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  • ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता

    ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता


    लंदन।
    लेबर पार्टी (Labour Party) के सांसद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री (Britain’s 59th Prime Minister) बन गए हैं। बकिंघम पैलेस (Buckingham Palace) में किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) के साथ एक निजी मुलाकात के दौरान उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया गया। इससे पहले सर कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से अपना इस्तीफा सम्राट को सौंप दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    बकिंघम पैलेस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सर कीर स्टार्मर ने आज सुबह सम्राट से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे महामहिम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। सबसे खास बात है एंडी बर्नहैम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ता। बर्नहैम, ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद वह ट्रंप के साथ कैसे निभाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।


    चुनौती होंगे ट्रंप के साथ संबंध

    बर्नहैम के सामने शुरुआती विदेश नीति की चुनौतियों में से एक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को संभालना होगा। बर्नहैम के पद संभालने से पहले ट्रंप ने उन्हें बेहद उदारवादी बताया था। बर्नहैम अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अमेरिका की अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीति को ब्रिटेन में लाने के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि उनकी इस आलोचना से अमेरिका के साथ ब्रिटेन के पुराने और मजबूत संबंधों पर असर पड़ने की संभावना कम है।


    हर तरफ से दबाव

    घरेलू मोर्चे पर, बर्नहैम को एक ऐसी सरकार विरासत में मिली है जिसे हर तरफ से राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आगमन वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता के बीच हुआ है, जिस दौरान बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर एक के बाद एक सत्ता में आए। ऐसे में श्री बर्नहैम के सामने न केवल अपने एजेंडे को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की भी ज़िम्मेदारी है कि उनकी सरकार वह स्थिरता प्रदान करेगी जो उनके कई पूर्ववर्तियों के समय नहीं दिख सकी।


    ब्रिटेन को बड़े बदलाव की जरूरत

    ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रहे बर्नहैम को ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ (उत्तर का राजा) के रूप में जाना जाता है। वह पहले भी लेबर पार्टी की सरकारों में काम कर चुके हैं। बर्नहैम लंबे समय से लंदन से बाहर के क्षेत्रों में अधिक निवेश और प्रशासनिक शक्तियां देने की वकालत करते रहे हैं। उम्मीद है कि बर्नहैम प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में इस बात पर जोर देंगे कि ब्रिटेन को एक बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने, संघर्ष कर रहे सार्वजनिक क्षेत्रों में सुधार करने और ‘ब्रिटेन को फिर से सुदृढ़ करने’ की योजनाएं शामिल हैं।

    यह भी एक रिकॉर्ड
    स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में जीवित पूर्व प्रधानमंत्रियों की संख्या रिकॉर्ड नौ हो गई है। इनमें जॉन मेजर, टोनी ब्लेयर, गॉर्डन ब्राउन, डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर शामिल हैं। उम्मीद है कि ये सभी नेता इस साल लंदन के सेनोटैफ में आयोजित होने वाली ‘रिमेंब्रेंस संडे’ सेवा में एक साथ नजर आएंगे।

  • US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान

    US में फिर ट्रेड वॉर…. ट्रंप ने किया कनाड़ा से आयातित सामान पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने एक बार फिर ट्रेड वॉर (Trade War) शुरू कर दिया है। ट्रंप ने सोमवार को पड़ोसी देश कनाडा (Canada) से आयातित अधिकांश सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ (50 Percent Tariff) लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कनाडा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है। अब ट्रंप के इस कदम से दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ बढ़ाने से जुड़े तीन फैसलों को मंजूरी दी है। अमेरिका के ट्रेड एक्ट ऑफ 1930 की धारा 338 के तहत फैसला तत्काल प्रभाव से ही लागू कर दिया गया है। ट्रंप प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि चीन के अलावा कनाडा ही उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिसने ट्रंप द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ का जवाब जवाबी शुल्क से दिया था। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के रवैये के लिए कनाडा की जवाबदेही तय की जानी जरूरी थी।

    बता दें कि ट्रेड एक्ट की धारा 338 को लागू कर ट्रंप पहले भी कई देशों पर इस तरह के शुल्क लगा चुके हैं। इसके बाद बीते साल डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस सेक्शन को खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। सांसदों ने चेतावनी दी थी कि ट्रंप इस कानून का इस्तेमाल एकतरफा टैरिफ लगाने के लिए कर सकते हैं। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है।


    किन चीजों पर पड़ेगा असर?

    ट्रंप के नए आदेश के तहत कनाडा के कुछ अहम सेक्टरों को बढ़े हुए टैरिफ से राहत दी गई है। ऊर्जा उत्पाद, पोटाश, मछली और दुर्लभ खनिजों को 50 फीसदी टैरिफ के दायरे से बाहर रखा गया है। हालांकि यह 50 फीसदी टैरिफ उन कई उत्पादों पर भी लागू होगा जिन्हें पहले ‘यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट’ (USMCA) के तहत सीमा शुल्क से सुरक्षा मिली हुई थी। 2020 में लागू हुआ यह व्यापार समझौता हाल ही में खत्म हुआ था। फिलहाल इसे दोबारा लागू करने के लिए बातचीत जारी है।


    बढ़ सकती है महंगाई, रिश्तों में खटास

    अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच अनिश्चितता बढ़ेगी। अमेरिका में महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है। वहीं दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में भी दरार आ सकती है। यही नहीं ट्रंप आने वाले दिनों में टैरिफ और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। मामले की जानकारी देने वाले अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सहयोगियों को कनाडा पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है।

  • यूक्रेन में ओडेशा पोर्ट के पास जहाज पर मिसाइल अटैक, 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत

    यूक्रेन में ओडेशा पोर्ट के पास जहाज पर मिसाइल अटैक, 4 भारतीय क्रू मेंबर्स की मौत

    कीव। समंदर (Ocean) में एक जहाज (Ship) पर हुए हमले (Attack) में 4 भारतीय क्रू मेंबर्स (Four Indian crew members) की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया है. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की जानकारी दी है. ये हमला MV गोल्डन लियो (MV Golden Leo) नाम के जहाज पर हुआ है. ये जहाज यूक्रेन के ओडेशा बंदरगाह (Odesha Port) से निकल रहा था. तभी इस पर हमला हुआ।

    भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 19 जुलाई 2026 को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय MV GOLDEN LEO नाम के एक जहाज पर हमला हुआ. यूक्रेन का दावा है कि ये हमला रूस ने मिसाइलों से किया है. घटना के समय जहाज़ पर 17 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें 5 भारतीय नागरिक भी शामिल थे. इनमें से 4 भारतीयों की मौत हो गई है. जबकि एक भारतीय गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन में हमारा मिशन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है. विदेश मंत्रालय हम मारे गए भारतीय नागरिकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायल भारतीय नागरिक के जल्द और पूरी तरह ठीक होने की कामना करते हैं।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और दोहराता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाना, निर्दोष आम नागरिकों (क्रू सदस्यों) की जान जोखिम में डालना या नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी में बाधा डालना निंदनीय है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।

    ये जहाज यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से अनाज लेकर निकल रहा था. तभी इसे निशाना बनाया गया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि ये जहाज पश्चिम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे के तहत समुद्र में चल रहा था।


    मरने वालों में एक शख्स केरल का

    भारतीयों में मरने वालों में एक शख्स केरल का था. 26 साल के इस शख्स का नाम अखिल जोयन है. जो कासरगोड ज़िले के वेल्लारिक्कुंडु के रहने वाले जोयन और सैली का इकलौता बेटा था।

    बलाल ग्राम पंचायत के वेल्लारिक्कुंडु वार्ड के सदस्य शोबी जोसेफ ने बताया कि परिवार को सोमवार शाम शिपिंग कंपनी से अखिल की मौत के बारे में एक ईमेल मिला।


    जहाज पर मिसाइलों से हुआ हमला

    यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक रविवार को ओडेसा से निकलने के कुछ ही देर बाद मक्का ले जा रहे कार्गो जहाज़ ‘गोल्डन लियो’ पर रूस की तीन क्रूज़ मिसाइलें गिरीं। यूक्रेन की नौसेना ने बताया कि हमले के बाद जहाज़ में आग लग गई. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार तट के पास एक जहाज़ से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी पहचान बाद में ‘गोल्डन लियो’ के तौर पर हुई. इसके क्रू में भारत और सीरिया के सदस्य शामिल थे।

    यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण ने बताया कि रात भर खोज और बचाव अभियान चलता रहा. इस हमले में नौ क्रू सदस्य और एक समुद्री पायलट की मौत हो गई, जबकि 17 क्रू सदस्यों में से आठ को बचा लिया गया.

    LSEG के शिपिंग डेटा के अनुसार, ‘गोल्डन लियो’ मुंबई स्थित ‘ओशन ग्रेस शिपिंग लिमिटेड’ का है. इस जहाज़ का प्रबंधन ‘फ्रेंड्स शिपिंग कंपनी SA’ करती है।


    काला सागर फिर से लड़ाई का मुख्य केंद्र बना

    यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब रूस और यूक्रेन काला सागर और आज़ोव सागर में सैन्य गतिविधियां तेज़ कर रहे हैं, जिससे कमर्शियल शिपिंग और अनाज के निर्यात पर लगातार खतरा बढ़ रहा है।

    2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद काला सागर इस संघर्ष के सबसे ज़्यादा विवादित इलाकों में से एक बन गया. हालांकि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से कुछ समय के लिए अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने और ग्लोबल फ़ूड मार्केट पर दबाव कम करने में मदद मिली थी, लेकिन फिर से शुरू हुई लड़ाई ने दुनिया के सबसे व्यस्त एग्रीकल्चरल शिपिंग रूट में से एक को फिर से बाधित कर दिया है।

    यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इंफ़्रास्ट्रक्चर और तेल टैंकरों को लगातार निशाना बनाया है, जबकि रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, फ़्यूल फ़ैसिलिटीज़ और कार्गो जहाज़ों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज़ कर दिए हैं।

  • ईरान पर अमेरिका के हमले जारी…. बंदर अब्बास समेत कई शहरों में हुए धमाके

    ईरान पर अमेरिका के हमले जारी…. बंदर अब्बास समेत कई शहरों में हुए धमाके


    नई दिल्ली।
    अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) पर फिर एक बार हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे पहले से ही तनावपूर्ण हालातों के बीच मिडिल ईस्ट (Middle East) में अस्थिरता और बढ़ गई है. सेंटकॉम (यू.एस. सेंट्रल कमांड) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि यह ऑपरेशन कमांडर-इन-चीफ (Operation Commander-in-Chief) के निर्देश पर किया गया।

    इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल जहाजों को धमकाने और उन पर हमला करने के लिए किया जाता रहा है. बता दें, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

    वहीं, ऑपरेशन शुरू होने के कुछ ही समय बाद, ईरान के स्टेट टेलीविजन ने दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में धमाके की सूचना दी. इसके अलावा, ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि देश के दक्षिणी तट पर बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट कर दिए गए थे, जो हमलों के दौरान सेना के हाई अलर्ट पर होने का संकेत देते हैं.

    ईरानी मीडिया ने दक्षिण-पूर्वी शहरों चाबहार और कोनारक में भी कई धमाकों की खबर दी है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच यह तनाव बढ़ने की ताजा घटना बताई जा रही है।

    इस बीच, ईरान के स्टेट ब्रॉडकास्टर आईआरआईबी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में हुई एक घटना के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया गया है. एक जलते हुए जहाज की तस्वीर शेयर करते हुए आईआरआईबी ने लिखा, ‘अमेरिका पर भरोसा करने का अंजाम, कुछ घंटे पहले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का नजारा.’

  • हर्मुज जलडमरूमध्य से परमाणु ठिकानों तक बढ़ा युद्ध का दायरा, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा किया

    हर्मुज जलडमरूमध्य से परमाणु ठिकानों तक बढ़ा युद्ध का दायरा, अमेरिकी हमलों और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा संकट खड़ा किया

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब ऐसे दौर में पहुंच गया है, जहां इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रह गया है। पश्चिम एशिया के कई देशों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों, समुद्री मार्गों पर सुरक्षा चुनौतियों और लगातार हो रहे हमलों ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। सोमवार को ओमान के तट के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक व्यावसायिक जहाज में आग लगने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर आशंकाओं को और बढ़ा दिया।

    हर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में जहाज में आग लगने की घटना के बाद विभिन्न देशों ने हालात पर नजर तेज कर दी है। फिलहाल आग लगने के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में पहले से जारी सैन्य तनाव के बीच इस घटना को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

    इसी दौरान अमेरिका ने ईरान के भीतर अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। अमेरिकी कार्रवाई लगातार कई दिनों से जारी है और इसमें केवल सैन्य ठिकानों ही नहीं बल्कि रणनीतिक महत्व वाले ढांचों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य उन क्षमताओं को कमजोर करना है जिनका उपयोग क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों, सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक हितों के खिलाफ किया जा सकता है।

    संघर्ष के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी एक निर्माणाधीन परियोजना भी हमलों की चपेट में आ गई। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया कि दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित दारखोविन परमाणु ऊर्जा परियोजना की निर्माण साइट पर हवाई हमला किया गया। हालांकि संबंधित अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में थी और वहां किसी प्रकार की परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद इस घटना ने परमाणु सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    सैन्य टकराव का असर अमेरिकी सैनिकों पर भी लगातार दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाओं में एक अमेरिकी सैनिक की मौत की पुष्टि हुई है। बताया गया कि यह घटना इराक में एक ड्रोन अभियान के दौरान नियंत्रित विस्फोट के समय हुई। इससे पहले भी संघर्ष के दौरान कई अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे अभियान की गंभीरता और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं।

    अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य प्रतिक्रिया तेज कर दी है। जॉर्डन, कुवैत और आसपास के क्षेत्रों की ओर मिसाइलों तथा ड्रोन से हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को बीच रास्ते में ही नष्ट कर दिया। वहीं कुवैत में ऊर्जा और जल आपूर्ति से जुड़े एक महत्वपूर्ण संयंत्र पर लगातार दूसरे दिन हमला होने से वहां आवश्यक सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    इन घटनाओं के बाद खाड़ी क्षेत्र के देशों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि बिजली, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से मानवीय संकट गहरा सकता है। लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई, समुद्री सुरक्षा पर मंडराता खतरा और क्षेत्रीय देशों की सक्रिय भागीदारी यह संकेत दे रही है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो पश्चिम एशिया का यह संघर्ष व्यापक अंतरराष्ट्रीय चुनौती का रूप ले सकता है।

  • ईरान पर अमेरिका की नई बमबारी से बढ़ा तनाव, तबरीज, बुशेहर और चाबहार बने निशाना, होर्मुज स्ट्रेट और बहरीन तक सुरक्षा अलर्ट से मचा हड़कंप

    ईरान पर अमेरिका की नई बमबारी से बढ़ा तनाव, तबरीज, बुशेहर और चाबहार बने निशाना, होर्मुज स्ट्रेट और बहरीन तक सुरक्षा अलर्ट से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार अधिक गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के विभिन्न हिस्सों में नए हवाई हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया। इस अभियान के दौरान ईरान के कई रणनीतिक क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में एक व्यापारिक जहाज में आग लगने और बहरीन में सुरक्षा अलर्ट जारी होने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

    अमेरिकी सैन्य अभियान के तहत उत्तर-पश्चिमी ईरान के तबरीज सहित कई स्थानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा दक्षिणी प्रांतों होरमोज़गान और बुशेहर में भी तेज धमाकों की सूचना मिली। दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार में कई विस्फोट दर्ज किए गए, जिसके बाद आसपास के कोनारक क्षेत्र में ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिले कि संभावित नए हमलों की आशंका को देखते हुए ईरान अपनी सुरक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है।

    अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनके जरिए वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। इसी रणनीति के तहत लगातार कई दिनों से हवाई अभियान जारी रखा गया है। हालांकि इन हमलों के बाद ईरान की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को उच्च स्तर पर बनाए रखा गया है।

    इसी दौरान होर्मुज स्ट्रेट से एक और चिंताजनक खबर सामने आई। ओमान के तट के निकट एक बड़े व्यापारिक जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे समुद्री गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई। जहाज की पहचान और आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।

    क्षेत्रीय हालात को देखते हुए बहरीन की राजधानी मनामा स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। दूतावास ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। संभावित सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त एहतियाती कदम भी उठाए जा रहे हैं।

    लगातार बढ़ते सैन्य अभियानों और सुरक्षा तैयारियों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने में लगे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर बनी हुई है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यदि सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और कूटनीतिक संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें इस संघर्ष के अगले घटनाक्रम और संभावित राजनीतिक समाधान पर टिकी हुई हैं।

  • उपराष्ट्रपति पद संभालने के दौरान चौथी बार पिता बने जेडी वेंस, बेटे एलेक नील वेंस के जन्म के साथ उषा वेंस ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    उपराष्ट्रपति पद संभालने के दौरान चौथी बार पिता बने जेडी वेंस, बेटे एलेक नील वेंस के जन्म के साथ उषा वेंस ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस के परिवार में खुशियों का माहौल है। रविवार सुबह उषा वेंस ने एक बेटे को जन्म दिया, जिसके बाद वेंस परिवार में चौथे बच्चे का स्वागत हुआ। नवजात का नाम एलेक नील वेंस रखा गया है। इस खुशखबरी की जानकारी स्वयं जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर साझा करते हुए अपने परिवार की खुशी दुनिया के साथ बांटी। उन्होंने बताया कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं तथा परिवार के अन्य बच्चे भी अपने छोटे भाई के आगमन से बेहद उत्साहित हैं।

    जेडी वेंस और उषा वेंस पहले से तीन बच्चों के माता-पिता हैं। उनके बच्चों के नाम इवान, विवेक और मिराबेल हैं, जिनकी उम्र लगभग चार से नौ वर्ष के बीच है। चौथे बच्चे के जन्म के साथ परिवार का विस्तार हुआ है और यह अवसर उनके निजी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। उपराष्ट्रपति ने अपने संदेश में चिकित्सकों और पूरे मेडिकल स्टाफ के प्रति विशेष आभार भी व्यक्त किया, जिन्होंने सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    इस जन्म के साथ उषा वेंस ने अमेरिकी राजनीतिक इतिहास में एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया है। बताया जा रहा है कि 1870 के दशक के बाद पिछले डेढ़ सौ वर्षों में वह पहली ऐसी महिला बनी हैं, जिन्होंने अपने पति के अमेरिका के उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए बच्चे को जन्म दिया है। इस वजह से यह घटना केवल पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी चर्चा का विषय बन गई है।

    जेडी वेंस ने अपने संदेश में लिखा कि उनके घर एक प्यारे बेटे का जन्म हुआ है और पूरा परिवार इस नए सदस्य के आगमन से बेहद प्रसन्न है। उन्होंने कहा कि उनके अन्य बच्चे अपने छोटे भाई से मिलने के लिए उत्साहित हैं। साथ ही उन्होंने वाशिंगटन स्थित वाल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना करते हुए उनकी सेवाओं के लिए धन्यवाद व्यक्त किया।

    इस वर्ष मार्च में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान जेडी वेंस ने हल्के-फुल्के अंदाज में चौथे बच्चे को लेकर अपनी और उषा वेंस के बीच हुई बातचीत का भी जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि उपराष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभालने के दौरान उन्होंने अपनी पत्नी से चौथे बच्चे की इच्छा जताई थी। उस समय उषा ने मजाकिया अंदाज में कहा था कि या तो वह उपराष्ट्रपति बन सकते हैं या फिर चौथे बच्चे की योजना बना सकते हैं। बाद में जेडी वेंस ने मुस्कुराते हुए कहा था कि आखिरकार उन्हें दोनों खुशियां एक साथ मिल गईं।

    बाद में उषा वेंस ने भी एक बातचीत में स्वीकार किया था कि तीसरे बच्चे के जन्म के बाद उन्हें लगा था कि उनका परिवार पूरा हो चुका है। हालांकि समय के साथ उन्होंने चौथे बच्चे के बारे में सकारात्मक सोच विकसित की और परिवार बढ़ाने के निर्णय पर सहमति जताई। इस फैसले के बाद अब उनका परिवार चार बच्चों के साथ नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है।

    भारतीय मूल की उषा वेंस का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य के सैन डिएगो में हुआ। उनके माता-पिता भारत से अमेरिका जाकर बसे थे। उनके पिता मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जबकि मां मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट के रूप में कार्य कर चुकी हैं। उषा और जेडी वेंस की मुलाकात वर्ष 2010 में येल लॉ स्कूल में पढ़ाई के दौरान हुई थी। दोनों ने बाद में विवाह किया और अब चार बच्चों के साथ अपने पारिवारिक जीवन का नया अध्याय शुरू किया है।

  • भारतीय नागरिकों से यात्रा टालने और उपलब्ध उड़ानों से जल्द देश छोड़ने की अपील..

    भारतीय नागरिकों से यात्रा टालने और उपलब्ध उड़ानों से जल्द देश छोड़ने की अपील..

    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर गंभीर बना दिया है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और अस्थिर हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए अहम यात्रा सलाह जारी करते हुए उन्हें अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय नागरिक अनावश्यक रूप से ईरान की यात्रा करने से बचें और जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, अपनी यात्रा स्थगित रखें।

    भारतीय दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल के दिनों में ईरान के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ा है। इसी कारण उन भारतीय नागरिकों को विशेष सलाह दी गई है जो किसी भी उद्देश्य से ईरान जाने की योजना बना रहे हैं। दूतावास का कहना है कि मौजूदा हालात में यात्रा टालना ही सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। सुरक्षा स्थिति में सुधार होने के बाद ही यात्रा संबंधी निर्णय लेने पर विचार किया जाना चाहिए।

    एडवाइजरी में उन भारतीय नागरिकों के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं जो पहले से ईरान में मौजूद हैं। दूतावास ने उन्हें उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों का उपयोग करते हुए अस्थायी रूप से ईरान छोड़ने पर विचार करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखना है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यात्रा संबंधी निर्णय लेते समय उपलब्ध विकल्पों और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाए।

    जो भारतीय नागरिक फिलहाल ईरान में ही रहने का निर्णय लेते हैं, उन्हें अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दूतावास ने कहा है कि सभी नागरिक स्थानीय घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखें और किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि वाले क्षेत्रों से दूर रहें। विशेष रूप से ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों और संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों और प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों से जल्द से जल्द अपना पंजीकरण कराने की अपील भी की है। जिन लोगों ने अब तक दूतावास के पास अपना विवरण दर्ज नहीं कराया है, उन्हें तत्काल पंजीकरण कराने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे आसानी से संपर्क किया जा सके और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। साथ ही नागरिकों से दूतावास की आधिकारिक सूचनाओं पर नियमित नजर बनाए रखने की भी सलाह दी गई है।

    क्षेत्र में जारी तनाव के कारण सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। भारत सरकार भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हालात की लगातार समीक्षा कर रही है। यदि क्षेत्रीय परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव होता है तो उसके अनुरूप नई सलाह और आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल सरकार का जोर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रखने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की तैयारी बनाए रखने पर है। ऐसी स्थिति में नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और जारी सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

  • पश्चिमी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र; फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं, निगरानी जारी

    पश्चिमी ईरान में 5.5 तीव्रता का भूकंप, 10 किलोमीटर गहराई में था केंद्र; फिलहाल बड़े नुकसान की सूचना नहीं, निगरानी जारी

    नई दिल्ली । पश्चिमी ईरान में सोमवार को आए 5.5 तीव्रता के भूकंप ने एक बार फिर क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता को उजागर कर दिया। सुबह दर्ज किए गए इस भूकंप के झटके काहरिज और जावनरुद सहित आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। झटकों के बाद लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बना, हालांकि अब तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या व्यापक तबाही की पुष्टि नहीं हुई है।

    यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर के अनुसार भूकंप का केंद्र काहरिज शहर से लगभग 54 किलोमीटर पश्चिम में स्थित था। वहीं जावनरुद शहर से यह लगभग 33 किलोमीटर दक्षिण की ओर दर्ज किया गया। दोनों क्षेत्रों में लोगों ने झटकों को स्पष्ट रूप से महसूस किया। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी प्रभावित इलाकों की स्थिति का लगातार आकलन कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित नुकसान की सही जानकारी जुटाई जा सके।

    भूकंप के तुरंत बाद कई स्थानों पर लोग एहतियात के तौर पर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। राहत एवं बचाव एजेंसियां भी सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल किसी बड़े ढांचागत नुकसान, सड़क बाधित होने या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे भी सामने आए। कुछ पोस्ट में इस घटना को ईरान के परमाणु कार्यक्रम या भूमिगत गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की गई। हालांकि अब तक किसी भी अंतरराष्ट्रीय भूकंप निगरानी संस्था या वैज्ञानिक विशेषज्ञ ने ऐसे दावों की पुष्टि नहीं की है। विशेषज्ञों का कहना है कि उपलब्ध भूकंपीय आंकड़े इस घटना को एक सामान्य प्राकृतिक भूकंप के रूप में ही दर्शाते हैं और बिना वैज्ञानिक प्रमाण के किसी अन्य कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

    ईरान लंबे समय से दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में गिना जाता है। इसका प्रमुख कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है। देश ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां अरब और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें लगातार एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं। इन प्लेटों के बीच बनने वाला दबाव समय-समय पर भूकंप के रूप में बाहर निकलता है, जिसके कारण यहां मध्यम से लेकर शक्तिशाली भूकंप आते रहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में भूकंप का पूरी तरह पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है, इसलिए मजबूत निर्माण, प्रभावी आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी व्यवस्था ही नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है। स्थानीय प्रशासन भी प्रभावित इलाकों में स्थिति की निगरानी कर रहा है और यदि किसी प्रकार की क्षति सामने आती है तो आवश्यक राहत कार्य तुरंत शुरू किए जाएंगे।

    ताजा भूकंप ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता और आपदा तैयारियों का लगातार मजबूत रहना कितना आवश्यक है। फिलहाल संबंधित एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण कर रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

  • अस्पताल की कथित गलती ने बदल दी दो परिवारों की किस्मत 38 साल बाद डीएनए टेस्ट से खुला जन्म का सबसे बड़ा राज

    अस्पताल की कथित गलती ने बदल दी दो परिवारों की किस्मत 38 साल बाद डीएनए टेस्ट से खुला जन्म का सबसे बड़ा राज


    नई दिल्ली। अमेरिका के नॉर्थ डकोटा राज्य से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने चिकित्सा व्यवस्था और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि वर्ष 1988 में एक अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण जन्म के तुरंत बाद दो नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई और दोनों अपने जैविक माता-पिता की बजाय दूसरे परिवारों के साथ बड़े हुए। करीब 38 वर्ष तक किसी को इस गलती का पता नहीं चला। आखिरकार एक सामान्य डीएनए टेस्ट ने ऐसा सच उजागर किया जिसने दो परिवारों की पूरी दुनिया बदल दी।

    रिपोर्ट के अनुसार यह मामला नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन शहर स्थित यूनिटी मेडिकल सेंटर से जुड़ा है। परिवारों का कहना है कि 26 जनवरी 1988 को अस्पताल में केवल दो बच्चों का जन्म हुआ था। आरोप है कि अस्पताल से छुट्टी के समय दोनों नवजातों को गलत परिवारों के साथ भेज दिया गया। इसके बाद दोनों बच्चे अपने नए परिवारों में पले बढ़े और उन्हें कभी इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि उनके जैविक माता-पिता कोई और हैं।

    समय के साथ दोनों ने सामान्य जीवन जिया। पढ़ाई की नौकरी की परिवार बसाया और अपने रिश्तों को उसी रूप में स्वीकार किया जैसा उन्हें बचपन से बताया गया था। हालांकि उनमें से एक व्यक्ति को बचपन से ही यह महसूस होता था कि उसका चेहरा और शारीरिक बनावट परिवार के अन्य सदस्यों से काफी अलग है। उस समय इसे सामान्य संयोग मान लिया गया लेकिन वर्षों बाद यही संदेह एक बड़े खुलासे की वजह बना।

    करीब दो वर्ष पहले दूसरे व्यक्ति ने अपने पारिवारिक इतिहास के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से डीएनए टेस्ट कराया। जांच रिपोर्ट में सामने आए परिणाम पूरी तरह अप्रत्याशित थे। रिपोर्ट ने ऐसे जैविक रिश्तों की ओर संकेत किया जिनके बारे में उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद आगे की जांच और पारिवारिक रिकॉर्ड की पड़ताल में कथित अदला-बदली की पूरी कहानी सामने आने लगी। परिवारों का दावा है कि जन्म के समय अस्पताल की पहचान पट्टी में दर्ज विवरण भी उनकी आशंकाओं को मजबूत करता है।

    सच्चाई सामने आने के बाद दोनों परिवारों के लिए भावनात्मक स्थिति बेहद कठिन हो गई। जिन लोगों को वे जीवनभर अपना माता-पिता और भाई-बहन मानते रहे थे उनके साथ रिश्ते तो बने रहे लेकिन अचानक यह जानना कि जैविक परिवार कोई और है किसी बड़े मानसिक आघात से कम नहीं था। दोनों पक्षों ने अपने वास्तविक परिवारों से मुलाकात की लेकिन लगभग चार दशक बाद नए रिश्तों को स्वीकार करना आसान नहीं रहा।

    परिवारों का आरोप है कि उन्होंने पहले अस्पताल के साथ बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की लेकिन सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अस्पताल के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया गया। उनका कहना है कि अस्पताल की कथित लापरवाही ने दो परिवारों का जीवन पूरी तरह बदल दिया और उन्हें दशकों तक अपने वास्तविक रिश्तों से दूर रखा।

    वहीं अस्पताल ने इस मामले में परिवारों की भावनात्मक पीड़ा पर संवेदना जताई है लेकिन अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है। अस्पताल ने अदालत से मामला खारिज करने की मांग की है। अब अंतिम निर्णय न्यायालय में पेश किए जाने वाले सबूतों और सुनवाई के आधार पर होगा।

    यह मामला केवल एक संभावित प्रशासनिक गलती का नहीं बल्कि पहचान रिश्तों और परिवार जैसी गहरी मानवीय भावनाओं का भी है। यदि अदालत में आरोप साबित होते हैं तो यह मामला चिकित्सा इतिहास के सबसे गंभीर लापरवाही के मामलों में गिना जा सकता है और भविष्य में अस्पतालों की सुरक्षा प्रक्रियाओं को और सख्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण भी बन सकता है।