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  • भारत-इजरायल रक्षा संबंध: रिपोर्ट्स में बढ़ते दावों के बीच हकीकत क्या है?

    भारत-इजरायल रक्षा संबंध: रिपोर्ट्स में बढ़ते दावों के बीच हकीकत क्या है?




    नई दिल्ली। इजरायल को भारत द्वारा सबसे ज्यादा सैन्य साजो-सामान सप्लाई करने के दावों को लेकर हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहस तेज हुई है, जिसमें कुछ रिपोर्ट्स भारत-इजरायल रक्षा व्यापार को गाजा युद्ध से जोड़कर प्रस्तुत कर रही हैं।

    इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत इजरायल को हथियार और रक्षा सामग्री सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है, लेकिन सरकारी आंकड़ों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत का कुल रक्षा निर्यात वैश्विक स्तर पर कई देशों में बंटा हुआ है और इजरायल उसका केवल एक छोटा हिस्सा है।

    भारत का रक्षा निर्यात और इजरायल की हिस्सेदारी
    आधिकारिक और वैश्विक रक्षा आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल रक्षा निर्यात अरबों डॉलर का है, जिसमें इजरायल को होने वाला निर्यात सीमित प्रतिशत में आता है। भारत के प्रमुख रक्षा साझेदारों में अमेरिका, फ्रांस, आर्मेनिया और कई एशियाई-अफ्रीकी देश शामिल हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंध गाजा संघर्ष से काफी पहले से चले आ रहे हैं और यह एक सामान्य द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है, न कि किसी एक युद्ध से जुड़ा हुआ समझौता।

    रिपोर्ट्स और राजनीतिक बहस
    कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि भारत की आपूर्ति इजरायल के सैन्य अभियानों से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इन दावों को लेकर अलग-अलग विश्लेषण सामने आते हैं और कई विशेषज्ञ इसे सीमित और संदर्भ से बाहर बताया गया नैरेटिव मानते हैं।भारत सरकार की ओर से हमेशा यह रुख रहा है कि उसका रक्षा निर्यात अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैध व्यापार समझौतों के तहत होता है और किसी भी संघर्ष में सीधी भागीदारी का आधार नहीं माना जा सकता।

    कुल मिलाकर भारत-इजरायल रक्षा संबंध लंबे समय से रणनीतिक और तकनीकी सहयोग पर आधारित हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इसे लेकर अलग-अलग व्याख्याएं और राजनीतिक दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं।

  • Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर

    Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर




    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने नए Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। यह विमान 19 मई को अपनी पहली उड़ान भर चुका है और इसे भविष्य के युद्धों में एक मल्टी-रोल एयरबोर्न कमांड सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस विमान को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है, खासकर भारत की संभावित जरूरतों के संदर्भ में।

    दूसरा पायलट बनेगा “कमांड पोस्ट”
    पायलट सर्गेई बोगदान के अनुसार Su-57D का सबसे महत्वपूर्ण फीचर इसका ट्विन-सीट कॉन्फिगरेशन है। इसमें दूसरा पायलट केवल सह-उड़ान नहीं करेगा, बल्कि हवा में रहते हुए पूरे मिशन का कमांड और कंट्रोल संभाल सकता है। यह स्थिति खासकर बड़े सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण होगी, जहां ग्राउंड कम्युनिकेशन बाधित होने की संभावना रहती है।

    उन्होंने बताया कि यदि रेडियो या नेटवर्क कम्युनिकेशन में बाधा आती है, तो अनुभवी पायलट हवा में ही निर्णय लेकर ऑपरेशन को आगे बढ़ा सकता है, जिससे मिशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

    ड्रोन और AI नेटवर्क से लैस क्षमता
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। इसमें एडवांस एआई और ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन सिस्टम को कंट्रोल करने की क्षमता विकसित की जा रही है। यह जेट दुश्मन के रडार को जाम करने और स्टील्थ ड्रोन स्क्वाड्रन को गाइड करने में सक्षम बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में युद्ध के स्वरूप को बदल सकती है, जहां एक ही विमान कई ड्रोन और यूनिट्स को नियंत्रित करेगा।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक अहमियत
    रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि Su-57D भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। यहां चीन द्वारा तैनात एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने के लिए ऐसे एयरबोर्न कमांड प्लेटफॉर्म की आवश्यकता मानी जाती है।

    यह विमान भारतीय स्वदेशी CATS (Combat Air Teaming System) और ‘वारियर’ ड्रोन प्रोजेक्ट के साथ इंटीग्रेट होकर एक मजबूत नेटवर्क वॉरफेयर क्षमता दे सकता है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट और ड्रोन-आधारित नेटवर्क वॉरफेयर पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    FGFA प्रोजेक्ट और आगे की चर्चा
    भारत और रूस ने पहले FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट पर मिलकर काम शुरू किया था, जिसमें ट्विन-सीट स्टील्थ जेट की मांग भी शामिल थी। हालांकि 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था। अब Su-57D के परीक्षण के बाद एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव: असम से बंगाल तक BSF-BGB में टकराव, ग्रामीणों को लेकर स्थिति संवेदनशील

    भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव: असम से बंगाल तक BSF-BGB में टकराव, ग्रामीणों को लेकर स्थिति संवेदनशील




    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा पर तनाव लगातार तीसरे हफ्ते भी जारी है। असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैले सीमावर्ती इलाकों में बीएसएफ (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच झड़प और टकराव की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे हालात संवेदनशील बने हुए हैं।

    जानकारी के अनुसार, 6 मई के बाद से सीमा पर तनाव बढ़ा है और पिछले लगभग 17 दिनों में आठ से अधिक बार दोनों देशों की सुरक्षा बलों के बीच झड़प की घटनाएं दर्ज की गई हैं। कई जगहों पर अवैध घुसपैठ रोकने और सीमा पार गतिविधियों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही है।

    कई इलाकों में झड़प और आरोप-प्रत्यारोप
    बांग्लादेशी पक्ष का दावा है कि बीएसएफ की कार्रवाई के दौरान कुछ नागरिकों को सीमा पार धकेलने की कोशिश की गई, जबकि भारतीय पक्ष का कहना है कि वह अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए कार्रवाई कर रहा है। इस दौरान कई स्थानों पर गोलीबारी और टकराव की स्थिति भी बनी।करीमगंज (असम) और ब्राह्मणबारिया (बांग्लादेश) जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात ज्यादा तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। वहीं, ‘जीरो पॉइंट’ नियमों के उल्लंघन को लेकर भी दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

    BGB का जन-जागरूकता अभियान
    तनाव के बीच बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने सीमावर्ती इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए जन-जागरूकता अभियान शुरू किया है। इसमें स्थानीय लोगों को अवैध घुसपैठ, मानव तस्करी और सीमा पार अपराधों से दूर रहने की अपील की जा रही है।

    BGB की 60वीं बटालियन ने इस अभियान की शुरुआत ब्राह्मणबारिया क्षेत्र से की है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को सतर्क करना और सीमा सुरक्षा में सहयोग बढ़ाना बताया गया है।

    ग्रामीणों की भूमिका पर भी सवाल
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई सीमावर्ती इलाकों में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका को लेकर भी विवाद सामने आया है। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों के सुरक्षा बलों के साथ आगे बढ़ने और टकराव के दौरान ढाल की तरह इस्तेमाल होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

    जानकारों की राय
    विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर यह तनाव केवल बाड़ या घुसपैठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे तस्करी और स्थानीय विवाद भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं। कई बार सीमा पार गतिविधियों को रोकने के दौरान स्थिति अचानक हिंसक रूप ले लेती है।

    फिलहाल दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।

  • Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर

    Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर


    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। इस विमान ने 19 मई को अपनी पहली उड़ान भरी है और इसे भविष्य के युद्धों में कमांड और कंट्रोल क्षमता वाला एक एडवांस प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है।

    पायलट के अनुसार, Su-57D में दूसरा कॉकपिट केवल सह-पायलट के लिए नहीं बल्कि एक ऐसे कमांडर के लिए है जो हवा में रहते हुए पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर सकता है। यह विमान युद्ध के दौरान कम्युनिकेशन बाधित होने पर भी मिशन को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने में सक्षम माना जा रहा है।

    एयरबोर्न कमांड सेंटर की तरह काम करेगा विमान
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक फ्लाइंग कमांड सेंटर के रूप में देखा जा रहा है, जो ड्रोन और अन्य युद्ध प्रणालियों को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इसे ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन नेटवर्क के साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।

    रूसी विशेषज्ञों का दावा है कि यह जेट भविष्य में जटिल मिशनों में तेजी से निर्णय लेने और दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को बाधित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक महत्व
    रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह विमान भारतीय वायुसेना के साथ जुड़ता है तो लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील इलाकों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ गहरे हमलों में मदद मिल सकती है। यह भारतीय स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट CATS के साथ भी इंटीग्रेट होकर नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता को मजबूत कर सकता है।हालांकि भारत पहले ही रूस के FGFA प्रोजेक्ट से बाहर हो चुका है, लेकिन दो-सीट Su-57D के आने के बाद रक्षा हलकों में एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5th जनरेशन फाइटर और ड्रोन-नेटवर्क आधारित एयर वॉरफेयर सिस्टम पर काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि तिब्बत क्षेत्र में किसी भी रणनीतिक चुनौती का जवाब दिया जा सके।

  • एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर

    एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर


    नई दिल्ली।
    दुनिया इस समय भीषण गर्मी (Extreme heat) और लगातार बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रही है। भारत (India) में जहां कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं यूरोप, एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो (El Niño) और जलवायु परिवर्तन (Climate change) के कारण हीटवेव (Heatwaves) अब पहले से ज्यादा खतरनाक, लंबी और जल्दी आने लगी हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जो गर्मी पहले जून-जुलाई में देखने को मिलती थी, अब वह मई महीने में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। कई देशों में स्कूलों, खेल आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। कुछ जगहों पर मौतों और स्वास्थ्य संकट की घटनाएं भी सामने आई हैं।


    ब्रिटेन में गर्मी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

    ब्रिटेन में मई महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। देश के मौसम विभाग के अनुसार लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने 1922 और 1944 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी गर्मी आमतौर पर जुलाई या अगस्त में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मई में ही लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए लोग पार्कों, फव्वारों और स्विमिंग पूल का सहारा लेते नजर आए।


    फ्रांस में 350 से ज्यादा शहरों में तापमान का रिकॉर्ड टूटा

    फ्रांस में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। देश के 350 से ज्यादा शहरों में मई महीने के तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। कई इलाकों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। सरकार ने कई क्षेत्रों में हाई टेम्परेचर अलर्ट जारी किया है और लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी गई है। पेरिस में एक रनिंग इवेंट के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अधिकारियों का मानना है कि तेज गर्मी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है।


    स्पेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंचने का अनुमान

    स्पेन भी इस समय भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालात ऐसे हैं कि रात में भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए।


    वियतनाम में हाल बेहाल

    एशिया में वियतनाम भी गर्मी की मार झेल रहा है। कई इलाकों में तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। लोगों को दोपहर 10 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।


    इन देशों में भी गर्मी का कहर

    थाईलैंड – बैंकॉक और अन्य इलाकों में अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य अलर्ट जारी किए गए हैं।
    फिलीपींस – स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने तक की नौबत आई क्योंकि तापमान बेहद ज्यादा बढ़ गया।
    मेक्सिको – लगातार हीटवेव के कारण कई राज्यों में लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
    चीन – उत्तरी और मध्य चीन के कई हिस्सों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई है।
    पाकिस्तान – सिंध और पंजाब के कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है।


    क्या है भारत का हाल?

    देश में नौतपा के पहले दिन सोमवार को उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक प्रचंड गर्मी के साथ उमस से लोग बेहाल रहे। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चिलचिलाती धूप के साथ गर्म लू चलती रही। दिन के साथ रातें भी गर्म रहीं। अभी 4-5 दिन झुलसा देने वाली गर्मी के आसार हैं। वहीं तमिलनाडु में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) ने मंगलवार को राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पूर्व अरब सागर तक बने वायुमंडलीय परिसंचरण तंत्र का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा।

  • ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका

    ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) के साथ जारी शांति वार्ता (Peace talks) के बीच डील को लेकर बड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान (Iran) के साथ या तो बड़ी और बेहतर परिणामों वाली डील होगी या फिर कोई भी डील नहीं होगी। इतना ही नहीं ट्रंप ने डील न होने की स्थिति में फिर से युद्ध शुरू करने की भी धमकी दी।

    उन्होंने कहा कि अब अगर डील नहीं होती है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा। इसके साथ ही ट्रंप ने अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की अपील की, जिसमें कुछ देश पहले से शामिल हैं। बता दें, ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हो रही शांति वार्ता लगातार लंबी खिंचती जा रही है। ईरान और अमेरिका दोनों ही तरफ से अच्छे संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

    ईरान के साथ लंबी खिंचती बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया का युद्ध फिर से शुरू हो। इसलिए बेहतर है कि डील हो जाए। सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने शनिवार को मध्य-पूर्व के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई अपनी बातचीतों का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया खाड़ी देशों के नेताओं, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान के साथ मिलकर इस संकट को सुलझाने के लिए बातचीत की है। उम्मीद है कि यह जल्दी ही सुलझ जाएगा, लेकिन इसके साथ ही ट्रंप ने अपील की यह सभी देश अब्राहम अकॉर्ड पर भी हस्ताक्षर करें। इतना ही नहीं ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो ईरान भी अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर कर सकता है।


    एक-दो देशों को छोड़कर बाकी देशों को समस्या नहीं होनी चाहिए: ट्रंप

    सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने इस्लामिक देशों के अब्राहम अकॉर्ड को स्वीकार न करने के डर को भी महत्व दिया। उन्होंने कहा, “संभव है कि एक या दो देशों के बाद ऐसा न करने का कारण हो, हम उसे स्वीकार भी करेंगे। लेकिन अधिकांश देशों को इसके लिए तैयार होना होगा। इससे ईरान के साथ होने वाला समझौता और भी ज्यादा ऐतिहासिक हो जाएगा। यह समझौता संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकस्तान के लिए वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक बूम साबित हुआ है। इस संघर्ष के दौर में भी इन देशों को इसका फायदा मिला है।”


    क्या हैं अब्राहम अकॉर्ड्स?

    अब्राहम अकॉर्ड्स अमेरिका द्वारा बनाए गए समझौतों की एक लिस्ट है। इसका प्रमुख उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच के राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए इस समझौते पर सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को ने हस्ताक्षर किए थे। सूडान ने भी इसको सहमति दी है, लेकिन अभी तक उसकी संसद ने इस पर हामी नहीं भरी है। वहीं, अमेरिका का करीबी माने जाने वाला सऊदी अरब भी अभी तक इस समझौते से दूरी बनाए हुए है। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस समझौते में शामिल होने के लिए एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा था कि वह इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं, बशर्ते इसमें दो-राष्ट्र समाधान को लेकर स्पष्टता हो।

    दरअसल, अरब देशों और इस्लामिक देशों की दुनिया में अब्राहम अकॉर्ड्स को फिलिस्तीन के साथ धोखे के तौर पर देखा जाता है। इसलिए ज्यादातर देश इससे कन्नी काटते हुए नजर आते हैं। इस समझौते के बाद देशों को इजरायल के साथ सामान्य संबंधों पर राजी होना पड़ता है, जिससे उनकी जनता इस पर नाराज हो सकती है। पाकिस्तान जैसे देश के लिए तो यह समझौता और भी ज्यादा परेशानी पैदा करने वाला है, क्योंकि वह तो इजरायल को देश के रूप में मान्यता ही नहीं देते हैं।

  • भारत के खिलाफ ‘यूक्रेन मॉडल’ की तैयारी में पाकिस्तान? एक्सपर्ट्स ने ड्रोन वॉरफेयर को बताया नया बड़ा खतरा

    भारत के खिलाफ ‘यूक्रेन मॉडल’ की तैयारी में पाकिस्तान? एक्सपर्ट्स ने ड्रोन वॉरफेयर को बताया नया बड़ा खतरा



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव के बाद अब सुरक्षा विशेषज्ञ एक नए खतरे की ओर इशारा कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान भविष्य में भारत के खिलाफ यूक्रेन-रूस युद्ध जैसा “ड्रोन वॉरफेयर मॉडल” अपनाने की कोशिश कर सकता है।

    दरअसल, हालिया संघर्ष के दौरान भारत ने लंबी दूरी की क्षमता और रणनीतिक गहराई का फायदा उठाते हुए पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। पाकिस्तान का भूगोल अपेक्षाकृत संकरा होने के कारण उसकी अधिकांश सैन्य और रणनीतिक संपत्तियां भारतीय मिसाइलों की रेंज में आती हैं।

    इसी असंतुलन को संतुलित करने के लिए पाकिस्तान लगातार लंबी दूरी की मिसाइलों और एडवांस ड्रोन तकनीक पर जोर दे रहा है। हाल के महीनों में पाकिस्तान ने अब्दाली, फतह-4, तैमूर और फतह-II जैसी मिसाइलों के परीक्षण भी किए हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने यह दिखा दिया है कि आधुनिक ड्रोन तकनीक बड़े और शक्तिशाली देशों की सुरक्षा व्यवस्था को भी चुनौती दे सकती है। यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन और AI आधारित नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर रूस के अंदर गहराई तक हमले किए हैं, यहां तक कि मॉस्को जैसे हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों तक ड्रोन पहुंचाने में सफलता हासिल की है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐसे ड्रोन GPS बंद होने की स्थिति में भी AI आधारित मशीन विजन सिस्टम की मदद से लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। साथ ही सैटेलाइट कम्युनिकेशन और लो-फ्लाइट प्रोफाइल की वजह से इन्हें पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।

    पूर्व सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान भविष्य में चीन की तकनीकी मदद से लंबी दूरी के स्टील्थ ड्रोन और BeiDou सैटेलाइट नेटवर्क का उपयोग कर सकता है। ऐसे ड्रोन भारत के भीतर गहराई तक घुसपैठ कर महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि केवल पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम इस तरह के खतरे से पूरी सुरक्षा नहीं दे सकते। इसलिए भारत को तेजी से एंटी-ड्रोन तकनीक, AI आधारित निगरानी और मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने की जरूरत है।

    हालांकि फिलहाल इस तरह की किसी संभावित रणनीति को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन बदलते युद्ध स्वरूप और ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • सऊदी अरब के ड्रीम प्रोजेक्ट NEOM पर संकट, घटते निवेश और आर्थिक दबाव ने बढ़ाई मुश्किलें

    सऊदी अरब के ड्रीम प्रोजेक्ट NEOM पर संकट, घटते निवेश और आर्थिक दबाव ने बढ़ाई मुश्किलें



    नई दिल्ली। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का महत्वाकांक्षी ‘NEOM’ प्रोजेक्ट अब गंभीर आर्थिक चुनौतियों के बीच घिरता नजर आ रहा है। कभी भविष्य के सबसे बड़े और आधुनिक शहर के रूप में पेश किए गए इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर अब खर्चों में कटौती, निर्माण की रफ्तार धीमी करने और योजनाओं को सीमित करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    ‘विजन-2030’ के तहत शुरू किए गए NEOM प्रोजेक्ट का मकसद तेल आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर सऊदी अरब को तकनीक, पर्यटन और वैश्विक निवेश का नया केंद्र बनाना था। इस योजना में रेगिस्तान के बीच करीब 170 किलोमीटर लंबी भविष्यवादी “लाइन सिटी” बनाने की परिकल्पना की गई थी, जिसमें शीशे की दीवारों वाले आधुनिक ढांचे, हाईटेक ट्रांसपोर्ट और लग्जरी सुविधाएं शामिल थीं।

    हालांकि अब वैश्विक आर्थिक दबाव, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश में कमी के कारण प्रोजेक्ट की रफ्तार प्रभावित हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई हिस्सों को फिलहाल सीमित किया जा रहा है और शुरुआती चरण में सिर्फ छोटे हिस्से के निर्माण पर फोकस किया जाएगा।

    बताया जा रहा है कि सऊदी सरकार ने कई अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी कंपनियों के नए कॉन्ट्रैक्ट रोक दिए हैं और कुछ भुगतान भी होल्ड पर डाल दिए गए हैं। वहीं, कुछ बड़े खेल और मनोरंजन निवेशों की गति भी धीमी पड़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध, क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा पहले जैसा नहीं रहा। इसके साथ ही सऊदी अरब को अपने बढ़ते बजट घाटे और भारी खर्चों को संतुलित करने के लिए अब ज्यादा व्यावहारिक रणनीति अपनानी पड़ रही है।

    फिलहाल NEOM पूरी तरह बंद होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इतना साफ है कि सऊदी अरब अब अपने बड़े सपनों को आर्थिक वास्तविकताओं के हिसाब से दोबारा आकार देने की कोशिश कर रहा है।

  • दलाई लामा के अगले अवतार पर फिर गरमाई राजनीति, चीन ने भारत को दी चेतावनी; उत्तराधिकारी को लेकर बढ़ा तनाव

    दलाई लामा के अगले अवतार पर फिर गरमाई राजनीति, चीन ने भारत को दी चेतावनी; उत्तराधिकारी को लेकर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के अगले अवतार को लेकर चीन और भारत के बीच कूटनीतिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। चीन ने साफ कहा है कि दलाई लामा के पुनर्जन्म का मुद्दा उसका “आंतरिक मामला” है और इसमें किसी बाहरी दखल की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    भारत स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि तथाकथित “सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन” को किसी भी संप्रभु देश की मान्यता नहीं है और उसे पुनर्जन्म प्रक्रिया पर दावा करने का अधिकार नहीं है। चीन ने साथ ही भारत से उम्मीद जताई कि वह तिब्बत की स्वतंत्रता से जुड़ी गतिविधियों को मंच नहीं देगा।

    दरअसल, यह विवाद तब और गहरा गया जब दलाई लामा ने हाल में कहा कि उनके पुनर्जन्म को पहचानने का “एकमात्र अधिकार” गादेन फोद्रांग ट्रस्ट के पास होगा और किसी अन्य संस्था या सरकार को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।

    चीन ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि दलाई लामा के किसी भी पुनर्जन्म को बीजिंग की मंजूरी जरूरी होगी। चीन लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि तिब्बती बौद्ध परंपरा में पुनर्जन्म की प्रक्रिया चीनी कानूनों और ऐतिहासिक ‘गोल्डन अर्न’ प्रणाली के तहत होनी चाहिए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि अगला दलाई लामा चीन से बाहर, खासकर भारत में चुना जा सकता है। वर्तमान में तिब्बती निर्वासित सरकार भारत के धर्मशाला में संचालित होती है और दलाई लामा भी लंबे समय से भारत में रह रहे हैं।

    माना जा रहा है कि अगर अगला दलाई लामा भारत या किसी स्वतंत्र देश में चुना जाता है, तो इससे तिब्बत मुद्दे पर चीन की स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर पड़ सकती है। यही वजह है कि बीजिंग इस पूरे मामले को लेकर बेहद संवेदनशील नजर आ रहा है।

    वहीं भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर ‘वन चाइना’ नीति का सम्मान किया जाता है, लेकिन कई भारतीय नेताओं ने कहा है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का फैसला तिब्बती परंपरा और उनके अनुयायियों के अनुसार होना चाहिए।

    फिलहाल दलाई लामा के अगले अवतार को लेकर धार्मिक परंपरा, भू-राजनीति और भारत-चीन रिश्तों के बीच नई खींचतान साफ दिखाई दे रही है।

  • लाहौर में हिंदू-सिख नामों की वापसी पर सियासत गर्म, नजम सेठी बोले-पश्चिमी देशों में छवि चमकाने का खेल

    लाहौर में हिंदू-सिख नामों की वापसी पर सियासत गर्म, नजम सेठी बोले-पश्चिमी देशों में छवि चमकाने का खेल




    नई दिल्ली। पाकिस्तान के लाहौर में विभाजन से पहले के हिंदू, सिख और जैन समुदायों से जुड़े पुराने इलाकों और सड़कों के नाम बहाल करने की तैयारी ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। पंजाब सरकार की इस योजना को लेकर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इसके पीछे पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की रणनीति काम कर रही है।

    दरअसल, पंजाब सरकार ने लाहौर और आसपास के कई ऐतिहासिक इलाकों के पुराने नाम दोबारा लागू करने की योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला मुख्यमंत्री मरियम नवाज की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया और इसे नवाज शरीफ के नेतृत्व वाले ‘लाहौर हेरिटेज एरियाज़ रिवाइवल प्रोजेक्ट’ के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस योजना के तहत इस्लामपुरा का नाम फिर से ‘कृष्ण नगर’, सुन्नत नगर का ‘संत नगर’, मुस्तफाबाद का ‘धर्मपुरा’ और बाबरी मस्जिद चौक का नाम ‘जैन मंदिर रोड’ किए जाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके अलावा भी कई ऐतिहासिक नामों की समीक्षा की जा रही है।

    इसी मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए पत्रकार नजम सेठी ने कहा कि पाकिस्तान में लंबे समय से इस्लामीकरण की राजनीति होती रही है और विभाजन के बाद हिंदू व अन्य गैर-मुस्लिम पहचान वाले नामों को व्यवस्थित तरीके से बदला गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब अचानक पुराने नामों की वापसी के पीछे जनरल असीम मुनीर की पश्चिमी देशों में उदारवादी छवि पेश करने की कोशिश हो सकती है।

    सेठी ने यहां तक कहा कि सेना प्रमुख की मंजूरी के बिना इतना बड़ा फैसला संभव नहीं था। हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इसे केवल सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान को बचाने की पहल बताया जा रहा है।फिलहाल इस फैसले ने पाकिस्तान में इतिहास, राजनीति और पहचान की बहस को फिर से तेज कर दिया है।