Category: International

  • दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की विशाल सुरंग का खुलासा, 50 ईरानी ड्रोन और भारी हथियार बरामद

    दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की विशाल सुरंग का खुलासा, 50 ईरानी ड्रोन और भारी हथियार बरामद


    नई दिल्ली। इजरायल डिफेंस फोर्सेज IDF ने दक्षिणी लेबनान के माजदल जौन क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के एक बड़े भूमिगत नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। सेना के अनुसार, गांव के नीचे करीब 200 मीटर लंबी और 29 मीटर गहरी सुरंग मिली है, जिसमें बड़ी मात्रा में हथियार, एंटी-टैंक मिसाइलें और 50 ईरानी निर्मित विस्फोटक ड्रोन बरामद किए गए हैं।

    IDF ने बताया कि यह कार्रवाई 2026 के युद्धविराम (सीजफायर) के दौरान चलाए जा रहे सुरक्षा अभियान के तहत की गई। पिछले सप्ताह 551वीं ब्रिगेड और विशेष याहलोम यूनिट ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें 20 से अधिक हिज्बुल्लाह लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया गया। सेना ने सुरंग के आसपास मौजूद कई अन्य ठिकानों को भी ध्वस्त कर दिया।

    सुरंग में मौजूद थीं हमले की पूरी तैयारियां

    सेना के मुताबिक, सुरंग को इस तरह तैयार किया गया था कि आतंकी लंबे समय तक इसमें रह सकें। अंदर रहने के लिए कमरे बनाए गए थे और इजरायल की दिशा में लॉन्च शाफ्ट स्थापित किए गए थे। यहां से रॉकेट और मिसाइल हमलों को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। बरामद किए गए 50 सुसाइड ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलें संभावित हमले की तैयारियों की ओर संकेत करती हैं।

    ईरानी मदद से निर्माण का दावा

    IDF का कहना है कि यह सुरंग नेटवर्क पिछले एक दशक में ईरानी वित्तीय और सैन्य सहायता के जरिए तैयार किया गया। सेना के अनुसार, सुरंगों को जानबूझकर आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे बनाया गया था और इनके कुछ हिस्से गांव की मस्जिद के आसपास भी जुड़े हुए थे। इजरायल ने आरोप लगाया है कि हिज्बुल्लाह नागरिक क्षेत्रों का इस्तेमाल अपनी सैन्य गतिविधियों को छिपाने के लिए करता रहा है।

    नागरिक इलाकों के नीचे हथियारों का जखीरा
    ऑपरेशन के दौरान जारी किए गए वीडियो में सुरंग के भीतर हथियारों के भंडार, ड्रोन और रहने की व्यवस्थाएं दिखाई गई हैं। इजरायल का दावा है कि इन संरचनाओं को स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के आसपास विकसित किया गया, जिससे स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता था।

    सीजफायर के बीच बढ़ा तनाव

    इजरायल का आरोप है कि युद्धविराम के बावजूद हिज्बुल्लाह अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ था। दूसरी ओर, लेबनान लगातार इजरायली सैन्य अभियानों पर सवाल उठाता रहा है। इस ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्र में लागू सीजफायर की प्रभावशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    आगे भी जारी रहेगा अभियान

    IDF के प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। सेना का लक्ष्य सीमा क्षेत्र के आसपास मौजूद सभी संभावित सुरंगों और आतंकी ठिकानों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजरायल की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की कोई नई कोशिश हुई तो सेना और कड़ी कार्रवाई करेगी।

  • फादर्स डे पर ब्रिटेन, यूएई, केन्या और जिम्बाब्वे के नेताओं ने पिता के महत्व पर साझा किए भावनात्मक संदेश

    फादर्स डे पर ब्रिटेन, यूएई, केन्या और जिम्बाब्वे के नेताओं ने पिता के महत्व पर साझा किए भावनात्मक संदेश


    नई दिल्ली । फादर्स डे के अवसर पर दुनिया भर के नेताओं ने अपने-अपने तरीके से पिता के महत्व को याद किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। इस खास मौके पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि पिता बनना उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी है और वह आज अपने पिता को याद कर रहे हैं, जिनकी वजह से वह आज अपने बच्चों के पिता हैं। उनका संदेश सरल लेकिन भावनात्मक था, जिसमें उन्होंने पारिवारिक रिश्तों और पिता की भूमिका को जीवन की नींव बताया।

    इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने पिता को परिवार की स्थिरता और खुशी का आधार बताया। उन्होंने अपने संदेश में देश के संस्थापक शेख जायद को याद करते हुए उन्हें एक आदर्श पिता और नेता के रूप में श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने अपने जीवन में दया, समझदारी और नेतृत्व के मूल्यों को स्थापित किया।

    यूएई के उप प्रधानमंत्री हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने भी पिता के योगदान को प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता केवल उपलब्धियों से नहीं बल्कि इस बात से मापी जाती है कि हम दूसरों पर क्या प्रभाव छोड़ते हैं और देश की सेवा को सम्मान कैसे मानते हैं। उनके अनुसार पिता न केवल मार्गदर्शक होते हैं बल्कि जीवन के मूल्यों को आकार देने वाले शिक्षक भी होते हैं।

    यूएई के उपराष्ट्रपति शेख मंसूर बिन जायद अल नाहयान ने भी अपने संदेश में पिता को ज्ञान, उदारता और मानवता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि एक पिता परिवार की नींव होता है और उसकी सीख आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती है।

    अफ्रीकी देशों में भी फादर्स डे पर भावनात्मक संदेश देखने को मिले। केन्या की फर्स्ट लेडी राहेल चेबेट रूटो ने राष्ट्रपति विलियम रूटो को देश के पिता के रूप में सम्मान देते हुए उनके समर्पण और सेवा भावना की सराहना की। वहीं जिम्बाब्वे के नेता नेल्सन चामिसा ने कहा कि एक देश को आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता होती है, जिसे उन्होंने पिता के रूप में प्रतीकात्मक रूप से व्यक्त किया।

    इन सभी संदेशों से स्पष्ट है कि पिता केवल एक पारिवारिक भूमिका नहीं बल्कि समाज, नेतृत्व और मूल्यों के निर्माण का आधार माने जाते हैं। फादर्स डे ने एक बार फिर इस बात को दुनिया के सामने रखा कि पिता का योगदान केवल परिवार तक सीमित नहीं होता बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य को भी आकार देता है।

  • वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव भारत-अमेरिका रिश्ते मजबूत ट्रंप की नीति पर उठे सवाल

    वैश्विक राजनीति में बड़ा बदलाव भारत-अमेरिका रिश्ते मजबूत ट्रंप की नीति पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी बार वापसी के बाद में वैश्विक भू-राजनीति का परिदृश्य तेजी से बदलता नजर आ रहा है, जहां अमेरिका की विदेश नीति एक नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में शुरुआत से ही दुनिया भर में टैरिफ और व्यापारिक दबाव की राजनीति तेज थी, जिससे कई देशों के साथ अमेरिका के संबंधों में तनाव की स्थिति बन गई थी। लेकिन ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच अमेरिकी प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसका सीधा असर भारत-अमेरिका संबंधों पर भी पड़ा है।

    ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका का ध्यान व्यापारिक विवादों से हटकर सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक गठबंधनों की ओर केंद्रित हो गया। इस बदलाव ने भारत जैसे देशों के महत्व को और बढ़ा दिया, जो लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत ने इस दौरान अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई, चाहे वह रूस से तेल खरीदने का मामला हो या वैश्विक व्यापारिक दबाव।

    इस पूरी स्थिति में भारत को अमेरिका का एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार माना जाने लगा है। वाशिंगटन के लिए यह स्पष्ट हो गया है कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए नई दिल्ली की भूमिका बेहद अहम है। यही कारण है कि हाल के समय में अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भारत के प्रधानमंत्री की सराहना भी देखने को मिली है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

    हालांकि, अमेरिकी नीति में यह नरमी स्थायी है या केवल परिस्थितिजन्य, इस पर अभी सवाल बने हुए हैं। ट्रंप के पिछले रुख को देखते हुए यह संभावना भी जताई जा रही है कि जैसे-जैसे वैश्विक हालात स्थिर होंगे, व्यापारिक दबाव और टैरिफ की राजनीति फिर से लौट सकती है। चीन को लेकर भी अमेरिका का रुख कुछ हद तक नरम दिखाई दे रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच पूरी तरह से विश्वास की स्थिति अभी नहीं बनी है।

    भारत ने इस पूरे घटनाक्रम में यह स्पष्ट किया है कि वह किसी दबाव में आकर अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता नहीं करेगा। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिका अपनी पुरानी नीतियों की ओर लौटता है या फिर भारत के साथ साझेदारी को एक स्थायी रणनीतिक दिशा देता है।

  • ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की एंट्री, शहबाज शरीफ पहुंचे स्विट्जरलैंड, मध्यस्थता की भूमिका पर नजर

    ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की एंट्री, शहबाज शरीफ पहुंचे स्विट्जरलैंड, मध्यस्थता की भूमिका पर नजर


    नई दिल्ली ।
    मध्य पूर्व में चल रहे तनाव को कम करने और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमैटिक घटनाक्रम देखने को मिला है। इस बातचीत के अगले चरण के लिए ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, और अब इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भी एंट्री ने वैश्विक ध्यान खींच लिया है।

    जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर का प्रतिनिधिमंडल भी स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है। स्विस विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लागू कराने की प्रक्रिया में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाने जा रहा है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि शहबाज शरीफ अपने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ज्यूरिख पहुंचे हैं और वे बर्गेनस्टॉक में होने वाली अहम वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस बैठक का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच हुए ज्ञापन समझौते को आगे लागू करने पर चर्चा करना बताया गया है।

    इस बीच, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही वहां मौजूद है। ईरान की तरफ से इस बातचीत को “मिनाब 168” कोडनेम के तहत संचालित किया जा रहा है।

    स्विस विदेश मंत्रालय ने पहले ही इस वार्ता को लेकर कहा था कि वह दोनों पक्षों के बीच एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि बातचीत बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।

    हालांकि यह वार्ता पहले निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी थी, लेकिन अब सभी प्रमुख पक्षों की मौजूदगी के साथ इसके आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस हाई-लेवल डिप्लोमैटिक मीटिंग पर टिकी हुई है, क्योंकि इसमें न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों का भविष्य तय हो सकता है, बल्कि मध्य पूर्व की क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

  • ईरान वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, कई दिनों तक चल सकती है बातचीत

    ईरान वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, कई दिनों तक चल सकती है बातचीत


    नई दिल्ली । अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ अगले चरण की महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं। इस दौरे को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही अंतरराष्ट्रीय चिंताओं के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

    जेडी वेंस ने जॉइंट बेस एंड्रयूज से रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि ईरान के साथ होने वाली इस बैठक से परमाणु मुद्दे पर ठोस प्रगति होगी। साथ ही उन्होंने लेबनान में लागू नाजुक संघर्ष विराम को बनाए रखने पर भी जोर दिया।

    सूत्रों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुका है और दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत पहले से ही शुरू हो चुकी है। यह वार्ता ल्यूसर्न के पास किसी डिप्लोमैटिक स्थल पर होने की संभावना है और इसमें कई दिनों तक चर्चा चल सकती है।

    वेंस ने बताया कि इस बातचीत का शुरुआती लक्ष्य एक स्पष्ट ढांचा तैयार करना और आगे की वार्ता के लिए मजबूत आधार बनाना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे स्वयं इस दौरे पर एक-दो दिन ही रह सकते हैं, लेकिन पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर फोकस रहेगा।

    मिडिल ईस्ट में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी तनाव ने पहले से ही शांति प्रयासों को प्रभावित किया है। ऐसे में अमेरिका इस वार्ता को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देख रहा है।

    वेंस ने कहा कि हालांकि हालात चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन कई क्षेत्रों में स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग और डिप्लोमैटिक टीम के प्रयासों की भी सराहना की, साथ ही स्वीकार किया कि संघर्ष विराम को बनाए रखना लगातार निगरानी और प्रयास की मांग करता है।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि इसके नतीजे न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों को प्रभावित करेंगे, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।

  • अमेरिका में गूंजा योग का संदेश, न्यूयॉर्क से वॉशिंगटन तक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन

    अमेरिका में गूंजा योग का संदेश, न्यूयॉर्क से वॉशिंगटन तक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर इस बार अमेरिका में भी योग का व्यापक उत्सव देखने को मिला, जहां यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर एक बड़े स्वास्थ्य और वेलनेस मूवमेंट के रूप में उभरकर सामने आया। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर वाशिंगटन डीसी, टेक्सास, कैलिफोर्निया और कई अन्य राज्यों तक योग दिवस के कार्यक्रमों ने पूरे देश में लोगों को एक साथ जोड़ दिया।

    वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के नेतृत्व में लिंकन मेमोरियल के पास बड़े स्तर पर सामूहिक योग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” थीम पर योगाभ्यास किया। इस कार्यक्रम में राजनयिकों, समुदाय के नेताओं और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

    न्यूयॉर्क में सेंट्रल पार्क और टाइम्स स्क्वायर जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर योग सत्रों का आयोजन किया गया, जहां हजारों लोगों ने खुले आसमान के नीचे योग किया। टाइम्स स्क्वायर को एक दिन के लिए विशाल योग स्टूडियो में बदल दिया गया, जो इस आयोजन की लोकप्रियता और वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

    टेक्सास के शुगर लैंड और ब्रेजोस रिवर पार्क में भी बड़े स्तर पर योग कार्यक्रम हुए, जहां स्थानीय प्रशासन, भारतीय समुदाय और योग प्रेमियों ने मिलकर भाग लिया। इसी तरह सैन फ्रांसिस्को के क्रिसी फील्ड और गोल्डन गेट ब्रिज के पास भी योगाभ्यास के आयोजन ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

    इस वर्ष कई अमेरिकी राज्यों ने योग दिवस को आधिकारिक समर्थन भी दिया है। न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट में एक प्रस्ताव पारित कर इसे 2026 में आधिकारिक योग दिवस घोषित करने की अपील की गई है, जबकि डेलावेयर और कैलिफोर्निया सहित कई राज्यों और शहरों ने भी योग के महत्व को मान्यता दी है।

    शिकागो, अटलांटा, बोस्टन, मियामी, डेनवर और कई विश्वविद्यालय परिसरों में भी सामुदायिक योग सत्र आयोजित किए गए, जिससे यह साफ हुआ कि योग अब अमेरिकी समाज के बड़े हिस्से में जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है।

    आयोजकों और विशेषज्ञों के अनुसार, योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक शांति और संतुलित जीवन के लिए भी बेहद प्रभावी साधन बन चुका है। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि योग अब भारत की सांस्कृतिक विरासत से आगे बढ़कर एक वैश्विक स्वास्थ्य आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसे दुनिया भर में व्यापक स्वीकृति मिल रही है।

  • ईरान-अमेरिका बातचीत पर दुनिया की नजर, परमाणु मुद्दे और शांति समझौते पर होगी चर्चा

    ईरान-अमेरिका बातचीत पर दुनिया की नजर, परमाणु मुद्दे और शांति समझौते पर होगी चर्चा


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को कम करने और संभावित शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ईरान और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ता स्विट्जरलैंड में शुरू होने जा रही है। इस बातचीत के लिए ईरान का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार देर रात स्विट्जरलैंड पहुंच गया है, जिसे कोडनेम ‘मिनाब 168’ के तहत जाना जा रहा है।

    स्विस विदेश मंत्रालय ने इस वार्ता को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि वह ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करता है और दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल उपलब्ध करा रहा है। यह वार्ता बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित की जा रही है, जहां पहले से तय समझौते को लागू करने और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

    सूत्रों के अनुसार, यह बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के कार्यान्वयन से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर समाधान की दिशा तलाशना है। इससे पहले इस वार्ता को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस बीच, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि बातचीत में मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में लागू संघर्ष विराम को बनाए रखने जैसे मुद्दों पर फोकस किया जाएगा।

    वेंस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह बैठक कई दिनों तक चल सकती है और इससे दोनों देशों के बीच संवाद को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ओर से भी कुछ मुद्दे रखे जाएंगे, जिन पर बातचीत के दौरान चर्चा की जाएगी।

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस वार्ता पर टिकी हुई है, क्योंकि इसके परिणाम न केवल ईरान-अमेरिका संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिरता पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।

  • योग का वैश्विक उत्सव, जापान में बारिश के बीच भी जुटे 2100 प्रतिभागी

    योग का वैश्विक उत्सव, जापान में बारिश के बीच भी जुटे 2100 प्रतिभागी

    नई दिल्ली । 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरी दुनिया में योग का उत्साह देखने को मिला, जहां सीमाओं और मौसम की बाधाएं भी इस वैश्विक आयोजन के जोश को कम नहीं कर सकीं। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रही, जिसके तहत सभी आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

    दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। यूएई की राजधानी दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें दुबई पुलिस के अधिकारी, योग साधक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया।

    स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भी योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर लोगों को योग को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने और इसे परिवार व समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया।

    सबसे उल्लेखनीय आयोजन जापान के त्सुकिजी होंगन-जी मंदिर में देखने को मिला, जहां भारी बारिश के बावजूद 2100 से अधिक योग प्रेमियों ने योगाभ्यास किया। “बारिश हो या धूप, योग नहीं रुकेगा” के संदेश के साथ प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

    इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में लगभग 2500 स्थानों पर 210 से अधिक भारतीय मिशनों द्वारा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत में मुख्य समारोह कोलकाता के रेड रोड पर हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया।

    प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि योग ने सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से ऊपर उठकर विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है, और आज पूरी दुनिया इसकी शक्ति को स्वीकार कर रही है।

    नई दिल्ली । 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरी दुनिया में योग का उत्साह देखने को मिला, जहां सीमाओं और मौसम की बाधाएं भी इस वैश्विक आयोजन के जोश को कम नहीं कर सकीं। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रही, जिसके तहत सभी आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

    दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। यूएई की राजधानी दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें दुबई पुलिस के अधिकारी, योग साधक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया।

    स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भी योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर लोगों को योग को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने और इसे परिवार व समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया।

    सबसे उल्लेखनीय आयोजन जापान के त्सुकिजी होंगन-जी मंदिर में देखने को मिला, जहां भारी बारिश के बावजूद 2100 से अधिक योग प्रेमियों ने योगाभ्यास किया। “बारिश हो या धूप, योग नहीं रुकेगा” के संदेश के साथ प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

    इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में लगभग 2500 स्थानों पर 210 से अधिक भारतीय मिशनों द्वारा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत में मुख्य समारोह कोलकाता के रेड रोड पर हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया।

    प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि योग ने सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से ऊपर उठकर विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है, और आज पूरी दुनिया इसकी शक्ति को स्वीकार कर रही है।
    12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर पूरी दुनिया में योग का उत्साह देखने को मिला, जहां सीमाओं और मौसम की बाधाएं भी इस वैश्विक आयोजन के जोश को कम नहीं कर सकीं। इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रही, जिसके तहत सभी आयु वर्ग के लोगों को स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

    दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय मिशनों और स्थानीय संगठनों के सहयोग से बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। यूएई की राजधानी दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें दुबई पुलिस के अधिकारी, योग साधक, विद्यार्थी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में पुलिस बैंड की प्रस्तुति ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया।

    स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भी योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जहां स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारतीय राजदूत अपूर्वा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर लोगों को योग को अपनी दैनिक जीवनशैली में शामिल करने और इसे परिवार व समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया।

    सबसे उल्लेखनीय आयोजन जापान के त्सुकिजी होंगन-जी मंदिर में देखने को मिला, जहां भारी बारिश के बावजूद 2100 से अधिक योग प्रेमियों ने योगाभ्यास किया। “बारिश हो या धूप, योग नहीं रुकेगा” के संदेश के साथ प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और एकजुटता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

    इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर दुनिया भर में लगभग 2500 स्थानों पर 210 से अधिक भारतीय मिशनों द्वारा योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारत में मुख्य समारोह कोलकाता के रेड रोड पर हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भाग लिया।

    प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि योग ने सीमाओं, भाषाओं और संस्कृतियों से ऊपर उठकर विश्व को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है, और आज पूरी दुनिया इसकी शक्ति को स्वीकार कर रही है।

  • होर्मुज से जहाजों की लंबी कतार, नियम सख्त कर ईरान ने संभाली स्थिति

    होर्मुज से जहाजों की लंबी कतार, नियम सख्त कर ईरान ने संभाली स्थिति


    नई दिल्ली । होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही एक बार फिर शुरू होते ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लंबे समय तक सीमित संचालन और सुरक्षा कारणों से बाधित रहने के बाद जब जहाजों को गुजरने की अनुमति मिली तो अचानक बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाज एक साथ कतार में लग गए। इससे समुद्री मार्ग पर जाम जैसी स्थिति बन गई है और संचालन व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं ताकि आवाजाही सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से हो सके।

    नए नियमों के तहत अब किसी भी जहाज को होर्मुज से गुजरने के लिए कम से कम अड़तालीस घंटे पहले ट्रांजिट आवेदन जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही जहाज को पूरी यात्रा के दौरान संबंधित अथॉरिटी से लगातार संपर्क बनाए रखना होगा। यदि किसी भी स्तर पर संपर्क या प्रक्रिया में चूक होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जहाज के मालिक और ऑपरेटर पर होगी। अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी जहाजों को अपनी यात्रा से जुड़ी विस्तृत जानकारी जैसे मार्ग यात्रा समय माल की प्रकृति और संपर्क विवरण पहले से साझा करना होगा।

    होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद बड़ा है। यह वही मार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और दुनिया के प्रमुख तेल और गैस निर्यात का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। वैश्विक स्तर पर खाड़ी देशों के बड़े हिस्से का ऊर्जा निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत चीन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं। भारत के लिए भी कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से आता है जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस जलमार्ग पर आवाजाही बेहद सीमित हो गई थी। कई जहाजों को सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया था और कुछ पर हमले का खतरा भी बना हुआ था। युद्ध जैसी स्थितियों के दौरान समुद्र में माइन्स बिछाने जैसी घटनाओं ने भी जहाजों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी थी। अब जब धीरे धीरे संचालन बहाल किया जा रहा है तो एक साथ बड़ी संख्या में जहाजों के पहुंचने से दबाव बढ़ गया है।

    नई व्यवस्था के तहत पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने ट्रांजिट प्रक्रिया को डिजिटल और नियंत्रित प्रणाली से जोड़ दिया है। जहाजों को पहले से ऑनलाइन आवेदन करना होगा और यात्रा से जुड़ी सभी जानकारियां सही समय पर उपलब्ध करानी होंगी। इसके बाद ही उन्हें गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अथॉरिटी का कहना है कि यह कदम सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी दुर्घटना की संभावना को कम करने के लिए उठाया गया है।

    समझौते के अनुसार शुरुआती साठ दिनों तक किसी भी जहाज से मार्ग उपयोग के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अवधि में सुरक्षा और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़ी सभी लागत ईरान सरकार वहन करेगी ताकि व्यापारिक आवाजाही को सुचारू रूप से दोबारा स्थापित किया जा सके।

    हाल के दिनों में कुछ ही जहाज इस मार्ग से गुजर पाए हैं जबकि पहले की तुलना में यह संख्या बहुत कम रही थी। अब जब क्षेत्रीय स्थिति में बदलाव आ रहा है तो होर्मुज फिर से वैश्विक व्यापार का केंद्र बनता दिख रहा है लेकिन इसके साथ ही सुरक्षा और प्रबंधन की चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं।

  • पाकिस्तान के बन्नू में दो लगातार धमाकों से दहशत 7 की मौत कई घायल

    पाकिस्तान के बन्नू में दो लगातार धमाकों से दहशत 7 की मौत कई घायल


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में एक के बाद एक हुए दो शक्तिशाली धमाकों ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इन धमाकों में सात लोगों की मौत हो गई जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने इस घटना को गंभीर आतंकी हमला बताया है और इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

    घटना बन्नू के वजीर सब डिवीजन के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी और अर्ध जनजातीय क्षेत्र मरका बेरा में हुई। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार पहला धमाका उस समय हुआ जब एक निजी वाहन यात्रियों को लेकर डोमेल की दिशा में जा रहा था। इसी दौरान रिमोट कंट्रोल के जरिए लगाए गए विस्फोटक उपकरण को सक्रिय किया गया। धमाका इतना तेज था कि वाहन पूरी तरह नष्ट हो गया और उसमें सवार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

    पहले धमाके के बाद जैसे ही राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया और घायलों को अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई तभी लगभग एक किलोमीटर दूर दूसरा विस्फोट हुआ। यह धमाका भी रिमोट कंट्रोल तकनीक से किया गया बताया जा रहा है। इस दूसरे हमले में एक और वाहन निशाना बना और उसमें सवार दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

    लगातार दो धमाकों से इलाके में अफरा तफरी फैल गई। स्थानीय लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। पुलिस और सुरक्षा बल तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया। रेस्क्यू टीमों ने घायलों और शवों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में पहुंचाया।

    सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई है कि इलाके में अभी और भी विस्फोटक उपकरण छिपाए गए हो सकते हैं। इसी वजह से पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर तैनात किया गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।

    पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने भी इसे नागरिकों पर किया गया कायराना हमला बताया है।

    बन्नू जिले में पिछले कुछ महीनों से आतंकी घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इससे पहले भी कई बार सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच झड़पें हो चुकी हैं। हाल ही में एक पुल को विस्फोट से उड़ाने की कोशिश और टारगेट किलिंग की घटनाओं ने सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया था।

    इस ताजा हमले ने एक बार फिर खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है और प्रशासन के सामने शांति बहाली की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।