Category: International

  • चीन के नए परमाणु केंद्र पर बढ़ीं आशंकाएं, उपग्रह तस्वीरों में दिखीं नई इमारतें और मशीनें

    चीन के नए परमाणु केंद्र पर बढ़ीं आशंकाएं, उपग्रह तस्वीरों में दिखीं नई इमारतें और मशीनें

    बीजिंग। चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत से करीब 1,400 किलोमीटर दूर सिचुआन प्रांत में बनाए जा रहे एक नए परमाणु केंद्र (new nuclear center) में कई नई इमारतों का निर्माण पूरा होने की जानकारी सामने आई है।

    ताजा उपग्रह तस्वीरों ने इस परियोजना को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं।

    बताया जा रहा है कि चीन ने कुछ गांवों को खाली कराकर इस विशाल परमाणु सुविधा का निर्माण किया है। उपग्रह चित्रों में रेडिएशन मॉनिटर, धमाका-रोधी दरवाजों और यूरेनियम व प्लूटोनियम से जुड़े उपकरणों की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। साइट को ‘साइट-906’ नाम दिया गया है और यहां काम तेज गति से आगे बढ़ता दिख रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार बड़े ट्रालों में रखी मशीनें भी देखी गई हैं, जिन्हें यूरेनियम या प्लूटोनियम संवर्धन से जुड़ा माना जा रहा है। बताया गया है कि इस स्थल को तीन अन्य परमाणु ठिकानों से जोड़ा गया है, जिससे चीन की परमाणु क्षमताओं के विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं।

    सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में इस परियोजना के लिए स्थानीय ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय अधिकारियों ने इसे सरकार की गुप्त योजना बताया था। अब सामने आए उपग्रह चित्र संकेत देते हैं कि गांव खाली कराकर तेज गति से परमाणु ढांचे का विकास किया गया।
    भौगोलिक रूप से दुर्गम माने जाने वाले सिचुआन क्षेत्र में यह सुविधा विकसित की गई है। यहां यांग्जी नदी और उसकी सहायक नदियों—मिन नदी, तुओ नदी और जियालिंग नदी—के आसपास का इलाका शामिल है, जहां पहुंचना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है।

    उपग्रह तस्वीरों से यह भी संकेत मिला है कि गांवों की लगभग 600 इमारतें हटाकर नई संरचनाएं बनाई गई हैं और परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हाल के दिनों में कई उपकरण लगाए जाने से इस सुविधा के जल्द संचालन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

  • US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… क्या है पूरा मामला?

    US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… क्या है पूरा मामला?


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है।
    टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा
    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
    हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’
    विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल
    पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी।
    पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप
    बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं।

    ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं।

    बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।

    राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ
    बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई।

    उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’
  • अमेरिका में हेल्थकेयर घोटाले का खुलासा, 50 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी; 8 गिरफ्तार

    अमेरिका में हेल्थकेयर घोटाले का खुलासा, 50 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी; 8 गिरफ्तार

    जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों में नर्स, डॉक्टर, साइकोलॉजिस्ट और कायरोप्रैक्टर शामिल हैं। इन लोगों ने कथित तौर पर ऐसे मरीजों को होस्पिस केयर में दाखिल दिखाकर बिल बनाया, जिन्हें वास्तविक रूप से कोई गंभीर या अंतिम चरण की बीमारी नहीं थी। इससे स्वास्थ्य प्रणाली और टैक्सदाताओं को भारी नुकसान पहुंचा।
    यह कार्रवाई जेडी वेंस के नेतृत्व वाले टास्क फोर्स टू एलीमिनेट फ्रॉड के सहयोग से की गई। एफबीआई और अभियोजन पक्ष के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में तीन नर्सें, एक डॉक्टर, एक साइकोलॉजिस्ट और एक कायरोप्रैक्टर शामिल हैं।

    जांच में सामने आया कि आमतौर पर होस्पिस में जीवन के अंतिम चरण में मरीजों को रखा जाता है, लेकिन इन केंद्रों में मरीजों की जीवित रहने की दर राष्ट्रीय औसत 17 प्रतिशत से लगभग पांच गुना अधिक पाई गई। इससे संदेह हुआ कि मरीजों को गलत तरीके से दाखिल कर फर्जी बिलिंग की जा रही थी।

    अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है।

  • म्यांमार में नया सत्ता समीकरण: सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, सैन्य पकड़ और मजबूत

    म्यांमार में नया सत्ता समीकरण: सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, सैन्य पकड़ और मजबूत

    म्यांमार। म्यांमार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां सेना के शीर्ष नेता Min Aung Hlaing ने राष्ट्रपति पद संभाल लिया है। संसद में हुए मतदान में उन्हें 584 में से 429 वोट मिले, जिससे उनकी सत्ता पर पकड़ अब औपचारिक रूप से और मजबूत हो गई है।

    यह घटनाक्रम 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के पांच साल बाद सामने आया है, जब मिन आंग ह्लाइंग ने निर्वाचित सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। उस दौरान Aung San Suu Kyi की सरकार को बर्खास्त कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया था, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन और सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया।

    हालिया चुनावों में सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी ने 80 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा, संसद की लगभग एक-चौथाई सीटों पर सेना के सदस्य बिना चुनाव के ही काबिज हैं, जिससे सैन्य प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है।

    विश्लेषकों के अनुसार, मिन आंग ह्लाइंग का राष्ट्रपति बनना एक रणनीतिक कदम है। इसका उद्देश्य सैन्य शासन को नागरिक सरकार के रूप में प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधता हासिल करना और सत्ता पर पकड़ बनाए रखना है।

    संविधान के प्रावधानों के चलते उन्होंने पहले ही सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया था। इस पद की जिम्मेदारी उनके करीबी सहयोगी और पूर्व खुफिया प्रमुख को सौंप दी गई है, जिन्हें सेना में उनका विश्वस्त माना जाता है।

    म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष के बीच यह बदलाव देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें टिकी हुई हैं।

  • पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर, अमेरिका-ईरान युद्ध की मार

    पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर, अमेरिका-ईरान युद्ध की मार


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के प्रभाव से पाकिस्तान के आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका और ईरान युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण से बाहर हो गई हैं। इसके कारण पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की दरों में बेतहाशा इजाफा करना पड़ा।

    पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को डीजल की कीमत बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी। डीजल की कीमत में 54.9 प्रतिशत और पेट्रोल की दर में 42.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। पिछले महीने भी पाकिस्तान ने तेल उत्पादों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि की थी। मंत्री ने साफ किया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उठाना पड़ा।

    उद्योग और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज कराची पोर्ट पर बुधवार को पहुंचा। इसके अलावा एक दूसरा जहाज भी दूसरे मार्ग से पोर्ट पर आया। ट्रस्ट के प्रवक्ता शारिक फारूकी ने कहा कि इस महीने खाड़ी देशों से जरूरी तेल की आपूर्ति के लिए और भी पाकिस्तानी जहाज आने की उम्मीद है। इससे पाकिस्तान अपने ऊर्जा संकट को कम करने की कोशिश कर रहा है।

    पिछले दिनों पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा था कि ईरान होर्मुज से 20 अतिरिक्त पाकिस्तानी जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर सहमत हो गया है। इसका उद्देश्य तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और बढ़ती कीमतों पर काबू पाना है।

    पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान के लिए पाकिस्तान और चीन ने मिलकर पांच सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। इन प्रस्तावों में शत्रुता तुरंत समाप्त करना शांति वार्ता शुरू करना गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नौवहन की सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पालन जैसे कदम शामिल हैं।

    युद्ध की वजह से अमेरिका में भी औसत उपभोक्ता के लिए गैस की कीमतों में 35 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। होर्मुज के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है क्योंकि इस मार्ग से दुनिया के तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान में तेल संकट जल्द ही खत्म होने की संभावना नहीं है और कीमतें ऊपर बनी रहेंगी।

    इस पूरी स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान का मध्यस्थ बनने का प्रयास अब उसके आम नागरिकों पर भारी पड़ रहा है। बढ़ती तेल कीमतों के चलते देश में महंगाई और आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया है।

  • ईरान की ट्रंप-हेगसेथ के 'स्टोन एज' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया, कहा- 'सभ्यताएं बमबारी से नष्ट नहीं होतीं'

    ईरान की ट्रंप-हेगसेथ के 'स्टोन एज' बयान पर तीखी प्रतिक्रिया, कहा- 'सभ्यताएं बमबारी से नष्ट नहीं होतीं'


    तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के स्टोन एज वाले बयान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी मिशन ने कहा कि अमेरिका की धमकी उनकी ताकत नहीं बल्कि अज्ञानता को दर्शाती है।

    ईरान के स्थायी मिशन ने X पर बयान में लिखा ईरान की सभ्यता 7 000 वर्षों से अधिक पुरानी है जबकि अमेरिका का इतिहास मुश्किल से 250 साल का है। सभ्यताओं की पहचान उनके इतिहास संस्कृति और मानवता के योगदान से होती है। दुनिया आज भी उन ज्ञान और योगदान की ऋणी है जो ईरानी विद्वानों ने हजारों वर्षों में मानवता को दिए हैं। ऐसी सभ्यता को बमबारी से नष्ट नहीं किया जा सकता।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मिडिल ईस्ट में ईरान को स्टोन एज में वापस भेजने की धमकी दी थी। इसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने करारा तंज किया।

    ईरानी दूतावास ने कहा स्टोन एज? जब आप गुफाओं में आग की तलाश कर रहे थे तब हम साइरस सिलेंडर पर मानवाधिकारों के बारे में लिख रहे थे। हमने सिकंदर और मंगोलों के आक्रमणों को झेला और फिर भी कायम रहे क्योंकि ईरान सिर्फ एक देश नहीं बल्कि एक सभ्यता है।

    इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर सैयद माजिद मूसावी ने भी अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने X पर लिखा अमेरिका अपने सैनिकों को मौत की ओर धकेल रहा है और वॉशिंगटन की बयानबाजी हॉलीवुड की काल्पनिक फिल्मों जैसी है। आप अपनी 250 साल पुरानी इतिहास के दम पर 6 000 साल पुरानी सभ्यता को धमका रहे हैं। यह आपकी कमजोर सोच को दर्शाता है।

    ज्ञात हो कि डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़े हमले करेगा। उन्होंने कहा था कि अमेरिका जल्द ही अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर देगा और ईरान को ‘स्टोन एज’ में वापस भेजेगा।

  • ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच फोड़ा टैरिफ बम… दवाओं पर 100, स्टील-एल्यूमीनियम पर 50 शुल्क का ऐलान

    ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच फोड़ा टैरिफ बम… दवाओं पर 100, स्टील-एल्यूमीनियम पर 50 शुल्क का ऐलान


    वॉशिंगटन।
    ईरान युद्ध (Iran War) के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने गुरुवार को अपनी “अमेरिका फर्स्ट” वाली आर्थिक नीति को और अधिक कड़ा करते हुए स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और विदेशी दवाओं पर नए आयात शुल्क नियमों की घोषणा की है। इन बदलावों का उद्देश्य न केवल आयात प्रक्रिया को सरल बनाना है, बल्कि विदेशी दवा कंपनियों और धातु निर्यातकों पर दबाव डालना है ताकि वे अपनी निर्माण यूनिट अमेरिका में स्थापित करें।

    ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 232 के तहत स्टील, एल्युमीनियम और तांबे के आयात पर 50% का आयात शुल्क बरकरार रखा है। हालांकि, अब इसे गणना करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यह शुल्क आयातित वस्तु के उस मूल्य पर लगेगा जो अमेरिकी ग्राहक भुगतान करते हैं, न कि केवल धातु की मात्रा पर।

    ट्रंप ने क्यों लगाए नए टैरिफ?
    इस बदलाव के पीछे का मुख्य कारण ‘अंडर-रिपोर्टिंग’ को रोकना है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कई आयातक शुल्क कम करने के लिए कृत्रिम रूप से आयात मूल्य को कम दिखाते थे। नया नियम इस विसंगति को दूर करेगा।

    यदि किसी उत्पाद में धातु का वजन 15% से कम है, तो उस पर से 50% का पिछला शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है। 15% से अधिक धातु सामग्री वाले भारी मशीनों, वाशिंग मशीन या गैस स्टोव जैसे उत्पादों पर अब धातु की मात्रा के बजाय पूरे उत्पाद के मूल्य पर 25% फ्लैट शुल्क लगेगा। विदेश में बने लेकिन पूरी तरह से अमेरिकी स्टील या तांबे से निर्मित उत्पादों पर रियायती दर से केवल 10% शुल्क लगेगा। बिजली ग्रिड और औद्योगिक उपकरणों के लिए टैरिफ को 50% से घटाकर 15% कर दिया गया है, ताकि अमेरिका में बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी लाई जा सके।

    विदेशी दवाओं पर 100% तक शुल्क
    ट्रंप ने दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से एक बड़ा दांव खेला है। कुछ खास आयातित दवाओं पर अब 100% तक का टैरिफ लगाया जा सकता है। यह नया नियम उन पेटेंट दवाओं पर लागू होगा जो उन देशों में बनती हैं जिनका अमेरिका के साथ कोई टैरिफ समझौता नहीं है। बड़ी दवा कंपनियों के लिए ये नियम 120 दिनों में लागू होंगे, जबकि छोटे निर्माताओं को 180 दिनों की मोहलत दी गई है। यह कदम सीधे तौर पर उन कंपनियों को टारगेट करता है जिन्होंने अमेरिका के साथ ‘मोस्ट-फेवर्ड-नेशन’ मूल्य निर्धारण समझौता नहीं किया है।


    राजस्व में होगा इजाफा

    वाइट हाउस का मानना है कि पहले का टैरिफ ढांचा अत्यंत जटिल था, जिससे आयातकों को हर पुर्जे में धातु की मात्रा निर्धारित करने में सिरदर्द होता था। प्रशासन के अधिकारी ने कहा, “अब यह आसान, सरल और सीधा है। कई उत्पादों के लिए दरें कम होंगी, कुछ के लिए थोड़ी बढ़ेंगी, लेकिन कुल मिलाकर यह उद्योग के लिए अनुकूल है।” प्रशासन को उम्मीद है कि इस नए ढांचे से सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी क्योंकि अब शुल्क पूरे बिक्री मूल्य पर वसूला जाएगा।

    यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ युद्ध और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों से जूझ रहा है। रक्षा सचिव द्वारा हाल ही में किए गए सैन्य फेरबदल और अब इन कड़े व्यापारिक नियमों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन अपने दूसरे कार्यकाल में आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर एक आक्रामक और आत्मनिर्भर अमेरिका की छवि पेश करना चाहता है।

  • US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… जानिए क्या है इसकी वजह?

    US: ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… जानिए क्या है इसकी वजह?


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी (Attorney General Pam Bondi) की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है।


    टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’


    विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल

    पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी।


    पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप

    बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं।

    ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं। बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।


    राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ

    बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’

  • कभी दिखाते थे आंखें… अब ईंधन के लिए भारत के आगे फैला रहे हाथ…

    कभी दिखाते थे आंखें… अब ईंधन के लिए भारत के आगे फैला रहे हाथ…


    नई दिल्ली।
    ईरान और अमेरिका युद्ध (Iran and America war) के कारण आए ईंधन संकट (Fuel Crisis) का असर भारत के पड़ोसियों पर भी पड़ा है। खबर है कि श्रीलंका, नेपाल समेत कई देशों ने भारत से सप्लाई की गुहार लगाई है। वहीं, इनमें मालदीव (Maldives) भी शामिल है। खास बात है कि मालदीव सरकार कभी भारत के खिलाफ खुलकर बात कर रही थी। बहरहाल, भारत में इन अनुरोधों पर विचार किया जा रहा है। हाल ही में ईरान ने कहा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz.) से निकलने को लेकर भारत में हमारे दोस्तों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।


    किसने मांगा ईंधन

    भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल मालदीव भारत से ईंधन मांग रहा है। भारत अपने पड़ोसी देशों को लगातार ईंधन भेज रहा है। उन्होंने बताया कि भारत कॉमर्शियल समझौतों के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की सप्लाई कर रहा है। खास बात है कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है।


    मालदीव की मांग

    उन्होंने जानकारी दी कि मालदीव सरकार ने भी हमसे शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों आधार पर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की सप्लाई के लिए संपर्क किया है। मालदीव के इस अनुरोध पर हमारी अपनी उपलब्धता और हमारी अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है। विश्व बैंक के डाटा के अनुसार मालदीव आमतौर पर अपने ज्यादातर ईंधन की सप्लाई ओमान से लेता है।

    फिलहाल, मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मोइज्जू की सरकार है। वह चुनाव में जीतने से पहले ‘India Out’ का नारा लगा रहे थे। साथ ही उन्होंने भारतीय सैनिकों को वापस जाने के आदेश भी जारी कर दिए थे। हालांकि, अब मुइज्जू ने हाल में ही भारत को अपना भरोसेमंद साझेदार करार दे दिया है। खबर है कि पर्यटन पर बड़े स्तर पर निर्भर देश उड़ानों पर पड़े प्रभाव के कारण भी मुश्किलों का सामना कर रहा है।


    बड़ी बैठक में शामिल हुआ भारत

    विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने ब्रिटेन में आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की आंशिक नाकेबंदी को लेकर भारत के रुख पर बात की। मंत्रालय ने बताया कि मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव और इस तथ्य पर बल दिया कि खाड़ी में व्यापारिक जहाजों पर हमलों में नाविकों को खोने वाला भारत एकमात्र देश है।

    विदेश मंत्रालय ने एक संक्षिप्त बयान में बताया, ‘उन्होंने (मिसरी ने) इस बात पर भी जोर दिया कि संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच कूटनीति और संवाद के मार्ग पर लौटना है।’ ईरान की तरफ से फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित संकरे होर्मुज जलमार्ग को लगभग रोक दिए जाने के बाद वैश्विक तेल व गैस की कीमतों में उछाल आया है। इस जलमार्ग से वैश्विक तेल और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

  • फ्यूल संकट में भारत का सहयोग, भूटान ने पीओएल-एलपीजी आपूर्ति के लिए जताया आभार

    फ्यूल संकट में भारत का सहयोग, भूटान ने पीओएल-एलपीजी आपूर्ति के लिए जताया आभार


    नई दिल्ली।पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष का असर हिमालयी देश भूटान पर भी दिखा है। देश में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और सरकार ने इसे “कंट्रोल से बाहर” बताया है। इस कठिन समय में पड़ोसी देश भारत ने पीओएल (पेट्रोलियम, तेल और लुब्रिकेंट) और एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करके भूटान को राहत दी है, जिसके लिए भूटानी सरकार ने भारत का धन्यवाद किया है।

    पेट्रोल और डीजल की बढ़ी कीमतें
    प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे के कार्यालय ने 1 अप्रैल को जारी बयान में बताया कि मिडिल ईस्ट संघर्ष के बाद से पेट्रोल की कीमतें 28 फरवरी से 60% से ज्यादा बढ़ गई हैं। इस अवधि में पेट्रोल की कीमत लगभग 65 न्गुलट्रम (एनयू) से बढ़कर 95 न्गुलट्रम हो गई। 1 अप्रैल 2026 की आधी रात से थिंपू में पेट्रोल की खुदरा कीमत 114.31 एनयू प्रति लीटर और डीजल की 174.13 एनयू प्रति लीटर कर दी गई है। हालांकि, फ्यूल सब्सिडी के तहत पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमशः 98.00 और 98.31 एनयू प्रति लीटर पर तय की गई हैं।

    सरकार की राहत और जनता से अपील
    भूटान सरकार ने फ्यूल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर 21 मार्च 2026 से नेशनल फ्यूल प्राइस स्मूथनिंग फ्रेमवर्क (एनएफपीएसएफ) के तहत सब्सिडी शुरू की। साथ ही, जनता से भी अपील की गई है कि गैर-जरूरी यात्रा से बचें, काम पर पैदल जाएं और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दें।

    भारत को जताया आभार
    भूटान सरकार ने भारत को धन्यवाद देते हुए कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावटों के बावजूद पीओएल और एलपीजी की बिना रुकावट आपूर्ति सुनिश्चित करना भारत की मदद का उदाहरण है। लगभग 8 लाख की आबादी वाला भूटान अपने फ्यूल का अधिकतर हिस्सा भारत से आयात करता है, जिससे यह सहयोग बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।