Category: International

  • भारत-यूएई संबंधों में नई मजबूती: जयशंकर के दौरे में व्यापक साझेदारी पर रहा जोर

    भारत-यूएई संबंधों में नई मजबूती: जयशंकर के दौरे में व्यापक साझेदारी पर रहा जोर


    नई दिल्ली। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दो दिवसीय आधिकारिक दौरा सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस दौरे के दौरान उन्होंने यूएई के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं और दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। दौरे के बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह यात्रा भारत-यूएई संबंधों को नई दिशा देने वाली रही।

    उच्च स्तरीय नेतृत्व से अहम मुलाकातें

    अबू धाबी में विदेश मंत्री जयशंकर ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत संदेश भी दिया। इस बैठक में ऊर्जा सहयोग, व्यापार विस्तार और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा बैठक में दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी उपस्थित रहे, जिससे यह मुलाकात और अधिक महत्वपूर्ण बन गई।

    विदेश मंत्री स्तर की अलग वार्ता

    डॉ. जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ भी अलग से बैठक की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, क्षेत्रीय स्थिरता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति बनाए रखने और संकट के समय भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

    भारतीय समुदाय से संवाद

    यूएई पहुंचने पर विदेश मंत्री ने वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों से भी मुलाकात की। उन्होंने बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच उनकी सुरक्षा और भलाई से जुड़े मुद्दों को सुना और सरकार द्वारा उनके समर्थन के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। भारतीय समुदाय ने भी भारत सरकार के प्रयासों की सराहना की और दोनों देशों के मजबूत संबंधों पर भरोसा जताया।

    ऊर्जा और व्यापार सहयोग पर फोकस

    यह दौरा भारत की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना और व्यापारिक साझेदारी को और मजबूत करना है। यूएई भारत के प्रमुख व्यापारिक और ऊर्जा साझेदारों में से एक है, और इस दौरे से दोनों देशों के संबंधों में और गहराई आने की उम्मीद है।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह यूएई दौरा भारत-यूएई संबंधों को नई मजबूती देने वाला साबित हुआ है। ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर हुई चर्चाओं ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाने की दिशा तय की है।

  • अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू कराने में जुटा पाकिस्तान, शहबाज-मुनीर ने तेज की कूटनीतिक पहल

    अमेरिका-ईरान वार्ता फिर शुरू कराने में जुटा पाकिस्तान, शहबाज-मुनीर ने तेज की कूटनीतिक पहल

    नई दिल्ली। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शुरुआती बातचीत बेनतीजा रहने के बाद पाकिस्तान ने दोनों देशों को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के लिए अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। यह दावा पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल ने सरकारी सूत्रों के हवाले से किया है।

    पहले दौर की बातचीत नहीं दे सकी ठोस नतीजा
    रिपोर्ट के मुताबिक, प्रारंभिक वार्ता में कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया, हालांकि दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख स्पष्ट रूप से सामने रखे। इसके बावजूद पाकिस्तान को उम्मीद है कि आगे बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में प्रगति हो सकती है।

    वॉशिंगटन और तेहरान से लगातार संपर्क
    पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान दोनों के संपर्क में बना हुआ है और जल्द से जल्द दूसरे दौर की बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, 22 अप्रैल के आसपास समाप्त होने वाले संभावित सीजफायर से पहले किसी ठोस नतीजे तक पहुंचना प्राथमिक लक्ष्य है, ताकि क्षेत्र में तनाव दोबारा न बढ़े।

    डेडलाइन से पहले समाधान की कोशिश
    एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, इसी अवधि में दूसरे दौर की वार्ता आयोजित कराने की दिशा में भी लगातार प्रयास जारी हैं।

    शहबाज शरीफ के निर्देश पर चल रही पहल
    यह पूरी कूटनीतिक कवायद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के निर्देश पर की जा रही है, जिससे स्पष्ट है कि इस्लामाबाद इस मामले को काफी अहम मान रहा है।

    डार और मुनीर कर रहे नेतृत्व
    पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इसहाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर इस प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं। पाकिस्तान दोनों देशों तक वार्ता फिर से शुरू करने का संदेश पहुंचा चुका है और अब उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि जल्द ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगी, जिससे तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और सीमित समय में कूटनीतिक समाधान निकाला जा सके।

  • सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल

    सीमा पर चीन की ‘साइलेंट स्ट्रैटेजी’, PoK के करीब नई काउंटी; वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने जहां दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर खींच रखा है, वहीं इसी बीच चीन ने अपने सीमावर्ती इलाके में एक अहम प्रशासनिक कदम उठाकर नई भू-राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। चीन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान से सटे शिनजियांग क्षेत्र में “सेनलिंग” नाम से नई काउंटी का गठन किया है।
    रिपोर्ट्स के अनुसार, यह नई प्रशासनिक इकाई काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। खासकर वाखान कॉरिडोर की निगरानी और क्षेत्र में उइगर गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर इसे चीन की बड़ी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

    सीमावर्ती इलाकों पर लगातार फोकस
    चीन पिछले एक साल में शिनजियांग में “हेआन” और “हेकांग” के बाद यह तीसरी नई काउंटी बना चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सीमा क्षेत्रों में प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने और सुरक्षा तंत्र को स्थानीय स्तर पर सुदृढ़ करने की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है।

    भारत की आपत्ति बरकरार
    भारत ने इस तरह के बदलावों पर पहले भी कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत का कहना है कि इन नई इकाइयों के कुछ हिस्से उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं।

    विशेष रूप से अक्साई चिन को लेकर भारत ने अपनी संप्रभुता दोहराते हुए चीन के कदमों को अस्वीकार्य बताया है।

    काशगर से जुड़ा प्रशासनिक नियंत्रण
    नई काउंटी को काशगर प्रशासन के तहत रखा जाएगा, जो ऐतिहासिक रूप से सिल्क रूट का प्रमुख केंद्र रहा है। यही क्षेत्र चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) का शुरुआती बिंदु भी है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    सुरक्षा और रणनीति का मिश्रण
    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और निगरानी मजबूत करने की व्यापक रणनीति है। वाखान कॉरिडोर—करीब 74 किलोमीटर लंबा यह क्षेत्र—चीन के लिए संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि यह ताजिकिस्तान और PoK के बीच स्थित है।

    चीन को आशंका रही है कि ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े उइगर लड़ाके इस रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में नई काउंटी के जरिए स्थानीय प्रशासन, खुफिया निगरानी और सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

    आगे क्या?
    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की चेतावनियों के बावजूद चीन के इस कदम से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। आने वाले समय में यह मुद्दा कूटनीतिक और सामरिक स्तर पर और अहम हो सकता है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • होर्मुज के बाद लाल सागर में बढ़ा खतरा: हथियारबंद हमलावरों ने घेरा जहाज, टली बड़ी वारदात

    होर्मुज के बाद लाल सागर में बढ़ा खतरा: हथियारबंद हमलावरों ने घेरा जहाज, टली बड़ी वारदात


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब समुद्री मार्गों पर भी गंभीर असर डालता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में टकराव की स्थिति के बीच अब लाल सागर में भी जहाजों पर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है।

    हथियारबंद समूह ने जहाज को घेरा

    यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के मुताबिक, यमन के अल-हुदैदा तट से करीब 54 नॉटिकल मील दूर एक जहाज को 10-12 हथियारबंद लोगों ने घेर लिया। इनमें 4-5 हमलावर ऑटोमैटिक हथियारों से लैस थे।

    हमलावरों ने जहाज को रोकने का आदेश दिया, लेकिन कप्तान ने इंकार कर दिया। इसके बाद हमलावर जहाज के करीब आकर उस पर चढ़ने की कोशिश करने लगे।

    कप्तान की सूझबूझ से टला खतरा

    स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन जहाज के कप्तान ने तुरंत फ्लेयर दागकर खतरे का संकेत दिया। इसके बाद हमलावर पीछे हट गए और दक्षिण-पूर्व दिशा में भाग निकले। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, लेकिन खतरे की गंभीरता साफ झलकती है।

    हूती विद्रोहियों पर शक

    इस हमले के पीछे हूती विद्रोही का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। अक्टूबर 2023 से ये विद्रोही लाल सागर में जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग और व्यापार प्रभावित हुआ है।

    इन हमलों के चलते कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेज रही हैं, जिससे यात्रा 10-14 दिन लंबी हो रही है और लागत भी बढ़ रही है।

    होर्मुज में भी जारी तनातनी

    उधर ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स के जरिए चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी ‘गलत हरकत’ का कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरान का दावा है कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर उसकी पूरी निगरानी और नियंत्रण है।

    बढ़ता समुद्री संकट

    विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में बढ़ता खतरा वैश्विक तेल सप्लाई और व्यापारिक मार्गों के लिए बड़ा संकट बन सकता है। यदि हालात नहीं संभले, तो इसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।

  • ईरान अपने रुख पर कायम… संसद अध्यक्ष बोले- 'ट्रंप की धमकियों से नहीं पड़ता कोई असर

    ईरान अपने रुख पर कायम… संसद अध्यक्ष बोले- 'ट्रंप की धमकियों से नहीं पड़ता कोई असर


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के संसद अध्यक्ष (Parliament Speaker) मोहम्मद बाकेर गालिबाफ (Mohammad Baqer Ghalibaf) ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा, ये धमकियां बेअसर हैं और ईरान अपने रुख पर मजबूत रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हो रही है।

    ईरानी सरकारी मीडिया और अल-जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि तेहरान ने बातचीत के दौरान ‘बहुत अच्छे प्रस्ताव’ दिए हैं, जिससे बातचीत आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा, ट्रंप की हाल की धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं है।

    हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे: गालिबाफ
    उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति को चेतावनी देते हुए कहा, अगर आप लड़ेंगे तो हम भी लड़ेंगे और अगर आप समझदारी से आएंगे तो हम भी समझदारी से बात करेंगे। उन्होंने आगे कहा, हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे। उन्हें हमारी इच्छाशक्ति को फिर से परखने दीजिए, ताकि हम उन्हें बड़ा सबक सिखा सकें।

    बातचीत की मैच पर वापस आएगा ईरान: ट्रंप
    इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्हें भरोसा है कि ईरान आखिरकार अमेरिका की शर्तें मान लेगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान वापस बातचीत की मेज पर आएगा। उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि वे हमें सब कुछ दें। ईरान के पास कोई ताकत नहीं बची है। उनके पास कोई बढ़त नहीं हैं।

    उन्होंने अपनी हालिया सख्त बयानबाजी का बचाव भी किया और कहा कि यही बातचीत शुरू होने की वजह बनी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगते हैं, इसलिए कड़ा जवाब जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एक टिप्पणी ने ही ईरान को बातचीत की मेज पर ला दिया और वह अभी भी वहीं मौजूद हैं।

  • रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब पहुंचा पाकिस्तान का सैन्य दल, हजारों सैनिक और लड़ाकू विमान तैनात

    रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब पहुंचा पाकिस्तान का सैन्य दल, हजारों सैनिक और लड़ाकू विमान तैनात

    लाहौर। पाकिस्तान ने अपने सैन्य सहयोग को मजबूत करते हुए सऊदी अरब में बड़ा सैन्य दल तैनात किया है। इस दल में करीब 13,000 सैनिकों के साथ 10 से 18 लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। यह तैनाती पिछले वर्ष दोनों देशों के बीच हुए संयुक्त रणनीतिक रक्षा समझौते के तहत की गई है।

    सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह पाकिस्तानी दल पूर्वी क्षेत्र में स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किया गया है। इसमें पाकिस्तान वायु सेना के लड़ाकू और सहयोगी विमान शामिल हैं।

    मंत्रालय ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, सैन्य क्षमता को मजबूत बनाना और क्षेत्रीय व वैश्विक स्तर पर सुरक्षा तथा स्थिरता को बढ़ावा देना है। पाकिस्तान सरकार के एक अधिकारी ने भी इस तैनाती की पुष्टि की है।

    समझौते की शर्तों के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मोहम्मद मेहदी के अनुसार, पाकिस्तान ने पिछले महीने ही सैनिकों और विमानों की तैनाती कर दी थी, जिसकी जानकारी अब सार्वजनिक हुई है।

    उन्होंने बताया कि पहले से ही करीब 10,000 पाकिस्तानी सैनिक सऊदी अरब में मौजूद हैं। वहीं, एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बीच पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब को मिसाइल रोधी प्रणाली भी उपलब्ध कराई है।

  • Donald Trump की चीन को चेतावनी: ईरान को हथियार दिए तो होंगे गंभीर परिणाम

    Donald Trump की चीन को चेतावनी: ईरान को हथियार दिए तो होंगे गंभीर परिणाम


    नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन नेता Donald Trump ने चीन को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगर वह Iran को हथियार या सैन्य सहायता भेजता है, तो इसके “गंभीर और दूरगामी परिणाम” होंगे।

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और कई देशों के बीच कूटनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं।

    चीन पर सीधा निशाना

    ट्रंप ने अपने बयान में China की संभावित भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए यह जरूरी है कि कोई भी देश संघर्ष क्षेत्रों में हथियारों की आपूर्ति न करे। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चीन इस तरह की किसी गतिविधि में शामिल होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय नियमों और शांति प्रयासों के खिलाफ होगा।

    हालांकि चीन की ओर से इस बयान पर तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पहले भी वह पश्चिम एशिया में तटस्थ और संतुलित भूमिका की बात करता रहा है।

    ईरान को लेकर बढ़ती चिंता

    ट्रंप ने विशेष रूप से ईरान का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां किसी भी प्रकार की सैन्य आपूर्ति पूरे क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा सकती है। उनका कहना था कि ऐसे कदम न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक संबंधों पर भी बड़ा असर डाल सकते हैं।

    वैश्विक कूटनीति पर असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान आने वाले समय में अमेरिका-चीन संबंधों पर भी प्रभाव डाल सकता है। पहले से ही दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह नया बयान कूटनीतिक माहौल को और जटिल बना सकता है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

    ईरान को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय विवादों के बीच कई देश क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हथियारों की संभावित आपूर्ति और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है।

    अमेरिका की रणनीतिक स्थिति

    विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका आने वाले समय में चीन और ईरान दोनों पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। ट्रंप का यह बयान इसी दिशा में एक सख्त संदेश माना जा रहा है।

    ट्रंप की चेतावनी ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। जहां एक ओर शांति और स्थिरता की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे बयान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में नई चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। अब देखना होगा कि चीन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है।
  • बड़ी खबर : ईरान के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान रहेगा जारी" शांति वार्ता के बीच नेतन्याहू का बड़ा बयान

    बड़ी खबर : ईरान के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान रहेगा जारी" शांति वार्ता के बीच नेतन्याहू का बड़ा बयान

    नई दिल्ली में सामने आई जानकारी के अनुसार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और आगे भी कई कदम उठाए जाएंगे। इजरायल का दावा है कि ईरान के पास अब कोई सक्रिय यूरेनियम संवर्धन केंद्र नहीं बचा है, लेकिन इसके बावजूद सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही गई है।

    लेबनान में हमले जारी, ड्रोन से निशाना
    दूसरी ओर, लेबनान के सरकारी मीडिया ने दक्षिणी क्षेत्रों में नए इजरायली हमलों की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार अल-मजादेल और तेबनीन इलाकों में ड्रोन हमले किए गए हैं। इन घटनाओं के बाद राजधानी बेरुत में इजरायल के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं, जहां नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया।

    लेबनान में राजनीतिक तनाव और यात्रा रद्द
    लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अपनी वॉशिंगटन यात्रा और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में देश की सुरक्षा और एकता उनकी पहली प्राथमिकता है।

  • इस्लामाबाद में 21 घंटे की अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा, खाली हाथ लौटे जेडी वेंस, सीजफायर पर सहमति नहीं

    इस्लामाबाद में 21 घंटे की अमेरिका-ईरान वार्ता बेनतीजा, खाली हाथ लौटे जेडी वेंस, सीजफायर पर सहमति नहीं

    इस्लामाबाद | इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर लगभग 21 घंटे तक चली मैराथन वार्ता आखिरकार बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। इसके बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान से रवाना हो गए। वार्ता के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने स्वीकार किया कि कोई डील नहीं हो सकी, हालांकि उन्होंने कहा कि बातचीत अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए अधिक महत्वपूर्ण थी।

    अमेरिका का अंतिम प्रस्ताव और परमाणु मुद्दा
    वेंस ने बताया कि अमेरिका ने लंबे संवाद के बाद अपना “सबसे बेहतर और अंतिम प्रस्ताव” रखा था। उन्होंने दावा किया कि ईरान की न्यूक्लियर संवर्धन सुविधाएं नष्ट हो चुकी हैं, जिससे बातचीत का फोकस अब इस पर है कि तेहरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न करे। उनके अनुसार, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान केवल वर्तमान नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में भी परमाणु हथियार क्षमता से दूर रहने की प्रतिबद्धता दे सकता है।

    पाकिस्तान की मध्यस्थता और प्रतिक्रिया
    इस वार्ता के बीच पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने बयान जारी कर दोनों पक्षों से सीजफायर का पालन करने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए आगे बढ़ेंगे। डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान भविष्य में भी दोनों देशों के बीच बातचीत को आसान बनाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।इस वार्ता के बीच पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने बयान जारी कर दोनों पक्षों से सीजफायर का पालन करने की अपील की। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए आगे बढ़ेंगे। डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान भविष्य में भी दोनों देशों के बीच बातचीत को आसान बनाने में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।

  • शांति वार्ता के बीच बड़ा बयान: बेंजामिन नेतन्याहू बोले-ईरान के खिलाफ अभियान खत्म नहीं

    शांति वार्ता के बीच बड़ा बयान: बेंजामिन नेतन्याहू बोले-ईरान के खिलाफ अभियान खत्म नहीं


    नई दिल्ली।मध्य पूर्व में चल रही शांति वार्ताओं के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ईरान के खिलाफ इजरायल का अभियान खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों और क्षेत्रीय हालात को देखते हुए यह कार्रवाई जारी रहेगी।

    नेतन्याहू के इस बयान ने ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल बढ़ा दी है, जब कई देशों की मध्यस्थता में तनाव कम करने और संघर्ष विराम को लेकर प्रयास तेज किए जा रहे हैं। हालांकि, इजरायल की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि वह अपनी सुरक्षा रणनीति में किसी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।

    ईरान को लेकर सख्त संदेश

    नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा कि Iran से जुड़े खतरे अभी भी बने हुए हैं और इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाता रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक लंबी रणनीति का हिस्सा है।

    इजरायली प्रधानमंत्री के मुताबिक, क्षेत्र में स्थिरता तभी संभव है जब “आतंकी ढांचे और उनके समर्थन नेटवर्क” को पूरी तरह कमजोर किया जाए।

    लेबनान में भी सैन्य कार्रवाई जारी

    इस बीच इजरायल की सेना की गतिविधियां Lebanon में भी जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तरी सीमा क्षेत्र में तनाव अभी भी बरकरार है और कई इलाकों में रुक-रुक कर हमले और जवाबी कार्रवाई देखी जा रही है।

    हालांकि इजरायल का दावा है कि यह कार्रवाई केवल सुरक्षा और जवाबी कदमों के तहत की जा रही है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

    शांति प्रयासों पर सवाल

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश दोनों पक्षों के बीच बातचीत और संघर्ष विराम की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नेतन्याहू के ताजा बयान ने इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान शांति प्रक्रिया को और जटिल बना सकते हैं।

    क्षेत्रीय तनाव और बढ़ती चिंता

    मध्य पूर्व में पहले से ही अस्थिर हालात के बीच इजरायल, ईरान और लेबनान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। ऊर्जा आपूर्ति, सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर भी इसका असर देखा जा रहा है।

    नेतन्याहू के इस सख्त रुख से साफ है कि फिलहाल क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत कमजोर हैं। जहां एक ओर शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई और बयानबाजी ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।