Category: International

  • दुबई में तेज आंधी तूफान के दौरान बुर्ज खलीफा पर बिजली गिरने का वीडियो वायरल हुआ राहत की बात यह रही कि कोई नुकसान नहीं हुआ

    दुबई में तेज आंधी तूफान के दौरान बुर्ज खलीफा पर बिजली गिरने का वीडियो वायरल हुआ राहत की बात यह रही कि कोई नुकसान नहीं हुआ


    नई दिल्ली ।खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और अनिश्चितता के माहौल के बीच दुबई से एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया है जिसने लोगों को हैरान कर दिया है दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा पर आसमान से तेज बिजली गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दुनियाभर के यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है

    बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई इसी दौरान आसमान में जोरदार गर्जना के साथ बिजली कड़कने लगी और एक पल ऐसा आया जब बिजली सीधे बुर्ज खलीफा की चोटी पर गिरती हुई दिखाई दी यह पूरा नजारा दूर से रिकॉर्ड किया गया जिसमें अंधेरे आसमान के बीच चमकती बिजली और उसके ठीक नीचे खड़ा विशाल टावर बेहद भयावह लेकिन रोमांचक दृश्य पेश कर रहा था

    इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह तेजी से फैल गया कई यूजर्स ने इसे शेयर करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी कुछ लोगों ने इसे कुदरत की ताकत बताया तो कुछ ने इसे डरावना अनुभव कहा हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह का नुकसान या जनहानि नहीं हुई

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और अहम पहलू यह है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव और अमेरिका के साथ खींचतान के चलते खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है इससे पहले भी सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें दुबई के आसपास धमाकों और धुएं के गुबार देखे गए थे जिनको लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं

    हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बुर्ज खलीफा पर बिजली गिरना कोई असामान्य घटना नहीं है क्योंकि इतनी ऊंची इमारतें अक्सर बिजली को अपनी ओर आकर्षित करती हैं खास बात यह है कि इस इमारत को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है टावर के शीर्ष पर विशेष लाइटनिंग रॉड लगाए गए हैं जो बिजली को सीधे अपनी ओर खींच लेते हैं और उसे सुरक्षित तरीके से जमीन में प्रवाहित कर देते हैं इससे इमारत और आसपास के इलाके को किसी भी संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है

    दुबई और आसपास के अन्य इलाकों जैसे अबू धाबी और शारजाह में भी इस दौरान मौसम अचानक बदला और तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई जिससे जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ कुल मिलाकर यह घटना जहां एक ओर प्राकृतिक शक्तियों की ताकत को दर्शाती है वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंजीनियरिंग और सुरक्षा उपायों की सफलता का भी उदाहरण पेश करती है जिसने इतनी बड़ी घटना को बिना किसी नुकसान के टाल दिया

  • ईरानी हैकर्स ने FBI डायरेक्टर काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट हैक

    ईरानी हैकर्स ने FBI डायरेक्टर काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट हैक

    वॉशिंगटन। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के निदेशक काश पटेल का निजी ईमेल अकाउंट कथित तौर पर हैक कर लिया गया है। ईरान से जुड़े एक हैकर समूह ने इस साइबर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसने पटेल के अकाउंट से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेज ऑनलाइन सार्वजनिक कर दिए हैं।

    खुद को फिलिस्तीन समर्थक बताने वाले हैकर समूह हंडाला हैक टीम ने अपनी वेबसाइट पर पोस्ट कर कहा कि काश पटेल अब उन व्यक्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं जिनके अकाउंट सफलतापूर्वक हैक किए गए हैं।

    अमेरिकी न्याय विभाग के एक अधिकारी ने भी प्रारंभिक तौर पर इस घटना की पुष्टि की है। अधिकारी के अनुसार, ऑनलाइन साझा की गई सामग्री पहली नजर में वास्तविक प्रतीत होती है।

    निजी तस्वीरें भी हुईं सार्वजनिक

    हैकर्स ने पटेल की कई निजी तस्वीरें जारी करने का दावा किया है। इन तस्वीरों में वह सिगार के साथ, एक पुरानी कन्वर्टिबल कार में बैठे हुए और रम की बोतल के साथ आईने के सामने फोटो लेते हुए दिखाई दे रहे हैं।

    FBI ने दी प्रतिक्रिया

    एफबीआई के प्रवक्ता Ben Williamson ने बयान जारी कर कहा कि एजेंसी ने संभावित जोखिम कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साझा किया गया डाटा पुराना है और इसमें कोई संवेदनशील सरकारी जानकारी शामिल नहीं है।

    कौन है हंडाला हैक टीम?

    साइबर विशेषज्ञों के अनुसार हंडाला हैक टीम का संबंध Iran की सरकारी साइबर खुफिया इकाइयों से हो सकता है। यह समूह फर्जी पहचान के जरिए साइबर हमलों को अंजाम देने के लिए जाना जाता है।

    इससे पहले 11 मार्च को इस समूह ने मिशिगन स्थित मेडिकल उपकरण कंपनी Stryker Corporation पर साइबर हमला करने का दावा किया था और कहा था कि उसने कंपनी का बड़ा डाटा नष्ट कर दिया है।

  • खाड़ी देश कोई युद्ध रोकने के पक्ष में तो कोई ईरान पर हमले तेज करने की मांग में

    खाड़ी देश कोई युद्ध रोकने के पक्ष में तो कोई ईरान पर हमले तेज करने की मांग में

    तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध का 28वां दिन और तनावपूर्ण हो गया है। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई अहम ठिकानों पर फिर हमले किए हैं, जिससे संकट और गहरा गया है।
    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमलों को आगे बढ़ाते हुए तेहरान को चेतावनी दी है कि वह को खोले, अन्यथा उसके ऊर्जा संयंत्र निशाने पर आ सकते हैं।
    खाड़ी देश दो फाड़
    ईरान को लेकर खाड़ी के मुस्लिम देश अलग-अलग रुख अपनाते दिख रहे हैं। कतर, ओमान और कुवैत आर्थिक नुकसान और जवाबी हमलों के डर से युद्ध जल्द खत्म करने की वकालत कर रहे हैं।
    सूत्रों के मुताबिक, खाड़ी देश कतर, ओमान और कुवैत और Bahrain का मानना है कि जब तक ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म नहीं होती, तब तक उस पर हमले जारी रहने चाहिए। इन देशों का कहना है कि अधूरा समझौता भविष्य में फिर संकट पैदा कर सकता है।

    अमेरिका से सख्त समझौते की मांग
    खाड़ी देशों ने निजी बातचीत में अमेरिका से कहा है कि किसी भी समझौते में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं पर स्थायी रोक, ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका जोर इस बात पर है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भविष्य में हथियार की तरह इस्तेमाल न किया जा सके।

    बार-बार हमलों से बढ़ी चिंता
    खाड़ी देशों का कहना है कि ईरान ने युद्ध के दौरान उनके ऊर्जा और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इसलिए वे ऐसे व्यापक समझौते की मांग कर रहे हैं जिसमें प्रॉक्सी युद्ध, तेल मार्गों की सुरक्षा और समुद्री यातायात की गारंटी शामिल हो।

    एमिरेट्स पॉलिसी सेंटर की प्रमुख Ebtesam Al-Ketbi ने कहा कि असली चुनौती सिर्फ युद्ध रोकना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे संकट से बचाव सुनिश्चित करना है। वहीं अमेरिका में यूएई के राजदूत Yousef Al Otaiba ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की परीक्षा बताया।

    सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया आकलन में ईरान के मिसाइल भंडार का करीब एक-तिहाई हिस्सा नष्ट होने का अनुमान है, लेकिन उसकी क्षमताएं अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऐसे में खाड़ी देश 2015 के परमाणु समझौते से अधिक व्यापक नए समझौते की मांग कर रहे हैं, ताकि पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

  • होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

    होर्मुज पर ट्रंप की नीति से भड़के अमेरिकी सांसद, युद्ध खर्च पर भी उठाए सवाल

    वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मर्फी ने ट्रंप की रणनीति पर तीखा हमला करते हुए इसे “पागलपन” करार दिया है।

    मर्फी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ था, लेकिन अब अमेरिका उस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रहा है जिसे उसने खुद पैदा किया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ संघर्ष पर अमेरिका प्रतिदिन करीब दो अरब डॉलर खर्च कर रहा है, जो बेहद बड़ी राशि है।

    सांसद ने यह भी कहा कि युद्ध में अमेरिकी नागरिकों की जान जा रही है और देश में कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष जारी रहा तो ऐसी संख्या और बढ़ सकती है। साथ ही वैश्विक स्तर पर ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में तेज उछाल का भी जिक्र किया।

    होर्मुज पर बढ़ा तनाव
    अमेरिका और Israel के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान कुछ मित्र देशों के जहाजों को ही गुजरने दे रहा है और अन्य टैंकरों पर हमले या शुल्क लगाने की चेतावनी दे रहा है।

    इस बीच ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ाते हुए कहा कि फिलहाल ईरानी ऊर्जा संयंत्रों पर बमबारी टाली जाएगी। हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम वार्ता अभी भी गतिरोध में बताई जा रही है।
    ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps ने दावा किया कि उसने होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को चेतावनी देकर वापस भेज दिया। गार्ड्स के अनुसार यह मार्ग “दुश्मन देशों” से जुड़े जहाजों के लिए बंद है।

    क्षेत्र में बढ़ते सैन्य जमावड़े के बीच अमेरिका ने अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं, जबकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में Hezbollah के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए और सैनिक भेजे हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा: पीएम मोदी के खिलाफ नारे, हाथापाई की नौबत

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा: पीएम मोदी के खिलाफ नारे, हाथापाई की नौबत

    नई दिल्ली शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण भारी हंगामे के साथ शुरू हुआ। सदन का माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब कुछ विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे शुरू कर दी। देखते ही देखते राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप रुख नोकझोंक में बदल गए और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

    नारे से भड़का विवाद

    सत्र की शुरुआत होते ही कांग्रेस के कुछ दलों ने पीएम मोदी के खिलाफ ‘हाय-हाय’ और ‘मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। इस पर भाजपा दलों ने कड़ा विरोध प्रदर्शन किया और अपनी सीटों से उठकर नाराजगी जाहिर की। इसी दौरान कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज लोन और भाजपा विधायक युधवीर सेठी के बीच नारे बहस हो गई। विवाद उस समय और बढ़ गया जब जवाबी प्रतिक्रिया में भाजपा विधायक ने राहुल गांधी पर टिप्पणी कर दी, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

    हाथापाई की स्थिति, मार्शलों ने कार्यभार मोर्चा

    नारेबाजी के बीच माहौल इतना गरमा गया कि विधायक अपनी सीटों से उठकर एक-दूसरे के करीब पहुंच गए। धक्का-मुक्की और हाथापाई जैसी स्थिति बन गई। कुछ सदस्यों ने पार्षदों को हवा में उछाल दिया। स्थिति बिगड़ती देख सदन के मार्शलों और सुरक्षा कर्मियों को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों के पहाड़ों को अलग कर परिस्थितियों को काबू में किया। इस दौरान सदन की कार्रवाई काफी देर तक बाधित रही।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भी गूंजे नारे

    इस हंगामे से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के पहाड़ों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर भी सदन में विरोध दर्ज कराया। उन्होंने अली खामेनेई के खिलाफ कथित कार्रवाई और ईरान-इजरायल तनाव को लेकर उठाए। NC, कांग्रेस, CPI(M) और PDP के पहाड़ों ने मिलकर इजरायल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेलंगाना और ईरान के समर्थन में आवाज उठाई।

    स्पीकर की अपील भी जमीनी

    विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कई बार सदन में शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। नतीजतन, प्रश्नकाल पूरी तरह बाधित रहा और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो।

    अलग-अलग मुद्दों पर टकराव

    जहां एक ओर विपक्ष अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर विरोध जता रहा था, वहीं भाजपा विधायक जम्मू में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। दोनों पक्षों के अलग-अलग मुद्दों ने सदन के माहौल को और ज़्यादा गरमा दिया।

  • बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत… संकट में भारत ने की मदद… 5000 टन अतिरिक्त Diesel भेजा

    बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत… संकट में भारत ने की मदद… 5000 टन अतिरिक्त Diesel भेजा


    ढाका।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में चल रहे संघर्ष के कारण बांग्लादेश (Bangladesh.) में पेट्रोल-डीजल का भारी संकट मंडरा रहा है। इस बीच भारत ने पड़ोसी देश की मदद करते हुए 5,000 टन अतिरिक्त डीजल (5,000 Tonnes Additional Diesel) की सप्लाई की है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार रात इस बात की पुष्टि की। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPC) के महाप्रबंधक (वाणिज्यिक) मो. मुर्शेद हुसैन आजाद ने समाचार एजेंसी ANI को बताया कि भारत से 5,000 टन अतिरिक्त डीजल बांग्लादेश पहुंच गया है।

    इस नई खेप के साथ, बांग्लादेश को हाल के दिनों में भारत से कुल 15,000 टन डीजल मिल चुका है। 28 मार्च को 6,000 टन अतिरिक्त डीजल भेजने के लिए पंपिंग की प्रक्रिया की जाएगी। भारत ने आगामी अप्रैल माह में 40,000 टन डीजल की आपूर्ति करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे बांग्लादेश सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है।

    कैसे पहुंच रहा है डीजल?
    इस डीजल की सप्लाई असम स्थित ‘नुमालीगढ़ रिफाइनरी’ से की जा रही है। यह ईंधन ‘भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन’ के जरिए बांग्लादेश के पारबतीपुर डिपो तक भेजा जाता है। साल 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए बड़े जन आंदोलन के बाद इस मैत्री पाइपलाइन का संचालन रोक दिया गया था।

    हाल ही में फरवरी में हुए आम चुनावों के बाद, जब तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार ने सत्ता संभाली, तो इस पाइपलाइन को फिर से बहाल कर दिया गया। फिर से शुरू होने के बाद से अब तक इसी पाइपलाइन के माध्यम से 15,000 टन डीजल भेजा जा चुका है।

    बांग्लादेश में डीजल की मांग और आयात की स्थिति
    ऊर्जा विशेषज्ञ एजाज अहमद ने बांग्लादेश की ऊर्जा जरूरतों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की वार्षिक डीजल मांग 40 लाख टन है, जो पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। विदेशों से आयात होने वाले कच्चे तेल में से केवल 5 लाख टन को ही बांग्लादेश की ‘ईस्टर्न रिफाइनरी’ में रिफाइन किया जा सकता है। बाकी की जरूरत पूरी करने के लिए सीधा रिफाइंड डीजल ही आयात करना पड़ता है। अपनी डीजल आपूर्ति के लिए बांग्लादेश मुख्य रूप से भारत, सिंगापुर और मध्य पूर्व पर निर्भर है।

  • ट्रंप ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को कहा ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’, नोबेल न मिलने पर उठाए सवाल

    ट्रंप ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को कहा ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’, नोबेल न मिलने पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी के फेना फोरम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ईरान युद्ध और वैश्विक राजनीति को लेकर कई तीखे बयान दिए। खुद को एक बार फिर पीसमेकर बताते हुए उन्होंने कहा कि यदि उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, तो फिर यह किसी और को भी नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने क्यूबा को अगला निशाना भी बताया।

    ट्रंप ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह कमजोर कर दिया गया है और वहां की सरकार अब समझौते के लिए मजबूर है। अपने खास अंदाज में उन्होंने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ तक कह दिया।

    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट अब ईरानी आतंक और न्यूक्लियर ब्लैकमेल से मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा, “मेरे नेतृत्व में अमेरिका इस कट्टरपंथी शासन से पैदा खतरे को खत्म कर रहा है। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिए ईरान की ताकत को तोड़ा जा रहा है। हमारे पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है, जिसे मैंने अपने पहले कार्यकाल में मजबूत किया। हमारे पास ऐसे हथियार हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। 47 साल तक ईरान क्षेत्र का दबदबा बनाए हुए था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।”

    कासिम सुलेमानी का भी किया जिक्र

    ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराने की घटना का भी उल्लेख किया। जनवरी 2020 में बगदाद एयरपोर्ट पर अमेरिकी ड्रोन हमले में सुलेमानी की मौत हुई थी। उस समय अमेरिका ने इसे अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया था।

    उन्होंने कहा, “यह मेरे कार्यकाल का अहम पल था। वह इतना प्रभावशाली था कि मुझे लगता है ईरान का नेतृत्व भी अंदर से राहत महसूस कर रहा था, हालांकि वे इसे स्वीकार नहीं करते। अब कोई उनसे सवाल करने वाला भी नहीं है। ईरान पर इतना दबाव है कि उसे बातचीत के लिए आना ही होगा। वे समझौते के लिए आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ मेरा मतलब होर्मुज खोलना ही होगा। फेक न्यूज कहेगी कि यह गलती थी, लेकिन मैं बहुत कम गलती करता हूं।”

    ब्रिटेन और नाटो पर भी निशाना

    नाटो और ब्रिटेन को लेकर भी ट्रंप ने आलोचनात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यूके के प्रधानमंत्री से उन्होंने दो एयरक्राफ्ट कैरियर की मांग की थी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ट्रंप ने कहा, “वे छोटे हैं और ज्यादा तेज भी नहीं हैं, लेकिन हम उनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म के रूप में कर सकते हैं। मैंने पूछा कि क्या आप हमारी मदद करेंगे? जवाब मिला कि युद्ध खत्म होने के बाद मदद करेंगे। यही नाटो की हकीकत है। हम उनकी मदद करते हैं, लेकिन वे हमारे साथ खड़े नहीं होते।” उन्होंने यह भी कहा कि नाटो की तुलना में बहरीन और कुवैत ने ज्यादा सहयोग दिया है और मिडिल ईस्ट के सहयोगी देशों ने निराश नहीं किया।

    नोबेल पुरस्कार पर फिर दोहराया दावा

    ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी पहचान एक बड़े शांतिदूत के रूप में बने। उन्होंने कहा, “अगर मुझे शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, तो फिर किसी को नहीं मिलना चाहिए। मुझे यह नहीं मिला और मुझे इस पर हैरानी भी नहीं है।”

    मिसाइल हमलों पर भी किया दावा

    मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि हाल ही में उन पर 101 मिसाइलों से हमला किया गया था, लेकिन सभी को मार गिराया गया। उन्होंने कहा, “अब हम उनके ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। उनके पास एयर डिफेंस नहीं बचा है और हम आसानी से अपने टारगेट पर हमला कर रहे हैं। हमारे पास अभी 3,554 लक्ष्य बाकी हैं, जिन्हें जल्द खत्म किया जाएगा। आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।”

  • नेपाल में नई सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व पीएम ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार

    नेपाल में नई सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व पीएम ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।
    नेपाल में नई सरकार के गठन के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में बनी सरकार ने शपथ लेने के महज 24 घंटे के भीतर ही सख्त कदम उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार कर लिया।

    यह कार्रवाई जेन-जी प्रदर्शन के दौरान छात्रों की मौत के मामले में की गई है, जिसमें इन दोनों नेताओं की भूमिका को जिम्मेदार माना गया था। जानकारी के अनुसार, बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में ही जांच आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिया गया था, जिसके आधार पर यह गिरफ्तारी की गई।

    रिपोर्ट में उल्लेख है कि प्रदर्शन के दौरान निहत्थे छात्रों पर गोली चलाई गई थी, जिससे कई छात्रों की जान गई। इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए सरकार ने सीधे सख्त कार्रवाई का रास्ता अपनाया।

    नेपाल के पूर्व गृह मंत्री और पूर्व पीएम गिरफ्तार

    सूत्रों के मुताबिक, सुबह सबसे पहले पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को हिरासत में लिया गया और उसके कुछ समय बाद पूर्व प्रधानमंत्री ओली को भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई को नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    सेना और पुलिस पर भी उठे सवाल

    जांच आयोग की रिपोर्ट में नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और सेना के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, फिलहाल सुरक्षा बलों के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार ने उनकी भूमिका की अलग से जांच के लिए एक नई समिति गठित करने का फैसला लिया है।

  • नेपाल के नए PM बालेंद्र शाह की कैबिनेट में 33% महिलाएं, पांच महिला मंत्रियों को अहम जिम्मेदारी

    नेपाल के नए PM बालेंद्र शाह की कैबिनेट में 33% महिलाएं, पांच महिला मंत्रियों को अहम जिम्मेदारी

    काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू में प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने शुक्रवार को 15 सदस्यीय नई कैबिनेट का गठन किया। इस कैबिनेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पांच महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है, जो कुल कैबिनेट का लगभग 33 प्रतिशत हैं। इसे नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    महिला मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी
    नई कैबिनेट के सभी मंत्रियों को राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। महिला मंत्रियों में निशा मेहता को स्वास्थ्य मंत्रालय, प्रतिभा रावल को संघीय मामलों, सामान्य प्रशासन और सहकारिता मंत्रालय, सोबिता गौतम को कानून और न्याय मंत्रालय और सीता बडी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया।

    नेपाल के संविधान का प्रावधान
    नेपाल के संविधान में पहले से यह प्रावधान है कि हर सरकारी संस्था, संसद और कैबिनेट में कम से कम 33 प्रतिशत महिलाओं को जगह मिलनी चाहिए। लेकिन अब तक इस नियम को पूरी तरह लागू नहीं किया गया था। पहले की सरकारों में आमतौर पर केवल 1 या 2 महिलाएं ही मंत्री बनती थीं।

    बालेंद्र शाह की कैबिनेट ने पेश की मिसाल
    विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार पीएम बालेंद्र शाह की कैबिनेट ने संविधान में तय नियम को सही तरीके से लागू कर एक मिसाल पेश की है। वरिष्ठ वकील और संवैधानिक विशेषज्ञ दिनेश त्रिपाठी ने इसे सराहनीय कदम बताया। उनका कहना है कि इससे सरकार अधिक समावेशी बनी है और महिलाओं को बराबरी का अवसर मिला है।

    नेपाल के 47वें पीएम बने बालेंद्र शाह
    राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेंद्र शाह को नेपाल का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें पीएम पद की शपथ दिलाई। बालेंद्र शाह अब नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री बन गए हैं।

  • ईरान ने बढ़ाई तैयारी, 10 लाख से ज्यादा लड़ाके जुटाए अमेरिका से संभावित संघर्ष के लिए

    ईरान ने बढ़ाई तैयारी, 10 लाख से ज्यादा लड़ाके जुटाए अमेरिका से संभावित संघर्ष के लिए


    नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच जहां एक तरफ अमेरिका ईरान में अपनी सेना उतारने की तैयारी में है, वहीं अब ईरान भी अमेरिकी का इस कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अपनी तैयारियों को आखिरी रूप देता दिख रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने अमेरिका को करारा जवाब देने के लिए अपने 10 लाख फाइटर्स को तैयार करके रखा है. इस समय अमेरिकी नौसेना के दो मरीन एसॉल्ट जहाज USS ट्रिपोली और USS बॉक्सर पूरी गति से ईरान की ओर बढ़ रहे हैं. अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के हजारों सैनिक इस समय ईरान की ओर जा रहे हैं. अमेरिका के पहले से ही खाड़ी क्षेत्र में लगभग 50,000 सैनिक तैनात हैं. सवाल है कि अगर ट्रंप ने सेना उतारने का आदेश दे दिया तो अमेरिकी सेना कैसे इस ऑपरेशन को अंजाम दे सकती है.

    खबरों के मुताबिक, पूरे ईरान में भर्ती केंद्रों पर युवा वॉलंटियर बड़ी संख्या में उमड़ रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि भर्ती केंद्रों पर युवाओं की ये भीड़ अमेरिका के साथ संभावित ज़मीनी युद्ध में शामिल होने को लेकर है. कहा जा रहा है कि ईरान 10 लाख से ज़्यादा ज़मीनी लड़ाकों को जुटा रहा है. तेहरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से बताया कि इन बलों को संगठित कर लिया गया है और वे युद्ध के लिए तैयार हैं. यह स्थिति बासिज, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) और सेना द्वारा संचालित केंद्रों पर नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ने के बाद सामने आई है.

    एजेंसी का कहना है कि ईरानी ज़मीनी लड़ाकों में ईरानी धरती पर अमेरिकियों के लिए “ऐतिहासिक नरक” बनाने का ज़बरदस्त उत्साह उमड़ पड़ा है. ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब अमेरिकी सैन्य गतिविधियां जारी हैं; संभावना है कि 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के चुनिंदा सैनिक कुछ ही दिनों में मध्य-पूर्व पहुंच जाएंगे, जहां वे पहले से मौजूद हज़ारों मरीन सैनिकों के साथ शामिल हो जाएंगे.

    डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे के बावजूद कि बातचीत चल रही है, तेहरान ने वाशिंगटन के किसी भी कूटनीतिक प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से ठुकरा दिया है और चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी सैनिक ईरानी धरती पर उतरे, तो इसका गंभीर परिणाम होंगे. खास बात ये है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले संकेत दिया था कि ईरान ने सद्भावना के तौर पर एक “रहस्यमयी तोहफ़ा” भेजा था, हालांकि उस समय उन्होंने इसके बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी थी. उन्होंने इसे एक बहुत ही महत्वपूर्ण और भारी कीमत वाला तोहफ़ा बताया था.ट्रंप ने कहा था कि आपको यह दिखाने के लिए कि हम असली हैं, ठोस हैं और हम सचमुच मौजूद हैं, हम आपको तेल से भरी आठ नावें देंगे, आठ नावें, तेल से भरी आठ बड़ी नावें. मुझे लगता है कि वे सही थे, और वे सचमुच असली थे; और मुझे लगता है कि उन पर पाकिस्तान का झंडा लगा हुआ था.आखिर में, वे 10 नावें निकलीं.