Category: International

  • अमेरिका ने खोली पाकिस्तान की पोल, आतंकियों के पनाहगाह के भारत विरोधी झूठों का पर्दाफाश

    अमेरिका ने खोली पाकिस्तान की पोल, आतंकियों के पनाहगाह के भारत विरोधी झूठों का पर्दाफाश

    नई दिल्ली । पाकिस्तान और आतंकवाद का पुराना नाता किसी से छिपा नहीं है। दशकों तक आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले पाकिस्तान को अब अमेरिका ने भी चेतावनी दी है। ताजा अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान आज भी आतंकियों और चरमपंथियों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है। रिपोर्ट ने भारत को लेकर पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठों का भी पर्दाफाश किया है।

    यह रिपोर्ट US कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) ने जारी की है। रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग में खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

    पाकिस्तान में सक्रिय 15 बड़े आतंकवादी समूह

    रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में आज भी करीब 15 बड़े आतंकवादी समूह सक्रिय हैं। इनमें वैश्विक स्तर पर सक्रिय, भारत-केंद्रित, अफगानिस्तान-केंद्रित, घरेलू स्तर के और सांप्रदायिक समूह शामिल हैं। इनमें से 12 समूहों को अमेरिकी कानून के तहत ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ (FTOs) घोषित किया गया है और अधिकांश चरमपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं। रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि पाकिस्तान इन नेटवर्कों को खत्म करने में विफल रहा है। 2014 के ‘नेशनल एक्शन प्लान’ में सभी सशस्त्र मिलिशिया को समाप्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन पाकिस्तान अब तक इन आतंकियों को पाल रहा है।

    भारत के लिए खतरा: सक्रिय समूहों के दस्ते

    रिपोर्ट में विशेष रूप से भारत-केंद्रित समूहों की ओर ध्यान खींचा गया है। हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों के पास 1,500 से अधिक सक्रिय समर्थक मौजूद हैं। लश्कर-ए-तैयबा, जैश और हिजबुल जैसे समूह भी पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने बना रहे हैं।

    पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश

    रिपोर्ट ने पाकिस्तान की दलीलों की पोल भी खोली। पाकिस्तान बलूचिस्तान में उग्रवाद को भारत प्रायोजित बताता है, जबकि अमेरिकी रिपोर्ट ने हक्कानी नेटवर्क का सीधा संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जोड़ा है। भारत पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुका है और स्पष्ट कर चुका है कि पाकिस्तान को अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाना बंद करना चाहिए।

  • ईरान युद्ध के बीच IMFकी चेतावनी… मिडिल ईस्ट तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित

    ईरान युद्ध के बीच IMFकी चेतावनी… मिडिल ईस्ट तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित

    तेल अबीव। मिडिल ईस्ट तनाव (Middle East Tensions) के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने सोमवार को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि मध्य पूर्व में ईरान युद्ध ने सीमावर्ती देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। साथ ही कई ऐसी अर्थव्यवस्थाओं की संभावनाएं धूमिल कर दी हैं, जो हाल ही में पिछले संकटों से उबरना शुरू कर रही थीं। आईएमएफ के शीर्ष अर्थशास्त्रियों द्वारा जारी एक ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों से उत्पन्न युद्ध वैश्विक स्तर पर एक असममित झटका पैदा कर रहा है, जिससे वित्तीय स्थितियां और अधिक कठिन हो गई हैं।

    आईएमएफ ने स्पष्ट किया कि युद्ध का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है, कितना फैलता है और बुनियादी ढांचे तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को कितना नुकसान पहुंचाता है। संगठन ने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि इस झटके से निपटने के लिए कोई भी नीतिगत उपाय सावधानीपूर्वक तय करें। आईएमएफ ने कहा कि वह जहां जरूरत हो, सदस्य देशों को नीतिगत सलाह और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है तथा यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समन्वय से किया जा रहा है।

    आईएमएफ की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब जी-7 के वित्त मंत्रियों ने ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने और हाल की अस्थिरता से उत्पन्न व्यापक आर्थिक दुष्प्रभावों को सीमित करने के लिए ‘सभी आवश्यक उपाय’ करने का संकल्प लिया है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण वैश्विक तेल बाजार में इतिहास का सबसे बड़ा व्यवधान उत्पन्न हुआ है। सामान्यतः वैश्विक तेल का 25-30 प्रतिशत और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है।


    खाद्य असुरक्षा के खतरे में सबसे गरीब देश

    आईएमएफ के ब्लॉग में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए कम आय वाले देश खाद्य असुरक्षा के विशेष जोखिम में हैं। कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं अपनी अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती कर रही हैं, ऐसे में इन देशों को अधिक बाहरी समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। अर्थशास्त्रियों ने लिखा है कि युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकता है, लेकिन सभी रास्ते उच्च कीमतों और धीमी वृद्धि की ओर ले जाते हैं।

    उन्होंने बताया कि एशिया और यूरोप के बड़े ऊर्जा आयातक देशों को ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जबकि अफ्रीका और एशिया के कई देश बढ़ी हुई कीमतों पर भी अपनी जरूरत की आपूर्ति प्राप्त करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। आईएमएफ के अनुसार, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इससे जुड़ी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम ऊर्जा को महंगा बनाए रखेंगे, आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ाएंगे तथा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।

    आईएमएफ ने कहा कि वह 14 अप्रैल को वाशिंगटन में अपनी वसंतकालीन बैठकों के दौरान जारी होने वाले विश्व आर्थिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) में इस युद्ध के प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन पेश करेगा। लेखकों ने चेतावनी दी कि यदि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें बनी रहीं तो वे विश्व स्तर पर मुद्रास्फीति को बढ़ावा देंगी। ऐतिहासिक रूप से तेल की कीमतों में वृद्धि मुद्रास्फीति बढ़ने और विकास दर घटने से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध से यह आशंका भी बढ़ सकती है कि मुद्रास्फीति लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहेगी, जिससे मजदूरी-कीमतों का चक्र तेज हो सकता है और बिना तीव्र मंदी के इस झटके को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। आईएमएफ ने सदस्य देशों से सतर्क रहने और समन्वित प्रयासों के साथ इस संकट का सामना करने की अपील की है।

  • ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना मुख्य लक्ष्य…. आधे से आगे पहुंचा अभियान : नेतन्याहू

    ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना मुख्य लक्ष्य…. आधे से आगे पहुंचा अभियान : नेतन्याहू


    तेल अवीव।
    इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने ईरान (Iran) के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इस्राइल संयुक्त सैन्य अभियान (US-Israel Joint Military Operation) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन अब आधे से आगे पहुंच चुका है और इसका अगला मुख्य लक्ष्य ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना या हटाना है।

    एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि इस अभियान में अब तक अहम सफलताएं हासिल हुई हैं। उनके मुताबिक, ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है।


    ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान

    नेतन्याहू ने बताया कि अमेरिका और इस्राइल की सेनाओं ने मिलकर ईरान के मिसाइल सिस्टम, हथियार फैक्ट्रियों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई प्रमुख वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है। इससे ईरान की युद्ध क्षमता को गंभीर झटका लगा है। उन्होंने कहा हमने उनकी मिसाइल क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, फैक्ट्रियां तबाह कर दी हैं और उनके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम लोगों को खत्म किया है।


    अब यूरेनियम भंडार पर नजर

    इस्राइली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब ऑपरेशन का फोकस ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार पर है, जो परमाणु हथियार बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सामग्री को ईरान से हटाने और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देने की मांग की है।

    नेतन्याहू ने इस सैन्य कार्रवाई को सिर्फ मौजूदा खतरे से निपटने का नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित बड़े संकट को रोकने का प्रयास बताया। उनका कहना है ईरान परमाणु हथियार बनाने और उन्हें अमेरिकी शहरों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित कर रहा है। इस युद्ध का मकसद इसी खतरे को रोकना है।


    ईरान कमजोर, गठबंधन मजबूत

    नेतन्याहू ने दावा किया कि इस ऑपरेशन के चलते ईरान की स्थिति कमजोर हो रही है, जबकि अमेरिका-इस्राइल गठबंधन और मजबूत होकर उभर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के अंदर अस्थिरता बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने ऑपरेशन के खत्म होने की कोई समयसीमा नहीं बताई, लेकिन भरोसा जताया कि मिशन अपने लक्ष्य तक पहुंचने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

  • बांग्लादेश में गहराया ऊर्जा संकट, भारत से भेजी मदद से मिली राहत, कर्ज की तलाश में पड़ोसी देश

    बांग्लादेश में गहराया ऊर्जा संकट, भारत से भेजी मदद से मिली राहत, कर्ज की तलाश में पड़ोसी देश

    ढाका । बांग्लादेश इस समय गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण देश में बिजली और ईंधन की कमी और गहरी हो गई है। स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश भारत से पाइपलाइन के जरिए डीजल आयात कर रहा है और देश में बिजली व ईंधन बचाने के लिए कड़े सरकारी आदेश जारी किए गए हैं।

    भारत से डीजल की नई खेप

    भारत की असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी से ‘भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन’ के माध्यम से बांग्लादेश को 7,000 टन डीजल की नई खेप प्राप्त हो रही है। इसकी सप्लाई शनिवार शाम से शुरू हो गई है और मंगलवार तक पूरी डिलीवरी की उम्मीद है। इससे पहले 25 मार्च को 5,000 टन की खेप और कुल मिलाकर 15,000 टन डीजल पाइपलाइन के जरिए पहले ही भेजा जा चुका है।

    जमाखोरी बनी बड़ी चिंता

    बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू ने सोमवार को संसद में स्पष्ट किया कि वर्तमान संकट में ईंधन की आपूर्ति की कमी से बड़ी समस्या ‘जमाखोरी’ है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन समुद्री मार्गों के साथ पाइपलाइन के जरिए होने वाले आयात को प्राथमिकता दे रहा है ताकि आपूर्ति स्थिर रहे।

    सरकारी कर्मचारियों के लिए कड़े आदेश

    17 करोड़ की आबादी वाला बांग्लादेश अपनी तेल और गैस की 95 प्रतिशत जरूरतें आयात पर निर्भर करता है। लोक प्रशासन मंत्रालय के अधिकारी सखावत हुसैन ने बताया कि रविवार देर रात कार्यालयों में बिजली और ईंधन बचाने के लिए कई सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

    बांग्लादेश सरकार के निर्देश
    – कार्यालयों में केवल आवश्यक संख्या में लाइट, पंखे, एयर कंडीशनर (AC) और अन्य उपकरण का इस्तेमाल।
    – कर्मचारी दफ्तर से निकलते समय लाइटें अनिवार्य रूप से बंद करें।
    – एयर कंडीशनर का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पर सेट करें।

    कर्ज की तलाश

    ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश सरकार बहुपक्षीय दाताओं से लगभग 2 अरब डॉलर का ऋण पाने की कोशिश कर रही है। ईंधन की खपत नियंत्रित करने के लिए पहले ही कई कदम उठाए गए हैं। जिनमें आम लोगों के लिए ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई है। अधिकांश उर्वरक कारखानों में उत्पादन रोक दिया गया है। पेट्रोल पंपों पर पुलिस गश्त और नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया है।

    भारत के सहयोग से बांग्लादेश को पाइपलाइन के जरिए 7,000 टन डीजल की खेप मिल रही है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार पश्चिम एशिया संकट से आपूर्ति में कमी उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी बड़ी समस्या देश में ईंधन की जमाखोरी है। 17 करोड़ आबादी वाले बांग्लादेश में तेल और गैस की कुल खपत का 95 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों और अन्य देशों से आयात किया जाता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है।

  • बड़ा टेक संकट! DeepSeek का सबसे लंबा डाउनटाइम, यूजर्स परेशान

    बड़ा टेक संकट! DeepSeek का सबसे लंबा डाउनटाइम, यूजर्स परेशान

     
    नई दिल्ली आउटेज ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर के अनुसार, रविवार शाम से ही उपभोक्ता ने समस्या की रिपोर्ट करना शुरू कर दिया था। इसके बाद डीपसीक एआई चैटबॉट के पेज स्टेटस ने रात 9:35 बजे पहली बार इस तकनीकी गड़बड़ी को स्वीकार किया। शुरुआत में कंपनी ने दावा किया था कि करीब दो घंटे में समस्या को ठीक कर लिया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर से सर्विस में गड़बड़ी आ गई। आख़िरकार अगली सुबह करीब 10:33 बजे एवेन्यू प्लेटफ़ॉर्म पूरी तरह से बहाल हो गया।

    इस पूरी घटना की सबसे बड़ी बात यह रही कि इतने लंबे आउटटेज़ के बावजूद अब तक कंपनी की ओर से इसके निष्कर्षों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। इस तरह के उपभोक्ता और टेक गैजेट्स के बीच कई तरह के आर्किटेक्चर मिल रहे हैं। खास बात यह है कि जनवरी 2025 में अपना आर1 मॉडल लॉन्च करने के बाद डीपसीक एआई चैटबॉट का एपटाइम रिकॉर्ड करीब 99 प्रतिशत बताया जा रहा है, ऐसे में यह इवेंट कंपनी की वेबसाइट पर भी भरोसेमंद सवाल कर रही है।

    जनवरी 2025 में लॉन्च होने के बाद डीपसीक एआई चैटबॉट ग्लोबल लेवल पर चर्चा में आया था। इसके एडवांस्ड आर्किटेक्चरल मॉडल्स ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी थी और सिलिकॉन वैली के कई बड़े उद्यमों के स्टॉक में गिरावट का आकलन किया गया था। उस समय यह भी कहा गया था कि होटल की वैश्विक दौड़ में अमेरिका की बढ़त को चुनौती मिल सकती है।

    हालाँकि, अभी भी डीपसीक एआई चैटबॉट का मुकाबला चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे बड़े प्लेटफॉर्म से पूरी तरह से नहीं मिला है। इसी बीच अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने हाल ही में डीपासिक में कुछ चीनी कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    एंथ्रोपिक का दावा है कि उनके क्लाउड मॉडल के निर्माण के माध्यम से ‘डिस्टिलेशन’ तकनीक का अवैध उपयोग किया गया। इसके लिए हजारों की संख्या में निवेशकों का रिकॉर्ड बनाया गया और लाखों स्टॉक के जरिए डेटा इकट्ठा किया गया। कंपनी ने चेतावनी दी है कि इस तरह के विकसित मॉडल मॉडलों में सुरक्षा संबंधी खामियां हो सकती हैं और इनका इस्तेमाल खतरनाक वस्तुओं जैसे साइबर हमले, निगरानी और गलत जानकारी के जरिए किया जा सकता है। इस पूरी घटना में एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया गया है कि रैपिड से हल्दी मसाला तकनीक के बीच सुरक्षा, मरम्मत और रखरखाव का महत्व है।

  • पाकिस्तान की फिर उड़ी खिल्ली… युद्ध पर चर्चा के लिए जुटे नेताओं के सामने औंधे मुंह गिरे विदेश मंत्री डार

    पाकिस्तान की फिर उड़ी खिल्ली… युद्ध पर चर्चा के लिए जुटे नेताओं के सामने औंधे मुंह गिरे विदेश मंत्री डार


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) कुछ बड़ा करने की कोशिश करे, और पूरी दुनिया के सामने उसकी खिल्ली ना उड़े, ऐसा शायद संभव नहीं। अब बीते कुछ दिनों से ईरान (Iran) पाकिस्तान को चौधरी बनने की पड़ी है और वह पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच जारी युद्ध में मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है। इसे लेकर रविवार को इस्लामाबाद में बड़े-बड़े नेता भी जुटे थे। हालांकि इस बीच पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार का बैलेंस बिगड़ गया और सबके सामने बुरी तरह गिर पड़े।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना विदेश मंत्रालय के दफ्तर में हुई। इशाक डार तब इस्लामाबाद में मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलअती से मिल रहे थे। चलते-चलते अचानक वह लड़खड़ा गए। हालांकि वहां मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उन्हें सहारा दिया और उठाने की कोशिश की।


    सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक

    अधिकारियों ने बाद में बताया कि डार को कोई चोट नहीं आई है और बैठक बिना किसी रुकावट के तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रही। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल रहा है और लोग इस वीडियो को लेकर मजेदार रिएक्शन दे रहे हैं।


    बैठक में क्या हुई चर्चा?

    इससे पहले पाकिस्तान में रविवार को एक अहम चार-पक्षीय बैठक का आयोजन किया गया जिसमें मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा हुई है ताकि तनाव कम करने का रास्ता खोजा जा सके। एक अधिकारी ने बताया कि विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा की और सुरक्षा मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हुए क्षेत्र में व्यापक शांति के विकल्पों पर मंथन किया। यह शिखर सम्मेलन अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता में देरी के बीच हुई है। हालांकि बैठक के बाद कोई बयान जारी नहीं किया गया।

    पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के अनुसार, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्री शनिवार को इस्लामाबाद पहुंच चुके थे, जबकि सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद रविवार को पहुंचे। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि दौरे पर आए विदेश मंत्री ‘क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयासों सहित कई मुद्दों पर गहन चर्चा’ करेंगे।

  • ईरान के मिसाइल हमले से इजरायल के केमिकल प्लांट में लगी भीषण… जहरीली गैस के रिसाव का खतरा

    ईरान के मिसाइल हमले से इजरायल के केमिकल प्लांट में लगी भीषण… जहरीली गैस के रिसाव का खतरा


    येरुशलम।
    युद्ध को बातचीत के जरिए खत्म करने की कोशिशों के बीच ईरान और इजरायल (Iran and Israel War) ने एक दूसरे पर भीषण हमले जारी रखे हैं। ईरान ने दक्षिणी इजरायल (Southern Israel.) में रविवार को एक केमिकल प्लांट पर मिसाइल से हमला (Missile attack Chemical plant) किया। इस हमले के बाद प्लांट में भीषण आग लग गई है। इससे इलाके में जहरीले रिसाव का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, इजरायल ने रविवार तड़के तेहरान पर बमबारी की।


    चीनी कंपनी का हिस्सा है प्लांट

    चीनी स्वामित्व वाले सिनजेंटा ग्रुप का हिस्सा एडीएएमए ने कहा कि संयंत्र को हुए नुकसान की सीमा का अभी पता नहीं चल पाया है। कृषि रसायनों और फसल सुरक्षा सामग्री बनाने वाली कंपनी एडीएएमए ने कहा कि उसके ‘मख्तेशिम प्लांट’ पर हमला किया गया है। फिलहाल जांच कर रहे हैं कि सीधे मिसाइल गिरी है या इंटरसेप्ट की गई मिसाइल का मलबा गिरा है। हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    इजरायल की ‘अग्नि शमन एवं बचाव सेवा’ ने बताया कि ईरानी मिसाइल हमले के बाद दक्षिणी इजरायल के एक औद्योगिक क्षेत्र में आग लग गई, जहां कई रासायनिक और औद्योगिक संयंत्र स्थित हैं। संभावना जताई जा रही है कि यह आग हवा में मार गिराई गई मिसाइल के मलबे से लगी है।

    लोगों से दूर रहने का आग्रह
    विभाग ने जनता से नियोत होवाव औद्योगिक क्षेत्र से दूर रहने का आग्रह किया है क्योंकि वहां जहरीले रसायन मौजूद हैं। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 34 टीमें काम कर रही हैं। विभाग ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र से 800 मीटर की दूरी के बाहर जनता के लिए कोई खतरा नहीं है। बयान में कहा गया, आस-पास के निवासियों को घरों के अंदर रहने, खिड़कियां और वेंटिलेशन बंद रखने और सुरक्षा बलों के निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया है, जब तक कि घटना पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पा लिया जाता।


    हमले के बाद दिखा आग और काला धुआं

    दमकल सेवा द्वारा जारी वीडियो और तस्वीरों में आग का बड़ा गोला और भारी काला धुआं दिखाई दे रहा है, जबकि अग्निशमन कर्मी आग को फैलने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले, इजरायली सेना ने कहा था कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों का पता लगाया है। नियोत होवाव क्षेत्र दक्षिणी इजरायल के सबसे बड़े शहर बीयर शेवा से लगभग 13 किमी दूर स्थित है। इस क्षेत्र में कई इजरायली सैन्य ठिकाने भी मौजूद हैं। पिछले सप्ताहांत, ईरानी मिसाइलों ने अराद और डिमोना के दक्षिणी शहरों पर हमला किया था, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए थे। यह अब तक इजरायली धरती पर अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के सबसे भीषण हमलों में से एक था।


    कुवैत में सैन्य शिविर पर हमला, 10 सैनिक घायल

    उधर ईरान ने कुवैत में भी सैन्य शिविर पर हमला किया है। जिसमें 10 सैनिक घायल हुए हैं। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कुवैत के हवाई क्षेत्र में 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और 12 ड्रोन दागे गए हैं। हमले में शिविर में काफी नुकसान हुआ है।


    ईरान के इस्फहान के विश्वविद्यालय पर हमला

    इजरायल ने ईरान के बीच शहर इस्फहान में स्थित इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर रविवार को हवाई हमले किए। यह दूसरी बार है जब इस विश्वविद्यालय पर हमला हुआ। यूनिवर्सिटी ने फार्स न्यूज एजेंसी को दिए बयान में कहा कि दोपहर करीब 2 बजे(स्थानीय समय) विश्वविद्यालय को दूसरी बार निशाना बनाया गया। यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट पर हुए इस हमले से कई दूसरी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा और यूनिवर्सिटी के चार कर्मचारियों को मामूली चोटें आईं।


    ईरान जवाबी हमले की धमकी दी

    ईरान ने विश्वविद्यालय पर हमले के जवाब में इजरायल और अमेरिका की यूनिवर्सिटी पर हमले की धमकी दी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के विश्वविद्यालय की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई, तो ईरान इस इलाके में मौजूद इजरायली और अमेरिकी विश्वविद्यालयों को निशाना बनाएगा। अमेरिका के कई कॉलेजों, जिनमें जॉर्जटाउन, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी और नॉर्थवेस्टर्न के कैंपस कतर और संयुक्त अरब अमीरात में हैं।

    गार्ड ने कहा, अगर अमेरिकी सरकार चाहती है कि इस इलाके में मौजूद उसकी यूनिवर्सिटीज सुरक्षित रहें, तो उसे सोमवार(30 मार्च) को दोपहर 12 बजे तक ईरानी यूनिवर्सिटीज पर हुई बमबारी की निंदा करनी चाहिए। उसने यह भी मांग की कि अमेरिका, इजरायल को ईरानी यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स पर हमला करने से रोके। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने शनिवार को बताया था कि दर्जनों यूनिवर्सिटीज और रिसर्च सेंटर्स पर हमले हुए हैं।


    यूएई पर दागी गई 16 बैलिस्टिक मिसाइलें

    संयुक्त अरब अमीरात पर रविवार को ईरान ने 16 बैलिस्टिक मिसाइलें दांगी, जबकि 42 ड्रोन ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।हालांकि इन सभी एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार कोई भी नुकसान नहीं हुआ है।


    बंदर ए खमीर बंदरगाह पर हमला, पांच मारे गए

    ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर-ए-खमीर पर हुए हमले में पांच लोग मारे गए और दो पोत भी नष्ट हो गए। इजरायल ने ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपने अभियान के तहत लेबनान में भी ठिकानों पर हमला किया। रविवार की सुबह सेना ने बताया कि लेबनान में लड़ाई के दौरान उसका एक सैनिक मारा गया।


    ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के एल्युमीनियम संयंत्र पर हमले किए, आठ घायल

    ईरानी सेना ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में दुनिया के दो सबसे बड़े एल्युमीनियम उत्पादकों के संयंत्रों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। ईरान ने इन उद्योगों को अमेरिकी सेना से जुड़ा हुआ बताया। एमिरेट्स ग्लोबल एल्युमीनियम (ईजीए) ने कहा कि ईरान के हमले में छह लोग घायल हो गए और उसके संयंत्र को काफी नुकसान पहुंचा, जबकि बहरीन के सरकारी मीडिया ने कहा कि दूसरे हमले में एल्युमीनियम बहरीन के दो कर्मचारी घायल हो गए।

  • इस्राइल के हमले से खोंडाब हेवी वाटर प्लांट बुरी तरह से क्षतिग्रस्त, ईरान को भारी नुकसान

    इस्राइल के हमले से खोंडाब हेवी वाटर प्लांट बुरी तरह से क्षतिग्रस्त, ईरान को भारी नुकसान


    विएना।
    पश्चिम एशिया (West Asia War) में बढ़ते तनाव के बीच इस्राइल (Israel) ने ईरान (Iran) के खोंडाब (अराक) हेवी वाटर प्लांट पर हवाई हमला किया। अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (आईएईए) (International Atomic Energy Agency – IAEA) ने पुष्टि की है कि यह प्लांट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और अब काम नहीं कर रहा है। आईएईए के अनुसार, यह जानकारी सैटेलाइट तस्वीरों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर दी गई है।


    खोंडाब प्लांट क्यों है इतना अहम?

    यह प्लांट ईरान के अराक शहर के पास स्थित है और इसे अराक न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स भी कहा जाता है। यहां ‘हेवी वाटर’ बनाया जाता है, जो खास तरह के परमाणु रिएक्टर में इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे रिएक्टर से प्लूटोनियम भी बनाया जा सकता है, जिसका उपयोग परमाणु हथियारों में किया जा सकता है। यही वजह है कि यह प्लांट लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रहा है।


    IAEA की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

    आईएईए ने साफ कहा है कि प्लांट को गंभीर नुकसान हुआ है, यह अब ऑपरेशनल नहीं है और यहां कोई घोषित परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी। इसका मतलब है कि रेडिएशन या तत्काल परमाणु खतरे की संभावना नहीं बताई गई है।

    इस्राइल ने क्यों किया हमला?
    इस्राइली सेना (आईडीएफ) ने दावा किया कि यह हमला खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया। उनका कहना है कि यह प्लांट ईरान के परमाणु कार्यक्रम का अहम हिस्सा था। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद इसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाया और यहां से भविष्य में हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम बनने का खतरा था। इस्राइल सेना ने इस ऑपरेशन को ‘राइजिंग लॉयन’ नाम दिया है।

    बढ़ता तनाव और आगे का खतरा
    इस हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान और इस्राइल के बीच पहले से ही तनाव चरम पर है, और अब इस तरह की कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक हलचल तेज हो सकती है।

  • नेपाल में चार पूर्व प्रधानमंत्रियों की संपत्ति जांच के घेरे में, पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खडका गिरफ्तार

    नेपाल में चार पूर्व प्रधानमंत्रियों की संपत्ति जांच के घेरे में, पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खडका गिरफ्तार

    काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह उर्फ बालेन के कार्यभार संभालने के तीसरे दिन ही देश के चार पूर्व प्रधानमंत्रियों की संपत्ति की सीआईबी जांच शुरू हो गई है। जांच के दायरे में आए इन पूर्व पीएम में केपी शर्मा ओली, पुष्पकमल दहल प्रचंड, शेरबहादुर देउबा और माधव कुमार नेपाल शामिल हैं।

    दीपक खडका गिरफ्तार

    इस बीच, नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व ऊर्जा मंत्री दीपक खडका को सीआईबी ने रविवार सुबह गिरफ्तार कर लिया। नेपाली गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, जांच में चारों पूर्व प्रधानमंत्रियों के साथ-साथ पूर्व मंत्री आरजू राणा देउबा और दीपक खडका तथा उनके परिवार की चल-अचल संपत्ति और आय के स्रोतों की समीक्षा की जा रही है। वहीं, शनिवार को गिरफ्तार ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

    जांच का कारण

    पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान, देउबा, ओली, खडका और प्रचंड की बेटी गंगा के आवासों में जले नोटों की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। सीआईबी प्रमुख एआईजी मनोज केसी के अनुसार, संपत्ति शुद्धीकरण जांच विभाग ने खडका को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है।

    भ्रष्टाचार निवारण आयोग की भूमिका

    नेपाल की नई सरकार ने 100 सूत्री कार्य योजना के तहत पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों की संपत्तियों की जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण आयोग गठित किया है। आयोग में कानून, वित्त, राजस्व और अनुसंधान के विशेषज्ञ शामिल हैं और यह प्रधानमंत्री व मंत्रिमंडल के अधीन काम करेगा। जांच का पहला चरण 2006 की नेपाली क्रांति के बाद पदस्थ लोगों पर केंद्रित है, जबकि दूसरा चरण 1991 से 2006 के बीच अहम पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की समीक्षा करेगा।

  • अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव बढ़ा: पाक गोलाबारी में 1 की मौत, 16 घायल

    अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव बढ़ा: पाक गोलाबारी में 1 की मौत, 16 घायल


    काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव और बढ़ गया है। अफगान सरकार ने रविवार को आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने पूर्वी अफगानिस्तान के एक शहर के बाहरी इलाकों में गोलाबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 16 लोग घायल हुए। घायलों में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

    अफगान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के मुताबिक, यह हमला भारी हथियारों और मोर्टार से किया गया और कुनार प्रांत के असदाबाद शहर के आसपास हुआ। इस गोलाबारी में कई घरों को नुकसान पहुंचा। पाकिस्तान की ओर से इस आरोप पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    क्यों बढ़ रहा है विवाद?

    दूसरे देशों के बीच लंबे समय से तनाव है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान आतंकियों को पनाह देता है, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को, जो अफगान तालिबान से जुड़ा माना जाता है। अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।

    हाल के महीनों में स्थिति

    कई महीनों से दोनों देशों के बीच गहमागहमी बढ़ती रही है। फरवरी से सीमा पर लड़ाई तेज हो गई, जिसे दशकों में सबसे गंभीर माना जा रहा है। इस दौरान कई सीमा पार हमले और हवाई हमले हुए। अफगान सरकार ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने काबुल में एयरस्ट्राइक की, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने इसे खारिज किया। पिछले महीने पाकिस्तान ने स्थिति को खुला युद्ध जैसा बताया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है क्योंकि इस क्षेत्र में अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन सक्रिय हैं।

    संघर्ष रोकने की कोशिशें

    हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और कतर की मध्यस्थता से ईद-उल-फितर से पहले एक अस्थायी युद्धविराम हुआ था, लेकिन वह जल्दी समाप्त हो गया। नवंबर में इस्तांबुल में हुई शांति वार्ता से कोई स्थायी समाधान नहीं निकला और अब फिर से संघर्ष जारी है।