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  • ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा

    ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा


    तेहरान।
     ईरान ने अमेरिका  के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी नौसेना ने कहा है कि तेहरान की अनुमति के बिना इस अहम समुद्री मार्ग में प्रवेश करने वाले किसी भी पोत को नष्ट कर दिया जाएगा।

    रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने समुद्री मार्ग के आसपास मौजूद जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि होर्मुज पार करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सेपाह) की नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चेतावनी में कहा गया कि बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज को “उड़ा दिया जाएगा।”

    The Wall Street Journal की रिपोर्ट में चालक दल द्वारा साझा किए गए ऑडियो का हवाला देते हुए बताया गया कि इस चेतावनी के बाद कई जहाज फिलहाल होर्मुज के आसपास रुके हुए हैं। फारस की खाड़ी के ऊपर युद्धक विमानों की तैनाती भी जारी बताई गई है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्ग
    ईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग करीब 34 किलोमीटर चौड़ा है और खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।

    दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा
    डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते होर्मुज मार्ग “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” तरीके से खुला रहे। उन्होंने बताया कि यह फैसला शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रस्ताव के बाद लिया गया।

    ईरान का संदेश—यह युद्ध का अंत नहीं

    दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने युद्धविराम को स्वीकार करते हुए कहा कि यह संघर्ष का अंत नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी कि यदि विरोधी पक्ष कोई गलती करता है तो “पूर्ण शक्ति” से जवाब दिया जाएगा।

    बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। हालांकि, होर्मुज में बढ़ी सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और संवेदनशील बना हुआ है।

  • सीजफायर, ईरान-इजरायल-अमेरिका की तनातनी से फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट

    सीजफायर, ईरान-इजरायल-अमेरिका की तनातनी से फिर भड़क सकता है मिडिल ईस्ट


    तेहरान।
     करीब 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ, तो क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी थी। लेकिन महज 24 घंटे के भीतर ही हालात बदलते नजर आ रहे हैं। तीनों प्रमुख पक्ष—ईरान, इजरायल और अमेरिका—के बयान अलग-अलग दिशा में जाते दिख रहे हैं, जिससे सीजफायर पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

    अमेरिका ने खारिज किया ईरान का प्रस्ताव
    कूटनीतिक मोर्चे पर सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के 10 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन ने तीखे शब्दों में कहा कि प्रस्ताव को “कूड़े के डिब्बे में डाल दिया गया।” इससे संकेत मिला कि वॉशिंगटन ईरान की शर्तों पर आगे बढ़ने को तैयार नहीं है और वह इजरायल के रुख का समर्थन कर रहा है।


    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि सीजफायर समझौते में लेबनान से जुड़े हमलों को शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उस मोर्चे पर कार्रवाई जारी रह सकती है।

    लेबनान पर इजरायल के हमले तेज
    सीजफायर के तुरंत बाद इजरायल ने समझौते की तकनीकी खामी का हवाला देते हुए कहा कि लेबनान में उसके सैन्य अभियान जारी रहेंगे। इसके बाद इजरायली हमलों में तेजी देखी गई, जिनमें 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है।
    इजरायल का कहना है कि वह हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा और यह कार्रवाई सीजफायर का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी।

    ईरान की चेतावनी—हमले हुए तो खत्म समझौता
    इजरायल के रुख पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेहरान ने कहा कि अगर लेबनान पर हमले जारी रहे तो सीजफायर स्वतः समाप्त माना जाएगा। ईरान ने अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा कि “गेंद अब आपके पाले में है”, यानी जवाबी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।

    क्या हो सकता है असर?

    अगर सीजफायर पूरी तरह टूटता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट पर पड़ सकता है। हिजबुल्लाह के सीधे युद्ध में उतरने से संघर्ष कई मोर्चों पर फैल सकता है और ईरान की प्रत्यक्ष भागीदारी का खतरा बढ़ जाएगा।
    विशेषज्ञों का मानना है कि हालात बिगड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

    महज 24 घंटे में समझौते का डगमगाना यह दिखाता है कि पक्षों के बीच अविश्वास कितना गहरा है और शांति की राह अभी भी बेहद कठिन बनी हुई है।

  • ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला

    ईरान युद्ध में सऊदी अरब को मिला दोहरा जख्म, तेल सप्लाई के दूसरे रास्ते पर भी हमला

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी जंग ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद थम गई है। लेकिन इसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग जाएंगे। इस युद्ध  के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दामों में उछाल आ गया था। सऊदी अरब ने तेल सप्लाई के अपने दूसरे रास्ते (ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन) का उपयोग करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी हमले में इस पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद होर्मुज का रास्ता खुल गया हो, लेकिन इसके बाद भी लाखों बैरल तेल कच्चे बाजार से बाहर होने की आशंका है। सऊदी अरब में मौजूद एक स्त्रोत के मुताबिक ईरान ने अपने हमलों के दौरान सऊदी अरब के कई तेल प्रतिष्ठानों और तेल सप्लाई प्वाइंट्स को निशाना बनाया था। इसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और उसके एक केंद्र (यानबू बंदरगाह) को भी निशाना बनाया गया है। इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब होर्मुज को बायपास करके तेल की सप्लाई को चालू रखता है।

    बता दें, ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ही सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का निर्माण किया था। इसके जरिए तेल सप्लाई को यानबू पर ले जाकर लाल सागर के जरिए आगे बढ़ाया जाता है। इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल सप्लाई होता था। 28 फरवरी के बाद सामने आए शिपिंग डेटा के मुताबिक यानबू की क्षमता करीब 4.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। पिछले कुछ दिनों से यह लगातार अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही थी। लेकिन अब इस पर भी हमला करके ईरान ने सऊदी के इस कदम पर भी पानी फेर दिया है।

    तेल प्रतष्ठानों पर हुए इन हमलों की जिम्मेदारी आईआरजीसी ने ली है। बुधवार को जारी एक बयान में आईआरजीसी की तरफ से कहा गया कि फारस की खाड़ी में कई लक्ष्यों के ऊपर मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमला किया गया है। इसमें यानबू में मौजूद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया। यह पहली बार नहीं है कि जब इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यानबू बंदरगाह को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे पहले भी ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तमाम ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया था। होर्मुज के ऊपर तेहरान ने पहले से ही पाबंदी लगा रखी थी। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे थे। हालांकि, अब सीजफायर के ऐलान के साथ ही होर्मुज को खोलने पर भी सहमति बनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कल से होर्मुज अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू भी हो जाता है, तब भी स्थिति को सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग जाएगा।

  • अमेरिका-ईरान सीजफायर विवाद: ईरान ने तीन उल्लंघनों की बात कही, 10 पॉइंट्स पर चर्चा जारी

    अमेरिका-ईरान सीजफायर विवाद: ईरान ने तीन उल्लंघनों की बात कही, 10 पॉइंट्स पर चर्चा जारी


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल को दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत दोनों पक्ष 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर राजी हुए थे लेकिन अब ईरान ने आरोप लगाया है कि इनमें से तीन बिंदुओं का उल्लंघन किया गया है। ईरान के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिका पर दो हफ्ते के सीजफायर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया।

    गालिबफ ने कहा कि अमेरिका पर ईरान का गहरा ऐतिहासिक अविश्वास है और अमेरिका बार बार अपने कमिटमेंट्स का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान के 10 पॉइंट सीजफायर प्रस्ताव के तीन हिस्सों का उल्लंघन हुआ है। इसमें शामिल है इजरायल का लेबनान पर लगातार हमला ईरानी एयरस्पेस में ड्रोन का प्रवेश और ईरानी यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नकारना।

    अमेरिका और ईरान के बीच 10 पॉइंट्स पर बनी सहमति में सबसे पहला बिंदु दोनों पक्षों द्वारा गैर आक्रामकता की गारंटी देना और ईरान के यूरेनियम संवर्धन को स्वीकार करना था। दूसरा ईरान की सेना के साथ तालमेल बनाकर होर्मुज स्ट्रेट से नियंत्रित मार्ग सुनिश्चित करना। तीसरा लेबनान में हिज्बुल्लाह समूह के खिलाफ लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना। चौथा इलाके के सभी बेस और डिप्लॉयमेंट पॉइंट से अमेरिकी सुरक्षा बलों को हटाना।

    साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को खत्म करना होर्मुज स्ट्रेट में एक सुरक्षित ट्रांजिट प्रोटोकॉल बनाना जो तय शर्तों के तहत ईरानी दबदबे की गारंटी दे संघर्ष के दौरान ईरान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई करना और ईरान के खिलाफ सभी मुख्य और द्वितीयक प्रतिबंध हटाना भी शामिल है। इसके अलावा विदेश में सभी ब्लॉक ईरानी संपत्तियों को रिलीज करना और इन सभी शर्तों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाइंडिंग प्रस्ताव के जरिए मंजूरी देना तय किया गया था।

    ईरान के डेलीगेशन ने इस विवाद के बीच अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के लिए गुरुवार रात इस्लामाबाद में पहुंचने की तैयारी की है। पाकिस्तान में ईरानी राजदूत ने सोशल मीडिया पर लिखा पीएम शहबाज शरीफ की बुलाई गई डिप्लोमैटिक पहल को नाकाम करने के लिए इजरायली सरकार द्वारा बार बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी जनता की राय पर शक के बावजूद ईरान के सुझाए गए 10 पॉइंट्स पर आधारित गंभीर बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद पहुंच रहा है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस्लामाबाद की यह पहल दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाने और सीजफायर के उल्लंघनों पर स्पष्ट समाधान निकालने में अहम साबित हो सकती है। आने वाली बैठक में इन 10 पॉइंट्स और उल्लंघनों पर चर्चा होगी जो इस क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

  • ईरानी राजदूत ने पाकिस्तान में प्रतिनिधिमंडल के आगमन की दी जानकारी, बाद में डिलीट किया पोस्ट

    ईरानी राजदूत ने पाकिस्तान में प्रतिनिधिमंडल के आगमन की दी जानकारी, बाद में डिलीट किया पोस्ट

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति के बाद दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ उच्चस्तरीय बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान पहुंच सकते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर यह जानकारी दी थी कि अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरानी डेलिगेशन इस्लामाबाद पहुंच रहा है। हालांकि उन्होंने बाद में यह पोस्ट डिलीट कर दी।

    ईरानी राजदूत के पोस्ट में लिखा गया था कि पीएम शहबाज शरीफ की बुलाई गई डिप्लोमेटिक पहल को नाकाम करने के लिए इजरायल द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी जनता की राय पर शक के बावजूद ईरान के सुझाए गए 10 पॉइंट्स पर आधारित बातचीत के लिए यह डेलीगेशन पाकिस्तान पहुंच रहा है। हालांकि अब यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उपलब्ध नहीं है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को खत्म करने के मकसद से बातचीत के लिए पाकिस्तान आ सकते हैं। अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने दो वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान के खुद को एक अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश करने के बाद इस हफ्ते इस्लामाबाद में बड़ी बैठक की तैयारी चल रही है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि संभव है कि जेडी वेंस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पाकिस्तान का दौरा करें। इससे पहले द फाइनेंशियल टाइम्स ने यह बताया कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने रविवार को ट्रंप से बातचीत की थी। इसी बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बात की।

    व्हाइट हाउस ने बयान में कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान निर्धारित समय से आगे चल रहा है और इसके मुख्य उद्देश्यों के करीब पहुंच रहा है। वहीं वॉशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि तेहरान के साथ “सार्थक” बातचीत जारी रखी जा रही है जिसका उद्देश्य इस संघर्ष को समाप्त करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है और इस्लामाबाद की पहल दोनों पक्षों के बीच भरोसे का माहौल बनाने में अहम साबित हो सकती है। ईरानी राजदूत के सोशल मीडिया पोस्ट को डिलीट करना इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और कूटनीतिक सावधानी बरती जा रही है।

    इस तरह अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत और पाकिस्तान की मध्यस्थता ने क्षेत्रीय राजनीति में एक नई दिशा देने की संभावना पैदा कर दी है। आगामी बैठक और उच्चस्तरीय वार्ताएं इस संघर्ष के भविष्य को तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

  • ईरान संघर्ष के बीच सऊदी अरब को दोहरा झटका, तेल सप्लाई के वैकल्पिक मार्ग पर हमला

    ईरान संघर्ष के बीच सऊदी अरब को दोहरा झटका, तेल सप्लाई के वैकल्पिक मार्ग पर हमला

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी जंग ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद थम गई है। लेकिन इसकी वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग जाएंगे। इस युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था, जिसकी वजह से पूरी दुनिया में कच्चे तेल के दामों में उछाल आ गया था। सऊदी अरब ने तेल सप्लाई के अपने दूसरे रास्ते (ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन) का उपयोग करना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब सामने आईं रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी हमले में इस पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बाद होर्मुज का रास्ता खुल गया हो, लेकिन इसके बाद भी लाखों बैरल तेल कच्चे बाजार से बाहर होने की आशंका है।

    सऊदी अरब में मौजूद एक स्त्रोत के मुताबिक ईरान ने अपने हमलों के दौरान सऊदी अरब के कई तेल प्रतिष्ठानों और तेल सप्लाई प्वाइंट्स को निशाना बनाया था। इसमें ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और उसके एक केंद्र (यानबू बंदरगाह) को भी निशाना बनाया गया है। इस पाइपलाइन के जरिए सऊदी अरब होर्मुज को बायपास करके तेल की सप्लाई को चालू रखता है।

    बता दें, ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए ही सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का निर्माण किया था। इसके जरिए तेल सप्लाई को यानबू पर ले जाकर लाल सागर के जरिए आगे बढ़ाया जाता है।

    इस पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल तेल सप्लाई होता था। 28 फरवरी के बाद सामने आए शिपिंग डेटा के मुताबिक यानबू की क्षमता करीब 4.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। पिछले कुछ दिनों से यह लगातार अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही थी। लेकिन अब इस पर भी हमला करके ईरान ने सऊदी के इस कदम पर भी पानी फेर दिया है।

    तेल प्रतष्ठानों पर हुए इन हमलों की जिम्मेदारी आईआरजीसी ने ली है।

    बुधवार को जारी एक बयान में आईआरजीसी की तरफ से कहा गया कि फारस की खाड़ी में कई लक्ष्यों के ऊपर मिसाइलों और ड्रोन्स के जरिए हमला किया गया है। इसमें यानबू में मौजूद अमेरिकी कंपनियों के ठिकानों को भी निशाना बनाया। यह पहली बार नहीं है कि जब इस संघर्ष के दौरान ईरान ने यानबू बंदरगाह को निशाना बनाने की कोशिश की है। इससे पहले भी ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के तमाम ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया था। होर्मुज के ऊपर तेहरान ने पहले से ही पाबंदी लगा रखी थी। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल के दाम आसमान छू रहे थे। हालांकि, अब सीजफायर के ऐलान के साथ ही होर्मुज को खोलने पर भी सहमति बनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कल से होर्मुज अपनी पूरी क्षमता के साथ शुरू भी हो जाता है, तब भी स्थिति को सामान्य होने में कई महीनों का वक्त लग जाएगा।
  • ट्रंप ने खोली पाकिस्तान के दावे की पोल, शहबाज शरीफ के बयान पर उठे सवाल

    ट्रंप ने खोली पाकिस्तान के दावे की पोल, शहबाज शरीफ के बयान पर उठे सवाल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान के दावों पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था जिससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है।

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में कहा कि सीजफायर समझौते में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि संभवतः ईरान ने इसे अलग तरह से समझा। वेंस के मुताबिक यह युद्धविराम अमेरिका ईरान और उनके सहयोगियों जैसे इजरायल और अरब देशों पर केंद्रित है न कि लेबनान पर।

    ट्रंप ने भी किया इनकार

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट कहा कि लेबनान को समझौते में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि इसकी वजह हिज्बुल्लाह है और वहां की स्थिति अलग तरह की झड़प का हिस्सा है।

    शहबाज शरीफ के बयान से बढ़ा विवाद

    इससे पहले शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि ईरान अमेरिका और उनके सहयोगी लेबनान समेत सभी क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों को इस्लामाबाद में आगे की वार्ता के लिए आमंत्रित भी किया था। उनके इस बयान के बाद अब अमेरिका के स्पष्ट रुख से पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

    इजरायल पहले ही कर चुका था साफ इनकार

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके थे कि यह युद्धविराम लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई पर लागू नहीं होगा। सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में हमले भी जारी रखे। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 89 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई हिज्बुल्लाह के खिलाफ जारी रहेगी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बंद बढ़ा तनाव
    लेबनान में हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया जिसे लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है और यह आशंका पैदा हो गई है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम आगे टिक पाएगा या नहीं।

  • तू मस्त-ए-कैलाश…. युद्ध के बीच ईरानी भाषा में शिवजी का भवन हुआ वायरल…

    तू मस्त-ए-कैलाश…. युद्ध के बीच ईरानी भाषा में शिवजी का भवन हुआ वायरल…


    तेहरान।
    मिडिल ईस्ट (Middle East) में वॉर के बीच ईरानी भाषा (Iranian language) के कुछ गाने चर्चा में है। यहां हम जिस गाने का जिक्र कर रहे हैं वो शंकरजी का भजन (Shankarji’s hymn) है। इसका टाइटल है, ‘मस्त-ए-कैलाश’। इस गाने में ईरान के कुछ लोग शिव मंदिर में पूजा करते दिख रहे हैं। कई पुरानी तस्वीरें दिख रही हैं। गायिका ने बहुत प्यारी आवाज में इसे गाया है। इसे यूट्यूब पर बियॉन्ड कॉन्शियस (Beyond Conscious on YouTube) पर देखा जा कता है। इसमें चैतन्य शर्मा को क्रेडिट दिया गया है। भजन ईरानी भाषा में है और इसमें शंकरजी की तारीफ की गई है।


    गाने में कई पुरानी तस्वीरें

    गाने की शुरुआत में एक स्टिल इमेज दिखती है जिसमें एक परिवार एक मंदिर में शिवलिंग की पूजा कर रहा है। इसके बाद कई शिवलिंग, पुराने मंदिर, नंदी की आकृति दिखती है। गाने के बोल हैं, तू जोगी ये कैलाश, तू मस्त ए कैलाश, ऐ शंकरा, ऐ शंकरा। यहां देखें गाना


    गाने की लिरिक्स

    तू जोगी-ये कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाश
    ऐ शंकरा, ऐ शंकरा
    आतिश-ए-हक, ऐ शंकरा
    तू जोगी-ये कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाश
    जहर-ए-जहां नुशीदी, फिदा-ये-जहां
    खाक-ए-भसम पुशीदी, ऐ जान-ए-जहां
    माह-ए-शब बर सर-ए-तू मी-दरखशद
    सदा-ये डमरू दर आसमां मी-रक्सद
    ऐ नीलकंठ, ऐ शंकरा
    आतिश-ए-हक, ऐ शंकरा
    तू जोगी-ए कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाश
    मार-ए-सियाह दर गरदनात ख्वाबिदा
    चश्म-ए-सेव्वम, रोशन ओ बीदारिदा
    अज सिंधु ता पार्स, येक ही खुदा
    ओम नमः शिवाय, या महादेवा
    तू मस्त-ए-कैलाश…
    ऐ शंकरा…
    हक शिवा, हक शिवा
    मस्त-ए-मस्त-ए-मस्त-ए-शिवा
    हक शिवा, हक शिवा
    आतिश दर जां, आतिश दर रूह
    तू कोह-ए-कैलाश, तू अजीम कोह
    रक्स-ए-तांडव, दर इन आलम
    भसम-ए-पाक, ऐ महादेवाम
    ऐ नीलकंठ, ऐ शंकरा
    ओम नमः शिवाय, या शंकरा
    तू जोगी-ये कैलाश, तू मस्त-ए-कैलाश
    या महादेव…


    समझें गाने का हिंदी मतलब

    आप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के मस्त प्रभु हैं।
    हे शंकर, हे शंकर
    सत्य की अग्नि हैं आप, हे शंकर
    आप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं।
    आपने संसार के विष को पी लिया, संसार के लिए एक महान बलिदान।
    आपने पवित्र भस्म धारण की, हे जगत की आत्मा।
    रात का चांद आपके मस्तक पर चमकता है,
    डमरू की ध्वनि आकाश में नृत्य करती है।
    हे नीलकंठ! हे शंकर!
    सत्य की अग्नि हैं आप, हे शंकर!
    आप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं।
    काला नाग आपकी गर्दन पर विश्राम करता है,
    तीसरी आंख जागृत और प्रकाशमान है।
    सिंध से लेकर पर्शिया (ईरान का पुराना नाम) तक एक ही दिव्यता है,ओम नमः शिवाय! हे महादेव!
    आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं…
    हे शंकर…
    सत्य ही शिव है! सत्य ही शिव है!
    आनंदमय, आनंदमय, आनंदमय हैं शिव!
    सत्य ही शिव है! सत्य ही शिव है!
    आत्मा में अग्नि! चेतना में अग्नि!
    आप ही कैलाश हैं, आप ही महान पर्वत हैं!
    इस जगत में तांडव का नृत्य!
    हे मेरे महादेव, पवित्र भस्म के स्वामी!
    हे नीलकंठ! हे शंकर!
    ओम नमः शिवाय! हे शंकर!
    आप कैलाश के योगी हैं, आप कैलाश के आनंदमय प्रभु हैं।
    हे महादेव…

    यूट्यूब पर यह गाना Beyond Conscious चैनल पर है। इस पर शिवजी के कई और भी भजन हैं।

  • दो नावों पर सवार पाकिस्तान, चीन के हथियार और अमेरिका की कृपा के बीच फंसी कूटनीति

    दो नावों पर सवार पाकिस्तान, चीन के हथियार और अमेरिका की कृपा के बीच फंसी कूटनीति

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच जब ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी तब अचानक सीजफायर की घोषणा ने दुनिया को राहत दी। लेकिन इस युद्धविराम के पीछे जिस देश का नाम सामने आया उसने सभी को चौंका दिया। यह देश था पाकिस्तान जो खुद आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर का नाम लेकर सीजफायर का श्रेय दिए जाने के बाद इस्लामाबाद ने इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। हालांकि वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि यह कहानी इतनी सीधी नहीं है बल्कि इसके पीछे बड़ी शक्तियों का जटिल खेल छिपा है।

    असल में चीन लंबे समय से पाकिस्तान का आर्थिक और सैन्य सहयोगी रहा है। भारी कर्ज और हथियारों के सहारे पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति बनी हुई है। लेकिन हाल के वर्षों में आर्थिक दबाव और कर्ज वापसी की सख्ती ने पाकिस्तान को नई राह तलाशने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में अमेरिका के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करना उसके लिए एक जरूरी विकल्प बन गया।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि सीजफायर के पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका एक स्वतंत्र मध्यस्थ की कम और एक संदेशवाहक की अधिक रही। चीन जो ईरान से तेल आपूर्ति पर काफी निर्भर है इस संघर्ष के लंबा खिंचने से खुद आर्थिक दबाव में आ सकता था। ऐसे में उसने पाकिस्तान के माध्यम से दबाव बनाकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।

    दूसरी ओर अमेरिका के लिए भी यह युद्ध लंबे समय तक जारी रखना आसान नहीं था। घरेलू दबाव और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच उसे एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो मध्यस्थ के रूप में सामने आ सके। पाकिस्तान इस भूमिका के लिए उपयुक्त था क्योंकि वह पहले से ही दोनों खेमों से संवाद बनाए हुए था।

    यह भी साफ है कि पाकिस्तान की यह सक्रियता केवल शांति स्थापित करने की मंशा से नहीं थी। उसके सामने कई मोर्चों पर संकट खड़े हैं। अफगानिस्तान सीमा पर अस्थिरता आंतरिक आर्थिक संकट और बढ़ता कर्ज उसे लगातार दबाव में रखे हुए हैं। इसके अलावा भारत के साथ तनाव और सैन्य चुनौतियां भी उसकी स्थिति को कमजोर करती हैं।

    इसी कारण पाकिस्तान ने एक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है जिसमें वह एक तरफ चीन को नाराज नहीं करना चाहता और दूसरी ओर अमेरिका की कृपा भी हासिल करना चाहता है। यही वजह है कि वह दोनों देशों के बीच अपनी उपयोगिता साबित करने में जुटा है।

    कुल मिलाकर यह घटनाक्रम पाकिस्तान की कूटनीति से ज्यादा उसकी मजबूरी को उजागर करता है। चीन के कर्ज और अमेरिका के भरोसे के बीच फंसा पाकिस्तान अब हर उस मौके को भुनाने की कोशिश कर रहा है जिससे उसकी वैश्विक छवि सुधरे और आर्थिक राहत मिल सके। लेकिन यह संतुलन कितने समय तक टिकेगा यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा।

  • ईरान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित मार्गों से देश वापसी का उच्च स्तरीय अलर्ट जारी

    ईरान में फंसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और नियंत्रित मार्गों से देश वापसी का उच्च स्तरीय अलर्ट जारी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें सभी भारतीय नागरिकों से आग्रह किया गया है कि जितनी जल्दी संभव हो, तय किए गए सुरक्षित और अधिकृत मार्गों से देश छोड़ दें। इसके साथ यह चेतावनी भी दी गई है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बिना दूतावास की अनुमति और समन्वय के बढ़ने का प्रयास न करें। यात्रा के दौरान नागरिकों को लगातार दूतावास के संपर्क में रहने और किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर तथा ईमेल आईडी का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

    इससे पहले जारी की गई सलाह में नागरिकों को 48 घंटे तक सुरक्षित स्थानों पर रहने की हिदायत दी गई थी। हालात की संवेदनशीलता के मद्देनजर अब सरकार ने अधिक सतर्कता बरतते हुए देश छोड़ने पर जोर दिया है। यह कदम अमेरिकी और ईरानी तनाव के बीच क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया गया है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के लिए सीजफायर का ऐलान हुआ था, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित स्थिति नहीं माना जा रहा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के समय ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक थे, जिनमें छात्र, कामगार और पेशेवर शामिल हैं। अब तक करीब 1,800 नागरिक सुरक्षित भारत लौट चुके हैं, जबकि बाकी नागरिकों की सुरक्षित वापसी के प्रयास जारी हैं। अमेरिकी चेतावनी और क्षेत्रीय तनाव ने हालात को और भी संवेदनशील बना दिया है।

    एडवाइजरी में नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहों से दूर रहें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि यात्रा के सभी मार्ग अधिकृत और सुरक्षित हों। किसी भी जोखिमपूर्ण गतिविधि से बचना अत्यंत आवश्यक है। सरकार स्थिति की निरंतर निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।