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  • गंभीर ऊर्जा संकट: होर्मुज से 8-10 मिलियन बैरल तेल सप्लाई ठप, कीमतों में आएगी तेजी

    गंभीर ऊर्जा संकट: होर्मुज से 8-10 मिलियन बैरल तेल सप्लाई ठप, कीमतों में आएगी तेजी

    नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार गंभीर संकट में है। एस एंड पी ग्लोबल के CERAWeek सम्मेलन में दुनिया की बड़ी तेल और गैस कंपनियों के सीईओ ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से रोजाना 8–10 मिलियन (80–100 करोड़) बैरल तेल और वैश्विक एलएनजी सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा बाजार से गायब हो गया है। इसके चलते जेट फ्यूल, डीज़ल और पेट्रोल की आपूर्ति में अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हुआ है और यह संकट एशिया से लेकर यूरोप तक फैल चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में दीर्घकालिक उछाल अब लगभग तय है।

    कंपनियों और विशेषज्ञों की चेतावनी

    कॉनोकोफिलिप्स के सीईओ रयान लांस ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल और गैस को बाजार से हटाने के गंभीर परिणाम अपरिहार्य हैं। कुवैत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के सीईओ शेख नवाफ अल-सबाह ने इसे खाड़ी तेल उत्पादकों के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी करार देते हुए कहा कि ईरान ने होर्मुज को बंद कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बना दिया है। स्वतंत्र विश्लेषक पॉल सैंकी ने स्थिति को 1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो के बाद सबसे गंभीर बताया।

    एलएनजी आपूर्ति दबाव में

    चेनीयर के सीईओ जैक फुस्को ने बताया कि कंपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रही है, लेकिन अमेरिका से एशिया तक एलएनजी पहुंचाने में 28 दिन लगते हैं। ऐसे में कतर पर निर्भर एशियाई देशों को तुरंत राहत मिलना मुश्किल है। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ वली नसर के अनुसार ईरान युद्धविराम नहीं बल्कि व्यापक समझौता चाहता है, जिसमें होर्मुज पर नियंत्रण, आर्थिक मुआवजा और सुरक्षा गारंटी शामिल हैं।

    पूर्व अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने कहा कि यह संघर्ष फिलहाल गतिरोध में है, लेकिन आगे बढ़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसेना के लिए होर्मुज से ओमान की खाड़ी तक समुद्री मार्गों की सुरक्षा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

    तेल कीमतें तीन साल के उच्चतम स्तर पर

    सीएनबीसी के अनुसार, युद्ध और तनाव बढ़ने के बीच तेल की कीमतें लगातार उछल रही हैं। 28 फरवरी को अमेरिकी कच्चा तेल 49% बढ़कर 99.64 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 55% बढ़कर 112.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है।

    सरकारें सुरक्षित कर रही हैं अपना भंडार

    टोटलएनर्जी के सीईओ पैट्रिक पुइयाने ने कहा कि जेट फ्यूल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल और डीज़ल 160 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है। रूस और चीन ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है, जबकि थाईलैंड में पेट्रोल राशनिंग शुरू हो गई है। अप्रैल तक यूरोप में भी कमी का असर दिखाई दे सकता है।

    खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर गंभीर असर

    पॉल सैंकी ने चेतावनी दी है कि यह संकट खाड़ी देशों के आर्थिक मॉडल को चुनौती दे सकता है। इराक, कतर, यूएई और संभावित रूप से सऊदी अरब की जीडीपी में 30% तक गिरावट आ सकती है। जिम मैटिस ने कहा कि अमेरिका ने खाड़ी सहयोगियों से बिना परामर्श युद्ध शुरू किया और अब इससे आसानी से बाहर नहीं निकल सकता। उन्होंने जोर दिया कि इस युद्ध के अंत का फैसला ईरान के हाथ में भी है।

  • ट्रंप ने ईरानी तेल और खार्ग द्वीप पर कब्जे की दी धमकी, यूरेनियम ऑपरेशन के दिए संकेत

    ट्रंप ने ईरानी तेल और खार्ग द्वीप पर कब्जे की दी धमकी, यूरेनियम ऑपरेशन के दिए संकेत

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर फिर से गंभीर बयान दिया है। खार्ग द्वीप को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका वहां कब्जा कर सकता है और ईरान का तेल हासिल करना उनकी प्राथमिकता में शामिल है। फाइनेंशियल टाइम्स के साथ इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “सच कहूं तो, मेरी सबसे पसंदीदा चीज़ ईरान का तेल लेना है।”

    कूटनीति और बातचीत

    ट्रंप के बयान ऐसे समय में आए हैं जब इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि ईरान के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बातचीत दोनों चल रही हैं, जिसमें पाकिस्तानी दूतों के माध्यम से संवाद भी शामिल है। ट्रंप ने कहा कि ये वार्ताएं अपेक्षाकृत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

    यूरेनियम ऑपरेशन की योजना

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप ईरान से लगभग 1,000 पाउंड यूरेनियम निकालने के लिए एक सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं। यह एक जटिल और जोखिम भरा मिशन होगा, जिसमें अमेरिकी सेना को देश के अंदर कई दिन या उससे अधिक समय तक रहना पड़ सकता है।
    अधिकारियों ने यह भी बताया कि ट्रंप ने अभी तक इस अभियान के आदेश पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन आम तौर पर वे इसे सकारात्मक रूप से देख रहे हैं ताकि ईरान को परमाणु हथियार निर्माण से रोका जा सके।

    होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर

    ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पाकिस्तान के झंडे वाले तेल टैंकरों की संख्या बढ़ाकर 20 कर दी है और इन्हें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इस व्यवस्था को ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबफ़ ने मंजूरी दी है। ट्रंप ने कहा, “कल सुबह से हमें होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते तेल से भरे 20 बड़े जहाज़ मिलेंगे।”

    खार्ग द्वीप पर सैन्य तैयारी

    ट्रंप ने कहा कि ईरान की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है और अमेरिका इसे आसानी से अपने कब्ज़े में ले सकता है। पेंटागन ने पहले ही 10,000 प्रशिक्षित सैनिकों की तैनाती का आदेश दे दिया है। शुक्रवार को लगभग 3,500 सैनिक इस क्षेत्र में पहुंचे और 2,200 अन्य मरीन रास्ते में हैं। 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के हजारों सैनिक भी तैनात किए जा रहे हैं।

    सैन्य विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि खार्ग द्वीप पर कोई भी हमला बेहद जोखिम भरा होगा। इससे अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का खतरा बढ़ सकता है और संघर्ष लंबा खिंच सकता है। साथ ही, यह दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को भी खतरे में डाल सकता है।

  • ईरान ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर हमले की दी चेतावनी, स्टूडेंट्स और प्रोफेसर से कैंपस खाली करने की अपील

    ईरान ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर हमले की दी चेतावनी, स्टूडेंट्स और प्रोफेसर से कैंपस खाली करने की अपील


    नई दिल्ली । ईरान ने मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी विश्वविद्यालयों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है ईरानी सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल जानबूझकर ईरान के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को टारगेट कर रहे हैं इसी संदर्भ में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स आईआरजीसी ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों को हमला करने की खुली धमकी दी है

    आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान की दो प्रमुख यूनिवर्सिटी पहले ही तबाह हो चुकी हैं और अमेरिकी सरकार को 30 मार्च को तेहरान टाइम के अनुसार दोपहर 12 बजे तक एक आधिकारिक बयान में ईरानी यूनिवर्सिटी पर बमबारी की निंदा करनी चाहिए इसके साथ ही आईआरजीसी ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों, प्रोफेसरों और छात्रों से अपील की कि वे कैंपस से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहें

    ईरानी मीडिया के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कई विश्वविद्यालय संचालित हैं इनमें कतर में टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी और यूएई में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी शामिल हैं हाल ही में तेहरान और इस्फहान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हमले हुए जिनमें भवनों को नुकसान पहुंचा लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने युद्ध के दौरान जानबूझकर विश्वविद्यालयों और रिसर्च सेंटर पर हमला किया ताकि ईरान की वैज्ञानिक नींव और सांस्कृतिक विरासत को कमजोर किया जा सके उन्होंने बताया कि इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और तेहरान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी उन कई संस्थानों में से दो हैं जिन पर पिछले 30 दिनों में हमले हुए

    बघाई ने यह भी कहा कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और अन्य संभावित खतरे सिर्फ बहाने हैं और असली मकसद देश की शिक्षा और शोध क्षमता को नुकसान पहुंचाना है ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार युद्ध की वजह से कम से कम 600 शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान हुआ है या वे पूरी तरह नष्ट हो गई हैं

    आईआरजीसी की चेतावनी के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्टूडेंट्स तथा प्रोफेसरों को सलाह दी गई है कि वे कैंपस से दूरी बनाए रखें ताकि किसी भी अप्रत्याशित हमले से बचा जा सके इस स्थिति ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और खाड़ी देशों में अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों के संचालन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है

  • पाकिस्तान की मध्यस्थता: मिस्र और तुर्किए के विदेश मंत्री मिडिल ईस्ट शांति चर्चा में शामिल

    पाकिस्तान की मध्यस्थता: मिस्र और तुर्किए के विदेश मंत्री मिडिल ईस्ट शांति चर्चा में शामिल


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष के चलते तनाव बढ़ता जा रहा है इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पहल की है और इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इस्लामाबाद में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है

    इस बैठक में मिस्र और तुर्किए के विदेश मंत्री शामिल होने के लिए 29 मार्च को पाकिस्तान पहुँचे मिस्र के विदेश मंत्री डॉ. बद्र अब्देलत्ती और तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान इस्लामाबाद में बैठक में भाग लेने के लिए आए हैं बैठक 20 और 30 मार्च के बीच आयोजित होगी और इसमें सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद भी शामिल होंगे

    पाकिस्तान के विदेश मंत्री और डिप्टी पीएम इशाक डार ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से हालात और क्षेत्रीय विकास को लेकर विस्तृत चर्चा की डार ने डी-एस्केलेशन की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि स्थायी शांति के लिए बातचीत और डिप्लोमेसी ही सही रास्ता है उन्होंने सभी हमलों और दुश्मनी को समाप्त करने के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति और स्थिरता लौटाने के प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है

    इसके अलावा विदेश मंत्री इशाक डार ने यह जानकारी दी कि ईरान ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 और जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति देने पर सहमति दी है इस मार्ग के माध्यम से रोजाना दो जहाज गुजरेंगे यह कदम इलाके में शांति और स्थिरता लाने की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है डार ने कहा कि यह घोषणा शांति की ओर एक सार्थक कदम है और इसे आगे बढ़ाने के लिए बातचीत, डिप्लोमेसी और कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग उपाय ही एकमात्र तरीका हैं

    बैठक में शामिल सभी देशों के प्रतिनिधि मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच संघर्ष को नियंत्रित करने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करेंगे इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि इलाके में स्थिरता और सुरक्षा की स्थिति में सुधार आएगा

  • ईरान पर इजरायल की नजर: पूरे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सैन्य ठिकानों को निशाना

    ईरान पर इजरायल की नजर: पूरे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सैन्य ठिकानों को निशाना


    नई दिल्ली । यरूशलम से आई ताजा जानकारी के अनुसार इजरायल डिफेंस फोर्स के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन ने एक लाइव प्रसारण में दावा किया है कि आने वाले कुछ ही दिनों में इजरायली सेना ईरान की सैन्य इंडस्ट्री के सभी महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले पूरी तरह से कर लेगी डेफ्रिन ने कहा कि इसका मतलब यह है कि ईरान की अधिकांश सैन्य उत्पादन क्षमता नष्ट हो जाएगी और उसे उसे ठीक करने में काफी समय लगेगा

    प्रवक्ता ने बताया कि IDF के पास एक व्यवस्थित प्लान है जो बड़े हमले के लिए पहले से तैयार किया गया है और स्थिति के अनुसार इसे लगातार अपडेट किया जा रहा है डेफ्रिन ने कहा कि इजरायली सेना के पास स्थिति को पूरी तरह से बदलने का अवसर है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि कोई भी ईरायली नागरिकों को नुकसान न पहुंचे

    सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार यमन से इजरायल पर मिसाइल लॉन्च किए जाने की घटना पर डेफ्रिन ने कहा कि इजरायल हूतियों समेत कई मोर्चों पर लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी इजरायली नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी

    लेबनानी मोर्चे पर भी इजरायली सेना ने अब तक 850 से अधिक हिज्बुल्लाह मिलिटेंट्स को मार गिराया है और उत्तरी इजरायली बस्तियों पर सीधे फायरिंग रोकने के लिए दक्षिणी लेबनान में नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है

    इस बीच, तेल अवीव में शुक्रवार को ईरान की ओर से दागी गई मिसाइल हमले में लगभग 60 वर्षीय कंस्ट्रक्शन वर्कर की मौत हो गई पुलिस के अनुसार यह घटना डिस्पर्सिंग क्लस्टर म्यूनिशन मिसाइल से जुड़ी थी जिसने मेट्रोपॉलिटन एरिया के कई हिस्सों में हमला किया इस हमले में दो लोग मामूली रूप से घायल भी हुए

    ईरान से मिसाइल लॉन्च के बाद सेंट्रल इजरायल के बड़े इलाकों में एयर डिफेंस सायरन बज गए और लोग शेल्टर में चले गए इससे पहले दक्षिणी इजरायल में भी मिसाइल लॉन्च हुई थी जिसमें दो लोग हल्की चोटें आई हैं

    यह घटनाक्रम 28 फरवरी से अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए संयुक्त हमलों के बाद बढ़े तनाव के बीच हुआ है उस समय ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसकी बारीकी से निगरानी कर रहा है

  • ईरान युद्ध के बीच एक और समुद्री रास्ता हो सकता है बंद…. हूतियों की एंट्री ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

    ईरान युद्ध के बीच एक और समुद्री रास्ता हो सकता है बंद…. हूतियों की एंट्री ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन


    तेहरान। ई
    रान और अमेरिका-इजरायल (Iran and America-Israel) के बीच जारी युद्ध में अब तक हूती विद्रोही (Houthi Rebels) शामिल नहीं हुए थे लेकिन शनिवार को पहली बार हूतियों ने भी मिसाइल दागकर साफ कर दिया है कि वे भी युद्ध में कूद पड़े हैं। हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) ने बयान देकर कहा कि उन्होंने इजरायल के संवेदनशील सैन्य इलाकों में हमला किया है। वहीं इजरायल ने कहा कि यमन की ओर से आई मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया। बता दें कि चार सप्ताह से चल रहे युद्ध की वजह से दुनियाभर में तेल का संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आवागमन को सीमित कर दिया है।


    बाब-अल-मंडेब पर भी खतरा

    इजरायल ईरान के अलावा दक्षिण लेबनान में भी लगातार बमबारी कर रहा है। यहां वह ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के ठिकानों को तबाह करने में लगा है। हूतियों के युद्ध में कूदने से ना केवल इसके गंभीर होने का खतरा बना है बल्कि एक और जलडमरूमध्य का रास्ता बंद होने का भी खतरा मंडरा रहा है। यह है बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य। यह लाल सागर के मुहाने पर स्थित है और यहां से होकर बड़ी संख्या में जहाज गुजरते हैं।


    कौन हैं हूती विद्रोही

    यमन के शिया मुस्लिम जैदियों का का सशस्त्र राजनीतिक समूह हूती के नाम से जाना जाता है। हूती विद्रोहियों को हिजबुल्लाह और हमास की तरह ही ईरान का समर्थन प्राप्त है। 1990 में बदरद्दीन अल हूती ने इसकी स्थापना की थी। इसने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। इसका स्लोगन ही था, ‘अल्लाह महान है, अमेरिका मुर्दाबाद, इजरायल मुर्दाबाद।’ हूती खुद को अंसार यानी अल्लाह का साथी कहते हैं।

    हूती 2004 से 2010 तक सालेह की सेना से छह युद्ध लड़े। 2011 में अरब की क्रांति की वजह से सालेह को सत्ता छोड़नी पड़ गई और अब्दरब्बू मंसूर हादी क राष्ट्रपति बनाया गया। यह सरकार भी ज्यादा दिन नहीं टिकी और 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लया। इसके बाद शियाओं का समूह मजबूत होने लगा। यह सऊदी अरब और यूएई के लिए सीधा खतरा बन गया। आज भी हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा है।इसमें राजधानी सना और लाल सागर का तटी इलाका शामिल है।


    बाब अल मंडेब पर क्यों है खतरा

    लाल सागर के उस इलाके पर हूतियों का ही कब्जा है जहां बाब अल मंडेब स्ट्रेट है। हूतियों के पास हथियारों की भी कमी नहीं है। उनके पास क्रूज मिसाइल, एंटी शिप मिसाइल, समुद्री ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हैं। बीते दो सालों में हूतियों ने 100 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों पर हमला किया है और इनमें से कई को समंदर में ही डुबो दिया है। लाल सागर के दूसरी ओर स्वेज नहर है जो कि भूमध्य सागर को जोड़ती है। इन दोनों रास्तों से ही यूरोप और उत्तरी अमेरिका को प्राकृतिक गैस और खाड़ी के तेल की सप्लाई होती है। 2013 में स्वेज नहर के रास्ते दुनिया के कुल व्यापारा का 12 से 15 फीसदी व्यापार हुआ था।


    ईरान के साथ कितना मजबूत रिश्ता

    सऊदी अरब और यूएई का कहना है कि ईरान हूती विद्रिहियों को हथियार मुहैया करवाता है। सऊदी अरब और ईरान में जो संघर्ष है उसके बीच यमन एक अलग ही मोर्चा बना हुआ है।


    हूती क्यों हैं ज्यादा खतरनाक

    हूती ब्रिगेडियर याह्या सरी ने कहा कि शनिवार को उन्होंने इजरायल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल अटैक किया है। इसका सीधा मतलब है कि युद्ध का स्तर अब और गंभीर हो गया है। शिया ताकतें अमेरिका और इजरायल के खिलाफ इकट्ठी हो रही हैं। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचने और बढ़ने का खतरा बना हुआ है। गाजा में हमास आज भी ऐक्टिव है और लेबनान से हिजबुल्लाह इजरायल पर हमले कर रहा है। इजरायल तीन मोर्चों से घिरा हुआ है।

    ईरान ने आगे सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उसने दुबई में उन दो विशिष्ट स्थानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे। बयान के अनुसार, एक स्थान पर 400 से अधिक और दूसरे पर 100 से ज्यादा अमेरिकी कर्मी मौजूद थे। ईरानी प्रवक्ता ने डोनल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह क्षेत्र ‘अमेरिकी सैनिकों के लिए कब्रगाह’ साबित होगा।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना के पास ईरान पर हमला करने और अपना सैन्य अभियान पूरा करने के लिए अभी 3,554 लक्ष्य बाकी हैं। मियामी में एक निवेश सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने नाटो सहयोगियों पर भी जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में सहायता न देने के लिए सहयोगियों को ‘कागजी शेर’ करार दिया और कहा कि अमेरिका नाटो की सुरक्षा पर सालाना सैकड़ों अरब डॉलर खर्च कर रहा है, लेकिन जरूरत के समय वे गायब हैं।

    तनाव को देखते हुए अमेरिका ने अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन तेज कर दिया है। विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश को अब केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के कार्यक्षेत्र में तैनात किया जा रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र में पहले से ही यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में दो स्ट्राइक समूह सक्रिय हैं। इसके अलावा गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक यूएसएस रॉस, यूएसएस डोनाल्ड कुक और यूएसएस मेसन को भी युद्धक संचालन में सहयोग के लिए रवाना कर दिया गया है।

    इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि यदि ईरान के आर्थिक केंद्रों या बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो इसका जवाब बेहद कड़ा होगा। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से पुरजोर अपील की है कि वे अपनी धरती का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए न होने दें।

  • ईरान युद्ध में बैकफुट पर ट्रंप….. जेडी वेंस बोले- लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं अमेरिका

    ईरान युद्ध में बैकफुट पर ट्रंप….. जेडी वेंस बोले- लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं अमेरिका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और ईरान (America-Iran War) के बीच जारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President J.D. Vance) ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान में लंबे समय तक सैन्य संघर्ष में उलझे रहने का इच्छुक नहीं है और जल्द ही अपने अभियान को समाप्त कर वहां से निकलना चाहता है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान में अपना काम पूरा करना है, न कि एक या दो साल तक वहां मौजूद रहना।

    उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “हम एक साल या दो साल आगे की योजना नहीं बना रहे हैं। हम अपना काम कर रहे हैं और जल्द ही वहां से बाहर आ जाएंगे।” उनके इस बयान को अमेरिकी रणनीति में सीमित और त्वरित सैन्य हस्तक्षेप के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    वेंस ने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रशासन कुछ समय तक अपना अभियान जारी रखेगा, ताकि भविष्य में फिर से ऐसी कार्रवाई की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने इसे एक ऐसी रणनीति बताया, जिसका उद्देश्य लंबे समय तक चलने वाले युद्ध से बचना है। इस बीच, उन्होंने यह भी दावा किया कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे ईंधन की कीमतों में भी गिरावट आएगी। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ा है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को 10 दिनों के लिए टालने का फैसला किया है। यह समयसीमा अब 6 अप्रैल तक बढ़ा दी गई है। ट्रंप ने कहा कि यह फैसला ईरान के अनुरोध पर लिया गया है और दोनों देशों के बीच बातचीत काफी अच्छी चल रही है।

    दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि वे अपने क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध संचालन के लिए न होने दें। इसे उन देशों के लिए संदेश माना जा रहा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। पेजेशकियान ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह के पूर्व-आक्रमण में विश्वास नहीं करता, लेकिन अगर उसके बुनियादी ढांचे या आर्थिक केंद्रों पर हमला हुआ तो कड़ा जवाब देगा।

    गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा यह संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है। यह टकराव 28 फरवरी को अमेरिकी हवाई हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसमें ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई थी।

  • मिडिल ईस्ट संकटः कड़े पहरे के बीच होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG से भरा पोत.. क्या ईरान वसूल रहा टोल!

    मिडिल ईस्ट संकटः कड़े पहरे के बीच होर्मुज पार कर भारत पहुंचा LPG से भरा पोत.. क्या ईरान वसूल रहा टोल!


    तेहरान।
    ईरान युद्ध (Iran War) के बीच दुनियाभर में ऊर्जा का बड़ा संकट (Energy Crisis) खड़ा हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और गैस व्यापार होता है। अब कई देशों के जहाज इस रास्ते से निकल ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में दुनियाभर के तमाम देश तेल संकट से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान समेत कई देशों ने जनता के लिए नए-नए नियम निकाल दिए हैं। कई जगहों पर कार्य सप्ताह चार दिनों का कर दिया गया है। इसी बीच बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते हुए भारतीय ध्वज वाला पोत ‘जग वसंत’ 47,000 टन द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर गुजरात के जामनगर स्थित वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है। ईरान ने साफ कहा है कि भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट में कोई प्रतिबंध नहीं है।


    होर्मुज से कितने शिप निकल पा रहे

    ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध अब दूसरे महीने में प्रवेश कर गया है। जहां युद्ध से पहले होर्मुज स्ट्रेट से रोज 100 जहाज निकल जाते थे, अब 3 से 4 जहाज ही निकल पा रहे हैं। इनमें में भारत के भी व्यापारिक जहाज होते हैं। ईरान ने अपने कुछ दोस्त देशों में भारत का भी नाम लिया है और इससे भारत को बड़ी राहत मिली है। ईरान ने कहा है कि भारत के झंडे वाले जहाजों को यहां नहीं रोका जाएगा।


    कौन से देशों को मिली है छूट

    शनिवार को भी दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी और BW Tyr और BW Elm के जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे। पिछले महीने होर्मुज स्ट्रेट से होकर कम से कम पांच जहाज भारत पहुंचे। इनमें पान गैस, जग वसंद, शिवालिक और नंदा देवी शिप शामिल हैं। इनमें एलपीजी और कच्चा तेल भारत पहुंचा है। ईरान ने भारत के साथ चीन, रूस, ईराक और पाकिस्तान को भी छूट दी है।

    गुरुवार को मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने एक पोस्ट में कहा था कि ईरानी विदेस मंत्री अब्बास अरागची ने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के लिए होर्मुज को खोल दिया है। इसके बाद थाईलैंड और मलेशिया ने भी दावा किया कि उसके लिए भी होर्मुज कोखोला गया है। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि इजरायल और अमेरिका के सहयोगियों को यहां से नहीं गुजरने दिया जाएगा।


    क्या ईरान होर्मुज में वसूल रहा है टोल?

    ईरान की संसद ने इस बात का समर्थन किया है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों सो टोल वसूला जाए। इसको लेकर कानून फाइनल होने वाला है। इसके मुताबिक जहाजों की सुरक्षा के बदले ईरान टोल वसूल सकता है। दूसरे कॉरिडोर में भी जहाजों से एक शुल्क लिया जाता है। जानकारी के मुताबिक कुछ जहजों से शुल्क लिया जाने लगा है। होर्मुज के दोनों ओर जहाजों का जमावड़ा लग गया है। दोनों ओर करीब 2000 शिप हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

  • दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले में 3 पत्रकार मारे गए, लेबनान राष्ट्रपति ने बताया जघन्य अपराध

    दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले में 3 पत्रकार मारे गए, लेबनान राष्ट्रपति ने बताया जघन्य अपराध

    नई दिल्ली । दक्षिण लेबनान में शनिवार को हुए इजरायली हवाई हमले में तीन पत्रकारों की मौत हो गई। यह हमला उस समय हुआ जब वे इजरायल-हिजबुल्लाह युद्ध की रिपोर्टिंग कर रहे थे।

    शोएब और फतौनी सहित तीन पत्रकार शहीद
    हिजबुल्लाह के अल-मनार टीवी के वरिष्ठ संवाददाता अली शोएब दक्षिण लेबनान में लगभग तीन दशकों से रिपोर्टिंग कर रहे थे। इजरायली सेना ने आरोप लगाया कि शोएब हिजबुल्लाह के खुफिया ऑपरेटिव थे और इजराइली सैनिकों की लोकेशन उजागर कर रहे थे, हालांकि इस दावे के कोई सबूत पेश नहीं किए गए। अल-मनार टीवी ने अपने पत्रकार को पेशेवर और विश्वसनीय बताया।

    बेरूत स्थित अल-मयादीन टीवी की रिपोर्टर फातिमा फतौनी और उनके भाई मोहम्मद, जो वीडियो जर्नलिस्ट थे, जेजीन जिले में इसी हमले में मारे गए। हमले से ठीक पहले फातिमा लाइव रिपोर्ट दे रही थीं।

    लेबनान में आक्रोश और प्रतिक्रिया
    लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे “एक जघन्य अपराध” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने सभी कानूनों और समझौतों का स्पष्ट उल्लंघन है।

    पहले भी हमले हो चुके हैं
    यह हमला पहली बार नहीं है। कुछ दिन पहले मध्य बेरूत में अल-मनार टीवी के प्रमुख मोहम्मद शेरी और उनकी पत्नी की हत्या हो चुकी है। इजरायल पहले भी अल-मनार टीवी के मुख्यालय और हिजबुल्लाह के अल-नूर रेडियो स्टेशन पर हमले कर चुका है। इस साल अब तक लेबनान में पांच पत्रकार और मीडियाकर्मी मारे जा चुके हैं।

    युद्ध में नुकसान बढ़ता जा रहा है
    बेरूत के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 47 लोग मारे गए और 112 घायल हुए। 2 मार्च से अब तक कुल 1,189 लोग मारे जा चुके हैं। शनिवार को हुए हमलों में 9 पैरामेडिक्स भी मारे गए, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों की कुल मौतें 51 हो गई हैं। वहीं, इजरायली सेना के 9 जवान दक्षिण लेबनान में दो हमलों में घायल हुए।

    इजरायली सेना के अनुसार, हिजबुल्लाह ने पिछले 24 घंटों में लगभग 250 हमले किए, जिनमें अधिकतर दक्षिण लेबनान में इजरायली सैनिकों को निशाना बनाने के लिए थे, और केवल 23 हमले इजरायल की सीमा के अंदर गिरे।

  • ईरानी हमलों के बीच कुदरत का कहर बुर्ज खलीफा पर गिरी बिजली

    ईरानी हमलों के बीच कुदरत का कहर बुर्ज खलीफा पर गिरी बिजली

    नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और अनिश्चितता के माहौल के बीच दुबई से एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया है जिसने लोगों को हैरान कर दिया है दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा पर आसमान से तेज बिजली गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दुनियाभर के यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है ।
    बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई इसी दौरान आसमान में जोरदार गर्जना के साथ बिजली कड़कने लगी और एक पल ऐसा आया जब बिजली सीधे बुर्ज खलीफा की चोटी पर गिरती हुई दिखाई दी यह पूरा नजारा दूर से रिकॉर्ड किया गया जिसमें अंधेरे आसमान के बीच चमकती बिजली और उसके ठीक नीचे खड़ा विशाल टावर बेहद भयावह लेकिन रोमांचक दृश्य पेश कर रहा था

    इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह तेजी से फैल गया कई यूजर्स ने इसे शेयर करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी कुछ लोगों ने इसे कुदरत की ताकत बताया तो कुछ ने इसे डरावना अनुभव कहा हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह का नुकसान या जनहानि नहीं हुई

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और अहम पहलू यह है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। 

    ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव और अमेरिका के साथ खींचतान के चलते खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है इससे पहले भी सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें दुबई के आसपास धमाकों और धुएं के गुबार देखे गए थे जिनको लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं

    हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बुर्ज खलीफा पर बिजली गिरना कोई असामान्य घटना नहीं है क्योंकि इतनी ऊंची इमारतें अक्सर बिजली को अपनी ओर आकर्षित करती हैं खास बात यह है कि इस इमारत को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है टावर के शीर्ष पर विशेष लाइटनिंग रॉड लगाए गए हैं जो बिजली को सीधे अपनी ओर खींच लेते हैं और उसे सुरक्षित तरीके से जमीन में प्रवाहित कर देते हैं इससे इमारत और आसपास के इलाके को किसी भी संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है

    दुबई और आसपास के अन्य इलाकों जैसे अबू धाबी और शारजाह में भी इस दौरान मौसम अचानक बदला और तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई जिससे जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ

    कुल मिलाकर यह घटना जहां एक ओर प्राकृतिक शक्तियों की ताकत को दर्शाती है वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंजीनियरिंग और सुरक्षा उपायों की सफलता का भी उदाहरण पेश करती है जिसने इतनी बड़ी घटना को बिना किसी नुकसान के टाल दिया