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  • ईरान में हालात खराब, भारत ने जारी की एडवाइजरी, देश छोड़ने का किया आग्रह

    ईरान में हालात खराब, भारत ने जारी की एडवाइजरी, देश छोड़ने का किया आग्रह

    नई दिल्ली। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन लगातार हिंसक होते जा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए भारत के दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इसमें छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और टूरिस्टों को सलाह दी गई है कि वे कमर्शियल फ्लाइट या उपलब्ध अन्य परिवहन साधनों के माध्यम से ईरान छोड़ दें।

    प्रदर्शन और हिंसा की स्थिति

    ईरान में विरोध प्रदर्शन लगभग 20 दिनों से जारी हैं। देशभर में 280 से ज्यादा जगहों पर अशांति की खबरें आई हैं। स्थानीय मीडिया और रिपोर्ट्स के अनुसार, इन विरोधों के दौरान कम से कम 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 20,000 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इंटरनेट सेवा पिछले पांच दिनों से बाधित है, जिससे लोगों तक ताजा जानकारी पहुंचने में कठिनाई हो रही है।

    भारतीय दूतावास की सलाह

    भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों से कहा है कि वे विरोध या प्रदर्शन वाली जगहों से बचें और अपने पासपोर्ट और अन्य पहचान दस्तावेज सुरक्षित रखें। दूतावास के साथ संपर्क बनाए रखें और किसी भी स्थानीय घटना के लिए मीडिया पर नजर रखें।

    इमरजेंसी हेल्पलाइन और संपर्क विवरण

    ईरान में किसी भी मदद या आपात स्थिति के लिए भारतीय नागरिक दूतावास से निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

    मोबाइल: +989128109115, +989128109109, +989128109102, +989932179359

    ईमेल: [email protected]

    इसके अलावा, सभी भारतीय नागरिकों से अपील की गई है कि जो लोग दूतावास में रजिस्टर नहीं हुए हैं, वे इस लिंक https://www.meaers.com/request/home
    पर जाकर रजिस्टर करें। यदि इंटरनेट बाधाओं के कारण रजिस्ट्रेशन संभव न हो, तो उनके परिवार भारत से रजिस्टर कर सकते हैं।

    दूतावास का उद्देश्य

    भारतीय दूतावास का मुख्य उद्देश्य वहां रह रहे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद प्रदान करना है। उन्होंने बार-बार चेतावनी दी है कि सभी भारतीय नागरिकों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी तरह के जोखिम वाले स्थानों से दूर रहना चाहिए।

    निष्कर्ष:
    ईरान में बढ़ती हिंसा और अशांति को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई है और उनके सुरक्षित बाहर निकलने के लिए दूतावास ने सक्रिय कदम उठाए हैं।

  • अबू धाबी में इंडियन ऑयल का ऐतिहासिक सफलता, तेल के नए भंडार की खोज

    अबू धाबी में इंडियन ऑयल का ऐतिहासिक सफलता, तेल के नए भंडार की खोज

    नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को जानकारी दी कि भारत की तेल कंपनियों को अबू धाबी में एक बड़ी सफलता मिली है। यहां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीसीएल) का संयुक्त उपक्रम, ऊर्जा भारत प्राइवेट लिमिटेड (यूबीपीएल), शिलैफ और हबशन क्षेत्रों में हल्के कच्चे तेल का भंडार खोजने में सफल रहा।

    प्रधानमंत्री मोदी के ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्रयास में योगदान

    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में नया मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मेहनत और तकनीकी क्षमता को दिखाती है। इससे न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि विदेशी निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

    देश में तेल और गैस खोज के नए कदम

    भारत में तेल और गैस की खोज के लिए ‘मिशन अन्वेषण’ पहल शुरू की गई है, जो देश के इतिहास का सबसे बड़ा सर्वेक्षण कार्यक्रम है। इसके तहत 20,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे किया जाना है, जिसमें से अब तक 8,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का सर्वे पूरा हो चुका है। इसके अलावा अब 10 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र को तेल खोज के लिए खोला गया है और 99 प्रतिशत प्रतिबंधित क्षेत्र हटा दिए गए हैं।

    ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम और निवेश संभावनाएं

    ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के तहत देशी और विदेशी कंपनियों को तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश करने का अवसर मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में 25 नए तेल और गैस क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, 154 क्षेत्र सक्रिय हैं, और अब तक 14 नई खोजें सफल रही हैं। आने वाला समय निवेश और भागीदारी के नए रिकॉर्ड बना सकता है।

    यूबीपीएल की इस खोज ने इंडियन ऑयल और बीपीसीएल के संयुक्त प्रयासों को सार्थक किया है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए यह खोज रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक असर से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

  • ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील

    ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील


    नई दिल्ली। ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने देश को गहरे संकट में धकेल दिया है। हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं और अब तक 2,571 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारियों और बढ़ती हिंसा के बीच आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए कड़ी एडवाइजरी जारी करते हुए ईरान तुरंत छोड़ने की अपील की है।
    ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में रह रहे सभी भारतीय नागरिकपर्यटक, छात्र, कारोबारी और PIO (पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन)उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स या सुरक्षित परिवहन के किसी भी माध्यम से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि यह फैसला तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात और अनिश्चित स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों, धरनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से पूरी तरह दूर रहने की सख्त सलाह दी है।

    साथ ही कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक दूतावास के नियमित संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया व आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

    एडवाइजरी में यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी भारतीय नागरिक अपने जरूरी दस्तावेजपासपोर्ट, वीजा, पहचान पत्र और अन्य इमिग्रेशन पेपर्सहमेशा तैयार और सुरक्षित रखें। किसी भी तरह की सहायता, जानकारी या आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से तत्काल संपर्क करने को कहा गया है।

    इस बीच, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संस्था ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ ने हालात को और भी चिंताजनक बताया है। संस्था के मुताबिक, अब तक मारे गए 2,571 लोगों में से 2,403 प्रदर्शनकारी हैं, जबकि 147 सरकारी कर्मी भी हिंसा में जान गंवा चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मृतकों में 12 बच्चे और 9 ऐसे आम नागरिक शामिल हैं, जो किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।

  • वॉशिंगटन में ईरान पर बन रहा खतरनाक प्लान, जानिए रजा पहलवी का ट्वीट

    वॉशिंगटन में ईरान पर बन रहा खतरनाक प्लान, जानिए रजा पहलवी का ट्वीट


    वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान ने यदि प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की तो हम सैन्य हस्तक्षेप करेंगे।
    उन्होंने मंगलवार को ईरानी लोगों से अपील की और कहा कि वे प्रदर्शन करना जारी रखें। ईरान की सरकार के आगे झुकने की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोगों को अपने संस्थानों पर कब्जा जमा लेना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को मारने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस तरह ईरान के लोगों को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं। एक तरफ वह प्रदर्शनकारियों से हर हाल में डटे रहने को कह रहे हैं तो वहीं सख्ती करने पर ईरान में हमले की धमकी भी दे रहे हैं।

    ऐसे ही सुर ईरान के विपक्षी नेता और दशकों से देश से बाहर बसे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के बोल भी डोनाल्ड ट्रंप जैसे ही हैं। एक तरफ ट्रंप ने अपील की है, ‘देशभक्त ईरानी आंदोलन करते रहें। आप अपने संस्थानों को कब्जे में लें। हत्यारों के नाम नोट कर लें। उन्हें बड़ी कीमत चुकानी होगी। मैंने ईरान के अधिकारियों से तब तक सारी मीटिंग कैंसिल कर दी हैं, जब तक कि बेगुनाह आंदोलनकारियों के कत्ल नहीं रुक जाते।’ वहीं दूसरी तरफ रजा पहलवी भी इसी अंदाज में ईरान के लोगों को उकसा रहे हैं।
    रजा पहलवी का ट्वीट- दुनिया सुन रही है आपकी आवाज
    रजा पहलवी ने ट्वीट किया, ‘मेरे साथियों। दुनिया आपकी आवाज सुन रही है और आपके साहस को देख रही है। आपने राष्ट्रपति ट्रंप की बात सुनी ही होगी। उनका कहना है कि मदद रास्ते में है।

    आप संघर्ष जारी रखिए, जैसा आप करते आए हैं। आप इस शासन को यह भ्रम पैदा ना कर दें कि ईरान में जिंदगी सामान्य है और पटरी पर है। यह नरसंहार की स्थिति है और ऐसा करने वालों को सजा दी जाएगी। इसके अलावा मेरा ईरान की सेना के लिए भी संदेश है। आप ईरान की राष्ट्रीय सेना हैं। आप इस्लामिक रिपब्लिक की आर्मी नहीं हैं। आपकी जिम्मेदारी है कि आप अपने देश के लोगों को बचाएं। आपके पास ज्यादा समय नहीं है और हम आपके साथ जल्दी ही जुड़ने वाले हैं।’
    आखिर वॉशिंगटन में ईरान पर बन रहा क्या प्लान
    इस तरह ट्रंप से लेकर रजा पहलवी तक दोनों की भाषा एक ही है।
    जानकारों का मानना है कि अमेरिका की ओर से ऐसा प्रचारित करने का प्रयास किया जा रहा है कि ईरान में बेगुनाह लोगों को मारा जा रहा है। ऐसे में उनकी रक्षा के लिए हम दखल रहे हैं। यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप और रजा पहलवी एक ही भाषा बोल रहे हैं। बता दें कि रजा पहलवी दशकों से अमेरिकी समर्थन से ही ईरान से बाहर रह रहे हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका को यह सही वक्त लग रहा है कि ईरान के अयातुल्लाह अली खामेनेई शासन को हटाकर रजा पहलवी को गद्दी पर बिठाया जा सकता है। यही अमेरिका की रणनीति है और इसी लिहाज से बयान भी दिए जा रहे हैं ताकि माहौल तैयार हो सके।
  • मुस्लिम देश ने US को किया होशियार, ईरान पर किया हमला तो अंजाम…

    मुस्लिम देश ने US को किया होशियार, ईरान पर किया हमला तो अंजाम…


    तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच दूसरे पश्चिमी एशियाई देश कतर ने मंगलवार (13 जनवरी) को अमेरिका को आगाह किया है कि अगर उसने पड़ोसी देश ईरान पर हमला किया तो वह विनाशकारी होगा। दोहा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने दो टूक कहा, “हम जानते हैं कि कोई भी तनाव… क्षेत्र और उससे बाहर विनाशकारी परिणाम देगा और इसलिए हम इससे जितना हो सके बचना चाहते हैं।” लगे हाथ कतर ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच कोई भी तनाव क्षेत्र के लिए ‘विनाशकारी’ होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के क्षेत्र के लिए गंभीर परिणाम ला सकते हैं। उन्होंने ये बातें वॉशिंगटन द्वारा इस्लामिक गणराज्य में विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई के जवाब में हमले की धमकी देने के बाद कही है।
    दरअसल, पिछले साल जून में जब अमेरिका ने ईरानी परमाणु सुविधा केंद्रों पर हमले किए थे, तब इन हमलों के जवाब में ईरान ने कतर में संयुक्त राज्य अमेरिका के अल उदीद सैन्य अड्डे को निशाना बनाया था। तब दोहा ने अपने क्षेत्र पर हुए इस अभूतपूर्व हमले का फायदा उठाकर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जल्द ही युद्धविराम कराने में मदद की थी। कतर को डर है कि अगर अमेरिका ने फिर से ईरान पर हमला किया तो ईरान अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने के लिए कतर पर हमला कर सकता है।
    विरोध-प्रदर्शन की आग में झुलस रहा ईरान
    बता दें कि ईरान इस वक्त विरोध-प्रदर्शन की आग में झुलस रहा है। इन हिंसक प्रदर्शनों में अब तक वहां 2000 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सुरक्षाकर्मी और आमजन शामिल हैं। इस बीच, व्हाइट हाउस ने सोमवार को दोहराया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकने के लिए ईरान पर हवाई हमले करने पर विचार कर रहे हैं।
    ईरान भी पलटवार करेगा

    दूसरी तरफ, ईरान में दखल देने की ट्रंप की बार-बार की धमकियों के जवाब में, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि ईरान भी पलटवार करेगा। उन्होंने सरकारी टीवी द्वारा प्रसारित एक संदेश में कहा कि अमेरिकी सेना और शिपिंग ईरान के ‘वैध लक्ष्य’ होंगे। इस संदेश के बाद से इलाके में न सिर्फ तनाव गहरा गया है बल्कि युद्ध के हालात बने हुए हैं।

    इस बीच, वाशिंगटन ने यह भी कहा है कि कूटनीति के लिए रास्ता खुला है,लेकिन ईरान ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ निजी चर्चाओं में “काफी अलग लहजा” अपनाया है।
    कूटनीतिक समाधान निकल सकता है

    कुवैत विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अंसारी ने कहा, “हम अभी भी ऐसी स्थिति में हैं, जहां हमारा मानना ​​है कि इससे कूटनीतिक समाधान निकल सकता है।” उन्होंने कहा, “हम सभी पक्षों से बात करने में शामिल हैं, जाहिर है कि अपने पड़ोसियों और क्षेत्र में अपने भागीदारों के साथ एक कूटनीतिक समाधान खोजना चाहते हैं।” इस बीच, नॉर्वे स्थित एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने कहा कि उसने पुष्टि की है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान 648 लोग मारे गए, जिनमें नौ नाबालिग शामिल हैं, लेकिन चेतावनी दी कि मरने वालों की संख्या शायद बहुत अधिक है – “कुछ अनुमानों के अनुसार यह संख्या 6,000 से अधिक है।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    रूस ने यूक्रेन पर फिर ढाया कहर; पावरग्रिड पर मिसाइलों से हमला

    कीव । रूस ने यूक्रेन पर एक और हमला बोला है। चार दिनों के अंदर यह यूक्रेन पर चौथा बड़ा ड्रोन हमला है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इस बार भी पावर ग्रिड पर निशाना लगाया गया। इन हमलों से अमेरिका द्वारा रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद कराने के प्रयासों को भी ठेस पहुंची है। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच करीब चार साल से युद्ध जारी है।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि रूस ने करीब 300 ड्रोन, 18 बैलेस्टिक मिसाइल और सात क्रूज मिसाइल से हमला बोला है। रात भर चला यह हमला आठ क्षेत्रों पर हुआ। इसमें उत्तर पूर्व खारकीव में एक मेल डिपो में चार लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा कीव क्षेत्र में सैकड़ों घर अंधेरे में डूब गए। यूक्रेन की राजधानी में इन दिनों भीषण ठंड पड़ रही है। यहां पर दिन का तापमान माइनस 12 डिग्री सेल्सियस है।

    गलियां बर्फ से ढंकी हुई हैं और जेनरेटरों के शोर से शहर का बुरा हाल है।

    कई आवासीय भवनों को नुकसान
    स्थानीय अधिकारियों मुताबिक रूसी हमलों में यूक्रेन के खारकीव क्षेत्र में, 10 लोग घायल हुए। वहीं, दक्षिणी शहर ओडेसा में, छह लोग घायल हुए। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख ओलेह किपर ने कहा कि हमलों ने एनर्जी ग्रिड, एक अस्पताल, एक किंडरगार्टन, एक शैक्षिक संस्थान और कई आवासीय भवनों को नुकसान पहुंचाया। रूसी हमलों ने भीषण ठंड में यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रूस द्वारा पावर ग्रिड पर हमले से बिजली और पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। रूस चाहता है कि यूक्रेनी नागरिकों की मुश्किलें बढ़ाकर वह युद्ध में बढ़त हासिल कर ले। वहीं यूक्रेनी अधिकारियों ने इस रणनीति को सर्दी को हथियार बनाने की रणनीति बताया है।

    चार दिन पहले भी निशाना
    चार दिन पहले रूस ने यूक्रेन पर सैकड़ों ड्रोन और दर्जनों मिसाइल से बड़ा हमला किया था। इस युद्ध में सिर्फ दूसरी बार ऐसा हुआ जब ताकतवर हाइपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया।

    पश्चिमी यू्क्रेन पर हुए इस हमले के जरिए रूस ने यू्क्रेन के नाटो सहयोगियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि पीछे हटने वाला नहीं है। सोमवार को ही अमेरिका ने रूस पर आरोप लगाया है कि वह युद्ध को गैरजरूरी ढंग से भड़का रहा है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस कोशिश में जुटे हैं कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध बंद हो जाए।
  • कनाडा में एयरपोर्ट से 400 किलो सोना उड़ा ले गए थे चोर, एक गिरफ्तार

    कनाडा में एयरपोर्ट से 400 किलो सोना उड़ा ले गए थे चोर, एक गिरफ्तार

    नई दिल्‍ली। कनाडा में हुए अब तक के सबसे बड़े गोल्ड हाइस्ट मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। कनाडा के पील रीजन की पुलिस ने बताया है कि करीब 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के सोने की चोरी से जुड़े मामले में 43 साल के अरसलान चौधरी को गिरफ्तार किया लिया गया है। बता दें को यह मामला 2023 के प्रोजेक्ट 24K से जुड़ा है, जब चोरों ने करीब 400 किलो सोना चुराकर पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी थी।
    दरअसल 17 अप्रैल 2023 को एक फ्लाइट स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख से टोरंटो पहुंची थी। इस फ्लाइट में करीब 400 किलो शुद्ध सोना लाया गया था, जिसकी कीमत 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा थी। इसके साथ ही करीब 2.5 मिलियन डॉलर की विदेशी करेंसी भी थी। सोने की यह खेप एयरपोर्ट से उतारकर एक अलग जगह ले जाई गई।
    हालांकि कुछ ही घंटों बाद इसके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

    इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और अब तक इस मामले में 10 लोगों की पहचान कर उन्हें आरोपी बनाया गया है। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया है। पुलिस ने अरसलान चौधरी पर भी 5,000 डॉलर से ज्यादा की चोरी, अपराध से हासिल संपत्ति रखने और गंभीर अपराध की साजिश रचने के आरोप लगाए हैं और सोमवार को उसे टोरंटो के पियर्सन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया।
    एक आरोपी भारत में?

    इन आरोपियों में 33 साल का सिमरन प्रीत पनेसर भी शामिल है, जो ब्रैम्पटन का रहने वाला है और पहले एयर कनाडा में काम करता था। पुलिस का कहना है कि पनेसर ने एयरलाइन सिस्टम में हेरफेर कर सोने की खेप को डायवर्ट करने में मदद की थी।

    पुलिस को शक है कि वह इस समय भारत में है। पिछले साल उसे चंडीगढ़ के बाहरी इलाके में एक किराए के फ्लैट में ट्रेस किया गया था। उसके खिलाफ पूरे कनाडा में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।
    अब तक कई गिरफ्तार

    इस मामले में एक अन्य आरोपी आर्चित ग्रोवर को मई 2024 में टोरंटो एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया था, जब वह भारत से लौट रहा था। अब तक गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में ओंटारियो के रहने वाले पूर्व एयर कनाडा कर्मचारी परमपाल सिद्धू और अमित जलोटा भी शामिल हैं। इसके अलावा ब्रैम्पटन के प्रसाथ परमलिंगम और टोरंटो के अली रजा को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। ब्रैम्पटन के ही अम्मद चौधरी और 27 साल के दौराने किंग मैकलीन को भी हिरासत में लिया गया है। किंग मैकलीन इस समय अमेरिका में हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले में जेल में है।

  • ईरान में खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले इरफान सोलतानी को फांसी की सजा की तैयारी, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल

    ईरान में खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले इरफान सोलतानी को फांसी की सजा की तैयारी, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच एक और खौफनाक खबर सामने आई है। 26 वर्षीय इरफान सोलतानी जिन्होंने खामेनेई के खिलाफ 8 जनवरी को हुए प्रदर्शन में भाग लिया था अब उन्हें फांसी की सजा दिए जाने की तैयारी है। सोलतानी को 14 जनवरी को फांसी दी जा सकती है और उनके मामले को लेकर मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में गहरी चिंता जताई जा रही है।

    इरफान सोलतानी जो तेहरान के पास कराज शहर के फर्दीस इलाके के निवासी हैं, को खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता का अवसर नहीं दिया गया। वे बिना वकील से मिले ही अपनी सजा का सामना करने के लिए मजबूर हो गए हैं। उनका परिवार भी इस मामले से पूरी तरह अज्ञात रखा गया है और उन्हें इस बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई। 11 जनवरी को जब सोलतानी के परिवार को उनकी मौत की सजा के बारे में सूचित किया गया, तब भी उन्हें केवल 10 मिनट की मुलाकात करने की अनुमति दी गई।

    सोलतानी की बहन जो खुद एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं ने कानूनी तरीके से अपने भाई की सजा को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें केस की फाइल तक देखने और अपने भाई का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं दी गई। यह मामले की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। इसके अलावा लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी मारियो नॉफाल ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ईरान में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सरकार इन विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए डर का माहौल बना रही है।

    तेज ट्रायल और सख्त दंड की प्रक्रिया ईरान में बढ़ते विरोधों को दबाने के लिए अपनाई जा रही है। इजरायल और अमेरिका आधारित न्यूज आउटलेट जफीड के मुताबिक सोलतानी का मामला आने वाली सख्त सजाओं का संकेत हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान सरकार इस तरह के मामलों के माध्यम से आगे के प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है। नॉर्वे में पंजीकृत कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ने भी इस मामले की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की है।

    ईरान में खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला पिछले 16 दिनों से जारी है। इन प्रदर्शनों में अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। इस दौरान 10,681 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तेहरान में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हॉस्पिटल के बाहर शवों का ढेर लगा हुआ है, और लोग अपने परिजनों के शवों की तलाश कर रहे हैं। ईरान की सरकार की यह कठोर कार्रवाई और नफरत से भरी नीति विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए उठाए गए कदमों का हिस्सा है, लेकिन इनका परिणाम केवल और अधिक हिंसा और रक्तपात हो सकता है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ईरान में इस तरह की कार्रवाई केवल सत्ता की तानाशाही को मजबूत करने के लिए की जा रही है।

  • भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते

    भारत-जर्मनी के बीच शुरू होगी वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा…. दोनों देशों ने किए 19 समझौते


    अहमदाबाद।
    जर्मनी (Germany) ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए अपने एयरपोर्ट (Indian Passport holders) से वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा (Visa-free Transit facility) शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है। इसकी घोषणा सोमवार को भारत-जर्मनी संयुक्त बयान में की गई। इस नई सुविधा से भारतीय यात्रियों को जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने के लिए अलग से ट्रांजिट वीजा की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय यात्रा अधिक सुगम और तेज हो जाएगी। जर्मनी के इस फैसले से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि भारत और जर्मनी के बीच आपसी संबंध और पर्यटन को भी नई मजबूती मिलेगी।


    19 महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और जर्मनी ने सोमवार को डिफेंस, ट्रेड, जरूरी मिनरल्स और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने का वादा किया। नेताओं के बीच वार्ता के बाद दोनों देशों ने कुल 19 समझौतों पर साइन किए। इसमें डिफेंस इंडस्ट्रियल सहयोग के लिए एक रोडमैप और हायर एजुकेशन सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर समझौता भी शामिल है।


    डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में बड़ा समझौता

    भारत और जर्मनी ने डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में अपने आपसी सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया। भारत और जर्मनी ने सीमा पार ई-कॉमर्स और समयबद्ध अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिहाज से डाक, एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य सीमा पार होने वाले ई-कॉमर्स व्यापार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामान की समय पर आपूर्ति को बेहतर बनाना है। समझौता आपसी व्यापार को और अधिक सरल और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।


    बढ़ेगा निर्यात, लॉजिस्टिक सिस्टम को मिलेगी मजबूती

    बयान में बताया गया है कि इस सहयोग से निर्यात बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा जिससे भारतीय लॉजिस्टिक सिस्टम को मजबूती मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच आसान होने से भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर अपने कारोबार को बढ़ाने और नई पहचान बनाने में काफी मदद मिलेगी। यह कदम भारतीय व्यवसायों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा।


    व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

    समझौते के जरिए भारत और जर्मनी मिलकर एक प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवा शुरू करेंगे। इस सेवा के तहत इंडिया पोस्ट के विशाल नेटवर्क और जर्मनी के डॉयचे पोस्ट-डीएचएल ग्रुप के वैश्विक एक्सप्रेस और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वैश्विक लॉजिस्टिक ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे भारत से विदेश भेजे जाने वाले सामान की डिलीवरी अब पहले से ज्यादा तेज और भरोसेमंद होगी। साथ ही ग्राहकों के लिए सामान भेजने से लेकर मिलने तक की पूरी निगरानी करना भी काफी आसान हो जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।


    रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी बढ़ेगा सहयोग

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों ने सैन्य अभ्यास प्रशिक्षण और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने पर सहमति जताई है। व्यापार और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार के 50 अरब डॉलर के पार पहुंचने पर खुशी जाहिर की। इसके साथ ही दोनों देशों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने का समर्थन किया है ताकि आर्थिक रिश्तों को और मजबूती दी जा सके।


    सेमीकंडक्टर, खनिज और इनोवेशन पर भी सहयोग

    दोनों देशों ने बातचीत में टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और इनोवेशन के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने रिन्यूएबल इनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और क्लाइमेट ऐक्शन में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत में फ्री और नियम आधारित नेवीगेशन व्यवस्था का समर्थन किया। साथ ही वैश्विक शांति और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर समान विचार व्यक्त किए।


    वीजा-मुक्त ट्रांजिट सुविधा की घोषणा

    दोनों देशों ने अपने नागरिकों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की। जर्मनी की ओर से भारतीय पासपोर्ट धारकों को वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा की घोषणा की गई। वीजा-फ्री ट्रांजिट सुविधा का मतलब है कि दूसरे देश जाते समय जर्मन एयरपोर्ट से गुजरने वाले भारतीय यात्रियों को अलग से ट्रांजिट वीजा के लिए आवेदन नहीं करना होगा। इस कदम से भारतीय नागरिकों के लिए अंतर्राष्ट्रीय यात्रा आसान हो जाएगी। इससे दोनों देशों के नागरिकों के आपसी संबंध मजबूत होंगे। पीएम मोदी ने इस फैसले का स्वागत किया है।

  • स्पेन से पोलैंड तक बढ़ी भारत की आर्थिक पकड़: यूरोप में तेजी से उछला भारतीय निर्यात

    स्पेन से पोलैंड तक बढ़ी भारत की आर्थिक पकड़: यूरोप में तेजी से उछला भारतीय निर्यात


    नई दिल्ली। अमेरिकी बाजार में टैरिफ और प्रतिबंधों की चर्चा के बीच भारत यूरोपीय देशों में अपने व्यापारिक कदम मजबूती से बढ़ा रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि स्पेन जर्मनी बेल्जियम और पोलैंड जैसे देशों में भारतीय निर्यात में तेज़ी आई है जिससे यूरोप में भारत की आर्थिक पकड़ मजबूत हो रही है।स्पेन में सबसे तेज़ उछाल देखने को मिला। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत से स्पेन को किया गया निर्यात 56 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 4.7 अरब डॉलर हो गया जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह मात्र 3 अरब डॉलर था। इस बढ़ोतरी के साथ भारत के कुल निर्यात में स्पेन की हिस्सेदारी 2.4 प्रतिशत तक पहुंच गई जो यूरोपीय देशों में सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है।

    जर्मनी में भी भारतीय उत्पादों की मांग स्थिर और मजबूत बनी हुई है। इसी अवधि में जर्मनी को निर्यात 9.3 प्रतिशत बढ़कर 7.5 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। भारत के कुल निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी अब करीब 2.6 प्रतिशत हो चुकी है। वहीं बेल्जियम में निर्यात 4.4 अरब डॉलर के पार हो गया है और पोलैंड में भी 7.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि भारत सिर्फ परंपरागत यूरोपीय बाजारों तक सीमित नहीं रहा बल्कि नए देशों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार स्पेन में तेज़ बढ़ोतरी जर्मनी में स्थिर मांग और बेल्जियम-पोलैंड में निरंतर विस्तार यह दर्शाता है कि भारत की यूरोप रणनीति संतुलित और विविध हो रही है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते FTA से आने वाले समय में व्यापार को और रफ्तार मिलने की संभावना है।

    वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 136 अरब डॉलर तक पहुंच गया जिसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर रहा। यूरोपीय संघ अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत-EU FTA लागू होता है तो कपड़ा दवाइयां स्टील पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।इस तरह यूरोप में भारतीय निर्यात की लगातार बढ़ती पकड़ न केवल भारत की आर्थिक वृद्धि को बल दे रही है बल्कि वैश्विक व्यापार में उसकी रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यूरोपीय बाजार भारत के लिए अमेरिकी बाजार के मुकाबले अधिक स्थिर और भरोसेमंद बन सकता है।