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  • यमन के ताइज पर सऊदी का हवाई हमला…. 13 की मौत, 10 लाख लोगों के सामने भुखमरी का संकट

    यमन के ताइज पर सऊदी का हवाई हमला…. 13 की मौत, 10 लाख लोगों के सामने भुखमरी का संकट


    सना।
    यमन (Yemen) के ताइज शहर (Ties City) में गुरुवार को सऊदी अरब (Saudi Arabia) के हवाई हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई. हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है. वहीं, स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया है कि हूती विद्रोहियों की घेराबंदी के कारण ताइज शहर में भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. खाने-पीने की चीजों, पानी और रसोई गैस की भारी किल्लत के बीच शहर के करीब 10 लाख लोगों के सामने गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है।

    ताइज के गवर्नर नबील शमसान ने एक ब्रीफिंग में कहा, ‘शहर में भुखमरी की स्थिति बन चुकी है.’ उन्होंने बताया कि वह यह बयान मोर्चे से महज एक मील की दूरी पर दे रहे हैं। गवर्नर शमसान के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने शहर के बाहर स्थित पानी के आखिरी स्रोत पर भी कब्जा कर लिया है. इसके कारण ताइज को अब उसकी जरूरत के मुकाबले बेहद कम पानी मिल रहा है. शहर में रसोई गैस की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है. इसकी वजह से रेस्तरां बंद करने पड़े हैं और परिवार खाना पकाने के लिए लकड़ियां जलाने को मजबूर हैं. अस्पतालों में मरीजों के लिए ऑक्सीजन का भंडार भी लगभग खत्म हो चुका है।

    विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने बताया कि वह ताइज में मानवीय सहायता पर निर्भर छह लाख से अधिक लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है. इसके अलावा गेहूं के आटे का भंडार भी लगभग समाप्त हो गया है।


    अक्टूबर की शुरुआत से अब तक 271 लोगों की मौत

    गवर्नर नबील शमसान के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से 271 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 1,129 लोग घायल हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बचाव कार्य में लगे लोगों और एंबुलेंस को भी निशाना बनाया जा रहा है. शमसान ने कहा, ‘जिन लोगों को बचाया जा सकता है, उन पर भी गोलाबारी की जाती है या स्नाइपर एंबुलेंस को निशाना बनाते हैं. हमें एक आम नागरिक की कार को एंबुलेंस की तरह इस्तेमाल करना पड़ा, लेकिन उस पर भी हमला किया गया.’


    ह्यूमन राइट्स वॉच ने जताई युद्ध अपराध की आशंका

    मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने गुरुवार को कहा कि अक्टूबर की शुरुआत से जारी ताइज की घेराबंदी युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती है, क्योंकि युद्ध के दौरान नागरिकों को भूखा रखना युद्ध के तरीके के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच की यमन शोधकर्ता निकू जाफरनिया ने कहा कि हूती विद्रोही ताइज की घेराबंदी के जरिए नागरिकों के सामने पैदा हुए मानवीय संकट को उचित नहीं ठहरा सकते.


    हूती नेता ने घेराबंदी के आरोपों को किया खारिज

    दूसरी ओर, हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने ताइज की घेराबंदी की खबरों को खारिज किया है. उन्होंने इन आरोपों को ‘सऊदी अरब द्वारा गढ़े गए दावे’ बताया. हूती नियंत्रण वाले अल-मसीरा टीवी पर गुरुवार को प्रसारित संबोधन में उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री और मानवीय जरूरतों की आपूर्ति के लिए रास्ते खुले हैं. उनका दावा है कि हूती लड़ाके केवल उन हथियारों की आपूर्ति रोक रहे हैं, जो उनके मुताबिक सऊदी समर्थित मिलिशिया तक पहुंचाए जा रहे हैं.

    अगस्त से अब तक 1.24 लाख विस्थापित ताइज पहुंचे
    यमन के दूसरे हिस्सों में जारी संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग ताइज पहुंच रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के मुताबिक, अगस्त से अब तक करीब 1.24 लाख विस्थापित लोगों ने ताइज में शरण ली है. इससे शहर के पहले से सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है. यमन में 2014 में गृहयुद्ध शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत देश के उत्तरी हिस्से के बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को निर्वासन में जाना पड़ा।

    ताइज तभी से संघर्ष का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. शहर के मध्य हिस्से पर सरकारी बलों का कंट्रोल है, जबकि आसपास की सड़कों पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है।

  • हसीना के सत्ता से हटने से पहले ही यूनुस को कमान सौंपने की हो गई थी तैयारी! इस दावे से बांग्लादेश में नई बहस शुरू

    हसीना के सत्ता से हटने से पहले ही यूनुस को कमान सौंपने की हो गई थी तैयारी! इस दावे से बांग्लादेश में नई बहस शुरू


    नई दिल्ली। बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और मोहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभालने से जुड़े घटनाक्रम पर नया विवाद खड़ा हो गया है। यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव और समाचार एजेंसी AFP के पूर्व पत्रकार शफीकुल आलम ने दावा किया है कि हसीना के प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले ही छात्र नेताओं ने यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने के लिए उनसे संपर्क की कोशिश शुरू कर दी थी। इस पूरी प्रक्रिया में AFP की फैक्ट-चेक टीम के तत्कालीन संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि, इस दावे से यह साबित नहीं होता कि सरकार गिराने की पूरी योजना पहले से तैयार थी।

    शफीकुल आलम के इस बयान के बाद बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के पीछे की रणनीति और अंतरिम सरकार के नेतृत्व के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आलम के मुताबिक, शिशिर ने छात्र नेताओं की ओर से यूनुस से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत कराने में मदद की।

    कैसे हुई यूनुस और छात्र नेताओं के बीच बातचीत?
    शफीकुल आलम ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि अगस्त 2024 में जब हसीना विरोधी आंदोलन तेज हो रहा था, तब छात्र नेता ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति की तलाश में थे, जो उनकी बात मोहम्मद यूनुस तक पहुंचा सके। उस समय AFP की फैक्ट-चेक टीम के संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने यह जिम्मेदारी संभाली।

    आलम के अनुसार, शिशिर ढाका स्थित AFP कार्यालय में उनके पास ही बैठते थे और उन्होंने पूरी बातचीत गोपनीय तरीके से कराई। उन्होंने लिखा कि शिशिर ने छात्र नेताओं की ओर से सबसे पहले यूनुस से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत का रास्ता बनाया।

    आलम ने दावा किया कि उस समय शेख हसीना की सरकार कमजोर पड़ रही थी, लेकिन यह संपर्क बेहद जोखिम भरा था। यदि सरकार को इसकी जानकारी मिल जाती तो शिशिर और AFP की पूरी टीम को कथित तौर पर ‘आइनाघर’ पहुंचा दिया जाता।

    ‘आइनाघर’ बांग्लादेश में एक कथित गुप्त हिरासत केंद्र के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है। हसीना शासन के दौरान यहां राजनीतिक विरोधियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने, प्रताड़ित करने और उनकी हत्या किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।

    आलम ने यह भी कहा कि शिशिर ने सरकार की कथित कार्रवाई से जुड़े वीडियो सबूत जुटाने शुरू कर दिए थे। AFP ने अगस्त 2024 के घटनाक्रम के दौरान बताया था कि इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच उसका ढाका ब्यूरो उन चुनिंदा स्थानों में शामिल था, जहां से बाहरी दुनिया तक खबरें पहुंचाई जा सकती थीं।

    हसीना के देश छोड़ने से पहले शुरू हुई थी यूनुस की भूमिका?
    शफीकुल आलम के दावे से यह सवाल उठ रहा है कि क्या मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने की बातचीत शेख हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी।

    बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े जनआंदोलन में बदल गया। हिंसक प्रदर्शनों के बीच 5 अगस्त 2024 को हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा। वह भारत पहुंचीं।

    इसके अगले दिन, 6 अगस्त को छात्र आंदोलन के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस घोषणा में नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद जैसे छात्र नेता शामिल थे। बाद में ये दोनों यूनुस सरकार में सलाहकार बने।

    8 अगस्त 2024 को पेरिस से ढाका लौटने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की जिम्मेदारी संभाली। शफीकुल आलम के ताजा बयान के मुताबिक, यूनुस को नेतृत्व सौंपने के लिए संपर्क की प्रक्रिया हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। हालांकि, छात्र नेताओं की ओर से संभावित अंतरिम नेतृत्व पर बातचीत होना और पूरे सत्ता परिवर्तन की साजिश पहले से तैयार होना दो अलग-अलग बातें हैं।

    यूनुस का पुराना बयान भी फिर चर्चा में
    इस विवाद के बीच सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में मोहम्मद यूनुस की ओर से दिया गया बयान भी चर्चा में आ गया है। उस दौरान उन्होंने अपने विशेष सहायक महफूज आलम को पूरी क्रांति के पीछे का दिमाग बताया था।

    यूनुस ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन को अचानक हुआ घटनाक्रम मानने के बजाय व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया आंदोलन बताया था। उन्होंने कहा था कि इसकी नेतृत्व व्यवस्था इस तरह बनाई गई थी कि किसी एक नेता के पकड़े जाने पर भी आंदोलन जारी रह सके।

    यूनुस के उस बयान और शफीकुल आलम के ताजा दावे को जोड़कर अब आंदोलन की तैयारी और सत्ता परिवर्तन के बाद नेतृत्व तय करने की प्रक्रिया पर चर्चा हो रही है।

    हसीना की वापसी के बयान के बीच नया घटनाक्रम
    शफीकुल आलम का यह दावा ऐसे समय आया है, जब भारत में रह रहीं शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की बात दोहराई है। 19 अक्टूबर को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें गिरफ्तारी, प्रताड़ना या जान से मारे जाने का डर नहीं है।

    इसी बीच 28 अक्टूबर को ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के पूर्व फ्लाइट लेफ्टिनेंट के.एम. तहसिफ सौरी का शव तुराग नदी से बरामद किया गया। 28 वर्षीय तहसिफ का नाम उस वीडियो से जोड़ा गया था, जिसमें कथित तौर पर 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को देश छोड़ते हुए दिखाया गया था।

    तहसिफ को अगस्त 2024 में वायुसेना से सेवा मुक्त कर दिया गया था। उनके परिवार ने हत्या की आशंका जताई है, जबकि पुलिस के मुताबिक मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल उनकी मौत और हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

    यूनुस का कार्यकाल खत्म, अब तारिक रहमान की सरकार
    बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने वाले मोहम्मद यूनुस ने फरवरी 2026 में पद छोड़ दिया। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत मिला और उसके नेता तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

    यूनुस के कार्यकाल में हसीना विरोधी आंदोलन से जुड़े कई छात्र नेताओं को अंतरिम सरकार में जगह मिली थी। बाद में इनमें से कुछ नेताओं ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनाई, जिसने जमात गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा।

    अब शफीकुल आलम के बयान ने अगस्त 2024 के घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। हालांकि, उनके दावे को सत्ता परिवर्तन की पूर्व नियोजित साजिश का प्रमाण मानने के लिए स्वतंत्र पुष्टि और अतिरिक्त साक्ष्यों की जरूरत होगी।

  • इजरायल चुनाव में नेतन्याहू को झटका, 53 सीटों पर सिमटा गठबंधन, बहुमत के लिए 8 सीटें कम

    इजरायल चुनाव में नेतन्याहू को झटका, 53 सीटों पर सिमटा गठबंधन, बहुमत के लिए 8 सीटें कम


    नई दिल्ली। इजरायल के संसदीय चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन सबसे आगे रहने के बावजूद बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सका है। सभी वोटों की गिनती के बाद नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि विपक्षी गठबंधन के खाते में 48 और अरब पार्टियों को 19 सीटें मिली हैं। 120 सदस्यीय संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है। ऐसे में किसी भी गठबंधन के बहुमत तक नहीं पहुंचने से नई सरकार के गठन को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

    लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी सरकार बनाना चुनौती
    चुनाव में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, गठबंधन के पास बहुमत से आठ सीटें कम हैं। इजरायल की केंद्रीय चुनाव समिति ने विशेष मतपत्रों की गिनती भी पूरी कर ली है। इन्हें डबल-एनवेलप वोट कहा जाता है। इसमें सैनिकों, कैदियों, विदेशों में तैनात राजनयिकों और अस्पतालों में भर्ती उन मतदाताओं के वोट शामिल होते हैं, जो अपने निर्धारित मतदान केंद्रों पर वोट नहीं डाल सके थे।

    अन्य दलों में गादी आइजनकोट की याशार पार्टी को 21 सीटें मिली हैं। बी’याचाद ने 12 और जॉइंट लिस्ट ने 11 सीटें हासिल की हैं। डेमोक्रेट्स और राअम को आठ-आठ सीटें मिली हैं। यूनाइटेड तोराह जूडाइज्म, इजरायल बेइतेनु और ओत्जमा येहुदित के खाते में सात-सात सीटें आई हैं। वहीं, शास और रिलिजियस जियोनिज्म ने छह-छह सीटें जीती हैं।

    केंद्रीय चुनाव समिति के मुताबिक, विशेष मतपत्रों की गिनती पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नतीजे बाद में जारी किए जाएंगे। मतगणना के बाद भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की सीटों के वितरण में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    चुनाव में विदेशी दखल और वोट खरीदने के आरोप
    चुनाव नतीजों के बाद इजरायल में विदेशी हस्तक्षेप और अरब मतदाताओं की भागीदारी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने आरोप लगाया है कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कथित वोट खरीदने और अवैध तरीके से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने का फायदा मिला। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया को ‘चोरी’ तक करार दिया है।

    इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट उन आशंकाओं की जांच कर रही है, जिनमें कतर और तुर्की से कथित तौर पर जुड़े विदेशी फंड के जरिए अरब मतदाताओं की भागीदारी को प्रभावित करने की बात कही गई है। वहीं, इजरायल पुलिस की लाहव 433 यूनिट चुनाव में कथित रिश्वतखोरी के मामलों की अलग से जांच कर रही है।

    आरोप साबित नहीं, कतर ने भी किया इनकार
    विदेशी हस्तक्षेप और चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। केंद्रीय चुनाव समिति के अध्यक्ष नोआम सोलबर्ग ने शिन बेट से संभावित विदेशी हस्तक्षेप की जांच करने को कहा है। हालांकि, चुनाव समिति के कार्यवाहक महानिदेशक ने कहा है कि चुनाव की निष्पक्षता को व्यवस्थित तरीके से प्रभावित किए जाने के आरोपों का कोई आधार नहीं है। कतर ने भी इजरायली चुनाव में किसी तरह के हस्तक्षेप से इनकार किया है।

    इस विवाद के बीच अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। इन दलों ने कुल 19 सीटें हासिल की हैं और सरकार गठन की प्रक्रिया में उनका समर्थन निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, अरब पार्टियों के सहयोग से सरकार बनाने का विकल्प कई यहूदी नेतृत्व वाली पार्टियों के लिए राजनीतिक रूप से विवादास्पद है। विपक्षी नेताओं ने भी चेतावनी दी है कि बिना पुष्टि वाले आरोपों के आधार पर चुनाव नतीजों या अरब मतदाताओं की भागीदारी पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।

    अब कैसे बनेगी इजरायल में सरकार?
    चुनाव के बाद नेतन्याहू के गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बहुमत के लिए जरूरी आठ सीटें जुटाने की है। विपक्षी गठबंधन के पास भी केवल 48 सीटें हैं। ऐसे में उसे सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों के समर्थन या सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।

    अंतिम नतीजों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किए जाने के बाद इजरायल के राष्ट्रपति सरकार गठन की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इस दौरान किसी सांसद को गठबंधन तैयार कर सरकार बनाने का प्रयास करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यदि कोई भी पक्ष 61 सांसदों का समर्थन जुटाने में सफल नहीं होता है, तो देश में एक बार फिर चुनाव कराने की नौबत आ सकती है।

  • Spain में भीषण रेल हादसा…. दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत में 64 लोगों की मौत…. 80 घायल

    Spain में भीषण रेल हादसा…. दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत में 64 लोगों की मौत…. 80 घायल


    मेड्रिड।
    स्पेन (Spain) के तोलेदो प्रांत (Toledo Province) में बुधवार को दो ट्रेन के बीच टक्कर हो जाने से कम से कम 64 लोगों की मौत हो गयी। इस घटना में कम से कम 80 लोग घायल हुए हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि बचावकर्मी मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश जारी रखे हुए हैं। कैस्टिला ला मांचा (Castilla-La Mancha) क्षेत्र की प्रवक्ता एस्थर पाडिला ने सरकारी प्रसारक बताया कि एक ही दिशा में जा रही दो तेज रफ्तार ट्रेन हादसे का शिकार हुईं, एक ट्रेन दूसरी ट्रेन के पिछले हिस्से से टकरा गई, जिससे उसके दो डिब्बे पटरी से उतर गये। उन्होंने कहा कि हादसे के कारण का पता लगाया जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि राजधानी मैड्रिड (Capital Madrid) से दक्षिणी-पश्चिमी शहर सेविले जा रही दोनों ट्रेन में सैकड़ों यात्री सवार थे।

    स्पेन के रेल प्रणाली संचालक ‘एडीआईएफ’ ने बताया कि बुधवार की सुबह तोलेदो प्रांत में यह हादसा हुआ जिसके बाद मैड्रिड, स्यूदाद रियल और अंदालूसिया के बीच रेल सेवा रोक दी गई। स्पेन की स्वास्थ्य मंत्री मोनिका गार्सिया ने बताया कि आपातकालीन कर्मी सबसे अधिक क्षतिग्रस्त दो रेल डिब्बों से जीवित बचे लोगों और शवों को निकालने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि घायलों को क्षेत्र के विभिन्न अस्पतालों में भेजा जा रहा है।

    इस दुर्घटना में स्पेन की सरकारी कंपनी ‘रेनफे’ और निजी रेल कंपनी ‘इर्यो’ की ट्रेनें शामिल थीं। स्पेन की मीडिया की खबरों के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि ‘रेनफे’ की ट्रेन ने ‘इर्यो’ की ट्रेन को टक्कर मारी। पाडिला ने बताया कि ‘रेनफे’ की ट्रेन में 397 यात्री और ‘इर्यो’ की ट्रेन में 147 यात्री सवार थे। आपातकालीन सेवाओं, दमकलकर्मियों और पुलिस की मदद के लिए सेना की आपातकालीन ब्रिगेड को तैनात किया गया। एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर सेवा घटनास्थल से घायलों को ले जाने में जुटे रहे, जबकि सुरक्षित बचे यात्रियों को बसों में बैठाकर वहां से ले जाया गया।

    उर्दा के मेयर मैनुअल गैलन ने बताया कि कई यात्री घायल हुए हैं। सिविल प्रोटेक्शन अधिकारियों ने उनके टाउन हॉल से संपर्क कर यात्रियों के इलाज के लिए एक स्पोर्ट्स पवेलियन तैयार करने को कहा है। स्थानीय प्रशासन घायलों को प्राथमिक उपचार देने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल भेजने की तैयारी में जुटा है। वहीं, पास के एक और गांव लॉस येबेनेस के मेयर जेसुस पेरेज ने भी TVE से बात करते हुए कहा कि हादसा बहुत ही गंभीर है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य जारी है।

    यह हादसा स्पेन के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के लिए झटका माना जा रहा है। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में दक्षिणी स्पेन में एक बड़ा हादसा हुआ था। उस समय एक ट्रेन पटरी से उतरी और सामने से आ रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई, जिसमें 46 लोगों की मौत हो गई थी। वह हादसा 2013 के हादसे के बाद स्पेन में सबसे जानलेवा था। 2013 में एक ट्रेन हादसे में 80 लोगों की जान गई थी।

  • चीन के 26 वर्षीय युवक ने बनाया उड़ने वाला स्केटबोर्ड, 10 इलेक्ट्रिक मोटरों की मदद से यांग्त्जी नदी के ऊपर भरी उड़ान

    चीन के 26 वर्षीय युवक ने बनाया उड़ने वाला स्केटबोर्ड, 10 इलेक्ट्रिक मोटरों की मदद से यांग्त्जी नदी के ऊपर भरी उड़ान


    नई दिल्ली ।चीन के 26 वर्षीय युवक सोंग शिंग्यू ने अपनी तकनीकी रचनात्मकता और लगातार प्रयोगों के दम पर उड़ने वाला स्केटबोर्ड तैयार किया है। इस बोर्ड की मदद से उन्होंने पहाड़ों के ऊपर उड़ान भरी और यांग्त्जी नदी को पार किया। उनके इस कारनामे का वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच इसकी काफी चर्चा होने लगी। सोंग ने यह उपकरण अपने हाथों से तैयार किया है। उनके इस आविष्कार की खास बात यह है कि इसमें 10 इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई हैं, जिनकी सहायता से बोर्ड हवा में उड़ान भरता है।

    हुबेई प्रांत के रहने वाले सोंग शिंग्यू सोशल मीडिया पर अमेजिंग आयू के नाम से पहचाने जाते हैं। उन्हें बचपन से ही नई चीजें बनाने और तकनीकी प्रयोग करने में दिलचस्पी रही है। वह अपने बनाए उपकरणों और उनसे जुड़े प्रयोगों के वीडियो साझा करते रहते हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर 30 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उड़ने वाला बोर्ड बनाने का विचार उन्हें स्पाइडर-मैन फिल्म में दिखाई देने वाले ग्रीन गोब्लिन के उड़ने वाले उपकरण से मिला था। इसी कल्पना को वास्तविक रूप देने के लिए उन्होंने काम शुरू किया।

    सोंग ने इस परियोजना पर करीब दो महीने तक मेहनत की। हालांकि, उनका पहला प्रयास सफल नहीं रहा। शुरुआती डिजाइन में उन्होंने पांच जेट इंजन का इस्तेमाल किया था। जब उन्होंने सभी इंजनों को एक साथ चलाकर परीक्षण किया, तो उसमें आग लगने जैसी समस्या सामने आई। इंजनों से निकलने वाली गर्म हवा जमीन से टकराकर वापस इंजन की ओर लौट रही थी। इससे उपकरण के संचालन में परेशानी पैदा हो रही थी। इस समस्या के बाद उन्होंने पुराने डिजाइन को छोड़कर बिजली से चलने वाले बोर्ड पर काम करना शुरू किया।

    नए डिजाइन में उन्होंने 10 शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर लगाईं। लगातार परीक्षण और सुधार के बाद बोर्ड उड़ान भरने के लिए तैयार हुआ। अक्टूबर 2026 में सोंग ने इससे जुड़ा वीडियो साझा किया, जिसमें वह पहाड़ों के बीच और यांग्त्जी नदी के ऊपर उड़ते दिखाई दिए। हालांकि, इस उपकरण को तैयार करने के साथ हवा में इसका संतुलन बनाए रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती थी। उड़ान के दौरान शरीर का थोड़ा-सा झुकाव भी बोर्ड का संतुलन बिगाड़ सकता था।

    इस समस्या से निपटने के लिए सोंग ने दो स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद ली। फोन बोर्ड के झुकाव और उनकी स्थिति पर नजर रखने में सहायता करते हैं। इसके बाद एआई उन्हें ईयरफोन के माध्यम से निर्देश देता है कि संतुलन बनाए रखने के लिए शरीर किस दिशा में झुकाना है और घुटनों की स्थिति कैसी रखनी है। इस तकनीक की मदद से उन्होंने उड़ान के दौरान अपने शरीर और बोर्ड के बीच संतुलन साधने का तरीका विकसित किया।

    सोंग को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने पहले जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर उड़ने का अभ्यास किया और फिर धीरे-धीरे अपने प्रयोगों का दायरा बढ़ाया। अक्टूबर में हुबेई प्रांत में उन्होंने अपने बोर्ड से उड़ान भरी। वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इसकी वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए इसे एआई से बनाया गया बताया। इसके बाद सोंग ने पत्रकारों के सामने भी उड़ान का प्रदर्शन किया, ताकि लोग उनके आविष्कार को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें।

    सोंग का मानना है कि नई चीजें बनाने के लिए केवल महंगे उपकरण ही जरूरी नहीं होते। सीखने की इच्छा, तकनीकी समझ और लगातार प्रयास से भी नए प्रयोग किए जा सकते हैं। हालांकि, इस तरह के उड़ने वाले उपकरणों का इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए पर्याप्त तकनीकी जानकारी, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक अनुमति के बिना ऐसे उपकरणों को बनाना या उड़ाना खतरनाक साबित हो सकता है।

  • यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट में मजाक में भेजे मैसेज से मचा हड़कंप, लिखा- ‘प्लेन हाईजैक कर क्रैश कर दूंगा’

    यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट में मजाक में भेजे मैसेज से मचा हड़कंप, लिखा- ‘प्लेन हाईजैक कर क्रैश कर दूंगा’


    नई दिल्ली। अमेरिका में एक यात्री के कथित मजाक ने विमान में सुरक्षा को लेकर हड़कंप मचा दिया। लास वेगास से न्यू जर्सी के नेवार्क जा रही यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट में एक यात्री ने टेक्स्ट मैसेज में विमान को हाईजैक करने और क्रैश करने की बात लिख दी। मैसेज पर संदेह होने के बाद फ्लाइट अटेंडेंट ने इसकी सूचना पायलट को दी। इसके बाद विमान को वापस लास वेगास लौटाने का फैसला किया गया। वहां पहुंचने पर 25 वर्षीय यात्री डांटे मिल्न को हिरासत में ले लिया गया। आरोपी का कहना है कि वह अपने सहकर्मी के साथ मजाक कर रहा था और उसका किसी को नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं था।

    फ्लाइट अटेंडेंट ने देखा हाईजैक की धमकी वाला मैसेज
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान में सवार होने के दौरान एक फ्लाइट अटेंडेंट ने दो यात्रियों को टेक्स्ट मैसेज के जरिए बातचीत करते देखा था। उनकी बातचीत में अन्य यात्रियों और फ्लाइट अटेंडेंट को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी शामिल थीं।

    बाद में फ्लाइट अटेंडेंट की नजर एक ऐसे मैसेज पर पड़ी, जिसकी शुरुआत ‘I’m gonna hijack’ यानी ‘मैं हाईजैक करने जा रहा हूं’ शब्दों से हुई थी। मैसेज में विमान को हाईजैक करने और आगे की सीटों की कतार से टकराकर उसे क्रैश करने जैसी बात लिखी गई थी। फ्लाइट अटेंडेंट ने तुरंत इसकी जानकारी लीड फ्लाइट अटेंडेंट को दी। बाद में मैसेज भेजने वाले की पहचान डांटे मिल्न के रूप में हुई।

    10 हजार फीट की ऊंचाई पार करने के बाद पायलट को मिली सूचना
    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, विमान के करीब 10,000 फीट यानी लगभग 3,050 मीटर की ऊंचाई पार करने के बाद कैप्टन को धमकी वाले मैसेज की जानकारी दी गई। इसके बाद पायलट ने विमान को वापस लास वेगास ले जाने का फैसला किया।

    एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रिकॉर्ड किए गए संदेश में पायलट को यह बताते सुना गया कि फ्लाइट अटेंडेंट ने हाईजैक की धमकी वाले मैसेज की सूचना दी थी। सुरक्षा संबंधी आशंका को देखते हुए विमान को वापस लौटाया गया। लास वेगास पहुंचने के बाद पुलिस ने मिल्न को हिरासत में ले लिया।

    आरोपी बोला- सहकर्मी के साथ कर रहा था मजाक
    पुलिस के मुताबिक, डांटे मिल्न न्यू जर्सी के वुडरिज का रहने वाला है। वह काम से जुड़े तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लास वेगास आया था और अंडरवॉटर वेल्डिंग का काम करता है।

    मिल्न ने अधिकारियों को बताया कि उसने एयरपोर्ट के एक बार में बीयर और शराब पी थी। विमान में बैठने के बाद वह सोने वाला था। उसकी नींद खुली तो उसे पता चला कि फ्लाइट वापस लास वेगास लौट रही है।

    उसने दूसरे यात्री के साथ टेक्स्ट मैसेज पर बातचीत करने की बात स्वीकार की। पुलिस के अनुसार, दोनों की मुलाकात प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हुई थी। हाईजैक वाले मैसेज के बारे में पूछे जाने पर मिल्न ने कथित तौर पर कहा कि बातचीत में शब्दों का इस्तेमाल सही तरीके से नहीं हुआ और यह सहकर्मियों के बीच मजाक का हिस्सा था। उसने विमान को हाईजैक करने, क्रैश करने या किसी को नुकसान पहुंचाने का इरादा होने से इनकार किया।

    धमकी देने या गलत सूचना फैलाने का आरोप
    मिल्न पर आतंकवादी घटना से जुड़ी धमकी देने या गलत सूचना देने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, आरोप लगना अपराध साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान तथ्यों की जांच होगी। आरोपी के वकील जेम्स गैलो ने बताया कि वह मामले की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिल्न अदालत में खुद को दोषी नहीं मानेगा।

    पहले भी मजाक में दी गई धमकियों से लौटे विमान
    विमान में बम या हाईजैक से जुड़ी धमकी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से लेती हैं। ऐसे संदेशों के कारण यात्रियों को हिरासत में लेने और उड़ानों का मार्ग बदलने जैसी कार्रवाई पहले भी हो चुकी है।

    2022, शिकागो: एक यात्री ने अपना बैग चेक कराते समय उसमें बम होने की बात कही थी।

    2017, तुर्किश एयरलाइंस: एक विमान को उस समय वापस लौटाना पड़ा था, जब किसी ने अपने वाई-फाई हॉटस्पॉट का नाम ‘बम ऑन बोर्ड’ रख दिया था।

    पिछले साल, Allegiant Air: एक उड़ान को इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी। बताया गया कि एक यात्री ने दूसरे व्यक्ति से उसके लैपटॉप में बम होने की बात कही थी।

  • पूर्व मिस स्विट्जरलैंड ने डोनाल्ड ट्रंप पर लगाया रेप का आरोप… अमेरिका में मची हलचल

    पूर्व मिस स्विट्जरलैंड ने डोनाल्ड ट्रंप पर लगाया रेप का आरोप… अमेरिका में मची हलचल


    वाशिंगटन।
    पूर्व मिस स्विट्जरलैंड (Former Miss Switzerland) बीट्रिस क्यूल (Beatrice Kühl) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) पर 1993 में न्यूयॉर्क के होटल में रेप करने का आरोप लगाया है। क्यूल का दावा है कि घटना के दौरान उनकी ड्रेस फट गई थी और उनके शरीर पर चोटें आई थीं। अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका समिति के डेमोक्रेटिक सदस्यों की नई रिपोर्ट में उनके आरोपों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में ट्रंप और यौन अपराधों के दोषी जेफ्री एपस्टीन के कथित संबंधों की भी जांच की गई है। व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट को राष्ट्रपति को निशाना बनाने की राजनीतिक कोशिश बताया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 1993 में क्यूल 24 साल की थीं और मॉडलिंग के साथ फाइनेंसियल सर्विस के सेक्टर में काम करती थीं। जिल हर्थ ने उन्हें अटलांटिक सिटी और न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाले डोनाल्ड जे ट्रंप अमेरिकन ड्रीम पेजेंट में शामिल होने के लिए बुलाया था। इस प्रतियोगिता में 16 से 22 साल की युवतियां हिस्सा लेती थीं। क्यूल के मुताबिक, न्यूयॉर्क के प्लाजा होटल में आयोजित प्रेस लंच के दौरान उनकी मुलाकात ट्रंप से हुई। उस समय यह होटल ट्रंप के मालिकाना हक में था। आरोप है कि ट्रंप ने उन्हें वीजा दिलाने और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में दाखिला पाने में मदद करने का भरोसा दिया। इसके बाद एपस्टीन ने भी उनसे संपर्क किया और इसी तरह की मदद का प्रस्ताव दिया। उसने ट्रंप की फ्लोरिडा स्थित मार-ए-लागो संपत्ति में आयोजित होने वाली पार्टी में आने का न्योता भी दिया।


    ‘शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान’

    रिपोर्ट में क्यूल के हवाले से बताया गया है कि बाद में ट्रंप के एक प्रतिनिधि ने उन्हें राष्ट्रपति से मिलने के लिए होटल के ऊपर बने एक कमरे में चलने को कहा। करियर और पढ़ाई में मदद मिलने की उम्मीद में वह उसके साथ कमरे में चली गईं। क्यूल का आरोप है कि कमरे में ट्रंप ने पीछे से उन्हें पकड़ लिया और रेप किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित घटना में उनकी ड्रेस फट गई और शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान पड़ गए। उन्हें खून भी निकलने लगा था। क्यूल ने इस घटना को बेहद क्रूर बताया। आरोप है कि इसके बाद ट्रंप ने वीजा और यूनिवर्सिटी में दाखिले में मदद का भरोसा दोहराया और उन्हें चुप रहने के लिए कहा।


    ‘ट्रंप ने क्यूल से दोबारा किया था संपर्क’

    रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे कहा था, ‘शो जारी रहना चाहिए।’ क्यूल ने डर और सदमे की हालत में प्रतियोगिता पूरी की और फिर स्विट्जरलैंड लौट गईं। बाद में उन्होंने ट्रंप की ओर से आयोजित हवाई की एक अन्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। कुछ महीने बाद ट्रंप ने स्विट्जरलैंड में उनसे दोबारा संपर्क किया, लेकिन क्यूल ने मदद का प्रस्ताव ठुकरा दिया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता लॉरेन बिस ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक सांसद राष्ट्रपति ट्रंप की उपलब्धियों से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। ट्रंप ने एपस्टीन को अपने मार-ए-लागो क्लब से निकाल दिया था और एपस्टीन से जुड़े मामलों में राष्ट्रपति को पूरी तरह पाक-साफ बताया।

  • इजरायल चुनाव के रुझानों में फंसा बहुमत का पेंच, नेतन्याहू गठबंधन को सरकार के लिए 2 सीटों की जरूरत

    इजरायल चुनाव के रुझानों में फंसा बहुमत का पेंच, नेतन्याहू गठबंधन को सरकार के लिए 2 सीटों की जरूरत


    नई दिल्ली। इजरायल के राष्ट्रीय चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता पर पकड़ को चुनौती मिलती दिख रही है। मंगलवार को मतदान खत्म होने के बाद आए एग्जिट पोल में पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को मामूली बढ़त दिखाई गई है। हालांकि, दोनों खेमे बहुमत के जरूरी आंकड़े से दूर हैं। इजरायल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत है। ऐसे में छोटे दलों का समर्थन और गठबंधन की बातचीत अगली सरकार का फैसला कर सकती है।

    एग्जिट पोल में दोनों गठबंधन बहुमत से दूर
    इजरायल के चुनाव में नेतन्याहू के लिकुड गठबंधन और विपक्षी खेमे के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। विभिन्न टीवी चैनलों के एग्जिट पोल में नेतन्याहू के समर्थक गठबंधन को करीब 50 सीटें, जबकि आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 52 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया। अरब दलों को मिलाकर करीब 18 सीटें मिलने का अनुमान है।

    ये आंकड़े एग्जिट पोल के अनुमान हैं, आधिकारिक अंतिम नतीजे नहीं। मतगणना और विशेष श्रेणी के मतों की गिनती के बाद सीटों का वितरण बदल सकता है। फिलहाल किसी भी मुख्य गठबंधन के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें नहीं हैं।

    लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन सरकार बनाना आसान नहीं
    प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, गादी आइजनकोट की याशर पार्टी विपक्ष के प्रमुख दलों में शामिल है। पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट भी नेतन्याहू के सामने विपक्षी खेमे के प्रमुख चेहरों में हैं।

    हालांकि, इजरायल की संसदीय व्यवस्था में सबसे बड़ी पार्टी बनना अपने आप सरकार बनाने की गारंटी नहीं है। किसी भी नेता को संसद में बहुमत का समर्थन जुटाना होगा। यदि छोटे दलों के साथ समझौता नहीं हो पाया, तो सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।

    77.7 प्रतिशत मतदान, 25 साल में सबसे ज्यादा
    इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार मतदान 77.7 प्रतिशत रहा। यह 1999 के बाद मतदान समाप्त होने के समय दर्ज सबसे ऊंचे आंकड़ों में से एक है और 2022 के चुनाव की तुलना में करीब सात प्रतिशत अंक अधिक है।

    7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा ईरान से जुड़े संघर्षों के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव था। इस वजह से देश की सुरक्षा, सैन्य रणनीति और नेतन्याहू के नेतृत्व को लेकर मतदाताओं की राय चुनाव के केंद्र में रही।

    अरब दलों के समर्थन पर नेतन्याहू का विरोध
    नेतन्याहू ने अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने की संभावना का विरोध किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने विपक्ष पर अरब पार्टियों के सहारे सरकार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और इजरायल में एकजुट जायोनी बहुमत की वकालत की।

    दूसरी ओर, अरब दलों को मिलने वाली संभावित सीटें सरकार गठन में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, विपक्षी खेमे के लिए भी इन दलों का समर्थन हासिल करना आसान नहीं है। इस मुद्दे पर अलग-अलग दलों के रुख से गठबंधन बनाने की प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

    अंतिम नतीजों के बाद शुरू होगी सरकार बनाने की कवायद
    मतदान के बाद सामने आए एग्जिट पोल किसी स्पष्ट विजेता की तस्वीर पेश नहीं करते। अंतिम मतगणना के बाद भी यदि कोई गठबंधन 61 सीटों तक नहीं पहुंचता है, तो राजनीतिक दलों को समर्थन जुटाने और साझा सरकार बनाने के लिए बातचीत करनी होगी।

    इस चुनाव का नतीजा केवल सबसे बड़ी पार्टी तय करने तक सीमित नहीं है। असली चुनौती संसद में बहुमत का समर्थन हासिल करना है। इसलिए नेतन्याहू और आइजनकोट, दोनों के लिए आने वाले दिन निर्णायक होंगे।

  • इजरायल चुनाव में नेतन्याहू और गादी आइजनकोट के बीच मुकाबला, बहुमत के लिए 61 सीटों का आंकड़ा अहम

    इजरायल चुनाव में नेतन्याहू और गादी आइजनकोट के बीच मुकाबला, बहुमत के लिए 61 सीटों का आंकड़ा अहम

    नई दिल्ली । इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की चुनौती है। चुनाव से पहले सामने आए ओपिनियन पोल में दोनों पक्षों के बीच कड़े मुकाबले के संकेत मिले हैं। कुछ सर्वेक्षणों में आइजनकोट की यशार पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनने की स्थिति में दिखाया गया है, लेकिन किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान नहीं है। ऐसे में चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए छोटे दलों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।

    इजरायल की संसद में 120 सीटें, बहुमत के लिए 61 जरूरी

    इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। देश की चुनाव व्यवस्था में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करते, बल्कि राजनीतिक दलों को वोट देते हैं। पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात के आधार पर संसद में सीटें आवंटित होती हैं।

    नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उसके सहयोगी दलों का मुकाबला विपक्षी खेमे से है। विपक्ष में गादी आइजनकोट की यशार पार्टी के साथ नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड के नेतृत्व वाला टुगेदर गठबंधन तथा अन्य दल भी शामिल हैं। चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए इन दलों के बीच समर्थन जुटाने और गठबंधन तैयार करने की प्रक्रिया अहम होगी।

    ओपिनियन पोल में क्या संकेत मिले?

    चुनाव से पहले जारी सर्वेक्षणों में अलग-अलग दलों और गठबंधनों की स्थिति को लेकर अंतर दिखाई दिया है। 23 अक्टूबर तक के एक सर्वे औसत में नेतन्याहू के गठबंधन को लगभग 52 सीटें और उनके विरोधी जियोनिस्ट दलों को करीब 50 सीटें मिलने का अनुमान था। दूसरी ओर, कुछ अन्य सर्वेक्षणों में आइजनकोट की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनने की स्थिति में दिखाया गया।

    हालांकि, किसी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलना और उसके गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत मिलना अलग-अलग बातें हैं। चुनाव के बाद छोटे दलों का समर्थन और राजनीतिक गठबंधन की बातचीत निर्णायक हो सकती है। इसलिए केवल ओपिनियन पोल के आधार पर नेतन्याहू की विदाई या आइजनकोट के प्रधानमंत्री बनने को तय नहीं माना जा सकता।

    चुनाव के चार प्रमुख मुद्दे

    पहला मुद्दा 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से जुड़ी सुरक्षा चूक है। उस हमले के बाद इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया एजेंसियों की तैयारियों पर सवाल उठे थे। विपक्षी नेताओं ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है। इस चुनाव में मतदाताओं के लिए यह अहम सवाल है कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए किस तरह की सुरक्षा नीति अपनाई जाएगी।

    दूसरा बड़ा मुद्दा अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय के लोगों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट है। इजरायल में अधिकांश यहूदी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है, लेकिन धार्मिक अध्ययन करने वाले हरेदी समुदाय के कई लोगों को इससे छूट मिलती रही है। इस व्यवस्था को लेकर देश में विवाद है। आइजनकोट सहित विपक्ष के कई नेता सैन्य सेवा की जिम्मेदारी अधिक व्यापक रूप से लागू करने के पक्ष में हैं, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन को हरेदी दलों का समर्थन मिलता रहा है।

    तीसरा मुद्दा सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों और न्यायपालिका में सुधार का है। नेतन्याहू सरकार के न्यायिक बदलावों के प्रस्तावों के विरोध में देश में बड़े प्रदर्शन हुए थे। विरोधियों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई, जबकि सरकार के समर्थकों ने बदलावों को सुधार की जरूरत से जोड़ा।

    चौथा प्रमुख विषय युद्ध, राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों का भविष्य है। मतदाताओं के सामने सुरक्षा सुनिश्चित करने, लंबे संघर्ष की कीमत और भविष्य की सैन्य रणनीति से जुड़े सवाल हैं। नेतन्याहू ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, जबकि विपक्ष ने सरकार के फैसलों और युद्ध प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।

    नेतन्याहू और आइजनकोट की सैन्य पृष्ठभूमि

    बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायली सेना की विशेष इकाई सायरेट मटकल में सेवा दी थी। उनके बड़े भाई योनातन नेतन्याहू की 1976 में युगांडा के एंटेबे में बंधकों को छुड़ाने के अभियान के दौरान मौत हो गई थी।

    गादी आइजनकोट ने 1978 में गोलानी ब्रिगेड में सैनिक के रूप में अपना सैन्य करियर शुरू किया। करीब चार दशक की सेवा के बाद वह 2015 में इजरायली सेना के प्रमुख बने और 2019 तक इस पद पर रहे। दिसंबर 2023 में गाजा में युद्ध के दौरान उनके बेटे गैल की मौत हो गई थी। अगले दिन उनके भतीजे माओर कोहेन आइजनकोट भी दक्षिणी गाजा में लड़ाई के दौरान मारे गए थे।

    चुनाव के बाद सरकार बनाने की चुनौती

    मतदान के बाद तस्वीर इस बात से स्पष्ट होगी कि कौन-से दल कितनी सीटें हासिल करते हैं और कौन बहुमत के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाता है। यदि कोई गठबंधन 61 सीटों का समर्थन हासिल नहीं कर पाता, तो सरकार गठन की प्रक्रिया कठिन हो सकती है। छोटे दलों और अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है, हालांकि अलग-अलग दलों के बीच राजनीतिक मतभेद गठबंधन की राह में बाधा बन सकते हैं।

    इसलिए इजरायल के चुनाव का परिणाम केवल सबसे बड़ी पार्टी तय नहीं करेगा। सरकार किसकी बनेगी, यह संसद में बहुमत जुटाने और चुनाव के बाद होने वाली राजनीतिक बातचीत पर निर्भर करेगा।

  • प्रधानमंत्री मोदी और लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की मुलाकात, भारत-यूरोप व्यापारिक सहयोग पर बढ़ा जोर

    प्रधानमंत्री मोदी और लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की मुलाकात, भारत-यूरोप व्यापारिक सहयोग पर बढ़ा जोर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टाइन के हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस और उनकी पत्नी हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी से मुलाकात की। इस दौरान भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई। प्रिंस एलोइस भारत की राजकीय यात्रा पर आए हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी साझेदारी को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के बीच यह बैठक हुई है। खास तौर पर भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते से मिलने वाले अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी प्रिंस एलोइस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और लिकटेंस्टाइन के संबंधों के साथ-साथ ईएफटीए के साथ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते के तहत उभरने वाले अवसरों पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि इस समझौते से मिलने वाले अवसरों के कारण दोनों देशों की साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रिंस की बैठक से आपसी सहयोग को और गति मिलेगी।

    प्रिंस एलोइस का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। स्वागत समारोह के बाद प्रिंस ने भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा को सम्मान की बात बताया। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए आभार जताया।

    प्रिंस एलोइस ने कहा कि भारत जैसे देश की पहली राजकीय यात्रा उनके लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह भारत के साथ अपने संबंधों को लिकटेंस्टाइन की ओर से दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा स्पष्ट हुई।

    प्रिंस की यात्रा के कार्यक्रम में भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं। मंगलवार को उनकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात प्रस्तावित है। इन बैठकों में आर्थिक संबंधों और सहयोग के संभावित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    इसके बाद प्रिंस एलोइस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। उनके सम्मान में आधिकारिक भोज का आयोजन भी किया गया है। यह कार्यक्रम भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच राजनयिक संपर्कों को आगे बढ़ाने के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है।

    प्रिंस एलोइस सोमवार को गुजरात के वडोदरा से नई दिल्ली पहुंचे थे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद उनकी राजकीय यात्रा से जुड़े औपचारिक कार्यक्रम शुरू हुए।

    भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच संपर्कों को मजबूत करने की यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब ईएफटीए समझौते के माध्यम से व्यापार और आर्थिक साझेदारी के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रिंस की बैठकों से दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।