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  • अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर, ट्रंप का ऐलान- रणनीतिक भंडार से जारी होगा तेल

    अमेरिका में डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर, ट्रंप का ऐलान- रणनीतिक भंडार से जारी होगा तेल

    वाशिंगटन। अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय देश अपने भंडार से बड़ी मात्रा में डीजल जारी करने पर सहमत हो गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सात प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह जी7 ने रणनीतिक भंडार से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसकी शुरुआत बड़े पैमाने पर डीजल की आपूर्ति से होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि डीजल जारी करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी।

    अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (एएए) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत कीमत 22 सितंबर को 6.52 डॉलर प्रति गैलन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। शुक्रवार को यह घटकर 6.37 डॉलर प्रति गैलन रही। ईंधन की ऊंची कीमतों से अमेरिकी उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र पर दबाव बना हुआ है।

    फ्रांस ने तेल जारी करने की योजना की जानकारी दी

    अमेरिका स्थित फ्रांसीसी दूतावास के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ती ईंधन कीमतों और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता को लेकर जी7 के अध्यक्ष एवं फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से रात में बातचीत की थी। इसके बाद मैक्रों ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जी7 नेताओं की बैठक की अध्यक्षता की।

    इस पहल के समन्वय की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) को दी गई है। फ्रांस ने अपने बयान में कहा कि आईईए के माध्यम से 10 करोड़ बैरल तेल जारी करने की प्रतिबद्धताओं को तत्काल लागू किया जाएगा। यह प्रक्रिया चार महीने तक चलेगी। इसके तहत जी7 के सदस्य और साझेदार देश शुरुआती 20 दिनों में बड़ी मात्रा में डीजल जारी करेंगे।

    इस कदम का उद्देश्य बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाना और ईंधन की कीमतों पर दबाव कम करने में मदद करना है।

    मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप पर बढ़ा दबाव

    अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई हैं। एपी-एनओआरसी के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश अमेरिकी नागरिक बढ़ती कीमतों के लिए ट्रंप को जिम्मेदार मानते हैं। सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था के प्रबंधन को लेकर उनकी लोकप्रियता रेटिंग में भी गिरावट दर्ज की गई।

    ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर आम लोगों के खर्च और परिवहन लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार पर महंगाई को नियंत्रित करने और ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कदम उठाने का दबाव बढ़ा है।

    ईरान युद्ध और व्यापारिक तनाव का असर

    ईरान युद्ध और व्यापारिक टकरावों के बीच अमेरिका में तेल सहित कई वस्तुओं की कीमतों में तेजी आई है। लंबे समय से जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है, जिसका असर अमेरिका समेत कई देशों में ईंधन की कीमतों पर पड़ा है।

    राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए युद्ध की आर्थिक कीमत स्वीकार्य है। उनका दावा है कि संघर्ष समाप्त होने के बाद ईंधन की कीमतें नीचे आ सकती हैं। हालांकि, युद्ध कब समाप्त होगा और ऊर्जा बाजार पर इसका असर कितने समय तक बना रहेगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की जी7 की पहल से बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इससे डीजल की खुदरा कीमतों में कितनी और कितनी जल्दी राहत मिलेगी, यह मांग, आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • फ्लाईदुबई हमला… 6 वर्षीय बच्ची की वजह से टला विमान हादसा, टॉयलेट जाने की जिद ने बचाईं 180 जानें!

    फ्लाईदुबई हमला… 6 वर्षीय बच्ची की वजह से टला विमान हादसा, टॉयलेट जाने की जिद ने बचाईं 180 जानें!


    दुबई।
    दुबई (Dubai) से तेल अवीव (तेल अवीव) जा रही फ्लाईदुबाई (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर ओमानी को-पायलट (Omani co-pilot) के खौफनाक हमले और विमान को क्रैश करने की साजिश के मामले में कई बेहद हैरान कर देने वाले और साहसिक खुलासे हुए हैं। हवा में 30,000 फीट की ऊंचाई पर एक 6 साल की मासूम बच्ची की छोटी सी जिद ने पूरे विमान को एक भीषण तबाही से बचा लिया।

    इस बीच, चाकूबाजी में गंभीर रूप से घायल हुए विमान के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार (Capt Smit Machchhar) की जान बचाने और हमलावर आतंकी को दबोचने वाले इजरायली नागरिकों को राष्ट्रपति पदक दिए जाने का ऐलान किया गया है।


    ‘मम्मी टॉयलेट जाना है’- 6 साल की नीना की जिद ने बचाई 180 जानें

    इजरायली न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए ताली मानेस (Tali Manes) ने उस खौफनाक मंजर को याद किया। ताली ने बताया कि उनकी 6 साल की बेटी नीना मानेस ने अचानक टॉयलेट जाने की जिद की। जैसे ही ताली अपनी बेटी को लेकर कॉकपिट के पास बने टॉयलेट की ओर बढ़ीं, उसी वक्त कॉकपिट का दरवाजा थोड़ा सा खुला और अंदर ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर चाकू से दनादन वार करने शुरू कर दिए।

    ताली ने कॉकपिट के भीतर खून से लथपथ कैप्टन को देखा और चीखना शुरू कर दिया, “वह पायलट को गोद रहा है! वह पायलट को चाकू मार रहा है! बचाओ!” चीख-पुकार और विमान के अचानक नीचे गिरने के बीच ताली के पति ज्विका मानेस और अन्य यात्री कॉकपिट की तरफ भागे। ज्विका ने बताया, “मेरी बेटियों की चीखें आज भी मेरे कानों में गूंज रही हैं जब विमान तेजी से नीचे गिर रहा था और वे कह रही थीं ‘पापा, हम मरना नहीं चाहते।’ इसी ने मुझे कॉकपिट के भीतर कूदने पर मजबूर किया।”


    खून से लथपथ भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने खोला कॉकपिट के गेट

    हमले में गंभीर रूप से घायल और फर्श पर पड़े भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने अदम्य साहस का परिचय दिया। चाकू के वार से लहूलुहान होने के बावजूद उन्होंने किसी तरह कॉकपिट डोर का ‘इमर्जेंसी रिलीज लॉक’ दबा दिया, जिससे बाहर मौजूद यात्री और क्रू मेंबर्स अंदर दाखिल हो सके।

    विमान में सफर कर रहे प्लंबर यानिव हयून ने हमलावर ओमानी पायलट को गर्दन से दबोचकर ‘चोकहोल्ड’ में ले लिया, जबकि एक डेंटिस्ट यात्री ने कैप्टन स्मित मछार का बहता खून रोककर उनकी जान बचाई। इस अफरा-तफरी के दौरान चेहरे पर खून से सने एक यात्री का वीडियो भी सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर मदद मांगते हुए कहा, “हम हाईजैक के बीच में हैं, हमने आतंकियों को काबू कर लिया है और लैंडिंग के करीब हैं। जो भी सुन रहा है, मदद भेजो!”


    नेतन्याहू ने कहा- ‘जिहादी कट्टरपंथ’ का मामला

    इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने अदम्य साहस दिखाने वाले नागरिकों- यानिव हयून, ज्विका मानेस और असाफ राजुआन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हिरोइज्म’ से सम्मानित करने की सिफारिश की है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बयान जारी कर कहा है कि शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि ओमानी को-पायलट ‘जिहादी कट्टरपंथ’ का शिकार था और उसने एक सोची-समझी साजिश के तहत विमान को क्रैश करने की कोशिश की थी। सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग के बाद घायल भारतीय कैप्टन का इलाज जारी है और सभी 180 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

  • ट्रंप प्रशासन की 46 अरब डॉलर की बॉर्डर योजना पर कोर्ट की रोक, टेक्सास में दीवार निर्माण अस्थायी रूप से रुका

    ट्रंप प्रशासन की 46 अरब डॉलर की बॉर्डर योजना पर कोर्ट की रोक, टेक्सास में दीवार निर्माण अस्थायी रूप से रुका


    नई दिल्ली। टेक्सास की एक फेडरल कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की दक्षिणी सीमा पर बॉर्डर वॉल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने राज्य के बिग बेंड इलाके में प्रस्तावित निर्माण कार्यों पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह मामला स्थानीय लैंडओनर्स, कारोबारियों और पर्यावरणविदों की आपत्तियों से जुड़ा है, जिन्होंने इस परियोजना को चुनौती दी थी।

    यह प्रोजेक्ट ट्रंप प्रशासन की करीब 46 अरब डॉलर की व्यापक सीमा सुरक्षा योजना का हिस्सा है। इसके तहत अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर करीब 30 फीट ऊंची स्टील की दीवारें, व्हीकल बैरियर्स, सड़कें और सर्विलांस टेक्नोलॉजी लगाने की योजना है।

    जज ने कहा- वादियों को गंभीर नुकसान का खतरा
    फेडरल जज कैथलीन कार्डोने ने अपने आदेश में कहा कि मामले में वादी अपने दावों में सफल होते हुए दिखाई दे रहे हैं और यदि निर्माण पर रोक नहीं लगाई गई तो उन्हें गंभीर नुकसान हो सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने फिलहाल बिग बेंड सेक्टर में निर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाने से प्रशासन को रोक दिया।

    कोर्ट के आदेश पर अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    दूर-दराज इलाका होने से सुरक्षा पहले से मजबूत होने का दावा
    बॉर्डर वॉल का विरोध कर रहे स्थानीय पक्षों का तर्क है कि बिग बेंड इलाका बेहद दूर-दराज और दुर्गम है। उनके मुताबिक, इस भौगोलिक स्थिति के कारण यहां अवैध तरीके से सीमा पार करना पहले ही कठिन है, इसलिए इस इलाके में भारी-भरकम बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर सवाल उठते हैं।

    याचिकाकर्ताओं ने प्रशासन पर निर्माण परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए नियमों में कई तरह की छूट देने और कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार करने का आरोप लगाया है। हालांकि, ये आरोप मामले में पक्षकारों के दावे हैं और अंतिम कानूनी निष्कर्ष कोर्ट के आगे के फैसले पर निर्भर करेगा।

    पर्यावरण संगठन ने फैसले को बताया बड़ी जीत
    मामले में याचिका दायर करने वाले सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी के लाइकेन जोर्डहल ने कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने इसे पूरी जीत बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला आने तक निर्माण के लिए इस्तेमाल हो रहे बुलडोजर वापस लौटेंगे।

    जोर्डहल ने इसे बिग बेंड, टेक्सास और अमेरिकी संविधान के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। वहीं, कोर्ट की मौजूदा रोक फिलहाल अस्थायी है और इससे परियोजना पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

    कुछ हफ्ते पहले शुरू हुआ था निर्माण
    कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब ट्रंप प्रशासन के बिग बेंड सेक्टर में बॉर्डर वॉल के पहले पैनल लगाए जाने के कुछ सप्ताह ही हुए हैं। प्रशासन की व्यापक योजना के तहत दक्षिणी सीमा पर दीवार के साथ-साथ वाहन अवरोधक, सड़कें और निगरानी से जुड़ी तकनीक विकसित करने का प्रस्ताव है।

    अब कोर्ट की अस्थायी रोक के कारण बिग बेंड इलाके में इन निर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। मामले में आगे होने वाली सुनवाई और अंतिम फैसला यह तय करेगा कि इस हिस्से में प्रस्तावित निर्माण को स्थायी रूप से आगे बढ़ाया जा सकेगा या नहीं।

  • एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा

    एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा


    पेरिस।
    एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने से जुड़े विवाद में हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) को जांच में क्लीन चिट मिल गई है। जांच में सामने आया है कि संगठन ने एफिल टावर प्रशासन से महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई मांग नहीं की थी। पिछले महीने करीब 100 संतों के एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वहां से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इसके विरोध में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था और एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा था।

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक BAPS प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही महिला कर्मचारियों को कुछ देर के लिए अपने स्थान से हटने को कहा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपसी सूचना के आदान-प्रदान के दौरान मूल संदेश का अर्थ बदल गया। कर्मचारियों को स्थायी रूप से स्थान छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था, बल्कि कुछ मिनटों के लिए एक-दूसरे से अलग रहने को कहा गया था।

    संचालन कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो छोड़ेंगे पद

    एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो इस साल के अंत में अपने पद से इस्तीफा देंगे। वह 2018 से एफिल टावर के महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    रुइवो के कार्यकाल में हुई आंतरिक जांच में इस दौरे के आयोजन में ‘परिचालन संबंधी खामियों और कमियों’ की बात सामने आई। कंपनी के बोर्ड ने कहा कि इन खामियों के कारण महिला कर्मचारियों को हटाया जाना ‘अस्वीकार्य’ था।

    क्या था पूरा विवाद?

    5 सितंबर को BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर का निजी दौरा किया था। आरोप था कि संगठन की ओर से दौरे के दौरान महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने की बात सामने आई थी।

    घटना के बाद यूनियन प्रतिनिधि डायने दावोइन ने महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटना दोबारा न होने की मांग की थी। कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद पेरिस शहर के अधिकारियों ने भी मामले की जांच शुरू की।

    एफिल टावर की संचालन कंपनी के बोर्ड अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि यहां एक विशेष प्रोटोकॉल विभाग बनाया जाएगा। इसके अलावा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए नए उपाय और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।

    एफिल टावर का स्वामित्व पेरिस नगर प्रशासन के पास है। यहां हर साल करीब 70 लाख पर्यटक पहुंचते हैं।

    100 साल से अधिक पुरानी है BAPS

    BAPS की स्थापना गुजरात में 100 से अधिक वर्ष पहले हुई थी। यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संस्था है। संगठन के साधु ब्रह्मचर्य के कड़े नियमों का पालन करते हैं और अनुयायियों से भी निर्धारित नैतिक नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

  • सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…

    सऊदी अरब पर हूतियों के हमले जारी…. मक्का के बाद अब मदीना में पावर स्टेशन पर अटैक…


    दुबई।
    मुसलमानों (Muslims) के सबसे पवित्र स्थलों में से एक मक्का (Mecca) पर हमले के बाद अब सऊदी अरब (Saudi Arabia) के मदीना (Medina) पर हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यमन के हूती विद्रोहियों ने मदीना (Medina) पर एक बड़ा हमला किया है। सऊदी की सैन्य गठबंधन ने बताया है कि हमला मदीना स्थित ताइबा पावर डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन (Taiba Power Distribution Station) पर हुआ और हूती विद्रोहियों ने इसे ड्रोन के जरिए निशाना बनाया। अहम बात यह है कि यह पावर स्टेशन सीधे तौर पर ‘मस्जिद-ए-नबवी’ मस्जिद को बिजली की आपूर्ति करता है।

    सऊदी सेना के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया एक्स पर हमले का आरोप लगाया है। पर उन्होंने बताया कि यह हमला बीते मंगलवार को हुआ। ड्रोन हमले में एक ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, पावर नेटवर्क को तुरंत बहाल कर दिया गया और इसलिए बिजली सेवा पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।


    दोनों पवित्र मस्जिदों पर हमले की कोशिश

    सऊदी की गठबंधन ने हूती विद्रोहियों के इस कदम की कड़ी निंदा की है। प्रवक्ता अल-मल्की ने कहा कि यह हमला दोनों पवित्र मस्जिदों को निशाना बनाने की कोशिशों का हिस्सा है। गौरतलब है कि इससे पहले बीते महीने हुती विद्रोहियों द्वारा मक्का को भी निशाना बनाने की खबरें सामने आई थीं। कथित तौर पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के मक्का को निशाना बनाने की कोशिश की और ड्रोन हमले किए। इसके बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था। भारत समेत कई देशों ने इस हमले की कड़ी निंदा की थी।


    बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की खबर

    मदीना हमले के अलावा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अन्य हिस्सों पर भी ताबड़तोड़ हमले किए हैं। बीते गुरुवार को सऊदी की एयर डिफेंस सिस्टम ने लाल सागर तट के पास खमिस मुशैत और जाज़ान में दो बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक खमिस मुशैत में मिसाइल और ड्रोन के मलबे गिरने के कारण कई इमारतों और वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा है।


    आतंक मचा रहे हूती

    हूती विद्रोहियों के इन बढ़ते हमलों ने क्षेत्र में तनाव भड़का दिया है। समूह ने यमन में लाल सागर की तटरेखा और रणनीतिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के द्वीपों पर लगभग नियंत्रण कर लिया है। हमले ऐसे समय में हुए हैं जब अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज पहले से ही ठप पड़ा है। ऐसे में वैश्विक तेल आपूर्ति दबाव में है। अब बाब अल-मंडेब पर हमलों से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

  • दुबई से लंदन के लिए उड़ा विमान… मिला इमरजेंसी अलर्ट, रास्ता बदलकर भेजा फ्रैंकफर्ट

    दुबई से लंदन के लिए उड़ा विमान… मिला इमरजेंसी अलर्ट, रास्ता बदलकर भेजा फ्रैंकफर्ट


    दुबई।
    दुबई (Dubai) से तेल अवीव (Tel Aviv) जाने वाली फ्लाइट में हुई घटना को लेकर दुनिया भर में चर्चा जारी है। इसी बीच दुबई से लंदन (London) के लिए उड़ान भरने वाली एक फ्लाइट ने भी हवा में ही इमरजेंसी अलर्ट (Emergency Alert) जारी किया। इसके बाद उसका रास्ता बदलकर उसे फ्रैंकफर्ट भेज दिया गया है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक एमिरेट्स की फ्लाइल नंबर EK31 (UAE4PY) दुबई से 11.25 सुबह रवाना हुई थी। उसने शुरुआत में इमरजेंसी अलर्ट भेजा। इसके बाद फ्रैंकफर्ट के पास नीचे उतरना शुरू किया। एयरलाइंस की तरफ से बताया गया कि यह इमरजेंसी अलर्ट फ्लाइट में मौजूद एक यात्री की मेडीकल कंडीशन को देखते हुए दिया गया था।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में यह विमान फ्रैंकफर्ट में ही मौजूद है। यहां से यह हीथ्रो एयरपोर्ट के लिए रवाना होगा।


    पायलट ने भेजा था स्क्वॉक कोड 7700

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इमिरेट्स फ्लाइट ने स्क्वॉक कोड 770 का इस्तेमाल किया था। यह एक इंटरनेशनल यूनिवर्सल ट्रांसपोंडर सिग्नल है, जिसका इस्तेमाल पायलट अपनी इमरजेंसी की स्थिति को बताने के लिए करते हैं। इससे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के रडार पर तुरंत विमान की पहचान हो जाती है। इसके बाद कंट्रोलर्स को बिना किसी रेडियो कॉल के असामान्य स्थिति के बारे में जानकारी मिल जाती है। इसके बाद फ्लाइट को प्राथमिकता वाला रूट, आस-पास के ट्रैफिक से क्लीयरेंस और सबसे पास की सही लैंडिंग साइट तक तेजी से पहुँचने के लिए निर्देश मिलते हैं।

  • होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला

    होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला


    तेहरान।
    लाल सागर (Red Sea) की तरफ से हूती (Houthis) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से लेकर ओमान की खाड़ी तक ईरान (Iran) गदर मचाए हुए हैं. ताबड़तोड़ हमले से अमेरिका (America) और उसके सहयोगियों के माथे से पसीना निकल रहा है. ईरान ने खासकर होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को श्‍मशान बना रखा है. दुनिया का एनर्जी कॉरिडोर कहे जाने वाला होर्मुज अमेरिका और ईरान की पंजे में फंसकर फड़फड़ा है. अब ईरान की तरफ से होर्मुज स्‍ट्रेट में एक बार फिर से हमला करने की खबर है।

    बताया जा रहा है कि ईरानी हमले का शिकार बने जहाज में आग लग गई है. पिछले 72 घंटे में 5 जहाजों पर अटैक किया गया है. पहले से ही वीरान हो चुके होर्मुज से अब हर कोई गुजरने से डर रहा है. अमेरिका ने इस समुद्री गलियारे में पूर्ण सुरक्षा देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन तेल, गैस और अन्‍य जरूरी सामानों से लदे टैंकर्स को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही न के बराबर रह गई है।

    ओमान के पास रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और टैंकर पर हमला किए जाने की खबर है, जिसके बाद जहाज में आग लग गई. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चालक दल सुरक्षित है, जबकि जहाज को हुए नुकसान का तत्काल पता नहीं चल सका है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि करीब 25 लाख बैरल क्षमता वाला सुपरटैंकर ओमान के तट से लगभग 8 किलोमीटर दूर प्रभावित हुआ है. हालांकि, हमले के लिए जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब 29 सितंबर को तीन टैंकरों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इससे क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।


    ईरान में एंटी टेररिस्‍ट ऑपरेशन

    ईरान के दक्षिण-पूर्वी शहर जाहेदान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अभियान चलाकर 6 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है. अभियान के दौरान कई विस्फोटक उपकरण भी बरामद किए गए. ईरानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में हाल के हफ्तों में सुरक्षा बलों पर हमलों में वृद्धि हुई है, जिसके बाद आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है. IRGC के करीबी एक ईरानी सूत्र ने अभियान की जानकारी साझा की. हालांकि, मारे गए लोगों की पहचान और उनके किसी संगठन से जुड़े होने के संबंध में तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. जाहेदान और ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के कुछ हिस्सों में सुरक्षा स्थिति लंबे समय से संवेदनशील रही है. अधिकारियों ने क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों और निगरानी को बढ़ाया है।

    अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाते हुए मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करनी शुरू कर दी है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यूएसएस मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप करीब 2,000 मरीन के साथ क्षेत्र की ओर रवाना हुआ है. इस बल में उभयचर अभियानों के लिए प्रशिक्षित 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट शामिल है. इसके अलावा यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इससे क्षेत्र में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या तीन तक पहुंच सकती है. कुल अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में करीब 9,000 अतिरिक्त सैनिक शामिल हो सकते हैं. इसी बीच सऊदी अरब और कतर में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की गई हैं. यह कदम ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच उठाया गया है।

  • California Child Marriage Ban: नाबालिगों की शादी पर पूरी तरह लगा ब्रेक 1 जनवरी 2027 से बदल जाएगा कैलिफोर्निया का कानून

    California Child Marriage Ban: नाबालिगों की शादी पर पूरी तरह लगा ब्रेक 1 जनवरी 2027 से बदल जाएगा कैलिफोर्निया का कानून


    नई दिल्ली। कैलिफोर्निया में बाल विवाह को लेकर बड़ा कानूनी बदलाव किया गया है। राज्य में अब 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति की शादी पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। गवर्नर गेविन न्यूसम ने 30 सितंबर 2026 को असेंबली बिल 1267 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया। यह नया कानून 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। इसके बाद शादी या डोमेस्टिक पार्टनरशिप के लिए दोनों पक्षों की उम्र कम से कम 18 साल होना जरूरी होगा और इस नियम में किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

    इस कानून के लागू होने के बाद कैलिफोर्निया उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां नाबालिगों की शादी पर बिना किसी अपवाद के रोक है। बिल को सांता क्रूज की असेंबली सदस्य गेल पेलरिन ने पेश किया था। बाल विवाह के खिलाफ काम करने वाली संस्था अनचेन्ड एट लास्ट और कैलिफोर्निया कमीशन ऑन द स्टेटस ऑफ वुमन एंड गर्ल्स ने भी इसका समर्थन किया। कानून पर हस्ताक्षर के दौरान मॉडल और बाल विवाह से बची कोर्टनी स्टोडेन भी मौजूद थीं।

    स्टोडेन का अनुभव भी इस कानून की चर्चा का अहम हिस्सा रहा है। उनकी शादी 16 साल की उम्र में अभिनेता डग हचिंसन से हुई थी जो उस समय उनसे काफी बड़े थे। उनके माता-पिता ने इस शादी की अनुमति दी थी। बाद में स्टोडेन ने इस रिश्ते को गलत और शोषणकारी बताया। कानून बनने के बाद उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों का आभार जताया और कहा कि देश के अन्य राज्यों में भी बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे प्रयास जारी रहने चाहिए।

    नए कानून से पहले कैलिफोर्निया में नाबालिगों की शादी कुछ परिस्थितियों में संभव थी। माता-पिता की मंजूरी और सुपीरियर कोर्ट के जज के आदेश के बाद कम उम्र में शादी की अनुमति मिल सकती थी। कैलिफोर्निया उन तीन राज्यों में शामिल था जहां विवाह के लिए स्पष्ट न्यूनतम उम्र निर्धारित नहीं थी। अन्य दो राज्य न्यू मैक्सिको और मिसिसिपी बताए गए हैं। बाल विवाह के विरोध में काम करने वाले संगठनों का तर्क रहा है कि नाबालिगों के लिए विवाह की स्वतंत्र और पूरी सहमति का सवाल जटिल होता है।

    कैलिफोर्निया में इस बदलाव की कोशिश पहले भी हो चुकी है। करीब एक दशक पहले भी बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था लेकिन उस समय प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। 2018 के बाद अमेरिका में बाल विवाह के खिलाफ अभियान तेज हुआ। गवर्नर कार्यालय के अनुसार कैलिफोर्निया से पहले 17 राज्यों में बिना किसी अपवाद के बाल विवाह पर रोक लागू थी। अब कैलिफोर्निया 18वां राज्य बन जाएगा जबकि अमेरिका के 32 राज्यों में अभी भी कुछ शर्तों के तहत नाबालिगों की शादी कानूनी हो सकती है।

    आंकड़ों के मुताबिक 2000 से 2021 के बीच कैलिफोर्निया में करीब 35 हजार ऐसी शादियां दर्ज हुईं जिनमें कम से कम एक पक्ष नाबालिग था। बाल विवाह विरोधी संगठनों के अनुसार इसी अवधि में पूरे अमेरिका में करीब 3 लाख 14 हजार नाबालिगों की कानूनी शादी हुई। इन आंकड़ों को लेकर अलग-अलग संस्थाओं के अध्ययन और कानूनी परिभाषाओं में अंतर हो सकता है। नए कानून के बाद कैलिफोर्निया में 18 साल से कम उम्र के लोगों के विवाह को लेकर कानूनी स्थिति पहले की तुलना में पूरी तरह बदल जाएगी।

  • SpaceX का कमाल: NASA के 4 अंतरिक्ष यात्री रिकॉर्ड 8 घंटे में पहुंचे ISS, जेसिका के हाथों में थी दल की कमान

    SpaceX का कमाल: NASA के 4 अंतरिक्ष यात्री रिकॉर्ड 8 घंटे में पहुंचे ISS, जेसिका के हाथों में थी दल की कमान


    वॉशिंगटन। नासा के चार अंतरिक्ष यात्रियों ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचने में करीब आठ घंटे का समय लिया। यह किसी अमेरिकी मिशन के लिए ISS तक पहुंचने का अब तक का सबसे कम समय बताया गया है। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से पहुंचे इस दल की कमान नासा की अंतरिक्ष यात्री जेसिका वॉटकिन्स के हाथों में है। दल में कनाडा का एक अंतरिक्ष यात्री भी शामिल है।

    स्पेसएक्स ने नासा के इस दल को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना किया था। मिशन के प्रक्षेपण में करीब तीन सप्ताह की देरी हुई थी, क्योंकि ड्रैगन कैप्सूल की ईंधन प्रणाली में रिसाव को ठीक किया जा रहा था। गुरुवार सुबह घने बादलों के कारण काउंटडाउन पर भी मौसम का असर पड़ने की आशंका थी, लेकिन बाद में आसमान साफ होने के बाद सुरक्षित प्रक्षेपण किया गया।

    छह महीने ISS में रहेंगे अंतरिक्ष यात्री

    चारों अंतरिक्ष यात्रियों का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर प्रवास करीब छह महीने का होगा। हालांकि, पृथ्वी से ISS तक पहुंचने में उन्हें केवल आठ घंटे लगे, जो किसी अमेरिकी मिशन के लिए सबसे तेज यात्रा है।

    यह स्पेसएक्स के साथ-साथ नासा समेत अमेरिकी अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी उल्लेखनीय उपलब्धि है। अंतरिक्ष यात्रियों के प्रक्षेपण के समय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कक्षीय स्थिति अनुकूल होने के कारण इतनी कम अवधि में वहां पहुंचना संभव हुआ।

    जेसिका वॉटकिन्स ने रचा इतिहास

    केप कैनावेरल स्पेस फोर्स स्टेशन से देर सुबह हुए प्रक्षेपण के साथ जेसिका वॉटकिन्स ने एक और उपलब्धि अपने नाम की। वह पृथ्वी की कक्षा में किसी अंतरिक्ष दल का नेतृत्व करने वाली पहली अश्वेत महिला बन गईं।

    भूविज्ञानी जेसिका वॉटकिन्स करीब एक दशक पहले नासा के मंगल मिशन क्यूरियोसिटी रोवर के साथ भी काम कर चुकी हैं। वर्ष 2022 में लंबे अंतरिक्ष प्रवास के बाद वह दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंची हैं। प्रक्षेपण के बाद वॉटकिन्स ने रेडियो संदेश में कहा, “इस शानदार सफर के लिए धन्यवाद।”

    तीन सदस्य पहली बार अंतरिक्ष में

    मिशन के बाकी तीन सदस्य पहली बार अंतरिक्ष यात्रा कर रहे हैं। इनमें नासा के ल्यूक डेलानी शामिल हैं, जो पहले अमेरिकी मरीन में सेवा दे चुके हैं। कनाडा के जोशुआ कुट्रिक रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स में कर्नल हैं, जबकि रूस के सर्गेई टेटेर्यातनिकोव पहले पनडुब्बी में सेवा दे चुके हैं।

    यह दल उन चार अंतरिक्ष यात्रियों की जगह लेगा, जो फरवरी से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर वैज्ञानिक और अन्य प्रयोग कर रहे हैं।

    स्पेसएक्स का नासा के लिए 13वां क्रू मिशन

    यह नासा के लिए स्पेसएक्स की ओर से भेजा गया 13वां चालक दल मिशन है। हालांकि, वर्ष 2020 की परीक्षण उड़ान को इस संख्या में शामिल नहीं किया गया है। चारों अंतरिक्ष यात्रियों के इस दल को ‘क्रू-13’ नाम दिया गया है।

    स्पेसएक्स और नासा की साझेदारी के तहत नियमित रूप से अंतरिक्ष यात्रियों को ISS तक पहुंचाया जा रहा है। इस मिशन में कम समय में स्टेशन तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    अंतरिक्ष में रहते पिता बनने वाले चौथे कनाडाई पुरुष

    कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जोशुआ कुट्रिक के लिए यह मिशन व्यक्तिगत तौर पर भी खास है। वह पृथ्वी की कक्षा में रहते हुए पिता बनने वाले चौथे पुरुष अंतरिक्ष यात्री होंगे।

    कुट्रिक की पत्नी हीदर नवंबर के अंत में अपने तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली हैं। कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि बच्चे के जन्म के समय पूरे परिवार को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

    इस तरह ‘क्रू-13’ का मिशन वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के साथ एक खास व्यक्तिगत घटना का भी गवाह बनने जा रहा है। छह महीने के प्रवास के दौरान दल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न प्रयोगों और गतिविधियों में हिस्सा लेगा।

  • होर्मुज संकट के बीच भारत-UAE पाइपलाइन योजना, समुद्र के नीचे तेल और गैस आपूर्ति के विकल्प पर काम तेज

    होर्मुज संकट के बीच भारत-UAE पाइपलाइन योजना, समुद्र के नीचे तेल और गैस आपूर्ति के विकल्प पर काम तेज

    नई दिल्ली। होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर काम कर रहा है। इसी क्रम में भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी की जा रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस दिशा में चल रही पहल की पुष्टि की है। यह पुष्टि उन्होंने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात के बाद की। पीयूष गोयल के अनुसार, ओमान और यूएई से भारत तक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता में रखा गया है।

    इस प्रस्तावित परियोजना को MEIDP यानी मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन के नाम से जाना जाता है। इसके तहत पाइपलाइन ओमान और यूएई के तट से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए भारत के गुजरात और महाराष्ट्र के तट तक पहुंच सकती है। शुरुआत में इस परियोजना में केवल गैस पाइपलाइन की योजना पर काम किया जा रहा था, लेकिन अब समुद्र के रास्ते कच्चा तेल भारत तक लाने की संभावना पर भी तकनीकी अध्ययन शुरू किया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर सरकारी कंपनियां परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इस रिपोर्ट में गहरे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने की तकनीक, लागत, सुरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की जाएगी।

    इस परियोजना की जरूरत होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव के बीच महसूस की जा रही है। भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। वहीं, देश में आने वाली आधी से अधिक एलपीजी और एलएनजी भी कतर और यूएई से इसी समुद्री मार्ग के जरिए जहाजों से आती है। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्र के नीचे पाइपलाइन के जरिए सीधे आपूर्ति मिलने से समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम करने का विकल्प तैयार हो सकता है।

    परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती समुद्र की अत्यधिक गहराई में पाइपलाइन बिछाना है। इसके लिए करीब 3,450 मीटर तक की गहराई में पाइपलाइन स्थापित करनी होगी। इतनी गहराई में पानी का दबाव काफी अधिक होता है। इसके अलावा समुद्र तल पर मौजूद चट्टानों और खाइयों के बीच पाइपलाइन के लिए सुरक्षित रास्ता तैयार करना तथा भविष्य में उसकी मरम्मत करना भी बड़ी तकनीकी चुनौतियों में शामिल है। परियोजना के तहत इन सभी पहलुओं का विस्तृत तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है।

    सीधे ओमान, यूएई, कतर और सऊदी अरब के गैस और तेल भंडार से आपूर्ति मिलने की स्थिति में समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे तेल और गैस के परिवहन तथा बीमा पर होने वाला खर्च घटाने में मदद मिल सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी होने पर भारत पर पड़ने वाला दबाव भी कम किया जा सकता है।

    परियोजना विकसित करने वाली संस्था साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज ने करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 3 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर इसका परीक्षण किया है। परियोजना की सभी शर्तें पूरी होने के बाद पूरी पाइपलाइन के निर्माण में करीब 5 से 7 साल लगने का अनुमान है। इस तरह होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति के लिए समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में इस परियोजना को आगे बढ़ा रहा है।