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  • बालेन शाह ने संभाली नेपाल की कमान, प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण

    बालेन शाह ने संभाली नेपाल की कमान, प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण


    नई दिल्ली। नेपाल में राजनीतिक परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हो गया है। पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद (Nepal PM) की शपथ लेकर देश की कमान संभाल ली है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत मिला है।

    बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने हालिया चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 275 में से 182 सीटों पर जीत हासिल की। यह जीत न सिर्फ ऐतिहासिक रही, बल्कि पारंपरिक राजनीतिक दलों के लिए बड़ा झटका भी साबित हुई।

    कौन हैं बालेन शाह जो बने हैं Nepal PM?
    बालेन शाह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता हैं। हाल ही में नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार के खिलाफ GenZ के विद्रोह के बाद बालेन शाह चर्चा का केंद्र बन गए। उन्होंने GenZ द्वारा चलाए गए सत्ता विरोधी आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद वह GenZ में काफी लोकप्रिय हो गए जिसका असर 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनावों में देखने को मिला। RSP ने भारी बहुमत हासिल किया। पार्टी ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 182 सीटें जीतीं। बालेन ने खुद चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके गढ़ झापा-5 सीट से भारी अंतर से हराया।

    रैपर से प्रधानमंत्री बनने तक का सफर
    बालेश शाह का जन्म 27 अप्रैल 1990 को हुआ था उन्होंने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। राजनीति में कदम रखने से पहले ही वे युवाओं के बीच अच्छी खासी लोकप्रियता रखते थे। वे अपने गानों का इस्तेमाल सत्ता पर निशाना साधने के लिए किया करते थे। मई 2022 में उन्होंने राजनीति में पहला कदम रखा। उन्होंने मेयर पद पर जीत हासिल की। इसके बाद से ही वे समाज सुधारक की भूमिका में दिखने लगे थे। आज 4 साल के बाद वह नेपाल के प्रधानमंत्री बन गए।

  • युद्ध के माहौल में बड़ा फैसला अमेरिकी करेंसी पर ट्रंप के हस्ताक्षर से बदलेगा इतिहास

    युद्ध के माहौल में बड़ा फैसला अमेरिकी करेंसी पर ट्रंप के हस्ताक्षर से बदलेगा इतिहास


    नई दिल्ली । अमेरिका एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है और इस बार बदलाव सीधे उसकी करेंसी यानी डॉलर से जुड़ा हुआ है। करीब 165 साल पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए अब पहली बार ऐसा होने जा रहा है जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर अमेरिकी नोटों पर दिखाई देंगे। यह ऐतिहासिक कदम डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में उठाया गया है और इसे अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के जश्न से भी जोड़ा जा रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस बात की पुष्टि की है कि जल्द ही छपने वाले डॉलर नोटों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर शामिल किए जाएंगे। उनके साथ ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के साइन भी होंगे। अब तक अमेरिकी करेंसी पर परंपरागत रूप से ट्रेजरी सचिव और ट्रेजरर के हस्ताक्षर ही होते रहे हैं लेकिन इस फैसले के बाद यह व्यवस्था बदलती नजर आएगी।

    इस पूरे घटनाक्रम को और भी खास बनाता है इसका समय। यह फैसला ऐसे दौर में लिया गया है जब अमेरिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनावपूर्ण परिस्थितियों का सामना कर रहा है खासकर Iran के साथ चल रहे टकराव के बीच। ऐसे में यह कदम सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व भी रखता है। अमेरिकी ट्रेजररब्रैंडन बीच ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह राष्ट्रपति के नेतृत्व और देश के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है। उनके अनुसार यह बदलाव आने वाले वर्षों तक अमेरिकी करेंसी की पहचान का हिस्सा रहेगा।

    जानकारी के मुताबिक सबसे पहले 100 डॉलर के नोट पर ट्रंप और बेसेंट के हस्ताक्षर जून महीने से छपने शुरू होंगे। इसके बाद धीरे धीरे अन्य मूल्य के नोटों पर भी यह बदलाव लागू किया जाएगा। फिलहाल अमेरिकी ब्यूरो ऑफ एनग्रैविंग एंड प्रिंटिंग पुराने नोटों की छपाई जारी रखे हुए है जिन पर जेनेट येलेन और लिन मालेरबा के हस्ताक्षर मौजूद हैं। हालांकि ट्रेजरी विभाग ने यह साफ कर दिया है कि नोट के डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यानी डॉलर की मौजूदा पहचान वैसी ही बनी रहेगी केवल हस्ताक्षरों में यह नया परिवर्तन जोड़ा जाएगा।

    गौरतलब है कि इससे पहले ट्रंप के नाम पर एक डॉलर का सिक्का जारी करने की कोशिश भी की गई थी लेकिन अमेरिकी कानूनों के तहत किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर को सिक्कों पर छापने की अनुमति नहीं है जिसके चलते वह प्रयास सफल नहीं हो पाया। कुल मिलाकर यह फैसला अमेरिका के आर्थिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यह न सिर्फ परंपरा में बदलाव का संकेत है बल्कि यह भी दर्शाता है कि आने वाले समय में करेंसी सिर्फ लेनदेन का माध्यम नहीं बल्कि राजनीतिक और राष्ट्रीय पहचान का भी मजबूत प्रतीक बनती जा रही है।

  • नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, बालेन्द्र शाह ने ली PM पद की शपथ

    नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, बालेन्द्र शाह ने ली PM पद की शपथ


    काठमांडू। नेपाल की राजनीति में शुक्रवार को एक नया इतिहास बना, जब रैपर और इंजीनियर से नेता बने बालेन्द्र शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 35 वर्ष की उम्र में वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं। इसके साथ ही वे मदेश क्षेत्र से इस पद तक पहुंचने वाले पहले नेता भी हैं।

    शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल की मौजूदगी में शीतल निवास में दोपहर 12:34 बजे शुभ मुहूर्त पर आयोजित हुआ। इस दौरान कार्यक्रम में हिंदू और बौद्ध परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। सात ब्राह्मणों ने शंखनाद किया, 108 युवा ब्राह्मणों ने स्वस्ति वाचन किया, जबकि 107 लामाओं ने बौद्ध मंत्रों का उच्चारण किया।

    भारी बहुमत के साथ सत्ता में एंट्री

    5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में पार्टी ने 182 सीटें हासिल कीं। बालेन्द्र शाह ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके गढ़ झापा-5 सीट से बड़े अंतर से हराया।

    इस चुनाव में पारंपरिक दलों को बड़ा झटका लगा। नेपाली कांग्रेस को 38 सीटें, CPN-UML को 25 और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 17 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस नतीजे को युवाओं की Gen-Z लहर का प्रभाव माना जा रहा है।

    कौन हैं बालेन्द्र शाह

    बालेन्द्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से भी जाना जाता है, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख नेता हैं। करीब छह महीने पहले केपी शर्मा ओली की सरकार को युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हटाया गया था। यह आंदोलन भ्रष्टाचार भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में हुआ था।

    बालेन इससे पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं। वे पेशे से इंजीनियर हैं और रैप संगीत के जरिए युवाओं के मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। शपथ लेने के बाद अब वे 15 से 18 मंत्रियों वाला छोटा मंत्रिमंडल बनाने की तैयारी में हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। नेपाल की राजनीति में यह बदलाव एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जहां युवा नेतृत्व से बड़े परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है।

  • ईरानी हमलों से अमेरिकी सैनिकों में हड़कंप, कई ठिकानों को छोड़ा, दूरदराज से लड़ना पड़ रहा युद्ध

    ईरानी हमलों से अमेरिकी सैनिकों में हड़कंप, कई ठिकानों को छोड़ा, दूरदराज से लड़ना पड़ रहा युद्ध


    तेहरान। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में मौजूद सेना का बड़ा हिस्सा अब अपने ठिकानों से हटकर दूरदराज से ही युद्ध लड़ रहा है। हालांकि, लड़ाकू पायलट और कुछ क्रू अभी भी सैन्य ठिकानों पर हैं और ईरान पर हवाई हमले जारी रखे हुए हैं।

    ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने नागरिकों से अमेरिकी सैनिकों की नई जगहों की जानकारी देने की अपील की है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि खतरे के बावजूद पेंटागन युद्ध जारी रखने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि ईरान के 7 हजार से अधिक ठिकानों पर अमेरिकी हमले किए गए हैं।

    युद्ध की शुरुआत और सैनिकों का स्थानांतरण

    युद्ध शुरू होने पर करीब 40 हजार अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में थे। सेंट्रल कमांड ने हजारों सैनिकों को अलग-अलग जगहों पर भेज दिया, कुछ को यूरोप तक भेजा गया। कई सैनिक पश्चिम एशिया में हैं, लेकिन अब अपने मूल ठिकानों पर नहीं हैं।

    ईरान ने दिया जबरदस्त जवाब
    ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों का कड़ा जवाब दिया। अपने सर्वोच्च नेता और दर्जनों अन्य नेताओं के मारे जाने के बावजूद, ईरान ने अमेरिकी ठिकानों, दूतावासों और तेल-गैस के बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया। होर्मुज जलडमरूमध्य भी आंशिक रूप से बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक प्रभाव महसूस हो रहा है।

    अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान

    क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले 13 अमेरिकी ठिकानों में कई पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कुवैत स्थित ठिकानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। पोर्ट शुएबा में हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर भी हमले हुए। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस में मिसाइलों और ड्रोन हमलों से संचार उपकरण और रीफ्यूलिंग टैंकर क्षतिग्रस्त हुए।

    सुरक्षा और योजना में कमी की स्वीकारोक्ति

    पेंटागन के ज्वॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्वीकार किया कि भारी हवाई हमलों के बावजूद ईरान के पास अब भी कुछ क्षमता बची हुई है। सुरक्षा की कई परतें अमेरिका को अपने सैनिकों और हितों की रक्षा में सक्षम बना रही हैं, लेकिन बेहतर योजना की कमी के कारण अमेरिकी सैनिकों को अतिरिक्त कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने युद्ध शुरू होने से पहले ईरान की ताकत का गलत आकलन किया और क्षेत्रीय दूतावासों पर कर्मचारियों की संख्या कम नहीं की। इस कारण सैनिकों को नए ठिकानों में भेजना युद्ध संचालन को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है।

    सैनिकों का होटल में इकट्ठा होना

    कुछ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों और उपकरणों को अस्थायी जगहों पर भेजने से संचालन मुश्किल हो गया। पूर्व अमेरिकी वायुसेना विशेष ऑपरेशंस विशेषज्ञ जे. ब्रायंट ने कहा कि हमारे पास तेजी से ऑपरेशन सेंटर बनाने की क्षमता है, लेकिन सभी उपकरणों को किसी होटल की छत पर इकट्ठा करना व्यावहारिक नहीं है।

  • ट्रंप का दावा: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को बताया ‘गे’, बयान से बढ़ा विवाद

    ट्रंप का दावा: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को बताया ‘गे’, बयान से बढ़ा विवाद

    वाशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक नया विवादित दावा किया है। उन्होंने कहा कि कथित तौ
    र पर नए सुप्रीम लीडर माने जा रहे मोजतबा खामेनेई ‘गे’ हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
    फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि खुफिया एजेंसी CIA ने उन्हें जानकारी दी है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ‘गे’ (समलैंगिक) हैं. जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वाकई CIA ने उन्हें यह बताया है, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘हां, उन्होंने ऐसा कहा है, लेकिन मुझे लगता है कि सिर्फ वही नहीं, बल्कि और भी बहुत से लोग यह बात कह रहे हैं.’
    ईरान में मोजतबा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं

    ट्रंप ने कहा कि इस जानकारी के बाद मोजतबा के लिए अपने देश में काम करना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने इसे मोजतबा के लिए एक “खराब शुरुआत” बताया. बता दें कि ईरान में समलैंगिकता को इस्लाम के खिलाफ माना जाता है और वहां इसके लिए मौत की सजा तक का प्रावधान है. न्यूयॉर्क पोस्ट की एक पुरानी रिपोर्ट के मुताबिक, जब ट्रंप को पहली बार खुफिया ब्रीफिंग में यह बात पता चली थी, तो वह काफी हैरान हुए थे और हंसने लगे थे.
    ट्रंप का दावा- हम ईरान से जंग जीत चुके हैं

    इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि सैन्य तौर पर अमेरिका ईरान से युद्ध जीत चुका है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरान की नौसेना और मिसाइल ताकत को पूरी तरह खत्म कर दिया है.

    ट्रंप के मुताबिक, ‘हमने उनकी नेवी और एयरफोर्स को तबाह कर दिया है. हमने उनके 154 जहाज डुबो दिए हैं. अब उनके पास सिर्फ 9% मिसाइलें ही बची हैं. ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने ईरान के मिसाइल लॉन्चर्स को भी नष्ट कर दिया है, जिसके बिना मिसाइलें किसी काम की नहीं हैं.
    ईरान में LGBTQ+ समुदाय पर जुल्म

    ईरान में समलैंगिकों की स्थिति बेहद खराब है. हेनगाओ ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ने मई 2025 की अपनी रिपोर्ट में ईरान को ‘जेंडर अपार्थेड स्टेट’ (लिंग आधारित भेदभाव वाला देश) कहा है.

    रिपोर्ट के अनुसार, वहां जेंडर और सेक्सुअल ओरिएंटेशन के आधार पर लोगों के साथ बहुत भेदभाव होता है. सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान के मुताबिक, वहां गे लोगों का जबरन इलाज (Conversion therapy) कराने की कोशिश की जाती है.

    विकीलीक्स के 2008 के एक केबल के अनुसार, 1979 की क्रांति के बाद से ईरान में लगभग 4,000 से 6,000 LGBTQ+ लोगों को फांसी दी जा चुकी है. हालांकि डेटा की कमी के कारण सटीक नंबर बताना मुश्किल है. जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट बताती है कि जनवरी 2022 में दो पुरुषों को समलैंगिकता के आरोप में फांसी दी गई थी. उसी साल उर्मिया की एक अदालत ने दो एक्टिविस्ट्स को ‘धरती पर भ्रष्टाचार’ फैलाने और समलैंगिकता को बढ़ावा देने के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी.

  • पाकिस्तान के समर्थन में चीन, कहा- व्यापार और निवेश में जारी रहेगा सहयोग

    पाकिस्तान के समर्थन में चीन, कहा- व्यापार और निवेश में जारी रहेगा सहयोग

    इस्लामाबाद। चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान के प्रति अपने समर्थन को दोहराया है। पाकिस्तान में चीन के राजदूत जियांग जेदोंग ने गुरुवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि चीन पाकिस्तान में व्यापार और निवेश के लिए लगातार सहयोग करता रहेगा।
    पाक प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार बैठक में उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान चीनी राजदूत ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता और सुधार प्रयासों की सराहना की।

    प्रधानमंत्री शरीफ ने चीन के निरंतर आर्थिक सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि पाकिस्तान, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस चरण में कृषि, औद्योगिक सहयोग और प्राथमिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

    बैठक के दौरान जियांग जेदोंग ने व्यापार और निवेश के क्षेत्र में चीन के निरंतर समर्थन की पुष्टि की। दोनों पक्षों ने कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर उच्च स्तरीय संपर्क बढ़ाने की उम्मीद भी जताई।

    प्रधानमंत्री शरीफ ने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करते हुए पश्चिम एशिया में तनाव कम करने में पाकिस्तान की भूमिका को रेखांकित किया और आपसी हितों के मुद्दों पर सभी स्तरों पर करीबी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।

  • सरेंडर नहीं सीधा टकराव; ईरान युद्ध के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख का बड़ा ऐलान, अब क्या होगा?

    सरेंडर नहीं सीधा टकराव; ईरान युद्ध के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख का बड़ा ऐलान, अब क्या होगा?

    तेहरान। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध के बीच हिजबुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि लेबनानी प्रतिरोध आंदोलन ने आत्मसमर्पण के बजाय टकराव का रास्ता चुना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सेनाएं अमेरिका-इजरायल परियोजना का मुकाबला करने के लिए बिना किसी सीमा के बलिदान देने को पूरी तरह तैयार हैं।

    ईरान के सरकारी चैनल प्रेस टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हिजबुल्लाह प्रमुख ने वर्तमान संकट को लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और भविष्य के लिए अस्तित्वगत संघर्ष बताया है।

    बयान में कासिम ने तर्क दिया कि लेबनान इस समय एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। उनके अनुसार, देश के सामने दो विकल्प हैं, या तो आत्मसमर्पण कर अपनी भूमि, गरिमा, संप्रभुता और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य त्याग दें, या अपरिहार्य टकराव में शामिल होकर कब्जे का डटकर विरोध करें। उन्होंने कहा कि प्रतिरोध की सक्रिय नीति ने इजरायली दुश्मन को कोई आश्चर्यचकित करने का मौका नहीं दिया और आगे की घुसपैठ के सभी बहानों को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया है। इस दौरान महासचिव ने अपने योद्धाओं की वीरता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने वीरता, सम्मान, देशभक्ति और गरिमा के सबसे शानदार महाकाव्य लिखे हैं।

    उन्होंने विस्थापित लेबनानी नागरिकों की भी सराहना की, जिन्होंने अपने वतन के सम्मानजनक भविष्य के लिए बलिदान और प्रतिरोध का रास्ता अपनाया है।

    कासिम के बयान का मुख्य मुद्दा कथित ‘ग्रेटर इजरायल’ की विस्तारवादी योजना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह ‘खतरनाक अमेरिकी-इजरायली परियोजना’ यूफ्रेट्स से नील नदी तक क्षेत्रीय नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, जिसमें लेबनान भी शामिल है। हिजबुल्लाह नेता के मुताबिक, लेबनानी धरती पर इजरायली आक्रमण 2024 के अंत से लगातार जारी है और इजरायली दुश्मन ने पिछले युद्धविराम समझौतों का बार-बार उल्लंघन किया है।
    घरेलू नीति पर बोलते हुए कासिम ने लेबनानी सरकार से आग्रह किया कि वह उन उपायों को रद्द करे जो प्रतिरोध को अपराध मानते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक देश खतरे में है, हथियारों का एकाधिकार केवल लेबनान के पतन और ‘ग्रेटर इजरायल’ योजना को बढ़ावा देगा। यही कारण है कि उन्होंने सक्रिय संघर्ष के दौरान किसी भी प्रकार की बातचीत को सख्ती से खारिज कर दिया और कहा कि गोलीबारी के बीच इजरायली दुश्मन से बातचीत जबरन आत्मसमर्पण के समान है।
  • Nepal के सबसे युवा प्रधानमंत्री होगे बालेंद्र शाह, आज ग्रहण करेंगे पदभार

    Nepal के सबसे युवा प्रधानमंत्री होगे बालेंद्र शाह, आज ग्रहण करेंगे पदभार


    काठमांडू।
    राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) (Rashtriya Swatantra Party – RSP)) नेता बालेंद्र शाह (Balendra Shah) शुक्रवार को नेपाल (Nepal) के प्रधानमंत्री (Prime Minister) पद की शपथ लेंगे। वह देश के सबसे युवा पीएम होंगे। इससे पहले संसद के अस्थायी भवन में आयोजित कार्यक्रम में नेपाल की प्रतिनिधि सभा के नए सांसदों ने बृहस्पतिवार को शपथ ली।

    प्रतिनिधि सभा के वरिष्ठ सदस्य अर्जुन नरसिंह केसी ने सांसदों को शपथ दिलाई। 63 सांसदों ने नेपाली के अलावा अपनी मातृभाषा में शपथ ली। उधर, संघीय संसद सचिवालय ने दलों की सीट संख्या के आधार पर बैठने की व्यवस्था तय की। इसके तहत नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी(एमाले) और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के सांसदों को एक ही पंक्ति में बैठाया गया, जहां उन्होंने शपथ ग्रहण किया। सांसद विभिन्न पारंपरिक वेशभूषा में शपथ लेने के लिए सिंहदरबार पहुंचे।


    शाह को संसदीय दल के नेता का प्रस्ताव पारित

    राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) की केंद्रीय समिति ने संसदीय दल गठन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है। पार्टी के प्रवक्ता और सांसद मनिष झा ने जानकारी दी कि जारी केंद्रीय समिति बैठक ने बालेन्द्र शाह को संसदीय दल का नेता चुनने का प्रस्ताव भी पारित कर दिया है।


    बालेंद्र शाह ने जारी किया अपना नया गाना

    अपने शपथ ग्रहण समारोह की पूर्व संध्या पर बालेंद्र शाह बालेन ने बृहस्पतिवार को अपना नया गाना जय महाकाली जारी किया। इस नए वीडियो गीत में बालेन के चुनावी अभियान के दृश्य दिखाए गए हैं। इस गीत का उद्देश्य देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश फैलाना है। यूट्यूब पर जारी होने के महज दो घंटे में ही इस गाने को 1.50 लाख दर्शकों ने देखा।

    गौरतलब है कि 5 मार्च को हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में आरएसपी ने 182 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। पार्टी ने चुनाव से पहले ही बालेंद्र शाह को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था।

  • ईरान का बड़ा फैसला, भारत समेत पांच देशों को ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति, जारी की सूची

    ईरान का बड़ा फैसला, भारत समेत पांच देशों को ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति, जारी की सूची


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने पांच मित्र देशों की सूची जारी की है जिन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है। इस सूची में भारत को प्राथमिकता देते हुए सबसे ऊपर रखा गया है। इसके अलावा चीन रूस पाकिस्तान और इराक भी शामिल हैं। इन देशों के वाणिज्यिक जहाजों को सीमित रूप से इस अहम समुद्री मार्ग का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।

    होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण

    दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20-25 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत बेहद बढ़ जाती है। वर्तमान हालात में इस क्षेत्र पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है और वह अपनी शर्तों पर ही जहाजों को गुजरने दे रहा है।

    इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने इस मार्ग को खुलवाने के लिए यूरोपीय देशों से सैन्य सहयोग की अपील की थी लेकिन कोई ठोस समर्थन नहीं मिला। इसके बाद अमेरिका ने 48 घंटे की चेतावनी देते हुए ईरान के पावर ग्रिड पर हमले की धमकी दी जिस पर ईरान ने कड़ा जवाब देते हुए मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नेटवर्क को निशाना बनाने की चेतावनी दी। बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी समयसीमा और धमकी वापस ले ली।

    पाकिस्तान का लौटाया जहाज

    हालांकि सूची में शामिल होने के बावजूद पाकिस्तान को झटका लगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक पाकिस्तानी टैंकर को होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं दी। ईरान का कहना है कि पाकिस्तान उसकी तय शर्तों पर खरा नहीं उतरा इसलिए जहाज को वापस लौटना पड़ा।

    दुश्मन देशों के लिए मार्ग पूरी तरह बंद

    ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि युद्ध जैसे हालात के चलते यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि मित्र देशों के जहाजों को ही अनुमति दी जा रही है जबकि दुश्मन देशों और उनके सहयोगियों के लिए यह मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा। उन्‍होंने कहा कि हमने चीन रूस भारत इराक और पाकिस्तान के तेल टैंकर और जहाजों को होर्मुज पास करने की इजाजत दी है।

    गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है। इस मार्ग में बाधा के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

  • यूक्रेन ने रूस पर लगाया आरोप: छह नागरिकों की गिरफ्तारी में भारत को घसीटा

    यूक्रेन ने रूस पर लगाया आरोप: छह नागरिकों की गिरफ्तारी में भारत को घसीटा


    नई दिल्ली। हाल ही में भारत में छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को हिरासत में लिया गया। इस घटनाक्रम के बीच यूक्रेनी दूतावास ने आरोप लगाया कि इस मामले में रूस भारत को अपनी राजनीतिक स्क्रिप्ट में घसीटने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेनी दूतावास ने रूस के विदेश मंत्रालय को ‘प्रोपेगैंडा मंत्रालय’ बताते हुए कहा कि यह अभियान रूस द्वारा तैयार की गई गलत जानकारी और राजनीतिक दबाव का हिस्सा है।

    रूस की भूमिका पर यूक्रेन का आरोप

    यूक्रेनी दूतावास का कहना है कि रूस ने भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी को लेकर तथाकथित “आधिकारिक बयान” जारी किया। इसमें रूस की स्पेशल सर्विसेज द्वारा बनाई गई मनगढ़ंत जानकारी भारत की संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई गई, जिससे यूक्रेन पर गलत आरोप लगाए जा सकें। यूक्रेन ने इसे राजनीतिक उपकरण के तौर पर भारत को घसीटने की कोशिश बताया और कहा कि रूस अब भी दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल देने की सोच रखता है।

    भारत की संप्रभुता और न्याय प्रणाली पर हमला

    यूक्रेनी दूतावास ने जोर देकर कहा कि रूस का यह रवैया भारत की संप्रभुता और लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान है। दूतावास ने स्पष्ट किया कि भारत का न्याय प्रणाली राजनीतिक दबाव के आधार पर काम नहीं करती और यह मामले की निष्पक्ष जांच करेगी। यूक्रेन ने यह भी कहा कि रूस ने जांच शुरू होने से पहले ही निष्कर्ष निकालने की कोशिश की, जिससे यह पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती थी।

    यूक्रेन का भरोसा भारत पर

    यूक्रेनी दूतावास ने भारत की जांच और न्याय प्रणाली पर भरोसा जताया। उन्होंने भारत के अधिकारियों से अपील की कि वे उकसावे में न आएं और मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करें। यूक्रेन ने यह भी कहा कि वह सच सामने लाने के लिए पूरी तैयारी के साथ भारतीय जांच में सहयोग करेगा।