार ने कहा है कि पिछले वीकेंड मादुरो को पकड़ने के लिए चलाए गए अमेरिकी अभियान में उसके 32 सैन्यकर्मी मारे गए। क्यूबा की दो मुख्य सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े ये कर्मी क्यूबा और वेनेजुएला के बीच हुए समझौते के तहत वेनेजुएला की राजधानी काराकास में तैनात थे।

    ट्रंप ने कहा, ‘वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है, जिन्होंने उन्हें इतने वर्षों तक बंधक बनाकर रखा था। अब वेनेजुएला के पास अमेरिका है, जो (निस्संदेह!) दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है। हम उनकी रक्षा जरूर करेंगे।’
    वेनेजुएला ऑपरेशन के बाद कैसे बदले समीकरण

    क्यूबा की अर्थव्यवस्था वेनेजुएला पर निर्भर है। वेनेजुएला से ही क्यूबा को पैसा और ईंधन मिलता है। बदले में क्यूब वेनेजुएला को मेडिकल फैसिलिटी और एक्सपर्ट देता है। ट्रंप दबाव डाल रहे हैं कि वेनेजुएला अमेरिका को तेल सप्लाई करे और ऐसे में क्यूबा बदहाल हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप की नजर अब क्यूबा पर भी है।
    क्यूबा पर कई बार कब्जे की कोशिश कर चुका है अमेरिका

    पहली बार नहीं जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की नजर क्यूबा पर है.। क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रों और अमेरिका की दुश्मनी काफी लंबी चली। क्यूबा के ही खुफिया विभाग ने कहा था कि अमेरिका ने सैकड़ों बार क्यूबा की सरकार गिराने और कब्जा करने का प्रयास किया। कई बार फिदेल कास्त्रो को मारने का प्लान भी बनाया गया।

    अमेरिका ने क्यूबा से निर्वासित लोगों की फौज तैयार कर दी थी और ऑपरेशन चलाया था लेकिन यह ऑपरेशन तीन दिन में ही फेल हो गया।
    1961-62 का ऑपरेशन मॉन्गूज

    राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के कार्यकाल में क्यूबा में ऑपरेशन मॉन्गूज चलाया गया था। वहीं फिदेल कास्त्रो को मारने के लिए कई तरह के प्लान बनाए गए। इसमें उनकी सिगार में विस्फोट करवाने का प्लान भी शामिल था। इसके अलावा फिदेल कास्त्रो के मिल्कशेक में जहर मिलवाने का प्रयास किया गया। उनके डाइविंग सूट में जानलेवा केमिकल लगाए गए।
    पूर्व प्रेमिका से हत्या का प्लान

    अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो की पूर्व प्रेमिका को भी उनकी हत्या करने के लिए राजी कर लिया था। उससे कास्त्रो को जहर देने को कहा गया था। हालांकि इस बात का पता कास्त्रो को चल गया और उन्होंने खुद ही पूर्व प्रेमिका को पिस्तौल दे दी और कहा कि मुझे शूट कर दो। उनकी प्रेमिका ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। 1975 की चर्च कमेटी ने बताया था कि 1960 से 65 के बीच अमेरिका ने कम से कम 8 बार फिदेल कास्त्रो को मरवाने का प्लान बनाया था।

    क्यूबा के एक पूर्व अधिकारी फैबियान एस्कलांते के मुताबिक अमेरिका ने फिदेल कास्त्रो को मरवाने के 638 प्रयास किए. इनमें से 184 बार निक्सन के कार्यकाल में उनपर हमला करवाने का प्रयास किया गया।

  • Pakistan: इस्लामाबाद में शादी समारोह में हुआ गैस सिलेंडर में ब्लास्ट… दूल्हा-दुल्हन समेत 8 लोगों की मौत

    Pakistan: इस्लामाबाद में शादी समारोह में हुआ गैस सिलेंडर में ब्लास्ट… दूल्हा-दुल्हन समेत 8 लोगों की मौत

    इस्लामाबाद । पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में रविवार की सुबह शादी समारोह (Wedding ceremony.) के बाद घर में रखा गैस सिलेंडर (Gas Cylinder suddenly exploded) अचानक फट गया। इसकी चपेट में आन से 8 लोगों की मौत हो गई, जिसमें दुल्हन और दूल्हा भी शामिल हैं। पुलिस और अधिकारियों ने यह जानकारी दी। विस्फोट तब हुआ जब शादी में शामिल मेहमान जोड़े के उत्सव के बाद घर में सो रहे थे। इस धमाके से घर का एक हिस्सा ढह गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। इस्लामाबाद पुलिस ने यह जानकारी दी है। इस घटना में 7 अन्य लोग घायल भी हुए हैं।

    पुलिस के बयान में कहा गया कि यह विस्फोट शहर के दिल में स्थित एक आवासीय इलाके में हुआ। सरकारी प्रशासक साहिबजादा यूसुफ ने बताया कि रविवार की सुबह जल्दी इस धमाके की सूचना मिली और अधिकारी अभी भी जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आसपास के कुछ घरों को भी नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने कहा कि जांच अभी जारी है। यह दुखद घटना शादी के उत्सव को मातम में बदल देने वाली एक बड़ी त्रासदी बन गई।

    घटना पर प्रधानमंत्री ने जताया गहरा दुख
    प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shehbaz Sharif) ने इस घटना में जान गंवाने वालों पर गहरा दुख व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उनके कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को बेहतरीन इलाज उपलब्ध कराया जाए और पूर्ण जांच के आदेश दिए। पाकिस्तान के कई घरों में कम प्राकृतिक गैस दबाव के कारण तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जाता है और गैस रिसाव के कारण ऐसे सिलेंडरों से जुड़े घातक हादसे अक्सर होते हैं।

  • ग्रीनलैंड को लेकर लामबंद होने लगा यूरोप, सैन्य मौजूदगी बढ़ाने पर जोर…

    ग्रीनलैंड को लेकर लामबंद होने लगा यूरोप, सैन्य मौजूदगी बढ़ाने पर जोर…


    लंदन।
    यूरोपीय देशों का एक समूह ग्रीनलैंड (European Countries group Greenland) में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की योजना पर चर्चा कर रहा है। इसकी अगुवाई यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) और जर्मनी (Germany) कर रहे हैं। ग्रुप का उद्देश्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को यह संदेश देना है कि यूरोप और नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) आर्कटिक सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। साथ ही स्वयं-शासित डेनिश क्षेत्र ग्रीनलैंड को लेकर वाशिंगटन की कब्जे संबंधी धमकियों का भी जवाब देना इसका मकसद है।

    ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि जर्मनी आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक संयुक्त NATO मिशन प्रस्तावित करने जा रहा है। इस मिशन का नाम आर्कटिक सेंट्री रखा जा सकता है, जो बाल्टिक सागर में महत्वपूर्ण ठिकनों की रक्षा के लिए शुरू किए गए बाल्टिक सेंट्री मिशन की तर्ज पर होगा।


    यूरोपीय कूटनीतिक सक्रियता

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सहयोगी देशों से हाई नॉर्थ यानी आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा उपस्थिति बढ़ाने की अपील की है। हाल के दिनों में उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज समेत कई नेताओं से इस मसले पर बातचीत की।

    यूरोपीय नेतृत्व का मानना है कि क्षेत्र में NATO की मजबूत और स्पष्ट भूमिका दिखाकर ट्रंप के उस तर्क को कमजोर किया जा सकता है, जिसके तहत वे राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की बात कर रहे हैं।

    ट्रंप के बयान और बढ़ती चिंता
    हाल की घटनाओं ने यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। इस महीने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की कार्रवाई के बाद ट्रंप प्रशासन की आक्रामक बयानबाजी फिर चर्चा में आ गई। खासकर ग्रीनलैंड पर सैन्य बल के इस्तेमाल की संभावना ने सहयोगी देशों को अपने विकल्पों पर तेजी से काम करने को मजबूर किया है।

    रविवार रात ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिका ग्रीनलैंड का मालिक बनेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका वहां मौजूद अपने सैन्य अड्डे पर फोर्स बढ़ा सकता है, लेकिन वास्तविक स्वामित्व जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर अमेरिका ऐसा नहीं करता तो रूस या चीन कर सकते हैं- और यह उनके रहते नहीं होगा।

    NATO की भूमिका पर चर्चा
    इस बीच जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडेफुल इस सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात करेंगे। बातचीत में ग्रीनलैंड और आर्कटिक स्थिरता में NATO की भूमिका प्रमुख विषय होगी।

    वेडेफुल ने कहा- आर्कटिक की सुरक्षा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। रूस और चीन के साथ पुराने और नए प्रतिद्वंद्वों को देखते हुए हमें NATO के भीतर मिलकर जिम्मेदारी निभाने के तरीकों पर चर्चा करनी चाहिए।


    ब्रिटेन बनाम फ्रांस का दृष्टिकोण

    सूत्रों के मुताबिक, स्टारमर का रुख यह है कि ब्रिटेन और यूरोप को अमेरिका के लिए अपनी ‘सॉफ्ट और हार्ड पावर’ की उपयोगिता दिखाकर ट्रंप को साथ लेना चाहिए- चाहे वह यूक्रेन युद्ध में रूस का प्रतिरोध हो या यूरोप के करीब अमेरिकी सुरक्षा हित। यह फ्रांस जैसे देशों की अपेक्षाकृत मुखर आलोचनात्मक लाइन से अलग है, जिन्होंने हाल ही में अमेरिकी दबाव से यूरोप के लिए खतरे की चेतावनी दी है। पिछले हफ्ते स्टारमर और ट्रंप के बीच हुई बातचीत में यूरो-अटलांटिक सुरक्षा और हाई नॉर्थ में रूस के बढ़ते आक्रामक रवैये को रोकने पर सहमति बनी।


    डेनमार्क की कूटनीतिक कोशिश

    उधर, डेनमार्क अब भी उम्मीद कर रहा है कि वॉशिंगटन की आगामी कूटनीतिक यात्रा से ट्रंप के रुख में नरमी आएगी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री- लार्स लोके रासमुसेन और विवियन मोट्जफेल्ड्ट उन तथ्यात्मक भूलों और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए सुरक्षा दावों को चुनौती देने की तैयारी में हैं, जिनके आधार पर ग्रीनलैंड को लेकर बहस तेज हुई है। हालांकि ट्रंप ने सैन्य बल के इस्तेमाल से इंकार नहीं किया है, लेकिन रूबियो ने सांसदों से कहा कि उद्देश्य हस्तक्षेप नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड को खरीदने का है- ताकि NATO की एकता पर सवाल न खड़े हों।

  • ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    ईरान में विरोध पर कड़ा रुख: सजा-ए-मौत की चेतावनी, मरने वालों की संख्या 72 पहुंची

    नई दिल्ली| ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और हालात तेजी से विस्फोटक होते जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सरकार ने बाहरी दुनिया से संपर्क तोड़ने के लिए इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय फोन लाइनों को पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बावजूद मानवाधिकार संगठनों से आ रही सूचनाएं बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। देशभर में आर्थिक तंगी, महंगाई और दमनकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग अब सीधे धार्मिक सत्ता और शासन व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों पर मौत की धमकी, ‘अल्लाह का शत्रु’ करार

    शनिवार को ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवहेदी आजाद ने सरकारी टेलीविजन पर सख्त बयान देते हुए प्रदर्शनकारियों को ‘मोहारेबेह’ यानी ‘अल्लाह के खिलाफ युद्ध’ का दोषी बताया। उन्होंने कहा कि जो भी इन प्रदर्शनों में शामिल है या प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहा है, उसे ईरानी कानून के तहत मौत की सजा दी जाएगी। अटॉर्नी जनरल ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना किसी देरी और नरमी के ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे चलाए जाएं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के संकेतों के बाद माना जा रहा है कि देशभर में अब बड़ा और व्यापक क्रैकडाउन शुरू होने वाला है।

    मानवाधिकार संगठनों का दावा: 72 की मौत, 2300 से ज्यादा गिरफ्तार

    मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (HRANA) के मुताबिक, अब तक कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, ईरानी मीडिया का दावा है कि गचसरन में बासिज बल के तीन सदस्य मारे गए हैं। इसके अलावा हमदान, बंदर अब्बास, गिलान और मशहद में भी सुरक्षा बलों के जवानों की मौत की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।

    अमेरिका का खुला समर्थन, ट्रंप प्रशासन की चेतावनी

    ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों को अमेरिका का खुला समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान के “बहादुर लोगों” के साथ खड़ा है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने कड़ा संदेश देते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ‘खेल’ न करे। विभाग ने कहा कि ट्रंप जो कहते हैं, उसका मतलब होता है और उसके नतीजे भी होते हैं।

    आर्थिक बदहाली से शुरू हुआ विद्रोह

    इन प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को ईरान की चरमराती अर्थव्यवस्था के खिलाफ हुई थी। ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 14 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव ने आम जनता की जिंदगी मुश्किल कर दी है। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर है, जो धीरे-धीरे धार्मिक सत्ता के खिलाफ राजनीतिक विद्रोह का रूप ले चुका है।

  • शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर लाठीचार्ज जैसा हमला, भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन

    शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर लाठीचार्ज जैसा हमला, भाजपा ने किया विरोध प्रदर्शन

    नई दिल्ली| पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर शनिवार रात पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना इलाके में हमला किए जाने से राजनीतिक माहौल गर्मा गया। यह घटना उस वक्त हुई जब शुभेंदु अधिकारी पुरुलिया में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद अपने निर्वाचन क्षेत्र नंदीग्राम लौट रहे थे। अधिकारी के अनुसार, रात करीब 8:20 से 8:30 बजे के बीच गरबेटा थाना क्षेत्र के चंद्रकोना रोड बाजार के पास अचानक उनके काफिले को रोक दिया गया।

    तृणमूल समर्थकों पर हमले का आरोप

    भाजपा का आरोप है कि चौराहे पर पहले से मौजूद तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के एक समूह ने काफिले को घेर लिया और शुभेंदु अधिकारी की गाड़ी पर बांस की लाठियों व डंडों से हमला किया। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी हुई और हालात तनावपूर्ण हो गए। बताया जा रहा है कि यह झड़प आम सड़क पर करीब एक घंटे तक चली, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप

    शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे और उन्होंने स्थिति को काबू में करने की कोई ठोस कोशिश नहीं की। अधिकारी ने अपने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार की “हिंसा और दंडमुक्ति की संस्कृति” से उत्साहित लोगों ने पुलिस की मौजूदगी में उन पर हमला किया। उन्होंने इसे कानून व्यवस्था की पूरी तरह विफलता बताया।

    पुलिस चौकी में धरने पर बैठे शुभेंदु अधिकारी

    हमले के बाद शुभेंदु अधिकारी सीधे चंद्रकोना रोड पुलिस चौकी पहुंचे और जमीन पर बैठकर धरना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक हमले के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी नहीं होती, वह पुलिस चौकी नहीं छोड़ेंगे। इस दौरान उन्होंने एक वकील की मदद से लिखित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू की। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हालात को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया, लोकतंत्र पर हमला बताया

    इस घटना पर भाजपा की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का पूर्ण पतन हो चुका है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनके शासन में पुलिस प्रशासन पक्षपाती और कमजोर हो चुका है। मजूमदार ने कहा कि नंदीग्राम के विधायक और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर हुआ यह हमला सुनियोजित और राजनीतिक हिंसा का उदाहरण है।

    बढ़ता सियासी तनाव

    घटना के बाद पश्चिम मेदिनीपुर से लेकर कोलकाता तक सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया है, वहीं पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला बंगाल की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।

  • भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    नई दिल्ली| लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने संगठन के गहरे संबंधों को खुलासा कर रहा है। कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने सैनिकों की अंतिम यात्रा में जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए आमंत्रित करती है। यह वीडियो किस समय का है, तारीख अभी मालूम नहीं चली। इसमें वह स्कूल के बच्चों को भाषण देता नजर आ रहा है। हालांकि, खुफिया स्रोतों ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि कर दी है।
    सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया, ‘पाकिस्तान की सेना मुझे जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए बुलाती है। क्या तुम्हें पता है कि भारत भी मुझसे डरता है?’ यह खुलासा पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंकवाद के भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को मजबूती देता है। यह घटना किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है कि एक आतंकी संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता बच्चों के स्कूल में जाकर युवा दिमागों को प्रभावित करे। पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर काम किया, जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी देखा गया था।

    आतंक का निर्यात करने में जुटा पाकिस्तान
    ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर में नए हमलों की तैयारी की थी, जिसे नई दिल्ली ने गंभीर चेतावनी करार दिया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह बताया गया है। ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था, जो आतंकी ढांचे को नष्ट करने का भारतीय अभियान था। अगर इसी तरह पाकिस्तान की ओर से आतंक का निर्यात जारी रहा तो इसकी नई फेज शुरू हो सकती है। यह भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए चिंता की बात है। ताजा वीडियो से पाकिस्तान की थू-थू हो रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना होगा।

  • US: महिला की हत्या के बाद फूटा गुस्सा, ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग.. कई शहरों में तनाव

    US: महिला की हत्या के बाद फूटा गुस्सा, ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग.. कई शहरों में तनाव


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में इमिग्रेशन अधिकारियों (Immigration officials) द्वारा 37 साल की महिला की गोली मारकर हत्या के बाद हालात संगीन हो गए हैं। गोली लगने के बाद ही रेनी गुड (Renee Good) नाम की महिला की मौत हो गई थी। इसके बाद अमेरिका के कई शहरों में लोगों को गुस्सा फूट पड़ा है। लॉस एंजेल्स, वॉशिंगटन से लेकर कंसास और मिसौरी तक लोग इस घटना के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। इस घटना के बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन (Donald Trump administration) पर भी दबाव बढ़ गया है।

    सरकार के अधिकारियों के मुताबिक पहले आईसीई के एजेंट महिला की कार के पास पहुंचे थे। महिला ने जैसे ही कार आगे बढ़ाई कि अधिकारियों ने उसपर गोली चला दी। रेनी गुड आईसीई विरोधी गुट में भी शामिल नहीं थीं। इस गटना के बाद ट्रंप प्रशासन ने मिनेसोटा में भारी तैनाती कर दी है। जानकारी के मुताबिक महिला अमेरिकी ही थी और वह इमिग्रेशन अभियान का टारगेट भी नहीं थी।

    इस घटना के बाद मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इस तरह की खौफ और हेडलाइन पैदा करने वाले ऐक्शन लोगों की जान लेने के अलावा कुछ नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यहां टीवी स्टाइल में सरकार चल रही है और इसकी कीमत लोगों को जान देकर चुकानी पड़ रही है।

    मिनियापोलिस के मेयर जैकब फ्रे ने भी कहा कि यह गोली आत्मरक्षा में नहीं चलाई गई बल्कि जानबूझकर हत्या करने के लिए चलाई गई थी। उन्होंने कहा कि आईसीई को शहर छोड़ देना चाहिए और यहां के लोगों को शांति से रहने देना चाहिए। न्यूयॉर्क के नए मेयर ममदानी ने भी कहा कि आईसीई देशभर में हिंसा के लिए जिम्मेदार है।

    अमेरिका में भारी बवाल
    अमेरिका के सिविल ऐक्टिविस्ट अब सड़कों पर उतर चुके हैं। रविवार को कई समूहों ने रैली निकाली। ऐसे में अमेरिका में संघीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच तनाव बढ़ गया है। इसी बीच पोर्टलैं में यूएस बॉर्डर पट्रोल एजेंट ने दो लोगों को गोली मार दी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक हफ्ते के भीतर शूटिंग की दो घटनाएं हो चुकी हैं। इससे पता चलता है कि डोनाल्ड ट्रंप की नजर में किसी की जान की कोई कीमत नहीं है।

  • ट्रंप की धमकी पर ग्रीनलैंड के सियासी दलों की दो-टूक, बोले- कोई दूसरा तय नहीं करेगा हमारे देश का भविष्य

    ट्रंप की धमकी पर ग्रीनलैंड के सियासी दलों की दो-टूक, बोले- कोई दूसरा तय नहीं करेगा हमारे देश का भविष्य


    नूक (ग्रीनलैंड)।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने जब से ग्रीनलैंड (Greenland) पर कब्जे की बात कही है, खलबली मची हुई है। अब ग्रीनलैंड की संसद (Greenland Parliament) के तमाम नेताओं ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया है। इसमें ग्रीनलैंड के नेताओं ने कहा है कि उनके देश का भविष्य कोई दूसरा नहीं तय करेगा, बल्कि खुद यहां के लोग करेंगे। इंसारत्तूस में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पांच पार्टियों के नेताओं द्वारा साइन किए गए एक बयान में, अमेरिका या डेनमार्क के नियंत्रण के किसी भी सुझाव को अस्वीकार कर दिया। इस बयान में कहा गया है कि हम अमेरिकन नहीं बनना चाहते हैं। हमें डैनिश नहीं होना चाहते। हम सिर्फ ग्रीनलैंड वाले बनकर रहना चाहते हैं।

    गौरतलब है कि तीन जनवरी को की गई कार्रवाई में वेनेजुएला के नेतृत्व को सफलतापूर्वक उखाड़ फेंकने के बाद, अमेरिका सरकार का हौसला बढ़ गया है। अब वह सीधे ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की बात कर रही है। विभिन्न यूरोपीय नेताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की है, लेकिन वे एक कथित सहयोगी द्वारा किए गए विश्वासघात पर कोई सुसंगत प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका को रूस और चीन को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने से रोकने के लिए उस पर अपना नियंत्रण करना चाहिए। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में तेल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर हम ग्रीनलैंड नहीं लेते हैं, तो रूस या चीन आपके पड़ोसी बन जाएंगे। ऐसा नहीं होने वाला है। मैं आसानी से डील करना चाहता हूं। लेकिन अगर हम इसे आसानी से नहीं करते हैं, तो हम इसे मुश्किल तरीके से करेंगे। उन्होंने डेनमार्क के एक स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता पर सवाल उठाया और इस विशाल, संसाधन से भरपूर द्वीप पर ऐतिहासिक दावों को खारिज कर दिया।

    ट्रंप ने कहा कि मैं डेनमार्क का प्रशंसक हूं, लेकिन, आप जानते हैं, सिर्फ इसलिए कि 500 साल पहले उनका एक जहाज वहां उतरा था, इसका मतलब यह नहीं है कि वे उस जमीन के मालिक हैं। यह टिप्पणियां अमेरिका और कई नाटो सहयोगियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने ऐसे किसी भी कदम को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी हमला नाटो और दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था का अंत होगा।

  • Iran में उग्र प्रदर्शनों के बीच क्राउन प्रिंस का घर वापसी का ऐलान, शहरों पर कब्जा करने की अपील

    Iran में उग्र प्रदर्शनों के बीच क्राउन प्रिंस का घर वापसी का ऐलान, शहरों पर कब्जा करने की अपील


    तेहरान।
    ईरान में उग्र होते प्रदर्शनों (Iran’s Escalating Protests) के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी (Exiled Crown Prince Reza Pahlavi) ने घर वापसी का ऐलान कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने ईरान के लोगों से अपील की है कि वे अब सिर्फ सड़कों पर ना उतरें बल्कि शहरों के सिटी सेंटर्स को अपने कब्जे में ले लें। उन्होंने कहा है कि अगर खूनी सत्ता के शीर्ष पर बैठे अली खामेनेई को उतार फेंकना है तो और ज्यादा संगठित होकर प्रदर्शन को तेज करना होगा।

    बता दें कि पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने महंगाई और आर्थिक बदहाली को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। इसके बाद यह प्रदर्शन उग्र होता चला गया। वहीं ईरान की इस्लामिक सरकार ने भी ऐक्शन के आदेश दे दिए और सेना की गोलीबारी में कई प्रदर्शनकारी मारे गए। अब तक इन प्रदर्शनों में 2017 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालांकि सरकारी आंकड़ों में केवल 65 मौतें ही बताई गई हैं।


    खामेनेई ने दी मृत्युदंड की चेतावनी

    ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई (86) ने प्रदर्शनकारियों को मृत्युदंड तक की चेतावनी द है। तेहरान में अपने परिसर में समर्थकों से कहा कि प्रदर्शनकारी अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने (ट्रंप ने) कहा है कि वह उनकी (प्रदर्शनकारियों की) मदद के लिए आगे आएंगे। इसके बजाय उन्हें अपने खुद के देश के हालात पर ध्यान देना चाहिए।”

    ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसिनी-इजेई ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को कोई कानूनी नरमी बरते बिना निर्णायक और अधिकतम सजा दी जाएगी। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद ट्रंप की इस चेतावनी को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है।


    ईरान पर हमले को तैयार बैठे हैं ट्रंप?

    ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अगर अमेरिका हमला करता है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि सैनिक जमीन पर भेजे जाएंगे, बल्कि इसका मतलब होगा कि दुश्मन को बहुत जोरदार तरीके से वहीं चोट पहुंचाई जाएगी जहां सबसे ज्यादा असर हो। ट्रंप ने कहा, “मैं ईरान के नेताओं से कहता हूं कि गोलियां चलाना शुरू मत करना, क्योंकि अगर तुमने ऐसा किया तो हम भी (तुम्हारे खिलाफ) करेंगे।”

    एसोसिएटेड प्रेस को मिले एक वीडियो में उत्तरी तेहरान के सादत आबाद इलाके में विरोध प्रदर्शन होते दिख रहे हैं और सड़कों पर हजारों लोग नजर आ रहे हैं इस दौरान एक व्यक्ति को खामेनेई मुर्दाबाद कहते हुए सुना गया है।