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  • US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार

    US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार


    मिशिगन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के संभावित दावेदारों के नाम बताए हैं। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Foreign Minister Marco Rubio) का नाम लेते हुए कहा कि पार्टी में कई मजबूत नेता हैं। ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की टीम को मजबूत बताते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधा।

    मिशिगन में रैली से पहले एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए कौन चुनाव लड़ सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि अभी किसी एक नेता को सबसे आगे बताना जल्दबाजी होगी। हालांकि, पार्टी में कई अच्छे नाम मौजूद हैं।

    ट्रंप ने कहा “मैं आपको बता सकता हूं कि मेरी नजर में कौन है, लेकिन अभी थोड़ा जल्दी है।” उन्होंने जेडी वेंस और मार्को रुबियो का नाम लेते हुए कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के पास मजबूत नेताओं की कमी नहीं है, जबकि डेमोक्रेट्स के पास ऐसी टीम नहीं है।


    रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल को लेकर भी बोले ट्रंप

    मिशिगन रवाना होने से पहले ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेल उद्योग को मौजूदा संघर्ष के कारण बंधक नहीं बनने देगा। ट्रंप ने दोहराया कि उनके विचार में यह युद्ध शुरू ही नहीं होना चाहिए था।


    3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव पर नजर

    अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव भी ट्रंप प्रशासन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों से तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) में किस पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। इसका असर ट्रंप के विधायी एजेंडे और वॉशिंगटन में राजनीतिक शक्ति के संतुलन पर पड़ सकता है।


    ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट की चर्चा

    ट्रंप प्रशासन के सामने आर्थिक चिंताओं और घटती लोकप्रियता जैसी चुनौतियां भी हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सितंबर में प्रकाशित एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत तक गिर गई थी। अखबार के अनुसार, 1990 से उसके सर्वे रिकॉर्ड में मध्यावधि चुनाव से पहले किसी राष्ट्रपति की रेटिंग का यह सबसे निचला स्तर था।

  • सर्बिया में छात्रों के आंदोलन ने बदली सत्ता की तस्वीर वुसिक ने स्वीकार की हार रूस से करीबी संबंधों वाले नेता के लिए बड़ा राजनीतिक झटका

    सर्बिया में छात्रों के आंदोलन ने बदली सत्ता की तस्वीर वुसिक ने स्वीकार की हार रूस से करीबी संबंधों वाले नेता के लिए बड़ा राजनीतिक झटका


    नई दिल्ली । यूरोप के बाल्कन क्षेत्र के देश सर्बिया में छात्र आंदोलन ने राजनीति की दिशा बदलने के संकेत दिए हैं। लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाले नेता अलेक्जेंडर वुसिक ने रविवार को हुए संसदीय चुनाव के बाद अपनी हार स्वीकार कर ली। चुनाव में उनके राजनीतिक गठबंधन के सामने विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन वाली स्टूडेंट्स लिस्ट ने मजबूत चुनौती पेश की। वुसिक के अपने अनुमान के मुताबिक छात्र समर्थित समूह को 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं जबकि उनकी पार्टी को करीब 105 सीटें मिलने की संभावना है। इन अनुमानों के आधार पर छात्र आंदोलन से जुड़े समूह के बहुमत हासिल करने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि अंतिम आधिकारिक नतीजों की पुष्टि के बाद ही सीटों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

    करीब 14 साल से प्रभावशाली रहे वुसिक को झटका

    अलेक्जेंडर वुसिक सर्बिया की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उनकी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी यानी SNS ने लंबे समय तक देश की सत्ता पर प्रभाव बनाए रखा। वुसिक वर्ष 2014 से देश की सरकार के शीर्ष पदों पर रहे हैं और बाद में राष्ट्रपति बने। उन्हें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ करीबी संबंध रखने वाले नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में छात्र आंदोलन से जुड़े समूह का चुनाव में आगे निकलना सर्बिया की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

    इस चुनाव में एक तरफ वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी थी तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालयों के छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन। छात्रों ने सरकार पर भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाए थे। आंदोलन को देश के अलग-अलग हिस्सों में समर्थन मिलने के बाद यह राजनीतिक चुनौती के रूप में उभरा।

    रेलवे स्टेशन हादसे के बाद शुरू हुआ विरोध

    सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद हुई थी। स्टेशन की छतरी जैसी संरचना गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद सरकारी जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठने लगे। छात्रों ने हादसे की जिम्मेदारी तय करने और सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

    धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन बड़े जन आंदोलन में बदल गए। विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ समाज के अन्य वर्गों ने भी सरकारी व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि भ्रष्टाचार और सत्ता के केंद्रीकरण ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। सरकार और उसके समर्थकों ने आंदोलन को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए लेकिन विरोध लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना रहा।

    वुसिक ने हार के लिए विदेशी हस्तक्षेप को ठहराया जिम्मेदार

    चुनावी कार्यक्रम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए वुसिक ने स्वीकार किया कि स्टूडेंट्स लिस्ट को जीत मिली है। हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी के प्रदर्शन के लिए सर्बिया के स्वतंत्र मीडिया और कुछ यूरोपीय देशों के कथित हस्तक्षेप के साथ अमेरिकी डीप स्टेट को जिम्मेदार ठहराया। ये आरोप वुसिक की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

    चुनाव से पहले देश में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ था। छात्र आंदोलन के समर्थकों ने सरकार के खिलाफ जवाबदेही और संस्थागत सुधार की मांग की जबकि वुसिक ने आंदोलन को विदेशी साजिश से जोड़ने की कोशिश की थी। चुनाव के शुरुआती अनुमान अब इस राजनीतिक संघर्ष को एक नए मोड़ पर ले आए हैं।

    नई सरकार के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

    यदि अंतिम नतीजों में स्टूडेंट्स लिस्ट को बहुमत मिलता है तो उसके सामने सरकार गठन और प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी होगी। भ्रष्टाचार की जांच सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और न्यायिक व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे नई राजनीतिक व्यवस्था की परीक्षा लेंगे। इसके अलावा सर्बिया के लिए रूस और चीन के साथ संबंधों तथा यूरोपीय संघ की सदस्यता से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

    छात्र आंदोलन की चुनावी सफलता ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सड़कों पर उठी मांगें अब सरकारी नीतियों में बदल पाएंगी। आने वाले दिनों में अंतिम चुनावी नतीजे और सरकार गठन की प्रक्रिया सर्बिया के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • ब्राजील में ट्रंप समर्थक को हराकर लूला फिर बने राष्ट्रपति, बोले- हमारा देश किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं

    ब्राजील में ट्रंप समर्थक को हराकर लूला फिर बने राष्ट्रपति, बोले- हमारा देश किसी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं


    नई दिल्ली। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने शानदार वापसी करते हुए चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ कर लिया है। रविवार, 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर के मतदान में उन्होंने दक्षिणपंथी नेता और सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो को हरा दिया। ब्राजील के चुनावी न्यायालय के मुताबिक, लूला को 51.79% और फ्लेवियो को 48.21% वोट मिले। लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में दक्षिणपंथी राजनीति का प्रभाव बढ़ रहा है। जीत के बाद लूला ने स्पष्ट कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं है।

    करीब 44 लाख वोटों से जीते लूला

    ब्राजील के चुनावी न्यायालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 100% मतगणना पूरी होने के बाद लूला को 6 करोड़ 42 लाख 56 हजार 232 वोट मिले, जबकि फ्लेवियो बोल्सोनारो के खाते में 5 करोड़ 98 लाख 26 हजार 41 वोट आए। दोनों के बीच करीब 44.3 लाख वोटों का अंतर रहा।

    80 वर्षीय लूला ने पहले दौर के चुनाव में फ्लेवियो से पिछड़ने के बाद दूसरे दौर में जीत दर्ज की। पहले चरण में फ्लेवियो को 47.03% और लूला को 45.16% वोट मिले थे। इसके बाद दोनों के बीच सीधा मुकाबला हुआ।

    लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा और वह 2030 तक राष्ट्रपति पद पर रहेंगे। इससे पहले वह 2003 से 2010 तक दो कार्यकाल राष्ट्रपति रह चुके हैं और 2023 में तीसरी बार सत्ता में लौटे थे।

    बोले- ब्राजील किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं

    जीत के बाद लूला ने ब्राजील की स्वतंत्र विदेश नीति और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्राजील किसी दूसरे देश किसी दूसरे देश के प्रभाव क्षेत्र में नहीं है। उनका संदेश ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और टैरिफ दबाव को लेकर ब्राजील-अमेरिका संबंध चर्चा में हैं।

    लूला ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने डिजिटल माध्यमों के जरिए विदेशी हस्तक्षेप की कोशिशों को नाकाम किया। लूला ने यह भी कहा कि वह शासन के तरीके में बदलाव करेंगे और निर्णय लेने की प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाएंगे।

    उनके मुताबिक, चुनाव के बाद अब प्राथमिकता देश को चलाने के तरीके में बदलाव लाने और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने की होगी।

    ट्रंप समर्थक दक्षिणपंथी राजनीति के बीच लूला की जीत

    लूला की जीत को लैटिन अमेरिका की राजनीति के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। क्षेत्र के कई देशों में दक्षिणपंथी नेताओं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों का प्रभाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में ब्राजील में वामपंथी नेता की जीत क्षेत्रीय राजनीतिक रुझानों से अलग तस्वीर पेश करती है।

    ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में लूला की सरकार के सामने घरेलू आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने की चुनौती भी रहेगी। अमेरिकी टैरिफ दबाव के बीच ब्राजील अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने और स्वतंत्र व्यापार नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।

    लैटिन अमेरिका के दो बड़े देशों ब्राजील और मैक्सिको में वाम-मध्य विचारधारा के नेता सत्ता में हैं। लूला की जीत से क्षेत्रीय राजनीति में इन सरकारों की भूमिका पर भी ध्यान केंद्रित हुआ है।

    फ्लेवियो बोल्सोनारो ने नतीजे को चुनौती देने की बात कही

    चुनाव में हार के बाद फ्लेवियो बोल्सोनारो ने परिणाम स्वीकार करने से इनकार करते हुए चुनाव रद्द कराने की मांग करने की बात कही। उन्होंने मतदान का समय दो घंटे बढ़ाए जाने पर आपत्ति जताई। यह फैसला मतदान के दिन आखिरी समय में लिया गया था, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

    हालांकि, ब्राजील के चुनावी न्यायालय ने लूला की जीत की आधिकारिक घोषणा कर दी है। चुनाव परिणाम को चुनौती देने की फ्लेवियो की घोषणा के बाद अब इस मामले में संभावित कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

    लूला की जीत के साथ ब्राजील में अगले चार साल के लिए राजनीतिक दिशा तय हो गई है। उनकी सरकार के सामने आर्थिक विकास, सामाजिक नीतियों, अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों और राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े मुद्दे अहम रहेंगे।

  • जापान का अनोखा द्वीप, जहां हर शख्स गले में रखता है गैस मास्क और सायरन बजते ही थम जाती है जिंदगी

    जापान का अनोखा द्वीप, जहां हर शख्स गले में रखता है गैस मास्क और सायरन बजते ही थम जाती है जिंदगी


    नई दिल्ली ।
    प्रशांत महासागर में स्थित जापान का मियाके-जिमा द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली जहरीली गैस के खतरे के लिए भी जाना जाता है। यहां रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में सुरक्षा के विशेष उपाय अपनाने पड़ते हैं। गैस मास्क रखना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। बाजार में खरीदारी करने वाले लोग हों, सड़क पर घूमते बच्चे हों या समुद्र में मछली पकड़ने जाने वाले मछुआरे, सभी को संभावित खतरे के प्रति सतर्क रहना पड़ता है। हवा में जहरीली गैस का स्तर बढ़ने पर चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को सावधान किया जाता है।

    जापान की राजधानी टोक्यो से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण में स्थित मियाके-जिमा, टोक्यो महानगर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। दूर से यह द्वीप हरी-भरी पहाड़ियों और नीले समुद्र से घिरा खूबसूरत स्थान दिखाई देता है। हालांकि, इसके बीचों-बीच स्थित माउंट ओयामा नामक सक्रिय ज्वालामुखी यहां के निवासियों के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। इस ज्वालामुखी से सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो अधिक मात्रा में सांस के जरिए शरीर में पहुंचने पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है।

    मियाके-जिमा का इतिहास ज्वालामुखी विस्फोटों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2000 में माउंट ओयामा में कई शक्तिशाली विस्फोट हुए, जिसके बाद वातावरण में बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड फैल गई। स्थिति गंभीर होने पर सितंबर 2000 में जापानी सरकार ने पूरे द्वीप को खाली कराने का आदेश दिया। वहां रहने वाले लगभग 3,600 लोगों को जहाजों और सैन्य हेलिकॉप्टरों के जरिए टोक्यो के मुख्य भूभाग पर पहुंचाया गया। इसके बाद कई वर्षों तक द्वीप पर सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा और वैज्ञानिकों तथा अनुसंधान दलों को विशेष सुरक्षा उपायों के साथ वहां जाने की अनुमति दी गई।

    समय के साथ ज्वालामुखी से निकलने वाली गैस के स्तर और परिस्थितियों की समीक्षा की गई। इसके बाद लोगों को धीरे-धीरे द्वीप पर लौटने की अनुमति मिली। हालांकि, वापसी के साथ सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन करना जरूरी बना रहा। गैस मास्क रखना और चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना यहां के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

    द्वीप पर हवा में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा पर नजर रखने के लिए गैस निगरानी स्टेशन लगाए गए हैं। इनकी मदद से गैस के स्तर में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाता है। चेतावनी प्रणाली के जरिए लोगों को संभावित खतरे की सूचना दी जाती है, ताकि वे समय रहते सुरक्षा संबंधी कदम उठा सकें। गैस का स्तर खतरनाक होने पर लोगों को मास्क पहनने और सुरक्षित स्थान की ओर जाने की सलाह दी जाती है।

    आज मियाके-जिमा में लगभग 2,200 लोग रहते हैं। यहां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को गैस के खतरे और सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूक रहना पड़ता है। घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक इमारतों में हवा को साफ रखने के लिए विशेष फिल्टरिंग व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाता है। जरूरत पड़ने पर लोग सुरक्षित आश्रय स्थलों में जाकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार करते हैं।

    इस द्वीप की परिस्थितियां पर्यटकों, भूवैज्ञानिकों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का विषय हैं। यहां आने वाले लोगों को स्थानीय सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता है। ज्वालामुखी से प्रभावित भूभाग और प्राकृतिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं।

    मियाके-जिमा की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम वाले क्षेत्रों में जीवन चलाने के लिए सतर्कता, तकनीक और तैयारी कितनी महत्वपूर्ण हैं। यहां गैस मास्क केवल सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि उस खतरे की लगातार याद दिलाने वाला साधन है, जिसके बीच स्थानीय लोग अपना जीवन आगे बढ़ा रहे हैं।

  • भारत से रियाद और दम्माम के लिए 7 नवंबर तक निलंबित रहेंगी उड़ानें… एअर इंडिया ने बढ़ाई अवधि

    भारत से रियाद और दम्माम के लिए 7 नवंबर तक निलंबित रहेंगी उड़ानें… एअर इंडिया ने बढ़ाई अवधि


    रियाद।
    पश्चिम एशिया (West Asia Tension) के संवेदनशील हालात के मद्देनजर भारत (India) से संचालित उड़ान सेवाओं को निलंबित रखने का फैसला लिया गया है। भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने शनिवार को बताया कि एअर इंडिया (Air India) और एअर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) की रियाद और दम्माम आने-जाने वाली उड़ानें 7 नवंबर तक निलंबित रहेंगी। वहीं, जेद्दा के लिए दोनों एयरलाइंस की सेवाएं 31 अक्टूबर तक बंद रहेंगी।


    हवाई अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों से तनाव

    दूतावास की तरफ से जारी बयान के मुताबिक रियाद और दम्माम के लिए उड़ान सेवाओं का निलंबन जारी रहेगा, जबकि जेद्दा के लिए उड़ानें भी फिलहाल निर्धारित तिथि तक संचालित नहीं होंगी। यह फैसला सऊदी अरब में नागरिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से रियाद और दम्माम के हवाई अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों के मद्देनजर लिया गया है।


    उमराह यात्रियों की स्वदेश वापसी कैसे?

    इस बीच, भारत सरकार ने कहा कि सऊदी अरब में फंसे भारतीय उमराह यात्रियों की वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास संबंधित एयरलाइंस और टूर ऑपरेटरों के संपर्क में हैं, ताकि यात्रियों की जल्द वापसी सुनिश्चित की जा सके।


    सरकार सऊदी में फंसे लोगों की मदद के लिए क्या कर रही है?

    नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में लगभग 3,000 फंसे हुए उमराह यात्री सऊदी अरब से भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा 10,000 से ज्यादा सामान्य उमराह यात्री भी भारत वापस आए हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बचे यात्रियों की जल्द वापसी के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा जारी है। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार फंसे हुए लोगों के संपर्क में हैं और सामुदायिक स्वयंसेवकों के सहयोग से उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं।


    भारतीयों के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम का संचालन

    विदेश मंत्रालय के अनुसार रियाद और जेद्दा में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम भी संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, जमीनी स्थिति की जानकारी देने के लिए नियमित सलाह (एडवाइजरी) जारी की जा रही है।


    तेल क्षेत्र और एयरपोर्ट पर हमले की चपेट में आए भारतीय

    बता दें कि भारत ने हाल ही में सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की थी। इनमें किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अरामको के शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले शामिल हैं। दम्माम हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य भारतीय घायल हुए थे। वहीं, शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले में भी एक भारतीय नागरिक घायल हुआ था।

  • भारत घूमने आया कपल, ऑटो खरीद 75 दिन किया सफर, ऐसा भाया कि जहाज पर लादकर साथ ले गए ब्रिटेन

    भारत घूमने आया कपल, ऑटो खरीद 75 दिन किया सफर, ऐसा भाया कि जहाज पर लादकर साथ ले गए ब्रिटेन


    नई दिल्ली।
    भारत (India) घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक (Foreign tourists) आमतौर पर टैक्सी, बस या किराये की कार से सफर करते हैं. लेकिन ब्रिटेन (Britain) के हेलेन और मिक (Helen and Mick) ने अपना रास्ता खुद चुना. उन्होंने चेन्नई में एक लाल रंग का ऑटो रिक्शा खरीदा और उसे नाम दिया ‘टिम्मी द टिन कैन’।

    ऑटो का लुक भी काफी दिलचस्प है. उसके आगे कार्टून जैसी आंखें और मुस्कुराता हुआ चेहरा बना है. यह ऑटो तमिलनाडु के चेन्नई में रजिस्टर्ड है. ब्रिटिश कपल हेलेन और मिक के लिए धीरे-धीरे यह सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं रहा, बल्कि उनके सफर का सबसे खास साथी बन गया. जब वे भारत की यात्रा खत्म कर यूके (UK) पहुंचे, तो अपने साथ ऑटो को भी पानी के जहाज से लेकर चले गए।


    ऑटो से घूमे, सोशल मीडिया पर भी शेयर किया सफर

    हेलेन और मिक ने अपने इस लाल ऑटो के नाम से इंस्टाग्राम पर ‘timmy_the_tin_can’ अकाउंट बनाया. यहां वे सफर के वीडियो और तस्वीरें शेयर करने लगे. देखते ही देखते लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ने लगी. कपल के इस अकाउंट पर नौ हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. उनकी पोस्ट में कहीं सड़क पर दौड़ता टिम्मी नजर आता है, तो कहीं उसके साथ बिताए खास पलों की झलक मिलती है. भारत की सड़कों पर इस तरह ऑटो से घूमना उनके लिए एक अलग अनुभव रहा।


    राजस्थान से गोवा तक तय किया लंबा रास्ता

    कपल ने अपने ऑटो से भारत के अलग-अलग हिस्सों की सैर की. उनके सफर में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दक्षिण भारत की कई जगहें शामिल रहीं. वे आगरा पहुंचे और ताजमहल भी देखा. इसके अलावा गोवा के बीच तक भी अपने ऑटो से गए. इस दौरान उन्होंने करीब 4,218 किलोमीटर की दूरी तय की. पूरे सफर में टिम्मी उनके साथ रहा. कभी शहरों की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर, तो कभी लंबे रास्तों पर चलता यह ऑटो उनकी यात्रा की पहचान बन गया।


    भारत छोड़ते वक्त टिम्मी को अलविदा कहना मुश्किल

    किसी जगह घूमने के दौरान वहां की यादें साथ रह जाती हैं, लेकिन हेलेन और मिक के लिए भारत की यादों के साथ एक ऑटो भी जुड़ गया. कई हफ्तों तक साथ सफर करने के बाद टिम्मी उनके लिए महज एक गाड़ी नहीं रहा था. जब वापस ब्रिटेन जाने का वक्त आया, तो उसे भारत में छोड़कर जाना आसान नहीं लगा. ऐसे में कपल ने उसे अपने साथ यूके ले जाने का फैसला किया. इसके बाद ऑटो को समुद्री रास्ते से भेजने की तैयारी की गई।


    लकड़ी के बड़े क्रेट में पैक होकर पहुंचा लंदन

    टिम्मी को भारत से ब्रिटेन पहुंचाने के लिए समुद्री माल ढुलाई का सहारा लिया गया. करीब छह महीने की शिपिंग के बाद 23 अक्टूबर 2026 को ऑटो लंदन गेटवे पोर्ट पहुंचा. सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में कपल लकड़ी के बड़े क्रेट से अपने लाल ऑटो को बाहर निकालते दिखाई देता है. इतने लंबे इंतजार के बाद टिम्मी को दोबारा सामने देखकर उनकी खुशी साफ झलकती है. अब यही वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    सीजन वन खत्म, अब ब्रिटेन की बारी
    कपल ने अपने पोस्ट में भारत के सफर को याद करते हुए बताया कि उनके लिए यह अनुभव काफी भावुक रहा. उन्होंने 75 दिनों में 4,218 किलोमीटर की यात्रा पूरी की और ऐसी यादें बनाईं, जिन्हें वे कभी नहीं भूलना चाहते. उनके मुताबिक, टिम्मी ने उनकी जिंदगी को एक अलग अनुभव दिया. अब उन्होंने अपने सफर के अगले हिस्से का इशारा भी कर दिया है. भारत में टिम्मी के साथ उनकी कहानी का पहला हिस्सा पूरा हो चुका है, जबकि अगला सफर ब्रिटेन में शुरू होने वाला है।


    एक ऑटो, हजारों किलोमीटर और ढेर सारी यादें

    हेलेन और मिक की कहानी में खास बात सिर्फ यह नहीं है कि उन्होंने भारत में ऑटो खरीदा और उसे विदेश ले गए. असल बात यह है कि सफर के दौरान एक साधारण-सा वाहन उनकी यात्रा का अहम हिस्सा बन गया. भारत की सड़कों पर बिताए दिन, अलग-अलग शहरों की झलक और रास्ते में बने अनुभव अब उनके साथ यूके तक पहुंच गए हैं. टिम्मी को अपने साथ ले जाकर कपल ने इन यादों को भी अपने पास रखने का इंतजाम कर लिया. अब सोशल मीडिया पर लोग उनके अगले सफर का इंतजार कर रहे हैं. देखना दिलचस्प होगा कि भारत में हजारों किलोमीटर घूम चुका यह लाल ऑटो ब्रिटेन की सड़कों पर कैसी कहानी लिखता है।

  • जापान के बोनिन द्वीप समूह में सुबह-सुबह आया 6.5 तीव्रता का भूकंप

    जापान के बोनिन द्वीप समूह में सुबह-सुबह आया 6.5 तीव्रता का भूकंप


    टोक्यो।
    जापान (Japan) के बोनिन द्वीप समूह क्षेत्र (Bonin Islands region) में 6.5 तीव्रता (Magnitude 6.3) का भूकंप (Earthquake) आया है. धरती के अंदर 7 प्लेट ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट जिन जगहों पर अधिक टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं।

    जापान के बोनिन द्वीप समूह क्षेत्र में रविवार सुबह 6.5 तीव्रता के भूकंप के तेज झटके दर्ज किए गए। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, इस भूकंप के बाद जान-माल के नुकसान या सुनामी की किसी चेतावनी से जुड़ी विस्तृत जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी है।

    संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने बताया कि टोक्यो से लगभग 1000 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व में बोनिन द्वीप समूह, जिसे ओगासावारा द्वीप समूह भी कहा जाता है, में 6.5 तीव्रता का भूकंप आया।

    भूकंप का केंद्र समुद्र में 494 किलोमीटर की गहराई में था। प्रभावित क्षेत्रों के लिए सुनामी की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई थी, और कोई भी भौतिक क्षति या हताहत होने की सूचना नहीं थी। भूकंप फिलीपीन और प्रशांत टेक्टोनिक प्लेटों के बीच भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में आया।

    बता दें, बार-बार टकराने से प्लेट के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है कि तो प्लेट टूटने लगती हैं. इनके टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है. 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है।

    भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है. 7.0 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप को आमतौर पर खतरनाक माना जाता है, वहीं, 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो भूकंप कहा जाता हैं, जिन्हें कई लोग महसूस भी नहीं कर पाते हैं।

    इस बीच, शनिवार को वानुआतू द्वीप में भी भूकंप के जोरदार झटके महसूस किए गए थे. रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.1 मापी गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप 24 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट पर आया. वानुआतू, दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक द्वीपसमूह देश है।

  • फ्रांस में फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार

    फ्रांस में फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, सड़कों पर उतरे लाखों लोग, 1,000 से ज्यादा गिरफ्तार


    नई दिल्ली। फ्रांस में महंगाई, रोजगार, वेतन, पेंशन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी मांगों को लेकर शनिवार, 24 अक्टूबर को एक बार फिर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस समेत देश के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 4 लाख 10 हजार लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जबकि लगभग 1,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पेरिस में मार्च के अंतिम चरण में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, शनिवार को सबसे बड़ा प्रदर्शन पेरिस में हुआ, जहां करीब 1 लाख 10 हजार लोग मार्च में शामिल हुए। शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में कुछ जगहों पर स्थिति बिगड़ गई। अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।

    पेरिस में मार्च के दौरान पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
    प्रशासन ने पेरिस में प्रदर्शन का मार्ग शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक सीमित रखा था। मार्च पोर्त द’इटली से शुरू होकर पोर्त द विन्सेन्स तक पहुंचा। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्लास द ला नासियों की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कुछ स्थानों पर तनाव बढ़ गया और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस तथा पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

    पेरिस अभियोजक कार्यालय के मुताबिक, शनिवार के प्रदर्शन के सिलसिले में 64 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 40 लोगों को पुलिस हिरासत में रखा गया। गिरफ्तार लोगों में छह नाबालिग भी शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर पर हथियार रखने या हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की तैयारी करने वाले समूहों में शामिल होने का संदेह है।

    लियोन, स्ट्रासबर्ग और मार्सेय में भी तनाव
    पेरिस के अलावा लियोन, क्लेरमोंट-फेरां और स्ट्रासबर्ग में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। नीस और नांतेस में पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को तैनात किया गया। मार्सेय में प्रदर्शन के अंतिम हिस्से के पास कुछ दर्जन लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई।

    प्रदर्शन को देखते हुए फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पहले ही देशभर में 70 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती का ऐलान किया था। सुरक्षा व्यवस्था के तहत हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों को भी लगाया गया।

    यह प्रदर्शन पिछले सप्ताह हुई हिंसा के बाद हुआ है। इससे पहले शनिवार को 5 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे थे। उस दौरान फ्रांसभर में करीब 3 हजार दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया था या उन्हें लूट लिया गया था।

    स्कूलों में शिक्षकों की कमी और महंगाई के खिलाफ आंदोलन
    फ्रांस में यह आंदोलन पिछले महीने पेरिस के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक हाई स्कूल में कर्मचारियों की कमी के विरोध से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। छात्र बेहतर शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, जबकि कर्मचारियों की मांगों में ज्यादा वेतन और बेहतर पेंशन शामिल हैं।

    शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में सरकारी मिडिल और हाई स्कूलों में शिक्षकों की गैरमौजूदगी के कारण 1 करोड़ 54 लाख शिक्षण घंटे प्रभावित हुए। यह कुल निर्धारित शिक्षण समय का 7.5 प्रतिशत था।

    छात्र संगठन उच्च शिक्षा में 2 लाख 50 हजार अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय प्रवेश व्यवस्था के तहत होने वाली चयन प्रक्रिया को खत्म करने, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में ज्यादा शिक्षकों की नियुक्ति करने और शैक्षणिक संस्थानों की मरम्मत कराने की भी मांग कर रहे हैं।

    इसके अलावा छात्र हर महीने छात्रवृत्ति में 200 यूरो की बढ़ोतरी और सरकारी छात्र आवासों का किराया रोकने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन में महंगाई, रोजगार के अवसर और आम लोगों की आर्थिक परेशानियां भी प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

    प्रदर्शन पर प्रतिबंध से ट्रेड यूनियन नाराज
    फ्रांस के प्रशासन ने लियोन, नीस और मोंपेलिए समेत कुछ शहरों में प्रदर्शनों पर रोक लगा दी थी। ट्रेड यूनियनों ने इन प्रतिबंधों का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह की रोक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करती है।

    इस बीच, येलो वेस्ट मूवमेंट से जुड़े संगठनों ने 31 अक्टूबर को फिर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। शिक्षा, महंगाई, वेतन और पेंशन से जुड़ी मांगों को लेकर जारी आंदोलन के कारण फ्रांस में आने वाले दिनों में भी विरोध प्रदर्शन होने की संभावना बनी हुई है।

  • मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना

    मक्का-मदीना पर हमले से हूतियों का इनकार, बोले- सऊदी के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट को बनाया निशाना


    नई दिल्ली। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही समूह ने इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना पर हमला करने की खबरों से इनकार किया है। समूह का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का निशाना सऊदी अरब के तेल ठिकाने और सैन्य प्रतिष्ठान हैं। इससे पहले सऊदी अरब ने दावा किया था कि उसने मक्का और मदीना की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है। कई इलाकों में मिसाइलों का मलबा गिरने की भी जानकारी दी गई थी।

    हूती समूह के इस बयान से सऊदी अरब और यमन के बीच सीमा पार तनाव बढ़ने की आशंका है। हूतियों ने कहा कि जब भी वे सैन्य अभियान चलाते हैं, तो उसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करते हैं। सऊदी अधिकारियों ने हूतियों के इनकार और उनके बताए लक्ष्यों पर तत्काल कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी।

    सऊदी अरब ने मिसाइलें रोकने का किया दावा

    सऊदी अरब की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, मक्का और मदीना क्षेत्रों की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया गया। इसके बाद मिसाइलों का मलबा मक्का के पास और जेद्दा, ताइफ तथा रबिघ में मिलने की जानकारी सामने आई।

    शनिवार को सऊदी नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने ताइफ, यानबू, मक्का और जेद्दा के लोगों को संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था। करीब 10 मिनट बाद एजेंसी ने बताया कि खतरा टल गया है।

    हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मिसाइलों के मलबे की जानकारी वाले सभी स्थानों पर वास्तव में क्या हुआ और क्या कोई मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंची थी। हूतियों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मक्का और मदीना को निशाना नहीं बनाया।

    रियाद एयरपोर्ट और अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब के कई अहम ठिकानों पर हमले किए। इनमें रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू में सऊदी अरामको की एक सुविधा, रबिघ तेल रिफाइनरी, कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशन और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शामिल हैं।

    प्रवक्ता ने दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, नज्रान के एक हवाई अड्डे और खमीस मुशैत के एक हवाई अड्डे को भी निशाना बनाने का दावा किया।

    वहीं, सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया। हालांकि, हूतियों की ओर से बताए गए अन्य ठिकानों पर हमलों की पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने भी इन दावों पर सीधे तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी।

    अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर मिसाइल हमले का आरोप

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने हूतियों पर अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाया है। यमन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से दो मिसाइलें तटरक्षक बल के मुख्यालय पर गिरीं, जबकि तीसरी तवाही इलाके में तटरक्षक बल की एक इमारत पर गिरी।

    दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उनके बलों ने अदन में सऊदी समर्थित सैन्य जमावड़ों को निशाना बनाया। उन्होंने अल-नस्र कैंप और एक नौसैनिक सैन्य अड्डे का उल्लेख किया। उनका आरोप था कि इन ठिकानों पर सऊदी अधिकारी सैन्य गतिविधियों की निगरानी कर रहे थे।

    2022 के युद्धविराम पर फिर मंडराया खतरा

    ताजा घटनाक्रम से यमन में संघर्ष रोकने के प्रयासों पर भी असर पड़ने की आशंका है। वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूतियों के बीच सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी।

    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों का राजधानी सना और देश के बड़े उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

    ईरान के साथ जारी व्यापक अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है। इसी महीने की शुरुआत में हूतियों ने विमानन कंपनियों को सऊदी हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने को लेकर चेतावनी दी थी। हालांकि, उस चेतावनी में मक्का और मदीना के ऊपर के हवाई क्षेत्र को अलग रखा गया था।

  • ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही

    ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमले का BLF का दावा, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन हमलावरों को मारने की बात कही


    बलूचिस्तान।
    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने ग्वादर में सैन्य ठिकानों और पुलिस स्टेशन पर हमले करने का दावा किया है। संगठन के मुताबिक, ऑपरेशन अलमास के तहत फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के कैंप और माजानी पुलिस स्टेशन को निशाना बनाया गया। सैन्य काफिले पर हमले का दावा भी किया गया है। वहीं, पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों ने हमले की कोशिश नाकाम करने और तीन हमलावरों को मार गिराने की जानकारी दी है। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    FWO कैंप पर कब्जे और झंडा फहराने का दावा

    BLF के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने गुरुवार को जारी बयान में ऑपरेशन की जानकारी दी। उनके अनुसार, अभियान में संगठन की विशेष सद्दो ऑपरेशनल बटालियन और अन्य इकाइयां शामिल थीं। BLF का दावा है कि ऑपरेशन की शुरुआत ग्वादर जीरो पॉइंट स्थित फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन के कैंप पर हमले से हुई।

    संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने सैन्य परिसर पर नियंत्रण हासिल कर वहां अपना झंडा फहराया। BLF के मुताबिक, इस दौरान पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस के एक कैप्टन और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के कई कर्मियों की मौत हुई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। FWO पाकिस्तानी सेना से जुड़ा सैन्य इंजीनियरिंग संगठन है। यह सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में काम करता है।

    माजानी पुलिस स्टेशन और सैन्य काफिले को निशाना बनाने का दावा

    BLF ने माजानी पुलिस स्टेशन पर कब्जा करने और वहां से सरकारी हथियार व उपकरण जब्त करने का दावा भी किया है। संगठन के अनुसार, इस झड़प में एक पुलिस अधिकारी की मौत हुई।

    इसके अलावा, BLF ने ग्वादर जिले के गाबद इलाके में सैन्य काफिले पर हमले की जिम्मेदारी ली है। संगठन का दावा है कि हमले में एक सैन्य वाहन नष्ट हुआ और कई सुरक्षाकर्मी मारे गए या घायल हुए। BLF ने गाबद क्रॉस स्थित पुलिस चौकी पर नियंत्रण हासिल करने का दावा भी किया है।

    पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का अलग दावा

    पाकिस्तानी मीडिया संस्थानों जियो न्यूज और डॉन से जुड़ी रिपोर्टों में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से अलग जानकारी सामने आई है। पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक निर्माण कंपनी के खाली कैंप पर हमले की कोशिश नाकाम कर दी। इस कार्रवाई में तीन हमलावरों के मारे जाने की बात कही गई है। कुछ अन्य संदिग्धों को घेरने की जानकारी भी सामने आई।

    हालांकि, घटनास्थल पर हुई कार्रवाई, हताहतों की संख्या और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के लिए अहम है ग्वादर

    ग्वादर पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है। यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है। इस परियोजना के तहत चीन और पाकिस्तान के बीच व्यापार, परिवहन और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    ऐसे में ग्वादर में सैन्य ठिकानों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमलों के दावे पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्र में चल रही रणनीतिक परियोजनाओं को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं।

    बलूचिस्तान में लंबे समय से जारी है विद्रोह

    बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी विद्रोह चल रहा है। सशस्त्र संगठन पाकिस्तान सरकार पर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन और स्थानीय आबादी के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी मानती है और उनके खिलाफ सुरक्षा अभियान चलाती है।

    ग्वादर में हालिया घटनाक्रम को लेकर BLF और पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के दावे अलग-अलग हैं। ऐसे में हमले की वास्तविक स्थिति, नुकसान और सैन्य ठिकानों पर नियंत्रण को लेकर आधिकारिक तथा स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार है।