Category: International

  • ‘जेल में इमरान खान को किया जा रहा टॉर्चर…’, बहन उज्मा का दावा, हालत को लेकर जताई चिंता

    ‘जेल में इमरान खान को किया जा रहा टॉर्चर…’, बहन उज्मा का दावा, हालत को लेकर जताई चिंता


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में सेहत और उनके साथ कथित व्यवहार को लेकर उनकी बहन उज्मा खान ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उज्मा का दावा है कि इमरान ने उनसे मुलाकात के दौरान कहा कि उनके साथ अन्याय हो रहा है और उन्हें जेल में कथित तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा है।

    उज्मा के मुताबिक, इमरान ने उनसे कहा कि “मेरे साथ अन्याय हुआ है। मुझे बहुत बुरी तरह टॉर्चर किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी बताया कि एक डॉक्टर ने इमरान से मुलाकात की और कहा कि लंबे समय से लोगों से संपर्क न होने के कारण उनकी तबीयत प्रभावित हो रही है।

    10 महीने से टीवी और पढ़ने का सामान नहीं
    उज्मा खान ने दावा किया कि इमरान खान के पास पिछले करीब 10 महीनों से पढ़ने के लिए कोई सामग्री या टीवी तक नहीं है। उनके मुताबिक, लंबे समय तक बाहरी दुनिया से संपर्क सीमित रहने का असर उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर पड़ रहा है।

    उन्होंने इमरान की आंखों की समस्या को लेकर भी जानकारी दी। उज्मा के अनुसार, इमरान ने उन्हें आंख में बचे हेमरेज का हल्का निशान दिखाया। डॉक्टर ने उन्हें बताया कि इंजेक्शन से स्थिति में सुधार होगा और एहतियात के तौर पर आगे भी फॉलो-अप इंजेक्शन देने पड़ सकते हैं। उज्मा ने कहा कि इमरान की नजर में पहले की तुलना में सुधार हुआ है, लेकिन वह अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है।

    अस्पताल से जांच के बाद फिर जेल भेजे गए इमरान
    21 अगस्त को इमरान खान को रावलपिंडी की अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद उनकी बहनों नोरिन नियाजी और उज्मा खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनकी स्थिति को लेकर जानकारी दी। रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इमरान को गुरुवार देर रात अस्पताल ले जाया गया था। डॉक्टरों ने मेडिकल जांच के बाद उन्हें फिट बताया, जिसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे उन्हें दोबारा अदियाला जेल भेज दिया गया।

    सरकार ने क्या कहा?
    पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि इमरान खान को 20 और 21 अगस्त की रात सुरक्षा व्यवस्था के बीच अस्पताल ले जाया गया था। वहां डॉक्टरों की टीम ने उनकी मेडिकल जांच की। इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। उन्हें भ्रष्टाचार समेत कई मामलों में गिरफ्तार किया गया था। अब उनकी बहन के आरोपों के बाद जेल में उनकी स्थिति और स्वास्थ्य को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक विवाद फिर तेज होने के संकेत हैं।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ट्रंप ने बताया ‘अमेरिकी इलाका’, ईरान ने कहा- रुख नहीं बदला तो बंद रहेगा

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ट्रंप ने बताया ‘अमेरिकी इलाका’, ईरान ने कहा- रुख नहीं बदला तो बंद रहेगा


    नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ट्रूथ सोशल पर एक मैप शेयर करते हुए होर्मुज को फिर ‘अमेरिकी इलाका’ बताया। दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि जब तक वॉशिंगटन अपना रुख नहीं बदलता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का सवाल नहीं है।

    पहले भी कर चुके हैं होर्मुज को लेकर दावा
    ट्रंप इससे पहले भी होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बताए जाने की बात कह चुके हैं। उन्होंने 18 अगस्त को भी इसी तरह का मैप शेयर किया था और कहा था कि जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी इलाका घोषित किया जाएगा। इससे पहले 14 अगस्त को लॉन्ग आइलैंड में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज को अपना क्षेत्र घोषित करेगा।

    ईरान ने ट्रंप के इस दावे को खारिज किया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रेज़ाई ने अमेरिकी दावे पर तंज कसते हुए कहा था कि होर्मुज को दोबारा खोल पाने में अमेरिका की नाकामी और उस पर मालिकाना हक जताने के दावे के बीच की दूरी, वॉशिंगटन और होर्मुज के बीच की दूरी से भी ज्यादा है।

    ईरान पर नए प्रतिबंधों की तैयारी
    ट्रंप का ताजा बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ नए आर्थिक प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने चीन से भी तेहरान के तेल निर्यात को लेकर अमेरिका का सहयोग करने की अपील की है।

    चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। ऐसे में नए अमेरिकी प्रतिबंधों का असर सिर्फ ईरान तक सीमित रहने के बजाय उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी पड़ सकता है।

    ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को बताया गैरकानूनी
    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की है। उनका आरोप है कि अमेरिका अपनी सीमाओं से बाहर भी अपने अधिकार थोपने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेकेंडरी प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है।

    मोहसिन रेज़ाई ने पड़ोसी देशों को भी अमेरिकी आर्थिक अभियान का समर्थन नहीं करने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो देश अमेरिका के आर्थिक युद्ध में शामिल होंगे, ईरान उन्हें दुश्मन मानेगा।

    ट्रंप-ईरान के बीच नहीं थमा तनाव
    ट्रंप लगातार दूसरे देशों से ईरान को आर्थिक मदद या व्यापारिक रास्ता उपलब्ध नहीं कराने की अपील कर रहे हैं। उनका जोर इस बात पर है कि तेहरान को अमेरिका के मुताबिक समझौते की शर्तें स्वीकार करनी चाहिए।

    वहीं, ईरान भी अपने रुख पर कायम है। हालांकि, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने टकराव खत्म करने के लिए कूटनीतिक समाधान की बात कही है। उनका कहना है कि ईरान अपनी ताकत और सम्मान बनाए रखते हुए संघर्ष को खत्म करने का रास्ता तलाशना चाहता है।

    होर्मुज को लेकर दोनों देशों के सख्त रुख के बीच अब तनाव और बढ़ने की आशंका है। खासकर नए अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरानी तेल व्यापार पर दबाव बढ़ने से यह विवाद आर्थिक मोर्चे पर भी गंभीर रूप ले सकता है।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच नई व्यापारिक डील को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह शुल्क कनाडा के कुछ उत्पादों पर लगाया गया है और इसका उद्देश्य अमेरिकी व्यापारिक हितों के खिलाफ माने जा रहे कनाडाई कदमों का जवाब देना है। अमेरिका ने कनाडा पर अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यापारिक व्यवहार का आरोप लगाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने बातचीत के दौरान तय शर्तों के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया।

    टैरिफ लागू करने का फैसला अचानक नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच कई सप्ताह से व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। अगस्त के मध्य में दोनों पक्षों के बीच प्रगति के संकेत मिले थे और अमेरिका ने नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने की समयसीमा भी कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाई थी। इसके बावजूद अंतिम चरण में दोनों सरकारें किसी साझा समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी कदम पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रगति जरूर हुई थी, लेकिन अंतिम समय में अमेरिका की ओर से ऐसी शर्तें और बदलाव सामने आए जिन्हें कनाडा अपने हितों के अनुरूप नहीं मान सकता था। इसके बाद कनाडा ने व्यापार वार्ता को रोकने का फैसला किया है।

    कार्नी ने स्पष्ट किया है कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब डॉलर के बदले डॉलर के आधार पर देगा। इसका अर्थ है कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों पर भी समान आर्थिक प्रभाव वाला शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। कनाडाई सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य अपने श्रमिकों, किसानों और कारोबारियों के हितों की रक्षा करना है।

    अमेरिकी कदम से प्रभावित होने वाले सामान कनाडा के कुल अमेरिकी निर्यात का एक सीमित हिस्सा हैं। फिर भी इसका राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव व्यापक हो सकता है, क्योंकि अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच हर वर्ष बड़े पैमाने पर वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है।

    नए टैरिफ से हॉकी उपकरण, कुछ औद्योगिक उत्पाद, डेयरी और अन्य निर्धारित श्रेणियों के सामान प्रभावित हो सकते हैं। इससे कारोबारियों की लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव आने की आशंका है। यदि कनाडा भी जवाबी शुल्क लागू करता है तो दोनों देशों के उत्पादों की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब दोनों देश उत्तर अमेरिकी व्यापार व्यवस्था को लेकर भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की समीक्षा भी आगे महत्वपूर्ण विषय बनने वाली है। ऐसे में मौजूदा टैरिफ विवाद आने वाली व्यापार वार्ताओं को और जटिल कर सकता है।

    अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश सुरक्षा, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मामलों में भी लंबे समय से साझेदार रहे हैं। इसलिए व्यापारिक टकराव का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि तत्काल समझौते के बजाय आर्थिक दबाव और जवाबी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

  • विदेश यात्रा में पेपरलेस होगी इमिग्रेशन प्रक्रिया, सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-बोर्डिंग पास से आसान होगा यात्रियों का सफर

    विदेश यात्रा में पेपरलेस होगी इमिग्रेशन प्रक्रिया, सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर ई-बोर्डिंग पास से आसान होगा यात्रियों का सफर

    नई दिल्ली । विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए 1 सितंबर 2026 से इमिग्रेशन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए कागज पर प्रिंट किए गए बोर्डिंग पास को अनिवार्य नहीं रखा जाएगा। यात्री अपने मोबाइल फोन में उपलब्ध ई-बोर्डिंग पास दिखाकर निर्धारित इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे नियमित रूप से विदेश यात्रा करने वाले लोगों को दस्तावेज संभालने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    नई व्यवस्था देश के सभी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर लागू की जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों को भी डिजिटल बोर्डिंग पास के आधार पर यात्रियों की प्रक्रिया संचालित करने के लिए तैयार किया जा रहा है। व्यवस्था लागू होने के बाद इमिग्रेशन काउंटर पर यात्रियों को अपने मोबाइल में मौजूद वैध ई-बोर्डिंग पास प्रस्तुत करने की सुविधा मिलेगी।

    अब तक कई अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को बोर्डिंग पास की प्रिंटेड कॉपी अपने साथ रखनी पड़ती थी। यात्रा के दौरान इस कागजी दस्तावेज की जरूरत अलग-अलग चरणों में पड़ सकती थी। नई व्यवस्था के बाद यात्रियों के लिए मोबाइल में बोर्डिंग पास रखना पर्याप्त होगा। इससे प्रिंट निकालने और उसे सुरक्षित रखने की अतिरिक्त जरूरत कम होगी।

    ई-बोर्डिंग पास के इस्तेमाल से इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान कागज पर मुहर लगाने की व्यवस्था भी समाप्त हो जाएगी। यानी डिजिटल बोर्डिंग पास दिखाकर प्रक्रिया पूरी करने वाले यात्रियों को अपने पास पर इमिग्रेशन की स्टांप लगवाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह बदलाव हवाई यात्रा को अधिक डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

    हालांकि, जिन यात्रियों के पास पहले से प्रिंट किया हुआ बोर्डिंग पास मौजूद है, उनके लिए भी यात्रा की सुविधा बनी रहेगी। उन्हें कागजी बोर्डिंग पास रखने के कारण रोका नहीं जाएगा। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे भौतिक बोर्डिंग पास पर इमिग्रेशन की मुहर नहीं लगाई जाएगी। यात्रियों के लिए डिजिटल माध्यम को सुविधाजनक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    इस बदलाव को लागू करने की जिम्मेदारी से जुड़े विभागों और एयरपोर्ट संचालकों के बीच तैयारी शुरू कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर डिजिटल प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अपडेट किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही के दौरान अनावश्यक कागजी प्रक्रिया को कम करना और इमिग्रेशन क्लियरेंस को डिजिटल माध्यम से अधिक सुविधाजनक बनाना है।

    यात्रियों के लिए यह जरूरी होगा कि वे अपने मोबाइल फोन में वैध ई-बोर्डिंग पास आसानी से उपलब्ध रखें। विदेश यात्रा से पहले बोर्डिंग पास डाउनलोड करने और फोन की बैटरी पर्याप्त रखने जैसी सामान्य सावधानियां उपयोगी रहेंगी। साथ ही यात्रियों को एयरलाइन की ओर से मिलने वाले यात्रा संबंधी निर्देशों का पालन करना होगा।

    नई व्यवस्था का सीधा लाभ उन यात्रियों को मिल सकता है जो लगातार अंतरराष्ट्रीय यात्राएं करते हैं और हर यात्रा में दस्तावेजों की प्रिंटेड प्रतियां संभालते हैं। मोबाइल आधारित बोर्डिंग पास के इस्तेमाल से यात्रा प्रक्रिया में कागज पर निर्भरता घटेगी। 1 सितंबर से लागू होने वाला यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में डिजिटल सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

  • पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के रक्षा गठजोड़ में बांग्लादेश की एंट्री? मक्का समझौते पर दिया बड़ा संकेत

    पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के रक्षा गठजोड़ में बांग्लादेश की एंट्री? मक्का समझौते पर दिया बड़ा संकेत


    नई दिल्ली। बांग्लादेश ने पाकिस्तान सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर अपना रुख साफ करते हुए संभावित रूप से इस ढांचे में शामिल होने का विकल्प खुला रखा है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा है कि ढाका सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से जुड़े किसी आर्थिक या रक्षा ढांचे में शामिल होने की संभावना को सकारात्मक नजरिए से देख रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी फैसला बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा व्यापारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    दरअसल सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को सभी पर हमला माना जाएगा। इसके साथ ही तीनों देशों ने रक्षा सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी समझौते को रक्षात्मक प्रकृति का बताया है और कहा है कि इसका उद्देश्य किसी विशेष देश के खिलाफ मोर्चा बनाना नहीं बल्कि बाहरी आक्रमण के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा क्षमता बढ़ाना है।

    इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे कई बार मुस्लिम नाटो की संज्ञा दी जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर यह नाम इस समझौते का हिस्सा नहीं है। बांग्लादेश के सकारात्मक संकेत के बाद अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह सुरक्षा ढांचा भविष्य में तीन देशों से आगे बढ़कर अन्य देशों को भी अपने साथ जोड़ सकता है। तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने भी समझौते के बाद मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की संभावना की बात कही थी।

    ढाका के रुख को उसकी मौजूदा विदेश नीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बांग्लादेश पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के साथ व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं चीन के साथ भी उसके रणनीतिक और आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण बने हुए हैं। दूसरी ओर भारत और बांग्लादेश के संबंधों में हाल के समय में कई मुद्दों को लेकर तनाव दिखाई दिया है। ऐसे में मक्का रक्षा ढांचे को लेकर सकारात्मक रुख बांग्लादेश की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें वह अपने रणनीतिक विकल्पों को व्यापक बनाना चाहता है।

    बांग्लादेश के लिए सऊदी अरब के साथ संबंध भी बेहद अहम हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक और श्रम संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक सऊदी अरब में काम करते हैं। वहीं तुर्किये के साथ ढाका के राजनीतिक और रक्षा संबंध भी लगातार विकसित हुए हैं। पाकिस्तान के साथ संबंधों में भी हाल के समय में नई सक्रियता दिखाई दे रही है। ऐसे में तीनों देशों से जुड़े किसी व्यापक आर्थिक या रक्षा मंच में भागीदारी बांग्लादेश के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से नया अवसर हो सकती है।

    इस घटनाक्रम पर भारत की नजर भी स्वाभाविक रूप से बनी हुई है। मक्का समझौते में बांग्लादेश की संभावित भागीदारी का मतलब यह नहीं है कि ढाका ने भारत विरोधी किसी सैन्य गठबंधन में शामिल होने का फैसला कर लिया है। अभी बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से समझौते में शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उसका मौजूदा रुख केवल इस संभावना को खुला रखने और विकल्प का आकलन करने तक सीमित है। इसलिए इसे सीधे तौर पर किसी नए सैन्य गठजोड़ में बांग्लादेश की एंट्री के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।

    फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि मक्का रक्षा समझौते के विस्तार की संभावना ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के रणनीतिक समीकरणों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यदि भविष्य में बांग्लादेश इस ढांचे का औपचारिक हिस्सा बनता है तो इसका असर केवल तीन देशों के मौजूदा रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दक्षिण एशिया में कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला बांग्लादेश की सरकार अपने राष्ट्रीय हितों और बदलते क्षेत्रीय हालात का आकलन करने के बाद ही करेगी।

  • स्कूल खुलते ही स्वीडन में दहशत का साया, तलवार से हमला कर तीन को किया घायल; हमलावर की मंशा पर जांच जारी

    स्कूल खुलते ही स्वीडन में दहशत का साया, तलवार से हमला कर तीन को किया घायल; हमलावर की मंशा पर जांच जारी


    नई दिल्ली। स्वीडन के मध्य हिस्से में स्थित फागेरस्ता शहर के ब्रिनेल स्कूल में शुक्रवार को उस समय दहशत फैल गई जब एक हमलावर ने तलवार से हमला कर दिया। घटना में कम से कम तीन लोग घायल हुए हैं जिनमें दो किशोरों की हालत गंभीर बताई जा रही है। एक अन्य घायल व्यक्ति को भी इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया। पुलिस ने मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन अभी तक हमले के पीछे की वजह और संदिग्ध की मंशा स्पष्ट नहीं हो सकी है।

    बताया गया है कि घटना के समय ब्रिनेल स्कूल में कक्षाएं चल रही थीं और परिसर में करीब 400 से 500 विद्यार्थी मौजूद थे। अचानक हुए हमले के बाद स्कूल में अफरातफरी मच गई। विद्यार्थियों और कर्मचारियों के बीच भय का माहौल बन गया। हमले में दो किशोर गंभीर रूप से घायल हुए हैं जबकि एक अन्य व्यक्ति को भी अस्पताल ले जाया गया। अधिकारियों की ओर से घायलों की विस्तृत स्थिति को लेकर अभी अधिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना के बाद पुलिस ने तत्काल स्कूल और आसपास के इलाके को सुरक्षित करने की कार्रवाई शुरू की। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के कई स्कूलों को भी बंद कर दिया गया और कुछ रास्तों पर अवरोध लगाए गए। लोगों की आवाजाही नियंत्रित करते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी। जांच टीमों ने स्कूल और आसपास लगे निगरानी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध स्कूल तक कैसे पहुंचा और हमले से पहले तथा बाद में उसकी गतिविधियां क्या थीं।

    प्रशासन ने घटना से प्रभावित विद्यार्थियों और अन्य लोगों की सहायता के लिए स्कूल के नजदीक स्थित एक खेल परिसर में संकट केंद्र भी बनाया। यहां प्रभावित लोगों को आवश्यक मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। पुलिस के साथ दमकल और स्वास्थ्यकर्मी भी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने लोगों से इलाके में शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।

    इस घटना ने स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्मियों की छुट्टी के बाद स्कूल खुलने के तुरंत बाद हुई इस घटना ने विद्यार्थियों अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन ने भी घटना को गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के पीछे क्या कारण था।
    इस घटना ने स्कूलों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्मियों की छुट्टी के बाद स्कूल खुलने के तुरंत बाद हुई इस घटना ने विद्यार्थियों अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टेरसन ने भी घटना को गंभीर और चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हमले के पीछे क्या कारण था।

    अब जांच का मुख्य फोकस गिरफ्तार संदिग्ध की पूछताछ और घटनास्थल से जुटाए गए सबूतों पर है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि हमला किसी व्यक्तिगत विवाद का परिणाम था या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। जांच आगे बढ़ने के साथ हमले की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल फागेरस्ता में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और स्कूल परिसर में हुई इस घटना ने पूरे इलाके में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

  • यूक्रेन के क्रिवी रिह में रूसी ड्रोन अटैक, शॉपिंग मॉल को बनाया निशाना, 14 की मौत, 121 घायल

    यूक्रेन के क्रिवी रिह में रूसी ड्रोन अटैक, शॉपिंग मॉल को बनाया निशाना, 14 की मौत, 121 घायल


    कीव। रूस ने शुक्रवार को मध्य यूक्रेन के क्रिवी रिह शहर में कई ड्रोन से हमला किया। हमले में एक बड़े शॉपिंग मॉल को निशाना बनाया गया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि 121 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 22 बच्चे भी शामिल हैं। 29 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है, इनमें पांच बच्चे हैं। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई गई है।

    मॉल पर बार-बार किए गए ड्रोन हमले

    क्रिवी रिह रक्षा परिषद के प्रमुख ओलेक्सांद्र विकुल के अनुसार, शॉपिंग मॉल को कई बार निशाना बनाया गया। उन्होंने बताया कि जेट इंजन वाले शाहेद ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए हमला कर रहे थे। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, रूसी सेना ने क्रिवी रिह के चार जिलों में करीब 60 हमले किए। इनमें ड्रोन, तोपों और एक हवाई बम का इस्तेमाल किया गया।

    हमले की चपेट में क्रिवी रिह जिले के जेलेनोडोल्स्क और ह्रुशिव्का इलाके भी आए। निकोपोल जिले में तीन और सिनेल्निकोव जिले में दो लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

    लगातार बढ़ती गई घायलों की संख्या

    हमले के तुरंत बाद दो लोगों की मौत और 15 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद घायलों की संख्या 50, 91 और फिर 96 तक पहुंच गई। शाम तक अधिकारियों ने 14 मौतों और 121 लोगों के घायल होने की पुष्टि की।

    जेलेंस्की ने रूस पर साधा निशाना

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का गृहनगर होने के कारण क्रिवी रिह पर हुए हमले को लेकर उनकी प्रतिक्रिया भी सामने आई। जेलेंस्की ने शॉपिंग सेंटर पर हमले को निंदनीय बताते हुए इसे आतंकवादी कार्रवाई करार दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से रूस पर प्रभावी दबाव बनाने की अपील की।

    क्रिवी रिह इससे पहले भी रूसी हमलों का निशाना बन चुका है। 16 अगस्त को शहर की प्रमुख इस्पात कंपनी आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह पर हुए हमले में दो कर्मचारियों की मौत हुई थी।

    बच्चे भी हुए हमले में घायल

    ताजा हमले में 22 बच्चों के घायल होने की पुष्टि हुई है। गंभीर रूप से घायल 29 लोगों में पांच बच्चे भी शामिल हैं। घटनास्थल से घायलों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। बचाव दल प्रभावित इलाकों में राहत और खोज अभियान चला रहा है।

    पहले भी हो चुका है बड़ा हमला

    क्रिवी रिह में अप्रैल 2025 में भी बड़ा रूसी हमला हुआ था। उस दौरान शहर के एक बच्चों के खेल मैदान को निशाना बनाया गया था, जिसमें कम से कम 18 लोगों की मौत हुई थी और दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

    ताजा हमले ने एक बार फिर यूक्रेन के नागरिक इलाकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शॉपिंग मॉल जैसे सार्वजनिक स्थान पर बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने से रूस-यूक्रेन युद्ध में नागरिकों पर पड़ रहे असर की तस्वीर और गंभीर हुई है।

  • इमरान खान की छह डॉक्टरों ने की मेडिकल जांच, अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, फिर अदियाला जेल भेजे गए

    इमरान खान की छह डॉक्टरों ने की मेडिकल जांच, अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया, फिर अदियाला जेल भेजे गए

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद एक बार फिर अदियाला जेल भेज दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाया गया था। वहां छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्वास्थ्य संबंधी जांच की। जांच पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने फिलहाल उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं बताई, जिसके बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।

    इमरान खान लंबे समय से अदियाला जेल में बंद हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। उनकी मेडिकल जांच कराने का मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश से जुड़ा हुआ था। अदालत ने उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए निर्धारित समय के भीतर मेडिकल जांच कराने और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा था।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। अदालत की ओर से मेडिकल जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने की बात भी कही गई थी। जांच और उपचार के दौरान डॉ. उजमा तथा इमरान खान के निजी चिकित्सक को भी मौजूद रहने की अनुमति दी गई थी। उनके इलाज से संबंधित खर्च उनके परिवार द्वारा वहन किए जाने की बात सामने आई थी।

    इमरान खान के अस्पताल पहुंचने से पहले वहां सुरक्षा व्यवस्था को काफी बढ़ा दिया गया था। अस्पताल के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अस्पताल में इमरान खान की मौजूदगी को देखते हुए प्रवेश और आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी गई।

    छह विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण किया। मेडिकल जांच पूरी होने के बाद डॉक्टरों की राय के आधार पर उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें वापस अदियाला जेल ले जाया गया। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य निगरानी जेल में ही किए जाने की बात सामने आई है।

    इमरान खान को निजी अस्पताल में जांच के लिए भेजे जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान सरकार ने पहले असहमति जताई थी। केंद्र सरकार ने अदालत के आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा था कि इमरान खान की स्वास्थ्य जांच पहले भी कई बार हो चुकी है और उनके लिए मेडिकल बोर्ड गठित किए जा चुके हैं।

    सरकार का तर्क था कि किसी कैदी को अस्पताल भेजने का फैसला उसकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर होना चाहिए। सरकार ने निजी अस्पताल में जांच के आदेश पर सवाल उठाते हुए इसे लेकर अदालत में पुनर्विचार की कोशिश की थी।

    हालांकि, सरकार की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने कुछ कमियां बताते हुए वापस कर दिया था। इसके बाद अदालत के निर्देश के तहत इमरान खान को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    मेडिकल जांच के बाद अस्पताल में भर्ती न किए जाने से फिलहाल इमरान खान को वापस जेल भेज दिया गया है। इस घटनाक्रम में अदालत के निर्देश, सरकार की आपत्ति और डॉक्टरों की मेडिकल राय तीनों महत्वपूर्ण पहलू रहे। इमरान खान की आगे की स्वास्थ्य निगरानी अदियाला जेल में ही किए जाने की संभावना है।

  • यमन और सोमालिया के तटों से समुद्री लुटेरों ने 22 भारतीयों वाले 2 जहाजों को किया हाइजैक

    यमन और सोमालिया के तटों से समुद्री लुटेरों ने 22 भारतीयों वाले 2 जहाजों को किया हाइजैक


    सना।
    यमन और सोमालिया (Yemen and Somalia) के तट के पास अलग-अलग घटनाओं में 22 भारतीय नागरिकों (Indian citizens) को लेकर जा रहे दो कॉमर्शियल जहाजों (Two Commercial Ships) को समुद्री लुटेरों (Pirates) ने हाइजैक (Hijack) कर लिया। अधिकारियों के मुताबिक, इन घटनाओं ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका के आसपास के समुद्री इलाकों में एक बार फिर समुद्री डकैती के खतरे को उजागर किया है।


    यमन के पास 16 भारतीयों वाला टैंकर हाइजैक

    पहली घटना में इरिट्रिया के झंडे वाला ऑयल प्रोडक्ट्स टैंकर M.T. Sibu 1 समुद्री लुटेरों के कब्जे में चला गया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक थे। इसे यमन के तट से करीब 30 नॉटिकल मील दूर अदन की खाड़ी में छह हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने हाइजैक किया।

    समुद्री प्रशासन निदेशालय की तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, जहाज के सभी 20 क्रू सदस्यों के सुरक्षित होने की सूचना है। हालांकि, जहाज और उसके क्रू की ताजा स्थिति का इंतजार किया जा रहा है। क्रू में 16 भारतीयों के अलावा एक सीरियाई, एक सूडानी और एक इराकी नागरिक शामिल है। वहीं, एक अन्य नाविक की राष्ट्रीयता की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, रिक्रूटमेंट एंड प्लेसमेंट सर्विस लाइसेंस एजेंसी से घटना की रिपोर्ट और उसके बाद की नियमित जानकारी e-Navik ऑनलाइन मरीन कैजुअल्टी रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए देने को कहा गया है। SKS Krishiv Marine Services के सुमित कांत सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी ने क्रू के चार सदस्यों की भर्ती की थी और उनके विवरण समुद्री प्रशासन निदेशालय को उपलब्ध करा दिए हैं।


    सोमालिया के पास 6 भारतीयों वाला कार्गो जहाज कब्जे में

    दूसरी घटना में सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास M/V LUTUF नाम के कैमरून-फ्लैग वाले कार्गो जहाज को समुद्री लुटेरों ने अपने कब्जे में ले लिया। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा उद्धृत एक सोमाली अधिकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार को हुई।

    जहाज पर 10 सदस्यीय क्रू था, जिसमें छह भारतीय नागरिक शामिल थे। जहाज को पुंटलैंड के Eyl जिले में Marraya से करीब 3.5 नॉटिकल मील दूर कब्जे में लिया गया और बाद में इसे Nugaal तट की ओर ले जाया गया। क्रू में एक तुर्की नागरिक, एक जॉर्जियाई नागरिक और दो सर्बियाई सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे।

    सोमाली अधिकारी के मुताबिक, पोलर मूवमेंट शिपिंग के स्वामित्व वाला यह जहाज मोगादिशु में तुर्की के एक सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए हथियार लेकर जा रहा था। इसके अलावा जहाज पर संचार और सैटेलाइट उपकरण भी थे।

    अधिकारी ने बताया कि आठ समुद्री लुटेरों ने जहाज को पुंटलैंड के डैंगोरोया जिले में जर्माल के पास तट की ओर ले जाया। माना जा रहा है कि ये वही समूह है जो अप्रैल में M/V Sward के हाईजैक में भी शामिल था।

    हालांकि, M/V LUTUF, उसके क्रू और जहाज पर मौजूद सामान की तत्काल स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी। तुर्की के अधिकारियों ने भी घटना पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की थी।

  • ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ेगा अमेरिका…. अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की दी चेतावनी!

    ईरान के खिलाफ आर्थिक युद्ध छेड़ेगा अमेरिका…. अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों की दी चेतावनी!


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच तनाव अब आर्थिक मोर्चे (Economic front) पर और गहराता दिख रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (US Treasury Secretary Scott Bessent) ने ईरान के खिलाफ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करेगा और ईरान की सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। बेसेंट ने यह भी कहा कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब फिलहाल सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है।


    अमेरिका ईरान पर क्या बड़ी कार्रवाई करने वाला है?

    बेसेंट के मुताबिक अमेरिका ऐसे कदम उठाएगा, जिससे ईरान की आर्थिक क्षमता और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों तक पहुंच सीमित हो सके। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने वाले देशों पर भी अमेरिकी कार्रवाई हो सकती है। बेसेंट ने संकेत दिया कि सोमवार को होने वाली एक मीडिया बैठक में ईरान के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यानी अमेरिका की नई रणनीति केवल प्रतिबंध लगाने तक सीमित नहीं रह सकती है।

    चीन को अमेरिका ने क्यों दी चेतावनी?
    ईरान के साथ चीन के व्यापारिक संबंधों को लेकर भी अमेरिका ने दबाव बढ़ाया है। बेसेंट ने चीन से अमेरिकी कार्यक्रम के साथ आने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों में सहयोग करने को कहा। उन्होंने कहा कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से पूरा करता है। इसलिए होर्मुज का खुला रहना चीन के अपने हित में भी है। अमेरिका ने चीन पर संभावित कार्रवाई के सवाल पर साफ जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि कुछ बातचीत निजी स्तर पर बेहतर होती है।


    ट्रंप ने ईरान पर क्या ऐलान किया था?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया था। उन्होंने इसे अभूतपूर्व आर्थिक युद्ध और अलगाव की रणनीति बताया। ट्रंप ने ईरान के तेल तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन, मुद्रा विनिमय केंद्रों, जहाज पंजीकरण और फर्जी कंपनियों को निशाना बनाने की बात कही। उन्होंने सहयोगी देशों से भी ईरान को अलग-थलग करने में अमेरिका का साथ देने की अपील की।

    होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद में क्यों अहम है?
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। यह दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल है। ट्रंप का कहना है कि जलडमरूमध्य खुला है और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी रही है। दूसरी ओर ईरान की ओर से इसे लेकर सख्त रुख सामने आया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पहले कह चुके हैं कि अमेरिका की ओर से अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी किए जाने तक तेहरान इसे फिर से खोलने पर सहमत नहीं होगा।


    ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को क्या बताया?

    ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने इन्हें ‘आर्थिक आतंकवाद’ और मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका दशकों से ईरानी लोगों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति अपना रहा है। ईरान ने कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और दबाव युद्ध और सैन्य हमले के ही दूसरे रूप हैं। साथ ही उसने साफ किया कि अमेरिकी दबाव के बावजूद वह अपनी सुरक्षा, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता रहेगा।


    क्या आर्थिक दबाव के बाद सैन्य कार्रवाई का खतरा टल गया?

    बेसेंट ने कहा है कि अधिकतम आर्थिक दबाव का मतलब संभवतः सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करना नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल अमेरिका आर्थिक और वित्तीय दबाव को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देने की बात दोहराई है। ऐसे में सैन्य विकल्प को पूरी तरह खत्म माना नहीं जा सकता। होर्मुज में तनाव और ईरान की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में स्थिति की दिशा तय कर सकती है।


    क्या अमेरिका-ईरान टकराव में चीन भी खिंच सकता है?

    फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधा आर्थिक टकराव है, लेकिन चीन का मुद्दा इसे और बड़ा बना सकता है। चीन के ईरान के साथ व्यापारिक संबंध हैं और उसकी ऊर्जा जरूरतों का संबंध खाड़ी क्षेत्र से है। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर दबाव बढ़ाने में सहयोग करे। वहीं ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार करने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर भी कार्रवाई करता है तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा कीमतों और कूटनीतिक संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।