Category: International

  • अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद में हवाई हमले का दावा, घरों को बनाया निशाना, बच्चों समेत कई लोगों की मौत

    अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद में हवाई हमले का दावा, घरों को बनाया निशाना, बच्चों समेत कई लोगों की मौत

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान के कुनार और हेलमंद प्रांत में अलग-अलग हवाई हमलों की खबर सामने आई है। इन हमलों में आम लोगों के घरों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों घटनाओं में कई लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। मरने वालों में बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ महिलाओं और बच्चों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। हमलों के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। इन घटनाओं के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर तनाव बढ़ने की बात सामने आई है।

    कुनार प्रांत के शेल्टन जिले की चोगाम घाटी में गुरुवार सुबह करीब 3 बजे हवाई हमला होने की बात कही गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस हमले में एक घर पूरी तरह टूट गया। हमले के बाद पांच लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। मृतकों में ज्यादातर बच्चे बताए जा रहे हैं। घटना में दो महिलाओं और एक बच्चे के घायल होने की भी खबर है। हमले के बाद प्रभावित परिवारों तक राहत और बचाव पहुंचाने का काम शुरू किया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में हमले से जुड़े अन्य विवरण सामने नहीं आए हैं।

    दक्षिणी अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत में भी हवाई हमले की खबर सामने आई है। यहां गरमसिर जिले के सफर इलाके में दो आम लोगों के घरों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में चार लोगों की मौत हुई है और आठ लोग घायल हुए हैं। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। दोनों घरों को निशाना बनाए जाने के बाद इलाके में राहत और बचाव का काम शुरू किया गया। घटना में प्रभावित लोगों को लेकर शुरुआती जानकारी में मौत और चोटों का जिक्र किया गया है।

    कुनार और हेलमंद में सामने आई इन दोनों घटनाओं ने अफगानिस्तान में हवाई हमलों को लेकर तनाव को फिर बढ़ा दिया है। कुनार में हुए हमले को लेकर एक घर के पूरी तरह टूटने और पांच लोगों की मौत का दावा सामने आया है, जबकि हेलमंद में दो घरों को निशाना बनाए जाने और चार लोगों की मौत की जानकारी दी गई है। दोनों घटनाओं में महिलाओं और बच्चों के घायल होने की बात कही गई है। शुरुआती जानकारी में आम लोगों के घरों को हमलों का निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव की गतिविधियां शुरू की गई हैं।

    इन घटनाओं के सामने आने के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और बढ़ने की बात कही जा रही है। कुनार के शेल्टन जिले की चोगाम घाटी में सुबह करीब 3 बजे हुए हमले में पांच लोगों की मौत और तीन लोगों के घायल होने का दावा है। वहीं, हेलमंद के गरमसिर जिले के सफर इलाके में दो घरों पर हमले में चार लोगों की मौत और आठ लोगों के घायल होने की जानकारी स्थानीय अधिकारियों की ओर से सामने आई है। दोनों घटनाओं में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर फिलहाल यही शुरुआती जानकारी उपलब्ध है।

  • महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान अमेरिका में राज्यों ने दी टैक्स राहत, चुनाव से पहले ईंधन की कीमतों पर बढ़ा दबाव

    महंगे पेट्रोल-डीजल से परेशान अमेरिका में राज्यों ने दी टैक्स राहत, चुनाव से पहले ईंधन की कीमतों पर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली । ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अमेरिका में भी दिखाई दे रहा है। पेट्रोल, डीजल और गैस की बढ़ती कीमतों से आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ईंधन महंगा होने के साथ राज्य सरकारों की चिंता भी बढ़ी है। इसी के चलते कई राज्यों ने लोगों को राहत देने के लिए गैस टैक्स में अस्थायी कटौती या छूट शुरू की है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले ईंधन की किफायती कीमतें मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई हैं।

    ओहायो में सांसदों ने दोनों दलों के समर्थन से 90 दिन की गैस टैक्स छुट्टी को मंजूरी दी है। इसके तहत इस साल के बाकी महीनों में राज्य का पेट्रोल टैक्स 38.5 सेंट और डीजल टैक्स 47 सेंट प्रति गैलन निलंबित रहेगा। राज्य सरकार सड़क और पुलों के रखरखाव के लिए जनरल फंड से करीब 725 मिलियन डॉलर खर्च करेगी, ताकि फ्यूल टैक्स से होने वाली आय में कमी की भरपाई की जा सके।

    बुधवार को अमेरिका में सामान्य पेट्रोल की औसत कीमत 4.43 डॉलर प्रति गैलन रही। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इसकी कीमत में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं डीजल की औसत कीमत 6.41 डॉलर प्रति गैलन रही, जो पिछले सप्ताह के रिकॉर्ड स्तर से कुछ ही सेंट नीचे है। एक गैलन में करीब 3.785 लीटर होते हैं। इस हिसाब से पेट्रोल की कीमत करीब 1.17 डॉलर प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 1.69 डॉलर प्रति लीटर बैठती है।

    ओहायो के अलावा कई अन्य राज्यों में भी ईंधन टैक्स को लेकर राहत दी गई है। जॉर्जिया ने मार्च में मध्य पूर्व संघर्ष के बाद ईंधन की कीमतें बढ़ने पर टैक्स निलंबित किया था। बाद में इसकी अवधि बढ़ाई गई और हाल में 30 दिन का नया मोटर फ्यूल टैक्स हॉलिडे शुरू किया गया। इंडियाना में भी फ्यूल टैक्स राहत को कई बार बढ़ाया गया है और मौजूदा छूट 5 अक्टूबर तक जारी है। यूटा में छह महीने के लिए फ्यूल टैक्स में 6 सेंट प्रति गैलन की कटौती की गई है। इलिनॉय और केंटकी ने प्रस्तावित ईंधन टैक्स बढ़ोतरी को भी टाल दिया है।

    कई राज्यों ने किसानों को राहत देने के लिए डीजल टैक्स नियमों में अस्थायी बदलाव किए हैं। अलाबामा, अर्कांसस, लुइसियाना, मिसौरी, नेब्रास्का, नॉर्थ कैरोलाइना, नॉर्थ डकोटा, ओकलाहोमा और टेक्सास में यह कदम उठाया गया है। आम तौर पर टैक्स-फ्री डाइड डीजल का इस्तेमाल ट्रैक्टर, लॉगिंग मशीन और सिंचाई पंप जैसी ऑफ-रोड मशीनों में होता है। फसल कटाई के मौसम में कुछ राज्यों ने इसके इस्तेमाल के नियमों में अस्थायी ढील दी है।

    कैलिफोर्निया ने भी पेट्रोल की कीमत कम करने के लिए समर-ब्लेंड ईंधन की अनिवार्यता में ढील दी है। राज्य के कई हिस्सों में आम तौर पर 31 अक्टूबर तक समर-ब्लेंड पेट्रोल जरूरी होता है। गवर्नर गेविन न्यूसम ने सोमवार को यह शर्त खत्म कर दी।

    ओहायो में गैस टैक्स छुट्टी का मुद्दा आगामी गवर्नर चुनाव से भी जुड़ गया है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन ने पिछले सप्ताह गैस टैक्स छुट्टी की मांग की थी। इसके कुछ घंटों बाद रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने भी इसी तरह की योजना का ऐलान किया। दोनों उम्मीदवार मौजूदा गवर्नर माइक डीवाइन की जगह लेने के लिए चुनाव मैदान में हैं। डेमोक्रेट्स ने रामास्वामी पर एक्टन के प्रस्ताव का श्रेय लेने का आरोप लगाया, जबकि उनके समर्थकों ने दोनों योजनाओं के बीच अंतर बताया।

    हालांकि टैक्स राहत का असर पेट्रोल पंप पर तुरंत और पूरी तरह दिखाई देना जरूरी नहीं है। ईंधन की कीमत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, थोक कीमत, परिवहन, स्टॉक और स्थानीय बाजार समेत कई कारकों पर निर्भर करती है। टैक्स हटने के समय रिटेलर के पास पहले से टैक्स देकर खरीदा गया ईंधन मौजूद हो सकता है। ऐसे में बिना टैक्स वाला नया स्टॉक आने के बाद ही राहत का पूरा असर खुदरा कीमतों में दिखाई दे सकता है।

  • यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    यूक्रेन पर रूस का मिसाइल-ड्रोन अटैक, बिजली और इंटरनेट केंद्रों को बनाया निशाना

    कीव। रूस ने यूक्रेन पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। बुधवार को यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि रातभर चले हमलों में राजधानी कीव और आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया। हमलों में ऊर्जा ढांचे के साथ एक अहम इंटरनेट केंद्र को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक कीव और उसके उत्तरी बाहरी इलाके में दो महिलाओं और 14 वर्षीय बच्चे समेत कई लोगों की मौत हुई है।

    कीव के मेयर विटाली क्लिचको ने बताया कि शहर के एक गोदाम पर हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। वहीं, कीव क्षेत्र के विशहोरोद में एक निजी मकान के मलबे से 14 वर्षीय बच्चे का शव बरामद किया गया। इसी मकान से तीन अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको के अनुसार, राजधानी और आसपास के इलाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    अगस्त के अंत से बढ़े हवाई हमले

    यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, अगस्त के अंत से रूस ने हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाई है। यह हमले ऐसे समय हो रहे हैं जब यूक्रेन सर्दियों की तैयारी कर रहा है। रूस की ओर से लगातार ऊर्जा संयंत्रों, बिजली सबस्टेशनों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।

    यूक्रेन की बिजली कंपनी डीटीईके ने नुकसान का विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया, लेकिन बताया कि उसके कर्मचारियों ने हमलों के बाद करीब 8,000 घरों में बिजली की आपूर्ति बहाल कर दी।

    188 ड्रोन और कई मिसाइलें दागने का दावा

    यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर के हमलों में एंटी-शिप और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ 188 ड्रोन दागे। यूक्रेन का दावा है कि इनमें से पांच मिसाइलों और 155 ड्रोन को रोक दिया गया। बाकी हथियारों में से कुछ अपने निशाने तक पहुंचे।

    रूस ने भी हमलों की पुष्टि की है। उसके रक्षा मंत्रालय के अनुसार, रूसी सेना ने कीव में सैन्य गतिविधियों से जुड़े एक डेटा सेंटर, कीव क्षेत्र के बिजली संयंत्र, ओडेसा क्षेत्र के एक औद्योगिक परिसर और इजमाइल बंदरगाह की सुविधाओं को निशाना बनाया।

    हालांकि, यूक्रेन ने रूस के इन विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा कि कीव के कम से कम चार जिलों में नागरिक इलाके भी हमलों की चपेट में आए।

    जेलेंस्की बोले- ऊर्जा व्यवस्था पर है मुख्य निशाना

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि रूस के हमलों का मुख्य निशाना कीव और उसके आसपास की ऊर्जा व्यवस्था है। उन्होंने इसे मुश्किल हमला बताते हुए कहा कि लगातार हो रहे हमलों से यूक्रेन की वायु रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

    जेलेंस्की ने उन देशों का भी आभार जताया, जिन्होंने हाल में यूक्रेन को हवाई रक्षा के लिए सहायता उपलब्ध कराई है।

    युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच जारी हैं हमले

    रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए साढ़े चार साल से अधिक समय हो चुका है। यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस अमेरिकी प्रयासों के तहत युद्ध समाप्त करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ने को तैयार नहीं है।

    वहीं, रूस का कहना है कि वह सीमित अवधि के युद्धविराम के बजाय व्यापक और स्थायी समझौता चाहता है। रूस की ओर से यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों पर उसके दावे और क्षेत्रीय रियायतों की मांग विवाद का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है, जबकि कीव अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तों के बीच शांति वार्ता में प्रगति नहीं हो सकी है और इसी दौरान हवाई हमले लगातार जारी हैं।

  • सिंधु जल संधि पर फिर भड़का पाकिस्तान, ‘बोला-भारत पानी को हथियार बना रहा

    सिंधु जल संधि पर फिर भड़का पाकिस्तान, ‘बोला-भारत पानी को हथियार बना रहा


    इस्लामाबाद।
    सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भारत पर पानी को ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल संधि को लेकर अपने रुख पर कायम है और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा। तरार ने यह भी दावा किया कि संधि को भारत एकतरफा तरीके से बदल, रद्द या स्थगित नहीं कर सकता।

    तरार ने बुधवार को इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज में सिंधु जल संधि पर एक रिपोर्ट जारी करने के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शांतिप्रिय देश है, लेकिन वह भारत को पानी को हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकता, क्योंकि उनके मुताबिक सिंधु का पानी पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का बुनियादी अधिकार है।

    ‘संधि को एकतरफा नहीं रोका जा सकता’

    अताउल्लाह तरार ने कहा कि सिंधु जल संधि दोनों देशों के बीच एक कानूनी समझौता है और उनके अनुसार यह दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी है। उन्होंने दावा किया कि विवाद होने की स्थिति में भी दोनों देशों को संधि में तय शर्तों और विवाद समाधान की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

    पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि अगर कोई देश स्थापित विवाद समाधान तंत्र के बावजूद किसी बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय जल संधि को एकतरफा तरीके से स्थगित कर सकता है, तो इसका असर दुनिया में सीमा-पार जल प्रबंधन की व्यवस्था पर पड़ सकता है।

    उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ बातचीत जारी रखेगा और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कानूनी तथा कूटनीतिक माध्यमों का इस्तेमाल करेगा।

    PCA के फैसले का भी दिया हवाला

    तरार ने स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के अगस्त 2026 के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि इससे पाकिस्तान के इस रुख को मजबूती मिली है कि संधि की स्थिति को एकतरफा कार्रवाई से नहीं बदला जा सकता।

    हालांकि, PCA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने सिंधु जल संधि की स्थिति और रतले जलविद्युत परियोजना से संबंधित अंतरिम उपायों पर फैसला जारी किया था। PCA की वेबसाइट पर संबंधित मामले में फैसलों की सूची भी उपलब्ध है।

    शहबाज शरीफ के UN भाषण का जिक्र

    तरार ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शरीफ ने सिंधु के पानी को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए ‘जीवनरेखा’ बताया था।

    तरार के मुताबिक, पाकिस्तान का सिंधु जल संधि पर रुख पूरी तरह स्पष्ट है और वह इसे क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का माध्यम मानता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मामले में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और दूसरे देशों के साथ संपर्क बनाए रखेगा।

    1960 में हुई थी सिंधु जल संधि

    भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर सितंबर 1960 में हस्ताक्षर हुए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुए इस समझौते में सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के जल के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और दायित्व तय किए गए थे।

    मौजूदा विवाद में दोनों देशों के रुख अलग हैं। पाकिस्तान संधि को बाध्यकारी बताते हुए इसके प्रावधानों को जारी रखने की मांग कर रहा है, जबकि भारत ने संधि को लेकर अपनी अलग स्थिति अपनाई है। PCA के आधिकारिक रिकॉर्ड में 31 अगस्त 2026 को ‘संधि की स्थिति’ पर अवॉर्ड दर्ज है और संबंधित मध्यस्थता मामला फिलहाल PCA के रिकॉर्ड में लंबित मामलों में शामिल है।

    इस बीच अताउल्लाह तरार ने कहा कि पाकिस्तान अपने कानूनी और कूटनीतिक पक्ष को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने रखता रहेगा। उन्होंने सीमा-पार जल समझौतों पर इस विवाद के संभावित व्यापक प्रभावों का भी मुद्दा उठाया।

  • ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ईरान ने अब संयुक्त राष्ट्र पर भी तंज कसा है। भारत में स्थित ईरानी दूतावास की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक मीम में बॉलीवुड की चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। इस मीम के जरिए संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    ईरान पहले भी मीम के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर निशाना साधता रहा है। अलग-अलग देशों में मौजूद ईरानी दूतावासों की ओर से सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे पोस्ट साझा किए गए हैं, जिनमें राजनीतिक घटनाक्रम को हास्य और लोकप्रिय संस्कृति से जोड़कर संदेश देने की कोशिश की गई। इस बार संयुक्त राष्ट्र को निशाना बनाने के लिए भारतीय सिनेमा के बेहद चर्चित किरदार ठाकुर को चुना गया।

    मंगलवार को साझा किए गए इस मीम में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गई हैं। पहली तस्वीर में मार्वल के सुपरहीरो डॉक्टर स्ट्रेंज को दिखाया गया है, जिसके कई हाथ नजर आते हैं। इस तस्वीर के साथ लिखा गया है, “स्कूल की किताबों के मुताबिक यूएन।” इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि आम तौर पर संयुक्त राष्ट्र को एक ऐसी शक्तिशाली वैश्विक संस्था के रूप में देखा जाता है, जो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मामलों में हस्तक्षेप करने और कार्रवाई करने की क्षमता रखती है।

    दूसरी तस्वीर में 1975 में रिलीज हुई चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी में ठाकुर के दोनों हाथ कटे हुए होते हैं। इसी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए मीम में लिखा गया है, “वास्तविकता में UN।” इसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक स्थिति को एक ऐसे किरदार से जोड़ने की कोशिश की गई है, जिसके पास अपने हाथ नहीं हैं और जो परिस्थितियों के सामने असहाय नजर आता है।

    ईरान ने यह मीम ऐसे समय में साझा किया है, जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है। इसी दौरान वैश्विक स्तर पर कई गंभीर संघर्ष और कूटनीतिक तनाव चर्चा में हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की जाती रही है।

    मीम के जरिए ईरानी पक्ष का संकेत यह है कि जब बड़े और शक्तिशाली देश सीधे संघर्ष में शामिल होते हैं, तब संयुक्त राष्ट्र के पास उन्हें रोकने की सीमित क्षमता रह जाती है। इसी विचार को समझाने के लिए फिल्म शोले के ठाकुर के किरदार का इस्तेमाल किया गया है। एक तस्वीर में कई हाथों वाले डॉक्टर स्ट्रेंज के जरिए संगठन की कागजी ताकत दिखाई गई है, जबकि दूसरी तस्वीर में हाथ कटे ठाकुर के जरिए उसकी कथित वास्तविक बेबसी को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

    ईरान की इस तरह की सोशल मीडिया गतिविधियों को मीम डिप्लोमेसी के तौर पर भी देखा जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कूटनीतिक बयानों के बजाय लोकप्रिय तस्वीरों, हास्य और इंटरनेट संस्कृति के माध्यम से राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाना होता है। इस बार भारतीय फिल्म के चर्चित किरदार को शामिल किए जाने के कारण यह मीम खास तौर पर चर्चा में आया है।

  • ईरान की सैन्य सप्लाई चेन पर अमेरिका का शिकंजा, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान से जुड़े 10 लोगों-संस्थाओं पर प्रतिबंध

    ईरान की सैन्य सप्लाई चेन पर अमेरिका का शिकंजा, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान से जुड़े 10 लोगों-संस्थाओं पर प्रतिबंध


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका ने ईरान की सैन्य सप्लाई चेन पर कार्रवाई करते हुए ईरान, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान से जुड़े 10 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने मंगलवार को यह कदम उठाया। इन लोगों और कंपनियों पर ईरान के रक्षा मंत्रालय के लिए हथियार और उनके कलपुर्जे जुटाने तथा सैन्य खरीद में आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोप लगाया गया है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। वहीं, दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक बातचीत को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत कार्रवाई

    अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासन के ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य ईरानी सरकार तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण वित्तीय मदद को रोकना है।

    ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि उनका विभाग ईरानी शासन को किसी भी तरह का समर्थन बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान की मदद करने वाले लोगों और संस्थाओं की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की कार्रवाई जारी रहेगी।

    हथियारों और कलपुर्जों की खरीद में मदद का आरोप

    अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिबंधों की जद में आए 10 लोग और संस्थाएं ईरान, हॉन्ग-कॉन्ग और पाकिस्तान में मौजूद हैं। इन पर ईरान के रक्षा मंत्रालय के लिए हथियार तथा हथियारों के हिस्से जुटाने में मदद करने का आरोप है।

    अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की रक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उसकी हथियार निर्माण क्षमता को दोबारा मजबूत करने की कोशिशों को रोकना है। नए प्रतिबंधों के जरिए उन लोगों और कंपनियों की लागत बढ़ाने का प्रयास किया गया है, जिन्होंने ईरान की सैन्य खरीद में मदद की।

    2024 में भी हुई थी कार्रवाई

    ईरान की सैन्य क्षमता से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ अमेरिका पहले भी कार्रवाई कर चुका है। वर्ष 2024 में बाइडेन प्रशासन ने ईरान के रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के लिए मिसाइल और ड्रोन बनाने तथा उनके प्रसार में मदद करने वाली संस्थाओं को प्रतिबंधों के दायरे में लिया था।

    रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रियाल

    अमेरिका की ताजा वित्तीय कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब मंगलवार को ईरान की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। तेहरान में कारोबारियों ने एक अमेरिकी डॉलर के बदले 25 लाख से अधिक रियाल में कारोबार किया। युद्ध शुरू होने के बाद से रियाल लगातार कमजोर हुआ है। इससे पहले दो सितंबर को यह 22 लाख रियाल प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंचा था।

    पहले से प्रतिबंधों के दबाव में ईरानी अर्थव्यवस्था

    ईरानी अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के दबाव में है। इस साल अमेरिका की ओर से ईरानी तेल पर नौसैनिक नाकाबंदी और युद्ध शुरू होने के बाद लगाए गए नए प्रतिबंधों ने आर्थिक स्थिति पर दबाव और बढ़ा दिया है। ताजा अमेरिकी कार्रवाई ईरान की सैन्य आपूर्ति और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के प्रयास के तौर पर सामने आई है।

  • एफिल टावर के चीफ पर एक्शन, महिला कर्मचारियों को हटाने के विवाद के बाद साल के अंत में छोड़ेंगे पद

    एफिल टावर के चीफ पर एक्शन, महिला कर्मचारियों को हटाने के विवाद के बाद साल के अंत में छोड़ेंगे पद


    नई दिल्ली। पेरिस के मशहूर एफिल टावर में हिंदू धार्मिक संगठन BAPS के प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को हटाए जाने के विवाद में बड़ा एक्शन हुआ है। एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी SETE के डायरेक्टर जनरल पैट्रिक ब्रैंको रुइवो साल के अंत तक अपना पद छोड़ देंगे। घटना की जांच में प्रबंधन के स्तर पर व्यवस्थागत और कामकाज से जुड़ी कई खामियां सामने आई थीं।

    सोसिएते डी’एक्सप्लॉयटेशन डे ला टूर एफिल (SETE) ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि इन खामियों के चलते 5 सितंबर को महिला कर्मचारियों को दौरे से दूर रखा गया था। कंपनी ने इसे अस्वीकार्य बताया है। रुइवो को 2018 के आखिर में SETE का डायरेक्टर जनरल नियुक्त किया गया था।

    महिला कर्मचारियों को BAPS प्रतिनिधिमंडल से दूर रखने पर विवाद

    330 मीटर यानी 1,083 फुट ऊंचे एफिल टावर में 5 सितंबर को BAPS के प्रतिनिधिमंडल का दौरा हुआ था। इस दौरान प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों को कथित तौर पर निर्देश दिया गया कि महिला कर्मचारी BAPS प्रतिनिधिमंडल से दूर रहें।

    इस फैसले के बाद टावर के कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई। कर्मचारियों ने 7 सितंबर को हड़ताल कर दी। इसके चलते एफिल टावर पर्यटकों के लिए बंद रहा। कर्मचारी प्रबंधन के उस निर्देश का विरोध कर रहे थे, जिसके तहत महिला कर्मचारियों को दौरे से अलग रखने की बात कही गई थी।

    हर साल करीब 70 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने वाला एफिल टावर इस विवाद के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया।

    BAPS ने सफाई में क्या कहा था?

    BAPS यानी ‘बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था’ स्वामीनारायण संप्रदाय से जुड़ा एक वैश्विक धार्मिक और नागरिक संगठन है। यह हिंदू धर्म की एक शाखा से संबंधित है।

    घटना के समय BAPS की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि महिला कर्मचारियों को दूर रखने का उद्देश्य किसी के लिंग के आधार पर कोई मांग करना नहीं था। संगठन के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया था ताकि एफिल टावर के कर्मचारियों या आम जनता को असुविधा पहुंचाए बिना बड़े समूह का दौरा सुचारू रूप से कराया जा सके।

    पेरिस में हिंदू मंदिर के उद्घाटन से जुड़ा था कार्यक्रम

    BAPS का प्रतिनिधिमंडल पेरिस में एक पारंपरिक हिंदू पत्थर के मंदिर के उद्घाटन से जुड़े कार्यक्रम के लिए पहुंचा था। इसी दौरान एफिल टावर का दौरा आयोजित किया गया था।

    बाद में महिला कर्मचारियों को दौरे से दूर रखने के निर्देश की जानकारी सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। कर्मचारियों की हड़ताल और प्रबंधन के खिलाफ विरोध के बाद मामले की जांच कराई गई।

    जांच में 5 सितंबर की घटना से जुड़ी कई व्यवस्थागत और कामकाज संबंधी खामियां सामने आईं। SETE के मंगलवार के बयान के अनुसार, इन्हीं खामियों के कारण महिला कर्मचारियों को दौरे से अलग किया गया था। कंपनी ने इस व्यवस्था को स्वीकार नहीं किए जाने योग्य बताया है। इसी घटनाक्रम के बाद SETE के डायरेक्टर जनरल पैट्रिक ब्रैंको रुइवो ने साल के अंत तक पद छोड़ने का फैसला किया है।

  • सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान का बड़ा ऐलान, कहा- जो सैन्य संसाधन हैं, सब उपलब्ध कराएंगे

    सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान का बड़ा ऐलान, कहा- जो सैन्य संसाधन हैं, सब उपलब्ध कराएंगे


    नई दिल्ली। सऊदी अरब पर हमला होने की स्थिति में पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल उसकी रक्षा के लिए कर सकता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा है कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान के पास उपलब्ध सैन्य संसाधन इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगे। उनका यह बयान यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच आया है।

    रोम दौरे के दौरान मंगलवार को मीडिया से बातचीत में आसिफ से पूछा गया कि क्या पाकिस्तानी सेना यमन में ईरानी ठिकानों पर हवाई हमलों में शामिल हुई है। उन्होंने इसकी न तो पुष्टि की और न ही इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उसके पास उपलब्ध सैन्य क्षमताएं जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब के लिए उपलब्ध रहेंगी। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि रियाद ने पाकिस्तान से सैन्य सहायता मांगी है या नहीं।

    पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किए के रक्षा समझौते का क्या मतलब?

    पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। तीनों देशों ने इसे रक्षात्मक समझौता बताया है और कहा है कि यह किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।

    ख्वाजा आसिफ का ताजा बयान इस समझौते की व्यावहारिक भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित बलों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। इससे पहले भी आसिफ कह चुके हैं कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक फैलता है तो मक्का रक्षा समझौता सक्रिय हो सकता है।

    हूती हमलों से सऊदी अरब की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

    आसिफ के मुताबिक हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि हूतियों ने हाल में यमन के लाल सागर तट पर स्थित बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कई द्वीपों पर कब्जा किया है। इससे बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास उनकी मौजूदगी बढ़ी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने यह भी कहा कि हूती विद्रोहियों और इराक में उनके सहयोगी मिलिशिया समूहों ने सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया है। उनके मुताबिक, सऊदी टैंकरों को इस जलमार्ग से गुजरने से रोकने की कोशिश भी की गई है।

    आसिफ ने हूतियों को हमलावर बताते हुए कहा कि सऊदी अरब का कोई भी दुश्मन पाकिस्तान का दुश्मन है।

    अभी तैयार हो रहा गठबंधन का ढांचा

    मक्का में हुए रक्षा समझौते के बाद तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को लागू करने का ढांचा अभी विकसित किया जा रहा है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के सैन्य प्रमुखों ने हाल में रियाद में बैठक की थी। इसमें खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य समन्वय और क्षमताओं को एक-दूसरे से जोड़ने सहित क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई।

    समझौते के तहत सचिवालय और अन्य संचालन व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके पूर्ण संचालन की प्रक्रिया अभी स्पष्ट रूप से तय नहीं हुई है। समझौते का पूरा पाठ भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    ईरान से बातचीत का रास्ता भी खुला रखना चाहता है पाकिस्तान

    सऊदी अरब को सैन्य समर्थन की प्रतिबद्धता जताने के साथ पाकिस्तान ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क भी बनाए रखना चाहता है। आसिफ ने कहा है कि पाकिस्तान क्षेत्रीय संघर्ष को खत्म करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत दोबारा शुरू कराने के पक्ष में है।

    पाकिस्तान ने इसी साल अप्रैल में इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की मेजबानी की थी। हालांकि, बाद में क्षेत्रीय संघर्ष फिर बढ़ गया और बातचीत के लिए तय समयसीमा आगे नहीं बढ़ सकी।

    इस तरह पाकिस्तान एक ओर नए रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए अपनी सैन्य क्षमताएं उपलब्ध कराने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद और क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिशों को भी जारी रखने की स्थिति में है।

  • US ने भारत समेत 20 देशों की खास दवाओं को 100% टैरिफ से दी छूट, भारतीय फार्मा सेक्टर को बड़ी राहत

    US ने भारत समेत 20 देशों की खास दवाओं को 100% टैरिफ से दी छूट, भारतीय फार्मा सेक्टर को बड़ी राहत


    नई दिल्ली : अमेरिका ने भारतीय फार्मा सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए भारत समेत 20 देशों से आयात होने वाली कुछ विशेष दवाओं और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले जरूरी घटकों पर 100 प्रतिशत एड वैलोरम टैरिफ से छूट दी है। शून्य टैरिफ का यह प्रावधान उन चुनिंदा फार्मास्युटिकल उत्पादों पर लागू होगा, जिनका इस्तेमाल दुर्लभ बीमारियों के इलाज, बांझपन के उपचार, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स और पशु स्वास्थ्य से जुड़े उपचारों में किया जाता है। संबंधित दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले जरूरी कच्चे माल और अन्य घटक भी इस छूट के दायरे में शामिल हैं।

    यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़े उत्पादों पर 100 प्रतिशत एड वैलोरम टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। यह शुल्क 29 सितंबर से लागू होने की बात कही गई है। हालांकि, विशेष श्रेणी की दवाओं को इस शुल्क से अलग रखा गया है। एड वैलोरम टैरिफ वह शुल्क होता है, जो किसी वस्तु की कीमत के एक निश्चित प्रतिशत के आधार पर लगाया जाता है। नई व्यवस्था के तहत तय श्रेणियों में आने वाली विशेष दवाओं और संबंधित सामग्री के लिए टैरिफ की दर शून्य रखी गई है।

    भारत के साथ जिन अन्य देशों को इस शून्य टैरिफ व्यवस्था का लाभ दिया गया है, उनमें अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं। यह व्यवस्था निर्धारित विशेष फार्मास्युटिकल उत्पादों और उनके संबंधित घटकों के लिए लागू होगी। इन उत्पादों में गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के साथ अन्य विशेष चिकित्सा उपचारों से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।

    शून्य टैरिफ की दर उन उत्पादों पर लागू होगी, जिनका इस्तेमाल गंभीर बीमारियों के इलाज, बांझपन के उपचार, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स में होता है। इसके अलावा पशु दवाओं में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। इन दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले संबंधित कच्चे माल और अन्य जरूरी घटकों को भी छूट दी गई है। अमेरिकी सरकार ने यह फैसला उन देशों से आने वाले उत्पादों के लिए किया है, जिनके साथ व्यापार समझौता है या निकट भविष्य में ऐसा समझौता होने की संभावना है।

    हालांकि, यह छूट भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी। इसका लाभ केवल निर्धारित विशेष श्रेणियों में आने वाली दवाओं और उनसे जुड़े जरूरी घटकों को मिलेगा। इस तरह 29 सितंबर से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और संबंधित उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने की तैयारी के बीच भारत समेत 20 देशों की विशेष दवाओं के लिए शुल्क में बड़ी राहत दी गई है।

  • गोल्डी बराड़ FBI की टॉप-10 मोस्ट वांटेड सूची में शामिल, गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम

    गोल्डी बराड़ FBI की टॉप-10 मोस्ट वांटेड सूची में शामिल, गिरफ्तारी में मदद करने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम

    नई दिल्ली ।अमेरिका की जांच एजेंसी ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपनी 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया है। उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वाले व्यक्ति को 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा की गई है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 9 करोड़ रुपये बताई गई है।

    गोल्डी बराड़ पर हत्या की साजिश, फिरौती के लिए कारोबार में दखल देने और नशीले पदार्थों की तस्करी समेत कई गंभीर आरोप हैं। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है और उत्तरी अमेरिका में इस आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियों को संभालने का आरोप उस पर है।

    गोल्डी बराड़ को 28 सितंबर को 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया गया। वह इस सूची में जगह पाने वाला 543वां भगोड़ा है। फिलहाल वह फरार है और अमेरिकी एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं।

    गोल्डी बराड़ के खिलाफ लॉस एंजिल्स की फेडरल कोर्ट में मामला दर्ज है। उस पर गैंग बनाकर साजिश रचने, फिरौती के लिए कारोबार में हस्तक्षेप करने और ड्रग्स की तस्करी जैसे आरोप लगाए गए हैं। मामले में अदालत ने पिछले साल 1 जुलाई को उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।

    अमेरिकी जांच एजेंसियों का आरोप है कि गोल्डी बराड़ लॉरेंस बिश्नोई गैंग के जरिए उत्तरी अमेरिका में आपराधिक नेटवर्क का संचालन करता है। इस नेटवर्क पर सुनियोजित तरीके से हत्याएं करने, गोलीबारी और लोगों को डराकर वसूली करने जैसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। हालांकि, इन आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

    जुलाई 2026 में अमेरिका में ‘ऑपरेशन हार्डबॉल’ के तहत भारत से जुड़े तीन आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई में 37 लोगों के खिलाफ आरोप सार्वजनिक किए गए थे। इनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आरोपी भी शामिल थे। कार्रवाई के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गोल्डी बराड़ समेत कुछ अन्य आरोपी अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं।

    अमेरिकी जांच एजेंसी के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर भारत के पंजाब से जुड़े एक प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेता की हत्या का आदेश देने का भी आरोप है। यह नेता हत्या के समय कनाडा में रह रहा था।

    अभियोग के अनुसार, 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक सिख मंदिर से बाहर निकलते समय दो हमलावरों ने उस नेता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले की जांच में अमेरिका, कनाडा और लॉस एंजिल्स की पुलिस एजेंसियों के बीच समन्वय की बात सामने आई है।

    गोल्डी बराड़ की तलाश के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसी ने आम लोगों से भी अपील की है कि अगर किसी व्यक्ति के पास उसके ठिकाने या गतिविधियों से जुड़ी कोई जानकारी है तो वह तुरंत अधिकारियों को उपलब्ध कराए। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखने की बात कही गई है।

    गोल्डी बराड़ की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर तक का इनाम घोषित किया गया है। इस कदम के बाद उसकी तलाश को लेकर अमेरिकी एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है।