Category: International

  • मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध जताया है। इसके बाद अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन ने ममदानी और कार्यक्रम के अन्य आलोचकों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    ममदानी ने कहा है कि वह भागवत के कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यह एक निजी कार्यक्रम है और इसे रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। उनका विरोध आरएसएस की विचारधारा और भारत को लेकर उसके दृष्टिकोण से जुड़ी चिंताओं पर आधारित है।

    भागवत का यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष में चल रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। कार्यक्रम को यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारतीय प्रवासी समुदाय के करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने की संभावना बताई गई है।

    ममदानी ने आरएसएस की विचारधारा को लेकर कहा है कि वह ऐसी सोच के विरोध में हैं जिसे वह किसी देश के लिए बहिष्कारी दृष्टिकोण मानते हैं। उनका कहना है कि न्यूयॉर्क ऐसा शहर है जो रंग, धर्म, आस्था और मूल स्थान की परवाह किए बिना सभी लोगों के साथ समान व्यवहार की भावना में विश्वास करता है।

    ममदानी के बयान के बाद कार्यक्रम के समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर ममदानी और अन्य आलोचकों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने वाले लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के विरोध के कारण ऐसा कर रहे हैं।

    मिलबेन ने अपने बयान में ममदानी और उनके साथ कार्यक्रम का विरोध करने वालों की राजनीतिक विचारधारा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन व्यावसायिक नियमों के आधार पर काम करता है और इसलिए राजनीतिक विरोध के आधार पर कार्यक्रम को रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस विवाद के बीच कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है। न्यूयॉर्क में कुछ नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने भागवत की मौजूदगी का विरोध किया तथा कार्यक्रम को रद्द करने की मांग उठाई है। इससे यह मुद्दा केवल भारतीय प्रवासी समुदाय तक सीमित न रहकर अमेरिकी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है।

    मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। उनका अमेरिका दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका के बाद उनके कनाडा और ब्रिटेन जाने का कार्यक्रम भी बताया गया है।

    मैरी मिलबेन इससे पहले भी भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी के एक कार्यक्रम से पहले भारत का राष्ट्रगान प्रस्तुत किया था। इसके कारण भारतीय समुदाय के बीच भी उनकी पहचान बनी है।

    फिलहाल भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के रुख स्पष्ट हैं। एक ओर ममदानी और कुछ संगठन आरएसएस की विचारधारा को लेकर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं मिलबेन सहित कार्यक्रम के समर्थक इसे भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़ा आयोजन मानते हैं। 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम पर अब सभी की नजर बनी हुई है और इससे पहले राजनीतिक बहस के और तेज होने की संभावना है।

  • नेपाल में बाढ़ से 105 भारतीय समेत 300 विदेशी पर्यटक लापता, बिहार के आठ जिलों में गंडक को लेकर हाई अलर्ट जारी

    नेपाल में बाढ़ से 105 भारतीय समेत 300 विदेशी पर्यटक लापता, बिहार के आठ जिलों में गंडक को लेकर हाई अलर्ट जारी

    नई दिल्ली ।नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी के तेज बहाव से घरों, पुलों, वाहनों और अन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार, 105 भारतीय पर्यटकों समेत 300 से अधिक विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना है। प्रभावित क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों के अलावा नेपाली नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं। अलग-अलग रिकॉर्ड की जांच के चलते लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।

    पर्यटन और यात्रा क्षेत्र से मिले शुरुआती आंकड़ों में प्रभावित इलाकों से कुल 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, स्थानीय गाइड और यात्रा कंपनियों के रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।

    लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। राहत और तलाश अभियान को तेज करने के लिए 15 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। दुर्गम और प्रभावित इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं।

    बाढ़ के कारण नेपाल में बुनियादी ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। तेज बहाव की चपेट में आने से 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई परियोजनाओं के बांध, विद्युतगृह और वहां तक पहुंचने वाले मार्गों को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। बाजारों और सीमा क्षेत्र में खड़े कई वाहन भी पानी के बहाव में बह गए।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही रोकी गई है। नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतने को कहा गया है।

    नेपाल में बाढ़ की स्थिति का असर बिहार पर भी पड़ने की आशंका के चलते राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई है। नेपाल सीमा से जुड़े पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

    बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब तीन मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। इसके मद्देनजर गंडक और अन्य प्रमुख नदियों के आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर संभावित बाढ़ की स्थिति और तैयारियों का जायजा लिया गया। बेतिया, मोतिहारी, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीतामढ़ी और शिवहर में भी हालात पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।

    गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बातचीत कर नेपाल में आई बाढ़ और बिहार में संभावित प्रभाव को लेकर तैयारियों की जानकारी ली। एनडीआरएफ की कई टीमों को छह जिलों में तैनात किया गया है। कोसी, गंडक और गंगा के आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। फिलहाल प्रशासन का जोर संभावित बाढ़ के प्रभाव को कम करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाने पर है।

  • रूस के अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण विस्फोट से 7 लोगों की मौत, छह चीनी नागरिक शामिल, नौ अब भी लापता

    रूस के अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण विस्फोट से 7 लोगों की मौत, छह चीनी नागरिक शामिल, नौ अब भी लापता

    नई दिल्ली । रूस के सुदूर पूर्वी अमूर क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़े गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण विस्फोट और आग ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छह चीनी नागरिकों समेत सात लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि नौ अन्य चीनी कर्मचारी अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद परिसर में राहत और बचाव अभियान चलाया गया तथा हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

    यह हादसा अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स की पाइरोलिसिस यूनिट के एक सहायक तकनीकी हिस्से में हुआ। जानकारी के अनुसार जिस समय विस्फोट हुआ, उस दौरान संयंत्र में उपकरणों की अंतिम टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम चल रहा था। अचानक हुए धमाके के बाद परिसर में आग फैल गई, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों में अफरा तफरी मच गई।

    प्लांट की प्रेस सर्विस के अनुसार घटना के बाद लगी आग पर काबू पा लिया गया है। कंपनी की ओर से यह भी बताया गया कि संयंत्र के मुख्य उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और लापता कर्मचारियों को लेकर स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। नौ चीनी कर्मचारियों के बारे में अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।

    अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स रूस और चीन के बीच औद्योगिक सहयोग से जुड़ी एक बड़ी परियोजना है। यह परिसर रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है और इसके निर्माण तथा विकास में रूस की सिबुर और चीन की सिनोपेक जैसी कंपनियों की भागीदारी है। ऐसे में हादसे में चीनी नागरिकों के प्रभावित होने से दोनों देशों के स्तर पर भी घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक विस्फोट मुख्य पाइरोलिसिस यूनिट के एक सहायक तकनीकी हिस्से में हुआ। उस समय वहां अंतिम परीक्षण और कमीशनिंग से जुड़ा काम चल रहा था। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विस्फोट की वास्तविक वजह क्या थी। तकनीकी खराबी, उपकरणों से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    रूसी जांच अधिकारियों की कार्रवाई के बाद हादसे के कारणों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि घटना के समय संयंत्र में किस तरह का तकनीकी काम चल रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। साथ ही विस्फोट के बाद आग फैलने की परिस्थितियों और कर्मचारियों की मौजूदगी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

    हादसे ने एक बार फिर बड़े औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षण के दौरान अपनाए जाने वाले मानकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से ऐसे परिसर में जहां गैस और रासायनिक प्रक्रियाओं से जुड़े संवेदनशील उपकरण मौजूद हों, वहां छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी गंभीर दुर्घटना का रूप ले सकती है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियों का मुख्य ध्यान लापता कर्मचारियों की तलाश, प्रभावित लोगों की पहचान और दुर्घटना की वास्तविक वजह सामने लाने पर है।

  • ईरान के खिलाफ अमेरिका ने बदली चाल, नए हमले से पीछे हटे रुबियो; होर्मुज में नौसैनिक दबाव और प्रतिबंधों पर फोकस

    ईरान के खिलाफ अमेरिका ने बदली चाल, नए हमले से पीछे हटे रुबियो; होर्मुज में नौसैनिक दबाव और प्रतिबंधों पर फोकस


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच वॉशिंगटन की रणनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कई सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों को बताया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर नए सैन्य हमले शुरू करने की तैयारी नहीं कर रहा है। रुबियो के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका तत्काल सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय आर्थिक प्रतिबंधों समुद्री दबाव और रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही को सामान्य करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। हालांकि ईरान की तरफ से किसी हमले की स्थिति में अमेरिका ने सैन्य विकल्प को पूरी तरह बंद नहीं किया है।

    अमेरिका की बदली रणनीति में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा बन गया है। अमेरिकी नौसेना इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है और समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रही है। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि सैन्य अभियान के चलते ईरान की उस क्षमता को काफी कमजोर किया गया है जिसके जरिए वह वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना सकता था। होर्मुज में बारूदी सुरंगों को हटाने की कोशिश भी की जा रही है और कुछ तेल टैंकरों ने दक्षिणी समुद्री रास्ते से आवाजाही शुरू कर दी है। इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

    अमेरिका की ओर से ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंधों का सहारा लिया जा रहा है। वॉशिंगटन ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों और कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस रणनीति का मकसद ईरान की आर्थिक ताकत को कमजोर करना और उसे सीधे सैन्य टकराव के बजाय दबाव के जरिए बातचीत की मेज पर लाना बताया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह नीति नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव तक जारी रह सकती है।

    दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिकी दबाव और समुद्री कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए खारिज किया है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल जहाजों की आवाजाही पर फीस लगाने की योजना को भी लगभग अंतिम रूप दिए जाने की बात सामने आई है। संसदीय समिति की ओर से कहा गया है कि जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से मेंटेनेंस और नेविगेशन फीस ली जा सकती है। हालांकि यह व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है। अगर ऐसा कदम उठाया जाता है तो वैश्विक तेल कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

    इसी बीच ईरान और ओमान ने होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अस्थायी समुद्री कॉरिडोर बनाने पर चर्चा की है। दोनों देश जलमार्ग से बारूदी सुरंगें हटाने की दिशा में भी काम करने की बात कर चुके हैं। हालांकि तनाव के बीच एक तेल टैंकर पर प्रोजेक्टाइल से हमला होने की खबर ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दबाव की स्थिति बनी हुई है।

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान भी अहम भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के ईरान दौरे और वहां नेताओं के साथ बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई है। फिलहाल अमेरिका की रणनीति को सीधे नए हमले की बजाय आर्थिक और समुद्री दबाव के रूप में देखा जा रहा है। रुबियो के बयान से इतना जरूर साफ है कि वॉशिंगटन तत्काल सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है लेकिन ईरान पर दबाव कम करने की भी उसकी कोई तैयारी नहीं दिख रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज और अमेरिकी प्रतिबंध इस टकराव की अगली दिशा तय कर सकते हैं।

  • पुतिन का ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ फिर तैयार? बुरेवेस्टनिक के संभावित टेस्ट से बढ़ी दुनिया की चिंता

    पुतिन का ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ फिर तैयार? बुरेवेस्टनिक के संभावित टेस्ट से बढ़ी दुनिया की चिंता


    नई दिल्ली।
    रूस की परमाणु क्षमता से लैस नई पीढ़ी की क्रूज मिसाइल बुरेवेस्टनिक (9M730 Burevestnik) एक बार फिर चर्चा में है। आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और विमानों की बढ़ती आवाजाही से ऐसी अटकलें तेज हुई हैं कि रूस इस परमाणु-संचालित मिसाइल का नया फ्लाइट टेस्ट कर सकता है। हालांकि, रूस ने संभावित परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    बुरेवेस्टनिक को रूस लंबे समय से ऐसी मिसाइल के रूप में पेश करता रहा है जिसकी मारक क्षमता बेहद लंबी बताई जाती है। इसे परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम बताया गया है और इसकी खासियत इसका कथित परमाणु-ऊर्जा आधारित प्रोपल्शन सिस्टम है।

    नोवाया जेमल्या में बढ़ी हलचल

    हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, रूस के आर्कटिक क्षेत्र स्थित नोवाया जेमल्या में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रोगाचेवो एयरबेस पर दो Il-976 SKIP विमान पहुंचे हैं। इन विमानों का इस्तेमाल मिसाइल परीक्षण के दौरान उसके रास्ते और उड़ान से जुड़े आंकड़े जुटाने के लिए किया जाता है।

    बेस पर एक A-50U एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमान, चार An-26 परिवहन विमान, एक An-74 और कई हेलिकॉप्टर भी दिखाई दिए हैं। इसके अलावा पिछले बुरेवेस्टनिक परीक्षणों से जुड़े कुछ नागरिक जहाजों की भी बैरेंट्स और कारा सागर में मौजूदगी बताई गई है।

    नॉर्वे के रक्षा विश्लेषक थोर्ड अरे इवरसेन के मुताबिक, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखाई दे रही गतिविधियां बुरेवेस्टनिक के पिछले परीक्षणों से मिलती-जुलती हैं। उनके अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि रूस मिसाइल के फ्लाइट टेस्ट की तैयारी कर रहा हो सकता है।

    14 परीक्षणों में कितनी बार सफल हुई?

    रिपोर्टों के मुताबिक, बुरेवेस्टनिक का अब तक करीब 14 बार परीक्षण किया जा चुका है, लेकिन इनमें सफलता सीमित रही है। रूस ने 2022 और 2025 के परीक्षणों को सफल बताया था।

    रूसी जनरल वैलेरी गेरासिमोव ने दावा किया था कि 2025 के कथित सफल परीक्षण के दौरान मिसाइल ने करीब 15 घंटे में 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की। रूस का दावा है कि उड़ान के दौरान मिसाइल ने अलग-अलग ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज दिशाओं में निर्धारित गतिविधियां कीं और उसकी एयर डिफेंस से बचने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ।

    इसके मुकाबले 2022 में हुआ परीक्षण महज करीब दो मिनट तक चला था।

    इसे ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ क्यों कहा जाता है?

    बुरेवेस्टनिक की सबसे असामान्य विशेषता इसका कथित न्यूक्लियर पावर प्रोपल्शन सिस्टम है। इसी वजह से पश्चिमी विश्लेषकों में इसे लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।

    इसे कभी-कभी ‘फ्लाइंग चेरनोबिल’ कहा जाता है। यह नाम 1986 की चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना से जुड़ी आशंकाओं को दर्शाता है। चिंता यह है कि परमाणु रिएक्टर से संचालित इस तरह की मिसाइल के परीक्षण या दुर्घटना की स्थिति में रेडियोधर्मी सामग्री के फैलने का जोखिम पैदा हो सकता है।

    नाटो ने बुरेवेस्टनिक के लिए ‘Skyfall’ नाम इस्तेमाल किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के पूर्व अधिकारी थॉमस कंट्रीमैन ने भी इस हथियार प्रणाली को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी।

    MIT के शोधकर्ताओं ने कैसे समझा डिजाइन?

    मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के शोधकर्ताओं ने रूसी मीडिया में उपलब्ध तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण कर बुरेवेस्टनिक के आकार और संभावित डिजाइन का अनुमान लगाने की कोशिश की।

    प्रोफेसर जेक हेक्ला और उनके सहयोगी आर. स्कॉट केम्प के विश्लेषण के मुताबिक, मिसाइल रूस की बड़ी क्रूज मिसाइलों से बड़ी है, लेकिन अत्यधिक विशाल नहीं है।

    एयरोडायनामिक मॉडलिंग के आधार पर शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि इसे हवा में बनाए रखने के लिए करीब Mach 0.75, यानी लगभग 575 मील प्रति घंटे की गति की जरूरत हो सकती है। यह गति करीब-करीब किसी आधुनिक यात्री विमान की क्रूजिंग स्पीड के आसपास है।

    न्यूक्लियर रिएक्टर से कैसे मिलती है ताकत?

    शोधकर्ताओं के अनुसार, बुरेवेस्टनिक में डायरेक्ट-साइकिल एयर-ब्रीदिंग न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसी तकनीक इस्तेमाल होने की संभावना है।

    सरल शब्दों में समझें तो इस अवधारणा में हवा को इंजन के भीतर मौजूद परमाणु रिएक्टर से सीधे गुजारा जाता है। रिएक्टर की ऊर्जा हवा को बेहद गर्म करती है और गर्म हवा को पीछे की ओर तेजी से निकालकर थ्रस्ट पैदा किया जाता है।

    यह सामान्य परमाणु रिएक्टरों से अलग अवधारणा है, जहां रिएक्टर की गर्मी को एक अलग कूलेंट सिस्टम के जरिए दूसरे चरण में पहुंचाया जाता है।

    हेक्ला के मुताबिक, अप्रत्यक्ष सिस्टम की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की जा सकती, लेकिन उसका अतिरिक्त वजन और जटिलता इसे कम संभावित विकल्प बनाती है।

    ‘असीमित रेंज’ का दावा कितना अहम?

    बुरेवेस्टनिक को लेकर रूस का सबसे बड़ा दावा इसकी बेहद लंबी या लगभग असीमित रेंज है। पारंपरिक क्रूज मिसाइलों में ईंधन की सीमा सबसे बड़ी बाधाओं में से एक होती है। परमाणु प्रोपल्शन का उद्देश्य इसी सीमा को काफी हद तक कम करना है।

    अगर यह तकनीक व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से काम करती है, तो मिसाइल लंबे समय तक हवा में रह सकती है और अप्रत्याशित दिशा से लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता हासिल कर सकती है। यही वजह है कि पश्चिमी देशों में इसके संभावित परीक्षणों पर नजर रखी जा रही है।

    हालांकि, बुरेवेस्टनिक की वास्तविक क्षमता, विश्वसनीयता और संचालन संबंधी दावों को लेकर स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सीमित है। रूस की ओर से संभावित नए परीक्षण की भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!

    US वीजा पर बड़े एक्शन की तैयारी….. 2 लाख लोगों पर लटकी देश निकाला की तलवार!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का प्रशासन देश में शरण पाने के लिए आवेदन कर चुके या फिलहाल आवेदन की प्रक्रिया में शामिल दो लाख तक विदेशी नागरिकों के कारोबारी और पर्यटन वीजा (Tourist Visa) रद्द करने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास (American History) में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में वीजा रद्द किए जाने की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी और इसे लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आने की संभावना है।

    अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों और दो अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि इस फैसले को चुनौती नहीं दी गई या इसमें बदलाव नहीं किया गया, तो विदेश विभाग आने वाले हफ्तों में 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए बी1 और बी2 वीजा रद्द करने की घोषणा कर सकता है। इसमें ऐसे वीजा धारक शामिल होंगे, जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या वर्तमान में शरण मांग रहे हैं। यह कार्रवाई गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के समन्वय से की जाएगी।


    क्या है बी1 और बी2 वीजा

    बी1 वीजा आम तौर पर कारोबारी यात्राओं के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि बी2 वीजा पर्यटन, परिवार से मिलने या चिकित्सा उपचार के लिए जारी किए जाते हैं। विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, ‘हम डीएचएस के साथ समन्वय कर ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान करने और उनके गैर-आप्रवासी वीजा रद्द करने का काम कर रहे हैं, जो अमेरिका में अल्पकालिक आगंतुक के रूप में आए थे, लेकिन बाद में यहां स्थायी रूप से रहने के लिए शरण का आवेदन दाखिल कर देते हैं।’

    उन्होंने वीजा रद्द किए जाने की संभावित संख्या पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा, ‘चूंकि यह प्रक्रिया जारी रहेगी, इसलिए रद्द किए जाने वाले वीजा की संख्या लगातार बदलती रहेगी और यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।’


    क्या तुरंत देश से निकाल दिए जाएंगे 2 लाख लोग

    अधिकारियों ने कहा कि वीजा रद्द होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि संबंधित लोगों को तुरंत अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। अधिकारियों ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि फिलहाल जिन लोगों के शरण संबंधी मामले लंबित हैं, उनमें से अधिकांश की श्रेणी बदली जा सकती है, लेकिन वे कारोबारी या पर्यटन यात्री के रूप में अपना वीजा दर्जा खो देंगे।


    वीजा पर जारी हैं पाबंदियां

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद से उनके प्रशासन ने वीजा आवेदकों पर लगातार पाबंदियां कड़ी की हैं। इनमें आवेदकों से उनके सोशल मीडिया इतिहास के बारे में अधिक जानकारी मांगना, वीजा प्रक्रिया के लिए महंगे बॉन्ड जमा करने की अनिवार्यता और कुछ देशों के नागरिकों को वीजा जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाना शामिल है।

    उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ऐसे लोगों को निशाने पर लिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे अमेरिका में प्रवेश करने के लिए पर्यटक और कारोबारी वीजा का इस्तेमाल करते हैं और फिर शरण के लिए आवेदन कर देते हैं।

    वर्तमान में बी1 और बी2 वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों से यह पुष्टि करने को कहा जाता है कि वे अमेरिका में शरण के लिए आवेदन नहीं करेंगे। साथ ही, उन्हें यह भी साबित करना होता है कि वे अपने देश लौटने का इरादा रखते हैं।


    करीब 2 लाख हो चुके हैं रद्द

    पिछले 18 महीनों में विदेश विभाग करीब 1.75 लाख वीजा रद्द कर चुका है। इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें नशे में वाहन चलाने से लेकर दुष्कर्म और लूट जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया है या जिन पर ऐसे अपराधों के आरोप हैं। इसके अलावा अमेरिका की नीतियों, खासकर पश्चिम एशिया से जुड़ी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने वाले कुछ लोगों के वीजा भी रद्द किए गए हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं द्वारा अमेरिका आकर यहां बच्चे को जन्म देकर उसे यहां की नागरिकता दिलाने के उद्देश्य वाले विदेशियों के ‘बर्थ टूरिज्म’ (जन्म पर्यटन) पर भी कार्रवाई तेज कर दी है।

  • बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल

    बांग्लादेश में हिंदू परिवार की हत्या पर बड़ा सवाल: क्या हत्या से पहले महिलाओं से हुआ था दुष्कर्म? पुलिस जांच पर उठे सवाल


    ढाका।
    बांग्लादेश के रंगपुर में हिंदू परिवार के चार सदस्यों की हत्या का मामला गंभीर विवाद में बदल गया है। पुलिस ने हत्या के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कुछ अहम साक्ष्य सामने नहीं लाए जा रहे हैं।

    सबसे गंभीर सवाल परिवार की महिला सदस्यों से कथित दुष्कर्म को लेकर उठ रहा है। हालांकि, दुष्कर्म के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की रिपोर्ट में महिलाओं के साथ दुष्कर्म का उल्लेख नहीं किया गया है।

    शवगृह कर्मचारी के दावे से बढ़ा विवाद

    स्थानीय मीडिया के एक स्टिंग ऑपरेशन में शवगृह के एक कर्मचारी ने महिलाओं के शवों से कथित तौर पर वीर्य मिलने का दावा किया। इस दावे के बाद मामले में दुष्कर्म की आशंका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र फॉरेंसिक या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह कहना कि हत्या से पहले निश्चित तौर पर दुष्कर्म हुआ था, फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    चारों की गला घोंटकर हत्या

    पुलिस रिपोर्ट के अनुसार स्कूल शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी, बेटी और बेटे की गला घोंटकर हत्या की गई। मामले में गणपति के रिश्तेदार मुग्धो दास और सिद्धार्थ दास को गिरफ्तार किया गया है।

    स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का आरोप है कि हत्या में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की भी अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    जांच डिटेक्टिव ब्रांच को सौंपी गई

    विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच स्थानीय पुलिस से हटाकर डिटेक्टिव ब्रांच को सौंप दी गई है। जांच एजेंसी हत्या की परिस्थितियों के साथ-साथ घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

    इस बीच हिंदू संगठनों का विरोध जारी है। संगठनों ने मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फॉरेंसिक जांच में दुष्कर्म के आरोप की पुष्टि होती है और क्या हत्या में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। इन दोनों सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • ईरान से तेल-पेट्रोकेमिकल डील पर US की बड़ी कार्रवाई: इंडिया-बेस्ड 4 कंपनियों पर प्रतिबंध, 3 भारतीय भी निशाने पर

    ईरान से तेल-पेट्रोकेमिकल डील पर US की बड़ी कार्रवाई: इंडिया-बेस्ड 4 कंपनियों पर प्रतिबंध, 3 भारतीय भी निशाने पर


    नई दिल्ली। ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार को लेकर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी ट्रेजरी ने 4 इंडिया-बेस्ड कंपनियों और 3 भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन कंपनियों पर ईरानी पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के कारोबार में शामिल होने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित लेनदेन की कुल कीमत करीब 119 मिलियन डॉलर है।

    यह कार्रवाई ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका की ओर से चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। अमेरिकी ट्रेजरी का कहना है कि इसका उद्देश्य उन आर्थिक रास्तों को निशाना बनाना है, जिनका इस्तेमाल ईरान राजस्व जुटाने और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है।

    सदाशिव ओवरसीज पर 69 मिलियन डॉलर के आयात का आरोप
    अमेरिकी ट्रेजरी के अनुसार, इंडिया-बेस्ड सदाशिव ओवरसीज लिमिटेड ने फरवरी 2024 से जून 2025 के बीच करीब 69 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। इनमें कुछ शिपमेंट ऐसी कंपनी से जुड़े बताए गए हैं, जिस पर अमेरिका पहले ही प्रतिबंध लगा चुका है।

    इसके अलावा PP सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड और प्रकृतिस इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 25-25 मिलियन डॉलर के ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के आयात का आरोप लगाया गया है। इन तीनों कंपनियों के कारोबार को मिलाकर कुल रकम करीब 119 मिलियन डॉलर बताई गई है।

    चौथी कंपनी पर पेट्रोकेमिकल शिपमेंट में मदद का आरोप
    अमेरिका ने पोर्टईज पार्टनर्स LLP पर भी कार्रवाई की है। आरोप है कि कंपनी ने ईरान से पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कई खेप भारत लाने में मदद की। अमेरिका ने कंपनियों के अलावा तीन भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंध सूची में शामिल किया है। इनमें PP सॉफ्टटेक के निदेशक प्रशांत गर्ग, पोर्टईज पार्टनर्स से जुड़े इदरीसमिया अशरफमिया शेख और हरीश रामचंद्र रंगी शामिल हैं।

    अमेरिका ने देशों को दी चेतावनी
    अमेरिका पहले ही विभिन्न देशों को चेतावनी दे चुका है कि वे ईरान को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए तय समयसीमा का पालन करें। ऐसा नहीं करने पर संबंधित कंपनियों और संस्थाओं को भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, इस अभियान का मकसद ईरान के उन आर्थिक रास्तों को बंद करना है, जिनके जरिए वह राजस्व हासिल करता है और अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करता है।

  • ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    ऑपरेशन सिंदूर में ईरान ने किसका साथ दिया? पाकिस्तान के दावे से बढ़ा सवाल, तेहरान की भूमिका को लेकर तस्वीर अब भी अलग

    नई दिल्ली ।भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने किसका साथ दिया था, इसे लेकर अब नया दावा सामने आया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा है कि भारत के साथ मई 2025 में हुए टकराव के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को मजबूत समर्थन दिया था। हालांकि, इस दावे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समर्थन किस रूप में दिया गया था।

    ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की थी।

    भारत ने इस अभियान को आतंकवाद के खिलाफ लक्षित कार्रवाई के तौर पर पेश किया था। अभियान के शुरुआती चरण में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बाद में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया। कुछ दिनों तक दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला चला।

    इसी घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का नया बयान सामने आया है। उन्होंने पाकिस्तान और ईरान के संबंधों पर दिए गए लिखित जवाब में कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में पिछले दो वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। इसी संदर्भ में उन्होंने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान ईरान के समर्थन का उल्लेख किया।

    पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, ईरान ने उस समय पाकिस्तान को मजबूत राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन दिया था। हालांकि, डार के बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस समर्थन में सैन्य सहायता, खुफिया सहयोग, हथियार या किसी अन्य प्रकार की प्रत्यक्ष मदद शामिल थी या नहीं। इसलिए केवल इस बयान के आधार पर ईरान की सैन्य भूमिका को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    ईरान की भूमिका को समझने के लिए उस समय उसके सार्वजनिक रुख को भी ध्यान में रखना जरूरी है। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ईरान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने पर जोर दिया था। ईरान के शीर्ष नेतृत्व की ओर से क्षेत्र में शांति और तनाव कम करने की कोशिशों का उल्लेख भी सामने आया था।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मई 2025 में ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत के दौरान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए ईरान के प्रयासों का आभार जताया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी उस दौरान क्षेत्रीय स्तर पर संपर्क और कूटनीतिक प्रयास किए थे।

    यही वजह है कि पाकिस्तान का ताजा दावा और उस समय ईरान की सार्वजनिक कूटनीतिक भूमिका अलग-अलग पहलुओं को सामने रखते हैं। पाकिस्तान इसे अपने पक्ष में मिले मजबूत समर्थन के रूप में देख रहा है, जबकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से यह साफ नहीं होता कि यह समर्थन सैन्य स्तर पर था या मुख्य रूप से राजनीतिक और कूटनीतिक।

    ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने भी स्पष्ट किया था कि अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाना था। भारत का कहना रहा कि कार्रवाई पहलगाम हमले के जिम्मेदार आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ की गई और सैन्य कार्रवाई को लक्षित तथा नियंत्रित रखा गया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 का संघर्ष बाद में युद्धविराम के साथ थमा। इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों ने तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए थे। अब ईरान की भूमिका को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री का बयान सामने आने के बाद उस समय के क्षेत्रीय समीकरणों पर फिर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान ने ईरान के समर्थन का दावा जरूर किया है, लेकिन समर्थन की प्रकृति और सीमा को लेकर स्पष्ट आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ईरान ने पाकिस्तान को किसी प्रत्यक्ष सैन्य अभियान में सहायता दी थी।

  • भारतीय IT प्रोफेशनल्स को एक और झटका देने की तैयारी में ट्रंप…. H-1B वीजा पर बढ़ेगी फीस

    भारतीय IT प्रोफेशनल्स को एक और झटका देने की तैयारी में ट्रंप…. H-1B वीजा पर बढ़ेगी फीस


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में काम करने का सपना देख रहे भारतीय IT प्रोफेशनल्स (Indian IT Professionals) के लिए H-1B वीजा (H-1B Visa) को लेकर मुश्किलें बढ़ सकती हैं. ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B वर्कर वीजा पर 1 लाख डॉलर से ज्यादा की फीस लगाने का प्रस्ताव पेश किया है. प्रस्ताव के तहत यह फीस 1,03,265 डॉलर तय की जा सकती है. खास बात यह है कि नई फीस सिर्फ विदेश से आवेदन करने वालों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि ज्यादातर नए H-1B आवेदकों पर लागू हो सकती है>

    अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (U.S. Department of Homeland Security) ने इस प्रस्ताव को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया है. अगर इसे अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो यह फीस स्थायी तौर पर लागू हो सकती है. प्रशासन इसे साल के अंत तक अंतिम रूप देने की तैयारी में है।


    पहले भी लगाई गई थी भारी फीस

    ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल H-1B वीजा पर अस्थायी तौर पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाई थी. हालांकि, जून में एक फेडरल जज ने इस फीस को गैरकानूनी बताते हुए प्रशासन को इसे वसूलने से रोक दिया था. अब अमेरिकी प्रशासन उस फैसले के खिलाफ अपील कर रहा है. एक अपीलीय अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है, जबकि एक दूसरी अदालत में भी फीस को चुनौती देने से जुड़ा मामला चल रहा है।


    H-1B वीजा क्या है?

    H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां खास तकनीकी और विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखती हैं. टेक्नोलॉजी, शिक्षा और रिसर्च जैसे सेक्टर में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. हर साल 65 हजार सामान्य H-1B वीजा जारी किए जाते हैं. एडवांस डिग्री वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए 20 हजार अतिरिक्त वीजा का प्रावधान है. आम तौर पर ये वीजा 3 से 6 साल तक के लिए मंजूर किए जाते हैं. ट्रंप के प्रस्ताव से पहले H-1B वीजा से जुड़ी फीस आमतौर पर करीब 2 हजार से 5 हजार डॉलर के बीच होती थी. ऐसे में 1,03,265 डॉलर की प्रस्तावित फीस कई गुना ज्यादा है।


    सभी पर नहीं पड़ेगा असर

    हालांकि, प्रस्तावित फीस हर H-1B वीजा पर लागू नहीं होगी. अमेरिका में पहले से स्टूडेंट वीजा पर मौजूद विदेशी नागरिकों को मिलने वाले नए H-1B वीजा इससे बाहर रखे जाएंगे. मौजूदा H-1B वीजा के रिन्यूअल पर भी यह फीस लागू नहीं होगी। फिर भी अगर यह नियम स्थायी होता है तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेश से नए हाई-स्किल्ड कर्मचारियों को हायर करना काफी महंगा हो सकता है. इसका असर भारत जैसे देशों के IT प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका है, जिनकी बड़ी संख्या H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करती है।