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  • दुबई का पर्यटन गहरे संकट में… ईरान युद्ध के चलते सूने पड़े होटल-रेस्तरां, 80% घटी कमाई

    दुबई का पर्यटन गहरे संकट में… ईरान युद्ध के चलते सूने पड़े होटल-रेस्तरां, 80% घटी कमाई


    दुबई।
    दुनिया के सबसे व्यस्त पर्यटन केंद्रों (Busiest Tourist Centers) में शामिल दुबई (Dubai) पश्चिम एशिया में जारी युद्ध (West Asia War) के चलते गहरे संकट से गुजर रहा है। पिछले साल यानी 2025 में 19.59 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत करने वाला यह शहर अब खाली होटलों, सूने रेस्तरां और ठप पड़े एयर ट्रैफिक की मार झेल रहा है। पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, आय में 50% से 80% तक की गिरावट आई है, जबकि होटल ऑक्यूपेंसी कई जगह 15-20% तक सिमट गई है। बीबीसी, बुकिंग प्लेटफार्म वेगो, डाटा एनालिटिक्स कंपनी एयरडीएनए और ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के अनुसार दुबई के रेस्तरां, जो आमतौर पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ से गुलजार रहते थे, अब खाली नजर आ रहे हैं।

    टाशस हॉस्पिटैलिटी ग्रुप की संस्थापक नताशा साइडेरिस कहती हैं कि देशभर में 14 आउटलेट्स और 1,000 से अधिक कर्मचारियों वाले उनके ग्रुप में राजस्व 50% से अधिक गिर चुका है, जबकि पर्यटकों पर निर्भर आउटलेट्स में यह गिरावट 70% से 80% तक पहुंच गई है। हालात इतने खराब हैं कि कई प्रतिष्ठानों को अपने आधे से ज्यादा कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजना पड़ा है।


    2.26 लाख से अधिक बुकिंग रद्द

    डेटा फर्म एयरडीएनए के अनुसार, युद्ध शुरू होने के पहले महीने (28 फरवरी से 29 मार्च) के दौरान यूएई में 2,26,500 से अधिक शॉर्ट-टर्म बुकिंग रद्द हुई हैं।पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी होटल और शॉर्ट-टर्म अपार्टमेंट सप्लाई अब भारी दबाव में है, क्योंकि मांग अचानक गिर गई है।


    प्रवासी कामगारों पर सबसे ज्यादा मार

    दुबई के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम करने वाले प्रवासी कामगार इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कई कर्मचारियों की नौकरी चली गई है या उन्हें बिना वेतन छुट्टी पर भेज दिया गया है। एक दक्षिण एशियाई वेटर के मुताबिक, यह कोविड-19 जैसा लग रहा है।हमें डर है कि फिर से नौकरी खोकर घर लौटना पड़ सकता है।मानवाधिकार समूहों के अनुसार यूएई में कई प्रवासी पहले से ही कर्ज के बोझ में दबे हैं, जिससे यह संकट उनके लिए और गंभीर हो गया है।


    क्षेत्रीय स्तर पर अरबों डॉलर का नुकसान संभव

    ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की इकाई टूरिज्म इकोनॉमिक्स के अनुसार अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो मध्य पूर्व में 23 से 38 मिलियन कम पर्यटक आ सकते हैं। इससे 34 अरब डॉलर से 56 अरब डॉलर तक के पर्यटन राजस्व का नुकसान हो सकता है। मामून हमीदेन के अनुसार अगर युद्ध जल्दी खत्म होता है तो रिकवरी संभव है, लेकिन लंबा खिंचने पर पूरे समर सीजन पर सवाल खड़े हो सकते हैं।


    हवाई यातायात को झटका किराया बढ़ने के भी संकेत

    युद्ध के कारण वैश्विक विमानन उद्योग की रीढ़ माने जाने वाला गल्फ हब मॉडल को गहरे संकट में डाल दिया है। दुबई, अबू धाबी और दोहा जैसे विश्व के सबसे व्यस्त ट्रांजिट केंद्रों पर उड़ानों में भारी बाधा, ईंधन संकट और यात्रियों की सुरक्षा चिंताओं ने न केवल तत्काल संचालन को प्रभावित किया है, बल्कि लंबे समय में हवाई यात्रा के स्वरूप को भी बदलने की आशंका पैदा कर दी है। बीबीसी और इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के अनुसार दुबई, अबू धाबी और दोहा से सीमित लेकिन नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं।

    हालांकि शेड्यूल अभी भी बार-बार बदल रहे हैं और कई रूट्स पर प्रतिबंध जारी हैं। ईंधन आपूर्ति भी पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई है। जेट फ्यूल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गल्फ कैरियर्स की क्षमता घटती है, तो हवाई किराए बढ़ना तय है। संघर्ष के बाद से सिरियम के विश्लेषकों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से मिडिल ईस्ट के लिए 30,000 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं।

  • डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का तीखा जवाब, ‘मिडिल ईस्ट को बना देंगे नरक’

    डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का तीखा जवाब, ‘मिडिल ईस्ट को बना देंगे नरक’


    तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने कड़ा पलटवार किया है। ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान समझौता नहीं करता तो उस पर “कहर” बरसेगा। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ने की चेतावनी दी है।  खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघारी ने कहा कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरा क्षेत्र अमेरिका और इजरायल के लिए “नरक” बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को हराने का भ्रम विरोधियों को दलदल में फंसा देगा।

    ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा

    इब्राहिम जोल्फाघारी ने दावा किया कि ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइलों से इजरायल और अमेरिका से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल, ईरान पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के पास समझौते या होर्मुज खोलने के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने लिखा कि पहले 10 दिन का समय दिया गया था और अब 48 घंटे बाद कड़ी कार्रवाई हो सकती है।


    लगातार बदलते बयान, बढ़ता तनाव

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में ट्रंप के बयान लगातार बदलते रहे हैं। एक ओर वे कूटनीतिक समाधान की बात करते हैं, तो दूसरी ओर ईरान को “स्टोन एज” में भेजने जैसी कड़ी चेतावनी भी देते हैं। युद्ध को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन होर्मुज अब भी पूरी तरह नहीं खुला है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है।

    ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतें

    होर्मुज के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है। पहले जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी, अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। हालांकि, कुछ देशों के जहाजों को सीमित रूप से होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है, जिनमें भारत भी शामिल है। हाल ही में एक फ्रांसीसी कंपनी का जहाज इस मार्ग से गुजरने वाला पहला बड़ा पश्चिमी यूरोपीय जहाज बना। इसके बावजूद, क्षेत्र में लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के चलते सामान्य समुद्री आवाजाही अब भी प्रभावित बनी हुई है।

  • 48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी

    48 घंटे में खोलो होर्मुज स्ट्रेट, डेडलाइन पार हुई बरपेगा कहर… ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन।
    मिडिल ईस्ट (Middle East.) में तनाव चरम पर है. ईरान और अमेरिका (America) के बीच को भी पीछे हटने या झुकने को तैयार नहीं है. सीजफायर की कोशिशों के बीच लगातार हमले जारी है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को खोलने की तय समय सीमा का पालन नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आक्रामक अंदाज में लिखा कि समय तेजी से खत्म हो रहा है. ईरान को समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए पहले ही समय दिया गया था, लेकिन अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं. यदि ये डेडलाइन पार हुई, तो ईरान पर अमेरिका कहर बनकर टूटेगा. हैरानी की बात ये है कि कुछ दिन पहले तक ट्रंप का रुख अपेक्षाकृत नरम दिखाई दे रहा था।

    उन्होंने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर उम्मीद जताई थी और समय सीमा को 10 दिन तक बढ़ाते हुए 6 अप्रैल तक का वक्त दिया था. यह कदम संकेत दे रहा था कि वाशिंगटन अभी भी कूटनीतिक रास्ता खुला रखना चाहता है. लेकिन अब उनके तेवर बदल चुके हैं. उन्होंने साफ संदेश दे दिया है कि धैर्य की सीमा खत्म होने के करीब है. इसके बाद भीषण हमले किए जाएंगे।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. इससे अमेरिका मुद्दे को सिर्फ क्षेत्रीय विवाद के तौर पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा स्थिरता से जुड़ा मामला मानता है.

    ट्रंप की बातों से साफ है कि अब यह मामला सिर्फ कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं रहा. 48 घंटे की चेतावनी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिन बेहद अहम होने वाले हैं. ईरान की ओर से अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से हालात तेजी से बदल रहे हैं, उससे दोनों देशों के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंच सकता है।

    28 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का आगाज किया तब उनके इरादे बिल्कुल साफ थे. दोनों ईरान की मिसाइल शक्ति को मिट्टी में मिलाना चाहते थे. उसके परमाणु ख्वाबों पर हमेशा के लिए ताला जड़ना चाहते थे. लेकिन युद्ध के पांचवें हफ्ते तक आते-आते अमेरिकी प्रशासन के ये लक्ष्य किसी पहेली की तरह उलझ गए हैं।

    कभी ट्रंप आक्रामकता की बात करते हैं, तो कभी अपने ही पुराने बयानों का खंडन कर दुनिया को हैरत में डाल देते हैं. इस टकराव का सबसे विचित्र पहलू ट्रंप के विरोधाभासी बयान रहे हैं. युद्ध के शुरुआती हफ्तों में उन्होंने बड़े आत्मविश्वास से कहा था कि इस लड़ाई का तेल से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन कुछ ही समय बाद उनके सुर बदल गए. अब ईरान के तेल पर कब्जे की बात करते हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट पर भी वॉशिंगटन का रुख डगमगाता दिखता है. पहले ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के हटने पर दूसरे देश इसे खोल सकते हैं, लेकिन महज कुछ ही दिनों में उन्होंने जोर देकर कहा कि वो आसानी से खुद संभाल सकते हैं. कभी वे जंग खत्म होने का ऐलान करते हैं, तो कभी बुनियादी ढांचे पर हफ्तों तक बमबारी की चेतावनी देते हैं. यह अनिश्चितता वैश्विक बाजारों के लिए चिंता का सबब बन गई है।

  • अमेरिका-ईरान संघर्ष: एफ-15 और ए-10 का नुकसान, पायलटों की खोज जारी

    अमेरिका-ईरान संघर्ष: एफ-15 और ए-10 का नुकसान, पायलटों की खोज जारी


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। आज संघर्ष का 36वां दिन है और ईरान ने अमेरिकी वायुसेना को गंभीर झटका दिया है। पहले एफ 15ई जेट विमान को मार गिराने के बाद ईरान ने अमेरिकी ए 10 वॉर्थोग फाइटर को भी निशाना बनाया। अमेरिकी मीडिया और वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार एफ 15ई के ढेर होने के बाद पायलट को बचाने के लिए भेजे गए ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर को भी ईरानी हमले का सामना करना पड़ा।

    एफ 15ई जेट दो सीटों वाला लड़ाकू विमान है। इसमें एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर शामिल होता है। इस विमान के क्रू मेंबर में से एक को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया जबकि दूसरा अभी लापता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह घटना शुक्रवार को हुई जिसमें दो पायलटों को रेस्क्यू किया गया और एक अभी भी तलाश के दायरे में है।

    वहीं अमेरिकी दूसरा विमान ए 10 वॉर्थोग फाइटर भी ईरानी हमले का शिकार हुआ। इसके पायलट ने विमान को कुवैत के हवाई क्षेत्र में लाकर खुद को इजेक्ट किया और सुरक्षित बचाव पाया। एफ 15ई के रेस्क्यू प्रयासों में शामिल दो अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर भी ईरानी फायरिंग की चपेट में आए। हालांकि हेलीकॉप्टरों में सवार अमेरिकी कर्मी घायल हुए लेकिन दोनों हेलीकॉप्टर सुरक्षित लौट आए।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। एनबीसी न्यूज से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि एफ 15 के नुकसान से ईरान के साथ बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह बयान पिछले सप्ताह उनके उस दावे के एक हफ्ते बाद आया जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान की सेना इतनी कमजोर हो गई है कि हमारे प्लेन उनके देश में आसानी से उड़ रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर सकता।

    ईरानी मीडिया ने इस घटना को भव्य रूप से दिखाया। ईरानी टेलीविजन रिपोर्टर ने कहा कि जो कोई भी अमेरिकी पायलट को पकड़ता है उसे भारी इनाम मिलेगा। इसके अलावा ईरानी गवर्नर ने वादा किया कि जो कोई भी दुश्मन की सेना को मारता या पकड़ता है उसकी सराहना की जाएगी।

    रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दक्षिण पश्चिमी ईरान में उस क्षेत्र के पास तलाशी अभियान शुरू किया है जहां विमान गिरा था। ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका और इजरायल की युद्ध रणनीति अब पायलटों की तलाश तक सिमट गई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका की बेतुकी लड़ाई अब “शासन बदलने” से घटकर “क्या कोई हमारे पायलट ढूंढ सकता है?” तक आ गई है।

    इस घटनाक्रम ने अमेरिका ईरान संघर्ष की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। दोनों पक्षों के बीच लड़ाई और नुकसान की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि खोए हुए पायलटों की तलाश में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे और इस संघर्ष के परिणाम क्या होंगे।

  • अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल: हवा और जमीन पर हमला करने वाला बहु भूमिका फाइटर

    अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल: हवा और जमीन पर हमला करने वाला बहु भूमिका फाइटर

    नई दिल्ली । ईरान द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराने के दावे ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान एफ 15ई स्ट्राइक ईगल पर केंद्रित कर दिया है। यह विमान अमेरिकी वायुसेना के सबसे भरोसेमंद और बहु भूमिका वाले फाइटर जेट्स में से एक माना जाता है। यूएस एयरफोर्स की आधिकारिक वेबसाइट एएफडॉटएमआईएल के अनुसार एफ 15ई स्ट्राइक ईगल को विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न केवल हवा में दुश्मन के विमानों से लड़ सके बल्कि जमीन पर स्थित लक्ष्य पर भी सटीक हमला कर सके।

    एफ 15ई में दो सदस्यीय क्रू होता है, जिसमें एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर शामिल होता है। यह संयोजन जटिल मिशनों को अधिक कुशलता और सुरक्षा के साथ अंजाम देने में सहायक होता है। विमान किसी भी मौसम में दिन रात उड़ान भरने में सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक एवियोनिक्स और रडार सिस्टम लगे हैं, जो लंबी दूरी से लक्ष्यों की पहचान और उन पर सटीक हमला करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

    एफ 15ई का एपीजी 70 रडार सिस्टम हवा और जमीन दोनों प्रकार के लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। इसके साथ ही एलएएनटीआईआरएन सिस्टम लो एल्टीट्यूड नेविगेशन एंड टारगेटिंग इंफ्रारेड इसे अत्यंत कम ऊंचाई पर उड़ान भरने और खराब मौसम या रात के समय भी सटीक हमले करने की सुविधा देता है। यह सिस्टम पायलट को जमीन के करीब सुरक्षित उड़ान भरने में मदद करता है, जिससे मिशन अधिक प्रभावी बनते हैं।

    प्रदर्शन के मामले में भी एफ 15ई बहुत शक्तिशाली है। इसकी अधिकतम गति लगभग 1,875 मील प्रति घंटा मैक 2.5 से अधिक है और यह लगभग 60,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है। इसकी लंबी रेंज और भारी हथियार ले जाने की क्षमता इसे दुश्मन के गहरे इलाके में जाकर भी हमला करने में सक्षम बनाती है।

    हथियारों की बात करें तो एफ 15ई में 20 मिमी की आंतरिक तोप लगी होती है। इसके अलावा यह एम 9 साइडवाइंडर और एम 120 अमराम जैसी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी ले जा सकता है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के प्रिसिजन गाइडेड और पारंपरिक बमों को भी वाहन कर सकता है, जो इसे बहु भूमिका फाइटर बनाते हैं।

    एफ 15ई स्ट्राइक ईगल का निर्माण अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने किया है। शुरुआत में इसकी कीमत लगभग 31 मिलियन डॉलर थी, लेकिन आधुनिक अपग्रेड और तकनीकी सुधारों के साथ इसकी कीमत बढ़कर लगभग 100 मिलियन डॉलर हो गई है। यूएस एयरफोर्स के अनुसार इसकी लंबी रेंज, भारी पेलोड क्षमता और मिशन पूरा करते समय सुरक्षा इसे अमेरिकी वायुसेना की एक प्रमुख ताकत बनाती है।

    इसलिए, चाहे ईरान का दावा सही हो या नहीं, एफ 15ई स्ट्राइक ईगल अपने आधुनिक रडार, हथियार प्रणाली और उड़ान प्रदर्शन के कारण दुनिया के सबसे खतरनाक और भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शुमार है।

  • क्या ईरान बना सकता है अमेरिका पर दबाव? लापता पायलट से बदल सकता है जंग का समीकरण

    क्या ईरान बना सकता है अमेरिका पर दबाव? लापता पायलट से बदल सकता है जंग का समीकरण

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इजरायल और अमेरिका द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले के बाद से हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के कारण संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा है। इसी बीच अमेरिका का एक फाइटर जेट ईरान में क्रैश हो गया, जिसने हालात को और जटिल बना दिया है।

    विमान में सवार दो पायलटों में से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है। इस पायलट की स्थिति को लेकर ही अब पूरे घटनाक्रम की दिशा तय होने की संभावना जताई जा रही है।

    संघर्ष में अहम मोड़
    ईरान की जमीन पर अमेरिकी फाइटर जेट का गिरना इस संघर्ष में अहम मोड़ माना जा रहा है। अब तक अमेरिका जिन हादसों को ‘फ्रेंडली फायर’ बताता रहा, इस घटना ने उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पहली बार स्पष्ट रूप से सामने आया है कि अमेरिकी विमान ईरान में गिरा है और एक पायलट का कोई सुराग नहीं है।

    पायलट की स्थिति तय करेगी अगला कदम
    विशेषज्ञों के अनुसार, अगर लापता अमेरिकी पायलट को ईरान पकड़ लेता है, तो यह स्थिति पूरी जंग का रुख बदल सकती है। पायलट को नुकसान पहुंचाने से ईरान को कोई खास रणनीतिक फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे अमेरिका को बड़ा सैन्य कदम उठाने का मौका मिल सकता है, खासकर डोनाल्ड ट्रंप के लिए। यदि पायलट की मौत होती है, तो अमेरिका इसे जवाबी कार्रवाई के लिए आधार बना सकता है, जिससे संघर्ष और उग्र हो सकता है। वहीं, अगर पायलट जिंदा और ईरान के कब्जे में होता है, तो यह तेहरान के लिए एक मजबूत रणनीतिक बढ़त बन सकती है।

    जिंदा पायलट से बढ़ेगा दबाव
    पायलट के जिंदा होने की स्थिति में अमेरिका पर उसे सुरक्षित वापस लाने का दबाव बढ़ेगा। इससे दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बन सकती है। ऐसे हालात में ईरान इस स्थिति का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कर सकता है। इसे एक तरह का ‘स्ट्रॉन्ग होल्ड’ माना जा रहा है, जिसे वह कूटनीतिक रूप से भुना सकता है।

    लोकेशन सबसे बड़ा सवाल
    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम पहलू पायलट की लोकेशन है। आमतौर पर इजेक्शन के बाद पायलट घायल हो जाते हैं, जिससे उनका सुरक्षित निकल पाना मुश्किल होता है। ईरान जैसे बड़े और विविध भूगोल वाले देश में उनकी तलाश करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

    ईरान की संभावित रणनीति
    अगर पायलट जीवित है, तो ईरान उसे पकड़ने की पूरी कोशिश करेगा। गिरफ्तारी के बाद ही वह बातचीत की शर्तें तय कर सकता है। साथ ही, पायलट से जुड़े सबूत या तस्वीरें जारी कर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है।

    अलग रणनीति, एक लक्ष्य
    इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान दोनों अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन दोनों का मकसद एक ही है- स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ना। आने वाले दिनों में पायलट की स्थिति और लोकेशन ही तय करेगी कि यह तनाव किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • पाकिस्तान में हिंदू विरासत पर फिर हमला, कराची में भगवान कृष्ण की मूर्तियां तोड़ी गईं

    पाकिस्तान में हिंदू विरासत पर फिर हमला, कराची में भगवान कृष्ण की मूर्तियां तोड़ी गईं


    लाहौर। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला कराची से सामने आया है, जहां एक ऐतिहासिक इमारत में भगवान कृष्ण और गोपियों की मूर्तियों को कथित रूप से खंडित कर दिया गया।

    इस घटना की जानकारी पाकिस्तान दरवार इत्तेहाद के अध्यक्ष शिव कच्छी ने दी। उन्होंने बताया कि कराची स्थित ऐतिहासिक सगन मेसन भवन में रखी धार्मिक मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, जिसे उन्होंने बेहद निंदनीय बताया।

    शिव कच्छी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक इमारत को नुकसान पहुंचाने की घटना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक विरासत, धार्मिक सद्भाव और अल्पसंख्यक समुदायों की भावनाओं पर सीधा हमला है। उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

    उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय इस घटना से आहत है और जिम्मेदार लोगों की जल्द गिरफ्तारी जरूरी है।

    साथ ही, ऐतिहासिक इमारत के तत्काल जीर्णोद्धार और संरक्षण की मांग भी उठाई गई है।

    बताया जा रहा है कि यह भवन स्वतंत्रता-पूर्व काल में 1937 में निर्मित हुआ था और यहां हिंदू समुदाय की कई धार्मिक मूर्तियां व प्रतीक सुरक्षित रखे गए थे। इससे पहले भी पाकिस्तान में मंदिरों और हिंदू स्थलों पर हमलों की कई घटनाएं सामने आती रही हैं, जिन पर भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र भी शामिल है, पर चिंता जता चुका है।

  • 10 मिनट ‘क्लीनिकली डेड’ रही महिला का दावा, 2030 की दुनिया देखकर लौटी; अनुभव ने चौंकाया

    10 मिनट ‘क्लीनिकली डेड’ रही महिला का दावा, 2030 की दुनिया देखकर लौटी; अनुभव ने चौंकाया


    नई दिल्ली। मेक्सिको की एक महिला ने दावा किया है कि 10 मिनट तक ‘क्लीनिकली डेड’ रहने के दौरान वह भविष्य यानी साल 2030 में पहुंच गई थीं। होश में आने के बाद उन्होंने जो अनुभव साझा किया, उसने लोगों के साथ-साथ वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, 24 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट रूबी रोल्गु को पिछले साल अप्रैल में फेफड़ों में खून के थक्के जमने की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा और डॉक्टरों ने उन्हें लगभग 10 मिनट तक ‘क्लीनिकली डेड’ बताया। परिवार को भी उनकी स्थिति बेहद गंभीर होने की जानकारी दी गई थी।

    2030 की दुनिया देखने का दावा

    होश में आने के बाद रूबी ने बताया कि उन 10 मिनटों में उन्होंने खुद को साल 2030 की दुनिया में पाया। उनके अनुसार, भविष्य की दुनिया आज की तुलना में अधिक शांत और व्यवस्थित थी। उन्होंने दावा किया कि तकनीक और ऑटोमेशन के कारण लोगों का जीवन आसान हो गया था और वे परिवार व समाज के साथ ज्यादा समय बिताते दिखे।

    रूबी ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद को और अपने परिवार को उम्रदराज होते देखा, मानो वह आने वाले वर्षों को दिन-प्रतिदिन जी रही हों। उनके मुताबिक भविष्य में तकनीक और मानवीय संवेदनाओं का संतुलन बेहतर दिखाई दिया।

    ‘वापस आना किसी नरक जैसा लगा’

    रूबी के अनुसार, यह अनुभव इतना सुखद था कि जब उनकी आंखें अस्पताल में खुलीं तो उन्हें वास्तविक दुनिया में लौटना कठिन लगा। उन्होंने बताया कि उन्हें रोशनी से भरी सुरंग दिखाई दी और फिर अचानक वह अपने अस्पताल के बेड पर थीं। होश में आने पर जब उन्होंने अपने भाई को देखा तो वह उन्हें अपनी ‘भविष्य की यादों’ के मुकाबले काफी छोटा लगा।

    रूबी ने कहा कि भविष्य की शांति के बाद वर्तमान की भागदौड़ भरी दुनिया में लौटना उन्हें किसी “नरक” जैसा महसूस हुआ। हालांकि वैज्ञानिक ऐसे दावों को अक्सर मस्तिष्क की जटिल गतिविधियों और ‘नियर-डेथ एक्सपीरियंस’ से जोड़कर देखते हैं, फिर भी यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • चीन में फैली फिर नई बीमारी, मारे जा रहे जानवर; बॉर्डर पर नियंत्रण कड़ा

    चीन में फैली फिर नई बीमारी, मारे जा रहे जानवर; बॉर्डर पर नियंत्रण कड़ा

    वीजिंग। चीन में एक नई बीमारी फैली है, जिसके बाद जानवरों को मारा जा रहा है। उत्तर-पश्चिम में ‘फुट-एंड-माउथ’ बीमारी के छोटे से प्रकोप के बाद चीन ने अपनी सीमा पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इसके साथ ही, टीकों की प्रक्रिया तेज कर दी है और मवेशियों को मारना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह बीमारी विदेश से आई है। कृषि मंत्रालय ने पिछले बताया कि उसने जानवरों को मारना और प्रभावित इलाकों को कीटाणु-मुक्त करना शुरू कर दिया है। यह कदम तब उठाया गया जब गांसु प्रांत और शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र में कुल 6,229 मवेशियों के झुंड इस बीमारी की चपेट में आ गए।
    उद्योग एक्सपर्ट ने बताया कि यह पहली बार है जब चीन में एसएटी-एक सेरोटाइप-जो अफ्रीका में आम तौर पर पाई जाने वाली इस बीमारी का ही एक प्रकार है, का पता चला है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बीमारी के अधिक सामान्य ‘O’ और ‘A’ सेरोटाइप के लिए देश में उपलब्ध मौजूदा टीके इस नए प्रकार से सुरक्षा प्रदान नहीं करते हैं। वर्ष 2025 से, SAT-1 अफ्रीका से फैलकर मध्य-पूर्व, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों तक पहुंच चुका है।

    अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि यह प्रकोप चीन में उत्तर-पश्चिमी सीमा के रास्ते से आया है। यह वह क्षेत्र है जो कजाकिस्तान, मंगोलिया, रूस और अन्य देशों से सटा हुआ है।

    आधिकारिक सूचनाओं के अनुसार, शिनजियांग और गांसु सहित सीमावर्ती प्रांतों को गश्त बढ़ाने और तस्करी या अवैध परिवहन के जरिए इस बीमारी को देश में प्रवेश करने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। शंघाई जेसी इंटेलिजेंस कंपनी की विश्लेषक रोजा वांग ने कहा, “मौजूदा प्रकोप एक बड़े क्षेत्र के लिए खतरा बन गया है, और इसकी रोकथाम तथा नियंत्रण पर भारी दबाव है।”

    यह प्रकोप ऐसे समय में सामने आया है जब रूस साइबेरिया के नोवोसिबिर्स्क क्षेत्र में मवेशियों की एक गंभीर बीमारी के प्रकोप से जूझ रहा है। यह क्षेत्र कजाकिस्तान की सीमा से लगा हुआ है और शिनजियांग और गांसु में प्रकोप वाली जगहों से क्रमशः लगभग 1200 किमी (750 मील) और 2500 किमी दूर है। 20 मार्च को प्रकाशित एक रिपोर्ट में, अमेरिकी कृषि विभाग ने कहा कि चीन की प्रतिक्रिया का पैमाना यह संकेत दे सकता है कि वहां ‘फुट-एंड-माउथ’ (खुरपका-मुंहपका) बीमारी का कोई ऐसा प्रकोप हुआ है जिसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। रूस ने ऐसे किसी भी प्रकोप से इनकार किया है।

  • तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

    तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने तेहरान के पास एक महत्वपूर्ण हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। यह हमला उस पुल पर किया गया जो तेहरान को करज शहर से जोड़ता है और जिसे रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन प्रणाली के लिए जरूरी आपूर्ति मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी वजह से इसे निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही को रोकना है।

    हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह पुल अभी पूरी तरह चालू नहीं था और सेना द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में आम नागरिक भी शामिल हैं, जो नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद थे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ईरान का एक बड़ा पुल नष्ट कर दिया गया है और अब इसका उपयोग संभव नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी बहुत कुछ होना बाकी है और ईरान को जल्द से जल्द समझौता कर लेना चाहिए, अन्यथा आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

    ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि जब देश की सुरक्षा की बात आती है तो हर नागरिक सैनिक बन जाता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान इस तरह के हमलों से डरने वाला नहीं है और पूरी मजबूती के साथ जवाब देगा।

    इस बीच, तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में वार्ता संभव नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक स्तर पर भी हालात सामान्य होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।

    स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अन्य क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी, जिससे संघर्ष का दायरा और फैलता नजर आ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिले हैं। रूस चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया है।इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।