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  • बालों को लंबा और घना बनाने के लिए कौन सा तेल लगाएं? एक्सपर्ट ने बताए तीन खास हेयर ऑयल और उनके फायदे

    बालों को लंबा और घना बनाने के लिए कौन सा तेल लगाएं? एक्सपर्ट ने बताए तीन खास हेयर ऑयल और उनके फायदे

    नई दिल्ली । लंबे, घने और चमकदार बालों की चाहत में लोग कई तरह के हेयर केयर प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। बालों की देखभाल में तेल लगाना भी एक पुराना और आसान तरीका माना जाता है। हालांकि, बालों की समस्या के हिसाब से सही तेल का चुनाव करना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग तेल अलग जरूरतों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

    डर्मेटोलॉजिस्ट निरुपमा परवंदा ने बालों की देखभाल के लिए तीन तेलों के बारे में जानकारी दी है। इनमें नारियल तेल, रोजमेरी ऑयल और बादाम का तेल शामिल हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक, इनका इस्तेमाल बालों की स्थिति और जरूरत को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।

    सबसे पहले नारियल तेल की बात करें तो यह खासतौर पर रूखे और फ्रिजी बालों के लिए उपयोगी माना जाता है। अगर बाल आसानी से उलझते हैं, उनमें नमी की कमी रहती है या वे काफी ड्राई दिखाई देते हैं, तो नारियल तेल मददगार हो सकता है। यह बालों में प्रोटीन लॉस को कम करने में सहायता करता है।

    नारियल तेल के इस्तेमाल से बालों में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे बालों का रूखापन और फ्रिजीनेस कुछ कम नजर आ सकती है। इसके साथ ही बाल अधिक मुलायम और चमकदार दिखाई दे सकते हैं। इसलिए ड्राई हेयर की समस्या वाले लोगों के लिए यह एक उपयोगी विकल्प हो सकता है।

    दूसरा विकल्प रोजमेरी ऑयल है। इसे बालों की ग्रोथ से जोड़कर देखा जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार, रोजमेरी ऑयल कुछ हद तक बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल सीधे बालों या स्कैल्प पर नहीं करना चाहिए।

    रोजमेरी ऑयल को किसी कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए नारियल तेल या जोजोबा ऑयल जैसे तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी रोजमेरी ऑयल को सीधे लगाने के बजाय उसे किसी उपयुक्त कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर हेयर केयर रूटीन में शामिल करना बेहतर तरीका है।

    तीसरा विकल्प बादाम का तेल है। यह खासतौर पर सूखे और बेजान बालों के लिए उपयोगी हो सकता है। बादाम के तेल में विटामिन ई और फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो बालों को मुलायम बनाने में मदद कर सकते हैं।

    अगर बालों में चमक कम हो गई है या वे रूखे और बेजान नजर आते हैं, तो बादाम तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बालों की फ्रिजीनेस कम करने और उन्हें अधिक मुलायम व चमकदार दिखाने में मदद मिल सकती है।

    इस तरह बालों की जरूरत के अनुसार इन तीनों तेलों में से विकल्प चुना जा सकता है। रूखे और फ्रिजी बालों के लिए नारियल तेल, ग्रोथ पर ध्यान देने वालों के लिए उचित तरीके से इस्तेमाल किया गया रोजमेरी ऑयल और सूखे-बेजान बालों के लिए बादाम तेल उपयोगी हो सकता है। किसी भी तेल से परेशानी या जलन होने पर उसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए।

  • चेहरे की चमक बढ़ाने से लेकर दाग धब्बों तक एलोवेरा और हल्दी का ये तरीका आ सकता है काम स्किन केयर विथ एलोवेरा हल्दी

    चेहरे की चमक बढ़ाने से लेकर दाग धब्बों तक एलोवेरा और हल्दी का ये तरीका आ सकता है काम स्किन केयर विथ एलोवेरा हल्दी


    नई दिल्ली। आज के समय में त्वचा की देखभाल के लिए लोग कई तरह के महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों को भी पारंपरिक तौर पर स्किन केयर में इस्तेमाल किया जाता रहा है। एलोवेरा और हल्दी इन्हीं में शामिल हैं। एलोवेरा त्वचा को ठंडक और नमी देने के लिए जाना जाता है जबकि हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक घरेलू देखभाल में किया जाता रहा है। दोनों को सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा को साफ और फ्रेश महसूस कराने में मदद मिल सकती है।

    एलोवेरा में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है और इसका जेल त्वचा पर लगाने से त्वचा को हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर गर्मी या धूप के संपर्क के बाद एलोवेरा जेल त्वचा को ठंडक देने वाला एहसास दे सकता है। वहीं हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है। इसमें करक्यूमिन नामक यौगिक पाया जाता है जिसे इसके एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है।

    घर पर एलोवेरा और हल्दी का फेस पैक बनाने के लिए ताजा और साफ एलोवेरा जेल लिया जा सकता है। इसमें बहुत थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाई जा सकती है। दोनों को अच्छी तरह मिलाकर चेहरे पर पतली परत में लगाया जा सकता है। इसे कुछ समय तक रखने के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। इसके बाद त्वचा के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है। हल्दी की मात्रा ज्यादा रखने से चेहरे पर पीला रंग रह सकता है इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना बेहतर है।

    अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है तो किसी भी घरेलू नुस्खे को सीधे पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। इसके लिए मिश्रण को त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर देखें। अगर लालिमा जलन खुजली या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खुले घाव या पहले से irritated त्वचा पर भी ऐसे मिश्रण लगाने से बचना बेहतर है।

    यह बात भी ध्यान रखने वाली है कि एलोवेरा और हल्दी किसी गंभीर त्वचा समस्या का इलाज नहीं हैं। मुंहासे दाग धब्बे एलर्जी या लगातार होने वाली त्वचा संबंधी परेशानी के लिए त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा उचित रहता है। साथ ही दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    एलोवेरा और हल्दी का इस्तेमाल त्वचा को प्राकृतिक तरीके से संवारने वाली सामान्य घरेलू दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय का असर भी अलग हो सकता है। नियमित सफाई पर्याप्त मॉइस्चराइजिंग संतुलित खानपान पर्याप्त पानी और धूप से बचाव के साथ त्वचा की बेहतर देखभाल की जा सकती है।

  • चींटियों की लाइन देखकर न हों परेशान किचन की इन जगहों पर छिपा हो सकता है पूरा राज

    चींटियों की लाइन देखकर न हों परेशान किचन की इन जगहों पर छिपा हो सकता है पूरा राज


    नई दिल्ली। किचन में अचानक चींटियों की लंबी लाइन दिखाई दे तो सबसे पहले लोगों का ध्यान चीनी या किसी मीठी चीज की तरफ जाता है। अक्सर माना जाता है कि जहां खाने की चीज खुली रह गई वहीं से चींटियां पहुंची होंगी। लेकिन किचन में चींटियों के आने की वजह केवल खाना नहीं होती। पानी की उपलब्धता नमी और किसी छोटी दरार से मिलने वाला रास्ता भी उन्हें एक ही जगह पर बार बार आने के लिए आकर्षित कर सकता है। इसलिए चींटियों से छुटकारा पाने के लिए केवल उन्हें हटाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनके आने की वजह और रास्ते को समझना जरूरी है।

    चींटियों की शुरुआत अक्सर कुछ स्काउट चींटियों से होती है। ये खाने और पानी की तलाश में आसपास घूमती हैं। जब उन्हें कोई उपयोगी स्रोत मिल जाता है तो वे रास्ते पर गंध का निशान छोड़ सकती हैं। बाद में दूसरी चींटियां उसी निशान का पीछा करते हुए वहां पहुंचती हैं। यही वजह है कि एक दो चींटियों को हटाने के बाद भी कुछ समय में उसी जगह पर फिर से चींटियों की लाइन दिखाई दे सकती है।

    सबसे पहले किचन में रखी खाने की चीजों की जांच करें। चीनी शहद बिस्किट मिठाई और दूसरे मीठे खाद्य पदार्थ चींटियों को जल्दी आकर्षित कर सकते हैं। काउंटर पर खाना बनाने के बाद गिरे हुए छोटे टुकड़े या चिपचिपे दाग भी उनके लिए भोजन का स्रोत बन सकते हैं। इसलिए खाना बनाने के बाद किचन काउंटर को अच्छी तरह साफ करें और इस्तेमाल किए हुए बर्तनों को लंबे समय तक सिंक में न छोड़ें।

    किचन के फर्श और कोनों की सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है। स्कर्टिंग बोर्ड फर्श के किनारे और अलग अलग सतहों के बीच की जगहों में खाने के बेहद छोटे कण जमा हो सकते हैं। नियमित रूप से झाड़ू या वैक्यूम करने से इन कणों को हटाने में मदद मिल सकती है। काउंटर के जोड़ और कोनों को भी नजरअंदाज न करें क्योंकि इन जगहों पर गंदगी जमा होने के साथ चींटियों के आने का रास्ता भी हो सकता है।

    अगर खाने की चीजें सुरक्षित रखने के बावजूद चींटियां लगातार दिखाई दे रही हैं तो सिंक और नल के आसपास की नमी जरूर जांचें। टपकता नल पाइप का हल्का रिसाव या सिंक के पास जमा पानी चींटियों को आकर्षित कर सकता है। कैबिनेट के अंदर पाइप के जोड़ भी देखें और जहां रिसाव हो उसे जल्द ठीक कराएं। किचन की गीली जगहों को सूखा रखना भी जरूरी है।

    आटा चीनी अनाज सीरियल और दूसरी सूखी खाद्य सामग्री को खुले पैकेट में रखने के बजाय एयरटाइट कंटेनर में रखें। कूड़ेदान को भी नियमित रूप से खाली करें क्योंकि खाने के बचे हुए हिस्से चींटियों को आकर्षित कर सकते हैं। कूड़ेदान के आसपास की जगह साफ रखने से भी समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

    अगर चींटियां लगातार किसी एक दिशा से आ रही हैं तो उनके रास्ते का पता लगाएं। यह दीवार की दरार फर्श का किनारा काउंटर और दीवार के बीच की जगह या पाइप के आसपास का छोटा गैप हो सकता है। समस्या नियंत्रित होने के बाद ऐसे प्रवेश बिंदुओं को सील किया जा सकता है।

    चींटियों के रास्ते की सफाई के लिए साबुन वाले पानी या उपयुक्त घरेलू क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है। सफेद सिरके और पानी का घोल भी कुछ घरों में सफाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अगर एंट बैट का उपयोग कर रहे हैं तो उसके निर्देशों का पालन करें और उसे बच्चों तथा पालतू जानवरों से दूर रखें। खाद्य सामग्री तैयार करने वाली सतह पर किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल सावधानी से करें।

  • सर्दियों में बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा हेल्दी रहने के लिए रोजमर्रा की इन आदतों को बनाएं अपनी ताकत

    सर्दियों में बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा हेल्दी रहने के लिए रोजमर्रा की इन आदतों को बनाएं अपनी ताकत


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम अपने साथ ठंडक और सुहाना मौसम लेकर आता है लेकिन इस दौरान सेहत को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी रखना भी जरूरी हो जाता है। तापमान कम होने पर कई लोगों की दिनचर्या बदल जाती है और शारीरिक गतिविधियां भी कम हो जाती हैं। ऐसे में सर्दी जुकाम गले में खराश और सांस से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए अपनी रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है। अच्छी डाइट पर्याप्त नींद नियमित गतिविधि और साफ सफाई जैसी आदतें सर्दियों में शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं।

    ठंड के मौसम में खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भोजन में मौसमी सब्जियों फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना बेहतर रहता है। शरीर को गर्म रखने के लिए लोग अक्सर बहुत ज्यादा तला भुना भोजन खाने लगते हैं लेकिन इससे बचना चाहिए। संतुलित और पौष्टिक भोजन शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। आंवला अमरूद संतरा और अन्य मौसमी फल भी डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।

    सर्दियों में पानी पीने की आदत कम हो जाती है लेकिन शरीर को इस मौसम में भी पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। प्यास कम लगने के बावजूद समय समय पर पानी पीते रहना चाहिए। गुनगुना पानी कई लोगों को आरामदायक लग सकता है लेकिन पानी की मात्रा व्यक्ति की उम्र गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। चाय और कॉफी को पानी का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

    ठंड के कारण लोग सुबह उठकर व्यायाम करने से बचते हैं लेकिन शरीर को सक्रिय रखना जरूरी है। मौसम अनुकूल हो तो हल्की वॉक स्ट्रेचिंग योग या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी शारीरिक गतिविधियां की जा सकती हैं। नियमित गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने के साथ मूड को बेहतर बनाए रखने में भी मदद कर सकती है। बहुत ज्यादा ठंड या खराब मौसम में घर के भीतर हल्की एक्सरसाइज करना भी विकल्प हो सकता है।

    सर्दियों में त्वचा की देखभाल भी जरूरी है। ठंडी और शुष्क हवा के कारण त्वचा में रूखापन बढ़ सकता है। नहाने के बाद मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बहुत गर्म पानी से लंबे समय तक नहाने से त्वचा की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है इसलिए सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल बेहतर रहता है। होंठों और हाथों की त्वचा को भी मॉइस्चराइज रखना चाहिए।

    ठंड के मौसम में पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है। देर रात तक जागने और लगातार स्क्रीन देखने की आदत नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। रोज लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करनी चाहिए। अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों को आराम देने में मदद करती है।

    सर्दियों में साफ सफाई को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना और खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना संक्रमण फैलने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतना भी उपयोगी है। बुजुर्ग छोटे बच्चों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को ठंड से बचाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    अगर लगातार बुखार सांस लेने में परेशानी सीने में दर्द बहुत ज्यादा कमजोरी या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दे तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सर्दियों में स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा तरीका किसी एक नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित भोजन नियमित गतिविधि पर्याप्त नींद स्वच्छता और मौसम के अनुसार सावधानी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना है।

  • सिगरेट नहीं पी फिर भी खतरे में 44.4 करोड़ भारतीय पैसिव स्मोकिंग का चौंकाने वाला आंकड़ा

    सिगरेट नहीं पी फिर भी खतरे में 44.4 करोड़ भारतीय पैसिव स्मोकिंग का चौंकाने वाला आंकड़ा


    नई दिल्ली। सिगरेट और तंबाकू का धुआं सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए ही नुकसानदायक नहीं होता बल्कि उसके आसपास मौजूद लोगों की सेहत पर भी गंभीर असर डाल सकता है। इसे सेकेंड हैंड स्मोक या पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है। एक नई स्टडी के मुताबिक 2023 में भारत में करीब 44.4 करोड़ लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आए। यह आंकड़ा इसलिए भी चिंता बढ़ाता है क्योंकि इन लोगों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्होंने खुद धूम्रपान नहीं किया है।

    दुनियाभर की स्थिति देखें तो 2023 में करीब 271 करोड़ लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में थे। भारत में प्रभावित लोगों की संख्या चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा बताई गई है। चीन में यह आंकड़ा करीब 66.4 करोड़ और इंडोनेशिया में करीब 14.2 करोड़ रहा। भारत चीन और इंडोनेशिया को मिलाकर दुनिया में सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने वाली आबादी का बड़ा हिस्सा सामने आता है।

    भारत के आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिला है। 1990 में देश में करीब 37.5 करोड़ लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में थे जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 44.4 करोड़ हो गई। हालांकि इसी अवधि में आबादी के अनुपात के हिसाब से सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने की दर कम हुई है। यानी प्रतिशत में कमी के बावजूद देश की बड़ी आबादी के कारण प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या काफी अधिक बनी हुई है।

    इस धुएं का असर केवल सांस लेने में परेशानी तक सीमित नहीं माना जाता। स्टडी में सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। इनमें हृदय रोग फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां स्ट्रोक अस्थमा और कुछ तरह के कैंसर शामिल हैं। लंबे समय तक तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहना शरीर पर लगातार हानिकारक प्रभाव डाल सकता है।

    सबसे चिंता वाली बात इससे जुड़ी मौतों का आंकड़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 2023 में भारत में करीब 3.26 लाख मौतें सेकेंड हैंड स्मोक से जुड़ी थीं। 1990 में यह आंकड़ा करीब 2.17 लाख था। यानी तीन दशक से ज्यादा समय में सेकेंड हैंड स्मोक से जुड़ी अनुमानित मौतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह 2023 में इससे जुड़े स्वास्थ्य नुकसान का अनुमान करीब 9.28 मिलियन DALYs लगाया गया है। यह आंकड़ा समय से पहले होने वाली मौत और बीमारी या विकलांगता के कारण खोए स्वस्थ जीवन वर्षों को दर्शाता है।

    बच्चों के लिए सेकेंड हैंड स्मोक विशेष रूप से चिंता का विषय माना जाता है क्योंकि उनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं। धुएं में मौजूद हानिकारक पदार्थ उनके श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। घर में कोई व्यक्ति नियमित रूप से धूम्रपान करता है तो परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए भी धुएं के संपर्क से बचना मुश्किल हो सकता है।

    दुनिया में सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क का अनुपात घटने के बावजूद आबादी बढ़ने के कारण प्रभावित लोगों की कुल संख्या अभी भी बहुत बड़ी है। यही वजह है कि केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को ही नहीं बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी इसके खतरे को समझना जरूरी है। घर ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों पर धुएं के संपर्क को कम करना पैसिव स्मोकिंग से बचाव का महत्वपूर्ण तरीका है।

  • अलसी सिर्फ सेहत के लिए नहीं त्वचा के लिए भी है खास जानिए ग्लोइंग स्किन के लिए कैसे करें इस्तेमाल

    अलसी सिर्फ सेहत के लिए नहीं त्वचा के लिए भी है खास जानिए ग्लोइंग स्किन के लिए कैसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली।अलसी को आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है लेकिन इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जाता है। अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो त्वचा को मॉइस्चराइज रखने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि आजकल होम स्किन केयर में अलसी से बने जेल और फेस पैक का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय हो रहा है। अगर आप भी अपनी त्वचा को नेचुरल तरीके से निखारने और मुलायम बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं तो अलसी को अपनी स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं।

    अलसी से जेल तैयार करना इसका सबसे आसान तरीका माना जाता है। इसके लिए एक से दो चम्मच अलसी को पानी में डालकर धीमी आंच पर कुछ देर उबालें। जब पानी थोड़ा गाढ़ा होने लगे तो गैस बंद कर दें और इसे ठंडा होने दें। इसके बाद साफ कपड़े या छन्नी की मदद से जेल को अलग कर लें। तैयार जेल को साफ डिब्बे में रखकर थोड़ी मात्रा में चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसे कुछ देर त्वचा पर रखने के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें।

    अलसी का जेल त्वचा को नमी देने वाली घरेलू देखभाल का हिस्सा बन सकता है। खासकर रूखी त्वचा वाले लोगों को इससे त्वचा में मुलायमपन महसूस हो सकता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    अलसी से फेस पैक भी बनाया जा सकता है। इसके लिए अलसी के जेल में थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट बाद धो लें। अगर त्वचा पर जलन खुजली या लालिमा महसूस हो तो तुरंत इसे धो दें और दोबारा इस्तेमाल न करें। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    कुछ लोग अलसी के पाउडर को दही या अन्य घरेलू सामग्री के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। लेकिन किसी भी मिश्रण को चेहरे पर लगाने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसमें शामिल सभी सामग्री आपकी त्वचा के अनुकूल हैं या नहीं। नींबू जैसी तेज अम्लीय सामग्री को सीधे चेहरे पर लगाने से बचना बेहतर है क्योंकि इससे कुछ लोगों की त्वचा में जलन या संवेदनशीलता बढ़ सकती है।

    स्किन केयर में अलसी का इस्तेमाल करते समय स्वच्छता का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। घर पर तैयार किया गया अलसी का जेल लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रहता इसलिए इसे कम मात्रा में बनाना बेहतर है। इसे साफ और बंद डिब्बे में रखें तथा खराब गंध या रंग में बदलाव दिखाई देने पर इस्तेमाल न करें। आंखों के आसपास या किसी कटे हुए हिस्से पर इसे लगाने से बचें।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना अच्छी नींद लेना और धूप से त्वचा की सुरक्षा करना भी जरूरी है। अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे खुजली दाने या जलन जैसी समस्या रहती है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। अलसी को स्किन केयर में शामिल करने का उद्देश्य त्वचा को अतिरिक्त घरेलू देखभाल देना है न कि किसी त्वचा संबंधी समस्या का इलाज करना।

  • दिल्ली में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो जरूर जाएं चिड़ियाघर जंगल जैसा माहौल और वन्यजीवों का रोमांच मिलेगा एक ही जगह

    दिल्ली में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो जरूर जाएं चिड़ियाघर जंगल जैसा माहौल और वन्यजीवों का रोमांच मिलेगा एक ही जगह


    नई दिल्ली। दिल्ली घूमने की योजना बना रहे लोगों के लिए राष्ट्रीय प्राणी उद्यान यानी दिल्ली चिड़ियाघर एक ऐसी जगह है जहां मनोरंजन के साथ वन्यजीवों को करीब से देखने का अनुभव भी मिलता है। राजधानी के बीचोंबीच स्थित यह जगह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। अगर आप शहर की भीड़भाड़ और रोजमर्रा की भागदौड़ से कुछ समय दूर प्रकृति और वन्यजीवों के बीच बिताना चाहते हैं तो चिड़ियाघर की सैर एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    दिल्ली चिड़ियाघर का परिसर काफी बड़ा है और यहां अलग अलग तरह के वन्यजीवों को देखने का मौका मिलता है। यहां घूमते समय पर्यटक कई तरह के पक्षियों और जानवरों को उनके प्राकृतिक व्यवहार के करीब देख सकते हैं। चिड़ियाघर की सैर बच्चों के लिए खास तौर पर सीखने का अनुभव बन सकती है क्योंकि किताबों और तस्वीरों में देखे गए वन्यजीवों को सामने देखकर उनके बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ती है।

    चिड़ियाघर में घूमने का मजा तभी ज्यादा आता है जब आप पर्याप्त समय लेकर जाएं। परिसर में पैदल घूमते हुए अलग अलग हिस्सों को देखने में समय लग सकता है। इसलिए जल्दबाजी के बजाय आराम से घूमना बेहतर रहता है। गर्मी के मौसम में सुबह का समय ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है जबकि मौसम सुहावना होने पर परिवार के साथ लंबे समय तक घूमने का आनंद लिया जा सकता है। यात्रा से पहले प्रवेश समय और टिकट से जुड़ी ताजा जानकारी आधिकारिक स्रोत से जांच लेना उचित रहेगा।

    यहां घूमने के दौरान वन्यजीवों के साथ सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है। जानवरों को किसी तरह का भोजन नहीं देना चाहिए और उनके बाड़े के पास शोर करने से भी बचना चाहिए। चिड़ियाघर में लगे निर्देशों का पालन करना पर्यटकों और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को खास तौर पर उनका ध्यान रखना चाहिए।

    दिल्ली चिड़ियाघर केवल घूमने और तस्वीरें लेने की जगह नहीं है बल्कि वन्यजीवों और जैव विविधता को समझने का अवसर भी देता है। यहां आने वाले बच्चों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि अलग अलग प्रजातियों का संरक्षण क्यों जरूरी है। वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिहाज से ऐसी जगहों की यात्रा उपयोगी हो सकती है।

    परिवार के साथ घूमने वालों के लिए चिड़ियाघर की सैर को एक छोटे दिनभर के आउटिंग प्लान में शामिल किया जा सकता है। दिल्ली के दूसरे पर्यटन स्थलों के साथ इसे जोड़कर यात्रा का कार्यक्रम बनाया जा सकता है। हालांकि एक ही दिन में बहुत ज्यादा जगह देखने के बजाय अपनी सुविधा और मौसम के अनुसार कार्यक्रम बनाना ज्यादा आरामदायक रहेगा।

    अगर आप दिल्ली में ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहां मनोरंजन के साथ बच्चों को कुछ नया सीखने का मौका भी मिले तो दिल्ली चिड़ियाघर आपकी यात्रा सूची में शामिल हो सकता है। वन्यजीवों को देखकर बच्चों की जिज्ञासा बढ़ सकती है और परिवार के साथ बिताया समय यादगार बन सकता है। बस इतना ध्यान रखें कि चिड़ियाघर की सैर के दौरान नियमों का पालन करें और वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार रखें।

  • महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़कर आजमाएं केसर का नुस्खा चेहरे की चमक के लिए ऐसे करें इस्तेमाल

    महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़कर आजमाएं केसर का नुस्खा चेहरे की चमक के लिए ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली। केसर का इस्तेमाल सदियों से खानपान के साथ साथ सौंदर्य देखभाल में भी किया जाता रहा है। इसकी खुशबू और रंग के अलावा इसमें मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसे त्वचा के लिए उपयोगी माना जाता है। खासतौर पर चेहरे की देखभाल में केसर का इस्तेमाल त्वचा को मुलायम बनाए रखने और चेहरे पर प्राकृतिक निखार लाने के लिए किया जाता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को चेहरे पर लगाने से पहले सावधानी जरूरी है।

    केसर को त्वचा की देखभाल में शामिल करने का एक आसान तरीका केसर वाला फेस पैक है। इसके लिए कुछ केसर के रेशों को थोड़े से दूध में भिगोकर रखा जा सकता है। कुछ समय बाद जब दूध में केसर का रंग उतर जाए तो इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। करीब दस से पंद्रह मिनट बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें। इससे त्वचा पर नमी महसूस हो सकती है और चेहरे को फ्रेश लुक मिल सकता है।

    केसर को शहद के साथ मिलाकर भी फेस पैक तैयार किया जाता है। शहद त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है जबकि केसर को पारंपरिक रूप से त्वचा की रंगत और चमक से जोड़कर देखा जाता है। इसके लिए केसर के कुछ रेशों को थोड़े से शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। कुछ देर बाद चेहरा धो लें। यदि त्वचा संवेदनशील है तो इस मिश्रण का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहेगा।

    केसर और एलोवेरा जेल का मिश्रण भी घरेलू स्किन केयर में इस्तेमाल किया जाता है। एलोवेरा त्वचा को ठंडक और नमी देने में मदद कर सकता है। वहीं केसर को इसके प्राकृतिक गुणों के कारण त्वचा की देखभाल में शामिल किया जाता है। दोनों को थोड़ी मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। इसे आंखों के आसपास लगाने से बचना चाहिए।

    केसर का इस्तेमाल करते समय मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है। ज्यादा केसर लगाने से ज्यादा फायदा मिलेगा ऐसा जरूरी नहीं है। प्राकृतिक चीज होने के बावजूद कुछ लोगों को इससे एलर्जी या जलन हो सकती है। इसलिए पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ या कान के पीछे थोड़ी मात्रा लगाकर पैच टेस्ट करना समझदारी है। जलन लालिमा खुजली या सूजन जैसी परेशानी महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    चेहरे की चमक केवल किसी एक घरेलू नुस्खे पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना भी त्वचा की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    केसर को स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जा सकता है लेकिन इसे किसी इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। अगर चेहरे पर लगातार मुंहासे दाग खुजली या अन्य त्वचा संबंधी समस्या बनी हुई है तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। घरेलू उपायों का इस्तेमाल सावधानी के साथ करने पर केसर आपकी सामान्य त्वचा देखभाल का एक हिस्सा बन सकता है।

  • बरसात में सेहत का रखें पूरा ख्याल: संक्रमण और मच्छरों से बचने के लिए जानिए रोजाना की जरूरी सावधानियां

    बरसात में सेहत का रखें पूरा ख्याल: संक्रमण और मच्छरों से बचने के लिए जानिए रोजाना की जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली। बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने से कई तरह के संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। गंदा पानी दूषित भोजन और मच्छरों की बढ़ती संख्या बरसात के दिनों में परेशानी का कारण बन सकती है। ऐसे में मौसम का आनंद लेने के साथ अपनी सेहत को लेकर थोड़ी अतिरिक्त सावधानी रखना जरूरी हो जाता है। रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाकर बारिश के मौसम में बीमार पड़ने की संभावना को कम किया जा सकता है।

    बरसात में सबसे पहले साफ पानी पीने पर ध्यान देना चाहिए। बारिश के दौरान पानी के स्रोत दूषित होने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। अगर पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे उबालकर या उचित Water Purification Method से सुरक्षित करने के बाद इस्तेमाल करना बेहतर होता है। बाहर से मिलने वाले ऐसे पेय पदार्थों से भी सावधानी रखना जरूरी है जिनकी साफ सफाई को लेकर भरोसा न हो।

    खाने को लेकर भी बरसात में विशेष सावधानी जरूरी है। सड़क किनारे खुले में रखे खाद्य पदार्थ धूल और गंदगी के संपर्क में आ सकते हैं। नमी और गर्म वातावरण में कुछ खाद्य पदार्थ जल्दी खराब भी हो सकते हैं। इसलिए कोशिश करें कि ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन ही खाएं। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें और लंबे समय तक बाहर रखा हुआ खाना खाने से बचें।

    बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ना भी आम समस्या है। घर के आसपास गमले कूलर की ट्रे बाल्टी छत और दूसरी जगहों पर पानी जमा न होने दें। पानी जमा होने पर मच्छरों को पनपने का मौका मिल सकता है। घर के आसपास नियमित रूप से सफाई करना और जहां जरूरी हो वहां मच्छररोधी उपाय अपनाना मददगार हो सकता है। सोते समय मच्छरदानी या अन्य सुरक्षित उपायों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

    गीले कपड़े और लंबे समय तक नमी में रहने से भी बचना चाहिए। बारिश में भीगने के बाद शरीर और कपड़ों को जल्द से जल्द सुखाना बेहतर होता है। पैरों को खास तौर पर सूखा रखना जरूरी है क्योंकि लगातार गीले जूते या मोजे पहनने से त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। बाहर से लौटने के बाद हाथ पैर साफ पानी से धोना और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

    बरसात में घर की सफाई पर भी ध्यान दें। सीलन और गंदगी वाली जगहों को साफ रखें तथा कमरे में पर्याप्त हवा और रोशनी आने दें। घर के आसपास नालियों में पानी रुकने या कचरा जमा होने की स्थिति हो तो उसे साफ कराने की कोशिश करें। बच्चों और बुजुर्गों को गंदे पानी या कीचड़ वाली जगहों से दूर रखना भी जरूरी है।

    अगर बारिश के मौसम में लगातार बुखार उल्टी दस्त सांस लेने में परेशानी त्वचा पर असामान्य लक्षण या कोई अन्य गंभीर समस्या दिखाई दे तो इसे सामान्य मौसम का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना उचित रहता है। खासकर तेज बुखार या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षणों में समय पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

    कुल मिलाकर बरसात में स्वस्थ रहने के लिए साफ पानी सुरक्षित भोजन मच्छरों से बचाव व्यक्तिगत स्वच्छता और आसपास की सफाई पर ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी बारिश के मौसम को ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बनाने में मदद कर सकती है।

  • नींद में बोलना सिर्फ सपना नहीं हो सकता बार बार बड़बड़ाने की आदत के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह

    नींद में बोलना सिर्फ सपना नहीं हो सकता बार बार बड़बड़ाने की आदत के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह


    नई दिल्ली। रात में सोते समय अचानक बोलना या बड़बड़ाना कई लोगों के साथ होता है। अक्सर परिवार के दूसरे सदस्य इस आदत को नोटिस करते हैं जबकि बोलने वाले व्यक्ति को सुबह उठने के बाद इसकी जानकारी भी नहीं होती। आमतौर पर नींद में बोलना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता और कई मामलों में यह अपने आप होने वाली सामान्य नींद संबंधी प्रक्रिया है। फिर भी अगर यह समस्या लगातार होने लगे या इसके साथ नींद में अन्य असामान्य गतिविधियां दिखाई दें तो इसके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी हो जाता है।

    नींद में बोलने या बड़बड़ाने की स्थिति को सोमनीलोक्वी कहा जाता है। इसे पैरासोमनिया यानी नींद के दौरान होने वाले असामान्य व्यवहारों की श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान व्यक्ति नींद में शब्द बोल सकता है या कभी कभी पूरे वाक्य भी कह सकता है। कई लोगों को सुबह उठने पर यह याद नहीं रहता कि उन्होंने रात में कुछ कहा था। कुछ स्थितियों में नींद में बोलने के साथ हाथ पैर हिलाना या अचानक करवट बदलना जैसी गतिविधियां भी देखी जा सकती हैं।

    नींद में बड़बड़ाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सपने इसका एक सामान्य कारण माने जाते हैं। जब व्यक्ति सपने देख रहा होता है तो दिमाग अलग अलग भावनाओं और घटनाओं को संसाधित करता रहता है। इसी दौरान कभी कभी नींद में आवाज निकल सकती है। दिनभर की घटनाओं का मानसिक दबाव भी नींद के दौरान व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। खासकर तनाव और चिंता की स्थिति में नींद प्रभावित हो सकती है और नींद में बोलने की संभावना बढ़ सकती है।

    बुरे सपने भी नींद में बोलने का एक कारण हो सकते हैं। डर या तनाव से जुड़े सपने के दौरान कुछ लोग नींद में बोलते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति जो नींद में बोलता है वह किसी मानसिक या शारीरिक बीमारी से परेशान है। कई स्वस्थ लोगों में भी कभी कभी ऐसा देखा जा सकता है।

    नींद की कमी और अनियमित सोने का समय भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। अगर व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है या पर्याप्त नींद नहीं लेता है तो नींद का सामान्य चक्र प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से सोने और जागने का समय नियमित रखना जरूरी है। इसके साथ ही सोने से पहले चाय कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि ये कुछ लोगों में नींद को प्रभावित कर सकते हैं। शराब का सेवन भी नींद की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।

    बेहतर नींद के लिए सोने से पहले मोबाइल और दूसरे स्क्रीन टाइम को कम करना भी मददगार हो सकता है। कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक रखना चाहिए। किताब पढ़ना हल्का संगीत सुनना या कुछ देर शांत होकर बैठना दिमाग को आराम देने वाली दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    अगर नींद में बोलना कभी कभी होता है और इससे व्यक्ति की नींद या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं हो रही है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए या इसके साथ नींद में हिंसक हरकतें तेज चीखना चलना बार बार बुरे सपने आना या दिन में अत्यधिक नींद जैसी परेशानी हो तो डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है। सही कारण की पहचान के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि समस्या सामान्य है या किसी अन्य स्लीप डिसऑर्डर से जुड़ी हुई है।