Category: International

  • सार्वजनिक मंच पर पारंपरिक नियमों की अनदेखी पर ईरानी गायिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश

    सार्वजनिक मंच पर पारंपरिक नियमों की अनदेखी पर ईरानी गायिका के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, मानवाधिकार संगठनों में आक्रोश

    नई दिल्ली । ईरान में सख्त इस्लामी ड्रेस कोड और हिजाब नियमों के उल्लंघन को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वहां की एक अदालत ने देश की मशहूर गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब के सार्वजनिक रूप से उपस्थित होने और स्लीवलेस ड्रेस पहनने के आरोप में 74 कोड़ों की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद से न केवल ईरान के भीतर बल्कि वैश्विक स्तर पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कला जगत से जुड़े लोगों में गहरा असंतोष और आक्रोश देखा जा रहा है। इस सख्त कानूनी कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों पर एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है।

    मिली जानकारी के अनुसार, गायिका परस्तू अहमदी हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक हिजाब को छोड़कर बिना सिर ढके और स्लीवलेस पोशाक में नजर आई थीं। सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद ईरान के रूढ़िवादी प्रशासन और नैतिक पुलिस ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया। इसके बाद मामले की सुनवाई करते हुए स्थानीय अदालत ने इसे देश के शरिया कानूनों और सार्वजनिक शालीनता के नियमों का खुला उल्लंघन माना और गायिका को कोड़े मारने की कठोर सजा मुकर्रर कर दी।

    ईरान में साल 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद भड़के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद से ही महिलाओं के पहनावे और हिजाब को लेकर कानून बेहद सख्त कर दिए गए हैं। प्रशासन लगातार सार्वजनिक स्थानों, सांस्कृतिक आयोजनों और सोशल मीडिया पर महिलाओं की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है। परस्तू अहमदी जैसी लोकप्रिय हस्ती पर इस प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करके प्रशासन ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, चाहे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा कितनी भी बड़ी क्यों न हो।

    इस अदालती फैसले के सार्वजनिक होने के बाद से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने ईरान सरकार की कड़ी आलोचना शुरू कर दी है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि कलाकारों पर इस प्रकार की शारीरिक प्रताड़ना की सजा थोपना पूरी तरह से अमानवीय है और यह महिलाओं के बुनियादी अधिकारों का हनन है। सोशल मीडिया पर भी दुनिया भर के लोग गायिका के समर्थन में आ गए हैं और इस दंडात्मक कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर ईरान के सख्त कानूनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच चल रहे पुराने संघर्ष को वैश्विक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है।

  • डोभाल की अध्यक्षता में ब्रिक्स एनएसए मीटिंग, रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा पर फोकस

    डोभाल की अध्यक्षता में ब्रिक्स एनएसए मीटिंग, रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा पर फोकस

    नई दिल्ली । नई दिल्ली में 22 से 23 जून 2026 को ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन होने जा रहा है जिसकी अध्यक्षता भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस उच्च स्तरीय बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और एनएसए शामिल होंगे और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया तेजी से बदलते भू राजनीतिक परिदृश्य और नई तकनीकी चुनौतियों का सामना कर रही है। बैठक का मुख्य विषय आज की दुनिया के सामने मौजूद गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां तय किया गया है जिसके तहत साइबर सुरक्षा आतंकवाद सूचना युद्ध और उभरती तकनीक के सुरक्षा प्रभाव जैसे मुद्दों पर फोकस किया जाएगा।
    दो दिन चलने वाली इस बैठक में सदस्य देश अपने अनुभव और रणनीतिक दृष्टिकोण साझा करेंगे ताकि सामूहिक सुरक्षा सहयोग को और मजबूत किया जा सके। विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक के दौरान काउंटर टेररिज्म और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के सुरक्षित उपयोग पर ब्रिक्स के संयुक्त कार्य समूहों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इससे सीमा पार खतरों से निपटने और एक मजबूत बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचा विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
    भारत इस मंच के माध्यम से ब्रिक्स के भीतर सुरक्षा सहयोग को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रखते हुए उसे रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों तक विस्तारित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसी बीच इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के शामिल होने की संभावना भी चर्चा में है जो अगस्त 2025 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा।
    वांग यी चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका भी निभाते हैं और एनएसए अजीत डोभाल के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। इस यात्रा को भारत और चीन के बीच चल रहे संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि वैश्विक कूटनीतिक गतिविधियों और अन्य अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की टाइमिंग के कारण पिछले कुछ ब्रिक्स बैठकों में उनकी अनुपस्थिति भी देखी गई थी।
    इस बार की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें बड़े भू राजनीतिक समीकरणों के बीच सुरक्षा सहयोग के नए रास्ते तलाशने की कोशिश होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक भरोसा बढ़ाने और वैश्विक सुरक्षा ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • बांग्लादेश में पत्रकार गिरफ्तारी से मचा बवाल ,प्रेस स्वतंत्रता पर फिर उठे सवाल

    बांग्लादेश में पत्रकार गिरफ्तारी से मचा बवाल ,प्रेस स्वतंत्रता पर फिर उठे सवाल


    नई दिल्ली । बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पत्रकारों के खिलाफ की गई हालिया कार्रवाई ने देश की मीडिया स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।  मामला स्थानीय सरकार ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री मीर शाहे आलम से जुड़ी एक कथित भ्रष्टाचार रिपोर्ट से संबंधित बताया जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साइबर सुरक्षा अधिनियम के तहत एक पत्रकार को गिरफ्तार किया गया है और छह अन्य पत्रकारों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

    गिरफ्तार किए गए पत्रकार की पहचान दैनिक अग्रजात्रा प्रतिदिन के कार्यवाहक संपादक रेजानुर इस्लाम के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्हें गाजीपुर सदर क्षेत्र से हिरासत में लिया गया और बाद में न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया। यह पूरी कार्रवाई उस रिपोर्ट से जुड़ी बताई जा रही है जिसमें राज्य मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे और जिसे कथित रूप से मानहानिकारक बताया गया।

    स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस मामले में शिकायत बोगरा प्रेस क्लब से जुड़े एक सदस्य की ओर से दर्ज कराई गई थी जिसके बाद अदालत ने जांच और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद संपादक प्रकाशक और रिपोर्टरों सहित कुल छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। जिन लोगों पर मामला दर्ज हुआ है उनमें प्रकाशक मेहदी हसन न्यूज एडिटर अशरफ अली फारूकी रिपोर्टर सालेह कैसर बोगरा के रिपोर्टर मोहम्मद शम्स और जिला रिपोर्टर सब्बीर हसन शामिल हैं।

    आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में राज्य मंत्री को भ्रष्टाचार विवाद से जोड़कर पेश किया गया था जिसे शिकायतकर्ता ने झूठा और मानहानिकारक बताया। दूसरी ओर इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और मीडिया हलकों में चिंता बढ़ गई है। अवामी लीग ने इस गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए कहा है कि आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को आपराधिक मामला बनाना प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरे का संकेत है।

    पार्टी ने यह भी कहा कि पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई स्वतंत्र मीडिया के लिए स्थान को सीमित कर सकती है। मीडिया संगठनों और पत्रकार समूहों में भी इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है क्योंकि इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत मानहानि और गलत रिपोर्टिंग के मामलों में कार्रवाई की जाती है
    और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में पत्रकार सुरक्षा और साइबर कानूनों के उपयोग को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह विवाद मीडिया और सरकार के बीच तनाव को और बढ़ाएगा या किसी समाधान की ओर ले जाएगा।

  • महासागर के भीतर मंडरा रही बड़ी तबाही की चेतावनी, AMOC करंट के कमजोर होने से बढ़ा खतरा

    महासागर के भीतर मंडरा रही बड़ी तबाही की चेतावनी, AMOC करंट के कमजोर होने से बढ़ा खतरा


    नई दिल्ली । धरती पर जलवायु परिवर्तन को लेकर अक्सर जंगलों की आग, पिघलते ग्लेशियर और बढ़ते समुद्र स्तर की तस्वीरें सामने आती हैं, लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा अदृश्य खतरा तेजी से बढ़ रहा है जो पूरी दुनिया के मौसम चक्र को बदल सकता है। यह खतरा अटलांटिक महासागर की गहराइयों में बहने वाली विशाल समुद्री धारा AMOC यानी अटलांटिक मेरिडियोनल ओवरटर्निंग सर्कुलेशन से जुड़ा है, जिसे धरती की जलवायु प्रणाली की रीढ़ भी माना जाता है।

    AMOC एक ऐसा महासागरीय तंत्र है जो उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से गर्म पानी को उत्तरी अटलांटिक और यूरोप की ओर ले जाता है। वहां यह पानी ठंडा होकर भारी हो जाता है और हजारों मीटर गहराई में जाकर वापस दक्षिण दिशा की ओर बहता है। यह निरंतर प्रक्रिया सदियों से वैश्विक तापमान, समुद्री लवणता और मौसम संतुलन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती रही है।

    हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों और उपग्रह डेटा संकेतों के अनुसार यह शक्तिशाली समुद्री धारा अब धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह प्रणाली और अधिक धीमी पड़ गई या पूरी तरह असंतुलित हो गई, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार इसके कमजोर होने से उत्तरी यूरोप में सर्दियां और अधिक कठोर हो सकती हैं, जहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे तक गिर सकता है। वहीं दूसरी ओर, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में मानसून के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा अमेरिका के पूर्वी तट पर समुद्र स्तर बढ़ने का खतरा भी बढ़ सकता है, जिससे तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

    इस पूरे मुद्दे की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह खतरा दिखाई नहीं देता। यह समुद्र की हजारों मीटर गहराई में बेहद धीमी गति से काम करता है, इसलिए इसका कोई स्पष्ट दृश्य प्रमाण नहीं होता जिसे कैमरे में कैद कर दिखाया जा सके। इसी कारण यह विषय आम जनता की नजरों से अक्सर दूर रह जाता है, जबकि इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर बेहद बड़ा हो सकता है।

    वैज्ञानिकों का कहना है कि आधुनिक जलवायु संकटों में सबसे बड़ी समस्या यही है कि कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं अदृश्य हैं। वे न तो तूफान की तरह दिखाई देती हैं और न ही आग की तरह तुरंत महसूस होती हैं, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय में कहीं अधिक विनाशकारी हो सकता है।

    इस स्थिति की तुलना अक्सर महासागरों में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण से की जाती है, जो आंखों से दिखाई नहीं देता लेकिन पूरे समुद्री जीवन को प्रभावित करता है। इसी तरह AMOC भी एक ऐसा सिस्टम है जिसकी गिरावट धीरे-धीरे लेकिन गहरे प्रभाव के साथ सामने आ सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जलवायु संकेतों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़े संकट को जन्म दे सकता है। इसलिए वैश्विक स्तर पर इस पर लगातार निगरानी और शोध बेहद जरूरी है ताकि समय रहते इसके प्रभावों को समझा और नियंत्रित किया जा सके।

  • ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘महान और सख्त नेता’, भारत की आर्थिक तरक्की की भी की तारीफ

    ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘महान और सख्त नेता’, भारत की आर्थिक तरक्की की भी की तारीफ


    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। उन्होंने पीएम मोदी को महान नेता और बहुत सख्त इंसान बताते हुए उनकी नेतृत्व शैली और राजनीतिक क्षमता की प्रशंसा की। यह बयान उन्होंने अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान दिया, जिसमें वैश्विक नेतृत्व, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

    इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि दुनिया के चुनिंदा नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नेता हैं जिनकी वे सबसे अधिक इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का लंबे समय से सत्ता में बने रहना और भारत जैसे विशाल लोकतंत्र का नेतृत्व करना उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत जैसे देश में स्थिर नेतृत्व बनाए रखना आसान नहीं है, लेकिन पीएम मोदी ने यह काम सफलतापूर्वक किया है।

    ट्रंप ने आगे कहा कि पीएम मोदी बाहर से शांत स्वभाव के दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वह बेहद दृढ़ और सख्त निर्णय लेने वाले नेता हैं। उनके अनुसार, यही संयोजन उन्हें एक प्रभावशाली वैश्विक नेता बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि नेतृत्व के उच्च स्तर पर पहुंचने के लिए बुद्धिमत्ता और कठोर निर्णय क्षमता दोनों जरूरी हैं, और मोदी में यह दोनों गुण मौजूद हैं।

    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने पीएम मोदी की नीतियों को इस विकास का एक महत्वपूर्ण कारण बताया। ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी अक्सर शांति और कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं, जो उनके नेतृत्व को और अधिक प्रभावी बनाता है।

    इंटरव्यू में ट्रंप ने वैश्विक नेताओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी तारीफ की और दोनों नेताओं को मजबूत नेतृत्व का उदाहरण बताया। हालांकि, उन्होंने विशेष रूप से पीएम मोदी को ऐसे नेताओं में शामिल किया जिनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे अधिक पहचान और सम्मान है।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2014 से भारत के प्रधानमंत्री हैं और लंबे समय से देश की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है।

    भारत और अमेरिका के संबंधों में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप जैसे बड़े कार्यक्रमों ने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंधों को भी विशेष पहचान दी थी। ट्रंप की यह ताजा टिप्पणी एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक राजनीति में पीएम मोदी की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ले आई है।

  • स्विट्जरलैंड बैठक टली, ईरान–अमेरिका के बीच नई बातचीत की तैयारी तेज

    स्विट्जरलैंड बैठक टली, ईरान–अमेरिका के बीच नई बातचीत की तैयारी तेज


    नई दिल्ली । मध्य-पूर्व की राजनीति में एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है जहां ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित वार्ता फिलहाल टल गई है। स्विट्जरलैंड में होने वाली दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक को स्थगित कर दिया गया है हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बातचीत की प्रक्रिया अभी रुकी नहीं है और जल्द ही नई बैठक की योजना पर काम चल रहा है।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के अनुसार अगले चरण की बातचीत को लेकर मध्यस्थों के माध्यम से लगातार परामर्श जारी है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए नई तारीखों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है और परिस्थितियों के अनुकूल होते ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान का कहना है कि प्रस्तावित समझौते की आगे की प्रक्रिया कुछ महत्वपूर्ण शर्तों पर निर्भर करती है। इनमें क्षेत्रीय संघर्षों का अंत सैन्य गतिविधियों में कमी और आर्थिक प्रतिबंधों से राहत जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि तेल निर्यात और फ्रीज की गई संपत्तियों से जुड़े मामलों पर भी चर्चा आवश्यक है।

    बयान में यह भी संकेत दिया गया है कि हालिया बातचीत का उद्देश्य किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करना था लेकिन कुछ प्रक्रियात्मक बदलावों और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के चलते बैठक को फिलहाल आगे बढ़ाना पड़ा।

    ईरानी पक्ष का दावा है कि हाल के दिनों में क्षेत्रीय स्तर पर कुछ अहम समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए हैं जिसके बाद मौजूदा बैठक की आवश्यकता पर दोबारा विचार किया गया है। हालांकि कूटनीतिक चैनल सक्रिय बने हुए हैं और बातचीत की संभावनाएं अभी भी पूरी तरह खुली हैं।

    इस बीच क्षेत्रीय तनाव भी चर्चा में बना हुआ है जहां ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पिछले कुछ समय से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में इस नई वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बातचीत आगे बढ़ती है तो यह न सिर्फ ईरान–अमेरिका संबंधों के लिए बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • मोदी की विदेश यात्रा में भारतीय विरासत की झलक, स्लोवाकिया को मिले थेवा, हिमरू और डोकरा आर्ट गिफ्ट्स

    मोदी की विदेश यात्रा में भारतीय विरासत की झलक, स्लोवाकिया को मिले थेवा, हिमरू और डोकरा आर्ट गिफ्ट्स

    नई द‍िल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा एक बार फिर भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक मंच पर बढ़ती सॉफ्ट पावर का उदाहरण बनकर सामने आई है फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद पीएम मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर स्लोवाकिया पहुंचे जहां उन्होंने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया स्लोवाकिया की आजादी के बाद यह पहला अवसर था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस देश का दौरा किया और इस यात्रा को ऐतिहासिक माना जा रहा है यहां प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया गया जो दोनों देशों के संबंधों की मजबूती का प्रतीक है

    इस दौरे के दौरान पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के नेताओं और शीर्ष अधिकारियों को भारत की पारंपरिक धरोहर से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए जिनमें प्राचीन भारतीय चिकित्सा ज्ञान का प्रतिनिधित्व करने वाली सुश्रुत संहिता और चरक संहिता प्रमुख रूप से शामिल थीं सुश्रुत संहिता को सर्जरी के क्षेत्र में विश्व की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण कृतियों में गिना जाता है जिसमें चिकित्सा विज्ञान और शल्य चिकित्सा की उन्नत तकनीकों का विस्तृत वर्णन मिलता है वहीं चरक संहिता आयुर्वेद का एक आधारभूत ग्रंथ है जो स्वास्थ्य रोग और मानव शरीर की संरचना को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाता है इन ग्रंथों के माध्यम से भारत ने यह संदेश दिया कि उसका ज्ञान केवल प्राचीन नहीं बल्कि आज भी वैश्विक स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रणाली के लिए प्रासंगिक है

    इसके अलावा पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को भारत की विविध हस्तशिल्प परंपराओं से जुड़े उपहार भी भेंट किए जिनमें प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध थेवा कला से बने कफलिंक शामिल थे थेवा कला रंगीन कांच पर सोने की महीन नक्काशी से बनाई जाती है और इसे राजस्थान की दुर्लभ और अनोखी शिल्प परंपरा माना जाता है यह कला न केवल सौंदर्य का प्रतीक है बल्कि भारतीय कारीगरों की बारीक कारीगरी और धैर्य को भी दर्शाती है

    साथ ही हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर भी भेंट किए गए जो महाराष्ट्र के औरंगाबाद की पारंपरिक बुनाई कला का प्रतिनिधित्व करते हैं हिमरू कपड़ा अपनी हल्की चमक मुलायम बनावट और सुंदर पैटर्न के लिए जाना जाता है और इसे शाही संरक्षण में विकसित किया गया था

    पीतल का डोकरा एंटीलोप सेट भी इस सूची में शामिल था जो छत्तीसगढ़ ओडिशा झारखंड और पश्चिम बंगाल के आदिवासी कारीगरों की प्राचीन धातु कला को दर्शाता है यह कला लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक से बनाई जाती है और हर मूर्ति अपने आप में अनोखी होती है इसके साथ ही पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को कश्मीर की प्रसिद्ध सिल्क कारपेट भी भेंट किया जो बारीक डिजाइन और महीनों से लेकर वर्षों तक चलने वाली कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है

    इन सभी उपहारों के माध्यम से भारत ने न केवल अपनी सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया बल्कि यह भी संदेश दिया कि भारतीय हस्तशिल्प और ज्ञान परंपरा वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान रखती है यह यात्रा केवल कूटनीतिक बैठकें या औपचारिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक संबंधों में उसकी बढ़ती भूमिका को भी मजबूती से सामने रखा

  • G20 से ग्लोबल साउथ तक भारत की नई पहचान, वैश्विक मंचों पर बढ़ा कूटनीतिक प्रभाव

    G20 से ग्लोबल साउथ तक भारत की नई पहचान, वैश्विक मंचों पर बढ़ा कूटनीतिक प्रभाव


    नई द‍िल्‍ली । बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत तेजी से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है जहां वह न केवल अपनी आर्थिक और सामरिक स्थिति को मजबूत कर रहा है बल्कि वैश्विक एजेंडा तय करने में भी निर्णायक भूमिका निभा रहा है पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खुद को एक एजेंडा सेटर और ब्रिज बिल्डर के रूप में स्थापित किया है जो विकसित और विकासशील देशों के बीच सेतु का कार्य कर रहा है

    एक दशक पहले तक भारत को मुख्य रूप से एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाता था लेकिन आज यह स्थिति बदल चुकी है भारत अब उन देशों में शामिल है जो वैश्विक मंचों पर विचारों को दिशा देने और अंतरराष्ट्रीय नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं G20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दुनिया के सामने रखा

    वर्ष 2023 में भारत की G20 अध्यक्षता एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखी जाती है जहां भारत ने वन अर्थ वन फैमिली वन फ्यूचर के विचार के जरिए वैश्विक एकता का संदेश दिया इस दौरान अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाए जाने जैसे निर्णय ने भारत की समावेशी कूटनीति को मजबूत किया साथ ही वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ जैसी पहल ने 125 से अधिक विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का काम किया जिससे भारत की नेतृत्व क्षमता और भी स्पष्ट हुई

    भारत ने BRICS और SCO जैसे मंचों पर भी सक्रिय और संतुलित भूमिका निभाई है BRICS में भारत ने विस्तार प्रक्रिया पर पारदर्शिता और संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया है वहीं स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के विचार को आगे बढ़ाया है यह रुख भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है जो किसी एक शक्ति पर निर्भर नहीं बल्कि सभी के साथ संतुलन बनाने की कोशिश करता है

    SCO में भारत का फोकस मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर रहा है यहां भारत मध्य एशिया तक अपनी पहुंच को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है वहीं QUAD के माध्यम से भारत अमेरिका जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा तकनीक सप्लाई चेन और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है इस तरह भारत दो अलग अलग वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति के जरिए संतुलनकारी भूमिका निभा रहा है

    भारत की जलवायु और ऊर्जा कूटनीति भी उसकी वैश्विक छवि को नया आयाम दे रही है मिशन लाइफ ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन और नवीकरणीय ऊर्जा पर भारत का फोकस यह दिखाता है कि देश केवल चर्चा तक सीमित नहीं है बल्कि समाधान देने वाले देशों में शामिल हो चुका है

    इसके अलावा वैश्विक संकटों के समय भारत की सक्रिय भूमिका ने उसकी विश्वसनीयता को और मजबूत किया है कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन कूटनीति ऑपरेशन गंगा ऑपरेशन कावेरी और ऑपरेशन अजय जैसे अभियानों ने यह साबित किया कि भारत न केवल अपने नागरिकों की बल्कि विदेशों में फंसे अन्य देशों के नागरिकों की भी सहायता करने में सक्षम है

    इन सभी प्रयासों ने मिलकर भारत को वैश्विक मंचों पर एक जिम्मेदार और प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित किया है आज का भारत केवल एक सहभागी देश नहीं बल्कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय योगदान देने वाला प्रमुख राष्ट्र बन चुका है आने वाले समय में इसकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने की संभावना है क्योंकि वैश्विक व्यवस्था तेजी से बहुध्रुवीय होती जा रही है और भारत उसमें एक मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी जगह बना रहा है

  • भारत की कला का वैश्विक प्रदर्शन पीएम मोदी ने फ्रांस में मैक्रों दंपति को दिए पारंपरिक हस्तशिल्प उपहार

    भारत की कला का वैश्विक प्रदर्शन पीएम मोदी ने फ्रांस में मैक्रों दंपति को दिए पारंपरिक हस्तशिल्प उपहार


    नई द‍िल्‍ली । फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से भारत की कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प कौशल की गहराई और विविधता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया गया।

    राष्ट्रपति मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की। यह पेंटिंग पारंपरिक कलमकारी शैली में तैयार की गई है और इसे बनाने में लगभग छह महीने का समय लगा। इस कलाकृति में महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को अत्यंत सूक्ष्म और कलात्मक ढंग से दर्शाया गया है, जिसमें धर्म, न्याय, कर्तव्य और नैतिकता जैसे शाश्वत मूल्यों को उभारा गया है।

    इस पेंटिंग का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भगवद्गीता से प्रेरित है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म, आत्मसंयम और जीवन के कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं। यह कलाकृति केवल एक पौराणिक दृश्य प्रस्तुति नहीं बल्कि नैतिक नेतृत्व, मानवीय गरिमा और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का प्रतीक भी मानी जाती है, जो आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक हैं।

    वहीं, ब्रिजिट मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना का पारंपरिक पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार स्वरूप भेंट किया। यह स्टोल हाथ से बुनी गई इकत रेजिस्ट-डाइंग तकनीक से तैयार किया जाता है और अपनी विशिष्ट ज्यामितीय और पुष्पीय डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी उत्कृष्ट बनावट और पारंपरिक शिल्पकला इसे भारतीय वस्त्र विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनाती है।

    भारत की यह हस्तशिल्प परंपरा न केवल सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है बल्कि फैशन और कला की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान रखती है। फ्रांस जैसे देश, जहां कला और फैशन को विशेष महत्व दिया जाता है, वहां ऐसे उपहार सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी संबंधों को और मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने विदेशी दौरों के दौरान विभिन्न वैश्विक नेताओं को भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े उपहार भेंट करते हैं। इसका उद्देश्य भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और विश्व समुदाय को भारतीय शिल्प परंपरा से परिचित कराना है।

  • ईरान समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के बावजूद अमेरिका प्रतिबद्ध

    ईरान समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के बावजूद अमेरिका प्रतिबद्ध

    नई द‍िल्‍ली । वाशिंगटन में ईरान के साथ तकनीकी वार्ता के अगले चरण को लेकर चल रही तैयारी के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की स्विट्जरलैंड यात्रा को फिलहाल टाल दिया गया है। यह यात्रा उस प्रक्रिया का हिस्सा थी जिसमें दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए प्रारंभिक समझौते को लागू करने और उसके क्रियान्वयन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से बातचीत होनी थी। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यात्रा स्थगित होने के बावजूद बातचीत की प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्ष जल्द से जल्द अगले चरण की तकनीकी चर्चा शुरू करने के लिए तैयार हैं।

    व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि तकनीकी बातचीत की तारीख अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुई है और स्थिति लगातार बदल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल किसी भी समय प्रस्थान के लिए तैयार है लेकिन वार्ता की व्यवस्था और समय तय करना आसान प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उपराष्ट्रपति उसी दिन यात्रा नहीं कर रहे हैं और आगे की जानकारी परिस्थितियों के अनुसार साझा की जाएगी।

    अमेरिकी प्रशासन ने यह संकेत दिया कि जैसे ही अगले चरण की बातचीत को लेकर कोई निश्चित कार्यक्रम तय होगा उसे सार्वजनिक किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत की प्रक्रिया में कोई देरी नहीं की जा रही है बल्कि समन्वय से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते समय में बदलाव हुआ है। प्रशासन ने यह भी दोहराया कि उनका उद्देश्य जल्द से जल्द तकनीकी वार्ता शुरू करना है ताकि समझौते के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाया जा सके।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही पक्ष समझौते के बाद निगरानी और अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की तैयारी कर रहे हैं। इन वार्ताओं में सबसे अहम विषय यह माना जा रहा है कि समझौते को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए और उसकी प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाए।

    उपराष्ट्रपति ने पहले संकेत दिया था कि तकनीकी बातचीत कुछ ही दिनों में शुरू हो सकती है और इसके लिए स्विट्जरलैंड संभावित स्थान हो सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इस प्रक्रिया का समन्वय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच समय और स्थान को लेकर लगातार बदलाव की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने कहा था कि योजना के अनुसार स्विट्जरलैंड जाने की तैयारी थी लेकिन यह स्थिति परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि बातचीत का मुख्य फोकस तकनीकी विवरणों पर होगा जिनमें निगरानी प्रक्रिया सत्यापन तंत्र और ईरान के संवर्धित यूरेनियम से जुड़े प्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन तकनीकी पहलुओं पर सहमति बनना ही बड़े समझौते की सफलता की असली परीक्षा होगी।

    व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासन केवल बयानों पर नहीं बल्कि व्यावहारिक कार्यों पर भरोसा करता है और इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अमेरिका का कहना है कि बातचीत में प्रगति तभी मानी जाएगी जब जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम सामने आएंगे और समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।