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  • सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का सेवन: लाभ तो हैं, लेकिन ज्यादा खाने से बढ़ सकता है वजन और शुगर

    सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का सेवन: लाभ तो हैं, लेकिन ज्यादा खाने से बढ़ सकता है वजन और शुगर

    नई दिल्ली । सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का क्रेज हर उम्र के लोगों में बढ़ जाता है। बाजार में बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश और खजूर की मांग तेजी से बढ़ जाती है। लोग सोचते हैं कि रोजाना इन्हें खाने से शरीर को गर्माहट, ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। लेकिन क्या यह आदत सभी के लिए सुरक्षित है? डॉक्टरों की राय इसे लेकर साफ है – मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ड्राई फ्रूट्स पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है, जबकि अखरोट और पिस्ता हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। सर्दियों में रोजाना थोड़ी मात्रा में मेवे खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और इम्यूनिटी भी मजबूत रहती है।दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एंड एसोसिएट हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, आम व्यक्ति के लिए रोजाना लगभग 30 ग्राम ड्राई फ्रूट्स पर्याप्त हैं। इससे अधिक खाने पर वजन बढ़ने, ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होने और लंबे समय में स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।

    डॉक्टर यह भी कहते हैं कि ड्राई फ्रूट्स में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। औसतन 100 ग्राम ड्राई फ्रूट्स में केवल 15-16 ग्राम प्रोटीन होता है। ऐसे में सामान्य व्यक्ति के लिए रोजाना 30 ग्राम मेवा खाने से प्रोटीन की मात्रा सीमित ही रहती है। हालांकि एथलीट या शारीरिक श्रम करने वाले लोग इसे 40-50 ग्राम तक बढ़ा सकते हैं।जहां तक वजन और शुगर की चिंता है, तो सभी ड्राई फ्रूट्स इसका कारण नहीं बनते। किशमिश और खजूर जैसे मीठे मेवे कैलोरी में अधिक होते हैं। अधिक मात्रा में सेवन करने से यह मोटापा और ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकते हैं। इसलिए डायबिटीज के मरीजों और वजन कम करने वाले लोगों को इनका सेवन बहुत सीमित मात्रा में करना चाहिए।

    सभी के लिए ड्राई फ्रूट्स सुरक्षित नहीं हैं। पाचन संबंधी समस्याओं, एलर्जी, अस्थमा या किडनी रोग वाले मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के मेवे नहीं खाने चाहिए। खासकर काजू कुछ लोगों में एलर्जी और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकता है।निष्कर्ष यह है कि ड्राई फ्रूट्स सर्दियों में सेहत के लिए लाभकारी हो सकते हैं, लेकिन संतुलन और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। सही चयन और सीमित मात्रा में सेवन करने पर ही ये शरीर के लिए फायदेमंद साबित होते हैं। वरना इन्हें ज्यादा खाने से वजन, शुगर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

    डॉक्टरों का सुझाव है कि रोजाना 30 ग्राम मेवे पर्याप्त हैं। इसमें बादाम, अखरोट, पिस्ता और थोड़ा सा किशमिश शामिल किया जा सकता है। खजूर का सेवन भी सीमित मात्रा में करना चाहिए। इसके साथ ही, किसी भी प्रकार की एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या होने पर हमेशा डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
    सर्दियों में ड्राई फ्रूट्स का सेवन तभी सुरक्षित और लाभकारी है जब इसे संतुलित मात्रा, सही चयन और अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाए।

  • Happy New Year 2026: अपनों को भेजें बेस्ट मैसेज, शायरी और शुभकामनाएं

    Happy New Year 2026: अपनों को भेजें बेस्ट मैसेज, शायरी और शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । : हर साल की तरह इस बार भी नया साल 2026 New Year 2026 अपने साथ नई खुशियां नई उम्मीदें और नए सपने लेकर आया है। साल 2025 ने सभी के लिए मिश्रित अनुभव दिए-किसी के लिए यादगार तो किसी के लिए चुनौतीपूर्ण। अब 2026 की शुरुआत के साथ लोग पुरानी गलतियों और निराशाओं को पीछे छोड़कर नए उत्साह और उमंग के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

    पहले लोग ग्रिटिंग कार्ड Greeting Cards के जरिए अपने दोस्तों और परिवार को नए साल की मुबारकबाद देते थे। लेकिन डिजिटल युग में अब लोग व्हाट्सअप फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने अपनों को Happy New Year 2026 Wishes भेजते हैं। मैसेज शायरी या स्टेटस के जरिए ये शुभकामनाएं सीधे दिल को छू जाती हैं।इस नए साल पर लोगों की प्राथमिकता यही रहती है कि वे अपने चाहने वालों को खुशियों हंसी मस्ती और कामयाबी से भरे संदेश भेजें। उदाहरण के तौर पर नए साल के कुछ बेस्ट मैसेज इस प्रकार हैं:

    हंसी मस्ती और कामयाबी से भरा हो आपका नया साल आप हंस्ते-मुस्कुराते रहें हर हाल। नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!फूल खिलते रहें जीवन की राह में खुशी चमकती रहे आपकी निगाह में। हर कदम पर मिले कामयाबी आपको हर नया दिन दे नई उम्मीदें। नया साल मुबारक हो।जिंदगी के हर मोड़ पर सफलता मिले हर सपना हकीकत बने दोस्ती का ये रिश्ता यूं ही महकता रहे। नया साल खुशियों से भरा रहे।हंसी मस्ती और साथ कभी कम न हो नया साल आ रहा है इसमें कोई गम न हो। नया साल बहुत-बहुत मुबारक हो।कल की गलतियों को भूल जाइए आज से एक नई कहानी शुरू कीजिए। 2026 की किताब के पन्ने अभी खाली हैं अपनी मेहनत से इसे शानदार बनाएं। नया साल खुशियों और सफलता से भरा हो।

    नया साल सिर्फ तारीख बदलने का मौका नहीं है बल्कि यह नई उम्मीदों सकारात्मक सोच और नए अवसरों का प्रतीक भी है। दोस्तों परिवार और करीबियों के साथ बिताए गए पल साझा की गई खुशियां और दी गई शुभकामनाएं इस दिन को और खास बना देती हैं।इसके अलावा नया साल प्रेरणा और आत्म-सुधार का भी संदेश लेकर आता है। यह समय है कि हम अपने पुराने अनुभवों से सीख लें और नए साल में बेहतर और सफल बनने का प्रयास करें। चाहे वह व्यक्तिगत जीवन हो या पेशेवर क्षेत्र 2026 हर किसी के लिए नई ऊर्जा और नए अवसर लाएगा।

    इस मौके पर लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मैसेज और शायरी शेयर करके अपने प्यार और अपनापन जताते हैं। सोशल मीडिया पर HappyNewYear2026 NewYearWishes NY2026 और NewYearShayari जैसे ट्रेंडिंग हैशटैग्स के साथ संदेश भेजना अब नया रिवाज बन गया है।तो इस नए साल 2026 पर अपनों को भेजें खास मैसेज शायरी और शुभकामनाएं ताकि हर दिल में खुशियों की रोशनी फैल सके।

  • घूमना तो बहाना, असली मज़ा है खाने में! जानें क्यों ट्रेंड में है Snack Tourism

    घूमना तो बहाना, असली मज़ा है खाने में! जानें क्यों ट्रेंड में है Snack Tourism


    नई दिल्ली।पर्यटन के नए रुझान अब सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं रह गए हैं। एडवेंचर, एस्ट्रो, हेरिटेज या बायो-टूरिज्म के बाद अब ट्रेंड में है Snack Tourism, यानी खाने के शौकीनों के लिए यात्रा। इसमें मुख्य उद्देश्य छोटे-छोटे व्यंजनों का अनुभव करना और स्थानीय, मशहूर या अति-स्थानीय स्नैक्स का आनंद लेना होता है।इस ट्रेंड के पीछे वजह है भारत की समृद्ध और विविध स्ट्रीट फूड संस्कृति। चाहे शांत गलियों में घूमना हो या चहल-पहल वाले बाज़ारों में जाना, हर जगह आपको कोई न कोई स्नैक मिलेगा, जो उस क्षेत्र की सांस्कृतिक और पाक परंपराओं की कहानी बताएगा।

    भारत के मशहूर स्नैक डेस्टिनेशन- इंदौर

    मध्यप्रदेश का इंदौर स्नैक टूरिज्म के लिए पहला स्टॉप माना जाता है। यहाँ पोहा-जलेबी, भुट्टे की कीस और साबूदाना खिचड़ी बेहद लोकप्रिय हैं। इन्हें स्वाद लेने के लिए सराफा बाजार और चप्पन दुकान जैसे जगहें सबसे ज़्यादा जानी जाती हैं। शाम के समय ये बाज़ार हलचल और खुशबू से भर जाते हैं।

    अमृतसर

    पंजाब के अमृतसर में कुल्चा, आलू टिक्की, पनीर पकोड़ा और ताज़ी लस्सी खाने के शौकीनों को दूर-दूर से खींच लाते हैं। यहाँ के हर स्ट्रीट फूड में पंजाबी स्वाद और मसालों की खास पहचान होती है।

    कोलकाता

    पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्नैक प्रेमियों के लिए जन्नत है। यहाँ पुचका, काठी रोल, झालमुरी और तेल बाझा जैसे स्नैक्स बेहद प्रसिद्ध हैं। यहाँ का स्ट्रीट फूड स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक तरीकों को बचाए रखता है।

    अहमदाबाद

    गुजरात का अहमदाबाद स्नैक टूरिज्म में अपनी अलग पहचान बनाता है। यहाँ के खाखरा, फाफड़ा-जलेबी, खांडवी और ढोकला देशभर में पसंद किए जाते हैं। शाकाहारी स्नैक्स का यह केंद्र अपने स्वाद और विविधता के लिए प्रसिद्ध है।

    बेंगलुरु

    दक्षिण भारत के बेंगलुरु में डोसा, मेदू वडा, इडली-सांभर, चटनी पुड़ी और मंगलौर बन जैसे स्नैक्स लोकप्रिय हैं। यहाँ के स्वाद में कर्नाटक की पारंपरिक और मॉडर्न स्वाद शैली का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है।

    Snack Tourism का महत्व

    Snack Tourism केवल खाने का अनुभव नहीं है। यह स्थानीय संस्कृति, इतिहास और पाक कला को जानने का एक तरीका भी है। हर शहर और हर स्नैक अपनी अलग कहानी बयान करता है। यह यात्रा के अनुभव को और मजेदार बनाता है और पर्यटकों को छोटे-छोटे व्यंजनों के माध्यम से उस स्थान की असली पहचान से परिचित कराता है।यह ट्रेंड खासतौर पर उन लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जो यात्रा के साथ-साथ खाने का भी शौक रखते हैं। चाहे वह कोलकाता का पारंपरिक स्ट्रीट फूड हो या अहमदाबाद का शाकाहारी स्नैक, हर शहर में अलग स्वाद, खुशबू और अनुभव मिलता है।स्नैक टूरिज्म की बढ़ती लोकप्रियता से यह स्पष्ट हो गया है कि अब सिर्फ पर्यटन स्थल देखने से संतोष नहीं मिलता, बल्कि वहां के स्थानीय स्वाद को चखना और अनुभव करना भी यात्रा का अहम हिस्सा बन गया है।

  • शिमला-मनाली की भीड़ से परेशान हैं? चंडीगढ़ के पास इन शांत हिल स्टेशनों पर बिताएं सुकून भरी छुट्टियां

    शिमला-मनाली की भीड़ से परेशान हैं? चंडीगढ़ के पास इन शांत हिल स्टेशनों पर बिताएं सुकून भरी छुट्टियां


    नई दिल्ली।सर्दियों की छुट्टियां शुरू होते ही देशभर के पर्यटक पहाड़ों की ओर रुख करने लगते हैं। बर्फ से ढकी वादियां, ठंडी हवा और पहाड़ों की खूबसूरती हर किसी को आकर्षित करती है। लेकिन बीते कुछ समय से शिमला, मनाली और मसूरी जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों पर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बर्फीली सड़कों पर लंबा ट्रैफिक जाम, घंटों फंसे वाहन और टूरिस्ट स्पॉट्स पर भारी भीड़ साफ देखी जा सकती है।ऐसे में अगर आप भी छुट्टियों में पहाड़ों का मजा लेना चाहते हैं, लेकिन भीड़ और ट्रैफिक से बचना चाहते हैं, तो कुछ ऑफबीट हिल स्टेशन आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। खास बात यह है कि ये जगहें चंडीगढ़ के पास स्थित हैं और यहां आपको प्रकृति के बीच शांति और सुकून दोनों मिलेंगे।

    शोजा, हिमाचल प्रदेश

    हिमाचल प्रदेश में स्थित शोजा एक बेहद खूबसूरत लेकिन कम चर्चित पहाड़ी गांव है। यह जगह तीर्थन वैली के पास बसी हुई है और अब भी बड़े पैमाने के पर्यटन से दूर है। जब मनाली और शिमला में होटल फुल हो जाते हैं और सड़कों पर जाम लगता है, तब शोजा शांति की मिसाल बन जाता है।यहां न तो बड़े-बड़े रिसॉर्ट्स हैं और न ही तेज म्यूजिक या पार्टी कल्चर। चारों ओर देवदार और चीड़ के घने जंगल, लकड़ी से बने छोटे-छोटे घर और पहाड़ों की ठंडी हवा इस जगह को खास बनाती है। सुबह की हल्की धुंध, पक्षियों की आवाज और प्राकृतिक नज़ारे शोजा को नेचर लवर्स के लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाते हैं।

    कनाताल, उत्तराखंड

    उत्तराखंड में मसूरी के पास स्थित कनाताल उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो शांति के साथ पहाड़ों का अनुभव लेना चाहते हैं। समुद्र तल से करीब 8,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन भीड़-भाड़ से काफी हद तक दूर है।कनाताल में चौड़ी और खुली सड़कें, साफ हवा और शांत वातावरण मिलता है। यहां बड़े टूरिस्ट हब्स की तरह ट्रैफिक जाम या शोरगुल नहीं होता। यही वजह है कि परिवार, कपल्स और सोलो ट्रैवलर्स के बीच इसकी लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही है। यहां से हिमालय की बर्फीली चोटियों का नज़ारा बेहद मनमोहक दिखाई देता है।

    पंगोट, उत्तराखंड

    पंगोट नैनीताल से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा और शांत पहाड़ी गांव है। नैनीताल में जब नए साल और छुट्टियों के दौरान होटल फुल हो जाते हैं और सड़कों पर जाम लगता है, तब पंगोट सुकून का अहसास कराता है।यह जगह खासतौर पर नेचर और बर्ड लवर्स के लिए जानी जाती है। घने जंगल, पहाड़ों की गोद में बसे छोटे घर और शांत माहौल पंगोट को भीड़ से दूर एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं। यहां आपको नैनीताल जैसी चहल-पहल नहीं, बल्कि शांति और प्राकृतिक सुंदरता मिलेगी।

    क्यों चुनें ऑफबीट हिल स्टेशन

    पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफबीट डेस्टिनेशन न सिर्फ ट्रैफिक और भीड़ से राहत देते हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति और प्रकृति को करीब से देखने का मौका भी देते हैं। इसके साथ ही ये जगहें मानसिक सुकून और असली छुट्टियों का अनुभव प्रदान करती हैं।अगर आप इस सर्दी पहाड़ों में भीड़ से दूर, शांति और खूबसूरती के साथ समय बिताना चाहते हैं, तो शिमला-मनाली की जगह इन ऑफबीट हिल स्टेशनों को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जरूर शामिल करें।

  • सर्दी में आंखों की देखभाल के लिए आयुष मंत्रालय के 4 प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय

    सर्दी में आंखों की देखभाल के लिए आयुष मंत्रालय के 4 प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय


    नई दिल्ली। सर्दी का मौसम आते ही जहां पूरे शरीर की देखभाल जरूरी हो जाती है वहीं आंखों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सर्द हवाएं और बढ़ता प्रदूषण आंखों के लिए खतरे का कारण बन सकते हैं। इस मौसम में आंखों में जलन पानी आना और पलकें चिपचिपी हो जाना सामान्य समस्या बन जाती है। इन समस्याओं से बचने के लिए आयुष मंत्रालय ने चार असरदार आयुर्वेदिक उपाय बताए हैं जिनसे आंखों को तुरंत राहत मिल सकती है और उनकी देखभाल बेहतर तरीके से की जा सकती है।

    आयुष मंत्रालय ने एक पोस्ट के माध्यम से इन चार आसान उपायों को साझा किया है जिनमें से पहला उपाय है आई पामिंग। इस विधि में दोनों हाथों की हथेलियों को आपस में रगड़कर गर्म किया जाता है और फिर इन्हें आंखों पर रखा जाता है। इससे आंखों की थकान कम होती है और आंखें रिलैक्स महसूस करती हैं। लगातार स्क्रीन पर काम करने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है और आई पामिंग इस दबाव को कम करने में मदद करता है।

    दूसरा उपाय है त्राटक। यह एक अभ्यास है जिसमें मोमबत्ती की लौ को बिना पलक झपकाए कुछ देर तक देखा जाता है। यह अभ्यास आंखों की रोशनी को बेहतर करने आंखों की सफाई और आंखों की नमी को बनाए रखने में मदद करता है। त्राटक से आंखों की आंतरिक स्पष्टता बढ़ती है और यह आँखों की थकान को कम करता है।

    तीसरा उपाय है गीले कॉटन पैड का इस्तेमाल। गीले कॉटन पैड से आंखों के तनाव को कम किया जा सकता है और सिर दर्द से भी राहत मिलती है। इसके लिए रूई को ठंडे पानी या गुलाब जल में भिगोकर आंखों पर कुछ देर के लिए रखा जाता है। यह उपाय आंखों के नीचे सूजन को कम करने और आंखों को ताजगी देने के लिए बहुत प्रभावी है। कुछ लोग इसकी जगह खीरे के टुकड़े भी इस्तेमाल करते हैं।

    चौथा उपाय है भाप लेना। सर्दियों में कई बार आंखों में गंदगी जमा हो जाती है जिससे पलके चिपकने लगती हैं। हल्की भाप से आंखों को शुद्ध किया जा सकता है जिससे पलके चिपकने से बचती हैं। हालांकि ध्यान रखें कि अधिक भाप लेने से आंखों की ड्राइनेस बढ़ सकती है इसलिए इसे संतुलित मात्रा में लें।

    इन उपायों को अपनाकर सर्दियों में आंखों की देखभाल की जा सकती है और आंखों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। आयुष मंत्रालय का कहना है कि इन सरल आयुर्वेदिक उपायों से न केवल आंखों को आराम मिलता है बल्कि आंखों की सेहत भी बेहतर बनी रहती है।

  • सर्दियों में त्वचा को बनाएं मुलायम और दमकती: अपनाएं ये जरूरी स्किन केयर टिप्स

    सर्दियों में त्वचा को बनाएं मुलायम और दमकती: अपनाएं ये जरूरी स्किन केयर टिप्स

    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम आते ही त्वचा की नमी कम होने लगती है। ठंडी हवा और हीटिंग सिस्टम की वजह से चेहरे और हाथों की त्वचा रूखी और खुरदरी हो जाती है। कई लोग महंगी क्रीम और लोशन लगाने के बाद भी खास असर नहीं देखते। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि स्किन केयर केवल प्रोडक्ट्स पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही आदतें अपनाना भी बेहद जरूरी है।

    लखनऊ की ब्यूटी एक्सपर्ट अमरीश कौर के अनुसार, सबसे पहला कदम है बार-बार मॉइस्चराइज करना। इसके लिए हैंड क्रीम और फेस मॉइस्चराइजर चुनते समय ऐसे प्रोडक्ट्स का चयन करें जिसमें शीया बटर, एलोवेरा या हयालूरोनिक एसिड हो। हर बार हाथ धोने और चेहरे को साफ करने के बाद मॉइस्चराइज करना बेहद जरूरी है।

    रात में स्किन की देखभाल और भी ज्यादा असरदार होती है। सोने से पहले चेहरे और हाथों पर पेट्रोलियम जेली या विटामिन ई ऑयल लगाकर कॉटन ग्लव्स और मोज़े पहनें। इससे स्किन पूरी रात पोषित और मुलायम रहती है। हफ्ते में एक बार हल्का एक्सफोलिएशन करना भी जरूरी है। चीनी और ऑलिव ऑयल मिलाकर चेहरे और हाथों की मृत त्वचा को हटाएं और फिर मॉइस्चराइज करें।

    नाखून और सनस्क्रीन का महत्व
    सर्दियों में सिर्फ चेहरे और हाथ ही नहीं, बल्कि नाखूनों और क्यूटिकल की देखभाल भी जरूरी है। रात में क्यूटिकल ऑयल लगाकर हल्की मसाज करने से नाखून मजबूत रहते हैं। दिन में बाहर निकलते समय SPF वाली हैंड क्रीम और फेस सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना त्वचा को UV किरणों से बचाता है और झुर्रियों को रोकता है।

    हवा और धूप दोनों ही त्वचा से नमी चुराते हैं, इसलिए ग्लव्स पहनना जरूरी है। घर में बर्तन धोते समय, सफाई करते समय या बगीचे में काम करते समय भी दस्ताने पहनें। माइल्ड साबुन का उपयोग करें और बहुत गर्म पानी की जगह गुनगुना पानी ही इस्तेमाल करें।

    नेचुरल उपाय और पोषण
    त्वचा की सुंदरता सिर्फ बाहरी देखभाल से नहीं आती। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित आहार लेना और सही नींद लेना भी जरूरी है। गाजर, पालक, टमाटर और मेवे जैसी चीजें विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं और त्वचा को अंदर से पोषण देती हैं। इसके अलावा, घर पर तैयार नेचुरल फेस पैक और मास्क जैसे हल्दी और दूध, दही और शहद, एवोकैडो और शहद आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये न केवल त्वचा को मॉइस्चराइज करते हैं बल्कि उसे प्राकृतिक चमक भी देते हैं।

    सर्दियों में त्वचा की देखभाल के लिए सही रूटीन अपनाना बेहद जरूरी है। बार-बार मॉइस्चराइज करना, रात की ओवरनाइट केयर, एक्सफोलिएशन, सनस्क्रीन का इस्तेमाल और ग्लव्स पहनना आपकी त्वचा को रूखेपन से बचाएगा। नेचुरल प्रोडक्ट्स और संतुलित जीवनशैली से त्वचा हमेशा मुलायम, नर्म और चमकदार बनी रहेगी। नियमित आदतों और सही प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से सर्दियों में भी त्वचा की खूबसूरती बरकरार रखी जा सकती है।

  • बिना सोच-विचार कर लो पैकिंगलास्ट मिनट ट्रैवल लवर्स के लिए बेस्ट हैं ये 5 जगहेंनए साल पर घूम आओ

    बिना सोच-विचार कर लो पैकिंगलास्ट मिनट ट्रैवल लवर्स के लिए बेस्ट हैं ये 5 जगहेंनए साल पर घूम आओ


    नई दिल्ली । अगर आपने अभी तक नए साल का ट्रिप नहीं प्लान कियातो कोई बात नहीं। अब आपका समय बिना ज्यादा सोच-विचार के पैकिंग करने का आ गया है। आज हम आपके लिए भारत की कुछ ऐसी जबर्दस्त जगहें लेकर आए हैंजो लास्ट मिनट ट्रैवल लवर्स के लिए एकदम परफेक्ट हैं। शांत वादियों से लेकर समुद्र तट और रेगिस्तान तक – 2025 के अंत पर बनाओ अपनी यादगार ट्रिप।
    नए साल पर घूम आओ
    क्या आप भी वो ट्रैवल लवर्स हैं जो – चलोआज ही चलें! वाली फीलिंग रखते हैं? कई लोग साल के आखिरी दिनों तक काम में इतने व्यस्त रहते हैं कि वे जल्दी से कोई ट्रिप प्लान नहीं कर पाते। लेकिन चिंता मत करोभारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां बिना ज्यादा प्लानिंग के भी आप नए साल की ट्रैवल ट्रिप मस्ती से बिता सकते हैं। अगर पैकिंग का बैग तैयार है तो चलिए जानते हैं उन 5 शानदार डेस्टिनेशन्स के बारे में जहाँ आप इस नए साल पर घूम आ सकते हैं।
    वर्कला
    समुद्र किनारे शांत माहौल में समय बिताना है तो केरल का वर्कला बहुत शानदार जगह है। यहां की ऊंची चट्टानेंसमुद्र की लहरों का नजारा और कैफे की चाय – सब मिलकर आपके ट्रिप को यादगार बना देंगे। दिन में बीच पर वॉक और शाम को सनसेट का आनंद लेना एकदम रिलैक्स एक्सपीरियंस है।
    पुष्कर
    अगर आप सांस्कृतिक और शांत माहौल वाले डेस्टिनेशन की तलाश में हैंतो पुष्कर एक खूबसूरत विकल्प है। यहां की झीलघाट और ब्रह्मा मंदिर आपको एक अलग आध्यात्मिक अहसास देंगे। भीड़-भाड़ हीरोइन जगहों के बजाययह छोटा सा शहर बहुत ही शांत और दिल को छू लेने वाला है।
    जीरो वैली
    अगर आपका दिल भीड़ और शोर से दूरसुकून भरे माहौल में घूमने को चाहता हैतो अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली एक अद्भुत विकल्प है। यहां चारों ओर हरियालीशांत मौसम और ठंडी वादियां हैंजो साल के अंत पर आपके दिल को शांति से भर देती हैं। यहां की वादियों में चाय की चुस्की लेते हुए नया साल मनाने का मजा ही कुछ और होता है।
    रण ऑफ कच्छ
    अगर आप कुछ अलग और नेचर से भरपूर जगह ट्राय करना चाहते हैंतो गुजरात का रण ऑफ कच्छ आपके लिए परफेक्ट रहेगा। सर्दियों के मौसम में यहां का सफेद नमक मैदान और खुला आसमान बेहद खूबसूरत दिखता है। भारी ऊनी कपड़े पैक करने की जरूरत भी नहीं पड़तीइसलिए लास्ट मिनट ट्रिप के लिए यह बढ़िया ऑप्शन है।
    अंडमान एंड निकोबार आइलैंड्स
    थोड़ी दूर जाना है लेकिन असली बीच का मजा लेना हैतो अंडमान एक शानदार चुनाव है। यहां की नीली समुद्री लहरेंसफेद रेत और पानी के नीचे की विश्व भर की खूबसूरती आपको एक अलग सा अनुभव देंगी। चाहें तो आप स्कूबा डाइविंग या स्नॉर्कलिंग जैसी एक्टिविटीज का भी मजा ले सकते हैं।
    ट्रैवल टिप्स बिना प्लानिंग के
    लास्ट मिनट ट्रिप पर निकलते समय पहले होटल और फ्लाइट की उपलब्धता जरूर चेक कर लें। ज्यादा चीजें प्लान करने का बोझ न लेंबस आराममस्ती और अनुभव को प्राथमिकता दें। यही सही तरीका है कि आप इस साल की आखिरी ट्रिप को पॉजिटिव ऊर्जा से भरपूर बना पाएं।

  • सर्दियों में लेमन ग्रास टी इम्यूनिटी बूस्ट और एनर्जी का प्राकृतिक स्रोत

    सर्दियों में लेमन ग्रास टी इम्यूनिटी बूस्ट और एनर्जी का प्राकृतिक स्रोत


    नई दिल्ली । सर्दियों के मौसम में ठंड से बचाव और सेहत बनाए रखने के लिए लेमन ग्रास टी एक प्राकृतिक वरदान है। सर्दियों में लेमन ग्रास टी की चुस्की खासतौर पर फायदेमंद है। यह ताजगी भरी हर्बल ड्रिंक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है।लेमन ग्रास टी न केवल पाचन सुधारती है बल्कि प्राकृतिक रूप से तनाव से राहत देती है और इम्यूनिटी बढ़ाती है। आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल हो रही यह चाय सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए भी बेहतरीन है।
    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लेमन ग्रास टी के फायदों से अवगत कराता है। इसका सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद है। यह पेट फूलना गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करती है। लेमन ग्रास टी में मौजूद सिट्रल कंपाउंड पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है जिससे भोजन आसानी से पचता है। सर्दियों में भारी खाने से होने वाली तकलीफों में यह राहत देती है।

    प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में भी लेमन ग्रास टी का बड़ा योगदान है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं जो संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। सर्दियों में वायरल इंफेक्शन और फ्लू से बचाव के लिए रोजाना एक कप पीना लाभकारी है। यह टी सूजन कम करने में भी प्रभावी है। एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण जोड़ों के दर्द मांसपेशियों की अकड़न और सर्दी से होने वाली सूजन में आराम मिलता है। साथ ही यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालती है और डिटॉक्स का काम करती है।

    लेमन ग्रास टी थकान को उतारने में भी प्रभावी है। रिलैक्सेशन को बढ़ावा देने वाली यह टी तनाव और चिंता कम करती है। इसकी सुगंध मूड को बेहतर बनाती है और नींद अच्छी आती है। सर्दियों की लंबी रातों में एक कप गर्म लेमन ग्रास टी पीना शांति का एहसास देता है। लेमन ग्रास टी बनाने के लिए ताजा या सूखे लेमन ग्रास के डंठल लें काटकर पानी में उबाल लें। इसे 5 से 10 मिनट तक उबालने के बाद छान लें। स्वाद के लिए इसमें शहद या नींबू भी मिला सकते हैं।लेमन ग्रास टी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे रोजाना 1 या 2 कप से ज्यादा न पीएं। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर से सलाह के बाद ही सेवन करें।

  • स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम

    स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम


    नई दिल्ली । आयुर्वेद बताता है कि भारतीय रसोई घर में ऐसे कई मसाले हैं जिनके सेवन से कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को मात दी जा सकती है। ऐसे ही एक मसाले का नाम जायफल है जो न केवल व्यंजनों में स्वाद और खुशबू जोड़ता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है।रसोई घर में रखा जायफल स्वाद बढ़ाने में कारगर है। औषधीय गुणों से भरपूर जायफल के बारे में आयुर्वेद विस्तार से जानकारी देता है। इसे दाल करी सब्जियां और मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
    इसकी अनोखी सुगंध और हल्की मिठास किसी भी डिश को चार चांद लगा देती है।भारतीय व्यंजनों में जायफल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। इसे अक्सर धनिया हल्दी मिर्च और अन्य मसालों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है जो डिश को ताजगी और मसालेदार स्वाद देता है। गरम मसाला में भी जायफल शामिल होता है। मिठाइयों जैसे हलवा खीर या लड्डू में इसका पाउडर डालने से स्वाद दोगुना हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जायफल सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला नहीं बल्कि सेहत का साथी भी है। जायफल का सबसे बड़ा फायदा नींद की समस्या में है। यह प्राकृतिक रूप से मानसिक शांति प्रदान करता है और अनिद्रा से राहत दिलाता है। रात को दूध में थोड़ा सा पीसा जायफल मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है। इसके अलावा जायफल पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह गैस अपच पेट फूलना और कब्ज जैसी आम समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

    जायफल में मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं जिससे भोजन आसानी से पचता है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सीमित मात्रा में जायफल का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है और सूजन कम करता है। हालांकि ज्यादा मात्रा में जायफल हानिकारक हो सकता है इसलिए रोजाना थोड़ी मात्रा ही इस्तेमाल करें। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे लोग डॉक्टर से सलाह लें।

  • रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ

    रक्त संचार बेहतर कर भरपूर एनर्जी देता है वृश्चिकासन अभ्यास से मिलते हैं कई लाभ


    नई दिल्ली । व्यस्त दिनचर्या और कार्य का बढ़ता तनाव शरीर के साथ-साथ मन को भी शीघ्र बीमारियों की चपेट में ले लेता है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने का सबसे प्रभावी तरीका है योगासनों को दिनचर्या में शामिल करना। ऐसा ही एक बेहतरीन आसन है वृश्चिकासनजिसे स्कॉर्पियन पोज भी कहा जाता है। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर बिच्छू की आकृति जैसा बन जाता है। इसके अभ्यास से शारीरिक मजबूतीलचीलापन और मानसिक शांति मिलती है।
    मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसारवृश्चिकासन के रोजाना अभ्यास से शरीर को एक-दो नहींकई लाभ मिलते हैं। वृश्चिकासन या स्कॉर्पियन पोज एक इनवर्टेड बैकबेंड आसन हैजिसमें कोहनियों पर संतुलन बनाते हुए पैरों को सिर की ओर झुकाया जाता है। यह आसन कंधोंबाजुओंपीठ और कोर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। योग एक्सपर्ट बताते हैं कि इससे रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ता हैजिससे कमर दर्द और पीठ की समस्याओं में राहत मिलती है। साथ हीयह पेट की मांसपेशियों को खींचता हैपाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार करता है। वृश्चिकासन एकाग्रता और संतुलन भी बढ़ाता है।

    यह मस्तिष्क में रक्त संचार सुधारता हैजिससे स्मरण शक्ति और फोकस बेहतर होता है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह आसन हृदय के लिए भी लाभकारी हैक्योंकि इनवर्टेड पोजिशन में रक्त प्रवाह संतुलित होता है। एक्सपर्ट बताते हैं कि इस आसन को करने के लिए सबसे पहले मयूरासन की स्थिति में आएं। कोहनियों को कंधों के नीचे रखें और हथेलियों से जमीन को पकड़ें। शरीर को ऊपर उठाते हुए पैरों को सीधा रखें। अब धीरे-धीरे रीढ़ को झुकाते हुए पैरों को सिर की ओर लाएंताकि पैरों की उंगलियां सिर को छूने की कोशिश करें।

    संतुलन बनाए रखें और गहरी सांस लें। शुरुआत में 10-20 सेकंड तक रुकेंफिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। अभ्यास के बाद शवासन या बालासन में विश्राम करें। वृश्चिकासन उन्नत आसन हैइसलिए शुरुआती लोग योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें। एक्सपर्ट बताते हैं कि कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। जैसे हाई ब्लड प्रेशरहृदय रोगचक्कर आने की समस्यागर्भावस्था या पीठ-कमर में चोट वाले लोग इसे न करें। वार्म-अप जरूर करेंजैसे डॉल्फिन पोज या प्लैंक। अगर गर्दन या कंधों में दर्द हो तो न करें। गलत तरीके से करने पर चोट लग सकती है।