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  • कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून

    कमजोर और सूखे नाखूनों की समस्या: जानिए कैसे वापस पा सकते हैं मजबूत और चमकदार नाखून


    नई दिल्ली। नाखून हमारी पर्सनैलिटी का एक अहम हिस्सा होते हैं। साफ, मजबूत और चमकदार नाखून जहां हाथों की खूबसूरती बढ़ाते हैं, वहीं टूटते और सूखे नाखून अक्सर स्वास्थ्य से जुड़ी कमियों की ओर इशारा करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नाखून मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं, और जब शरीर में पोषण या नमी की कमी होती है, तो ये कमजोर होने लगते हैं।
    डॉक्टरों का कहना है कि बार-बार साबुन, डिटर्जेंट और केमिकल के संपर्क में आने से नाखूनों की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। इससे वे सूखे, भुरभुरे और जल्दी टूटने लगते हैं। इसके अलावा पानी की कमी भी नाखूनों की सेहत पर सीधा असर डालती है।
    नाखूनों को मजबूत बनाने के आसान उपाय
    विशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों की सही देखभाल से उनकी सेहत को दोबारा बेहतर किया जा सकता है। सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेट रखना। पर्याप्त पानी पीने से नाखूनों की बनावट बेहतर होती है और वे मजबूत बने रहते हैं। हाथ धोने के बाद मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना भी बेहद जरूरी है। इससे नाखूनों के आसपास की त्वचा में नमी बनी रहती है और सूखापन कम होता है।
    रात के समय नाखूनों की देखभाल और भी ज्यादा असरदार मानी जाती है। सोने से पहले नारियल तेल, पेट्रोलियम जेली या मॉइस्चराइजिंग क्रीम लगाने से नाखूनों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे टूटने की समस्या कम होती है।
    विटामिन और तेलों का महत्व
    विशेषज्ञ विटामिन ई को नाखूनों के लिए बेहद फायदेमंद मानते हैं। यह एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो नाखूनों को अंदर से मजबूत बनाता है। विटामिन ई ऑयल से हल्की मालिश करने पर ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और नाखूनों को पर्याप्त पोषण मिलता है। जैतून का तेल भी नाखूनों की देखभाल में कारगर माना जाता है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स नाखूनों की सूखी परत को मुलायम बनाते हैं और उनकी टूटने की संभावना को कम करते हैं।
    सही डाइट भी है जरूरी
    डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदरूनी पोषण भी बेहद जरूरी है। प्रोटीन, बायोटिन, आयरन, जिंक और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्व नाखूनों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हरी सब्जियां, अंडे, दालें, मेवे और फल नाखूनों की सेहत को बेहतर बनाते हैं। साथ ही, जरूरत से ज्यादा नेल पॉलिश रिमूवर या नकली नाखूनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये नाखूनों को कमजोर कर सकते हैं।
  • गर्मी में कूलर की गर्म हवा से परेशान? ये 2 आसान उपाय बना सकते हैं कमरे को AC जैसा ठंडा

    गर्मी में कूलर की गर्म हवा से परेशान? ये 2 आसान उपाय बना सकते हैं कमरे को AC जैसा ठंडा

    नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ता है तो घरों में कूलर ही सबसे बड़ा सहारा बनता है। लेकिन कई बार लोगों को यह समस्या परेशान करती है कि कूलर ठंडी हवा देने के बजाय गर्म हवा फेंकने लगता है। ऐसे में लगता है कि अब राहत मिलना मुश्किल है, लेकिन कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से कूलर की कूलिंग को फिर से बेहतर किया जा सकता है और कमरे में ठंडक का असर बढ़ाया जा सकता है।

    कूलर की हवा को ठंडा बनाने के लिए सबसे सरल तरीका पानी में सेंधा नमक का उपयोग माना जाता है। जब कूलर के टैंक में पानी भरते समय उसमें थोड़ी मात्रा में सेंधा नमक मिलाया जाता है तो पानी जल्दी गर्म नहीं होता और लंबे समय तक ठंडा बना रहता है। इससे कूलर की हवा का असर बेहतर हो जाता है और कमरे में ठंडक महसूस होती है। यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनके घर में लगातार गर्म हवा की समस्या आती रहती है।

    इसके अलावा फिटकरी का उपयोग भी कूलर की कूलिंग को सुधारने में मदद करता है। जब कूलर के पानी में फिटकरी डाली जाती है तो यह पानी को साफ रखने में मदद करती है और उसमें मौजूद गंदगी और बदबू को कम करती है। साफ और शुद्ध पानी के कारण कूलर की हवा ज्यादा ताजगी भरी और ठंडी महसूस होती है, जिससे कमरे का वातावरण काफी हद तक बेहतर हो जाता है।

    कूलर की कूलिंग को और बढ़ाने के लिए कुछ अन्य घरेलू उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। जैसे टैंक में सामान्य पानी की जगह ठंडा पानी या बर्फ डालने से तुरंत ठंडक महसूस होती है और कमरे का तापमान तेजी से कम होता है। यह तरीका खासकर तब ज्यादा असरदार होता है जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा हो।

    इसके साथ ही कूलर की घास या कूलिंग पैड की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण होती है। अगर यह पुराना या खराब हो जाए तो कूलर की हवा गर्म आने लगती है। इसलिए समय-समय पर इसकी सफाई या बदलाव जरूरी होता है ताकि हवा का फ्लो सही बना रहे और कूलिंग बेहतर मिले।

    कमरे में कूलर का असर बढ़ाने के लिए वेंटिलेशन का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर कमरे की खिड़कियां और दरवाजे सही तरीके से खुले रहें तो हवा का सही प्रवाह बना रहता है और कूलर की ठंडी हवा पूरे कमरे में फैल जाती है। इससे कमरा जल्दी ठंडा होता है और लंबे समय तक ठंडक बनी रहती है।

    इसके अलावा कूलर में जरूरत से ज्यादा पानी भरने से बचना चाहिए क्योंकि इससे हवा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। सही मात्रा में पानी और नियमित सफाई कूलर की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखती है और गर्मी में राहत दिलाने में मदद करती है।

  • मीठी ड्रिंक्स बन रही लिवर की दुश्मन, फैटी लिवर से बचाव के लिए जरूरी हैं ये 3 आसान आदतें

    मीठी ड्रिंक्स बन रही लिवर की दुश्मन, फैटी लिवर से बचाव के लिए जरूरी हैं ये 3 आसान आदतें

    नई दिल्ली। आज की बदलती जीवनशैली और अनहेल्दी खानपान की आदतें शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल रही हैं, जिनमें लिवर सबसे अधिक प्रभावित होने वाले अंगों में से एक है। लिवर शरीर में डिटॉक्सिफिकेशन, पाचन और एनर्जी बैलेंस जैसे कई अहम कार्य करता है, लेकिन जब खानपान में अधिक मात्रा में चीनी और मीठी ड्रिंक्स शामिल हो जाती हैं, तो इसका सीधा असर लिवर की कार्यक्षमता पर पड़ने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक ज्यादा शुगर का सेवन फैटी लिवर जैसी गंभीर स्थिति को जन्म दे सकता है, जिसमें लिवर के अंदर फैट जमा होने लगता है और उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।

    शरीर में जब अधिक मात्रा में चीनी जाती है तो वह फ्रुक्टोज और ग्लूकोज में बदलकर लिवर तक पहुंचती है। सामान्य स्थिति में लिवर इन शुगर को ऊर्जा में बदलकर उपयोग करता है, लेकिन जब इनकी मात्रा जरूरत से अधिक हो जाती है तो शरीर इन्हें फैट के रूप में स्टोर करने लगता है। समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होता जाता है और धीरे-धीरे फैटी लिवर की समस्या पैदा हो जाती है। यह स्थिति न केवल लिवर के कार्य को प्रभावित करती है बल्कि शरीर की ऊर्जा, पाचन और मेटाबॉलिज्म पर भी नकारात्मक असर डालती है।

    मीठी ड्रिंक्स इस समस्या को और भी तेजी से बढ़ा सकती हैं। इन पेयों में मौजूद हाई शुगर कंटेंट और आर्टिफिशियल तत्व शरीर में तेजी से अवशोषित होते हैं, जिससे लिवर पर अचानक दबाव बढ़ जाता है। लगातार इनका सेवन लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इसके अलावा इनमें मौजूद केमिकल्स और एडिटिव्स भी लिवर की सेहत को कमजोर करने का काम करते हैं। यही कारण है कि विशेषज्ञ मीठी ड्रिंक्स के सेवन को सीमित करने की सलाह देते हैं।

    फैटी लिवर जैसी समस्या से बचने के लिए संतुलित आहार को सबसे जरूरी माना जाता है। जब भोजन में पोषक तत्वों का सही संतुलन होता है तो लिवर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और वह बेहतर तरीके से अपना काम करता है। इसके साथ ही ताजे फल और फाइबर युक्त आहार लिवर की सफाई प्रक्रिया को मजबूत करते हैं और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी लिवर के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया को बेहतर बनाता है।

    इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। अनहेल्दी खानपान, अत्यधिक शुगर का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली धीरे-धीरे लिवर को कमजोर कर सकती है, जिससे आगे चलकर गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों को अपनाकर लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय रखा जा सकता है।

  • मदर्स डे पर भावुक हुईं दीपिका सिंह, बोलीं- “मां बनना जिंदगी का सबसे खूबसूरत अहसास”

    मदर्स डे पर भावुक हुईं दीपिका सिंह, बोलीं- “मां बनना जिंदगी का सबसे खूबसूरत अहसास”


    नई दिल्ली। माताओं के सम्मान और प्रेम को समर्पित मदर्स डे (10 मई) को लेकर टीवी अभिनेत्री दीपिका सिंह बेहद उत्साहित नजर आईं। लोकप्रिय शो ‘मंगल लक्ष्मी’ में मंगल का किरदार निभा रहीं दीपिका ने इस खास मौके पर अपने मातृत्व के अनुभवों को खुलकर साझा किया।

    दीपिका सिंह ने कहा कि मां बनना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा और खूबसूरत बदलाव रहा है। उनके अनुसार, यह एक ऐसा सफर है जो सिर्फ एक किरदार नहीं बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा सोहम उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर दिन उन्हें जीवन के छोटे-छोटे पलों की अहमियत समझाता है।

    अभिनेत्री ने भावुक होते हुए कहा कि जब वह शूटिंग के दौरान बच्चों के साथ सीन करती हैं, तो अक्सर उन्हें अपने बेटे की याद आती है। उनके लिए यह अनुभव काफी भावनात्मक होता है, क्योंकि वह हर बच्चे में अपने बेटे की झलक महसूस करती हैं।

    दीपिका ने यह भी कहा कि मां होने के साथ-साथ वह एक कामकाजी महिला भी हैं और चाहती हैं कि उनका बेटा उन्हें इस रूप में भी देखे। उनके अनुसार, जब बच्चे अपनी मां को काम करते देखते हैं, तो उन्हें मेहनत और सपनों की अहमियत समझ आती है। उन्होंने कहा कि एक महिला की पहचान सिर्फ मां होने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह कई भूमिकाएं एक साथ निभाती है।

    मदर्स डे पर उन्होंने सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि सभी महिलाओं की सराहना की। दीपिका ने कहा कि हर महिला, जो परिवार की जिम्मेदारियों को प्यार और समर्पण के साथ निभाती है, वह सम्मान की हकदार है। उन्होंने सभी माताओं की मेहनत, त्याग और प्रेम को सलाम किया।
     

  • पंच केदार के दर्शन से मिलता है पुण्य फल, जानिए भगवान शिव के पांच पवित्र धामों की महिमा

    पंच केदार के दर्शन से मिलता है पुण्य फल, जानिए भगवान शिव के पांच पवित्र धामों की महिमा


    नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि माना जाता है। यहां स्थित चारधाम यात्रा जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही खास मानी जाती है पंच केदार यात्रा। पंच केदार भगवान शिव को समर्पित पांच पवित्र मंदिरों का समूह है, जिनका हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन मंदिरों के दर्शन करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन धामों की यात्रा कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

    पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और उनसे मिलने से बचने के लिए बैल का रूप धारण कर उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में चले गए। जब पांडवों ने उनका पीछा किया, तब शिवजी बैल के रूप में धरती में समाने लगे। इसी दौरान उनके शरीर के अलग-अलग अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए। यही पांच स्थान आगे चलकर पंच केदार कहलाए।

    इनमें सबसे प्रमुख और प्रथम केदार केदारनाथ धाम है, जहां भगवान शिव के पृष्ठ भाग की पूजा की जाती है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

    दूसरा केदार मध्यमहेश्वर है, जहां भगवान शिव की नाभि की पूजा होती है। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर चौखंबा पर्वत की गोद में बसा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां के दर्शन से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

    तीसरा केदार तुंगनाथ धाम है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है। यहां भगवान शिव की भुजाओं और हृदय स्थल की पूजा की जाती है। चोपता के पास स्थित यह धाम प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है।

    चौथा केदार रुद्रनाथ मंदिर है, जहां भगवान शिव के मुख की पूजा होती है। गुफा के भीतर स्थित यह मंदिर बेहद रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। यहां शिवजी को नीलकंठ महादेव के रूप में पूजा जाता है।

    पंचम और अंतिम केदार कल्पेश्वर मंदिर है, जो चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित है। यहां भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि कल्पेश्वर मंदिर के कपाट पूरे साल खुले रहते हैं, जिससे श्रद्धालु किसी भी समय यहां दर्शन कर सकते हैं।

    पंच केदार यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव का अनोखा संगम भी है। माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ इन पांचों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

  • स्वाद के साथ सेहत का भी खास ख्याल, ग्रीन चटनी सैंडविच ढोकला बना लोगों का नया फेवरेट स्नैक

    स्वाद के साथ सेहत का भी खास ख्याल, ग्रीन चटनी सैंडविच ढोकला बना लोगों का नया फेवरेट स्नैक

    नई दिल्ली। ग्रीन चटनी सैंडविच ढोकला इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पारंपरिक गुजराती ढोकले को नए अंदाज में तैयार कर बनाई गई यह डिश स्वाद के साथ सेहत का भी खास ध्यान रखती है। मुलायम और स्पंजी ढोकले के बीच लगी तीखी हरी चटनी इसकी खासियत मानी जा रही है। इसका चटपटा स्वाद लोगों को काफी पसंद आ रहा है और यही वजह है कि अब यह स्नैक घरों में तेजी से तैयार किया जाने लगा है। हल्के मसालों और कम तेल में बनने वाली यह डिश हर उम्र के लोगों के लिए एक शानदार विकल्प मानी जा रही है।

    इस खास रेसिपी को तैयार करने के लिए सबसे पहले बेसन, दही और पानी की मदद से स्मूद बैटर बनाया जाता है। इसमें हल्दी, नमक और अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट मिलाकर कुछ समय के लिए रखा जाता है ताकि मिश्रण अच्छी तरह तैयार हो सके। इसके बाद ताजी हरी धनिया पत्ती, पुदीना, हरी मिर्च और नींबू के रस से स्वादिष्ट ग्रीन चटनी तैयार की जाती है। यही चटनी इस डिश को अलग और खास स्वाद देती है।

    ढोकले को मुलायम और फूला हुआ बनाने के लिए बैटर में फ्रूट सॉल्ट मिलाया जाता है। इसके तुरंत बाद मिश्रण को चिकनाई लगे बर्तन में डालकर भाप में पकाया जाता है। कुछ ही मिनटों में तैयार हुआ ढोकला बेहद सॉफ्ट और स्पंजी बनकर तैयार हो जाता है। ठंडा होने के बाद इसे बीच से काटकर दो हिस्सों में बांटा जाता है और फिर एक हिस्से पर ग्रीन चटनी की मोटी लेयर लगाई जाती है। इसके ऊपर दूसरा हिस्सा रखकर इसे सैंडविच स्टाइल में तैयार किया जाता है।

    ढोकले का स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से राई, सफेद तिल और करी पत्तों का तड़का डाला जाता है। यह तड़का इसकी खुशबू और स्वाद दोनों को और बेहतर बना देता है। छोटे-छोटे टुकड़ों में कटने के बाद जब इसे सर्व किया जाता है तो इसका आकर्षक लुक भी लोगों को काफी पसंद आता है। कई लोग इसे सुबह के नाश्ते में खाना पसंद करते हैं, वहीं शाम की हल्की भूख के लिए भी यह एक बेहतरीन स्नैक माना जाता है।

    आजकल लोग ऐसे भोजन को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ हल्का और हेल्दी भी हो। ग्रीन चटनी सैंडविच ढोकला इसी वजह से तेजी से लोगों की पसंद बनता जा रहा है। स्टीम में तैयार होने के कारण इसमें तेल का इस्तेमाल बेहद कम होता है, जिससे यह दूसरी तली हुई चीजों की तुलना में ज्यादा पौष्टिक माना जाता है। कम समय में आसानी से तैयार होने वाली यह रेसिपी अब कई घरों की खास पसंद बन चुकी है।

  • गर्मी में कैसे बनाए रखें स्किन का नेचुरल ग्लो? अपनाएं ये आसान और असरदार टिप्स

    गर्मी में कैसे बनाए रखें स्किन का नेचुरल ग्लो? अपनाएं ये आसान और असरदार टिप्स


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है। तेज धूप, पसीना, धूल और गर्म हवाएं स्किन को डल, ड्राई और ऑयली बना देती हैं। कई लोगों को टैनिंग, पिंपल्स और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम अपने स्किन केयर रूटीन में कुछ खास बदलाव करें, ताकि त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहे। सही देखभाल और कुछ आसान टिप्स अपनाकर गर्मियों में भी चेहरे की प्राकृतिक चमक बरकरार रखी जा सकती है।

    गर्मी के मौसम में स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी माना जाता है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई देने लगती है। इसलिए दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे स्किन साफ और चमकदार बनी रहती है। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी और फ्रेश जूस भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मददगार होते हैं।

    धूप में बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। सूरज की तेज यूवी किरणें स्किन को नुकसान पहुंचाकर टैनिंग और समय से पहले एजिंग की समस्या बढ़ा सकती हैं। इसलिए SPF युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। रोजाना सनस्क्रीन लगाने से त्वचा सुरक्षित रहती है और उसका नेचुरल ग्लो बना रहता है।

    गर्मियों में हैवी क्रीम की जगह लाइटवेट और ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इससे स्किन चिपचिपी नहीं होती और चेहरे पर फ्रेशनेस बनी रहती है। मॉइस्चराइजर स्किन को हाइड्रेट रखने के साथ उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में भी मदद करता है।

    स्किन को हेल्दी बनाए रखने के लिए खान-पान का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। गर्मियों में तरबूज, खीरा, पपीता और संतरा जैसे सीजनल फलों का सेवन फायदेमंद होता है। इनमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और चेहरे की चमक बढ़ाते हैं। हेल्दी डाइट का असर सीधे स्किन पर दिखाई देता है।

    गर्मी में त्वचा जल्दी ऑयली हो जाती है, जिससे पिंपल्स और एक्ने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए दिन में दो से तीन बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करना चाहिए। इससे चेहरे पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त ऑयल हट जाता है और स्किन फ्रेश महसूस करती है।

    इसके अलावा घरेलू और नेचुरल फेस पैक भी गर्मियों में काफी फायदेमंद साबित होते हैं। बेसन, दही, एलोवेरा, गुलाबजल और नींबू जैसी चीजों से बने फेस पैक त्वचा को ठंडक देने के साथ नेचुरल ग्लो भी बढ़ाते हैं। हफ्ते में एक या दो बार फेस पैक लगाने से चेहरे पर निखार आता है और स्किन हेल्दी बनी रहती है।

    अगर आप भी गर्मियों में अपनी स्किन को चमकदार और फ्रेश बनाए रखना चाहते हैं, तो इन आसान टिप्स को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा जरूर बनाएं।

  • World Thalassaemia Day: थकान, कमजोरी और एनीमिया को न करें नजरअंदाज

    World Thalassaemia Day: थकान, कमजोरी और एनीमिया को न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली । हर साल 8 मई को मनाया जाने वाला World Thalassemia Day लोगों को एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार Thalassemia के प्रति जागरूक करने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार थकान महसूस होना, कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी, पीली त्वचा या बार-बार बीमार पड़ना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार ये संकेत थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा करते हैं।

    नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में ऑक्सीजन का संचार प्रभावित होता है, जिससे मरीज को लगातार कमजोरी, थकान और एनीमिया जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में आनुवंशिक रूप से पहुंचती है, इसलिए इसकी समय पर पहचान बेहद जरूरी मानी जाती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि थैलेसीमिया मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—थैलेसीमिया माइनर और थैलेसीमिया मेजर। थैलेसीमिया माइनर में व्यक्ति बीमारी का वाहक होता है और सामान्य जीवन जी सकता है। कई मामलों में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं या दिखाई ही नहीं देते। वहीं, थैलेसीमिया मेजर इसका गंभीर रूप है, जिसमें मरीज को नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। लगातार इलाज, दवाओं और चिकित्सकीय निगरानी के बिना मरीज के लिए सामान्य जीवन जीना मुश्किल हो सकता है।

    विश्व थैलेसीमिया दिवस का सबसे बड़ा उद्देश्य युवाओं को शादी से पहले थैलेसीमिया जांच कराने के लिए प्रेरित करना है। डॉक्टरों के अनुसार अगर पति और पत्नी दोनों थैलेसीमिया माइनर के वाहक हों, तो उनके बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते जांच और जागरूकता इस बीमारी की रोकथाम में अहम भूमिका निभा सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से अपील कर रहे हैं कि यदि किसी व्यक्ति में लगातार कमजोरी, भूख कम लगना, थकान, पीली त्वचा या बार-बार संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यक रक्त जांच कराएं। सही समय पर पहचान और उचित इलाज से बीमारी की जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    थैलेसीमिया मेजर के मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। यही वजह है कि इस अवसर पर स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि एक यूनिट रक्त किसी मरीज के लिए नई जिंदगी साबित हो सकता है।

    हालांकि थैलेसीमिया का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन समय पर जांच, नियमित उपचार, संतुलित देखभाल और जागरूकता के जरिए मरीज सामान्य और बेहतर जीवन जी सकते हैं।

  • मई में पार्टनर संग घूमने के लिए बेस्ट रोमांटिक डेस्टिनेशंस, जहां यादगार बन जाएगा हर पल

    मई में पार्टनर संग घूमने के लिए बेस्ट रोमांटिक डेस्टिनेशंस, जहां यादगार बन जाएगा हर पल

    नई दिल्ली।  गर्मियों की शुरुआत होते ही लोग छुट्टियों का प्लान बनाने लगते हैं। खासकर कपल्स ऐसी जगहों की तलाश में रहते हैं जहां सुकून भरा माहौल, खूबसूरत नजारे और रोमांटिक पल एक साथ मिल सकें। अगर आप भी मई के महीने में अपने पार्टनर के साथ किसी खास डेस्टिनेशन पर घूमने का सोच रहे हैं, तो देश की कुछ बेहद खूबसूरत जगहें आपके ट्रिप को यादगार बना सकती हैं। यहां आप प्रकृति के बीच क्वालिटी टाइम बिताने के साथ शानदार तस्वीरें भी कैमरे में कैद कर सकते हैं।
    केरल का अलेप्पी कपल्स के लिए सबसे पसंदीदा रोमांटिक डेस्टिनेशंस में गिना जाता है। समुद्र, बैकवॉटर और हाउस बोट का अनुभव यहां की सबसे बड़ी खासियत है। शांत पानी के बीच तैरती हाउस बोट में पार्टनर के साथ बिताया गया समय किसी फिल्मी सफर से कम नहीं लगता। नारियल के पेड़ों और ठंडी हवाओं के बीच यहां का माहौल बेहद सुकून देने वाला होता है। यही वजह है कि अलेप्पी को “पूरब का वेनिस” भी कहा जाता है।
    अगर आप पहाड़ों और प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं, तो उत्तराखंड का चोपता आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। बुरांश के फूलों से ढकी घाटियां और तुंगनाथ मंदिर तक का ट्रेक सफर को खास बना देता है। आसपास मौजूद औली की बर्फीली चोटियां और रोप-वे राइड रोमांच के साथ रोमांस का शानदार अनुभव देती हैं। मई के महीने में यहां का मौसम काफी सुहावना रहता है।
    हिमाचल प्रदेश का मनाली हमेशा से हनीमून और कपल ट्रिप्स के लिए मशहूर रहा है। मई-जून की गर्मियों में भी यहां हल्की ठंड का एहसास बना रहता है। रोहतांग पास की बर्फ, हरी-भरी वादियां और खूबसूरत कैफे कपल्स को बेहद आकर्षित करते हैं। मनाली के आसपास सोलंग वैली और अटल टनल जैसी जगहें भी घूमने लायक हैं, जहां आप एडवेंचर और रोमांस दोनों का मजा ले सकते हैं।
    भीड़-भाड़ से दूर शांत माहौल पसंद करने वाले कपल्स के लिए डलहौज़ी एक शानदार विकल्प है। देवदार के जंगल, झरने और ठंडी हवाएं यहां के माहौल को बेहद रोमांटिक बना देती हैं। खज्जियार, पंचपुला और सतधारा जैसी जगहें यहां आने वाले पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं। मई में यहां का मौसम बेहद आरामदायक रहता है, जिससे यह कपल्स के लिए परफेक्ट समर डेस्टिनेशन बन जाता है।
    वहीं जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत यूसमार्ग घाटी भी कपल्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। हरे-भरे मैदान, बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण इस जगह को खास बनाते हैं। यहां ट्रेकिंग और हाइकिंग जैसी एक्टिविटीज का मजा भी लिया जा सकता है। मई में यहां का मौसम काफी खुशनुमा रहता है, जो रोमांटिक ट्रिप के लिए बिल्कुल परफेक्ट माना जाता है।
    अगर आप इस गर्मी अपने पार्टनर के साथ कुछ खास और यादगार पल बिताना चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशंस आपके ट्रैवल प्लान को शानदार बना सकते हैं।
  • धुंधली नजर को न समझें सामान्य, 40 की उम्र के बाद नियमित आंखों की जांच क्यों है बेहद जरूरी

    धुंधली नजर को न समझें सामान्य, 40 की उम्र के बाद नियमित आंखों की जांच क्यों है बेहद जरूरी

    नई दिल्ली। आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया है, जिसका सीधा असर आंखों की सेहत पर पड़ रहा है। खासकर 40 साल की उम्र पार करने के बाद आंखों से जुड़ी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। ऐसे में विशेषज्ञ नियमित आई टेस्ट कराने की सलाह देते हैं ताकि आंखों की रोशनी लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आंखों की सुरक्षा का सबसे आसान और असरदार तरीका समय-समय पर नेत्र जांच कराना है। अक्सर लोग धुंधला दिखने या नजर कमजोर होने जैसी समस्याओं को उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर गंभीर बीमारी का रूप ले सकती है।

    40 की उम्र के बाद आंखों में कई प्राकृतिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। नजदीक की चीजें साफ न दिखना, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्याएं धीरे-धीरे विकसित हो सकती हैं। इन बीमारियों की शुरुआत में ज्यादा लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि 40 साल के बाद हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार पूरा आई चेकअप जरूर कराना चाहिए। वहीं जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में आंखों की बीमारी का इतिहास हो, उन्हें हर छह महीने में जांच करवानी चाहिए। समय पर बीमारी का पता चलने से इलाज आसान हो जाता है और आंखों की रोशनी को नुकसान से बचाया जा सकता है।

    आई टेस्ट सिर्फ आंखों की कमजोरी पहचानने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर की दूसरी बीमारियों के शुरुआती संकेत पकड़ने में भी मदद करता है। कई बार डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का असर सबसे पहले आंखों पर दिखाई देता है।

    आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ जरूरी आदतें अपनाना भी फायदेमंद माना जाता है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें, अच्छी रोशनी में पढ़ाई करें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें। इसके अलावा पौष्टिक भोजन भी आंखों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

    डाइट में गाजर, पालक, ब्रोकली, संतरा, कीवी, बादाम और ब्लूबेरी जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करने चाहिए। इनमें मौजूद विटामिन A, C, E, ओमेगा-3 फैटी एसिड और ल्यूटिन आंखों की रोशनी को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आई टेस्ट और सही लाइफस्टाइल अपनाकर बढ़ती उम्र में भी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।