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  • शेख हसीना प्रत्यर्पण मामले में भारत का जवाब, बांग्लादेश को कहा- वापसी की समयसीमा अभी तय नहीं की जा सकती

    शेख हसीना प्रत्यर्पण मामले में भारत का जवाब, बांग्लादेश को कहा- वापसी की समयसीमा अभी तय नहीं की जा सकती

    नई दिल्ली ।शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने स्पष्ट किया है कि उनकी बांग्लादेश वापसी के लिए फिलहाल कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती। बांग्लादेश की ओर से हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध भारत को प्राप्त हुआ है और इस अनुरोध की कानूनी जांच की जा रही है। भारत के अनुसार, प्रत्यर्पण से जुड़ा मामला तय कानूनी, न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी वजह से उनकी वापसी की कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं की गई है।

    ढाका में आयोजित एक निजी चर्चा के दौरान भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही मांगों के बारे में सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हसीना की वापसी की समयसीमा के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश से मिले प्रत्यर्पण अनुरोध पर फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है और भारत इस मामले को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है।

    भारत को बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध मिल चुका है। इस अनुरोध की कानूनी समीक्षा वर्तमान में जारी है। भारत की ओर से यह संकेत दिया गया है कि मामले में किसी तरह की समयसीमा पहले से तय नहीं की जा सकती। प्रत्यर्पण से संबंधित निर्णय कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध प्रावधानों के आधार पर लिया जाएगा। इस दौरान भारत की ओर से मामले को न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के दायरे में रखा गया है।

    शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच अचानक देश छोड़कर भारत आई थीं। उस समय बांग्लादेश में परिस्थितियां तेजी से बिगड़ रही थीं। हसीना उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं और उनकी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उनकी सरकार गिर गई और वह भारत आ गईं। भारत की ओर से उस समय कहा गया था कि तेजी से बिगड़ते हालात के बीच हसीना को भारत में आने की अनुमति देने के अलावा बहुत कम विकल्प मौजूद थे।

    भारत का कहना है कि उस समय हसीना को भारत आने की अनुमति देना सीमा पार बढ़ते संकट के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से जरूरी था। इसके बाद बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिति बदली और अब वहां तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार है। इस बदले राजनीतिक परिदृश्य के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही है।

    ढाका में बंगाल की खाड़ी संवाद 2026 के दौरान भी भारतीय उच्चायुक्त से इसी मुद्दे पर सवाल किया गया। उन्होंने दोहराया कि भारत फिलहाल हसीना की वापसी के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बता सकता। उनका कहना था कि प्रत्यर्पण अनुरोध कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है। ऐसे में आगे की कार्रवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी और फिलहाल उनकी वापसी की कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं है।

  • दुबई के क्राउन प्रिंस ने कैप्टन स्मित मच्छार से की मुलाकात, उनके साहस को किया सलाम

    दुबई के क्राउन प्रिंस ने कैप्टन स्मित मच्छार से की मुलाकात, उनके साहस को किया सलाम


    दुबई।
    फ्लाईदुबई की फ्लाइट (Flydubai flight) को हाईजैक (Hijack) से बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित मच्छार (Indian pilot Smit Machhar) से शनिवार को यूएई (UAE) के क्राउन प्रिंस (Crown Prince) ने मुलाकात की है। सऊदी अरब से आबूधाबी शिफ्ट किए गए मच्छार से मुलाकात करते हुए दुबई के क्राउन प्रिंस और डिप्टी पीएम शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद (Sheikh Hamdan bin Mohammed bin Rashid) ने उनके साहस को सलाम किया। शेख ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया साइट पर भी पोस्ट की।

    यूएई के क्राउन प्रिंस ने स्मित मच्छार की तारीफ की। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि स्मित ने साहस, जिम्मेदारी और मानव जीवन के प्रति अपनी चिंता की सर्वोच्च मिसाल को पेश किया है। उन्होंने जोर देकर की यूएई के नेतृत्व की तरफ से स्मित मच्छार को पूरा सम्मान और तारीफ दी जाती है।

    क्राउन प्रिंस ने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि कैप्टन स्मित मच्छार की कहानी उनके देश की कहानी और यूएई के मूल्यों का हिस्सा है। इसके साथ ही उन्होंने यूएई को शांति, करुणा और जीवन की रक्षा करने वाला देश करार दिया। इस पोस्ट के साथ में क्राउन प्रिंस ने स्मित के साथ कुछ तस्वीरें भी शेयर कीं। इसमें वह मच्छार को गले लगाते हुए और उनके सिर को चूमते हुए नजर आ रहे हैं।

    बता दें, दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाइट को ओमानी को पायलट द्वारा हाईजैक करने की कोशिश हुई थी। उस पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार के ऊपर हमला किया। इसके बाद प्लेन को हाईजैक करने की कोशिश की। लेकिन मच्छार ने सबसे पहले उसे रोकने की कोशिश की। ग्राउंड कंट्रोल को हाईजैक कोड भेजे और घायल होने के बाद भी कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे बाकी यात्रियों को अंदर आने और हाईजैक करने वाले पायलट को कंट्रोल करने में मदद मिली।

    इसके बाद आतंकी को पायलट को सीट से बांध दिया गया। यहां से स्थिति बदल गई। प्लेन को सऊदी अरब ले जाया गया। यहां से सभी यात्रियों को थोड़े इंतजार के बाद उनके गंतव्य तक भेजा गया। कैप्टन अमित मच्छार गंभीर रूप से घायल थे। ऐसे में उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। बाद में मेडीकल इजाजत मिलने के बाद उन्हें आबूधाबी के अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। हाल ही में उन्होंने पीएम मोदी से भी बात की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि कैसे घटना के दौरान उन्होंने हनुमान चालीसा को याद किया था।

  • US: वीजा नीति में बड़ा बदलाव…. 50 देशों के लोगों को देना होगा वीजा बॉन्ड, भारतीयों को छूट

    US: वीजा नीति में बड़ा बदलाव…. 50 देशों के लोगों को देना होगा वीजा बॉन्ड, भारतीयों को छूट


    वाशिंगटन।
    संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन (Donald Trump Administration) ने वीजा नीति (Visa Policy) में बढ़ा बदलाव किया है। अब पर्यटक और कारोबारी वीजा लेने के लिए 50 देशों को नागरिकों को वीजा बॉन्ड (Visa Bond) देना होगा। नए नियमों के तहत इन 50 देशों के लोगों को अब अमेरिकी वीजा लेने के लिए करीब 10 से 20 हजार डॉलर का बॉन्ड लेना पड़ सकता है। इस लिस्ट से भारत को बाहर रखा गया है। इसका मतलब है कि भारतीय नागरिकों (Indian citizens) के ऊपर इन निर्देशों का कोई असर नहीं होगा। हालांकि, भारत के पड़ोसी बांग्लादेश, भूटान और नेपाल सहित कई अन्य देश के नागरिक इस लिस्ट में हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से उन देशों की लिस्ट जारी की गई, जिनके नागरिकों को अब वीजा बॉन्ड देना होगा। एक नागरिक अमेरिकी वीजा के लिए कितने हजार डॉलर का बॉन्ड देगा यह उसके वीजा इंटरव्यू के आधार पर तय होगा। इसमें मुख्य रूप से तीन क्रम रखे गए हैं। काउंसलर अधिकारी आवेदकों के इंटरव्यू के आधार पर उन्हें 10, 15 या 20 हजार के वीजा बॉन्ड की लिस्ट में बांट सकता है।

    बता दें, भारत के पड़ोसी नेपाल और बांग्लादेश के लोगों के ऊपर यह नियम 21 जनवरी से लागू है, जबकि हाल ही में भूटान को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इस लिस्ट में अफ्रीका, कैरेबियाई क्षेत्र, पश्चिम एशिया समेत अन्य क्षेत्रों के देश भी शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक उनके इन नए नियमों का लक्ष्य अमेरिका में आने वाले विदेशी नागरिकों के जरूरत से ज्यादा रुकने पर रोक लगाना है।


    बॉन्ड जमा करने पर भी वीजा की गारंटी नहीं

    अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि ऐसा नहीं है कि अगर आपका वीजा बॉन्ड जमा किया जाता है। उसके बाद आपका वीजा पक्का हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कांसुलर अधिकारियों को वीजा जारी करने से पहले बॉन्ड जमा करवाने का अधिकार है। हालांकि, इसके बाद भी वीजा देना है या नहीं यह अमेरिकी विदेश विभाग के ऊपर निर्भर करेगा।

    बता दें, अमेरिका का डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन शुरुआत से ही दूसरे देशों से आने वाले प्रवासियों के लिए सख्त नियम अपना रहा है। पिछले दो सालों से ट्रंप सरकार ने अप्रवासियों को लेकर काफी कड़े नियम अपनाए हैं। कभी दूसरे देशों से आने वाले प्रवासियों की दम पर बसा अमेरिका, ट्रंप सरकार में गैर कानूनी तरीके से अमेरिका में आ रहे लोगों को हवाईजहाज में भरकर उनके देश भेजने के लिए भी जाना जाता है। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप ऐसा कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका की जन्म आधारित नागरिकता संबंधी नियम को भी बदलने की कोशिश की है।

    वर्तमान नियमों के मुताबिक अमेरिका में आने वाले लोगों को अब सख्त नियमों का पालन करना होगा। उन्हें कमर्शियल प्लेन सर्विस और अमेरिकी सीमा शुल्क और प्री क्लीयरेंस सर्विस का उपयोग करना होगा। इसके अलावा वह सामान्य चार्टर विमानन, चार्टर विमानों, समुद्री बंदरगाहों का उपयोग नहीं कर सकते।

  • Russia: साइबेरिया की लैब में प्लैग से महिला रिसर्चर की मौत से मचा हड़कंप, 200 लोगों को किया आइसोलेट

    Russia: साइबेरिया की लैब में प्लैग से महिला रिसर्चर की मौत से मचा हड़कंप, 200 लोगों को किया आइसोलेट


    मॉस्को।
    रूस (Russia) के साइबेरिया (Siberia) स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र (Irkutsk region) में लैब (Lab) में काम करने वाली एक महिला शोधकर्ता (Female Researcher) की प्लेग से मौत हो गई है। घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लगभग 200 लोगों को मेडिकल निगरानी और आइसोलेशन में रखा है। ‘द मॉस्को टाइम्स’ और रूसी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बुरियाटिया गणराज्य के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने महिला की मौत का कारण प्लेग होने की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्टों में आशंका जताई जा रही है कि महिला न्यूमोनिक प्लेग से पीड़ित थी, जो प्लेग का सबसे घातक रूप माना जाता है।


    कौन थी मरने वाली महिला

    मृतक महिला की पहचान डारिया(27साल) के रूप में हुई है। वह इरकुत्स्क एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट में कार्यरत थी। 29 सितंबर को उसे गंभीर निमोनिया के लक्षणों के साथ इरकुत्स्क के पास शेलेखोव के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। एक अक्तूबर को उसकी मौत हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने मेडिकल स्टाफ को बताया था कि सैंपल इकट्ठा करते समय गलती से उससे जिंदा बैक्टीरिया वाली एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। यह जानकारी टेलीग्राम चैनल पर दी गई है, अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है।


    इमरजेंसी बैठक बुलाई गई

    एक अन्य दावे के मुताबिक यह भी दावा किया जा रहा है कि महिला बुरियाटिया के आधिकारिक दौरे से लौटी थी। यहां मंगोलिया सीमा के पास प्लेग का प्रकोप रिपोर्ट किया गया था। इरकुत्स्क के प्रांतीय अधिकारियों ने शुरुआत में इसे केवल अत्यंत खतरनाक संक्रमण करार दिया था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए महिला के संपर्क में आए डॉक्टरों, अस्पताल के कर्मचारियों और अन्य लोगों सहित करीब 200 लोगों को एहतियातन निगरानी में रखा गया है। आपात बैठक के बाद इरकुत्स्क क्षेत्र के गवर्नर इगोर लोबजेव ने कहा कि संपर्क में आए लोगों में फिलहाल बीमारी के लक्षण नहीं हैं और उनकी शुरुआती लैब रिपोर्ट नेगेटिव आई है। फिलहाल सभी लोगों को निगरानी में रखा गया है।

    रेन टीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि महिला के संपर्क में आए लोगों को दो अस्पतालों में भर्ती कराया गया और 12 लोगों को निगरानी के लिए एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट भेजा गया। इनमें से कुछ लोगों में बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं, लेकिन अभी तक संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, प्लेग ‘येर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु से होता है, जो आमतौर पर छोटे स्तनधारियों और उनके पिस्सुओं में पाया जाता है।’येर्सिनिया पेस्टिस’ से संक्रमित लोगों में अक्सर एक से सात दिनों के बाद लक्षण दिखाई देते हैं।

  • बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिर में तैयार की जा रही 7 मूर्तियों से तोड़फोड़

    बांग्लादेश में दुर्गा पूजा से पहले हिंदू मंदिर में तैयार की जा रही 7 मूर्तियों से तोड़फोड़


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) के टंगाइल जिले (Tangail district) में दुर्गा पूजा (Durga Puja) से पहले हिंदू मंदिर (Hindu temple) में तैयार की जा रही 7 प्रतिमाओं में अज्ञात लोगों ने तोड़फोड़ कर दी। यह घटना बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच मिर्जापुर उपजिला के जमुरकी पश्चिमपाड़ा स्थित मंदिर में हुई। स्थानीय अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर में करीब 85 साल से जमुरकी आर्य समिति की देखरेख में दुर्गा पूजा आयोजित की जा रही है। इस घटना के बाद इलाके में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, जिन 7 प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया, उनमें मुख्य दुर्गा प्रतिमा भी शामिल थी। सभी प्रतिमाएं लगभग पूरी हो चुकी थीं और उनमें सिर्फ रंग भरने का काम बाकी था। जमुरकी आर्य समिति के अध्यक्ष प्रकाश बाकली ने बताया कि गुरुवार को जब वह अन्य समुदाय के लोगों के साथ मंदिर पहुंचे तो प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त हालत में पाया। उन्होंने कहा कि अभी यह पता नहीं चल पाया है कि तोड़फोड़ किसने की। मामले की औपचारिक शिकायत पुलिस से की गई है। अब उनकी मांग है कि पुलिस जिम्मेदार लोगों की पहचान करे और उन्हें कानून के तहत सजा दिलाए।


    पुलिस मामले की जांच कर रही

    घटना की सूचना मिलने के बाद टंगाइल के पुलिस अधीक्षक मोहम्मद शमसुल आलम सरकार और सीनियर पुलिस अधिकारी मंदिर पहुंचे। अधिकारियों ने हिंदू समुदाय के लोगों को भरोसा दिलाया कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले के सहायक पुलिस अधीक्षक मोहम्मद अदनान मुस्तफिज ने बताया कि कुछ प्रतिमाओं को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इलाके में जरूरी सुरक्षा इंतजाम भी किए गए हैं।


    सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना

    बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है और देश की आबादी में उनकी हिस्सेदारी करीब 7.95 प्रतिशत है। रिपोर्ट में कहा गया कि यह समुदाय लंबे समय से सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करता रहा है। राजनीतिक और सामाजिक तनाव के अलग-अलग दौर में हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। स्थानीय मंदिरों और प्रतिमाओं में तोड़फोड़ की घटनाएं भी इसी तरह की चुनौतियों का हिस्सा रही हैं। टंगाइल की ताजा घटना ऐसे समय हुई है जब दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही हैं और मंदिर में प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा था।

  • Flydubai को-पायलट पर विमान क्रैश कराने की साजिश का आरोप, UAE ने आतंकी हमले के प्रयास के तौर पर शुरू की जांच

    Flydubai को-पायलट पर विमान क्रैश कराने की साजिश का आरोप, UAE ने आतंकी हमले के प्रयास के तौर पर शुरू की जांच

    नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही Flydubai की फ्लाइट FZ1073 में भारतीय मूल के कैप्टन Smit Machchhar पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट हमाम-अल-हम्मामी की पहचान सामने आई है। UAE के अटॉर्नी जनरल ने इस मामले को कथित तौर पर आतंकवादी हमले के प्रयास के तौर पर जांच के दायरे में रखा है। जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, पूछताछ के दौरान हमाम-अल-हम्मामी ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह विमान को क्रैश करना चाहता था। मामले में को-पायलट द्वारा कैप्टन पर किए गए हमले और विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने की कथित साजिश की जांच जारी है।

    फ्लाइट जब हवा में थी, उसी दौरान ओमानी को-पायलट ने कैप्टन Smit Machchhar पर अचानक चाकू या किसी अन्य धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले के बाद विमान की स्थिति अचानक गंभीर हो गई और वह हजारों फीट नीचे की ओर जाने लगा। इस घटना के बाद विमान को सुरक्षित रखने और स्थिति को नियंत्रित करने की कार्रवाई की गई। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमाम-अल-हम्मामी ने कथित तौर पर विमान को क्रैश कराने की कोशिश क्यों की और इस घटना के पीछे उसकी क्या मंशा थी। UAE के प्रॉसिक्यूटर जनरल के अनुसार, पूछताछ में को-पायलट ने इस घटना को आतंकवादी हमले के तौर पर अंजाम देने की कोशिश किए जाने की बात स्वीकार की है।

    जांच के दौरान हमाम-अल-हम्मामी के पुराने रिकॉर्ड और गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले साल ओमान की राष्ट्रीय एयरलाइन Oman Air ने कथित तौर पर उसके कट्टरपंथी विचारों के कारण उसे प्रशिक्षण से जुड़ी भूमिका से हटा दिया था। जांच अधिकारियों को उसके निजी सामान से ‘फ्री फिलिस्तीन’ से जुड़े पर्चे और फिलिस्तीन समर्थक दस्तावेज मिलने की बात भी सामने आई है। बताया गया है कि वह सार्वजनिक और निजी तौर पर लगातार फिलिस्तीन के समर्थन तथा इजरायल के विरोध में बातें करता रहा था। इन तथ्यों की जांच मौजूदा मामले के संदर्भ में की जा रही है।

    रिपोर्टों के अनुसार, हमाम-अल-हम्मामी के पुराने सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की गई है। इनमें अल-कायदा से जुड़े लोगों की तस्वीरें और अन्य संदिग्ध सामग्री मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसियां इस सामग्री और उसके कथित विचारों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि विमान को नुकसान पहुंचाने की कथित कोशिश केवल उसकी व्यक्तिगत कार्रवाई थी या इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति, संगठन या नेटवर्क की भूमिका थी। मामले में संभावित संपर्कों और निर्देशों की भी जांच जारी है।

    इस घटना को लेकर UAE में जांच का दायरा अब को-पायलट की कार्रवाई से आगे बढ़कर कथित साजिश और संभावित नेटवर्क तक पहुंच गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या हमाम-अल-हम्मामी को किसी अन्य व्यक्ति से निर्देश मिले थे या किसी बड़े नेटवर्क से उसका संबंध था। फिलहाल जांच में सामने आए उसके कथित कबूलनामे, निजी सामान, पुराने सोशल मीडिया अकाउंट्स और पूर्व गतिविधियों को अलग-अलग पहलुओं से देखा जा रहा है। विमान में कैप्टन Smit Machchhar पर हमला और फ्लाइट को कथित तौर पर क्रैश कराने की कोशिश इस जांच का मुख्य केंद्र बनी हुई है।

  • इलॉन मस्क और शिवॉन जिलिस का ब्रेकअप, चार बच्चों की मां ने कहा- एक हफ्ते में प्यार से अलगाव तक पहुंचना मुश्किल था

    इलॉन मस्क और शिवॉन जिलिस का ब्रेकअप, चार बच्चों की मां ने कहा- एक हफ्ते में प्यार से अलगाव तक पहुंचना मुश्किल था


    नई दिल्ली:
    इलॉन मस्क और न्यूरालिंक की एग्जीक्यूटिव शिवॉन जिलिस के रिश्ते के खत्म होने की खबर सामने आई है। जिलिस ने 2 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि मस्क ने अचानक रिश्ता खत्म कर दिया। उनके मुताबिक, ब्रेकअप से पहले उन्हें इसकी कोई चेतावनी नहीं मिली थी। जिलिस ने कहा कि उनके लिए एक हफ्ते के भीतर प्यार से अलगाव तक पहुंचना बेहद मुश्किल था। उन्होंने यह भी बताया कि वह इस ब्रेकअप से दुखी हैं, लेकिन अब भी मस्क की परवाह करती हैं। जिलिस ने उम्मीद जताई कि दोनों आगे अच्छे दोस्त बने रहेंगे और अपने बच्चों की मिलकर परवरिश करेंगे।

    मस्क और शिवॉन जिलिस चार बच्चों के माता-पिता हैं। उनके जुड़वां बच्चों स्ट्राइडर और एज्योर का जन्म नवंबर 2021 में हुआ था। इसके बाद 2024 में उनकी बेटी अर्काडिया का जन्म हुआ। फरवरी 2025 में जिलिस ने बेटे सेल्डन लाइकर्गस के जन्म की घोषणा की थी। इसे मस्क का 14वां ज्ञात बच्चा बताया गया था। जिलिस की मां पंजाबी मूल की हैं, जबकि उनके पिता कनाडाई हैं। इसी वजह से उन्हें भारतीय मूल से भी जोड़ा जाता है। मस्क और जिलिस के रिश्ते और उनके बच्चों को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है।

    इलॉन मस्क की निजी जिंदगी में इससे पहले भी कई रिश्ते और शादियां चर्चा में रही हैं। उनकी पहली शादी जस्टिन विल्सन से हुई थी। दोनों के छह बच्चे हुए थे, जिनमें एक बेटे की शैशवावस्था में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद मस्क ने अभिनेत्री तालुलाह रिले से दो बार शादी की। उनके चर्चित रिश्तों में अभिनेत्री एम्बर हर्ड और ग्राइम्स के नाम भी शामिल रहे हैं। मस्क की निजी जिंदगी और परिवार से जुड़े मामलों को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होती रही है।

    शिवॉन जिलिस ने अपने बयान में रिश्ते के अचानक खत्म होने और उसके भावनात्मक असर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक हफ्ते के भीतर प्यार से अलगाव तक पहुंचना उनके लिए मुश्किल था। हालांकि, उन्होंने मस्क के प्रति अपनी परवाह कायम रहने की बात कही और भविष्य में दोनों के अच्छे दोस्त बने रहने की उम्मीद जताई। साथ ही, उन्होंने बच्चों की परवरिश मिलकर करने की बात भी कही है। इससे दोनों के बीच भविष्य में सह-पालन की भूमिका जारी रहने की बात सामने आती है।

    इलॉन मस्क लंबे समय से दुनिया में घटती जन्मदर को लेकर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। वह अधिक बच्चे पैदा करने की जरूरत की बात कहते रहे हैं और कम जन्मदर को सभ्यता के लिए संभावित खतरा बता चुके हैं। मस्क और जिलिस के चार बच्चे हैं। अब उनके रिश्ते के खत्म होने की जानकारी के बाद दोनों के परिवार और बच्चों से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर जिलिस के बयान पर भी चर्चा हो रही है।

  • अमेरिका में महिला कैदी को मौत की दवा के दो इंजेक्शन दिए, फिर भी नहीं हुई मौत; टेनेसी में बाकी फांसी पर रोक

    अमेरिका में महिला कैदी को मौत की दवा के दो इंजेक्शन दिए, फिर भी नहीं हुई मौत; टेनेसी में बाकी फांसी पर रोक

    नई दिल्ली: अमेरिका के टेनेसी में मौत की सजा पाए महिला कैदी क्रिस्टा गेल पाइक को जानलेवा दवा के दो इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई। इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी उनकी धड़कन चलती रही और वह सांस लेती हुई खर्राटे ले रही थीं। घटना के बाद टेनेसी में इस साल निर्धारित बाकी सभी मौत की सजाओं को फिलहाल रोक दिया गया है। राज्य के गवर्नर ने मौत की सजा देने के लिए इस्तेमाल की गई पूरी प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए हैं। टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन के अनुसार अधिकारियों ने अदालत से मंजूर प्रक्रिया के सभी चरणों का पालन किया था, लेकिन इसके बावजूद प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी।

    पाइक को बुधवार को स्ट्रेचर पर बांधकर मौत का इंजेक्शन दिया गया। उनके वकीलों के अनुसार अधिकारियों ने उन्हें पेंटोबार्बिटल के दो इंजेक्शन दिए, लेकिन इसके बाद भी उनकी मौत नहीं हुई। प्रक्रिया के दौरान कुछ समय के लिए उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और गवाहों को बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद उनके वकीलों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में आपात याचिका दायर कर प्रक्रिया को रोकने की मांग की। मामला सामने आने के बाद राज्य में मौत की सजा की प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों को लेकर जांच शुरू की गई है।

    मौजूदा नियमों के अनुसार पहले इंजेक्शन के बाद कैदी की मौत नहीं होने पर दूसरा इंजेक्शन देने का प्रावधान है। हालांकि, दोनों इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी कैदी के जीवित रहने की स्थिति में आगे क्या किया जाना चाहिए, इसे लेकर नियम स्पष्ट नहीं हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें नस में घातक दवा पहुंचाने में परेशानी के कारण मौत की सजा पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, पाइक के मामले में उनके वकीलों का दावा है कि दवा शरीर में पहुंचने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई।

    क्रिस्टा गेल पाइक को 1995 में अपनी 19 वर्षीय सहपाठी कोलीन स्लेमर की हत्या का दोषी ठहराया गया था और 1996 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी। अदालत में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार पाइक, उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड तादारिल शिप और एक अन्य दोस्त ने कोलीन स्लेमर को टेनेसी यूनिवर्सिटी कैंपस के पास जंगल में बुलाया था। वहां स्लेमर पर हमला किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। अपराध के समय पाइक 18 वर्ष की थीं, जबकि शिप 17 वर्ष के थे। नाबालिग होने के कारण शिप को मौत की सजा नहीं दी गई और उन्हें उम्रकैद की सजा मिली।

    घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर ने मौत के इंजेक्शन की पूरी प्रक्रिया की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, इस साल राज्य में निर्धारित बाकी सभी मौत की सजाओं पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। अधिकारियों के सामने अब यह जांच का विषय है कि अदालत से मंजूर प्रक्रिया के सभी चरणों का पालन किए जाने के बावजूद पाइक की मौत क्यों नहीं हुई। टेनेसी डिपार्टमेंट ऑफ करेक्शन ने कहा है कि निर्धारित प्रक्रिया के सभी चरणों का पालन किया गया था, लेकिन इसके बावजूद मौत की सजा पूरी नहीं हो सकी। जांच के दौरान इसी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है।

  • टेक्सास कोर्ट ने 46 अरब डॉलर की बॉर्डर वॉल योजना पर लगाई अस्थायी रोक, बिग बेंड में निर्माण पर फिलहाल ब्रेक

    टेक्सास कोर्ट ने 46 अरब डॉलर की बॉर्डर वॉल योजना पर लगाई अस्थायी रोक, बिग बेंड में निर्माण पर फिलहाल ब्रेक


    नई दिल्ली:
    डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की 46 अरब डॉलर की बॉर्डर वॉल योजना को टेक्सास की संघीय अदालत से झटका लगा है। अदालत ने बिग बेंड इलाके में बॉर्डर वॉल और उससे जुड़ी अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण पर फिलहाल अस्थायी रोक लगा दी है। इस परियोजना के तहत अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर 30 फीट ऊंची स्टील की दीवारें बनाने के साथ वाहनों को रोकने वाले बैरियर, सड़कें और आधुनिक निगरानी तकनीक लगाए जाने की योजना है।

    यह रोक फिलहाल अस्थायी है। बिग बेंड इलाके में जमीन मालिकों और पर्यावरण समूहों के विरोध के बीच अदालत का यह आदेश आया है। निर्माण का विरोध करने वालों का कहना है कि बिग बेंड का इलाका इतना दूर-दराज और दुर्गम है कि वह अपने आप में अवैध आव्रजन को रोकने का काम करता है।

    टेक्सास की संघीय अदालत ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किया। जज कैथलीन कार्डोने ने अपने फैसले में कहा कि वादी अपने दावों में सफल होते दिखाई दे रहे हैं और यदि रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें गंभीर नुकसान हो सकता है। अदालत का आदेश ऐसे समय आया है, जब प्रशासन ने कुछ ही सप्ताह पहले बिग बेंड सेक्टर में बॉर्डर वॉल के पहले पैनल लगाए थे।

    यानी निर्माण शुरू होने के कुछ समय बाद ही उस पर अस्थायी रोक लगा दी गई। अदालत के आदेश के तहत ट्रंप प्रशासन को बिग बेंड क्षेत्र में बॉर्डर वॉल के साथ दूसरी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण से भी फिलहाल रोका गया है।

    इस मामले में जमीन मालिकों, कारोबारियों और पर्यावरण समूहों ने परियोजना का विरोध किया था। विरोध करने वालों का आरोप है कि प्रशासन ने नियमों को किनारे रखकर कई छूट दीं और कानून का उल्लंघन किया। इन समूहों का कहना है कि बिग बेंड की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वहां इस तरह की सीमा दीवार की जरूरत पर सवाल उठते हैं।

    निर्माण का विरोध करने वाले पक्षों के अनुसार, इलाके की दुर्गमता पहले से ही अवैध आव्रजन को रोकने में भूमिका निभाती है। इस मामले में जमीन मालिकों और पर्यावरण समूहों ने निर्माण कार्य के खिलाफ कानूनी कदम उठाया था, जिसके बाद अदालत ने अस्थायी रोक का आदेश दिया।

    यह मामला सेंटर ऑफ बायोलॉजिकल डायवर्सिटी की ओर से दायर किया गया था। संगठन की ओर से लाइकेन जोर्डहल ने अदालत के फैसले को पूरी जीत बताया और इसे बिग बेंड, टेक्सास तथा संविधान के लिए ऐतिहासिक दिन करार दिया।

    वहीं, अदालत के आदेश से फिलहाल 46 अरब डॉलर की व्यापक योजना के तहत बिग बेंड क्षेत्र में प्रस्तावित निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है। परियोजना में सीमा पर दीवार के अलावा वाहनों को रोकने वाले बैरियर, सड़कें और निगरानी की आधुनिक तकनीक शामिल है। फिलहाल अदालत की अस्थायी रोक के कारण इस क्षेत्र में इन निर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर विराम लगा है।
  • फ्लाईदुबई के को-पायलट पर पहले भी उठे थे सवाल, ट्रेनिंग के दौरान कट्टरपंथी दस्तावेज मिलने का दावा

    फ्लाईदुबई के को-पायलट पर पहले भी उठे थे सवाल, ट्रेनिंग के दौरान कट्टरपंथी दस्तावेज मिलने का दावा


    दुबई।
    दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमले के मामले में आरोपी ओमानी सह-पायलट को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी ओमान एयर में काम करने के दौरान भी सवालों के घेरे में आया था। वर्ष 2024 में ट्रेनी को-पायलट रहते हुए उसके पास कथित तौर पर कट्टरपंथी और जिहादी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज मिले थे। इसके बाद उसे उड़ान संबंधी जिम्मेदारियों से हटाकर प्रशासनिक कार्यों में लगाया गया था।

    अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पहले सवालों के घेरे में आ चुका व्यक्ति फ्लाईदुबई में सह-पायलट कैसे बना। साथ ही, इजरायल जाने वाली उड़ान में उसे जिम्मेदारी दिए जाने की परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी को सऊदी अरब में इलाज के बाद आगे की जांच के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को सौंप दिया गया है।

    बताया गया है कि सह-पायलट ने पहले कई मौकों पर फलस्तीनियों के समर्थन और इजरायल के विरोध में विचार व्यक्त किए थे। हालांकि, इन दावों और हमले के पीछे उसके कथित मकसद की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है।

    यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार ने की भारतीय पायलट की तारीफ

    घटना के बाद यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के सलाहकार अनवर गर्गाश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्मित ने सूझबूझ और साहस का परिचय देकर एक बड़ी संभावित त्रासदी को टालने में मदद की।

    यह घटना बुधवार को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई थी। आरोप है कि सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया, जिससे वह घायल हो गए। गर्गाश ने घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि संकट के समय कैप्टन ने जिम्मेदारी और पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। उन्होंने पायलट के व्यवहार को सराहनीय बताया।

    घटना में किसी देश की भूमिका मिली तो होगी कार्रवाई: नेतन्याहू

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि यदि फ्लाईदुबई की घटना के पीछे किसी देश की भूमिका सामने आती है, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हालांकि, उन्होंने अपने बयान में किसी देश की संलिप्तता के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया।

    नेतन्याहू के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ घटना की तस्वीर स्पष्ट हो रही है। उन्होंने दावा किया कि हमलावर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था और उसका इरादा विमान में सवार यात्रियों सहित विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने का था। ये आरोप जांच के अंतिम निष्कर्षों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट होना बाकी हैं।

    शुरुआती जांच में को-पायलट के हमले की बात

    अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के गृह मंत्रालय ने बताया कि फ्लाईदुबई की उड़ान की आपात लैंडिंग से जुड़े मामले की शुरुआती जांच में सामने आया कि सह-पायलट ने कैप्टन पर हमला किया था। घटना में दोनों को चोटें आईं। शुरुआती जांच में यूएई की सुरक्षा टीम ने भी सहयोग किया था।

    इस घटना पर तुर्किये और पाकिस्तान की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है। मामले को विमानन सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना जा रहा है।

    इजरायली अधिकारी भी करेंगे पूछताछ

    मामले की जांच में इजरायली अधिकारी भी शामिल होंगे। वे यूएई के अधिकारियों के साथ समन्वय कर घटना के क्रम और संदिग्ध के कथित मकसद की पड़ताल करेंगे। आरोपी सह-पायलट को यूएई भेजे जाने के बाद जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    फिलहाल जांच का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना है कि कॉकपिट में हमला किन परिस्थितियों में हुआ, आरोपी की पृष्ठभूमि से जुड़े दावों में कितनी सच्चाई है और क्या इस घटना के पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका थी।