Category: International

  • ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव

    ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनके अनुसार, अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है तो इससे वैश्विक स्तर पर हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

    वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने एक सरल प्रस्ताव रखा है, जिसमें या तो बातचीत के जरिए समझौता किया जाए या फिर तनाव बढ़ने की स्थिति में परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सद्भावना के आधार पर बातचीत करना चाहता है और बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। वेंस के मुताबिक, कुछ संकेत ऐसे मिले हैं जिससे लगता है कि ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकता है, लेकिन अंतिम स्थिति तभी साफ होगी जब किसी समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।

    जेडी वेंस ने ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि वहां कई शक्तिशाली गुट सक्रिय हैं, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में ईरान की नीति क्या है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को रूस भेजने जैसी किसी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता।

    इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि अमेरिका का लक्ष्य इस संघर्ष को जल्द खत्म करना है और ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समाधान की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

    गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव और हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, हालांकि कुछ समय के लिए सीजफायर की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद स्थायी समझौता अभी तक नहीं हो सका है और हालात फिर से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

  • बीजिंग में शी जिनपिंग-पुतिन की बैठक: दुनिया ‘जंगलराज’ की ओर बढ़ रही, ईरान युद्ध रोकने की अपील

    बीजिंग में शी जिनपिंग-पुतिन की बैठक: दुनिया ‘जंगलराज’ की ओर बढ़ रही, ईरान युद्ध रोकने की अपील



    नई दिल्ली। बीजिंग में वैश्विक राजनीति पर बड़ा बयान देते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान जिनपिंग ने कहा कि दुनिया एक बार फिर “जंगलराज” जैसी स्थिति की ओर बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम और वैश्विक स्थिरता कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

    एक रिर्पोट के मुताबिक, बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष, खासकर ईरान से जुड़े तनाव को लेकर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि युद्ध और सैन्य कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई तो इसका असर पूरी दुनिया की शांति और व्यवस्था पर पड़ेगा।

    जिनपिंग ने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध वैश्विक व्यवस्था को अस्थिर कर रहे हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय कानूनों की भूमिका कमजोर हो सकती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान हालात में संघर्षों को रोकना और संवाद के जरिए समाधान निकालना बेहद जरूरी है।

    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और BRICS जैसे मंचों पर भी चर्चा की। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में रूस और चीन के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा रहे हैं।

    पुतिन ने यह भी कहा कि रूस और चीन की साझेदारी का उद्देश्य न केवल आर्थिक विकास है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देना भी है। उन्होंने कहा कि दोनों देश संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े हैं।

    इस दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर भी चर्चा की, जिनमें ऊर्जा, व्यापार, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दौरे में लगभग 40 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन के बीच बढ़ती यह साझेदारी वैश्विक शक्ति संतुलन को नया रूप दे रही है, खासकर ऐसे समय में जब यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट संकट जैसी स्थितियों से दुनिया में तनाव बढ़ा हुआ है।

    गौरतलब है कि शी जिनपिंग और व्लादिमिर पुतिन अब तक 40 से अधिक बार मिल चुके हैं और दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। दोनों नेता अक्सर खुद को “मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर” के समर्थक के रूप में पेश करते हैं, जिसमें वैश्विक शक्ति केवल एक देश के हाथों में नहीं बल्कि कई देशों में बंटी होती है।

  • इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर

    इटली दौरे में पीएम मोदी-मेलोनी की दोस्ती चर्चा में: कोलोजियम में सेल्फी, रोम की सड़कों पर साथ सफर



    नई दिल्ली। इटली दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात इस बार खास अंदाज में चर्चा का विषय बन गई। रोम में दोनों नेताओं के बीच न सिर्फ औपचारिक बातचीत हुई, बल्कि उनका दोस्ताना अंदाज भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

    पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को एक खास “मेलोडी” नाम की टॉफी गिफ्ट की, जिसे लेकर मेलोनी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए खुशी जताई और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके लिए बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए हैं, इसके लिए उन्होंने धन्यवाद भी दिया।

    इस मुलाकात के दौरान दोनों नेता रोम की सड़कों पर एक ही कार में साथ नजर आए और करीब 2000 साल पुराने ऐतिहासिक कोलोजियम का दौरा किया। वहां दोनों ने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं।

    इससे पहले दोनों नेताओं ने साथ में डिनर किया और कई अहम वैश्विक मुद्दों पर अनौपचारिक बातचीत भी की। मेलोनी ने मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए लिखा “वेलकम माय फ्रेंड”, जिसने दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को और भी उजागर किया।

    सूत्रों के अनुसार, इस दौरे में भारत और इटली के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, एडवांस टेक्नोलॉजी, रक्षा, ऊर्जा और ग्लोबल सप्लाई चेन जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।

    भारत और इटली के बीच वर्तमान में 14 अरब यूरो से अधिक का व्यापार होता है और दोनों देश मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, फार्मा और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। इस दौरे में स्पेशल स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात की, जिसमें भारत में निवेश और नई औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

    इसके अलावा दोनों नेताओं ने वैश्विक मुद्दों जैसे मिडिल-ईस्ट तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर भी विचार साझा किए।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी 2024 में इटली का दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। यह यात्रा उनके पांच देशों के दौरे का अंतिम पड़ाव रहा, जिसमें यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे शामिल रहे।

  • PAK सैन्य अधिकारी के दावे झूठे, जिन एयरबेस को तबाह करने की बात कही, भारत में उनका अस्तित्व ही नहीं

    PAK सैन्य अधिकारी के दावे झूठे, जिन एयरबेस को तबाह करने की बात कही, भारत में उनका अस्तित्व ही नहीं


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान और भारत के बीच पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव बढ़ने की घटनाओं के बीच एक बार फिर पाकिस्तानी सेना का दावा चर्चा में आ गया है। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई को “ऑपरेशन बुनियान उल मरसूस” नाम दिया था, जिसके तहत भारतीय क्षेत्रों और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की गई थी, हालांकि भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को विफल कर दिया था।

    पाकिस्तान की ओर से 10 मई 2025 को ‘फतह-1’ रॉकेट दागने का भी दावा किया गया था, जिसे भारत ने हवा में ही नष्ट कर दिया था। पाकिस्तान ने इस दौरान जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात की हवाई सीमाओं में घुसपैठ की कोशिश करने की बात कही थी।

    इसी बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी कैप्टन मुनीब जमाल का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह दावा करते नजर आते हैं कि उनकी मिसाइलों ने भारत के दो एयरबेस को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। अपने बयान में उन्होंने कहा कि लक्ष्य राजौरी और मामून एयरबेस थे, जिन्हें सफलतापूर्वक तबाह किया गया।
    हालांकि इस दावे पर सवाल खड़े हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन स्थानों का जिक्र किया गया है, उनमें से राजौरी जम्मू-कश्मीर का एक जिला है, जहां कोई वायुसेना एयरबेस मौजूद नहीं है। वहीं मामून पंजाब के पठानकोट में स्थित एक सैन्य छावनी है, जिसे एयरबेस के रूप में नहीं जाना जाता। वीडियो में अधिकारी यह भी दावा करते हैं कि हमले के समय वहां आम नागरिक मौजूद थे, जिससे सैनिकों का हौसला बढ़ा।

    सोशल मीडिया पर इस दावे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स ने इन बयानों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जिन ठिकानों पर हमले का दावा किया गया है, उनका वास्तविक अस्तित्व ही स्पष्ट नहीं है। कुछ यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि ये ऐसे “एयरबेस” हैं जिन्हें शायद नक्शों में ही ढूंढना पड़ेगा।

  • पाकिस्तान में ऊर्जा संकट का अलर्ट, तेल आपूर्ति बाधित होने पर रिफाइनरी बंद की चेतावनी

    पाकिस्तान में ऊर्जा संकट का अलर्ट, तेल आपूर्ति बाधित होने पर रिफाइनरी बंद की चेतावनी

    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान में संभावित बड़े ऊर्जा संकट के संकेत सामने आए हैं। देश की प्रमुख तेल रिफाइनिंग कंपनी अटॉक रिफाइनरी लिमिटेड (ARL) ने पाकिस्तान सरकार और ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) को पत्र लिखकर गंभीर स्थिति की चेतावनी दी है।

    कंपनी ने अपने पत्र में कहा है कि सड़क प्रतिबंधों और सुरक्षा कारणों से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो रिफाइनरी का संचालन बंद करना पड़ सकता है, जिससे देश में ईंधन आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    चिट्ठी के अनुसार, रावलपिंडी और आसपास के क्षेत्रों में लागू यातायात नियंत्रण और सड़क बंदी के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है। बड़ी संख्या में टैंकर शहर की सीमाओं में फंसे हुए हैं, जिससे रिफाइनरी तक कच्चे तेल की आपूर्ति में लगभग 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी ने सरकार से तेल टैंकरों को तत्काल यातायात प्रतिबंधों से छूट देने की मांग की है, ताकि कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

    पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो मुख्य कच्चा तेल प्रसंस्करण इकाई को बंद करना पड़ सकता है। इसका असर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति पर पड़ेगा, जिससे हवाई अड्डों, रक्षा प्रतिष्ठानों और बिजली उत्पादन इकाइयों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पत्र पिछले महीने लिखा गया था, लेकिन रावलपिंडी क्षेत्र में हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

    विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा निर्भरता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। उनका मानना है कि यदि रिफाइनिंग और ईंधन आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर परिवहन, बिजली उत्पादन और सैन्य लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है।

  • राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे पर, रक्षा सहयोग को नई दिशा; भारत-वियतनाम रिश्तों में बढ़ी रणनीतिक गहराई

    राजनाथ सिंह वियतनाम दौरे पर, रक्षा सहयोग को नई दिशा; भारत-वियतनाम रिश्तों में बढ़ी रणनीतिक गहराई

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री Rajnath Singh के वियतनाम दौरे ने भारत-वियतनाम संबंधों को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक स्थिरता पर अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
    हनोई/नई दिल्ली। भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने वियतनाम दौरे के दौरान वहां के शीर्ष नेतृत्व से अहम बातचीत की। इस बैठक में रक्षा सहयोग, सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और संतुलन बनाए रखने में भारत और वियतनाम की साझेदारी बेहद अहम भूमिका निभा सकती है।

    राजनाथ सिंह ने इस दौरान भारत की ओर से वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी केवल रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, तकनीकी सहयोग और सामरिक समझ पर आधारित एक व्यापक संबंध है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी शुभकामनाएं वियतनाम नेतृत्व को दीं।

    इसी बीच भारत के ऐतिहासिक विदेश नीति दृष्टिकोण की चर्चा भी एक बार फिर सामने आई है। कहा जाता है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने 1960 के दशक में अमेरिका के वियतनाम युद्ध में गहराई से शामिल होने पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। हालांकि ऐतिहासिक दस्तावेजों में उनके विचार सीधे और औपचारिक रूप में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हैं, लेकिन कई समकालीन लेखों और स्मृतियों में उनके इस रुख का उल्लेख मिलता है कि वियतनाम में सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहिए।

    आगे चलकर वियतनाम युद्ध ने वैश्विक राजनीति पर गहरा असर डाला, जिसमें भारी जनहानि और लंबे संघर्ष के बाद अंततः अमेरिका को पीछे हटना पड़ा। युद्ध के बाद वियतनाम एकीकृत राष्ट्र के रूप में उभरा।

    भारत और वियतनाम के संबंध केवल रणनीतिक ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरे हैं। 1959 में तत्कालीन राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने हो ची मिन्ह को बोधि वृक्ष भेंट किया था, जो आज भी दोनों देशों की मित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह प्रतीक समय-समय पर भारत-वियतनाम रिश्तों की मजबूती को दर्शाता रहा है।

  • पाकिस्तान का नया दावा फिर बेनकाब: “फतह-1 से उड़ाए भारत के एयरबेस”, जिनका अस्तित्व ही नहीं!

    पाकिस्तान का नया दावा फिर बेनकाब: “फतह-1 से उड़ाए भारत के एयरबेस”, जिनका अस्तित्व ही नहीं!



    नई दिल्ली। पाकिस्तान की सेना एक बार फिर अपने दावों को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। हाल ही में पाकिस्तानी सेना के एक अधिकारी ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी फतह-1 मिसाइलों ने भारत के दो सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन जिन एयरबेसों का नाम लिया गया, वे वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं हैं।

    पाकिस्तानी अधिकारी कैप्टन मुनीब जमाल ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि फतह-1 मिसाइलों ने “राजौरी एयरबेस” और “मामून एयरबेस” को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया। हालांकि हकीकत यह है कि राजौरी में कोई वायुसेना एयरबेस मौजूद नहीं है और मामून केवल पठानकोट के पास एक सैन्य कैंटोनमेंट क्षेत्र है, न कि कोई एयरबेस।

    भारत-पाकिस्तान के बीच “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर पहले से ही तनाव और दावे-प्रतिदावे जारी हैं। इसी बीच पाकिस्तान का यह नया बयान एक बार फिर उसके दावों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। भारत की ओर से पहले भी कई बार ऐसे हमलों को नाकाम किए जाने की पुष्टि की जा चुकी है।

    सोशल मीडिया पर भी पाकिस्तानी दावे को लेकर जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है, जहां यूजर्स “काल्पनिक एयरबेस” का उल्लेख कर इस बयान को हास्यास्पद बता रहे हैं।

  • असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं

    असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने बलूचिस्तान की धरती से एक बार फिर भारत का नाम लिए बिना कड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने बाहरी ताकतों पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने और दुष्प्रचार चलाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी कोशिशें देश की तरक्की और स्थिरता को रोक नहीं सकतीं।

    मुनीर ने कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान का “निश्चित उदय” किसी भी प्रकार के प्रॉक्सी वॉर, गलत सूचना अभियान या आतंकवाद से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और जनता मिलकर देश से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    अपने भाषण में उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात सैन्य अधिकारियों की ट्रेनिंग और पेशेवर क्षमता की भी सराहना की। मुनीर ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, नई तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम करना होगा।

    उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात में निरंतर प्रशिक्षण और उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    मुनीर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ “शत्रु ताकतें” पाकिस्तान के खिलाफ फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सेना और जनता की एकता के आगे ये प्रयास सफल नहीं होंगे।

    बलूचिस्तान में स्थायी शांति और विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्रगति सुरक्षा, समावेशी विकास और बेहतर शासन पर निर्भर करती है।

  • पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं

    पीएम मोदी से सवाल पर विवाद: नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने कहा- मैं विदेशी जासूस नहीं, पत्रकारिता करना अपराध नहीं



    नई दिल्ली। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूछे गए एक सवाल को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग सोशल मीडिया पर आलोचना और आरोपों के घेरे में आ गईं, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सफाई दी है।

    हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की “विदेशी जासूस” नहीं हैं और उनका काम केवल पत्रकारिता करना है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का दायित्व सत्ता में बैठे लोगों से सीधे सवाल पूछना होता है, चाहे वह सवाल टकराव पैदा करने वाले ही क्यों न हों। उनके अनुसार, पत्रकारों को पहले से तैयार जवाबों को बिना सवाल किए स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए कठिन सवाल पूछना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ओस्लो में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेले लिंग ने पीएम मोदी से कुछ सवाल पूछे। सवालों की प्रकृति और पूछने के तरीके को लेकर वहां मौजूद कुछ लोगों और बाद में सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्थिति स्पष्ट की गई और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, मीडिया की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों पर जोर दिया गया।

    विवाद बढ़ने के बाद हेले लिंग ने एक पोस्ट में लिखा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि उन्हें यह स्पष्ट करना पड़ेगा कि वह किसी विदेशी सरकार की एजेंट या जासूस नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्य रूप से नॉर्वे में पत्रकारिता करती हैं और उनका उद्देश्य केवल मानवाधिकार, लोकतंत्र और शासन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना है।

    उन्होंने यह भी बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जुड़े वीडियो पर कुछ समय बाद कमेंट्स बंद कर दिए गए, लेकिन इससे पहले ही उनके सवालों को लेकर ऑनलाइन बहस तेज हो चुकी थी। पत्रकार का कहना है कि अगर सार्वजनिक मंच पर नेताओं से सवाल पूछने का अवसर मिलता है तो पत्रकारों को अपनी भूमिका निभाने से रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस पूरे मामले पर भारतीय पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां संवैधानिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मजबूत व्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में विविध भाषाओं और क्षेत्रों में सैकड़ों मीडिया संस्थान सक्रिय हैं, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाते हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पत्रकारिता की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और राजनयिक संवाद की मर्यादाओं पर बहस छेड़ दी है।