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  • झड़ते बालों से हैं परेशान तो ऐसे करें नारियल तेल का इस्तेमाल जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    झड़ते बालों से हैं परेशान तो ऐसे करें नारियल तेल का इस्तेमाल जानिए लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बनती जा रही है। बदलती जीवनशैली तनाव खानपान में पोषक तत्वों की कमी नींद पूरी न होना और बालों की सही देखभाल नहीं करना इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। बालों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए बाजार में कई तरह के उत्पाद मौजूद हैं लेकिन घरेलू स्तर पर नारियल तेल का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। नारियल तेल बालों को कंडीशन करने और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि बालों का झड़ना लगातार बढ़ रहा हो तो केवल घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय कारण की पहचान करना जरूरी है।

    नारियल तेल को बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल करने का एक आसान तरीका है इसे हल्का गुनगुना करके सिर की त्वचा पर लगाना। तेल को बहुत गर्म नहीं करना चाहिए। हल्के हाथों से उंगलियों की मदद से सिर की त्वचा पर मसाज की जा सकती है। इससे बालों में तेल अच्छी तरह फैलता है और सिर की त्वचा की मालिश करने से आराम भी महसूस हो सकता है। मसाज करते समय नाखूनों का इस्तेमाल करने के बजाय उंगलियों के पोरों से धीरे धीरे मालिश करना बेहतर रहता है।

    अगर बाल बहुत ज्यादा रूखे हैं तो नारियल तेल को बालों की लंबाई पर भी लगाया जा सकता है। खासतौर पर बालों के सिरों पर थोड़ी मात्रा में तेल लगाने से रूखापन और उलझने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। तेल लगाने के बाद कुछ समय के लिए बालों को छोड़ दें और फिर हल्के शैंपू से धो लें। बहुत अधिक तेल लगाने से बाल चिपचिपे हो सकते हैं और उन्हें साफ करने में ज्यादा शैंपू की जरूरत पड़ सकती है।

    नारियल तेल में कुछ लोग एलोवेरा जेल या मेथी जैसी चीजें मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे घरेलू मिश्रणों का इस्तेमाल करने से पहले यह देखना जरूरी है कि किसी चीज से एलर्जी या सिर की त्वचा में जलन तो नहीं होती। पहली बार इस्तेमाल करने वाले लोग थोड़ी मात्रा को त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर प्रतिक्रिया देख सकते हैं। जलन खुजली लालिमा या किसी तरह की परेशानी होने पर इसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए।

    बालों को मजबूत बनाए रखने के लिए केवल तेल लगाना पर्याप्त नहीं है। भोजन में प्रोटीन आयरन जिंक विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना भी महत्वपूर्ण है। दालें अंडे दूध दही हरी सब्जियां फल और मेवे जैसे खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना भी बालों की सामान्य सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है।

    बालों को धोने के बाद बहुत जोर से रगड़ने या लगातार गर्म उपकरणों का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। गीले बाल अपेक्षाकृत कमजोर होते हैं इसलिए उन्हें धीरे से सुखाना बेहतर रहता है। बहुत कसकर बाल बांधने की आदत भी बालों पर खिंचाव बढ़ा सकती है।

    ध्यान रखें कि हर व्यक्ति में बाल झड़ने का कारण अलग हो सकता है। अगर बाल अचानक बहुत तेजी से झड़ने लगें सिर की त्वचा पर खुजली या घाव हों या बालों में स्पष्ट रूप से खाली जगह दिखाई देने लगे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। नारियल तेल बालों की देखभाल का एक सामान्य घरेलू तरीका हो सकता है लेकिन यह हर तरह के बाल झड़ने का इलाज नहीं है।

  • उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    उंगलियां मिलाने पर भी गैप दिखे तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे आर्थिक स्थिति और स्वभाव से जोड़कर देखा जाता है

    नई दिल्ली ।हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं के अलावा उंगलियों की बनावट और उनके बीच दिखाई देने वाले अंतर को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि जब हथेली की सभी उंगलियों को एक साथ मिलाने के बाद भी उनके बीच गैप दिखाई देता है, तो इससे व्यक्ति के स्वभाव और आर्थिक स्थिति से जुड़े कुछ संकेत मिल सकते हैं। अलग-अलग उंगलियों के बीच बने गैप का अलग अर्थ बताया गया है।

    तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच गैप को हस्तरेखा शास्त्र में स्वतंत्र विचारों से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर दिखाई देता है, वे किसी के दबाव में रहकर काम करना पसंद नहीं करते। वे अपने तरीके से निर्णय लेना और स्वतंत्र होकर काम करना पसंद कर सकते हैं।

    ऐसे लोगों को मेहनती भी माना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, ये लोग अपनी मेहनत के दम पर धन और मान-सम्मान हासिल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि, कमाई के साथ खर्च करने की प्रवृत्ति भी अधिक हो सकती है। इसलिए इन्हें आर्थिक मामलों में अनुशासन और खर्च पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है। मान्यता के अनुसार, यदि ऐसे लोग अपनी योजनाओं और खर्च को व्यवस्थित तरीके से संभालें, तो जीवन में अच्छी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

    मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच गैप को आर्थिक स्थिति और करियर से जोड़कर देखा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र की मान्यता के अनुसार, ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती वर्षों में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर 25 वर्ष की उम्र तक आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने की बात कही जाती है। करियर में भी स्थिरता आने में समय लग सकता है।

    इसके बावजूद ऐसे लोगों के स्वभाव को उदार माना जाता है। मान्यता है कि इनके पास धन सीमित होने के बावजूद ये दूसरों की मदद करने की कोशिश करते हैं। भविष्य को लेकर ज्यादा चिंता न करने के कारण ये लोग कई बार आर्थिक योजना और बजट बनाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। इससे उन्हें वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सही योजना और बजट के साथ जीवन आगे बढ़ाने पर परिस्थितियों में सुधार की संभावना मानी जाती है।

    अनामिका और कनिष्ठा यानी छोटी उंगली के बीच दिखाई देने वाले गैप को हस्तरेखा शास्त्र में व्यक्ति की वृद्धावस्था की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार, यदि इन दोनों उंगलियों के बीच अंतर हो तो बुढ़ापे में आर्थिक परेशानी की स्थिति बन सकती है। ऐसे लोगों को जीवन के शुरुआती चरण से ही भविष्य के लिए आर्थिक योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

    वहीं, अगर अनामिका और कनिष्ठा के बीच गैप नहीं होता है, तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे वृद्धावस्था में बेहतर आर्थिक स्थिति का संकेत माना जाता है। इस तरह उंगलियों के बीच का अंतर व्यक्ति के स्वभाव, खर्च करने की आदत, आर्थिक योजना और जीवन के अलग-अलग चरणों से जुड़ी मान्यताओं के आधार पर देखा जाता है।

    हालांकि, ये सभी बातें हस्तरेखा शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणी या आर्थिक स्थिति का निश्चित आकलन नहीं माना जाना चाहिए। उंगलियों की बनावट और उनके बीच का अंतर व्यक्ति की शारीरिक संरचना से भी संबंधित हो सकता है। इसलिए इन संकेतों को केवल पारंपरिक हस्तरेखा मान्यताओं के संदर्भ में ही देखना उचित है।

  • दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    नई दिल्ली ।बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। कैल्शियम शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण मिनरल है, जो हड्डियों और दांतों की संरचना को मजबूत बनाए रखने के साथ मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। आमतौर पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए दूध और डेयरी उत्पादों को प्रमुख स्रोत माना जाता है, लेकिन कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जिन्हें डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति दूध कम पीता है या कैल्शियम के लिए दूसरे विकल्प तलाश रहा है, तो पौधों से मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम का सेवन ही पर्याप्त नहीं माना जाता। शरीर में कैल्शियम के बेहतर इस्तेमाल के लिए विटामिन डी, पर्याप्त प्रोटीन, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

    रागी कैल्शियम से भरपूर अनाजों में शामिल है। इसमें कैल्शियम के साथ प्रोटीन और फाइबर भी पाया जाता है। इसे रोटी, दलिया या रागी डोसा के रूप में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। रागी के 100 ग्राम आटे में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है। इसकी मात्रा भोजन की तैयारी और इस्तेमाल किए गए उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है।

    तिल भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। सफेद और काले दोनों तरह के तिल भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल तिल की चटनी, सब्जी या सलाद में किया जा सकता है। तिल से लड्डू भी बनाए जाते हैं, लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। तिल में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है, फिर भी रोजाना सेवन की मात्रा सामान्यतः कम रहती है, इसलिए इसे पूरी डाइट का एक हिस्सा माना जाना चाहिए।

    टोफू उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो दूध से बने खाद्य पदार्थों के अलावा कैल्शियम का स्रोत तलाशते हैं। कैल्शियम-सेट टोफू में प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी मिलता है। हालांकि, सभी टोफू उत्पादों में कैल्शियम की मात्रा समान नहीं होती। इसलिए टोफू खरीदते समय उसके पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।

    हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कैल्शियम पाया जाता है। सहजन के पत्ते, चौलाई और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों को दाल, सब्जी या साग के रूप में भोजन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, पालक में मौजूद ऑक्सलेट कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल पालक पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए निर्भर रहना उचित नहीं है।

    बादाम भी कैल्शियम देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। इनमें मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स भी पाए जाते हैं। थोड़ी मात्रा में बादाम को नाश्ते या स्नैक के रूप में लिया जा सकता है। हालांकि, बादाम में कैल्शियम की मात्रा तिल या कैल्शियम-सेट टोफू से अलग होती है, इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना चाहिए।

    उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों के साथ मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। इसलिए डाइट में कैल्शियम वाले अलग-अलग खाद्य पदार्थों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त विटामिन डी, प्रोटीन और वजन सहने वाली नियमित शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

  • गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    गणेशोत्सव पर घर में बनाएं हलवाई जैसे दानेदार मोतीचूर लड्डू, बेसन से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई की आसान रेसिपी

    नई दिल्ली । गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक और अलग-अलग तरह की मिठाइयां तैयार की जाती हैं। इनमें मोतीचूर के लड्डू भी काफी पसंद किए जाते हैं। बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय इस बार घर पर ही बेसन से दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए किसी खास सांचे या बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं है। सामान्य रसोई में मौजूद सामग्री से भी इसे आसानी से बनाया जा सकता है।

    मोतीचूर लड्डू बनाने के लिए एक कप बेसन, तीन-चौथाई कप पानी, एक कप चीनी, आधा कप पानी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर, एक चुटकी ऑरेंज या येलो फूड कलर, एक बड़ा चम्मच मगज के बीज और तलने के लिए देसी घी या तेल की जरूरत होगी। चाशनी के लिए आधा छोटा चम्मच नींबू का रस भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे चाशनी जमने से बची रहती है।

    सबसे पहले एक बाउल में एक कप बेसन लें। इसमें थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए चिकना और बिना गुठलियों वाला पतला घोल तैयार करें। घोल बहुत ज्यादा गाढ़ा नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसी से बूंदी के छोटे-छोटे दाने तैयार किए जाएंगे।

    अब कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। एक छेद वाली सामान्य कड़छी या कद्दूकस की मदद से बेसन का घोल गर्म तेल में डालें। कड़छी को कड़ाही के ऊपर हल्का थपथपाने पर घोल की छोटी-छोटी बूंदें तेल में गिरने लगेंगी। इन बूंदियों को केवल 10 से 15 सेकंड तक हल्का तलना है। इन्हें ज्यादा देर तक तलने से बूंदी कड़क हो सकती है, जबकि मोतीचूर लड्डू के लिए नरम दाने जरूरी होते हैं।

    इसके बाद चाशनी तैयार करें। एक पैन में एक कप चीनी और आधा कप पानी डालकर गर्म करें। इसमें एक चुटकी फूड कलर, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और आधा छोटा चम्मच नींबू का रस डालें। इसे तब तक गर्म करें जब तक चीनी पूरी तरह घुलकर हल्की चिपचिपी चाशनी न बन जाए। इसके लिए एक तार की चाशनी तैयार करने की जरूरत नहीं है।

    अगर तैयार बूंदी के दाने थोड़े बड़े या असमान हैं, तो उन्हें ठंडा होने के बाद मिक्सी के जार में डालकर केवल एक-दो सेकंड चलाया जा सकता है। इससे बूंदी बारीक और दानेदार हो जाएगी तथा मोतीचूर जैसा टेक्सचर तैयार होगा। ध्यान रखें कि मिक्सी को ज्यादा देर तक न चलाएं।

    अब तैयार बूंदी को गरमा-गरम चाशनी में डालें और धीमी आंच पर करीब दो मिनट तक पकाएं। इस दौरान बूंदी चाशनी को अच्छी तरह सोख लेगी। इसके बाद गैस बंद कर दें और मिश्रण में मगज के बीज डालकर मिला दें। मिश्रण को ढककर करीब 10 मिनट के लिए छोड़ दें।

    जब मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तो हाथों में थोड़ा सा घी लगाएं और इसे गोल आकार देते हुए लड्डू बांध लें। इस तरह घर पर ही दानेदार और स्वादिष्ट मोतीचूर लड्डू तैयार हो जाएंगे। इन्हें भगवान गणेश को भोग में चढ़ाने के साथ परिवार के सदस्यों को भी परोसा जा सकता है।

  • मनी प्लांट की ग्रोथ रुक गई है तो किचन की ये 3 चीजें आजमाएं, हरी और चमकदार पत्तियों के साथ बेल होगी घनी

    मनी प्लांट की ग्रोथ रुक गई है तो किचन की ये 3 चीजें आजमाएं, हरी और चमकदार पत्तियों के साथ बेल होगी घनी

    नई दिल्ली ।घर में लगाया गया मनी प्लांट लंबे समय तक हरा-भरा और घना रहे, इसके लिए केवल पानी देना पर्याप्त नहीं है। कई बार पौधे की नई पत्तियां निकलना कम हो जाती हैं, बेल की बढ़त रुक जाती है या पुरानी पत्तियां पीली होकर गिरने लगती हैं। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर बाजार से महंगी खाद खरीदने के बारे में सोचते हैं। हालांकि घर की रसोई में मौजूद कुछ चीजों का सीमित मात्रा में इस्तेमाल पौधे की देखभाल में किया जा सकता है।

    मनी प्लांट के लिए चाय बनाने के बाद बची चायपत्ती का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें कुछ पोषक तत्व और ऑर्गेनिक मैटर मौजूद होते हैं, जो मिट्टी की गुणवत्ता को बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि चायपत्ती का इस्तेमाल करने से पहले उसे अच्छी तरह साफ करना जरूरी है।

    चाय बनाने के बाद बची पत्ती को साफ पानी से धो लें, ताकि उसमें दूध और चीनी के अवशेष न रहें। इसके बाद इसे पूरी तरह सुखाएं। सूखने के बाद थोड़ी मात्रा में चायपत्ती को गमले की मिट्टी में मिलाया जा सकता है। इसे बार-बार या जरूरत से ज्यादा मात्रा में डालने से बचना चाहिए।

    मनी प्लांट की देखभाल में केले के छिलके से तैयार पानी का भी सीमित इस्तेमाल किया जा सकता है। केले के छिलकों में पोटैशियम सहित कई खनिज मौजूद होते हैं। इससे पौधे के लिए एक साधारण घरेलू लिक्विड फीड तैयार किया जा सकता है। हालांकि इसे किसी नियमित उर्वरक का सीधा विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    इसके लिए दो से तीन केले के छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर पानी में करीब 24 घंटे भिगोकर रखा जा सकता है। इसके बाद छिलकों को पानी से निकाल दें और तैयार पानी को सादे पानी में मिलाकर पौधे में डालें। इसका इस्तेमाल बहुत अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए।

    तीसरा विकल्प चावल धोने के बाद बचा हुआ पानी या बिना नमक वाला चावल पकाने के बाद बचा मांड है। इसमें स्टार्च के साथ कुछ पोषक तत्व भी होते हैं। चावल धोने के पानी को सादे पानी के साथ मिलाकर कभी-कभार मनी प्लांट में इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर चावल का मांड इस्तेमाल कर रहे हैं तो उसमें नमक, तेल या मसाला नहीं होना चाहिए।

    चावल का पानी लंबे समय तक रखकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पुराना या बदबूदार पानी मिट्टी में डालने से बचें, क्योंकि इससे गमले में छोटे कीड़े आने की समस्या हो सकती है।

    इन घरेलू चीजों के इस्तेमाल के साथ पौधे की मूल जरूरतों का ध्यान रखना भी जरूरी है। मनी प्लांट को बहुत तेज सीधी धूप में रखने से उसकी पत्तियां झुलस सकती हैं। इसे ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां पर्याप्त रोशनी मिले, लेकिन बहुत तेज सीधी धूप न पड़े।

    पानी देते समय मिट्टी की ऊपरी सतह की नमी जांच लें। मिट्टी हर समय गीली रहने से जड़ों को नुकसान हो सकता है। गमले में पानी जमा न हो, इसके लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी है। पौधे में मौजूद पीली, सूखी या खराब पत्तियों को साफ कैंची से हटाते रहना भी देखभाल का हिस्सा है। इस तरह घरेलू चीजों के सीमित इस्तेमाल के साथ सही रोशनी, पानी और जल निकासी का संतुलन बनाए रखने से मनी प्लांट की बेहतर देखभाल की जा सकती है।

  • त्वचा की छोटी छोटी गलतियां पड़ सकती हैं भारी इन आसान उपायों से रखें स्किन का खास ख्याल

    त्वचा की छोटी छोटी गलतियां पड़ सकती हैं भारी इन आसान उपायों से रखें स्किन का खास ख्याल


    नई दिल्ली। खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा हर किसी की चाहत होती है लेकिन बदलता मौसम धूल मिट्टी प्रदूषण तनाव और गलत खानपान का असर त्वचा पर आसानी से दिखाई देने लगता है। कई बार लोग चेहरे पर निखार लाने के लिए महंगे प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं लेकिन रोजमर्रा की कुछ सामान्य आदतों में सुधार करके भी त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए सबसे जरूरी है कि उसकी सफाई नमी और सुरक्षा का नियमित रूप से ध्यान रखा जाए।

    दिनभर बाहर रहने के दौरान धूल मिट्टी और प्रदूषण त्वचा पर जमा हो सकते हैं। इसलिए चेहरे को अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार किसी हल्के क्लींजर से साफ करना जरूरी माना जाता है। बहुत ज्यादा बार चेहरा धोने या तेज साबुन का इस्तेमाल करने से त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है। ऐसे में त्वचा को साफ रखने के साथ उसकी नमी बनाए रखना भी जरूरी है।

    मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल का अहम हिस्सा माना जाता है। तैलीय त्वचा वाले लोगों को हल्का और नॉन कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर पसंद आ सकता है जबकि रूखी त्वचा के लिए थोड़ा अधिक मॉइस्चराइजिंग विकल्प उपयोगी हो सकता है। त्वचा को नियमित रूप से मॉइस्चराइज करने से रूखापन और खिंचाव कम महसूस हो सकता है।

    धूप से त्वचा की सुरक्षा करना भी बेहद जरूरी है। लंबे समय तक तेज धूप में रहने से त्वचा पर टैनिंग और समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना अच्छी आदत मानी जाती है। धूप में ज्यादा समय बिताना हो तो टोपी या छाते जैसी चीजों से भी त्वचा को बचाया जा सकता है।

    त्वचा की सेहत का संबंध खानपान और जीवनशैली से भी माना जाता है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना और फल तथा सब्जियों को आहार में शामिल करना शरीर के साथ त्वचा के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा तला भुना भोजन और अनियमित दिनचर्या से बचना बेहतर माना जाता है। पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है क्योंकि लगातार नींद की कमी से चेहरा थका हुआ दिखाई दे सकता है।

    चेहरे को बार बार हाथ लगाने और बिना साफ किए मेकअप के साथ सोने से भी बचना चाहिए। मेकअप करने के बाद रात में त्वचा को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। इसके अलावा तकिए के कवर और चेहरे के संपर्क में आने वाली चीजों की सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए।

    घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी जरूरी है। हर प्राकृतिक चीज हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित हो यह जरूरी नहीं है। किसी नए प्रोडक्ट या घरेलू सामग्री को चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। यदि त्वचा पर लगातार खुजली जलन लालिमा मुंहासे या कोई अन्य समस्या बनी रहती है तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।

    कुल मिलाकर त्वचा की देखभाल के लिए महंगे प्रोडक्ट से ज्यादा जरूरी नियमितता है। साफ सफाई मॉइस्चराइजिंग धूप से सुरक्षा संतुलित खानपान पर्याप्त नींद और सही दिनचर्या को अपनी आदत में शामिल करके त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने की कोशिश की जा सकती है।

  • बवासीर को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

    बवासीर को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं


    नई दिल्ली। बवासीर यानी पाइल्स एक आम समस्या है जिससे बड़ी संख्या में लोग परेशान रहते हैं। इसमें गुदा या मलाशय के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है। कब्ज की समस्या लंबे समय तक बनी रहना मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना टॉयलेट में अधिक देर तक बैठे रहना और खाने में फाइबर की कमी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हो सकते हैं। बवासीर होने पर दर्द खुजली जलन सूजन और मल त्याग के दौरान खून आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते और बवासीर भी मुख्य रूप से दो प्रकार की मानी जाती है।

    पहली होती है आंतरिक बवासीर। यह मलाशय के अंदर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। शुरुआती स्थिति में इसमें आमतौर पर दर्द बहुत कम होता है या बिल्कुल नहीं होता। हालांकि मल त्याग के दौरान ताजा लाल खून दिखाई देना इसका प्रमुख लक्षण हो सकता है। जैसे जैसे समस्या बढ़ती है वैसे वैसे सूजी हुई नसें मलाशय से बाहर की ओर आने लग सकती हैं। आंतरिक बवासीर को गंभीरता के आधार पर चार ग्रेड में बांटा जाता है। शुरुआती ग्रेड में नसें अंदर रहती हैं जबकि आगे की स्थिति में वे बाहर निकल सकती हैं और कुछ मामलों में उन्हें हाथ से वापस अंदर करना पड़ सकता है।

    दूसरी तरह की बवासीर बाहरी बवासीर होती है। यह गुदा के बाहर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। इसमें दर्द खुजली और सूजन जैसी समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सूजी हुई नस के भीतर खून का थक्का बन जाता है। इसे थ्रॉम्बोस्ड हेमोरॉयड कहा जाता है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज दर्द हो सकता है और गुदा के पास गांठ जैसी महसूस हो सकती है। यह स्थिति आमतौर पर जानलेवा नहीं होती लेकिन अचानक तेज दर्द या सूजन होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

    आमतौर पर बवासीर को जानलेवा बीमारी नहीं माना जाता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लगातार होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए। खासकर लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में रक्तस्राव होने पर शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। इससे कमजोरी थकान और चक्कर जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में अत्यधिक रक्तस्राव चिंता का कारण बन सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि मल के साथ खून आने का कारण हर बार बवासीर ही हो यह जरूरी नहीं है। गुदा में दरार यानी फिशर आंतों से जुड़ी दूसरी समस्याएं और कुछ गंभीर बीमारियां भी रक्तस्राव का कारण हो सकती हैं। इसलिए बार बार खून आने पर खुद से इसे बवासीर मानकर इलाज करना सही नहीं है।

    अगर गुदा से लगातार या ज्यादा खून निकल रहा है और इसके साथ चक्कर कमजोरी बेहोशी जैसा महसूस होना तेज दर्द या काला मल आने जैसी समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई दिनों तक कब्ज दर्द खुजली या मल के साथ खून आने की समस्या बनी रहने पर भी जांच कराना जरूरी है।

    बवासीर से बचाव के लिए कब्ज को नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। भोजन में फल सब्जियां साबुत अनाज और दालों जैसी फाइबर वाली चीजें शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने से बचें। टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा देर तक बैठने की आदत भी छोड़नी चाहिए। समय रहते ध्यान देने से बवासीर की समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

  • कितने घंटे पुरानी रोटी खाना सुरक्षित है, जानिए बासी रोटी खाने के फायदे और किन परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए

    कितने घंटे पुरानी रोटी खाना सुरक्षित है, जानिए बासी रोटी खाने के फायदे और किन परिस्थितियों में इससे बचना चाहिए


    नई दिल्ली ।
    भारतीय भोजन में रोटी का खास स्थान है। लंच से लेकर डिनर तक ज्यादातर घरों में रोटी नियमित रूप से खाई जाती है। कई बार रात के खाने में जरूरत से ज्यादा रोटियां बन जाती हैं और कुछ रोटियां अगले दिन के लिए बच जाती हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि रात की बची हुई रोटी कितनी देर तक खाने के लिए सुरक्षित रहती है और क्या बासी रोटी खाने से कोई फायदा भी हो सकता है।

    रोटी को लेकर सबसे जरूरी बात उसके सही तरीके से रखे जाने की है। अगर रोटी को बनाकर खुले में छोड़ दिया जाए, तो मौसम के अनुसार वह कुछ ही घंटों में खराब हो सकती है। खासतौर पर गर्म मौसम में भोजन के जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रात की बची रोटी को अगले दिन खाना जोखिम भरा हो सकता है।

    अगर रोटी को किसी साफ और बंद डिब्बे में रखकर फ्रिज में सुरक्षित तरीके से रखा गया है, तो इसे अगले दिन सुबह या दोपहर तक खाया जा सकता है। सामान्य तौर पर रोटी को 12 से 24 घंटे तक ही सुरक्षित माना जाता है। 24 घंटे से ज्यादा पुरानी रोटी खाने से बचने की सलाह दी जाती है। लंबे समय तक रखे गए भोजन में बैक्टीरिया या फंगस पनपने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे पेट खराब होने जैसी परेशानी हो सकती है।

    सही तरीके से रखी गई और लगभग 12 से 15 घंटे पुरानी रोटी के कुछ संभावित फायदे भी बताए जाते हैं। रोटी ठंडी होने के बाद उसमें मौजूद स्टार्च का एक हिस्सा रेजिस्टेंट स्टार्च में बदल जाता है। इसे पचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और बार-बार भूख लगने की संभावना कम हो सकती है। इसी वजह से वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ठंडी रोटी को एक विकल्प माना जाता है।

    बासी रोटी में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के लिए भी उपयोगी हो सकता है। सुबह पेट साफ नहीं होने जैसी समस्या से परेशान लोग ठंडी रोटी को दूध के साथ खाने का विकल्प अपना सकते हैं। इसके अलावा ठंडी रोटी को सुबह ठंडे दूध में मिलाकर खाने से शरीर की गर्मी कम महसूस होने और पेट को ठंडक मिलने की बात भी कही जाती है।

    हालांकि, बासी रोटी खाने से पहले उसकी स्थिति की जांच करना जरूरी है। अगर रोटी से अजीब या खराब गंध आ रही हो, उसका रंग बदल गया हो या उस पर फंगस अथवा सफेद धब्बे दिखाई दे रहे हों, तो उसे बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। ऐसी रोटी को तुरंत फेंक देना बेहतर है।

    फ्रिज में रखी रोटी खाने से पहले उसे हल्का गर्म किया जा सकता है। इससे रोटी नरम हो जाती है और उसे खाना आसान रहता है। इस तरह रात की बची रोटी को सुरक्षित तरीके से रखने और समय सीमा का ध्यान रखने पर ही अगले दिन इस्तेमाल करना बेहतर है।

  • गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    गणेश चतुर्थी पर घर में बनाएं चॉकलेट मोदक, डार्क चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्वादिष्ट मिठाई

    नई दिल्ली ।गणेश चतुर्थी पर अगर इस बार भोग के लिए कुछ अलग बनाना चाहते हैं, तो चॉकलेट मोदक एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद वाला है और घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसमें डार्क चॉकलेट के साथ नारियल, काजू, बादाम और पिस्ता का इस्तेमाल किया जाता है। चॉकलेट का स्वाद बच्चों को भी पसंद आ सकता है।

    चॉकलेट मोदक तैयार करने के लिए 250 ग्राम डार्क चॉकलेट, 100 ग्राम नारियल का बुरादा, दो चम्मच बारीक कटे काजू, दो चम्मच बारीक कटे बादाम और दो चम्मच बारीक कटा पिस्ता चाहिए। इसके अलावा 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क और एक चम्मच घी की जरूरत होगी। इन सीमित सामग्रियों से मोदक का मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले डार्क चॉकलेट को पिघलाना होगा। इसके लिए एक पैन में थोड़ा पानी गर्म करें और उसके ऊपर एक कटोरी रखें। कटोरी में डार्क चॉकलेट डालकर धीमी आंच पर धीरे-धीरे पिघलाएं। चॉकलेट को सीधे तेज आंच पर गर्म करने से बचना चाहिए। डबल बॉयलर तरीके से चॉकलेट को धीरे-धीरे पिघलाया जा सकता है।

    इसके बाद दूसरे पैन में एक चम्मच घी गर्म करें। इसमें कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ता और नारियल का बुरादा डालें। सभी चीजों को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भूनें। इस दौरान ध्यान रखें कि नारियल और ड्राई फ्रूट्स ज्यादा न भुनें।

    जब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तब इसमें 50 ग्राम कंडेंस्ड मिल्क डालें। इसे अच्छी तरह मिलाते हुए तब तक चलाएं, जब तक सभी सामग्री आपस में मिलकर थोड़ा गाढ़ा मिश्रण न बना लें। इसके बाद इसमें पहले से पिघलाई गई डार्क चॉकलेट डालकर अच्छी तरह मिक्स करें।

    चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स का मिश्रण तैयार होने के बाद इसे कुछ देर ठंडा होने दें। मिश्रण इतना ठंडा हो जाए कि उसे आसानी से सांचे में भरा जा सके, तब मोदक बनाने की प्रक्रिया शुरू करें।

    मोदक के सांचे पर पहले हल्की-सी घी की परत लगा दें। इससे तैयार मोदक को सांचे से निकालने में आसानी होगी। अब चॉकलेट मिश्रण को सांचे में भरकर हल्के हाथ से दबाएं। इसके बाद सांचे को खोलकर मोदक को सावधानी से बाहर निकाल लें।

    इसी तरह पूरे मिश्रण से मोदक तैयार करें और कुछ देर के लिए इन्हें सेट होने दें। इसके बाद इन्हें ठंडा करके परोसा जा सकता है। गणेश चतुर्थी के भोग के अलावा घर आए मेहमानों और बच्चों को भी ये मोदक खिलाए जा सकते हैं।

    चॉकलेट, नारियल और ड्राई फ्रूट्स का संयोजन इस मिठाई को पारंपरिक मोदक से अलग स्वाद देता है। खासतौर पर जिन बच्चों को सामान्य मोदक पसंद नहीं आते, उनके लिए यह चॉकलेट वाला विकल्प पसंद किया जा सकता है। चॉकलेट पिघलाते समय डबल बॉयलर का इस्तेमाल और सांचे पर हल्की घी की परत लगाना इसकी तैयारी को आसान बनाता है।

  • दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें

    दवाओं से पहले जीवनशैली पर दें ध्यान स्वस्थ शरीर और खुशहाल जीवन के लिए अपनाएं ये जरूरी आदतें


    नई दिल्ली।
    अच्छी सेहत हर व्यक्ति की सबसे बड़ी जरूरत है लेकिन व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। काम का तनाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। स्वस्थ रहने के लिए हमेशा कठिन नियम अपनाने की जरूरत नहीं होती बल्कि रोजमर्रा की कुछ आसान आदतों में बदलाव करके भी शरीर को बेहतर तरीके से स्वस्थ रखा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता किसी बीमारी के बाद नहीं बल्कि पहले से शुरू होनी चाहिए।

    स्वस्थ रहने के लिए संतुलित भोजन सबसे अहम माना जाता है। रोज के भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। अधिक तला हुआ भोजन ज्यादा नमक और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन सीमित रखना बेहतर होता है। पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह ताजा और घर का बना भोजन प्राथमिकता देने से खानपान को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। भोजन की मात्रा के साथ खाने का समय भी नियमित रखना जरूरी है।

    पर्याप्त पानी पीना भी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान कमजोरी और सिरदर्द जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। इसलिए दिनभर अपनी जरूरत के अनुसार पानी पीते रहना चाहिए। हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत उसकी उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।

    शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना भी जरूरी है। रोज कुछ समय पैदल चलना योग करना हल्की एक्सरसाइज करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि करना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत से बचना भी महत्वपूर्ण है। काम के बीच छोटे ब्रेक लेकर कुछ देर चलना शरीर के लिए बेहतर हो सकता है।

    स्वास्थ्य के लिए नींद को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। देर रात तक मोबाइल या अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल करने से नींद प्रभावित हो सकती है इसलिए सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करनी चाहिए। तनाव को नियंत्रित करना भी स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है। ध्यान योग किताब पढ़ना या अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना मानसिक तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके अलावा व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है। हाथों की नियमित सफाई साफ कपड़े और आसपास की स्वच्छता कई संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकती है। समय समय पर सामान्य स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी हो सकता है ताकि किसी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके।

    ध्यान रखना चाहिए कि ये सामान्य स्वास्थ्य सुझाव हैं और किसी बीमारी का इलाज नहीं हैं। अगर शरीर में लगातार कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें या पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। स्वस्थ जीवन का आधार संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद मानसिक शांति और साफ सफाई जैसी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण आदतें हैं। इन्हें रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाकर लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।