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  • त्वचा की नमी बनाए रखने में मददगार है ग्लिसरीन, ऐसे करें इस्तेमाल और पाएं सॉफ्ट स्किन

    त्वचा की नमी बनाए रखने में मददगार है ग्लिसरीन, ऐसे करें इस्तेमाल और पाएं सॉफ्ट स्किन


    नई दिल्ली। आजकल त्वचा को मुलायम और हाइड्रेटेड रखने के लिए लोग तरह तरह के स्किन केयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार साधारण और आसानी से मिलने वाली चीजें भी त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। ग्लिसरीन भी ऐसा ही एक लोकप्रिय मॉइस्चराइजिंग घटक है जिसका इस्तेमाल कई क्रीम और मॉइस्चराइजर में किया जाता है। त्वचा विशेषज्ञों की सलाह में भी ग्लिसरीन को ऐसे घटकों में शामिल किया जाता है जो रूखी त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं।

    ग्लिसरीन को ह्यूमेक्टेंट माना जाता है। इसका मतलब है कि यह त्वचा की सतह पर नमी बनाए रखने में मदद करता है। खासकर जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है उनके लिए ग्लिसरीन युक्त मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है। हालांकि चेहरे पर सीधे ग्लिसरीन लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि इसे किस तरह और किस चीज के साथ इस्तेमाल किया जाए। हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी नए प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है।

    अगर आप ग्लिसरीन को स्किन केयर रूटीन में शामिल करना चाहते हैं तो सबसे पहले चेहरे को किसी माइल्ड क्लींजर से साफ करें। त्वचा को जोर से रगड़ने से बचें क्योंकि इससे जलन और रूखापन बढ़ सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी चेहरे की सफाई के लिए हल्के क्लींजर और गुनगुने पानी का इस्तेमाल करने की सलाह देती है।

    चेहरा साफ करने के बाद त्वचा को पूरी तरह सुखाने के बजाय हल्का नम रहने दें। इसके बाद ग्लिसरीन वाले मॉइस्चराइजर या उपयुक्त स्किन केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। नम त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाने से नमी को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। त्वचा विशेषज्ञ भी नहाने या चेहरा धोने के बाद नम त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाने की सलाह देते हैं।

    ग्लिसरीन का इस्तेमाल खास तौर पर रूखी त्वचा में फायदेमंद हो सकता है। इससे त्वचा में नमी बनी रहने में मदद मिलती है और रूखापन कम महसूस हो सकता है। नियमित मॉइस्चराइजिंग से त्वचा अधिक मुलायम महसूस हो सकती है। हालांकि ग्लिसरीन को चेहरे पर लगाने से यह दावा नहीं किया जा सकता कि इससे रंग बदल जाएगा या किसी तरह की त्वचा संबंधी समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

    स्किन केयर में एक और जरूरी बात यह है कि जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल न किए जाएं। कई अलग अलग एक्टिव प्रोडक्ट एक साथ लगाने से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार स्किन केयर प्रोडक्ट लगाने का क्रम भी महत्वपूर्ण होता है। सामान्य तौर पर चेहरा साफ करने के बाद ट्रीटमेंट प्रोडक्ट और फिर मॉइस्चराइजर या सनस्क्रीन लगाया जाता है।

    दिन के समय स्किन केयर करते हुए सनस्क्रीन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। धूप से त्वचा को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है। केवल ग्लिसरीन लगाने से धूप से त्वचा की सुरक्षा नहीं होती इसलिए मॉइस्चराइजिंग के साथ सन प्रोटेक्शन भी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा होना चाहिए।

    अगर ग्लिसरीन या किसी नए स्किन केयर प्रोडक्ट को लगाने के बाद जलन लालिमा खुजली या असहजता महसूस हो तो उसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए। लगातार समस्या रहने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासकर बहुत संवेदनशील त्वचा या पहले से किसी त्वचा रोग से परेशान लोगों को घरेलू प्रयोग करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

    इस तरह ग्लिसरीन को स्किन केयर रूटीन में शामिल करने का सबसे आसान तरीका इसे किसी उपयुक्त मॉइस्चराइजर या ग्लिसरीन युक्त प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल करना है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है और रूखी त्वचा को मुलायम महसूस कराने में उपयोगी हो सकता है।

  • घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा क्रिस्पी मसाला डोसा, आसान बैटर और स्वादिष्ट आलू की फिलिंग से तैयार करें नाश्ता

    घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा क्रिस्पी मसाला डोसा, आसान बैटर और स्वादिष्ट आलू की फिलिंग से तैयार करें नाश्ता

    नई दिल्ली । सुबह के नाश्ते में अगर स्वादिष्ट और पेट भरने वाली डिश बनाने का मन है, तो मसाला डोसा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। बाहर मिलने वाले कुरकुरे डोसे और मसालेदार आलू की फिलिंग का स्वाद घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती। सही तरीके से बैटर तैयार करने, उसे पर्याप्त समय तक फर्मेंट करने और तवे का तापमान ठीक रखने से डोसा बाहर से कुरकुरा और अंदर से हल्का नरम बन सकता है।

    मसाला डोसा बनाने के लिए सबसे पहले बैटर तैयार किया जाता है। इसके लिए 2 कप चावल, 1 कप उड़द दाल और 1 छोटा चम्मच मेथी दाना चाहिए। चावल और उड़द दाल को अच्छी तरह धोकर पानी में भिगो दें। मेथी दाने को चावल के साथ भिगोया जा सकता है। इन्हें करीब 5 से 6 घंटे तक भिगोने के बाद चावल और दाल को अलग-अलग या साथ में पीसकर थोड़ा गाढ़ा बैटर तैयार करें।

    अब बैटर को ढककर करीब 8 से 10 घंटे के लिए गर्म जगह पर रखें, ताकि अच्छी तरह फर्मेंटेशन हो सके। डोसा बनाने से पहले बैटर में स्वादानुसार नमक और जरूरत के मुताबिक थोड़ा पानी मिलाएं। बैटर की कंसिस्टेंसी ऐसी रखें कि उसे तवे पर आसानी से फैलाया जा सके।

    डोसे के लिए आलू की मसालेदार फिलिंग बनाने के लिए 4 से 5 आलू उबालकर छील लें और उन्हें हल्का मैश कर लें। इसके बाद पैन में थोड़ा तेल गर्म करें। इसमें 1 छोटा चम्मच राई, 8 से 10 करी पत्ते और 2 बारीक कटी हरी मिर्च डालें। इसके बाद एक बारीक कटा प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें।

    अब इसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी, आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद मैश किए हुए आलू डालें और सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर कुछ मिनट तक पकाएं। गैस बंद करने के बाद इसमें थोड़ा हरा धनिया डाल दें। इस तरह डोसे के लिए स्वादिष्ट आलू की फिलिंग तैयार हो जाएगी।

    अब डोसा बनाने के लिए तवा गर्म करें और उस पर हल्का तेल लगाएं। एक करछी बैटर तवे पर डालकर उसे गोल आकार में पतला फैलाएं। डोसे के किनारों पर थोड़ा तेल या घी डालें और मध्यम आंच पर पकने दें। जब डोसा नीचे से सुनहरा और कुरकुरा होने लगे, तो उसके बीच में तैयार आलू की फिलिंग रखें।

    आलू की फिलिंग रखने के बाद डोसे को दोनों तरफ से मोड़कर प्लेट में निकाल लें। इसी तरह बचे हुए बैटर और आलू की फिलिंग से बाकी डोसे तैयार किए जा सकते हैं। अगर डोसा ज्यादा क्रिस्पी पसंद है, तो बैटर को तवे पर बहुत पतली परत में फैलाना चाहिए और मध्यम आंच पर पर्याप्त समय तक पकाना चाहिए।

    गरमा-गरम मसाला डोसा नारियल चटनी, टमाटर की चटनी और सांभर के साथ परोसा जा सकता है। इस तरह सामान्य सामग्री और आसान प्रक्रिया से घर पर स्वादिष्ट, कुरकुरा और मसालेदार मसाला डोसा तैयार किया जा सकता है।

  • चावल में घुन और कीड़े लगने से बचाना है तो स्टोरेज के दौरान अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके

    चावल में घुन और कीड़े लगने से बचाना है तो स्टोरेज के दौरान अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके

    नई दिल्ली । घर में चावल को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है तो सिर्फ उसे डिब्बे में भरकर रखना पर्याप्त नहीं होता। खासकर नमी वाले मौसम में अगर चावल को सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो उसमें घुन या छोटे कीड़े दिखाई दे सकते हैं। कंटेनर में मौजूद नमी, ढीला ढक्कन और गीले चम्मच का इस्तेमाल इस समस्या का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए चावल को सुरक्षित रखने के लिए कुछ छोटी लेकिन जरूरी सावधानियां अपनाना फायदेमंद हो सकता है।

    सबसे पहले चावल को हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए। खुले पैकेट या ढीले ढक्कन वाले डिब्बे में चावल रखने से नमी और कीड़ों के संपर्क का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए कांच, स्टील या फूड-ग्रेड प्लास्टिक का साफ कंटेनर इस्तेमाल किया जा सकता है। कंटेनर में चावल भरने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसमें किसी तरह की नमी न हो।

    चावल को कीड़ों से बचाने के लिए कुछ लोग सूखे तेजपत्ते का भी इस्तेमाल करते हैं। चावल के डिब्बे में कुछ पूरी तरह सूखे तेजपत्ते रखे जा सकते हैं। इसकी तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है। हालांकि पत्तियां सूखी होनी चाहिए, क्योंकि नमी बढ़ने पर समस्या उलटे बढ़ सकती है।

    सूखी नीम की पत्तियों का इस्तेमाल भी अनाज को कीड़ों से बचाने के पारंपरिक घरेलू तरीकों में किया जाता है। अगर इस उपाय को अपनाया जाए तो नीम की पत्तियां बिल्कुल सूखी होनी चाहिए। इसी तरह कुछ लोग चावल के डिब्बे में साबुत लौंग रखने का तरीका भी अपनाते हैं। लौंग की तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे चावल की सुरक्षा का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

    कुछ घरेलू तरीकों में चावल के साथ साबुत और सूखी लहसुन की कलियां रखने की सलाह भी दी जाती है। अगर लहसुन का इस्तेमाल किया जा रहा है तो वह सूखा होना चाहिए। गीली या छिली हुई लहसुन की कलियां डालने से कंटेनर में अतिरिक्त नमी पहुंच सकती है, जिससे चावल खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।

    चावल के डिब्बे को ऐसी जगह रखना भी जरूरी है जहां भाप या नमी अधिक न हो। सिंक, गैस या नमी वाली जगह के आसपास चावल रखने से बचना चाहिए। चावल निकालते समय हमेशा सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें। गीले चम्मच से कंटेनर में नमी पहुंच सकती है और लंबे समय में चावल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

    एक और जरूरी बात यह है कि नया चावल पुराने चावल के साथ सीधे नहीं मिलाना चाहिए। पहले पुराने चावल का इस्तेमाल करें। इसके बाद कंटेनर को अच्छी तरह साफ करके पूरी तरह सुखाएं और फिर उसमें नया चावल भरें। इससे पुराने स्टॉक से किसी संभावित कीट या उसके अंडों के नए चावल तक पहुंचने का जोखिम कम किया जा सकता है।

    अगर चावल में पहले से थोड़े कीड़े दिखाई दे रहे हैं, तो उसे अलग करके अच्छी तरह जांचना चाहिए। चावल को कुछ दिनों के लिए फ्रीजर में रखने का विकल्प भी अपनाया जाता है। इसके बाद चावल को छानकर और अच्छी तरह सुखाकर साफ, एयरटाइट डिब्बे में रखा जा सकता है। लेकिन अगर चावल में बहुत ज्यादा कीड़े, फफूंद, नमी या खराब गंध दिखाई दे, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है।

  • दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोज अपनाएं ये 7 आसान आदतें, डाइट के साथ नींद और तनाव पर भी दें ध्यान

    दिल को स्वस्थ रखने के लिए रोज अपनाएं ये 7 आसान आदतें, डाइट के साथ नींद और तनाव पर भी दें ध्यान

    नई दिल्ली ।दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल एक्सरसाइज करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। रोजमर्रा की जीवनशैली में खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद, तनाव और कुछ आदतों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नाश्ता छोड़ देते हैं, लंबे समय तक बैठे रहते हैं, पैकेज्ड फूड का अधिक सेवन करते हैं या देर रात तक जागते हैं। इन आदतों में सुधार करके दिल की सेहत का बेहतर ध्यान रखा जा सकता है।

    दिन की शुरुआत संतुलित नाश्ते से करना अच्छी आदत हो सकती है। भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, नट्स, बीज और प्रोटीन के बेहतर स्रोत शामिल किए जा सकते हैं। वहीं बहुत अधिक नमक, मीठे पेय, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और अनहेल्दी फैट वाली चीजों का सेवन सीमित रखना बेहतर है।

    अगर काम के कारण लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना पड़ता है तो बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना जरूरी है। फोन पर बात करते समय चलना, जहां संभव हो सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और नियमित वॉक जैसी छोटी गतिविधियां दिनभर की शारीरिक सक्रियता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

    खाने के बीच बार-बार पैकेज्ड स्नैक्स लेने की आदत पर भी ध्यान देना चाहिए। भोजन की मात्रा संतुलित रखना और पर्याप्त पानी पीना रोज की दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या मोटापे जैसी स्थितियों से जूझ रहे लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

    नींद को नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। व्यस्त दिनचर्या के कारण देर रात तक जागने की आदत बन सकती है, लेकिन पर्याप्त और नियमित नींद शरीर के लिए जरूरी है। कोशिश करनी चाहिए कि सोने और जागने का समय नियमित रहे। रात में सोने से पहले मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कम करना भी नींद की दिनचर्या को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

    तनाव को नियंत्रित करने के लिए दिन में कुछ समय खुद के लिए निकालना उपयोगी हो सकता है। शांत बैठना, मेडिटेशन करना या काम के बीच छोटा ब्रेक लेना तनाव संभालने के आसान तरीके हो सकते हैं। लगातार तनावपूर्ण दिनचर्या के बजाय काम और आराम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

    धूम्रपान और तंबाकू का सेवन दिल तथा रक्त वाहिकाओं के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इसलिए हृदय की सेहत को ध्यान में रखते हुए इनसे दूरी बनाना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति तंबाकू का सेवन करता है तो इसे छोड़ने के लिए चिकित्सकीय सलाह और उचित सहायता ली जा सकती है।

    शराब का सेवन भी सीमित रखना जरूरी है। अत्यधिक शराब पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए शराब का सेवन करने वाले लोगों को इसकी मात्रा को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए।

    दिल की सेहत के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ, एक्सरसाइज या उपाय पर निर्भर रहने के बजाय पूरी जीवनशैली पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और तंबाकू से दूरी जैसी आदतों को लगातार अपनाने से स्वस्थ दिनचर्या बनाने में मदद मिल सकती है।

  • कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल तो इन बातों पर दें, ध्यान पोषण और लाइफस्टाइल में बदलाव से मिल सकती है मदद

    कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल तो इन बातों पर दें, ध्यान पोषण और लाइफस्टाइल में बदलाव से मिल सकती है मदद


    नई दिल्ली ।आजकल कम उम्र में बाल सफेद होना कई लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। कुछ लोगों के बालों में 20 से 30 साल की उम्र के बीच ही सफेद बाल दिखाई देने लगते हैं। इसके पीछे केवल उम्र ही जिम्मेदार नहीं होती बल्कि आनुवंशिक कारण तनाव धूम्रपान और शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी भी भूमिका निभा सकती है। बालों का प्राकृतिक रंग मेलेनिन नामक पिगमेंट से तय होता है और उम्र बढ़ने के साथ बालों की जड़ों में मौजूद मेलेनोसाइट कोशिकाएं कम मेलेनिन बनाने लगती हैं। इसी वजह से बाल धीरे धीरे सफेद या ग्रे दिखाई देने लगते हैं।

    अगर आप अपने बालों को लंबे समय तक प्राकृतिक रूप से काला और स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। खाने में पर्याप्त प्रोटीन के साथ आयरन और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना जरूरी है। कुछ मामलों में इन पोषक तत्वों की कमी समय से पहले बाल सफेद होने से जुड़ी पाई गई है। हालांकि बिना जांच के किसी विटामिन या सप्लीमेंट का सेवन शुरू करना सही तरीका नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराकर ही कमी की पुष्टि करनी चाहिए।

    तनाव को नियंत्रित करना भी बालों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लगातार तनाव शरीर पर अलग अलग तरह से असर डाल सकता है और शोध में तनाव तथा बालों के रंग में बदलाव के बीच संबंध देखा गया है। इसलिए पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव कम करने वाली आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    धूम्रपान की आदत भी समय से पहले बाल सफेद होने से जुड़ी पाई गई है। इसलिए बालों की सेहत के साथ पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा बालों पर बहुत ज्यादा गर्मी और कठोर केमिकल ट्रीटमेंट का इस्तेमाल भी कम करना चाहिए। बार बार कलर या दूसरे केमिकल ट्रीटमेंट कराने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं।

    बालों को काला करने के लिए इंटरनेट पर आंवला करी पत्ता तेल प्याज या कई तरह के घरेलू नुस्खे बताए जाते हैं लेकिन इनसे सफेद हो चुके बाल स्थायी रूप से दोबारा काले होने का मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अगर बाल पहले ही सफेद हो चुके हैं तो उन्हें ढकने के लिए हेयर कलर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हेयर कलर इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है क्योंकि कुछ लोगों को इससे एलर्जी या त्वचा में जलन हो सकती है।

    अगर कम उम्र में अचानक तेजी से बाल सफेद होने लगें या इसके साथ बाल झड़ने और स्कैल्प से जुड़ी दूसरी समस्या भी दिखाई दे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। कुछ मामलों में विटामिन की कमी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी बालों में बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं। सही कारण पता चलने के बाद ही उचित उपाय किया जा सकता है।

    इसलिए बालों को नेचुरली काला बनाए रखने का सबसे व्यावहारिक तरीका किसी एक चमत्कारी नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित खानपान तनाव नियंत्रण धूम्रपान से दूरी और बालों की सही देखभाल पर ध्यान देना है। उम्र के कारण सफेद हुए बालों को पूरी तरह वापस काला करने का कोई प्रमाणित घरेलू तरीका नहीं है लेकिन स्वस्थ जीवनशैली समय से पहले होने वाले बदलावों को कम करने में मदद कर सकती है।

  • स्किन केयर में सिरके का इस्तेमाल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें वरना त्वचा को हो सकता है नुकसान

    स्किन केयर में सिरके का इस्तेमाल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें वरना त्वचा को हो सकता है नुकसान


    नई दिल्ली । स्किन केयर के लिए लोग तरह तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। इन्हीं में सिरका भी शामिल है जिसका इस्तेमाल कुछ लोग त्वचा की सफाई और अतिरिक्त तेल को कम करने के लिए करते हैं। खासतौर पर एप्पल साइडर विनेगर को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जाते हैं। हालांकि सिरका एक अम्लीय पदार्थ है इसलिए इसे चेहरे पर सीधे लगाना त्वचा के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। स्किन केयर में इसका इस्तेमाल करने से पहले इसके संभावित फायदे और सावधानियों को समझना जरूरी है।

    सिरके में एसिटिक एसिड मौजूद होता है। इसी अम्लीय प्रकृति की वजह से यह त्वचा के पीएच को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि पतला किया हुआ सिरका त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद कर सकता है। लेकिन हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और जिस चीज से किसी व्यक्ति को फायदा महसूस हो वही दूसरे व्यक्ति की त्वचा में जलन पैदा कर सकती है। खासतौर पर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को घरेलू प्रयोग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति सिरके को स्किन केयर में शामिल करना चाहता है तो सबसे जरूरी बात इसे बिना पतला किए चेहरे पर न लगाना है। शुद्ध सिरका त्वचा में जलन लालिमा खुजली या सूखापन पैदा कर सकता है। आंखों के आसपास की त्वचा पर इसे बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा खुले घाव कट या पहले से irritated त्वचा पर सिरका लगाने से समस्या बढ़ सकती है।

    घरेलू स्किन केयर में किसी भी नए पदार्थ का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है। इसके लिए बहुत थोड़ी मात्रा को त्वचा के किसी छोटे हिस्से पर लगाकर प्रतिक्रिया देखी जा सकती है। अगर जलन खुजली लालिमा या सूजन जैसी समस्या दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए। चेहरे की त्वचा पर प्रयोग करने से पहले यह सावधानी विशेष रूप से जरूरी है।

    मुंहासों को लेकर भी सिरके के इस्तेमाल की चर्चा होती है। कुछ लोग मानते हैं कि इसकी अम्लीय प्रकृति बैक्टीरिया और अतिरिक्त तेल को प्रभावित कर सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मुंहासों के इलाज के लिए सिरका एक प्रमाणित विकल्प है। मुंहासे लगातार बने रहते हैं या त्वचा पर दर्दनाक दाने और निशान हो रहे हैं तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

    सिरके का इस्तेमाल करने के बाद त्वचा में सूखापन महसूस हो सकता है। ऐसे में हल्का और त्वचा के अनुकूल मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना जरूरी हो सकता है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने के चक्कर में त्वचा की मूल देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार में मिलने वाले अलग अलग प्रकार के सिरके एक जैसे नहीं होते। खाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सिरका और किसी विशेष कॉस्मेटिक उद्देश्य के लिए तैयार उत्पाद अलग हो सकते हैं। इसलिए इंटरनेट पर बताए गए किसी भी नुस्खे को बिना समझे चेहरे पर इस्तेमाल करना सही नहीं है।

    कुल मिलाकर सिरका स्किन केयर का कोई जादुई उपाय नहीं है। कुछ लोगों को पतला किए गए सिरके से त्वचा पर अलग अनुभव हो सकता है लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर जलन और त्वचा की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसलिए चेहरे पर सिरका लगाने से पहले त्वचा के प्रकार को समझना जरूरी है। संवेदनशील त्वचा वाले लोग या पहले से किसी त्वचा संबंधी समस्या से परेशान व्यक्ति घरेलू प्रयोग करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लें। स्वस्थ त्वचा के लिए नियमित सफाई मॉइस्चराइजिंग और सनस्क्रीन जैसी बुनियादी देखभाल ज्यादा महत्वपूर्ण है।

  • HIV से बचाव का बदला तरीका 8 हफ्ते में लगने वाले इंजेक्शन ने रोज की गोली को दी चुनौती स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे

    HIV से बचाव का बदला तरीका 8 हफ्ते में लगने वाले इंजेक्शन ने रोज की गोली को दी चुनौती स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे


    नई दिल्ली । HIV से बचाव को लेकर हुई एक स्टडी में लंबे समय तक असर करने वाले इंजेक्शन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोध में हर 8 सप्ताह में लगाए जाने वाले कैबोटेग्राविर इंजेक्शन को HIV से बचाव के लिए रोजाना ली जाने वाली गोली की तुलना में ज्यादा प्रभावी पाया गया। इस नतीजे के बाद HIV संक्रमण के जोखिम वाले लोगों के लिए बचाव के विकल्पों को लेकर चर्चा बढ़ी है। हालांकि सबसे जरूरी बात यह है कि कैबोटेग्राविर HIV का इलाज नहीं है बल्कि संक्रमण से पहले बचाव के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है।

    HIV शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाला वायरस है। संक्रमण से बचाव के लिए ऐसे लोगों को प्री एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस यानी PrEP दिया जा सकता है जिन्हें HIV संक्रमण का जोखिम अधिक हो। लंबे समय से इसके लिए रोजाना दवा लेने का विकल्प इस्तेमाल किया जाता रहा है। रोज गोली लेने की व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती नियमितता की होती है क्योंकि कई बार लोग किसी दिन दवा लेना भूल सकते हैं। ऐसे में लंबे समय तक असर करने वाला इंजेक्शन एक वैकल्पिक तरीका हो सकता है।

    कैबोटेग्राविर इसी तरह का इंजेक्शन है जिसे लगभग 8 सप्ताह के अंतर पर लगाया जाता है। उपलब्ध स्टडी में कुल 4566 लोगों को शामिल किया गया था। प्रतिभागियों को अलग अलग समूहों में रखा गया जिसमें एक समूह को हर 8 सप्ताह में कैबोटेग्राविर का इंजेक्शन दिया गया जबकि दूसरे समूह को रोजाना HIV से बचाव की गोली दी गई। अध्ययन के दौरान इंजेक्शन वाले समूह में 13 लोगों में HIV संक्रमण पाया गया जबकि रोज गोली लेने वाले समूह में 39 संक्रमण दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष के अनुसार इंजेक्शन ने HIV से बचाव में बेहतर प्रभाव दिखाया।

    महिलाओं में भी इस इंजेक्शन की प्रभावशीलता को लेकर अध्ययन किया गया। इसमें 3224 महिलाओं को शामिल किया गया था। हर 8 सप्ताह में कैबोटेग्राविर लेने वाले समूह में HIV संक्रमण के 4 मामले सामने आए जबकि रोजाना गोली लेने वाले समूह में 36 मामले दर्ज किए गए। इन परिणामों ने लंबे समय तक असर करने वाले HIV प्रिवेंशन इंजेक्शन की संभावित उपयोगिता को सामने रखा।

    हालांकि इन नतीजों का यह मतलब नहीं है कि HIV की मौजूदा दवाओं की जरूरत खत्म हो गई है। कैबोटेग्राविर का इस्तेमाल HIV से संक्रमित व्यक्ति के इलाज के लिए नहीं किया जाता। यह उन लोगों के लिए बचाव का विकल्प है जिन्हें HIV संक्रमण का खतरा है और जिनके लिए डॉक्टर PrEP की सलाह देते हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से HIV संक्रमण है तो उसके लिए डॉक्टर की निगरानी में अलग उपचार की जरूरत होती है।

    इंजेक्शन लेने से पहले HIV की स्थिति की जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है। इसके अलावा इंजेक्शन की अगली खुराक समय पर लेना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए स्टडी के सकारात्मक परिणामों के बावजूद इसे अपनी मर्जी से इस्तेमाल करने के बजाय योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही PrEP का विकल्प चुनना चाहिए।

  • पहाड़ों की खूबसूरती और झील का सुकून एक ही जगह दिल्ली के पास मौजूद है ये शानदार डेस्टिनेशन

    पहाड़ों की खूबसूरती और झील का सुकून एक ही जगह दिल्ली के पास मौजूद है ये शानदार डेस्टिनेशन


    नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए वीकेंड पर घूमने के लिए ऐसी जगह तलाशना अक्सर मुश्किल होता है जहां शहर की भीड़भाड़ से दूर प्रकृति का सुकून भी मिले और सफर बहुत लंबा भी न हो। अगर आप भी कुछ घंटों की दूरी पर किसी शांत और खूबसूरत जगह जाने का प्लान बना रहे हैं तो गुरुग्राम के पास मौजूद दमदमा झील आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यहां आपको एक ही जगह पर अरावली की पहाड़ियां झील और हरियाली से घिरा प्राकृतिक वातावरण देखने को मिलता है।

    दमदमा झील अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है और यही इसकी सबसे खास खूबसूरती है। एक तरफ ऊंची नीची अरावली की पहाड़ियां दिखाई देती हैं तो दूसरी तरफ झील का शांत पानी पूरे वातावरण को आकर्षक बना देता है। आसपास मौजूद हरियाली और प्राकृतिक इलाका इस जगह को दिल्ली की भागदौड़ से अलग एक सुकून भरा अनुभव देता है। यही वजह है कि यह जगह उन लोगों को खास तौर पर पसंद आ सकती है जो कुछ समय शहर की भीड़ से दूर प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं।

    दमदमा झील का माहौल खासतौर पर उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है जिन्हें प्रकृति और आउटडोर गतिविधियां पसंद हैं। यहां पहुंचने के बाद पहाड़ियों और झील का एक साथ दिखाई देने वाला नजारा सफर की थकान कम कर सकता है। शांत वातावरण में बैठकर आसपास के प्राकृतिक दृश्य देखना अपने आप में एक अलग अनुभव देता है। फोटो खींचने के शौकीनों के लिए भी यहां का लैंडस्केप काफी आकर्षक हो सकता है क्योंकि झील के पानी के साथ पीछे दिखाई देती अरावली की पहाड़ियां तस्वीरों को खूबसूरत बैकग्राउंड देती हैं।

    दिल्ली एनसीआर से इस जगह की कनेक्टिविटी भी इसे वीकेंड ट्रिप के लिए सुविधाजनक बनाती है। बहुत लंबी छुट्टी लिए बिना भी यहां घूमने का प्लान बनाया जा सकता है। परिवार के साथ समय बिताने वाले लोगों से लेकर दोस्तों के साथ छोटा ट्रिप प्लान करने वालों तक के लिए यह जगह अलग तरह का अनुभव दे सकती है। खासकर उन लोगों के लिए जो हर बार मॉल और बाजार जाने के बजाय खुले वातावरण में कुछ घंटे बिताना चाहते हैं उनके लिए दमदमा झील एक अलग विकल्प बन सकती है।

    यहां जाने से पहले मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा। आरामदायक कपड़े और जरूरी सामान साथ रखने से यात्रा ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है। प्रकृति के बीच समय बिताते हुए साफ सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है ताकि इस तरह के प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती बनी रहे।

    कुल मिलाकर दमदमा झील दिल्ली एनसीआर के आसपास मौजूद उन जगहों में शामिल है जहां कम समय में प्रकृति के करीब पहुंचने का मौका मिल सकता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच शांत झील और आसपास की हरियाली का मेल इसे वीकेंड पर कुछ अलग देखने वालों के लिए आकर्षक बना सकता है। अगर आप दिल्ली के आसपास किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में हैं जहां पहाड़ झील और जंगल जैसा प्राकृतिक माहौल एक साथ महसूस हो तो दमदमा झील को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

  • फंक्शन से पहले चेहरे की थकान और रूखापन कैसे करें कम, घर की इन चीजों से तैयार करें आसान फेस पैक

    फंक्शन से पहले चेहरे की थकान और रूखापन कैसे करें कम, घर की इन चीजों से तैयार करें आसान फेस पैक


    नई दिल्ली ।पार्टी, फंक्शन या किसी खास मौके से पहले हर कोई अपने चेहरे को फ्रेश और ग्लोइंग देखना चाहता है। लेकिन कई बार लगातार व्यस्तता, थकान या मौसम के असर से त्वचा रूखी और बेजान नजर आने लगती है। ऐसे में आखिरी समय पर पार्लर जाने के बजाय घर पर उपलब्ध कुछ सामान्य चीजों से आसान फेस पैक तैयार किए जा सकते हैं।

    घरेलू स्किन केयर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें चेहरे को साफ और तरोताजा महसूस कराने में मदद कर सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और किसी भी नए मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है।

    बेसन और दही का फेस पैक एक आसान विकल्प है। इसके लिए बेसन और दही को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर पानी से धीरे-धीरे साफ कर लें। चेहरे को साफ करते समय ज्यादा रगड़ने से बचना चाहिए।

    अगर त्वचा रूखी या बेजान महसूस हो रही है, तो एलोवेरा जेल और शहद का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों को थोड़ी मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। यह घरेलू पैक त्वचा को नमी देने वाले विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

    पका हुआ पपीता और शहद भी घर पर तैयार किए जाने वाले फेस पैक में शामिल किए जा सकते हैं। पपीते को अच्छी तरह मैश करके उसमें थोड़ी मात्रा में शहद मिलाएं। तैयार मिश्रण को कुछ देर चेहरे पर रखने के बाद पानी से धो लें। इसके बाद त्वचा के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है।

    हल्दी और दही से भी फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसके लिए दही में बहुत थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर पतली परत लगाएं। कुछ समय बाद इसे पानी से साफ कर लें। हल्दी की मात्रा ज्यादा रखने पर चेहरे पर पीला रंग दिखाई दे सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना चाहिए।

    रूखी या खिंची हुई त्वचा के लिए ओट्स और शहद का पैक भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ओट्स को हल्का पीसकर उसमें शहद मिलाएं और तैयार मिश्रण को चेहरे पर हल्के हाथ से लगाएं। इसे त्वचा पर जोर से रगड़ने से बचना चाहिए, खासकर अगर स्किन संवेदनशील हो।

    खीरे का पैक भी घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। खीरे को पीसकर उसका पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा को ठंडक और ताजगी महसूस हो सकती है। गर्म मौसम या लंबे दिन के बाद यह एक सरल घरेलू स्किन केयर विकल्प हो सकता है।

    इनमें से किसी भी फेस पैक को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना जरूरी है। अगर जलन, खुजली, चुभन या किसी तरह की असहजता महसूस हो तो इसे तुरंत पानी से धो देना चाहिए। बहुत अधिक फेस पैक लगाने या बार-बार त्वचा को एक्सफोलिएट करने से जलन और ड्राईनेस बढ़ सकती है। इसलिए फंक्शन से पहले स्किन केयर करते समय त्वचा की जरूरत और संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

  • चेहरे की चमक के लिए गुलाब से करें स्किन केयर गुलाब जल से लेकर फेस पैक तक जानें त्वचा को निखारने के आसान तरीके

    चेहरे की चमक के लिए गुलाब से करें स्किन केयर गुलाब जल से लेकर फेस पैक तक जानें त्वचा को निखारने के आसान तरीके


    नई दिल्ली। गुलाब को खूबसूरती और ताजगी का प्रतीक माना जाता है। इसकी पंखुड़ियों और गुलाब जल का इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। गुलाब की खुशबू मन को सुकून देने के साथ स्किन केयर रूटीन को भी तरोताजा महसूस करा सकती है। खासतौर पर गुलाब जल को चेहरे पर इस्तेमाल करने की परंपरा काफी पुरानी है। इसमें मौजूद प्राकृतिक यौगिक त्वचा को हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है।

    गुलाब जल का इस्तेमाल चेहरे को साफ करने के बाद किया जा सकता है। इसके लिए कॉटन की मदद से गुलाब जल को चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। कुछ लोगों को इससे त्वचा पर ठंडक और ताजगी महसूस होती है। अगर त्वचा संवेदनशील है तो किसी भी नए प्रोडक्ट या घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले कान के पीछे या हाथ की त्वचा पर थोड़ी मात्रा लगाकर प्रतिक्रिया देखना जरूरी है। जलन लालिमा या खुजली महसूस होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार फेस पैक भी पारंपरिक स्किन केयर में इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए साफ गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर उसमें एलोवेरा जेल या दही मिलाया जा सकता है। तैयार मिश्रण को चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाया जा सकता है। कुछ समय बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लेना चाहिए। इस तरह के घरेलू फेस पैक से त्वचा मुलायम और तरोताजा महसूस हो सकती है। लेकिन नींबू या दूसरे तेज अम्लीय पदार्थों को चेहरे पर सीधे लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे कुछ लोगों की त्वचा में जलन हो सकती है।

    गुलाब जल को मॉइस्चराइजर का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। चेहरे को साफ करने के बाद त्वचा की जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाना जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी स्किन केयर रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुलाब जल को अतिरिक्त देखभाल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इससे त्वचा की सभी समस्याओं का इलाज होने का दावा सही नहीं माना जाना चाहिए।

    गुलाब की पंखुड़ियों से बना ठंडा पानी भी चेहरे को ताजगी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए साफ पानी में गुलाब की पंखुड़ियों को कुछ समय भिगोकर रखा जा सकता है। हालांकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के बजाय ताजा तैयार करके इस्तेमाल करना बेहतर है। बाजार में मिलने वाले गुलाब जल का इस्तेमाल करते समय उसके लेबल पर दिए गए ingredients और उपयोग संबंधी निर्देश जरूर पढ़ने चाहिए।

    गुलाब आधारित स्किन केयर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे सरल रूटीन में शामिल किया जा सकता है। चेहरे की सफाई मॉइस्चराइजिंग और सनस्क्रीन के साथ गुलाब जल का इस्तेमाल त्वचा को ताजगी देने वाला अतिरिक्त कदम हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार मुंहासे खुजली लालिमा दाने या दूसरी त्वचा संबंधी परेशानी है तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। सही स्किन केयर वही है जो त्वचा की जरूरत के अनुसार हो और नियमित रूप से सुरक्षित तरीके से अपनाया जाए।