चेहरे को साफ रखें
त्वचा में नमी बनाए रखें
धूप से बचाव करें
खूब पानी पिएं

चेहरे को साफ रखें
त्वचा में नमी बनाए रखें
धूप से बचाव करें
खूब पानी पिएं

एनर्जी ड्रिंक्स: जहर का मीठा कॉम्बिनेशन
क्या इनमें सचमुच ‘एनर्जी’ होती है?
रोजाना सेवन के भयानक नुकसान:

इंद्रप्रस्थ पार्क इंद्रप्रस्थ पार्क का जापानी स्टाइल गार्डन अभी भी कई लोगों के लिए अनजान है. यहां रंग-बिरंगे फूल, पत्थर और अलग ही तरह की वाइब देखने को मिलती है. नेचर लवर्स और फोटो के शौकीन कपल्स के लिए यह जगह परफेक्ट है. यहां की शांति आपके वैलेंटाइन डे को और भी खास बना सकती है.

GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले सामने आए, जबकि लगभग 9.2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह लेट डायग्नोसिस है। शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता रहता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
लेट डायग्नोसिस क्यों है खतरनाक
जब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है, तब यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है। इस स्थिति में इलाज न केवल महंगा होता है बल्कि सफल होने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान को कैंसर से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं।
मैमोग्राफी
महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है।
अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन
पेट, लिवर, किडनी और अन्य अंगों में होने वाले ट्यूमर की पहचान के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होती है।
कोलोनोस्कोपी
यह जांच आंतों और कोलन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद करती है, खासकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए।
ओरल स्क्रीनिंग
तंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों के लिए मुंह और गले की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे ओरल कैंसर की समय रहते पहचान हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का डर पालने की बजाय जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। संतुलित आहार, व्यायाम और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय रहते पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है बल्कि जीवन को भी बचा सकती है।

एक्सपायरी डेट: हमेशा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। फ्रोजन मटर आमतौर पर 6-12 महीने तक अच्छी रहती है। पैकेट की बनावट: पैकेट कहीं से फटा या ढीला नहीं होना चाहिए। सीलबंद पैकेट ही लें। रंग: दानों का रंग गहरा हरा होना चाहिए। यदि रंग हल्का पीला या सफेद पड़ रहा हो, तो मटर पुरानी हो सकती है। पिक-अप टाइम: ग्रोसरी शॉपिंग के दौरान फ्रोजन मटर सबसे अंत में उठाएं ताकि वह घर पहुँचने तक ज्यादा न पिघले।
इस्तेमाल करने का सही तरीका

रात को सोने से पहले क्यों जरूरी है स्किन केयर
दिनभर स्किन बाहरी नुकसान झेलती है। रात के समय ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और स्किन सेल्स तेजी से रिपेयर होते हैं। यही वजह है कि नाइट स्किनकेयर रूटीन को सबसे अहम माना जाता है।
रात को सोने से पहले लगाएं ये 3 चीजें
2. गुलाब जल
गुलाब जल नेचुरल टोनर की तरह काम करता है। यह स्किन के पोर्स को टाइट करता है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाता है। कॉटन की मदद से सोने से पहले चेहरे पर गुलाब जल लगाएं। यह स्किन को शांत करता है और रेडनेस भी कम करता है।
3. नारियल तेल या बादाम तेल
अगर आपकी स्किन ड्राई है तो सोने से पहले कुछ बूंदें नारियल तेल या बादाम तेल की मसाज करें। यह स्किन को पोषण देता है और रातभर नमी बनाए रखता है। सुबह स्किन सॉफ्ट और चमकदार दिखती है।
बेहतर रिजल्ट के लिए रखें इन बातों का ध्यान
सोने से पहले मेकअप जरूर हटाएं। हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें और पर्याप्त नींद लें। पानी ज्यादा पिएं और जंक फूड से दूरी बनाएं।नियमित रूप से इन नेचुरल उपायों को अपनाने से कुछ ही दिनों में स्किन की रंगत में सुधार और नेचुरल ग्लो साफ नजर आने लगेगा।

नकली पश्मीना देखने में बिल्कुल असली जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ आसान जांच के जरिए इसकी सच्चाई पहचानी जा सकती है। अगर आप भी महंगी पश्मीना शॉल खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
ऊन का स्रोत पहचानें
असली पश्मीना लद्दाख की ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाने वाली चांगथांगी बकरियों के अंडरकोट से बनाया जाता है। अत्यधिक ठंड के कारण इनके रेशे बेहद महीन, मुलायम और गर्म होते हैं। यही खासियत पश्मीना को दूसरी ऊन से अलग बनाती है।
वजन से करें जांच
शुद्ध पश्मीना बेहद हल्का होता है। आमतौर पर पूरा पश्मीना शॉल लगभग 180 ग्राम के आसपास होता है, जबकि स्टोल का वजन करीब 90 से 100 ग्राम तक रहता है। अगर शॉल हाथ में भारी महसूस हो, तो वह नकली या मिश्रित हो सकता है।
बर्न टेस्ट से पहचान
पश्मीना की असलियत जांचने का एक पुराना तरीका बर्न टेस्ट है। शॉल के किनारे से निकाले गए धागे को जलाने पर असली पश्मीना बालों की तरह धीरे जलता है और राख बन जाता है। वहीं नकली या सिंथेटिक धागा प्लास्टिक की तरह पिघलता है और तेज बदबू देता है।
बुनावट और फिनिशिंग पर नजर डालें
असली पश्मीना पूरी तरह हाथ से बुना जाता है। इसलिए उसकी बुनावट में हल्की असमानता हो सकती है। अगर शॉल मशीन से बनी तरह बहुत ज्यादा परफेक्ट और एकसमान दिखे, तो वह नकली होने का संकेत हो सकता है।
जीआई टैग जरूर देखें
खरीदारी के समय पश्मीना शॉल पर जीआई टैग की मांग जरूर करें। यह टैग उसकी प्रामाणिकता और मूल स्थान की पुष्टि करता है और बताता है कि शॉल वास्तव में कश्मीर या लद्दाख क्षेत्र की पारंपरिक पश्मीना है।विशेषज्ञों के अनुसार, पश्मीना शॉल खरीदते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए। सही जानकारी और थोड़ी सतर्कता आपको नकली से बचा सकती है और आपकी महंगी खरीद को सही निवेश बना सकती है।
वैलेंटाइन पर पार्टनर को लेकर कहां जाएं, दार्जिलिंग
मनाली
कपल्स का सबसे पसंदीदा प्लेस है मनाली. मनाली की खूबसूरती दिल में तो उतर ही जाती है. वैलेंटाइन वीक में आप मनाली का प्लान बना सकते हैं. इस समय वहां का मौसम भी अच्छा होता है और आपके बजट में भी है.
पुष्कर
अगर आप ठंडी जगह पर नहीं जाना चाहते हैं, तो राजस्थान का पुष्कर आपके लिए परफेक्ट जगह साबित हो सकती है. यहां कम बजट में भी आपको एक रॉयल फील मिलेगा. पार्टनर के साथ यहां के घाटों पर बैठकर डूबते सूरज को निहारना और रेगिस्तान की खामोशी में ऊंट की सवारी करना बेहद रोमांचक एहसास है.
ओरछा
वैलेंटाइन वीक के लिए मध्य प्रदेश का ओरछा एक बेमिसाल ऑप्शन है. बेतवा नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर शांति और रोमांस का अद्भुत मेल पेश करता है. यहां के भव्य महल और मंदिर आपको एक पुराने और खूबसूरत दौर की याद दिलाएंगे. यहां रहने और खाने के खर्चे भी बहुत मामूली होते हैं. आप ओरछा के रामराजा मंदिर के दर्शन करने भी जा सकते हैं.

फ्लू और सर्दी-जुकाम से बचने के लिए साफ-सफाई सबसे बड़ा हथियार है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथों को साबुन से धोना, खांसते/छींकते समय रुमाल का उपयोग और बार-बार नाक-आंख छूने से बचना जरूरी है। साथ ही घर का बना ताजा भोजन, हल्दी वाला दूध, गुनगुना पानी, और सही पहनावा इस मौसम में सेहत बनाए रखने में मददगार है।
बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगर दो दिन से अधिक बुखार, कफ या कमजोरी बनी रहे तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।

धूप से आकर तुरंत न चलाएं पंखा दोपहर के वक्त बाहर से आने पर अक्सर शरीर का तापमान बढ़ जाता है और हम तुरंत पंखा चला लेते हैं या एसी की तलाश करते हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि ऐसा करना ‘सर्द-गर्म’ का मुख्य कारण बनता है। जब आप बाहर से आएं, तो कम से कम 10-15 मिनट शांति से बैठें ताकि शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से सामान्य हो जाए। इसी तरह, तेज धूप से लौटकर तुरंत ठंडा पानी पीना गले के संक्रमण और तेज बुखार को न्योता देना है।
साफ-सफाई: फ्लू से बचने का सबसे बड़ा हथियार बदलते मौसम में वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता (Hand Hygiene) सबसे महत्वपूर्ण है। अपनी हथेलियों, उंगलियों और नाखूनों को नियमित रूप से साबुन से धोएं। खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें और हाथों से बार-बार नाक या आंखों को छूने से बचें।
सेहत बनाए रखने के अचूक उपाय: इस संक्रमण काल में खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव जरूर करें:
बाहर के खुले या जंक फूड से परहेज करें और घर का बना ताजा भोजन ही लें।
रात को सोने से पहले एक गिलास हल्दी वाला दूध पिएं, यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक का काम करता है।कफ या गले में खराश महसूस होने पर केवल गुनगुना पानी ही पिएं।
सुबह और शाम की ठंड को हल्के में न लें; पूरी बाजू के कपड़े पहनें। पैरों में संक्रमण से बचने के लिए अब बंद जूतों की जगह खुली चप्पलों का चुनाव किया जा सकता है।
डॉक्टर की सलाह कब लें? बदलते मौसम में बच्चे और बुजुर्ग सबसे जल्दी संक्रमण की चपेट में आते हैं। यदि आपको या परिवार में किसी को भी दो दिन से अधिक समय तक बुखार, लगातार कफ या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे ‘मौसमी असर’ मानकर नजरअंदाज न करें। तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें ताकि समय रहते सही उपचार शुरू हो सके।
फरवरी में दिन की गर्मी और रात की ठंड के कारण ‘सर्द-गर्म’ की समस्या बढ़ रही है। 15 साल की सबसे गर्म शुरुआत के बीच सर्दी-जुकाम और फ्लू का खतरा है। बचाव के लिए धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी न पिएं, स्वच्छता का ध्यान रखें और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी वाले दूध का सेवन करें।