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  • बारिश के मौसम में यूं रखें अपनी त्वचा का खास ख्याल इन आसान स्किन केयर टिप्स से मिलेगी प्राकृतिक चमक

    बारिश के मौसम में यूं रखें अपनी त्वचा का खास ख्याल इन आसान स्किन केयर टिप्स से मिलेगी प्राकृतिक चमक


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं यह त्वचा के लिए कई नई चुनौतियां भी लेकर आता है। हवा में बढ़ी हुई नमी पसीना धूल मिट्टी और बैक्टीरिया त्वचा पर जमा होकर कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इस मौसम में ऑयली स्किन वाले लोगों को मुंहासों की परेशानी बढ़ सकती है जबकि संवेदनशील त्वचा वालों को एलर्जी खुजली और फंगल संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में मानसून के दौरान नियमित और सही स्किन केयर रूटीन अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में सबसे पहले चेहरे की सफाई पर ध्यान देना चाहिए। दिन में दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करने से त्वचा पर जमा गंदगी अतिरिक्त तेल और बैक्टीरिया हट जाते हैं। बार बार चेहरा धोने से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी भी कम हो सकती है।

    कई लोग मानसून में मॉइस्चराइजर लगाना छोड़ देते हैं लेकिन यह सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। बारिश के मौसम में भी त्वचा को नमी की जरूरत होती है। इसलिए हल्का और नॉन ऑयली मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना चाहिए ताकि त्वचा हाइड्रेट रहे और चिपचिपाहट भी महसूस न हो।

    बारिश के दिनों में धूप कम दिखाई देती है लेकिन अल्ट्रावॉयलेट किरणें बादलों के बीच से भी त्वचा तक पहुंचती हैं। इसलिए घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलना चाहिए। कम से कम एसपीएफ तीस वाला सनस्क्रीन त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद करता है।

    मानसून में पसीना अधिक आने से रोमछिद्र बंद हो सकते हैं जिससे मुंहासे और ब्लैकहेड्स की समस्या बढ़ जाती है। सप्ताह में एक या दो बार हल्के स्क्रब से त्वचा की सफाई करना लाभदायक माना जाता है। हालांकि अधिक स्क्रब करने से त्वचा को नुकसान भी पहुंच सकता है इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल बाहरी देखभाल ही नहीं बल्कि खानपान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना मौसमी फल हरी सब्जियां और विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन त्वचा को अंदर से पोषण देता है। तली भुनी और अत्यधिक मीठी चीजों का सेवन कम करने से मुंहासों की समस्या भी कम हो सकती है।

    यदि बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचते ही साफ पानी से चेहरा और हाथ पैर धो लें तथा सूखे तौलिए से अच्छी तरह पोंछ लें। लंबे समय तक गीले कपड़े पहनने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है इसलिए जल्द से जल्द सूखे और साफ कपड़े पहनना बेहतर होता है।

    मेकअप का इस्तेमाल करने वालों को मानसून में हल्के और वाटरप्रूफ उत्पाद चुनने चाहिए। रात को सोने से पहले मेकअप पूरी तरह हटाकर त्वचा की सफाई करना जरूरी है ताकि रोमछिद्र बंद न हों और त्वचा स्वस्थ बनी रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल से बारिश के मौसम में भी त्वचा को स्वस्थ चमकदार और संक्रमण मुक्त रखा जा सकता है। यदि लगातार खुजली लालपन दाने या फंगल संक्रमण जैसी समस्या बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

  • आमरस बनाम मैंगो शेक: दोनों में किसमें ज्यादा पोषण, कम कैलोरी और बेहतर फायदे? जानिए पूरी तुलना

    आमरस बनाम मैंगो शेक: दोनों में किसमें ज्यादा पोषण, कम कैलोरी और बेहतर फायदे? जानिए पूरी तुलना

    नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही आम से बने व्यंजनों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इनमें मैंगो शेक और आमरस सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले विकल्प हैं। दोनों का स्वाद लाजवाब होता है और दोनों ही पके हुए आम से तैयार किए जाते हैं, लेकिन इन्हें बनाने की विधि, पोषण मूल्य और स्वास्थ्य पर प्रभाव एक-दूसरे से काफी अलग होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दोनों में से कौन-सा विकल्प आपके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है।

    मैंगो शेक एक ठंडा और क्रीमी पेय है, जिसे आम के गूदे में दूध मिलाकर तैयार किया जाता है। कई लोग इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी, ड्राई फ्रूट्स, आइसक्रीम या क्रीम भी मिलाते हैं। इसकी वजह से यह अधिक गाढ़ा, स्वादिष्ट और ऊर्जा से भरपूर बन जाता है। गर्मी के दिनों में यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देने वाला पेय माना जाता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है।

    दूसरी ओर, आमरस पारंपरिक भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे केवल पके हुए आम के गूदे को अच्छी तरह मसलकर तैयार किया जाता है। कई जगहों पर इसमें इलायची या केसर जैसी प्राकृतिक खुशबू वाली सामग्री मिलाई जाती है, लेकिन इसका मूल स्वाद आम की प्राकृतिक मिठास पर ही आधारित रहता है। आमरस को अक्सर पूरी या अन्य पारंपरिक व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।

    पोषण की दृष्टि से देखें तो दोनों में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व मौजूद रहते हैं, क्योंकि दोनों का मुख्य आधार आम ही है। हालांकि मैंगो शेक में दूध और अतिरिक्त चीनी मिलाने से इसकी कैलोरी, फैट और शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है। यही कारण है कि यह अधिक ऊर्जा प्रदान करता है, लेकिन वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों के लिए सीमित मात्रा में ही उपयुक्त माना जाता है।

    वहीं बिना अतिरिक्त चीनी या अन्य सामग्री के तैयार किया गया आमरस अपेक्षाकृत हल्का विकल्प माना जाता है। इसमें प्राकृतिक मिठास बनी रहती है और अतिरिक्त फैट नहीं होता। हालांकि इसमें भी आम के कारण प्राकृतिक शर्करा पर्याप्त मात्रा में होती है, इसलिए इसका सेवन भी संतुलित मात्रा में करना बेहतर रहता है।

    दोनों विकल्पों का उपयोग अलग-अलग जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है। यदि किसी को अधिक ऊर्जा और लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला पेय चाहिए तो मैंगो शेक बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं यदि कोई व्यक्ति आम के प्राकृतिक स्वाद का आनंद लेना चाहता है और अतिरिक्त फैट से बचना चाहता है तो आमरस अधिक उपयुक्त माना जा सकता है।

    खानपान की परंपरा में भी दोनों की अलग पहचान है। आमरस लंबे समय से पारंपरिक भारतीय भोजन का हिस्सा रहा है, जबकि मैंगो शेक आधुनिक जीवनशैली के साथ घरों, कैफे और रेस्तरां में समान रूप से लोकप्रिय हो चुका है। दोनों का स्वाद और उपयोग अलग-अलग परिस्थितियों में पसंद किया जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही विकल्प पौष्टिक हो सकते हैं, बशर्ते इनका सेवन संतुलित मात्रा में किया जाए। अतिरिक्त चीनी, क्रीम या आइसक्रीम से बचकर तैयार किए गए मैंगो शेक और बिना अतिरिक्त मिठास वाला आमरस, दोनों ही गर्मियों में स्वाद और पोषण का अच्छा संतुलन प्रदान कर सकते हैं।

  • दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं पाकिस्तान की ये मनमोहक जगहें, प्रकृति, इतिहास और एडवेंचर का मिलता है अनूठा अनुभव

    दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं पाकिस्तान की ये मनमोहक जगहें, प्रकृति, इतिहास और एडवेंचर का मिलता है अनूठा अनुभव

    नई दिल्ली । दक्षिण एशिया का पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी प्राकृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों के कारण पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां ऊंचे बर्फीले पर्वत, हरी-भरी घाटियां, शांत झीलें, विस्तृत समुद्री तट और ऐतिहासिक स्मारक देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। प्रकृति, रोमांच और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम इस देश के कई पर्यटन स्थलों को विशेष पहचान दिलाता है।

    उत्तरी पाकिस्तान में स्थित हुंजा घाटी सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। ऊंचे पर्वतों, स्वच्छ वातावरण और हरियाली से घिरी यह घाटी प्राकृतिक सौंदर्य का शानदार उदाहरण मानी जाती है। यहां ट्रैकिंग, राफ्टिंग, कयाकिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है। शांत वातावरण और पर्वतीय दृश्य इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।

    नीलम घाटी भी अपनी मनमोहक प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है। ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं, बहती नदियां, घने जंगल और शांत वातावरण इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। यहां मौजूद ऐतिहासिक स्थल और प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय माना जाता है।

    समुद्री पर्यटन पसंद करने वालों के लिए चूर्णा आइलैंड प्रमुख आकर्षण है। अरब सागर में स्थित यह द्वीप अपने साफ पानी और समुद्री जीवन के लिए जाना जाता है। यहां स्कूबा डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और क्लिफ डाइविंग जैसी रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। समुद्र के भीतर की रंग-बिरंगी दुनिया देखने के इच्छुक लोगों के लिए यह स्थान विशेष महत्व रखता है।

    सिंध क्षेत्र का गोरख हिल भी पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। ऊंचाई पर स्थित यह इलाका अपने चट्टानी परिदृश्य, ठंडे मौसम और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां से दिखाई देने वाले प्राकृतिक दृश्य पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं और एडवेंचर पसंद करने वाले यात्रियों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

    उत्तर पाकिस्तान के शोगरान और सिरी पाये क्षेत्र भी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां तक पहुंचने का सफर भी रोमांच से भरपूर माना जाता है। हरे-भरे घास के मैदान, रंग-बिरंगे फूल और बादलों से घिरी पहाड़ियां इस क्षेत्र को बेहद आकर्षक बनाती हैं। गर्मियों के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटक यहां घूमने पहुंचते हैं।

    कराची के समुद्र तट भी देश के प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में शामिल हैं। समुद्र किनारे सूर्यास्त का मनमोहक दृश्य, समुद्री हवाएं और मनोरंजक गतिविधियां पर्यटकों को अपनी ओर खींचती हैं। यहां परिवारों और युवा यात्रियों के लिए अवकाश बिताने के कई विकल्प उपलब्ध हैं।

    इसके अलावा खानपुर डैम साहसिक खेलों के लिए प्रसिद्ध है, जहां जेट स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। वहीं हिंगोल नेशनल पार्क अपनी अनूठी भौगोलिक संरचना, वन्यजीवों और प्राकृतिक दृश्यों के कारण प्रकृति प्रेमियों के बीच लोकप्रिय है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले पर्यटक सुक्कुर जैसे शहरों का भी रुख करते हैं, जहां प्राचीन स्थापत्य और ऐतिहासिक धरोहरें क्षेत्र की समृद्ध विरासत की झलक प्रस्तुत करती हैं।

  • बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च

    बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम शुरू होते ही राजस्थान का उदयपुर अपनी अलग ही खूबसूरती में नजर आता है। झीलों से घिरा यह ऐतिहासिक शहर मानसून के दौरान हरियाली से ढक जाता है और अरावली की पहाड़ियां बादलों की चादर ओढ़ लेती हैं। पानी से लबालब भरी झीलें और शाही महलों का नजारा इस शहर को देश के सबसे खूबसूरत मानसून पर्यटन स्थलों में शामिल कर देता है। यदि आप एक सप्ताह की यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं तो उदयपुर बेहतरीन विकल्प हो सकता है।

    यात्रा के पहले दिन सिटी पैलेस और लेक पिछोला की सैर करें। शाम को बोट राइड का आनंद लें और झील किनारे स्थानीय भोजन का स्वाद लें।

    दूसरे दिन फतेह सागर झील, सहेलियों की बाड़ी और स्थानीय बाजारों की सैर करें। मानसून के दौरान यहां का वातावरण बेहद सुहावना रहता है।

    तीसरे दिन सज्जनगढ़ पैलेस जाएं जिसे मानसून पैलेस भी कहा जाता है। यहां से पूरे शहर और झीलों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। बारिश के मौसम में यह स्थान फोटोग्राफी के लिए सबसे पसंदीदा माना जाता है।

    चौथे दिन एकलिंगजी मंदिर और नाथद्वारा मंदिर का धार्मिक भ्रमण किया जा सकता है। दोनों स्थल उदयपुर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

    पांचवें दिन बागोर की हवेली और स्थानीय संग्रहालय देखें। शाम को पारंपरिक राजस्थानी लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम यात्रा को और यादगार बना देंगे।

    छठे दिन आसपास की अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक स्थलों की सैर करें। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और शांत वातावरण प्रकृति प्रेमियों को खूब आकर्षित करता है।

    सातवें दिन स्थानीय हस्तशिल्प बाजारों से राजस्थानी कला वस्तुएं कपड़े और स्मृति चिह्न खरीदकर अपनी यात्रा का समापन करें।

    अनुमानित खर्च
    आने जाने का यात्रा खर्च लगभग 4000 से 10000 रुपये (शहर और परिवहन के अनुसार)
    होटल का खर्च प्रति रात लगभग 2000 से 5000 रुपये
    भोजन पर प्रतिदिन लगभग 800 से 1500 रुपये
    स्थानीय घूमने और प्रवेश शुल्क लगभग 3000 से 5000 रुपये
    कुल सात दिन का औसत बजट प्रति व्यक्ति लगभग 25000 से 45000 रुपये हो सकता है।

    मानसून के दौरान यात्रा करते समय छाता या रेनकोट साथ रखें। फिसलन वाले स्थानों पर सावधानी बरतें और मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। बारिश के मौसम में उदयपुर की झीलें, महल और हरियाली मिलकर ऐसा अनुभव देती हैं जो लंबे समय तक याद रहता है।

  • मानसून में बढ़ जाता है इन 7 बीमारियों का खतरा जानिए बचाव के आसान और असरदार उपाय

    मानसून में बढ़ जाता है इन 7 बीमारियों का खतरा जानिए बचाव के आसान और असरदार उपाय


    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है लेकिन अपने साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान जगह जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है जबकि दूषित पानी और गंदगी बैक्टीरिया तथा वायरस के फैलाव को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान साफ सफाई और खानपान का विशेष ध्यान रखकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

    मानसून में सबसे अधिक फैलने वाली बीमारियों में डेंगू प्रमुख है। यह एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। तेज बुखार सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द और शरीर तथा जोड़ों में तेज दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं। इससे बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें तथा पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।

    मलेरिया भी बारिश के मौसम में तेजी से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने से होने वाली इस बीमारी में ठंड लगकर बुखार आना पसीना आना कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शाम के समय मच्छरों से बचाव और साफ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है।

    चिकनगुनिया भी मच्छरों के जरिए फैलने वाला संक्रमण है जिसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों में असहनीय दर्द हो सकता है। नियमित सफाई और मच्छरों की रोकथाम इसके बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

    बारिश में दूषित भोजन और पानी के कारण टाइफाइड का खतरा भी बढ़ जाता है। लगातार बुखार पेट दर्द कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं इसके प्रमुख संकेत हैं। हमेशा स्वच्छ पानी पिएं और खुले में मिलने वाले खाद्य पदार्थों से बचें।

    हेपेटाइटिस ए भी गंदे पानी और दूषित भोजन से फैलने वाला संक्रमण है। इसमें आंखों और त्वचा का पीला पड़ना भूख कम लगना थकान और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। भोजन और पानी की स्वच्छता इसका सबसे प्रभावी बचाव है।

    गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट का संक्रमण भी मानसून में आम हो जाता है। दूषित भोजन या पानी के कारण दस्त उल्टी पेट दर्द और शरीर में पानी की कमी की समस्या हो सकती है। ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाना तथा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना जरूरी है।

    मौसम में अचानक बदलाव के कारण सर्दी जुकाम और फ्लू के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। नाक बहना गले में खराश खांसी और हल्का बुखार इसके सामान्य लक्षण हैं। नियमित हाथ धोना पर्याप्त नींद लेना संतुलित आहार और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना संक्रमण से बचने में मदद करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं ताजा भोजन करें और बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। समय पर सतर्कता ही स्वस्थ मानसून की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • बार बार होने वाला सिरदर्द हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

    बार बार होने वाला सिरदर्द हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी


    नई दिल्ली । नई दिल्ली से प्राप्त मेडिकल जानकारी के अनुसार सिरदर्द को अक्सर लोग सामान्य समस्या मानकर टाल देते हैं। थकान नींद की कमी तनाव या लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करने के बाद होने वाला सिरदर्द आम माना जाता है और आराम करने या पानी पीने से ठीक भी हो जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिरदर्द सामान्य नहीं होता। जब यह समस्या बार बार होने लगे या इसके साथ शरीर में असामान्य बदलाव दिखाई देने लगें तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

    डॉक्टरों के अनुसार ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर स्थिति के शुरुआती संकेत बहुत साधारण हो सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग इन्हें थकान या मानसिक दबाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। दिमाग में जब असामान्य कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं तो वे आसपास के हिस्सों पर दबाव डालती हैं। इस दबाव के कारण अलग अलग तरह के लक्षण सामने आ सकते हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि ट्यूमर दिमाग के किस हिस्से में है और कितना बढ़ चुका है।

    अगर यह समस्या सोचने समझने या याददाश्त से जुड़े हिस्से को प्रभावित करती है तो व्यक्ति को भूलने की समस्या होने लगती है। ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आती है और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो सकती है। कई लोग इसे उम्र या तनाव का असर मान लेते हैं जबकि यह गंभीर संकेत हो सकता है।

    यदि ट्यूमर दृष्टि से जुड़े हिस्से को प्रभावित करता है तो धुंधला दिखना दोहरी छवि दिखाई देना या नजर कमजोर होना जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में बोलने में कठिनाई या सही शब्द चुनने में परेशानी भी देखी जा सकती है। ये लक्षण धीरे धीरे बढ़ते हैं इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते।

    इसके अलावा दिमाग के संतुलन और मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाले हिस्से पर असर पड़ने से चलने में लड़खड़ाहट हाथ पैरों में कमजोरी और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो सकती है। कुछ मरीजों में व्यवहार में बदलाव चिड़चिड़ापन या सामाजिक दूरी भी बढ़ सकती है जिसे मानसिक तनाव समझ लिया जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिरदर्द खतरनाक नहीं होता लेकिन कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो बार बार हो रहा हो नींद से जगा रहा हो या पहले से अलग और अधिक तीव्र महसूस हो तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

    यदि सिरदर्द के साथ उल्टी संतुलन बिगड़ना नजर में बदलाव कमजोरी या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण भी दिखें तो स्थिति गंभीर हो सकती है और तुरंत जांच कराना जरूरी हो जाता है। समय पर पहचान और उपचार से कई गंभीर समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है इसलिए लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

  • शिमला मिर्च से बढ़ता है पोटैशियम? डायलिसिस मरीजों को क्यों रखनी चाहिए सावधानी

    शिमला मिर्च से बढ़ता है पोटैशियम? डायलिसिस मरीजों को क्यों रखनी चाहिए सावधानी


    नई दिल्ली । किडनी की बीमारी या डायलिसिस की स्थिति में खानपान पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर से कई जरूरी मिनरल्स और अपशिष्ट पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण तत्व पोटैशियम है, जिसका संतुलन बिगड़ने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में पोटैशियम का बढ़ना हाइपरकलेमिया कहलाता है, जो दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकता है और गंभीर मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसी वजह से डायलिसिस मरीजों को हमेशा लो-पोटैशियम डाइट लेने की सलाह दी जाती है।

    शिमला मिर्च को आमतौर पर एक हल्की और सुरक्षित सब्जी माना जाता है। पोषण संबंधी आंकड़ों के अनुसार, 100 ग्राम कच्ची हरी शिमला मिर्च में लगभग 170 से 180 मिलीग्राम पोटैशियम पाया जाता है। लाल और पीली शिमला मिर्च में यह मात्रा थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे अन्य कई सब्जियों और फलों की तुलना में कम पोटैशियम वाला भोजन माना जाता है।

    इसके अलावा शिमला मिर्च में विटामिन C, विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डायलिसिस मरीज इसे पूरी तरह बंद करने की बजाय सीमित मात्रा में सेवन कर सकते हैं। इसे मुख्य भोजन का बड़ा हिस्सा नहीं बनाना चाहिए और अन्य हाई-पोटैशियम फूड जैसे टमाटर या आलू के साथ मिलाकर अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।

    हर मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी आहार को अपनाने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की बड़ी उपलब्धि, 104 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड हुए डिजिटल

    आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की बड़ी उपलब्धि, 104 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड हुए डिजिटल


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, अब तक 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड को 93 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) से जोड़ा जा चुका है। इसके साथ ही यह मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ नेटवर्क में शामिल हो गया है।

    सरकार के अनुसार, सितंबर 2021 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य पूरे देश में ऐसा डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ, प्रभावी और एक-दूसरे से जुड़ी हो सकें। इस व्यवस्था के जरिए मरीज अपने मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित तरीके से संभाल सकते हैं। अस्पतालों में कागजी प्रक्रिया कम होती है, पंजीकरण और इलाज में लगने वाला समय घटता है तथा मरीज, डॉक्टर, अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है।

    मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) के रूप में एक विशिष्ट डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई जाती है। मरीज की सहमति के आधार पर यह आईडी उसके मेडिकल रिकॉर्ड को अस्पतालों, लैब, बीमा कंपनियों और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से सुरक्षित तरीके से जोड़ती है।

    सरकार ने हाल ही में आरोग्य सेतु 2.0 को भी इस मिशन के तहत डिजिटल हेल्थ एप के रूप में लॉन्च किया है। इसके जरिए नागरिक ABHA अकाउंट बना सकते हैं, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड देख और प्रबंधित कर सकते हैं, टेली-कंसल्टेशन ले सकते हैं, अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं, बीमा संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आसपास उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा वियरेबल डिवाइस के जरिए स्वास्थ्य की निगरानी की सुविधा भी उपलब्ध है।

    फैक्टशीट के मुताबिक, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा ने अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण की प्रक्रिया को काफी आसान और तेज बना दिया है। 18 जून तक देशभर में 23.21 करोड़ से अधिक ABHA लिंक्ड डिजिटल टोकन जारी किए जा चुके हैं।

    सरकार ने बताया कि 18 जून तक इस योजना के तहत अस्पतालों को 107 करोड़ रुपये से अधिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, लैब और फार्मेसी को 2.95 करोड़ रुपये से ज्यादा तथा डिजिटल हेल्थ समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को 26 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है।

    इसके अलावा 2,200 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को ई-सुश्रुत क्लिनिक प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। सी-डैक द्वारा विकसित यह हल्का हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों को मरीजों के रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करने में मदद कर रहा है। सरकार का कहना है कि यह पहल देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर, तेज तथा पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।

  • बारिश में भीग गया स्मार्टफोन? घबराने की बजाय तुरंत अपनाएं ये आसान उपाय, सही समय पर उठाया कदम बचा सकता है आपका मोबाइल

    बारिश में भीग गया स्मार्टफोन? घबराने की बजाय तुरंत अपनाएं ये आसान उपाय, सही समय पर उठाया कदम बचा सकता है आपका मोबाइल

    नई दिल्ली । मानसून के मौसम में अचानक होने वाली बारिश अक्सर लोगों के स्मार्टफोन के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। बाहर निकलते समय जेब या बैग में रखा मोबाइल कई बार पानी की चपेट में आ जाता है। ऐसे में घबराकर जल्दबाजी में उठाया गया एक गलत कदम फोन को हमेशा के लिए खराब कर सकता है। इसलिए मोबाइल भीगने के बाद सही तरीके अपनाना बेहद जरूरी होता है।

    अगर फोन बारिश में भीग जाए तो सबसे पहले उसे तुरंत स्विच ऑफ कर देना चाहिए। यदि डिवाइस पहले से बंद है तो उसे चालू करने की कोशिश बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। पानी के संपर्क में आने के बाद फोन के अंदर शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में फोन ऑन रहने या बार-बार चालू करने का प्रयास करने से मदरबोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

    भीगे हुए मोबाइल को तुरंत चार्जिंग पर लगाना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। कई लोग यह जांचने के लिए कि फोन काम कर रहा है या नहीं, उसे चार्जर से जोड़ देते हैं। ऐसा करने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है और फोन पूरी तरह खराब हो सकता है। इसलिए जब तक फोन पूरी तरह सूख न जाए, उसे चार्जिंग से दूर रखना ही सुरक्षित माना जाता है।

    फोन बंद करने के बाद सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड को बाहर निकाल लेना चाहिए। यदि मोबाइल की बैटरी निकालना संभव हो तो उसे भी अलग कर देना बेहतर रहता है। इससे डिवाइस के अंदर हवा का प्रवाह बढ़ता है और नमी जल्दी सूखने में मदद मिलती है। साथ ही सिम और मेमोरी कार्ड को भी संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।

    इसके बाद फोन के बाहरी हिस्से को साफ और सूखे सूती कपड़े या टिश्यू पेपर से धीरे-धीरे पोंछना चाहिए। स्क्रीन, बैक पैनल और किनारों पर मौजूद पानी को सावधानी से हटाएं। इस दौरान फोन को जोर से हिलाने या झटकने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पानी अंदर तक पहुंच सकता है और नुकसान बढ़ सकता है।

    मोबाइल को सुखाने के लिए हेयर ड्रायर या किसी अन्य गर्म हवा वाले उपकरण का उपयोग नहीं करना चाहिए। तेज गर्म हवा फोन के अंदर मौजूद प्लास्टिक और अन्य संवेदनशील हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा हवा का दबाव पानी को बाहर निकालने के बजाय अंदर की ओर धकेल सकता है, जिससे समस्या और गंभीर हो सकती है।

    मानसून के दौरान मोबाइल को सुरक्षित रखने के लिए वॉटरप्रूफ कवर या सुरक्षित पाउच का इस्तेमाल करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यदि फोन लंबे समय तक पानी में रहा हो या पूरी तरह सूखने के बाद भी सामान्य रूप से काम न करे, तो उसे स्वयं खोलने की बजाय सर्विस सेंटर में जांच कराना बेहतर रहेगा। सही समय पर बरती गई सावधानियां स्मार्टफोन को गंभीर नुकसान से बचाने के साथ उसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में भी मदद करती हैं।

  • बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई छोटी-बड़ी परेशानियां भी लेकर आता है। इनमें जूतों से आने वाली बदबू एक आम समस्या है, जिससे कई लोग रोजमर्रा की जिंदगी में असहज महसूस करते हैं। ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या किसी सामाजिक कार्यक्रम में जूते उतारते समय अगर उनमें से तेज दुर्गंध आने लगे तो यह शर्मिंदगी का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मुख्य वजह बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और बैक्टीरिया का तेजी से पनपना है।

    बारिश के दिनों में पैर अक्सर पसीने या पानी के संपर्क में रहते हैं। जब नमी लंबे समय तक जूतों के अंदर बनी रहती है तो बैक्टीरिया और फंगस विकसित होने लगते हैं। यही सूक्ष्म जीव दुर्गंध पैदा करते हैं। यदि समय रहते जूतों की सफाई और देखभाल न की जाए तो समस्या और बढ़ सकती है।

    इस परेशानी से राहत पाने के लिए महंगे उत्पादों की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों का सही तरीके से उपयोग कर जूतों की बदबू को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे प्रभावी उपायों में बेकिंग सोडा शामिल है। रात में सोने से पहले जूतों के अंदर थोड़ा-सा बेकिंग सोडा छिड़कने से यह अतिरिक्त नमी और दुर्गंध को सोख लेता है। सुबह जूतों को अच्छी तरह झाड़कर साफ कर दें। इससे जूते अधिक ताजगी भरे महसूस होते हैं।

    सूखी चाय की पत्ती या इस्तेमाल किए गए और अच्छी तरह सुखाए गए टी-बैग भी इस समस्या में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन्हें कुछ घंटों के लिए जूतों के अंदर रखने से नमी कम होती है और दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया की सक्रियता घटती है। यह तरीका विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जो रोजाना लंबे समय तक जूते पहनते हैं।

    अगर बारिश में जूते भीग गए हों तो उन्हें तुरंत सुखाना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुराने अखबार का इस्तेमाल किया जा सकता है। अखबार को मोड़कर जूतों के अंदर भर देने से वह तेजी से नमी सोख लेता है। यदि अखबार पूरी तरह गीला हो जाए तो उसे बदलकर दूसरा सूखा अखबार रख दें। इससे जूतों के अंदर नमी जमा नहीं होती और बैक्टीरिया के पनपने की संभावना कम हो जाती है।

    इसके अलावा, जब भी मौसम साफ हो और धूप निकले, जूतों को कुछ समय के लिए खुली हवा और धूप में जरूर रखें। सूर्य की किरणें प्राकृतिक रूप से नमी कम करने के साथ बैक्टीरिया और फंगस की वृद्धि को भी रोकने में मदद करती हैं। नियमित रूप से जूतों को हवा लगने देने से उनमें ताजगी बनी रहती है और दुर्गंध की समस्या दोबारा होने की संभावना कम होती है।

    मानसून के दौरान जूतों की साफ-सफाई और सही देखभाल पर थोड़ा-सा ध्यान देकर बदबू की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है। घरेलू उपाय न केवल किफायती हैं, बल्कि नियमित उपयोग से जूतों की स्वच्छता बनाए रखने और पैरों को संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी मददगार साबित होते हैं।