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  • Venezuela: काराकास में फिर गूंजी धमाकों की आवाज… राष्ट्रपति भवन पर दोबारा हुआ हमला

    Venezuela: काराकास में फिर गूंजी धमाकों की आवाज… राष्ट्रपति भवन पर दोबारा हुआ हमला


    काराकास।
    वेनेजुएला (Venezuela) पर अमेरिकी अटैक (American Attack) के महज कुछ ही घंटों बाद राजधानी काराकास (Capital Caracas) एक बार फिर धमाकों की आवाजों से गूंज रहा है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सोमवार देर रात (स्थानीय समय) वेनेजुएला के काराकास में राष्ट्रपति भवन पर हमला हुआ है। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े कई वीडियो सामने आए हैं जिनमें राष्ट्रपति भवन के पास भारी गोलीबारी देखी जा सकती है।

    सूत्रों के मुताबिक काराकास में मिराफ्लोरेस पैलेस के ऊपर अज्ञात ड्रोन देखे गए हैं। सुरक्षा बलों ने रात 8 बजे के आसपास जवाबी गोलीबारी भी की। बीते शनिवार को काराकास में अमेरिकी हमलों और राष्ट्रपति मादुरो को कैदी बनाए जाने के महज कुछ ही घंटों बाद अब देश में इस तरह कर हमलों के बाद लोगों में अफरा तफरी मची हुई है। हालांकि सरकार के करीबी एक सूत्र ने एएफपी को बताया है फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए विडियोज में बताया गया है कि काराकास की सड़कें सुरक्षा बलों से भरी हुई हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए विडियोज में बताया गया है कि काराकास की सड़कें सुरक्षा बलों से भरी हुई हैं। एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया गया, “वेनेजुएला की राजधानी काराकास का डाउनटाउन इलाका सशस्त्र झड़पों से भरा हुआ है, कई सुरक्षा बल भारी गोलीबारी कर रहे हैं। काराकास की सड़कें अलर्ट पर हैं।”

  • ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    तेहरान। ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने रविवार सुबह बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों में 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। एजेंसी के अनुसार, मरने वालों की संख्या कम से कम 15 पहुंच गई है और 580 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में अशांति पैदा करने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि दंगाइयों को उनके स्थान पर रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर इजरायल की ओर से ऐसा बयान सामने आया है, जिसे सुनकर खामनेई आग-बबूला हो जाएंगे।

    दरअसल, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर अन्य देशों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह इस्लामी गणराज्य के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इजरायल ईरान के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़ा है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि हम ईरानी जनता के संघर्ष तथा उनकी स्वतंत्रता, आजादी और न्याय की आकांक्षाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह बहुत संभव है कि हम ऐसे क्षण में खड़े हैं जब ईरानी लोग अपना भाग्य अपने हाथों में ले रहे हैं। बता दें कि ईरान में प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले रविवार को हुई थी, जब दुकानदारों ने आर्थिक समस्याओं को लेकर हड़ताल की थी। उस वक्त से इसका दायरा और आकार लगातार बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारी राजनीतिक मांगें भी उठा रहे हैं।
    जून 2025 में 12 दिनों का चला था युद्ध

    बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले साल जून में 12 दिनों तक युद्ध चला था, जब इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों पर हमलों की श्रृंखला शुरू की थी। यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य इस्लामी गणराज्य की परमाणु अनुसंधान और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था। ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाब दिया। बाद में संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल का साथ देते हुए ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बनाया, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।

    रविवार को नेतन्याहू ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की और कहा कि उन्होंने इस सप्ताह अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ इस पर बातचीत की थी। नेतन्याहू ने कहा कि हमने शून्य संवर्धन के अपने साझा रुख को दोहराया तथा ईरान से 400 किलोग्राम संवर्धित सामग्री हटाने और उन स्थलों को सख्त तथा वास्तविक निगरानी के अधीन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    वेनेजुएला में अमेरिकी ऐक्शन से घबराया तानाशाह किम जोंग? मिसाइल का किया परीक्षण

    प्योंगयांग । अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करने और उस देश को राष्ट्रपति को उठा कर ले आने के बाद उसके विरोधी देशों में एक डर का माहौल है। ईरान, उत्तर कोरिया और लैटिन अमेरिका के कई देश, जो खुले तौर पर अमेरिका का विरोध करते नजर आते हैं, उन्होंने ट्रंप की इस हरकत की कड़ी निंदा की है।
    यूएस के वेनेजुएला पर किए हमले के एक दिन बाद ही उत्तर कोरिया ने एक ताकतवर मिसाइल का परीक्षण किया। कई विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर कोरिया इसके जरिए यह दिखाना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। इस तरह की स्थिति में वह एक ताकतवर जवाब देने के लिए तैयार है।

    वेनेजुएला पर हुए अमेरिका आक्रमण की निंदा करते हुए किम जोंग उन के प्रशासन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और एक संप्रुभ देश की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया। प्योंगयांग ने कहा कि यह कदम साम्राज्यवादी अमेरिका के बागी और क्रूर स्वाभाव को दर्शाता है।

    प्योंगयांग की तरफ से की गई यह मिसाइल दो लक्ष्यों को साधती हुई नजर आती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चीन की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा चीन के साथ दक्षिण अमेरिका की बढ़ती दोस्ती और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा देने के लिए मानी जा रही है। हालांकि, मिसाइल के जरिए उत्तर कोरिया ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

    दक्षिण कोरिया की इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम ने कहा कि कोरिया और जापान के बीच समुद्र में किए गए इस मिसाइल टेस्ट के जरिए दक्षिण कोरिया और चीन के बीच होने वाली बैठक के पहले तानाशाह की तरफ से चीन को दिया गया संदेश है।

    दरअसल, दक्षिण कोरिया कि मुख्य मांग कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु निरस्रीकरण हैं, जिसके लिए उत्तर कोरिया तैयार नहीं है।

    बकौल, लिम ‘उत्तर कोरिया इसके साथ अमेरिका को भी संदेश देना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। यानी अगर अमेरिका, वेनेजुएला जैसा कोई अभियान उत्तर कोरिया के साथ करने की सोचता है, तो ऐसी स्थिति के लिए वह दिखाना चाहता था कि उसकी तरफ से जबरदस्त प्रतिरोध होगा।

    किम जोंग उन का जिक्र करते हुए योंसई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बोंग यांगशिक ने कहा कि इस समय वेनेजुएला में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर सबसे ज्यादा डरने वाला व्यक्ति किम जोंग उन ही है। क्योंकि वह भी एक तानाशाह ही है।

    अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया में ऐसा कोई हमला करने की संभावना कम है। क्योंकि एक तो उत्तर कोरिया सीधे तौर पर अमेरिका से उलझने से बचता आया है। हालांकि वह धमकी देता रहा है। दूसरी तरफ, वेनेजुएला की तुलना में उत्तर कोरिया की तानाशाही ज्यादा मजबूत और सैन्य शक्ति भी मजबूत है।

  • थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह

    थाईलैंड में ट्रांस वुमन ने भारतीय व्यक्ति को पीटा, जानिए वजह


    मुंबई। भारतीयों के बीच में थाईलैंड की एक खास छवि बनी हुई है। हर साल लाखों लोग छुट्टियां मनाने के लिए थाईलैंड जाते हैं। ऐसे में कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो सोशल मीडिया पर एक शर्म का कारण बन जाती हैं। ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें थाईलैंड के पटाया में कुछ ट्रांसजेंडर महिलाएं मिलकर एक भारतीय नागरिक के साथ हाथा-पाई करती नजर आ रही हैं।
    कथित तौर पर व्यक्ति यौन सेवाओं का भुगतान किए बिना भाग रहा था।
    सोशल मीडिया साइट पर वायरल हो रहा यह वीडियो 27 दिसंबर का बताया जा रहा है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे तीन महिलाएं मिलकर एक 52 वर्षीय भारतीय व्यक्ति से पैसे की मांग कर रही है। जैसे ही व्यक्ति पैसे देने से इनकार करते हुए कार में बैठकर जाने लगता है, तो विवाद बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों की मदद से वह उसे कार से बाहर खींच लेती हैं और फिर जमकर मारपीट करती हैं। बाद में पुलिस वहां आकर उन्हें अलग करवाती है।

    एक स्थानीय युवक ने बताया कि आरोपी व्यक्ति वॉकिंग स्ट्रीट इलाके में एक ट्रांस सेक्स वर्कर के साथ बहस करत रहा था। जल्दी ही यह बहस एक हिंसक झड़प में बदल गई और फिर मारपीट शुरू हो गई।

    व्यक्ति ने बताया कि इस लड़ाई की शुरूआत रकम तय करने के बाद मुकर जाने की वजह से हुई।

    आपको बता दें, थाईलैंड का पटाया भारतीयों के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। यहाँ पर अक्सर ऐसे विवाद सामने आते रहते हैं। कुछ समय पहले सिंतबर में भी एक ऐसा वीडियो सामने आया था, जिसमें ट्रांसजेंडर महिला ने आरोप लगाया था कि व्यक्ति ने उसे गलत तरीके से छुआ है। इसी तरह अक्तूबर में भी तीन ट्रांस महिलाओं पर दो भारतीयों ने हमला किया था और उनके पैसे लेकर फरार हो गए थे।

  • वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित

    वेनेजुएला टेंशन का ग्लोबल मार्केट पर दिखेगा असर… सोने-चांदी और क्रूड भी होंगे प्रभावित


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) द्वारा वेनेजुएला (Venezuela) पर की गई सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक वित्तीय बाजारों (Global financial markets) में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। इससे भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market), सोने, चांदी और कच्चे तेल पर संभावित प्रभावों का आकलन किया जा रहा है। जानें, निवेशकों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

    अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है, इसलिए इस घटनाक्रम ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है और शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तथा कच्चे तेल तक सभी एसेट क्लास पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।

    भारतीय शेयर बाजार की बात करें तो फिलहाल किसी बड़ी घबराहट के संकेत नहीं हैं, लेकिन अस्थिरता बढ़ने की संभावना जरूर बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस और उपभोक्ता आधारित कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है।

    दूसरी ओर डॉलर के मजबूत होने की स्थिति में आईटी कंपनियों के शेयरों को कुछ समर्थन मिल सकता है। कुल मिलाकर बाजार में बड़ी गिरावट की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनती दिख रही है।


    सोने पर इफेक्ट

    भू-राजनीतिक तनाव का सीधा फायदा सोने को मिलता दिख रहा है। अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं और सोना पारंपरिक रूप से उनका पसंदीदा विकल्प रहा है। वेनेजुएला संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में मजबूती देखी जा रही है। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो सोना नए रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंच सकता है।


    चांदी में तेज उतार-चढ़ाव बना रहेगा

    चांदी पर इस घटनाक्रम का असर थोड़ा अलग नजर आता है। एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग चांदी को सहारा देती है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता औद्योगिक मांग को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में तेजी के साथ तेज उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।


    महंगा हो सकता है कच्चा तेल

    कच्चे तेल के मोर्चे पर फिलहाल स्थिति संतुलित है, क्योंकि वेनेजुएला से वैश्विक बाजार में पहले ही सीमित मात्रा में तेल की आपूर्ति हो रही थी। हालांकि इस सैन्य कार्रवाई से तेल बाजार में ‘रिस्क प्रीमियम’ जुड़ गया है। यदि तनाव बढ़ता है या तेल आपूर्ति से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता आती है, तो कच्चा तेल आने वाले समय में महंगा हो सकता है।

    भारत के लिए राहत की बात यह है कि वह फिलहाल वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात नहीं करता और उसकी आपूर्ति रूस तथा पश्चिम एशिया से स्थिर बनी हुई है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भी भारत को इस वैश्विक संकट से निपटने में सहारा दे सकता है।

  • वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की नजर अब उनके बेटे पर

    वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका की नजर अब उनके बेटे पर


    कराकास।
    वेनेजुएला (Venezuelan) के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (President Nicolás Maduro) और उनकी पत्नी को अमेरिका (America) ने गिरफ्तार किया है। उनके ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अमेरिका काफी समय से माइग्रेशन और ड्रग तस्करी को लेकर मादुरो के पीछे पड़ा था। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन की निगाहें मादुरो के बेटे पर भी टेढ़ी हैं। आखिर कौन है मादुरो का बेटा और क्या है उसका नाम? इसके अलावा यह भी जानेंगे कि आखिर अमेरिका मादुरो के बेटे से इतना ज्यादा खफा क्यों है…


    पहली पत्नी से जन्म

    निकोलस के बेटे का नाम है निकोलस अर्नेस्टो मादुरो ग्वेरा और उसे प्रिंस के नाम से भी जाना जाता है। प्रिंस का जन्म 1990 में मादुरो की पहली पत्नी, एड्रियाना गुएरा अंगुलो के यहां हुआ था। उसे मादुरो के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में जाना जाता है। अमेरिका ने उसे भी वेनेजुएला के ड्रग ऑपरेशन के आरोपियों की लिस्ट में रखा है। ट्रंप प्रशासन ने मादुरो और उनकी पत्नी के साथ उनके बेटे पर भी ड्रग ट्रैफिकिंग, नार्को-टेररिज्म और हथियारों की तस्करी में आरोप तय किए हैं। अभियोजकों का आरोप है कि तीनों ने अमेरिका में कोकीन की बड़ी मात्रा तस्करी करने की साजिश रची ताकि कोलंबियाई गुरिल्ला समूहों, मैक्सिकन कार्टेल और वेनेजुएला की गैंगों को फायदा मिल सके।


    नार्कोटिक्स नेटवर्क का योजनाकार

    अमेरिका के संघीय अभियोजक उसे एक व्यापक नार्कोटिक्स नेटवर्क का प्रमुख योजनाकार बताते हैं। इस नेटवर्क ने वेनेजुएला से अमेरिका तक कोकीन ले जाने के लिए देश के संसाधनों, सैन्य कर्मियों और राजनीतिक प्रभाव का फायदा उठाया। 2014 और 2015 के बीच, वह कथित तौर पर हर महीने दो बार सरकारी विमान फाल्कन 900 जेट पर मार्गरीटा द्वीप की यात्रा करता था। हर उड़ान से पहले, विमान में कथित तौर पर बड़े, टेप से लिपटे कोकीन के पैकेज लोड किए जाते थे और सैन्य कर्मी उनके अंदर की सामग्री से पूरी तरह परिचित होते थे। एक हलफनामे में दावा किया गया है कि मादुरो ग्वेरा ने दावा किया कि विमान जहां चाहे उड़ सकता है, यहां तक ​​कि अमेरिकी हवाई क्षेत्र में भी।


    ड्रग संगठन में काम करने का आरोप

    इसके अलावा प्रिंस पर कार्टेल दे लॉस सोल्स के भीतर काम करने का आरोप है, जो वेनेजुएला का ड्रग संगठन है। यह संगठन कथित रूप से उच्च-स्तरीय सरकारी अधिकारियों के नेतृत्व में है। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इस कार्टेल ने पीडीवीएसए के विमान, राष्ट्रपति हैंगर और राजनयिक चैनलों का उपयोग कानून प्रवर्तन से खेपों को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी को सुविधाजनक बनाने के लिए किया। अभियोग पत्र के मुताबिक ड्रग्स से हुई कमाई राजनीतिक अभियानों में इस्तेमाल की गई।

  • मादुरो की गिरफ्तारी पर भड़के किम जोंग उन… ट्रंप को दी चेतावनी- मेरे दोस्त को छोड़ दो, वरना…

    मादुरो की गिरफ्तारी पर भड़के किम जोंग उन… ट्रंप को दी चेतावनी- मेरे दोस्त को छोड़ दो, वरना…


    सियोल।।
    वेनेजुएला (Venezuela) पर अमेरिका (America) की कार्रवाई और फिर राष्ट्रपति निकोलस (President Nicholas) की गिरफ्तारी के मामले ने वैश्विक राजनीति में गजब का तहलका मचा दिया है। दूसरी ओर इस पूरे मामले में वैश्विक राजनीति और गर्म तब हो गई जब इस पूरे मामले में उत्तर कोरिया (North Korea) के नेता किम जोंग उन (Kim Jong Un) भी कूद पड़े। किम जोंग ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अमेरिका को खुलकर चेतावनी दी है। मादुरो को अपना दोस्त बताते हुए किम जोंग ने कहा कि अगर उन्हें तुरंत रिहा नहीं किया गया तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।

    मीडिया रिपोर्टस में बताया गया है कि किम जोंग ने अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए ट्रंप को यहां तक चेताया कि यह टकराव विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर मादुरो को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की यह कार्रवाई सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा है। किम जोंग ने यहां तक कह दिया कि ऐसी कार्रवाइयों से विश्व युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है।


    किम जोंग ने अमेरिका पर लगाया आरोप

    इस दौरान उत्तर कोरियाई नेता ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में जबरन दखल दे रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। किम जोंग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वेनेजुएला की संप्रभुता का सम्मान किया जाए और मादुरो को जल्द रिहा किया जाए।


    रूस समेत ये बड़े देश अमेरिका के खिलाफ

    बता दें कि वेनेजुएला पर अमेरिका के इस कार्रवाई को कई देशों ने गलत ठहराया है। रूस से लेकर कोलंबिया, क्यूबा, चिली, मेक्सिको, ब्राजील, ईरान, स्पेन और जर्मनी तक। इन सभी देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की है। रूस ने यहां तक कह दिया कि वेनेजुएला को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार है और बाहरी सैन्य हस्तक्षेप अस्वीकार्य है। रूस ने संवाद के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।

    वहीं कोलंबिया ने कहा कि वेनेजुएला पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। कोलंबिया ने यह साफ किया कि वह सैन्य टकराव नहीं चाहता, लेकिन शांति और मानव गरिमा की रक्षा जरूरी है। सुरक्षा कारणों से उसने वेनेजुएला सीमा पर अपनी सेना तैनात की।


    क्या वैश्विक मोड़ ले सकता है अमेरिका-वेनेजुएला तनाव?

    विशेषज्ञों का मानना है कि किम जोंग का यह बयान वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकता है, क्योंकि पहले ही अमेरिका की कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने चिंता जताई है। ऐसे में अमेरिका-वेनेजुएला विवाद अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

  • बेनेजुएला में बड़ा 'ऑपरेशन… घर में घुसकर राष्ट्रपति मादुरो को मिनटों में उठा ले गया अमेरिका

    बेनेजुएला में बड़ा 'ऑपरेशन… घर में घुसकर राष्ट्रपति मादुरो को मिनटों में उठा ले गया अमेरिका


    वाशिंगटन।
    वेनेजुएला (Venezuela) में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में अमेरिकी विशेष बलों (American special forces) ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (President Nicolás Maduro) को एक गुप्त सैन्य अभियान के बाद गिरफ्तार कर लिया है। अमेरिका ने इस मिशन को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ (‘Operation Absolute Resolve’) नाम दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने इस सफलता की पुष्टि करते हुए कहा कि अब वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन तक अमेरिका देश का नियंत्रण संभालेगा। अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन के अनुसार, यह मिशन 2 जनवरी की रात को अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन की बारीकियों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।

    इस मिशन में F-22, F-35, F-18 लड़ाकू विमानों, B-1 बमवर्षक विमानों और ड्रोन्स समेत 150 से अधिक विमान शामिल थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने रात 10:46 बजे (ईस्टर्न टाइम) मिशन को हरी झंडी दी। ठीक रात 1:01 बजे (कराकस समय अनुसार रात 2:01 बजे) अमेरिकी फोर्स मादुरो के परिसर में उतरी। मादुरो एक किले जैसे सुरक्षित महल में थे। ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी सैनिकों ने इस महल के हूबहू ढांचे पर महीनों तक अभ्यास किया था।


    30 मिनट में मिशन पूरा, भारी धमाकों से गूंजा कराकस

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने मार-ए-लागो से दिए बयान में कहा कि जब यह हमला हुआ तो कराकस की लाइटें बंद थीं। यह डार्क और घातक मिशन था। सैनिकों के पास भारी ‘ब्लोटॉर्च’ थे ताकि वे सुरक्षित कमरों के दरवाजे काटकर अंदर घुस सकें, लेकिन मादुरो को सुरक्षित कमरे तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिला। 30 मिनट से भी कम समय में मादुरो को पकड़ लिया गया। इस दौरान कराकस में कम से कम सात बड़े विस्फोट सुनाई दिए।


    वेनेजुएला अब अमेरिका के नियंत्रण में

    राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला में एक सुरक्षित और उचित सत्ता हस्तांतरण होने तक अमेरिका ही देश को चलाएगा। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी है। अमेरिकी न्याय विभाग ने पुष्टि की है कि मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोर्स पर ‘नार्को-टेररिज्म’ के गंभीर आरोप हैं, जिसके तहत उन पर अमेरिका में मुकदमा चलेगा।

    जनरल केन ने बताया कि इस मिशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई है और न ही कोई सैन्य उपकरण खोया है। वहीं वेनेजुएला के अधिकारियों का दावा है कि इस हमले में उनके कुछ सैनिक और नागरिक मारे गए हैं, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई।


    खुफिया एजेंसियों का महाजाल

    इस मिशन की सफलता के पीछे CIA, NSA और NGA जैसी शीर्ष खुफिया एजेंसियों का हाथ था। जनरल केन ने बताया कि यह ऑपरेशन दशकों के अनुभव और थल सेना, वायु सेना, नौसेना और स्पेस फोर्स के बेजोड़ तालमेल का नतीजा था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस मिशन में विफलता का कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि एक भी चूक पूरे अभियान को खतरे में डाल सकती थी।

  • चीनी सेना में भ्रष्टाचार को लेकर शी जिनपिंग टेंशन में, कई बड़े अधिकारी गिरफ्तार

    चीनी सेना में भ्रष्टाचार को लेकर शी जिनपिंग टेंशन में, कई बड़े अधिकारी गिरफ्तार

    वीजिंग। चीन में बढ़ता भ्रष्टाचार शी जिनपिंग सरकार के चिंता का सबब बनता जा रहा है। ऊंचे पदों पर आसीन उप मंत्री स्तर के अधिकारी भी भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं। चीन में भ्रष्टाचारी आधिकारियों पर शिकंजा भी कसा जा रहा है। साल 2025 में ऐसे करीब 65 अधिकारी गिरफ्तार किए गए हैं जो कि 2024 से 12 फीसदी ज्यादा हैं। इन लोगों में मंत्रालयों के सीनियर प्रशासनिक अधिकारी, बैंकर, सरकारी कंपनियों के अधिकारी और कई नामी विश्वविद्यालयों के अध्यक्ष शामिल हैं।

    चीन के सेंट्रल कमीशन फॉर डिसिप्लिन इंस्पेक्शन (CCDI) ने कहा है कि 2025 में भ्रष्टाचारी अधिकारियों की पकड़ बीते साल से ज्यादा हुई है।

    2024 में ऐसे 58 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। बता दें कि 72 साल के शी जिनपिंग के इस तीसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने छोटे और बड़े भ्रष्टाचारी अधिकारियों के खिलाफ अभियान शुरू किया है।
    सेना में भयंकर भ्रष्टाचार की दीमक

    चीन की मीडिया का कहना है कि कुछ ही सालों में लाखों अधिकारियों को सजा मिल चुकी है। इसमें सेना में उच्च पदों पर आसीन अधिकारी भी हैं। पिछले साल चले अभियान में सेना के कई टॉप जनरल्स को भी बर्खास्त कर दिया गया।

    अक्टूबर में अपने भाषण में शी जिनपिंग ने कहा था कि देश के लिए भ्रष्टाचार बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाल ही में ऑल चाइना फेडरेशन ऑफ ट्रेड यूनियन्स की पूर्व वाइस चेयरवुमन झांग शिपिंग को गिरफ्तार किया गया था।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के बड़े अधिकारी बड़े-बड़े घोटालों में शामिल हैं। 12 से 14 जनवरी के बीच सीसीडीआई एक प्लेनरी सेशन करने वाली है जिसमें 2026 को लेकर योजना पेश की जाएगी। बता दें कि चीन में कई बार भ्रष्टाचारियों को मृत्यु दंड तक दे दिया जाता है।

  • दक्षिण अमेरिकी देशों पर कब्जे की तैयारी में ट्रंप? अब क्यूबा को भी मिली धमकी

    दक्षिण अमेरिकी देशों पर कब्जे की तैयारी में ट्रंप? अब क्यूबा को भी मिली धमकी

    वॉशिंगटन। वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के बाद अब अमेरिका की ट्रंप सरकार के हौसलें बुलंद हैं और अब वे दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों को भी धमकाने पर उतर आए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के नेता को चेतावनी देते हुए कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अगर मैं क्यूबा की सरकार में होता तो यकीनन मुझे चिंता होती।

    मार्को रुबियो ने क्यूबा को दी चेतावनी
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘क्यूबा पूरी तरह से तबाह है। इसे पूरी तरह से अयोग्य सरकार और इसे एक वृद्ध व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है। इसकी कोई अर्थव्यवस्था नहीं बची है। यह पूरी तरह से तबाह देश हैं। मादुरो की सुरक्षा में लगे सभी गार्ड भी क्यूबा के थे। क्यूबा ने कुछ मामलों में वेनेजुएला पर कब्जा किया हुआ है। क्यूबा ने वेनेजुएला को अपनी कालोनी बनाने की कोशिश की। अगर हम सुरक्षा के लिहाज से देखें तो अगर मैं हवाना में रह रहा होता और मैं सरकार में होता तो में घटनाक्रम से थोड़ा चिंतित तो जरूर होता।’

    अमेरिका और क्यूबा के बीच रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण हैं। दोनों देशों के संबंधों में तनाव 1960 के दशक से है, जब फिदेल कास्त्रों की सरकार के साथ अमेरिका के संबंध बिगड़े और अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। बराक ओबामा के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध सुधारने की कोशिश हुई, लेकिन ट्रंप और बाइडन सरकार में फिर से संबंध तनावपूर्ण हो गए।

    ट्रंप ने भी दिए संकेत
    गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी क्यूबा की आलोचना की और इसे एक असफल राष्ट्र बताया। ट्रंप ने कहा कि क्यूबा के नागरिकों और क्यूबा छोड़ चुके लोगों की मदद करना अमेरिका का लक्ष्य है। ट्रंप ने कहा, ‘क्यूबा एक रोचक मामला है। क्यूबा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। क्यूबा के लोग वर्षों से परेशानी झेल रहे हैं। मुझे लगता है कि क्यूबा एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर हम आगे चर्चा करेंगे क्योंकि क्यूबा एक असफल राष्ट्र है। हम क्यूबा के लोगों की मदद करना चाहते हैं।’

    अमेरिका की खुफिया एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने संयुक्त अभियान चलाकर शनिवार को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया और उन्हें अमेरिका ले जाया गया है। अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पाम बोन्डी ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा, नशीली दवाओं की तस्करी और नार्को आतंकवाद की साजिश रचने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया है।