Category: International

  • Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता

    Earthquake : पड़ोसी देश चीन के सिचुआन प्रांत में आया भूकंप… 5.5 रही तीव्रता


    बीजिंग।
    वेनेजुएला (Venezuela) में भूकंप (Earthquake) की तबाही से दुनिया अब तक गमगीन है. वेनेजुएला के बाद जापान और अमेरिका में भूकंप आया. भारत और अफगानिस्तान में भी भूकंप के झटके महसूस हुए. अब भूकंप की आहट भारत के पड़ोस में सुनाई दी है. जी हां, भारत के पड़ोस यानी चीन (China) में भूकंप आया है. दक्षिण-पश्चिम चीन (Southwest China) के सिचुआन प्रांत (Sichuan Province) में 5.5 तीव्रता का तेज भूकंप आया है. स्थानीय समयानुसार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    दरअसल, दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के यिबिन शहर में देर रात 5.5 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया. इस भूकंप के झटके चेंगदू और चोंगकिंग जैसे बड़े क्षेत्रीय केंद्रों तक महसूस किए गए. इस भूकंप से लोगों में खौफ का माहौल है. आधी रात को लोग अपने घरों से बाहर की ओर भागते दिखे. भूकंप का केंद्र गाओक्सियन काउंटी में जमीन से महज 6 किलोमीटर की गहराई पर था।

    अभी तक की जानकारी के मुताबिक, इस भूकंप से केंद्र के पास की कुछ इमारतों की दीवारों को मामूली नुकसान पहुंचा है और आपातकालीन टीमें नुकसान का आकलन कर रही हैं. अभी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. बता दें इससे दो दिन पहले यानी शनिवार को अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का भूकंप आया था. इस भूकंप के कारण दिल्ली-एनसीआर के अलावा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा तथा चंडीगढ़ सहित उत्तर भारत के कई हिस्सों में तेज झटके महसूस किए गए थे।


    संडे को जापान में भूकंप

    इसके बाद रविवार को जापान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था. इवाते प्रांत के तट के पास रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह सात बजकर 25 मिनट पर भूकंप आया. इसका केंद्र करीब 40 किलोमीटर (25 मील) की गहराई में था. भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत और आसपास के अन्य क्षेत्रों में भी महसूस किए गए. राहत की बात यह थी कि इसमें किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं आई।


    वेनेजुएला में भूकंप की तबाही

    वहीं, वेनेज़ुएला में आए भूकंप के झटकों से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. वेनेजुएला में अब तक 1500 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. अधिकारियों के अनुसार, परिवारों ने कम से कम 68,900 लोगों के लापता होने की जानकारी दी. इस सबके बीच लोगों में हताशा बढ़ती जा रही है. वेनेज़ुएला के सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में से एक, ला ग्वायरा में, अपने प्रियजनों और पड़ोसियों की तलाश कर रहे लोग फावड़ों, भारी मशीनों, रस्सियों और अपने हाथों का इस्तेमाल करके कंक्रीट के ढेर को हटाने की कोशिश करते दिखे।

  • यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी

    यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूस में तेल संकट गहराया, दो रिफाइनरियों पर हमला, पुतिन ने पहली बार मानी ईंधन की कमी


    कीव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों ने हालात और तनावपूर्ण कर दिए हैं। यूक्रेन ने रूस की दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया है, जिसके बाद वहां आग लगने और नुकसान की खबरें सामने आई हैं। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार स्वीकार किया है कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति बन रही है।

    रिफाइनरी पर हमला, आग और नुकसान

    रिपोर्टों के अनुसार, रविवार को यूक्रेन ने रूस के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़ी तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया, जिससे वहां भीषण आग लग गई। रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र के स्लाव्यांस्क-ना-कुबानी स्थित इस रिफाइनरी में हमले के बाद एक व्यक्ति की मौत और एक अन्य के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है।

    यह रिफाइनरी हर साल लगभग 40 लाख टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती है और काला सागर के बंदरगाहों के जरिए पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करती है।

    यूक्रेन का दावा- दो रिफाइनरियां निशाने पर

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने दावा किया कि उनके देश के ड्रोन हमलों में रूस की दो तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है। उनका कहना है कि हर सफल हमला रूस की सैन्य और आर्थिक क्षमता को कमजोर कर रहा है और शांति की दिशा में एक कदम है। हालांकि रूसी अधिकारियों ने यारोस्लाव क्षेत्र की दूसरी रिफाइनरी पर हमले की पुष्टि नहीं की है।

    रूस में ईंधन संकट के संकेत

    यूक्रेन द्वारा लगातार ऊर्जा ठिकानों पर किए जा रहे हमलों का असर अब रूस के भीतर दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की कमी की स्थिति बन गई है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कुछ इलाकों में ईंधन की बिक्री पर सीमा तय कर दी गई है।

    साइबेरिया के इरकुत्स्क क्षेत्र में एक सरकारी तेल कंपनी के पंप पर एक वाहन को प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर ईंधन देने का नियम लागू किया गया है। वहीं रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए ईंधन निर्यात समझौतों की समीक्षा की जा रही है।

    पुतिन का बयान और सैन्य स्थिति

    राष्ट्रपति पुतिन ने स्वीकार किया कि देश में ईंधन की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार तेल संयंत्रों की सुरक्षा बढ़ाएगी, उत्पादन तेज करेगी और जरूरत पड़ने पर आयात पर भी विचार किया जाएगा।

    हालांकि पुतिन ने यह भी दावा किया कि यूक्रेन के हमलों का मोर्चे पर चल रही लड़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूक्रेन का उद्देश्य रूस के भीतर अस्थिरता पैदा करना है।

    दोनों ओर से हमले जारी

    युद्ध के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले जारी रखे हैं। रूस ने यूक्रेन के जापोरिज्जिया शहर पर बमबारी की, जिसमें दो लोगों की मौत और 16 लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।

    रूस के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने एक रात में 213 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। वहीं यूक्रेन की वायुसेना का कहना है कि रूस ने 142 ड्रोन और 8 मिसाइलें दागीं, जिनमें से अधिकांश को नष्ट कर दिया गया।

  • अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव

    अफगानिस्तान में पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक, हमलों में 34 नागरिकों की मौत, सीमा पर बढ़ा तनाव


    नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अफगान मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने रविवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए, जिनमें 34 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में सभी आम नागरिक होने का दावा किया गया है।

    स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पाकतिका प्रांत के गयान जिले और पाकतिया प्रांत के समकानी जिले में हवाई हमले किए। इन हमलों में रिहायशी इलाकों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा कुनार प्रांत के कुछ क्षेत्रों पर भी हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    रिहायशी इलाकों को बनाया गया निशाना
    पाकतिया पुलिस कमांड के प्रवक्ता मुनीब जादरान ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि समकानी जिले में 35 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 40 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उनके अनुसार, हमला समकानी जिले के मांडोखेल इलाके में बिस्मिल्लाह जान नामक एक नागरिक के घर पर किया गया। आरोप है कि पहले हमले के बाद जब स्थानीय लोग मलबे में फंसे लोगों को बचाने पहुंचे, तभी उसी स्थान पर दूसरा हवाई हमला किया गया, जिससे राहत कार्य में जुटे लोग भी इसकी चपेट में आ गए।

    स्थानीय लोगों का दावा- इलाके में नहीं था कोई सैन्य ठिकाना
    समकानी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों और घायलों का कहना है कि हमले पूरी तरह रिहायशी इलाकों पर हुए। उनका दावा है कि आसपास कोई सैन्य ठिकाना या सैनिक मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद घरों को निशाना बनाया गया, जिससे बड़ी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए।

    पाकिस्तान की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
    इस घटना पर पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। वहीं अफगानिस्तान की ओर से इन हमलों की कड़ी निंदा की गई है और इसे आम नागरिकों पर सीधा हमला बताया गया है। बताया जा रहा है कि हाल ही में कराची में हुए हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था। इसी पृष्ठभूमि में इन ताजा हवाई हमलों की खबर सामने आई है, जिससे सीमा पर हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।

  • ईरान-अमेरिका युद्ध में नया मोड़, सीजफायर के बाद फिर शुरू हुई बमबारी, होर्मुज मार्ग को लेकर बढ़ा रणनीतिक तनाव

    ईरान-अमेरिका युद्ध में नया मोड़, सीजफायर के बाद फिर शुरू हुई बमबारी, होर्मुज मार्ग को लेकर बढ़ा रणनीतिक तनाव

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। कुछ समय पहले घोषित किए गए सीजफायर के टूटने के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों का दौर फिर से शुरू हो गया है। स्थिति तब और जटिल हो गई जब होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में गतिविधियों और समुद्री मार्गों को लेकर विवाद तेज हो गया, जिसे इस संघर्ष का अहम रणनीतिक कारण माना जा रहा है।

    मौजूदा घटनाक्रम के अनुसार, सीजफायर के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट्स, तटीय रडार पोजीशन और संचार प्रणाली को निशाना बनाया गया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ये कार्रवाई क्षेत्र में बढ़ते खतरे और समुद्री सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों का हिस्सा थी।

    इन हमलों के जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स फोर्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के आसपास ड्रोन और मिसाइल गतिविधियां कीं। ईरान ने इसे अपने खिलाफ किसी भी हमले का “कड़ा जवाब” बताया और आगे भी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है।

    इस बीच होर्मुज स्ट्रेट में एक टैंकर पर हुए संदिग्ध हमले ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री निगरानी एजेंसियों के अनुसार, इस क्षेत्र में एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल से टैंकर को नुकसान पहुंचा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति मार्गों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है।

    तनाव तब और बढ़ गया जब यूनाइटेड नेशंस द्वारा प्रस्तावित एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग योजना को ईरान ने खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि इस तरह के निर्णय बिना किसी परामर्श के लिए गए हैं और इससे क्षेत्रीय संप्रभुता पर असर पड़ सकता है। इस विवाद के बाद क्षेत्र में राजनीतिक असहमति और गहरी हो गई।

    इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के सैन्य ढांचे को निशाना बनाते हुए नए हमलों की पुष्टि की। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन स्टोरेज और निगरानी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई है। जवाबी कार्रवाई में ईरान की ओर से भी सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी गई है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि स्थिति नियंत्रित नहीं हुई तो अमेरिका को और कठोर सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे की स्थिति और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, यदि तनाव को कम नहीं किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता विवाद और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की रणनीति इस संघर्ष का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। इसके साथ ही लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। आने वाले दिनों में यह टकराव और व्यापक रूप ले सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है।

  • वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    वेनेजुएला भूकंप संकट में भारत की बड़ी मानवीय पहल, ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत राहत और चिकित्सा सहायता से हजारों जिंदगियों को संबल

    नई दिल्ली । उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उत्पन्न गंभीर मानवीय संकट के बीच भारत ने तेजी से राहत अभियान शुरू करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की मिसाल पेश की है। 7.5 तीव्रता के इस भूकंप से व्यापक तबाही हुई है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की स्थिति ने संकट को और गहरा दिया है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के तहत आपात राहत और चिकित्सा सहायता भेजी है।

    भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान राहत सामग्री लेकर वेनेजुएला पहुंचे हैं। यह सामग्री कोटे डी आइवर के अबिदजान के रास्ते प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचाई गई है। इस अभियान का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत राहत पहुंचाकर जीवन बचाने और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करना है।

    इस राहत मिशन में विदेश मंत्रालय द्वारा लगभग 6 टन आवश्यक दवाइयां और आपातकालीन मेडिकल सामग्री भेजी गई है। इसके साथ ही एक विशेष भारतीय फील्ड अस्पताल टीम भी तैनात की गई है, जिसमें कुल 41 सदस्य शामिल हैं। इस टीम में मेडिकल अफसर, पैरामेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं, जो गंभीर रूप से घायल लोगों के उपचार, ट्रॉमा केयर और आपात सर्जरी जैसी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

    भारत की इस मानवीय पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अत्याधुनिक ‘भीष्म क्यूब’ तकनीक है, जिसे आपदा क्षेत्रों में तेजी से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है। इस मिशन के तहत दो भीष्म क्यूब वेनेजुएला भेजे गए हैं, जो एक कॉम्पैक्ट और मोबाइल अस्पताल प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं। यह तकनीक कम समय में स्थापित होकर बड़े पैमाने पर मरीजों को उपचार सुविधा देने में सक्षम है।

    भीष्म क्यूब की क्षमता के अनुसार यह एक साथ बड़ी संख्या में मरीजों को ट्रॉमा केयर, इमरजेंसी सर्जरी और आईसीयू स्तर की चिकित्सा सुविधा प्रदान कर सकता है। इसमें पोर्टेबल वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और आधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण शामिल हैं, जिससे आपदा के समय तुरंत चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा सकती है।

    वेनेजुएला में भूकंप के बाद स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। कई शहरों और कस्बों में इमारतें ढह गई हैं और राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से प्रयास कर रही हैं।

    इस आपदा में भारी जनहानि और व्यापक विस्थापन की स्थिति ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है। ऐसे समय में भारत की त्वरित सहायता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो आपदा प्रबंधन और वैश्विक सहयोग की दिशा में एक मजबूत संदेश देता है।

    भारत का यह राहत अभियान न केवल चिकित्सा सहायता तक सीमित है, बल्कि यह आपदा प्रभावित लोगों के जीवन को बचाने और पुनर्वास प्रयासों को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ‘ऑपरेशन एमिस्टेड’ के माध्यम से भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय सहयोग में अपनी सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में वैश्विक योगदान के लिए सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में वैश्विक योगदान के लिए सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया गया।


    नई दिल्ली ।
    Narendra Modi को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ा सम्मान प्राप्त हुआ है। हिंद महासागर क्षेत्र के द्वीप राष्ट्र Seychelles ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और वैश्विक जलवायु नीति में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया है।

    सेशेल्स सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों और नेतृत्व ने न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई सोच को जन्म दिया है। विशेष रूप से हरित ऊर्जा, नवीकरणीय संसाधनों और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उनकी पहलों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में महत्वपूर्ण माना गया है। यह सम्मान सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती के अवसर पर प्रदान किया गया, जिससे यह क्षण और भी ऐतिहासिक बन गया।

    इस सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की प्रतिबद्धता और पर्यावरण के प्रति उनकी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रतापूर्ण संबंधों को भी रेखांकित किया और हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।

    यह पहला अवसर नहीं है जब प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण और विकास से जुड़े वैश्विक मंचों पर सम्मान मिला हो। इससे पहले भी उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें खाद्य सुरक्षा, सतत कृषि और जलवायु परिवर्तन से संबंधित योगदान प्रमुख रहे हैं। वैश्विक संगठनों ने उनके नेतृत्व में भारत द्वारा अपनाई गई नीतियों को विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास माना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सौर ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा मिशन और पर्यावरण अनुकूल नीतियों के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका ने देश की छवि को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में मजबूत किया है। सेशेल्स द्वारा दिया गया यह सम्मान इसी वैश्विक मान्यता का एक और प्रमाण माना जा रहा है।

    हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक भूमिका लगातार बढ़ रही है। ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘महासागर विजन’ जैसी नीतियों के माध्यम से भारत ने क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग और साझेदारी को नई दिशा दी है। सेशेल्स के साथ संबंधों को भी इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और विकास सहयोग पर लगातार संवाद होता रहा है।

    इस सम्मान के साथ प्रधानमंत्री मोदी का नाम एक बार फिर उन वैश्विक नेताओं की सूची में शामिल हो गया है, जिन्हें जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के क्षेत्र में नेतृत्व के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। यह उपलब्धि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसकी कूटनीतिक सफलता को भी दर्शाती है।

  • आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप

    आतंक के ठिकानों पर अज्ञात हमलों का साया: पाकिस्तान में लश्कर से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध मौतों से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में आतंकी संगठनों से जुड़े तत्वों की रहस्यमयी मौतों को लेकर हाल के दिनों में सुरक्षा और खुफिया हलकों में हलचल तेज हो गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े तीन आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है कि क्या देश के भीतर किसी प्रकार का संगठित टारगेट ऑपरेशन चल रहा है या यह आपसी संघर्ष का परिणाम है।

    सूत्रों और सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में तीन आतंकियों के शव मिलने से आतंकी नेटवर्क में बेचैनी बढ़ी है। इनमें गाजी मुमताज, मोहम्मद खुजैमा कासिम और खालिद बशीर जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं, जो कथित रूप से लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इन मौतों के कारण संगठन के भीतर असुरक्षा का माहौल गहराने की बात कही जा रही है।

    पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी संगठनों को संरक्षण देने के आरोपों का सामना करता रहा है। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को लेकर भी विभिन्न समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि वर्तमान घटनाक्रम में जिस तरह से एक के बाद एक संदिग्ध मौतों की खबरें सामने आ रही हैं, उसने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार इस तरह की घटनाएं या तो आंतरिक संघर्ष, गुटीय टकराव या फिर किसी गुप्त ऑपरेशन का संकेत हो सकती हैं। हालांकि किसी भी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय स्तर पर कुछ घटनाओं में हमलों और गोलीबारी का जिक्र भी सामने आया है, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।

    इसी क्रम में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य संवेदनशील इलाकों में पहले भी आतंकी कमांडरों पर हमलों की खबरें आती रही हैं, जिनमें अज्ञात हमलावरों की भूमिका की बात कही जाती है। इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी ढांचे की स्थिरता पर सवाल खड़े किए हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी नेटवर्क अब पहले जितना सुरक्षित नहीं रह गया है और आंतरिक व बाहरी दबाव दोनों के बीच उसकी स्थिति कमजोर हो रही है। लगातार हो रही घटनाओं से संगठनों के भीतर नेतृत्व और सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता बढ़ती दिखाई दे रही है।

    हालांकि इन सभी घटनाओं के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं, यह स्पष्ट नहीं है और जांच एजेंसियों की ओर से भी कोई ठोस निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके बावजूद लगातार सामने आ रही संदिग्ध मौतों ने आतंकी संगठनों की गतिविधियों और उनकी आंतरिक संरचना को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • सेशेल्स दौरे में पीएम मोदी का बड़ा कूटनीतिक संदेश, हिंद महासागर क्षेत्र को सहयोग, सुरक्षा और अवसरों का साझा मंच बनाने की अपील

    सेशेल्स दौरे में पीएम मोदी का बड़ा कूटनीतिक संदेश, हिंद महासागर क्षेत्र को सहयोग, सुरक्षा और अवसरों का साझा मंच बनाने की अपील

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपनी सेशेल्स यात्रा के दूसरे दिन हिंद महासागर क्षेत्र को लेकर भारत के दीर्घकालिक दृष्टिकोण ‘महासागर विजन’ को फिर से रेखांकित किया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई रणनीतियों पर जोर बढ़ रहा है। भारत का यह दृष्टिकोण हिंद महासागर को केवल भौगोलिक क्षेत्र नहीं बल्कि साझा अवसरों और साझा जिम्मेदारी के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    सेशेल्स में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत एक ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है जहां आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग केवल बड़े देशों के नेतृत्व पर आधारित न होकर आपसी सम्मान और भरोसे की नींव पर आगे बढ़ना चाहिए। यह संदेश भारत की उस कूटनीतिक नीति को दर्शाता है जिसमें छोटे द्वीपीय देशों की भूमिका को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हिंद महासागर सभी देशों का साझा घर है और इसकी सुरक्षा, स्थिरता तथा समृद्धि सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस विचार को भारत के ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन का आधार बताया। यह नीति भारत की समुद्री रणनीति को स्थानीय सीमाओं से आगे ले जाकर वैश्विक स्तर पर सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

    महासागर विजन की शुरुआत मार्च 2025 में की गई थी, जिसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में सहयोग, सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना है। इस पहल के तहत भारत छोटे देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने, समुद्री गतिविधियों की निगरानी क्षमता बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने जैसे लक्ष्यों पर काम कर रहा है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य ग्लोबल साउथ के देशों को साझा मंच पर लाकर उनकी भूमिका को अधिक प्रभावी बनाना भी है।

    सेशेल्स में अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत का उद्देश्य किसी भी देश के साथ अलग-अलग संवाद करने के बजाय सामूहिक रूप से आगे बढ़ना है। उन्होंने जोर दिया कि हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाने के लिए सभी देशों की भागीदारी आवश्यक है। यह दृष्टिकोण क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत करने की क्षमता रखता है।

    भारत और सेशेल्स के बीच यह संवाद न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन और विकास के नए अवसर भी खोलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भविष्य में समुद्री व्यापार, सुरक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को नई ऊंचाई तक ले जा सकती हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत अब समुद्री कूटनीति को केवल रणनीतिक जरूरत के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग और साझा विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देख रहा है।

  • भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें

    भूकंप के झटकों से उबर नहीं पा रहा बेनेजुएला… आज भी आया 5.6 तीव्रता का भूकंप, अब तक 1430 मौतें


    कराकस।
    वेनेजुएला (Venezuela) भूकंप (Earthquake) के झटकों से उबरता नहीं दिख रहा. बीते बुधवार को आए दो विनाशकारी भूकंप (Two devastating Earthquakes) के झटकों के बाद अब भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके आ रहे हैं. शनिवार के बाद अब आज रविवार को भी वेनेजुएला में भूकंप के झटके महसूस किए गए. इससे लोग दहशत में आ गए. इधर बुधवार को आए दो विनाशकारी भूंकप के कारण वेनेजुएला में हजारों लोगों की मौत होने की बात कही जा रही है. आधिकारिक रूप से अभी तक 1430 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है. हजारों लोग घायल है. हजारों लापता बताए जा रहे हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

    नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिग्ज ने शनिवार को बताया कि बुधवार को आए भूकंप से अभी तक 1,430 लोग मारे गए और 3,238 लोग घायल हुए>


    आज वेनेजुएला में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया

    रविवार सुबह वेनेजुएला में 5.6 की तीव्रता का भूकंप आया. शुरुआती जानकारी के अनुसार 5.6 तीव्रता का यह भूकंप वेनेजुएला के एल लिमोन से लगभग 30 किमी दूर उत्तर पूर्व में आया. स्थानीय समय 3 बजकर 20 मिनट पर भूंकप आया है. इससे पहले शनिवार सुबह वेनेजुएला में 4.1 तीव्रता का भूकंप आया था।

    वेनेजुएला की भूकंप अनुसंधान संस्था (फनविसिस) ने बताया कि देश के मध्य हिस्से में 4.1 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया. यह भूकंप ऐसे समय आया है जब लोग इस हफ्ते की शुरुआत में आए दो बड़े और विनाशकारी भूकंपों के बाद पहले से ही डरे हुए हैं।

    बुधवार को आए दो शक्तिशाली भूकंपों के बाद इस शहर को आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया था, क्योंकि यहां काफी नुकसान हुआ था. अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को आया भूकंप जमीन से सिर्फ पांच किलोमीटर नीचे था. इतनी कम गहराई वाले भूकंप अक्सर ज्यादा तेज महसूस होते हैं और इमारतों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

    काराकस और आसपास के इलाकों के लोगों ने भी झटके महसूस किए. कई लोग डर के कारण इमारतों से बाहर निकल आए, क्योंकि उन्हें और नुकसान होने या इमारतें गिरने का डर था. यह भूकंप बुधवार को आए दो बड़े भूकंपों के कुछ ही दिन बाद आया, जिनसे कई जगह भारी तबाही हुई थी. कई इमारतें गिर गईं, भूस्खलन हुआ और लोगों की मौत भी हुई.

  • Pakistan: कराची में भीषण आतंकी हमला, 6 आतंकवादी और 4 रेंजर्स ढेर…एक पकड़ाया

    Pakistan: कराची में भीषण आतंकी हमला, 6 आतंकवादी और 4 रेंजर्स ढेर…एक पकड़ाया


    कराची।
    पाकिस्तान (Pakistan) के सबसे बड़े शहर कराची (Karachi) में शनिवार रात एक बड़ा आतंकी हमला (Terrorist Attack) हुआ. आतंकियों ने सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर धावा बोल दिया. सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई में छह आतंकवादी (Six Terrorists) मार गिराए गए, जबकि एक हमलावर को जिंदा पकड़ लिया गया. करीब 90 मिनट तक चली इस मुठभेड़ में चार रेंजर्स की भी मौत हो गए. अक्टूबर 2024 के बाद कराची में यह पहला बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है, जिसने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विश्वसनीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार के सात आतंकियों ने शनिवार रात करीब 8:30 बजे कराची के घनी आबादी वाले गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में स्थित सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय पर हमला किया. आतंकियों ने पहले विस्फोटकों से भरे वाहन को मुख्य गेट से टकराकर परिसर में प्रवेश किया और इसके बाद हैंड ग्रेनेड फेंकते हुए अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. हमले के तुरंत बाद रेंजर्स के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया।

    बाद में स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (एसएसयू) के कमांडो और एंटी टेररिस्ट फोर्स (एटीएफ) की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं. संयुक्त अभियान के दौरान करीब डेढ़ घंटे तक भीषण गोलीबारी हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने छह आतंकियों को मार गिराया और एक घायल हमलावर को जिंदा गिरफ्तार कर लिया. हालांकि इस मुठभेड़ में चार रेंजर्स जवानों ने भी अपनी जान गंवा दी. घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया. रेंजर्स मुख्यालय के आसपास की सभी सड़कों को बंद कर दिया गया और स्थानीय लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई।


    हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली

    सुरक्षा अभियान के दौरान आसपास के कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही. बचाव और राहत एजेंसियों को भी तत्काल मौके पर भेजा गया ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके. हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली है. यह संगठन टीटीपी का एक कट्टरपंथी धड़ा है, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में सक्रिय रहा है. यह संगठन पहले भी सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों पर कई बड़े हमले कर चुका है. हालांकि हाल के वर्षों में इसकी गतिविधियां सीमित मानी जा रही थीं, लेकिन कराची में हुआ यह हमला संगठन की नई रणनीति की ओर इशारा करता है. सिंध के पुलिस महानिरीक्षक जावेद आलम ओधो ने बताया कि शुरुआती जांच से पुष्टि हुई है कि आतंकी एक वाहन में सवार होकर आए थे और मुख्य गेट को तोड़कर परिसर में घुसे।

    उन्होंने कहा कि हमला शुरू होते ही रेंजर्स के जवानों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की और आतंकियों को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया. उन्होंने यह भी बताया कि हमले के दौरान जोरदार विस्फोट की आवाज सुनी गई थी, जिसकी जांच की जा रही है. सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने घटना का संज्ञान लेते हुए पुलिस महानिदेशक और कराची के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. वहीं रेस्क्यू 1122 सिंध ने बताया कि गुलिस्तान-ए-जौहर ब्लॉक-5 के पास विस्फोट की सूचना मिलते ही राहत और बचाव दलों को मौके पर रवाना कर दिया गया था।


    अक्टूबर 2024 में बड़ा आतंकी हमला हुआ था

    कराची में इससे पहले अक्टूबर 2024 में बड़ा आतंकी हमला हुआ था, जब कराची एयरपोर्ट के पास हुए आत्मघाती विस्फोट में दो चीनी इंजीनियरों की मौत हो गई थी. उस हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली थी. वहीं टीटीपी का कराची में पिछला बड़ा हमला फरवरी 2023 में हुआ था, जब आतंकियों ने कराची पुलिस कार्यालय पर हमला किया था. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर टीटीपी आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने का आरोप लगाता रहा है।

    पाकिस्तान का दावा है कि अफगान सीमा पार मौजूद टीटीपी के ठिकानों से लगातार हमलों की साजिश रची जाती है. इसके जवाब में पाकिस्तान की सेना हाल के महीनों में अफगानिस्तान के भीतर कथित टीटीपी ठिकानों पर कई कार्रवाई भी कर चुकी है. ऐसे में कराची में हुआ यह हमला पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।