Category: International

  • इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को भेजा प्रशंसा पत्र, स्वस्थ होने के बाद यरुशलम आने का दिया न्योता

    इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को भेजा प्रशंसा पत्र, स्वस्थ होने के बाद यरुशलम आने का दिया न्योता

    नई दिल्ली: इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार को प्रशंसा पत्र भेजकर उनकी बहादुरी और सूझबूझ के लिए आभार व्यक्त किया है। राष्ट्रपति ने 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई के विमान को सुरक्षित उतारने और उसमें सवार यात्रियों को बड़े खतरे से बचाने के लिए कैप्टन मच्छार की सराहना की। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि गंभीर खतरे के बीच कैप्टन ने जिस साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, वह प्रशंसनीय है। राष्ट्रपति ने उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना भी की। कैप्टन मच्छार को यह पत्र अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ के दौरान मिला। राष्ट्रपति हर्जोग ने उन्हें पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद यरुशलम आने का निमंत्रण दिया है। इस पत्र के जरिए उन्होंने कैप्टन के प्रति इजरायल की कृतज्ञता व्यक्त की और उनकी बहादुरी को भारत तथा इजरायल के बीच ऐतिहासिक संबंधों से भी जोड़ा।

    अपने पत्र में राष्ट्रपति हर्जोग ने गंभीर खतरे के समय कैप्टन मच्छार द्वारा बनाए रखे गए संयम की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने लिखा कि दर्द के बावजूद परिस्थितियों का सामना करने, अपने जीवन पर मंडरा रहे तत्काल खतरे से लड़ने और सही निर्णय लेने की क्षमता कैप्टन के मजबूत चरित्र और असाधारण साहस को दर्शाती है। राष्ट्रपति के अनुसार, इस घटना में कैप्टन ने जिस तरह चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में जिम्मेदारी निभाई, वह उनके व्यक्तित्व की मजबूती का प्रमाण है। पत्र में उन्होंने कैप्टन के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हुए भरोसा जताया कि वह धीरे-धीरे अपनी रिकवरी पूरी करेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि वह उनके पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद यरुशलम में स्वागत करने और इजरायल के लोगों की ओर से आभार तथा सम्मान व्यक्त करने के लिए उत्सुक हैं।

    इस सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रपति हर्जोग ने एक समारोह के दौरान कैप्टन मच्छार को राष्ट्रपति पुरस्कार देने का इरादा भी जाहिर किया था। यह समारोह उड़ान में सवार छह इजरायली नागरिकों की वीरता को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया था। इन नागरिकों को असैन्य वीरता के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर हर्जोग ने घोषणा की कि कैप्टन मच्छार के चोटों से उबरने के बाद उन्हें भी राष्ट्रपति पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। कैप्टन को यह सम्मान देने का निर्णय विमान को सुरक्षित उतारने और यात्रियों को गंभीर खतरे से बचाने में उनकी भूमिका के संदर्भ में लिया गया है। फिलहाल वह अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। राष्ट्रपति का पत्र उन्हें इसी दौरान मिला, जिसमें उनकी बहादुरी की सराहना के साथ जल्द स्वस्थ होने की शुभकामनाएं दी गई हैं।

    राष्ट्रपति हर्जोग ने कैप्टन मच्छार की वीरता को भारत और इजरायल के पुराने संबंधों का हिस्सा बताते हुए एक सदी से अधिक समय पहले पवित्र भूमि में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कैप्टन की बहादुरी उन्हें उन भारतीय सैनिकों की प्रतिष्ठित पंक्ति में शामिल करती है, जिन्होंने एक सौ साल से अधिक समय पहले पवित्र भूमि के शहरों को मुक्त कराने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली थी। राष्ट्रपति के मुताबिक, उन सैनिकों ने इजरायल के इतिहास में स्थायी स्थान बनाया और कैप्टन मच्छार भी अब दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यह घटना भारत गणराज्य और इजरायल के बीच आपसी गर्मजोशी तथा संबंधों को और मजबूत करेगी।

    पत्र के अंतिम हिस्से में राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा कि कैप्टन मच्छार संयुक्त अरब अमीरात में अपने मित्रों और साझेदारों की देखरेख में हैं। उन्होंने उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि वह कैप्टन के स्वस्थ होकर ताकत हासिल करने के बाद यरुशलम में उनका स्वागत करना चाहते हैं। राष्ट्रपति ने इसे इजरायल की ओर से आभार और सम्मान व्यक्त करने का अवसर बताया। कैप्टन मच्छार को भेजे गए पत्र और उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार देने की घोषणा के जरिए इजरायल ने विमान को सुरक्षित उतारने में उनके साहस तथा यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों को सम्मान दिया है।

  • काला सागर में फंसे 3 भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी… जानिए क्या पूरा मामला?

    काला सागर में फंसे 3 भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी… जानिए क्या पूरा मामला?


    बुखारेस्ट (रोमानिया)।
    काला सागर (Black Sea) में जहाज (Ship) से बचाए गए तीन भारतीय नागरिक अब स्वदेश लौट रहे हैं। भारतीय दूतावास (Embassy of India) ने रविवार को बताया कि साहिल संधू, अश्विनी कुमार और हरमन सिंह भारत (India) के लिए रवाना हो गए हैं। दूतावास ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी मदद और सहायता उपलब्ध कराई। इससे पहले, तीनों को छह अक्तूबर को जहाज एमवी रॉयद मम्मादोव (Ship MV Roid Mammadov) से बचाया गया था। यह जहाज काला सागर में था।


    तीनों की वापसी के लिए क्या मदद दी गई?

    रोमानिया और मोल्दोवा में भारतीय दूतावास ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें बताया गया कि तीनों भारतीय नागरिक आज भारत के लिए रवाना हो गए हैं। दूतावास ने उनकी वापसी आसान बनाने के लिए सभी जरूरी मदद और सहायता दी।

    दूतावास ने रोमानिया के अधिकारियों, कॉन्स्टांटा काउंटी अस्पताल और रोमानिया की बचाव टीमों का आभार जताया। उसने कहा कि इन सभी ने अहम मदद की। साथ ही, सहयोग और समर्थन दिया। इस पोस्ट में विदेश मंत्रालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय कूटनीति (इंडियन डिप्लोमेसी) को भी टैग कर आभार जताया गया।


    कहां रह रहे थे तीनों भारतीय?

    दूतावास ने सात अक्तूबर को जानकारी दी थी कि उसके एक प्रतिनिधि ने एक दिन पहले बचाए गए तीनों भारतीय नागरिकों से मुलाकात की थी। ये तीनों एमवी रॉयद मम्मादोव जहाज से बचाए गए थे। जहाज काला सागर में था। दूतावास ने बताया था कि इनमें से दो भारतीयों को एक होटल में ठहराया गया था। तीसरे भारतीय का रोमानिया के कॉन्स्टांटा स्थित काउंटी अस्पताल में इलाज चल रहा था। उस समय तीनों की हालत स्थिर थी।


    दूतावास ने क्या इंतजाम किए?

    दूतावास ने तीनों भारतीयों को भरोसा दिलाया था कि रोमानिया से उनकी सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए हर जरूरी सहायता दी जाएगी। उनकी जरूरत की चीजें भी उपलब्ध कराई गईं। इनमें मोबाइल फोन जैसी जरूरी वस्तुएं शामिल थीं। ये सामान शिपिंग कंपनी के स्थानीय एजेंट की मदद से दिलाए गए। उनके लिए भारतीय भोजन का भी इंतजाम किया गया। इसके लिए एक स्थानीय भारतीय रेस्तरां की मदद ली गई।

  • नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

    नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में बुधी गंडक नदी (Budhi Gandak River) में बड़ी बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है. प्राधिकरण ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है. साथ ही नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी है।

    NDRRMA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी. पोस्ट के मुताबिक, चुमानुम्ब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 की तरफ से बुधी गंडक नदी में बाढ़ का पानी आ रहा है. इसे देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के करीब न जाएं।


    त्रिशूली दोभान तक नदी के पास जाने से बचें

    NDRRMA ने त्रिशूली दोभान तक नदी के किनारे जाने से मना किया है. प्रशासन का कहना है कि बाढ़ का पानी आने के दौरान नदी के आसपास रहना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में लोगों को नदी से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

    प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे चेतावनी को गंभीरता से लें. बाढ़ का पानी गुजरने तक नदी के पास जाने या वहां रुकने से बचें. खासकर नदी के किनारे रहने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. प्राधिकरण ने लोगों को ऊंचाई वाली जगहों पर जाने की सलाह दी है. बाढ़ के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा हो सकता है. ऐसे में सुरक्षित और ऊंची जगह पर रहना जरूरी है।

    NDRRMA ने कहा कि लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए. नदी के पास जाने से बचना चाहिए और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए. अगर आसपास पानी का स्तर बढ़ता दिखाई दे, तो सुरक्षित जगह पर जाना जरूरी है।


    ‘बाढ़ का पानी गुजरने तक सतर्क रहें’

    प्राधिकरण ने कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के आसपास जाने से बचें. लोगों को जल्दबाजी में नदी पार करने या किनारे के करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें. बाढ़ का खतरा टलने तक ऊंचाई वाली सुरक्षित जगहों पर रहें और नदी से दूर रहें।

    इससे पहले भी नेपाल की बुधी गंडक नदी में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था. सितंबर 2026 में गोरखा जिले के नामरुंग इलाके में बाढ़ के कारण मनास्लु ट्रेक का रास्ता बंद हो गया था. बाढ़ में दो पुल बह गए थे. इनमें बूढ़ी गंडकी नदी पर बना एक झूला पुल भी शामिल था. बाढ़ से दो जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।

  • पेरू में ‘हिटलर मुसोलिनी’ बना मेयर, सिर्फ 25 वोटों से जीता चुनाव, नाम के कारण दुनिया भर में चर्चा

    पेरू में ‘हिटलर मुसोलिनी’ बना मेयर, सिर्फ 25 वोटों से जीता चुनाव, नाम के कारण दुनिया भर में चर्चा


    नई दिल्ली। चुनाव में जीत दर्ज करने वाले नेताओं की चर्चा आमतौर पर उनके राजनीतिक विचारों, वादों और कामकाज को लेकर होती है, लेकिन पेरू में एक नवनिर्वाचित मेयर अपने नाम की वजह से सुर्खियों में हैं। यहां हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल की है। उनके नाम में शामिल ‘हिटलर’ और ‘मुसोलिनी’ शब्दों ने इस चुनाव को दुनिया भर में चर्चा का विषय बना दिया है।

    45 वर्षीय फ्लोरेस ने पेरू के हुआनुको विभाग के पहाड़ी इलाके में स्थित क्वेरोपाल्का जिले में मेयर पद का चुनाव लड़ा था। उन्होंने केंद्रीय-वामपंथी पार्टी ‘आहोरा नासियोन’ के टिकट पर मैदान में उतरकर जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 229 वोट मिले, जो कुल 663 वैध मतों का 34.5 प्रतिशत है।

    फ्लोरेस ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गैस्पर बेनिल्डे ओसोरियो ज़ाम्ब्रानो को केवल 25 वोटों के अंतर से हराया। दक्षिणपंथी पार्टी ‘पॉपुलर रिन्यूअल पेरू’ के उम्मीदवार ओसोरियो को 204 वोट मिले।

    730 से कुछ अधिक आबादी वाला जिला, लेकिन चर्चा पूरी दुनिया में

    क्वेरोपाल्का पेरू के लौरिकोचा प्रांत में स्थित एक छोटा-सा जिला है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में यहां की आबादी 730 से कुछ अधिक थी। यह इलाका राजधानी लीमा से करीब 360 किलोमीटर दूर है।

    इतनी कम आबादी वाले जिले में हुए स्थानीय चुनाव की चर्चा सामान्य तौर पर क्षेत्र तक सीमित रह सकती थी, लेकिन फ्लोरेस के नाम ने इसे अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। उनके नाम के दो हिस्से जर्मनी के एडोल्फ हिटलर और इटली के बेनिटो मुसोलिनी की याद दिलाते हैं। दोनों 20वीं सदी के कुख्यात तानाशाहों में गिने जाते हैं और फासीवादी विचारधारा तथा दमनकारी शासन से जुड़े रहे थे।

    हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम अपने आप में उसके राजनीतिक विचारों या विचारधारा का प्रमाण नहीं होता। फ्लोरेस की चुनावी जीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी की प्रमुख वजह भी उनके नाम और ऐतिहासिक तानाशाहों के नामों से उसकी समानता है।

    पेरू में पहले भी ‘हिटलर’ नाम वाले नेता बटोर चुके हैं सुर्खियां

    पेरू में यह पहला मामला नहीं है, जब किसी नेता के नाम में ‘हिटलर’ शब्द होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई हो। इससे पहले हिटलर ग्यूस्कलिन अल्बा सांचेज भी अपने नाम को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। वह केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी ‘वी आर पेरू’ से जुड़े थे और वर्ष 2011 से 2014 तक युंगार शहर के मेयर रहे थे।

    अल्बा ने वर्ष 2018 में भी मेयर का चुनाव जीता था। उस समय उनके प्रतिद्वंद्वी लेनिन व्लादिमीर रोड्रिगेज वाल्वरडे ने उनकी उम्मीदवारी की वैधता को चुनौती दी थी।

    रिपोर्टों के मुताबिक, अल्बा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ‘हिटलर रिटर्न्स’ और ‘हिटलर विद द पीपल’ जैसे नारे इस्तेमाल किए थे। उन्होंने खुद को ‘अच्छा हिटलर’ भी बताया था। अल्बा का कहना था कि उनके पिता ने उनका नाम रखते समय नाजी नेता एडोल्फ हिटलर के इतिहास और उसकी विरासत के बारे में जानकारी नहीं रखी थी।

    सांसद भी रहे हैं हिटलर नाम वाले नेता

    पेरू में हिटलर नाम के एक अन्य नेता भी चर्चा में रहे हैं। हिटलर सावेद्रा पेशे से सर्जन थे और ‘वी आर पेरू’ पार्टी से सांसद बने थे। उन्होंने वर्ष 2021 से 2024 में अपनी मृत्यु तक संसद में काम किया। उनका निधन 46 वर्ष की उम्र में हुआ था।

    इन मामलों ने पेरू के कुछ नेताओं के नामों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बार-बार चर्चा का विषय बनाया है। अब हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस की जीत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद नाम किसी स्थानीय चुनाव को किस तरह वैश्विक सुर्खियों तक पहुंचा सकते हैं।

  • जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज

    जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा है कि यूक्रेन को अब नया राष्ट्रपति चुन लेना चाहिए। उनका आरोप है कि जेलेंस्की के पास रूस के साथ समझौता करने के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने इन मौकों का लाभ नहीं उठाया।

    ट्रंप की नाराजगी खास तौर पर रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को लेकर है। उनका मानना है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से ईंधन की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले जारी हैं और रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना भी विवाद का विषय बनी हुई है।

    ‘ऐसा नेता चाहिए, जो रूस से समझौता कर सके’

    ट्रंप पहले भी जेलेंस्की को रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की सलाह दे चुके हैं। उनका तर्क है कि ऐसे हमलों से युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

    ट्रंप का आरोप है कि जेलेंस्की ने रूस के साथ समझौता करने के कई मौके गंवा दिए। अब उन्होंने यूक्रेन में ऐसे नेतृत्व की जरूरत बताई है, जो रूस के साथ बातचीत कर किसी समझौते तक पहुंच सके। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त कराने को लेकर अमेरिका की भूमिका और जेलेंस्की के नेतृत्व पर ट्रंप की नाराजगी फिर चर्चा में आ गई है।

    रूस के हमलों में 20 लोगों की मौत का दावा

    इस बीच यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार जारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को जापोरिज्जिया क्षेत्र में रूसी हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल बताए गए हैं, जबकि 18 लोग घायल हुए हैं।

    रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को भी मिसाइल हमले से निशाना बनाया। इस हमले में चार लोगों के घायल होने की खबर है। रूस के हमलों में रिहायशी इलाकों और शहरों के साथ ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। लगातार हो रहे हमलों के बीच युद्धविराम और बातचीत की संभावनाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं।

    रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना पर विवाद

    ट्रंप ने शुक्रवार को रूस से डीजल खरीदने से जुड़े समझौते का ऐलान किया था। उनके मुताबिक, रूस अमेरिका को तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे भी बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने की योजना बताई गई।

    इस फैसले को लेकर यूक्रेन ने चिंता जताई है। उसकी आशंका है कि रूस को ऊर्जा उत्पाद बेचकर मिलने वाली कमाई युद्ध जारी रखने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इस वजह से अमेरिकी योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिका पहले रूस पर आर्थिक दबाव बनाने और प्रतिबंधों के जरिए उसकी युद्ध क्षमता सीमित करने की नीति का समर्थन करता रहा है।

    यूरोपीय देशों को भी रूस की ऊर्जा कमाई पर चिंता

    रूस से डीजल खरीदने की योजना को लेकर यूरोप के कुछ देशों ने भी चिंता जताई है। स्वीडन ने कहा है कि ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई रूस के युद्ध खर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, जर्मनी ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को जारी रखने की बात कही है।

    इस पूरे विवाद में ट्रंप का जोर रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराने पर है। इसके विपरीत, जेलेंस्की का रुख रहा है कि रूस पर दबाव कम करने से उसके हमले रुकने के बजाय और बढ़ सकते हैं। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों, अमेरिकी डीजल खरीद योजना और युद्ध समाप्त करने के तरीके को लेकर दोनों पक्षों के बीच यही मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

  • रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी

    रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी


    नई दिल्ली । अमेरिका और रूस के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए कथित समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। इस फैसले के तहत रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दिए जाने की बात कही गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस कदम पर नाराजगी जताई और इसे अनुचित बताया। उनका कहना है कि इससे रूस की युद्ध लड़ने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    ट्रंप ने दावा किया कि रूस तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में उपलब्ध कराएगा। उन्होंने नवंबर में पांच लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति और इसके बाद मात्रा बढ़ाने की संभावना का भी उल्लेख किया। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी वैश्विक बाजारों में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए तत्परता जताई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल की बिक्री के लिए अस्थायी छूट जारी की है। इससे अप्रैल 2027 तक आपूर्ति का रास्ता खुलने की बात कही गई है। हालांकि, समझौते की शर्तों और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

    अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.37 डॉलर प्रति गैलन और डीजल की कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन बताई गई है। फरवरी के अंत से पेट्रोल की कीमत में 46 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 67 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने का दावा किया गया है। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। ट्रंप ने कहा कि किसानों, ट्रक चालकों और आम अमेरिकी नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करना उनकी प्राथमिकता है।

    जेलेंस्की ने रूसी डीजल की बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक, अतिरिक्त आय से पुतिन युद्ध को लंबा खींचने और यूक्रेन पर अधिक आक्रामक हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस फैसले से अधिक लोगों की जान जा सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान बढ़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने मॉस्को पर कई प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में रूसी ईंधन की बिक्री को राहत देने का फैसला अमेरिकी नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस समझौते से ईंधन की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सावधानी जताई है। विशेषज्ञ क्लेटन सीगल के अनुसार, इस फैसले से कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना सीमित है, जबकि रूस और पुतिन को लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञ माइकल लिंच ने भी कीमतों पर इसके असर को लेकर संदेह जताया। उनका कहना है कि यदि अमेरिका रूस से डीजल खरीदता है, तो रूस के मौजूदा ग्राहक अन्य देशों से ईंधन खरीदने लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में आपूर्ति का वितरण बदल सकता है, लेकिन कीमतों में उल्लेखनीय कमी होना निश्चित नहीं है।

    इस बीच, क्रेमलिन ने कहा कि ट्रंप ईरान से जुड़े संघर्ष का समाधान निकालने की कोशिशों में रूस की भूमिका का स्वागत करते हैं। ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने पर तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उन्होंने शुक्रवार को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक चुनावी रैली के दौरान यह बात कही। रूस से डीजल आपूर्ति पर राहत देने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब ऊर्जा की कीमतें और युद्ध से जुड़े घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं।

  • भारतीय मूल की नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार… बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे दादा

    भारतीय मूल की नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार… बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे दादा


    नई दिल्ली।
    नवनेथम नवी पिल्लई (Navanethem Navi Pillay) को साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) दिया गया है। भारतीय मूल (Indian-origin) की नवी पिल्लई संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख (Former UN Human Rights Chief) रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की जज भी हैं। उन्हें यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए मिला है। नवी पिल्लई का भारत से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाता है, क्योंकि वे भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनके दादा 1890 के दशक में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान भारत से बंधुआ मजदूर के रूप में गन्ने के खेतों में काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे।

    नवी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में एक प्रवासी तमिल हिंदू परिवार में हुआ। उनके पिता नारायणसामी बस ड्राइवर थे और उनकी मां शांतमा नायडू ने उन्हें पारंपरिक मूल्यों के साथ पाला, जिसने उनके जीवन को एक मजबूत आधार दिया। भारत की इस विरासत और पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ पिल्लई रंगभेद के कठोर दौर में भी आगे बढ़ीं और दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने वाली भारतीय मूल की पहली महिलाओं में से एक बनकर उभरीं।


    नवनेथम नवी पिल्लई का संघर्ष भरा जीवन

    नवनेथम नवी पिल्लई का जीवन रंगभेद के दौर में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों के संघर्ष और न्याय के लिए उनकी लंबी लड़ाई से जुड़ा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए काम किया है। नोबेल समिति के मुताबिक, नवी पिल्लई का काम उन सभी लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत है, जो दुनिया को अधिक शांतिपूर्ण बनाना चाहते हैं। दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं। जजों और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी संस्थाओं को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में यह पुरस्कार याद दिलाता है कि हिंसा के बिना विवादों को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान जरूरी है।

    नवनेथम नवी पिल्लई को पुरस्कार मिलने की सूचना देने के लिए समिति उनसे संपर्क नहीं कर पाई थी। इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 287 उम्मीदवारों के नामांकन मिले थे। इनमें एक चौथाई से कुछ अधिक नाम संस्थाओं के थे। पुरस्कार के लिए नामांकन करने का अधिकार राष्ट्राध्यक्षों, राष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, विदेश नीति संस्थानों के प्रमुखों, पूर्व नोबेल विजेताओं और नोबेल समिति के सदस्यों समेत कुछ चुनिंदा लोगों और संस्थाओं को होता है।


    नोबेल शांति पुरस्कार के बारे में जानिए

    नोबेल शांति पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी। अब तक यह 112 व्यक्तियों और 28 अलग-अलग संस्थाओं को दिया जा चुका है। रेड क्रॉस को यह सम्मान तीन बार, जबकि संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी को दो बार मिल चुका है। हालांकि, 19 बार ऐसा भी हुआ है, जब यह पुरस्कार नहीं दिया गया। इनमें से ज्यादातर मौके दोनों विश्व युद्धों के दौरान आए। साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद भी यह पुरस्कार किसी को नहीं दिया गया था। महात्मा गांधी को 12 बार नामांकित किया गया, लेकिन उन्हें कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। इस साल पुरस्कार के तहत 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना की राशि दी जाएगी, जो करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर है।

  • रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा

    रूस से डीजल खरीदेंगे ट्रंप, जेलेंस्की भड़के, बोले- पुतिन को फायदा देना युद्ध में निवेश जैसा


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के मुताबिक, नवंबर में रूस 5 लाख मीट्रिक टन डीजल और देगा, जिसके बाद 10 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी। ईंधन की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने की कोशिशों के बीच हुए इस ऐलान पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे रूस के खिलाफ युद्ध रोकने के प्रयासों को कमजोर करने वाला फैसला बताते हुए कहा कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने से मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ जंग जारी रखने में इस्तेमाल हो सकता है।

    ट्रंप ने पुतिन से बातचीत के बाद किया समझौते का ऐलान
    ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद इस समझौते की घोषणा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजार को डीजल की आपूर्ति करेगा। उनके मुताबिक, शुरुआती खेप के बाद नवंबर में 5 लाख मीट्रिक टन और फिर 10 लाख मीट्रिक टन डीजल दिया जाएगा।

    यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब ट्रंप प्रशासन 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को कम करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस आपूर्ति समझौते की शर्तों और इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    जेलेंस्की बोले- रूस को पैसा देना युद्ध में निवेश जैसा
    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने रूस के साथ हुए इस समझौते की आलोचना की। उनका कहना है कि मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पाद बेचने का अवसर देने से उसे यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त आर्थिक संसाधन मिल सकते हैं।

    जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पुतिन को इस तरह का लाभ देने से सभ्य दुनिया को न तो शांति मिलेगी और न ही कोई फायदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस इस डीजल से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल और अधिक हिंसा तथा धोखे के लिए करेगा।

    जेलेंस्की के मुताबिक, रूस की आमदनी बढ़ाने वाला ऐसा फैसला युद्ध खत्म करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को कमजोर कर सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में मॉस्को पर दबाव बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वह युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार हो।

    अमेरिका में मौजूद यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल के बीच हुआ ऐलान
    इस समझौते की घोषणा उस समय की गई, जब यूक्रेन का एक प्रतिनिधिमंडल रूस के साथ जारी संघर्ष का समाधान तलाशने के लिए अमेरिका में मौजूद था। ऐसे में ट्रंप के ऐलान ने यूक्रेन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    जेलेंस्की ने इस फैसले को मजबूत साझेदारों की ओर से लिया गया कमजोर निर्णय बताया। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल का इस्तेमाल केवल एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हमारी टीम का इस्तेमाल सिर्फ एक मोहरे के रूप में किया जा रहा है। यह सही नहीं है और साझेदारों को एक-दूसरे के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।”

    ईंधन की कीमतें घटाने की कोशिश और रूस को मिलने वाला आर्थिक लाभ
    ट्रंप प्रशासन के सामने ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती है। रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने पर अमेरिकी बाजार को अतिरिक्त ईंधन मिल सकता है, लेकिन इस कदम का भू-राजनीतिक असर भी महत्वपूर्ण है।

    जेलेंस्की की आपत्ति का मुख्य आधार यही है कि रूस को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली कमाई उसके युद्ध संबंधी खर्चों में मदद कर सकती है। उनके मुताबिक, रूस को आर्थिक लाभ देने के बजाय उस पर दबाव बनाना चाहिए, ताकि युद्ध समाप्त करने की संभावनाएं मजबूत हों।

    इस तरह डीजल आपूर्ति का यह प्रस्ताव एक ओर अमेरिकी ईंधन बाजार से जुड़ा है, तो दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध और शांति वार्ता पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर विवाद खड़ा कर रहा है।

  • एलन मस्क ने मुकेश अंबानी को लेकर उठाया सवाल, भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने पर राहुल गांधी ने दिया जवाब

    एलन मस्क ने मुकेश अंबानी को लेकर उठाया सवाल, भारत में स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने पर राहुल गांधी ने दिया जवाब

    नई दिल्ली ।भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने का मामला चर्चा में है। इस मुद्दे पर मस्क ने सवाल उठाते हुए भारत के बड़े कारोबारियों की भूमिका पर टिप्पणी की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पूछा कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और मस्क से कहा कि भारत में दूसरे व्यक्ति से मिलने तक इंतजार करें।

    एलन मस्क का आरोप है कि भारत के कुछ बड़े कारोबारी नहीं चाहते कि स्टारलिंक की सेवा देश में शुरू हो। उनके मुताबिक, ऐसा इसलिए हो सकता है ताकि बाजार में उनका दबदबा बना रहे। मस्क ने इस स्थिति को भारतीय लोगों के खिलाफ अपराध बताते हुए सवाल किया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करने के बावजूद उनकी कंपनी को अब तक लाइसेंस क्यों नहीं मिला है।

    मस्क ने अपनी टिप्पणी में कहा कि स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने भारत सरकार के सभी कानूनों और आवश्यकताओं का पालन करते हुए पांच साल बिताए हैं। इसके बावजूद भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस नहीं मिलने पर उन्होंने सवाल खड़े किए। इसी संदर्भ में उन्होंने मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए पूछा कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं।

    इस टिप्पणी के बाद राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मस्क का भारत में स्वागत करते हुए कहा कि दूसरे व्यक्ति से मिलने तक इंतजार करें। राहुल गांधी की इस टिप्पणी को मस्क के सवाल के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। मस्क ने राहुल गांधी के संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए उनका धन्यवाद किया और कहा कि यह स्थिति वास्तव में परेशान करने वाली है।

    स्टारलिंक को भारत में अनुमति मिलने का मुद्दा इससे पहले भी चर्चा में रहा है। मस्क पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि देश के कुछ बड़े कारोबारी उनकी कंपनी की एंट्री में बाधा डालना चाहते हैं, ताकि मौजूदा बाजार में अपना प्रभाव बनाए रख सकें। हालांकि, केंद्र सरकार इन आरोपों को खारिज कर चुकी है। इस तरह लाइसेंस से जुड़ा विवाद केवल सेवा शुरू करने की अनुमति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धा और बड़े कारोबारी समूहों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    स्टारलिंक की ओर से भारत में सेवा शुरू करने की तैयारी के तहत देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई गई हैं। ये जमीन पर स्थापित स्टेशन हैं, जो अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक के सैटेलाइट को धरती के मुख्य इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने का काम करते हैं। इन साइट्स पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं, ताकि सैटेलाइट से मिलने वाले इंटरनेट सिग्नल को नेटवर्क तक पहुंचाया जा सके और डेटा का आदान-प्रदान हो सके।

    गेटवे साइट्स और एंटीना की तैनाती के बावजूद लाइसेंस नहीं मिलने का सवाल बना हुआ है। मस्क ने इसी स्थिति को लेकर भारत में नियामकीय प्रक्रिया और बाजार की प्रतिस्पर्धा पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, केंद्र सरकार उनके कारोबारी हितों को प्रभावित करने के आरोपों को खारिज कर चुकी है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवाद का मुख्य मुद्दा स्टारलिंक को भारत में सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस नहीं मिलना और इस मामले पर मस्क तथा राहुल गांधी के बीच हुई सार्वजनिक प्रतिक्रिया है।

  • 172 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान, अमेरिका भी करेगा सम्मानित

    172 लोगों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार को इजरायल का सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान, अमेरिका भी करेगा सम्मानित

    नई दिल्ली ।फ्लाईदुबई की उड़ान में गंभीर संकट के दौरान 172 यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए साहस दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इजरायल के सर्वोच्च नागरिक वीरता सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने उन्हें ‘प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हीरोइज्म’ देने की घोषणा की है। इसके अलावा, अमेरिका में भी कैप्टन मच्छार के साहस को सम्मान दिया जाएगा। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति उनके योगदान की सराहना करते हुए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में बयान दर्ज कराएंगे।

    इजरायल के राष्ट्रपति की ओर से सम्मान देने की घोषणा कैप्टन मच्छार के स्वस्थ होने के बाद की जाएगी। भारत में इजरायली दूतावास ने इस फैसले की जानकारी साझा करते हुए कहा कि कैप्टन की बहादुरी और साहस ने एक बड़ी त्रासदी को टालने में मदद की। उनके पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना करते हुए इजरायल ने उनके योगदान के लिए आभार जताया है। यह सम्मान विमान में पैदा हुए गंभीर संकट के दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों के मद्देनजर दिया जा रहा है।

    यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड 1073 में हुई थी। आरोप है कि उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस दौरान विमान की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। राजा कृष्णमूर्ति के बयान के मुताबिक, विमान महज 30 सेकंड में लगभग 16,000 फीट नीचे आ गया था। ऐसे हालात में कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विमान और उसमें सवार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रयास करते रहे।

    गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छार किसी तरह कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचे और उसे खोलने में सफल रहे। इससे विमान में मौजूद यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों को कॉकपिट के भीतर पहुंचने तथा कथित हमलावर को काबू करने का अवसर मिला। इस कार्रवाई ने संकट के दौरान स्थिति संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कैप्टन की कोशिशों के बाद विमान में मौजूद फ्लाईदुबई के दो रिजर्व पायलटों ने नियंत्रण संभाला और उड़ान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबूक में उतारा।

    विमान में कुल 172 यात्री सवार थे। इनमें चार अमेरिकी नागरिक और 27 बच्चे भी शामिल थे। घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इसके बावजूद विमान को सुरक्षित उतारने में सफलता मिली। कैप्टन मच्छार के साहस और संकट के समय लिए गए फैसलों को इसी वजह से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस घटना में उनकी भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।

    भारतीय नागरिक कैप्टन स्मित मच्छार के पास विमान संचालन का 17 वर्षों का अनुभव है। इसमें 11 वर्ष कप्तान के रूप में काम करने का अनुभव शामिल है। राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि जानलेवा हमले का सामना करने के बावजूद कैप्टन ने विमान में सवार लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उनके मुताबिक, गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में भी कैप्टन को यह अहसास था कि विमान में मौजूद लोगों की जिंदगी उनके अगले कदम पर निर्भर हो सकती है। अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने खतरे को समझा और कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने का साहसिक फैसला किया।

    कृष्णमूर्ति ने अमेरिकी कांग्रेस के आधिकारिक रिकॉर्ड में कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना दर्ज कराने की घोषणा की है। उन्होंने अन्य सांसदों से भी इस बहादुरी को सम्मानित करने की अपील की। उनका कहना है कि कैप्टन की सूझबूझ, दृढ़ निश्चय और साहस ने यात्रियों तथा चालक दल को हमले को रोकने और संभावित बड़े हादसे से बचने का अवसर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विमान में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के पीछे एक परिवार है और कैप्टन के प्रयासों से अनेक परिवारों को अपूरणीय दुख से बचने का अवसर मिला।