Category: International

  • ईरान में भड़की जनता, आगजनी के बीच 50 से ज्यादा शहरों तक फैला आंदोलन

    ईरान में भड़की जनता, आगजनी के बीच 50 से ज्यादा शहरों तक फैला आंदोलन


    तेहरान। ईरान की खराब अर्थव्यवस्था के कारण शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ग्रामीण इलाकों में फैल गए है। प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई है। 5 लोगों की मौत गुरुवार को जबकि एक शख्स की मौत बुधवार को हुई थी। झड़पों में ईरान की पैरामिलिट्री फोर्सेस के एक जवान की भी मौत हुई है जबकि 13 से ज्यादा घायल हैं।
    50 से ज्यादा शहरों तक फैला आंदोलन

    ईरान में हिंसक आंदोलन को दौरान हुई मौतों के बाद प्रदर्शकारी बेकाबू होते दिख रहे हैं। तेहरान से शुरू हुआ प्रदर्शन अब ईरान के 50 से ज्यादा शहरों तक पहुंच गया है। बढ़ती महंगाई को लेकर शुरू हुआ ये प्रदर्शन सुरक्षाबलों की कार्रवाई के बाद और तेज हो गया है। सबसे ज्यादा हिंसक झड़पें तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में 300 किलोमीटर स्थित अजना शहर में हुई हैं। यह शहर ईरान के लोरेस्तान सूबे में पड़ता है।

    सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प

    ईरान के लोरदेगान में सुरक्षा बलों और हथियारबंद प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़प हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने गवर्नर के ऑफिस में आग लगा दी है। खबरों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने कुछ शहरों में ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड की बिल्डिंग्स पर भी कब्जा कर लिया है। अदालतों की बिल्डिंग्स पर भी प्रदर्शनकारी बैठ गए हैं।

    ईरान की सरकारी मीडिया ने 6 लोगों की गिरफ्तारी की खबर दी है हालांकि ये नहीं बताया कि ये गिरफ्तारियां क्यों की गई हैं। इंटरनेशनल मीडिया के मुताबिक अलग-अलग शहरों में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
    तेहरान से शुरू हुआ था विरोध प्रदर्शन

    ईरान में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला राजधानी तेहरान से शुरू हुआ था। सबसे पहले तेहरान के कारोबारियों ने बिजनेस की खराब होती हालत के खिलाफ प्रोटेस्ट मार्च निकाला इसके बाद, व्यापारियों के विरोध प्रदर्शन में तेहरान यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स भी शामिल हो गए। इसके बाद तो आंदोलन की आग दूसरे शहरों में फैल गई और अब पूरे ईरान में प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं।

    अमेरिका और यूरोपीय देशों ने लगाए प्रतिबंध

    बता दें कि, 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हैं। पांबदियों की वजह से ईरान की माली हालत खस्ता हो गई है। बीते साल जून में पहले इजरायल के साथ झड़प फिर अमेरिकी बमबारी के बाद ईरान ने न्यूक्लियर सेक्टर में इंटरनेशनल संगठनों के साथ सहयोग बंद कर दिया इसके बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए।

  • वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो बस ड्राइवर से लेकर राष्ट्रपति तक

    वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो बस ड्राइवर से लेकर राष्ट्रपति तक


    मुंबई। अमेरिका ने शुक्रवार देर रात को वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमले किए। साथ ही कहा कि देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया गया है और देश से बाहर ले जाया गया है। आइए आपको निकोलस मादुरो की जीवन यात्रा से आपको रूबरू कराते हैं। निकोलस मादुरो ने बस चालक से वेनेजुएला के राष्ट्रपति बनने तक का सफर तय किया। हालांकि उन पर देश में लोकतंत्र के पतन और आर्थिक तबाही को लेकर आंखे मूंदे रहने के आरोप लगे। विभिन्न मोर्चों पर कई महीने के अमेरिकी दबाव के बाद ये घटनाक्रम सामने आया है।

    ऐसे शुरू हुआ सफर
    मादुरो ऐसे समय में शासन कर रहे थे, जब पिछले कुछ महीने से अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करने और उसे अपने नियंत्रण में लेने के इरादों की अटकलों को हवा दी जा रही थी। अमेरिकी हमले का उद्देश्य उस स्वघोषित समाजवादी क्रांति को समाप्त करना था, जिसे मादुरो के दिवंगत राजनीतिक गुरु और पूर्ववर्ती ह्यूगो शावेज ने 1999 में शुरू किया था।

    शावेज की तरह, मादुरो ने भी अमेरिका को वेनेजुएला के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। साथ ही लोकतांत्रिक मानदंडों को बहाल करने के किसी भी प्रयास के लिए डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन प्रशासन की कड़ी आलोचना की थी।

    40 साल पहले राजनीतिक करियर की शुरुआत
    मादुरो का राजनीतिक करियर लगभग 40 साल पहले शुरू हुआ था। 1986 में, वह एक साल के वैचारिक प्रशिक्षण के लिए क्यूबा गए, जो हाई स्कूल के बाद उनकी एकमात्र औपचारिक शिक्षा थी। वापस लौटने पर, मादुरो ने काराकस में बस चालक के रूप में काम किया, जहां वह जल्दी ही एक श्रमिक संघ के नेता बन गए।

    1990 के दशक में वेनेजुएला की खुफिया एजेंसियों ने उन्हें क्यूबा सरकार से घनिष्ठ संबंध रखने वाले घोर वामपंथी के रूप में चिन्हित किया। मादुरो ने अंततः बस चालक की नौकरी छोड़ दी और उस राजनीतिक आंदोलन में शामिल हो गए जिसे शावेज ने खड़ा किया था।

    शावेज ने घोषित किया उत्तराधिकारी
    शावेज को वर्षों पहले एक असफल सैन्य तख्तापलट का नेतृत्व करने के लिए 1994 में राष्ट्रपति से क्षमादान मिला था, जिसके बाद उन्होंने राजनीतिक अभियान शुरू किया था। साल 2013 में अपने निधन से पहले राष्ट्र को दिए गए अपने अंतिम संबोधन में शावेज ने मादुरो को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद से मादुरो लगातार इस पद पर बने हुए थे। इससे पहले मादुरो देश के विदेश मंत्री और उपराष्ट्रपति भी रहे चुके थे।

    कितनी है संपत्ति
    सालों तक भ्रष्टाचार के दावों के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि निकोलस मादुरो के पास कितनी प्रॉपर्टी है। कोई विस्तृत सार्वजनिक वित्तीय विवरण भी उपलब्ध नहीं है। आंकड़े काफी भिन्न हैं। कुछ आकलनों के अनुसार, उनकी रिपोर्ट की गई संपत्ति अन्य नेताओं की तुलना में कम है जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप है। हालांकि सेलेब्रिटी नेट वर्थ के अनुसार, मादुरो की अनुमानित संपत्ति लगभग 2 मिलियन डॉलर है।

  • डोनाल्ड ट्रंप की धमकी पर ईरान बोला-'अमेरिकी सैन्य अड्डे हमारे टारगेट होंगे'

    डोनाल्ड ट्रंप की धमकी पर ईरान बोला-'अमेरिकी सैन्य अड्डे हमारे टारगेट होंगे'

    शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर घातक बल का प्रयोग किया तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। इस बयान पर ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनी के वरिष्ठ सलाहकार भी चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है।
    राजधानी तेहरान सहित पूरे ईरान में रविवार से जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं, जो मूल रूप से आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित हैं। दुकानदारों ने मुद्रा रियाल की गिरावट, मुद्रास्फीति और बढ़ती महंगाई के खिलाफ हड़ताल की, जो जल्द ही देशव्यापी हो गई। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदर्शन अब केवल आर्थिक शिकायतों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि कई जगहों पर सरकार-विरोधी और सत्ताधारी व्यवस्था के खिलाफ नारे भी लगाए जा रहे हैं। प्रदर्शन कुम, इस्फहान, मशहद, हमदान जैसे शहरों तक फैल चुके हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने लोगों की आजीविका के मुद्दों को गंभीरता से लेने की बात कही, लेकिन स्वीकार किया कि उनकी सरकार के पास सीमित विकल्प हैं।
    ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध

    यह प्रदर्शन 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े पैमाने के विरोध हैं, जो महसा अमीनी मामले के बाद हुए थे। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप का बयान इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका ईरान में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर सतर्क है, जबकि ईरान इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मान रहा है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन वैध हैं, लेकिन अशांति फैलाने वालों को कड़ा जवाब दिया जाएगा। दोनों पक्षों की ओर से जारी ये पारस्परिक धमकियां मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकती हैं, खासकर तब जब हाल ही में इजरायल-ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति रही हो।

  • बलूचिस्तान में सेना तैनात करने जा रहा चीन, भारत को बलोच नेता किया आगाह?

    बलूचिस्तान में सेना तैनात करने जा रहा चीन, भारत को बलोच नेता किया आगाह?


    इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चीन जल्द ही अपनी सेना तैनात कर सकता है। बलूचिस्तान के बड़े नेता ने इस मामले पर चिंता जताते हुए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खत लिखा है। इस चिट्ठी में बलोच नेता मीर यार बलूच ने चेतावनी देते हुए कहा है कि चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया है कि चीन अगले कुछ महीनों में ही बलूचिस्तान इलाके में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।
    मीर यार ने बीते गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में एस जयशंकर के नाम एक लिखे एक खुला खत साझा किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बरसों से बलूचिस्तान का शोषण कर रहा है। मीर यार ने लिखा, “बलूचिस्तान के लोग पिछले 79 सालों से पाकिस्तान के सरकारी कब्जे, प्रायोजित आतंकवाद और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन को झेल रहे हैं।
    अब समय आ गया है कि इस बढ़ती हुई बीमारी को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि हमारे देश में शांति आए और संप्रभुता पक्की हो।”
    पाक-चीन को लेकर जताई चिंता

    खत में मीर यार बलूच ने कहा कि चीन और पाकिस्तान तेजी से चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के आखिरी स्टेज की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते गठबंधन को बहुत खतरनाक मानता है।

    चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को उसके आखिरी स्टेज तक पहुंचा दिया है।”
    बड़े खतरे की आशंका

    उन्होंने आगे कहा कि इस इलाके में जल्द ही चीन की सीधी मिलिट्री मौजूदगी देखी जा सकती है। मीर यार ने कहा, “अगर बलूचिस्तान की डिफेंस और फ्रीडम फोर्स की क्षमताओं को और मजबूत नहीं किया गया और अगर ऐसे ही नजरअंदाज किया जाता रहा, तो चीन कुछ महीनों के अंदर बलूचिस्तान में अपनी मिलिट्री फोर्स तैनात कर सकता है।” उन्होंने आगे लिखा, “60 मिलियन बलूच लोगों की इच्छा के बिना बलूचिस्तान की धरती पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी भारत और बलूचिस्तान दोनों के भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा और चुनौती होगी।”

  • जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    जापान की संसद में महिला शौचालयों की कमी, पीएम तक दिखीं परेशान

    ताइपे। जापान की संसद में इन दिनों महिला सांसदों को शौचालयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। महिला सांसदों ने इसे लेकर अपनी आवाज भी उठाई है। यह मामला उस वक्त और भी ज्यादा सुर्खियों में आ गया, जब देश की पहली प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भी इन महिला सांसदों के समर्थन में अपनी आवाज उठाई।
    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक जापानी संसद के मुख्य सदन के पास अभी केवल दो शौचालय क्यूबिकल हैं, जो कि 73 महिला सांसदों के लिए अपर्याप्त हैं। इसके अलावा अगर पूरे संसद भवन की बात करें तो केवल 9 महिला शौचालय हैं, जिनमें केवल 22 क्यूबिकल है। इस मामले पर प्रदर्शन का हिस्सा डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद यासुको कोमियामा ने फेसबुक पर डाले अपने पोस्ट में कहा कि यह समस्या सिर्फ महिला सांसदों तक सीमित नहीं है, बल्कि संसद परिसर में काम करने वाली महिला पत्रकार और कर्मचारी भी परेशान हैं।

    आपको बता दें जापान की संसद भवन की इमारत करीब 90 साल पुरानी है। इसका निर्माण 1936 में किया गया था। उस वक्त महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था। इस वजह से वहां पर महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है।

    फिलहाल 2024 में हुए आम चुनाव में ऐसा पहली बार हुआ है कि 73 महिला सांसद चुनकर आई हैं।

    जापानी मीडिया के मुताबिक कोमियामा ने कहा, “यदि प्रशासन सच में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए गंभीर है तो मुझे उम्मीद है कि इस मामले पर हम उनकी समझ और सहयोग की उम्मीद कर सकते हैं।” जापानी न्यूज आउटलेट आसाही शिंबुन के मुताबिक जापान की निचले सदन के अध्यक्ष ने अधिक महिला शौचालयों के प्रस्ताव पर विचार करने का वादा किया है।

    गौरतलब है कि जापान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर लड़ाई लंबी है। कार्य स्थल पर बराबरी हासिल करने के लिए महिलाओं को एक लंबे संघर्ष का सामना करना पड़ा है। जापानी सरकार ने वर्ष 2020 में समाज के सभी क्षेत्रों में 30 फीसदी नेतृत्व के पदों पर महिलाओं को नियुक्त करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अंदरूनी विरोध के चलते इसे चुपचाप एक दशक के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।

  • Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट

    Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट


    ओटावा।
    कनाडा (Canada) में आने वाले महीनों में बिना वैध दस्तावेजों (Without valid Documents) के रह रहे प्रवासियों (Migrants.) की संख्या में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण लाखों अस्थायी वर्क परमिट और स्टडी परमिट (Temporary Work Permits and Study Permits) का समाप्त होना है, जबकि नई वीजा श्रेणियों और स्थायी निवास के रास्ते लगातार सख्त होते जा रहे हैं। ऐसे में कनाडा में रह रहे लाखों अस्थायी निवासियों, विशेष रूप से भारतीयों के लिए एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।

    मिसिसॉगा (कनाडा) स्थित इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सेराह के अनुसार, 2026 के मध्य तक कम से कम 10 लाख भारतीय अपनी कानूनी स्थिति खोने के जोखिम में हैं। यह अनुमान इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि 2025 के अंत तक लगभग 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में आगे 9.27 लाख वर्क परमिट की समाप्ति होने वाली है। ये आंकड़े सेराह ने शेयर किए हैं। सेराह ने चेतावनी दी है कि कनाडा में कुल मिलाकर 20 लाख लोग अवैध रूप से रहने वाले हो सकते हैं, जिनमें से आधे भारतीय होंगे। उन्होंने इसे “बहुत रूढ़िवादी अनुमान” बताया और कहा कि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त हो रहे हैं, साथ ही कई शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    वैध दर्जा समाप्त होने का खतरा

    वर्क परमिट की अवधि समाप्त होते ही संबंधित व्यक्ति का कनाडा में वैध दर्जा भी खत्म हो जाता है, जब तक कि वह नया वीजा हासिल न कर ले या स्थायी निवास की ओर ट्रांजिशन न कर पाए। हालांकि, कनाडा सरकार ने हाल के समय में अस्थायी श्रमिकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी नीतियों को सख्त किया है। साथ ही शरण आवेदनों को नियंत्रित करने के लिए भी नए उपाय लागू किए गए हैं, जिससे वैध रास्ते और सीमित हो गए हैं।


    2026 में ‘बॉटलनेक’ की चेतावनी

    कंवर सेराह ने चेतावनी दी कि कनाडा ने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आउट ऑफ स्टेटस होते नहीं देखा है। उनके अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 3,15,000 परमिट समाप्त होने वाले हैं, जिससे इमिग्रेशन सिस्टम में गंभीर बॉटलनेक पैदा होगा। तुलना करें तो 2025 की आख़िरी तिमाही में यह संख्या लगभग 2,91,000 थी।

    आवास संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सरकार ने टेम्परेरी रेजिडेंट्स की संख्या घटाने का लक्ष्य रखा है। 2026-2028 इमिग्रेशन लेवल्स प्लान में टेम्परेरी रेजिडेंट्स को 2026 में 3.85 लाख तक सीमित किया गया है, जो 2025 से 43% कम है। इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट भी आधे से कम हो गए हैं।

    सेराह का अनुमान है कि मध्य-2026 तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग बिना वैध कानूनी दर्जे के रह रहे हो सकते हैं। इसमें से करीब 50 प्रतिशत भारतीय नागरिक हो सकते हैं। उन्होंने इसे बहुत ही सतर्क अनुमान बताया, क्योंकि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त होंगे और बड़ी संख्या में शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    ग्रेटर टोरंटो एरिया में सामाजिक असर

    बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या का असर अब ग्रेटर टोरंटो एरिया के कुछ हिस्सों में दिखने लगा है। खासकर ब्रैंपटन और कैलेडन जैसे इलाकों में जंगलनुमा क्षेत्रों में टेंट कॉलोनियां उभर आई हैं, जहां कथित तौर पर बिना वैध दर्जे के लोग रह रहे हैं।

    ब्रैम्पटन-आधारित पत्रकार निति चोपड़ा, जिन्होंने ऐसी ही एक टेंट सिटी को डॉक्यूमेंट किया, उनका कहना है कि अनौपचारिक सूचनाओं के अनुसार कई भारतीय मूल के आउट-ऑफ-स्टेटस प्रवासी कैश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ फ्लाई-बाय-नाइट ऑपरेटर सुविधा के लिए शादियों की व्यवस्था करने वाले दफ्तर खोल रहे हैं।


    विरोध प्रदर्शन और मांगें

    इस बीच, श्रमिक अधिकारों की वकालत करने वाला समूह नौजवान सपोर्ट नेटवर्क जनवरी में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। नेटवर्क के टोरंटो-आधारित कार्यकर्ता बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर मोमेंटम बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिना वैध रास्तों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को उजागर किया जा सके।

    नेटवर्क का अभियान नारा- काम करने के लिए काफी अच्छा, रहने के लिए काफी अच्छा – इस मांग को दर्शाता है कि जो लोग कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें देश में कानूनी रूप से बने रहने का अवसर भी मिलना चाहिए।


    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत स्तर पर जल्द समाधान नहीं खोजा गया, तो बढ़ती अवैध आबादी न सिर्फ मानवीय संकट पैदा करेगी, बल्कि श्रम बाज़ार, आवास और सामाजिक सेवाओं पर भी दबाव बढ़ाएगी। कनाडा सरकार के लिए आने वाला समय इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित रखने की एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

  • घटती आबादी से जूझ रहे चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक हुए महंगे, सरकार ने लगाया भारी टैक्स

    घटती आबादी से जूझ रहे चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक हुए महंगे, सरकार ने लगाया भारी टैक्स


    बीजिंग।
    घटती आबादी (Declining Population) से परेशान चीन (China) ने कंडोम और अन्य गर्भ निरोधकों (Condoms and Other Contraceptives) को लेकर बड़ा फैसला किया है। चीन कि शी जिनपिंग सरकार (Xi Jinping government.) ने पुरानी नीति को खत्म करके अब गर्भनिरोधकों पर 13 फीसदी का सेल्स टैक्स लगाने का फैसला किया है। यह फैसला 1 जनवरी 2026 से ही लागू हो गया है और इसके बाद कंडोम और गर्भनिरोधकों की कीमत में इजाफा हो गया है। बता दें कि 1994 से ही इन प्रोडक्ट्स को टैक्स से छूट दी गई थी। बढ़ती आबादी को देखते हुए चीन ने वन चाइ्ल्ड पॉलिसी लागू की थी। हालांकि 30 सालों में ही चीन की डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आ गया और तेजी से गिरती हुई जन्मदर चिंता की वजह बन गई।

    दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन लाख कोशिश करने के बाद भी जन्म दर बढ़ा नहीं पा रहा है। 2024 में लगातार तीसरे साल चीन की जनसंख्या कम हो गई। ऐसे में एक्सपर्ट्स ने चीन को चेतावनी दी है। 2024 में चीन में 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ जो कि 2016 की तुलना में आधा था।


    क्यों टेंशन में है चीन?

    चीन इस समय दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ ही बड़ा बाजार भी है। वहीं घटती आबादी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या उत्पादकता को प्रभावित करेगी और सरकार पर बोझ बढ़ेगा। आने वाले समय में चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह डगमगाने का खतरा है। जानकारों का कहना है कि चीन अमीर होने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा। 2024 में ही चीन में 60 साल से ज्यादा की उम्र वाले लोगों की जनसंख्या 31 करोड़ को पार कर गई।


    कभी बढ़ती आबादी से परेशान था चीन

    एक समय था जब चीन अपनी बढ़ती आबादी को लेकर टेंशन में था। 1970 में चीन की आबादी 1 अरब के करीब पहुंच गई थी। उस समय चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी लागू की गई थी। कई बार जबरन नसबंदी या फिर गर्भपात भी करवाया जाता था। यह सब कई दशकों तक चलता रहा और पहली बार 2016 में दो बच्चों को अनुमति दी गई। इसके बाद 2021 में तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी गई।


    बढ़ती महंगाई की वजह से भी बढ़ रही आबादी

    चीन में बढ़ती आबादी की वजह से भी लोग ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करना चाहते हैं। हालांकि चीन की सरकार अब शादी और बच्चे पैदा करने को काफी तवज्जो दे रही है। ऐसे में कई कॉलेज में लव एजुकेशन का कोर्स भी चलाया जा रहा है।

    एक तरफ सरकार गर्भनिरोधकों पर टैक्स लगा रही है तो दूसरी तरफ बच्चे पैदा करने पर नकद लाभ की योजना भी चलाई जा रही है। सरकार की नीति के मुताबिक 1 जनवरी 2025 के बाद हर बच्चे पर सरकार की तरफ से 3600 युआन की वार्षिक सब्सिडी दी जाती है जो कि लगभग 45 हजार रुपये के करीब होता है। वहीं तीन साल के बाद यह सब्सिडी बढ़ाकर 10800 युआन कर दिया जाएगा। चाइल्ड केयर सब्सिडी को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसके अलावा चीन की सरकार ने फ्री पब्लिक प्री स्कूल स्कीम भी शुरू की है।


    क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े

    संयुक्त राष्ट्र के आकड़ों की मानें तो 1.4 अरब लोगों की आबादी में 60 साल से ज्यादा के लोगों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। सन 2100 तक आधी आबादी ब ुजुर्ग हो सकती है। चीन में जनसंख्या को बढ़ाने के लिए जो भी योजनाएं चलाई जा रही हैं वे नाकाफी साबित हो सकती हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि गर्भनिरोधक को महंगा करने से हो सकता है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र जोखिम उठाने लगे। ऐसे में यह नई नीति खतरनाक साबित होगी। कई जानकारों का कहना है कि कंडोम पर टैक्स लगा देने पर जन्मदर पर कोई प्रभावन नहीं पड़ने वाला है।

  • भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि का होगा नवीकरण… औपचारिक वार्ता शुरू

    भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि का होगा नवीकरण… औपचारिक वार्ता शुरू


    नई दिल्ली।
    भारत और बांग्लादेश (India and Bangladesh) ने 1996 में साइन की गई गंगा जल बंटवारा संधि (Ganges water sharing treaty) के नवीकरण पर औपचारिक वार्ता शुरू कर दी है। यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त हो रही है, जो इसके हस्ताक्षर के ठीक 30 वर्ष बाद होगी। अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों ने गुरुवार से गंगा और पद्मा नदियों में जल स्तर का संयुक्त मापन शुरू कर दिया है। यह मापन हर 10 दिन में दर्ज किया जाएगा और 31 मई तक जारी रहेगा।

    यह कदम संधि के प्रावधानों के अनुरूप है, जो सूखे मौसम (जनवरी से मई) के दौरान फरक्का बैराज पर जल बंटवारे को नियंत्रित करता है। संधि के अंतिम वर्ष में प्रवेश करने के साथ ही दोनों देश नवीकरण पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि क्षेत्रीय जल प्रबंधन में निरंतरता बनी रहे। भारतीय केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के उप निदेशक सौरभ कुमार और सहायक निदेशक सनी अरोड़ा बांग्लादेश में हैं, जबकि बांग्लादेश जल विकास बोर्ड की उत्तर-पूर्वी मापन जलविज्ञान प्रभाग के कार्यकारी इंजीनियर अरिफिन जुबेद के नेतृत्व में चार सदस्यीय बांग्लादेशी दल भारत में है।

    मापन कार्य पद्मा नदी पर हार्डिंग ब्रिज से 3,500 फीट ऊपर के बिंदु और भारत में फरक्का बिंदु पर शुरू हुआ है। बता दें कि पद्मा नदी बांग्लादेश की एक प्रमुख नदी है, जो भारत से आने वाली गंगा नदी की मुख्य धारा है और बांग्लादेश में प्रवेश करने के बाद इसी नाम से जानी जाती है। बांग्लादेश के वरिष्ठ जल संसाधन मंत्रालय अधिकारी शिब्बर हुसैन ने कहा कि भारतीय दल की सुरक्षा को विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जल संसाधन मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है।


    क्या है संधि और इसका महत्व?

    1996 की गंगा जल संधि भारत और बांग्लादेश के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौता है, जो फरक्का बैराज पर सूखे मौसम में गंगा के जल को साझा करने का प्रावधान करता है। यह संधि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद को सुलझाने में मील का पत्थर साबित हुई थी। हालांकि, जलवायु परिवर्तन, बढ़ती सिंचाई आवश्यकताएं और विकास परियोजनाओं के कारण दोनों पक्ष नई संधि में बदलाव चाहते हैं।

    भारत अपनी बढ़ती जल आवश्यकताओं (सिंचाई, बंदरगाह रखरखाव और बिजली उत्पादन) को ध्यान में रखते हुए संधि में संशोधन की मांग कर रहा है, जबकि बांग्लादेश सूखे मौसम में अधिक जल हिस्सेदारी की अपील कर रहा है, क्योंकि दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में कृषि और आजीविका प्रभावित हो रही है। दोनों देश 54 साझा नदियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं, हालांकि अभी केवल गंगा और कुछ अन्य पर ही समझौते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नवीकरण वार्ता जलवायु-प्रतिरोधी और अधिक समावेशी समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकती है।

    संधि में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, दोनों देश एक जनवरी से 31 मई तक गंगा और पद्मा नदियों में विभिन्न निर्दिष्ट बिंदुओं पर जलस्तर का मापन करेंगे और प्रत्येक 10 दिन का आंकड़ा रिकॉर्ड करेंगे।

  • पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा

    पायलट ने शराब के नशे में उड़ाया विमान… कनाड़ा ने Air India को 26 जनवरी तक एक्शन लेने को कहा


    वैंकूवर।
    कनाडा (Canada) ने एयर इंडिया (Air India) को सूचित किया है कि 23 दिसंबर 2025 को उसकी एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान (International flight) के संचालन से ठीक पहले एयरलाइन का एक पायलट शराब के नशे में पाया गया। यह कनाडाई कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है। कनाडा के परिवहन नियामक ट्रांसपोर्ट कानाडा ने इस मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने और 26 जनवरी 2026 तक उठाए गए कदमों की जानकारी देने को कहा है।

    यह सूचना पायलट के ब्रीथ एनालाइजर (BA) टेस्ट में फेल पाए जाने के एक दिन बाद भेजी गई। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने एयर इंडिया से अपने सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) के तहत सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।


    आरसीएमपी की पुष्टि और संभावित कार्रवाई

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसपोर्ट कनाडा द्वारा 24 दिसंबर को एयर इंडिया को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने एयरलाइन को बताया कि संबंधित कप्तान 23 दिसंबर को उड़ान संख्या AI 186 की ड्यूटी के लिए शराब के नशे में पहुंचा था और उड़ान संचालन के लिए अयोग्य पाया गया। वैंकूवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर RCMP द्वारा कराए गए दो ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में इसकी पुष्टि हुई, जिसके बाद पायलट को विमान से उतारकर ड्यूटी से हटा दिया गया।

    पत्र के अनुसार, यह घटना कनाडा के एविएशन रेगुलेशंस के साथ-साथ एयर इंडिया के फॉरेन एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (FAOC 1946) की शर्तों का भी उल्लंघन है। FAOC की एक शर्त है कि विदेशी एयर ऑपरेटर सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करेगा। ट्रांसपोर्ट कनाडा ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में RCMP और स्वयं उसका विभाग कानूनी कार्रवाई कर सकता है।


    DGCA को सूचना, विवरण मांगा

    मामले की गंभीरता को देखते हुए एयर इंडिया ने कनाडाई अधिकारियों से ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट का पूरा विवरण, जिसमें अल्कोहल का स्तर भी शामिल है, मांगा है। साथ ही, एयरलाइन ने भारत के विमानन नियामक DGCA को भी इस घटना की जानकारी दे दी है। ऑपरेशन सिंदूर के चलते पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने के बाद एयर इंडिया की उत्तरी अमेरिका से भारत आने वाली अल्ट्रा-लॉन्ग-हॉल उड़ानों को बीच में ईंधन भरने के लिए ठहराव करना पड़ रहा है। AI 186 को वैंकूवर से वियना तक दो सेट पायलटों (प्रत्येक सेट में एक कप्तान और एक सह-पायलट) द्वारा संचालित किया जाना था। वियना से दिल्ली के लिए तीसरा सेट उड़ान संचालित करता।

    संबंधित पायलट का वियना में लेओवर था और वह कथित तौर पर वैंकूवर ड्यूटी-फ्री से शराब खरीद रहा था। चूंकि वह कनाडा से बोर्ड कर ऑस्ट्रिया में उतरने वाला था, इसलिए दोनों विदेशी स्टेशनों पर सामान्यतः ब्रीथ एनालाइजर जांच नहीं होती। हालांकि, ड्यूटी-फ्री स्टाफ को उसकी सांस से शराब की गंध आई, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सीसीटीवी फुटेज के जरिए पुलिस ने उसे एयर इंडिया की उड़ान तक ट्रेस किया।


    ‘12 घंटे पहले शराब निषिद्ध’

    वरिष्ठ पायलटों का कहना है कि उड़ान से कम से कम 12 घंटे पहले शराब पीना सख्त वर्जित है। यदि कोई पायलट इस नियम का पालन नहीं कर पाता, तो उसे चिकित्सा कारणों से उड़ान संचालन से इनकार कर देना चाहिए। ऐसा करने से उसकी नौकरी, लाइसेंस और करियर सुरक्षित रह सकता है।

    एयर इंडिया ने बुधवार को जारी बयान में कहा- 23 दिसंबर 2025 को वैंकूवर से दिल्ली जाने वाली उड़ान AI 186 में अंतिम क्षणों में देरी हुई, क्योंकि एक कॉकपिट क्रू सदस्य को उड़ान से पहले उतार दिया गया। कनाडाई अधिकारियों ने पायलट की ड्यूटी के लिए फिटनेस पर चिंता जताई, जिसके बाद उन्हें आगे की पूछताछ के लिए ले जाया गया।

  • नए साल पर पाकिस्तान ने शुभकामनाएं नहीं धमकी भेजी, आसिम मुनीर ने भारत को लेकर क्या कह डाला?

    नए साल पर पाकिस्तान ने शुभकामनाएं नहीं धमकी भेजी, आसिम मुनीर ने भारत को लेकर क्या कह डाला?


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत में ही पाकिस्तान ने एक बार फिर आक्रामक तेवर दिखाए हैं. पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने भारत का नाम लिए बिना कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उल्लंघन होने पर ठोस और निर्णायक जवाब दिया जाएगा. यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान खुद आंतरिक अशांति और आतंकवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा है.

    जीएचक्यू में दिया बयान

    पाक सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर्सजीएचक्यू में बलूचिस्तान पर आयोजित 18वीं राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रतिभागियों से बातचीत के दौरान यह टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है.

    क्षेत्रीय शांति की बात, लेकिन लहजा धमकी भरा

    आसिम मुनीर ने एक ओर क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रति पाकिस्तान की प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं दूसरी ओर चेतावनी भरे अंदाज में कहा, पाकिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भी उल्लंघन हुआ तो दृढ़ और निर्णायक प्रतिक्रिया दी जाएगी.

    बलूचिस्तान हिंसा के लिए भारत समर्थित गुटों पर आरोप

    पाक सेना प्रमुख ने बिना कोई सबूत पेश किए आरोप लगाया कि भारत समर्थित गुट बलूचिस्तान में हिंसा फैलाने और विकास कार्यों को बाधित करने में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल प्रांत को आतंकवाद और अशांति से मुक्त कराने के लिए कड़ी कार्रवाई जारी रखेंगे.

    भारत का पलटवार

    पाकिस्तान की इस बयानबाजी के बीच भारत में पंजाब के पुलिस महानिदेशकडीजीपी गौरव यादव ने पाकिस्तान की असलियत उजागर करते हुए बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआईISI ड्रोन के जरिए हथियार और गोला-बारूद पंजाब भेज रही है.

    पंजाब को अशांत करने की साजिश

    बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीजीपी यादव ने कहा कि पाकिस्तान ग्रेनेड हमलों जैसी घटनाओं को बढ़ावा देकर पंजाब को अत्यधिक अशांत राज्य के रूप में दिखाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने इसे भारत के खिलाफ छेड़े गए छद्म युद्ध का हिस्सा बताया. डीजीपी ने बताया कि पाकिस्तान का मकसद पंजाब में अशांति फैलाना है, इसी वजह से ड्रोन के जरिए हथियार भेजे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क के सूत्रधार उत्तरी अमेरिका, यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों में बैठे हुए हैं.

    हर साजिश को नाकाम कर रही है पंजाब पुलिस

    गौरव यादव ने साफ कहा कि सीमा पार से आईएसआई द्वारा रची जा रही हर साजिश को पंजाब पुलिस नाकाम कर रही है. पंजाब में पुलिस थानों को निशाना बनाकर किए गए ग्रेनेड हमलों को लेकर डीजीपी ने कहा कि पाकिस्तान सीमावर्ती राज्य में शांति भंग करना चाहता है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और हर कोशिश को विफल किया जा रहा है.